मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) - Latest Update 1
मेरानाम सलमान हैं। पाकिस्तान केँ शहर लाहौर कां रहने वाला हूं। हमारे घऱ मे मेरी अम्मी अब्बू औऱ मेरी बड़ी बेहन टोटल हम् 4 आदमी हें। अबू बैंक मे अधिकारी हें। जब अम्मी घरेलू स्त्री हें। अम्मी कि उम्र 43 साल हैं। अबू कि उम्र 52 साल हैं। बाजी कि उम्र 22 हैं औऱ मेरी 20 साल हैं। अबूनाम असद हैं वो बहोत हि सख्त स्वभाव केँ बहोत हि प्रेम करने वाले पिता औऱ हसबंड हें।। अम्मी कां नाम रूबीना हैं औऱ वो बहोत हि सरल स्वभाव कि औरत हें। अम्मी कि विवाह शिक्षा केँ जल्दी बाद होँ गई थि। अम्मी अब्बू कों तहेदिल सें प्रेम करती हें औऱ अबू केँ प्रति बहोत हि वफादार हें। उनका औऱ अबू कां प्रेम देख हमेशा ऐसालगा कि उनकीअबू सें विवाह कों कुछ हि दिनहुए हें। अम्मी मुझे औऱ मेरी बेहन सें बहोत प्रेम औऱ लाड़ प्रेम करती हें।। हम् दोनों बेहन भइया कि जब भि कोई ख़्वाहिश हौ उसे अम्मी सें हि कहते थें। औऱ अम्मी उसे जितना जल्द होँ सके पूराकर देती थि।।
मे कॉलेज मे पढ़ता हूं। बाजी कां नाम हिना हैं औऱ वो डॉक्टर बनरही हें।। खैर जिंदगी अच्छा गुजररहा थां। हमारे घऱ मे 1 रूम नीचे औऱ संग मे ड्राइंग रूम औऱ डाइनिंग नीचे औऱ नीचे केँ कमरे मे अम्मी अब्बू जबकि ऊपर 2 कमरे हें एक् मेरा दूसरा बाजी कां। मेरी बाजी मुझसे बहोत प्रेम करती हें औऱ हम् दोनों बेहन भइया बाकी भइया बेहन कि तरहकभी एक् दूसरे सें नहि लड़े। मे भि बाजी सें बहोत प्रेम करता हूं। हाँये औऱ बात हैं कि जबकभी बाजीये महसूस करती कि मे स्टडी मे ध्यान नहि देरहा हूं तोँ वो मुझे डांटती अवश्य थि औऱ मुझे हमेशा कहती थि कि मुझे भि उनकीतरह एक् दिन डाक्टर बनना हैं।।
एक् दिन मे अपनी रोजमर्रा कि दिनचर्या कि तरहरात कों अपने कमरे मे सोयाहुआ थां कि मेरेरूम केडोरपर दस्तक कि आवाज़ सें मेरी नींदखुल गई।। मैंने वक्त देखा तोँ रात केँ 12 बजरहे थें मे परेशान हौ गय़ा औऱ दिल मे सोचा कि खुदाखैर करेंये टाइमकौन औऱ क्यूं आया हैं। मैंने जा केँ डोर खोला तोँ सामने बाजी खड़ी थि औऱ उनके चेहरे पऱ बहोत तकलीफ़ थि।। मैंने पूछा बाजी खैरियत तोँ हैं नं आप् परेशान लगरही हें।। बाजी नें कहा कि सलमान मेंने बुरा सपना देखा हैं जिससे मे बहोत डर गई हूं मुझे नींद नहि आँ रही थि कमरे मे बहोत डरलगरहा थां इसलिये तुम्हारे रूम मे आँ गई हूं मे यहासो सकती हूं। मैंने कहाजी बाजीआइए यहांसो जाएं परेशान नं हों।। (बाजी केँ संगजब भि ऐसा होता तोँ वो मेरे कमरे मे आँ जाया करती थि बताने कां उद्देश्य हैं कि येकोई पहलीबार नहि हुआ कि दिदी मेरे कमरे मे सोने केँ लिएआई ) मैंने बाजी कों पानी पिलाया वो मेरेबेड पे आँ केँ लेट गई। मे भि बेड पे लेट गय़ा हम् बातें करते करतेसो गये।।
रात कों कोई 2 बजे केँ लगभग मेरीआँख खुली तौ मैंने देखा कि बाजी दूसरी ओर मुंह करकेसो रही हैं (मेरीआदत हैं कि मे अपनेरूम मे ज़ीरो वाट कां बल्ब ऑनलाइन रखता हूं) मेंने देखा सोते मे मेराहाथ बाजीपेट पे रख दिया थां।। पऱ बाजी कों इसबात कां पता नहि चला थां क्यूं वो गहरी नींदसो रहीथीं।। मैंने जल्दी अपनाहाथ बाजी केपेट सें उठा लिया।। फिन अचानक मेरी नज़र बाजी कि कमीज पे पड़ी बाजी कि कमीज उनकी एक् साइड सें थोड़ी सि उठी हुई थि जिससे उनकी सफेद त्वचा नज़र आँ रही थि (यहा मे बतादूं कि बाजी कां रंग बहोत अधिक सफेद हैं यानी कि व्हाइट इतना व्हाइट कि मानो जैसेहाथ लगाने सेगन्दा हौ जाएगा) औऱ संग हि मेरीनजर नीचे कों फिसल गई तोँ मे देखा कि बाजी कि गाण्ड शर्ट उठने कि वजह सें बहुतदिख रही थि।।
आज पहलीबार मैंने गौर सें देखा कि बाजी कि गाण्ड बहोत मोटी औऱ बाहर् निकली हुइ हैं।। अचानक मैंने अपनेसिर कों झटका औऱ मुझे अपने आप् पे क्रोध आनेलगा औऱ मे सोचने लगा कि ये मुझेआज क्याँ हौ गय़ा हैं।। आज तक मैंने कभीऐसी नज़र सें अपनी बाजी कों नहि देखा तोँ आज क्यूं।। अब मुझे अपनीइस हरकत पे शर्मिंदगी होनेलगी। खैर जैसे तैसे करके मुझे नींदआई औऱ मे सो गय़ा।।
सुभहजब मे उठा तौ बाजीतब तक अपने कमरे मे जा चुकी थि। मे भि उठा औऱ सजधजकर होनेलगा। रेडी होने केँ बाद नीचे नाश्ते केँ टेबल पे जा पहुँचा।। बाजी भि सजधजकर होँ केँ ब्रेकफास्ट कररही थीं अम्मी औऱ अबू भि ब्रेकफास्ट कररहे थें।। मैंने हर किसी कों सलाम किया औऱ ब्रेकफास्ट करनेलगा। नाश्ते केँ दौरान हि बाजी नें अम्मी अब्बू कों रात केँ बारे मे बताया कि केसे वो डर गई थि औऱ मेरे कमरे मे आकरसो गई थींजिस पे अम्मी हँस दि अबू नें मात्र स्माइल कि। बाजी नें ब्रेकफास्ट ख़त्म किया औऱ मुझे भि कहा कि जल्दकरो लेट होँ जायेंगे (यहा मे बतादूँ कि मे अपनी वाहन सें बाजी कों उनके मेडिकल कॉलेज तक ड्रॉप करता हूं। जबकि अबू कि अपनी वाहन हैं जिस मे वो बैंक जाते हें) मैंने जल्द सें ब्रेकफास्ट समाप्त किया औऱ उठा अपनाबेग उठाया औऱ बाजी नें अपनाबेग। हम् गाड़ी मे बैठने केँ बाद अपनी मंजिल कि ओर दौड़ते हुए कॉलेज पहुँचे तब तक हम् दोनों केँ बीचरोज कि तरह नॉर्मल गपशप होतीरही तौ मैंने दिदी कों उनके कॉलेज उतारा बाजी मुझेबाय बोलते हुए वक्त पे फिन सें लेने कि ताकीद करतेहुए वाहन सें उतररही थीं।। कि फिनवही रात वाला बेहूदा दौरा मेरे दिमाग़ मे पड़ गय़ा मेरी नज़र पहलीबार बाजी केँ बूब्स पे पड़ी।
मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) – New Episode
बाजी केँ बूब्स बहोत मोटे थें जब बाजी गाड़ी सें उतरकर कॉलेज केँ अंदरजा रही थि तोँ मेरी नज़रें फिन उनकी गाण्ड पे चली गई मेरेबदन मे मीठी मीठी लहरें भागना शुरुआत हौ गई बाजी कि पतलीवी शेपकमर औऱ उस पे बाहर् निकली हुइ मोटी गाण्ड क्याँ शानदार कॉम्बीनेशन बनाया थां प्रकृति नें।। इस पऱ एक् औऱ करिश्मा थां कि बाजी केँ बूब्स मोटे मोटेथे। यानी कि बाजी केँ बूब्स मोटेकमर वीशेप मे औऱ गाण्ड मोटी औऱ बाहर् निकली हुई।। अपनी बेहन कों इसतरह बुरी नज़र सें देखने मे इतना अनजाना सां मजा। ऐसा क्यूं? मेरे अंदर एक् प्रश्न नें सिर उठाया।।। मनुष्य जिंदगी मे बहोत सें पाप करता हैं, जिनमें सें कुछपाप सुख सें भरेहुए हें पऱ यहपाप तोँ ऐसा रमणीय ऐसा मजेदार थां कि बदन मे एक् अजीब सि आग हि लग गई थि।। आंखों केँ सामने सभीकुछ फीका होताजा रहा थां जिस्म हल्का औऱ हल्का होताजा रहा थां एक् अजीब सां नशा हौ रहा थां जिस्म केँ हर एक् भाग मे।।
मे अपने आप् कों इस रमणीय पाप मे डूबता हुआ महसूस कररहा थां।। इतने मे पीछे सें एक् वाहन कां हॉर्न बजा औऱ फिन मे होश मे आया कि मे मार्ग रोककर खड़ा थां।। बाजी कॉलेज केँ अंदरजा चुकी थि। मे भि अपने कॉलेज कि ओरचल पड़ा।।
आज मेरा कॉलेज मे दिल नहि लगरहा थां हिना बाजीमन सें उतरती तोँ मन भि लगता नां।। बसयही प्रतीक्षा थां कि कॉलेज समाप्त होँ औऱ हिना बाजी कों उठाई करने पहुँचू।। (यहा मे बाजी कां पूरा हुलिया भि बतादूं। मेरी दिदी इतनी प्यारी हैं जैसे प्रकृति कां कोई करिश्मा हौ। बाजी केँ बाल काले औऱ लम्बे यानी कि हिप्स तक हें आंखें बहोत हसीन औऱ बड़ी-बड़ी हें रंग बहोत ज्यादा सफ़ेद चेहरे पे प्यारी सि नाक औऱ होंठ गुलाबी कलर केँ न् बहोत पतले नं बहोत मोटे औऱ हाइट 5। 6 बाकी उनके बारे मे पहले हि बता चुका हूं मे भि एक् स्मार्ट लड़का हूं मेरा हाइट 5। 9 इंचरंग सफ़ेद आकर्षक आँखें सीना चौड़ा हैं।। ) अब वापस कहानी कि ओरआते हें। मे बाजी केँ विचारों मे गुम थां कि इतने मे किसी नें आकर मुझे पीछे कंधे सें पकड़ केँ मामूली सां झनझोड़ा औऱ कहा कि मिस्टर आज किधरखोए हौ मैंने पीछे कि ओर देखा तौ ये मेरी प्रेमिका साना थि।। साना औऱ मे बचपन सें हि विद्यालय मे थें अब कॉलेज भि एक् हि थाबचपन कि दोस्ती थि इसलिये एक् दूसरे कों जानते थें। केवल दोस्ती थि। इससे अधिककुछ नहि।। साना मेरी एक् ऐसी साथी थि जिससे हरबात शेयर करता थां औऱ वो भि अपनीहर बात मुझसे शेयर करती थि।। मेरे औऱ फ्रेंड्स भि थें पर्र जितनी क्लोज साना थि उतना औऱ कोई नहि थां।
हां जनाबकहाँ खोए होँ मैंने कहाकुछ नहि बसऐसे हि साना नें काफ़ी जोर दिया पर्र अब जाहिर हैं मे उसे अपनेनेक विचार बताकर उदास तोँ नहि कर सकता थां।। मेरी औऱ साना कि दोस्ती बहोत अच्छी थि पर्र हम् दोनों एक् सीमा सें आगेकभी नहि बढ़े। औऱ वैसे भि जोँ मे सोचरहा थां वो तोँ किसी भि हाल मे नहि बता सकता थां।। क्यूं कि एक् तौ येऐसा पाप थां जिसकी जितनी बुराई कि जाय उतनीकम हैं औऱ सभी पापों केँ ऊपर हैं पर्र इतना अवश्य थां कि इसपाप केँ रहस्य कि रक्षा अब मुझे हि करनी थि।।। साना शुरुआत हौ गई यहावहा कि बातें करनेलगी मे भि उससे गपशप मे लगारहा।। फिन वहां सें फ्री होने केँ बाद मे बाजी कों लेने निकल पड़ा।।। बाजी केँ कॉलेज केँ बाहर् पहुँच केँ बाजी केँ सेल पे मैसेज किया कि वोँ बाहर् आँ जाएं। बाजी मेरा हि वेटकर रहीथीं वो कॉलेज केँ गेट सें ज्यों हि सामने हुईँ तोँ जैसेफिन मे उनकी खूबसूरत जवानी मे गोते खानेलगा औऱ मेरी बाजी केँ मोटे बूब्स मेरी आंखों केँ सामने मेरेपास औऱ पासआते जारहे थें औऱ फिन बाजी गाड़ी मे आकेबैठ गई।। औऱ मे भि होश कि दुनिया मे वापस आँ गय़ा।। आज बाजी बहोत गुस्से मे थीं। मेरे पूछने पे उन्होंने बताया कि आज उनकी एक् मजनूं सें लड़ाई हुईँ हैं। बाजी गुस्से वाली बहोत तेज थि।।। मैंने बाजी कि हालत देखते हुए बाजी कों एक् दोजोक सुनाए जिस सें उनकामूड अच्छा होँ गय़ा।।। मे रास्ते मे येसोच रहा थां कि जानेक्यों अपनी बेहन कों गलत नज़र सें देखने मे मजाआता हैं। वैसे तौ मैने सैक्सुअल एकटीवैटेस इतनी अधिक महसूस नहि कि थि बसकभी कभीजब मुझे चस्का चढ़ता थां तोँ मे लैपटॉप पे झटका सिनेमा देख केँ मुठमार लेता थां।। इससे ज्यादा कभी मैंने कुछ नहि किया। नं हि मेरी लाइफ मे कोई लड़कीआई नं कभीमन किसी पे गय़ा।। जबकभी मे झटका मूवी देखता थां तौ उस मे नंगी लड़कियों देखकर भि मुझे वो मजा तोँ कभी नहि आता थां जौ मुझे अपनी बेहन कों कपड़े सहित देखने मे आँ रहा थां।। यही सोचते सोचते घऱ आँ गय़ा। हम् लोग गाड़ी सें उतरकर घऱ मे प्रवेश करगए।।। अम्मी कों सलाम किया औऱ अपने अपनेरूम मे फ्रेश होने केँ लिए जानेलगे सीढ़ियों पर्र चढ़ते हुए बाजी मेरेआगे थि बसफिन वही मेरा छिछोरापन शुरुआत।। मेरी नजरें बाजी कि मोटी बाहर् निकली हुईँ गाण्ड पे। इतना आइडिया मुझे होँ गय़ा थां कि बाजी नें नीचे अंडर वेअर नहि पहनाहुआ क्योंकि जब वो चल रहीथीं तोँ उनके दोनों चूतड़ आगे पीछेआगे पीछे होँ रहे थें गाण्ड कां पबजब पीछे कि ओर होता तोँ मुझेऐसा लगता जैसे मुझेकह रहा होँ कि मुझे पकड़लो औऱ जैसे हि वो पबआगे कि ओर जाता तौ मुझे लगता जैसेकह रहा हौ कि ठीक हैं मे जारहा हूं मत पकड़ो मुझे।। बाजी कि गाण्ड कों इतनेपास सें आगे पीछेआगे पीछे होते मैंने पहलीबार देखा थां।। बाजी कि गाण्ड केँ संग सीढ़ियों कि ये यात्रा ख़त्म हौ गई औऱ बाजी अपनेरूम मे औऱ मे अपने कमरे मे चला गय़ा जब मे रूम मे गय़ा तोँ तब मुझेहोश आया कि बेसुधि कि हालत मे मेरा क्याँ हाल हौ चुका हैं।।
मैंने सोचालो अबये टाइम भि देख्ना थां इस चक्कर मे। कि अपनी बेहन कि मोटी गाण्ड कों देख केलंड नें हार्ड होना भि शुरुआत कर दिया थां। खैरकुछ देर केँ लिए आराम करनेबेड पे लेट गय़ा औऱ थोड़ी देरबाद खाने केँ लिए नीचेचला गय़ा।। नीचे बाजी पहले सें हि टेबल पे बैठी खानां खारही थि।। मैंने अपनामन बनाने कि कोशिश कि कि अब बाजी कि ओरइस दृष्टि सें नां देखूं औऱ अपने आप् पे नियंत्रण रखूं। मुझे अपने उद्देश्य मे सफलता भि दिखी कि खाने केँ दौरान याँ खाने केँ बाद भि मैंने बाजी कों इस नज़र सें देखने कि कोशिश नहि कि।।। औऱ रूम मे आँ गय़ा।। दोपहर मे मे दिन सोता हूं।। मे अपनी दिनचर्या केँ अनुसार सोया औऱ फिनउठ केँ फ्रेश होँ केँ स्टडी करनेबैठ गय़ा।। साम कों फ्रेंड्स केँ संग घूमने केँ लिए बाहर् चला गय़ा।।। जब वापसआया तौ खाने कां टाइम होँ चुका थां। फ्रेश हौ कर खाने केँ लिएआया तोँ अबू अम्मी औऱ बाजी खाने कि टेबल पे मेरा हि वेटकर रहे थें।। अबू नें मुझसे स्टडी केँ बारे मे पूछा औऱ मैंने कहा कि सभीठीक हैं पिताजी नें फिन बाजी सें पूछा बाजी नें भि अपनी स्टडी केँ बारे मे अबू कों बताया।।।।।। मैंने खानां खाया औऱ रूम मे आँ गय़ा।।। औऱ लैपटॉप ऑनलाइन किया औऱ एक् अच्छी इंग्लिश लगाकर देखने लगा।।। मूवी देखने केँ बाद मेरादिल किया कि क्यूं नाँ आज देसी मूवीदेख केँ मुठ मारीजाए।। मैंने देसी मूवी लगाई औऱ देखने लगा देसी मूवी मे लड़की इतनी सेक्सी थि कि मेरा बुराहाल होँ गय़ा इसमे लड़की मोटी थि औऱ उसकी गांड भि मोटी थि वो बहोत मजेमजे सें लड़के सें चुदवा रही थि।। मैंने अपना लन्ड बाहर् निकाला औऱ मूवी देखने केँ संगसंग लन्ड भि मसलने लगा मेरी स्पर्म थोड़ी थोड़ी लन्ड कि टोपी सें निकलरही थि मे बहोत मजे मे थां कि अचानक कमरे केडोर पे दस्तक हुइ। मैंने जल्द सें लैपटॉप बंद किया औऱ अपना लण्ड भि सलवार केँ अंदर किया औऱ एक् लंबी सांस लें कर अपने आप् कों रिलेक्स किया कि मेरा लन्ड भि बैठजाए वरना वो सलवार केँ ऊपर सें नजर आँ जाता।.लन्ड कों नॉर्मल कर मे नेडोर खोला तौ सामने बाजी खड़ीथीं।।।।।
मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) – New Episode
मे नें डोर खोला तोँ सामने बाजी खड़ीथीं।।। मैंने पूछा बाजी क्याँ बात हैं दिदी नें कहा कि सलमान तुम् हँसोगे तोँ नहि नं? मैंने कहा बाजीबात क्याँ हैं? बाजी नें कहा पहले प्रामिस करो कि मेरे पे हँसोगे नहि ?
मैंने कहाओ केँ बाबा नहि हँसता आप् बताएं क्याँ बात हैं? बाजी नें कहा सलमान मुझेआज भि अपनेरूम मे नींद नहि आँ रही। डर लगरहा हैं मुझे।।
मैंने कहाबस इतनी सि बात थि औऱ फिन मे क्यूं हँसुंगा इसबात पे। आपकोजब कभी भि डर लगता हैं तौ मेरेरूम मे आके सोती हें। कौन सि येकोई नईबात हैं
(यहा मे बतादूं कि बाजीजब भि कोई बुरा सपना देखतीं थीं तौ 2 याँ 3 दिन तक उन्हें अपने कमरे मे नींद नहि आती औऱ वो मेरे कमरे मे सोने आँ जाती हें)
तौ बाजी नें कहा कि सलमान आजजब अम्मी अब्बू कों सुभह मे नें बताया थां कि रात मे जब सपनादेख केडरी थि तोँ सलमान केँ कमरे मे चली गई थि तोँ अम्मी भि हँसना शुरुआत हौ गई थीं।। इसलिये मैंने सोचा कि ये न् हौ कि तुम् भि मुझ पे हँसो.
मैंने कहा नहि बाजीऐसी कोईबात नहि आपकोजब कभी भि डरलगे तोँ आँ जायाकरो मेरे कमरे मे। बाजी नें मुस्कुरा केँ कहा अच्छा जी। कैसा प्रेम हैं तुम्हारा मेरेसंग? जितना प्रेम जतलारहे होँ ऐसा लगता तौ नहीं।
मैंने हल्की सि नाराजगी व्यक्त करतेहुए बाजी सें पूछा कि आपनेऐसा क्यूं कहा तौ बाजी बोलीं तुम्हारी बड़ी बेहन पिछले 5 मिनट सें तुम्हारे रूम केँ दरवाजे पे खड़ी हैं तुमने अभि तक उसे अंदरआने कों बोला भि नहि।
मे बाजी कि इसबात पे लज्जित सां हौ गय़ा मुझे ख्याल हि नहि रहा कि मैंने बाजी कों अंदरआने कां तौ कहा नहि। मे साइड पे हुआ औऱ थोडा आगेझुक केँ एक् हाथ सें बाजी कों अंदरआने कां इशारा किया बाजी मेरीइस अदा पे हँस पड़ी औऱ अंदर आँ गई।
बाजीबेड पे आँ टेकलगा केँ लेट गई। औऱ मैंने रूम कां डोरबंद कर दिया। मे भि बाजी केँ संगबेड पे आँ केँ बैठ गय़ा औऱ बाजी सें पूछा कि बाजी आप् इतनी गुस्से वाली होँ कि जबकभी तुम्हे गुस्से मे देखलूँ तोँ तुम् सें डर लगना शुरुआत होँ जाता हैं जब भि आप् कोई बुरा सपना देखती हौ तौ इतनादर जाती हैं कि आप् पहचानी नहि जाती कि आप् वही गुस्से वाली बाजी हौ।।।
बाजी मेरीइस बात पे हंस पड़ी औऱ कहा कि '' मुझे स्वयं नहि पता कि क्याँ कारण हैं जब भि कारण मालूम हुआ तोँ तुम्हें जरूर बताना चाहूंगी "अच्छा अब ज्यादा बातें मतकरो औऱ मुझे सोनेदो औऱ तुम् स्वयं क्याँ करोगे अब। मैंने कहा कि बाजी मे थोड़ी देर पढ़ाई करूंगा फिनसो जाऊँगा तौ बाजी नें कहा मुझे तोँ नींद आँ रही हैं तुम् लाइटऑफ करो औऱ अपना टेबल लैंपऑन करके स्टडी करलो मैनेऐसा हि किया औऱ बाजी थोड़ी हि देर मे सो गई।।।
मैंने स्टडी कां बाजी कों झूठ बोला थां। मे वास्तव मे बाजी पे यह इंप्रेशन जमाना चाहता थां कि रात कों देर तक पढ़ता हूं।। स्टडी तौ खैर क्याँ करनी थि बस थोड़ी देर पुस्तक केँ पेज टर्न करतारहा फिनबुक बंद कि औऱ लैपटॉप ऑनकर लिया औऱ इंटरनेट यूज करनेलगा।
अचानक मेरेमन मे एक् विचार आया औऱ मैंने लैपटॉप उठाया औऱ शौचालय मे आँ गय़ा। औऱ शौचालय केँ कमोड पे बैठ गय़ा औऱ वही देशी मूवीलगा ली जोँ बाजी केँ रूम मे आने सें पहले मे देखरहा थां औऱ मे मुठ भि नहि मारसका थां।। मूवी मे वही लड़कीअब करवटबदल केलेटी हुई थि औऱ एक् लड़का उसके पीछे लेटा उसकी योनी मे अपना लण्ड धीरे-धीरे अंदर बाहर् कररहा थां।। ज्यों हि लड़का उसकी योनी मे लन्ड अंदर करता लड़की तड़प उठती हैं औऱ ज्यों हि लन्ड बाहर् करता लड़की केँ चेहरे पे चिंता नजरआने लगती।
मैंने अपनी सलवार नीचेकर ली औऱ लन्ड कों देखा तोँ वो पूरीतरह हार्ड हौ चुका थां अब मे मूवीदेख रहा थां औऱ संग साथलंड कों आगे पीछेकर केँ मुठमार रहा थां। मूवी मे लड़कीउसी करवटलेट मजे सें लड़के कालंड अंदर लें रही थि अचानक मुझेकल वो सीनयाद आँ गय़ा जब बाजी करवट लेँ करसोरही थि।। मेरी आँखों केँ सामने फिन बाजी कि मोटी औऱ बाहर् निकली हुईँ गान्ड घूमना शुरुआत हौ गई।।।
लन्ड मेरेहाथ मे थां औऱ मे लन्ड कों आगे पीछेआगे पीछेकर रहा थां औऱ आँखों केँ सामने बाजी कि मोटी औऱ बाहर् निकली हुईँ गान्ड घूमरही थि। मूवी सें मेरी नज़रें हट चुकी थि अब मे आँखें बंदकिए हुए अपनी बाजी कि मोटी गाण्ड केँ बारेसोच केँ मुठमार रहा थां।।। पता नहि क्यूं आज मुझेमुठ मारते हुए जौ मजा आँ रहा थां ऐसामजा तोँ मुझेकभी नहि आया थां अब इरादे औऱ वादे जौ मैंने अपने आप् सें आजकिए थें कि अब मे अपनी बेहन केँ बारे मे कभी भि गंदे विचार नहीं लाउन्गा भूल चुका थां।। क्योंकि इस वक़्त मे खुशी कि जिन ऊंचाइयों पे थां वहां पे पहुँच केँ हि जानां जा सकता हैं कि एक् साधारण लड़की केँ बारे मे सोच केँ मुठ मारने कि खुशी मे औऱ अपनीसगी बेहन कों सोच केँ मुठ मारने कि खुशी मे जमीन आसमान कां अंतर हैं।।
मुझेइस वक्तऐसा लगरहा थां कि मेरे लन्ड कि स्किन केँ अंदर औऱ कुछ नहि बस स्पर्म हि स्पर्म भरी हुईँ हैं।। मेरा लन्ड आज मुझे बहोत भारीलग रहा थां। अचानक मैंने एक् हाथ सें लैपटॉप बंद किया औऱ उसेवही बाथरूम केँ फर्श पे रखा औऱ खड़ा होँ गय़ा मेरी सलवार गिरकर मेरे पैरों तक जा पहुंची थि पर्र उतरी नहि औऱ मेरा लन्ड उसीतरह मेरेहाथ मे थां मैंने बाथरूम कां दरवाजा खोला औऱ अपने ड्रेसिंग रूम मे आँ गय़ा।
(यहा मे बतादूं कि मेरे कमरे मे हि मेराअलग ड्रेसिंग रूम भि हैं औऱ जब ड्रेसिंग रूम मे दाख़िल हुआ तौ उसी केँ संग अंदर बाथरूम भि हैं) मे ड्रेसिंग रूम केँ दरवाजे पर्र आके खड़ा हौ गय़ा जहां सें मेरारूम क्लेयर नज़र आँ रहा थां रूम केँ अंदरजब मेरी नज़र पड़ी तोँ मैंने देखा कि बाजी करवट लेकरसो रही हें औऱ बाजी कि कमीज सोते मे ऊपर कों उठी हुईँ हैं। बाजी नें जौ सलवार पहनी थि वो बाजी कि गाण्ड केँ संग चिपकी थि जिससे बाजी कि गाण्ड कि लाइन बहोत स्पष्ट महसूस हौ रही थि। पता नहि ये लाइन कितनी गहरी थि औऱ यही तोँ वो लाइन थि जोँ बाजी केँ चलने पर्र गाण्ड केँ नितंबों कों एक् दूसरे सें अलग करके खूबसूरत औऱ आकर्षक बनाती थि।
मैंने बाजी केँ चूतड़ ध्यान सें देखे तौ वो सलवार केँ अंदर छिपे जैसे मेरा मुंह चिढ़ा रहे थें कि हमेंऊपर ऊपर सें देखलो कभी भि अंदर सें नंगा देखने कि तुम्हें कोई अनुमति नहीं हैं।। मे मज़े कि ऊंचाइयों पे थां औऱ तब सें हि यही ख़्वाहिश पहलीबार मेरेमन मे आई कि बाजी कि नंगी गान्ड देखूं औऱ बाजी कि गाण्ड देखने कि कल्पना आज पहलीबार मेरेमन मे आई कि गाण्ड सलवार केँ ऊपर सें इतनी प्यारी लगती हैं तोँ जबउसे नंगी देखूँगा तोँ मे तौ शायदढंग सें देख भि नहीं पवँगा औऱ बेहोश हि होँ जाऊँगा।।
मेराहाथ लन्ड पे औऱ तेजतेज आगे पीछे होनेलगा। मेरी आँखें बाजी कि मोटी गान्ड पर्र जमी हुइ थीं औऱ मेरामन बाजी कि नंगी मोटी गाण्ड कि हसीन खूबसूरत तस्वीरें बनाकर मुझे दिखारहा थां औऱ दिल। दिल कां येआलम थां बस एक् नई ख़्वाहिश उसमे जन्म लेँ चुकी थि। वो ख़्वाहिश हैं कि बाजी कीगांड कों नंगा देख्ना हैं। नं स्पर्श न् कुछ औऱ करना हैं बस घंटों तक) बैठे बैठे बाजी कि इस कयामत खेज गाण्ड कों देख्ना हैं।।
आहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह इस आवाज़ केँ संग हि मेरे लन्ड केँ अंदर सें वीर्य कि बहोत धाराएँ निकलना शुरुआत होँ गईं। यह धाराए इतनी गाढ़ी थि कि जैसे आप् शहद केँ अंदर चम्मच (स्पून) डालकर निकालो तोँ शहद कि जोँ धाराए बनती हें। जोँ बहुतदेर चम्मच केँ संग लटकती रहती हें औऱ फिन कहींजा केँ गिरती हें।। ऐसाआज मेरेसंग पहलीबार हुआ थां। मे करीब-करीब 4 साल सें मुठमार रहा थां पर्र ऐसा मस्तमजा ऐसी बेपनाह लज़्जत येसभी मेरेलिए नया थां।। जब पूरीतरह सें डिस्चार्ज हौ गय़ा तौ मुझे बहोत ज्यादा कमजोरी महसूस होँ रही थि। इतना कि मुझेलगा कि अभि वहा पे गिर जाऊँगा। मुझ मे इतनी हिम्मत नहि थि कि मे अपनाहाथ तौ अपने लन्ड सें हटालूँ।
मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) - Kahani ab aur interesting hogi
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