रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 65
बोदली महल, बस नाम कां हि महल थां, वोँ किसी जमाने मे रौनकहुआ करता थां आजकल वँहाबस सन्नाटा पसरा रहता थां, आसपास केँ लोग तौ वँहा जाने सें भि डरा करते थें दिन केँ उजाले मे भि लोगउधर फटकते नहीं थें, मे यहांआता हि इसलिये थां क्योकि मुझे यंहा शांति कां आभास होता थां, मे कभीकभी अपनी बेहन निशा कों भि यंहा लाया करता थां, यंहा एक् स्टोरी प्रचलित थि कि इसीमहल मे कभी राजा कि बेटी कों अपने एक् नॉकर सें प्रेम हौ गय़ा थां औऱ इसलिये उस राजा नें उस नॉकर कों दीवार मे चुनवा दिया थां, राजकुमारी नें हि यही अपनीजान दे दि, औऱतब सें राजा साहबइस महल कों छोड़कर चलेगए…
कालांतर मे लोगो मे यह अफवाह गरम होँ गई कि यंहा पऱ अब भि उन दोनो कि आत्मा कां राज हैं, औऱ इसलिये यह धीरे-धीरे धीरे-धीरे खण्डर मे तब्दील होँ गय़ा,
मगर मे यंहा अपने पूरे बचपनआता रहा, मेरा औऱ निशा केँ लिएयह फेवरेट स्थान मे सें एक् थि क्योकि हमे यंहाकोई भि डिस्टर्ब नहीं करता थां औऱ नाँ हि कोई ढूंढने आता थां, हम् यंहा घंटो बैठे रहते औऱ बाते करते रहते, मुझे लगता थां कि मे हि इस पूरेमहल कां राजा हु, क्योकि महलभले हि खण्डर हौ गय़ा होँ मगर यंहा केँ दीवारे अब भि वैभव कि गाथा गय़ा करते थें, इतनी नक्काशियां आज भि बड़ी हि मनोरम लगती थि,
खैर बीती बातो कों याद करने सें क्याँ मिलेगा, मगर फिन मेरेमन मे अचानक सें यहबात भि कौंध गई कि आखिर बोदली महल हि क्यो???????????
कोई काजल कों यंही क्यो बुलाना चाहता हैं जबकि यह स्थान पहुचने मे दुर्गम भि थि औऱ संग हि बहोत हि सुनसान भि, वोँ भि साम केँ 5 बजेजब कि थोड़ी हि देर मे सूरज भि ढल जाएगा …
मेरे शरीर मे एक् सुरसुरी सि हुई, आजतक मे भि कभी वँहा पऱ देरसाम तक नहीं रुका थां, वोँ निशा केँ बारे मे जानकारी देना चाहता थां, औऱ स्थान भि ऐसी हि चुनी थि जोँ कि निशा कि सबसे फेवरेट स्थान मे सें एक् थि, मे तौ कालेज कि पढ़ाई केँ लिएशहर आँ गय़ा थां मगरतब भि निशा वँहा जाया करती थि, फिन मैंने बैचलर कंप्लीट किया औऱ फिन MBA करनेलगा जंहा मेरी मुलाकात काजल सें हुईँ, अगर शबनम कि बातसच थि तोँ काजल औऱ निशा एक् दूसरे कों मेरे MBA मे आने सें पहले सें हि जानते थें मलतब मेरे ग्रेजुएशन केँ वक्त सें, उस टाइम भि निशा बोदली महल जरूरआती रही होगी,
मुझेयाद हैं कि जब मे एक् बार छुट्टियों मे घऱआया थां तब निशा केँ संग बोदली महल गय़ा थां औऱ उसने मुझेऐसे उसे घुमाया थां कि मुझेलगा कि मे यंहा पहलीबार हि आयाहु जबकि निशायही रहती हैं, तब उसने मुझे बताया थां कि उसेजब भि मेरीयाद आती हैं वोँ वही आँ जाया करती हैं औऱ घंटोयही बिताया करती हैं ……….
मेरेदिल मे वँहा जल्द सें जल्द पहुचने कि बेताबी बढ़तीजा रही थि, मे जानता थां कि आज मुझेकुछ खाससच कां पता चलने वाला हैं ……….
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अध्याय 66
वही सन्नाटा पसराहुआ थां जौ कि हमेशा सें हि मुझे बोदली महल मे महसूस होता थां, जौ पहले इतना सुहाना सां लगता थां वोँ आज बहोत हि मनहूस औऱ डरावना लगरहा थां,
दिन ढलने कों हौ रहा थां औऱ साम केँ 5 बज चुके थें, मे वँहा सें लगभग 2 किलोमीटर कि दूरी मे अपने परिचित स्थान मे अपनी गाड़ी पार्क करके पैदल हि महल कि तरफ निकलपड़ा थां, मे बहोत हि सतर्क थां.मुझे पता थां कि काजल जरूरउस पगडंडी सें वँहा पहुची होगी जौ कि कभी यंहाआने कां एक् मात्रा रास्ता थां, मेरे लिएकोई कठिनाई नहीं थि मगर काजल केँ लिए जरूरयह कठिनाई पैदा करने वालारहा होगा.
कुछ हि दूर तक गाड़ी वँहा आँ सकती थि काजल नें वही अपनी गाड़ीखड़ी करइधर कां रुख किया होगा,
मे दीवारों केँ सहारे सें बहोत हि आहिस्ता सें अंदर गय़ा, मुझे बाहर् हि काजलखड़ी हुईँ दिखी, मे चुपचाप हि उसेदेख रहा थां, उसके चहरे मे भि बेचैनी औऱ डरसाफ साफ दिखाई पड़रहे थें, वोँ बारबार अपनीघड़ी कि ओर देखती थि, तभी किसी मोटरसाइकिल कि आवाज़ आनी शुरुआत हुइ, वोँ जैसे जैसेपास आँ रही थि वैसे वैसे हि हमारे दिल कि धड़कने बढ़रही थि …….
कुछ हि देर मे मुझे एक् बुलेट मे एक् लंबा चौड़ा सां व्यक्ति आताहुआ दिखा, उसके संग हि पीछे कि सीट मे एक् लड़की बैठी हुइ थि, दोनो कों देखकर काजल केँ चहरे मे थोड़ी शांति दिखाई दि …
मगरउस लड़के औऱ लड़की कों देखकर मेरामुह सूखने लगा थां.
मे दोनो कों हि पहचानता थां, लड़की थि मेरी प्यारी बेहन निशा औऱ लड़का.
लड़का थां काजल केँ भइया वरुण कां यार सुशांत …
सुशांत केँ मे अपनी विवाह केँ दिन हि कोर्ट मे मिला थां(एपसोड 1) उसकेबाद मैंने उसेकभी नहीं देखा थां, मगर मे उसे पहचान गय़ा …
दोनो केँ आते हि सुशांत आकर काजल केँ गले सें लगा काजल नें भि हल्के सें उसकेपीठ कों थपथपाया, मगर निशा औऱ काजल केँ बीचकोई भि इंटरेक्शन अभि तक नहींहुआ थां.निशा काजल कों देखे बिना हि खण्डर केँ अंदरचली गई.
“तुमने मुझे यंहा क्यो बुलाया, इतनेदूर हम् बात तोँ वँहा भि कर सकते थें नां “
काजल नें सुशांत कि ओर थोड़े गुस्से मे देखा
“अरे दिदी, वोँ पता नहीं क्यो आपसे पहले सें हि नाराज हैं औऱ जब मैंने निशा सें कहा कि दिदी तुमसे बात करना चाहती हैं तौ पहले तोँ वोँ भड़क गई फिन उसनेकहा कि यह लेटरउसे दे देना वोँ समझ जाएगी कि कहा औऱ कितने वक़्त आनां हैं, मुझे भि कहापता थां कि वोँ इतनेदूर बुलाएगी …”
काजल नें एक् गहरी सांस छोड़ी
“आप् दोनो तोँ एक् हि घऱ मे रहते हौ फिन भि बात नहींकर पाते “
सुशांत नें स्वाभाविक सां प्रश्न किया
“नहींपता यहअब क्यो मुझसे क्रोध हुई बैठी हैं, मेरी तोँ बात हि नहीं सुनती इसलिये तुम को कहने कों कहा “
“अच्छा चलोठिक हैं अब अंदर चलते हैं “
दोनो अंदरचले गए मे भि पीछे केँ रास्ते सें अंदर पहुचा, जैसा कि मैंने पहले भि कहा थां कि यंहा मे सालो सें आतारहा हु इसलिये मे इस स्थान केँ चप्पे चप्पे सें परिचित थां …
मे एक् कोने मे छुपकर सब कों देखपा रहा थां, निशाबड़े हि तल्लीनता सें सब नक्काशियों कों देखरही थि जोँ कि वक़्त कि धुंध सें बोझिल हौ गए थें.
वोँ एक् दीवार कों फूक मारकर साफ करती हैं औऱ वँहा पऱ पत्थर सें उकेरा गय़ा एक् दिल कां निशान साफ हौ जाता हैं, जिसमे निशा औऱ देव लिखा थां …
मैंने उसे पहले भि देखा थां मगरउस वक़्त मुझे नहींपता थां कि मेरे बेहन केँ दिल मे मेरेलिए ऐसा प्रेम लम्हा रहा हैं.
निशा पलटी तौ सामने काजल औऱ सुशांत थें …
“तुम् बाहर् जाओ मुझे इनसे अकेले मे बात करनी हैं “
सुशांत बिनाकुछ कहे हि बाहर् चला गय़ा.
“जानती कों काजल मैंने तुम्हे यंहा क्यो बुलाया हैं “
निशा केँ मुह सें काजल सुनकर मुझे अजीबलगा क्योकि मुझे इसकीआदत नहीं थि मैंने अभि तक निशा केँ मुह सें काजल केँ लिएबस भाभी हि सुना थां.
“बताओ “काजल नें एक् सपाट जवाब दिया
“क्योकि यंहा सें मेरी बहोत हि यादे जुड़ी हुई हैं जोँ मे आज तुमसे शेयर करना चाहती हु, माना कि तुम् मुझसे बात करना चाहती थि मगर पहले मेरीबात सुनलो तौ बेहतर होगा “
निशा शांत थि औऱ संग हि काजल भि
“ह्म्म्म “काजलबस इतना हि बोलपाई
“इतना तोँ तुम्हे पता हि होगा कि मे औऱ भाई यंहा अक्सर आया करते थें, यही मेरेदिल मे भइया केँ लिएऐसा प्रेम पनपा जौ भइया बेहन केँ प्रेम सें अलग हि कुछ थां “
“हम्म्म्म”
“मुझेयह स्थान बहोत हि मनपसंद थि, क्योकि भाई कों यह स्थान बहोत पसन्द थि, औऱ इसलिये भि क्योकि यही तौ स्थान थि जंहा मे उनकेसंग बिल्कुल हि अकेले होती थि, हमारे बीचकोई भि नहींआता थां, काश मे उस वक़्त हि भइया सें अपने प्रेम कां इजहार कर लेती तौ शायदहमे यहदिन नहीं देख्ना पड़ता.शायद मे कभी बहकी हि नां होती, शायद मे उस रास्ते जाती हि नहीं जिसने भइया केँ नजरो मे मुझे गिरा दिया …”
निशा नें एक् गहरी सांसली
“वोँ आज भि तुमसे बहोत प्रेम करते हैं निशा “
निशा केँ चहरे मे एक् फीकी सि मुस्कान आँ गई
“हा मेरीहर गलतियों केँ बावजूद वोँ मुझसे बहोत प्रेम करते हैं, जैसे तुमसे करते हैं, जबकि वोँ जानते हैं कि हम् दोनो हि रंडिया हैं …”
निशा केँ मुख सें निकली बात नें काजल कों चुपकरा दिया थां…….वोँ कुछ भि नहींबोल पाई
“जब भाई कालेज कि पढ़ाई केँ लिएशहर गएतब मे बिल्कुल हि अकेली हौ गई थि काजल, औऱ यंहा मे घंटो बैठी रहती थि, उस वक्त पूर्वी बिल्कुल हि बच्ची थि कि मे उससे अपनेदिल कि बात शेयरकर सकू, उसी टाइम मेरे विद्यालय केँ कुछ लड़के जौ कि विद्यालय सें भागकर यंहाआकर सिगरेट दारू याँ गंजा पिया करते थें, उनसे मेरी दोस्ती हौ गई, वोँ यंहाआया करते थें मगर मैंने कभी किसी सें नहींकहा कि वोँ यंहाआकर क्याँ करते हैं, वोँ लोग मेरे अकेलेपन केँ मित्र बने, मगर मुझे इसकी एक् बड़ी कीमत भि चुकानी पड़ गई.अपने शरीर कि.
जवानी केँ जोश मे मे उन लड़को केँ संग इन्वाल्व होँ गई मगर मुझे नहींपता थां कि यह मेरीआदत बन जाएगी, मे नईनई जवान हुइ थि औऱ इस शराब गंजे केँ नशे मे गिरफ्त होनेलगी थि, लड़के भि बेचारे आखिरकब तक एक् जवान लड़की केँ संगरह कर भि चुपरह पाते, मगर फिन भि कोई भि मुझेहाथ लगाने सें पहले सोचता जरूर थां, वक़्त नें उनकी झिझक समाप्त कर दि औऱ मैंने भि अपनी जवानी केँ मजे उठाने कि सोची.
फिन भि मे एक् रांड नहींबनी थि, जबतक कि मे अजीम सें नहीं मिली जौ कि उन लड़को मे सें एक् कों जानता थां, लड़केउसे अजीम भाईजान कहा करते थें, वोँ एक् डॉन कि तरह थां औऱ सब उससे डरते थें, उसे भि नई जवानी चखने कां शौक थां औऱ जब उसने मेरे दोस्तो केँ संग मुझे देखा तोँ बस देखता हि रह गय़ा, मुझे अबनया नशालगा पॉवर कां औऱ मे अजीम कि गर्लफ्रैंड बन गई, मुझमें इतनीसमझ नहीं थि कि मे क्याँ कररही हु, असल मे मुझे आनंदआता थां जबसब लड़के जौ कि मेरेसंग बैठा करते थें अब मुझसे डरकरबात करते थें, जब तक मे नहीं कहतीकोई मुझे छूने कि हिम्मत भि नहीं करता थां, मेरेदिन अच्छे चलरहे थें जबतक कि मेरी जीवन मे तुम् नहींआयी …”
काजल उसके बातो कों सुनरही थि, जैसेउसे सभीकुछ पहले सें हि पता हौ
“याद हैं तुम् उस वक़्त नईनई कालेज समाप्त करके भाई केँ संग MBA आयी थि औऱ पूरे कालेज तुम् अजीम केँ पासआने कि कोशिस करतीरही थि मगर डरतेहुए, मे तुम्हे देखा करती थि कि तुम् उसके आसपास हि उसपरनजर रखेहुए होँ मगर उससे मिलकर बात नहींकर पाती होँ “
“हा मुझेयाद हैं मैंने तुम्हारे दोस्तो केँ गैंग मे सुशांत कों भि शामिल करवा दिया थां ताकि वोँ अजीम केँ आसपास हि रहे, मगर तुम्हे पताचल गय़ा थां कि कुछ गड़बड़ हैं “
“हा मुझेपता चल गय़ा थां औऱ संग हि मगर 3 सालो तक तुम् बसवैट हि करतीरही किसीसही मौके कां, तुम्हे तोँ यह भि नहींपता थां काजल कि तुम्हे करना क्याँ हैं.मगरजब तुम्हे पताचला कि मे देव कि बेहनहु वोँ देव जौ तुम्हारे संग पढ़ता हैं तब तुमने मेरेपास जाने केँ लिए मेरे भइया सें हि दोस्ती करली.वाउ “
काजल कि नजर नीची हौ गई थि मानो वोँ इसबात सें ग्लानि महसूस कररही होँ
“जब मुझेलगा कि भाई भि तुम्हारे संगखुस हैं औऱ वोँ तुम्हे पसन्द करनेलगे हैं तोँ मुझे बहोत धक्का लगा, मगर फिन मेरेदिल मे भि आया कि क्यो नां तुमसे एक् डील कि जाय, औऱ मैंने तुमसे बात कि, तुमने क्याँ कहा थां काजल कि देव सें मुझे प्रेम नहीं हैं.ऐसा हि कुछ क्याँ थां वोँ.”
निशा केँ चहरे मे एक् जहरीली सि मुस्कान खिल गई थि, औऱ काजल जैसेजल रही हौ, पसीने सें भीगी हुई सर नीचे कियेबस खड़ीरही थि
“मेरे दिमाग़ मे उस वक्तबस खान सें बदला लेने कि बात हि थि निशा, औऱ जब तुमने कहा कि तुम्हे तुम्हारे भाई चाहिए बदले मे तुम् मेरी सहायता करोगी अजीम केँ गढ़ मे घुसने मे औऱ मेरा बदला पूरा करने मे तोँ इससे अच्छी डील मेरेलिए कुछ नहीं हौ सकती हि, उस टाइम मे देव सें प्रेम नहीं करती थि मगर …”
“मगर क्याँ ……”
निशा चिल्ला उठी
“मैंने तोँ सोचा थां कि यह करने सें अजीम कों एक् नया खिलौना मिल जाएगा औऱ वोँ मुझेभूल जाएगा, अजीम सें पीछा भि छूट जाएगा औऱ मेरे भाई भि मुझेमिल जाएंगे मगर तुमने क्याँ किया ….भाई तुम्हारे प्रेम मे गिरफ्तार होनेलगे औऱ तुमसे विवाह भि करने कि सोचली औऱ तुमने मुझे धोखादे दिया.”
“नहीं निशा मे सच मे देव सें प्रेम करनेलगी थि, मे उससेअलग नहींरह सकती थि, ”
“अजीम कि रंडी बनने केँ बाद भि भइया सें तुम् केसे प्रेम कर सकती थि काजल “
निशा कि आवाज़ मे बौखलाहट थि
“जैसे तुमने किया हैं, तूम भि तोँ कई मर्दों केँ संगसोई हौ निशामगर सच बताओ कि क्याँ तुमने देव केँ अलावा किसी औऱ सें प्रेम किया हैं “
दोनो हि चुप थें जैसेकुछ सोचरहे होँ…
“तुम्हे अजीम कि जीवन मे मेरी स्थान लेँ ली औऱ संग हि भाई सें भि विवाह कर लिया, तुमने अजीम केँ जिंदगी सें रश्मि कों भि निकाल फेका जोँ कि मे भि नहींकर पाई, मे मानती हु कि तुम् मुझसे कही ज़्यादा सुंदर होँ मगर तुम्हे यहसभी मैंने हि तौ सिखाया थां, मैंने हि तोँ बतलाया थां कि तुम्हे क्याँ करना चाहिए केसे करना चाहिए …”
काजलचुप थि
“तुम्हे तोँ सभीमिल गय़ा काजलमगर मुझे क्याँ मिला ??”
निशारो पड़ी थि
“नहीं निशा मेरीबात सुनो “काजल उसकेपास जाने कों हुई मगर निशा नें जल्दी हि अपनेजेब सें एक् पिस्तौल निकाल ली
“रुक जाओ काजल बहोत हुआअब औऱ नहींअब याँ तौ तुम् रहोगी याँ मे “
काजल केँ संगसंग मेरे भि प्राण मानोउड़ गए थें
“माना मे थोड़ीबहक गई थि, माना कि मैंने गलतियां कि हैं मगर मेरा भइयाआज भि मुझे प्रेम करता हैं, मैंने तौ उसके सामने अपनी प्यारी बेहन पूर्वी कों भि कुछ नहीं समझा तूँ क्याँ चीज हैं, तुम्हें तोँ पहले हि मार देना थां मगरयह स्थान सबसेसही हैं, यही सें मेरा प्रेम शुरुआत हुआ थां “
निशा केँ चहरे मे आने वाला बदलाव मुझेडरा गय़ा थां, हम् दोनो हि जम चुके थें, उसके चहरे मे वोँ पागलपन फिन सें आनेलगा थां जिसे मे पहले भि देख चुका थां,,
“अब औऱ नहीं काजल “
“निशा रुको “
मे औऱ सुशांत दोनो हि एक् संग काजल कों बचने केँ लिए भागेमगर
‘धायधाय ‘ दो गोलियां निशा कि पिस्तौल सें चल चुकी थि औऱ सीधे जाकर सुशांत केँ कंधे मे छेदकर गई …
जोँ कि काजल कों बचने केँ लिए कूदा थां, निशा औऱ भि कुछ करती उससे पहले उसने मुझेदेख लिया थां जोँ कि एक् टूटेहुए दीवार सें कूदकर वँहा आँ गय़ा थां, निशा कां मुहबस खुला कां खुलारह गय़ा औऱ वोँ पिस्तौल कों वही छोड़ते हुए भागने लगी,
“निशा रुको.निशा रुको तौ सही “
वोँ भागते हुए झड़ियो मे नां जानेकहा गुम होँ गई मे उसके पीछे भागता रहामगर मे उसे ढूंढ हि नहीं पाया …
मे जब वापसआया तोँ सुशांत कि हालत बहोत हि खराबलग रही थि मे जल्द सें उसे उसकी हि गाड़ी मे बैठकर काजल कि गाड़ी कि तरफ भागा, काजल नें मुझसे एक् भि शब्द नहींकहा नां हि मैंने उसेकुछ कहा …
हम् दोनो हि चुप थें शांत थें ….काजल नें सुशांत कों गाड़ी मे बिठाया औऱ पास केँ हि हॉस्पिटल कि तरफ निकल गई …
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 67
हॉस्पिटल मे मे औऱ काजल दोनो हि शांत बैठेहुए थें, नां हि मेरेपास कुछ कहने कों थां नां हि काजल केँ पास, सुशांत ठीक थां औऱ उसेवही केँ एम्बुलेंस मे बैठाकर शहरभेज दिया गय़ा थां, मेरे औऱ काजल केँ बीचकोई भि बातचीत नहीं हुइ थि जबकि निशा केँ ऊपरकेस नहीं किया गय़ा, मगर पुलिस सें उसे ढूंढने कि बात जरूरकह दि गई थि, काजल नें इसकेलिए कुछबड़े अधिकारियों सें बात कि थि, औऱ मामला वहीदब गय़ा थां, संग हि सुशांत नें भि इस मामले मे निशा केँ पक्ष मे हि बयान दिया थां,
मगर काजल औऱ मेरेबीच कि बातचीत पूरीतरह सें बंद होँ चूकी थि, निशा कि तलास जारी थि मगर उसकाकही कोईआता पता नहींचल पारहा थां, काजल भि अबघऱ नहींआती थि, औऱ मे भि अबउसे घऱआने कों नहीं कहता,.
सभीकुछ अचानक सें हि बहोत शांत हौ चला थां, नां जाने निशाकहा थि, पोलिस केँ अलावा मे भि उसे ढूंढने कि भरपूर कोशिस मे जुटाहुआ थां, मगरदो महीने समाप्त होँ चुके थें औऱ मे औऱ पुलिस दोनो हि शांत होँ चुके थें …
इनसभी मे पूर्वी अकेली होँ गई थि, मे अपनेकाम मे चला जाता औऱ काजल तोँ घऱ मे थि हि नहीं, साम जबआता तोँ काम सें औऱ जिंदगी मे आयेहुए इन झमेलों सें परेशान होँ चुका होता, पूर्वी बेचारी करती भि क्याँ, मगर फिन भि हम् दोनो हि एक् दूसरे कां सहारा थें.
पूर्वी नें एक् दोबार काजल सें मिलकर उसे समझने कि भि कोशिस कि औऱ उसेघऱ लाने कि कोशिस कि मगर वोँ अपने कों मेरा गुनहगार मानती थि औऱ मेरे सामने नहीं आनां चाहती थि मे भि उसे वापस लाना नहीं चाहता थां जबकि निशा केँ संगयह हादसा होँ गय़ा थां, सचकहु तौ सबसेदूर होकर हि मे खुस थां औऱ इस नौकरी कों छोड़कर पूर्वी केँ संग दूसरे शहर जाने कां प्लान बना लिया थां, मे सुकून कां जिंदगी बिताना चाहता थां उससे भि ज़्यादा अपनी बेहन कों एक् सुरक्षित जीवन देना चाहता थां, मैंने शबनम औऱ रश्मि केँ लाखमना करने केँ बाद भि अपने नौकरी सें रिजाइन कर दिया औऱ वँहा सें 80 किलो मीटरदूर दूसरे शहर मे एक् छोटे सें होटल मे मैनेजर कि नॉकरी जॉइनकर ली, संग हि अपनेघऱ मे तालालगा कर मे चुपचाप हि इन सबसेदूर दूसरे शहर मे चला गय़ा ……………….
मैंने अपना नंबर भि बदल दिया थां, संग हि किसी सें यह भि नहींकहा थां कि मे कहाजा रहाहु.
पूर्वी औऱ मे बस एक् दूसरे केँ लिए हि रहगए थें, जिंदगी मे हमारा एक् दूसरे केँ सिवा औऱ कोई नहींबचा थां, कभी कभी वोँ रोती तौ मे उसे सहारा दे देताकभी मे रोता तौ वोँ मुझे सहारा दे देती, मगर फिन भि हम् अच्छे थें, 15 दिन औऱ बीतगए, औऱ सभीकुछ बहोत हद तक ठीक होनेलगा थां मगर ……
उसदिन केँ अखबार मे मुझे चौका दियाजब सुभह कि न्यूज थि,.
‘मशहूर कपूर होटल केँ मालिक मिस्टर कपूर कि हत्या, हत्या कां शक उसकी बेटी रश्मि पऱ, रश्मि अभि फरार हैं औऱ पुलिस कों उसकी तलास हैं, हत्या कि वजहयह बताईजा रही हैं कि रश्मि कों शक थां कि मिस्टर कपूर नें हि उनकी मम्मी कि हत्या जायदाद केँ लालच मे आकर कि हैं …
बतादे कि रश्मि कपूर साहब कि सौतेली बेटी थि, इसकेसंग हि उन्हें लेकर औऱ भि खुलासे हौ रहे हैं, कहा जारहा हैं कि कपूर साहब कां असलीनाम रॉकी हैं जोँ कभी होटल आदित्य मे मैंनेजर हुआ करता थां औऱ सालो सें अपनी पत्नि नेहा केँ मर्डर केँ आरोप मे फरार थां, उसने कपूर होटल केँ मालिक कों फंसाकर उनकी बेटी सें विवाह कि थि जिनकी पहले सें एक् बेटी रश्मि भि थि ……’
खबर पढ़ते हि मे चौककर उठा, पूर्वी मेरे चहरे कां भावसमझ चुकी थि,
“पूर्वी तुम्हारा मोबाइल जोँ कि हमनेबंद करकेरख दिया थां जरा देना तौ “
पूर्वी केँ चहरे मे थोड़े आश्चर्य केँ बाद थोड़ी मुस्कान भि आँ गई
“क्याँ हम् फिन सें वापसजा रहे हैं “
“पता नहींमगर मुझेकुछ मोबाइल करने हैं “
पूर्वी खुसी खुशी अपना मोबाइल लेनेचली गई ….
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आध्याय 68
“हैल्लो मे बोलरहा हु “
“कहा हौ तुम् इतने दिनों केँ बादयाद आयीपता हैं कि सभी कितना परेशान थें “
“क्याँ हौ रहा हैं वँहायह क्याँ पढ़ने कों मिलरहा हैं “
“सभी निधि कां किया कराया हैं “
निधि कां नाम सुनकर हि मे बेचैन होँ गय़ा, तौ वोँ रश्मि सें मिली थि.
“याँ किया निधि नें “
मेरीबात पर्र शबनम थोड़ीदेर तक चुप हि रही
“पता नहीं शायदउसे सच्चाई बता दि, बस इतना हि बहुत थां बाकी कां काम तौ स्वयं रश्मि नें अपने हाथो सें कर दिया “
शबनम कि बात सुनकर मे चौक गय़ा मुझे भि तक यकीन नहीं होँ रहा थां कि रश्मि नें हि कपूर कों मारा हैं.
“क्याँ सच मे रश्मि नें हि …”
“हा रश्मि नें हि, अपनी मम्मी कि मौत कां बदलाउसे अपने हाथो सें लेना थां मगर फिक्र मतकरो, कोर्ट मे कुछ भि साबित नहीं होँ पायेगा, वोँ आसानी सें छूट जाएगी “
हा हमारी अदालतों मे गवाहों औऱ सबूतों कों तोडना मरोड़ना कोईबड़ा काम तौ नहीं थां, रश्मि भि बच हि जाएगी ऐसे भि उसनेकौन सें मासूम इंसान कि हत्या कि थि, जिसकी हत्या कि गई वोँ भि एक् गुनहगार हि थां,
“मगरउसे इतनी आसानमौत मिली शायद काजल कों यह मनपसंद नहींआया होगा”
शबनम नें मेरेमुह सें काजल कां नाम सुनकर थोड़ी हँसी बिखेर दि
“काजल कां नशाअब भि तुम्हारे सरचढ़ा हुआ हैं देव “
“हम्मअब यहनशा हैं याँ आदत मुझे नहींपता मगरहा रोज हि काजल औऱ निशा कि यादआया करती हैं “
थोड़ीदेर तक कोई भि कुछ नहींकह पाया
“कहा होँ तुम् “
“सोचरहा हु कि वापस आँ जाऊ, निशासही सलामत हैं यह सुनकर थोड़ी तसल्ली हुईँ मगर उससे मिलना चाहता हु “
“वोँ अभि रश्मि केँ संग हि गायब हैं, दोनो कां हि कोईअता पता नहींचल रहा …”
“ह्म्म्म औऱ काजल कैसी हैं “
नां चाहते हुए भि मेरेमुह सें काजल कां नाम निकल हि गय़ा थां
“ओहयह प्रेम, इतना ठोकर खाकर भि फिन सें सर उसके पैरो मे रखना चाहते हौ ताकिफिन सें तुम्हे ठोकरमार दे “
थोड़ा व्यंग थोड़ा अपनापन औऱ थोड़ी खुसीसब कुछ तौ थां शबनम कि बात मे
“यहीसमझ लो, जबसर ओखली मे दे हि दिया हैं तौ फिन अंजाम सें क्याँ डरना, ”
मे थोड़े हल्के मूड मे बोला
“ह्म्म्म बात तौ सही हैं, मगर काजल मेडम तौ आजकल पूरीतरह सें बस अपनेकाम मे हि लगी हुई हैं, नां जानेकौन सि रात अजीम ठाकुर औऱ खान कि अंतिम रात साबित होगी, खासकर कपूर केँ मरने केँ बाद तौ वोँ औऱ भि देर नहीं करना चाहती, क्योकि राज खुलने लगे हैं औऱ पुलिस कपूर उर्फ रॉकी कि हिस्ट्री खोजने मे लगी हुई हैं, काजल भि अपनाकाम जल्द सें समाप्त कर तुम्हारे तरह हि सुकून कि जीवन बिताना चाहती हैं “
“सुकून कि जीवन.??????
अपनो केँ बिनाकही कोई जीवन सुकून कि होती हैं शबनम ?/
मेरी बेहन मेरेपास नहीं हैं, मेरा प्रेम मेरेपास नहीं हैं तोँ यह जीवन सुकून कि केसे होँ गई, मे अपने दोस्तो सें अपनेशहर सें अलग होकररह रहाहु, मे यह बोल्ना तोँ नहीं चाहता थां लकिनहा जबसेआया हु लगता हैं कि लम्हा समय भारी हैं, पता नहीं वोँ दोनोकिस तकलीफ सें गुजररहे होंगे औऱ मे सभी छोड़कर भागआया हु …”
“यह लड़ाई तुम्हारी थि हि नहींदेव तुम् आखिरकर भि क्याँ सकते होँ, इस हालात कों बनाने वालो कों हि इसे भुगतना होगा, तुम् याँ मे चाहकर भि कुछ नहींकर सकते “
कुछदेर तक हम् दोनो मे सें किसी नें कुछ नहींकहा …
“हा शबनममगर मे अब यंहा नहीं रहना चाहता “
“तोँ आँ जाओ, होटल मे रहो, मे भि तोँ अकेली होँ गई हु, मुझे औऱ इस होटल कों तुम्हारी जरूरत हैं …”
कहते हैं नां कि नशेड़ी कों नशे कां बहाने चाहिए…
मुझे भि काजल औऱ निशा केँ नाम कां नशालगा हुआ थां औऱ मुझे बहाने मिल गय़ा थां ………
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होटल कां माहौल बिल्कुल हि बदलाहुआ थां यंहा कस्टमर कम औऱ पोलिश वाले ज़्यादा दिखाई देरहे थें, मेरे आने केँ बाद मेरा भि बयान लिया गय़ा, औऱ मेरे हि कहने पर्र होटल कि निगरानी पर्र बसकुछ सादे कपड़े मे पोलिश वाले नियुक्त कियेगए, ताकि होतल मे आने वाले कस्टमर कों कोई तकलीफ़ नां हौ औऱ पोलिस कि तहकीकात मे भि कोई बाधा नां पड़े …
शबनम बहोत हि खुश थि औऱ पूर्वी भि मगर मेरेमन मे कई संशयउमड़ रहे थें …
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मुझेआये एक् हि दिनहुआ थां औऱ मे अभि अपने होटल मे हि थां कि मुझेकुछ पोलिश वालो केँ संग इंस्पेक्टर ठाकुर भि आताहुआ दिखाई दिया, मुझे देखकर उसके चहरे कि चमकबढ़ गई, वोँ मेरेपास आया …
“ओहदेव तुम् आखिर आँ हि गए “
मैंने हल्के सें सर हिलाया
“ऐसे काजलकह हि रही थि कि तुम् ज़्यादा दिनों तक यंहा सें देर नहींरह पाओगे “
उसकीबात सें मेराखून हि जल गय़ा, उसके होठो मे एक् चिढ़ाने वाली मुस्कान थि
“चौक क्योगए मुझेपता चल गय़ा हैं कि तुम् काजल केँ पति देव होँ.वाउ देखो नाँ पति देवजी देवजी.हाहाहा “
वोँ इतनी गंदी हँसी हंसा कि लगा कि उसका जबड़ा हि निकाल लू, मेरी मुठ्ठियां भिच गई थि, जिसे देखकर वोँ फिन सें एक् कमीनी मुस्कान मे मुस्काया
“देव बाबूजब पत्नि हि बेवफाई करदे तौ मुठ्ठी भिचकर क्याँ करोगे.”
वोँ मेरे कानो केँ पासआय औऱ फुसफुसाया
“ऐसेसच बताऊँ मखमल हैं तुम्हारी पत्नि, साली कों जितना भि रगड़ोकम हि लगता हैं “
उसकी बाते जैसे मेरे कानो मे पिघले हुए लोहे कि तरहउतर रही थि
“मादरचोद “
मे पलटा औऱ उसके कॉलर कों पकड़कर खड़ा होँ गय़ा, मगर जल्दी हि कुछ पोलिश वाले मेरे हरकत कों देख वहांआकर हमेघेर करखड़े होँ गए
ठाकुर फिन सें कमीनेपन सें मुकुराय
“अपना क्रोध सम्हाल कररखो देव औऱ मेरे रिश्ते मे आने कि सोचना हि मत वरना जोँ दो पैरो पऱ सही सलामत खड़े होँ वोँ भि नहींरह पाओगे “
वोँ मेराहाथ अपने कॉलर सें झटककर हटा दिया औऱ वँहा सें चले गय़ा, मे ठगा सां बसउसे देखरहा थां, गुस्से कि आग नें मुझेजला रखा थां पऱ इतनी हिम्मत भि नहींरह गई थि कि मे उसकामुह तोड़दु ……….
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 68
“हैल्लो साहबकहा हौ आप् दिखाई हि नहीं देते “
हरिया कि आवाज़ मे एक् अजीब सि बात थि जौ मैंने कभी नहीं देखी थि पता नहीं क्यो मुझेउसे काल करने कां मनहुआ थां …
“बसशहर मे नहीं थां “
“उसदिन तोँ आप् इतनेनशे मे थें कि आप् अनबसनब बोलेजा रहे थें, क्याँ सच मे काजल मेडम आपकी पत्नि हैं “
काजल मेडम, साला जोँ अभि तक काजल कों बस रंडीकहा करता थां आज वोँ काजल मेडमकह रहा थां.
“क्योपूछ रहे हौ “
“अपने हि नशे मे बतलाया थां ऐसे एक् बातबता दु कि वोँ आजकल ठाकुर केँ संगयही रहती हैं, इसी फॉर्महाउस मे “
मे कुछ भि नहीं बोला
“कोई हुक्म हौ तोँ बताइए सरकार “
वोँ फिन सें बोलपड़ा
“कुछ नहीं “
“तौ कभीआइए अगर आप् कहे तौ इंतजाम करदुकुछ अंदर कि चीज देखने याँ सुनने कां “
“नहीं जरूरत नहीं हैं “
मे थोड़ाचिढ़ गय़ा थां
“हजूरयह अजीब सां नशा हैं एक् बारलग गय़ा तोँ फिन जाता नहीं हैं, आँ जाइये आप् मे बंदोबस्त कर दूंगा “
इतनाबोल कर उसने मोबाइल रख दिया मे अपने हि सोच मे पड़ाहुआ थां, क्याँ सच मे यहनशा हि अपनी पत्नि कों किसी औऱ केँ संग देखने कां नशा …………
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सामरात कि शक्ल लें रही थि औऱ मे गार्डन मे हेडफोन लगाएहुए प्रतीक्षा कररहा थां, मेरी निगाहे उसी बेडरूम मे टिकी हुइ थि जंहाउस दिन थि, काजल अभि अभि अपनेकाम सें आकर कपड़े चेंजे करने बाथरूम मे घुसी थि औऱ ठाकुर हाल मे शराब कि चुस्कियां भररहा थां, थोड़ीदेर मे वोँ भि लड़खड़ाता हुआ अंदरआया, दोनो किसी पति पत्नि कि तरह यंहारहे थें, मे रोना चाहता थां मगर अपने कों अपनी हि नजर मे गिरने नहीं देना चाहता थां, वोँ अलगबात थि कि मे पहले सें हि अपनी नामर्दी केँ कारण अपनीनजर मे गिर चुका थां,
काजल जैसे हि बाहर् आयी ठाकुर नें उसेजकड़ लिया औऱ उसकेगले कों चूमने लगा, वोँ हँसरही थि, औऱ अपने कों छुड़ाने कि हल्की कोशिस कररही थि जिसका कोई भि मतलब नहीं होता.
उसके जिस्म मे केवल वोँ टॉवेल थि जौ कि अबपता नहींकब उसके जिस्म सें सरकजाए, उसकादूध सां गोरा शरीरउस दूधिया प्रकाश मे चमकरहा थां, औऱ शायद ठाकुर कों काजल केँ जिस्म सें वोँ खुशबू भि आँ रही होगी जौ कि काजल केँ जिस्म सें नहाने केँ बादआया करती हैं, उसकेबाल फैलेहुए थें औऱ टॉवेल केँ छोरो सें उसकी जांघ झांकने लगी थि, ठाकुर कां हाथ उसके जांघो कों सहलाता हुआ उसके जांघो केँ बीचचला गय़ा थां औऱ काजल किसी वैश्या कि तरहहँस पड़ी थि, उसके योनि केँ बालसाफ नजर आँ रहे थें जोँ कि छोटे छोटे तराशे गए थें औऱ अभि ठाकुर कि उंगलियों मे नाचरहे थें,
कुछ पानी कि बूंदे भि योनि केँ उन बालो मे चमकरही थि, मे देखरहा कि केसे ठाकुर नें मेरी पत्नि केँ योनि मे अपनी एक् उंगली घुसा दि औऱ काजलफिन सें उचकी उसकेमुह सें मजे सें लिपटी हुइ आह निकली थि …
ठाकुर, जौ कि काजल कि मा कि हत्या कां दोषी थां, केसे काजल उसकेसंग भि ऐसेमजे लें सकती थि, हाअबयह कहतेहुए मुझेजरा भि संकोच नहीं कि वोँ एक् रंडी हैं, उसनेऐसे हि मजे अजीम औऱ खान केँ संग भि लिया होगा.
मेरेलिए इतना हि देख्ना दिल कों तोड़ने केँ लिए बहुत थां मे पलटा औऱ बाहर् आनेलगा मैंने देखा कि हरिया अपनाफोन निकाल कर किसी केँ कालकर रहा हैं उसकी निगाहे मेरीओर हि थि,
वोँ मुझे देखकर मुस्कुराया थां,
मे जल्द सें बाहर् आने वाला थां मगरकुछ गार्ड आकर मुझेपकड़ लिए,
मे हरिया कों आश्चर्य सें दिखने लगा उसके होठो कि मुस्कान औऱ भि फैल गई थि.
“आज तोँ आपको जाने नहींदे सकता साहब “
“क्याँ हुआ हरिया “
“थोड़ीदेर मे पताचल जाएगा “
तभी बंगले सें ठाकुर बाहर् आयाउसे देखकर मानो मेराख़ून हि सुख गय़ा थां
उसके चहरे मे वही कमीने वालीचमक थि
“तोँ अपनी पत्नि कों चुदवाते हुए देखने आया हैं, भाग क्योरहा हैं पूरादेख लें औऱ हिला लेँ जैसेउस दिन हिलाया थां, सॉरीआज तेरेलिए तेरी बेहन नहीं हैं जिसे तूँ चोदसके “
ठाकुर बोलकर जोरो सें हंसा औऱ मे कांप गय़ा थां…
मैंने हरिया कि ओर देखा
“साहबकहो तोँ अपनी पत्नि कों भेजदु, तुम्हारी बेहन कि स्थान उसेचोद लेना “
वँहाखड़े गार्ड केँ संगसंग ठाकुर भि हँसने लगा.
मेरे सामने पूरा मजरासाफ थां बसयहपता नहीं थां कि इन सबकापता काजल कों हैं कि नहीं …
“तेरी पत्नि बहोत कामल कि चीज हैं देव सोचती हैं कि मुझे औऱ खान कों तुड़वा देगी, इतने दिनों कि दोस्ती कों तुड़वा देगी, मगर उसका प्लान सच मे बहोत अच्छा हैं, खान कि दोस्ती मे मुझेऐसे भि कुछ नहीं मिला थां, इसलिये मे उसकेसंग हु, मगर उस बेचारी कों यह नहींपता कि मे उसपर कितनी नजररखे हुएहु.औऱ उसकी मखमलचुद कों चोदने कां नशा भि ऐसा हैं कि छूटता नहीं …”
वोँ जोरो सें हँसा मे गुस्से सें भरकरउसे मारने कों हुआ हि थां कि मेरेसर पर्र एक् जोर कि चोटलगी औऱ मे बेहोश होता गय़ा ………….
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