रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 69
मेरीआंख खुली तौ मे एक् काल कोठारी कि तरह केँ कमरे मे थां, सामने एक् बड़ा सां कांचलगा हुआ थां जिसके पारवही बेडरूम थां जिसे देखने केँ लिए मे उस छोटे सें झरोखे कां इस्तेमाल किया करता थां, वोँ दीवाल नुमा कांच थां शायद एक् तरफा कांचरहा हौ जिससे मे तोँ उधरदेख पाऊमगर मुझे औऱ इस कमरे कों कोईदेख नहींपाए, कमरे कि छोटी छोटी आवाज़ भि मेरे कानो मे पड़रही थि लगा कि कोई स्पीकर स्लिम कर दिया गय़ा हौ, मेरे कमरे मे बहोत हि अंधेरा थां इतना कि मुझे मेराहाथ भि नहीं दिखाई देरहा थां, उधर सें आने वाला प्रकाश भि छनकर हि आँ रहा थां जिससे थोड़ी रोशनी वक़्त केँ संग मेरे आंखों नें अनुभव कि थि,
मे जब थोड़ा हिलने कों हुआतब मुझे मालूम हुआ कि मेरेहाथ बंधेहुए हैं औऱ संग हि मेरामुह भि मुझे एक् कुर्सी मे बांध दिया गय़ा थां, मे इतना बेसहारा थां कि ठिक सें हिल भि नहींपा रहा थां,
नां जाने मे कब तक बेहोश रहा थां, जब मैंने आगे देखा तौ मुझे पलंग मे काजल औऱ ठाकुर नंगे लेटेहुए दिखाई दिए थें, मे टूट गय़ा औऱ रोनेलगा मगर यंहा मेरी आवाज़ सुनने वालाकौन थां, मुह मे कपड़ा घुसा दिया गय़ा थां मे ठीक सें रो भि तौ नहींपा रहा थां,
काजल केँ नंगेबदन कों ठाकुर जकड़ेहुए सोरहा थां, औऱ काजल कां हाथ भि ठाकुर केँ कंधे मे थि, स्वाभाविक हैं कि मेरी बेहोशी मे हि उन्होंने हवस कां खेलखेल लिया थां,
ठाकुर कों काजल कि रसीले मखमली चुद पसन्द थि …
वोँ उसकेनशे मे हैं …
यह सोचकर हि मुझे काजल औऱ ठाकुर सें घृणाआने लगी थि.
नाँ जाने वोँ कब तक ऐसे हि सोतेरहे, मेरा जागना औऱ सोना दोनो हि बेमतलब थां,
फिन भि मेरेलिए सो जानां हि आराम कां एक् मात्रा मार्ग बचा थां …
**************
मेरी नींद खुली काजल केँ गुनगुनाने कि आवाज़ काजल मेरेठीक सामने खड़ी होकर अपने बालो सें खेलरही थि, असल मे वोँ उस आदमकद कांच केँ सामने थि जिसके पीछे मे थां, उसके चहरे सें तौ यहीलग रहा थां कि वोँ इसबात सें बेखबर हैं, मगर मे उसके नंगे शरीर कों देखपा रहा थां, वोँ अपनेपेट मे पड़ेहुए उस दांत केँ निशान कों देखती हैं जिसे शायदआज केँ हवस केँ खेल मे ठाकुर नें उसे दिया थां, वोँ अब भि लाल औऱ ताजा थां, वोँ थोड़ीडर होकरपास ड्रेसिंग सें एक् क्रीम लें आयी औऱ फिन सें उसे मेरे सामने हि लगाने लगी,
तभी ठाकुर भि आँ चुका थां, उसका काला लिंग किसी सांप कि तरह उसके जांघो केँ बीचलटक रहा थां औऱ वोँ आकर काजल कों पीछे सें पकड़कर उसकी योनि कों सहलाने लगा,
“रातभर तौ इसेरगड़ लिए होँ फिन सें खेलरहे हौ इससे “
काजल नें हल्के सें हंसते हुएकहा,
ठाकुर दर्पण सें ऐसे देखा जैसे मेरी आंखों मे हि देखरहा होँ, उसके होठो मे एक् बहोत हि कमीनी सि मुस्कान थि, उसने अपनी उंगली उसकी योनि मे घुसा दि …
“अरे जानेमन यह तौ मख्खन हैं जितना भि घुसाओ सालाफिन सें टाइट हौ जाता हैं, इतना नरम औऱ गरम तौ मैंने आजतक किसी कां नहीं देखा “
वोँ बड़े हि अदा सें उसकी योनि कों सहलारहा थां, काजल केँ होठो नें भि सिसकियां छोड़ दि, उसकी आंखेबंद होँ गई थि, मगर ठाकुर मेरे आंखों मे देखने लगा औऱ उसके होठो कि मुस्कान बहोत हि गहरी थि.
“पता नहीं तेरा पति कैसा चुतिया हैं जोँ इस मखमली चुद कों छोड़कर दुसरो केँ पीछेपड़ा हुआ हैं.”
मे लज्जा सें पानी पानी होँ रहा थां
मगर उसकीइस बात सें काजल मे तुरतं हि फर्कआया
वोँ उससेअलग हौ गई
“कितनी बारकहा कि उस चूतिए कां नाम लेकर मेरामूड खराबमत कियाकरो साले तौ अपनी बेहन चोदनी हैं उसेसंग लेकरभाग गय़ा साला नामर्द, हरिया नें बताया थां नाँ कि केसे मुझे तुम्हारे संग देखकर साला अपनी बेहन केँ संगछि ऐसे नामर्द कां नाम मेरे सामने फिनकभी मत लेना “
काजल कि बात सुनकर मे बिल्कुल हि स्तब्ध रह गय़ा, शायद मेरे किसी पुराने कर्मो कि हि सजा थां, याँ शायदउस बेवफा सें इतना प्रेम करने कि सजा …
काजल मेरे बारे मे ऐसा सोचती हैं यहसोच कर हि मे टूट गय़ा, रहीसही थोड़ी हिम्मत भि टूट हि गई, अबबस यंहापड़े हुए मुझेमौत कां हि प्रतीक्षा थां नां जाने वोँ किसरूप मे आएगी …
ठाकुर नें उसकामूड ठीक करने केँ लिएउसे पुचकारने लगा औऱ फिन मेरे हि सामने फिन सें वोँ दोबदन मिलगए, मगरइस बार ठाकुर नें काजल कों उसी कांच मे टिकाया थां, काजल कां हाथउस कांच कों थामेहुए थां औऱ ठाकुर उसे पीछे सें हि भरेजा रहा थां ….
ठाकुर कि आंखे मुझपर हि टिकी थि औऱ काजल कि आहो सें पूरारूम गूंजरहा थां, मगर मुझे नाँ हि उनकेइस कृत्य मे कोई मज़ा आँ रहा थां नां हि मे उसे दिखना चाहता थां, मे तौ बस ईश्वर सें अब अपनीमौत कि हि दुवाकर रहा थां …
***************
ठाकुर औऱ काजल कां खेल समाप्त हौ चुका थां औऱ दोनो एक् संग हि बाथरूम मे घुस चुके थें,.
ठाकुर जाने कों सजधजकर हौ चुका थां, मैंने कमरे कि दीवार मे लगी हुइ घड़ी देखी, 8बज चुका थां अभि तक किसी नें मेरीकोई सुध भि नहींली थि, काजलअब भि एक् नाइटी मे हि थि, ठाकुरर जानेलगा तभी काजल नें उसे रोका औऱ अपने पर्स सें एक् पुड़िया निकाली
“अजीम कों दे देना “
“कितना ख्याल रखती होँ तुम् उसका, साले कों मर जानेदो नशे केँ बिना “
काजल खिलखिला पड़ी
“इतना जल्दमर जाएगा तोँ जायजाद हमारे नाम केसे होगा “
काजल कि कमीनी मुस्कान केँ संग हि ठाकुर भि मुस्कुरा उठा औऱ वोँ पुड़िया अपनेजेब मे डाल ली, दोनो एक् दूसरे केँ होठो कों किसी प्रेमी कि तरह चूसते रहे औऱ वोँ निकल गय़ा …
उसके जाने केँ बाद काजलउस कांच तक आयी औऱ अपने कों निहारने लगी, उसने अपनी नाइटी निकाल फेंकी थि औऱ अपनेबदन कों ध्यान सें देखने लगीफिन उसने अपनी हि आंखों कों देखा, उसके होठो मे एक् मुस्कान थि …….
भयानक डरा देने वाली मुस्कान …….
अध्याय 70
काजल कि आंखे भयावह थि, लाल आंखे जैसे शैतान हँसरहा हौ, मगरफिन कुछ बूंदे पानी कि भि उनमे आँ गई थि,
मे स्तब्ध सां उसेदेख रहा थां, उसके चहरे मे मुस्कान खिल गई थि मगरयह मुस्कान भि बहोत हि डरावनी थि लगा जैसे किसी शैतान कां कोई शैतानी मकसद पूरा हौ गय़ा हौ …
वोँ जाकर अपने कपड़ेपहन रही थि कि दरवाजे मे दस्तक हुई, जब दरवाजा खोला गय़ा तौ सामने अंजू (हरिया कि पत्नि) थि …
अंजू पसीने सें सनी हुईँ थि, उसकी सांसे उखड़ी हुइ थि, चहरा पिला थां जैसे बहोत डरी हुइ होँ औऱ हाथ मे गरमचाय कि प्याली थि.
काजल उसकी हालत देखते हि समझ चुकी थि कि डाल मे कुछ काला हैं.
“क्याँ बात हैं अंजू”
उसने बहोत धीरे-धीरे सें कहा थां मगर मुझे उसकी आवाज़ सुनाई दि,
“मेडम वोँ.वोँ “
वोँ इधरउधर देखने लगी
“अंदरआओ “
उसके अंदरआते हि काजल नें दरवाजा बंदकर लिया.
अंदरआते हि अंजू नें तुरत हि गरमचाय कि ट्रेरखी औऱ बोलपड़ी
“मेडमदेव साहबकल आये थें, मैंने देखा थां.ठाकुर औऱ हरिया उसे बांध केँ इस कमरे मे बंदकर दिए थें.”
उसने कांच कि तरफ इशारा किया, काजल अजीब सि निगाहों सें कांच कि ओर देखने लगी
“पहले क्यो नहीं बताया “
काजल चीखी
“वोँ हरिया…”
अंजूकुछ बोल पाती इससे पहले हि काजल कमरे सें बाहर् जा चुकी थि,
थोड़ी हि देर मे मेरे कमरे कां दरवाजा खुला औऱ काजल औऱ अंजू नें मिलकर मुझेखोल दिया.
रात केँ मार औऱ मानसिक शारीरिक मानसिक पीड़ा सें मे टूट चुका थां, औऱ बहोत हि थक चुका थां, जैसे हि मे खड़ा हौ पाया थां मेरे गालो सें एक् जोर कां हाथपड़ा …
“क्याँ जरूरत थि तुम्हे यंहाआने कि, हमारे बीचअब बचा हि क्याँ हैं जोँ तुम् यंहाआये थें.”
काजल कि चीख सें मे बुरीतरह सें झेंपा
“यह क्याँ कररही हैं मेडम साहब कों पताचला तौ “
हरिया कि आवाज़ आयी, अबतकसब कमरे सें बाहर् आँ चुके थें,
हरिया अंजू कों लाललाल आंखों सें देखरहा थां
“मे उसे सम्हाल लुंगी इसे जानेदो “
“मे इसे नहीं जानेदे सकता“इस बार हरिया कि आवाज़ मे दृढ़ता थि
“जाने दीजिये नाँ “अंजू नें थोड़ा सहमे आवाज़ मे कहा
“चुप कर रांड साली तेरी तौ मे बाद मे देखता हु “
हरिया चिल्लाया औऱ अंजू बिल्कुल हि सहम सि गई.
मगर काजल कि आंखों मे जैसेआग उतरआया थां…
“जब मैंने कह दिया कि यहजारहा हैं तोँ तेरेबात समझ मे नहींआती “
“चुपकर साली, ”
हरिया भि तमतमाया
“दो कौड़ी कि रांड मुझे सिखाएगी, जब तक ठाकुर साहब नहींकह देतेयह कही नहीं जाएगा “
काजल कि आंखों मे खूनउतर आया थां औऱ उसने हरिया कों मारने केँ लिए अपनाहाथ उठाया मगर हरिया मजबूत व्यक्ति थां, उसने उसकाहाथ पकड़ लियासंग हि उसे एक् ओर धक्का देकर मुझेफिन सें कमरे केँ अंदर लेँ जानेलगा,
काजल नें पास सें एक् कुल्हाड़ी उठायी औऱ ……
“नहीं ….”अंजू कि चीख फिजा मे गूंज गई, काजल कां चहराखून सें सनाहुआ थां, औऱ हरिया केँ सर केँ कई टुकड़े बिखरगए थें, खून सें जमीनलाल हौ चुकी थि…
काजल नें कुल्हाड़ी एक् ओरफेक दि.औऱ अंजू कि ओर देखा जोँ अभि बिल्कुल किसी मूर्ति सि जमीखड़ी थि …
मे भि कुछ सोचने समझने कि हालत मे नहीं थां …
“तूँ क्योरो रही हैं, यही तौ हैं जौ तुम्हे खान औऱ ठाकुर केँ सामने नंगी करके नचवाता थां, तेरी जैसी देहात कि भोली भाली लड़की कों साले नें रांडबना दिया, उसके लिए आंसूबहा रही हैं ……
काजल नें फिन सें वोँ कुल्हाड़ी उठाली
“यह लेँ जा अपनेउस ससुरजी कि भि लीलाआज ख़त्म करदे जौ यहसभी होंते हुए देखने केँ बाद भि चुपरहा, औऱ इन सबमेसंग देता रहा, औऱ अपने कपड़े बांध लें, बच्चों कों विद्यालय सें हि उठा लेंगे.यहकाम तोँ पहले हि कर देना थां, थोड़ी देर हौ गई …”
अंजू थोड़ा सम्हल गई थि औऱ कुल्हाड़ी कों अपने हाथो मे पकड़ लिया.मगर उसकेहोठ कुछ कहने कों फड़फड़ा रहे थें…
“ठाकुर साहब …”
काजल केँ खून सें सजे चहरे पर्र वोँ मुस्कान शैतान कां भि दिल दहला देती.
“उसका इंतजाम मैंने कर दिया हैं, आजखान औऱ ठाकुर खून केँ आंसू रोयेंगे, ”
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थोड़ी हि देर मे हम् फॉर्महाउस सें बाहर् थें, मुझे मेरी वाहन तक छोड़कर काजल अंजू कों लेकरचली गई थि, मेरेमन मे बारबार काजल केँ वोँ शब्द गूंजरहे थें ….
‘क्याँ जरूरत थि तुम्हे यंहाआने कि, हमारे बीचअब बचा हि क्याँ हैं जोँ तुम् यंहाआये थें.’
‘उसका इंतजाम मैंने कर दिया हैं, आजखान औऱ ठाकुर खून केँ आंसू रोयेंगे’
हमारे बीच मे अबबचा हि क्याँ हैं ?????????
यह प्रश्न मुझे खायेजा रहा थां ……
आजखान औऱ ठाकुर खून केँ आंसू रोयेंगे….ऐसा क्याँ कर दिया थां काजल नें ???
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 71
बदन कि कमजोरी सें बड़ीमन कि कमजोरी होती हैं, मे मन सें थक गय़ा थां, जैसे हि मे अपने होटल मे पहुचा जौ कि आजकल मेरा ठिकाना थां, शबनम नें मुझेरोक लिया,
“रात भरकहा थें औऱ यहसभी क्याँ हैं “
उसने मेरे कपड़े मे लगेखून केँ धब्बो कों देखकर कहा.
अब मे उसे क्याँ बतलाता कि मे आखिरकहा थां,
“जानते हौ क्याँ हुआ हैं, ??”
उसनेफिन सें प्रश्न किया, साला अब क्याँ हौ गय़ा हैं ???
मैंने नां मे सर हिलाया
“अजीम कों ठाकुर नें कुछऐसा खिला दिया जिससे उसकी तबियत बहोत हि ज़्यादा खराब होँ गई हैं, सारे tv चैनल मे यह सबसेबड़ी न्यूज़ बनी हुई हैं औऱ तुम् सबसे अनजान होँ “
मे चौक गय़ा, क्याँ वही पुड़िया थि जिसेआज काजल नें ठाकुर कों दिया थां.
शबनम मेराहाथ पकड़कर खिंचते हुए मुझे केबिन मे लेँ गई औऱ tv ऑनकर दिया …
समाचार देखते देखते मेरी आंखेबड़ी हौ गई
‘खान ग्रुप केँ मालिक मिस्टर खान केँ बेटे अजीम जोँ कि ड्रग्स औऱ कत्ल केँ जुर्म मे कुछ दिनों सें जेल मे हैं कों जेल इंचार्ज इंस्पेक्टर ठाकुर द्वारा जेल केँ अंदर हि ड्रग्स कि सप्लाई कि जाती थि औऱ आज जहरीला ड्रग्स देकर मारने कि कोशिस किया गय़ा, इससे शासन सकते मे आँ गय़ा हैं, जेल केँ अंदरइस तरह केँ भयानक गतिविधियों सें पोलिस औऱ जेल प्रशासन पर्र गंभीर प्रश्न खड़े हौ गए हैं, जेल केँ सीसीटीवी फुटेज मे भि कई गड़बड़ियां पाई गई हैं, कई घंटो कां फुटेज गायब बताया जारहा हैं, कहाजा रहा हैं कि अवैध तरीके सें इंस्पेकटर ठाकुर अजीम कों उसके पिता सें मिलवाता थां, सारी घटना केँ बारे मे हमनेजेल IG सें जानने कि कोशिस कि मगरकोई भि जिम्मेदार कुछ भि नहींकह रहा हैं, हालिया ख़बरो केँ अनुसार इंस्पेक्टर ठाकुर फरार हैं, वही अजीमखान कि तबियत गंभीर बताईजा रही हैं, उन्हें ** अस्पताल मे रखा गय़ा हैं ….
क्याँ हमारे देश मे भ्रस्टाचार कां ऐसा नंगा चलता रहेगा ‘
मैंने tv बंदकर दिया …
“तोँ काजल नें अपनीचाल चल हि दि “
शबनम नें मुझे देखते हुएकहा, मैंने हा मे सर हिलाया
“मगरअब तौ उसकीजान कों ठाकुर औऱ खान दोनो सें हि खतरा होगा आखिरकहा हैं वोँ “
“मुझे नहींपता “
मैंने सपाट सां जवाब दिया
वोँ मोबाइल निकाल कर एक् काल करती हैं
“हम्मओके “
वोँ एक् गहरी सांस लेती हैं
“वोँ अभि हॉस्पिटल मे हि हैं, अजीम केँ पास, खान कों भरोसा दिलाने कि ठाकुर हि उसे मारने कां षड्यंत्र कररहा थां, ठाकुर कां कोईपता नहीं हैं अभि भि …”
तभीफिन सें उसका मोबाइल घनघना उठा
“हैल्लो क्याँ ??”
उसके चहरे कां रंग हि उड़ गय़ा थां
“क्याँ हुआ “
“पता नहींयह क्याँ होँ रहा हैं, ठाकुर नें खान केँ फॉर्महाउस मे जाकर वँहा केँ गार्ड औऱ उसके बेटे कों कुल्हाड़ी सें मार डाला, उसकी पत्नि हि जानबचा करभाग पाई हैं …”
वोँ उलझन मे दिखरही थि मगर मुझेपता थां कि यहसभी काजल कां हि कियाधरा हैं.अब पुलिस औऱ खान दोनो हि ठाकुर कों ढूंढने मे लगेहुए थें…
“क्याँ बोलते हौ हॉस्पिटल चले “
शबनम कि बात सें मे थोड़ाचौक गय़ा
“क्यो ??”
“देखते हैं नां कि आखिर अजीम कों उसके पापों कि क्याँ सजा मिली हैं, औऱ मुझेखान कों रोताहुआ देखकर बहोत हि चैन होगा “उसके होठो मे एक् मुस्कान आँ गई ……
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हम् दोनो हि ICU केँ बाहर् खड़े थें, खान साहब कि आंखे र्रोरो करसूज गई थि, चहरामरा हुआ मालूम होँ रहा थां, उन्होंने हमे देखा तक नहीं चारोतरफ पुलिस वाले हि दिखरहे थें, हमे अंदर जाने कि इजाजत नहीं दि गई, मगरकुछ देरबाद काजल आँ गई वोँ भि अंदर जानां चाहती थि, उसने पुलिस सें बात करकेहमे परमिशन दिलवा दिया, काजल मेरीओर देख भि नहींरही थि नां हि मे काजल कों देखरहा थां ऐसालग रहा थां जैसे हम् नितांत अजनबी हौ …
हम् तीनो हि अंदरगए क्योकि खान कि इतनी हिम्मत हि नहीं थि कि वोँ उसेदेख सके…
अजीम कि हालत बहोत हि खराब थि, लगरहा थां जैसे उसका पूरा शरीर हि गल गय़ा होँ, सिर्फ आंखे हि सलामत दिखरही थि, काजल कों देखकर उसके आंखों मे आंसू आँ गए, औऱ काजल केँ होठो मे मुस्कान, उसकेनाक मे ऑक्सीजन मास्क लगाहुआ थां औऱ चारोतरफ हि बहोत सें मशीन, उसे बस जिंदा रखा गय़ा थां,
डॉ नें हमे देखते हि कहा
“पता नहींयह कौन सां ड्रग्स इसे खिलाया गय़ा हैं औऱ इतनी मात्रा मे इसनेइसे लेँ केसे लिया, जरूरयह ठाकुर पर्र बहोत हि भरोसा करता थां, ”
“सच बतलाइए डॉ इसके बचने कां कितना चांस हैं “
काजल नें डॉ कि ओर देखा
“सच कहु होँ एक् दो दिनों तक मशीनों केँ भरोसे जिंदा रखाजा सकतामगर उससे ज़्यादा., खान साहब सें यहबात नाँ कहे तोँ हि बेहतर होगा, औऱ कोईअगर इनसे मिलना चाहेकोई करीबी होँ तोँ प्लीज् उन्हें मिलवा दीजिये, हम् 1-2 दिन सें ज़्यादा इन्हें नहींबचा पाएंगे.”
डॉ केँ सामने तौ काजल नें अफसोस जाहिर कियामगर उसके जाते हि उसके होठो मे मुसकान गहरी होँ गई वोँ अजीम केँ पास पहुची.
“डॉ कों नहींपता कि यहकौन सि ड्रग्स हैं, यहवही ड्रग्स हैं जौ तुमने बनवाई थि, उन लड़कियों कों अपने रास्ते सें हटवाने केँ लिए जौ तुम्हारे गलेपड़ जाती थि.बहोत पाप किया हैं तुमने अबदो दिनों तक उसकीसजा भुगतलो, मे तुम्हे आसानी सें मरना नहीं चाहती थि, मे यही चाहती थि कि तुम् अफसोस करकर केँ मरो …”
इतना कहकर वोँ सीधे हि कमरे सें बाहर् निकल गई औऱ अजीम केँ आंखों सें एक् पानी कि बून्द नीचेगिर गई ….
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 72
मे अभि नींद मे हि थां कि पूर्वी नें मुझे झकझोर दिया,
“भाई जल्द सें उठो शबनम बुलारही हैं “
“क्याँ हुआअब उसे “
“रश्मि नें सिलेंडर कर दिया हैं “
मे चौककर उठ गय़ा
“क्याँ “
मे जल्द केँ सजधजकर होकर नीचेआया तोँ शबनम मेरा प्रतीक्षा कररही थि,
“रश्मि नें अभि एक् घंटे पहले हि सिलेंडर कर दिया हैं, औऱ वोँ हमसे मिलना चाहती हैं, अपने वकील कों भि बुलाया हैं, अभि थाने मे हि हैं “
बिनाकुछ कहे हि हम् दोनोउस ओरचलपड़े
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“फिक्र कि कोई भि जरूरत नहीं हैं पुलिस अपना चार्जसीट जमाकर देगी औऱ उनकेपास आपके खिलाफ कोईऐसा सबूत नहीं हैं कि आपको दोषी मानाजाय, आप् गोवा मे जिस होटल मे ठहरी थि उसकाबिल जमाकर देंगे औऱ कह देंगे कि आपको अपने पिता कि मौत कां पता हि नहीं थां क्योकि आप् उसकेदो दिन पहले हि गोवा केँ लिए निकल गई थि, औऱ कोई डिस्टर्ब नाँ करे इसलिये किसी कों बतलाया नहीं थां, औऱ फोनबंद कर दिया थां ताकिकाम कां टेंसन नां होँ औऱ आप् सकून सें छुटिया मानासके, आप् अक्सर ऐसा करती हैं इसलिये किसी कों भि शक नहींहुआ कि आप् कहा हैं, जब आप् वापसआयी तौ पताचला कि पिता कि हल्या होँ गई हैं औऱ आपको हि इसका दोषी मानाजा रहा हैं, तौ अपने सिलेंडर कर दिया.औऱ इन्हें भि मे सबकुछ समझा दूंगा ….बाकीकुछ भि होँ जाए आप् अपने बयान पऱ अडिग रहिएगा …”
रश्मि नें वकील कि बात पर्र हा मे सर हिलाया, संग हि वकील नें भि हमेकुछ बाते समझा दि औऱ चला गय़ा …
अब कमरे मे मे रश्मि औऱ शबनम हि बचे थें, रश्मि मुझे देखकर मुस्कुरा रही थि ….
“निशाकहा हैं “
मैंने पहला सवाल किया
“तुम्हे बहोत याद करती हैं, तुमसे बहोत प्रेम जोँ करती हैं “
रश्मि नें उसी मुस्कान केँ संग जवाब दिया
मे चुप थां
“मगर वोँ काजल सें अब भि बहोत नाराज हैं क्योकि उसे लगता हैं कि उसने अपने बदले कि खातिर तुम्हारी जीवन कों हि बर्बाद कर दिया हैं …”
“सही तोँ लगता हैं उसे, मे दोनो कों हि बहोत प्रेम करताहु औऱ यह भि जानता हु कि वोँ दोनो भि मुझे बहोत प्रेम करते हैं मगर ….वक़्त कों शायदकुछ औऱ हि मंजूर हैं जौ हम् संग नहींरह पारहे हैं, मेरी बेहन कों मुझसे हि मिलने मे लज्जा महसूस हौ रही हैं औऱ मेरी पत्नि ……….पता नहीं काजल केँ दिल मे मेरेलिए क्याँ हैं, अब तोँ मे समझना भि नहीं चाहता.”
रश्मि केँ चहरे पऱ गंभीरता थि.
“पहले मे भि काजल सें नाराज थि मगरजब सें मे निशा सें मिली मुझे अपने पऱ हि क्रोध आया, मेरे पिता नें मेरी जीवन बर्बाद कि, पहले मेरीमा कों मार दिया केवल दौलत कि खातिर फिन मुझे अपने मित्र केँ बेटे केँ चंगुल मे फेक दिया वोँ भि दौलत कि खातिर.अब मुझे किसी सें कोई बदला नहीं लेनाअब जाके मुझेचैन मिला हैं, अब शायद मे अच्छे सें बिना किसीगम केँ जिंदगी बिता पाऊंगी.मन कां बोझ क्याँ होता हैं बदले कि आग क्याँ होती हैं यह तुम् शायद नहीं समझोगे देव, तुम् सीधे साधे व्यक्ति हौ औऱ शायद तुम्हे यही लगता होगा कि काजल नें तुम्हारा यूज़ किया हैं जैसा कि निशा कों लगता हैं, हायहबात सही हि हैं मगर मे यह भि जानती हु कि बदले कि बोझ मे वोँ भि दबीजा रही हैं जितना जल्दयह बोझ ख़त्म हौ वोँ अपनी जिंदगी कों आहिस्ता जी पाएगी, यहबात अलग हैं कि इस बदले कि कीमत उसने बहोत अधिक दि हैं.
मगर कीमत तौ चुकानी हि पड़ती हैं मैंने भि चुकाई हैं, निशा नें भि चुकाई हैं औऱ काजल भि चुकारही हैं …”
थोड़ीदेर तक कमरे मे शांति हि रही
“तुमने इतनी जल्द सिलेंडर क्योकर दिया, पहले सें बतलाया होता तोँ हम् जमानत कि कागज बनवाकर रखते “
शबनम नें कहा, जिससे रश्मि केँ होठो मे मुस्कान बिखर गई
“मुझे अजीम कां पताचला, औऱ मे उससे मिलना चाहती हु, माना कि वोँ कितना भि बड़ा गुनहगार हौ मगर मे एक् महिला हु औऱ औऱ वोँ मेरा पहला प्रेम थां, मेरा पति थां.उसके अंत वक्त मे मुझे उसकेसंग होना चाहिए, ऐसे जमानत मुझेआज साम तक मिल जाएगी, क्योकि कोई सुबूत मेरे खिलाफ हैं भि नहीं, औऱ मुझे अभि पुलिस कस्टडी मे अजीम सें मिलने कि भि इजाजत मिल गई हैं “
रश्मि केँ होठो मे केँ फीकी मुस्कान आँ गई, मे उसके मनोदशा कों देखकर सोच मे पड़ गय़ा थां कि आखिर एक् स्त्री सचमे प्रेम कि देवी होती हैं, जौ अपनेउस पति कां भि संग नहीं छोड़ना चाहती जिसने कभी उससे प्रेम नहीं किया हैं, मगर काजल ….???
वोँ मेरासंग छोड़कर चली गई जबकि मैंने तोँ उसे दिलोजान सें चाहा थां …
रश्मि नें जैसे मेरेदिल कां हालजान लिया थां
“देव वोँ हि तुमसे बहोत प्रेम करती हैं, मगर अभि उसके सामने प्रेम कां इन्तहां देने कि नौबत नहींआयी हैं, मुझे यकीन हैं कि जब वक़्त पड़ेगा तौ वोँ तुम्हारे नजरो मे खरी उतरेगी …”
पता नहीं रश्मि कि बात कितनी सच्ची थि औऱ कितनी झूठीमगर यह जरूरसच थां कि अभि तक मे हि प्रेम कां इन्तहां देरहा हु.उसकेहर गलतियों केँ बावजूद उससे प्रेम कररहा हु ………….
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अपने होटल मे मे औऱ शबनमसंग संग बैठे थें, कोईकुछ भि नहींकह पारहा थां …
“क्याँ तुम्हे नहीं लगता कि हम् भि गुनहगार हैं “
मैंने धीरे-धीरे सें कहा
“क्यो “
शबनम नें मुझे आश्चर्य सें देखा
“क्योकी हमारे कारण भि तौ कई लडकिइस धंधे मे आयी हैं हमने भि तौ कई लड़कियों कों रंडीबना दिया हैं, हमारे होटल मे भि तोँ यहसभी चलता हैं, तोँ हममें औऱ अजीम मे फर्क हि क्याँ हैं “
शबनम मेरीबात कों गौर सें सुनरही थि औऱ उसका चहरा थोड़ा गंभीर होँ गय़ा थां, उसने मेराहाथ पकड़ा औऱ मुझे खिंचते हुए लेँ गई, वोँ होटल कां पीछे वाला हिस्सा थां जंहाकुछ सर्विस क्वाटर बनेहुए थें, उसने उनमे सें एक् मे दस्तक दि औऱ दरवाजा खुला, दो लडकिया बैठी हुईँ थि, एक् कुछ 20 साल कि लगरही थि वही दूसरी 25-30 कि.
“आज सें तुम् दोनो कों यहकाम करने कि कोई जरूरत नहीं हैं तुम् दूसरा कामकर सकती हौ याँ चाहो तोँ जा सकती हौ “
दोनो लड़कियों कां चहरा जैसे पिलापड़ गय़ा औऱ वोँ दौड़ती हुई शबनम केँ कदमो मे आकरगिर गई.
दोनो हि रोनेलगी थि, 20 साल कि लड़की गिड़गिड़ाने लगी
“दिदी हमसेकोई गलती होँ गई हैं क्याँ यह आप् क्याँ कहरही हैं हम् कहा जाएंगे, मेरी मम्मी कां क्याँ होगादीद वोँ बिना इलाज केँ मर जाएगी दिदी प्लीज् हमेयही रहनेदो ….”
दूसरी भि फफकपड़ी थि
“दिदी मेरी बेटी कों मे पढ़ना चाहती हु देहात मे मजदूरी करती थि, वँहा कां ठेकेदार हि मुझपर नजर लगाए रखता थां, आज अपनी बेटी कों अच्छे विद्यालय मे पढापा रहीहु, पति तोँ दारू केँ पीछे हि दीवाना हैं, मुझे निकाल दोगी तोँ वोँ मेरी बेटी कों हि धंधे मे बैठा देगा दिदी गलती हुई हौ तौ हमेमार लीजिए मगर यंहा सें मत निकालिए “
मे उन दोनो कों बस देखता हि रह गय़ा थां, बदन कां धंधा करने वालीयह औरतेकिन मुस्किलो सें गुजररही थि इसबात कों जानने कि कभी मैंने कोशिस हि नहीं कि थि,
हम् तोँ बसबदन कां व्यापार करने वाली औरतों कों रंडीबोल कर निकल जाते हैं मगर सोचा हि नहीं कि यह रंडी क्योबनी …
शबनम मेरीओर देखने लगी
“देव मुझेबस एक् चीज बताओ कि इन्हें रंडी किसने बनाया हैं, हम् लोगो नें याँ उस ठेकेदार नें जोँ इसकेबदन कों हवस कि नजर सें देखता थां, याँ उस पति नें जौ दारू केँ लिए अपनी पत्नि औऱ बेटी कां भि सौदाकर सकता हैं, याँ फिनउस विद्यालय मे जोँ इतनाफीस लेते हैं कि अपनी बेटी कों अच्छी शिक्षा केँ लिएइसे अपना शरीर बेचना पड़रहा हैं.औऱ देवइसे किसने रंडी बनाया हैं हमने याँ उस सरकारी हॉस्पिटल नें जंहा इसकी मां कां अच्छे सें इलाज नहीं हौ पाया औऱ उसे प्राइवेट हॉस्पिटल मे दाखिला करवाना पड़ा, औऱ क्याँ उसेउस प्राइवेट हॉस्पिटल नें रंडी नहीं बनाया जंहा कि फीस भरने केँ लिएयह अपनेबदन कां सौदा करने कों बाध्य होँ गई हैं ….
देव तुमने पूछा थां नाँ कि हममें औऱ अजीम मे क्याँ फर्क हैं, फर्कबस इतना हैं कि हम् किसी कों बदन बेचने पर्र मजबूर नहीं करतेमगर अजीम लड़कियों कों मजबूर औऱ ब्लैकमेल करके उनसेयह धंधा करवाता थां…
हायह धंधा तौ एक् हि हैं मगरइसे चलाने वालेअलग अलगलोग हैं एक् मे लड़कियां अपनी मर्जी सें आती हैं औऱ जाती हैं, मगर जैसा धंधा अजीम करता हैं वँहा लड़कियां नां तोँ मर्जी सें आती हैं नाँ हि जा सकती हैं, बसयही अंतर हैं ….”
मे बसउन दोनो लड़कियों कों देखता तोँ कभी शबनम कों आज शबनम केँ लिए मेरा प्रेम औऱ बढ़ गय़ा थां औऱ संग हि इस धंधे कों लेकर मेरी ग्लानि भि मिट गई थि …………….
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अध्याय 73
शबनम मेरी तपती हुइ जीवन मे एक् पेड़ कि छाया कि तरहआयी थि, मे सें अपने बांहो मे लिए लेटाहुआ थां, उसके प्रेम भरेदिल नें मुझे जौ चैन दिया थां मानो जिंदगी उठापटक मे एक् गहरा सुकून थां.
उसकेपास होने सें हि मुझे अजीब सि शांति मिलती थि, हम् दोनो हि अभि अभि प्रेम केँ दरिया मे नहाकर निकले थें, वोँ अब भि सोई हुईँ थि औऱ बहोत प्यारी लगरही थि, मे उसके चहरे कों हि देखेजा रहा थां …
उसकेफोन मे एक् संदेश आया,
स्क्रीन लॉक थां मगर वाट्सअप कां नोटिफिकेशन दिखारहा थां, कुछ लाइने साफदिख रही थि …
संदेश काजल कां थां औऱ बस इतना हि दिखा कि.
‘आजा तेरा भि तौ दोषी हैं …”
मे कुछसमझ नहीं पाया शायद औऱ भि संदेश किये होंगे जिसमे एक् कों मे पड़पारहा थां …
शबनम उठाने केँ बाद संदेश कों देखी औऱ उसके चहरे कां रंगबदल गय़ा
“क्याँ हुआ???”
मैंने प्रश्न किया
“कुछ नहीं.”
उसने चहरे केँ भाव कों छुपाते हुए अपने चहरे मे मुस्कान लायी …
स्वाभाविक सि बात थि कि वोँ मुझसे कुछ छुपारही थि मैंने भि उसेजोर नहीं दिया, वोँ थोड़ीदेर मे हि सजधजकर होकर निकलपड़ी मगर साला मुझे तोँ पीछा करने कि आदतपड़ी हुईँ थि, तोँ मे पीछेलग गय़ा …
वोँ एक् गोदाम मे पहुची जौ कि सालो सें बंद थि जरूरकुछ कांड होने वाला थां,
मे लुकछुप कर देख्ना चाहता थां जैसे मेरीआदत बनरही थि,.
मे चुपचाप कोई खिड़की देखने लगा ताकि अंदरदेख सकू एक् छोटा सां दरवाजा मुझेदिख गय़ा जौ कि पीछे कि ओर खुलता थां, मे हल्के सें अंदरआया तोँ वँहा कबाड़ कां ढेर पाया, अंदरकुछ आवाजे आँ रही थि मे उनबड़े बड़े कबाड़बन चुके मशीनों मे छुपता हुआआगे बढ़रहा थां …
“बैठ इसमें “
काजल कि तेज आवाज़ नें मेरा ध्यान खिंचा, मे उसओरबढ़ गय़ा.
“यह तुम् मेरे औऱ मेरे बेटे केँ संग क्योकर रही हौ काजल.”
खान कि दर्दभरी आवाज़ मेरे कानो केँ पड़ी सामने देखा तौ दंग हि रह गय़ा क्योकि सामने काजल औऱ शबनम दोनो हि खड़ेहुए थें औऱ संग हि खान बहोत हि गंभीर अवस्था मे खड़ाहुआ थां, उसेजिस कुर्सी पर्र काजल बैठने कों कहरही थि उसमे नां मालूम कितनी सुइयां लगी हुई थि, खानउसे देखकर हि कांपरहा थां मगर काजल केँ हाथो मे पिस्तौल थां,
“बैठजा मादरचोद “
इसबार शबनम नें कहा
“तुम् लोगयह क्योकर रहे होँ, मेरे बेटे केँ जाने केँ बादऐसे भि मेरा जीना व्यर्थ होँ चुका हैं, तुम् सारी दौलत लेँ लोमगर मुझेअब मेरी बाकी कि जीवन शांति सें बिताने दो “
काजल जोरो सें हँसपड़ी मगरसंग हि उसकेलाल लाल आंखों मे आंसू भि छलकउठा थां …
“शांति केँ संग.वाउ.तुम्हारे कारण हमारे जिंदगी कि शांति चली गई औऱ तुम् अपनी जीवन शांति सें बिताने कि बातकर रहे हौ …”
“आखिर हौ कौन तुम्.औऱ क्याँ चाहते हौ.”
खान झल्ला गय़ा थां
“वोँ भि पताचल जाएगा “
उसनेखान कों जोर कां धक्का दिया औऱ वोँ कुर्सी मे जा बैठा, उसकेमुह सें दिल दहला देने वालीचीख निकली क्योकि सारे सुइयां अब उसके पिछवाड़े मे जागड़े थें, फर्श पर्र खूनफुट पड़ा औऱ जल्दी हि शबनम नें रश्सी उठाकर उसे बांध दिया थां, खान मानो दर्द सें मर हि जाने वाला थां,
“तूँ जानना चाहता हैं नाँ कि हम् कौन हैं तौ सुन ….”
काजल कहतीचली गई औऱ खान कि आंखेबड़ी होती गई …
“तुम् मुझेमार हि क्यो नहीं डालती “
खान रोया
“ऐसे नहीं तेरे साथी कों तोँ बहोत आराम कि मौत नसीब होँ गई वोँ तोँ मेरे हाथो सें बच गय़ा मगरअब तुम्हें हि उसका कोटा भि पूरा करना होगा …”
काजल नें एक् इंगजेक्शन अपने पर्स सें निकाला औऱ खान कों दे दिया
“तेराबदन 3 दिनों मे अब धीरे-धीरे धीरे-धीरे गलेगा, शबनमइसे उठाकर हॉस्पिटल मे डालदो, जंहा इसका बेटा पड़ाहुआ हैं, औऱ हायाद रखना एक् घंटे सें पहलेमत लें जानां.”
दोनो मिलकर उसे गाड़ी मे डालने लगे
“रुको, मेरी पूरी दौलत लेँ लोमगर मुझेछोड़ दो.”
“तेरेपास हैं हि क्याँ.तेरी पूरी दौलतअब मेरे औऱ शबनम केँ नाम हौ चुकी हैं, औऱ जौ तेरेनाम पर्र हैं भि वोँ बिजनेस हि पूरीतरह सें डूब चुका हैं, कर्ज मे वोँ भि बिक हि जाएगा “
उसे डालने केँ बाद शबनमचली गई औऱ काजलबस अकेले हि एक् कोने मे बैठ गई, उसका चहराबस शांत थां कोई भि भाव उसमे दिखाई नहींदे रहे थें, इसीदिन केँ लिए उसने इतनी मेहनत कि थि औऱ यह इतनी जल्द औऱ इतने आहिस्ता ख़त्म होँ जाएगा उसने सोचा भि नहीं होगा …
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) - Kahani ab aur interesting hogi
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