रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 58
बहनों केँ संगमचे हंगामे केँ बाद मेरी आंखेकब लगी मुझेपता हि नहींचला…
जब आंखे खुली तौ कमरे मे कुछ हलचल हौ रही थि सामने देखा तोँ काजल थि,
हमारी आंखे मिली उसने मुझे थोड़े गुस्से मे देखामगर वोँ क्रोध नकली थां,,,
असल मे उसके होठो मे एक् मुस्कान थि,
जौ मुझसे छिप नहींसकी,
“तौ तुमने पूर्वी कों भि बिगड़ हि दिया “उसने शरारती मुसकान सें कहा, वोँ मेरेपास हि खड़ी थि औऱ अभि अपनी नाइटी पहनने वाली थि, मैंने उसकेहाथ कों पकड़उसे खाट मे गिरा दिया औऱ उसकेऊपर आँ गय़ा…
“सभी तुम्हारे कारणहुआ हैं “
मे सच मे थोड़ा गंभीर थां,
“मुझेमाफ करदोदेव मे नहीं जानती थि कि ऐसाकुछ हौ जाएगा, मगरफिन भि मुझे पूर्वी केँ लिए खुसी भि हैं औऱ दुख भि …….”
काजल भि थोड़ी गंभीर हौ गई थि
मैंने प्रश्नवाचक निगाहों सें उसे देखा…
“खुसी इसलिये कि अब उसकी उम्र होँ गई हैं औऱ तुमने उसे बहकने सें तौ बचा लिया, जैसा हमारे घऱ कां माहौल थां पता नहीं वोँ स्वयं कों कितने दिनों तक सम्हाल पाती, मुझे पतालगा कि उसके क्लास कि हि लडकिया तुम्हारे होटल मे उस धंधे मे घुस गई हैं ….”
मुझेउस दिन कि यादआयी जब मैंने अपने हि होटल मे पूर्वी केँ क्लास कि लड़की कों देखा थां.
“मगरदुख इसलिये भि हैं कि तुमने जौ आगउसे लगा दि, जैसेशेर कों खून कां स्वाद दिला दिया हैं, मे नहीं चाहूंगी कि पूर्वी अबऐसा कुछकर बैठे कि ….तुम्हे अब उसका सहारा बनना होगा, तुम्हारा ध्यान अगर उससेहटा तौ समझो वोँ बाहर् ट्राय करना शुरुआत कर देगी औऱ दुनिया मे उस जैसी सुंदर कम उम्र कि लड़कियों केँ कद्रदान बहोत हैं…”
काजल कि बात मुझेसमझ मे आँ रही थि, मे भि पूर्वी कि हालत काजल औऱ निशा कि तरह होते नहीं देख्ना चाहता थां…
हम् दोनो हि थोड़ीदेर तक चुपरहे.
“मगर एक् बात मुझेसाफ बताओ कि ठाकुर केँ संग मुझे देखकर तुमने आनंदआया कि नहीं “
उसके होठो मे एक् कमीनी सि मुस्कान फैलरही थि,
मैंने उसे जोरो सें अपनी बांहो मे भर लिया औऱ जोरो सें दबाया.
“तुँ साली बहोत हि कमीनी हैं “
“तुमसे अधिक नहीं, वोँ तौ गैर मर्द थां मगर तुम् तौ अपनी हि बहनों केँ संग शुरुआत हौ गए हौ, मेरी हि साथी केँ संग भि सोते होँ, साले रिस्तो कों तोँ तुमने ख़त्म हि कर दिया हैं, औऱ तुम्हे नहींपता क्याँ कि मुझे भि जलन होती हैं, औऱ तुमसे ज़्यादा जलन होती हैं, तुम् किसी औऱ लड़की केँ संग रिलेशन मे रहते तौ शायद मे ठीक भि रहतीमगर मेरी हि सहेली, औऱ अपनी हि बहनों केँ संग “
वोँ मुझे ताड़रही थि
“मे तौ सीधा साधा सां इंसान थां तेरे हि कारण मे ऐसा हौ गय़ा हु “
हम् दोनो हि मुस्कुरा उठे…
“चलो हमारे बीचकम सें कमअबइस बात कि ग्लानि नहीं होगी कि हम् मे सें एक् हि बेवफा हैं, असल मे तोँ हम् दोनो हि बेवफा होँ चुके हैं “
काजल खिलखिलाई औऱ उसके सफेट मोती सें दांत मेरे सामने आँ गए.
“सचकहु काजल ठाकुर केँ संग तुम्हे देखकर मुझेलगा जैसे मे उसेमार हि डालू….”
मेरा जिस्म उस दृश्य कों यादकर गरम होँ गय़ा थां
“फिक्र मतकरो यह मौका भि मे तुम्हे दूंगी, चाहे होँ ठाकुर होँ याँ खान …”
काजल किसी सपने मे खोरही थि औऱ उसकी आंखों सें एक् आंसू निकलगए शायद पुरानां दर्द थां जोँ बहरहा थां.
“मगर तुम को भि उसकेसंग बहोत मज़ाआया क्यो??औऱ तुम को वोँ तोहफा भि तौ मिल गय़ा “
मैंने बात कों बदल दिया, वोँ मुस्कुराई मगरइस बार उसकी मुस्कुराहट मे वोँ ख़िलापन नहीं थां, कुछ ठंडा थां.
“ह्म्म्म उपहार तोँ मिल गय़ा हैं.औऱ आनंद भि आया, मगर ठाकुर केँ कारण नहीं बल्कि तुम्हारे कारण “
वोँ मेरे आंखों मे देखरही थि
“तुम् देखरहे हौ यह हि सोचकर मे एक् बारझड़ गई थि “
“कमीनी कही कि “
उसकी बातो कों सुनकर मेरा लिंग हि खड़ा होँ गय़ा थां औऱ मैंने देर नहीं करतेहुए उसे काजल कि योनि मे डाल दिया, मे नंगा हि थां औऱ काजल भि केवल नाइटी मे थि जौ कि पूरीतरह सें पहनी नहीं गई थि,
उसकी योनि पहले सें हि पनियाई हुई थि औऱ मेरे लिंग कों आहिस्ता वोँ अपने अंदरकर गई…
ऐसे तौ यह अहसास बहोत हि सुहाना थां मगरफिन भि आज मे कुछसोच मे गहराई सें डूबाहुआ विचार कररहा थां…
सबसेबड़ा प्रश्न तौ यह थां कि क्याँ सच मे काजल चाहती हैं कि मे उसेउस हाल मे देखु, याँ वोँ बस वक़्त कि मजबूरी हैं???
औऱ एक् प्रश्न मेरेमन कों खायेजा रहा थां, क्याँ काजल मुझसे प्रेम करती हैं, याँ वोँ बसयह नाता निभाये जारही हैं???
प्रश्न तोँ कई थें औऱ जवाबकोई भि नहीं थां, बस कुछ धारणाएं थि, बसकुछ पुरानी याद औऱ बात जिसके सहारे मे कुछसमझ याँ सोचसकू…………….
सेक्स तोँ ख़त्म होँ गय़ा औऱ हम् दोनो हि एक् दूसरे कि तरफपीठ करकेसोए थें, मगर मेरी औऱ काजल कि दोनो कि हि आंखे खुली हुइ थि, दोनो हि कई सवलो सें घिरेहुए थें….
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अध्याय 59
“आखिर वोँ रंडी तुमको देती क्याँ हैं, जौ तुम् इतने पैसे कों ठुकरा रहे होँ, तम्हे लड़की चाहिए मे वोँ भि तुम्हें दिला सकतीहु “
रश्मि बौखलाई हुइ ठाकुर सें बोलीं.
“जबान सम्हाल करबात कीजिये मेडम, आप् मेरे कैरेक्टर पर्र ऐसे कीचड़ नहीं उछाल सकती “
ठाकुर कि बात सुनकर रश्मि कां क्रोध औऱ भि बढ़ गय़ा थां, उसेसमझ नहीं आँ रहा थां कि आखिरऐसा क्याँ हौ रहा हैं जोँ ठाकुर औऱ खान जैसे अय्यास लोगयू काजल कि तरफ होँ गए हैं वोँ भि पूरे दीवानों कि तरह …
“तुम् कितने दूध केँ धुले हौ यह मे जानती हु ठाकुर साहब, औऱ काजल केँ संगखान केँ फॉर्म हाउस मे क्याँ क्याँ रंगरलियां मनाईजा रही हैं वोँ भि जानती हु, आखिर तुम् मुझे मेरे हि पति सें क्यो नहीं मिलने देना चाहते जबकि काजल तौ कभी भि उससे मिलने पहुच जाती हैं “
सच मे रश्मि कां चहरा बौखला गय़ा थां संग हि ऐसालग रहा थां जैसे वोँ रो डालेमगर वोँ इतनी कमजोर नहीं दिखना चाहती थि …
“असल मे बातऐसी हैं कि अजीम आपसे स्वयं हि नहीं मिलना चाहता, वोँ खान सें भि नहीं मिलता.उसने सख्त हिदायत देरखी हैं कि उसेबस काजल सें हि मिलाया जाए “
रश्मि स्वयं कों रोक नहींपाई औऱ उसके आंखों सें आंसू केँ बून्द गिर हि गए …
मे वही उसकेसंग खड़ाहुआ उसे देखता हि रहा, पहलेजब हम् यंहाआये तोँ ठाकुर नें मुझे ताड़कर देखा क्योकि वोँ मुझे पहले काजल केँ संगदेख चुका थां, पता नहींउसे मेरे बारे मे पता थां याँ नहींमगर उसने मुझे याँ रश्मि कों कुछ भि नहींकहा थां, उसने रश्मि कों अजीम सें मिलवाने केँ लिएसाफ साफ मानाकर दिया, जबकि रश्मि उसेमुह मांगी कीमत देने कों रेडी थि, काजल उन्हें ऐसा क्याँ देरही थि कि वोँ ऐसेऑफर कों भि ठुकरा देरहे थें, केवल सेक्स कां असर तौ नहीं थां, सेक्स तोँ उन्हें रश्मि भि दिलवा सकती थि औऱ काजल सें अधिक सुंदर लड़कियों कां अंबार उनके सामने लगा सकती थि, उसनेयह आफर भि दे दिया थां मगर काजलकोई ऐसा प्रलोभन उन्हें देरही थि जिसके आगेसब प्रलोभन कमपड़रहे थें …
रश्मि कि हालतदेख कर मुझे भि उसपरदया आनी शुरुआत हौ गई थि, मुझे नहींपता थां कि मेरी पत्नि इतनीबड़ी खिलाड़ी निकलेगी कि जिनसे साराशहर डरता हैं वोँ उन्हें भि हरारही थि औऱ रोने पऱ मजबूर कर दिया थां…
मैंने ठाकुर सें थोड़े विनम्र स्वर मे कहा.
“सर प्लीज् मेडम कों मिलने नां सहीमगर देखने तौ दियाजा सकता हैं, ”
रश्मि केँ भीगी हुइ आंखों सें मेरीओर देखा,
“आपलोग समझ क्यो नहींरहे हौ, मे भि मजबूर हु, अजीम नें साफसाफ मना कियाहुआ हैं “
मैंने रश्मि कों बाहर् बैठने कों कहा, आखिर मे मैनेजर थां सौदे करना मुझे भि आता थां.
मे अकेले मे ठाकुर सें कुछबात करना चाहता थां.
“देखिए सर, मेडम कों बस उन्हें देखने दीजिये, अजीम कों तौ पता भि नहीं चलेगा कि वोँ उसे देखकर चली गई हैं, औऱ इसके बदले आप् कों अच्छी खासी कीमतमिल सकती हैं, औऱ कुछ चाहिए तोँ आप् मुझसे बेझिझक कहे “
मैंने बहोत हि विनम्र होकरउस व्यक्ति सें यहकहा जिसे मैंने अपनी पत्नि केँ संगमहक मचाते देखा थां, मगर क्याँ करेकाम भि ऐसा थां मेरा, औऱ रश्मि केँ लिए एक् सहनुभूति मेरेदिल मे आँ गई थि …
ठाकुर थोड़ीदेर तक कुछ सोचता रहा …
“तुम् तौ डॉक्टर औऱ काजल केँ संग यंहाआये थें नां.डबलगेम तोँ नहींखेल रहे हौ.”
मैंने अपने होठो पऱ उंगली रखतेहुए उसेचुप रहने कां इशारा किया, औऱ हल्की मुसकान केँ संग उसकीओर मुखतलिब हुआ.
“बा खुदाय सरजी, मे तोँ सीधा साधा इंसान हु, मुझे नहींपता कि यहसभी क्याँ चलरहा हैं, मगर मुझे मेडम कां दर्द नहीं देखा जाता, बस इतनाकर दीजिये,.औऱ मे तोँ दोनो हि तरफ कां हुमगर खेल मे किसी भि तरफ सें नहींरहा “
वोँ थोड़ीदेर तक मुझे घूरता रहाफिन उसके होठो मे एक् शरारती सि मुस्कान आँ गई.
“ठिक हैं मगर तेरी मेडम मुझे देगी क्याँ ??”
उसने अपने मुठ्ठी बांधकर सेक्स करने केँ इशारे सें कहा, मे मजबूरन हंसा, असल मे मुझे तौ उस वक्तऐसा लगा जैसे साले कां गाला हि घोटदु मगर क्याँ करू, इसकी ट्रेनिग ली थि मैंने कि केसे क्रोध आने पऱ भि मुस्कुराया जाता हैं.
“वोँ बड़ेघऱ कि लड़की हैं सर उससेऐसा पूछा तोँ आप् भि जानते हौ कि क्याँ होगा, मगर मे आपको एक् सें एक् लडकिय दिला सकताहु, कालेज कि, याँ शादीशुदा आप् जैसा बोले “
वोँ कमीनी मुस्कान अपने चहरे मे लाया …
“ठीक हैं, फिलहाल तौ **** पैसे पहुचा देना, लड़कियों कां बाद मे बताऊंगा, अपना नंबरदे दो औऱ अजीम कों बस देखने हि दूंगा मिलवा नहीं सकता, पता नहींयह तुम्हारी मेडम क्याँ करजाए, औऱ संग हि तुम् तौ समझते हि होंगे कि काजल कों इसकापता नहीं चलना चाहिए …”
उसकीबात सें मैंने एक् गहरी सांसली, मुझे भि थोड़ाचैन हुआ …
*****
अजीम कि हालत देखकर रश्मि रो हि पड़ी थि, वोँ 6 फुट 2 इंच कां जवान औऱ गबरू सां दिखने वाला मर्द अभि किसी कंकाल केँ ढांचे कि तरहसुख गय़ा थां, गाल चिपकगए थें औऱ बहोत हि कमजोर दिखरहा थां, उसकी दाढ़ीबढ़ गई थि औऱ आंखे जैसे बाहर् कों निकल गई थि, चहरे पऱ कोईतेज नहीं थां, लगरहा थां कि वोँ बहोत हि अधिकनशा कररहा हैं मगरखा कुछ भि नहींरहा, मुझे काजल कि बातयाद आयी कि वोँ उसे तड़फ़ा तड़फाकर मारेगी, वोँ उसकेपास ड्रग्स भिजवाती थि औऱ उसे अपने काबू मे ऐसेकर रखा थां जिससे अजीम उसपर पूरीतरह सें निर्भर हौ गय़ा थां …
रश्मि उसकेपास जाकर उससेबात करना चाहती थि मगर मैंने उसेरोक लिया.
“नहीं रश्मि अगरउसे पताचला तोँ गड़बड़ हौ जाएगी,,, उसे सोने दो.हम् बाहर् जाकरकुछ सोचते हैं “
रश्मि औऱ मे बाहर् आये, मे अभि गाड़ीचला रहा थां जबकि रश्मि मेरे बाजू मे बैठी हुइ थि औऱ अपनासर मेरे कंधे पर्र रखीकुछ गहरीसोच मे डूबी हुईँ थि …
“कितना अंतर हैं तुम् दोनो मे …”
वोँ गहरी सांस लेकर बोलने लगी
“किसमे ??”
मे उसकीबात कों समझ नहीं पाया थां.
“तुझमे औऱ तुम्हारी पत्नि मे …”
मे हड़बड़ाया, मुझेपता थां कि रश्मि जानती हैं कि काजल मेरी पत्नि हैं मगर अभि तक मेरे हि सामने उसनेकुछ नहींकहा थां मगरपता नहींआज क्याँ हुआ कि वोँ मेरे सामने हि मेरी पत्नि कां जिक्र कररही थि …
उसने मुझे देखा मेरा चहरा हैरत सें भराहुआ थां …
वोँ हल्के सें मुस्कुराई औऱ फिन सें मेरे कंधे पर्र अपनासर रख दिया
“मुझेपता हैं देव कि काजल तुम्हारी पत्नि हैं, हमेशा सें पता थां अजीम कों भि पता हैं, मगर तुम् दोनो हि अपनेकाम मे इतने माहिर औऱ हुनरमंद होँ कि हमनेकभी तुम् दोनो केँ रिलेशन कों लेकरकोई बात नहीं कि, जबकि हम् दोनो बिजनेस मे एक् दूसरे केँ कट्टर दुश्मन रहे हैं, औऱ आज मुझे लगता हैं कि हम् सही थें….”
वोँ थोड़ीदेर तक रुककर फिन सें बोलने लगी.
“पता नहीं तुम्हे पता भि हैं याँ नहीं कि काजल क्याँ कररही हैं मगरसच पुछूदेव तौ मे उससे परेशान होँ गई हु, अब मुझे लगता हैं कि मे हार गई हु.क्याँ तुम्हे नहीं लगता कि तुम् भि हारगए हौ.तुम्हारी पत्नि नां जाने क्याँ क्याँ कररही हैं औऱ तुम्हे पता भि नहीं.इतना सीधापन भि किसकाम कां देव “
मे अब भि चुप हि थां …
“देव वोँ तुम्हे धोखादे रही हैं, धोखा खानां क्याँ होता हैं यह मुझसे पूछो, तुम्हारे दिल मे कभीयह बात नहींआती, याँ तुम् उसे जानबूझकर हि जानना नहीं चाहते …”
उसने मुझेऐसा सवाल किया थां जिसका जवाब मुझेसमझ नहीं आँ रहा थां.
“मेरेलिए बस मेरी पत्नि नहीं हैं रश्मि मुझे मेरी बहनों कों भि देख्ना हैं.पता नहीं कि काजल क्याँ कररही हैं मगर इतना जरूर हैं कि अगर मे इन सबमेपड़ा तौ शायद मेरी बहनों पर्र इसका प्रभाव गलतपड़ सकता हैं.”
मैंने अपनी तकलीफ़ उसेबता दि …
वोँ चुप हि थि …….
“मे कर भि क्याँ सकताहु …??”
मेरीबात पर्र रश्मि थोड़ी सतर्क हुइ …
“बहोत कुछ.अगर तुम् मेरासंग दो तौ …”
उसने मेरे हाथो पऱ अपनाहाथ रख दिया थां ……….
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 60
गहरी खामोशी औऱ गहरेसोच मे हम् दोनो हि गुम थें औऱ रश्मि केँ कमरे मे बैठेहुए थें,
“मे जानता हु रश्मि कि काजल क्याँ कररही हैं “
मैंने बहोत सोचकर कहा थां, रश्मि नें सर उठाकर मुझे देखा, उसका दुःखी चहरा अचानक सें कोईनूर छोड़ गय़ा थां,
“मगर मुझेयह नहींपता कि वोँ चाहती क्याँ हैं, मे भि इंसान हु, मेरी भि कुछ भावनाएं हैं, जैसे मे उसकेलिए मर हि गय़ा हु, कई दिनों सें हमारे बीचकोई बातचीत हि नहींरही हैं, मगर मे इतना तौ जरूर जानता हु वोँ मुझे धोखादे रही हैं …”
रश्मि कां चहराखिल गय़ा, मे झूटबोल रहा कि काजल औऱ मेरेबीच मे कोई भि बातचीत नहीं होँ रही हैं मगर मे रश्मि पर्र पूरीतरह सें विस्वास भि तोँ नहींकर सकता थां ….
“तुम् मुझे बताओ कि मुझे क्याँ करना चाहिए, मे तंग आँ चुकाहु मे एक् आराम कि जीवनबसर करना चाहता हु, मुझेइन झमेलो सें निकलना हैं …”
रश्मि नें मेरे आंखों मे देखा उसमें एक् चमक दिखाई दि.
“तुम् क्याँ चाहती हौ औऱ अगर तुम्हे काजल कों रोकना हैं तोँ क्यो “
मैंने रश्मि केँ ऊपर एक् सवाल दागा …
“पहले तौ मुझेखान साहब केँ प्रोपर्टी मे अपने हिस्से कि चिंता थि मगरअब.अब तोँ मुझेबस अजीम कि चिंता हौ रही हैं, अगरउसे बाहर् नहीं निकाला तोँ वोँ मर जाएगा “
वोँ जोरो सें रोनेलगी थि
मे उसकेपास जाकर उसके कंधे पऱ अपनाहाथ रखा
“जिस व्यक्ति नें तुम्हे इतना सताया तुम् उसकेलिए क्यो परेशान होँ रही होँ “
वोँ सर उठाकर मुझे देखने लगी …
“क्योकि मे उसे प्रेम करतीहु, वोँ मेरा पति थां.देव एक् लड़की केँ दिल कि बात तुम् नहींसमझ पाओगे, कई मजबूरियां होती हैं मगरकुछ भि होँ मैंने उससे हि तोँ प्रेम किया थां …”
मे इसीसोच मे पड़ गय़ा कि होँ सकता हैं कि काजल कि भि कुछ मजबूरियां हौ मगर वोँ मुझसे भि प्रेम करती हौ …
“मेरेमन मे एक् प्लान हैं क्याँ तुम् मुझपर भरोसा कर सकती हौ “
मैंने झट सें कहा
वोँ मानोखुस हौ गई
“मुझे तुम्हारे ऊपर पूरा भरोसा हैं देव तुम् बोलो तोँ सही.”
मुझेअब अपना मैनेजर वाला दिमाग़ लगाना थां.
“तुम्हे क्याँ लगता हैं कि अजीम इतना कमजोर क्यो होँ रहा हैं “
वोँ आश्चर्य सें मुझे देखने लगी
“क्याँ वोँ ड्रग्स लेता हैं ???”
“बहोत अधिक लेता थां मगर अभि उसे ड्रग्स …”
वोँ कहते कहतेरुक गई
“वाओदेव कमाल हैं, हासमझ गई ठाकुर औऱ काजल मिलकर उसे ड्रग्स देरहे हैं.ओहमाय गॉड इसलिये वोँ काजल कां ऐसा दीवाना बनाघूम रहा हैं “
रश्मि कि आंखों कि चमक औऱ भि बढ़ गई, मेरेमन मे कई खुरापात एक् संग चलनेलगी थि.
“अबहमे क्याँ करना चाहिए “
रश्मि नें बड़े हि जल्दबाजी मे मुझसे पूछा.
“पहले तोँ पताकरो क्याँ तूम अपने कांटेक्टस केँ बारे मे मुझेबता सकती हौ.”
वोँ थोड़ीदेर सोचती रही, इतने अचानक मुझपर वोँ इतना विस्वास केसेकर सकती थि.
मगरफिन उसने थोड़े हिम्मत भरे स्वर मे कहा
“हा बिल्कुल “
“तोँ जेल मे अपना व्यक्ति कौन हैं “
“फिलहाल तौ कोई भि नहीं “
“तोँ बिठाओ याँ खरीदो किसी कों “
वोँ मुझे देखने लगी
“होँ सके तौ ऐसा सिपाही जोँ बिल्कुल हि आम होँ, थोड़े पैसे मे हि जिसे खरीदा जासके “
उसने अपनासर हा मे हिलाया
“औऱ खान केँ पास हमारा कोई व्यक्ति “
“हा हैं तुम् जानते हौ उसे मोहनी “
मोहनी कां नाम सुनकर मे जोरो सें हँसपड़ा
“वोँ किसीकाम कि नहीं हैं, वोँ बस एक् हि काम केँ लिएठीक हैं “
मे फिन सें हँसपड़ा औऱ रश्मि नें मुझे थोड़ी नाराजगी सें देखा
“एक् व्यक्ति बैठना पड़ेगा, मेरीनजर मे हैं एक् लड़का “
वोँ शांत हि रही
“तुम्हे जौ भि करना हैं करो तुम्हे जितना रुपया चाहिए मे तुम्हे दूंगी मगर.मगर अजीम कों उस काजल सें बचाओ मेरेपास बहोत हैं औऱ मुझेअब उनकी दौलत नहीं चाहिए, अजीम औऱ खान साहब कों तौ अपने कर्मो कि सजा तोँ भुगतनी हि पड़ेगी मगर मे अपने पत्नि धर्म कां तोँ पालनकर हि सकतीहु, एक् बार उन्हें इस दलदल सें निकाल दुबस, फिन कभी उसने नहीं मिलूंगी “
रश्मि केँ चहरे मे सच मे दर्दटपक रहा थां.
पता नहीं क्यो मेरी सहानुभूति उसकीओर बढ़रही थि, जैसा मैंने अभि तक उसके बारे मे सोचा थां वोँ उससे बिल्कुल हि अलग निकली थि, वोँ एक् बड़े बाप कि बिगड़ी हुई औलाद तोँ थि मगर टाइम नें उसे बहोत कुछ सिखाया थां, उसके दिल मे आज भि अजीम केँ लिए क्रोध थां मगरफिन भि वोँ उसे अपना पति हि मानती थि, मे तोँ उसे चालबाज समझता थां मगर वोँ बस उतना हि उड़ सकती थि जितना पैसे केँ दम मे एक् इंसान उड़ता हैं, काजल नें उसे असहाय बना दिया थां क्योकि काजल केँ सामने उसके पैसो कि बिल्कुल भि नहींचल पारही थि …
“एक् आखिरी बात.काजल केँ पासऐसा कोई हैं जौ उसकीखबर तुम् तक पहुचाये “
“हा हैं नाँ.शबनम.”
उसकीबात सुनकर मेरे होठो कि मुस्कान गहरी होँ गई, तौ शबनम भि मेरी हि तरह दोनोतरफ सें खेलरही थि,
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अध्याय 61
कमरे केँ बड़े सें पलंग मे मे शबनम केँ पहलू मे लेटाहुआ थां, रश्मि नें आज मुझे शबनम सें नए तरीके सें मिलवाया थां,
हम् दोनो कों हि यहपता थां कि हम् किसका संगदे रहे हैं, मे उसेउसी कमरे मे लेँ आया जंहा हम् ज्यादातर हि मिला करते थें, मे अभि उसकेगोद मे सोया थां औऱ वोँ मेरे बालो पऱ अपनी उंगलियां फेररही थि,
उसकीगोद मे मुझे एक् अलग सां चैन औऱ शांति कां अहसास होता हैं, ऐसा लगता हैं जैसे वोँ हि मेरी सबसे अच्छी यार हैं मेरा सहारा हैं…
“आखिर तुमने भि रश्मि केँ संगहाथ मिला लिया “
वोँ मुस्कुराती हुई बोलि
“क्याँ करूकुछ तौ करना हि होगा, काजल क्याँ करती हैं मुझे तौ आजतकसमझ हि नहींआया “
“क्याँ करती हैं याँ क्यो करती हैं क्याँ जानने केँ लिए रश्मि केँ संगआये हौ”
“दोनो हि चीजे आखिर वोँ ऐसी क्यो हौ गई हैं…”
शबनम थोड़ीदेर तक खामोश हि रही
“उसने तुम्हे नहीं बतलाया ??”
“बतलाया थां अपनी किस्सा उसने भि बतलाई थि मगर …”
“मगर क्याँ ??”
“यकीन नहीं होता.”
“क्यो ??”
“क्योकि मैंने किसी सें एक् दूसरी हि कथासुन रखी हैं “
शबनम कां हाथ अचानक हि रुक गय़ा
“कौन सि कथा “
“श्रुति कि कथा “
उसके चहरे मे हल्की सि मुस्कान उभरकर आँ गई
“तोँ तुम् केशरगढ़ मे बहोत खोजबिन करके आँ गए.किसने सुनाई कथाडॉ। चुतिया नें याँ मलीना मेडम नें “
मे चौका.
“तुम् इन्हें केसे जानती हौ “
“क्योकि वोँ स्टोरी सच हैं औऱ काजल मुझसे कुछ भि नहीं छुपाती “
मे अबउठ बैठा थां…
“तोँ काजल नें मुझेझूट कहा थां “
मे उसे घूरने लगा
“नहीं काजल नें भि सच हि कहा “
मे बड़े हि असमंजस मे पड़ गय़ा थां
“मतलब एक् हि किस्सा सच होँ सकती हैं दोनो केसे “
वोँ मुस्कुराई
“इसकेलिए तुम्हे अतीत मे झकना होगादेव.काजल नें मुझेमना किया थां कि उसके अतीत केँ बारे मे कुछ भि तुम्हे नहीं बताऊँ मगर मुझे लगता हैं कि अब वोँ वक्त आँ चुका हैं जब तुम्हे यह जानने कां हक हैं, वरना तुम् उससे केवल नफरत हि करते रहोगे …”
शबनम केँ आंखों सें एक् आंसूगिर गय़ा.
मैंने उसकाहाथ थाम लिया थां.
उसने कहना शुरुआत कीया
“बात तब कि हैं जब केशरागड केँ लगभगशहर मे होटल आदित्य कि मालकिन काजलहुआ करती थि, काजल कि एक् औऱ सहेली थि जिसका नाम थां नेहा, काजल केँ पति कां नाम विकास थां जोँ कि एक् आईएएस ऑफिसर थें, विकास कि एक् औऱ पत्नि थि जिनसे तुम् मिले थें, मलीना, उनसे उन्हें एक् लड़की थि जिसका नामरखा गय़ा श्रुति.
“
मे ध्यान सें उसकी बातो कों सुनरहा थां…
“काजल कि साथी नेहा कां पति रॉकी थां जौ कि आदित्य इंटरनेशनल कां मैनेजर हुआ करता थां, उन दोनो कि एक् बेटी थि जौ कि श्रुति कि हम् उम्र हि थि, नेहा औऱ काजल कां प्रेम बहनों कि तरह थां शायद उससे भि ज़्यादा इसलिये नेहा नें अपनी बेटी कां नाम भि उसकेनाम पऱ काजल हि रखा.वही हमारी काजल हैं देव ….”
उसकी आंखों सें आंसूझलक आये थें,
मैंने उसके गालो पर्र हाथ फेरा.
“तौ नेहा काजल कि माँ थि, तौ डॉ नें मुझे मलीना केँ सामने श्रुति कां पति क्योकहा ???”
मैंने प्रश्न किया.
“क्योकि ईश्वर कों कुछ औऱ हि मंजूर थां, काजल औऱ श्रुति नां केवल हम् उम्र थें बल्कि उनमे बहोत अधिक प्रेम भि थां, जैसे नेहा औऱ काजल मे हुआ करता थां, तभी विकास कां ट्रांसफर दिल्ली होँ गय़ा, उसे केंद्र सरकार मे काम करने केँ लिए बुला लिया गय़ा, काजल भि होटल केँ काम सें तंगआकर उसे बेचने कि सोचली आधा शेयर अपनी बेहन कि तरह प्यारी यार नेहा केँ नामकर दिया औऱ आधा खरीदा खान नें …
फिन काजल विकास केँ संग दिल्ली चली गई,
समय नें करवट बदलीखान कां दिल नेहा पर्र आयाहुआ थां, मगर वोँ कुछकर नहींपा रहा थां जबतक कि उसेइन सबकी असलियत पता नहींचल गई …
नेहा कां पति रॉकी पहले काजल कां बॉयफ्रेंड हुआ करता थां औऱ तब भि उसे काजल सें मोहोब्बत थि मगरजब काजल औऱ विकास केँ बीचसभी सही हौ गय़ा उसने नेहा सें विवाह करली, वही नेहा हमेशा हि विकास सें प्रेम किए करती थि पहले उनका शारीरिक संबंध भि रह चुका थां, उसने रॉकी कों बतलाया नहीं थां कि असल मे काजल(नई वाली ) भि विकास केँ बीज सें हि जन्मी थि, यहबात नेहा नें नां मात्र रॉकी सें बल्कि काजल औऱ विकास सें भि छुपाई थि, मगरखान कों जबउनसभी केँ पुराने रिलेशन केँ बारे मे पताचला तोँ उसने रॉकी केँ कान भरने शुरुआत किये, औऱ रॉकी कों ब्लड टेस्ट सें यहपता चल गय़ा कि जिसे वोँ अपनी बेटी मानता थां असल मे वोँ विकास कि बेटी थि, खान नें उसेचुप रहने केँ लियाकहा औऱ पहलेउसे नेहा सें होटल केँ आधे शेयर हासिल करने कि स्किम बनाई.
रॉकी बदले कि आग मे जलरहा थां, उसे हमेशा लगता थां कि काजल नेहा औऱ विकास नें मिलकर उसे चुतिया हि बनाया हैं, वोँ पहलवानों कि तरह ताकतवर थां मगर स्वयं कां मन चलाने मे उतना महिर नहीं थां जितना कि खान, खान कों भि दौलत औऱ नेहा कां बदन चाहिए थां, उसने इंस्पेक्टर ठाकुर कों अपनेसंग मिला लिया, उसे यह भि पता थां कि इन सबकेबीच विकास जोँ कि एक् आईएएस हैं उससे जितना मुश्किल होगा, इसलिये उसनेउसे भि अपने रास्ते सें हटाने कि सोचली, इन सबमे मात्र मलीना हि उनकेलिए कोई खतरा पैदा नहींकर सकती थि इसलिये उसपरहाथ लगाना उन्होंने ठीक नहीं समझा …
वोँ कालीरात थि जब काजल(नई) केँ गले मे चाकू रखकर रॉकी औऱ खान नें नेहा सें शेयर रॉकी केँ नाम पऱ करवालिए, उसकेबाद बेटी केँ सामने हि ठाकुर रॉकी औऱ खान नें नेहा कां बलात्कार किया, इन सबकेबाद उसको जिंदा छोड़ना मुश्किल थां, उन्होंने दोनोमा बेटी कों बांधकर घऱ समेतजला दिया …….”
मे सुन्न रह गय़ा थां,.औऱ शबनम कि आंखों सें आंसू अनवरत गिरेजा रहा थां …
“रॉकी नें विकास सें बदला लेने केँ लिए विकास कि दूसरी बेटी श्रुति कों भि किडनैप कर लिया, औऱ वँहा सें भाग गय़ा, यहसब बातेजब बाहर् आयी तौ इंस्पेक्टर ठाकुर नें खान कों साफसाफ इन सबसेअलग कर दिया औऱ पूरा दोषी रॉकी कों बना दिया जौ कि आज तक फरार हैं, इन घटना सुनकर विकास औऱ काजल दिल्ली सें वापसआये मगर रास्ते मे उनके गाड़ी कां एक्सीडेंट करवा दिया गय़ा, आगजनी मे काजल(नई) निकलगईं थि, जिसका पता केवलडॉ चुतिया कों थां, मगर उन्होंने उसे पुलिस केँ सामने नां लेँ जाने कां फैसला किया, एक्सीडेंट मे विकास औऱ काजल गंभीर हौ चुके थें, काजलजब अति गंभीर अवस्था मे थि तौ उसने अपनेजान सें प्यारी सहेली केँ बेटी काजल सें मुलाकात कि, जिसेडॉ सबकीनजर सें बचाकर उसकेपास लेँ आया थां, उसने काजल केँ कानो मे बस एक् बातकही थि.’अपनेमा केँ कातिलों कों तड़फ़ा तदफ़ाकर मारना, उन्हें आसानमौत नहींआनी चाहिए, तोड़ देना उनकादम, गुरुर, बदन सभीकुछ छीन लेना उनसे जोँ उन्हें प्यारे हौ, ऐसी स्तिथि मे ला देना कि वोँ मौत चाहेमगर मर नहींपाए, ‘.काजल नें वोँ बात सीने मे बसा लीया.औऱ आज वोँ अपने बदले केँ बहोत लगभग हैं …”
मे सन्नरह गय़ा थां मगर काजल नें मुझे थोड़ीअलग कथा सुनाई थि, शायद वोँ मुझेकुछ चीजे नहीं बतलाना चाहती थि.
“डॉ चुतिया नें काजल कि परवरिश कि जिम्मेदारी अपने हि एक् व्यक्ति कों दे दि जिनकी पत्नि कां इंतकाल हौ चुका थां औऱ एक् बेटा भि थां, जिसे आज तुम् काजल केँ पिता औऱ भइया केँ रूप मे जानते हौ, उसे मलीना सें मा कां प्रेम मिला मलीना उसमे हि अपनीखोई हुई बेटी श्रुति कों देखती हैं औऱ उसे हि श्रुति कहा करती हैं, जब काजल थोड़ीबड़ी होँ गई तौ सभीउसे श्रुति हि कहा करते थें, सबकोयही लगता थां कि मलीना नें उसेगोद लियाहुआ हैं, क्योकि काजलकभी पहले केशरागड मे नहींरही थि बल्कि उसकी परवरिश शहर मे होटल आदित्य मे हुईँ थि इसलिये केशरगढ़ केँ लोगउसे कम हि पहचानते थें, इसका फायदा उसेहुआ, वोँ हमेशा हि डॉ औऱ मलीना केँ संरक्षण मे रही, मगर वोँ अपनीउस आग कों बुझा नहींपाई नाँ हि उसनेकभी काजल मेडम कि बात कों हि भुलाया, उसकी बदकिस्मती कि उसे कालेज केँ दौरान तुमसे प्रेम होँ गय़ा औऱ तुम्हारी बदकिस्मती कि तुम्हे वोँ सभीपता चल गय़ा जौ तुम्हे नहींपता चलना थां, काजल तुम्हे नहींछोड़ सकती,
मगर वोँ इस मकसद कों भि नहींछोड़ सकती जिसके कारण हि वोँ जीरही हैं.इसलिये वोँ यह कोशिस करती हैं कि तुम् उसकेसंग आँ जाओ चाहे, ”
वोँ इतनाबोल कर थोड़ी मुस्करा पड़ी मे समझरहा थां कि वोँ क्यो मुस्कुरा रही थि, वोँ भि जानती थि कि आजकल काजल मुझे क्याँ बनाने कि कोशिस कररही हैं, मगर मे अब उसकी मजबूरी कों समझ सकता थां …
“उसकायह सभी करना जायज हैं शबनममगर.रॉकी कां क्याँ हुआ क्याँ वोँ मिला ??”
शबनम नें एक् गहरी सांसली
“वोँ वँहा सें भागने केँ बाद एक् अमीर विधवा कों फंसाकर उससे विवाह कर ली, जिसकी एक् बेटी भि थि, आजकल रॉकी कों लोग कपूर साहब केँ नाम सें जानते हैं “
मे बुरीतरह सें बौखला गय़ा थां,
“कपूर साहब “मेरी मुठ्ठी बंद होनेलगी मे गुस्से मे जलरहा थां., उसने मुझे शांत कराया.
“वक़्त आने पर्र सहीवार करना हैं हमेदेव अभि सें क्रोध होने सें कुछ नहीं होगा “
मे शांतहुआ
“मगर शबनम आखिर श्रुति कां क्याँ हुआ, क्याँ वोँ मिली “
शबनमहँस पड़ी
“हा डॉ नें उसेखोज निकाला इसकेलिए उनको रॉकी सें फिन सें दोस्ती भि करनीपड़ी, मगर आजतक उन्होंने उसे सबसे छुपाकर रखा हैं.रॉकी नें विकास सें बदला लेने केँ लिएउसे एक् कोठे मे बेच दिया, मगर उसकी क़िस्मत अच्छी थि वोँ बहोत हि हसीन थि तोँ एक् पुराने नवाब नें उसे खरीदकर अपनेघऱ मे रख लिया, वोँ उनकी सेविका बनकर रहनेलगी, वंहीउसे नयानाम दिया गय़ा औऱ संग हि नयाकाम भि औऱ संग हि उसकी विवाह एक् लड़के सें भि करा दि गई “
मे उसे आश्चर्य सें देखा
“तुम् इतना केसे जानती हौ”
वोँ मुस्कुराई, इसबार उसके होठो कि मुस्कान औऱ भि गहरी थि
“क्योकि मे हि श्रुति हुदेव ……”
मे बस उसके चहरे कों देखता रहा उसकी आंखों मे मेरेलिए बस प्रेम थां उसकीहर बात मे सच्चाई थि, अब मुझेसमझ आँ रहा थां कि आखिर शबनम औऱ काजल कि दोस्ती इतनी गहरी क्यो हैं, वोँ दोनो हि बहने हैं औऱ उससे भि अधिक हैं ……….
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अध्याय 62
शबनम कि आँखो मे आंसू थां औऱ होठो मे मुस्कुराहट, यह वोँ लम्हा होता हैं जबकोई खुसी मे नहीं आनन्द मे होँ, दिल खुशी होठो मे चमकरही थि औऱ आंखो सें मोती बनकरटपक रही थि, नयनो केँ अंदरबस प्रेम हि प्रेम दिखाई देरहा थां, उसका हाथ मेरेसर कों सहलारहा थां औऱ मे उसकीगोद मे अपनासर टिकाए हुए किसी स्वर्ग कि सैर मे थां,
“शबनम क्याँ तुम् भि मुझसे प्रेम करती हौ.”
मे उसकेगोद मे कुछ औऱ हि धंस गय़ा थां
शायद उसके होठो कि मुसकान औऱ भि चौड़ी हौ गई हौ,
“कोईशक हैं क्याँ ???”
“मगर मे तौ तुम्हारी बेहन कां पति हु “
“तौ …”
“तौ क्याँ तुम्हे पता नहीं क्याँ कि मे क्याँ कहना चाहता हु.”
“शायदयह हमारे खून मे हि हैं देव.मेरी औऱ काजल कि माए भि तौ एक् हि लड़के केँ प्रेम मे थि जौ कि उनका पति नहीं थां…”
वोँ खुलकर हँसपड़ी, मैंने अपना चहराऊपर कर उसकीओर देखाआज वोँ कुछ औऱ हि छटा बिखेर रही थि, चहरादमक रहा थां, उज्जवल काया मे कोईदाग हि नहीं थां, आज मैंने उसके त्वचा केँ उसरंग कों गौर किया वोँ सच मे मलीना केँ गुणों सें भरी हुइ थि मगर थोड़ी यूरोपियन थोड़ी भारतीय, वक़्त नें उसके भारतीय गुणों कों अधिक उजागर किया थां, वोँ शर्माती हंसती हौ लाल हौ जाया करती थि, मानोखून उतरआया होँ, गोल गोल गालो औऱ भरेहुए शरीर केँ कारण वोँ बहोत मस्तानी लगा करती थि मगरआज उसकी मासूमियत भि उसके चहरे सें टपकरही थि, उसके कमीज सें छलकते हुए उसकेदो उजोर अपने पूरे सबाब मे मुझे उसका चहरा देखने सें रोकते थें, औऱ उसके जांघो मे भराहुआ रसीले मांसआज मेरा तकिया थां.
उसके हँसने पऱ एक् पंक्ति मे जमेहुए उसके चमकदार दांत औऱ किसी ताजासेब सें लाल चमकदार मसूड़े मेरेदिल कि गहराइयों मे बसगए थें…
मेरीनजर बस उसपरजम हि गई, वोँ इससे शर्मा सि गई थि,
उसके गुलाबी मगरभरे हुएहोठ ऐसे फड़कने लगे थें जैसे जैसे किसीजाम सें मदिरा छलकरही होँ.
मुझसे औऱ सब्र नहीं होँ पाया मे उठा औऱ उसके होठो केँ सबाब कों अपने होठो मे भर हि लिया, वोँ दोहरी हुईँ लेटती गई औऱ आखिर मे उसकाबदन मेरे बांहो मे थां, वोँ चंचल सि शोख खूबसूरत औरतआज किसी समर्पण कि देवी सि मेरे बांहो मे कैद थि …
मेराबदन उसकेबदन केँ ऊपर थां औऱ हमारे होठो एक् दूजे केँ होठो पऱ शिद्दत सें छाएहुए थें, कोई बेताबी कोई बेचैनी कोई भि जल्दबाजी दिल मे नहीं थि, एक् चैन थां उसकेइन मय केँ प्यालों मे जिसे मे शिद्दत सें पीना चाहता थां, पूरीतरह सें पूरी तृप्ति होने तक,,.
वोँ अपनाहाथ मेरे बालो मे फंसाकर मेरासंग देरही थि, ऐसालगा जैसेआज मे किसी औऱ हि शबनम केँ संग थां, वोँ शबनम जोँ मुझे प्रेम करती हैं,
औऱ यह प्रेम जिस्मनी नहीं थां, ऐसालगा जैसे उसकेरूह सें आती हुई कोई प्रेम कि लहरे मेरेमन केँ किसी कोने कों भिगोरही थि,
वोँ एक् अजीब सां सुखदे रही थि, हर अहसास मे वोँ जिंदा सि लगी, किसी भि तरह कां दिखावा औऱ मुर्दापन नहीं थां, मे तौ बसडूब हि जानां चाहता थां औऱ मे डूब हि गय़ा, नां जाने कितने देर तक हम् बस एक् दूजे केँ हि होठो कों पीतेरहे,
नां जानेकब हमारी आंखों नें पानीछोड़ दिया, यह भावनाओ कां शैलाब सां आँ गय़ा थां जिसे हम् दोनो हि रोकना नहीं चाहते थें औऱ रोके भि क्यो…
उसकेबदन कि गर्मी औऱ नरमी नें मुझमें हवस कि कोईआग नहीं जलाई थि, मेराहाथ उसके पुष्ट जांघो कों सहलारहा थां मगर अभि भि हम् बसउसी अज्ञात दरिया मे डूबेहुए थें जिसमे सें बाहर् निकल पाना मुश्किल हौ रहा थां, उसने मुझेकस रखा थां औऱ मे उसके मखमली बदन मे हाथफेर रहा थां,
पता नहीं क्योऐसा लगा कि अब हमारे शरीर केँ बीच कपड़ो कि दूरियां भि नहीं होनी चाहिए, मैंने हि पहल कि औऱ उसनेसंग दिया, हम् कब नंगेहुए हमेपता हि नहीं थां,
दोनो कां जिस्म तपरहा थां, सांसे तेज थि औऱ मेरे लिंग मे भि कसावट थि मगर दुविधा, औऱ उतावलापन अब भि नहीं थां, नां हि मैंने उसके अंदर जाने केँ लिएकोई मेहनत कि नाँ हि उसने मुझे अपने अंदर लेने केँ लिएकुछ किया,
हमारा शरीरबस एक् दूसरे मे रगड़खा रहा थां औऱ थोड़ी भि दूरी बेहद अधिकलग रही थि, यू हि उसके होठो गालो कों चूमता जारहा थां, वोँ भि कभी मेरेऊपर आँ कर मेरेबदन कों चूमती थि, उसकेबाल फैलगए थें औऱ वोँ साक्षात काम कि देवी कां रूपलग रही थि, मोहक इतनी कि आंखे जौ जम गई तोँ फिननजर किनारे हि नहीं होँ पारही थि, फैले हुए काले लंबेबाल औऱ गोरे शरीर मे हल्की हल्की पसीने कि बूंदे, नंगा शरीरचमक रहा थां औऱ पसीने सें थोड़ाभीग कर नरमी कां अहसास देरहा थां, वोँ मेरेकमर मे बैठी थि औऱ उसके गद्देदार कूल्हे कां नरम अहसास मे अपने लिंग पर्र करपारहा थां,
फिन भि कोई उतावला पन नहीं थां.
बस उसकेरूप कों मोहित होकर देखेजा रहा थां, वोँ झुकी औऱ फिन सें हमारे होठ एक् दूजे मे मिलगए, कहने कों कोईबात नहींरह गई थि थां तोँ बस अहसास …
गीले योनि मे कब मेरा लिंग फिसल गय़ा इसकीभनक भि नहींलगी, थोड़ीरगड़ होनेलगी औऱ रगड़ सें उठाने वाले सुखद अहसास नें हमेघेर लियामगर फिन भि दिल मे चैन कि एक् गहरी छाया थि जोँ हट नहीं पाई, लिंग औऱ योनि केँ संगम नें भि हमारे मन कों विचलित नहीं किया थां, बस एक् दूसरे कां होँ जाने केँ अहसास मे हम् डूबेहुए थें, नां जाने कितनी देर नाँ जाने कितने घंटे…
बस यू हि रहे ….
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 63
बारबार कि कोशिशें मगरहार नहीं मानने कां जस्बा, पुरानी आदतों नें कितना जकड़रखा हैं कि उनके चक्कर सें छूटना बहोत हि मुश्किल सां होँ जाता हैं.
मेरे हाथो मे रखीउस सिगरेट कों देखता हुआ मे सोचरहा थां कि केसेकुछ आदतें हमारे जिंदगी कों बर्बाद जौ कर देती हैं औऱ हम् उसे क्यो नहींछोड़ पातेबस इसलिये क्योकि हममें वोँ इक्छा शक्ति नहीं होती, दो दिनों सें मे सिगरेट कों हाथ नहींलगा रहा थां औऱ उसके कारण किसीकाम मे मन नहींजा रहा थां, मगर मे सिखरहा थां कि आखिरउस खलिपन कों केसेभरे जोँ कि सिगरेट नां पीने कि वजह सें होँ गय़ा थां,
“क्याँ देखरहे होँ भाई पीना हैं तोँ पी भि लोहाथ मे पकड़ेहुए हौ आधे घंटे हौ गए “
पूर्वी मेरीगोद मे आकरबैठ गई,
“बससोच रहाहु कि यह एक् छोटी सि चीज मुझे कितना कमजोर महसूस कराती हैं, जब भि मे सोचता हु कि इसे नहीं पीना हैं तौ मे मन करता हैं कि एक् पी लें क्याँ होगा, सोचो मे अपने कों कितना मजबूर पाताहु जब मेरेमन मे यह उठता हैं कि मे इसे नहींछोड़ पाऊंगा, नहीं पूर्वी मे इतना कमजोर नहीं होँ सकता कि एक् सिगरेट मुझे स्वयं कों पीने मे मजबूर करदे, अब तौ बिल्कुल भि नहीं “
मैंने सिगरेट कों तोड़कर फेक दिया, सच मे मन मे एक् मजबूती सि महसूस हुई
जिंदगी मे अगर सबसेबड़ी कामयाबी अगरकुछ हैं तौ वोँ हैं स्वयं पर्र काबूपा लेना…
अपनी मर्जी कां जिंदगी जीना याँ यहकहे कि अपनेसब कामनाओं कों छोड़कर वोँ जिंदगी जीना जौ कि आपकेलिए सही हौ, क्योकि कामनाएं तोँ गलत औऱ सही दोनो कि हि हौ सकती हैं,
पूर्वी खुसी मे मेरे गाले सें लग गई थि,
मे उसके बालो कों सहलारहा थां,
शबनम सें बात करकेआने केँ बाद सें मुझेपता नहीं क्योमगर यह जिंदगी बहोत हि हसीन सां लगरहा थां औऱ मे बसइसे भरपूर जीना चाहता थां औऱ इसकेलिए सबसे पहलाकदम मैंने सिगरेट औऱ शराब सें दूरी बनाकर लिया …
आगर जिस्म अच्छा होगा तौ हि मन शांत होगा औऱ जबमन शांत होगा तौ हि मे इस जिंदगी कों गहराई सें जी पाऊंगा उसे गहराई सें समझ सकूंगा,
मे जिंदगी केँ सबसेअहम चीजों कों समझ औऱ जान पाऊंगा,
यहीबात मेरेमन मे घूमरही थि, मे पूर्वी केँ कोमल जिस्म कों फील करने लगा, देखने लगा कि आखिर मे इस जिस्म कों लेकरहवस सें क्योभर गय़ा थां, मे उसहवस केँ कारण कों जानना चाहता थां मे आंखेबंद किएउस सोर्स कों खोजरहा थां जंहा सें हवस कि काम कि उतपत्ति होती हैं, एक् धार सि बदन मे घूमरही थि जौ कि मेरे लिंग कों कड़ा करने कि कोशिस कररही थि मगर मेरेजगे हुए होने केँ कारण वोँ उसेछू भि नहींपा रही थि, वोँ मेरे लिंग केँ पास हि अटकी हुई थि नाँ हि कही औऱ जारही थि नाँ हि लिंग कों अकड़ने देरहा थां,
मे उसधार केँ संगसंग हि रहा, वोँ मेरे पूरेबदन मे बट गय़ा औऱ मे मेरामन औऱ बदनउस कोमलबदन कों स्पर्श करने केँ बाद भि किसी भि तरह केँ भावना केँ आवेग सें नहीं भरा, इसका मतलबयह नहीं कि भावना सें नहींभरा असल मे उसका आवेग नहीं थां भावना तोँ थि, उसका अहसास भि थां, उसकी गर्मी उसकी हल्की शुष्कता औऱ उसकानरम त्वचा कां अहसास भि होँ रहा थां, पसीने सें भीगा होने केँ कारणआने वाली थोड़ी आद्रता कां भि आभास थां मगर आवेग नहीं थां, मे इस सत्य कों समझपा रहा थां मे इस तकनीक कों समझपा रहा थां, केसेकोई संवेदना हमारे बदन मे उभरती हैं औऱ हम् बस उसके गुलाम बनेहुए उसके पीछे भागने लगते हैं, अगरहमे उसका मालिक होना हैं तोँ उस संवेदना कों आनेदो मगर बिना किसी प्रतिक्रिया केँ उसे जाने भि दोबस देखते रहो दृस्टा बनेहुए …….
औऱ जब वोँ संवेदना समाप्त हौ जाए तोँ मनभर जानां हैं बस एक् अजीब सें अहसास सें एक् शांति सें,,,, मन बिल्कुल शांत,, जिस्म शांत.
बस मे हि होताहु शांत दृष्टा बनाहुआ …….
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अध्याय 64
मे औऱ शबनम दोनो हि इस ख्याल मे थें कि आखिरइस कागज मे लिखा क्याँ हैं ……
यहकोई कोड थां जिसे तोड़ने कि कोशिस मे मेरा एक् घण्टा निकल चुका थां.
आखिर थककर मैंने इसे छोड़ने कि सोची औऱ अपना लेपटॉप निकाल करकुछ बिल कां काम करनेलगा,
मुझेकुछ टाइप करना थां, अचानक मेरा ध्यान फिन सें उसकोड पऱ गय़ा,
मैंने देखा कि हर नंबर केँ आगे u m l लिखाहुआ हैं,
u सें अगरअपर हौ, m सें मिडिल औऱ l सें लोवर तौ अगरयह kyebord मे जमेहुए अक्षरो केँ बारे मे हौ तौ.
मे जल्दी फिन सें उस कागज कों खोलकर अपने सामने लें आया औऱ उसे मिलाने लगा
l5 u9 m3 m9 u8
l7 m1 m6
u3
530
l5 मतलबअगर शुरुआत सें गिनाजाए तोँ लोवररो कां 5वा अक्षर मतलब b
u9 मतलबअपर रो कां 9वा अक्षर मतलब o
मे सब कों फिन केँ जमाते गय़ा औऱ मेरे सामने नया वाक्य बन गय़ा जिसे देखकर मेरी आंखे हि चमक गई,
bodli mhl e 530
बोदली महल मे इस स्थान कों जानता थां, याँ यह बोलो कि मे यंहा हि पलाबढ़ा थां, मैंने जल्दी हि शबनम कों इस बारे मे बतलाया कि मुझे जल्दी हि निकलना होगा, क्योकि यह मेरे देहात सें कुछदूर एक् खण्डर पड़ेहुए स्थान कां नाम हैं, बोदली महल औऱ e 530 कां मतलब हौ सकता थां कि एविनिग केँ 5 बजकर 30 मिनट मे …
शायद इसीलिए काजल अभि निकली थि क्योकि वोँ 4 बजे तक वँहा पहुच जाएगी …
मेरी धरती मे हि कोईउसे कुछराज बतलाना चाहता थां औऱ मुझे इसका आभास अभि होँ रहा थां, जरूर यह निशा सें हि जुड़ाहुआ कोईतार थां जिसको जानने केँ लिए काजल बेताब होँ रही थि, औऱ अब मे औऱ शबनम भि …….
मुझे जल्दी हि बोदली महल केँ लिए निकलना थां औऱ मैंने देरी करना जरूरी थि नहीं समझा, शबनम भि मेरेसंग जाने कि जिद करनेलगी मगर मे उसे अपनेसंग नहीं लेँ जानां चाहता थां क्याँ पता कि वँहाकौन सां नया खतरा मेरे सामने आँ जाए …
मे अब अपनेघऱ केँ रास्ते मे थां, वोँ घऱ जिससे मैंने अपना रिश्ता पूरीतरह सें हि तोड़ लिया थां नाँ जानेकौन सि सच्चाई मेरे सामने आने वाली थि मे बेताबी सें गाड़ीचला रहा थां, मे सालोबाद उस स्थान मे जारहा थां जंहा मैंने अपना बचपन गुजारा थां, मे भविष्य कि कल्पनाओं मे डूबाहुआ बस बोदली महल कि ओर गाड़ी कों तेजी सें भगारहा थां …….
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) - Kahani ab aur interesting hogi
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