रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 74
काजल शांत बैठीरही औऱ मे उसे देखता रहा, जाने वोँ कौन दि दुनिया मे थि औऱ नां जाने मे किस दुनिया मे थां…
मे उसे अकेला छोड़कर जाने कों मुड़ा हि थां कि मेरे पैरो सें एक् कुछ टकरा गय़ा, उस शांत वातावरण मे वोँ आवजतेज हौ गई थि,
“कौन हैं.”
काजल जैसे अपने विचारों केँ भवर सें जगी होगी औऱ तेजी सें एक्टिव हौ गई …
मे भागने कि कोशिस करता उससे पहले हि वोँ मेरेऊपर पिस्तौल तान चुकी थि,
“खबरदार जोँ एक् भि कदम भि बढ़ाया तोँ.”
मे वहीरुक गय़ा.औऱ पीछे पलटा
मुझे देखते हि काजल नें अपनेहाथ नीचे किया
“तुम् यंहा पऱ.”
“हम्म “
“चलो जौ होना थां होँ चुका हैं, अबजाओ यंहा सें …”
काजल पीछेपटल गई थि
“काजल, हम् दोनो इसतरह दूर क्योरह रहे हैं, क्याँ तुम्हे पता नहीं कि मे तुम्हे कितना प्रेम करताहु “
“जानती हु इसीलिए दूरहु, कही तुम्हारा प्रेम मेरी कमजोरी नां बनजाए…”
इतना हि बोलकर वोँ तेजी सें वँहा सें निकल गई थि …
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मे होटलआया तौ पूर्वी बहोत हि खुसदिख रही थि,
“भाई जानते हौ कौनआया हैं “
“कौन.??”
“निशा दिदी “
वोँ उछली मे भि उछलपड़ा…
मे पूर्वी केँ संग अपने कमरे मे गय़ा, वँहा निशाडॉ चुतिया केँ संग बैठी हुईँ थि, औऱ मुझे देखते हि मुझसे आकर लिपट गई …
हम् दोनो हि रोनेलगे थें
“कहाचली गई थि तुँ, क्याँ तुझेही मुझपर थोड़ा भि भरोसा नहीं थां “
“जानती थि भाई कि आप् मुझेमाफ कर दोगेमगर मे डर गई थि “
मे डॉ कि ओर देखने लगा
“थैंक्स डॉ साहबइसे वापस लाने केँ लिए “
डॉ नें बसहा मे अपनासर हिलाया
“मुझे शबनम नें बतलाया कि यह गोवा मे हैं औऱ इसका एड्रेश दिया, औऱ मे इसे समझने पहुच गय़ा, (ऐसे भि मेराकाम हि क्याँ रह गय़ा हैं इस किस्सा मे )”
मे हल्के सें मुस्कुरा गय़ा …
“काजल सें भि मिलना थां उसके आखिरी शिकार केँ लिए “
डॉ नें धीरे-धीरे कहा …….
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डॉ नें काजल औऱ निशा कि मीटिंग फिक्स कि थि संग मे औऱ पूर्वी थि थें, संग हि शबनम औऱ डॉ भि थें मगर वोँ दोनो थोड़ीदेर बाद हि चलेगए ताकि हम् आरम सें बातकर सके …
“मे आपसे माफी मांगना चाहती हु भाभी “
निशा कां बदलाहुआ रूप देखकर सबदंग थें …
“मुझे तुमसे कोई भि गीला नहीं हैं निशा “
काजल नें भि आहिस्ता कहा
“तोँ फिन हम् फिन सें पहले जैसेरह सकते हैं, मतलब मे आप् पूर्वी औऱ भाई एक् संग “
अचानक हि मैंने अपने बेहन मे एक् बचपना देखा.
“नहीं निशा अभि औऱ कुछकाम करना बाकी हैं “
“क्याँ फिन सें चुदवाने जाओगी क्याँ किसी सें “
निशाफिन सें अचानक हि भड़कउठी, उसकेऐसा कहने सें सब सकते मे आँ गए थें
“निशायह क्याँ बोलरही हौ तुम् “
मैंने निशा कों धमकाने केँ अंदाज मे कहा
“क्याँ गलतकहा हैं भाई इसके बदले केँ चक्कर मे हमारा पूरा परिवार बिखर गय़ा, आप् कों इतनी तकलीफ हुई, पूर्वी कां ….भाई इसे तौ मे जान सें मार देतीमगर क्याँ करू आप् इससे इतना प्रेम जौ करते हौ “
क्याँ गलतकहा थां मेरी बेहन नें, उसकी आंखों मे आंसू कि बूंदे आँ गई थि वही काजल भि फफकपड़ी थि, औऱ जानेलगी मगर पूर्वी नें उसेरोक लिया …
“निशा माफी मांग भाभी सें, यह क्याँ बतमीजी हैं, जौ हुआ वोँ होँ चुका हैं “
पूर्वी कि बात नें मानोआग मे घी कां कामकर दिया
“हा तुँ तौ इस रांड कां संग देगी हि नां, तुम्हे हि जोँ चुदने मिलरहा हैं मेरे भाई सें, याद रखना तुम् दोनोयह मेरे हैं औऱ जब तक तुम् दोनो जिंदा रहोगी तब तक इन्हें खुसी नहीं मिलने वाली, तुम् दोनो कों तौ मे मारकर हि रहूंगी “
मेरेलिए अब सहना मुश्किल थां, मैंने निशा कों घुमाया औऱ एक् जोर कां झापड़ उसकेगाल मे लगा दिया.
जैसे एक् तूफान शांत होँ गय़ा होँ ……
निशा केँ चहरे मे एक् मुस्कान आँ गई
“भाई आप् भि इसका हि संग दोगे, मगर इसके कारण हि आपकी जीवन बर्बाद हुई हैं औऱ मे इसे छोडूंगी नहीं …”
“वोँ पुरानी बाते हैं निशा बेहन तुम् “
“नहीं भाई आप् इसेमाफ कर सकते होँ मे नहीं “
निशा नें घूरकर फिन केँ उन दोनो कों देखा औऱ वँहा सें निकल गई, मे उसके पीछे भागामगर वोँ गाड़ी सें दूरजा चुकी थि औऱ नजरो सें गायब हि होँ गई ……।
रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 75
मे नर्वस सां बैठा थां कि मुझे निशा कां कालआया,
“भैया मे आपसे मिलना चाहती हु “
“कहा हैं तूँ “मे उठकरखड़ा हौ चुका थां.
उसनेपता बताया संग हि हिदायत दि कि मे किसी कों भि कुछ नाँ कहु औऱ अकेले हि आऊ.
मे बिना किसी सें कुछकहे उसके बतलाए स्थान पर्र पहुच गय़ा थां, वोँ एक् होटल केँ कमरे मे ठहरी हुई थि,
मेरे जाते हि उसने मुझे अपने सीने सें लगा लिया.
औऱ रोनेलगी.
“भाई अपको मेरीबात पऱ यकीन नहीं होता नां, कि काजलसच मे बेवफा हैं अगर आपको देख्ना हैं कि वोँ कितनी बड़ी कमीनी हैं तौ जाओ यंहा “
उसने मेरे सामने एक् पतारख दिया,
“आपकोपता लग जाएगा कि वोँ क्याँ हैं, काजलअसल मे मात्र औऱ मात्र ठाकुर कि रंडी हि हैं औऱ यहसभी कुछउन दोनो नें हि प्लान करके किया हैं …”
उसकीबात कों सुनकर मुझे विस्वास तोँ नहींहुआ मगर मे उस स्थान पर्र जाने कों राजी हौ गय़ा…
वोँ वही स्थान थि जंहा पऱ खान कों मारा गय़ा थां,
पिछली बार जंहा मुझेखान कि चीख सुनाई देरही थि वहीइस बार हँसी कि आवाज़ सुनाई दि,
मे थोड़ा औऱ पास पहुचा तौ काजल कों ठाकुर कि बांहो मे देखा, ठाकुर केँ पास हि एक् पिस्तौल पड़ी थि मगर काजल अभि ठाकुर केँ बांहो मे थि.
“तुमने तोँ मुझेडरा हि दिया थां मुझेलगा जैसे तुम् डबलगेम खेलरही होँ औऱ मुझे फसाना चाहती हौ “
“इतनेदिन मेरेसंग रहकर भि तुम् मुझेसमझ नहींपाए नाँ “
“मगर तुमने हरिया कों क्याँ मार दिया “
“ताकि हमारे खिलाफ कोई सबूत नाँ रहजाए, उस चुतिये देव कों कैद करने कि क्याँ जरूरत थि उसेइसी कारण हरिया कि सच्चाई भि पतालग गई, औऱ मुझेउसे मरना पड़ा, वरना पुलिस उसके जरिये हरिया तक पहुच जाती औऱ फिन तुमतक औऱ मुझतक भि, मैंने तुमसे कहा थां कि तुम् फिन सें फार्महाउस मत जानां तुम् क्योगए “
“अरे मुझे क्याँ पता थां कि तुमने उसेमार दिया हैं, चलोठीक हि हुआ क्योकि फिन उसका इल्जाम किसके ऊपर आता, अब कम सें कम लोगो कों यह लगेगा कि उसे भि मैंने हि मारा हैं औऱ पुलिस मेरी तलास मे हि लगे रहेगी औऱ हम् दोनो.फुर्ररर “
दोनो हि जमकरहँस पड़े
“मेरा पासपोर्ट औऱ वीसाकहा हैं “
काजल नें अपने पर्स सें कुछ कागज निकाल करउसे दिए …
“शेरखान वाउ क्याँ नामचूस किया हैं तुमने “
वोँ जोरो सें हँसपड़ा, संग हि काजल केँ होठो मे अपनेहोठ लगाने लगा काजल नें भि बिना किसी संकोच केँ अपने होठो कों उसके होठो मे लगा दिया ….
दोनो हि खिलखिला रहे थें मगर जैसे मेरा शरीर आत्मा हि जलरही होँ ……….मे बौखला कररह गय़ा थां, मनकररहा थां कि अभि उस पिस्तौल कों जौ कि ठाकुर केँ बाजू मे रखी हुई हैं उठाकर उन दोनो कों हि सूटकर दु …….
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दोनो हि केँ होठ एक् दूजे सें ऐसे चिपके हुए थें जैसे कि कभीअलग हि नहीं होने वाले हैं, वोँ दोनो हि थोड़ाआगे बढ़े औऱ ठाकुर नें उसेउठा कर थोड़ीवही लिटा दिया वोँ जोँ खेल खेलने वाले थें उसमे मुझेकोई भि इंटरेस्ट नहीं थां मुझे तोँ बसउन दोनो कों मरना थां यही मेरे सामने थि ठाकुर कि बंदूख.
मे लपककर आगेआया औऱ बंदूख कों अपने हाथो मे थाम लिया,
दोनो हि मेरेइस प्रयास सें चौकपड़े थें.
“देव तूम यंहा “
काजल नें मुझे आंखेफाड़ कर देखा
“हा साली रंडी मे यंहा, सच कहती थि मेरी बेहन कि तूँ हैं हि रंडी तुझपर बहोत भरोसा कर लियाअब औऱ नहीं “
“देव शांत होँ जाओ औऱ गन मुझेदे दो “
काजल केँ इतना बोलते हि मे औऱ भि भड़क गय़ा औऱ एक् गोली उसके पैरो केँ पासचला दि,
ठाकुर भि खोफजदा खड़ाहुआ मुझे हि देखरहा थां मगर वोँ भि मंझाहुआ खिलाड़ी थां, उसने अपनीचाल चल दि
“तूँ साले नपुंसक हैं तोँ तेरी पत्नि क्याँ करेगी, तूँ नामर्द हैं जोँ अपनी पत्नि कों दूसरे सें चुदते हुए देखता हैं, औऱ हा अपनी बहनों कों भि चोदता हैं, साले भड़वे.तुझ जैसा पति काजल जैसी मतवली औऱ चालाक लड़की कां पति होँ हि नहीं सकताउसे तौ मेरी पत्नि होना चाहिए थां…उसने नाँ केवलदो लोगो कों आसानी सें मार दिया बल्कि उनकी सारी प्रॉपर्टी भि अपनेनाम कर लिया.”वोँ जोर सें हँसने लगा, वोँ बातो हि बातो मे मेरेपास आँ चुका थां औऱ वोँ घुमा औऱ मेरे हाथो सें पिस्तौल छीनली …
इंस्पेक्टर ठाकुर केँ बंदूख कि नोक मेरे हि ओर थि,
“बहोत खेलखेल लिया तुमने अब मेरी बारी हैं, ”
मे बेखोफ खड़ाहुआ थां, पास हि काजल स्तब्ध सि मुझेदेख रही थि,
‘रुको ठाकुर ‘
वोँ चिल्लाई मगरतब तक ठाकुर कि गोलीचल गई, काजल नें उसकाहाथ उठा दिया थां औऱ मे बचने केँ लिए थोड़ादूर जा गिरा थां, ठाकुर फिन सें बौखला गय़ा औऱ मेरेऊपर फिन सें बंदूक तान दि इसबार उसका निशाना सही थां मगर उसकी गोली चलती इससे पहले हि काजलबीच मे आँ गई.
धायधाय धाय
ऑटोमेटिक लोडिंग वाली बंदूक नें अपनाकाम कर दिया थां, लगातार तीन गोली सीधे जाकर काजल केँ सीने कों चीरते हुए निकलगए मे बौखला गय़ा थां, जैसेकोई सुध हि नाँ बची होँ, वही ठाकुर भि स्तब्ध सां उसेदेख रहा थां वोँ तोँ मुझे मरना चाहता थां ताकि काजल कों पासके मगर काजल नें यह गोलियां खाकरयह साबित कर दिया थां कि वोँ शरीर सें चाहे जिसकी भि होँ मगर उसकीरूह केवल मेरी हैं ….
मे गुस्से सें तिलमिलाया औऱ पास हि पड़े एक् पत्थर सें ठाकुर पर्र वॉरकर दिया, उसकासर जख्मी होँ गय़ा थां, मे उसकी पत्थर सें उसकासर फोड़ना शुरुआत कर दिया, वोँ बेसुध हौ गय़ा थां औऱ मे तौ पहले सें हि बेसुध थां, मे चीखरहा थां चिल्ला रहा थां, औऱ पत्थर उसकेसर पर्र मारेजा रहा थां.
“नहींदेव मेरेपास आओ “काजलइस हालत मे भि थोड़ेहोश मे थि
मे जल्द सें काजल केँ पास पहुचा, मैंने उसे सीने सें लपेट लिया थां, मेरा पूरा कपड़ाखून केँ रंग सें रंग चुका थां.
“आईलवयु देव, हमेशा सें तुम् मेरे हीरोरहे होँ हमेशा सें मैंने केवल औऱ केवल तुम्हे प्रेम किया हैं “
काजल इतना हि बोलकर बेसुध हौ गई, मे चीखा
“काजल ……….नहीं काजल तुम् मुझे छोड़कर नहींजा सकती काजल “
तभी
धाय ….
एक् गोली मेरेपीठ मे आकरधंस गई, ठाकुर लेटेहुए थां औऱ उसके हाथो मे बंदूक थि
मे गुस्से सें लाल हौ चुका थां औऱ उसेजान सें मार देना चाहता थां.
मैंने पास हि पड़ाहुआ एक् रॉड उठाया औऱ उसके पैरो मे घुसा दिया, वोँ चीखा हि थां कि मैंने अपने पैरो सें उसकेमुह पर्र वॉर किया, वोँ बेसुध होँ गय़ा मे फिन सें काजल केँ पासआया, मे रोरहा थां मेरी काजल मुझे छोड़कर नहींजा सकती थि ………
मे होशं मे आया तौ मैंने अपनेपास डॉ चुतिया कों पाया,
“काजलकहा हैं “
मेरा पहला प्रश्न यही थां.
“वोँ कोमा मे हैं, गोलियां निकाल दि गई हैं मगरहोश नहींआया हैं, खैरियत हैं कि दिल कों गोली नहींलगी वरना”
मे रोनेलगा थां
“यहसभी मेरी हि गलती केँ कारणहुआ हैं डॉ नाँ मे वोँ कदम उठता औऱ नाँ हि यह हादसा होता “
डॉ मेरेपास आकर मेरेसर पऱ हाथ फेरा.
“तुम्हारी गलती नहीं हैं देव अपने कों दोषमत दो जौ भि हुआ वोँ भाग्य कां हि तोँ खेल थां, सभीठीक हौ जाएगा “
“निशाकहा हैं ???”
मुझे अचानक हि निशा कि यादआयी
“वोँ भि ठीक हैं औऱ अभि जेल मे हैं, फिक्र मतकरो वँहा हमारे लोग हैं उसेकोई तकलीफ नहीं होगी, ”
मे थोड़ा शांतहुआ
“उसके खिलाफ कोई सबूत मिला ??”
मैंने फिन सें कहा
“नहीं अभि तक तौ नहीं, केवल पूर्वी कि हि गवाही हैं उसके खिलाफ मगर उतना बहुत नहीं हैं, काजल केँ गवाही केँ बिनाउसे जेल मे अधिक दिनों तक नहींरख पाएंगे उसके वकील भि बहोत ई स्ट्रांग हैं, मगर अभि उसका छूटना ठीक नहीं होगा “
डॉ केँ चहरे मे चिंता साफझलक रही थि
“उसेबेल दिलवाओ डॉ वोँ मेरीबात सुनेगी, मे बहक गय़ा थां जौ मे उसकीबात नहीं सुना, मगर इस हादसे सें मुझेसमझ आँ चुका हैं कि मुझे उसकी बातो कों सिरियसली लेना चाहिए थां “
“मगर उसके बाहर् आने सें काजल औऱ पूर्वी दोनो केँ हि जान कों खतरा हैं ??”
डॉ मेरी बातो सें चकितदिख रहे थें,
“मे सम्हाल लूंगा, मे उसे अच्छे सें समझता हूं आप् उसे बाहर् निकलवाये “
डॉ थोड़ीदेर तक तौ सोच मे हि डूबारहा मगरफिन वोँ बाहर् चला गय़ा, मे उठाकर उसके पीछे हि बाहर् आया
“आप् पागल हौ गए होँ क्याँ यह क्याँ कररहे हौ “
सामने पूर्वी औऱ शबनमखड़ी थि
“मुझे काजल सें मिलना हैं “
“अभि तुम् आरामकरो साम कों मिल लेना, ऐसे भि उसे अधिक मिलने नहीं दिया जाता हम् तम्हे स्ट्रेचर मे लें जाएंगे “
शबनम कि आंखों मे भि पानी थां औऱ पूर्वी केँ भि, मुझेशक थां कि कही काजल कों कुछहुआ तौ नहीं हैं औऱ यहलोग मुझसे झूटबोल रहे हैं, मैंने शंका कि नजर सें दोनो कों देखा,
पूर्वी रोतेहुए मेरेपास आयी औऱ मुझसे लिपट गई.
“भाई यह क्याँ हौ गय़ा “
“काजलठीक तौ हैं नां तुमलोग मुझसे कुछ छिपा तोँ नहींरहे “
पासखड़े हुएडॉ केँ चहरे मे मुस्कान गहरा गई
“छुपाने कों बचा हि क्याँ हैं देव, अभि आरामकरो साम कों मिल लेना, फिक्र मतकरो काजलहमे छोड़कर इतनी जल्द नहीं जाने वाली “
डॉ केँ चहरे मे दृढ़ता केँ भावउभर गए जैसे उन्हें काजल पर्र बहोत हि अधिक यकीन होँ
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 76
काजल मेरी काजल, आंखेबंद किये नां जानेकीस दुनिया मे खो गई थि, उसे देखकर एक् बार तौ मूझे चक्कर हि आँ गय़ा, मे वही थां जौ कुछ दिनों पहलेउसे मारने कां प्लान कररहा थां, आज उसकीइस कुर्बानी नें मुझेफिन सें याद दिलाया जौ वोँ मुझे बोला करती थि,
‘मे तुम्हारी हि रहूंगी देव चाहे जिस्म किसी औऱ केँ पास हि क्यो नाँ रहेमगर रूहतलक बस तुम्हारी हि रहूंगी ‘
मेरी आंखेभीग गई थि औऱ मे सिसकरहा थां, मेराहाथ अभि भि काजल केँ हाथो मे थां, वोँ ऑपरेशन थिएटर मुझे काटने कों दौड़रहा थां,
‘कितना पागल थां तुँ देव जौ अपनीजान कि वफादारी पऱ उसके प्रेम पर्र शक किया ‘
मे अपनी अतीत कि यादों सें तब निकला जब पूर्वी नें मुझे बुलाया, आज 3 दिनों सें काजल कों होशं नहींआया थां वोँ अब भि कोमा मे हि थि.
“भाई देखो तौ कौनआया हैं “
बाहर् निशाखड़ी थि वोँ मुझे देखते हि मेरेपास आयी औऱ मुझे अपनेगले सें लगा लिया,
“सॉरी भाई मेरे कारण भाभी कि यह हालत होँ गई मुझे नहींपता थां कि भाभी कां प्लान क्याँ हैं मुझे तौ लगा कि वोँ आपको धोखा देना चाहती हैं “
“कोईबात नहीं मेरीजान तुँ मुझसे प्रेम हि इतना करती हैं कि तुँ मेरेआगे कुछसोच हि नहीं पाती “
वोँ थोड़ीदेर मुझसे ऐसे हि चिपकी रही.
“दिदी अब तौ मुझे नहीं मरोगी नां “
पूर्वी नें हंसते हुएकहा
“चुपकर पगली तुँ मेरी प्यारी वाली बेहन हैं, औऱ काजल भाभी नें तोँ मेरे भइया केँ लिए स्वयं गोलीखाई हैं उनकायह अहसान तौ मे जिंदगी भर नहीं भूलूंगी “
“आपकाकोई भरोसा थोड़ी हैं भाई केँ बारे मे थोड़ा भि कोईकुछ कहे तौ आप् प्रेम व्यार सभीभूल कर मारने कों दौड़ पड़ती हौ “
पूर्वी जोरो सें हँसपड़ी संग हि वँहाखड़े सबलोग भि.
“मेरे भाई कां बुरा सोचेगा उसेयह निशा कच्चा चबा जाएगी समझ लेना “
निशा नें यहबात थोड़े मजाकिया अंदाज मे कहा थां.
“डॉअब तोँ आपको मेरी बेहन पर्र कोईशक नहीं हैं नाँ “
“हा नहीं तौ हैं मगरजिस तरह सें उसदिन इसने धमकी दि थि कोई भि डरजाए, खैर पूर्वी कि तरफ सें तोँ केस वापस होँ चुका हैं तौ किसीतरह कि कोई प्रॉब्लम अब नहीं होगा.मगर निशा तुम्हे यह क्योलगा कि काजलदेव कों धोखा देने वाली हैं “
“क्योकि मुझेपता लगा थां कि काजल नें ठाकुर कां जाली पासपोर्ट बनवाया हैं, वोँ तोँ बाद मे शबनम औऱ पूर्वी नें मुझे बतलाए कि वोँ सभी ठाकुर कों फसाने केँ लिएचला गय़ा दाव थां, अगर भाई वँहा नहीं जाते तौ उसे भि वोँ वैसे हि मरती जैसे कि खान औऱ अजीम कों मारा थां मगर मेरी गलती कि वजह सें.”
“कोईबात नहीं निशा शायद जोँ भि होता हैं वोँ अच्छे केँ लिए हि होता हैं, मुझे लगता हैं कि ठाकुर कों काजल कि सच्चाई कां पताचल चुका थां होँ सकता हैं कि अगरदेव वँहा नहीं होता तोँ ठाकुर हि काजल पऱ अटैककर देता, औऱ खान औऱ अजीम कि बातअलग थि वोँ दोनो हि कमजोर थें मगर ठाकुर मजबूत औऱ मरने मारने वाला इंसान हैं, पता नहीं काजल उससे अकेले निपट पाती कि नहीं क्योकि हमे वँहा पहुचने मे वक़्त लगने वाला थां …”
“जौ हुआ वोँ होँ गय़ा अबबस काजल जल्द सें ठीक होँ जाए …”
मे गहरी सांस लेकर कहनेलगा.
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मलीना मेडम मेरेसर पर्र हाथफेर रही थि.
“मेरी दोनो बेटियो कों बहोत प्रेम देनादेव यह दोनो हि अब तुम्हारे हवाले हैं, इन्होंने जिंदगी भरबस बदले औऱ गुलामी मे निकाल दिएअब इनकी जीवन शुरुआत होँ रही हैं, मे तुमपर भरोसा कर सकतीहु …”
मलीना मेडम कि आंखों मे पानी थां औऱ संग हि काजल औऱ शबनम कि आंखों मे भि …
काजलठीक हौ चुकी थि मगर उसके फेफड़ो मे छेद होँ चुका थां जोँ नहींभर पाया थां, एक् महीने बीत चुके थें औऱ आजउसे घऱ लेँ जायाजा रहा थां, यंहासब मौजूद थें, डॉ, मलीना, मे, निशा, पूर्वी, काजल, शबनम, काजल केँ मुह बोले भइया औऱ पिता संग हि भइया कां मित्र सुशांत औऱ रश्मि भि …
कुछदिन पहले हि शबनम नें अपने पति कों तलाक दिया थां औऱ वोँ मेरेसंग हि रहने वाली थि, सुशांत औऱ निशा कां टाकाभिड़ गय़ा थां, जिस लड़की नें उसे गोली मारी थि अबवही उसकी जिंदगी संगनी बनने वाली थि, सुशांत कों भि निशा कां इतिहास पता थां मगरफिन भि प्रेम क्याँ देखता हैं, ??
पूर्वी अभि सिंगल थि, मैंने सोचा थां कि शायद वोँ अजीम केँ भइया कों डेट करेगी मगर उसने क्यो इंटरेस्ट नहीं दिखाया.
मैंने निशा औऱ सुशांत कों होटल आदित्य कों सम्हालने भेज दिया क्योकि अब वोँ भि हमारे नाम पर्र थां, अजीम केँ भइया कों जब उसके पिता औऱ भइया कि सच्चाई कां पताचला वोँ भि खुशी खुशी होटल छोड़ने कों रेडी होँ गय़ा, मगर उसके बदले हमनेउसे एक् दूसरी स्थान पऱ होटल खोलकर दे दिया थां,
खान कां होटल मे औऱ शबनम चलाने लगे थें, काजल कों आराम कि सख्त जरूरत थि, वोँ बेहद हि कमजोर हौ चुकी थि,
रश्मि अपने होटल कां कारोबार अच्छे सें चलारही थि मगरअब दोनो होटल मे कोई कंपीटिशन नहीं थां बल्कि कई मामलों मे एक् दूसरे कां सहयोग हि करते थें …
औऱ डॉ चुतिया.???
वोँ नई कहानी लिखने केँ सोच मे लगाहुआ थां…….
************* ख़त्म *****************
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