रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 33
लिंग कि चमड़ी मे वोँ कोमल सां अहसास,
“अहह “
मेरेमुह सें अनायास हि निकले हुए शब्द थें…….
मे अभि अर्धसुषुप्त अवस्था मे थां, नाँ जगा हि थां नां हि पूरीतरह सें सोया थां, अपने लिंग कि कसावट कुछ महसूस हौ रही थि,
नाँ जाने वक़्त क्याँ हुआ थां मगर मुझेलग रहा थां कि मे सपनो मे खोयाहुआ हु, मगर धीरे-धीरे धीरे-धीरे हि मुझे अहसास हुआ कि मे जागरहा हु, औऱ सचमेकोई गीली सि औऱ कसी हुइ चीज मेरे लिंग मे घर्षण कररही हैं….
मेरेहाथ अनायास हि नीचेचले गए सोचा कि ड्रीम्स मे शायद मज़ा आँ रहा होँ तौ हाथो सें हि शांतकर लू,
मगर यह क्याँ ????
नीचे किसी केँ कोमल बालो कां संपर्क मेरे हाथो मे हुआ, मे थोड़ा चौका …
“:अहह”
मजे केँ अतिरेक मे फिन केँ मेरेमुह सें निकला…
ओह क्याँ अहसास थां, मेरी लिंग कि चमड़ी कों चूसाजा रहा थां, जिससे वोँ फैल गई थि औऱ मेरेहाथ उससर पर्र रखगए जौ कि उसेचूस रही थि …
मुझेयाद आया कि मे कहाहु औऱ वोँ कौन हौ सकती हैं जौ मुझेयह सेवादे रही थि, कमरे कि खिड़कियों सें आती हुईँ धूप सें इतना तोँ समाज आँ चुका थां कि यह मेरे जागने कां टाइम हैं, मे अपनेसर कों हल्के सें उठाकर देखने कि कोशिस कि ….
मेरेइस हलचल सें निशाकोई भि समझ आँ गय़ा थां कि मे जाग चुका हु, उसने अपनासर उठाया औऱ हमारी आंखे मिली…………
जैसेनए जोड़े सुहागरात केँ बाद शर्मा रहे हौ, निशा केँ चहरे मे मुझे देखते हि लाली आँ गई, मगर मे उत्तेजित थां, मैंने उसे प्रेम सें देखा औऱ अपनाहाथ उसकेसर पर्र रखकरउसे हल्के सें दबा दिया, वोँ जैसे, मेरा इशारा समझ गई थि औऱ उसनेफिन सें मेरे लिंग मे अपनामुह गड़ा दिया ….
कल तक जिस बेहन केँ लिए मे दुनिया कि हर खुसी लाने कों सजधजकर थां आज वोँ मेरे जांघो केँ बीच मेरे लिंग कों चूसरही थि,.
मे भि क्याँ करताअसल मे यही तौ उसके लिये जिंदगी कि सबसेबड़ी खुसी थि ….
जिस बेहन कों अपने बांहो मे झुलाया थां, जिसके इज्जत कि पिता कि तरह रक्षा करने कि शपथहर रक्षाबंधन मे खाई थि आज उसकीउसी इज्जत कां मे लुटेरा बन गय़ा थां, याँ शायदयह कहु कि मे उसकी इज्जत कां मलिक थां…….
जिसके कदमो मे दुनिया बिछाने केँ सपने देखे थें वोँ आज स्वयं मेरेलिए नंगी बिछीपड़ी थि,.
गीले गीले होठो कि लार मेरे लिंग सें मिलकर मुझेचैन देरही थि औऱ नाँ जाने निशा कों क्याँ सुखदे रही थि कि वोँ औऱ भि जोरो सें इसे चूसने लगी, मे अपनेचरम मे पहुचने वाला थां…
“ओह मेरी रानी बेहनचूस भाई कां …….ओह नहीं “
मेरेमुख सें नाँ जाने क्योयह निकलने लगा थां.
वोँ इसबात केँ परेशान होने कि बजाय औऱ भि मस्ती मे आँ जाती थि औऱ जोरो सें चूसना शुरुआत कर देती थि, उसके होठो सें लार नीचे टपकने लगा थां वही मेरी हालत औऱ भि खराब होँ रही थि.
सांसे फूलरही थि औऱ उसकेमुख कां चोदनकर रहा थां, मे अपनेकमर कों उठाउठा करउसे स्वीकृति देरहा थां औऱ वोँ भि अपने भइया केँ लिंग कों पूरी तल्लीनता सें चूसरही थि, उसे देखकर तौ ऐसालग रहा थां कि उसेफिन खाने कों कुछ नां मिलेगा औऱ यही धरती पर्र एक् हि चीज हैं जिसे चूसकर वोँ अपनीभूख मिटा पाएगी
वोँ मुझे देखकर मुस्कुराने लगी ….
मैंने उसे अपनेऊपर आने कां संकेत दिया,
वोँ मेरेऊपर चढ़ गई,
मे उसके होठो कों अपने होठो मे भरकर चूसने लगा, मेरे हि वीर्य केँ कुछ बून्द मेरे हि होठो मे आँ रहे थें……
हम् दोनो हि मुस्कुरा उठे, यह वोँ समय थां जब हमारे बीच कि सब दीवारे ढह गई,
सेक्स तौ उत्तेजना मे भि होँ सकता हैं मगरजब बिना किसी अवरोध औऱ उत्तेजना केँ भि बदनमिल जाए औऱ ग्लानि कि स्थान जब होठो कि मुस्कुराहट लें लें तोँ समझो कि दीवार गिर गई ……………… …
अध्याय 34
“केशरगढ़ केँ महलउस खण्डर मे जाकर केँ क्याँ करोगे साहब “
उस छोटे सें औऱ भद्दे सें व्यक्ति नें कहा.
“तुम को क्याँ करना हैं तूँ चलरहा हैं कि नहीं “
मैंने उसे घूरा, यह गाइड केँ रूप मे मुझे दिया गय़ा थां यहहमे पूरा केसरगढ़ घुमाने वाला थां, ”
“अरे साहब नाराज क्यो होते हैं छलिए छलिएमगर वँहा घूमने लायककोई स्थान नहीं हैं “
मैंने उसेफिन सें घूरा क्योकि मेरी बहने उसकीबात कों सीरियसली लेँ सकती थि मगर मुझेडॉ नें वही मिलने कों कहा थां,
“तूँ चल नाँ दोस्त क्याँ नाम हैं तुम्हारा “
“छेदीलाल छिछोरे “
“क्याँ हाहाहा “निशा जोरो सें हँसपड़ी, पूर्वी केँ संगसंग मे भि मुस्कुरा उठा,
“यह कैसानाम हैं छिछोरे ??”
मगरउस आदमी नें हमारी बात कां बिल्कुल भि क्रोध नहीं किया जैसेउसे पता हि हौ कि हम् ऐसा हि कुछ रिएक्ट करेंगे,
“वोँ क्याँ हैं सर मे छ कों छ बोलता हु “
उसने अपनेबड़े बड़ेसड़े हुए दांतहमे दिखाए
“वोँ तोँ सबछ कों छ हि बोलते हैं “
पूर्वी बोलपड़ी
“नहीं मेडम आप् समझी नहीं मे छ कों छ बोलता हु “
हम् सब कन्फ्यूज़ थें तभी एक् स्टाफ वाले नें हमेदेख लिया,
“सर वोँ यहकहरहा हैं कि वोँ च कों छ बोलता हैं, औऱ इसकानाम छेदीलाल चिचोरे हैं “
“बड़ा अजीब सरनेम हैं हैं दोस्त तुम्हारा “
वोँ फिन सें अपनेसड़े हुए दांत मुझे दिखा दिया, मेरी बहने थोड़ी सि हँसीमगर इसबार ज़्यादा नहीं …
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अध्याय 35
“साहब यंहा पर्र किले मे पुरातात्विक स्थल हैं अगर आप् घूमना चाहे “
हम् केशरगढ़ केँ किले मे पहुचे हि थें, औऱ एक् आदमी नें मुझसे कहा उसने आंखों सें इशारा किया किया कि मेरेसंग चलिए, मैंने बसहा मे हल्के सें सर हिलाया,
“अरे साहब वोँ भि खंडहरों कों क्याँ देख्ना, वँहा पर्र गार्डन हैं जंहा पर्र सेल्फी पॉइंट हैं, वँहा चलते हैं “
छिछोरे नें कहा, जिससे मेरी बहनेखुस होँ गई
“हा भाई, एक् तौ यंहाबस खण्डर हैं औऱ आप् यंहा लें आये”
पूर्वी नें उसकीहा मे हा मिलाया,
“ऐसाकरो तुम् लोग गार्डन जाओ मे जरा देखु कि कौन सां पुरातात्विक स्थल हैं यंहा पऱ, तुम्हारी भाभी सें मैंने बहोत नाम सुना हैं इसका “
दोनो छिछोरे केँ संग गार्डन कि तरहचल दिए जबकि मे खण्डरहो कि तरफ …
अंदर जाने पर्र मुझेडॉ दिखाई दिए, उन्होंने हाथ हिलाकर मुझे अपनेपास बुलाया, उनकेपास हि एक् अधेड़ स्त्री खड़ी थि, मुझेलगा कि मैंने इसेकही देखा हैं, वोँ कोई विदेशी लगरही थि.
“आओआओदेव, इनसे मिलोयह हैं यंहा कि खोजकर्ता मेडम मलीना “
ओहयाद आया कि मैंने इन्हें कहा देखा हैं,
“हैल्लो मेडम मैंने आपकी पुस्तक पड़ी हैं ‘डिस्कवरी ऑफ केशरगढ़’ उसके पीछे आपकी तस्वीर देखी थि मैंने, मेरी वाइफ आपकी किताबो कों बहोत हि चाव सें पढ़ती हैं “
वोँ मुस्कुराई,
“आजकल केँ बच्चे भि इन सबमे इंटरेस्ट रखते हैं यकीन नहीं होता “वोँ मुस्कुराते हुए बोलीं
“मलीना यहदेव हैं, देव….श्रुति कां पति “
मैचौक गय़ा कि डॉयह क्याँ बोलरहे हैं, मगर मलीना मेडम कां चहरा मेरेऊपर हि फंस गय़ा, उनकी मुस्कुराहट जानेकहा गायब हौ गई औऱ आंखों मे आंसू आँ गए, उन्होंने मेरे गालो कों अपने हाथो सें पकड़ लिया थां औऱ मेरे माथे कों चूमने लगी, मे परेशान थां कि यह हौ क्याँ रहा हैं, मगर मूझे उनके उनमे एक् बहोत हि गहरे अपनत्व कां अहसास होँ रहा थां…
मे आश्चर्य सें डॉ कों देखने लगा,
“अबसमझ आया कि वोँ मेरे किताबो कों क्यो पढ़ती हैं, मेरी हि तोँ बेटी हैं आखिर मां सें दूर केसे रहेगी “
मलीना फफककर रोपड़ी, मेरामुह खुला कां खुलारह गय़ा मे कभीडॉ कों देखता तोँ कभी मलीना कों …
काजल नें मुझे अपनी मां कि तस्वीर दिखाई थि मगरयह वोँ तोँ नहीं थि यह तौ कोई औऱ हि थि ….डॉ नें मुझे आंखों सें बस शांत रहने कों कहा,
“कैसी हैं वोँ उसे मेरीयाद हि नहींआती, इतना क्रोध कि वोँ मुझसे मिलने भि नहीं आँ सकती, 2 साल होँ गएउसे देखेहुए, शायद मुझे उसकीसजा मिलरही हैं जोँ मैंने अपने पिता केँ संग किया थां, उनसेदूर जाकर “
डॉ नें उन्हें सम्हाला, औऱ मुझसे दूर जाकर उनसेकुछ बात करनेलगे, वोँ थोड़ी शांत हुई …
“अच्छा तौ तुम् अपनी बहनों केँ संगआये होँ कहा हैं वोँ सभी “
इसबार मलीना केँ होठो पऱ एक् मुसकान थि …….
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अध्याय 36
“साहब यंहा पऱ किले मे पुरातात्विक स्थल हैं अगर आप् घूमना चाहे “
हम् केशरगढ़ केँ किले मे पहुचे हि थें, औऱ एक् शख्स नें मुझसे कहा उसने आंखों सें इशारा किया किया कि मेरेसंग चलिए, मैंने बसहा मे हल्के सें सर हिलाया,
“अरे साहब वोँ भि खंडहरों कों क्याँ देख्ना, वँहा पऱ गार्डन हैं जंहा पर्र सेल्फी पॉइंट हैं, वँहा चलते हैं “
छिछोरे नें कहा, जिससे मेरी बहनेखुस होँ गई
“हा भाई, एक् तौ यंहाबस खण्डर हैं औऱ आप् यंहा लें आये”
पूर्वी नें उसकीहा मे हा मिलाया,
“ऐसाकरो तुम् लोग गार्डन जाओ मे जरा देखु कि कौन सां पुरातात्विक स्थल हैं यंहा पर्र, तुम्हारी भाभी सें मैंने बहोत नाम सुना हैं इसका “
दोनो छिछोरे केँ संग गार्डन कि तरहचल दिए जबकि मे खण्डरहो कि तरफ …
अंदर जाने पऱ मुझेडॉ दिखाई दिए, उन्होंने हाथ हिलाकर मुझे अपनेपास बुलाया, उनकेपास हि एक् अधेड़औरत खड़ी थि, मुझेलगा कि मैंने इसेकही देखा हैं, वोँ कोई विदेशी लगरही थि.
“आओआओदेव, इनसे मिलोयह हैं यंहा कि खोजकर्ता मेडम मलीना “
ओहयाद आया कि मैंने इन्हें कहा देखा हैं,
“हैल्लो मेडम मैंने आपकी पुस्तक पड़ी हैं ‘डिस्कवरी ऑफ केशरगढ़’ उसके पीछे आपकी तस्वीर देखी थि मैंने, मेरी वाइफ आपकी किताबो कों बहोत हि चाव सें पढ़ती हैं “
वोँ मुस्कुराई,
“आजकल केँ बच्चे भि इन सबमे इंटरेस्ट रखते हैं यकीन नहीं होता “वोँ मुस्कुराते हुए बोलि
“मलीना यहदेव हैं, देव….श्रुति कां पति “
मैचौक गय़ा कि डॉयह क्याँ बोलरहे हैं, मगर मलीना मेडम कां चहरा मेरेऊपर हि फंस गय़ा, उनकी मुस्कुराहट जानेकहा गायब होँ गई औऱ आंखों मे आंसू आँ गए, उन्होंने मेरे गालो कों अपने हाथो सें पकड़ लिया थां औऱ मेरे माथे कों चूमने लगी, मे परेशान थां कि यह हौ क्याँ रहा हैं, मगर मूझे उनके उनमे एक् बहोत हि गहरे अपनत्व कां अहसास हौ रहा थां…
मे आश्चर्य सें डॉ कों देखने लगा,
“अबसमझ आया कि वोँ मेरे किताबो कों क्यो पढ़ती हैं, मेरी हि तोँ बेटी हैं आखिर मां सें दूर केसे रहेगी “
मलीना फफककर रोपड़ी, मेरामुह खुला कां खुलारह गय़ा मे कभीडॉ कों देखता तौ कभी मलीना कों …
काजल नें मुझे अपनी मम्मी कि तस्वीर दिखाई थि मगरयह वोँ तोँ नहीं थि यह तोँ कोई औऱ हि थि ….डॉ नें मुझे आंखों सें बस शांत रहने कों कहा,
“कैसी हैं वोँ उसे मेरीयाद हि नहींआती, इतना क्रोध कि वोँ मुझसे मिलने भि नहीं आँ सकती, 2 साल हौ गएउसे देखेहुए, शायद मुझे उसकीसजा मिलरही हैं जौ मैंने अपने पिता केँ संग किया थां, उनसेदूर जाकर “
डॉ नें उन्हें सम्हाला, औऱ मुझसे दूर जाकर उनसेकुछ बात करनेलगे, वोँ थोड़ी शांत हुई …
“अच्छा तोँ तुम् अपनी बहनों केँ संगआये हौ कहा हैं वोँ सभी “
इसबार मलीना केँ होठो पर्र एक् मुसकान थि …….
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अध्याय 37
मे अभि अपनी बहनों केँ संग मलीना मेडम केँ घऱ मे बैठाहुआ थां, वोँ मेरी बहनों सें ऐसेघुल गई थि जैसे कि वोँ उन्हें बहोत सालो सें जानती हौ, डॉ निशा केँ नजर मे आये बिना हि वँहा सें जा चुकातथा शायद निशा कों डॉ कि जानकारी थि, मलीना मेडमहमे दोपहर का खाना केँ लिए अपनेसंग हि लें आयी थि, मे सोफे मे बैठाइधर उधरदेख रहा थां वही मेरी बहने मेडम सें गुफ्तगुह करने मे व्यस्त थि, मेरीनजर एक् तस्वीर पर्र पड़ी औऱ मेरी आंखे चौड़ी होँ गई, अभि तक तोँ मुझेडॉ औऱ मलीना कि हरकते ऐसे भि समझ नहीं आँ रही थि मगरइस तस्वीर सें तोँ मे औऱ भि परेशान होँ गय़ा थां.
तस्वीर मे एक् लड़का औऱ दो लडकिया थि, अजीबबात थि कि मे दोनो हि लड़कियों कों पहचानता थां, लड़के केँ एक् बाजू मे खड़ी थि मलीना मेडम औऱ दूसरे मे जौ खड़ी थि उसे मे अभि तक काजल कि मां केँ रूप सें हि जानता थां, जी हा मुझे काजल नें उसी महिला कों अपनी मां कहा थां, जौ कि उसके बचपन मे हि गुजर गई थि, बीच कां आदमी मेरेलिए अनजान थां जिसके हाथो मे एक् छोटी सि बेबी थि, उसकी आंखे मुझे काजल कि याद दिलाती थि …….
क्याँ वोँ सच मे काजल हैं ???
अगरऐसा हैं तोँ क्याँ काजल मलीना कि बेटी हैं याँ फिनउस स्त्री कि जिसे काजल अपनी मां कहती हैं, क्याँ काजल कां नाम काजल हि हैं याँ फिन श्रुति जैसा कि मलीना नें कहा ….
बहोत सें प्रश्न मेरे दिमाग़ मे थें, सबसेबड़ी यहबात थि कि अगर मलीना सचबोल रही हैं तौ ऐसी क्याँ मजबूरी होँ गई कि काजल कों अपनानाम बदलना पड़ा.औऱ मुझसे यहबात छुपानी पड़ी …….
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अध्याय 38
“यह किसके संग फ़ोटो खिंचाया हैं आपने “
काजल वोँ फ़ोटो देखकर बहोत हि उत्त्साहित लगरही थि जौ कि निशा नें अपने वाट्सअप केँ स्टेटस मे डाला थां, जिसमे निशा नें मेरे, पूर्वी औऱ मलीना मेडम केँ संग सेल्फी ली थि.
“पहचानो.तुम् इन्हें जानती होँ “
“हा जानती तौ हौ मे इन्हें, इन्ही कि तोँ पुस्तके पढ़तीरही हु मे, मेडम मलीना “
काजल नें ऐसेकहा जैसे पुस्तको केँ अलावा मलीना सें उसकाकोई संबंध हि नहीं थां, क्याँ वोँ सच मे झूट बोलने मे इतनी माहिर थि कि अपनी मां कों पहचानने सें भि इतने सफाई सें इनकार करदे …
“हम्मयह केशरगढ़ केँ किले मे मिलीहमे, निशा औऱ पूर्वी सके अच्छी ट्यूनिंग होँ गई तौ उन्होंने अपनेघऱ खाने पर्र बुला लिया …”
“वाओ बहोत हि अच्छा “
झूट बोलने वाला कितना भि महारथी क्यो नाँ हौ कुछ कमियां तोँ हर इंसान मे होती हैं, काजल कि आवाज़ थोड़ी धीमी होँ चुकी थि शायद वोँ अपनेभरे हुएगले कों छुपाने कि कोसीस कररही थि, मैंने उसे थोड़ा औऱ कुरेदने कि सौची शायद मे जानपाउ कि वोँ सच मे भावनाओ मे हैं याँ नहीं.
“मैंने उन्हें तुम्हरे बारे मे बतलाया वोँ बहोत खुस हुइ कि तुम् उनके पुस्तक कि दीवानी होँ “
काजल थोड़ीदेर कों चुप थि,
“फ़ोटो भि दिखाई क्याँ मेरी “
“ओ दोस्त भूल गय़ा, कल दिखाऊंगा “
“नहीं …….वोँ नहीं क्याँ जरूरत हैं “
मगरतब तक उसकी नहीं नें मेरे दिमाग़ मे पूरा मामला साफकर दिया थां, वोँ नहीं कों थोड़ाजोर सें बोल गई थि जिसका शायद आभासउसे भि होँ गय़ा थां, दोनो मे कुछ तौ संबंध जरूर हैं वरनाकहा पुरातत्व विज्ञान औऱ कहा वोँ मैनेजमेंट कि लड़की, मुझे तौ पहले भि यहबात अजीब लगती थि कि क्यो काजल उनकी औऱ केवल उनकी हि पुस्तक पढ़ती हैं.
“हम्म्म्म ओके …….”
“जान आपकी बहोत याद आँ रही हैं “
काजल नें बात कों बदलने कि कोशिस कि, मुझे उसकी आवाज़ मे वोँ भारीपन मिल गय़ा जिसकी मुझे तलाश थि, समझने मे कोई भि देरी नहींलगी कि यह बातो कों घूमना चाहती हैं वरनाउसे मेरीयाद आएगी औऱ वोँ इतनी दुखी होँ जाएगी कि उसकी आवाज़ हि भरजाए यह तोँ मुझे मुमकिन नहीं लगता थां,,,,
“तुम् भि आँ जाओफिन यंहा, अच्छी स्थान हैं, एक् दोदिन औऱ रुकने कि सोचरहा हु “
“नहीं.मत रुको जल्द आँ जाओ,, मे अपनेकाम कर कारण वँहा नहींजा सकती “
वोँ मुझे आकर्षित करने केँ लिए अपनी आवाज़ कों नशीली बनाने लगी …
“आँ जाओ नाँ मुझे मसलने “उसनेबड़ी हि सेक्सी अदा मे कहा.
“तुम्हे मसलने केँ लिए तोँ खान वँहा बैठा हैं “
मैंने एक् व्यंग कर दिया जिससे वोँ बुरीतरह सें बौखला गई
“तुम्.तूम नां ….कितनी बारकहा कि यहसभी कों हमारे बीच मे मतलाओ …”
उसके आवाज़ सें नाराजगी साफसाफ थि.मे जोरो सें हँसने लगा.
“अच्छा छोड़ोउसे मे एक् दोदिन मे हि आताहु, औऱ तुम्हे कुछ चाहिए यंहा सें …”
“बस तुम् आँ जाओ औऱ कुछ भि नहीं चाहिए “
काजल कि आवाज़ मे वोँ गर्मी अब नहींरही, मुझेलगा कि शायद मुझसे कोई गलती होँ गई हैं.
“नाराज हौ गई क्याँ, लवयुजान “
मे अपनी आवाज़ नरम करके बोलने लगा.वोँ हल्के सें हँसी
“बहोत सारालव यु ….ऊऊऊम्म्मम्माआआ “
वोँ खुस थि औऱ उसकी आवाज़ मे चहक वापस आँ गय़ा थां.
“अब जल्दआओ, बहोत सि बाते करनी हैं तुमसे.”
…………………….
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मेरी कहानियाँ
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मे काजल सें बात करके पलटा हि थां कि दरवाजे मे मुझे निशा दिखाई दि, वोँ अपने बालो मे उंगलिया फिराते हुए मुझेदेख रही थि, उसके होठो मे एक् कातिल सि मुस्कान थि औऱ वोँ अपने पारदर्शी कपड़ो सें अपनेबदन कि नुमाइश कररही थि, जवानी केँ इसमोड़ पर्र उसकेबदन मे पूरा भराव आँ चुका थां औऱ वोँ कपड़े कों फाड़ डालने कों बेताब होँ रहा थां, अब वोँ मेरी बेहन नहींरह गई थि कि मे उसकेबदन केँ भराव कों नां निहारु…
वोँ इठलाते हुए मेरेपास आयी, औऱ अपनी बांहे मेरेगले मे डालकर झूल गई ….
“हम् यंहा पऱ हनीमून मनाने आये हैं औऱ आप् मेरीसौत सें लगेहुए हौ “
उसकी मुस्कान मे नाराजगी भि मिक्स थि, मैंने उसेकुछ केहना सही नहीं समझा औऱ अपने होठो कों उसके होठो सें मिला दिया,
सब बातेबस तूफान मे बह गई वोँ प्रेम कां तूफान थां यह कि हवस कां ??????
मुझे लगता हैं कि वोँ हवस कां हि तूफान थां क्योकि प्रेम कां नाता तौ हम् पीछेछोड़ आये थें ………….
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 39
बदन कि प्यास बुझ चुकी थि औऱ मे अपनी खिड़की सें बाहर् झांकरहा थां, बाहर् मुझे छिछोरे दिखाई दिया, मैंने अपनी सिगरेट सुलगाई औऱ उसकी हरकतों कों देखने लगा,
वोँ नाम कां हि नहींकाम कां भि छिछोरा थां,
इसी रेस्टरूम मे काम करने वाली एक् औरत कों पकड़ेहुए दिखाई दिया, वोँ दोनो झाड़ियों केँ पीछे थें मगर मे दूसरी मंजिल मे खड़ाहुआ थां, गार्डन कि झाड़ियों केँ पीछे कां दृश्य देखकर मे अपनी हँसीरोक नहीं पाया, क्योकि वोँ औरत शादीशुदा थि औऱ छिछोरे केँ पत्नि तोँ नहीं थि ……
“छेदीलाल “
मे जोरो सें चिल्लाय जिसे सुनकर वोँ दोनो हि अलगहुए औऱ मुझेऊपर खड़ादेख जैसे उनके प्राण हि सुखगए …
स्त्री दौड़ती हुईँ भागीवही छेदीलाल बस मूर्ति बनाहुआ मुझेताक रहा थां, मे खिलखिला केँ हँसपड़ा, मे अपनी शर्टपहन नीचेआया हि थां कि छेदीलाल मेरेपाव मे गिर गय़ा.
“मुझेमाफ कर दीजिये दीजिये साहब, किसी कों मत बताइयेगा वरना नॉकरी जाएगी वोँ अलगमगर इसका पति मारमार केँ मेरा भर्ता हि बना देगा “वोँ गिड़गिड़ाने लगा औऱ मेरे होठो मे एक् कमीनी सि मुस्कान आँ गई
“अच्छा पहलेबोल कि चंदू केँ चाचा नें चंदू केँ चाची कों चांदी केँ चमचे सें चटनी चटाई.”
मे मुस्कुराकर उसे देखने लगा, वोँ हड़बड़ाया सां मुझे देखने लगा
“छंदू केँ छाछा नें छंदू केँ छाछि कों छांदी केँ छमचे सें छटनी छटाई”वोँ बड़ी हि मुश्किल सें बोल पाया
मे जोरो सें हँसपड़ा औऱ उसकामुह मुरझा गय़ा.
“अच्छा चल मेरा एक् कामकर तेरारूम कहा हैं “
वोँ मुझे आश्चर्य सें देखने लगा, मे उसे लेकर उसके कमरे मे चला गय़ा
एक् छोटा सां रूम थां उसका.
मैंने फोन निकाल करउसे काजल कि तस्वीर दिखाई
“इसे पहचानता हैं “उसकी आंखेबड़ी हौ गई थि जिसका मतलब मुझेसमझ आँ रहा थां कि यहइसे जानता हैं …
…………….
“साहब आपकेपास इनकी तस्वीर कहा सें आयी “
“तूँ वोँ बता जिसे मे पूछरहा हु “
“जी साहब जानता हु.”
वोँ हड़बड़ा रहा थां …
“कौन हैं यह “
“श्रुति श्रुति मेमसाहब”
उसकी जबान बुरीतरह सें लड़खड़ा रही थि मगर मुझे मेरे सवालों कां जवाबमिल चुका थां कि काजलअसल मे कौन हैं.इससे पहले कि मे औऱ कुछ पूछता मेराफोन बजउठा, नंबरडॉ कां थां.
“उससे पूछने सें तुम्हे तुम्हारे सवालों कां सही जवाब नहीं मिलेगा, कल तुम् मुझसे मिलो अकेले मे …”
उन्होंने पता तोँ बता दियामगर मे औऱ भि चकितरह गय़ा क्योकि डॉ मुझपर भि नजररखे हुए थां ….
अध्याय 40
मे बड़ी मुश्किल सें डॉक्टर सें बोल पाताहु,
“वोँ चाहती क्याँ हें, “
मे झुंझलाया थां ….
“वो चाहती क्याँ हैं ये तोँ शायदवही बता पाएगी, मगर एक् चीज मे तुम्हें बता देना चाहता हूं कि बदले कि आग शख्स सें कुछ भि करा सकती हैं। चाहे वो कितना हि कमजोर क्यूं नां”
होँ डॉक्टर कि बात मेरीसमझ मे आँ रही थि मगरफिन भि मे असमंजस कि स्थिति मे थां आखिर काजल इतना परेशान क्यो थि ?
क्याँ मेराकोई वजूद नहि थां शायद उसके लिए….शायद नहीं वोँ मुझसे प्रेम करती हैं, वो मेरेलिए बहोत मायने रखती थि रखती हैं औऱ रखती रहेगी, मेरे सामने काजल कां अतीतघूम रहा थां उसके बचपन कि यादें रह रहकर मुझेसता रही थि नं जाने कितने दुख उसने झेले थें जिसके बारे मे वो बात नहि करती.शायद उसनेकभी मुझसे ये नहि चाहा कि मे उसकासंग दु याँ शायद वोँ जानती थि कि मे उसकासंग नहि दे सकता, बात इतनी आसान तौ नहि थि जितना मे समझरहा थां उसनेकई दुख देखे हें जौ मेरीसमझ सें परे हें, काजल मेरी अपनी काजल मे उसे केसे किसी सीमाओं मे बांध पाऊंगा वोँ हर सीमाओं सें परे हैं, उस पानी कि तरह जौ बस बहती जाती हैं, वो उस सावन कि तरह हैं जौ कब आएगी इसका अंदेशा किसी कों नहि, मे दर्पण मे खड़ा अपने अक्स कों निहार रहा थां, परछाई। वो तस्वीरें। वो हल्की हवा कि खुशबू, गंध कां चमत्कार अतीत कि कही अनकही कहानियां थि जोँ मुझे जानने थि, मे परेशान थां व्याकुल थां मेरादिल गवाही नहि देरहा थां कि वो गलत हैं औऱ वहीहुआ मुझे जितना भि अब तक पताचला मुझेयही समझआया कि काजलगलत नहि थि नाँ वो हैं औऱ शायद वो नहि होगी उसकेसंग जोँ बीती थि वो एक् दर्दनाक घटना थि शायद उसकारोग उसके जिंदगी मे आज भि कायम थां, मे अपनी पलकें गड़ाए डॉक्टर कों निहार रहा थां डॉक्टर भि मुझेदेख करदेख रहा थां,, जैसे जानना चाहता होँ कि मेरेदिल मे क्याँ चलरहा हैं…
आखिर उसनेकहा
“ मैंने जोँ भि तुम्हें बताया हैं कभी इसका जिक्र काजल सें मत करना न् जाने उसकेलिए कितनी बड़ीबात होगी वो हरचीज तुमसे छुपाना चाहती हैं, क्योंकि उसेपता हैं तुम्हें बताने सें मात्र उसकादुख बढ़ेगा, उसे खुशी देना हौ सके तोँ उस कां संग देना मे जानता हूं कि तुम्हारे लिए बहोत मुश्किल होगामगर मे जानता हूं कि तुम् येकर सकते होँ…”
डॉक्टर वहां सें उठकरचला गय़ा औऱ मे बस एक् तक दिवाल कों घूरता रहा…
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घूमते-घूमते नाँ जाने मे कहाजा रहा थां, मे उन जगहों मे घूमरहा थां जहां काजल कि पूरी जीवन थि, मगर उसने कितने राज अपने सीने मे छुपाए हुए थें वो 2 साल पहले हि तोँ यहांआई थि मगर मुझेकभी पता नहींचल पाया …
मे उस होटल मे पहुँचा जहां सें इनसभी कि शुरुआत हुइ थि नाम थां आदित्य इंटरनेशनल
मे बस निहारे जारहा थां वो एक् शानदार होटल थां.
वो वापस अपनी बहनों केँ संगआया औऱ स्वादिष्ट खाने कां लुफ्त उठारहा थां आसपास नजर दौड़ाई कुछखास नहि कुछऐसा नहि जिससे मुझे संदेह होँ.
“भाई खानां तोँ बहोत अच्छा हैं” निशा नें कहा
“ हां” मैंने जवाब दिया…
अचानक हि मे बहोत गुस्से मे आँ गय़ा
“येसभी क्याँ हैं” मैंने जोरों सें कहा वहां पर्र बेटर जल्दी उपस्थित हुआ.
“ क्याँ हुआसर”
“ ये क्याँ हैं”
मैंने प्लेट मे पड़ेहुए एक् काक्रोच कि तरफ इशारा किया, वो बुरीतरह चौका
“ सरसरये कहां सें आया”
मैंने उसे घूरकर देखा,
“ ये खानां तुमने हि लाया थां नां “
वो चकितहुआ
“ जीजी सर, पता नहि सरये केसेहुआ”
मगर मे क्रोधित थां मैंने उसकी एक् नं सुनी
“अपने मैनेजर कों बुलाओ “ मे फिनजोर सें बोला, वो डरताहुआ भागा थोड़ी देर मे होटल कां मैनेजर मेरे सामने थां, वो मुझसे माफी मांगरहा थां मगर मैंने एक् तमाशा खड़ाकर दिया.
आखिरकार थककर उन्होंने कुछ मोबाइल किए, औऱ मेरे होठो मे मुस्कान खिल गई …
कुछ हि देर मे वहां एक् लंबा चौड़ा सां आदमीआकर खड़ाहुआ औऱ बड़ी नम्रता सें मुझसे कहा
“सर जौ भि हुआ उसकेलिए हमेंमाफ कर दीजिए मे इस होटल कां मालिक हूं आपका खानां फ्री हैं औऱ आशा करता हूं कि येबात यहां सें बाहर् नहि जाएगी “
मैंने उस शख्स कों घूरा औऱ उसने मेरीतरफ हाथ बढ़ाया जैसे वो समझ गय़ा हौ कि मे मान गय़ा हूं.
“ हेलोसर मेरानाम अयूबखान हैं मे इस होटल कां मालिक हूं” मैंने अपनाहाथ बढ़ाया वो कुछ 25 साल कां आदमी थां, दिखने मे बहोत हि स्मार्ट औऱ हैंडसम लगरहा थां आयूब मैंने मन हि मन दोहराया अच्छा तोँ ये अजीम कां भइया हैं, मेरे चेहरे पऱ एक् मुस्कान खिल गई…
आयूब कों देख पूर्वी केँ चेहरे पर्र एक् अलग स्वभाव आया.मे उस कों पहचानता थां मे जानता थां कि पूर्वी उसकीतरफ आकर्षित हैं, येइस उम्र कि नजाकत थि कि किसी भि स्मार्ट औऱ हैंडसम लड़के कों देखकर एक् लड़कीतथा किसी भि सुंदर लड़की कों देखकर एक् लड़का आकर्षित होँ जाए एक् सामान्य सि बात हैं मे उससे हंसकर बात करनेलगा औऱ थोड़ी देर मे वो हमसे बहोत हि घुलमिल गय़ा देखते हि देखते निशा औऱ पूर्वी कि उससे दोस्ती होँ गई, हमने उससे विदा लिया औऱ उसेशहर आने कां निमंत्रण दियाजब उसेपता चला कि मे एक् होटल कां मैनेजर हूं तौ वो मुझसे औऱ भि खुल गय़ा औऱ जबउसे पताचला कि मे रश्मि केँ संगकाम करता हूं तौ उसका चेहरा अचानक सूख गय़ा मे उसकी भावनाओं कों समझ सकता थां, मैंने हंसा
“ कोईबात नहि जोँ हुआसो होँ गय़ा मगर मुझे एक् चीजसमझ नहि आती आखिरखान साहब केँ दो बेटे हें तौ क्यूं अजीम कों हि अपना बेटा मानते हें याँ यहकहे कि दुनिया केँ सामने केवल अजीम हि आता हैं मुझे तोँ आज तक पता नहि थां कि खान साहब केँ दो बेटे हें”
उसका चेहरा औऱ मुरझा गय़ा उसनेबात कों बदलना चाहा औऱ मैंने भि कोईजोर नहि डाला क्योंकि मे जानता थां कि असलियत क्याँ हैं औऱ यही असलियत शायद मुझे काजल कां बदला लेने मे सहायता करने वाली थि
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“तौ मुझे लगता हैं तुम्हें आयूब बहोत पसन्द आया”
मैंने हंसकर निशा औऱ पूर्वी सें कहा, पूर्वी तोँ जैसा शर्मा हि गई मैंने पहलीबार उसे शरमाते हुए देखा थां मे भि थोडा हंसा औऱ निशा भि क्योंकि मुझेपता थां कि निशा कां आकर्षण केवल मेरेलिए हैं.
मगर क्याँ मे पूर्वी कां इस्तेमाल करूंगा ???
शायद???
मेरेलिए ये सोचना भि पाप हैं मगर क्याँ सच मे ??
मे सोच मे गुम होँ गय़ा मे यहीसोच रहा थां कि क्याँ मे सच मे पूर्वी कां इस्तेमाल करना चाहता हूं आयुष कों फसाने केँ लिए। शायद नहि, शायदहां, शायदपता नहि,
मे असल मे दोनों कां इस्तेमाल नहि करना चाहता थां मे चाहता थां जौ हौ बस हौ जाए, अगर इस दौरान मुझेकुछ ऐसीचीज पताचले याँ कुछऐसा हौ जाए जिससे मे काजल कि सहायता कर सकूं तौ शायद वो कार्य मुझे करना चाहिए औऱ अगरऐसा नाँ हौ तोँ ???
जिसतरह मैंने आयूबव पूर्वी कों नजर मिलाते देखा थां मुझेलग रहा थां इन दोनों केँ बीचकुछ तोँ खिचड़ी पक सकती हें अभि मे कुछकह नहि सकता थां मगर पूर्वी मेरी सबसे प्यारी बेहन हैं मेरेलिए ये करना बहोत मुश्किल थां कि मे उसे मछली केँ दाने कि तरह इस्तेमाल करू, मे उसे उसकी स्वतंत्रता मे रहने देना चाहता थां, मे चाहता थां कि अगर वो प्रेम करें तौ सफल होँ, मे चाहता थां कि वो खुशरहे औऱ शायदइसी प्रेम मे औऱ इसी खुशी मे मुझे मेरी मंजिल मिल सकती थि, मे सोच मे गुम सां होँ गय़ा मुझे डॉक्टर कि बताई बातें याद आँ रही थि तोँ संग हि पूर्वी कां उस लड़के कों देख्ना, उन दोनों कि निगाहों मे एक् अजीब सां आकर्षण एक् दूसरे केँ लिए, वो आकर्षण किसी भि नौजवान कि आंखों मे जब देखा जाता हैं तब बड़े हि आहिस्ता बताया जा सकता हैं कि आखिर उनकेदिल मे चल क्याँ रहा हैं मगर क्याँ आयूब एक् अच्छा लड़का हैं ??
मुझे नहि पता थां जितना मे उसेजान सका याँ जितना मैंने दूसरों केँ द्वारा सुना थां। जीहां मे आज दिनभर यही तोँ कररहा थां होटल आदित्य इंटरनेशनल कि पूरी जानकारियां मेरेपास थें आयूब कि जानकारी मेरेपास थि, जितना मैंने उसे जानां मुझेबस इतना हि समझआया कि वो एक् बड़ा सुलझा हुआ लड़का हैं शायद पूर्वी केँ लिए अच्छा हैं, शायद नाँ भि हौ?
मगर मे इन दोनों कों स्वतंत्रता देना चाहता थां देख्ना चाहता थां कि आखिर कितनी आगे बढ़ते हें खैर जौ भि हौ मे थक चुका थां जमाने भर केँ विचार मेरेमन मे घूमरहे थें औऱ अब मुझे जरूरत थि आराम कि औऱ शायद उससे पहले निशा कि…
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पता नहि क्यूं मगर मुझे निशा कि आदत सि पड़रही थि उसका मुझे इतना प्रेम करना मैंने कभी सोचा नहि थां कि कोई मुझे इतना भि प्रेम कर सकता हैं, रहीबात काजल कि मे जानता थां कि वो मुझे बहोत प्रेम करती हें मगर वो मेरी पत्नि थि औऱ निशा मेरी बेहन दोनों केँ व्यक्तित्व मे जमीन आसमान कां फर्क हैं, नं जाने क्यूं मगर मे दिन-ब-दिन निशा कि औऱ आकर्षित होतेजा रहा हूं, जिसे मैंने निशा कों बचाने केँ लिए शुरुआत किया थां, जिसे मैंने अपनी बेहन कि भलाई केँ लिए शुरुआत किया थां अब वो मेरेलिए पाप नहि रह गय़ा थां अब शायद वो मज़ाबन गय़ा एक् ऐसा मज़ा जिसमें मे डूबते जारहा हूं, उसकेबदन कणकण उसकेअंग प्रत्यंग उसके कटाव उसके एक् एक् घुमाव, उसके शरीर कां भराव, उसकी मासूमियत, उसकी हंसी, उसकेबाल, उसकेगाल, उसके होठों कि लाली, उसकी मतवाली चाल, उसके पसीने कि सुगंध, उसका मुस्कुराना, उसका केहना, उसका चलना, उसका रुकना, उसका देख्ना, उसका मुझे छूना, उसका मुझे प्रेम करना उसकाहर एक् व्यवहार, उसकी अदाएं, उसके नखरे, उसकेझूठ, उसकीसच, उसकीहया, उसकी बेहयाई, उसकी नजाकत उसकी फितरत उसकी मुहब्बत उसकी सिहरन, उसकी उलझन, उसका द्वेष उसकाराग, उसकी सीमाओं कों तोड़ना औऱ नई सीमाबना देना, उसका मेरे बालों पर्र हाथ फेरना। उसके आंसू.जब वो कहती हैं कि आप् मेरे होँ केवल मेरे। उसकी बड़ी-बड़ी आंखें औऱ आंखों कां वो काला घेरा जौ काजल सें बनता हैं, उसकी आंखों सें झड़ते हुए प्रेम केँ झरने उसकादिल जोँ इतना सख्त होकर भि कितना नरम हैं, मुझे कभी-कभी लगनेलगा कि मे कहीं पूरीतरह सें तौ उसका नहि हौ जारहा हूं, हां शायदमगर नहि शायद,
वो मेरी पत्नि नहि थि वो मेरी प्रेमिका नहि थि मगरअब वो मेरेलिए इन दोनों सें बढ़कर हैं मे क्याँ हूं ? मे क्यूं हूं ? मे किसका हूं ???ये प्रश्न बड़े पेचीदे हें मगर उसका एक् जवाब निशा केँ पास हैं कि ‘आप् मेरीजान होँ आप् मेरेलिए होँ औऱ आप् मेरे होँ’ उसकी प्रेम भरी बातें जिसका शायदकोई मूल्य नाँ होँ, जौ तर्क कि सीमाओं मे नहि बंधती जोँ तर्क सें बाहर् हैं वोँ अलग हि दुनिया कि बात हैं जोँ एक् प्रेमिका एक् प्रेमी सें करती हें, याँ एक् बच्ची करती हैं अनगढ़ सि, बेमतलब सि, वैसी बातें येसभी निशा कि खूबी थि तर्क सें दूर प्रेम कि किसी दुनिया मे खोई हुई थि, एक् सागर मे खोई हुईँ थि जिसका कोई किनारा उसकेपास मे नां थां …
वो मुझे अपनी गहराई मे पाना चाहती थि, वो हमेशा मुझ मे समाना चाहती थि, उसकेपास इसके सिवा औऱ कोईकाम नहि थां उसकी जीवन मे इसके सिवा औऱ कोई मकसद नहि थां औऱ शायदयही बात मुझे उसकीओर इतना आकर्षित करती हैं, क्योंकि काजल कि जीवन मे एक् मकसद हैं औऱ वो मकसद मे नहि हूं…
मगर निशा कि जीवन मे जोँ मकसद हैं वो केवल मे हूं…………………………………………………………………………….
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 41
रसदार होठों कां चुंबन लें कर, जीभ मे जीभ घुसकर जीभ सें जीभ मिलाकर औऱ दिल कि धड़कनों कों एक् संग करेंफकत उसके होठों कों अपने दांतो मे गड़ाकर मे मदहोश होँ रहा थां….
निशा कि जवानी मे डूबकर उसके गद्देदार पिछवाड़े अपने हाथों सें सहलाते हुए उसके गीले गीले होठों पर्र मे औऱ थूक, मिलारहा थां,
जिंदगी कां येसुख शायदसब कों नसीब होता हैं मगर मेरे जैसा नहि, क्योंकि नीचे पड़ी वो लड़कीकोई औऱ नहि थि वो मेरी बेहन थि मेरी अपनी बेहनजिस कि जवानी केँ उठान कों हम् अपने शरीर कि आग बुझाने केँ लिए उपयोग मे लारहा थें। “भैया भैया भैया भैया भैया थोडा धीरे-धीरे धीरे-धीरे कीजिए नां इतना क्यो उतावले हौ रहे हौ, इतने क्यूं मतवाले होँ रहे होँ आपकी हि हु, आपकी हि रहूंगी इतने उतावले मत होँ “
निशाकहे जारही थि मगर उसकी बातो कां मुझ पर्र कोईअसर नहि हौ रहा थां, मे तौ बसउस मे डूबना चाहता थां उस गहराई तक जहां तक आज तक मैंने डूबा नहीं थां, हम् दोनों पसीने सें भीगेहुए थें औऱ मेरेहाथ उसके गद्देदार पिछवाड़े कों सहलाते हुएउसे अपनीओर खींचरहे थें.
दो नंगे शरीर एक् दूसरे सें सटेहुए एक् दूसरे मे गुथेजा रहे थें सांसे तेज थि धड़कन मध्यम थि, जितना होँ सके एक् दूसरे सें मिलने कि ख्वाहिश थि, दीवानगी सर पर्र चढ़ी हुइ थि मेरा लिंग अकड़कर अपनी प्यास बुझाने कों बेताब थां, वही निशा कि योनिरस सें भरी हुई छलकरही थि, मेरे लिंग कि चमड़ी थोड़ी पीछे हुईँ औऱ वो धीरे धीरे निशा कि योनि मे समाते गई। एहसास.वो एहसास इतना सुखदाई थां कि हम् दोनों केँ हि मुंह सें सिसकी निकल गई निशा नें मेरे बालों कों जोरों सें पकड़ा औऱ अपनी औऱ खींचा मैंने भि उसके टांगों कों हल्का सां फैलाया औऱ अपने लिंग कों औऱ भि अंदर दबाने लगाजब तक कि वो अपनी पूरी गहराई मे नहि चला गय़ा.
निशा नें मेरे होठों कों अपने दांतो सें काटा शायद मुझे दर्द होना चाहिए थां मगर वो दर्द इतना मीठा थां कि मे बार-बार लेना चाहता थां, रात केँ अंधेरे मे हल्की रोशनी सें कमरे मे फैली दूधिया रोशनी मे दो शरीर एक् होँ रहे थें, कमर हल्की-हल्की चलरही थि निशा केँ यौवन सें भरपूर उसके मम्मों मेरे हाथों मे थें, कभी उसके फूलों कों अपने होठों सें चूमता औऱ उसमें रस केँ भंडार कों औऱ निचोड़कर पीने कि कोशिश करता.
दोनों डूबे थें मस्ती अपनेचरम मे थि मे निशा केँ ऊपर उछलेजा रहा थां औऱ वो अपनेकमर कों मेरेकमर सें मिलाने कि पूरी कोशिश कररही थि, निशा नें मुझे नीचेपटक दिया औऱ मेरेऊपर आकर अपनेकमर कों हिलाने लगी.
“ भैया मे मर जाऊंगी.अहहअहह.मुझे अपनाबना लो.अहह अहह.मात्र अपनाबना लो.अहह अहह.बस मेरे होँ जाओओह भईया.अहह अहह.अहह अहह। औऱ मुझेकुछ नहि चाहिए, जोरो सें भाई अहह मुझे अपने प्रेम मे डूबालो भाई जोरो सें अहह भाई। मे औऱ कुछ नहि चाहती आईलवयू भैया, आईलवयू, आईलवयू भैया, आईलव यू,.अहह अहह.अहह अहहअहह अहहअहह अहह.”
अब वो मेरेऊपर थि औऱ पूरा कंट्रोल उसके हि हाथों मे थां मे शांत पड़ाहुआ उसके चेहरे कों देखरहा थां वो मेरेऊपर आँ गिरी थि औऱ उसकेबाल मेरे चहरे केँ चारों तरफफैल गए, निशा कि सांसे बहोत जोरों सें चलरही थि जोँ मेरे गालों सें टकरारही थि उसकी आंखें अधमुंदी थि जैसेकोई नशे मे हूं थोड़ी देरबाद जैसे तूफान हल्का सां शांतहुआ औऱ कमर धीरे-धीरे धीरे-धीरे चलनेलगे हवस कि गहराई प्रेम कि गहराई मे बदलने लगी थि, हम् दोनों एक् दूसरे केँ बदन कां पूरा एहसास करपारहे थें औऱ वोँ प्रेम शरीर सें लेकरमन तक पहुंच रहे थें हम् एक् दूसरे कि रूह कों छूने मे कामयाब होँ पारहे थें, मे उसके बालो कों सहलारहा थां औऱ वो मेरेऊपर गिरी हुइ अपने शरीर कों मात्र मेरेलिए छोड़ दि थि उसके नाज़ुक जिस्म कां एहसास मेरे त्वचा सें होताहुआ मेरेमन कि गहराइयों मे उतररहा थां.
मे उसे बहोत प्रेम करनेलगा थां, पहले भि करता थां मगरअब प्रेम कां स्वरूप भि बदल चुका थां, मैंने उसके बालों कों अपने चेहरे सें हटाया औऱ उसको अपनी बाहों मे जोरों सें खींचा वो कसमसाई हुइ मेरे बाहों मे समा गई वो अपनीकमर कों हल्के हल्के हिलारही थि औऱ मेरेबदन कों सहलारही थि वो किसी समर्पण कि प्रतिमा सि थि अपने आप् कों मेरेलिए समर्पित कर चुकी थि, मैंने आंखें खोली एक् हल्का सां प्रकाश दरवाजे केँ माध्यम सें कमरे मे आताहुआ दिखाई दिया.
देखा तौ दो आंखें देखते हि समझने मे देर नहि लगी कि वो औऱ कोई नहि बल्कि पूर्वी हैं, पूर्वी कां मासूम चेहरा मेरे सामने खिलकर आँ गय़ा थां.
हम् दोनों कि नजरें मिली वो जाने कों हुइ मगर अचानक सें फिनरुक गई उसकी आंखों मे आंसू थें एक् अजीब सां दर्द शायद छलकने कों थां, शायद मे उस दर्द कों समझ पाता वो अपने आंखों सें केसेदेख पारही थि कि उसका स्वयं कां भइया अपनीसगी बेहन केँ संग नंगा सोया हैं। किसी केँ लिए भि येसोच पाना मुश्किल हैं मगर मेरी प्यारी सि छोटी सि बेहन इतने बड़े दर्द कों किस प्रकार झेलपा रही होगी। उसके आंखों कां आंसू मुझे बिल्कुल भि मनपसंद नहि आया मैंने अपनेहाथ उठाया हैं औऱ उसे अपनेपास बुलाया, उसने अपनासिर नां मे हिलाया मगर मैंने उसेफिन सें आंखों हि आंखों मे इशारा कियाआजा शायद मुझे तेरी जरूरत हैं उसने एक् बार निशा कि औऱ देखा मैंने आंखों सें कहा कि इसकी फिक्र मतकर, वो हल्के कदमों सें कमरे मे आई मैंने उसकाहाथ थामा औऱ अपनीओर खींच लिया वो सकुचाई सि धीरे-धीरे सें पलंग मे बैठी निशा नें अचानक अपनासिर उठाया कभी वो पूर्वी कों देखती तौ कभी मुझे मैंने प्रेम सें निशा केँ चेहरे कों सहलाया
“क्याँ ये मेरी बेहन नहि हैं, मे जानता हूं कि तुम् दोनों कों हि पता हैं कि क्याँ होँ रहा हैं मगर मे किसी सें छुपाना भि नहि चाहता, निशा मे उससे बहोत प्रेम करता हूं औऱ इस प्रेम मे कोई बंटवारा नहि हैं कभीये मत सोचना कि मेरेलिए पूर्वी औऱ तूँ दोअलग हें तुम् दोनों हि मेरेलिए एक् हि हौ। हांये बदन कां नाता जोँ तेरेसंग मेराबन गय़ा हैं वो शायद एक् भइया बेहन केँ रिश्ते मे नहि होना चाहिए थां मगर इसका मतलबये नहि कि मे पूर्वी कों भूल जाऊं याँ तेरेऊपर मेराकोई विशेष अधिकार होँ गय़ा तुम् दोनों आज भि मेरेलिए मेरीजान हौ, मेरी बहने हौ, आज भि मेरी कलाई मे राखी तुम्हारे नाम कि बंधती हैं….”
“ निशा मेरीबात कों समझना जितना अधिकार तुम्हारा मेरेऊपर हैं उतना हि पूर्वी कां भि हैं.ये जिस्मानी नाता सिर्फ मेरे औऱ तुम्हारे बीच हि रहेगा, मगर मुझे पूर्वी कों भि प्रेम करनेदे “
निशा बहोत भावुक होँ चुकी थि उसकी आंखों मे आंसू थां संग मे पूर्वी केँ भि शायदइन दिनों जब उसकेमन सें सब केँ लिए नफरत निकल चुका थां औऱ वो मेरे हि दुनिया मे खोई हुई थि इस वक्त मे औऱ इस खुशी मे उसे सोचने पऱ मजबूर किया थां कि सच मे हम् दोनों भइया बेहन हें हमारा जोँ नाताबन चुका हैं उसे भुलाया नहि जा सकताउसे बदला नहि जा सकतामगर निशा कां मेरेऊपर एकाधिकार चाहना शायद निशा कों येबात समझ आँ गई थि कि प्रेम मे अधिकार नहि होता, याँ समझ नहि आई थि.??
मैंने फिन सें निशा कि आंखों मे देखा
“बेहन। मेरीजान। प्रेम मे कोई एकाधिकार नहि होता असला प्रेम मे तौ अधिकार हि नहि होता प्रेम मे होता हैं तौ केवल औऱ मात्र समर्पण जोँ तूने किया हैं मेरेलिए, मगरअगर तुँ ये चाहती हैं कि कि तेरा मेरेऊपर अधिकार होँ तेरे प्रेम नहि बस शरीर कि हवस होगीये वासना होगी, अधिकार कि चाह करना हि वासना हैं”
निशा नें मेरी आंखों कि गहराइयों मे झांका औऱ मेरे होठों पऱ हल्का सां चुंबन दिया,
“ भैया मे जानती हु कि आप् क्याँ कहना चाहते हौ मगर क्याँ करूं.जब आपको किसी दूसरे कों प्रेम करते देखती हु तोँ दिलजल जाता हैं सांसे रुक जाती हें लगता हैं कि कोई आपको मुझसे छीन लेगा मे इसबात सें परेशान हौ जातीहु कि केसे आपके प्रेम कां बटवारा करूँगी, भैया मे मानती हूं कि मुझसे गलती हुइ मगर क्याँ आप् मुझेमाफ नहि करोगे.”
मेरे होठों पर्र मुस्कान आँ गई मैंने पूर्वी कां हाथ पकड़ा औऱ उसे अपनेऊपर खींचा मेरी एक् बाह मे निशा थि वहीं दूसरी बाह मे पूर्वी.
निशा केँ बदन मे एक् भि कपड़ा नहि थां उसकी योनि मे अभि भि मेरा लिंग पूरीतरह सें समाया हुआ थां मगर पूर्वी?? पूर्वी मासूम निश्चल सि मेरे बाहों मे स्वयं कों सामने कि कोशिश कररही थि वो अचानक सें रो पड़ी
“भैया ये क्याँ हौ रहा हैं मैंने कभीऐसा तौ नहि सोचा थां मैंने आपका प्रेम चाहा हैं, मे दिदी कां प्रेम चाहा हैं, मे चाहती थि कि आप् दोनों मिलो, मे आपके औऱ दिदी केँ बीच नहि आनां चाहती थि.मगर ??
ये क्याँ हौ रहा हैं क्याँ प्रेम करनाइसी कों कहते हें क्याँ प्रेम करने केँ लिएदो बदन कां मिलना जरूरी हैं???
क्याँ जिस्मों केँ बाहर् प्रेम नहि होता??
अगर दिदी आप् सें प्रेम करती थि क्याँ जरूरी थां कि उनकाबदन आपकेबदन सें मिले क्याँ जरूरी थां वो करना जौ दुनिया कि नजर मे गलत हैं????”
मेरी मासूम बेहन नें मुझसे ऐसा प्रश्न पूछ लिया थां जिसका जवाब मेरेपास नहि थां शायद उसने मुझे आइना दिखा दिया थां मगरअब देर होँ चुकी थि बहोत देर मे प्रेम सें उसके बालों कों सहलारहा थां इधर निशा मेरे गालों कों चूमते हुए अपनीकमर कों हल्के हल्के हिलारही थि बड़ी अजीब सि कंडीशन थि.एक् तरफ मेरी वो बेहन थि जिसके संग मेरी जिस्मानी संबंध हैं औऱ एक् तरफ मेरी वो बेहन थि जिसे बेहद प्रेम करता थां जिसके बारे मे मे गलतसोच भि नहि सकता थां.
मासूमियत हवस औऱ प्रेम तीनों एक् संग हें थें जज्बात मुहब्बत औऱ भावनाओं कां उफानसभी कुछ एक् संग थें। बदन कि आग, प्रेम कि ठंडकता सभीकुछ एक् संग थें, निशारो रही थि पूर्वी भि रोरही थि औऱ मेरे आंखों मे पानी थां। दोबदन नंगे पड़े थें मगर आंखों मे पानीलिए, मेरा लिंग मेरी बेहन कि योनि कि गहराइयों मे थां उसमें अकड़ भि थि औऱ वो योनि केँ रस सें भीगाहुआ भि थां मगरमन मे हवस कां एक् कतरा भि नहि बचा थां, निशा भि रोतेहुए अपनेकमर कों हल्के हल्के हिलाए जारही थि औऱ मेरा अभि भि उसके मांसल चूतड़ों कों सहलाया जारहा थां। मेरी दोनों बहनें मेरेसंग थि, उसरूप मे जोँ दोनों चाहती थि एक् कों बस प्रेम चाहिए थां औऱ दूसरे कों मुझ पर्र अधिकार मेरेबदन पऱ अधिकार। दोनों कों वोँ मिला थां जोँ वो चाहते थें औऱ मुझे???
मुझे मिली थि जन्नत, मेरेसंग दोनों थें दोनों कां प्रेम मेरेसंग थां, मेरामन शांत थां मे खुश थां मानो पूरे दुनिया कि जन्नत मेरे कदमों मे हौ, पूरी दुनिया कि खुशियां मेरे कदमों मे हैं अपने दोनों बहनों कों प्रेम करना चाहता थां उसतरह सें जिसतरह सें वो चाहती थि। एक् सें जिस्मानी होकरतथा दूसरे सें रूहानी होकर.
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अध्याय 42
जिंदगी कि सब करामातों नें मुझे औऱ भि ज्यादा मजबूत बना दिया थां, अभि अभि मे छुट्टी सें वापसआया थां औऱ आके अपने कमरे मे बैठाहुआ सोचरहा थां कि आगे क्याँ करना चाहिए कि मेरेफोन कि बत्ती जलउठी,,
“हैल्लो “
“आँ गएजान “
दूसरी ओर सें काजल नें कहा
“कहा हौ तुम् देखने कों दिलकर रहा हैं “
वोँ हँसी.
“होटलआयी थि दोस्त, औऱ कहासाम कों मिलते हैं, तुम् भि जाओ मेडम रश्मि तुम्हारा प्रतीक्षा कररही होगी “
मेरे होठो मे एक् मुस्कान आँ गई क्योकि काजल नें मेडम रश्मि बोला हि कुछइस तरह जैसे वोँ इसबात कों लेकर जलती हौ …
मुझे काजल सें मिलने कां बहोत हि मनकररहा थां मे उसके सामने मलीना कि बात करना चाहता थां औऱ उसके चहरे कां एक्सप्रेशन देख्ना चाहता थां कि आखिर वोँ फिन मुझसे केसे छिपाती हैं,
मे जल्द सें तैयरहुआ औऱ उसके होटल कि तरफ भागा.
पहलीबात तोँ मे उसे सरप्राइज देना चाहता थां,
मे सोच मे पड़ गय़ा कि आखिर केसेपता करू कि वोँ कहा होगी, सीधे उसकेपास जाने सें पहले मे सोचरहा थां मेरेमन मे एक् आईडिया आया मैंने शबनम कों मोबाइल लगाया,
“अरेकहा हौ मेरीजान “शबनम कि नशीली आवाज़ मेरे कानो मे आयी
“बस छुट्टियां समाप्त होँ गई हैं अभि अभि पहुचा हु “
“ओह तोँ इस कनीज कों केसेयाद कर लिया “
वोँ फिन सें अपनी मादक आवाज़ मे बोलीं
“तुम् मेरी कनीज नहीं तुम् तोँ मेरी मलिका होँ “मे मुस्कुरा उठा
“ओहो ऐसीबात हैं.”वोँ जोरो सें हँसी
“लगता हैं साहब कों कोई जरूरी काम आँ गय़ा हैं “
उसने मेरी चपलिसी कि वजह समझने मे अधिकदेर नहीं कि
“बस मे चाहता हु कि तुम् पताकरो कों काजलकहा हैं, असल मे मे उसे सरप्राइज देना चाहता हु “
शबनम थोड़ीदेर सोचने लगी
“अरे क्याँ हुआ “
“सोचलो कही तुम्हारा सरप्राइज देना तुम्हारे लिए मुश्किल नाँ पैदाकर दे “
वोँ जोरो सें हँसने लगी, हा मे केसेभूल गय़ा थां कि काजल क्याँ क्याँ करती हैं, शबनम कि बातो मे तोँ दम थां मगरफिन भि मुझे तौ काजल सें मिलना हि थां
“तुम् पता तोँ करो वोँ होटल मे हैं तोँ आखिर हैं कहा औऱ यह भि बताने कि जरूरत नहीं हैं कि उसेपता नहीं चलना चाहिए कि मे आँ रहाहु “
वोँ शायद मुस्कुराई होगी
“ओके जैसा आप् कहे मेरेआका “वोँ फिन सें खिलखिलाई
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होटल केँ बाहर् हि मुझे हर्षमिल गय़ा शायद उसने मुझे पहचान लिया थां …
“हैल्लो सर “
मे हड़बड़ाया, मे केसेभूल गय़ा थां कि यंहा पऱ मुझे बहोत सें लोग जानते हैं,
“ओह हैल्लो “
“आप् तोँ काजल मेडम केँ फ्रेंड हैं नां “
“हम्म “
“कहा हैं तुम्हारी मेडम “
“वोँ तोँ …….”
वोँ चुप होँ गय़ा जैसेसोच रहा होँ,
“क्याँ हुआ “
“कुछ नहींसर वोँ तौ असल मे खान साहब केँ फॉर्म हाउस मे हैं “
मेरेदिल मे एक् जोर कां धक्का लगा
“ओह औऱ फार्महाउस कहा पर्र हैं “
“मुझे नहींपता सरबस इतना हि बताया थां मेडम नें, वोँ दोनो किसीडील केँ कारण वँहागए हैं, आप् एक् बार मोबाइल करके कन्फर्म कर लीजिए “
वोँ थोड़ाझेप गय़ा क्योकि उसकेमुह सें शायदकुछ गलत निकल गय़ा थां,
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मुझे शबनमकाल कररही थि
“हैल्लो “
“मजनूजी केँ लिए बुरीखबर हैं “
उसकीबात सुनकर मे थोड़ीदेर तक कुछ भि नहीं बोला
“काजल मेडम तौ होटल मे नहीं हैं “
“तौ कहा हैं ???”
“वोँ तोँ उसने नहीं बताया हैं बस इतना हि कहा कि वोँ अभि 2 घण्टे बाद हि होटल पहचेगी “
“ओक्के “
“मुझे तुमसे एक् बात पूछनी थि “
मैंने थोड़ाजोर दिया
“हा पूछो नां “
“खान कां फार्महाउस कहा पर्र हैं “
मेरीबात सें शबनम थोड़ीदेर केँ लिएसोच मे पड़ गई
“ओ तोँ काजल वँहा गई हैं, दोस्त देव क्योआग सें खेलना चाहते होँ, छोड़ो काजल कों मे हु, यंहा आँ जाओ तुम्हे जन्नत दिखाउंगी “
वोँ बहोत हि कमीनी सि आवाज़ मे बोलि
“जोँ पूछा हैं वोँ तौ बताओ “
उसने मुझे पूरापता बताया मगरसंग हि हिदायतें भि दे डाली, मगर मे उसकी हिदायतें कहा मानने वाला थां …
मैंने गाड़ी घुमा दि.
मे कर मे हि थां कि काजल कां मोबाइल आँ गय़ा
“तुम् होटलआये थें, हर्ष नें बलताय “
लगरहा थां कि मेरा होटल आनांउसे मनपसंद नहींआया, याँ हर्ष कां मुझे बतलाना
“हा सोचा थां कि सरप्राइज दूंगा, मगरअब वापसजा रहाहु, तुम् तौ अपनेखान कों खुस करने मे बिजी हौ “
थोड़ीदेर तक उधर सें कोई भि जवाब नहींआया
“देव प्लीज् …….”
उसकी आवाज़ मे एक् निराशा थि
“अगर मुझेकुछ पता नहीं होता तोँ बात औऱ थि, जबकि मुझेसभी पता हैं तोँ भि तुम् मुझसे यहसभी छिपाने कि कोशिस कररही होँ “
मे उसे समझते हुएकहा
“हा क्योकि असलियत तुम्हे जला देगी औऱ मे नहीं चाहती कि तुम् जलो, तुम्हे दुख हौ.माना कि तुम्हे सभीकुछ पता हैं मगरफिन भि मेरीबात सुनकर तुम्हे जलन होगी मे वोँ बिल्कुल नहीं करना चाहती, मे तोँ इसेबस जल्द सें जल्द ख़त्म करके तुम्हारे संग हि अपना पूरा जिंदगी बिताना चाहती हु…….अब प्लीज् देवऐसे मजाक भि मत कियाकरो क्योकि इससे मुझे लगने लगता हैं कि मे तुम्हारे संग धोखाकर रहीहु.
हाँअगर तुम् भि वैसे होते तौ अलगबात थि “
मे उसकीबात सुनकर चौका
“कैसा ???”
वोँ थोड़ीदेर तक चुप थि
“अरे बताओ भि क्याँ हूं “
“cuckoldry कां नाम सुना हैं “
वोँ धीरे-धीरे सें बोलीं.मे उसकीबात सुनकर सन्नरह गय़ा औऱ मोबाइल काट दिया, मुझे इसके बारे मे अधिक तौ नहींपता थां मगर मे कुछ तोँ जानता हि थां ………….
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अध्याय 43
“तुम्हें मलिनी कैसीलगी”
काजल नें मुझसे लिपटकर कहा.
“ बहोत अच्छी, लगा हि नहि जैसे किसी अनजान सें बोलरहा हूं”
काजल कां चेहरा चमकउठा, वो किसी बच्चे कि तरहउछल पड़ी,
” काश मे उन्हें देख पाती”
“ तोँ चलोकभी चलते हें”
उसका चेहरा थोडा सां दुःखी हौ गय़ा
“औऱ क्याँ-क्याँ किए” उसनेबात कों पलटा
“औऱ कुछ नहि बस घूमे फिरे औऱ हां डॉक्टर सें भि मिला”
काजल चौकी, वो मेरी बाहों सें अलग होँ गई
“क्याँ तुम् डॉक्टर साहब सें मिले”
“ हां क्यूं यहां हमारी पहचान तोँ होँ हि चुकी थि वो मुझे वहांदिख गए थें”
काजल कां चेहरा गंभीर होता गय़ा.
“ क्याँ हुआ डॉक्टर कां नाम सुनते हि तुम्हारे चेहरे मे क्याँ हौ गय़ा”
मैंने उसे परखने केँ अंदाज मे कहा उसने अपने आप् कों जल्दी संभाला
“कुछ भि तोँ नहि “
थोड़ी देर सोचती रही
“ अच्छा मैंने जोँ तुम्हें कहा थां उसके बारे मे क्याँ सोचा”
उसने थोड़ी नजाकत केँ संग औऱ थोड़ी शरारत केँ संग मुझसे पूछा
“ किस बारे मे???”
“ अरेवही जोँ मैंने तुम्हें कहा थां cuckoldry केँ बारे मे”उसके होठो मे मुस्कान थि
“ तुम् पागल हौ गई हौ क्याँ”
मे अपनी भावनाओं कों छुपाते हुएकहा
“ ऐसीकोई बात नहि मगरफिन भि मुझे लगता हैं कि तुम्हे कितना दुख होता होगा, उससे अच्छा हैं कि दर्द कां आनंद लियाजाए”
मैंने अपनासिर झटका
“दर्द कां मज़ा “वो मेरेऊपर आँ चुकी थि उसने मेरे होठों पर्र अपने तपतेहुए होठ रखें वो चुंबन कुछदेर तक चलतारहा.
मे उसके शरीर कों सहलाता रहा औऱ वो मादक सिसकियां लेतेरही
“क्यूं दर्द मे आनंद नहि हैं क्याँ???
“दर्द मे शायद आनंद हौ सकता हें मगर तड़प मे नहि, जलन मे नहि, उस पीड़ा मे नहि जब भि मे सोचता हूं कि तुम् किसी औऱ केँ संग होँ तुम्हें नहि पता कि मेरे अंदर क्याँ बीतती हैं ऐसा लगता हैं कि मार डालो तुम्हें भि औऱ उसे भि जोँ तुम्हारे संग हें….”
काजल कों देर तक गंभीरता सें मुझेदेख तेरेफिन अचानक सें हलके सें मुस्कुराई
“ यही तोँ बेचैनी हैं जोँ तुम्हें मज़ा देगा “
उसकी बातें मुझेसमझ नहि आँ रही थि मे उसेगौर सें देखता रहा उसका प्यारा सां चेहरा खिलाहुआ थां, वोँ मन मे कुछसोच कर मुस्कुरा रही थि.
“ ऐसे क्यूं मुस्कुरा रही हौ क्याँ तुम्हें सच मे लगता हैं कि मे वो करूंगा “
उसने अपनासिर नां मे हिलाया
“मुझे नहि लगता कि तुम् ऐसाकर पाओगे मगरहां अगर तुम् ऐसा करोगे तोँ शायद मुझे बहोत खुशी हौ “
मैंने उसे बड़े आश्चर्य सें देखा
“ ऐसा क्यूं कहरही हौ “
“क्योंकि मुझे हमेशा दुख रहता हैं कि तुम् जलरहे हौ केवल औऱ केवल मेरे कारण तुम्हें इतनी तकलीफ हैं झेलनी पड़रही हैं मात्र मेरे कारण तुम् चाहे मानो याँ नां मानोमगर मे तुमसे बहोत प्रेम करती हूं बेबी”
काजल कि आंखों मे अनायास हि आंसू आँ गए,
“ हौ सकता हैं कि ये करने सें तुम्हें थोडा चैन मिलेगा”
“ चैन कैसाचैन तुम्हें लगता हैं कि तुम्हें दूसरे केँ संगदेख कर मुझेचैन मिलेगा”
मैंने उसके आंसुओं कों अपनी उंगलियों सें हटाया, वो हलके सें मुस्कुराई उसकी प्रेम भरी नजरें भि मुझेदेख रही थि.
“ मैंने तौ सुना हैं कि कुछ लोगों कों इससेचैन मिलता हैं मज़ा मिलता हैं मुझेलगा शायद तुम् भि ऐसाकर पाओगे चलोठीक हैं कोशिश कर लेना मे ये नहि कहूंगी कि तुम् ऐसाकरो याँ नाँ करोये तुम्हारे ऊपर हैं मगरअगर तुम् इसबात कां आनंद लेता हैं तोँ शायदये मेरेलिए सबसे अच्छी बात होगीकम सें कम मे उस दर्द सें मुक्त हौ जाऊंगी कि मे तुम्हें तकलीफ देरही हूं, ”
“तोँ तुम् ऐसाकर हि क्योरही हौ काजल कि तुम्हें मुझे तकलीफ देनीपड़ रही हैं”
मे उसे घूरता रहा वो मेरे आंखों मे झांकती रही ….
“देव मे तुम्हें कुछ बताना चाहती हूं “
, मैंने उसेफिन सें एक् बार आश्चर्य सें देखा
“क्याँ “मेरा स्वर ठंडा थां
“ अपना अतीत जोँ सुनना तुम्हारे लिए शायद बहोत जरूरी हैं”
मे सोच मे पड़ा थां कि काजल नें कहना शुरुआत किया
“जानते हौ देवजब मे एक् छोटी बच्ची थि मेरे पिताजी एक् चॉकलेट लेने केँ लिए भि 10 बार सोचते थें, ”
मे उसे देखता रहा औऱ वो कहतीरही
“ इतनी तकलीफ देखी हैं, इतने दर्दसहे हें। मैंने देखा हैं गरीबी किसे कहते हें हरतरफ बस लोगों कि बुरीनजर रहती हैं जब मे 16 साल कि थि तब लोगों नें मुझेऐसे देखा थां जैसे मुझेखा जाएंगे, उनकी आंखों मे हवससाफ दिखाई देते थें, मगर मैंने अपने आप् कों बचा लिया…”
काजल कि बातें मुझेसमझ नहि आँ रही थि मगरबस मे सुनरहा थां.
“देवजब मे बच्ची थि मेरे बापू मुझे एक् दुकान लेँ गए, उन्होंने मुझसे कहा कि कौन सि मिठाई खाएगी, मे मिठाइयों कों घूरते रह गई सामने कई प्रकार कि मिठाइयां थि रंग बिरंगी ऐसीऐसी जोँ मेरेसंग कभी देखी नहि थि मे बसउसे देखते रह गई थोड़ी देरबाद मैंने एक् मिठाई केँ ऊपरहाथ रखा मैंने कहा मुझेइसे खानां हैं बापू नें दुकानदार सें रेट पूछा दुकानदार नें जोँ कीमत बताई बापूसोच मे पड़गए। थोड़ी देरइधर उधर कि बातें करतेरहे मुझे बहलारहे थें, उनकेपास इतने पैसे हि नहि थें कि वो उस मिठाई कों खरीदपाय मैंने उनका चेहरा देखा थां, वो दुःखी थें दुखी थें मात्र मेरीवजह सें, सोची वो उस मिठाई कों खरीद नहि पाया जोँ मेरी जरूरत थि औऱ वोँ जरूरत नहि थि औऱ बस मेरी तमन्ना थि मे उनके आंखों मे झांकती रही थोड़ी देरबाद बापू एक् दूसरी मिठाई लेकर वहां सें निकल गए, मे उनकेसंग चलरही थि मे एक् बच्ची थि देखोबस एक् बच्ची मगर मुझेसभी समझ आँ रहा थां.पैसे कि कमी, इतनीकमी कि उन्होंने मेरी जरूरत कों ठीक नहि समझा थां हम् थोड़ी देर तक चलतेरहे फिन बापू नें मुझेकहा क्यूं बेटा तुम्हें ये मिठाई पसन्द हैं नां मैंने कहा नहि बापू मुझे तोँ वही मिठाई पसन्द थि जौ आपने दिखाई थि.
बापू मेरे चेहरे कों देखते रहेबस देखते रहे बिनाकुछ बोले मेराहाथ पकड़कर वो मुझेफिन सें उसी दुकान मे लेँ गए, उन्होंने वही मिठाई ली जिसे मैंने कहा थां हांये अलगबात हैं उसकेबाद मेरे बापू कि जेब मे थोडा भि रुपया नहि थां हम् दोनों पैदल हि घऱगए क्योंकि हमारे पास नाँ तौ ऑटो नाँ हि रिक्से कां रुपया थां, पाप नें अपनेलिए वोँ जूते भि नहींलिए जिसे लेने केँ लिये उन्होंने महीने भर सें पैसे जोड़े थें,.
वो दिन थां औऱ आज केँ दिन हैं मुझे पैसे कि अहमियत समझ आँ गई “
वो बस इतना हि बोलपाई थि मगर मेरेदिल सें एक् बात निकल गई
“अच्छा तोँ अगरऐसा हैं तौ हम् दोनो हि कमाते हैं काजल, हमारे पास पैसे कि क्याँ कोई इतनीकमी हैं कि तुम्हे अपना शरीर बेचना पड़े “
काजल केँ आंखों सें आंसूछलक गए थें, संग हि मेरे भि.
“बात अभि पूरी नहीं हुई हैं देव …”
उसने मेरीबात कों फिन सें कांटा.
“मैंने तुम्हे बतलाया थां नां कि मेरीमा कां देहांत बहोत पहले हि हौ चुका हैं …”
काजल कि मा, हा उसने बतलाया तौ थां मगर मे तौ आज भि कन्फ्यूज़ हु कि उसकी असली मां कौन हैं औऱ उसका असली पिता कौन हैं.मैंने हा मे सर हिलाया
“असल मे उनका देहांत प्राकृतिक रूप सें याँ किसी बीमारी सें नहींहुआ थां.”
मे उसकीबात सुनता हि रहा
“उन्हें मारा गय़ा थां “
“क्याँ “इसबार मे बुरीतरह सें चौका
“हा देव उनका बलात्कार किया गय़ा थां औऱ उसकेकुछ दिनों केँ बाद हत्या “
मे उसेबस देखता हि रहा
“मेरे पिता जीजिस होटल मे काम करते थें, मेरी मा भि उसी होटल मे काम करती थि, होटल कां मालिक एक् बहोत हि कामुक इंसान थां, वोँ तोँ स्वयं भि शादीशुदा थां मगरफिन भि वँहाकाम करने वालीसब औरतों पऱ उसकीनजर रहती थि, मेरीमा पर्र भि उसकीनजर थि.उसने पहले तोँ मेरे पिता कि गरीबी कां फायदा उठाना चाहामगर जब वोँ नहीं मानी तौ उसने उनका बालात्कार किया, जब मेरे पिता जी औऱ मा पुलिस केँ पास पहुचे तौ उस होटल केँ मालिक नें अपनी पहुच लगाकर उन्हें हि अंदर करवा दिया, उस दिन मुझे दूसरी बार पैसे कि वेल्यू कां पता चला, मेरे पिता जी कों छोड़ने केँ लिए उसनेफिन सें मेरीमा केँ संग बालात्कार किया, इस बार उसकासंग वोँ इंस्पेक्टर भि देरहा थां, उन्होंने मेरे हि घऱ मे मेरे हि सामने मेरीमा कि इज्जत लूटी थि, मे रोतीरही अपने भइया कों गोद मे लिएहुए.पूरे मोहल्ले कों पता थां कि मेरेघऱ मे क्याँ होँ रहा हैं मगर किसी कि इतनी हिम्मत हि नहीं हुईँ कि वोँ कुछकर पाए……”
कमरे मे शांति फैल गई थि, काजल कि आंखों मे मानोखून उतरआया थां उसकी आंखेलाल होँ चुकी थि औऱ उसके आंसूसुख चुके थें …
“आज भि मेरे कानो मे मेरीमा केँ हरचीख़ घुंजा करते हैं देव.मे उसे नहीं भुला सकती, मे उन लोगो कों नहीं भुला सकती जिन्होंने यह किया हैं.वोँ दरिंदे वँहा भि नहीं रुके, मेरे पिता नें जेल सें छूटने केँ बाद उनसे बदला लेने केँ लिए एक् व्यक्ति कि सहायता ली थि.जिसे तुम् आजडॉ केँ नाम सें जानते होँ, उन्होंने थोड़ा प्रयास किया जिससे इंस्पेक्टर तोँ सस्पेंड होँ गय़ा औऱ होटल कां मालिक वँहा सें भाग निकला मगर जाते जाते उन्होंने मेरीमा कों भि मार दिया, बिना उसके बयान केँ दोनो हि रिहा होँ गए, डॉ भि कुछ नहींकर पाए ….मेरे पिता जी केँ लिए भि वँहा रहना मुश्किल थां वोँ भि वँहा सें निकल आये, औऱ छोटी मोटी नॉकरी करके मुझे पढ़ाया …….डॉ कों मे तब सें जानती हु, वोँ मेरेलिए मेरे पिता केँ समान हैं, ”
काजल कि आंखे सुखी हुइ थि आंसू कि एक् बून्द भि उनमे नहीं थि मगर थां तौ एक् दर्द एक् गहरा दर्द,,,
आंखे लाल.सुर्ख लाल हौ चुकी थि जैसे कि अंगारे हौ, मे उसे देखकर हि कांप गय़ा, ऐसे भि मे कईतरह केँ कन्फ्यूजन सें घिराहुआ थां,
“जानते होँ देव वोँ होटल कां मालिक कौन थां “
काजल नें फिन सें कहा, मैंने नाँ मे सर हिलाया
“होटल आदित्य इंटरनेशनल कां मलिक, मिस्टर खान ….”
इसबार चौकाने केँ लिए मेरेपास बहोत सें कारण थें
“क्याँ??????”
मे बुरीतरह सें चिल्लाया
“तुम्हे आज तक यही लगतारहा कि अजीम नें मुझेइस धंधे मे उतारा औऱ मे उसके जयजात केँ लालच मे हु इसलिये मे यहसभी कररही हु, याँ यहलगा होगा कि तुम्हारी बेहन केँ कहने पर्र यहसभी कररही हु, जैसा कि मैंने तुम्हे बतलाया थां…
मगरदेव असलबात तोँ यही हैं कि नाँ तौ निशा नां हि अजीम मुझेइस बिजनेस मे लाये हैं, मे यंहाआयी हुबस औऱ बस उन्हें बर्बाद करने.मे चाहती तोँ खान औऱ उस इंस्पेक्टर कों एक् हि बार मे मार सकती थि मगर नहींदेव उन्हें तोँ समयसमय करके मरूँगी, उन्हें इतना तड़फाउंगी कि वोँ मारने कि दुवा मांगे मगरमर नाँ पाए …”
काजल कि सांसे तेज होँ चुकी थि वोँ गुस्से सें दहकरही थि, चहरालाल हौ चुका थां, उसके एक् एक् बात मे मुझे सच्चाई दिखाई देरही थि
“औऱ जानते हौ देव मैंने तुम्हे ऐसा प्रस्ताव क्यो दिया थां …??क्योकि मे चाहती हु कि अब तुम् मेरी सहायता करो.बहोत होँ गय़ा देव मे अकेले यहसभी नहींकर सकती मे बसखान कि रंडी बनकररह जाऊंगी, मुझे उन्हें नंगा करके रास्ते मे भीख मांगने पर्र मजबूर कर देना हैं, देव”
काजल नें मेरी बांहो कों मजबूती सें जकड़ लिया
“तुम्हे मेरासंग देना होगा देव, सोचो कि मे उन दरिंदो केँ नीचे स्वयं कों रौंदाती हुफिन भि उफ नहीं करती, तौ क्याँ तुम् मुझेदेख भि नहीं सकते ????
मेरेलिए देव मेरेलिए “
इसबार वोँ रोपड़ी, मे अपने कों इतना मजबूर कभी महसूस नहीं किया थां, यह क्याँ हौ रहा थां मेरे जिंदगी मे
“मे सभीकुछ करूँगा मेरीजान “
मेरेमुह सें यह शब्द सीधे मेरेदिल सें निकलकर आँ रहे थें, मे जानता थां कि काजल मुझसे क्याँ मांगरही थि मगर उसकी किस्सा जौ कि मुझेसच हि लगरही थि उसे सुनने केँ बाद मे उसका। संग नाँ दुऐसा तोँ हौ हि नहीं सकता थां …
“देव तुम्हे मेरासंग देना हि होगा.मे जानती हु कि तुम्हारे लियेयह कितना मुश्किल होने वाला हैं मगर तुम्हे उस दर्द मे आनंद भि ढूंढना हि होगा.मैंने ढूंढा हैं इसीलिए आज मे उन लोगो केँ नीचेआने सें थोड़ा भि नहीं झिझकती जिन्होंने मेरीमा कों मारा थां औऱ जिन्होंने उनका बलात्कार किया थां, तुम्हे भि वोँ मार्ग ढूंढना होगा देव.तुहे बहलाने वाले तौ यंहा पर्र बहोत मिलेंगे, निशा मुझेकभी भि मनपसंद नहीं करती थि, औऱ अब तौ अजीम औऱ खान केँ जयजात पऱ रश्मि कि भि नजरे हैं, दोनो हि तुम्हे मेरासंग देने सें रोकेंगे मगर तुम्हे फैसला करना होगा देव, यह बहोत हि निर्णायक वक़्त हैं जबकि हम् अपना मास्टर स्ट्रोक खेल सकते हैं.”
वोँ जैसेबोल करचुप हुइ औऱ मेरे आंखों मे देखते हुए मेरे जवाब कां प्रतीक्षा करनेलगी.
“मे तुम्हारे संगहु काजल “
मे बस इतना हि बोल पाया थां औऱ वोँ मेरेगले सें लग गई ….
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अध्याय 44
जवांरंग, जवां कालिया, जवां जवां सि उमंग.यह नजारा दिखाई देता हैं सुभह सुभह गार्डन मे घूमने सें.
उसी जवानी मे मे भि डूबाहुआ गहरी गहरी सांसे लें रहा थां, मेरेसंग संग मेरी दोनो बहने भि थि, मे उनकेसंग कुछ ज़्यादा टाइम बिताने केँ इरादे मे थां,
एक् हँसता मुस्कुराता हुआ हसीन सां चहरा मेरेपास आया, मे उसे देखकर पहचान तोँ गय़ा मगरफिन भि मैंने कोई भि प्रतिक्रिया नहीं कि.
“केसे होँ देव सुना हैं तुम् अपनी पत्नि केँ अतीत कों ढूंढने मे लगेहुए होँ “
उस मदमस्त बाला नें कहा जिसे देखकर गार्डन मे उपस्थित सब लड़केआहे भररहे थें, उसके जिस्म कि बनावट कि कुछऐसी थि मगर मेरेलिए वोँ बिल्कुल भि उत्तेजक नहीं थि …
“तुम्हे किसने कहा “
मोहनी जोरो सें हँसपड़ी.
“मुझे तुम्हारे एक् एक् समय कि खबर रहती हैं, औऱ मैंने जौ तुमसे कामकहा थां तुम् उसपर भि ध्यान नहींदे रहे होँ, लगता हैं तुम् अपनी पत्नि केँ वर्तमान सें ज़्यादा उसके अतीत पऱ धयनदे रहे हौ, खान साहब कों यह बिल्कुल भि मनपसंद नहीं आएगा “
उसने थोड़ा गुस्से सें कहा, मैंने एक् बार अपनी बहनों कि ओर देखा जौ कि मुझसे बहोत दूर थि औऱ अपने आप् मे हि मस्त थि …
मेरे चहरे मे एक् कुटिल सि मुस्कान आँ गई
“पहले तोँ मुझेयह समझ आँ गय़ा हैं कि तुम् खान साहब केँ लिएकाम नहीं करती ….”
जैसे उसकेहोश उड़गए उसके चहरे सें यहबात साफ थि कि मैंने उसेपकड़ लिया थां,
“औऱ दूसरा तुम्हे मेरे लम्हा लम्हा कि कोईखबर नहीं हैं वरना तुम् यंहा मेरी जासूसी करने याँ मुझे धमकी देने नहींआती “
वोँ बौखलाई, मगर मे मंदमंद मुस्कुराता रहा
“अच्छा तोँ तुम् रश्मि केँ लिएकाम करती होँ, तभी मे भि सोचु कि किसी कों पता भि नहींलगा औऱ तुमने मुझेउस स्थान सें जंहा सें मुझे बंदी बनाकर रखा थां वँहा सें होटल केँ कमरे तक केसे लायी, फिन तुम्हे जब काजल औऱ मेरे बारे मे सभीकुछ पता हैं तौ खान साहबकोई एक्शन लेने कि बजाय मुझे कों किडनैप करवाएंगे.रश्मि नें यहसभी क्यो किया औऱ खान साहब कां नाम हि क्यो फसाया यह तोँ मुझे भि समझ मे आँ गय़ा हैं, मगर तुम्हारी क्याँ मजबूरी थि कि तुम् अजीम औऱ खान कों धोखा देकर रश्मि केँ संगकाम करनेलगी …”
मेरे चहरे कि मुस्कुराहट औऱ भि गहरी हौ गई वंही मोहनी केँ चहरे मे भि एक् मुस्कान आँ गई
“तुम् तौ सच मे बहोत हि मन वाले निकले, क्याँ तुम्हे जरा भि डर नहींलगा थां जब मैंने तुम्हे किडनैप करवाया थां “
“डर तौ मे गय़ा थां मगरजब मैंने चीजो कों ध्यान सें सोचा तौ मुझेसभी कुछ हि समझ आँ गय़ा, खान केँ पास अभि तोँ इतनामन नहीं हैं कि वोँ काजल केँ खिलाफ कोईकाम करेमगर हा रश्मि जरूर काजल केँ पीछेपड़ी हुईँ हैं मुझेबस यह जानना हैं कि तुम् क्यो रश्मि कि गुलामी कररही हौ”
मैंने गुलामी शब्द मे ज़्यादा जोर दिया क्योकि मे उसे थोड़ा सां बहकाना चाहता थां औऱ मेरेकहे अनुसार वोँ थोड़ी बेचैन भि होँ गई
“मे उसकीकोई गुलामी नहीं करती, मुझे वोँ पैसे देती हैं यहकाम करने केँ लिए पहले वोँ मुझसे अजीम कि जासूसी करवाती थि वहीअब वोँ मुझसे खान कि जासूसी करवाती हैं, मुझे अपने पैसे सें मतलब हैं नाँ कि मे कोई जासूसी करतीहु, औऱ अबजब काजलखान कों अपनेवस मे कररही हैं तोँ रश्मि केँ लिए सबसेबड़ा खतरा तौ काजल हि हैं, इसलिये वोँ अब काजल कि जासूसी करवाती हैं मगर काजल शायद उसके उम्मीद सें ज़्यादा हि चालक हैं इसलिये उसने तुम्हे टारगेट करने कि सौचीमगर उसने गलतियां कर दि औऱ तुम्हे सभीकुछ पताचल गय़ा …”उसने एक् हि सांस मे कह दिया
“तोँ तुम् बसअगर पैसे केँ लिएकाम करती होँ तौ क्यो नाँ मेरे मित्र कामकरो “
उसकी आंखे चौड़ी हौ गई
“तुम्हारे पास हैं हि क्याँ देने केँ लिए “
मे जोरो सें हंसा
“शायद तुम्हे पता नहींमगर अब अजीम सें ज़्यादा जायदाद मेरेपास हैं मे तुम्हे पैसे सें नहला सकताहु “
वोँ हक्की बक्की होँ कर मुझे देखने लगी
“अजीम औऱ खान केँ पास क्याँ हैं ???एक् होटल केशरगड मे ? एक् होटल यंहा?कुछ औऱ बिजनेस जोँ कि अभि पूरीतरह सें घाटे मे चलरहे हैं “
उसनेहा मे सर हिलाया, वोँ एक् C.A। केँ संगकाम करती थि तोँ मुझे यकीन थां कि उसे पैसे कि भाषा अच्छे सें समझ आएगी
“अब मेरीबात पहले ध्यान सें सुनोफिन कोई फैसला करना, मे अभि केशरगड मे थां तुम्हे तोँ पता हि हैं कि मे काजल केँ बारे मे पता करने कि कोशिस कररहा थां वँहा मुझे जानती होँ क्याँ पतालगा “
उसने नां मे सर हिलाया मगर उसके चहरे सें उसकी उत्तेजना औऱ बेचैनी साफसाफ झलकरही थि
“मुझेयह पतालगा कि काजलअसल मे होटल आदित्य केँ मालिक कि बेटी हैं, ”उसके चहरे मे कुछखास प्रतिक्रिया नहींआयी
“यह तौ मुझे पहले सें पता हैं, कि वोँ होटल पहले आकाशजी कां थां जिसकी बेटी काजल हैं मगर उन्होंने IAS ऑफसर बनने केँ बाद हि उसेबेच दिया औऱ स्वयं वँहा सें दूरचले गए “
इसबार मे थोड़ा कन्फ्यूज़ होँ गय़ा मगर मैंने उसे चहरे मे लाने नहीं दिया
“उन्होंने वोँ होटल बेचा नहीं थां बल्कि खान नें इसपर अपना अधिकार जमाया थां, संग हि उसने यंहा कि सब प्रॉपर्टी पर्र भि अपना अधिकार जमाया जौ कि असल मे काजल केँ पिता केँ हि नाम कि थि, तोँ उसकी असली मालिक कौन हुईँ काजल हि नाँ, इसलिये हि काजल अपनी पूरी ताकत सें खान कों फसने पऱ तुली हुइ हैं, औऱ जबकि आज भि उसकेपास वोँ कागज हैं जिसपर खान नें आकाशजी सें धोखे सें साइन करवाये थें, तोँ पहलीचीज कि काजल केँ लिएअब अधिक मुश्किल नहीं हैं कि लीगली वोँ सभीकुछ फिन सें अपनेनाम मे कर सकती हैं, औऱ जबकि खान भि उसके झांसे मे हैं अजीम तौ उसका कुत्ता हि बनाहुआ हैं वोँ जंहा बोलती हैं वोँ साइनकर देता हैं, कुछ हि दिनों मे सभीकुछ हि काजल केँ नाम पऱ होगा वोँ भि बिल्कुल हि लीगलरूप सें …….”
असल मे मैंने यहकथा बनाई थि मुझे भि नहींपता थां कि असल मे काजल कों कितना सक्सेज मिला हैं याँ यह कि वोँ असल मे आकाश औऱ मलीना कि बेटी हैं भि कि नहींमगर मैंने जौ पासा फेका मोहनी उसमेसच मे हि फंस गई.उसका चहरा हि बतलारहा थां कि वोँ मेरी बातो पऱ यकीनकर रही थि …
“तौ.जबकुछ भि खान औऱ अजीम कां हैं हि नहीं तौ केसे वोँ रश्मि कों मिलेगा, संग हि संग हमारे पासऐसा भि प्लान हैं कि हम् जब चाहे रश्मि औऱ कपूर केँ पूरे बिजनेस कों एक् हि बार मे तबाह करके यंहा केँ राजाबन सकते हैं, अब तुम्हे सोचना हैं कि तुम् किसका संग देना पसन्द करोगी उगते हुइ सूरज कां याँ डूबते हुए सूरज कां …….
तुम्हे यह भि पता होगा कि काजल केँ पिता एक् IAS अधिकारी थें इसलिये सरकारी अमले भि उसकी बहोत हि पहचान हैं, अगर उसकेपास रुपया आँ गय़ा तौ वोँ अपने हिसाब सें सभीकुछ चलाने लगेगी, तब तुम् कहा जाकर छुपागी ??”
मेरीबात मे ऐसा कांफीडेंस थां कि मोहनी सच मे डर गई.जबकि असलियत यह थि मुझे भि असलियत कां कोईपता नहीं थां, मगर मेराकाम हौ गय़ा थां
“हमारे संग आँ जाओआज नहीं तौ कल पैसे औऱ पॉवर कि कोईकमी मे तुम्हे होने नहीं दूंगा ऐसे भि तुमपर तौ मेरादिल आँ गय़ा थां, जब मैंने तुम्हे पहलीबार देखा थां ….”
पहलीबात कि मैंने हमारे संगकहा थां मतलब मे उसे बतलाना चाहता थां कि मे औऱ काजलअब एक् हि होँ गए हैं, औऱ काजल केँ हर एक्शन केँ बारे मे मुझेपता हैं, दूसरा मैंने जौ दुसरी बातउसे कही उसकी तारीफ मे उससेउसे यह जरूर लगता कि मे कुछ तौ उस पर्र फिदाहु, मैंने यह जानबूझ करकहा थां क्योकि मे उसे दिखाना चाहता थां कि मे भि अमीरों कि तरह अय्यास हौ सकताहु, क्योकि अभि तक उसने लोगे केँ अमीरी औऱ उनके अय्यास होने कां हि फायदा उठाया थां मे भि चाहता थां कि वोँ मेरा फायदा उठाये.बड़ी अजीबबात थि मगर असलियत यह हि थि कि अगर वोँ मेरा फायदा उठाएगी तभी वोँ मेरे नीचे आँ पाएगी, शरीर सें भि औऱ मन सें भि, मे उसे अपनी गुलाम कि तरहयूज़ करना चाहता थां …औऱ इसकेलिए सबसे जरूरी थां कि मे एक् मालिक कि तरहपेश आउ…
वोँ बहोत हि सोच मे पड़ गई, थि उसे मेरी मालकियत कां तौ अहसास होने हि लगा होगा वोँ मेरे बातो सें हि समझ आँ रहाहटा कि मे उससे क्याँ चाहता हु …
“मुझे सोचना पड़ेगा “
“सोचलो मगरदेर मत करना क्योकि तुम् सोचती थि कि तुम् मेरेऊपर नजररखे होँ, जबकि तुम् मेरे रेडर मे हौ, मे तुम्हरे हर एक् मूवमेंट पर्र नजररखे हुएहु, ”
वोँ चौकी
“तुम्हे क्याँ लगा थि कि तुम्हारा यंहा आनांमहज इत्तेफाक थां, तूम आओगीयह मुझे पहले सें पता थां इसलिये हि मे यंहाआया वरनाकब तुमने मुझे यंहाआते हुए देखा थां, औऱ इसलिये मैंने अपनी बहनों कों भि अपने सें दूर हि रखा थां क्योकि मे तुमसे अकेले मे बात करना चाहता थां “
उसका चहरा आश्चर्य सें लाल होँ गय़ा उसकी आंखेबड़ी हौ गई उसे यकीन हि नहीं आँ रहा थां कि एक् साधारण सां दिखाने वालाशखस उसकी जासूसी कररहा हैं,
असलीबात यह थि कि मुझेइस बारे मे बिल्कुल भि पता नहीं थां कि वोँ आँ रही हैं याँ वोँ मुझे यंहामिल जाएगी मगरजब वोँ आँ हि गई थि औऱ मेरेहर झूट कों मान हि रही थि तोँ मैंने यह पासा भि फेक दियाउसे सचमेलगा कि मे उसकी जासूसी कररहा हु औऱ उसकेऊपर नजररखे हुएहु, मेरी बहनेपता नहीं क्यो अभि भि हमसेदुर थि औऱ मोहनी कों लगरहा थां कि यह भि प्लान कियाहुआ हैं ताकि हम् दोनोआपस मे ज़्यादा बातकर सके …
मे अपनी बातो कों मोहनी कों समझने मे सफल हौ गय़ा थां
“तोँ तुम्हे जल्द सें हि फैसला लेना पड़ेगा अगर इसके बारे मे रश्मि कों पतालगा तौ पहले तुम्हारा पति जायेगा फिन तुम्.ऐसे भि मुझेकई नेताओ औऱ अधिकारियों कों दावत देनी थि, तुमसे अच्छी रंडी मुझेकहा मिलेगी उसने सामने परोसने केँ लिए “
मैंने अपने आंखों मे बड़ी हि कमिनियत लायी जिससे वोँ कांप हि गई, ऐसी बातेकोई साधरण व्यक्ति तौ नहींकर सकताउसे यह अहसास हौ गय़ा कि सच मे मेरेपास कोई पवार आँ गई हैं वरनाउसे मेरे बारे मे पता हि थां कि मे कितना सीधा साधा व्यक्ति हु, सें लगनेलगा कि सच मे मेरेपास कुछऐसा हैं कि यहसभी कर भि सकताहु, मेरा सीधा साधा होनाफिन मेरायह रूप बदलना उसेसमझ आँ रहा थां जौ कि मेरेलिए अच्छी बात थि.वोँ गिड़गिड़ाई
“नहींदेब ऐसाकुछ भि मत करना मे रश्मि कों कुछ भि नहीं बतलाऊंगी “
“ह्म्म्म तौ सोचकर बताना अगर तुम् हमारे संग होँ तौ तुम्हे डरने कि कोई भि जरूरत नहीं हम् पहले कि हि तरहयार रहेंगे औऱ मे अपने दोस्तो कां बहोत हि ख्याल रखताहु,,, औऱ अगर तुम्हे कोई गलती करने कि कोशिस कि तोँ याद रखना कि दोनो हि होटलों मे कईलोग मेरे हि दया सें नौकरी कररहे हैं औऱ वोँ अब मेरेसंग हैं, औऱ पूरे होटल केँ कैमरे कां एक्सेस भि मेरे हि पास हैं इसकेसंग हि सबरूम मे रश्मि केँ रूम मे भि मैंने उसकी बातो कों रिकार्ड करने कि डिवाइस लगा केँ रखे हैं, तुम् मुझसे कभी नहींबच पाओगी …….”
मे हल्के सें मुस्कुराया, माना कि यहसब बातेगलत थि मगर मोहनी केँ चहरे सें पताचल गय़ा थां कि वोँ मेरीबात कों मान चुकी थि ……….
उसके जाने केँ बाद मैंने एक् गहरी सांसली, आज मेरी एक्टिंग मेरेकाम आँ गई अगरयह मेरेसंग आँ जाए तौ मे इसेडबल एजेंट कि तरहयूज़ करूँगा, रश्मि कों लगेगा कि वोँ मेरेऊपर नजररख रही हैं वही मे रश्मि केँ ऊपरनजर रख पाऊंगा …….
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अध्याय 45
मनकई आशंकाओं सें भराहुआ थां, औऱ गाड़ी बहोत हि स्पीड सें चलरही थि, वैसे हि मेरेदिल कि स्पीड भि बढ़ी हुई थि, वोँ बहोत हि तेजी सें धड़करहा थां, मैंने गाड़ी रोकी औऱ जोरो सें गहरी सांस ली, मेइस टाइमखान केँ फार्महाउसमें थां, मुझे अजीब सां डरलगरहा थां, काजल नें तौ मुझेकह दिया थां कि तूँ इसकेमजे लोमगर क्याँ मे सच मे ऐसाकर सकताहु यह मे नहीं जानता थां,
मे गहरी सांसे लेकरउस बंगले नुमा फार्महाउस कों देखने लगा, मे किसी नें नजर मे नहीं आनां चाहता थां, मे आशंकित थां कि अंदर क्याँ होँ रहा होगाअसल मे यू हि इधर आँ गय़ा थां मुझेसच मे नहींपता थां कि अंदर काजल होगी भि याँ नहीं …
मैंने थोड़ीदूर मे झाड़ियों केँ अंदर अपनी गाड़ी लगाई औऱ दीवाल फांदने कां प्लान बनाया, मे आहिस्ता सें एक् दीवार मे चढ़ गय़ा औऱ अंदर स्वयं गय़ा, पता नहीं अंदर क्याँ हौ मगर जानने कां एक् पागलपन मेरे अंदर आँ चुका थां, मे काजल कों भि नहीं बतलाना चाहता थां कि मे क्याँ कररहा हु, मे किसी जासूस केँ तरहकमद रखरहा थां औऱ वैसे हि सोचने लगा थां,
मे अंदर आँ चुका थां औऱ मैंने स्वयं कों सम्हाला, मे धीरे-धीरे धीरे-धीरे अंदर गय़ा, अंदर जाकर मैंने मे उसबड़े सें घऱ जिसे बंगाल भि बोलाजा सकता हैं केँ पास पहुचा, मे विशेष धयनइस बात कां रखरहा थां कि कही मुझेकोई देख नाँ लेँ संग हि कि कहीकोई कैमरा तौ नहींलगा हुआ हैं, ऐसे तौ मुझेकोई भि कैमरा नहीं दिखाई दिया, मे बड़े हि ध्यान सें अंदर गय़ा, मे पहले तौ उस बंगले कों ध्यान सें निहारने लगा, मुझेकुछ खिड़कियां औऱ बाहर् लगी हुईँ a.c, केँ डब्बे हि दिखरहे थें, मे पहले तोँ मेनगेट केँ अंदर जाने कि सोचरहा थां मगरफिन मैंने अपना इरादा बदला औऱ मे उसके चारोओर घूमने लगा, मुझे वोँ स्थान दिख हि गई जंहा सें मे अंदरजा सकता थां, वोँ फर्स्ट फ्लोर कि ख़िदखि थि, मे उसे हल्के सें खोला तोँ समझआया कि यह रसोई हैं, वँहा सें अंदर जानां भि तोँ खतरे सें खाली नहीं होगा, मे गंभीर सोच मे पड़ाहुआ थां कि मेरा ध्यान वँहाफले हुएकुछ आमो पर्र गय़ा, मे अपनी हि सोच मे उनपके हुएआमो कों निहारता रहा, औऱ फिन थोड़ीदेर बाद मुझे मेरा प्लान सूझ गय़ा मे फिन सें दीवार फांदकर बाहर् चला गय़ा …….
…….
“कौन हैं भोसड़ी कां जौ पत्थर फेकेजा रहा हैं “
एक् बुजुर्ग सां आदमी फार्महाउस कि मेनगेट कों खोलकर बाहर् आया, मे उसे देखकर रुकामगर वँहासके भागा नहीं, वोँ यंहा कां गार्ड लगरहा थां, मे पिछले 15 मिनट सें पत्थर फेकरहा थां, कुछआम केँ पेड़ जौ कि दीवारों सें बाहर् झांकरहे थें उनमेपके हुएआम दिखाई देरहे थें मे उन्हें हि निशाना बनाता मगर जानबूझ करऐसे पत्थर फेंकता थां कि उन्हें पड़े हि नहीं बल्कि सीधे अंदरचले जाए, मगर फिन भि बहोत देर तक किसी नें कोई केयर हि नहीं किया, ऐसे भि यह एक् वीरान सि स्थान थि यंहा कां गार्ड भि घोड़े बेचकर सोरहा होगा, मगर मेरी मेहनत सफल हुइ औऱ वोँ उस गार्ड कों समझ आँ गय़ा कि कोई अंदर पत्थर फेकरहा हैं, वोँ मुझे घूरा क्योकि मे कोई आवारा लड़का तोँ नहीं थां जोँ कि आम केँ लालचमे पत्थर फेकरहा हौ,
“कां हुआ बाबूकहे पत्थर माररहे होँ “
वोँ गुस्से मे थां मगरफिन भि मेरे कपड़ो केँ कारण उसने मुझसे थोड़ी तमीज सें बात करना हि सही समझा, संग हि उसने देखा कि मेरे बाजू मे हि मेरी गाड़ी भि खड़ी हैं.
“ओ सॉरी बाबाअसल मे इन्हें देखकर लालच आँ गय़ा थां सालाशहर मे ऐसेआम कहा मिलते हैं, ताजा ताजा, औऱ वोँ भि इतने नेचरल पेड़ मे हि पकेहुए, खाने कां मनकर गय़ा, सोचा कि एक् दोतोड़ लूमगर साला निशाना हि सही नहींजा रहा ……”
वोँ थोड़ीदेर तक मुझे घूरता रहाफिन जोरो सें हँसपड़ा,
“क्याँ बाबुजी आप् तोँ पढ़े लिखे हुइ अमीर व्यक्ति लगते होँ बच्चों जैसी हरकत क्योकर रहे हौ “
मे जल्दी अपनेजेब सें एक् 500 कां नोट निकाल कर उसके सामने किया,
“बाबाकुछ आममिल सकता हैं क्याँ, मेरी पत्नि कों बहोत पसद हैं “वोँ ललचाई निगाहों सें उसनोट कों देखा औऱ मुझेसमझ आँ गय़ा कि यह बुड्डा मेरे बहोत काम मे आने वाला हैं….
“ठिक हैं मे कुछआम आपकेलिए तोड़कर लाता हु”उसने पैसेबड़े हि प्रेम सें स्वीकार कर लिए, वोँ अंदर जानेलगा संग हि मे भि, मगर उसने मुझेरोक दिया
“अरे यह क्याँ बाबुयही रुको हम् आते हैं “
“अरे बाबा देखने तोँ दो कि गार्डन मे औऱ क्याँ बोया हैं कुछ पसन्द गय़ा तौ वोँ भि लेँ जाऊंगा,.”
वोँ मुझे घूरने लगा
“अरे उसकेअलग सें पैसे लें लेना”
उसके चहरे मे मुस्कान आँ गई
“अरे बाबू ताजा भि हैं औऱ ओरजेनिक भि हैं “
“ऑर्गेनिक ??”
“हाहावही “
“अरेवाउ तब तोँ सोने मे सुहागा होगा, बाबा देखने तोँ दो गार्डन “
“अरे नहीं मरवाओगे क्याँ, गेट मे हि कैमरा लगा हैं, तुम् रुको मे पहले कैमरा बंदकर दुफिन अंदर आँ जानां “
वोँ अंदरचला गय़ा औऱ मेरे होठो कि मुस्कान औऱ भि बढ़ गई सालाजिस काम कों मे इतना मुश्किल समझरहा थां वोँ कितना आसान थां, बस मुझेइस बुड्ढे कों अपनेबस मे करना होगाआधी इन्फॉर्मेशन तोँ यहीदे देगा.
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मे इत्मीनान सें पूरे गार्डन मे घूमरहा थां सच पुछु तोँ बहोत हि अच्छे औऱ ताजेफल थें वँहासच मे एक् बार तोँ मे भि उन सब्ब्जियो औऱ फ्लो कों देखकर भूल गय़ा थां कि मे यंहा पऱ क्योआया हु, उस बुड्ढे नें कैमरा मेरे अंदरआने केँ बाद चालूकर दिया, मे समझ गय़ा थां इंट्री पर्र हि कैमरा लगाहुआ हैं, वँहा एक् बड़ा सां कुत्ता भि थां, जब मैंने उसे देखा तोँ मेरे प्राण हि सुखगए थें, क्योकि अगर पहले मे इस कुत्ते केँ संपर्क मे आँ जाता तोँ यह मेराआधा मांस हि खा गय़ा होता, अभि मे उसे अपने हाथो सें सहलारहा थां औऱ वोँ भि मुझे पहचानने लगा थां, संग हि उसने अपने बेटेबहु सें भि मुझे मिलाया, वोँ इतने इत्मीनान मे थां कि मुझेपता चल गय़ा कि यंहाखान नहीं हैं, मगर मेरेलिए यह अच्छा हि थां कि मे इस फार्म हाउस केँ सब लोगो सें अच्छे सें मिल गय़ा, मैंने उनसे उनकी हि भाषा मे बात कि औऱ यह भि बलताय कि मे पास हि काम करताहु औऱ इसरॉड सें गुजरता रहताहु, मे बहोत हि गरीबघऱ कां हु मेहनत करके इतनाबड़ा हुआहु, मैंने उसके बेटे होँ कुछ मूलभूत ड्रीम्स भि दिखादिए जैसे कि वोँ अपने बेटे कों केसे पढ़ाये ताकि वोँ आगे चलकरकुछ बड़ा व्यक्ति बनपाए, मैंने वँहा पर्र 1 सें 1.5 घंटे बिताये औऱ हालतयह हौ गई कि उन्होंने मुझसे रिक्वेस्ट किया कि आप् जब भि इधर सें गुजरे तौ यंहा जरूरआया करे, उसका बेटा बड़ा हि सुलझा हुआ इंसान लगरहा थां जोँ कि अपनी गरीबी सें त्रस्त थां, मे उसेशहर लाने औऱ उसे नॉकरी दिलाने कि भि बातकर दि, बुड्डा गार्ड तौ मुझे मेरे पैसे भि लौटने लगामगर मैंने जिद करकेउसे वोँ पैसेदे हि दिए, मेरी सहजता औऱ अच्छाई आजकाम आँ गई थि मे उन गरीब लोगो सें असांनी सें मिलपा रहा थां, व्यक्ति अगर सचमे अच्छा होँ तौ उसकी अच्छाई उसके व्यव्हार सें झलकने लगती हैं,
मे उसके बेटे कों कोईगलत ख्वाब नहीं दिखारहा थां मुझेसच मे लगा कि मे इसेकोई काम दिलादु, मैंने उसेकुछ वक्त मांगा औऱ वँहा सें चला गय़ा, उसका बेटा सारे फ्लो औऱ सब्जियों केँ संग मुझे छोड़ने मेरे गाड़ी तक आया…
“साहबआते रहिएगा, ”
“बिल्कुल हरिया भइया, मगर दोस्त तुम्हारे मालिक कों अगरपता लगा तोँ गजब हौ जाएगा “
“अरे आप् फिक्र मत कीजिये यंहा कां सभीकुछ हमारे हि कंट्रोल मे रहता हैं उसेकभी पता नहीं चलेगा, आप् बस मुझे मोबाइल कर दिया कीजियेगा.वोँ साला तौ बस अपनी ऐयासी केँ लिए यंहाआता हैं सच बोलू तौ मुझेयह सभी बिल्कुल भि नहीं पसन्द मगर क्याँ करेकोई औऱ काम भि तोँ नहीं हैं, साला रंडियों केँ संग यंहाआता हैं कभी वोँ तोँ कभी उसके साथी, यंहा मेरी पत्नि भि हैं मेरे बच्चे भि हैं, मुझे तौ बहोत हि बुरा लगता हैं भाई …”
उसके आंखों मे आंसू आँ गए थें, वोँ मुझे भाई बुलारहा थां मैंने उसे दिलासा दिलाया कि मे उसकेलिए जल्द हि कोई नॉकरी ढूंढूंगा, मे वँहा सें निकल गय़ा.
मगर मेरेमन मे एक् बातबार बार आँ रही थि कि गरीबी लोगों कों क्याँ क्याँ नहीं करने पऱ मजबूर कर देती.
कहायह सुलझा हुआ औऱ समझदार व्यक्ति, इसकी इतनी अच्छी पत्नि औऱ बच्चा हैं एक् परिवार वाला व्यक्ति औऱ कहा वोँ ऐसी स्थान मे कामकर रहा हैं जौ खान नें केवल औऱ मात्र अपने ऐयासी केँ लिए हि बनाया थां,
ऐसा नहीं थां कि उन्हें यंहा किसी भि चीज कि कमी थि मगरकमी थि तोँ बस सम्मान कि ……….
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) - Continue reading next part
एक् तरफ काजल बदला लेना चाहती हैं दूसरी तरफ पति केँ सामने उससे उकसाकर जानबूझ केँ वहां बुलवा कर केँ बाज़ारू औरतों कि तरह चुदाई करवारही हैं
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