जवान भाभी कि तनहाई - hot steamy kahani with pics (Full Storyd) – New Episode
Update - 6
उस घटना नें मेरे औऱ भाभी केँ बीच एक् नया, गहरा नाता कायमकर दिया, मगर येसभी भैया औऱ मम्मी सें छुपाकर होँ रहा थां। पहले जहाँ केवल आकर्षण औऱ छेड़खानी थि, वहाअब विश्वास औऱ दोस्ती कि मजबूत नींवपड़ गई। मैंने महसूस किया कि भाभी अकेली थीं औऱ मे उनका सहारा बन सकता हूं।
अगले दिनों सें मे उनका ज़्यादा ख्याल रखनेलगा। साम कों बाहर् सें आतेसमय उनकी मनपसंद कि चॉकलेट याँ फूल लाकर देता, मगर यहसभी तब करताजब भैया दफ़्तर मे औऱ मम्मी पूजा मे व्यस्त होतीं। भाभी मुस्कुरा उठतीं औऱ कहतीं, “तुम्हारी वजह सें मेरी जीवन मे खुशीलौट आई हैं। ” यह छोटी-छोटी बातें हमें औऱ लगभगला रहीथीं। जैसे हम् अब परिवार सें अधिक, एक्-दूसरे केँ राजदार बनगए थें, मगर हम् सावधानी बरतते कि कोई हमेंदेख न् लें।
धीरे धीरे भाभी औऱ खुलने लगीं। पहले जहाँ वोँ शर्माती थीं, अब वोँ बिंदास होकर बातें करने लगीं, मगर यहसभी घऱ मे अकेले होने पऱ याँ रात केँ वक्त छुपकर। साम कों सोफे पर्र बैठकर हम् घंटों गप्पें मारते, उनके कॉलेज केँ दिनों कि कहानियाँ, मेरी शरारतें, सभीकुछ। कभी वोँ मजाक मे अपनी सेक्स लाइफ कि बातें छेड़ देतीं, जैसे “विवाह केँ बादसभी बदल जाता हैं। ” मे चुपचाप सुनता औऱ उन्हें सलाह देता कि वोँ खुश रहें।
एक् दिन तौ उन्होंने पीरियड्स कि तकलीफ केँ बारे मे खुलकर बताया, “इससमय बड़ा दर्द होता हैं, मगरकोई सुनता हि नहि। ” मैंने उन्हें दवाइयाँ लाकरदीं औऱ वोँ मेरे कंधे पऱ सिर रखकर बोलीं, “तुम् जैसेयार मिलगए, अब क्याँ फिक्र। ” मगर हम् दोनों जानते थें कि यह बातें केवल हम् तक सीमित रहनी चाहिए, भैया याँ मम्मी कों कुछपता नं चले।
ये नाताअब इतना गहरा होँ चुका थां कि हम् एक्-दूसरे केँ बिना अधूरे लगते, मगर सारी नजदीकियाँ छुपकर हि होतीं। भाभी कि आँखों मे वोँ प्यास अभि भि थि, मगरअब वोँ मुझसे खुलकर बात करतीं औऱ मे उनका मित्र बनकर उनकीहर बात सुनता।
घऱ मे हँसी-खुशी बढ़ गई औऱ भैया-मां कों भि लगा कि हमारा परिवार औऱ मजबूत होँ गय़ा हैं, मगर उन्हें अंदाजा नहि थां कि हमारे बीच कां ये बंधन कितना गुप्त औऱ गहरा हैं।
मेरेदिल मे वोँ घटना हमेशा एक् मीठीयाद बनकररह गई, जोँ हमें औऱ मजबूती सें बाँधे रखती, मगर हम् सतर्क रहते कि परिवार कि नजरों सें दूररहे।
हमारी अब मीठी बातें औऱ शरारती छेड़छाड़ एक् आमबात होँ गई थि। कभी-कभी जब भाभी मस्त कपड़े पहनतीं तोँ मे उन्हें आँख मारता याँ फिनकमर पऱ चिमटी लें लेता। भाभी भि मेरे पीछे मजाक मे एक् चमाटलगा देतीं।
एक् दिनजब मे फ्रूट्स लेकरघऱ पहुंचा तौ…
भाभी:अरे वाउ!आज केले, संतरे, पपीते… पूरा बाजार लाए होँ?
मे: हाँ भाभी, रोज देखता हूं। आज सोचाखा भि लूँ।
भाभी:हाँ सही हैं, संतरे तोँ बहोत अच्छे होते हें सेहत केँ लिए।
मे: हाँ, मगर मेरे नसीब सें तोँ मुझेयह छोटे वाले हि मिले। पूरा बाजार देखा मैंने, मगर बड़े संतरे कहीं नहि थें।
भाभी:मगर पपीते तौ बड़ेलाए हें।
मे: इतने कहां, पपीते तौ मैंने देखे थें हाथ लगाकर पहलेकभी, उतने बड़े नहि मिले।
भाभी: बदमाश, चुप!
आज मजाक-मजाक मे मे थोडा आगेबढ़ गय़ा, मगर भाभी नें बुरा नहि माना। वोँ सामान लेकर रसोई मे चलीगईं।
एक् जवान लड़की कि इस दोस्ती सें मे भि खुश थां। कभी-कभी उनके बूब्स, कमर, गांड कों निहारता औऱ खुश रहता। जब वोँ खुश होतीं तौ मुझेगले भि लगा लेतीथीं। उनके बूब्स कां प्यारा एहसास मुझे बीच-बीच मे मिलता रहता।
मे अभि भि उसदिन कों भुला नहि पाया थां। रात कों भाभी कि गांड कों छूने कां एहसास, उनके बूब्स कां स्पर्श, उनकीउस कातिल फिगर कों देखकर मे मुठ मारता थां।
एक् दिन बड़ा अच्छा मौकाआया। भैया कहीं बाहर् गएहुए थें, मां सो गई थीं। रात केँ लगभग 11 बजे होंगे। मुझे यकीन थां भाभी अभि सोई नहि होंगी। मैंने भाभी कों मैसेज किया,
मे: अरे
भाभी: क्याँ हुआ? नींद नहि आँ रही?
मे: नहि भाभी।
भाभी: क्याँ हुआ? नींद न् आने कि वजह क्याँ हैं? किसकी याद आँ रही हैं?
मे: हैं कोई।
भाभी: हमें भि तोँ बताओ।
मे: हैं कोई, हसीन, प्यारी, मस्तीभरी, नाजुक-सि।
भाभी:बस इतनी-सि तारीफ? मुझेलगा कोई कातिल होगी जिसने तुम्हारी नींद चुराली।
मे: तारीफ तोँ बहोत हें, मगर मे लिखते-लिखते थक जाऊँगा।
भाभी: तोँ इधरआकर बताओ।
मे झट सें उठा औऱ आरामसे भाभी केँ बेडरूम कि ओर बढ़ा। दरवाजा खुला हि थां। मैंने अंदर जाकर दरवाजा बंदकर दिया औऱ बेड पऱ जाकर भाभी केँ बाजू मे बैठ गय़ा।
कमरे मे अंधेरा थां, बाहर् सें आँ रही हल्की रोशनी मे भाभी कि आँखें औऱ गालचमक रहे थें। भाभी नें गले तक ब्लैंकेट ओढ़रखा थां, मगरउस पतले ब्लैंकेट मे उनकी फिगरसाफ नजर आँ रही थि। उनके बाजू मे बैठकर मे उनकी आँखों मे देखता रहा।
भाभी:करो तारीफ।
मे: वोँ मेरीखास यार हैं, जौ मेरा बहोत ख्याल रखती हैं। मेरी छोटी-मोटी खुशियों मे खुश होती हैं औऱ गले लगाकर खूब प्रेम करती हैं। वोँ हसीन भि बहोत हैं। उसके हल्के सुनहरे बालजब गालों पर्र सरकते हें, तोँ गालों कि लाली औऱ निखर जाती हैं।
अब भाभी नें करवटली औऱ चेहरा मेरीओर किया। ये करतेहुए उन्होंने दोनों हाथ कंबल सें बाहर् निकाले। साफपता चलरहा थां कि कंधे पऱ कोई स्ट्रैप नहि हैं, यानी शायद अंदर भाभी नें कोई टी-शर्ट याँ ब्रा नहि पहनी हैं। मेरे लन्ड नें अचानक एक् झटका दिया। उनके नंगे कंधे देखकर मे थोडा हड़बड़ा गय़ा।
भाभी: औऱ?
मे: (उनकी आँखों मे देखते हुए) उसकी फिगर तौ एकदम लाजवाब हैं। (नजरें उनके शरीर पर्र फेरते हुए) जैसेकोई लहर, एकदम सही, न् अधिक, नं कम। गोरा-सफ़ेद शरीर, हाथ रखो तौ झट सें फिसलजाए। इतना चिकना।
भाभी नें एक् हाथआगे बढ़ाया औऱ पूछा।
भाभी: इससे भि चिकना?
मैंने अपना एक् हाथ उनके पूरेहाथ पर्र फेरा औऱ कहा।
मे: हाँ।
अब भाभी थोडा नाराज होने कां नाटक करने लगीं। फिन कुछ सोचकर वोँ वापसपीठ केँ बललेट गईं। फिन मेराहाथ पकड़ा औऱ घसीटकर ब्लैंकेट केँ अंदर लेँ गईं, औऱ अपनेपेट पर्र रख दिया।
भाभी: इससे भि चिकना?
मे अबयेखेल समझ गय़ा थां।
मे: हाँ।
अब भाभी अपनेहाथ सें मेरेहाथ पऱ फेररही थीं। उन्होंने अचानक मेराहाथ कसके पकड़ा औऱ सीधे अपने एक् बूब्स पर्र रख दिया। मुझे तौ एक् जोरदार झटकालग गय़ा, वोँ ब्लैंकेट केँ अंदर टॉपलेस थीं। मैंने मौके कां फायदा उठाते हुए उनके बूब्स कों हल्के सें दबा दिया। उन्होंने हल्के सें सिसकी भरी।
भाभी: इससे भि चिकना?
मे: जराठीक सें देखलूँ?
भाभी: हम्ममम…
भाभी कि “हम्ममम” कि आवाज़ मे एक् गहरी, भरी हुई तड़प थि। जैसे वोँ स्वयं कों बहोत देर सें रोकरही हों औऱ अब वोँ रोक टूटने वाली हौ। मैंने अपनाहाथ उनके बूब्स पर्र औऱ थोडा मजबूती सें रखा। वोँ इतने रसीले, इतनेगरम औऱ इतनेभरे हुए थें कि मेरी हथेली पूरीतरह ढक गई।
मैंने धीरे धीरे अंगूठे सें निप्पल कों घुमाया, जोँ पहले सें हि कड़क औऱ उभराहुआ थां। जैसे हि मैंने हल्का-सां दबाया, भाभी कि साँस एक् झटके सें रुक गई। उनकी आँखें बंद हौ गईं, होंठ थोड़े सें खुले औऱ मुँह सें एक् लंबी, दबी हुइ सिसकी निकली, “स्स्स्स… आह…”
उनका पूराबदन हल्का-सां काँपउठा। ब्लैंकेट केँ नीचे उनकी छाती ऊपर-नीचे होँ रही थि, तेज-तेज। मैंने दूसरा हाथ भि ब्लैंकेट केँ अंदर डाला औऱ दूसरे बूब्स कों भि सहलाना शुरुआत किया। दोनों कों एक् संग दबाया, हल्के सें मसलते हुए। भाभीअब पलंग पऱ थोडा-थोडा लोटरही थीं।
उनकीकमर ऊपरउठ रही थि, जैसे वोँ मेरे हाथों मे औऱ दबनाचाह रहीहों। “उफ़्फ़… औऱ… धीरे-धीरे सें…” उनकी आवाज़ काँपरही थि, जैसेहर स्पर्श उन्हें औऱ उत्तेजित कररहा होँ। उनके निप्पल अब औऱ सख्त हौ चुके थें, औऱ मे उन्हें चुटकी मे लेकर हल्का-सां खींचता। भाभी कि टाँगें थोड़ी-सि सिकुड़ गईं औऱ वोँ तड़पकर अपनीकमर मोड़ने लगीं, जैसे अंदरकोई आगलगी हौ।
मेरी हालत तौ अब पूरीतरह खराब होँ चुकी थि। लन्ड इतना सख्त थां कि दर्द हौ रहा थां, औऱ दिल कि धड़कन इतनीतेज कि लगरहा थां भाभीसुन लेंगी। मे स्वयं कों रोकने कि कोशिश कररहा थां, मगर वोँ गर्माहट, वोँ मुलायमियत मुझे पागलकर रही थि।
भाभी: (कसमसाते हुए) इससे भि चिकना?
मे: हाँ…
उन्होंने मेराहाथ पकड़ा औऱ उसे नीचे कि तरफ सरकाया, अब नाभि सें नीचे खिसकाते हुए। उनकीकमर इतनी चिकनी थि कि मेरी उंगलियाँ फिसलने लगीं। मैंने हल्के सें सहलाया औऱ भाभी कि कमरउछल पड़ी। “ओह्ह…हाँ…” वोँ कराह उठीं औऱ उनकी टाँगें थोड़ी-सि फैलगईं। उनका चेहरा लाल हौ चुका थां, पसीना चमकरहा थां औऱ साँसें छोटी-छोटी होँ गईं।
ब्लैंकेट केँ नीचे उनका जिस्म अब हल्के-हल्के हिलरहा थां, जैसे वोँ स्वयं कों मेरे स्पर्श मे डुबोना चाहरही हों। मेरी हालत औऱ बिगड़ गई, पसीना छूटरहा थां, सिरघूम रहा थां औऱ लन्ड सें अब प्रीकम निकलने लगा थां। मे सोचरहा थां कि अगरयह ऐसे हि चला तौ मे फट पड़ूँगा।
भाभी नें बड़े मदमस्त लहजे मे पूछा,
भाभी: इससे भि चिकना?
भाभी नें अपनाहाथ मेरेहाथ पर्र रखा औऱ उसे औऱ नीचे लेँ गईं, अब जाँघों कि शुरुआत पऱ। वोँ स्थान इतनीनरम औऱ संवेदनशील थि कि जैसे हि मैंने उंगलियाँ फेरीं, भाभी कि टाँगें पूरीतरह फैलगईं। “अह्ह…” वोँ तड़पकर बैड कि चादर पकड़लीं।
उनकाबदन अब पूरीतरह थरथरा रहा थां, कमर ऊपर-नीचे होँ रही थि औऱ ब्लैंकेट सरकने लगा थां। उनकी साँसें हाँफरही थीं, आँखें बंद, होंठकाट रही थीं, उत्तेजना कि हद पऱ। मेरी हालतअब असहनीय थि। मे काँपरहा थां, लन्ड दर्दकर रहा थां औऱ मन मे बस एक् हि बात थि, औऱआगे।
भाभी: इससे भि…
इसबार भाभी अपना प्रश्न पूरा नहि कर पाईं। क्योंकि मैंने स्वयं अपनाहाथ नीचे सरकाया, जाँघों केँ बीच मे। जैसे हि उंगलियाँ वहा पहुँचीं, भाभी कां पूराबदन झनझना उठा। “ओह्ह…हाँ…” उनकी कराह मे दर्द औऱ मज़ा दोनों थें। ब्लैंकेट अब पूरीतरह सरक चुका थां औऱ मे देखरहा थां कि उनका चिकना, साफ चूत गीला औऱ फूलाहुआ थां। मैंने हल्के सें क्लिट पर्र उंगली फेरी औऱ भाभी तड़पकर उछल पड़ीं, “आआह्ह्ह… बस!”
उनकी टाँगें मेरेहाथ कों दबारही थीं, साँसें रुक-रुक कर आँ रहीथीं औऱ जिस्म इतनेजोर सें काँपरहा थां कि पूराबैड हिलरहा थां। मेरी हालत खत्म हौ चुकी थि, मे स्वयं कों रोक नहि पारहा थां, लन्ड फटने कों थां।
अंत मे मेराहाथ बिल्कुल उनके चूत पर्र जा पहुंचा। वोँ इतनीगरम, गीली औऱ रेडी थि कि मेरी उँगलियाँ स्वयं-ब-स्वयं अंदर सरकने लगीं। भाभी नें एक् जोरदार चीख मारी, “आआह्ह्ह… हाँ!”, औऱ उनका जिस्म चरम पर्र पहुँच गय़ा। भाभी मंद-मंद मुस्कुरा रहीथीं औऱ संग हि उतावलापन भि रहीथीं।
उनकी वोँ मुस्कुराहट देखकर मेरी सारी हिचकिचाहट गायब हौ गई। मैंने झट सें अपनी टी-शर्ट उतारी, फिन पजामा औऱ अंडरवियर कों भि घसीटकर फेंक दिया। मेरा लन्ड अब पूरीतरह खुला औऱ तनाहुआ थां, गर्मी सें थरथरा रहा थां।
भाभी कि आँखें मेरेबदन पऱ टिकी हुईँ थीं औऱ उनकी साँसें फिन सें तेज़ होँ गईं। मे बेड पर्र घुटनों केँ बल चढ़ा औऱ उनकी जाँघों पर्र बैठ गय़ा। मेरी जाँघें उनकी जाँघों सें सटी हुइ थीं औऱ वोँ गर्माहट मुझे औऱ उत्तेजित कररही थि। ब्लैंकेट अब पूरीतरह हट चुका थां औऱ भाभी कां गोरा, नंगा जिस्म मेरे सामने थां, वोँ परफेक्ट कर्व्स, वोँ चिकनी त्वचा जौ हल्की रोशनी मे चमकरही थि।
मैंने दोनों हाथों सें शुरुआत कि उनके बूब्स सें। वोँ अभि भि गरम औऱ सख्त थें, निप्पल उभरेहुए। मैंने उन्हें हल्के सें दबाया, फिन मसलते हुए नीचे कि तरफ़ सरकाया। मेरी उँगलियाँ उनकी पसलियों पर्र फिसलीं, नाभि केँ चारों तरफ़ घूमीं औऱ फिनकमर कि साइड सें होती हुईँ जाँघों तक पहुँचीं। भाभी कि जाँघें इतनी रसीले औऱ गरमथीं कि मेरी हथेलियाँ स्वयं-ब-स्वयं उन पऱ रुकगईं। मैंने उन्हें सहलाया, अंदर कि तरफ़ दबाते हुए, औऱ फिन धीरे धीरे उनके चूत कि तरफ़ बढ़ाया।
वोँ स्थान पहले सें हि गीली औऱ फूली हुइ थि, जैसेकोई नरमफूल जोँ स्पर्श कि इंतजार कररहा हौ। जैसे हि मेरी उँगलियाँ वहा पहुँचीं, मैंने हल्के सें क्लिट कों छुआ औऱ फिन अंदर-बाहर् सरकाना शुरुआत किया। भाभीअब पूरीतरह उतावलापन रहीथीं। उनकीकमर बार-बार उछलरही थि, जैसेकोई लहरउठ रही हौ। “आआह्ह… ओह्ह… धीरे-धीरे… औऱ…” उनकी कराहें कमरे मे गूँजरही थीं, साँसें हाँफरही थीं औऱ हाथ पलंग कि चादर कों कसकर पकड़े हुए थें।
उनका चेहरा लाल होँ चुका थां, आँखें बंद, औऱ जिस्म हर स्पर्श पर्र काँप उठता थां। जाँघें मेरेहाथ कों दबारही थीं, जैसे वोँ मुझे रोकना चाहती होंमगर रोक नहि पारही हों। उनकी उतावलापन देखकर मेरी हालत औऱ ख़राब हौ गई। लन्ड इतना सख्त थां कि दर्द होनेलगा थां औऱ मे स्वयं कों रोकने कि कोशिश कररहा थां, मगर नहि करपारहा थां।
फिन मे उनकेऊपर लेट गय़ा। मेरा सीना उनके बूब्स सें सटाहुआ थां औऱ लन्ड उनकी जाँघों केँ बीचदबा हुआ। मैंने उनके होंठों कों अपने होंठों सें पकड़ लिया औऱ जोर सें चूसने लगा। वोँ मीठे, गरम होंठ, जैसेकोई जूसभरा फल। भाभी नें भि जवाब दिया, अपनीजीभ मेरे मुँह मे डाल दि औऱ हम् दोनों एक्-दूसरे कों चूमते हुए लिपटगए।
मेरेहाथ अभि भि उनके जिस्म पर्र घूमरहे थें, मगरअब भाभी नें अपनाहाथ नीचे किया औऱ मेरा लन्ड पकड़ लिया। उनकीगरम हथेली नें उसे कसकर जकड़ लिया औऱ धीरे धीरे ऊपर-नीचे करने लगीं। वोँ स्पर्श इतना उत्तेजक थां कि मेरा पूराबदन झनझना उठा। मे कंट्रोल नहि कर पाया। अचानक एक् जोरदार झटकालगा औऱ मेरापतन होँ गय़ा। साराकम बाहर् निकलआया, भाभी कि जाँघों पऱ फैल गय़ा। मे हाँफते हुए वहीँलेट गय़ा, भाभी केँ बगल मे। वोँ मुस्कुराते हुए मुझे लेटे-लेटे गलेलगा लेना चाहती थीं।
मे वहा सें उठकरचला गय़ा। दिल कि धड़कन इतनी तेज़ थि कि लगरहा थां बाहर् निकल आएगी। भाभी कि वोँ मुस्कुराहट औऱ गले लगाने कि गर्माहट अभि भि मेरेबदन मे सिहरन पैदाकर रही थि, मगर लज्जा औऱ अपराधबोध नें मुझेरोक लिया।
मैने मेरे सारे कपड़े उठाए औऱ बेडरूम सें बाहर् कदमरखा। पीछे सें भाभी कि आवाज़ आई, “रुकजा… इधर आँ…” उनकी आवाज़ मे प्रेम औऱ चिंता कां मिश्रण थां, मगर मे रुका नहि। मेरी आँखें नम होँ रहीथीं। मे तेज़ी सें अपने कमरे मे चला गय़ा, द्वार (दरवाज़ा) बंद करकेलेट गय़ा।
रातभर नींद नहि आई। दिमाग़ मे बार-बार वोँ लम्हा घूमते रहे, उत्तेजना कां चरम औऱ फिन अचानक सभीकुछ बिखर जानां। मे स्वयं कों कोसरहा थां, सोचरहा थां कि पहलीबार कि अनुभवहीनता नें सभीकुछ बर्बाद कर दिया। मगर भाभी केँ प्रति वोँ आकर्षण, वोँ प्रेम औऱ वोँ सेक्सुअल टेंशन अभि भि मेरे अंदरजल रहा थां, जैसेकोई आग जोँ बुझने कां नाम नहि लें रही होँ।
जवान भाभी कि तनहाई - hot steamy kahani with pics (Full Storyd) – New Episode
Update - 7
सुभह हुई। घऱ मे सभी उठकर रेडी हौ रहे थें। मैंने स्वयं कों सामान्य दिखाने कि पूरी कोशिश कि, मगर भाभी कि तरफ़ देखने सें डरलगरहा थां। सभी ब्रेकफास्ट करके मम्मी मंदिर चली गई। घऱ मे अब सिर्फ़ मे औऱ भाभी थें।
दिल कि धड़कन फिन तेज़ होँ गई। एक् अजीब-सि घबराहट थि, मगरसंग हि छिपी हुइ उत्तेजना भि। मे रसोई कि तरफ़ नहि गय़ा, मगर भाभी नें मुझे आवाज़ दि।
भाभी:“इधर आँ… कुछबात करनी हैं। ”
उनकी आवाज़ मे वही नरमी थि जौ मुझे हमेशा खींचती थि। मे आरामसे रसोई मे गय़ा। वहा भाभीगरम चायबना रहीथीं। उन्होंने एक् पतली-सि सफेद नाइट गाउन पहनाहुआ थां, इतना पतला कि अंदर कि ब्रा औऱ पैंटी कि आउटलाइन साफ़दिख रही थि। गाउन कां फैब्रिक इतना ट्रांसपेरेंट थां कि सुभह कि धूप मे उनके गोरे जिस्म कि चमक साफ़ नज़र आँ रही थि, जैसेकोई रेशमी परदा जोँ सभी छिपाने कि कोशिश कररहा हौ मगर नाकाम हौ रहा होँ। उनकी फिगर, वोँ कर्व्स, वोँ कमर कि पतलीलहर, गाउन सें चिपकी हुईँ थि औऱ हर मूवमेंट मे हल्का-सां हिल जाता थां, जौ मेरी नज़रों कों औऱ खींचरहा थां। भाभी केँ चेहरे पर्र हल्की-सि मुस्कान थि, मगर आँखों मे चिंता औऱ प्रेम दोनों थें।
मे रसोई केँ दरवाज़े पर्र रुक गय़ा। भाभी नें मुड़कर मुझे देखा औऱ सीधे मेरेपास आँ गईं। उन्होंने मेरेगाल छुए औऱ अचानक मुझे अपनी तरफ़ घसीटकर एक् गहराकिस कर दिया। उनके होंठ इतनेनरम औऱ गरम थें कि मेरी सारी घबराहट पिघल गई। उसकिस मे वोँ इमोशन थां, जैसेकह रहीहों, कुछ नहि बिगड़ा, सभीठीक हैं।
मगर सेक्सुअल टेंशन हवा मे तैररहा थां। हम् दोनों जानते थें कि दिन कां वक्त हैं, कोई भि आँ सकता हैं, मगर वोँ स्पर्श रुकने नहि देरहा थां। किस समाप्त होने केँ बाद भाभी नें अपनाहाथ मेरी गांड पऱ रखा औऱ आहिस्ता सहलाने लगीं। उनकी उँगलियाँ मेरे हिप्स पऱ घूमरही थीं, हल्का-सां दबावदे रहीथीं, जोँ मुझे औऱ उत्तेजित कररहा थां। भाभी मेरे आंखों मे देखते हुए औऱ गांड़ कों सहलाते हुए।
भाभी:“यह सभी इनएक्सपीरियंस कि वजह सें होता हैं। ”
उन्होंने धीरे-धीरे सें कहा। उनकी आवाज़ मे ममता औऱ समझ थि, मगर आँखों मे वोँ चमक थि जोँ बतारही थि कि वोँ स्वयं भि उत्तेजित हें।
भाभी: “पहलीबार सबकेसंग ऐसा होता हैं। टेंशन मत लेँ। ”
उनकी बातों मे वोँ इमोशनल सपोर्ट थां जौ मुझे राहतदे रहा थां, मगर उनका स्पर्श, वोँ सहलाना, मेरे अंदरआग लगारहा थां।
मैंने उनकीबात समझते हुए अपनाहाथ उनकी गांड पर्र रखा। वोँ गाउन केँ नीचे इतनी रसीले औऱ गोल थि कि मेरी उँगलियाँ स्वयं-ब-स्वयं दबगईं। मैंने उन्हें अपनी तरफ़ खींचा। हमारे बदनसट गए औऱ मैंने एक् लंबा, गहराकिस किया। किस मे हमारी साँसें मिलरही थीं, जीभें एक्-दूसरे सें खेलरही थीं औऱ सेक्सुअल टेंशन चरम पर्र थां। जैसे-जैसे मे उनके गांड कों मसलरहा थां, भाभी कां गाउनऊपर सरकरहा थां। उनकी जाँघें मेरी जाँघों सें रगड़रही थीं औऱ हम् दोनों कि साँसें तेज़ हौ गईं। इमोशंस उमड़रहे थें, लज्जा, प्रेम, डर औऱ उत्तेजना कां मिश्रण। दिन कां टाइम होने सें घबराहट थि, कहींकोई आँ न् जाए, मगर वही टेंशन सभीकुछ औऱ रोमांचक बनारहा थां। हम् रोक नहि पारहे थें। वोँ आकर्षण इतना मज़बूत थां कि सभीकुछ भूलगए।
फिन भाभी नें अपने हाथों सें कमर पे पैंट पकड़ा औऱ ब्रीफ केँ संग धीरे धीरे नीचे खींच लिया। मेरा लन्ड पहले सें हि तनाहुआ थां। जैसे हि वोँ बाहर् आया, भाभी घुटनों केँ बलबैठ गईं। मेरे लन्ड कों प्रेम सें सहलाया, औऱ आंखेबंद करके लन्ड कों अपने मुंह मे समा लिया। उन्होंने एक् जबरदस्त ब्लोजॉब शुरुआत कर दिया, उनकीजीभ मेरेटिप पर्र घूमरही थि, होंठों सें जोर सें चूसरही थीं औऱ हाथ सें ऊपर-नीचे कररही थीं। दिन केँ उजाले मे यहसभी होँ रहा थां, इसलिये हम् दोनों घबरारहे थें। दिल कि धड़कन तेज़, कान दरवाज़े कि तरफ़लगे हुए, मगर उत्तेजना इतनी भयंकर थि कि रुकना नामुमकिन हौ चुका थां।
भाभी ब्लोजॉब देतेहुए मेरी गांड कों दबारही थीं। उनकी उँगलियाँ मेरे हिप्स कों मसलरही थीं औऱ फिन धीरे-धीरे सें एक् उंगली मेरे गांड केँ छेद मे डाल दि। वोँ एहसास एकदमअलग थां, एक् मीठा-सां दर्द, एक् नई सिहरन जोँ मेरे पूरे जिस्म मे फैल गई।
मे कराहउठा, “आह… भाभी…” मेरीकमर स्वयं-ब-स्वयं हिलरही थि। इमोशंस चरम पऱ थें, प्रेम कि गहराई, उत्तेजना कि आग औऱ वोँ टेंशन जौ सभीकुछ औऱ इंटेंस बनारहा थां। भाभी कां गाउनअब उनके कंधों सें सरक चुका थां, ब्रा कि स्ट्रैप दिखरही थि औऱ वोँ पतला फैब्रिक उनकीहर मूवमेंट मे हिलरहा थां, जैसेकह रहा होँ कि सभीकुछ सजधजकर हैं। हम् दोनों उससमय मे पूरीतरह खो चुके थें, दुनिया कों भूलकर।
भाभी कां ब्लोजॉब इतना उत्तेजक थां कि मे चरम पऱ पहुँचने वाला थां, मगर अचानक उन्होंने मुंह पीछे खींच लिया औऱ मुझे अधूरा छोड़ दिया। उनकी आँखों मे एक् शरारती चमक थि, जैसे वोँ जानबूझकर मुझे तड़पाना चाहरही हों।
वोँ धीरे-धीरे सें खड़ी हुईं। उनकी साँसें अभि भि तेज़थीं औऱ होंठों पऱ मेरे प्रीकम कि हल्की चमक। मे हाँफते हुए उन्हें देखता रहा। मेरा लन्ड अभि भि तनाहुआ थां। भाभी नें मुस्कुराते हुए अपनीजीभ होंठों पर्र फेरी, जैसेकह रहीहों, अभि तोँ बस शुरुआत हैं। उस लम्हा मे इमोशंस उमड़रहे थें; मेरे अंदर कां प्रेम औऱ उत्तेजना कां मिश्रण इतना गहरा थां कि मे स्वयं कों रोक नहि पारहा थां। उनकी वोँ सेक्सी हरकत नें सभीकुछ औऱ रोमांचक बना दिया।
दिन कि घबराहट अभि भि थि, मगरवही टेंशन हमें औऱ लगभगला रही थि, जैसेकोई गुप्त मिलन जोँ केवल हमारा थां। भाभी नें एकदम सेक्सी अंदाज़ मे रसोईटॉप कों दोनों हाथों सें पकड़ लिया औऱ अपनीकमर कों थोडा सां ऊपर कि औऱ मोड़ा। उनका गाउनअब औऱ ऊपरसरक चुका थां, जाँघों तक, औऱ वोँ पतला फैब्रिक उनकी गोरी त्वचा सें चिपका हुआ थां, जैसेकोई रेशमी आवरण जौ हर मूवमेंट मे औऱ खुलरहा हौ।
उन्होंने अपनी गांड कों हल्के सें मटकाया, जैसे मुझे ललचाने केँ लिए। उनकी आँखें मेरी तरफ़ मुड़ीं, वोँ नज़र इतनी कामुक थि कि मेरेदिल मे सिहरन दौड़ गई। इमोशनली, वोँ समय मुझेलगा जैसे भाभी न् सिर्फ़ मेरे जिस्म कों, बल्कि मेरी आत्मा कों भि छूरही हों। उनका वोँ अंदाज़ प्रेम कि गहराई दिखारहा थां, जहाँ मेरी अनुभवहीनता कों वोँ अपनी समझदारी सें संभाल रहीथीं।
सेक्सुअल टेंशन हवा मे घुलाहुआ थां। मे रसोई केँ फर्श पर्र खड़े-खड़े बस उन्हें निहार रहा थां। मेरी साँसें उनकेहर मूवमेंट सें सिंक होँ रहीथीं। फिन भाभी नें आरामसे अपनी पैंटी उतारी, एक् हाथ सें गाउन कों ऊपर पकड़े हुए। पैंटी गाउन केँ नीचे सें सरकती हुईँ नीचे गिरी औऱ उनकी गोरी, रसीले जाँघें पूरीतरह खुलगईं।
उन्होंने अपनी गाउन कों गांड़ केँ ऊपर खींचके कमर पे सेट किया, गांड कों औऱ जोर सें मटकाया, जैसेकोई डांसकर रहीहों। वोँ गोल, चिकनी गांड इतनी सेक्सी लगरही थि कि मेरी आँखें वहा सें हट नहि पारही थीं। भाभी कि कमर कि लहर, वोँ हल्का-सां झुकाव, सभीकुछ इतना उत्तेजक थां कि मेरे अंदर कि आग औऱ भड़क गई।
इमोशनल तौर पऱ, यहसभी देखकर मुझेलगा जैसे भाभी मुझे अपनाबना रहीहों। अपनीहर हरकत सें कहरही हों कि मे उनकी दुनिया कां हिस्सा हूं। दिन कि रोशनी मे यहसभी हौ रहा थां। घबराहट थि कि कहींकोई न् आँ जाए, मगर वही जोखिम हमें औऱ पैशनेट बनारहा थां, जैसे प्रेम कि यहआगकभी नहि बुझेगी।
मे पीछे सें उनके लगभगआया। मेरेहाथ उनकीकमर पऱ रखे, भाभी नें अपने पांव फैलाए, औऱ गांड़ कों मेरी औऱ किया, मैने धीरे-धीरे सें अपना लन्ड उनकी चूत कि तरफ़ बढ़ाया। जैसे हि टिपबुर कों छुआ, वोँ एहसास इतना इंटेंस थां। उनकी चूत गरम, गीली औऱ रेडी थि, जैसेकोई मीठा आमंत्रण।
भाभी नें लन्ड पकड़कर टिप कों एंट्री पऱ अच्छेसे सेट किया। मैंने धीरे-धीरे सें अंदर धकेला। वोँ समय, वोँ घर्षण, वोँ गर्माहट, मुझेलगा जैसे मे स्वर्ग मे हूं। भाभी कि एक् दबी हुई कराह निकली, “अह्ह…हाँ…” औऱ उनकी गांड मेरे खिलाफ दब गई।
भाभी कि वोँ सेक्सी हरकत देखकर मेरी सारी हिचकिचाहट खत्म हौ गई। मैंने पीछे सें उन्हें औऱ कसकर पकड़ा। मेरी छाती उनकीपीठ सें सटी हुई थि औऱ मेरा लन्ड उनकी चूत मे पूरीतरह समा चुका थां। पहला धक्का जैसे हि लगा, भाभी कि गांड मेरी जाँघों सें जोर सें टकराई। एक् गहरी, मोटी थप्पड़ जैसी आवाज़ निकली, “पटक!” वोँ आवाज़ रसोई कि टाइल्स पर्र गूँजी औऱ फिनहर धक्के केँ संग दोहराई जानेलगी, भाभी कि चूत एकदम गीली थि, किचेन मे गीलीचटक चटक औऱ भाभी केँ नाम गांड़ सें टकरानेकी पटकपटक आवाजें गूंजरही थि
पटकचटक पटकचटक।
उनकीगोल, रसीले गांड मेरी जाँघों सें हरबार टकराती औऱ वोँ टकराव इतना उत्तेजक थां कि मेरे पूरेबदन मे बिजली दौड़ जाती। भाभी कि कमर आगे-पीछे हिलरही थि, जैसे वोँ स्वयं मेरे धक्कों कां जवाबदे रहीहों। हरबार जब मे अंदर धकेलता, वोँ अपनी गांड पीछे करके औऱ गहराई लेतीं औऱ वोँ टकराव कि आवाज़ औऱ तेज़ हौ जाती।
रसोई मे सिर्फ़ हमारी साँसें, कराहें औऱ वोँ सेक्स कि गूँजती थप्पड़ें थीं, “आह्ह…पटक… उफ्फ…पटक…” जैसेकोई म्यूज़िक बन गय़ा होँ, जौ हमें औऱ उन्मत्त कररहा थां।
मैंने दोनों हाथ उनकेबदन पर्र फैलाए। एक् हाथ सें उनके बूब्स कों कसकर पकड़ा, वोँ भरेहुए, गरम औऱ निप्पल सख्त। मैंने उन्हें मसलना शुरुआत किया, हल्का-सां खींचा औऱ भाभी कि कराह औऱ जोर सें निकली, “ओह्ह…हाँ… औऱ जोर सें…”
दूसरा हाथ नीचे सरकाया, नाभि सें होती हुईँ चूत तक पहुंचा। जहाँ मेरा लन्ड अंदर-बाहर् हौ रहा थां, वहा मेरी उँगलियाँ भि संगखेल रहीथीं। क्लिट कों हल्के सें दबाया, घुमाया औऱ भाभी कां पूराबदन झनझना उठा। उनकी चूत इतनी गीली थि कि हर धक्के केँ संग चटक-चटक कि आवाज़ आँ रही थि औऱ मेरी उँगलियाँ उसनमी मे फिसलरही थीं।
मे बूब्स सें चूत तक हाथ फेरता रहा, कभी बूब्स कों दबाता, कभी निप्पल कों चुटकी काटता, कभीकमर कों सहलाता औऱ फिन सीधे क्लिट पर्र। भाभी तड़परही थीं। उनकीकमर ऊपर-नीचे हौ रही थि औऱ हर स्पर्श पर्र वोँ औऱ जोर सें अपनी गांड मेरी जाँघों सें टकरातीं।
भाभी नें अचानक अपनासिर पीछे किया। उनके लंबी सुनहरे बाल मेरे चेहरे पर्र फैलते हुए साइड मे सेट होँ गए औऱ उन्होंने मुझे गहराकिस किया। उनके होंठ मेरे होंठों सें चिपकगए, जीभें एक्-दूसरे मे उलझगईं। वोँ किस इतना पैशनेट थां कि हम् दोनों कि साँसें रुक-रुक कर आँ रहीथीं। किस करतेहुए भि मे धक्के लगाता रहा। हर धक्के मे उनकी गांड मेरी जाँघों सें टकराती औऱ वोँ टकराव कि आवाज़ किस केँ बीच मे गूँजती। भाभी कां एक् हाथ मेरी गर्दन पऱ थां, मुझे औऱ लगभग खींचरही थीं। दूसरा हाथ रसोईटॉप कों कसकर पकड़े हुए थां ताकि संतुलन बनारहे। उनका मुंह मेरे मुंह मे थां, मगर कराहें अभि भि निकलरही थीं, “मम्म… ऊह्ह…हाँ…”, औऱ वोँ कराहें मेरे मुंह मे गूँजरही थीं।
किस मे उनका स्वाद, उनकी साँस कि गर्मी औऱ नीचे सें होँ रहा वोँ घर्षण, सभी मिलकर मुझे पागलकर रहा थां।
मैंने धक्कों कि रफ़्तार बढ़ा दि। अबहर धक्का औऱ गहरा, औऱ तेज़ थां। भाभी कि गांड मेरी जाँघों सें इतनीजोर सें टकरारही थि कि रसोई मे वोँ थप्पड़ कि आवाज़ लगातार गूँजरही थि, पटक-पटक-पटक, जैसेकोई ताल हौ। उनकी चूत मेरे लन्ड कों कसकर जकड़रही थि, हरबार अंदर जातेसमय सिकुड़ती, बाहर् निकलते समय फिसलती। मेरी उँगलियाँ अभि भि उनके क्लिट पर्र थीं, तेज़ी सें घुमारही थीं। भाभीअब चीखने लगीं, “ओह्ह…बस… आँ रहा हैं…!”
उनका जिस्म काँपने लगा, कमर उछलरही थि औऱ गांड मेरी जाँघों सें औऱ जोर सें टकरारही थि। मे भि चरम पऱ थां। वोँ गर्मी, वोँ नमी, वोँ टकराव, वोँ किस, सभीकुछ मिलकर मुझे लेँ डूबा।
हम् दोनों एक् संग झटके सें काँपउठे। मैंने उनके अंदर हि सभीकुछ छोड़ दिया। भाभी कि कराहचरम पऱ पहुँची, उनका जिस्म मेरे खिलाफ थरथराया औऱ हम् दोनों हाँफते हुए खड़े खड़े उखड़ती सांसों कों संभाल नें लगे।
भाभी नें धीरे-धीरे सें मुड़कर मेरी आँखों मे देखा। उनकी आँखों मे प्रेम, संतुष्टि औऱ थोड़ी-सि शरारत थि। उनका गाउनअब पूरीतरह सरक चुका थां, बदन पसीने सें चमकरहा थां औऱ हम् दोनों अभि भि एक्-दूसरे सें चिपके हुए थें। रसोई मे वोँ सेक्स कि गूँजअब धीरे धीरे शांत होँ रही थि, मगर वोँ एहसास, वोँ टकराव, वोँ आवाज़ें, वोँ किस, सभी मेरेमन मे हमेशा केँ लिएबस गए। भाभी नें मेरेगाल पऱ एक् हल्का किस किया औऱ फुसफुसाईं,
भाभी:“अब तूँ समझ गय़ा न्…?”
मे बस मुस्कुराया औऱ उन्हें औऱ कसकरगले लगा लिया। मेने थोड़ाअलग होकर भाभी केँ आँखों मे देखा, हम् एक् दूसरे सें कहरहे हैं जैसे, समाज केँ मान्यताओं केँ विपरीत हमें अपना जीवनसाथी मिल गय़ा हौ, एक् ऐसी जोड़ी जौ समाज कि नज़रों मे गलत थि, मगर हमारे दिलों मे बिल्कुल सच्ची औऱ साफ़ थि। भाभी केँ संग बिताए पलो मे वोँ प्रेम इतना गहरा औऱ साफ़ थां कि लगता थां, दुनिया कि सारी गलतियाँ बस एक् बहाने हें। जब हम् एक्-दूसरे कि आँखों मे देखते थें, तौ सारी दुनिया वही सिमट जाती थि, न् कोईडर, न् कोईशक, नं कोई बाहर् कि आवाज़। बस हम् दोनों थें, एक्-दूसरे कि समझ, एक्-दूसरे कि फिक्र, एक्-दूसरे कि वोँ बेपनाह चाहत जौ हर साँस मे महसूस होती थि। वोँ नज़रें, वोँ स्पर्श, वोँ ख़ामोशी मे भि बोलती हुई बातें, सभीकुछ इतना शुद्ध थां कि गलत होने कां एहसास भि कभी नहि आया। हम् बस एक्-दूसरे केँ होँ गए थें, औऱ उस लम्हा मे यही बहुत थां।
जवान भाभी कि तनहाई - hot steamy kahani with pics (Full Storyd) – New Episode
Update - 8
घऱ मे मां, भैय्या, होने सें हमें चुपके-चुपके हि मौके मिलते थें। सेक्स कभीमन भरके पूरा नहि हौ पाता थां, बस झटपट, जब कोई नज़र न् हौ। जैसे एक् बार रसोई मे भाभीगरम चायबना रहीथीं, मे पीछे सें आया औऱ उन्हें कमर सें पकड़ लिया। भाभी नें शरारती मुस्कान दि, “श्श्श… कोई आँ जाएगा, ” मगर स्वयं हि मेरी तरफ़ मुड़ीं औऱ एक् हल्का किसकर दिया। मैंने उनका गाउनऊपर किया पैंटी कों बिना उतरे केवल चूत सें सरकाया औऱ झट सें लन्ड अंदर धकेल दिया, मगर बस दो-तीन धक्कों मे हि आवाज़ सुनकर रुकना पड़ा। भाभी कि साँसें तेज़थीं, वोँ लिपटकर बोलीं, “अभि नहि, रात कों…” मगररात कों कोई चांस नहि मिलता थां। यह अधूरापन हमें औऱ तड़पाता, मगर वोँ शरारत, वोँ चोरी-छिपे स्पर्श, जैसे भाभी कां कभी झुककर बूब्स दिखाना, याँ हल्के सें ड्रेस उठाकर पैंटी फ्लैश करना। कभी कभी भाभी बिना पैंटी केँ घऱ मे घूमती थि, औऱ चांस मिलते हि मे ड्रेस केँ अंदरहाथ डालके उनकी गांड़ मसल देता। हम् हमेशा इतने उत्तेजना मे रहते थें कि हम् रुक नहि पाते।
भाभी केँ चेहरे पऱ बारबार वोँ सेक्सी भाव आँ जाते, जैसेकह रहीहों, “देख, मे तेरी हूं, ” औऱ मे पागल होँ जाता। वक्त बीतते-बीतते मैंने भाभी कों सेक्स टॉयज़ उपहार करने शुरुआत करदिए। पहले एक् बटप्लग, जौ भाभीघऱ केँ काम करते टाइम पहनतीं औऱ मुझे मैसेज करतीं, “अबयह अंदर हैं, तुँ क्याँ करेगा?” फिन एक् रिमोट कंट्रोल वाला वाइब्रेटर भि मैने भाभी कों तोहफा किया। भाभीउसे पहनकर घऱ मे घूमतीं औऱ मे रिमोट सें खेलता, कभीलो वाइब्रेशन, कभीहाई। भाभी तड़पतीं, मगर घरवालों केँ सामने मुस्कुराती रहतीं।
एक् बार डिनर टेबल पऱ मैंने रिमोट ऑन किया। भाभी कि प्लेट गिरते-गिरते बची, वोँ मुझे घूरते हुएचली गईं, मगर आँखों मे वोँ शरारत थि। जब भि वाइब्रेटर कि वजह सें उनकी टाँगें हल्की-सि थरथरातीं, उनकी गांड भि काँपती, मे बड़ेगौर सें देखता औऱ एंजॉय करता।
यह टॉयज़ हमारे बीच कां गुप्त खेलबन गए, जौ हमारे अधूरे सेक्स कों औऱ रोमांचक बनाते। भाभी कां वोँ सेक्सी अंदाज़, याँ हल्के सें किस करकेभाग जानां, मुझेहर टाइम उत्तेजित रखता।
एक् दिन हमने प्लान बनाया औऱ मॉलगए। मैंने शर्ट औऱ जींस पहनी, मगर भाभी नें एक् छोटी, टाइट ड्रेस पहनी, वोँ इतनी छोटी कि जाँघों तक आती औऱ नीचे पैंटी कि लाइन साफ़ दिखती। ब्रा भि नहि पहनीथीं तौ ड्रेस केँ ऊपर सें निप्पल उभरेहुए थें। मॉलघऱ सें बहुतदूर थां, इसलिये देखने वाले कां डरकम थां।
मॉल पहुँचते हि हम् कपल्स कि तरह व्यवहार करनेलगे, हाथ मे हाथ डाले घूमते, कभी भाभी मेरे कंधे पऱ सिर टिका लेतीं, कभी मे उनकीकमर मे हाथ डालकर उन्हें अपनी तरफ़ खींच लेता।
भाभी नें मेरेहाथ मे वही छोटा रिमोट थमा दिया, वाइब्रेटर कां, जौ वोँ पहनकर आईथीं। वोँ मुस्कुराईं औऱ उनकी आँखों मे वोँ सेक्सी चमक थि। हम् एस्केलेटर पऱ चढ़े। मैंने वाइब्रेशन शुरुआत किया, पहलेलो, फिन मीडियम। भाभी केँ पेर काँपने लगे, वोँ मेरेहाथ कों कसकर पकड़ लिया। उनकी जाँघें आपस मे हल्के-सें रगड़रही थीं औऱ मैंने देखा कि उनके घुटनों केँ नीचे सें हल्का-सां रसटपक रहा थां, वोँ पारदर्शी, चिपचिपा रस जोँ उनकी जाँघों पर्र आरामसे बहरहा थां औऱ मॉल कि रोशनी मे चमकरहा थां। भाभी नें अपनी टाँगें थोड़ी-सि सिकोड़ लीं, मगर वाइब्रेशन बढ़ते हि वोँ फिन सें काँप उठीं। वोँ सामान्य दिखने कि कोशिश कररही थीं, मगर चेहरा लाल होँ गय़ा, साँसें छोटी-छोटी, औऱ कभी-कभी वोँ मेरी तरफ़ मुड़कर फुसफुसातीं, “बसकर…”मगर मैंने नहि रोका। एस्केलेटर पर्र खड़े-खड़े उनकी गांड हल्की-हल्की हिलरही थि, जैसे आमंत्रण देरही होँ। वोँ स्वयं कों संभाल नहि पारही थि।
अब उनकी जाँघें अंदर सें पूरीतरह गीली हौ चुकीथीं। हमने किसी शांत रेस्टोरेंट मे जाने कां फैसला किया। रेस्टोरेंट मे आते हि भाभी वॉशरूम कि तरफ़ दौड़ीं। थोड़ी देरबाद वापसआकर बैठगईं।
भाभी: “बदमाश, ड्रेस गीली होँ जाती तोँ? अभि-अभि साफ़ करकेआई हूं, अब अधिक मस्ती मतकर। ”
मेने वाइब्रेटर लो पर्र चलाकर देखा, भाभी नें एक् झटकेसे मेरीओर ग़ुस्सेसे देखा, मे समझ गय़ा वाइब्रेटर अभि भि उनके अंदर थां। हमने थोडा-सां खानां खाया। मैंने वाइब्रेटर सिर्फ़ लो पर्र चलतारखा। भाभी मदहोश होकर सामान्य व्यवहार करने कि कोशिश कररही थि। कुछदेर बाद हमनेघऱ लौटने कां फैसला किया।
मॉल सें निकलते वक़्त हम् वाहन पार्किंग मे पहुँचे। दिनढल चुका थां औऱ पार्किंग लॉट मे अंधेरा छारहा थां, सिर्फ़ कुछ दूर-दूर कि लाइट्स जलरही थीं, जोँ कारों पऱ हल्की-सि चमकडाल रहीथीं। भाभी कि हालत पूरेमॉल मे वाइब्रेटर कि वजह सें बुरीतरह खराब होँ चुकी थि।
हम् गाड़ी मे बैठे। भाभी नें गहरी साँसली,
भाभी:“हाय… अबघऱचल। ”
उनकी आवाज़ मे वोँ कंपकंपी थि, साँसें तेज़चल रहीथीं औऱ आँखों मे वोँ सेक्सी बेचैनी झलकरही थि, जौ पूरेदिन कि प्यास कां नतीजा थि। वाइब्रेटर तोँ मेनेबंद रखा थां, मगर उनकी जाँघें आपस मे रगड़रही थीं औऱ मे देखरहा थां कि ड्रेस केँ नीचेफिन सें रस कि बूँदें बहरही थीं, वोँ गरम, चिपचिपा रस जोँ उनकी उत्तेजना कि गवाही देरहा थां।
गाड़ी मे बैठते हि भाभी नें अपनीसीट पीछे कि औऱ मेरीतरफ मुड़ीं।
“यह वाइब्रेटर निकालो न्। घऱ जाने सें पहले ड्रेस चेंज करनी होगी। घऱ मे ऐसे नहि जा सकती, कोई देख लेगा। ”
वाहन कां अंदरूनी माहौल पहले सें हि गरम थां, हमारी साँसों कि गर्मी, भाभी कि उत्तेजना कि गंध औऱ बाहर् कां अंधेरा, जौ हमें एक् गुप्त दुनिया देरहा थां। भाभी नें बैकसीट सें अपनी साधारण ड्रेस निकाली, एक् सिंपल सलवार-कमीज़, जोँ घरेलू लगे। मगर चेंज करने कां तरीका इतना सेक्सी थां कि मेरी साँसें थमगईं।
उन्होंने पहले अपनी ड्रेस केँ बटन खोले, ऊपर सें नीचे तक, धीरे धीरे। गाड़ी कि हल्की डैशबोर्ड लाइट मे उनके बूब्स चमकउठे। ब्रा नं होने कि वजह सें निप्पल्स सख्त औऱ उभरेहुए थें।
“देख, कितनी गीली हूं तेरीवजह सें, ” वोँ शरारती अंदाज़ मे बोलीं औऱ ड्रेस कों कंधों सें सरका दिया।
उनका ऊपरी जिस्म अब नंगा थां, सफ़ेद, चमकदार, पसीने सें चिपचिपा। फिन उन्होंने ड्रेस कों नीचे कि तरफ खींचा। जाँघें खुलगईं औऱ पैंटी दिखी, जोँ पूरीतरह गीली हौ चुकी थि। वाइब्रेटर कि वजह सें उनका चूत फूलाहुआ थां औऱ पैंटी केँ बीच सें गीलापन साफ़ नज़र आँ रहा थां।
भाभी नें पैंटी भि उतार दि औऱ वाइब्रेटर कों स्वयं निकाला। वोँ गीला, चमकता हुआ बाहर् आया औऱ भाभी कि एक् दबी हुईँ कराह निकली,
“हम्म.अब राहत मिली। ”
मगर उनकी आँखें मेरीतरफ थीं, जैसेकह रही हों, अब तुँ संभाल। मे आगे कि सीट सें साइड मे मुड़ा। भाभी नें अपनी टाँगें फैलालीं। गाड़ी मे उत्तेजना कि लहर दौड़रही थि। बाहर् पार्किंग कि कारों कि आवाज़ें दूर-दूर सें आँ रहीथीं, मगर अंदर हमारी अपनी दुनिया थि।
मैंने अपनासिर उनकी जाँघों केँ बीचरखा औऱ उनकी चूत कों चूसना शुरुआत किया। वोँ स्थान इतनीगरम, गीली औऱ मीठी थि कि मेरीजीभ स्वयं-ब-स्वयं घूमने लगी। पहले मैंने हल्के सें क्लिट कों चाटा। भाभी कि कमरउछल पड़ी,
“ओह्ह.हाँ। चूस नं। पूरा साफ़कर दे। ”
उनकी आवाज़ मे वोँ सेक्सी कंपकंपी थि, जैसेहर चाट पर्र वोँ औऱ बेचैनी रहीहों। मैंने जीभ कों अंदर डाला, उनकारस चूसते हुए। वोँ चिपचिपा, गरमरस मेरे होंठों पऱ लगरहा थां औऱ हरसिप पऱ भाभी कि कराहें बढ़रही थीं,
“स्स्स। आह। धीरे-धीरे। नहि। जोर सें.”
उनके हाव-भाव इतने सेक्सी थें, आँखें बंद, होंठकाट रहीथीं, एक् हाथ सें मेरेसिर कों दबारही थीं, दूसरा हाथ अपनी ब्रेस्ट पऱ, निप्पल कों मसलरही थीं। उनकी जाँघें मेरे चेहरे पर्र कसगईं, जैसे मुझे औऱ गहराई मे धकेलरही हों। गाड़ी कि सीट पऱ उनका जिस्म हिलरहा थां, कमर ऊपर-नीचे हौ रही थि औऱ हर चूसने पऱ वोँ “स्स्स। बस। औऱ.” कि सिसकारियाँ निकाल रहीथीं।
मैंने अपनीजीभ कों तेज़ किया, क्लिट पर्र गोल-गोल घुमाया, फिन अंदर-बाहर् किया। भाभीअब पूरीतरह बेचैनी रहीथीं। उनकी साँसें हाँफरही थीं, बदन पसीने सें चमकरहा थां औऱ वाहन मे उनकी कराहें गूँजरही थीं,
“आआह्ह। मे। आँ रही हूं। चूस.जोर सें!”
उनके हाव-भाव मे वोँ सेक्सी बेकाबूई थि, चेहरा लाल, आँखें आधी खुलीं, जैसे स्वर्ग मे हों औऱ हाथों सें मेरेबाल खींचरही थीं। उत्तेजना चरम पर्र थि। वाहन कि खिड़कियाँ हमारी साँसों सें फॉग होँ गई थीं औऱ बाहर् कां अंधेरा हमें छिपारहा थां।
मैंने औऱ जोर सें चूसा, जीभ कों क्लिट पर्र दबाया। भाभी कां जिस्म झटके सें काँपउठा।
“ओह्ह.हाँ.!” उनकी एक् जोरदार कराह निकली औऱ उनकारस मेरे मुँह मे बह आया, गरम, मीठा औऱ भरपूर।
वोँ तड़पकर अपनीकमर उछालती रहींकई सेकंड तक, औऱ फिन हाँफते हुए शांत हुईं। भाभी नें मेरेसिर कों ऊपर खींचा औऱ एक् गहराकिस किया। उनके होंठों पर्र उनका हि रस थां, मगर वोँ सेक्सी मुस्कान केँ संग बोलीं,
“तूने तौ मुझे समाप्त कर दिया.अब ड्रेस पहनलूँ?”
मैंने हँसकर कहा, “हाँ, मगरयह याद रहेगी। ”
भाभी नें जल्द सें साधारण सलवार-कमीज़ पहनी, बाल बाँधे औऱ हम् घऱ कि तरफचल पड़े। मगर वाहन मे वोँ उत्तेजना कि गंध अभि भि थि, जैसे हमारा गुप्त खेलकभी समाप्त नहि होगा।
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