मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) – New Episode
बाजीऐसी कितनी हि बातें कह गई।। औऱ जैसे वो अपने आप् सें भि ये प्रश्न पूछरही हों कि क्याँ ऐसा संभव हैं।। अचानक बाजी नें कहा सलमान तुम्हें अबयेसभी बातें अपनेमन सें निकालनी होंगी।।। येकभी भि नहि होँ सकता।। अचानक सें मेरे अंदर कां वो पागलपन जागउठा। जौ होश मे आने केँ बाद मुझेअब तक महसूस नहि होँ रहा थां। (शायदमौत कि सच्चाई कों इतने लगभग सें देखने केँ बादकुछ बदलाव आया थां मेरे अंदर) मैंने उतावलापन केँ बाजी सें कहा बाजीआई लवयू तुम् मेरी पहली प्यार हौ तुम्हारे बिना मे मर जाऊँगा। औऱ आप् मुझे नं मिली तौ मे अपने आप् कों समाप्त कर दूंगा। अपनेबदन पे अपनी आत्मा पे बस मैने आपकानाम लिख दिया हैं.
बाजी नें अचानक गुस्से सें कहा सलमान बस।।।।। बाजी सें मेरेहाथ सें अपनेहाथ हटादिए। औऱ सामने केँ सोफे पे जा केँ बैठ गई। औऱ पता नहि किन सोचों मे गुम होँ गई।।।
मे अस्पताल सें वापसघऱ आँ चुका थां। औऱ जिसदिन मे होश मे आया थां बाजीउसी दिन हॉस्टल वापसजा चुकी थि।।।। जातेहुए बाजी केँ चेहरे पे बहोत उलझन औऱ तकलीफ़ देखी थि मैने।।
घऱआते संग हि अम्मी नें कहा:आज केँ बाद तुम् हमारे कमरे मे हि सोया करोगे।। (अम्मी डर गई थीं कि कहींफिन कुछ उल्टा सीधा नहि करदूं।।।। ऊपर सें मैंने हाथ काटने कि वजह अभि तक नहि बताई थि) मैंने अम्मी कों कहा कि आप् चिंता नं करें मे फिनकुछ ऐसा वैसा नहि करूँगा।।। आप् मुझ पर्र विश्वास करें।।। खैर बहोत मुश्किल सें अम्मी कों मना पाया मे।।।।।।।।
बाजी एक् बारफिन मुझसे मिलकर जा चुकी थि। अब तौ मुझे बाजी कां साफसाफ जवाब भि मिल चुका थां कि ऐसा संभव नहि जैसा जौ मे चाहता हूं।। हांसही भि तौ थां। ये जरूरी तोँ नहि कि जैसे मुझे बाजी सें प्रेम होँ गय़ा थां वैसे हि बाजी कों भि मुझसे होँ जाता।। बाजी कि थि भि तोँ बाकी लड़कियों सें अलगसोच। सम्मान, हया, शालीनता कों हि लड़की कां गहना समझती थि।।।
मेरेहाथ कां घाव तोठीक होँ चुका थां पऱ बाजी केँ साफ इनकार केँ बाद मेरी आंतरिक हालत बुरी औऱ बुरी होतीजा रही थि। बहोत कमजोर होँ गय़ा थां मेरीइस हालत कों लेकर अम्मी बहोत परेशान थि।।।।।।।
बाजीघऱ सें फिनगए आज 13 दिन हौ चुके थें।।।।।।।।।।।।।
एक् दिन मे रात केँ खाने केँ टाइम नीचे गय़ा तौ अम्मी डाइनिंग टेबल पऱ अकेली बैठी थि औऱ खानां भि लगाहुआ थां। अबू वहां मौजूद नहि थें।। मे समझा कि अम्मी मेरा औऱ अबू कां वेटकर रही हें। मैंने पूछा कि: अम्मी अब्बू कहां हें। अम्मी नें जोँ जवाब दिया वो सुन केँ एक् खुशी कि लहर मेरे अंदर दौड़ गई औऱ खुशी केँ संग हि उदासी भि।।।।
अम्मी नें कहा:अबू हिना कों लेनेगए हें औऱ अबबस पहुँचने वाले हें। हिना केँ कॉलेज मे गर्मियों कि छुट्टियां होँ गई हें अब हिना एक् महीने घऱ हि रहेगी।।
खुशी इसलिये कि मेरा प्रेम आँ रही हैं।। अबयेदिन देख्ना तौ नसीब होगा।। औऱ उदासी इसलिये मे अपनीइस प्रेम कों पा नहि सका।।।
थोड़ी देर तक अबू औऱ हिना बाजी आँ गए।।। अम्मी नें बाजी कों संगलगा लिया औऱ प्रेम किया।। बाजी नें मुझे सलाम किया। फिन हम् सबने खानां खाया औऱ मे अपने कमरे मे आँ गय़ा।।।।
आज मेरा भि कॉलेज मे लास्ट डे थां। गर्मी बहोत बढ़ गई थि इसलिये हमारा कॉलेज भि आजबंद हौ रहा थां।।।
कॉलेज सें जबघऱआया तोँ अम्मी औऱ बाजी बातें कररही थीं। मे दोनों कों सलाम किया औऱ ऊपर कमरे मे आँ गय़ा। रातरूम मे लेटे मे दैनिक दिनचर्या केँ अनुसार बाजी कि वही शादीवाली तस्वीर देखरहा थां (अम्मी कों एल्बम वापस करने सें पहले मैंने वो दोनों तस्वीरें एल्बम सें चुरालीं थीं) औऱ तस्वीर सें बातें कररहा थां। अपने प्रेम कों तोँ नं पासका। इसलिये ऐसे तस्वीर सें बातें कर केँ कुछसमय कां आराममिल जाता थां मुझे।।।। औऱ जबमुठ मारनी होती थि तौ बाजी कि दूसरी वाली फोटोदेख केँ मुठमार लेता थां।।
अचानक मेरेरूम केँ दरवाजे पे दस्तक हुई मे फोटो तकिए केँ नीचीरखे औऱ गेट खोला तोँ सामने बाजी खड़ी थि।।। बाजी केँ हाथ मे दूध कां गिलास थां।। बाजी नें आने कां कां पूछा तोँ मे साइड मे हौ गय़ा।।
बाजीजब अंदरआई तोँ मैनेडोर बंदकर दिया।। बाजी केँ बदन कों एक् निगाह मे पीछे सें देखा।। बाजी मेरेबेड पे जा केँ बैठ गई मे भि चुप करके बाजी केँ संग हि बेड पे बैठ गय़ा।।। (नहि चाहिए मुझे किसी कां तरस किसी कि सहानुभूति, नं हि वो बेहन भइया वाला पारंपरिक प्रेम, अब मैंने अपनी हि एक् दुनिया बनानी हैं। जिसमें मे अपनी बाजी कों प्रेम करूं औऱ उनकी पूजा करता रहूं) बाजी नें मुझेदूध कां गिलास पकड़ा दिया।।।
मैंने कहा: बाजी मे दूध नहि पीता होता। बाजी जैसे मेरीइसी बात कां प्रतीक्षा कररही थि। बाजी जल्दी सें चिल्ला उठी: आखिर तुम् चाहते क्याँ हौ? क्याँ हालतबना ली हैं अपनी?ऐसे हि रहे तौ एक् दिनमर जाओगे? ये कहां कि मानवता हैं? सारेघऱ कों परेशान कररखा हैं तुमने।।। अपनी मम्मी केँ हाल पे हि तरसखाओ। तुम्हें पता भि हैं कि कितने दिन सें सुकून कि नींद नहि सोसकी तुम्हारी वजह सें।। बाजी कहती गई औऱ मे चुपचाप सुनता अचानक बाजी कि नज़र मेरे तकिए पर्र पड़ी तोँ उन्हें उसके नीचेकोई तस्वीर पड़ी दिखी (मे जल्द मे तस्वीर कों सही सें तकिए केँ नीचे नहि रख पाया थां जोँ बाजी कों नजर आँ गई) बाजी नें हाथआगे बढ़ाया तोमैं नेतड़प केँ कहा नहि बाजी प्लीज़ उसे वहीं रहनेदें। बहोत देर होँ चुकी थि.तस्वीर अब बाजीहाथ मे थि।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
मेरी दीवानगी नें बाजी केँ दिल पे आज एक् वार औऱ कर दिया। बाजीरो पड़ी। बाजी कि आंखों सें आंसूटिप टिपगिर रहे थें।।। बाजी कों रोतादेख भि रो पड़ा।।। बाजी नें रोते रोते मुझसे पूछा: सलमान क्यूं? आखिर क्यूं? (इस क्यूं कां जवाब तौ इस दुनिया मे किसी भि प्रेम करने वाले केँ पास नहि थां। आज बाजी नें मेरे अंधे प्रेम कि एक् औऱ झलकदेख ली थि।। जिसे बाजीसहन नं सकी) मे कुछ बोला नहि बस रोतारहा
अचानक बाजीउठी औऱ रूम केडोर कि ओर बढ़ी तोँ मैंने आगेबढ़ बाजीहाथ पकड़ लिया औऱ बाजी कों अपनीतरफ किया औऱ दूसरे हाथ सें बाजी केँ बाल प्रेम सें पकड़लिए औऱ बाजी केँ गुलाबी गुलाबी होंठ अपने होंठों मे लेँ लिए।।।।
बाजी केँ आंसू थें जौ रुकने कां नाम नहि लें रहे थें।।।। औऱ मेरे आँसू भि उनकी आँखों मे आँसूदेख कर निकलना शुरुआत हौ चुके थें वो भला केसे मेरी आँखों मे ठहर सकते थें।।। मे बाजी केँ होठों कों किसकर रहा थां। कभी बाजी केँ नीचे वाले होंठ कों अपने होंठों मे डालता। कभीऊपर वाले होंठ कों अपने होंठों मे। बाजी कि आँखें बंदथीं औऱ बाजी मेरे किसका कोई रेसपौंस नहि देरही थींबस रोयेजा रही थि ऐसे जैसे वो अपनेहोश मे नाँ हों।। बाजी केँ आँसू मेरे मुंह मे जारहे थें औऱ मेरे आँसू बाजी केँ मुंह मे। अब मे बाजी केँ गाल पऱ भि किस करनेलगा। औऱ बाजी केँ आँसुओं कों पीनेलगा।। बाजी केँ माथे चुंबन केँ बाद बाजी कि प्यारी सि नाक कों भि चूम लिया। अब मैंने अपने होंठ बाजी कि बरसती आँखों पे रखदिए। औऱ दोनों आंखों कों भि बारी बारी चूमना शुरुआत कर दिया।।। मेरा एक् हाथ जिससे मैंने बाजीहाथ पकड़ा थां। अपनेउस हाथ कि उंगलियां मैंने बाजी केँ हाथ कि बेजान उंगलियों मे डाल दि औऱ दूसरे हाथ कि उंगलियां बाजी केँ बालों मे फेरने लगा।।। अजीब हि आलम थां।।। मेरे सपनों कि रानी मेरे सपनों कि वो देवी।। जिसकी आज तक तस्वीरों सें हि मैंने प्रेम किया थां जिसेआज तक मे छुपछुप केँ पूजता थां। वो देवी वो रानीआज सीधे मेरे प्रेम कि चपेट मे थि।।। औऱ मे उसके चेहरे केँ हर एक् एक् इंच कों चूमेजा रहा थां।।
अचानक बाजी नें अपनाहाथ मेरे सें छुड़ाया औऱ दोनों हाथों सें मुझे पीछे किया आँखें खोलमुझ पे एक् निगाह डाली।।। औऱ ऐसे हि रोती हुई औऱ मुझे भि रोताहुआ छोड़रूम सें बाहर् निकल गई रोरो केँ मेरे आँसू भि समाप्त होँ चुके थें शायद।।।।।
मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) – New Episode
बाजी केँ संग बिताए वो कुछ लम्हा मुझे एक् ड्रीम्स जैसेलग रहे थें।।। बाजी केँ रूम सें चले जाने केँ बाद भि बहोत देर तक मुझे विश्वास नहि आया कि मेरे औऱ दिदी केँ बीचये सभीहुआ हैं।। मेरे सपनों कि वो हुश्न कि परी, मैंने उसके गुलाबी होंठों कों अपने होंठों मे लिया औऱ चूमा हैं। उसके चेहरे कि इंचइंच कों चूमा हैं। एक् तौ बाजी मेरा प्रेम थां ऊपर सें थि भि तोँ बहोत हसीन।।
क्याँ समय थें।।। मेरेदिल चाहरहा थां इन पलों कों याद करते करते हि सारा जिंदगी बीतजाए। क्याँ अब बाजी पे मेरा पूरा अधिकार थां? क्याँ उन्हें लेकर जोँ ख्वाब मे सजाए थें वोँ पूरे होनेवाले थें? ऐसे हि कितने सवालों कि लड़ाई मेरे सीने मे चलरही थि।। मे अपनेबेड पे लेटाहुआ थां। औऱ मैंने बाजी वो विवाह वाली तस्वीर हाथ मे ली हुइ थि।। ये फोटो मेरेलिए बहोत भाग्यशाली साबित हुई।
बाजी कि फोटो देखते हि जब मेरी नज़र बाजी होंठों पे पड़ी तोँ मुझे वो समययाद आँ गय़ा जब मैंने बाजी होंठों कों अपने होंठों मे लियाहुआ थां औऱ किस करतेहुए जब मेरे होंठ बाजी केँ नरम होठों सेरगड़ खारहे थें।.औऱ बाजी केँ नरम होठों केँ घर्षण कों याद करते हि मेरा लंडखड़ा होनेलगा। मस्ती औऱ कीलहरें मेरे जिस्म मे दौड़ने लगी।।। किस करते टाइम मुझेपता नहि क्यूं इसतरह कि कोई ग्लानि नहि आई।। याँ शायद मेरा ध्यान हि इसओर नहि गय़ा। पऱ अब मेरा लण्ड धीरे-धीरे धीरे-धीरे बहोत जोश मे आनेलगा थां।।।।।
मैंने बाजी कि दूसरी तस्वीर निकाली औऱ बाजी केँ हुश्न कों देखने लगा औऱ अपना लन्ड पाजामे सें बाहर् निकाल लिया। औऱ मुठ मारनी शुरुआत कर दि। अब मेरीनजर बाजी कि गाण्ड कि साइड पे जमी हुई थि।।। अब मे पूरेजोश मे आँ चुका थां। औऱ अपने लन्ड कों सहीमजे लें केँ आगे पीछेआगे पीछे हिलारहा थां।। वीर्य थोडा थोडा करके लन्ड सें निकलरहा थां।।
कुछदेर पहले बाजी केँ संग बिताए वो हसीनसमय मेरे अंदर औऱ ज़्यादा नशा औऱ मजा बढ़ारहे थें।। मे अबनशे औऱ मजे कि इंतिहा तक पहुँच चुका थां।।। बाजी कि मोटी गाण्ड कों देखते देखते पता नहि मुझे क्याँ हुआ औऱ अचानक मेरे मुंह सें निकला "बाजी आप् कि मोटी गाण्ड" "बाजी दिखादो नाँ ये अपनी मोटी गाण्ड" "क्यूं सलवार मे छुपाई हुईँ हैं" मानो जैसेइन शब्दों कां चमत्कार गय़ा। मुठ मारने सें जौ नशा मेरे जिस्म मे पैदा हौ रहा थां ये शब्द बोलते हि वो नशाचार गुना आनां शुरुआत होँ गय़ा।।
उसदिन मैंने जानां जितना मजा सेक्स करतेहुए अपनी भाषा कां प्रयोग करने मे आता हैं किसी औऱ भाषा सें मजा बिल्कुल नहि आता। अब मामला मेरी बर्दाश्त सें बाहर् हौ गय़ा थां।।। मैंने तेजी सें करवटबदल ली औऱ बाजी कि तस्वीर मेरेहाथ सें गिर गय़ा। मेरी आँखें बंद थि औऱ बाजी कि गाण्ड मेरी आँखों केँ सामने औऱ मस्ती औऱ बेसुधी कि हालत मे एक् हि बातबार बारकह रहा थां "बाजी कि मोटी गाण्ड" "बाजी कि मोटी गाण्ड"।।। मुझेकुछ पता नहि कि फारिग होने केँ कितनी देरबाद भि एक् नशे कि कैफियत मे रहा।।
सुभहजब मेरीआँख खुली तौ सभी कितना अच्छा लगरहा थां।।। बहोत दिनबाद खुशी केँ रंग अपने जिंदगी मे फिन सें देखरहा थां। एक् रात मे इतना बड़ा परिवर्तन तौ मैंने ख्वाब मे भि नहि सोचा थां।
पिछली रात केँ बादअब मे इससोच मे थां कि कब मे अपनी बाजी केँ फिन सें इतना लगभग जाऊँगा।। औऱ बाजी केँ बदन सें टूट केँ प्रेम करूँगा।। यही सोचते सोचते मे बेड सें उठा सजधजकर हुआ औऱ नीचे आँ गय़ा।।। बाजी अम्मी औऱ अबू ब्रेकफास्ट कररहे थें। मैंने हर किसी कों सलाम किया औऱ ब्रेकफास्ट करनेलगा।।। आज बहोत दिनों बाद मेरे चेहरे पे खुशी औऱ रौनकदेख केँ अम्मी बहोत खुश हुईं औऱ कहा क्याँ बात हैं आज मेरा सलमान कितना खुशलग रहा हैं बेटा खुशरहा करो।। मैंने सिर्फ "जी अम्मी" कहा।। औऱ दिल मे सोचाअब मे खुश हि रहूंगा।
ब्रेकफास्ट करते करते चोरी चोरी बाजी कों भि देखरहा थां।।। बाजी कि आँखें सूजी हुई औऱ लालनजर आँ रहीथीं।। जिससे पतालग रहा थां कि वो सारीरात हि रोतीरही हें। बाजी मुझे नज़रअंदाज़ कररही थीं।।। अम्मी औऱ अब्बू कुछ औऱ हि सोचरहे थें पर्र मामला यहा तौ कुछ औऱ हि थां।। बाजी केँ नज़रअंदाज़ करने पे मे परेशान होँ गय़ा।।.कईतरह केँ प्रश्न मेरेमन मे गूंजरहे थें।। क्याँ बाजी केँ संगअब मे वैसाकर पाऊंगा जोँ रात कों किया ? औऱ ऐसे हि जाने औऱ कितने प्रश्न।।
मे ब्रेकफास्ट करके अम्मी अब्बू कों स्टडी कां कह केँ रूम मे आँ गय़ा औऱ कमरे मे मौजूद एक् चेयर पे बैठ केँ आँखें बंदकर ली औऱ बाजी केँ बारे मे सोचने लगा। कि अब केसे बाजी सें वहीसभी कुछ करूँ जौ रात कों हुआ। औऱ फिनकुछ मन मे आते हि मैंने आँखें खोली औऱ बाजी केँ संगआगे कि प्रगति कों रात पे छोड़ दिया। दोपहर का खाना पऱ बाजी कां सामना नहि हुआ। बाजी अपनेरूम मे हि रही। अम्मी सें पताचला कि वो एक् लेट खानां बनाएँगी। दिन बहोत मुश्किल सें कटा।। औऱ फिनरात केँ खाने पे बाजी सें सामना होँ गय़ा।। अब बाजी कों देखते हि एक् अलग हि तरह कि खुशी कां एहसास होता थां। बाजी कि हालत अभि भि ठीक नहि थि आँखें औऱ वैसी हि लाल औऱ सूजी हुई थीं।। लगता थां कि बाजीदिन मे भि रोतीरही हें।।। बाजीअब भि मुझेउसी तरह ध्यान न देनाकर रहीथीं।। मेरे अंदर कि तकलीफ़ औऱ बढ़रही थि। अम्मी नें बाजी पूछा भि कि: हिना क्याँ हालत बनाई हुईँ हैं? बाजी नें कहा कि: अम्मी रात बहुतदेर तक पढ़ती रही हूं। नींदकम ली हैं इसलिये ऐसा हैं।।।।। अम्मी नें कहा पढ़ाई ज़रूरी हैं पऱ उसकेसंग अपने स्वास्थ्य कां भि ख़याल रखाकरो।। बाजी नें कहाजी अम्मी।।
खानां खाने केँ बादरूम मे आँ चुका थां औऱ अभि बुक सामने रखे बाजी कि याद मे गुम थां।। ऐसे हि वक्त बीतता रहाफिन जबरात केँ 12 बजे तौ मैंने पुस्तक साइड मे रखी औऱ बेड सें उतराकदम उठने सेपहले हि लड़खड़ा रहे थें।। पेर बेजान हौ चुके थें।। जिस्म मे करंटलग रहा थां।।। अचानक मैंने एक् आखिरी फैसला किया औऱ एक् गहरी सांसली औऱ अपनेरूम केँ दरवाजे कों खोला।। औऱ बाजी केँ रूम कि ओर बढ़ा।।। बाजी केँ रूम केँ पास पहुँच केँ एक् समय मेंने कुछ सोचा औऱ फिनगेट पे नोक किया।।
कुछ हि सैकंडबाद डोर खुला तौ बाजी मेरे सामने खड़ीथीं।। बाजी मुझेदेख कर घबरा सि गईं।।। मुंह सें कुछ बोलीं नहि।।। मैंने हि हिम्मत करके बाजी सें पूछा कि क्याँ मे अंदर आँ सकता हूं? बाजी नें कुछसमय कुछ सोचा औऱ कहा हूं आँ जाओ। औऱ बाजी साइड मे होँ गईं। मे अंदर आँ गय़ा।।। औऱ रूम मे मौजूद एक् चेयर पे बैठ गय़ा।।। बाजी नें दरवाजा अंदरबंद नहि किया। औऱ बेड पे आँ केँ बैठगईं। बाजी जैसी हि हसीनथीं वैसा हि खूबसूरत बाजी नें अपनारूम सजाया हुआ थां औऱ सभीकुछ सलीके सें अपनी स्थान पड़ी हुईँ थि। बाजी अपनेबेड पे पड़ी पुस्तक उठाकर उसके पन्नों कों पलटने लगी औऱ मे बाजी कों देखने लगा।।। बहुतदेर कि चुप्पी केँ बाद बाजी नें पूछा बोलो केसे आँ नाँ हुआ?
एक् तौ मेरी बाजी थि हि बहोत खूबसूरत ऊपर सें मेरा पहला प्यार वो भि ऐसा प्यार कि दीवानगी कि सब सीमाओं कों पारकर बैठा थां उसके प्रेम मे।।। बाजी केँ इस प्रश्न कां जवाब देने कि कोई हिम्मत पैदा नहि हुइ मेरे अंदर।। मे चुप बैठा बाजी कि तरफ देखता हि रहा औऱ बाजी मेरे जवाब कां इंतजार करते करते मेरी हि तरफदेख रही थि।। हम् दोनों एक् दूसरे कों ऐसे देखते देखते धीरे-धीरे धीरे-धीरे हम् किसी औऱ हि दुनिया मे चलेगये।। बाजी अपना प्रश्न भूल गई औऱ अपना जवाब। हम् दोनों बेहन भइया एक् दूसरे कि आंखों मे आंखें डालपता नहि किस जहां मे खोगए।। कुछपता नहि उसरात हम् दोनों एक् दूसरे कों कितनी देरऐसे हि देखते रहे।।। औऱ पता नहि औऱ कितनी देरऐसे हि एक् दूसरे कों देखते रहतेअगर बाजी केँ हाथ मे पकड़ी वो पुस्तक गिरती नहि। पुस्तक केँ गिरते हि बाजी चौंकी औऱ बुक उठाने नीचे झुकी औऱ हमारा ये सिलसिला ऐसेअंत कों पहुंचा.
बाजी नें पुस्तक उठारखी औऱ कहा तुम् नें बताया नहि कि तुम् क्यूं आए थें? बाजी केँ लहजे मे थोड़ी घबराहट मे नरमी भि थि।।।
मे क्क़कुछ नहि वैसे हि आया थां। औऱ येकहकर मे उठा औऱ रूम सें बाहर् जानेलगा। बाजी सवालिया नजरों सें मुझे हि देखरही थि।।। रूम केँ गेट पे पहुँच कर मे अचानक पीछे कि तरफ पलटा औऱ बाजी केँ पास आँ केँ बाजी बालों कों अपने एक् हाथ मे प्रेम सें पकड़ा औऱ बाजी केँ होंठों कों अपने होंठों मे लें लिया।।। मेरे अचानक हमले सें बाजी केँ बदन कों एक् झटकालगा औऱ बाजी नें मुझे दोनों हाथों सें पीछे कि ओर धकेल दिया औऱ उठ खड़ी हौ गई।।। औऱ कहा: नहि सलमान अब नहि कभी नहि।। ऐसाअब ऐसा सोचना भि मत।। बाजी केँ स्वर मे हल्की सि कठोरता औऱ बहुत तकलीफ़ थि।।। बाजी नें कहा: सलमान यहपाप हैं।।।
पऱ बाजी केँ होठों कां स्पर्श मिलने कि देर थि।।। भावनाओं केँ तूफान अब मेरे अंदर चलना शुरुआत हौ चुके थें।।। औऱ अबइस तूफान कों रोकना असंभव हौ चुका थां। बाजी अपने दुपट्टे कों अपनेगले सें निकाल कर अपनेसर पे औऱ अपने सीने पे सही सें रख चुकी थि।।। मे फिन सें आगेहुआ औऱ बाजी केँ आगे खड़ा होकर बाजी कि गर्दन मे अपनाहाथ पीछे सें घुमा केँ बाजी कों अपनीओर किया औऱ किस करने कि कोशिश कि। पऱ बाजी नें फिन मुझे पीछे कि ओर धकेलने कि कोशिश कि पर्र अब मे पीछे नहि हौ सकता थां।। मे बाजी केँ होंठ अपने होंठों मे लेने कि कोशिश कररहा थां औऱ बाजी मुझसे अपने आप् कों छुड़ाने कि।।।। ऐसे करते करतेअब एक् तरह सें हम् दोनों बेहन भइया मे लड़ाई शुरुआत हौ चुकी थि। ऐसे करते करते अचानक मैंने बाजी कों रूम कि दीवार केँ संगजा केँ लगा दिया
मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) – New Episode
मेरा एक् हाथ पीछे सें बाजी कि गर्दन मे डलाहुआ थां औऱ दूसरे हाथ सें मैंने बाजी केँ बाल दुपट्टे केँ ऊपर सें हि पकड़लिए थें। अब बाजी पे मेरी पकड़ बहोत टाइट थि।।। मैंने अब अपने होंठ बाजी केँ होंठों पे रखे औऱ बाजी होंठों कों चूमना शुरुआत कर दिया।। बाजी नें हरतरह सें कोशिश कि कि वो मुझसे अपने आप् कों छुड़ा लें पर्र वो नाकाम रहीं। पऱ फिन भि उन्होंने अपनीये असफल कोशिश जारीरखी मे पागलों कि तरह बाजी केँ होठों कों चूमरहा थां औऱ अब तौ अपनी ज़ुबान भि मैंने बाजी होंठों केँ बीच मे डालनी शुरुआत कर दि थि। पूरीजीब बाजी केँ होंठों केँ बीच सें गुज़ारता हुआ बाजी केँ मुंह मे डालता।। औऱ मैने अपनीजीब कों बाजी कि जीब पे फेरता औऱ फिनऐसे हि करताहुआ वापस अपनीजीब बाजी केँ मुंह सें बाहर् निकाल लेता औऱ फिनइसी प्रक्रिया केँ संग हि फिन अंदरडाल देता।।।
मेरा पूरा जिस्म इस प्रक्रिया मे जैसे मस्ती केँ समुंदर मे गोतेखा रहा थां।।।। बहुतदेर ऐसा करने केँ बादअब मे फिन बाजी होंठ चूमने चूसने लगा। पर्र इसकेसंग हि कुछऐसा हुआ जिससे मेरारोम रोमझूम उठा।।।
बाजी नें अचानक मेरे होंठों कों अपने हसीन गुलाबी होठों सें पकड़ लिया। औऱ मेरे होठों कों चूम लिया।। मेरे सपनों कि देवी, मेरा जिंदगी, मेरा पहला प्रेम औऱ उसका मुझे पहला चुंबन।।। उस वक़्त मौत भि आँ जाती तौ कोईग़म नहि थां।।।। बाजी केँ ऐसे करने सें मेरी भावनाओं कि गर्मी कों जौ ठंडक मिलीइस सें मेरे प्रेम कि तीव्रता जैसेकई गुना औऱ बढ़ गई औऱ मे बाजी केँ होंठों कों प्रेम औऱ चाहत सें चूमने औऱ चूसने लगा।।। बाजी भि अब मेरे होंठों पे पलटकर मेरे चुम्बन कां जवाबदे रहीथीं पर्र उसकेसंग हि बाजी मुझे अपने हाथों सें पीछे भि करने कि कोशिश कररही थीं। जिससे येलगरहा थां कि जोँ हम् दोनों बेहन भइया केँ बीच होँ रहा हैं बाजी नहि चाहती थि कि ये होँ।।। मैंने फिन भि अपने हाथों औऱ होठों कि पकड़ कों ढीला नहि छोड़ा
ऐसे हि हम् दोनों बेहन भइयापता नहि कितनी देर एक् दूसरे कों चूमते रहे औऱ एक् दूसरे कि सांसों कि गर्मी कों एक् दूसरे मे उतारते रहे।।।।
किस करते करते मैंने अपने होंठ बाजी केँ होंठों सें उठाए औऱ बाजी केँ गालों कों चूमने लगा।। बाजी कां सफेद चेहरा इस प्रक्रिया सें गीला हौ चुका थां।।। बाजी केँ होठों सें होंठ उठाने कि देर थि कि बाजी नें हल्की सें चीख केँ संगकहा सलमान पीछेहटो, ऐसामत करो मेरेसंग, पर्र सलमान होश-ओ-हवा मे कहां थां जौ अपनी बाजी कि आवाज़ सुन पाता।। मैंने बाजी कि नाक माथाकान कों चूमा औऱ फिन अपने एक् हाथ जोँ बाजी कि गर्दन केँ आसपास थां उसे वहां सें उठाया औऱ बाजी केँ शोल्डर पे रख दिया। औऱ अपने होंठ बाजी कि गर्दन पे जमादिए। उसदिन मुझेपता चला कि गर्दन लड़की कां कितना संवेदनशील बिंदु हैं।। जैसे हि मैंने अपनी बाजी कि खूबसूरत नरम नाजुक औऱ सफेद गर्दन पे अपने होंठ जमाए।।। बाजी केँ मुँह सें एक् सिसकी निकली।।। औऱ बाजी केँ मुंह सें बेइख्तियार निकला सलमान नहि।।।।।।।।
बाजी कि यह सिसकी एक् औऱ हि तरह कां चमत्कार गई मेरे पर्र।। औऱ मे पागलवार अपनी बाजी कि गर्दन कों किस करनेलगा।।। औऱ बाजीपता नहि किस जहां मे खोई हुइ बसयही कहतीरही: सलमान नहि सलमान नहि सलमान क्याँ हैं ये सलमान
सारी दुनिया सोई हुईँ थि औऱ हम् दोनों बेहन भइया एक् दूसरे मे खोेये हुए थें।।। मे अब बाजी कि खूबसूरत गर्दन कों अपने होठों सें चूमरहा थां औऱ अपनीजीभ भि उस पऱ फेररहा थां। मे बाजी कि पूरी गर्दन पे जीब फिरता रहाऊपर सें नीचे तक, फिन नीचे सें ऊपर तक।।। औऱ संग हि जिस हिस्से पे ज़ुबान फेरता उस हिस्से कों चूमता भि। मेरीइस प्रक्रिया सें बाजी कि हालत बुरी सें बुरी होतीजा रही थि औऱ बाजी कि सिसकियों मे भि वृद्धि होतीजा रही थि औऱ बाजी नें आँखें बंदकर लीथीं। पऱ अब भि बाजी केँ नरम नाजुक हाथ मेरे सीने सें टकरारहे थें। इननरम नाजुक खाथों सें बाजी मुझे पीछे करने कि कोशिश भि साथसाथ कररही थीं।।।।।।।।
बाजी कि गर्दन कों ऐसे हि चूमते चाटते मे अब बाजी केँ शोल्डर पे पड़े अपनेहाथ सें बाजी केशोल्डर दबाने लगा।। मेरा प्रेम मेरी सपनों कि वहशहज़ादी मेरे सामने मेरे अधिकार मे थि, भलाये केसे होँ सकता थां कि मे उसकेबदन कि इंचइंच कों जीभर केँ प्रेम नं करता।।। अगर मे ऐसा नहीं करता तौ प्रेम मे बेमानी हौ जाती।।। मे तौ ऐसा दीवाना थां जोँ शायदयही एक् प्रेम कां उद्देश्य इस दुनिया मे लें केँ आया थां।।
मस्ती औऱ खुमार कि स्थिति औऱ जुनून कि हालत मे डूबेहुए, मेराहाथ बाजी केँ शोल्डर कों दबारहा थां वो अब धीरे-धीरे धीरे-धीरे नीचे कि ओरआया औऱ मैंने अपनेउस हाथ सें बाजी कां नरम, मोटा औऱ सख़्त खड़ा मम्मा शर्ट केँ ऊपर सें हि पकड़ लिया औऱ आहिस्ता प्रेम सें दबाने लगा।।। मेरी बाजी कां मम्मा आज मेरेहाथ मे थां, वो मम्मा जिसे मैंने आज तक छुपछुप कर देखा थां, वो मम्मा जिसेआज तक तस्वीर मे हि देखकर मैंने मुठ मारी थि, वो मम्मा जिसे छूना एक् ख्वाब जैसा लगता थां, जीहाँ वही मम्मा आज मेरेहाथ कि गिरफ़्त मे थां औऱ उस मम्मे कों मे दबारहा थां।।।। उसीदिन केँ अंदरमजे कि एक् नई दुनिया सें परिचित होँ चुका थां।
मे बाजी कि गर्दन कों वैसे हि चूमचाट रहा थां औऱ संग हि बाजी कां मम्मा भि दबारहा थां।।। बाजी किसी औऱ हि दुनिया मेंखोई हुई थि कि अचानक उनके जिस्म कों एक् झटकालगा औऱ संग हि बाजी नें मेराहाथ अपने बालों सें हटाया औऱ फिन दूसरा हाथ अपने मम्मे सें हटाया, फिन दोनों हाथो सें मुझे पूरी ताकत केँ संग पीछे कि ओर धक्का दिया औऱ कहा कि सलमान यह क्याँ बदतमीज़ी हैं? ऐसामत करो।।। पीछे हौ। येसभी पाप हैं, येगलत हैं सलमान पीछे होँ जाओ।।। बाजीऐसे हि कितना कुछबोल गई। औऱ बाजी केँ धक्के कारण लड़खड़ाते हुएकप कॉफ़ी कदम पीछे होँ गय़ा।।।।। बाजी केँ चेहरे पे सख्त नाराजगी थि।।।। औऱ बाजी कों खो देने केँ डर सें सिर झुकाए कमरे सें बाहर् चला गय़ा। वैसे भि हम् दोनों केँ बीच एक् अंजाना सां छुपे प्रेम कां सिलसिला चलरहा थां, जिसेअब कुछकह कर खराब नहि करना चाहता थां।।।।
मे अपनेरूम मे आकरबेड पे गिर गय़ा औऱ आज केँ उस हसीन वक़्त कि यादों मे खो गय़ा।।। औऱ उन यादों सें अपनी आत्मा कों सारॉबार करनेलगा।।। ये जोँ कुछ भि होँ रहा थां ख्वाब जैसा लगता थां।।।। बाजी कां यूं मुझेकिस करना, मेरा बाजी केँ बदन कों छूना बाजी केँ अपने होंठों कि गर्मी स्वयं मुझे देना।।
उस बेरहम कों मुझ पे थोडा रहम आँ चुका थां। पर्र बाजीजिस तरह कि लड़की थि उनकेलिए इतनासभी कुछकर लेना भि बहोत ज्यादा थां। एक् ऐसी लड़की जोँ हया औऱ सम्मान कों अपना सिंगार समझती थि।। आज उसने अपनी इज़्ज़त औऱ हया कों अपने छोटेभाई केँ प्रेम औऱ दीवानगी पे लूटाया थां।
सुभहजब मे उठा तोँ वहीरात वाली स्थिति मुझ पे अभि भि वैसे हि छाई हुइ थि।।। मे अब दीवानगी कि उस हालत मे पहुंच चुका थां कि मुझेअब जीवन हि एक् ख्वाब जैसी लगना शुरुआत होँ गई थि।।। शायद प्रेम इतनी मुश्किल केँ बाद पाने केँ कारणयह हाल थां मेरा।।।
पऱ अभि मेरे प्रिय नें मुझे वो विकल्प नहि दिया थां, जौ मे उस सें चाहता थां।।। मे चाहता थां कि वो भि मुझेऐसे हि दीवानों कि तरह प्रेम करे जैसे मे करता हूं।
मे उठा रेडीहुआ औऱ नीचे आँ गय़ा।।। नीचेसभी उपस्थित थें औऱ अम्मी ब्रेकफास्ट लगारही थि।।। नाश्ते केँ दौरान बाजी नें मुझे बिल्कुल नहि देखा।। बाजी कों हिम्मत करके मैंने कहा कि बाजी ब्रैड देनाइधर बाजी नें बिनाकोई उत्तर दिए चुपचाप ब्रैड ऐसेपास कि कि उनके चेहरे औऱ एक्सपरेशनज़ सें मुझे अंदाजा हौ गय़ा कि वो मुझसे सख्त नाराज हें।। अजीब हि प्यार किस्सा थि मेरी। एक् समयऐसा लगता थां कि महबूब पे मेराबस मेरा हि अधिकार हैं औऱ दूसरे लम्हा ऐसा लगता थां कि मेरे महबूब नें तौ आज तक मुझे बिल्कुल चाहा हि नहि।।।।। नाश्ते केँ बाद मुझे अम्मी नें कहा: बेटा साम कों बाजार चलना हैं, कुछ खरीदारी करनी हैं।।। मे ओकेकह केँ अपनेरूम मे आँ गय़ा।।। दिन गुजरा औऱ सामआई।।। मे अम्मी औऱ बाजी कों लेकर बाजार मे चला गय़ा।। बाजी केँ चेहरे पे अब भि वही नाराजगी थि। जिसे सिर्फ मे देख सकता थां।।। हम् दोनों बेहन भइया कि तोँ कोई औऱ हि दुनिया हैं, इस दुनिया कि भाषा कों केवल हम् दोनों हि समझ सकते थें।।। इस लोगों सें भरी दुनिया वाले तौ हमें बेहन भइया हि समझते। बाजी कि ये नाराजगी मुझे अंदर हि अंदरखाए जारही थि।।। मेरामन कररहा थां कि बाजी कों गलेलगा लूँ औऱ उन्हें रोरो केँ मनालूँ।।। पऱ मजबूर मरता क्याँ नं करता।।। चुप हि रहा।।
मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) - Kahani ab aur interesting hogi
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