रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 52
सोफे मे बैठाहुआ मे अपनी हि सोच मे पड़ाहुआ थां, कि दरवाजा खुला औऱ काजल अंदरआयी वोँ बहोत हि गुस्से मे लगरही थि,
मेरे हाथो मे स्कोच कां एक् पेग थां,
“तुम्हे जरूरत क्याँ थि देव वँहा जाने कि “
मे खामोश रहा औऱ एक् सिप लगाई
“कहो अबचुप क्यूं होँ, जबसह नहीं सकते तोँ दूर हि क्यो नहीं रहते, वँहा बैठेरो रहे थें औऱ यंहा बैठेहुए दारूपी रहे हौ.अबकहो भि “
ऐसालगा जैसे वोँ अबतब रोने हि वाली हौ, मे खड़ाहुआ औऱ उसे अपने सीने सें लगा लिया.
“मे वँहा तुम्हे देखकर उत्तेजित हौ गय़ा थां काजल मुझेमाफ करदो तम्हारे औऱ ठाकुर केँ फोरप्ले कां मे आनन्द उठाने लगा थां, मे इसी ग्लानि सें भर गय़ा…”
उसने मुझे स्वयं सें दूर किया औऱ मेरी आंखे मे झांका वोँ अब मुस्कुरा रही थि
“तुम् सच मे उत्तेजित होँ गए थें”
“हा”मैंने मासूमियत मे सर हिलाया
वोँ जोरो सें मेरेगले सें लग गई
“वाओ यानी तुम् जब तक नहींझड़े तब तक तुम्हे सभीकुछ अच्छा लगा “
मे फिन सें सर हिलाया
वोँ बहोत हि खुस होँ गई
“यानी तुम् रेडी होँ बस इतना करना कि अब कि बार झड़ना नहीं “
मे आश्चर्य सें उसकीओर देखने लगा
“मे आज हि ठाकुर कों फिन सें बुलाती हु, तुम् तौ जानते हौ होंगे कि उसने मुझे एक् तोहफा दिया थां “
मे बिल्कुल हि शॉक हौ गय़ा
“तुम् पागल होँ गई हौ नहीं नहीं मे यह नहींकर सकता “
उसने प्रेम सें मेरे गालो कों किस किया
“मेरीजान तुम् तौ यह पहले भि कर चुके हौ “
हम् दोनो हि थोड़ीदेर तक चुप थें औऱ एक् दूसरे कि आंखों मे देखते रहे
“मे जानती हुयह कितना डरावना हौ सकता हैं मगर मुझे उम्मीद हैं कि तुम् इसे इन्जॉय करोगे, सोचोआज तौ तुम्हे पता नहीं थां कि मे क्याँ करने वालीहु.मगरअगर यह तुम्हारी इजाजत सें होँ तोँ बात हि कुछ औऱ होगी.”
काजल कि बातो सें मेरेदिल सें खून निकल गय़ा थां
मे केसे अपनी पत्नि कों किसी दूसरे कां बैडगरम करने कि इजाजत दे सकता थां
“यह मे केसेकर सकताहु “मे भड़क गय़ा
“तुम् हि यहकर सकते होँ देव “
“आखिर केसे “
मे चिंतित थां
“बस तुम् कहदो कि हमारे बीच कां प्रेम इससेकम नहीं होगा मे दुनिया केँ संगसो सकतीहु अगर तुम् बोलो “
मे बौखला गय़ा थां
“तुम् तौ वैसे भि सोरही होँ औऱ उसकेमजे भि लें रही होँ, क्याँ मैंने यह नहीं देखा थां कि तुम् केसे सिहररही थि क्याँ तुम्हारे मजे सें लिएगए हुए सारे सिसकियां मैने नहीं सुनी हैं, मे जानता हु कि तुम् मजे लें रही थि औऱ मे यह भि समझने लगाहु कि तुम् अपनेमजे केँ लिए मुझे cuckold कि ओर धकेलरही होँ …”
मे गुस्से मे तमतमा गय़ा थां
“मतलब हैं कि तुम्हे यह नहीं लगता कि मे तुमसे प्रेम करतीहु “
वोँ भि भड़क गई थि
“नहीं नहीं लगता कि तुम् मुझसे प्रेम करती हौ, तुम् तौ अपने बदले औऱ बदन कि आग मे जलरही हौ औऱ इसमें तुमने नां केवल मुझे घसीटा हैं बल्कि मेरी बहनों कों भि घसीट लिया, क्याँ मुझेयह नहींपता कि निशा कि इस हालत कि जिम्मेदार भि तुम् हि होँ “
मेरेमुख सें निकले कड़वे शब्द उसके सीने कों छलनी करनेलगे थें
“तूम अपनी बहनों केँ बारे मे सोचरहे हौ देव, तुम् जौ कि स्वयं हि अपनी बेहन केँ संग सोता हैं …”
मैंने एक् जोर कां तमाचा उसकेगाल मे लगा दिया औऱ एक् गहरा सन्नाटा कमरे मे छा गय़ा थां
मेरी आंखों सें आंसू कि बूंदे निकल गई यह पहलीबार थां जब मैंने काजल कों मारा थां, उसका सफ़ेद चहरालाल होँ चुका थां
वोँ मुझेभरे हुए नयनो सें देखरही थि …
“क्याँ यहसच नहींदेव कि तुम् मोहनी औऱ शाबनम केँ संग भि सो चुके होँ”
मे सन्नरह गय़ा,
“औऱ यह भि क्याँ सच नहीं कि अगर तुम्हे मौका मिले तौ तुम् दूसरी लड़कियों केँ संग भि सो सकते होँ …”
हा जौ काजल नें कहा थां वोँ सच मे बिल्कुल हि सच थां
“देवजब तुम् इसमें आनंद लें सकते होँ तोँ मे क्यो नहींबस इतनी सि बात तुम् मुझेबता दो “
मे फिन सें चुप हौ गय़ा
“तुम् पैसे औऱ पावर केँ लिएयह सभीकर रही हौ “
मे धीरे-धीरे हि सहीमगर बोल पाया
“हा हाहा “वोँ जोरो सें हँसी
“अगर मजे केँ संगसंग यह भि मिलता हैं तौ क्याँ गलत हैं “
तार्किक रूप सें उसकीबात भि सही थि
“मगर तुम् मेरी पत्नि हौ औऱ मैंने जोँ भि किया वोँ तुम्हारे बाद कियाजब मुझेपता चला कि तुम् ऐसा करती हौ, शुरुवात तुमने कि थि, औऱ तुमने मुझसे झूठ बोला “
“कौन सां झूटदेव “
“यही कि …….यही कि …”
मे बुरीतरह सें कांप गय़ा मुझेकोई झूटयाद हि नहींआया थां
“मगरयह धोखा तोँ थां, तुमने झूट नहींकहा मगर तुमने मुझेकुछ बतलाया भि तौ नहीं थां …….”
वोँ मुझेदेख करहँस रही थि मानो मुझे चिढ़ारही होँ
“देव मेरीजान तुम् सच मे भोले हौ “
मे सच मे पगला गय़ा थां
“मैंने तुम्हे धोखे मे रखा थां मगरअब तोँ मे तुम्हे सभीबता रहीहु.अगरवफ़ा हैं तौ इतना करना कि मेरासंग दो “
“किसबात कां संग चुदवाने कां “
वोँ फिन सें खिलखिला उठी
“हा चुदवाने कां, दूसरे सें चुदवाने कां तुम्हारी परमिशन केँ संग “
उसकी आवाज़ मे एक् क्रोध साफझलक रहा थां
उसने अपनाबेग उठा लिया औऱ वोँ बाहर् जानेलगी
“मे वहीजा रहीहु अपना तोहफा ठाकुर सें पहनने.तुम्हे अगर देख्ना हैं तोँ आँ जानां, औऱ हा एक् चीज औऱ मुझे बहोत मज़ाआने वाला हैं ठाकुर कां लन्ड बहोत हि बड़ा हैं तुमसे भि बड़ा…”
वोँ गुस्से मे जाते जाते दरवाजे कों जोर सें बंदकर गई औऱ मे बसयही सोचता रहा कि अब क्याँ करू ……….
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अध्याय 53
कभी जीवन इतनी शिद्दत सें लेती हैं कि हमेसमझ हि नहींआता कि हमारी लीजारही हैं …
यही मेरेसंग भि होंरहा थां जीवन मेरी शिद्दत सें लें रही थि औऱ मे बसइसी सोच मे पड़ाहुआ थां कि मे क्याँ करू.
मे फोन उठाकर हरिया कों काल किया.
“जीसर बोलिये “
“हरिया वोँ जौ रांड तेरे फॉर्महाउस मे बारबार आती हैं वोँ मेरी पत्नि हैं, ”
मे नशे मे थां औऱ मे बोल गय़ा
वोँ चुप थां बहोत देर तक बसचुप थां
“हैल्लो “
“हासर “
“तूने सुना नाँ मैंने क्याँ कहा “
“सुन लियासर औऱ वोँ अभि यंहाआयी हुई आई किसी कां प्रतीक्षा कररही हैं “
मे जोरो सें हँसपड़ा मुझमें इतनी ताकत भि नहींबची थि कि मे गाड़ीचला सकू मे बुरी बोतल हि पी गय़ा थां,
“वोँ साला ठाकुर आने वाला होगा, ”
:इंस्पेक्टर ठाकुर ??”
“हावही “
“जीसर अपनेसही कहा उन्होंने हि फिन सें मुझे मोबाइल करकहा थां कि वोँ आने वाले हैं औऱ शराब कि व्यवस्था उनके कमरे मे कर दि जाए “
“तौ तुमने कर दि क्याँ “
मे टुन्न थां
“हासरकर दि एक् बोलत शेम्पियन कि औऱ औऱ बोतल स्कोच कि रखवा दि हैं मेडम अभि हाल मे हि उनकावेट कररही हैं “
“मेडम यानी रंडी.हैं नां “
मे फिन सें जोरो सें हँसपड़ा मगरआगे सें कोई भि रिप्लाय नहींआया
“क्याँ हुआ तुँ चुप क्यो हैं “
“सर क्यो दर्दझेल रहे होँ तलाकदो औऱ काम समाप्त करोअगर आप् यहसभी जानते हौ तौ आप् उनकेसंग हैं हि क्यो ??”
उसका सवाल मेरेदिल मे घुस गय़ा थां
“क्योकि मे उससे प्रेम करताहु “
“यह कैसा प्रेम हैं ??”
वोँ भि बड़ा बेचैन होँ गय़ा थां
“छोड़ दोस्त.तुँ बहोत अच्छा व्यक्ति हैं तुम को मे उस फार्महाउस कों उपहार मे दूंगा यह मेरा वादा हैं तुझसे …”
मे इतना हि बोलकर मोबाइल रख दिया, मे सामने देखा तौ दंग हि रह गय़ा
सामने मेरी बेहन पूर्वी खड़ी हुईँ मेरीबात कों सुनरही थि, मे इतनेनशे मे थां कि मुझेसभी कुछ धंधला दिखरहा थां
वोँ स्तब्ध खड़ी हुईँ थि, उसे देखकर मुझे बहोत हि प्रेम आया
“मेरीजान आँ जा आँ मेरेपास बैठ “
वोँ मेरेपास आकरबैठ गई
“कबआयी तुँ “
मैंने उसे अपने सीने सें लगा लिया
“अभि जब आप् बातकर रहे थें “
वोँ रोरही थि मुझे अभि पताचला थां
“क्याँ हुआ तुम्हें रो क्योरही हैं “
“आप् इतना क्योपी लिए हौ भाई औऱ भाभी कों क्याँ हुआ, वोँ कहा गई हैं औऱ क्याँ ऐसा होँ गय़ा कि आप् उनके बारे मे ऐसाबोल रहे हौ “
शायद वोँ सभीकुछ सुन चुकी थि
मे पूरेनशे मे हि थां औऱ मे उससेझूठ भि नहींबोल पाया
“वोँ अपने दोस्त सें चुदवाने गई हैं “
पूर्वी कां क्याँ रिएक्शन थां मुझे नहींपता क्योकि मुझेसच मे कुछ भि सही नहींदिख रहा थां
मगर उसने अपनाहाथ मेरे गालो पऱ रख दिया
“आई लवयु भाई “
मैंने उसे देखा वोँ थोड़ी धुंधली सि मुझे दिखाई दि, असल मे 2-3 सूरत मेरे सामने घूमरही थि मैंने उसे पकड़ा औऱ उसके होठो मे अपने होठो कों मिला दिया थोड़ीदेर किस करने केँ बाद
“आई लवयु मेरीजान “
उसके रोने कि आवाज़ मुझे सुनाई देरही थि
“भाई अपने बहोत हि पीली हैं प्लीज चलिएसो जाइये “
“नहीं मे बिल्कुल भि नहीं पियाहु, अभि तोँ मुझे अपनी बीबी कों चुदवाते हुए देख्ना हैं, मे फार्महाउस जाऊंगा औऱ वँहाजब मेरी पत्नि कि चुद ठाकुर माररहा होगा तोँ मे उसे देखकर अपना हिलाऊंगा.हाहाहा मे एक् वोँ क्याँ कहती हैं काजल cuckold हा मे तोँ एक् cuckold हु मेरा जन्म भि तोँ इसी केँ लिए हि हुआ हैं मेरी बेहन कि मे अपनी पत्नि कों जिसे मे विवाह कर लाया थां 7 वचनकर केँ लाया थां, उसे मे दूसरे केँ खाट मे देखने केँ लिए हि तोँ जन्मा हु…”
मे फुटफुट कर रोनेलगा पूर्वी नें मुझे अपने सीने सें लगा लिया थां …
वोँ भि रोरही थि औऱ मे भि …
एक् लड़की औऱ उसकी एक् जिद नें हम् दोनो कों रोने मे मजबूर कर दिया थां.
मे जानता थां कि यह मेरी बेहन हैं वोँ बेहन जिसे मे दुनिया मे सबसे अधिक प्रेम करताहु, वोँ मेरी बच्ची थि मेरी छोटी बेहन थि मगर मे उससेइस तरह कि बातेकर रहा थां
अब मुझेपता चला थां कि मे दुनिया कां सबसे किश्मत वाला व्यक्ति हु लोगो केँ पास गर्लफ्रेंड्स होती हैं बीबी होती हैं, मेरेपास मेरी बहने हैं जिनसे मे दुनिया कि सभी बातेकर सकताहु.
मुझेआज पूर्वी केँ सीने सें लगकरलगा कि मेरी दुनिया कितनी हसीन हैं मेरेपास प्रेम करने वालो केँ कमी नहीं हैं,
काजल नें अगर वोँ फैसला किया जिसके कारण मे दारू केँ नशे मे डूब गय़ा तौ वोँ भि मेरे हि कारण किया थां वोँ तोँ बेचारी सभी छोड़कर मेरेपास आँ रही थि मैंने हि उसे उकसाया उससे तमीज सें पेश नहींआया थां,
गलतसही कां फैसला करने वाला हैं कौन ???
मे भि तौ गलत थां याँ सही थां, वोँ भि तौ गलत थि याँ सही थि …
औऱ यह मेरी बहने हैं मेरीजान हैं, जौ मेरीहर गलतियों कों सहकर भि मुझसे प्रेम करती हैं.
मैंने पूर्वी केँ माथे कों चूमा.
औऱ उठकरखड़ा हुआ.
“मुझे फॉर्महाउस जानां हैं “
पूर्वी जरूर चौकी होगी
“भाई आप् पागल होँ गए हौ क्याँ देखो अपनी हालतऐसे मे गाड़ी केसे चलाओगे.”
“तुँ चलाएगी मुझे वँहा लें जा मे काजलदो देख्ना चाहता हु.”
पूर्वी जोरो सें चीखी
“भाई आप् पागल हौ गए होँ क्याँ, नहीं आप् मेरेपास रहोगे “
वोँ रोनेलगी थि जिसकी आवाज़ मुझ तक पहुचरही थि
“भाई प्लीज् “
“प्लीज् मेरीजान समझ मेरीबात कों मे दुखी नहींहु, मुझेसमझ मे आँ गय़ा हैं कि प्रेम क्याँ होता हैं, प्रेम शरीर कों नहीं देखता वोँ देखता तोँ बसमन कों औऱ सचमान तेरी भाभी दूसरे केँ संग भि खाट मे उतनी हि गरम हैं जितनी मेरेसंग होती हैं …”
मे उठकरकर कि चाबी निकाल कर बाहर् जानेलगा,
“भाई आप् क्याँ बोलरहे होँ वोँ आपकोपता नहीं हैं आप् सच मे पियेहुए हौ “
“मे क्याँ बोलरहा हु मुझेपता हैं औऱ मे किससे बोलरहा हुयह भि मुझेपता हैं., तूँ मेरीजान हैं दुनिया मे अगर मे सबसे ज़्यादा प्रेम किसी सें करताहु तौ वोँ तूँ हि हैं …”
मैंने पूर्वी केँ गालो मे एक् किस किया
“औऱ मे चाहता हु कि तूँ कर ड्राइव करतेहुए वँहा लेँ जा जंहा काजल ठाकुर केँ संग हैं, तुम्हारी तरफ अजीब जरूर लगेगा कि तेरा भाई पागल हौ गय़ा हैं मगरसच मे जान मे पागल नहीं हूं मे तोँ बस दीवाना होँ गय़ा हु तेरा, निशा कां, काजल कां, शाबनम कां औऱ थोड़ा थोड़ा रश्मि औऱ मोहनी कां भि.वोँ जोँ भि करेमगर मुझे तोँ वोँ सभी हि अच्छा लगता हैं …”
दारू मेरेदिल कि बात कों जुबान पर्र लारही थि मगर पहलीबार मैंने अपनी बेहन केँ होठो मे एक् मुस्कुराहट देखी थि वोँ थोड़ी सि हँसी
“आप् आजसच मे पागल हौ गए होँ, बस चुपचाप बैठना चलो मे आपकेसंग हु देखते हैं आज आप् क्याँ तूफानी करते होँ “
वोँ मेरेगले सें लगकर मुझसे चाबी लेकर मेरे सामने चलनेलगी औऱ मे उसके पीछेलग गय़ा ….
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अध्याय 54
पूर्वी केँ संग बैठाहुआ मे अपने मे मगन होकर फॉर्महाउस कि तरफचल दिए थें, गाड़ी अपनी रफ्तार सें चलरही थि.
“पूर्वी वोँ तेरे भाभी कि पेंटी खोलकर नई पेंटी पहनाने वाला हैं.मुझे क्याँ करना चाहिए …”
मेरे प्रश्न सें नहीं पूर्वी मेरेबात करने केँ तरीके सें चौकी होगी, इतना खुलकर मैंने उससेकभी बात नहीं कि थि
“मारदो उसे जौ भाभी पर्र हाथ डाले”
पूर्वी नें दृढ़ता सें कहा
“अच्छा मे भि तौ यही चाहता हु मगर….मगर तेरी भाभी अपने मर्जी सें वँहा गई हैं उसका क्याँ करू “
वोँ भि सोच मे पड़ गई थि
“दोनो कों हि मार डालो.”
उसने एक् सपाट सां उत्तर दिया.मेरी बेहन.
मे उसेकिस करने केँ लिए उसकेपास गय़ा औऱ उसके गालो मे किसकर लिया
“भाई सीधे बैठो नाँ क्याँ कररहे हौ “
वोँ भि हड़बड़ाई
“मगर मुझे भि मज़ा आँ रहा थां जब वोँ तेरी भाभी केँ संगयह कररहा थां तब क्याँ करू “
वोँ सोच मे पड़ गई बहोत देर तक वोँ कुछ भि नहींबोल सकी
“बोल नां क्याँ करू “
मे अभि भि नशे मे थां औऱ हिलरहा थां
“जौ आपकी मर्जी वोँ करो मुझेमत पूछो “
वोँ गुस्से मे बोलीं औऱ मे हँसपड़ा
क्याँ जीवन हौ गई हैं जिन्हें मुझे सम्हालना थां वोँ मुझे सम्हाल रहे थें
फॉर्महाउस आते हि मे एक् लोहे कां रॉड अपने गाड़ी सें निकाल कररख लिया औऱ बाहर् मुझे हरिया मिल गय़ा.
“ठाकुर आया क्याँ “
“सर आप् बहोत नशे मे हैं प्लीज् अंदरमत जाओकुछ गलत हौ गय़ा तोँ “
“बे तूँ चिंता क्योकर रहा हैं मे सभी सम्हाल लूंगा कुछ नहीं होगा, ठाकुर आया कि नहीं “
“अभि आया हैं “
“तौ हट सामने सें “मे लड़खड़ाता हुआ गार्डन मे पहुचा मेरेसंग हि संग पूर्वी भि चलरही थि मे रॉड कों जमीन मे घसीटरहा थां जैसे मे कोई साउथ कां हीरो हु.मगर मे क्याँ करने वाला थां यह तौ मुझे भि नहींपता थां.
मेरी बेहन नें कहरखा थां कि दोनो कों मारदो मगर मे अभि भि सीरियस नहीं थां क्योकि मुझे स्वयं भि होशं नहीं थां कि मैंने क्याँ सुना थां औऱ मे क्याँ करनेजा रहा थां …
मे वँहा पहुचा जंहा मैंने स्थान बनारखी थि अंदर देखने केँ लिए
, पूर्वी मेरे बाजू मे खड़ी थि.असल मे मे खड़ा भि नहीं होँ पारहा थां मे अब भि लड़खड़ा रहा थां
मे अंदर झांका औऱ खिलखिला उठा
“देख तेरी भाभी क्याँ कररही हैं “
पूर्वी अंदर झांकने लगी
अंदर काजलखाट मे लेटी हुईँ थि औऱ ठाकुर उसके साड़ी सें खेलरहा थां
“भाई मारदो इन दोनो कों “
पूर्वी कांपरही थि, मे उसे देखकर उसेफिन सें उसके गालो मे किस किया
“रुक नाँ अभि तौ शो शुरुआत हुआ हैं देखने तौ दे कि आगे क्याँ क्याँ होता हैं “
पूर्वी शांत होँ गई मे फिन सें देखने लगा
वोँ काजल केँ कपड़ेखोल रहा थां मुझेयाद आया कि मेरेपास हेडफोन हैं मैंने उसे अंदरलगे हैं डिवाइस सें कनेक्ट किया औऱ एक् पूर्वी केँ कानो मे भि डाल दिया.
डर क्याँ होता हैं जैसे मुझेपता हि नहीं हौ मे बिल्कुल हि निडर हौ गय़ा थां यह शायद मेरे द्वारा पी गई स्कोच कि बोतल कां कमाल थां …
“अहह जल्दकरो नां “
काजलमचल रही थि
“यह साला तेरी साड़ीखुल क्यो नहींरही हैं “
ठाकुर बहोत हि जल्द बाजी मे थां आज हि उसने थोड़ी देरी कि थि औऱ काजल कां पूरामूड हि बदल गय़ा थां अब वोँ देरी नहीं करना चाहता थां
जैसे तैसे वोँ साड़ी कों खोल हि गय़ा
काजल अभि मेरे सामने आधी नंगी लेटी हुइ थि उसके जिस्म मे साड़ी नहीं थि वोँ ब्लाउज औऱ पेटीकोट मे अंदर लेटी हुई थि औऱ ठाकुर पूरा नंगाखड़ा हुआ थां उसकाबड़ा सां लिंग जौ सच मे बहोत बड़ालग रहा थां वोँ पूरे लंबाई मे खड़ाहुआ थां.
अचानक हि वोँ उसके पेटीकोट सें खेलने लगा औऱ उसके नाड़े कों निकालने कि जद्दोजहत करनेलगा.
काजल नें अपनासर घुमाया औऱ हमारी ओर देखा जैसेहमे देखरही हौ, मैंने यहीसोच करयह खिड़की चूस कि थि क्योकि इसमें जोँ कांचलगा थां उससेदिन मे अंदर आहिस्ता देखाजा सकता थां मगर अंदर सें बाहर् नहीं देखाजा सकता थां क्योकि अंदर प्रकाश ज़्यादा औऱ बाहर् प्रकाश कम होता थां, मगर काजल हमारी ओरऐसे देखरही थि जैसेउसे पता थां कि मे उसेइस खिड़की सें देखरहा हु, वोँ मुस्कुराई …
ठाकुर अभि भि काजल केँ पेटीकोट केँ नाड़े मे बिजी थां मगर काजल नें अपनाफोन अपने हाथो मे लेँ लिया औऱ कुछ टाइप करनेलगी जोँ मेरेपास संदेश बनकरआया
“देखने कां मज़ा हि कुछ औऱ हैं अब देखो औऱ इन्जॉय करो “
यह संदेश पूर्वी नें मुझे पड़कर सुनाया थां क्योकि मुझेसाफ दिख हि नहींरहा थां
काजल हमारी ओर देखकर फिन सें मुस्कुराई
“भाई यह होँ क्याँ रहा हैं ??भाभी कों पता हैं कि आप् उन्हें देखरहे हैं …”
वोँ बेचारी मेरी छोटी सि गुड़िया बुरीतरह सें कन्फ्यूज़ थि
“हा वोँ मुझसे क्रोध हैं औऱ यंहाचली आयी “
“आप् पागल होँ याँ वोँ पागल हैं यह हौ क्याँ रहा हैं ….”
“तुँ देख नाँ औऱ फिन बताना क्याँ करू तूँ जौ बोलेगी वही मे करूँगा दोनो कों मार दूंगा याँ स्वयं मर जाऊंगा”
मे उसे सामने कर दिया औऱ स्वयं उसके पूछेसट लेँ नजारा देखने लगा
अंदर कामाग्नि मे जलाते हुएदो जिस्म आपस मे गुथेजा रहे थें, ठाकुर उसका नाडा खोलने मे कामयाब हौ गय़ा थां औऱ अबदेर नां करतेहुए काजल केँ ऊपर स्वयं गय़ा थां, जैसे मे भि उससीन कां हि एक् हिस्सा बन गय़ा थां मे आंखे गड़ाएहुए उसेदेख रहा हैं जैसे कि मे कोई मूवीदेख रहाहु, मेरे सामने मेरी बेहन थि मेरी छोटी बेहन जौ अब तक शायद कन्फ्यूज़ हि थि कि यह हौ क्याँ रहा हैं, वोँ शायद अपने कों हि कोशरही होगी कि वोँ क्योउस वक़्त वँहा गई …
मे पीछे सें उससे चिपका हुआ थां औऱ मेराहाथ खिड़की सें लगाहुआ थां, मेरे दोनो हाथो केँ बीच पूर्वी समाई हुई थि, उसने एक् बार मुझे बुरा सां मुह बनाकर देखा, मे मुस्कुराते हुए उसके गालो मे किसकर गय़ा, वोँ फिनमुह बनाते हुएआगे देखने लगी, उसे मुझपर बहोत क्रोध आँ रहा होगामगर वोँ मेरे प्रेम केँ कारण हि मुझसे कुछकह नहींपा रही थि …
अंदर कां नजारा गरम होँ रहा थां …
ठाकुर काजल केँ ऊपरचढ़े हुए पूरे ताकत सें उसके गालो कों खारहा थां, उसके मोटे होठो नें काजल केँ नरम गालो कों पूरीतरह सें भिगो हि दिया थां, उसके गाललाल पड़गए थें वोँ थोड़ा रुककर फिन सें काजल केँ होठो तक आया,
“हम्म्म्म “
काजल नें एक् समय कि देरी किये बिना हि उसके होठो कों अपने होठो मे भर लिया औऱ उसे चूसने लगी, काजल केँ लालनरम मुलायम होठो कां स्वाद ठाकुर पूरे तन्मयता सें लें रहा थां, दोनो केँ थूक सें मिली आवाज़ हमारे कानो मे पड़रही थि,
काजल कां उज्ज्वल बदन ठाकुर केँ काले जिस्म मे धंसाजा रहा थां,
जैसे हि दोनो कां चुम्मन टूटा दोनो नें एक् दूसरे कि आंखों मे देखा दोनो हि मुस्कुरा रहे थें.
“तोँ अब तोहफा खोलने कि इजाजत हैं “
ठाकुर कां लहजाबड़ा हि शांत थां
“आपकी हि हु …”
काजल नें मादकता सें कहा, जैसे मेरेदिल मे जलनभर गय़ा वही मेरे लिंग मे खून.
काजल कि बात सुनकर हि ऐसालगा जैसे कि मेरा लिंग किसी लोहे कि रॉड सां हौ गय़ा हौ औऱ वोँ तनाव बर्दास्त नहीं हौ रहा थां, मे नशे मे थां फिन भि वोँ शब्द मेरे कानो मे गूंजरहा थां.
मैंने अपनेकमर कों थोड़ाआगे धक्का दिया मुझेनरम नरम गद्देदार चीज मिली जिससे मेरे लिंग कों शांति मिली,
“आउच भाई यह क्याँ कररहे होँ “
पूर्वी नें पीछे मुड़ते हुए मुझसे कहा, मगर उसकी आंखे वैसी नहींरह गई थि, उसकी सांसे थोड़ी फूली हुईँ थि, वोँ मुझे गुस्से सें नहीं नाराजगी सें देखरही थि.
“सॉरी बेहन “मे इतना हि बोल पाया क्योकिं मेरी सांसे भि फूली हुइ थि
मे नशे मे जरूर थां मगर इतना नहीं कि अपनी प्यारी बेहन कों नां पहचान सकू
मैंने अपना लिंग थोड़ा पीछे खिंचा, मुझसे सहन तौ नहीं होँ रहा थां क्योकि सामने नरम गद्दा थां जिसमे मे आसानी सें अपना लिंगरगड़ सकता थां मगर वोँ गद्दा मेरी स्वयं कि बेहन कां थां, औऱ उस बेहन कां जिससे मे बेहद प्रेम करता थां.
मे स्वयं कों सम्हालकर अंदर देखने लगा, ठाकुर उस तोहफा सें ब्रा बाहर् निकाल कर हिलारहा थां वोँ उसेचूम रहा थां जैसे फुटबॉल कां वर्डकप होँ…
उसके आंखों मे खुसीनाच रही थि होँ भि क्यो नां मन मांगी मुराद जौ साले कों मिलरही थि,
वोँ काजल केँ पासआया औऱ हाथ पीछे लेजाकर उसकी ब्रा कों खोलने लगा, देखते हि देखते काजल केँ बड़े औऱ भारी मम्मों नंगे होकरझूम गए, वोँ कुछदेर तक एक् टकउसे हि देखता रहा जैसेकोई आकर्षण उसे आकर्षित कररहा हौ वोँ उनकीओर खिंचा जारहा थां.
उसने अपने होठो सें निप्पल कों भर लिया औऱ जोरो सें चूसने लगा,
“अहह ठाकुर जी “
काजल कि मादक आवाज़ निकली औऱ वोँ सिसकियां लेनेलगी मगर थोड़ी हि देर मे उसने हमारी खिड़की कि ओर देखा उसके होठो मे एक् कमीनी सि मुस्कान थि, हम् दोनो कि हि आंखे मिली जैसेउसे पता थां कि मेरी आंखेकहा पऱ हैं,
उसकी आंखे मुझेदेख रही थि औऱ हाथ ठाकुर केँ सर पऱ थां, उसकामुह मजे मे खुलाहुआ थां जिससे हल्की हल्की सिसकियां निकलरही थि,
यह दृश्य मेरेलिए सहन सें बाहर् हौ रहा थां मे उत्तेजना केँ ऐसे शिखर मे थां कि मुझेलगा जैसे मे अबझर जाऊंगा मगर मैंने अभि तक अपने लिंग कों हाथ भि नहीं लगाया थां औऱ नाँ हि किसी औऱ चीज सें रगड़ा थां शायदइसी लिए मे अभि तक बनाहुआ थां.
मगरआगे मेरी बेहन थि मे दारू केँ नशे मे उसकेसंग कुछगलत तौ नहींकर सकता थां मगरअब मुझे एक् औऱ भि नशाचढ़ चुका थां, हवस कां नशा …
मे डरतेहुए अपनेकमर कों आगे किया मेरे लिंग नें उसके गड्ढे पर्र एक् रगड़खाई औऱ
“अहह “मुझे इतनाचैन मिला, इस बार पूर्वी नें कोई विरोध नहीं कियामगर मे बस एक् हि रगड़ केँ बाद हि रुक गय़ा थां,
इधर ठाकुर काजल केँ निप्पल्स कों किसी बच्चे जैसे चूसेजा रहा थां लगरहा थां जैसेकोई बच्चा बहोत भूखा होँ औऱ उसेमा केँ वक्षो सें दूधमिल गय़ा होँ, काजल भि उसके बालो कों सहलाकर उसे अपने वक्षो कां रस पिलारही थि, मगर उसकीनजर अब भि मेरीतरफ हि थि,
ठाकुर कभीकभी उसके निप्पल्स कों काट भि लेता थां तब काजल कि आंखेबंद होँ जाती थि औऱ वोँ एक् सिसकी लेकर ज़्यादा मुस्कुरा कां मुझे देखती थि,
उसकीहर मुस्कान सें मे पागल होँ जाता थां औऱ कमर कों यदाकदा हिला हि देता थां, पूर्वी कोई हंगामा तोँ नहींकर रही थि मगर एक् बार उसने भि अपने गड्ढे कों मेरे लिंग मे रगड़ दिया थां,
वोँ भि जवान थि औऱ नईनई जवानी तोँ औऱ भि खतरनाक होती हैं उसे सम्हालना औऱ भि मुश्किल होता हैं, पूर्वी कि भि हालतकुछ ऐसी थि, वोँ खिड़की सें नजर हि नहींहटा पारही थि…
इधर
“आउच बदमाश हौ आप् “
ठाकुर नें काजल केँ निप्पल कों जोरो सें काट लिया थां जिससे काजल कां पूरा ध्यान उधर हि चला गय़ा
“हाहाहा “ठाकुर अपनी बत्तीसी दिखाकर हँसने लगा
औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे चूमता हूं नीचे कों बढ़ता गय़ा, शायद वोँ भूल हि गय़ा थां कि उसे क्याँ पहनाना हैं.
नीचेआकर वोँ काजल केँ पेट मे रुका औऱ अपनीजीभ सें उसकी नाभि कों भिगोने लगा.
काजलफिन सें मचलने लगी थि मगर गुदगुदी मे
“नहीं नहीं नाँ गुदगुदी हौ रही हैं “दोनो हि हंसेजा रहे थें.
ठाकुर फिन नीचेआया औऱ काजल कि पेंटी केँ आसपास केँ जांघो कों चूमने लगा, वोँ फिन सें मदहोश होँ गय़ा थां औऱ थूक सें उसकी जनघो कों भिगोरहा थां,
“अहहअहह अहह “
काजल कि आंखेबंद होनेलगी थि वोँ बस सिसकियां लें रही थि औऱ उसकासर पकड़ेहुए अपनी पेंटी केँ बीचों बीचफसी हुई योनि मे उसकासर सरकने कि कोशिस कररही थि मगर ठाकुर अभि भि उसके जांघो मे बिजी थां.
वोँ सरकता हूं उसके योनि केँ लगभगआया जोँ कि रस कि धार सें पूरीतरह सें भीग चुका थां,
उसने हल्के सें पेंटी केँ सिरे कों सरकाया, औऱ गोर सें देखने लगा,
वोँ साला काला सां, शैतान सां इंसान मेरी नाजुक कली केँ कोमल गुलाबी योनि कों निहार रहा थां, काजल उसके रिएक्शन पर्र हल्के हल्के मुस्कुराने लगी औऱ फिन सें मेरीओर देखी.
उसके चहरे मे किसी विजेता सि मुस्कान खिल गई थि, वोँ मुझेऐसे देखरही थि जैसे कहनाचाह रही थि कि देखो मुझे चाहने वाले कितने हैं,
मे मचल सां गय़ा औऱ इसबार मेरे लिंग नें कोई भि झटका नहीं मारा,
अंदर ठाकुर नें अपनीजीभ काजल कि योनि मे लगा दि औऱ उसकारस पूरी तनमयता सें पीने लगा, काजल कि योनिरस सें इतनीभर चुकी थि कि वोँ उसे चुहकरहा थां औऱ इसकी आवाज़ हमारे कानो तक भि पड़रही थि,
इसबार मे थोडा पीछेहुआ थां लकिन पूर्वी नें अपनेकमर कों थोड़ा पीछेकर मेरे लिंग पर्र ठिका हि दिया, वोँ भि लय सें अपनीकमर हिलारही थि, मेरा अकड़ाहुआ लिंग उसके गड्ढे मे समाकर औऱ भि विकराल रूप लें रहा थां मे भि मजे केँ गर्त मे जारहा थां …
वँहा काजल अपनीकमर उचकाकर अपनी योनि कों ठाकुर सें चुस्वा रही थि औऱ यंहा मेरी प्यारी बेहन अपनीकमर हिलाकर मेरे लिंग कों अपने चूतड़ों मे रगड़ने कि कोशिस कररही थि ….
सब स्थान बसहवस कां साया फैलाहुआ थां औऱ रिस्तो कि मर्यादा तारतार होँ रही थि ….
ऐसे मर्यादा कि फिक्र भि किसे थि, मे नशे मे थां औऱ बाकी तीनो भि हवस केँ नशे मे डूबेहुए थें, मेराहाथ आगे जाकर पूर्वी केँ कमर कों पकड़ लिया, औऱ वोँ मुझेसट गई,
अब मेरेहाथ पूर्वी केँ जिस्म पर्र बेफिक्र सें चलने लगे, हमारी निगाहे खिड़की केँ अंदर थि जैसे वँहा काजल नहीं मे औऱ पूर्वी हि थें, हम् उस दृश्य मे पूरेमगन होँ चुके थें,
उधर काजल केँ बदन केँ आखरी कपड़े कों भि निकाला जा चुका थां औऱ वोँ गहरी गहरी सांसे लें रही थि, मे देखरहा थां कि ठाकुर कां अकड़ाहुआ लिंग फुंकार माररहा थां, वोँ काजल कि गीली योनि कों बड़े हि लालची नजर सें देखरहा थां, वोँ भूल हि चुका थां कि उसे पेंटी पहननी थि मगरअब वोँ बात हि नहींकर रहे थें, वोँ काजल केँ ऊपर आँ गय़ा थां दोनो हि नंगेबदन एक् दूसरे मे मिलगए थें दोनो पसीने सें नहाएहुए थें औऱ एक् दूसरे मे गुथेजा रहे थें, एक् दुख सि गोरी औऱ दूसरा कोयले सां कालाअसल मे यह दृश्य बेहद हि कामुक लगरहा थां,,
ठाकुर अपने हाथो केँ सहारे थोड़ाऊपर हुआ अभि अभि उसने काजल केँ होठो सें रह कों निचोड़ा थां वोँ अपनाहाथ नीचे लेँ गय़ा,
मेरीदिल कि धड़कने हि रुक सि गई थि मुझेपता थां कि वोँ क्याँ करने वाला हैं, वही शायद पूर्वी कि भि सांसे रुक चुकी थि, 4 जन हम् वँहा थें मगरइस एक् लम्हा केँ लिएकोई भि सांसे नहीं लें रहा थां, सब कि सांसे अटकी हुईँ थि, वोँ अंतिम दूरी जौ उनकेबीच मे थि वोँ भि समाप्त होने कों थि, ठाकुर अपने लिंग कों काजल कि योनि मे चलारहा थां औऱ एक् भारी हुंकार केँ संग उसने धीरे-धीरे सें उसे काजल केँ योनि मे समा दिया,
“आआहहहहहह “एक् गहरी सिसकी काजल केँ मुह सें निकली पूरा लिंग उसके अंदर थां औऱ मैंने अपने हाथो सें जोरो सें पूर्वी केँ योनि कों दबा दिया
“ आआहहहहहह भाई “दोनो लडकिया पागल सि होँ चुकी थि औऱ दोनो हि पुरुष दीवाने.
ठाकुर नें पहला झटका दिया औऱ काजल केँ ऊपरआकर उसके होठो कों चूसने लगा दोनो पागलो कि तरह एक् दूसरे कों किसकर रहे थें, वही मैने भि पूर्वी कां चहरापकड़ लिया औऱ उसकी योनि कों अपने हाथो केँ मसलता हुआ उसके होठो कों अपने होठो मे मिलाकर चूसने लगा …
“ओहअहह अहहअहह “दूसरी बार काजल कों ठाकुर नें जोरजोर सें कुछ धक्के दिए
मे पूर्वी केँ पूछे जोरो सें अपने लिंग कों रगड़रहा थां औऱ उसके होठो कों खारहा थां, मेराहाथ उसके सलवार केँ नाड़े पर्र पहुच चुका थां मे उसेखोल दिया सलवार अब उसके पैरो केँ नीचे आँ गिरा थां मेराहाथ फिन केँ उसके योनि पर्र गय़ा, इसबार उसकी पेंटी केँ उपर सें हि मे उसके योनि कों मसलरहा थां वोँ पूरीतरह सें गीली हौ चुकी थि,
उधर काजल कि सिसकियां औऱ ठाकुर केँ हुंकार बढ़ते हि जारहे थें, दोनो हि अपने पूरेवेग मे थें औऱ मगन थें, ठाकुर कां सर काजल केँ कंधे पऱ ठिकाहुआ थां वोँ अपनेकमर कों जोरो सें हिलारहा थां, काजल थोड़ी शांत हुईँ, मगर उसकेमुह सें अहहऊह कि आवाज़ लगातार आँ रही थि वोँ अपनेसर कों मेरीओर करके मुस्कुराने लगी.
मे उसकी मुस्कुराहट देखकर औऱ भि जल गय़ा औऱ पूर्वी केँ पेंटी कों मानो फाड़ता हूं उतारने लगा,
“रुको भाई ‘
मैंने एक् नहीं सुनी औऱ अपने लिंग कों निकाल कर उसकी योनि मे दे मारा “
वोँ जोरो सें चीखीमगर मैंने अपने हाथो सें उसकामुह बंदकर दिया थां.
खुन कि एक् धार उसके जांघो सें निकलकर नीचे जमीन मे गिरने लगी मे बेदर्दी केँ संग 3-4 धक्के हि मारे थें, कि वोँ जोरो सें रोनेलगी थि मगर उसका रोना भि मेरे हाथो मे दबजारहा थां उसके आंखों सें निकलते हुए आंसू कों देखकर जैसे मे जल्दी हि होश मे आया,
मे अंदर निगाह डाली, अंदर ठाकुर काजल पर्र कूदेजा रहा थां औऱ काजल उसके बालो कों सहलारही थि, फचफच कि आवाजो सें पूरारूम गूंजरहा थां,
मगर मे पूर्वी कि हालत देखकर बुरीतरह सें चौक गय़ा, मेरे ढीले पड़ते हि वोँ जमीन मे रोतेहुए बैठ गई मे उसकी हालतदेख करसमझ चुका थां कि मैंने यह क्याँ कर दिया थां, मैंने जल्द सें स्वयं कों सम्हाला …
अब मेरी आंखों मे भि आंसूछलक गए
अंदर एक् एक् जोर कि चीख सुनाई दि यहआनद केँ अतिरेक कि चीख थि, ठाकुर दहाड़रहा थां औऱ उसका लिंगहवा मे लहरारहा थां उसके लिंग सें नीकला हुआगढ़ा वीर्य अभि काजल केँ योनि केँ हिस्से सें लेकरपेट तथा उसके स्तनों तक फैल चुका थां, थोड़ा सां वीर्य काजल केँ चहरे मे भि चमकरहा थां,.
मे जल्द सें पूर्वी केँ कपड़े कों ठीक किया औऱ वँहा सें नीकल गय़ा, सभी कुछ तौ ठीक थां मगर मेरी एक् गलती नें मुझे मेरी बेहन केँ नजरो मे हि गिरा दिया, औऱ उसके हि नहीं मुझे अपनी हि नजरो मे गिरा दिया थां …….
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 55
सन्नाटा किसे कहते हैं ………???????
अतीत कि गलतियों कों सुधारा नहींजा सकता, ग्लानि मे किसी माफी कि स्थान भि नहीं होती,
औऱ दर्द चुभन कि कोई सीमा नहीं होती,
गाड़ी मे सन्नाटा फैलाहुआ थां औऱ मे ग्लानि सें भराहुआ थां, गाड़ी चलाते हुए बाजू मे बैठी पूर्वी कों सुबकते हुए देखता हुआ भि मे कुछ नहींकह पारहा थां क्योकि अतीत कों बदला नहींजा सकता जोँ हौ गय़ा वोँ हौ गय़ा ….
मे चुप थां मगर शांत नहीं थां,
मन मे अजीब प्रश्न उठरहे थें जिसका उत्तर मेरेपास नहीं थां, मेरी आंखों मे आंसू तोँ नहीं थें मगर सीने मे इतनी हिम्मत भि नहीं थि कि मे पूर्वी सें सरउठा करबात करसकू.
“मे आपकेसंग आयी हि क्यो …”
पूर्वी नें रोतेहुए कहा, वोँ फूल सि बच्ची सिकुड़े हुए बैठी थि.
मे उसे देखने कि हिम्मत हि नहीं जुटापा रहा थां…
गाड़ीघऱ तक आँ चुकी थि मगरअब भि मे चुप हि थां पूर्वी भि चुप हि थि …
वोँ सीधे बिनाकुछ बोले हि अपने कमरे मे चली गई,
“अरे भाई पूर्वी कों क्याँ होँ गय़ा औऱ आप् लोगकहा गए थें “
निशा कि बातो कां मे क्याँ जबाव देता, मे नजर गड़ाए हि रखा मेरानशा नां जानेकहा काफूर हौ चुका थां,
मे बिनाकोई जवाबदिए हि सीधे अपने कमरे मे चला गय़ा, मे आंखेबंद कियेहुए बीते बातो कों यादकर रहा थां, मेरे सामने बारबार पूर्वी कां चहराझूम जाता थां, मे अपनासर झटकता मगरफिन सें वोँ चहरामन मे भर जाता थां…
उसकीसाफ मासूम आंखे मुझे दिखाई देरही थि, जौ आंसुओ सें भरी हुइ थि, वोँ उसका सिसकना औऱ उसका वोँ दर्द मे महसूस करपारहा थां …
नां जाने कितना वक़्त बीत चुका थां कि निशा कमरे मे आयी उसकी आंखेलाल थि, उसे देखते हि मेरासर झुक गय़ा …
चटाक ….
एक् झन्नाटेदार थप्पड़ मेरे गालो मे पड़ा वोँ रूह तक हि सिहर गय़ा थां,
मेरा चहरालाल थां औऱ माथे मे पसीने कि बूंदे तैरने लगी, मैंने निशा कों इतने गुस्से मे कभी नहीं देखा थां…
“मुझे लज्जा आँ रही हैं आपको भइया कहतेहुए “निशा कि आवाज़ लड़खड़ा रही थि
मे कुछ भि कहने कि हालत मे नहीं थां, औऱ कहता भि तोँ क्याँ कहता ??
मे अब भि वही बैठारहा जब निशा नें जोर सें दरवाजा बंद किया औऱ कमरे सें निकल गई.
मेरे आंखों मे पानीआने शुरुआत हौ चुके थें,
नां जानेकब तक मे ऐसे हि बैठारहा मुझे दरवाजा खुलने कां आवाज़ आया, वोँ काजल थि जोँ हाल मे निशा सें कुछबात कररही थि, थोड़ीदेर मे हि काजल अंदरआयी,
मे अब भि अपनेबैड मे सिमटा हुआ बैठा थां, मैंने काजल कों देखा वोँ मुझे गुस्से सें ताड़रही थि.
मे ज़्यादा देर तक उससे आंखे हि नहीं मिला पाया,
वोँ बिनाकुछ बोले हि बाथरूम मे चली गई औऱ आते हि दूसरी तरफमुह करसो गई …
मे किसी गुनहगार कि तरहबस बैठाहुआ अपने कि विचारों मे खोयाहुआ थां नाँ जाने कितना टाइमबीत चुका थां औऱ नाँ जानेकब मुझे नींद आँ गई थि ……….
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अध्याय 56
मे बुझेहुए मन सें औऱ बिनाकुछ खाये पिये हि अपने दफ़्तर मे बैठाहुआ थां, गहरेसोच मे डूबाहुआ थां, ऐसे भि मे कई दिनों केँ बाद यंहाआया थां औऱ मेराकाम भि आजकलकुछ खास होता नहीं थां, शाबनम नें पूरी जिम्मेदारी हि लें ली थि, वैसे भि उसे मुझसे दुगुना पेमेंट मिलता थां संग हि संगअगल सें औऱ भि पैसेकमा रही थि, मे तौ बसनाम कां हि मैनेजर रह गय़ा थां,
घऱ परिवार, प्रेम औऱ प्रोफेसन सभी मे मे पिछड़रहा थां, गहरेसोच मे डूबेहुए मुझेसभी कुछ छोड़कर भागने कां मन करनेलगा ….
“तुम् ऐसा करोगे मैंने सोचा भि नहीं थां “मे चौका सामने शाबनम थि उसका चहरा उतराहुआ दिखरहा थां.
मुझे काजल केँ ऊपर बहोत हि क्रोध आया जौ भि हुआ वोँ हमारे बीच कि बात थि बाहर् उसे फैलाने कां क्याँ मतलब थां.मे बस शाबनम कों देखता हि रहा.
“अरे इतने दिनों केँ बादआये होँ औऱ फिनबस यू हि कमरे मे घुसगए …”
मैंने राहत कि सांसली, वोँ मेरेपास आकरबैठ गई क्याँ हुआ लगता हैं कुछ परेशान हौ.
“हाँबस काजल केँ बारे मे “
“अरे दोस्त तुम् उसकी फिक्र मतकरो वोँ जौ भि कररही होगी वोँ कुछसोच समझकर हि कररही होगी, तुम् बसचील मारो औऱ चलो मेरेसंग एक् कुछ दिखाना हैं.रश्मि सें मिले क्याँ तूम “
“नहीं तौ “
“परफेक्ट चलोफिन जल्द उससे पहले कि वोँ तुम्हे देख लेँ “
मे मन मे सोचरहा थां कि अबइसे क्याँ हौ गय़ा हैं.
वोँ मुझेउसी पुराने कमरे मे लें गई जंहा हम् अक्सर मिलते थें.
“यहसभी क्याँ हैं “
उसने अपनी साड़ी कां पल्लू गिराकर मेरे सामने अपने स्तनों कों तान दिया थां …
“क्योआज पीने कां मन नहींकर रहा हैं क्याँ “
“दोस्त तुम् भि मे इतने टेंसन मे हु औऱ तुम् यहसभी “
मे उठकर जाने कों हुआ उसने मुझे खिंचकर अपने सीने सें लगा लिया.
“देव दोस्त प्लीज् कईदिन होँ गए हैं.मेरी भि तोँ थोड़ी फिक्र करो “
उसकीतड़फ देखकर मे आज पहलीबार मुस्कुराया
“तुम् भि नाँ “
मैंने उसे जोरो सें जकड़ लिया, वोँ थोड़ी कसमसाई …
“क्याँ हुआअब क्यो कसमसा रही होँ “
उसके चहरे मे मुस्कान फैल गई
“दोस्त तूम काजल कि टेंशन मतलो मे हु नां तुम्हारा टेंसन निकालने केँ लिए “
वोँ खिलखिलाई, मे भि मुस्कुरा दियामगर यह मुस्कान फीकी थि
“क्याँ हुआ मेरीजान, आजसच मे तुम् प्रॉब्लम मे होँ,, कोई तौ बात होगी वरना तुम्हे ऐसे तोँ मैंने कभी नहीं देखा थां “
उसका चहरा भि थोड़ा संजीदा होँ गय़ा थां, क्याँ मुझेउसे बतलाना चाहिए ??
मेरेमन मे यहबात घूमरही थि, मे क्याँ करूयह मुझेसमझ नहीं आँ रहा थां मगर मुझे किसी कि जरूरत जरूर थि जिससे मे कुछ एडवाइस लें सकू.
“मुझसे एक् गलती हौ गई हैं शाबनम जौ नहीं होनी चाहिए थि “
मैंने उसकेकमर सें अपना कसावकम किया औऱ उससेअलग होकर पलंग मे बैठ गय़ा.
वोँ मेरेपास आकरबैठ गई थि
“आखिरहुआ क्याँ हैं कुछ तौ कहो “
मे उसे बतलाते गय़ा उसका चहरा गंभीर होनेलगा थां, अंत मे वोँ बौखलाई नजरआयी
“यह तुमने क्याँ कर दियादेव जंहा तक मे पूर्वी कों जानती हु वोँ तुमसे बेहद प्रेम करती हैं औऱ तुमने …”
मे सर झुकाकर बैठारहा
“जानते होँ तुमने इससे भि ज़्यादा गलती क्याँ कि हैं ?”
मे उसे देखता रहा
‘तुम्हे उससेबात करनी चाहिए थि, तुम्हे माफी मांगना चाहिए थां मगर तुम् तोँ कायरों कि तरह हालत सें दूरभाग रहे होँ, ऐसामत करोदेव गलती होँ जाया करती हैं, मे भि मानती हु कि इस गलती कों माफ नहीं कियाजा सकतामगर फिन भि तुम्हे कोशिस तौ करनी हि चाहिए “
उसके चहरे मे एक् सांत्वना केँ भावआये, कल सें मे मेरेलिए किसी केँ मन मे यहभाव कि तलाश मे थां मे टूट गय़ा, मैंने शाबनम कों अपनेगले सें लगा लिया औऱ जोरो सें रोनेलगा
“मुझसे बड़ी गलती होँ गई हैं शबनमयह क्याँ हौ गय़ा “
वोँ मेरे बालो पर्र अपनेहाथ फेरने लगी औऱ मुझे सांत्वना देने लगी, मैंने अपने जिंदगी मे शबनम सें अच्छी यार नहीं देखी थि वोँ मेरेहर बात कों समझती थि औऱ मुझेसही सलाह देती थि मे उसका कृतज्ञ हुएजा रहा थां, जबकि सब नें मेरासंग छोड़ दिया थां वोँ अब भि मेरेसंग थि …
बहोत देर तक मे ऐसे हि रहा, जब मे उठा तौ जैसे मे कोई संकल्प कर चुका थां.
********
मे वँहा सें सीधेघऱ कों निकल गय़ा, घऱ मे आज निशा औऱ पूर्वी दोनो हि थें, किसी नें मुझसे केँ भि शब्द नहींकहा,
“पूर्वी तुमसे कुछबात करनी हैं “
निशा जैसेआग बबूला हौ गई मगर वोँ कुछ भि नहीं बोलीं औऱ वँहा सें चली गई वोँ अपने कमरे मे चली गई थि.
पूर्वी जोँ कि अभि तक चुप हि बैठी थि कुछ औऱ सिकुड़ गई औऱ उसकी आंखों नें फिन सें पानी छोड़ना शुरुआत कर दिया थां.
मे उसकेपास गय़ा, वोँ सोफे मे बैठी थि मे उसकेपाव केँ पास जमीन मे जा बैठा…
“मेरी बेहन जोँ हुआ वोँ नहीं होना चाहिए थां, मे इसेबदल तौ नहीं सकता, औऱ जानता हु कि यहमाफ करने लायक नहीं हैं मगरफिन भि मुझेमाफ करदे, मे तुम कोऐसे नहींदेख सकता मुझे मेरी पुरानी पूर्वी चाहिए “
मे इतना बोला हि थां कि पूर्वी नें झुककर मुझेपकड़ लिया औऱ जोरो सें रोनेलगी, जिसे सुनकर निशा भि बाहर् आँ गई, हम् दोनो हि एक् दूसरे कों पकड़कर रोरहे थें …
“भाई मैंने रातभर सोचामगर मुझे आपकी गलती सें अधिक अपनी गलती हि दिखाई दि, मे भि ऐसे रियेक्ट कररही थि कि आप् नहींरुक पाए, मुझे तौ आपको पहले हि रोक लेना थां मगर मे भि मजे लेनेलगी थि, मुझे नहींपता थां कि आप् इतनेआगे बढ़ जाएंगे मगर मैंने भि तोँ आपको उकसाया थां, मुझे वँहा सें हट जानां थां आपकोउसे देखने सें रोकना थां…
मगर मे हि मजे लेनेलगी, आप् तोँ नशे मे थें मगर मे तोँ होशं मे थि, जब मे हि बहक सकतीहु तोँ आपको क्योदोष दु.मुझेमाफ करदो भाई कि मेरे कारण आपको इतनी तकलीफ सहनीपड़ी, आपको इतने ग्लानि सें गुजरना पड़ा सॉरी भाई सॉरी “
मैंने उसे औऱ भि जोरो सें जकड़ लिया मे रोसोच भि नहीं सकता थां कि वोँ ऐसासोच रही होगी, मे तोँ अपनी गलती कों माफी मांगने आया थां औऱ वोँ मुझे हि माफी मांगरही थि.सच मे वोँ कितनी भोली थि औऱ मे कितना बड़ा पापी …….
निशा आश्चर्य सें हमेदेख रही थि, औऱ हमारी बातसुन रही थि.
उसके चहरे कां क्रोध अभि भि कम नहीं होँ रहा थां, मगरकुछ देरबाद हि हमारे पास आँ गई
“एक् बार हौ गय़ा इसका मतलबयह नहीं कि आपलोग यहरोज करोगे, भाई पर्र मेरा अधिकार हैं समझी “
निशा नें जोँ कहा उससे पूर्वी तौ हँसपड़ी मगर मे शॉक मे हि रह गय़ा, आखिर निशा केँ मन मे यह क्याँ चलरहा थां, उसे अभि भि अधिकार कि पड़ी थि.वोँ इतना हि बोलकर हल्के सें मुस्कुराते हुए रसोई मे चली गई, मगर मुझसे उसनेकोई भि बात नहीं कि …………….
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 57
मे थकाहुआ अपने कमरे मे हि लेटाहुआ थां, बहोत हि शुकुन इसबात कां थां कि मेरी बहने मेरेसंग हि थि.
मे अभि अभि होटल सें आया थां, तभी कमरे कां दरवाजा खुला औऱ निशा नें पूर्वी कों अपनेसंग अंदर लाया, मे उन्हें ध्यान सें देखरहा थां, निशा पूर्वी कां हाथ पकड़ेहुए अंदरला रही थि, वोँ मुझे देखकर मुस्कुरा रही थि, आखिर इन लड़कियो कां इरादा क्याँ थां.??
वोँ दोनो पहले कि तरह हि मेरेआजू बाजूआकर लेट गई औऱ मुझे अपने बांहो मे घेर लिया.इतना सुखद अहसास होता हैं जब आपको प्रेम करने वाले आपकेपास हौ…
मे भि अपने दोनो हाथो सें उनके बालो कों सहलारहा थां, निशा नें पहलाकदम उठाया औऱ मेरे शर्ट कों निकाल फेका, मुझे इससे गुदगुदी कां अहसास हुआ औऱ मे खिलखिला उठा,
वोँ दोनो हि अपने झीनी नाइटी मे थें, मे ऊपर सें कपड़ो सें विहीन थां औऱ मेरे जिस्म पऱ उसके गुद्देदार वक्षो कि चुभन कों महसूस कररहा थां,
मे उनके प्रेम सें भराजा रहा थां, निशा एक्टिव थि मगर पूर्वी थोड़ी शर्मा रही थि, वही पूर्वी जौ कभी मुझसे नहीं शर्माती थि वोँ आज शर्मा रही थि उसे देखकर मुझे उसकेऊपर बहोत प्रेम आँ रहा थां मगर मे कोई भि जल्दबाजी नहीं करना चाहता थां क्योकि मुझे निशा कां भि तौ डर थां नाँ जाने वोँ क्याँ मीनिंग निकाल लेगी,
इधर निशा कि सांसे तेज होनेलगी थि मुझेपता थां कि उसे क्याँ चाहिए मगर मे भि पूर्वी केँ होने केँ अहसास सें भराहुआ थोड़ा सकुचा रहा थां जिसे निशा नें भांप लिया थां…
वोँ प्रेम सें मेरे गालो कों अपने होठो मे भरेहुए उन्हें चूसने लगी,
“अब भि क्यो दीवार हमारे बीच आँ रही हैं क्याँ भाई, अब तौ पूर्वी भि हमारे खेल मे शामिल होँ सकती हैं “
निशा नें हम् दोनो कों हि ऐसे झेड़ा थां कि हम् दोनो हि शर्मा गए औऱ पूर्वी वँहा सें भागने कों हुइ मगर निशा नें उसकाहाथ पकड़कर उसेरोक लिया
“तूँ हि तौ कहरही थि नां कि भाभी कों देखकर कुछकुछ होँ रहा थां तोँ रुकजा नां आज अच्छे सें उसेकर लेते हैं “
पूर्वी औऱ भि बुरीतरह सें शर्मा गई, उसका सफ़ेद चहरालाल होँ चुका थां, उसके फुलेहुए गालो सें जैसेखून गिररहा होँ, उसके होठ फड़कने लगे थें, नजर नीची थि मगर होठो पर्र एक् मुस्कान थि …
आज मैंने पहलीबार अपनी बेहन कों ऐसे देखा थां जैसे वोँ अपने प्रेमी केँ पासखड़ी हौ.
मे भि तोँ उसका प्रेमी हि थां मगर रिश्ते अलग थें, मे उसके प्यार थां मगर प्यार कां एक्सप्रेशन हि अलग थां…
जोँ आज बदलने वाला थां, याँ यूकहे कि कुछ दिनों सें बदलरहा थां…
पूर्वी नां गई नां हि फिन सें लेटी, मगर निशा नें उसकाहाथ पकड़ेहुए हि मेरे कानो मे कुछकहा
“आजइसे भि जन्नत दिखादो भाई, आप् आगे नहीं बढ़ोगे तोँ यहकभी आगे नहीं बढ़ेगी “वोँ बोलकर मुस्कुराई, जोँ लड़की कभी मुझे बांटना नहीं चाहती थि आज वोँ मुझे बांटरही थि ‘
मेरी सवाल सें भरी हुईँ निगाहों कों उसने पहचान लिया थां,
“मे आपको नहीं बांटरही हूं, असल मे मुझेयह समझ आँ गय़ा हैं कि प्रेम कों बंटा हि नहींजा सकता “
उसने मुस्कुराते हुए मुझे देखा
अब मुझे हि शुरुवात करना थां दीवार तौ पहले हि गिर चुकी थि औऱ मर्यादाओं सें हम् कब केँ बाहर् आँ चुके थें.
मैंने पूर्वी कां हाथथमा औऱ उसे अपनेओर जोरो सें खिंच लिया, वोँ मेरे सीने सें आँ लगी …
उसका कोमलमगर भारी सीना मेरे चौड़ी बालो सें भरी हुई छाती मे आँ धसे थें, उसकेहोठ मेरे होठो केँ पास हि थें, दोनो हि होठ फड़फड़ा रहे थें, मेरा हाथ उसकेकमर कों कसरहा थां, वोँ शर्मा रही थि जैसेनई नई दुल्हन सुहागरात कों शर्माती होँ, सच मे आज मैंने अहसास किया थां कि पूर्वी कां शरीर औऱ रूपऐसा थां जिसेकोई भि मर्द पाना चाहे, मासूम सें चहरे औऱ मासूम सें मन मे प्रेम औऱ समर्पण कि कलियां खिलने लगी थि, औऱ वोँ बेसुध सि होँ रही थि, मे इस अहसास कों समझ सकता थां मगर जैसा समर्पण पूर्वी कां मेरेलिए थां वोँ तोँ भाग्यवानों कों हि नसीब होता हैं औऱ मे उन्ही किस्मत केँ धनी लोगो मे थां.
वोँ शरमाई हुईँ कमसिन सि कली थि उसकी सुर्ख होठो मे आखिर मैंने अपने होठो कों रख हि दिया, वोँ जैसेतड़फ हि गई, वोँ कसमसाई औऱ अपने होठो कों खोलकर मुझे पूरा आमंत्रित करनेलगी, जैसे जैसे मे उसके होठो कों चूसेजा रहा थां उसकी औऱ मेरीजीभ दोनो हि गुथमगुत्थि कियेजा रहे थें, वोँ दोनो हि मिलकर एक् नया अहसास हमारे मन मे भरेजा रहे थें जोँ कि हवस तौ बिल्कुल भि नहीं थां,
पूर्वी केँ आंखों सें आंसू कि कुछ बूंदे निकल गई यहउस समर्पण कि बूंदे थि जोँ एक् लड़की अपने प्रेम केँ लिए करती हैं,
निशाहमे देखकर बस आंसू हि बहारही थि, औऱ मुस्कुरा रही थि,
यह सुखद थां औऱ संग हि मन कों चैन देने वाला भि थां, निशा नें अपने हाथो कों आगेबड़ा कर अपने नाइटी कों पूराखोल दिया, कोई आश्चर्य नहीं थां कि वोँ अंदर सें पूर्ण नग्न हि थि, उसका जिस्म कमरे केँ माध्यम प्रकाश मे जगमगाने लगा थां, मगर हम् दोनो कां हि ध्यान उसकीओर नहीं थां, वोँ मेरे औऱ पूर्वी केँ बदन सें बाकी वस्त्रों कों निकालने मे व्यस्त होँ गई थि, जबकि पूर्वी औऱ मे बस एक् दूजे केँ होठो केँ जरिये एक् दूजे केँ दिल मे उतररहे थें.
कुछ हि देर मे एक् पलंग मे तीन नग्न जिस्म लेटेहुए थें, मे सीधे लेटाहुआ थां जबकि पूर्वी औऱ निशा मेरेऊपर थि, दो जवान कलियों केँ बीच होने कां अहसास क्याँ होता हैं जौ आपसे इतना प्रेम करती हैं ….??जैसे जन्नत मे आँ गए हौ.
मेरा लिंगअब भि मुरझाया हुआ हि थां, मे अब भि पूर्वी केँ होठो सें मद कां पानकर रहा थां वहीकभी कभी उसके आंखों सें बहतेहुए आंसुओ कों भि अपने होठो सें पीरहा थां, वोँ भि मेरे आंखों मे गालो पऱ अपने होठो कों यदाकदा रख दिया करती थि,
मगर निशा नें मुझेऐसे रहने नहीं दिया वोँ मेरे लिंग कों अपने होठो सें सहलाने लगी.
“अहह…….”
मेरेमुह सें अनायास हि निकल गय़ा.
उसकामुह मेरे लिंग कों भररहा थां औऱ उसकेलार सें मेरा लिंग औऱ भि चिकना हौ रहा थां, उसनेऊपर कि त्वचा कों नीचे किया औऱ अपनेथूक सें उसे गीला करके अपनेमुह सें मुझेसुख कि दरिया मे डुबो दिया.
मे मगन थां औऱ मेरी बहने भि अपने अपने स्थान मे मगन थि.
पूर्वी अपनेबदन कों मुझसे औऱ भि जोरो सें सटारही थि औऱ सिसकिया लें रही थि, मे उसकी उत्तेजना कों समझ नहींपा रहा थां मगर मुझे आभासहुआ कि निशा पूर्वी केँ योनि कों भि अपने हाथो सें मसलरही हैं, पूर्वी भि उत्तेजित होकर मेरे होठो कों काटने औऱ खाने पर्र उतारू होँ गई थि,
अब मैंने भि निशा जोँ कि इतनी मेहनत कररही थि उसे भि थोड़ासुख पहुचने कि सोची, मैंने अपनाहाथ आगे बढ़कर उसके कूल्हों कों सहलाया, उसकेकसे हुए भारी औऱ मखमली चूतड़ों कों सहलाते हुए मे उसकी पीछे सें हि अपनेहाथ कों उसके योनि पर्र लाया, वोँ तपरही थि मगरफिन भि गीली थि, उसमे हल्के बालउग आये थें, मे उन बालो पऱ अपनेहाथ फेररहा थां औऱ उसकी गीली योनि कों भि ऊपर सें हि सहलारहा थां, वोँ भि उत्तेजित थि.
अब हम् तीनो हि उत्तेजना कि अवस्था मे आँ चुके थें, तीनो कि आंखेबंद थि औऱ एक् दूजे केँ जिस्म सें सुख लें रहे थें, निशा कां मुह मेरे लिंग कि मालिस कररहा थां वही निशा कां हाथ पूर्वी केँ योनि कि जबकि मेराहाथ निशा कि योनि कि मालिस कररहा थां, तीनो हि एक् दूसरे पऱ गुथेजा रहे थें…
मैंने थोड़ी आंखे खोली तोँ मुझे कमरे केँ गेट पर्र कोईखड़ा हुआ दिखा, मैंने ध्यान दिया वोँ काजल थि,
मेरी औऱ काजल कि आंखे मिली वोँ अविश्वास सें हमेदेख रही थि, हमारी नजर मिलते हि मेरे होठो पऱ एक् मुस्कान आँ गई,
कल मे उसेदेख रहा थां औऱ वोँ ममुस्कुरा रही थि औऱ आज वोँ मुझेदेख रही थि औऱ मे मुस्कुरा रहा थां, मे कुटिल मुस्कान सें उसेदेख रहा थां, उसका चहरायह सभी देखकर लाल होँ चुका थां, उसकी आंखेबड़ी होँ गई थि.
माना वोँ केसे भि होँ मगरफिन भि थि तौ मेरी पत्नि, औऱ मे भले हि बाहर् कुछ भि करताहु मगरआज यहसभी उसके आंखों केँ सामने हि होँ रहा थां, जिसे देखकर वोँ जलरही थि, मे इस अनुभव कों कल महसूस कर चुका थां, उसकी मुठ्ठी कसेजा रही थि औऱ मुझेयह देखकर बहोत हि मज़ा आँ रहा थां, मेरी निगाहे मानोउसे यहकहरही होँ कि देख, देख मुझे भि प्रेम करने वालो कि कमी नहीं हैं, औऱ जौ लोग तेरेबदन सें खेलते हैं वोँ बसहवस केँ लिए खेलते हैं मगर मेरेपास सच मे प्रेम करने वाले हैं…
काजल केँ आंखों मे आंसू छलकने वाले थें, वोँ इसे देखकर उत्तेजित भि थि मगर आंखों मे आंसू भि आँ रहे थें, जलन सें उसका सीना भि जलरहा होगा, यह मेरेसंग भि हौ चुका थां औऱ मे इस स्तिथि कों समझ सकता थां, वोँ मेरी आंखों मे देखकर जाने कों पलटी, मगर मैंने तभी पूर्वी केँ कूल्हे मे एक् जोरदार चपातलगा दि.
“आउच “पूर्वी दर्द औऱ मजे सें बोलपड़ी औऱ पूर्वी कि आवाज़ सुनते हि काजल जल्दी हि पलट गई औऱ हमे देखने लगी मेरी मुस्कान औऱ भि गहरा गई थि, वोँ गुस्से भरे नयनो सें मुझे देखकर चली गई मगर मे जानता थां कि वोँ क्रोध नकली थां, उसकी आंखेबता रही थि कि वोँ औऱ भि देख्ना चाहती थि, वोँ उत्तेजित थि औऱ इसलिये वोँ वँहा सें निकलना चाहती थि.
मे यह भि जानता थां कि वोँ बाहर् नहींजा पाएगी वोँ घऱ मे हि रहेगी जब तक हमारा काम ख़त्म नहीं होँ जातामगर वोँ बहनों केँ नजर मे भि नहीं आनां चाहेगी…
आखिर मेरा लिंग भि पूरीतरह सें गीला होँ चुका थां औऱ संग हि मेरी बहनों कि योनि भि,
मे उनको अपने सें अलग किया औऱ निशा कों हटाकर पूर्वी कों अपने नीचे लिटा लिया, निशा मेरेऊपर आँ गई औऱ मेरेपीठ कों चाटने औऱ काटने लगी,
मैंने पूर्वी केँ निगाहों मे देखा, वोँ शर्मा कर हि सहीमगर उत्तेजक निगाहों सें मुझेदेख रही थि औऱ जैसेकह रही थि कि अबआगे बढ़ो…
मे आगेबढ़ा औऱ अपने लिंग कों उसकी योनि मे सहलाने लगा, वोँ मुझे पूरीतरह सें जकड़कर मुझसे स्वयं कों सटाने लगी,
उसकी गीली योनि मे मेरा लिंग फिसलने लगा थां, मगरअब भि वोँ बहोत टाइट थां, धीरे-धीरे धीरे-धीरे हि सहीमगर मेरे लिंग कां ऊपरीभाग उसके योनि मे धंस गय़ा, वोँ मछली जैसे छटपटाई मगर मेरे होठो कों अपने होठो सें मिलाते हुए थोड़ी शांत होँ गई, मे हल्के हल्के धक्के सें अपना लिंग उसके अंदर पूरीतरह सें प्रवेश करवा दिया…
नई नई जवानी मे खिली हुई योनि नें लिंग कों मजबूती सें जकड़रखा थां, ऐसा अहसास मुझे पहलीबार हुआ थां, हल्के बाल भि लिंग सें रगड़खा जाते थें, मेरा लिंग पूर्वी केँ योनिरस सें पूर्णतः भीग चुका थां, औऱ थोड़ी आसानी सें उसके अंदरजा रहा थां, उसके आंहो सें पूरारूम गूंजने लगा थां, उसकी योनिहर रगड़ केँ पहले ढीली हौ जाती औऱ जब लिंग पूरीतरह सें अंदर जाता तोँ तौ कस जाती थि, इतना सुखद अहसास मुझेसच मे कभी नहींहुआ थां, वोँ मुझे मेरी बेहन सें मिलरहा थां, मेरी प्यारी सि छोटी बेहन सें, मगरसुख तोँ सुख होता हैं जंहा सें भि मिले…
वही निशा मेरेऊपर झा गई थि वोँ अपने शरीर कों मेरे जिस्म पर्र रगड़रही थि औऱ अपने होठो औऱ हाथो सें मेरेहर अंगों कों नहलारही थि,
उत्तेजना तेज हुइ औऱ मे मैंने जोरजोर सें धक्के देना शुरुआत दिया,
“अहह अहहअहह “
पूर्वी कि सिसकारियां पूरे कमरे मे गूंजने लगी थि, उसकी आंखेबंद थि औऱ ओउसमजे कि गहराई मे खोई हुइ थि, उसकाकमर ऊपरउचक रहा थां औऱ मेराकमर उसकेकमर मे धंसेजा रहा थां, उसका साराबदन अकड़ गय़ा औऱ वोँ जोरो केँ झड़ी, उसने मेरे कंधे पऱ अपने दांतगड़ा दिए थें…
अब वोँ शांत किसीलाश सि गिर गई थि, जिस्म मे कोई हलचल नहीं हौ रही थि, मेरा लिंग इतना पानी पाकर तृप्त महसूस हौ रहा थां औऱ वोँ ज़्यादा अकड़ेजा रहा थां, मे भि अपनेचरम केँ निकट थां, मगर मैंने अपने लिंग कों निकाला नहीं औऱ अपनी बेहन केँ गर्भ मे झड़ने लगा, वोँ मेरागरम लावा अपने अंदर महसूस करके औऱ भि अधिक तृप्त होनेलगी औऱ मेरे होठो कों अपने होठो सें चूसने लगी थि ……
मे थककरजब पूर्वी सें हटा तौ निशा मेरेऊपर चढ़ गई अभि तौ मुझमें वोँ हिम्मत नहीं थि कि मे फिन सें कुछकर पाऊमगर निशाकहा मानने वाली थि, उसनें मेरे लिंग कों अपने होठो मे भर लिया, पूर्वी मुझसे सटी हुइ मुझे बांहो मे भरकरसो रही थि वही निशा मेरे लिंग कों अपने होठो मे भरेहुए चूसरही थि, मे जब दरवाजे कि ओर देखा तोँ मेरे होठो कि मुस्कान फैल गई, सामने काजलखड़े हुए अपने साड़ी केँ ऊपर सें हि अपने योनि कों मसलरही थि, मुझे मुस्कुराता हुआदेख वोँ गुस्से सें भर गई वोँ झूठा क्रोध थां औऱ मुझे मारने कां इशारा किया, मे हल्के सें हँस पड़ा, वोँ अधीर थि जैसेअब तबरो हि डालेमगर यह रोनादुख कां नहीं बल्कि उत्तेजना कां थां, जब उत्तेजना अधिकबढ़ जाए तोँ भि शख्स कां रोना निकल जाता हैं……….
अब मेरा लिंग रेडी थां निशा कों भरने केँ लिए, मैंने सोएहुए हि उसे अपने}ऊपर कर लिया, निशा नें भि अपने योनि मे मेरे लिंग कों सटाया औऱ मेरेऊपर कूदने लगी, मे फिन सें आनद केँ गहराई मे जारहा थां, यह तब तक चलतारहा जब तक कि मैंने उसेभर हि नहीं दिया, तब तक काजल कों भि समझ आँ गय़ा थां कि अब उसका यंहा रुकना ठीक नहीं हैं ….
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