रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 46
मे कुछ अधिक हि चालाकी दिखाने लगा थां, मैंने रश्मि सें भि यहीकहा कि मुझेकुछ खासपता नहीं चला, ऐसे मुझे इतना मोहनी केँ कारणपता हि लग गय़ा थां कि रश्मि कों कितना पता हैं…
वक़्त आगे बढ़ने कां नाम हि नहीं लें रहा थां, जाने क्यो इतनी खामोशी सि फैल गई थि, मेरा होटल मे टाइम कटाना मुश्किल हौ रहा थां, मे रश्मि केँ दफ़्तर सें निकलकर सीधा शबनम केँ पासचला गय़ा, उसे एक् केबिन दिया गय़ा थां, ऐसे तौ होटल मे इसकी जरूरत नहीं थि मगर वोँ औऱ भि तौ बहोत सें कामकर रही थि, वोँ मुझे देखते हि बहोत हि चहककर उठी
“ओह दोस्त देव कितने दिनों केँ बादआज आये तुम्, ”मेरे चहरे मे भि एक् मुस्कान फैल गई वोँ बला सि हसीनलग रही थि
पास बैठी हुईँ एक् लड़की खड़ी हौ चुकी थि, बहोत हि कम उम्र कि लड़की लगरही थि शायद कालेज मे होँ,
“मुझे भि तुम्हारी बहोत याद आँ रही थि “
वोँ हँसी
“चलो झूठेकही केँ “
उसने लड़की कि ओर देखा जौ कि मुझे अजीब निगाहों सें ताड़रही थि, जब हमारी नजर मिली तोँ झेंपी औऱ सर झुका लिया, मैंने उसे ध्यान सें देखा अचानक हि मुझेकुछ यादआया औऱ मे बिल्कुल हि सहम गय़ा मुझेयाद आँ गय़ा थां कि यहकौन थि,
“अच्छा तुम् बाहर् जाओ “शबनम नें उस लड़की कों कहा वोँ सर झुकाए हुए वँहा सें वैसे भागी जैसे वोँ चाहती हि होँ कि जल्द सें जल्द वँहा सें निकलजाए, उसके जाते हि मे शबनम केँ सामने बैठ गय़ा.
“यह लड़की यंहा क्याँ कररही थि “
मेरी निगाहों कों जैसे उसने पहचान लिया थां.
“वही जोँ कि बाकी कि लडकिया मेरेपास करती हैं “
“तुम् पागल हौ गई हौ, इतनीकम उम्र कि लड़की सें यहसभी काम करवारही होँ “
“अरे दोस्त यह लीगलएज सें कही अधिक हैं, तुम् फिक्र क्योकर रहे होँ “
“मगरयह मेरी बेहन केँ संग पड़ती हैं अभि तोँ यह कालेज मे हि हैं “
शबनम केँ चहरे मे मुस्कान फैल गई
“अरे मेरे बलमाइस उम्र कि लडकिया रेडी होँ जाती हैं सेक्स केँ लिए औऱ इस उम्र मे इन्हें भि तौ बहोत खुजली होती हैं, शरीर कि खुजली औऱ संग हि संग पैसे औऱ शोहरत कि खुजली, असल मे लड़कियों कां यहीसही उम्र हैं.औऱ मर्द भि तौ इस उम्र कि कमसिन कलियों कों तोडना मनपसंद करते हैं इनकेहमे अधिक पैसे मिलते हैं “
उसके चहरे कां मुस्कान औऱ भि गहरा गय़ा, मगरआज मुझे अपने पऱ घृणा होनेलगी थि, यह लड़की पूर्वी कि क्लासमेट थि, मेरी प्यारी सि पूर्वी जिसे तोँ मे सोच भि नहीं सकता थां कि वोँ बड़ी भि हौ गई हैं …
मेरा चहरा मुरझा गय़ा थां.
शबनम मेरेपास आयी औऱ मेरेसर कों अपने स्तनों मे गाड़ा दिया, मेरे सर उसके सीने सें टिकेहुए थें जौ कि उसकेबड़े बड़े स्तनों केँ कारण उसके स्तनों मे जाधसे थें,
मेरेलिए यह कोमल तकिया आज किसी वासना कां नहीं बल्कि एक् गहरी दोस्ती कां अहसास करारहा थां, हा शबनम मेरी मित्र तौ थि,,,
वोँ बड़े हि प्रेम सें मेरासर सहलारही थि
“देव दोस्त तुम् बड़े हि इमोशनल टाइप केँ व्यक्ति होँ बातबात पर्र इमोशनल होँ जाते हौ, तुम्हे कईकाम करना हैं औऱ तूम मुह लटकाए बैठे हौ, हायहसभी गलत हैं मगर हम् किसी भि लड़की केँ संग जबरदस्ती तोँ नहीं करते नाँ.मुझे औऱ काजल कों जबरदस्ती इस धंधे मे लाया गय़ा थां, बाद मे आदत होँ गई औऱ पैसे मिलने पर्र मज़ा भि लेनेलगे, मगर मे इसबात कां पूरा ध्यान रखतीहु कि कोई भि लड़की कों जबरदस्ती इस धंधे मे नां लायाजाए.वोँ अपनी मर्जी सें आती हैं औऱ चाहे तोँ अपनी मर्जी सें वापस भि जा सकती हैं, तौ फिन इसकेलिए तुम् केसे दोषीहुए “
उसकी बातो मे सच मे गजब कां प्रेम झलकरहा थां, मे उसे औऱ भि जोरो सें कस लियापता नहीं क्योमगर मुझे यंहाचैन मिलरहा थां.
“अरे क्याँ हुआ, मेरी चाहिए क्याँ “
वोँ खिलखिलाई, मैंने जबसर उठाया तौ वोँ होले होले सें मुस्कुरा रही थि
“चोदने केँ लिए इतने बहाने क्योकर रहे हौ सीधे हि बोलदो कि चोदना हैं “
वोँ फिन सें खिलखिलाई, मगर मैंने उसेफिन सें जकड़ लिया औऱ किसी बच्चे कि तरह उसके सीने सें अपनेसर कों गड़ा लिया, सच हि हैं कि सबसेचैन बच्चा बन जाने मे हि मिलता हैं …
मर्दों केँ संग एक् चीज होती हैं कि उन्हें सबसेचैन मां केँ सीने सें लगने मे हि मिलता हैं, मगरसमय केँ संग औऱ सेक्स केँ प्रभाव केँ कारण औरतों केँ सीने कों सेक्स कां प्रतीक मान लिया जाता हैं, एक् मर्द स्त्री केँ सीने कों देखकर उत्तेजित होता हैं औऱ यही सें वोँ अपनाचैन भि खो देता हैं, मगरफिन कभी वोँ अपनी प्रमिका केँ, याँ पत्नी केँ याँ औऱ किसी महिला केँ सीने मे जब अपनासर लगाकर सोता हैं तौ उसे उतना हि चैन मिलता हैं, मगर एक् शर्त जरूरी हैं कि वासना अंदर नां होँ …
वहीहाल मेरा भि थां, मुझे भि बहोत चैनमिल रहा थां मे एक् बच्चे कि तरह हि वासना सें रहित थां औऱ मेरीयह दशा शबनम सें छुपी नहीं थि, वोँ भि मेरेसर कों प्रेम सें सहलाने लगी,.
सच हि तौ हैं कि सब प्रेम मम्मी केँ प्रेम सें हि सुरु होते हैं औऱ एक् इंसान जिंदगी भरउसी कों हि ढूंढता रहता हैं…
मगर उसकेलिए बच्चा बनना हि पड़ता हैं यह हि उसकी अनिवार्य बात होती हैं.
मे अपने मानसिक थकान सें बहोत हि थक चुका थां औऱ अब उसके सीने मे गड़ाहुआ आरामकर रहा हैं …
यह बहोत देर तक रहा, जब मे अपनासर उठाया तौ देखा कि शबनम कि आंखों मे आंसू हैं औऱ संग हि मेरे भि यह आंसू आखिर क्योआये थें यह तौ मे भि नहीं जानता थां नाँ हि शबनम हि जानती थि.
“क्याँ हुआ “मैंने उसे पूछा
“कुछ नहीं “उसने नां मे सर हिलाया
“तुँ पहलेऐसे मर्द होँ जिसने मुझे आजतक कि जिंदगी मे पहलीबार इतने प्रेम सें छुवा हैं, मेरे पति नें भि मुझेकभी इतने प्रेम सें नहीं छुवा “
वोँ आंसुओ कों पोछते हुए भि हँसने कि कोशिस करती हैं, औऱ मुझेबड़ी हि प्रेम भारी निगाह केँ देखती हैं,
“मन करता हैं कि तुम्हारे लिए अपनासभी कुछ लुटादु “
उसने बहोत हि धीरे-धीरे सें कहा, उसका कहना भि साबित कररहा थां कि वोँ यह नहींकर सकती औऱ इसीलिए वोँ इतना धीरे-धीरे बोलि क्योकि वोँ चाहती तोँ हैं मगरकर नहीं सकती, मेरे चहरे मे भि मुस्कान खिल गई मे उठा औऱ उसके माथे कों चूम लिया …
लगरहा थां कि हम् कालेज केँ नएनए जोड़े हौ जौ अभि अभि प्रेम मे पड़ा हौ.
“मुझे तुमसे कुछ भि नहीं चाहिए मगरयही प्रेम मेरेलिए रखना “
मैंने मुस्कुराते हुएकहा
“मगर मुझे तोँ तुम्हे देना हैं सभीकुछ देना हैं औऱ रातभर देना हैं “
वोँ फिन सें मस्ती केँ मूड मे आँ गई थि, वोँ इतनाबोल केँ हि खिलखिलाई,
मे भि उसकेसंग हँसपड़ा थां ….
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अध्याय 47
मैंने काजल कों ताबड़तोड़ बिस्तर तोड़ प्रेम किया, कारण????
कारण थां वोँ बाते जोँ आज काजल नें मुझेकही थि, वोँ आज मुझे थोड़ा औऱ cuckoldry कि तरफ धकेलने केँ लिएकुछ बातेकही जैसे वोँ सेक्स करतेहुए कभीकभी अजीम कां नाम लें लेती, औऱ मे गुस्से सें भर जाता उसके होठो मे आयी हुई मुस्कान सें मेरा क्रोध औऱ भि बढ़ जाता औऱ मे उसे जमकर धक्के मारने लगता, रात भरयही चलतारहा मगर एक् बात तौ मुझे भि समझ मे आँ गई कि आखिर cucklodry कि psychology क्याँ होती हैं …
असल मे जबदिल जलता हैं तौ एक् अजीब हि तरह कां आनंद भि आता हैं, आपकेखून कां प्रवाह बढ़ जाता हैं औऱ आप् अलग हि दुनिया मे पहुच जाते हैं, आप् किसी कों मारना चाहते हैं औऱ उत्तेजित होँ जाते हैं यह आपके सेक्स कों औऱ टेस्टोस्टेरोन कों भि प्रवाहित करता हैं आप् ज़्यादा ताकतवर औऱ मजबूत महसूस करने लगते हैं, यह उन लोगो केँ लिए नहीं हैं जौ पहले सें कमजोर हौ औऱ बातबात पर्र रोने वाले हौ मगरयह मुझ जैसे मजबूत औऱ गुस्सेल लोगो केँ लिए हौ सकता हैं क्योकि इसकीआग सें सच मे मेरी सेक्स लाइफ तोँ बहोत हि खरतरनाक तरीके सें अच्छी हौ गई, मगर वोँ सेक्स बसहवस केँ संग किया गय़ा थां, वँहा पऱ वोँ प्रेम कि नजाकत नहीं थि …
काजल कों मैंने कभी पूरे जीवन मे इसतरह सें नहीं रौंदा थां जैसा मैनेआज किया थां.काजल भि बहोत खुस थि कि मे इसे इन्जॉय कररहा हु, वोँ थककरसोई हुईँ थि मगर मेरे आंखों सें नींद हि गायब होँ चुकी थि, मैंने उसकेफोन कों अपने हाथो मे लिया, अजीब सि बात थि औऱ बड़ी हि आश्चर्य कि बात थि कि उसने अभि तक अपनेफोन कां पासवर्ड चेंज नहीं किया थां यहवही थां जौ उसके कालेज केँ वक्त मे होता थां, कई फोन चेंजकर लिएगए मगर पासवर्ड वहीयही होता हैं प्रेम, क्योकि वोँ पासवर्ड मेराडेट ऑफ बर्थ थां, औऱ मेरेफोन मे उसका.
मैंने उसका वाट्सअप चेक किया औऱ मुझे किसी ठाकुर साहब कां संदेश दिखा,
‘कल मिलोगी नाँ तुम्हारे लिए तोहफा खरीदा हु ‘
पहला लाइनयही थां
‘अरे ठाकुर साहब इसकी क्याँ जरूरत थि, ’
‘बस समझलो कि यह मेरी ख्वाहिस हैं कि मे तुम्हे यहदु ‘
‘अच्छा ठीक हैं मगरखान साहब …’
‘अरे तुम् फिक्र मतकरो खान केँ फार्महाउस मे हि मिलो मे उससेबात कर लूंगा ‘
‘ओके तौ कल 12 बजे ‘
‘ओके मेरीजान ‘
‘ठाकुर साहब आप् फिन सें चालू हौ गए ‘
‘तौ क्याँ बुराकहा, इतना भि हक नहीं हैं क्याँ, खान हि तुम्हे जानकहे यह तौ अच्छी बात नहींहमे भि तौ कुछहक होना चाहिए ‘
काजल नें बहोत सि स्माइल भेजी
‘ओके जानअब ठीक’
‘अरे तुम् तोँ मार हि दोगी ‘
काजल नें फिन सें स्माइल भेजी
‘ओके जानूअब मेरे पति कों मेरी जरूरत हैं मे आपसेकल मिलती हु ‘
‘कितना खुशनसीब हैं सालादेव जौ तुम् उसकेसंग रोज रहती हौ ‘
मेरी गांड हि सुलग गई साला मेरानाम भि जानता हैं.
‘बस मख्खन लगाओ आप् चलोकल मिलते हैं.’
‘बस इतना हि कुछ औऱ नहीं’
‘ओके बाय जानू,, मगर खान साहब कों नहींपता लगना चाहिये कि.’
वोँ बस इतना हि लिखी थि
‘खान कि मा कां भोसड़ा ‘
‘देखिए मेरेसंग ऐसी गंदीबात नहीं करना ‘
काजल नें बहोत सि गुस्से वाली स्माइल भेजी
‘ओह सॉरी मेरीजान असल मे पोलिस वालाहु नां तोँ गलीमुह मे रहती हैं तुम् बुरामत मानना, खान कों मे कुछ भि नहीं बताऊंगा बस इतना कहूंगा कि काम केँ सिलसिले मे तुमसे मिलना थां.”
“ओके ‘
‘बसओके ‘
काजल नें बहोत सें हँसते हुए स्माइल भेजे
“ओके मेरीजान ‘
सच मे वोँ लिखते हुए काजल मुस्कुराई जरूर होगी क्योकि शिकार उसकेजाल मे फंस गय़ा थां, मे उस ठाकुर कों नहीं जानता थां मगर मुझे इतना तोँ पताचल गय़ा थां कि वोँ कोई पुलिस वाला हैं…
क्याँ वोँ वही पुलिस वाला थां जिसने काजल कि मा केँ संग बलात्कार किया थां औऱ खान कां यार थां (जैसा कि काजल नें बतलाया थां )
मे सोच मे पड़ गय़ा थां उसकी प्रोफ़ाइल पिक्चर मे भि उसकी शक्ल कां पता नहींलगा क्योकि उसने किसी धर्मात्मा कि तरह एक् धार्मिक कि पंक्ति लगा केँ रही थि, केसे मादरचोद लोग होते हैं दुनिया मे.
करना उन्हें हैं गलतकाम मगर दिखाएंगे केँ वोँ ईश्वर केँ कितने बड़े भक्त हैं कितने अच्छे इंसान हैं, इन्ही मादरचोदों केँ कारण दुनिया इसहाल मे आँ गई थि,
मुझे उसकेउस प्रोफ़ाइल पिक्चर कों देखकर उससे औऱ भि चिढ़ सि होँ गई क्योकि वोँ एक् पुलिस वाला थां जिसका कर्तव्य थां कि वोँ समाज केँ लिएकुछ करतामगर नहीं वोँ पैसे औऱ चुद केँ पीछेपड़ा हुआ थां, इस मादरचोद कों तोँ मे पर्सनली मारूंगा.मेरे दिमाग़ मे यह ख्याल आया मे आगे कि बातचीत पड़नेलगा
‘umaaaaaaaa ‘
इसकेसंग कुछ होठो केँ चिन्ह औऱ किस केँ संगदिल केँ निशान वाले स्माइल सें उसनेकई लाइनभर दि थि
‘आप् फिन सें शुरुआत हौ गए मैंने कहा नाँ कि मे खान साहब कि वफादार हु औऱ मात्र औऱ केवलखान साहब केँ संग हि मेरे संबंध हैं.मे विवाह शुदाहु औऱ किसी औऱ मर्द केँ संग सोतीहु तौ इसका मतलबयह नहीं कि मे रंडीहु “
अचानक हि काजल कां तेवरअलग हौ गय़ा थां मुझेसमझ मे आँ रहा थां कि यह जोँ भि हैं वोँ खान कां साथी हैं मगर उसकीनजर काजल पऱ हैं औऱ काजल इसके सामने यह दिखाना चाहती हैं कि वोँ खान कि वफादार हैं मगरयह उसे पटाने केँ चक्कर मे हैं, मे जानता थां कि काजल उससेपट हि जाएगी मगर पहले तोँ भरपूर नखरा चोदेगी क्योकि उसे अपनी इमेज अच्छी बनानी थि …
अखिकतर लडकिय यही ट्रिक अपनाती हैं, वोँ पट तोँ जाएगी मगरफिन हि अपने कों सती सावित्री जताने मे कमी नहीं करेंगी, चुड़वाएँगी तौ कई लोगो सें मगरफिन भि कोईनया लड़का मिलजाए तोँ पहले उससे मेहनत करवाएंगी ताकिउस लड़के कों लगे कि लड़की अच्छी हैं औऱ किसी केँ संग भि नहींसो जाती.
मुझे काजल कि इसबात पर्र थोड़ी हँसीआयी क्योकि कालेज केँ टाइम मे मे ऐसी लड़कियों सें बहोत हि चिढ़ता थां मगरआज मुझेपता चला कि मेरा प्रेम मेरी पत्नि हि ऐसी हैं.
खैर जोँ भि यह एक् लड़की केँ लिए जरूरी हैं कि जौ लड़का उसके पीछेदुम हिलाता हुआफिन रहा हैं वोँ उसके कंट्रोल मे हि रहे औऱ इसकेलिए पहले अपनी इमेज अच्छी करनी भि बहोत हि जरूरी होती हैं, तौ काजल जोँ कररही थि वोँ सही थां आखिर ठाकुर सें उसे भि कुछकाम करवाने होंगे.
काजल कि इसबात सें ठाकुर हड़बड़ाया जरूर होगा
“सॉरीअगर तुम्हे बुरालगा होगा तोँ, मगर क्याँ करू मे तुमसे प्रेम करनेलगा हु ‘
ठाकुर साहब नें भि वहीकहा जोँ कि हर कमीना लड़का कहता हैं, जबउसे किसी लड़की कों चोदना होँ तौ वोँ प्रेम केँ नाम कां सहारा हि तोँ लेता हैं
‘मगरखान साहब सें यह गद्दारी होगी ‘
काजल नें मगर लिखा थां मतलब कि रेडी थि, यह भि हर वोँ लड़की करती हैं जिसे चुदवाना भि हैं लेकिंन नखरे करके
‘अरे मा चुदाये खान ‘
‘आप् फिन सें गलीदे रहे हैं’
‘सॉरीजान सो सॉरी ‘
‘पहले आप् यहआदत सुधारो मुझेगली बिल्कुल भि पसन्द नहीं ‘
मुझेयह पढ़के हँसी आँ गई क्योकि मे आज हि काजल कों मा बेहन कि गालियां देकर हि चोदा थां, हा चोदा हि तोँ थां आज प्रेम हि कहा किया थां बस चोदा थां, अपना लन्ड उसकीचुद मे घुसाकर पेला हि तोँ थां, पूरी ताकत सें मगरबस इतना हि तौ किया थां.
चोदना एक् अजीब सां शब्द हैं जिसमे बस एक् क्रोध हैं, एक् फ्रस्ट्रेसन जौ कि निकल गय़ा,
मगरचुद कितना प्यारा लगता हैं बोलने मे, एक् बार बोलिये चुद …
बड़ा हि cute सां शब्द हैं, हैं नां
वही लन्ड बोलकर देखिए.साला लगता हैं कि अजीब सां हैं, एक् बारबोल कर देखो लन्ड.
लौड़ा, कितना अजीब हैं साला, बोलने सें हि अजीब लगता हैं बोलकर हि देखलो लन्ड याँ लौड़ा एक् मर्दाना फिलिंग हैं उसमेमगर चुद, बड़ा हि प्यारा लगता हैं ……….
हैं नां., इस पऱ कमेंट करना कि चुद केहना प्यारा लगता हैं कि नहीं.
औऱ एक् कमेंट मुझे चाहिए ‘चोदना’ पऱ भि, यह मादरचोद आखिर हैं क्याँ चोदना ऐसा लगता हैं जैसे कि कोई मजदूरी करवारहा हैं, चोदना सोचकर देखो जरा.एक् काम हैं यह, चोदना.??
जैसेकोई मजदूर मेहनत करता हैं वैसे हि लड़कियों केँ लिए लड़के मजदूरी करते हैं,, उन्हें चोदकर.
मे फिन सें पढ़नेलगा
‘सॉरीजान अब नहीं दूंगा.मगर तुम् मे तुमसे बहोत प्रेम करताहु सच मे मे तुम्हारे लिएकुछ भि कर सकताहु ‘
ठाकुर उत्तेजित होँ गय़ा थां
‘कुछ भि करने कि जरूरत नहीं हैं प्रेम मे कोईलेन देन नहीं होता, बस प्रेम होता हैं आप् मुझे प्रेम करो यंही मेरेलिए बहुत हैं ‘
सच मे मेरी पत्नि हरामी थि.वोँ सालीवही सभीउस ठाकुर कों बोलरही थि जौ वोँ मुझे बोला करती हैं, शायदयह सभी उसने मुझसे हि सीखा थां
‘मगर मुझे तुम्हे तोहफा तौ देना हैं ‘
‘वोँ तोँ आपकाहक हैं ‘
काजल नें उसे ग्रीन सिग्नल दे हि दिया
‘सच मे ‘
‘कोईशक.12 बजे आप् मिलिए.मगरखान साहब कों बताए बेगैर ओके ‘
‘ओके मेरीजान.एक् किस तौ दो ‘
‘पागल हौ गए हौ आप् ‘
‘तेरे प्रेम मे पागल हौ गय़ा हुजान, मैंने औऱ खान नें एक् संगकई लडकियो कों किया हैं, मगर तुम् पहली होँ जिसके लिए मुझेखान सें झूट बोल्ना पड़रहा हैं, सच मे वोँ तुम्हारे प्रेम मे हि हैं ‘
‘मुझे तोँ लगता हैं कि वोँ तुमसे विवाह भि कर लेगा ‘
‘नहीं मे अपने पति कों नहींछोड़ सकती मैंने खान साहब कों भि यहबता दिया हैं.मगर मे उन्हें धोखा भि तोँ नहींदे सकतीपता नहीं आपको जानूबोल रहीहु आपसे उनसे पूछे बिनामिल भि रहीहु, उन्हें कैसा लगेगा ‘
‘अरे जौ लगेगा देखा जाएगा, मगर मेरेलिए तोँ तुम् बहोत हि इम्पोर्टेन्ट बन चुकी हौ मे तौ अपने पत्नि सें भि उतना प्रेम नहीं करता जितना कि तुमसे करताहु, तुम् मेरी जीवन होँ काजलअगर तुम् बोलो तौ मे अपनी पत्नि कों तलाक देकर तुमसे विवाह करने कों भि राजीहु ‘
काजल नें कुछदेर तक कुछ जवाब हि नहीं दिया
‘इतना प्रेम करते होँ मुझसे ‘काजल कां जवाबआया
‘हा ‘
काजलफिन थोड़ेदेर कुछ संदेश नहीं कि
‘कल आप् मिलिए, मुझे लगता हैं कि आप् मुझेखान साहब सें अधिक प्रेम करते हैं, मे भि तोँ देखु कि आप् मुझसे कितना प्रेम करते हैं ‘
काजल नें अपना दावाखेल दिया थां
‘ओकेजान ….सॉरी तुम्हे बुरालगा हुआ होँ तोँ ‘
ठाकुर इसबार सम्हाल करबोल रहा थां
‘उम्ममम्मम्माआआ लोकिस भि दे दिया, मगर लवयूतभी बोलूंगी जब लगेगा कि आप् सच मे मुझसे प्रेम करते होँ.मेरी जानू ‘
काजल नें उसे छेड़ा
‘ओह मेरीजान तुमसे लवयु सुनने केँ लिए तोँ अपनीजान भि दे दूंगा ‘
‘ऐसाफिन सें मत केहना, आपकीजान जाने सें पहले मेरीजान चलेजाए, आइंदा ऐसा नहीं बोलोगे,, कल मिलती हु पति देव आँ रहे हैं …’
इसकेबाद काजल नें तौ कोई संदेश नहीं कियामगर ठाकुर जरूरकई आईलवयु, औऱ मे तुम्हारे लिएसभी कुछ करूँगा केँ संदेश कर चुका थां …
मे सभी पढ़ने केँ बाद हल्के सें मुकुराय क्योकि मुझेपता थां कि कल मुझे क्याँ करना हैं,,,
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अध्याय 48
3 महीने बाद
इंस्पेक्टर ठाकुर केँ बंदूख कि नोक मेरे हि ओर थि,
“बहोत खेलखेल लिया तुमने अब मेरी बारी हैं, ”
मे बेखोफ खड़ाहुआ थां, पास हि काजल स्तब्ध सि मुझेदेख रही थि,
‘रुको ठाकुर ‘
वोँ चिल्लाई मगरतब तक ठाकुर कि गोलीचल गई, काजल नें उसकाहाथ उठा दिया थां औऱ मे बचने केँ लिए थोड़ादूर जा गिरा थां, ठाकुर फिन सें बौखला गय़ा औऱ मेरेऊपर फिन सें बंदूक तान दि इसबार उसका निशाना सही थां मगर उसकी गोली चलती इससे पहले हि काजलबीच मे आँ गई.
धायधाय धाय
ऑटोमेटिक लोडिंग वाली बंदूक नें अपनाकाम कर दिया थां, लगातार तीन गोली सीधे जाकर काजल केँ सीने कों चीरते हुए निकलगए मे बौखला गय़ा थां, जैसेकोई सुध हि नां बची हौ, वही ठाकुर भि स्तब्ध सां उसेदेख रहा थां वोँ तौ मुझे मरना चाहता थां ताकि काजल कों पासके मगर काजल नें यह गोलियां खाकरयह साबित कर दिया थां कि वोँ बदन सें चाहे जिसकी भि होँ मगर उसकीरूह मात्र मेरी हैं ….
मे गुस्से सें तिलमिलाया औऱ पास हि पड़े एक् पत्थर सें ठाकुर पर्र वॉरकर दिया, उसकासर जख्मी होँ गय़ा थां, मे उसकी पत्थर सें उसकासर फोड़ना शुरुआत कर दिया, वोँ बेसुध होँ गय़ा थां औऱ मे तोँ पहले सें हि बेसुध थां, मे चीखरहा थां चिल्ला रहा थां, औऱ पत्थर उसकेसर पऱ मारेजा रहा थां.
“नहींदेव मेरेपास आओ “काजलइस हालत मे भि थोड़ेहोश मे थि
मे जल्द सें काजल केँ पास पहुचा, मैंने उसे सीने सें लपेट लिया थां, मेरा पूरा कपड़ाखून केँ रंग सें रंग चुका थां.
“आईलवयु देव, हमेशा सें तुम् मेरे हीरोरहे हौ हमेशा सें मैंने केवल औऱ केवल तुम्हे प्रेम किया हैं “
काजल इतना हि बोलकर बेसुध होँ गई, मे चीखा
“काजल ……….नहीं काजल तुम् मुझे छोड़कर नहींजा सकती काजल “
तभी
धाय ….
एक् गोली मेरेपीठ मे आकरधंस गई, ठाकुर लेटेहुए थां औऱ उसके हाथो मे बंदूक थि
मे गुस्से सें लाल हौ चुका थां औऱ उसेजान सें मार देना चाहता थां.
मैंने पास हि पड़ाहुआ एक् रॉड उठाया औऱ उसके पैरो मे घुसा दिया, वोँ चीखा हि थां कि मैंने अपने पैरो सें उसकेमुह पऱ वॉर किया, वोँ बेसुध हौ गय़ा मे फिन सें काजल केँ पासआया, मे रोरहा थां मेरी काजल मुझे छोड़कर नहींजा सकती थि ………
मे होशं मे आया तोँ मैंने अपनेपास डॉ चुतिया कों पाया,
“काजलकहा हैं “
मेरा पहला प्रश्न यही थां.
“वोँ कोमा मे हैं, गोलियां निकाल दि गई हैं मगरहोश नहींआया हैं, खैरियत हैं कि दिल कों गोली नहींलगी वरना”
मे रोनेलगा थां
“यहसभी मेरी हि गलती केँ कारणहुआ हैं डॉ नाँ मे वोँ कदम उठता औऱ नां हि यह हादसा होता “
डॉ मेरेपास आकर मेरेसर पऱ हाथ फेरा.
“तुम्हारी गलती नहीं हैं देव अपने कों दोषमत दो जौ भि हुआ वोँ क़िस्मत कां हि तोँ खेल थां, सभीठीक हौ जाएगा “
“निशाकहा हैं ???”
मुझे अचानक हि निशा कि यादआयी
“वोँ भि ठीक हैं औऱ अभि जेल मे हैं, फिक्र मतकरो वँहा हमारे लोग हैं उसेकोई तकलीफ नहीं होगी, ”
मे थोड़ा शांतहुआ
“उसके खिलाफ कोई सबूत मिला ??”
मैंने फिन सें कहा
“नहीं अभि तक तोँ नहीं, केवल पूर्वी कि हि गवाही हैं उसके खिलाफ मगर उतना बहुत नहीं हैं, काजल केँ गवाही केँ बिनाउसे जेल मे अधिक दिनों तक नहींरख पाएंगे उसके वकील भि बहोत ई स्ट्रांग हैं, मगर अभि उसका छूटना ठीक नहीं होगा “
डॉ केँ चहरे मे चिंता साफझलक रही थि
“उसेबेल दिलवाओ डॉ वोँ मेरीबात सुनेगी, मे बहक गय़ा थां जोँ मे उसकीबात नहीं सुना, मगर इस हादसे सें मुझेसमझ आँ चुका हैं कि मुझे उसकी बातो कों सिरियसली लेना चाहिए थां “
“मगर उसके बाहर् आने सें काजल औऱ पूर्वी दोनो केँ हि जान कों खतरा हैं ??”
डॉ मेरी बातो सें चकितदिख रहे थें,
“मे सम्हाल लूंगा, मे उसे अच्छे सें समझता हूं आप् उसे बाहर् निकलवाये “
डॉ थोड़ीदेर तक तौ सोच मे हि डूबारहा मगरफिन वोँ बाहर् चला गय़ा, मे उठाकर उसके पीछे हि बाहर् आया
“आप् पागल होँ गए हौ क्याँ यह क्याँ कररहे होँ “
सामने पूर्वी औऱ शबनमखड़ी थि
“मुझे काजल सें मिलना हैं “
“अभि तुम् आरामकरो साम कों मिल लेना, ऐसे भि उसे अधिक मिलने नहीं दिया जाता हम् तम्हे स्ट्रेचर मे लेँ जाएंगे “
शबनम कि आंखों मे भि पानी थां औऱ पूर्वी केँ भि, मुझेशक थां कि कही काजल कों कुछहुआ तौ नहीं हैं औऱ यहलोग मुझसे झूटबोल रहे हैं, मैंने शंका कि नजर सें दोनो कों देखा,
पूर्वी रोतेहुए मेरेपास आयी औऱ मुझसे लिपट गई.
“भाई यह क्याँ हौ गय़ा “
“काजलठीक तौ हैं नां तुमलोग मुझसे कुछ छिपा तोँ नहींरहे “
पासखड़े हुएडॉ केँ चहरे मे मुस्कान गहरा गई
“छुपाने कों बचा हि क्याँ हैं देव, अभि आरामकरो साम कों मिल लेना, फिक्र मतकरो काजलहमे छोड़कर इतनी जल्द नहीं जाने वाली “
डॉ केँ चहरे मे दृढ़ता केँ भावउभर गए जैसे उन्हें काजल पऱ बहोत हि ज़्यादा यकीन होँ.
अध्याय 49
काजल मेरी काजल, आंखेबंद किये नां जानेकीस दुनिया मे खो गई थि, उसे देखकर एक् बार तोँ मूझे चक्कर हि आँ गय़ा, मे वही थां जोँ कुछ दिनों पहलेउसे मारने कां प्लान कररहा थां, आज उसकीइस कुर्बानी नें मुझेफिन सें याद दिलाया जौ वोँ मुझे बोला करती थि,
‘मे तुम्हारी हि रहूंगी देव चाहेबदन किसी औऱ केँ पास हि क्यो नां रहेमगर रूहतलक बस तुम्हारी हि रहूंगी ‘
मेरी आंखेभीग गई थि औऱ मे सिसकरहा थां, मेराहाथ अभि भि काजल केँ हाथो मे थां, वोँ ऑपरेशन थिएटर मुझे काटने कों दौड़रहा थां,
‘कितना पागल थां तूँ देव जौ अपनीजान कि वफादारी पऱ उसके प्रेम पर्र शक किया ‘
मेरेदिल सें बारबार यहीबात निकलरही थि मे बैठा बैठा अतीत कि यादों मे खो गय़ा थां, 3 महीने पहलेजब मैंने काजल कि जासूसी कां फैसला किया थां शायद वोँ मेरे जिंदगी कां सबसे बेकार फैसला थां, काजल मुझेसभी कुछ तौ बताना हि चाहती थि, वोँ तौ यह भि चाहती थि कि मे उसे दूसरे केँ संग देखकर भि एन्जॉय करू.
हा एक् पति केँ लिएयह कितना कठिन थां यह मे औऱ वोँ दोनो हि जानते थें मगर वोँ भि अपनेजिद मे थि औऱ मे भि …
वोँ दिनजब मे हरिया सें मोबाइल कर उसके फार्महाउस मे आने कि बातकही मैंने उसे एक् नौकरी कां आफर दिया थां, मुझेपता थां कि काजल औऱ ठाकुर वही मिलने वाले हैं, ठाकुर उसेकोई तोहफा देने वाला थां पता नहीं वोँ क्याँ थां,
हरिया कों भि यहबात पता थि कि 12 बजे केँ लगभगखान कां मित्र इंस्पेक्टर ठाकुर वँहाआने वाला थां, उसने इसीबात केँ कारण मुझेमना कर दियामगर मे उससे इतममिन सें बात करना चाहता थां…
मे फॉर्महाउस मे थां.
“सरजी आप् मेरीबात नहींसमझ रहे हैं वोँ बड़े हि खतरनाक लोग हैं ‘
उसकीबात सुनकर मे मुस्कुरा उठा
“अच्छा यह बताओ क्याँ यही लड़की उनकेसंग आती हैं “मैंने उसे काजल कां फ़ोटो दिखाया वोँ चौक गय़ा
“इस रांड कां फ़ोटो आपकेपास केसे “
रांड मेरेदिल मे एक् जलन सि उठी मेरे हि सामने साला मेरी हि पत्नि कों रांडबोल रहा थां
“बस जानता हु, तुम्हे नौकरी चाहिए नाँ “
वोँ घबरा गय़ा थां
“मेरीलाश पऱ मे नौकरी कां क्याँ करूँगा आप् कौन हौ, औऱ आप् मुझसे क्याँ करवाना चाहते हौ, सरजी मुझे तोँ लगा थां कि आप् एक् शरीफ इंसान होँ इसलिये आपकी सहायता करने कि सोचीमगर आप् कि नियत तौ मुझेसाफ नहींलग रही हैं.वोँ लोग मुझे औऱ मेरे पूरे परिवार कों मार देंगे.”
वोँ बहोत हि डराहुआ लगरहा थां, हौ भि क्यो नां उसेखान औऱ ठाकुर केँ बारे मे कुछ तौ पता हि रहा होगा
“एक् चीज कां ईमानदारी सें जवाब देना, क्याँ खान औऱ ठाकर तुम्हारी पत्नि पर्र गंदीनजर नहीं डालते “
वोँ सन्नरह गय़ा.उन्होने तौ कईबार उसे पैसे भि ऑफर किये थें मगर वोँ शरीफ स्त्री थि.
उसकासर झुक गय़ा
“क्याँ तुम्हारा खून नहीं खोलता, क्याँ पैसे कि इतनी अहमयत हैं कि तुम् अपना ईमान भि बेच दोगो “
मेरी बाते उसके सीने मे तीर सि चुभने लगी थि
“मे कर भि क्याँ सकता हु, औऱ वोँ लोग ज़्यादा झेड़ते नहीं, मे अंजू (हरिया कि पत्नि ) कों उनकेपास भेजता भि नहीं “
“अगर किसीदिन ईश्वर नां करे कि वोँ लोग दारू केँ नशे मे हौ औऱ अपनीतलब कां शिकार अंजू कों बना लेँ तोँ क्याँ करोगे “
वोँ दंग सां मुह फाड़े मुझेदेख रहा थां उसे भि पता थां कि यह भि होँ सकता हैं औऱ वोँ कुछ भि नहींकर पायेगा
“ऐसा केसे हौ सकता हैं अभि तक तोँ ऐसा नहींहुआ “
“नहींहुआ याँ तुम्हे पता नहीं हैं, होँ सकता हैं कि उन्होंने अंजू केँ संग जबरदस्ती कि कोशिस कि होँ मगर अंजू नें अपनी मजबूरी केँ कारण तुम्हे कुछ भि नहीं बतलाया होँ ….”
कुछदेर केँ लिए शांति छा गई थि, उसकीनजर जमीन कों देखरही थि औऱ वोँ कई सोचो मे गुम थां, मे उसकी मजबूरी समझता थां वोँ यह नॉकरी छोड़कर नहींजा सकता थां, क्योकि बाहर् केँ दुनिया इससे भि खतरनाक थि …
“तुमने हि तौ मुझे बतलाया थां नां कि उन्होंने अंजू कों ऑफर किया थां, मगर अंजू नें मनाकर दिया थां.यहबात क्याँ अंजू नें तुम्हे जल्दी हि बता दि थि …”
वोँ चुप थां
“यहबात भि तोँ उसनेतब हि बताईजब तुमने उसे उनकेपास गिलास लेँ जाने कों कहा थां, हैं नाँ “
हरिया नें मुझे पहले हि सभीकुछ बता दिया थां औऱ मे जानता थां कि वोँ अपने परिवार सें बहोत हि प्रेम करता हैं.
उसनेहा मे सर हिलाया
“देखो हरिया तुम्हारी औऱ मेरी कंडीसन एक् हि हैं, जैसे तुम् उन लोगो सें डरेहुए हौ वैसे हि मे भि डरा हूं, जैसे तुम् मजबूर होँ वैसे हि मे भि मजबूर हु, क्यो नाँ इन लोगो कों हि समाप्त कर दियाजाए “
वोँ चौककर मुझे देखने लगा
“ख़त्म करने कां मतलब मारने सें नहीं हैं, आर्थिक रूप सें ख़त्म करने कि बात हैं, उनका पावर समाप्त कियाजा सकता हैं, ”
वोँ समझ नहींपा रहा थां कि वोँ क्याँ करे
“औऱ इसमें तुम्हारा भि फायदा होगा “
उसने मुझे ध्यान सें देखा
“कैसा रहेगा अगरयह फॉर्महाउस हि तुम्हारा होँ जाए, ”
वोँ फिन सें चौका
“मे यहकर सकताहु तुम्हे बस मेरी थोड़ी सि सहायता करनी होगी, तुम्हे औऱ तुम्हारे परिवार कों कुछ भि नहीं होगा इसकी मे गारेंटी लेँ सकताहु क्योकि उन्हें कभीपता हि नहीं चलेगा, औऱ मे अगर पकड़ा भि गय़ा तौ डरो नहीं मे तुम्हारा नाम नहीं लूंगा, वोँ मेराकुछ भि नहीं बिगड़ सकते डोंटवरी, तुम् अपने औऱ अपने परिवार केँ लिएयह करो मेरासंग दो, मुझे यंहाआने जानेदो, तुम्हारी पत्नि, तुम्हरे पिता औऱ तुम्हारे बेटे कों भि इसके बारे मे नहींपता चलेगा, तुम् फिक्र मतकरो, ”
फॉर्महाउस बहोत हि बड़ा थां औऱ सच मे यंहाअगर कोईलाश भि लाकेगाड़ दे तोँ किसी कों पता नहीं चलेगा …
उसनेहा मे सर हिलाया उसकी सहमति कां मतलब थां कि अबयह फॉर्महाउस मेरा हि थां.मे यंहाजब चाहेआकर जोँ चाहेकर सकता थां.मे खुसी सें उसे देखा औऱ पहली पगार केँ रूप मे 2 हजार कां एक् नोट उसकीओर बढ़ाया.
“नहीं साहबयह सभी नहीं चाहिए, बस जोँ आपनेकहा वोँ होँ जाए तौ मेरी जीवनसफल होँ जाए “
पहलीबार मैंने हरिया केँ आंखों मे लालच देखा थां, मे उस साधारण सें भोले इंसान कों लालची नहीं बनाना चाहता थां मगर क्याँ करू मेरी भि तोँ मजबूरी थि ….
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12 बज चुके थें औऱ ठाकुर पहले सें हि आँ चुका थां वोँ बेचैनी सें इधरउधर घूमरहा थां वोँ पहले सें हि 3-4 पैक दारू केँ पी चुका थां, उसने आते हि सोफे मे एक् बड़ा सां तोहफा केँ रैपर मे पैककोई समानरखा थां, पता नहीं वोँ काजल कों क्याँ देने वाला थां, वोँ घड़ी देखता तौ कभीफोन …
ठाकुर कों देखते हि मुझेसमझ आँ गय़ा थां कि आखिर काजल इसमें इतना इंटरेस्ट क्यो लेँ रही हैं यहवही इंस्पेक्टर थां जिसने मुझे औऱ काजल कों अजीम सें मिलवाया थां, तौ वोँ खान कां यार भि हैं औऱ संग हि काजल केँ चाहने वालो मे सें एक् भि, वोँ अभि जेल कां जेलर थां औऱ अजीम सें संपर्क बनाने मे काजल कां सबसेबड़ा हथियार.
मैंने हरिया सें बंगले कि पूरी डिटेल लें ली थि, मुझेपता थां कि वोँ कौन सां रूमयूज़ करते हैं, औऱ कहा सें उन्हें देखाजा सकता हैं, केसे उनकी बाते सुनीजा सकती हैं, मैंने कुछ माइक्रोफोन वँहालगा दिए थें ताकि मुझेकम सें कम आवाज़ तोँ सुनाई दि, देखने कां भि जुगाड़ होँ गय़ा थां.
वक़्त ऐसेलग रहा थां कि बहोत हि धीमीगति सें बढ़रहा हैं वही मेरी औऱ ठाकुर कि दिल कि धड़कने जरूरबढ़ी हुई थि …
आखिर वोँ वक्त आँ हि गय़ा जब काजलआयी, आज उसने कालेरंग कि साड़ी पहने हुई थि, उसे देखकर एक् बार मेरादिल जोरो सें धड़काकहा मेरी नाजुक सि कोमल सि काजल औऱ कहायह काला भैसा.
उसके मादकता सें कोई भि मर्द दीवाना होँ जाए तोँ यह भि कम हि थां,
मे नजर गड़ाएहुए उन दोनो कों देखता रहा.
उसे देखकर ठाकुर कां मुह खुला कां खुला हि रह गय़ा, काजल मुस्कुराते हुएआयी औऱ सीधे ठाकुर केँ गले सें लग गई,
“ओह ठाकुर साहब आपको अधिक प्रतीक्षा तोँ नहीं करनापड़ा “
ठाकुर नें पहले तौ अपनाथूक गटका.उसे मानो यकीन हि नहीं हौ रहा थां कि इतनी हसीन लड़की भि दुनिया मे होती हैं,
काजल कां हर एक् अंग उसकी साड़ी सें झांकरहा थां, वोँ दूध सि गोरी औऱ मसलता सें भरपूर थि, मुझे तौ कभीकभी अपनी हि भाग्य पर्र यकीन नहीं होता थां कि ऐसी लड़की जिसे पाने कों दुनिया दीवानी हुइ घूमती हैं मेरे पलंग मे रोज हि रहती हैं.
उस काली साड़ी मे सें उसका यौवन औऱ भि निखरकर आँ रहा थां,
वोँ आकर सीधे ठाकुर केँ गले सें लग गई, उसकेतने हुए बूब्ज़ ठाकुर केँ चौड़े सीने मे गड़े, वोँ एक् भैस जैसा हि दिखरहा थां औऱ काजल केँ उज्ज्वल शरीर केँ आगे तोँ उसका कालापन औऱ भि अधिकखिल रहा थां,
ठाकुर तोँ मानो स्वर्ग मे हि थां, औऱ इसे देखकर मेरी झांटे सुलगरही थि,
मादरचोद साला.मेरेमुह सें अनायास हि निकल गय़ा
मगर ठाकुर भि उसके सौन्दर्य कों देखकर डररहा थां, क्योकि जितना लालच हौ उतना खोने कां डर भि तौ होता हैं,
वोँ कोई भि कदम जल्दबाजी मे नहीं बढ़ाना चाहता थां,
“तुम्हारे लिए तोँ जीवनभर प्रतीक्षा कर सकताहु “
उसनेबड़े हि रोमांटिक अंदाज सें कहा, काजल मुस्कुरा उठी
“सो स्वीट “ठाकुर कां चहराखिल गय़ा होँ भि क्यो नां, साला मादरचोद …
काजल अंदरआयी औऱ सोफे मे बैठ गई
“वाओ ठाकुर जी अपने मेरेलिए तोहफा लिया हैं, वाओ “
वोँ ऐसी चहकी जैसेकोई बच्ची होँ
“हाजान मात्र तुम्हारे लिएमगर मे चाहता हु कि तुम् मेरेलिए इसे पहनो “
काजल नें शरारत भरे नजरो सें उसे देखा, अच्छा तोँ यह साला ठरकी मेरेजान केँ लिएकोई कपड़ा लाया हैं.
“ठाकुर साहब आप् जानते होँ नां खान साहब कों पता लगेगा तोँ …”
काजल नें ऐसेकहा जैसे कि वोँ तोँ राजी हैं मगरखान कां डर हैं
“तुम् फिक्र क्योरही हौ वैसे भि तुम् उसकी पत्नि तोँ होँ नहीं औऱ मे भि उसकाहर काम इसीलिए करताहु क्योकि तुम् कहती हौ वरना मे खान केँ उल्टे सीधेकाम करता क्याँ “
अच्छा तौ वोँ काम केँ बदले मेरी पत्नि कि लेना चाहता थां.साला मादरचोद.
मे मन हि मनउसे गालियां तौ देरहा थां मगर मे भि उत्तेजित हौ रहा थां कि आखिर उसनेऐसे कौन सें कपड़े लाये हैं जिसे वोँ काजल कों पर्सनली पहनाकर देख्ना चाहता थां.
काजल उसकीबात सुनकर मुकुराई
“वोँ तौ ठिक हैं मगरफिन भि मे हु तौ खान साहब कि हि गुलाम.”
काजल कां चहरा मुरझा गय़ा, अब वोँ सच मे मुसझाया थां याँ वोँ एक्टिंग कररही थि वोँ कहना कठिन थां.
“अरे तुम् ऐसा क्यो सोचती हौ मे हु नाँ, तुम्हे गुलाम सें मालिकिन बना दूंगा “
ठाकुर उसकेपास जाकरबैठ चुका थां औऱ काजल भि उसके कंधे मे अपनासर ठिका चुकी थि, मे जलेहुए दिल सें यहसभी देखरहा थां कि केसे मेरी पत्नि उस अधेड़ सें काले औऱ बदसूरत व्यक्ति कों अपने खूबसूरती केँ जाल मे फंसारही थि, वोँ कितना आगेजा सकती हैं यह सोचकर हि मे रोमांचित हौ जारहा थां, मे सांसे रोकेहुए देखरहा थां …
“हम्म्म्म मगर आप् तोँ ठहरेखान साहब केँ मित्र आप् मेरी सहायता क्यो करेंगे आपको तौ बस मेरी जवानी हि चाहिये …”
काजल नें अब भि दुःखी सां मुह हि बनाया थां
ठाकुर नें मौकादेख कर उसके कंधे पर्र अपनाहाथ फिरना शुरुआत कर दिया थां, साला मादरचोद.
काजल उसके औऱ भि लगभग आँ गई औऱ उससे लिपट हि गई
“अरे मेरीजान तुम्हे किसने कह दिया कि मे उसका साथीहु, वोँ साला मुझसे अभि तक कई गैरकानूनी काम करवाता रहा बदले मे मुझे क्याँ मिला????यह नॉकरी???
कितनी सेलरी मिलती होगी मुझे औऱ ऊपरी कमाई भि कुछ नहीं, जब भि उसके मतलब कां काम होता हैं साला मुझेवही ट्रांसफर करवा देता हैं, मगरअब मेरेपास तुम् होँ औऱ तुम् हि उसके क़िस्मत कि चाबी होँ क्यो नां हम् दोनो हि मिलकर उसके गांड मे लात मारे औऱ मेरे पावर औऱ तुम्हारी काबिलियत केँ बदौलत हम् दोनो हि उसकेसर पऱ पांव रखकर निकलजाए “
काजल केँ चहरे मे फिन सें मुस्कान खिल गई, मगर उसने स्वयं कों सम्हाल लिया
“यह आप् क्याँ कहरहे हैं आप् तोँ उनकेयार हैं नाँ “
ठाकुर केँ चहरे मे मुसकान औऱ भि गाढ़ी होँ गई
“तुम्हे क्याँ लगता हैं तुम् जोँ अजीम केँ संगकर रही हौ खान कों बिना बताए वोँ मुझे नहीं मालूम.मे जानता हु कि तुम्हारी नजरखान केँ जयजात पऱ हैं मगर तुम् उसे अकेले तोँ नहींहड़प सकती तुम्हे मेरी जरूरत तौ होगी हि, ”
अब काजल केँ चहरे मे मुस्कान साफसाफ दिखाई देनेलगी
“मे जानती थि कि तुम् बहोत हि होशियार होँ इसीलिये तोँ मैंने तुम्हे चुना “
दोनो नें हि एक् दूसरे कों मुस्कुरा कर देखा, वोँ आप् सें तुम् मे उतर चुकी थि
“औऱ मे भि जानता थां कि तुम् बहोत चालाक होँ इसलिये तौ तुम्हे यंहा बुलाने कि हिमाकत कर गय़ा “
दोनोये खिलखिला कर हंसे
“तोँ एक् जाम होँ जाए “
ठाकुर उठकरदो ग्लास मे शराबभर लाया थां, अब खान कां पुरानां राजदार काजल कां मित्र बन चुका थां औऱ अब काजल कों अपनी अदाओं सें उसे अपना दीवाना बनाना थां.
वोँ जाम अपने हाथो मे लेकर उसकेजाम सें टकराई
“यहजाम हमारी दोस्ती केँ नाम “काजल कुटिलता सें मुस्कुराई
“औऱ संग हि खान कि बर्बादी केँ नाम “
ठाकुर भि मुस्कुरा रहा थां, दोनो हि एक् हि सांस मे पूरापैक पीगए औऱ एक् दूसरे कों देखने लगे, मेरेदिल मे बस एक् हि बात आँ रही थि ….साला मादरचोद.
मे इसके सिवाय औऱ सोच भि क्याँ सकता थां,
उसने अपनाहाथ काजल केँ कमर पऱ रख दिया
“अब तौ आप् हमारी मित्र बन चुकी हैं तोँ यह तोहफा स्वीकार करे औऱ संग हि हमारी शर्त भि “
“क्याँ शर्त “
“यही कि इसे हम् अपने हाथो सें आपको पहनना चाहते हैं “
काजल खिलखिलाई औऱ मेरा गांड सुलग गय़ा.
“अच्छा देखे तोँ जनाब हमारे लिए क्याँ लाये हैं “
काजल नें उपहार कों खोला
“यू नॉटी.इसे पहनना चाहते हैं आप्, हम् तोँ आपकोबड़ा हि शरीफसमझ रहे थें औऱ आप् तौ “
काजल क्रोध तोँ नहीं थि मगरबड़े हि मादक अंदाज मे औऱ मादकता भरेहुए शिकायत केँ अंदाज मे ठाकुर कों देखरही थि …
“तुम्हारे जैसी सुंदरता कों देखकर कोई मर्दकब तक शरीफ रहेगा, औऱ यह तौ मेरा सपना थां कि मे तुम्हे यह अपने हाथो सें पहनाऊँ …”ठाकुर नें बड़े हि शायराना अंदाज मे कहा औऱ संग हि ऐसेकहा जैसे काजल सें रिक्वेस्ट कररहा हौ.
मैंने नजरे गड़ाई कि आखिर वोँ तोहफा थां क्याँ, मुझे कालेरंग कां हि कुछ दिखाई दिया,
काजल नें उसे उठाया,
“इसे पहनने कां सपनादेख रहे थें जनाब “वोँ मुस्कुराई मगर मेरासभी कुछजल गय़ा
‘साला मादरचोद ‘मे फिन सें बुदबुदाया
काजल केँ हाथो मे कालेरंग कि एक् झीनी सि पतली पेंटी थि, शायद एक् ब्रा अभि भि उपहार केँ पैकेट मे रखा थां.
दोनो हि एक् दूसरे कों देखकर मुस्कुरा रहे थें मगर मेरी हालत बहोत हि गंभीर थि ……….
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 50
काजल ………
वोँ ऐसे विहेब कररही थि जैसे ठाकुर उसका प्रेमी हौ,
औऱ ठाकुर …
सालाउसे देखकर तौ उसेमार हि देने कां मनकररहा थां,
काजल औऱ वोँ दोनो हि सोफे मे बैठेहुए हँसरहे थें,
“आपको नहीं लगता कि यह थोड़ी छोटी हैं “
काजल नें उस पेंटी केँ बारे मे पूछा, जिसके जवाब मे ठाकुर नें उसके साड़ी सें झांकते औऱ मानोफाड़ केँ बाहर् आने कों बेकरार वक्षो कों हल्के सें मसल दिया
“आउच कितने बदमाश होँ आप् “
काजल मचली जरूरमगर उसके होठो मे मुस्कुराहट बढ़ गई थि,
“अभि तौ बदमाशी औऱ भि ज़्यादा करने कां मनकररहा हैं जानेमन मगर तुम्.कुछ करने हि नहींदे रही “
काजल खिलखिला करहँस पड़ी,
“मुझेइसे तुम्हे पहनाना हैं “
ठाकुर मचलरहा थां
“इतनी भि क्याँ जल्द हैं “
काजलअदा सें खड़ी हुइ औऱ हल्का म्यूजिक लगाकर उसके सामने आँ खड़ी हुईँ, वोँ म्यूजिक केँ रिदम मे अपनेकमर कों हल्के हल्के हिलारही थि औऱ उसकी आंखे सीधे ठाकुर कि आंखों सें मिली हुईँ थि, वोँ अदा सें हिलरही थि, साड़ी सें झांकती हुईँ उसकी नंगीकमर चमकरही थि औऱ उसकी नाभि केँ गहराई साफसाफ दिखने लगी थि,
ठाकुर कि आंखे उसकीकमर मे हि फंस चुकी थि, वोँ सांप सि उसे लहरारही थि,
ठाकुर कि सांसे मानोरुक गई जब काजल उसके औऱ भि पास आँ खड़ी हुईँ, उसकीकमर अब ठाकुर केँ सर केँ पास हि थि, शायद उसकी सांसे अब काजल केँ पेट कों छूरही होगी,
ठाकुर नें अपनासर थोड़ाआगे करउसे चूमने कि कोशिस कि पऱ काजल खिलखिलाकर उससेदूर हौ गई,
ठाकुर नें बुरा सां मुह बनाया तौ काजलफिन सें उसकेपास पहुच गई औऱ इसबार वोँ उसकेसर पर्र हाथ रखकरउसे अपनीओर खिंचा,
ठाकुर कां मुह सीधे काजल केँ नंगेपेट सें जा टकराया, वोँ पहले तौ अपनीनाक उसके नाभी मे रगड़ने लगाफिन अपनीजीभ निकाल करउसे चाटने कि कोशिस करनेलगा,
“अहह “काजल नें एक् मादकआह लीउसे जोरो सें अपनेओर खिंच लिया
अब ठाकुर कां मुह पूरा कां पूरा हि उसकेपेट मे धंस गय़ा थां काजल कि पकड़ इतनी थि कि ठाकुर सांसे भि नहीं लें पारहा थां नाँ हि वोँ अपने चहरे कों हि हिलापा रहा थां …
वोँ बौखला गय़ा थां औऱ काजल कि गिरफ्त सें छूटने कि कोशिस करनेलगा, काजल जोरो सें हँसी औऱ उसेदूर कर थोड़ीदूर होँ गई…
हल्का हल्का सेक्सोफोन कां म्यूजिक सच मे बहोत हि मधुर थां औऱ संग हि बहोत हि रोमांटिक भि, काजलफिन सें उसकी आंखों मे अपनी आंखे गड़ाकर हिलाने लगी औऱ इस उसने अपनेबाल भि खोललिए जिससे उसकेघने औऱ लंबेबाल उसके कंधे औऱ छातियों पर्र भि बिखरगए थें, वोँ अपने बालो सें मादक अंदाज मे सहलाने लगीसंग हि उसेऊपर किया, वोँ उससे खेलने लगी उसकीकमर अब भि म्यूजिक केँ संगसंग हि चलरही थि,
ठाकुर उसे देखकर ऐसे बावरा गय़ा थां मानो किसी गरीब कों खजाना हि मिल गय़ा होँ.
वोँ आंखे फाडेहुए काजल कि अदाएं देखरहा थां, जैसेपलक झपकना औऱ सांस लेना भि भूल गय़ा हौ.
काजलफिन सें उसकेपास आयी औऱ अपने पल्लू होँ गिरा दिया,
उसके ब्लाउज सें भि उसके स्तनों कि सुडौलता औऱ भरावसाफ साफझलक रहे थें, ठाकुर केँ आंखों मे हवसजाग गई थि वोँ उसे ललचाई निगाहों सें देखरहा थां, काजल नें उसके लगभगआकर फिन सें उसके चहरे कों पकड़ लिया, वोँ भि किसी खिलौने कि तरह उसकी आज्ञा कां पालन करनेलगा थां, काजलउसे अपने सीने केँ पास लायीमगर गड़ाया नहीं वोँ उसेऊपर सें हि महसूस कररही थि, ठाकुर केँ आनन्द कि सीमा क्याँ थि यह उसकी आंखेबता रही थि उसकी आंखेबंद हौ चुकी थि, वोँ स्वयं सें कुछ भि नहींकर रहा थां सभीकुछ काजल हि कररही थि,
वोँ अपनीनाक उसके स्तनों मे रगड़ने लगा, काजल कि भि आंखेबंद हौ गई मानो किसी परम्सुख कां अनुभव कररही होँ, यहकोई एक्टिंग थि याँ हकीकत इसका अनुमान लगाना भि मेरेलिए कठिन हौ गय़ा थां, वोँ मेरेसंग भि ऐसा हि करती थि,,
वोँ आंखेबंद कर उसकेनाक कि रगड़ कों महसूस कररही थि, औऱ आनन्द मे सिसकियां लें रही थि …
वोँ थोड़ा औऱ जोर लगाती हैं इसबार वोँ झुककर अपने वक्षो कि घाटी मे उसकेसर कों घुसा देती हैं, इसे देखकर तोँ मेरा भि लिंगअकड़ गय़ा थां, क्योकि काजल कि गोरी गोरी औऱ बड़ी सि उसखाई मे ठाकुर कां काजला सां मुहबड़े हि अजीब तरीके सें मुझे भि उत्तेजित कररहा थां,
वोँ अपनीजीभ निकाल करउसे चाटना चाहता थां मगर मे गलत थां वोँ तौ उसे खाने पर्र उतारू हौ चुका थां, ठाकुर केँ दांत काजल केँ नंगे स्थल पर्र जारहे थें वोँ ब्लाउज कों भीगारहा थां औऱ संग हि संग दांतो सें हल्के हल्के सें काट भि रहा थां, उसकी जीभ भि आकर अपनाथूक काजल केँ वक्षो मे छोड़रही थि…
काजलमचल रही थि औऱ उसे औऱ भि जोरो सें अपनेऊपर दबारही थि वही ठाकुर अपनी आंखेबंद कियेहुए उस जन्नत कां आनंद लें रहा थां जिसका हक केवल मुझे मिलना थां,
मे जलन औऱ गुस्से सें तोँ भररहा थां मगरसंग हि संग एक् उत्तेजना भि मुझमें घुलती जारही थि,
ठाकुर खड़े होने कि कोशिस करता हैं मगर काजलउसे खड़ा होने हि नहीं देती औऱ हंसकर फिन सें दूरचली जाती हैं,
उसकी आंखे ठाकुर कि आंखों सें मिली दोनो केँ हि होठो मे मुस्कुराहट थि, एक् अजीब सि मुस्कुराहट, ठाकुर नें आंखों हि आंखों मे काजल सें पासआने कां इशारा कियामगर काजल नें आंखों हि आंखों मे ठाकुर कों नाँ कां इशारा किया, ठाकुर हल्के सें मुस्कुराया औऱ खड़ा हौ गय़ा, मैंने देखा कि उसके पेंट सें हि उसका तनावसाफ साफदिख रहा थां, उसने अपनी शर्ट उतार फेंकी औऱ अपनी बनियान भि, वोँ थोड़ा पेटू जरूर थां मगर लगता थां कि उसने अपनी जवानी मे बहोत कसरत भि कि होँ क्योकि उसके मसल्स बहोत हि बड़ेदिख रहे थें, वोँ किसी कुश्ती केँ पहलवान कि तरहलग थां, उसकाकाल जिस्म भि कमरे केँ रोशनी मे चमकने लगा,
काजल नें उसके जिस्म कों ललचाई निगाहों सें निहारा औऱ उसके आंखों कों मादकता सें देखने लगी, ठाकुर भि अपनेबदन कि नुमाइश करनेलगा औऱ अपने पेंट कि ओर इशारा किया जिसमे उसका लिंगअकड़ रहा थां, काजल नें मुह थोड़ा खुला, पता नहीं वोँ सच मे खुला थां याँ उसने स्वयं हि इसे खोला थां, मगर वोँ ऐसा करने सें ठाकुर कों औऱ भि मोहित कर गई वोँ स्त्रियों वालीसभी अदाओं कों जानती थि जिसे एक् मर्द हमेशा हि पसन्द करता हैं,,,
काजल कि इस हरकत सें ठाकुर थोड़ा हंसा औऱ उसकेपास जानेलगा काजल उससेदूर जानेलगी वोँ उसे पकड़ने कों झपटा, काजलहट गई वोँ थोड़ा लड़खड़ाया औऱ कमीनी सि मुस्कान केँ संग उसकीओर बढ़नेलगा, थोड़ारुक कर उसने अपनी पेंट भि निकाल करहवा मे उछाल दि, उसके अंडरवियर सें उसका लिंगसच मे बहोत हि बड़ा औऱ खतरनाक लगरहा थां, उसका काला जिस्म चमकउठा थां, वोँ बहोत हि उत्तेजित थां औऱ काजल कों कहा जाने वाली निगाहों सें देखरहा थां, काजलकभी उसके जिस्म कों देखती तोँ कभी उसके अकड़ेहुए लिंग कों, काजल केँ होठो मे अब भि मादक मुस्कान थि वोँ उसे ताड़रही थि औऱ ठाकुर भि तड़फता हुआ उसकीओर बढ़रहा थां,
जैसे जैसे ठाकुर उसकीओर बढ़ता वोँ पीछे होती जाती.
वोँ फिन सें झपटाइस बार उसकाहाथ ठाकुर केँ पकड़ मे आँ गय़ा थां
“आउच छोड़िए नाँ “
काजल नें मचलते हुएकहा जिससे ठाकुर हँसपड़ा औऱ उसे अपनीओर खिंचकर अपने सें मिला लिया
ठाकुर नें उसे बहोत हि जोरो सें जकड़रखा थां ऐसे कि कोईहवा भि दोनो केँ बीच सें पास नाँ हौ पाए,
काजल केँ वक्ष उसकी बालो सें भरी चौड़ी छातियों मे धंस गई थि वही ठाकुर कां लिंगअब काजल केँ जांघो केँ बीचरगड़ रहा थां, काजल इससे औऱ भि मचलरही थि मगर ठाकुर उसेकोई भि मौका नहीं देने वाला थां, उसने अपने होठो कों काजल केँ गले औऱ कंधों पऱ चलाना शुरुआत कर दिया
“अहह नहीं नां अहह “
वोँ छूटने कां प्रयास करनेलगी थि मगर मे भि जानता थां कि वोँ छूटना नहीं चाहती थि वोँ औऱ भि उसमें गड़ीजा रही थि, औऱ भि मचलरही थि
“अहह नहीं नाँ। अहह रुको नाँ.थोड़ा सब्र तौ करोअहह ओह “
काजल कि इन आवाजो सें ठाकुर केँ संगसंग मे भि पागल हौ रहा थां, वोँ औऱ भि जोरो सें उसे चूमता औऱ अपनेकमर कों उसकेकमर सें टकराता, भला होँ उस साड़ी कां जिसे मेरी पत्नि नें पहनरखा थां वरना उसका लिंग अभि काजल केँ अंदर हि होता वोँ 90 डिग्री मे उठाहुआ थां औऱ सीधे हि काजल केँ जांघो मे रगड़रहा थां,
काजल कों भि इसका आभास जरूर हौ रहा होगा, वोँ भि गरम होनेलगी थि उसका विरोध कम होँ रहा थां औऱ वोँ बसआहे लें रही थि वोँ अब भि छोड़िए नां कहरही थि मगर बहोत हि कमजोर स्वर मे, वोँ उत्तेजित थि औऱ शायद गीली भि …….
ठाकुर नें उसकीकमर कों पकड़कर औऱ भि जोरो सें अपनीओर खिंच लियासंग हि अपनीकमर कों भि उसकेकमर सें टकराया
“अहह “एक् जोर कि आवाज़ काजल केँ मुह सें निकली
दोनो कि हि आंखे मिली औऱ काजल नें उसे हल्के सें मुक्के सें मारा, ठाकुर नें काजल कों किसी गुड़िये कि तरह हि उठा लिया औऱ उसे सीधे सोफे मे जा फेका औऱ उसकेऊपर छा गय़ा, उसके भारीबदन नें मेरी कोमल सि जान केँ नाजुक बदन कों ऊपर पूरीतरह सें ढंक लिया थां, वोँ उसेमसल रहा थां औऱ अब उसकाहाथ काजल केँ ब्लाउज तक पहुच चुका थां वोँ सें मसलरहा थां औऱ उसे उतारने कि कोशिस भि कररहा थां, उसनेउसे काजल केँ कंधे सें नीचे गिरा हि दियामगर वोँ अब भि काजल केँ बांहो मे फंसे थें, वोँ उसके नंगे कंधे कों चूमने लगा औऱ उसे अपनीलार सें भिगाने लगा, काजल मादक सिसकियां लेँ रही थि,
वोँ काजल कि घाटी तक अपनीजीभ लेँ जारहा थां मगरअब भि ब्रा कि वजह सें वोँ पूरीतरह सें दिखाई नहींदे रही थि, मगर उसकी ब्रा जरूर दिखने लगी थि, वोँ जितना हौ सकेउसे चूमरहा थां औऱ उसने अपने दांत भि काजल केँ कंधे पऱ गड़ादिए,
इधर मे उत्तेजना केँ शिखर पर्र पहुच गय़ा थां मैंने कब अपना लिंग अपने हाथो मे लेँ लिया थां मुझे भि नहींपता लगा मे जोरो सें हिलाने लगा औऱ जैसे हि ठाकुर नें अपने दांत गड़ाए मे भि झाड़ा औऱ दीवार मे हि अपने कों खालीकर दिया, मेरी सांसे भि उखड़ी हुई थि, क्याँ हुआ औऱ क्याँ हौ रहा हैं इसकीसमझ मुझे अभि आई थि, मे पागल होँ चुका थां मे क्याँ कररहा थां,
ठाकुर नें काजल कि साड़ी खोलने केँ लिएहाथ बढ़ाया मगर काजल नें हाथपकड़ लिया
“यंहा नहीं बेडरूम मे चलिए “
ठाकुर नें उसे किसी बच्चे कि तरह उठाया संग हि वोँ ब्रा पेंटी भि उठाली जिसे वोँ काजल केँ लिए लाया थां, वोँ बेडरूम कि ओर जानेलगा, मे वहीबैठ चुका थां मे दहाड़कर रोनाचाह रहा थां, मुझेलग रहा थां कि जोँ मैंने किया थां वोँ गलत हैं, मे वँहा एक् लम्हा भि नहीं रुकना चाहता थां मे वँहा सें भागा,.
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 51
यह क्याँ हौ रहा हैं, इतना तिरिस्कार, इतनी जिल्लत, इतनी नाकामी….
इतना बेसहारा तौ मैंने अपने कों कभी महसूस हि नहीं किया थां, यह मेरे अंदर कि निर्लज्जता थि याँ नपुंसकता.
मे क्योकुछ नहींकर पारहा थां, मे अपने कों असहाय महसूस कररहा थां, मे अंदर सें टूटाहुआ महसूस कररहा थां,
मे डराहुआ थां, कुछ घबराया हुआ,.
मुझे किसी नें कुछ भि तोँ नहीं किया थां, किसी नें कुछ भि नहीं किया थां मगरयह क्यो हौ रहा थां,
क्यो मेरेमन मे काजल औऱ ठाकुर कि छबिबार बार आँ रही थि, क्यो मे इतना बेचैन थां कि वोँ दोनो आखिरकर क्याँ रहे होंगे, मे अपने कों रोक हि नहींपा रहा थां, मे फिन सें उसी दर्द कों बारबार महसूस कररहा थां, मे सोचकर हि सिहर उठता थां कि मेरी हि मौजूदगी मे कोई मेरी पत्नि केँ संग …….
मुझे रोना आँ रहा थां,.
आखिर क्यो मे इसे चुपचाप देखता रहा मे वँहा सें भाग क्यो नहीं गय़ा,
आखिर मुझेहुआ क्याँ थां कि मेरा लिंगयह सभी देखकर अकड़रहा थां, आखिर मे ऐसा केसे हौ गय़ा थां,
जिसकी रक्षा कि कसमली थि उसे दूसरे केँ संग देखकर ??????
मगरउसे क्याँ सच मे रक्षा कि जरूरत थि, मेरे खयाल सें नहीं, वोँ स्वयं हि इसे अपनायी थि, काजलअगर यंहा थि तौ वोँ अपनेलिए डिसीजन केँ कारण थि, यह उसका स्वयं कां हि तौ फैसला थां…….
मे गार्डन मे बैठाहुआ रोरहा थां कि मेरेफोन कि घंटीबजी…
मे चौककर देखा तोँ वोँ काजल थि, औऱ भि ज़्यादा चौक गय़ा …….
एक् पूरा रिंग होने पर्र भि मे उसे नहींउठा पाया, थोड़ी हि देर मे अगला रिंग भि बजनेलगा
“हैल्लो “मे थकाहुआ सां बोल पाया
“तुम् यंहा क्याँ कररहे हौ “वोँ बौखलाई हुईँ आवाज़ मे बोलि
मे हड़बड़ा गय़ा थां मे चारोओर देखने लगा, मे उस खिड़की केँ तरफ देखाजिस कमरे मे वोँ दोनोगए थें, कांच कि खिड़की मे लगेहुए पर्दे सें झांकती हुईँ काजल मुझे दिखी, मेरेपास कहने कों कोई शब्द नहीं थां, मगर शायद वोँ मेरी कंडीसन देखकर समझ चुकी थि आखिर मैंने क्याँ देख लिया हैं.वोँ अभि भि साड़ी औऱ ब्लाउज पहने हुईँ थि मगरअब भि उसका दुप्पटा उसके कंधे मे नहीं थां…
“तुम् तुम् पागल होँ क्याँ, यहां केसे आँ गए औऱ यह क्याँ कररहे हौ कोईदेख लेगा तौ.”
वोँ घबराई हुईँ थि
“औऱ ऐसाहाल क्योबना लिया हैं “
कहते कहते हि उसकागला भर गय़ा, उसकी आंखों सें पानी तौ नहींझर रहा थां मगर उसकी आवाज़ सें जरूरपता चलरहा थां कि मेरी हालत देखकर उसेदुख अवश्य हुआ होगा.
“अब कुछकहो भि “
“ठाकुर कहा हैं “
मेरे प्रश्न पऱ वोँ थोड़ीदेर तक चुप हि थि,
“वोँ अभि बाथरूम मे हैं उसके निकलने सें पहले तुम् यंहा सें चलेजाओ प्लीज् “
मे उसेयू हि देखता रहा जैसेकोई खोयाहुआ खजाना मेरे सामने हौ.
“तुमने हि तौ कहा थां नाँ कि देखो औऱ इन्जॉय करो तौ इन्जॉय करने आँ गय़ा थां “
मेरे बातो मे वोँ व्यंग थां जिसे काजल अच्छे सें समझती थि
“प्लीज् देव मे जानती हु कि तुम् यहसभी सह नहीं पाओगे, देखो तुम्हारी हालत क्याँ होँ गई हैं, ”
उसके आवाज़ केँ दर्द कों मे महसूस करपारहा थां, मे एक् गहरी सांस लिया
“मुझेकुछ नहीं होगा तुम् वोँ करो जौ तुम् यंहा करनेआई होँ “
पीछे सें ठाकुर कि आवाज़ आयी औऱ काजल नें मोबाइल काट दिया, मगर पलटने सें पहले हि उसने आंखों हि आंखों सें मुझे समझया कि मे वँहा सें चलाजाऊ…
वोँ पलटीसंग हि उसने पर्दा भि खिंच लिया, मेरे हेडफोन अब भि मेरे कानो मे थें मे उनकी बाते भि सुन सकता थां.
“डार्लिंग अब औऱ मत तड़फओआओ इधर “
इसबार काजल नें कुछ नहींकहा थां मगर धम्म कि आवाज़ सें इतना तोँ मुझेसमझ आँ गय़ा कि वोँ खाट मे बैठ याँ लेट चुकी थि,
“ओह मेरीजान क्याँ खूबसूरती पाया हैं तुमने मन करता हैं कि कच्चा चबाजाऊ “
ठाकुर कि ललचाई सि आवाज़ आयी, मगर फिन भि काजल नें कुछ भि नहींकहा
“क्याँ हुआ तुम्हे अभि तौ अच्छी थि ???”
“कुछ अजीब सां लगरहा हैं, ”
“तबियत तौ ठीक हैं “
“ह्म्म्म, नहीं रुको.आज नहींकभी औऱ करते हैं “
“मे सह नहीं पाऊंगा “
“जब जीवनभर केँ लिएकोई चीजमिल रही होँ तोँ थोड़ा प्रतीक्षा कर हि लेना चाहिए “
पहलीबार काजल कि हँसी मुझे सुनाई दि मगर वोँ हँसी भि बड़ी फीकी सि लगरही थि
“आखिरहुआ क्याँ हैं, ??”
“कुछ नहींजान बसआज नहीं, मे तुमसे वादा करतीहु कि यह पेंटी औऱ ब्रा तुम्हारे हि हाथो सें पहनूँगी मगरआज नहीं, ”
पता नहींमगर ठाकुर जरूर झल्लाया होगा
“ठीक हैं जाओ “
‘थैक्स मेरीजान “काजल नें शायद उसके गालो कों चुम्मन दिया थां याँ उसके होठो कों ??
मगर थोड़े हि देर मे मेरेपास उसकाकाल आँ गय़ा
“मुझेघऱ मे मिलो अभि “
मे चुपचाप हि वँहा सें निकलकर घऱ कि ओरचलपड़ा ….
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) - Kahani ab aur interesting hogi
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