मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) – New Episode
मे वहीं पे ड्रेसिंग रूम कि दीवार सें टेकलगा केँ खड़ा होँ गय़ा। कुछदेर बादजब कुछ हिम्मत आई तौ मे वापस बाथरूम मे गय़ा हाथ धोनेकिए औऱ लन्ड साफकर सलवार पहनकर लैपटॉप उठाया औऱ ड्रेसिंग रूम सें गुजरते हुए मैंने अपनी स्पर्म कों देखा जोँ जमीन पर्र पड़ी थि औऱ मुझे बीते लम्हों कि याद दिलारही थि।। मे उठा औऱ बहोत सावधानी सें अपनी स्पर्म कों जमीन सें साफकर दिया औऱ रूम मे आया औऱ लैपटॉप साइड टेबल पे रखा औऱ बाजी कि तरफ देखा। बाजीअब सीधी होकरसो रहीथीं मैंने टेबल लैंपबंद किया औऱ सोने कि कोशिश करनेलगा।।। एक् हि दिन मे मेरी दुनिया मेरी जीवन मेरीसोच सभीकुछ बदल गय़ा थां। मुझेअब अपनीसगी बेहन केँ बारे मे ऐसा सोचने मे कुछ बुरा नहि लगरहा थां बल्कि प्रेम औऱ सुखमिल रहा थां मेरी भावनाए मेरे सीने मे अपनीसगी बेहन केँ लिएउभर आई थि औऱ मे अपनेदिल मे जन्मी औऱ शायदकभी न् पूरी होने वाली ख़्वाहिश कों सोचते सोचते सो गय़ा
सुभहजब उठा तोँ बाजी अपनेरूम मे जा चुकी थि।। मैंने समय देखा तोँ मे कॉलेज केँ लिए बहुतलेट हौ रहा थां। मे उठा औऱ सजधजकर होके नीचे पहुँचा। अम्मी अब्बू औऱ बाजी ब्रेकफास्ट कर चुके थें। औऱ बाजी मेरा हि वेटकर रही थि। ज्यों हि बाजी कि मुझ पे नज़र पड़ी उन्होंने कहा छोटेभाई आजलेट होँ गएदेर रात तक अध्ययन करतेरहे हौ?
(अब मे उन्हें क्याँ बताता कि रात कों उसकी मोटी गाण्ड केँ दर्शन नें मेरे जिस्म सें निकले स्पर्म केँ ड्रॉप नें निचोड़ कररख दिया थां जिसवजह सें कमज़ोरी हौ गई थि औऱ आंख खुली हि नहि) मैंने कहाजी बाजीरात देर तक बैठा पढ़ता रहा इसलिये आंख नहि खुली।। बाजी नें कहा शाबाश ऐसे हि मनलगा केपढ़ते रहना (मैंने दिल मे कहा कि बाजीऐसे हि दिललगा केँ पढूंगा क्योंकि अबयही पढ़ाई तौ मेरी जीवनबन चुकी हैं) औऱ अब जल्द सें ब्रेकफास्ट करो मे भि लेट हौ रही हूं आज कॉलेज मे एक् समारोह हैं उसकेलिए थोड़ी सि तैयारी भि करनी हैं।
मे अम्मी अब्बू कोसलाम किया औऱ ब्रेकफास्ट करनेलगा औऱ बाजी टेलीविज़न पे कोई मॉर्निंग शो देखने लगी।। मे ब्रेकफास्ट करते करते बाजी कों भि चोर नज़रों सें देखरहा थां।। बाजी नें रेडकलर कां ड्रेस पहना थां जौ बाजी पे बहोत सूटकर रहा थां।। औऱ बाजी बहोत प्यारी लगरही थि रेड ड्रेस मे। बाजी कां रंग सफेद थां जिस पे रेड ड्रेस बहोत जचरहा थां। बाजी कों देखकर दिलकर रहा थां कि बाजी कों सामने बैठाकर बस देखता हि रहूं देखता हि रहूं औऱ दिन सप्ताह महीने सालबीत जाएंबस मे बाजी कों देखता हि रहूं औऱ बाजी कों पूजता हि रहूं औऱ अपनी नज़र नं हटाउउन पऱ सें।।। पता नहि मेरेसंग येसभी क्याँ हौ रहा थां हर गुजरते दिन केँ संग मेरे बाजी केँ बारे मे विचार औऱ सोच हि बदलती जारही थि।। कही मुझे बाजी सें प्रेम तोँ नहि हौ गय़ा? जौ पहलायह प्रश्न मेरेदिल नें मेरेमन पे टाइप किया। मेरेबदन मे जैसे करंट लगना शुरुआत होँ गय़ा औऱ फिनसंग हि मेराबदन एक् दम ढीलापड़ गय़ा।। '' हांये प्रेम हि तौ थां ''
कॉलेज मे मेरा एक् बहोत अच्छा साथी थां सैफ वो हमारे कॉलेज कि एक् लड़की सें बहोत प्रेम करता थां औऱ वो लड़की थि साना। जोँ मेरी बेस्ट फ्रेंड थि। (जिसका उल्लेख प्रथम भाग मे हौ चुका हैं) सानासैफ कों पसन्द नहि करती थि जिस नज़र सें सैफ साना कों पसन्द करता थां। हाँ सानाउसे एक् अच्छे मित्र कि दृष्टि सें अवश्य पसन्द करती थि।। सैफ साना कों सच्चे दिल सें चाहता थां। औऱ सैफ नें हि एक् बार मुझे बताया थां कि जब आप् दिनरात किसी एक् हि आदमी केँ बारे मे सोचना शुरुआत कर देते होँ औऱ फिन तुम्हारे अंदरजब ये प्रश्न पैदा हौ कि आपकोउस आदमी सें इश्क तौ नहि हौ गई तौ समझजाओ कि आप् उस आदमी केँ प्रेम मे दिलजान सें गिरफ्तार हौ चुके हें।।। जबसैफ नें अपनाये तजुर्बा मुझे सुनाया तोँ मुझेतब हँसीआई। क्योंकि तब मे किसी लड़की सें प्रेम नहि करता थां। अब जाहिर हैं प्रेम करने वाला हि इसतरह कि बातों कों समझ सकता हैं जौ प्रेम नहीं करता होँ वो इसतरह कि बात पे हंसेगा हि।।।।।
सैफ कि यहीबात मेरेमन मे गूँजी थि जिसके बाद मुझे करंट लगना शुरुआत होँ गय़ा थां।।। औऱ फिन मेरा शरीर ढीलापड़ गय़ा क्योंकि मुझे जिंदगी मे पहलीबार प्रेम हुआ थां औऱ वो भि अपनीसगी औऱ बड़ी बेहन सें।।। यह एक् ऐसा प्यार थां जोँ व्यर्थ थां।।।
मैंने बेदिल सें ब्रेकफास्ट ख़त्म किया औऱ बाजी कों उठने कों बोला औऱ बाजी औऱ मे गाड़ी मे आँ केँ बैठगए। बाजी कों उनके मेडिकल कॉलेज उतारा औऱ जब तक बाजीगेट केँ अंदर जाकर मेरी नज़रों सें ओझल नहि हुई मे विवश्ता केँ आलम मे अपनी लथपथ आँखों सें बाजी कों देखता गय़ा। मेरी बेबसी औऱ मेरी भीगी आँखें बाजी केँ संग मेरे ग़लत प्रेम कि घोषणा कर चुकीथीं पर्र मेरी बेहन मेरीइन भावनाओं सें अनजान थि उसेपता हि नहि थां कि मे 2 दिनों मे उसे कितना टूटकर प्रेम करना शुरुआत कर चुका हूं।।।
मे केसे बाजी कों कहूँ कि मे उन्हें प्रेम करता हूं? केसे उनसे कहूं कि बाजी मे आपसे इतना प्रेम करनाचाहता हूं कि आपकेबदन केँ अंदर खोकर आपकी आत्मा सें लिपट केँ अपना सारा जिंदगी गुज़ार देना चाहता हूं। बाजी मुझे अपनी आत्मा पे अपने जिस्म पे पूरा पूरा प्रेम दे।।। सवालों औऱ इच्छाओं कि लड़ाई ऐसे हि मेरे अंदर चलतीरही औऱ मे अपने कॉलेज पहुंच गय़ा।।।
आज साना भि कहीं नज़र नहि आँ रही थि। मैंने भि उसे फ़ोनकर नहि पूछा कि वो कहां हैं। क्योंकि मे अकेला रहना चाहता थां। कॉलेज समाप्त होने केँ बाद मे बाजी कों लेने केँ लिए उनके कॉलेज कि ओरजारहा थां कि दिदी कां संदेश आया केँ '' सलमान अबमत आनां मे समारोह कि वजह सें लेट हूं। जब तुम्हे बुलाना होगा मे संदेश कर दूंगी '' मे फिन वहीं सें घऱ कि ओरचल पड़ा।।
घऱ पहुंच केँ अम्मी सें मिला औऱ अम्मी नें बाजी कां पूछा तोँ उन्हें बताया कि बाजीलेट फ्री होंगी समारोह कि वजह सें।।। मे अपने कमरे मे आया औऱ फ्रेश होने केँ बाद खानां खाने नीचे आँ गय़ा।। अम्मी मेरेपास हि बैठ गई। खाने केँ दौरान अचानक मैंने अम्मी सें प्रश्न किया कि अम्मी आपकी औऱ अब्बू कि विवाह पसन्द कि थि याँ अरेंज मेरीज थि। अम्मी हँस पड़ी औऱ कहा कि तुम्हें आजयेबात केसेयाद आई।।। मैंने कहा वैसे हि अम्मी आप् बताएं नं कि क्याँ हुआ थां। तोँ अम्मी नें कहा कि वैसे तोँ तुम्हारे अब्बू मेरे चचेरे भइया हें पऱ वो मुझे बहोत छोटी उम्र सें हि बहोत पसन्द करते थें।।। औऱ इसतरह यह मनपसंद आहिस्ता प्रेम मे बदल गई।। औऱ एक् दिन तुम्हारे अब्बू नें अपने प्रेम कां इज़हार मुझसे किया। मैंने पूछा कि अम्मी आपने अब्बू कों क्याँ जवाब दिया थां। अम्मी नें कहा कि तुम्हारे अबू एक् बहोत अच्छे इंसान हें औऱ मुझे पति केँ रूप मे अपनेलिए परफेक्ट लगे।। पऱ बेटा लज्जा हया महिला कां गहना हैं। इसलिये मे उनसेतब जवाब मे कुछ नहि कहसकी। तुम्हारे अब्बू नें फिन हमारे घऱ नाता भेजा औऱ हम् दोनों कि विवाह होँ गई।। औऱ मे अपने आप् कों भाग्यशाली महिला समझती हूं कि तुम्हारे अब्बू जैसे एक् अच्छे इंसान सें मेरी विवाह हुइ।।।
मे खानां खा केँ ऊपर कमरे मे आँ गय़ा औऱ लैपटॉप पे लव सॉंग सुनने लगा। औऱ सोचने लगा कि मे भि बाजी सें अपने प्रेम कां इजहार करदूँ? फिन अपनेसर पे हल्के सें एक् थप्पड़ रसीद किया कि बाजी मेरी चचेरी बेहन तोँ हैं नहि। जैसे अम्मी अब्बू कि चचेरी बेहन हें।।। आज तोँ अपने रूटीन केँ अनुसार नींद नहि आँ रही थि मुझे। यह सच हैं सुना थां कि प्रेम मे भूखकम लगती हैं औऱ नींद भि कमआती हैं।। ऐसे हि वक्तलव सॉंग सुनते हुए बीतता रहा औऱ बाजी कां संदेश आया कि मुझे रिसीव की करने आँ जाओ।। मे उठा औऱ गाड़ी लेकर बाजी केँ कॉलेज कि ओरचल पड़ा।।
मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) – New Episode
मे खानां खा केँ ऊपर कमरे मे आँ गय़ा औऱ लैपटॉप पे लव सॉंग सुनने लगा। औऱ सोचने लगा कि मे भि बाजी सें अपने प्रेम कां इजहार करदूँ? फिन अपनेसर पे हल्के सें एक् थप्पड़ रसीद किया कि बाजी मेरी चचेरी बेहन तौ हैं नहि। जैसे अम्मी अब्बू कि चचेरी बेहन हें।।। आज तोँ अपने रूटीन केँ अनुसार नींद नहि आँ रही थि मुझे। यह सच हैं सुना थां कि प्रेम मे भूखकम लगती हैं औऱ नींद भि कमआती हैं।। ऐसे हि टाइमलव सॉंग सुनते हुए बीतता रहा औऱ बाजी कां संदेश आया कि मुझे उठाई करने आँ जाओ।। मे उठा औऱ गाड़ी लेकर बाजी केँ कॉलेज कि ओरचल पड़ा।।
वहा पहुँच केँ बाजी कों संदेश किया कि बाहर् आँ जाएं तोँ थोड़ी हि देर मे बाजीगेट सें सामने आई औऱ वाहन कि ओर बढ़ी पऱ उनकेसंग 2 लड़कियों औऱ थि जिनमें सें इक मेरी प्रेमिका साना औऱ दूसरी कों आज पहलीबार देखरहा थां।। गाड़ी मैंने साइड मे पार्क कि औऱ बाहर् निकलआया बाजी औऱ उस लड़की कों नमस्ते करके साना सें पूछा कि वो यहां केसे तौ साना नें बताया कि उसकेसंग मे उसके चचेरे भइया हैं जिनका यहा पे एडमिशन हुआ हैं। कॉलेज केँ समारोह मे उसनेआज मुझे भि इनवाइट किया थां। साना सें मैंने पूछा कि आओ आप् लोगों कों मे ड्रॉप कर दूंगा तोँ उसनेकहा कि नहि हमारी अपनी गाड़ी हैं तुम् जाओ।
मे, साना औऱ उसके चचेरे भइया कों बाय बोलता हुआ वाहन मे आँ गय़ा औऱ बाजी भि उन्हें बाय कहती हुइ वाहन मे बैठ गई।। (बाजी साना कों मेरीवजह सें बहोत अच्छे सें जानती थि औऱ यह भि जानती थि कि हम् दोनों बहोत अच्छे फ्रेंड्स हें)
बाजी गाड़ी मे क्याँ आँ बैठी मुझेलगा कि जैसे गाड़ी मे बहार आँ गई।। मेरे आसपास जैसेफूल खिलने लगे।। औऱ मेरादिल चुपके सें मुस्कुरा उठा।। बाजी सें मैंने आज केँ समारोह केँ बारे मे पूछा औऱ बाजी मुझे समारोह केँ बारे मे बताने लगी।। मेरा प्रेम मेरासभी कुछ मुझसे कुछ हि इंच दूरी पे बैठा थां आज बाजी केँ संग वाहन मे बैठकर जौ सफ़रकर रहा थां दिलचाह रहा थां कि ये सफ़रकभी ख़त्म नं होँ औऱ दिल भि चाहरहा थां कि गाड़ी किसीऐसी रोड पे लेँ जाऊं जोँ कभी न् समाप्त होने वालीरोड होँ।।। पऱ येसभी ख्वाहिशें ऐसीथीं जिन्हें सोच मे अपनेदिल कों कुछसमय आराम हि दे सकता थां।। तथ्यवही थां कि जोँ मे चाहता थां वो असंभव औऱ बेकार थां।।।।।। कुछ हि देरबाद हम् घऱ पहुंचे।। हम् घऱ केँ अंदर एंट्री हुए।। बाजी अम्मी सें मिलने उनके कमरे मे चली गई औऱ मे अपने कमरे मे आँ गय़ा।
आज मेरा अपने दोस्तों कि ओर जाने कां भि कोईदिल नहि कररहा थां।। मेरीये कैफियत थि कि मे बस अकेला रहना चाहता थां औऱ अगर मेरी तन्हाई कों समाप्त करने इख्तियार किसी कों अब थां तौ वो मेरी बेहन थि।। रात कों जब खाने कां वक़्त हुआ तोँ मे खाने केँ लिए नीचे गय़ा औऱ सबको सलाम करके खानां खानेबैठ गय़ा। अम्मी वहीरोज कि प्रेम औऱ ममता कि चाहतभरी नज़रों सें हम् दोनों भइया बेहन कों खानां खातेदेख रही थि। जबकि अबूवही हमेशा कि तरहचुप बैठे थें।।। अबूऐसे हि हमेशा चुपचाप रहते थें जिससे हम् दोनों बेहन भइया बहोत डरते थें। खैर खानां ख़त्म किया औऱ मई अपनेरूम मे आँ गय़ा।।
थोड़ी देरबाद कमरे केँ दरवाजे पे दस्तक हुई औऱ मैंनेडोर खोला तोँ सामने बाजी खड़ी थि औऱ बाजी नें कहा कि सलमान मुझे अभि स्टडी करनी हैं स्टडी करके तुम्हारे कमरे मे सोने आऊंगी। (जैसा मैंने पहले हि कहा थां कि बाजीजब भि बुरा सपना देखती हें तोँ 2 याँ 3 दिन उन्हें अपने कमरे मे नींद नहि आती) बाजी कि येबात सुनते हि मेरादिल जोरजोर सें धड़कना शुरुआत हौ गय़ा। बड़ी मुश्किल सें मेरी ज़ुबान सें ये शब्द निकले '' जी बाजीठीक हैं '' फिन बाजी अपनेरूम मे चली गई औऱ मे डोरबंद करके अपनेबेड पे आकरगिर गय़ा।।।
मेरा प्रेम मेरे जिंदगी मे आजरात मेरेसंग मेरेबेड पे सोने आँ रही हैं। येसोच केँ हि मेरेबदन सें प्राण निकल चुके थें।। पता नहि बाजी इससे पहले कितनी बार मेरे कमरे मे सोई थि।। मुझे तोँ गिनती भि भूल गई थि। पर्र पहले मेरेसंग मेरी बाजी सोया करती थि। आज वो केवल मेरी बाजी हि नहि बल्कि मेरी जीवन औऱ मेरा प्रेम भि थि जौ मेरेसंग मेरेबेड पे सोने वाली थि।।।।।।। एक् एक् लम्हा मेरेलिए वर्षों केँ बराबर थां। टाइम थां कि बीतने कां नाम हि नहि लें रहा थां।। मेरारोम रोमबस मेरे प्रेम कों आकर्षित करके बुलारहा थां औऱ चीख केँ कहरहा थां कि मेरीरात कि रानी आँ भि जाओ नाँ क्यूं मुझेसता रही हौ आओ मेरीरात कि रानी औऱ आकर मेरी भावनाओं औऱ चाहत कि दुनिया कों अपनी खुशबू सें सुगंधित करदो।।।।।।।
आखिर वो वक़्त आँ गय़ा औऱ मेरेरूम केँ दरवाजे पे दस्तक हुईँ।। मे एक् तेज़दिल केँ संगउठा औऱ डोर खोला औऱ तोँ सामने बाजी खड़ी थि।।। बाजी नें मुस्कुरा केँ कहा कि छोटे भइया आजडोर पे हि खड़ा रखना हैं याँ अंदर भि आने दोगे। मे बहोत मुश्किल सें बाजी कि इसबात पे मुस्कुराया औऱ एक् साइड पे हौ गय़ा औऱ बाजी कों अंदरआने कां मार्ग दिया।।। बाजीरूम केँ अंदरआई औऱ बेड कि ओर बढ़ी मैनेरूम कां दरवाजा बंदकर दिया। औऱ बाजी कों बेड पऱ जातेहुए देखने लगा। मेरादिल किया कि बाजी कों पीछे सें जाकरजोर सें हगकरलूं औऱ अपनेदिल कि बातकह दूं।। सच कहते हें कि प्रेम इंसान केँ मन कों कहीं कां नहि छोड़ता औऱ मानव मस्तिष्क कों जंगलग जाती हैं।। मैंने अपनेसिर कों हल्के सें झटका औऱ बड़ी मुश्किल सें अपने आप् कों कंट्रोल किया।।
बाजीबेड पे टेकलगा करलेट चुकी थि मे भि अपनी शहज़ादी केँ संगबेड पे आकरटेक लगाकर लेट गय़ा।।। मे बाजी सें बहोत देर तक बातें करना चाहता थां। पऱ बाजी नें काफ़ी देर तक मुझसे बात नहि कि औऱ मुझेकहा कि सलमान अब तुम् पढ़ाई करो औऱ सोनेजा रही हूं।।। (बाजी क्याँ जाने कि उनका भइया 2 हि दिन मे उन्हें केसे दीवानों कि तरह चाहने लगा हैं।। औऱ अब बाजी कि निकटता हि दीवाने भइया केँ लिए राहत कि बात हैं अपनीसगी बेहन केँ बिना तोँ ये पागल भइया बिल्कुल अकेला औऱ अधूरा हैं) मैंने चुपचाप लाइटऑफ करके टेबल लैंपओं कि औऱ किताब खोलली।।। औऱ बाजी थोड़ी हि देर मे सो गई।।। मैंने बाजी केँ सोते हि बुकबंद कि औऱ करवटबदल केँ बाजी कि तरफ मुंहकर लिया औऱ बाजी केँ चेहरे कों देखने लगा।। बाजी सीधी होकर लेटी हुईँ थि।। बाजी सोतेहुए कितनी सुन्दर लगरही थि।।।।।।।।।।।।।।। मुझेकुछ खबर नहि रही कि मे ऐसेकब तक अपना प्यार दर्शन करतारहा। बंद आँखों पे सजी पलकों कां, आधे खुले गुलाबी होंठ, औऱ चंदा कि तरह चमकते गाल। मे इसआलम मे सभीकुछ भूल चुका थां। आलमये थां कि दुनिया सें बेखबर हौ चुका थां।। ऐसा लगता थां कि बसइस दुनिया मे मे हूं औऱ संग मे मेरी बाजी।। बाकी दुनिया भूल बैठा थां।।
मुझे अचानक होशतब आयाजब बाजी नें सोते मे करवट बदली औऱ मुंह दूसरी तरफकर लिया।।। औऱ मुझेऐसा लगा कि किसी सांप नें अचानक मुझे डॅन्स लिया होँ एक् नशा सां मेरीनस नस मे भागना शुरुआत होँ गय़ा।।। ये थां मेरेइस प्रेम कां दूसरा रुख।। प्रेम केँ इसरुख कों केसे भुला सकता थां।। एसीरुख सें तौ पहले वालेरुख कों जान पाया थां।। येबदन कां प्रेम मुझे बाजी सें न् हुआ होता तोँ आत्मा केँ प्रेम कों केसेसमझ पाता।। यही तोँ वो दो पहलू यानीबदन कां प्यार औऱ पवित्र प्रेम। यह दोनों जब मिलते हें तौ प्यार पूर्ण होता हैं
दोदिन पहले कि हि तौ बात थि जब पहलीबार मैंने अपनी बेहन कों ऐसी करवट लेते देखा थां औऱ अपनी बेहन केँ बदन केँ संग मेरी दीवानगी कि हद तक प्रेम उसे करवट लेतेहुए हि तौ शुरुआत हौ गय़ा थां।।
इस वक्त मेरादिल इतनी तेज़ी सें धड़करहा थां कि मेरागला सूख चुका थां थूक निगलने कि हिम्मत मुझमें बाकी नहि बची थि।। बदन मे जाननाम कि कोईचीज नहि थि। जहां थां वही पे एक् मूर्ति बनारह गय़ा।। मेरामुझ पे कोई कंट्रोल नहि थां।। अब तोँ जैसे प्रेम कां देवता मुझे अपने इशारों पे नचाने मेरे कमरे मे आँ गय़ा थां। मेरी नजरें अपनी बेहन कि मोटी औऱ मुझे तरसाने औऱ तड़पा नें वाली गाण्ड पे जम गई। मैंने सोचा कि दिदी कि मोटी औऱ बाहर् निकली हुईँ गाण्ड जब सलवार सें बाहर् आएगी तोँ जाने मेरा क्याँ हश्रकर देगीउस दिन।।। ऊपर सें देखकर इतनी उत्तेजना मे हूं अगर अंदर सें देखली तौ पता नहि उसदिन बेहन केँ प्रेम मे कहींमर हि नं जाऊं।।।
इसीनशे औऱ दीवानगी कि हालत मे मेरा एक् हाथआगे कि ओर बढ़ा औऱ मैंने बाजी कि कमीज कों धीरे-धीरे धीरे-धीरे सलवार केँ ऊपर सें हटाना शुरुआत कर दिया। औऱ फिन मैंने कमीज़ कों पूरीतरह सें बाजी कि गाण्ड पर्र सें हटाकर ऊपरकर दिया।। बाजी कीगांड कि लाइन बहुत स्पष्ट सलवार सेदिख रही थि। औऱ मेरीजान केँ दो नशेमन वोँ गाण्ड पब। मैंने जीभर केँ अपनी बेहन कि इस क़यामत ढाती गाण्ड कों देखा औऱ अपनी आंखों कों जितना होँ सकाइस नज़ारे कां दर्शन करवाया। ताकिबाद मे कहीं वो मुझसे शिकायत न् करें।।।। मैंने अपनेहाथ कों आगे कि ओर करके अपनी बाजी कि गाण्ड केँ एक् पब कों पकड़ लिया।
हांअब मेरी बाजी कि प्यारी मोटी बाहर् निकली हुईँ गान्ड कां एक् पब मेरेहाथ मे थां मे बाजी कि गाण्ड कां मरने कि हद तक दीवाना बन गय़ा थां।।। बाजी कि गाण्ड जितनी मोटी औऱ सेक्सी औऱ बाहर् निकली हुईँ मस्त थि उतनी हि बाजी कि गाण्ड नरम भि थि। मुझेऐसा लगा कि मे इस दुनिया कां राजा हूं मैंने जैसेआज सभीकुछ जीत लिया होँ।।।।
मे नें पहलीबार अपनी बाजी केँ चूतड़ कों हल्के सें दबाया आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ह औऱ संग हि मैंने अपना अंगूठा अपनी बाजी कीगांड कि लाइन मे धीरे-धीरे डाल दिया। मेरा अंगूठा मेरी बेहन कि गांड कि लाइन मे अंदर होताजा रहा थां औऱ अंदर औऱ अंदर बाजी कि लाइन गहरी थि बहोत अधिक गहरी।। मेरी बाजी कि गांड कि जौ गहरी लाइन थि न् इसी गहरी लाइन कि वजह सें हि तौ मेरी बाजी कीगांड बाहर् निकल केँ अपनी सुंदरता मे वृद्धि करती थि।।। अब बाजी कां एक् पूरा चूतड़ मेरी पकड़ मे थां।। मेरादिल खुशी सें झूमरहा थां औऱ मेरा लन्ड वो तोँ जैसे मेरी सलवार कों फाड़ने कि पूरी तैयारी मे थां।
अब बाजी कां जौ चूतड़ मेरी पकड़ मे थां उसे दबाना शुरुआत होँ कियाहाय राम क्याँ मज़ा थां आराम थां नशा थां तब।।। मुझे दुनिया कां कोईहोश औऱ कोईडर नहि थां। मे अपनी मस्ती मे बाजी केँ इसनरम औऱ घातक चूतड़ कों अबजोर सें दबाना शुरुआत होँ गय़ा। औऱ चूतड़ कों देखदिल मे कहना शुरुआत होँ गय़ा देखा मुझे चिढ़ा रहे थें न् कल। अबदेख लो मैंने तुम्हें पकड़ भि लिया हैं औऱ अब तुम्हारे संगमजे भि लेँ रहा हूं। मे मस्ती कि हालत मे डूबाहुआ थां कि अचानक बाजी केँ बदन कों इक झटका सां लगा औऱ बाजी नें मुझे पीछे मुड़ केँ देखा।।। मेरानशा मजा औऱ मजा कि बुलंदी येसभी कुछ साबुन केँ झाग कि तरहइक दम सें बैठ गय़ा।।।। औऱ मिट्टी दबानेवाला बन जहां थां जैसा थां वहीरह गय़ा।।। बाजी नें जबये सारा दृश्य अपनी आंखों सें देखा तौ तड़प केँ उठकरबैठ गई।। मुझेकुछ होश नहि रहा थां। बाजी नें मेराहाथ पकड़ा औऱ पकड़ केँ पीछे कि फैंक सां दिया।।। औऱ संग हि बाजी नें एक् जोर कां थप्पड़ मेरे मुंह पे दे मारा।। औऱ कहा कि तुम् इतनेनीच औऱ घटिया भि होँ सकते हौ कभीऐसा ख्वाब मे भि नहि सोच सकती थि।।। ऐसा लगता हैं कि बाजी नें एक् औऱ थप्पड़ मेरे मुंह पे लगा दिया।।। औऱ कहा कि एक् लड़की केँ लिए उसका भइया जोँ उसका रक्षक होता हैं।। जोँ लड़की कि इज्जत कि रक्षा करता हैं। औऱ तुम् भइया हौ कि अपनी बेहन कि इज्जत केँ दुश्मन हौ। बाजी कि गुस्से सें लाल आँखें टेबल लैंप कि रोशनी मे स्पष्ट नजर आँ रहीथीं।। ऐसालग रहा थां कि आज बाजी मुझेजान सें मार देगी।।। औऱ फिन बाजीबेड सें उठी औऱ कमरे केँ दरवाजे कि ओर जानेलगी कि फिन वहां सें वापसआई औऱ फिन एक् तीसरा थप्पड़ मेरे मुंह पे लगा दिया।। औऱ फिन बाजीरूम सें बाहर् चली गई।।।
मेरे आँसू थें कि रुकने कां नाम हि नहि लेँ रहे थें।।। जानेउस दिन मे कितनी देर तक रोतारहा।। मेरे आँसुओं नें मेरी चादर कों भिगोकर रख दिया।। बाजी नें जौ कहा थां सही हि तौ कहा थां।। पर्र बाजीये नहि जानती थि कि मेरेदिल कां आलम क्याँ हैं मेरेदिल कि भावनाए उनकेलिए क्याँ कररही हें।। नं बाजी नें मुझे मौका दिया कि मे कुछकह सकूँ।।। औऱ वो मुझे मौका देती भि क्यूं। जोँ भइया अपनी बेहन सें प्रेम कर बैठा थां तोँ उस भइया केँ लिएइस दुनिया मे कही भि कोई स्थान नहि थि।। ऐसे हि रोते रोते जानेकब सो गय़ा
सुभहजब मेरीआँख खुली तोँ मे पहलेऐसे हि कुछदेर बेड पे लेटारहा औऱ रात केँ बारे मे सोचता रहा।।। इस एक् रात नें मेरी आत्मा कों झकझोर कररख दिया थां। इन बीते लम्हों कों याद किया तोँ मेरीरूह कांपउठी। 3 दिन हि तौ हुए थें मुझे प्रेम किएहुए औऱ 3 दिन केँ भीतर हि इस बेरहम दुनिया केँ निराधार सिद्धांतों नें धर्म कि बनाई हुइ सीमाओं नें मेरे प्रेम केँ मुँह पे एक् थप्पड़ दे मारा थां।।.किस नें बनाईथीं यह सीमाए औऱ क्यूं बनाईथीं?
ऐसे हि बहोत सें प्रश्न औऱ विश्लेषण कि ग़ज़बनाक लड़ाई मेरे अंदरलगी हुइ थि कि अचानक किसीसोच सें मे चौंक पड़ा।। मे बीतीरात क्योंकि इतना अपसेट हौ चुका थां कि मे भूल गय़ा कि बाजी तौ रूम सें गुस्से सें बाहर् निकली थि।। ये नं हुआ हौ कि उन्होंने गुस्से मे अम्मी अब्बू कों मेरी कि हुईँ खता केँ बारे मे बता दिया हौ।। यहबात मन मे आते हि मे सभी बातें भूलइस बात कों लेकर परेशान हौ गय़ा औऱ बहोत घबरा गय़ा।।
यह तकलीफ़ भि तौ इसी समाज कि देन थि नां।। प्रेम करने वाले कों इस समाज मे कहीं भि कोईऐसी स्थान तोँ नहि न् कि जहांजा कर वोँ कुछसमय केँ लिए स्वतंत्र रूप सें सांस लें सके।।। अब मे सोचरहा थां कि पता नहि नीचे जाऊँगा तौ वहांकौन सां नया तमाशा मेरा इंतजार कररहा होगा।। नीचे जाने सें मे बहोत घबरारहा थां।। नीचे जानां तोँ थां मुझे।। अब सारी ज़िंदगी तोँ इस कमरे मे बैठा तोँ नहि सकता थां।।।
अबू कां चेहरा मेरी आँखों केँ सामने आता तौ जिस्म पे कपकपी दौड़ जाती। क्योंकि अपनेअबू कां मुझेपता थां कि वो मुझेजान सें मार देंगे।। वो तोँ किसी बाहर् कि लड़की सें मेरा अफेयर सहन नहि कर सकते थें। बाजी केँ संग छेड़छाड़ केँ लिए तोँ वो मुझे गोली मारने सें भि नहि रुकेंगे।। अम्मी कां ममता सें भरपूर चेहरा मेरी आँखों केँ सामने आता तोँ मे एक् लम्हा केँ लिए आँखेबंद करसिर कों झटक देता।।.क्यूं कि उनका सामना करने कि मुझ मे हिम्मत नं थि।।। औऱ मेरी चाहत मेरा प्रेम मेरी बेहनजब उनका चेहरा मेरी आँखो केँ सामने आता तौ आंखें जानेक्यों भीगने लगती
खैर मैंने एक् गहरी साँसली औऱ बाथरूम मे चला गय़ा ये सोचते हुए कि अब जोँ होगा वो मेरी भाग्य मेरा नसीब।। जब मे रेडी होकर बाथरूम सें निकला तोँ बहोत मुश्किल सें कांपते हुए हाथों सें रूम काडोर खोला औऱ काँपती टाँगो सेसीढ़यों सें नीचे उतरने लगा।। जब मे नीचेआया तौ सामने डाइनिंग टेबल पे अबू औऱ अम्मी बैठे ब्रेकफास्ट कररहे थें औऱ बाजी कहीं नज़र नहि आँ रही थि।।। मैंने डरते डरते अम्मी औऱ अबू कोसलाम किया तौ अम्मी नें मुस्कुरा केँ जवाब दिया औऱ अबू नें भि सलाम कां जवाब दिया।।। उनके अभिवादन कां जवाब औऱ अम्मी कि रोज की्रह विशेष मुस्कान सें मेरेदिल औऱ दिमाग़ पे छायाभय औऱ डर एक् दम सें उतर गय़ा।।।
ये थां वो दया कां टुकड़ा जोँ मेरी चाहत नें मेरे प्रेम नें यानी मेरी बाजी नें मेरी झोली मे फेंका थां। मे जान चुका थां कि बाजी नें इसलिये अम्मी अब्बू कों नहि बताया थां कि वो जानती थि कि अबू मुझे गोली मारने सें भि पीछे नहि हटते। बाजी कि दया कों अपनी झोली मे समेटे ब्रेकफास्ट करनेलगा।। औऱ फिन बाजी प्रेम करे याँ न् करे। उसकी निगाह मे घृणा हौ याँ प्रेम। इससे क्याँ फर्क पड़ता हैं।। मेरेलिए इतना हि बहुत थां कि मेरा प्रेम मेरी बाजी नें मेरा इतना हि ख्याल रखा थां औऱ मेरीजान बख्श दि। औऱ अपनेइस दीवाने आज मरने नहि दिया।।।।।
मे ब्रेकफास्ट करतेहुए सोचरहा थां कि अम्मी सें पूछूँ कि बाजी कहां हें नज़र नहि आरहीं। पर्र मेरेदिल मे चोर थां।। इसलिए पूछने सें घबरारहा थां।। फिन भि पूछना तोँ थां हि बाजी कां क्योंकि वो रोज मेरेसंग हि तोँ जाया करतीथीं। मैंने हिम्मत कर केँ अम्मी सें पूछा कि बाजीकहाँ हें। तोँ अम्मी नें आगे जोँ कहा वो मेरेमन पे किसी परमाणु बम केँ विस्फोट सें कम न् थां।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
अम्मी नें कहा कि बाजीआज सें होस्टल जारही हें।।। मेरेमन मे आंधियां औऱ तूफान फिन सें चलना शुरुआत हौ गए।।। मैनेमरी हुईँ ज़ुबान मे अम्मी सें पूछा कि वो क्यूं? अम्मी नें कहा कि हिना (मेरी बाजी कां नाम) कहती हैं कि घऱ पऱ पढ़ाई सही नहि होती।। हॉस्टल मे सबी क्लास कि दोस्त लड़कियों केँ संग मे मिल केँ पढ़ाई करेगी तोँ ज़्यादाअच्छे सें पढ़ाई होगी। मे तोँ मनाकर रही थि तुम्हारे अब्बू कों अबकौन समझाए कहते हें कि जहां हिना कि ख़्वाहिश हैं हिना वहांरह कर पढ़े, हमेंबस इसीबात सें मतलब हैं कि ये स्टडी अच्छे सें करे।।।।।।।
अजीब बेरहम प्रेम थां मेरा एक् तरफ तोँ मुझे मारने नहि देता औऱ दूसरी तरफ मुझसे दूर जाकर मुझे अकेला तड़पने औऱ मरने केँ लिए छोड़ केँ जारहा हैं।।।। संग हि अम्मी नें कहा कि सलमान तुम् कॉलेज चलेजाओ बाजी कों अबू उसके हॉस्टल मे छोड़ देंगे उसका बहुत सामान भि हैं कि तुम्हारी गाड़ी मे नहि आएगा। औऱ हांजा केँ बाजी सें मिल भि आओ औऱ बायबोल आओ।। मे ब्रेकफास्ट क्याँ करताबस वही पे छोड़ दिया।। पऱ अम्मी जोँ मुझे बाजी सें मिलने कों कहरही थि मे केसेमिल सकता थां बाजी कों केसेफेस कर सकता थां उन्हें।।।
उनकेरात कों कहेहुए शब्द अभि भि तौ मेरे कानों मे गूंजरहे थें औऱ ऊपर सें उनका हॉस्टल शिफ्ट होने कां फैसला।। येसभी बातें तौ इसबात कि घोषणा कररही थीं कि सलमान तुम्हारी बाजी तुमसे नफरत करती हैं। औऱ अब वो तुम्हारा चेहरा कभी नहि देख्ना चाहती।।।। मे हारेहोय जुआरी कि तरह चेयर सें उठा जोँ अपनासभी कुछ हारी हुइ बाजी मे लगा बैठा थां। सीढ़ियाँ चढ़ता हुआऊपर कि ओर बढ़ा अपनेरूम मे जाकर थोड़ी देर केँ लिए खड़ा होँ गय़ा। ताकि अम्मी कों येलगे कि मे बाजी सें मिलरहा हूं।। फिनरूम सें बाहर् निकला औऱ अपनी बाजी केँ रूम केडोर कि ओर एक् बार देखा। इस दरवाजे केँ दूसरी ओर हि तोँ मेरा प्रेम बैठा थां।।।
कॉलेज पहुँचा औऱ कॉलेज मे एक् साइड पे लगे एक् बेंच पे जा केँ बैठ गय़ा। यहा बहोत कम हि कोईआता थां।।। पऱ एक् थां जौ मुझे कहीं भि देख सकता थां वो थि मेरी प्रेमिका साना।।। मुझे अपने पीछे सें किसी केँ गाना गाने कि आवाज़ आई '' चुपचुप बैठे हौ जरूरकोई बात हैं '' मुझे साना कि च्वाइस पे हमेशा हंसीआती थि।। आज जानेक्यों मुझे उसकाये गानादिल कों बहोत भा गय़ा।। ये टाइम औऱ हालात हि तौ होते हें जौ इंसान कों क्याँ सें क्याँ बना देते हैं। साना नें कहा क्याँ बात हैं जनाबआज यहा कहां औऱ केसेआए।।।
मैंने मुश्किल सें साना केँ आगमन पे स्माइल कि औऱ कहा कि कुछ नहि बस वैसेदिल कररहा थां यहा थोड़ी देर बैठने कां।। साना नें कहा, न् बताओजब दिलकरे तौ दिल कि बात साझाकर लेना।।। औऱ साना मेरेसंग बेंच पे आँ केँ बैठ गई।। फिन हम् लोग वैसे हि गपें लगाते रहेकुछ देर। उस दिन मैंने जानां कि महिला अगर मर्द कों जख्म देती हैं तौ यही महिला व्यक्ति कों मरहम भि तौ लगाती हैं, चाहे जख्म देने वालीऔरत कोई औऱ हौ औऱ मरहम लगाने वालीकोई औऱ।। जब मेरी कॉलेज मे एंट्री हुईँ थि तौ मुझे अपने साथीदूर सें नज़रआये पर्र मैंने उनसेबात नहि कि औऱ उनसे नज़रें बचाकर यहाआकर बैठा थां जब सानायहा आई औऱ मैंने साना सें कुछदेर गपशप कि तोँ मुझेऐसा लगा कि साना कि गपशप नें मेरे ज़ख़्मों पे मरहम कां काम किया हैं सच कहते हें '' अपोजिट अट्रॅक्टिव। '। पर्र जौ भि थां मेरे जख्मऐसे थें कि अब उनका पूरा इलाज एक् हि इंसान केँ पास थां औऱ वो थि मेरी प्रेम यानी कि मेरी अपनी बाजी।।।
अचानक बात करते करते साना नें कहा कि सलमान तुम्हें तुम्हारी दिदी केँ बारे मे तुम्हें कुछ बताऊँ? ? साना कि बात जैसे मेरेमन पे हथौड़ा कां वार साबित हुईँ औऱ मेरामन धड़ककर रह गय़ा साना नें जैसे मेरी दुखती रग पे पेररख दिया थां। मे अपने आप् कों औऱ अपनी दिली भावनाओं कों नियंत्रित करके साना सें पूछा कि हां बताओ क्याँ बात हैं। तोँ साना नें कहा कि मेरी जौ चचेरे भइया हें तमखा हैं तमखा कि फ्रेंड केँ हि कॉलेज मे पढ़ती हैं वो कुछदिन पहले तुम्हारी दिदी कि कुछ फ्रेंड्स केँ संग बैठी थि औऱ तुम्हारी दिदी कि फ्रेंड्स तुम्हारी दिदी केँ बारे मे हि आपस मेंबात कररही थीं।।
सानाकुछ देर केँ लिए खाँमोश हौ गई। मैंने उतावलापन केँ साना सें कहा कि आगेकुछ बताएगी याँ नहि।। साना नें अपनीबात आगे बढ़ाई औऱ कहा कि सलमान वो बातकर रहीथीं कि हमारे कॉलेज मे बहोत कमऐसी लड़कियां हें जिनका किसी लड़के केँ संगकोई अफेयर नहि हैं औऱ उनमें सें एक् हिना हैं (यानी मेरी बाजी)।। साना नें कहा कि सलमान तुम्हारी दिदी केँ संग कॉलेज केँ कई लड़के अपने प्रेम कां इजहार कर चुके हें पऱ तुम्हारी बाजीइन सभी बातों केँ सख्त खिलाफ हें।।। मेरी चचेरे भइया कों उनकी फ्रेंड्स नें ये भि बताया हैं कि तुम्हारी दिदी कि येसोच हैं कि लड़की कि इज्जत औऱ लड़कीहया हि लड़की कां गहना हैं। तुम्हारी दिदी कि येसोच हैं कि लड़की कों सारा जिंदगी शालीनता मे गुजारना चाहिए औऱ जब लड़की कि विवाह कि उम्रआए तौ उसके माँ-बाप कों हि उसकी विवाह तय करना चाहिए। औऱ लड़कीजब पहलीबार प्रेम करे तोँ वो विवाह केँ बाद अपने हसबंड केँ संग हि करे।
मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) – New Episode
हमारी क्लास कां वक्त हौ चुका थां। हम् उठे औऱ क्लास कि ओरचल पड़े।। साना कि बातों सें मेरे अंदर मौजूद कई सवालों केँ जवाब मुझेमिल चुके थें।।। जहां मुझे एक् ओर अपनी बेहन कि पवित्र सोच औऱ अच्छी भूमिका पे गर्व होँ रहा थां, दूसरी ओर बाजी कि अच्छी सोच औऱ सॉफ चरित्र सें तकलीफ़ भि। अजीब भइया थां मे भि जौ अपनी बेहन केँ पवित्र औऱ नेक होने पे परेशान थां। आज तोँ साना कि बातों केँ बाद मुझेऐसा लगना शुरुआत होँ गय़ा कि मे बाजी कों लेकर जीतने भि ख्वाब सजाए थें औऱ जौ कुछ भि सोचा थां अब मुझे भूलना पड़ेगा। पर्र प्रेम करने वालाहार केसेमान सकता हैं। चाहे मंजिल मिले याँ नं मिले।।।।।।।। अब मुझे लगनेलगा थां कि यह विवश्ता केँ आंसू औऱ यह अधूरी ख्वाहिशें ऐसे हि मेरे सीने मे रहते रहते मेरेसंग मर जाएंगी।।।।
घऱ पहुँचने पर्र पताचला कि बाजीजा चुकी हें।। मेरामन कररहा थां कि मे चीखचीख कररो पडूं। दीवार टक्कर मारूं। आज मुझे मेरा हि घऱ हि काट खाने कोदोड़ रहा थां।।
आज बाजी कों देखे 2 सप्ताह होँ चुके थें।। मे अपने बाथरूम मे बैठा स्मोकिंग कररहा थां।।। जिंदगी तोँ बर्बाद होँ हि चुका थां मेरा तौ मैने सोचा स्मोकिंग करके थोडा औऱ बर्बाद कर लेते हें।। प्रेम मे विफलता केँ बाद इंसान तरहतरह केँ काम करता हैं।। सुकून तौ उसी केँ पास होता हैं जिससे वो प्रेम करता हैं।
बाथरूम सें बाहर् आया औऱ बेड पे बैठ गय़ा। अचानक मेरीमृत आँखों मे इकचमक आई औऱ मे अपने कमरे सें बाहर् आया औऱ सीढ़ियाँ उतर केँ अम्मी केँ कमरे मे आँ गय़ा।। अम्मी अपने कमरे मे सोई हुईँ थि मैंने उन्हें जगाया औऱ कहा कि हमारे परिवार कि फोटो एल्बम कहां हैं। अम्मी नें पूछा क्याँ करना हैं बेटा परिवार कि फोटो एल्बम कां। मैंने कहा वैसे हि आजदिल कररहा थाबचपन केँ फोटोग्राफ देखने कां। अम्मी नें मुझे अपनी चाबी देकरकहा येलोवहा सें लेँ लो। औऱ मे गय़ा औऱ परिवार कां फोटो एल्बम सैफ सें निकाल लिया औऱ अम्मी कोचाबियां वापस करतेहुए अपनेरूम मे आँ गय़ा। एक् अनजानी सि खुशी थि मेरे चेहरे पे जोँ आज बहोत दिनों बाद मैंने देखी थि।
मैंने एल्बम कों खोला औऱ उसके पन्नों कों पलटपलट कर देखने लगा। फिन मे एक् पृष्ठ पे आकेरुक गय़ा। क्योंकि इस पृष्ठ पे उसकी तस्वीर थि जिस हस्ती केँ दर्शन केँ लिये मे ये एल्बम नीचे लें आया थां। औऱ वो सख्श स्पष्ट रूप सें एक् हि होँ सकता हैं। हाँ वो हस्ती मेरीजान सें प्यारी मेरी बाजी कि थि। बाजी कि यह फोटोआज सें 1 साल पहले कि थि।। हम् लोग अपने एक् चचेरे भइया कि विवाह पे गए थें औऱ वहां मैंने बाजी कि ये तस्वीर बनाई थि। तबजब मैंने यह फोटो बनाई थि तब मुझे क्याँ पता थां कि इसी फोटो कों 1 सालबाद मे देखकर रोरहा हुँगा। मेरे आँसू थें कि रुकने कां नाम हि नहि लेँ रहे थें।।।
मैंने बाजी कि फोटो एलबम सें निकाली औऱ जीभर केँ अपनी बाजी कां दीदार किया। बाजी कि बड़ी बड़ी खूबसूरत सि आँखें औऱ बाजी कि प्यारी सि नाक बाजी केँ पिंक होंठ उनके केचमकते गाल औऱ काले लम्बे बाल, बाजीउस दिन व्हाइट ड्रेस मे किसीहूर सें कम नहि लगरही थीं।। किसी कों वोँ फोटो दिखादो औऱ उससे पूछो कि इस दुनिया मे सबसे खूबसूरत औरतकौन हैं तौ वोँ एक् हि जवाब देता कि सलमान तेरी मुहब्बत।।।।।
अचानक मैंने फिन एल्बम केँ पन्ने फिन पलटने शुरुआत किए औऱ एक् पृष्ठ पे आकररुक गय़ा।। इस पृष्ठ पे बाजी कि एक् औऱ तस्वीर थि जिसमें बाजीघास पे बैठी थि।। हम् परिवार केँ सदस्यों केँ संग एक् बार पिकनिक पर्र गए थें यह फोटो वहां बनाई थि मैने।। इस तस्वीर मे बाजी कि गाण्ड कि साइड बाजी कि कमीज औऱ सलवार केँ ऊपर सें सहीनजर आँ रही थि क्योंकि बाजीघास पे बैठी थि जिसवजह सें बाजी कि गाण्ड जमीन पे लगने सें बहोत चौड़ी होँ गई थि।। मैंने सोचा कि बाजी कि पहली वाली तस्वीर देखने केँ बाद अपनी आत्मा कों समयभर कां आरामदे दूँ। अबइस तस्वीर कों देखते हुए ज़रा अपनेबदन कों भि आरामदे लूँ। मैंने बाजी कां फोटो एलबम सें बाहर् निकाला औऱ हाथ मे पकड़ केँ बेड सें टेकलगा केँ लेट गय़ा।
औऱ अपनी नज़रें बाजी कि मोटी गाण्ड कि साइड पे जमाली। मैंने दूसरे हाथ सें अपनी सलवार सें अपना लण्ड बाहर् निकाला जोकि करीब-करीब अब तकखड़ा होँ हि चुका थां औऱ तस्वीर देखते देखते मुठ मारने लगा। ये उसरात केँ बादआज मेरा पहलामुठ थां। औऱ मेरे प्रेम कां आलमये थां कि येमूठ भि मे अपनी बाजीनाम कि हि माररहा थां। अजीब आराम औऱ लज़्जत कि लहरें मेरी रगों मे दौड़रही थीं। मे एक् नज़र बाजी पे डालता औऱ एक् नज़र बाजी बाकी केँ जिस्म पे।।। मेरे लन्ड सें स्पर्म निकल निकलकर मेरे हि हाथों मे लगरही थि औऱ मे उस स्पर्म कों अपनेलंड केँ ऊपर मस्लरहा थां। अब मेराहाथ अपनेलंड पे बहोत हल्का महसूस हौ रहा थां औऱ स्लिप कररहा थां।।। औऱ स्लिप सें बहोत मजा आँ रहा थां। पता नहि ऐसेही कब तक बाजी कि तस्वीर कों देखते हुएमुठ मारता रहा।।।
जब भि फारिग होने लगता तौ मुठ मे थोडा ब्रेक लगा लेता।।। क्योंकि मे इसमजे कि दुनिया सें बाहर् बेरहम दुनिया मे वापस नहि जानाचाहता थां।।। संग मे उसकी अंतिम रात कों यादकर रहा थां जब मैंने अपनेहाथ मे बाजी कि गाण्ड कां वो मोटापब पकड़ा हुआ थां औऱ अपने अंगूठे कों अपनी बाजी कि गाण्ड कि गहरी लाइन मे घुसाया हुआ थां। ये सोचते सोचते तौ जैसे मे नशे औऱ मज़े मे पागल हौ चुका थां।। अब मे अपने लन्ड सें निकलती स्पर्म कों अपनेलंड केँ नीचे जोँ बॉल्स थें उनके पर्र मलना शुरुआत कर दिया। अब मामला मेरी बर्दाश्त सें बाहर् हौ गय़ा थां।।। मैंने अपनेहाथ सें मुट्ठी बनाई औऱ उस मुट्ठी केँ छेद मे अपने लन्ड कों डाला औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे नीचे कि ओर लेँ केँ गय़ा औऱ फिनऊपर कि ओर, नज़रें बाजी कि तस्वीर पे मन मे वही आखिरी रात कां दृश्य औऱ संग हि अहहअहह कि आवाज़ केँ संग फारिग होना शुरुआत होँ गय़ा औऱ संग हि मे सिहर केँ आगे कि ओर होँ गय़ा औऱ स्पर्म मेरी टांगों पे गिरना शुरुआत हौ गई।।।।।।।।।।।
दिन बीतते जारहे थें।।।
अब तोँ मैंने दिदी केँ छात्रावास केँ चक्कर भि लगाने शुरुआत करदिए थें।। कितनी कितनी देर उनके छात्रावास केँ बाहर् जा केँ अपनी वाहन साइड पे पार्क कर गाड़ी मे बैठा रहता औऱ यहीसोच केँ दिल कों चैन रहता कि चारदीवारी केँ पार बाजी कहीं बैठी होगी।।।।
बाजी कों घऱ सें गएआज 25 दिन होँ चुके थें।।।।।।।।।।।
ऐसे हि घऱ पर्र नीचे टेलीविज़न केँ सामने बैठा अपनी बाजी कि यादों मे खोयाहुआ थां कि घऱ कि बेलबजी। मे उठा औऱ बाहर् जा केँ जबगेट खोला तौ मेरासिर चकरा गय़ा औऱ चक्कर खा केँ गिरते गिरते बचा औऱ बहोत मुश्किल सें मैंने अपने आप् कों संभाला।। ये सपना तौ नहि हौ सकता कि मेरे सामने मेरी बाजी खड़ी थि।
मेरे जिस्म मे जैसे कीड़े काटरहे थें।। मेरेमन मे भि मुझेऐसे हि लगरहा थां कि कुछ कीड़े दौड़रहे हें जिस्म ठंडा सां पड़ने लगा। क्योंकि बाजी केँ चेहरे पे अभि भि वही नफरत थि जोँ उस आख़िरी रात उनके चेहरे पे थि।।। ज़ुबान इतनी भारी होँ गई थि कि कोई शब्द निकल हि नहि पारहा थां मेरीजीभ सें।।। बड़ी मुश्किल सें मैंने दिदी कों सलाम किया जिसका बाजी नें कोई जवाब नहि दिया औऱ अंदर कि ओरचली गई। जिसकी खातिर रातों कों नींद नहि आती, जिसके लिएदिन कां सुकून छिन गय़ा, जिसकी खातिर खानां पीनाभूल गय़ा, औऱ सिगरेट कों मुंह सें लगा लिया औऱ मेरावही प्रेम आज चुप्पी कां थप्पड़ मेरे मुंह पे मारचली गई।।।।
मे गेटबंद किया औऱ निराशा केँ आलम मे अंदर आँ गय़ा।। बाजी अम्मी केँ संग बैठी बातें कररही थीं। ज्यों हि मे अंदरआया अम्मी नें मुझेकहा कि तुम्हारी ये जोँ बेहन हैं नाँ उसकाअब हम् सें मिलने कों जरा सां भि दिल नहि करता। आज इससे मोबाइल पे कितनी मन्नतें कि फिन कहींजा केँ ये 2 दिन रहनेघऱ आई हैं। अम्मी मेरे औऱ दिदी केँ बीच होने वालेसब मामले सें अनजान मुझसे बाजी कि शिकायतें कररही थीं। मे अम्मी कि बातसुन बमुश्किल एक् स्माइल ला पाया अपने चेहरे पे औऱ अपनेरूम कि तरफ जानेलगा कि अम्मी नें कहा बेहन इतनेदिन बादघऱ आई हैं उसकेपास बैठो नाँ। ऊपर कहां जारहे होँ।।। मे अम्मी केँ संग हि बैठ गय़ा औऱ अम्मी नें कहा तुम् दोनों बहनभाई बातें करो मे खाने कों जरादेख केँ आई।।।। अम्मी चली गई।।।।
बाजी टेलीविज़न कों देखने लगी औऱ मे उसकीओर।। कितने दिनबाद देखरहा थां अपनी चाहतों कि रानी कों।।। मेरे सपनों कि रानी कों क्याँ पता थां कि मेरे अंदर क्याँ भावनाओं हें इसकेलिए।। वोँ तौ बस मेरे सीने पे खंजर चलाना जानती थि।।।। अचानक मैंने अपनेमन मे कुछ सोचा औऱ बाजीकहा; बाजी;
ज्यों हि मेरी आवाज़ बाजी केँ कानों सें टकराई तौ उनके चेहरे पे नफरत औऱ गुस्से केँ मिलेजुले भावउभर आए।।। औऱ वो उठकर किचन मे चली गई।।। औऱ मे मुंह खोले बाजी कों जातेहुए देखता रहा।।।
इतनी नफरत इतना क्रोध।।। मेरा अपराध आखिर क्याँ थां कि मुझे बाजी कि आत्मा औऱ बाजी केँ जिस्म सें प्रेम थां।। मे उठा औऱ अपने कमरे मे आँ गय़ा। रात केँ खाने पे भि बाजी नें एक् बार भि मुझ पे नहि डाली।। खाने केँ बाद मे अपने कमरे मे आँ गय़ा औऱ अपनी विफलता ए प्रेम पे मातम करनेलगा।
रात केँ 1 बजरहे थें।।। एकाएक बस मेरेमन मे यही ख्याल थां कि मुझे बाजी सें प्रेम हैं सच्चे दिल कां प्रेम। फिन बाजी कों मेरा प्रेम समझना चाहिए।। वो बेशक हि मुझसे प्रेम नं करें जैसा मे उनसे करता हूं पर्र मुझे एक् बार मेरेदिल कि बात कहने कां मौका तोदें।।।
मैंने अपनेरूम कां डोर खोला औऱ बाजी केँ रूम कि ओर बढ़ा।।। बाजी केँ रूम केँ पास पहुंच केँ मैंने उनके कमरे केँ दरवाजे नोक किया। थोड़ी हि देर मे कमरे कां दरवाजे खुला औऱ मेरे सामने वही हसीन चेहरा औऱ हूर जिस्म खड़ी थि। मुझे देखते हि बाजी नें गुस्से सें कहा कि '' क्यूं आए हौ यहा '' करीब 25 दिनबाद आज बाजी नें मुझसे बात कि थि।।।।।। मेरी आंखों मे आंसू आँ गए औऱ कपकपाती आवाज़ मे बोला कि आप् सें कुछबात करनी हैं।।।। बाजी नें मेरे आँसुओं कि परवाह न् करतेहुए कहा मैंने तुम् जैसे घटिया औऱ कमीने व्यक्ति सें कोईबात नहि करनी। दफा हौ जाओयहा सें।।। औऱ मुझसे अब जिंदगी भरकभी बात करने कि कोशिश मत करना।।
बाजी मुझे घटिया औऱ कमीना औऱ ज़लील व्यक्ति समझती थि।.क्यूं कि उन्होंने मुझेउस रातजिस हालत मे अपनेसंग देखा थां। वो उनकेलिए नाक़ाबिले माफी थां।। बाजी केँ सामने जोँ मेरा इमेजबन गय़ा थां वो इसलिये कि बाजी नें एक् एंगल सें मुझे देखा बाजी कों ये तोँ पता थां हि नहि कि वो मेरी जीवन मेरीजान बन चुकी हें। औऱ मे यही तौ बाजी कों बताने आया थां। उन्होंने उसदिन कि तरहआज भि मुझेकोई मौका नहि दिया।।। मे आज एक् पक्के इरादे केँ संग बाजी केँ पासआया थां कि अगर बाजी नें मुझेकुछ कहने कां मौका दिया तोँ ठीक वरनाआज मे अपने आप् कों समाप्त कर दूंगा।।। वो चाहे मुझसे मेरे जैसा प्रेम न् करें पर्र एक् बार मेरेदिल कां हाल तोँ सुन लेँ।। बेशक मेरे प्रेम कों ठुकरा दें पऱ मेरेदिल कि किस्सा तौ सुनें।।
पऱ आज भि बाजी नें मेरी कोईबात सुने बिना मुझेदफा हौ जाने कां जबकहा तौ मैंने अपनीजेब मे हाथ डाला औऱ उसमें सें एक् ब्लेड निकाला (जबरूम सें निकला थां तब मे जेब मे अपनेसंग लें आया थां) औऱ बाजी कि आँखों मे आँखें डाल केँ उस ब्लेड सें अपनेहाथ कि नस कों काट दिया।।।।।।।।। खून कां एक् फव्वारा सां मेरेहाथ सें अचानक निकला औऱ फिनटिप टिपखून जमीन पे गिरना शुरुआत हौ गय़ा।।। खून इतना निकल चुका थां कि मेरी आंखों केँ सामने अंधेरा छानेलगा। शायदमौत कां अंधेरा औऱ फिन ख्यालों मे कहीं गिरता जारहा थां।।।। बाजी कां जोँ आखिरी शब्द मेरे कानों सें टकराया वो ये थां "सलमान ये तुमने क्याँ कर दिया"
जब मुझेहोश आया तौ मे अस्पताल केँ कमरे मे लेटाहुआ थां।।। अम्मी, अबू औऱ बाजी मेरेपास हि मौजूद थें। अम्मी अब्बू केँ चेहरे पे गंभीर तकलीफ़ थि। जब कि बाजीरो रही थि। उनकी हालत सख्त खराबलग रही थि।।।।। मुझेहोश मे देख अम्मी अब्बू केँ चेहरे पे खुशी कि लहर दौड़ गई जब कि बाजी थि कि चुप हि नहि होँ रही थि।। अम्मी नें आगे बढ़कर मुझे अपनेसंग चिपका लिया औऱ रोना शुरुआत कर दिया।। जब अम्मी चुप हुई तौ मुझसे पूछा कि तुमने यह हरकत क्यू कि बेटा।। जरा सां नहि सोचा अपनीइस मम्मी केँ बारे मे कि तुम्हारे बिनाये केसेजी पाएगी। हमें हिना नें बताया कि तुम् रात कों उसके कमरे मे गये औऱ उसेये कहा कि अम्मी अब्बू सें कह देना कि अगर मुझेकुछ गलती होँ गई होँ तौ मुझेमाफ कर देना औऱ फिन तुमने अपनेहाथ कि नसकाट ली।। बेटा यह क्याँ बेवकूफी हैं। ऐसा क्यूं किया तुमने।।
मेंसमझ गय़ा कि दिदी नें मेरे औऱ उनकेबीच केँ मामले कों सामने नहि आने दिया। मे चूँकि इकलौता बेटा थां इसलिये सारे परिवार केँ लिए बहोत इम्पोर्टेंट भि थां।। अबू केँ मजबूत दिल कां मुझेउस दिन अंदाजा हुआ। कि अबू नें अपने अंदर कि तकलीफ़ उसदिन भि पता नहि होने दि
अम्मी नें मुझेकहा कि सलमान देखो नं तुम्हारी बेहन केसेरो रही हैं तुम्हारे लिए।।। कुछ कहती नहि हैं।। बस रोयेजा रही हैं।। इतना प्रेम करनेवाली बेहन कों छोड़ तुम् कहां जारहे थें।।।
मैंने बाजी कों देखा जौ अभि भि रोरही थीं।।। मैंने कहा: बाजीचुप हौ जाओ मे अबठीक हूं नां।।।
पर्र बाजी नें फिन भि रोनाबंद नहि किया।।।। अम्मी नें भि काफ़ी कोशिश कि कि मे बतादूं कि ऐसा मे क्यूं किया। पर्र मे आगेचुप हि रहा। अम्मी नें कहा: बेटा कोई समस्या हैं तोँ हमें बताओ हम् तुम्हारी उस समस्या कां समाधान करेंगे।
पर्र मे सोबात कि इकबात बसचुप हि रहा।।।
जब अम्मी केँ बहोत पूछने पे भि कुछ नं बोला तौ अबूआगे बढ़े औऱ अम्मी केशोल्डर पकड़ केँ दबा दिया।। शायद वो अम्मी कों मेरे सें अधिककुछ पूछने केँ लिएमना कररहे थें।।। अम्मी नें कहा: अच्छा बाजी तुम्हारे पास हि रहेगी हम् लोगजरा घऱ सें होँ आएँ औऱ खाने कों भि कुछ लें आएं।। हिना नें कब सें कुछ खाया हि नहि।। औऱ ऐसाकह कर अम्मी अब्बू घऱचले गए।।
अम्मी औऱ अब्बू केँ जाते हि बाजी मेरेपास चेयर पे आकेबैठ गई। औऱ मेरा एक् हाथ अपने दोनों हाथों मे लेकरउस पे अपनी आँखें रखकर रोनेलगी।।। इतनारोई कि मेराहाथ उनके आंसुओं सें भीग गय़ा।।। मुझेपता थां कि बाजी केँ ये आंसू अपने भइया केँ लिए हें।। न् कि अपने भइया केँ उस प्रेम केँ लिए जोँ उनका भइया उनसे करता हैं। मेरादिल ऊब चुका थां अबइस दुनिया सें।। औऱ मे चाहता थां कि कुछऐसा हौ कि मे मर जाऊं।.क्यूं बच गय़ा मरने सें।।।। अचानक बाजी नें रोते रोतेसिर उठाया औऱ कहा: सलमान ऐसा क्यूं किया तुमने। तुम्हें पता हैं तुम् मौत केँ मुंह सें वापसआए हौ।।
मैंने कहा: बाजीअब क्याँ फायदा पूछने कां उसदिन तुम्हारे पासआया थां आपकोकुछ बताने तब तौ आपने सुना नहि। अब मुझे पे ये प्रेम कैसातरस कैसा? औऱ क्यूं? बाजी नें कहा व्यर्थ कि बातें मतकरो औऱ मुझे बताओ क्यूं कियाऐसा।।। अपनी बाजी केँ आँसूदेख केँ अब मेरादिल भि धीरे-धीरे धीरे-धीरे पिघलना शुरुआत होँ गय़ा।।
फिन आख़िर थोड़ी देरबाद मेरेदिल मे जौ भि बाजी केँ लिए थां मैंने उन्हें सभीकुछ बता दिया। जिस्म केँ प्रेम कां भि उन्हें बताया साफसाफ शब्दों मे नहि। बाजी मेरी सारीबात सुनती रहीं औऱ जब मे चुपहुआ तोँ तब तक उनका रोना भि बंद होँ चुका थां।। बाजी नें एक् गहरी साँसमी औऱ हल्के सें सख्त लहजे मे कहा कि सलमान तुम् कैसीबात कररहे होभला भइया बेहन केसे एक् दूसरे सें प्रेम कर सकते हें।। ये प्रेम तोँ ऐसा प्यार हैं जोँ इस समाज मे मौजूद हि नहि हैं। तुम् बच्चों वालीबात कररहे हौ।।। ये केवल तुम्हारी उम्र कां तक़ाज़ा कि इस उम्र मे व्यक्ति ऐसी व्यर्थ बातें सोच सकता हैं। नहि सलमान ऐसा तोँ संभव हि नहि। अपने हि भइया सें प्रेम।।
मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) - Continue reading next part
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