मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) – New Episode
ऐसे हि एक् दिन मे अपने कमरे मे रात केँ वक्तमरा पड़ा थां, औऱ रात 12। 30 टाइम थां कि मेरेसेल पे साना कि कॉलआई आई, मैंने फोन अटेंड तौ आगे सें साना कि आवाज़ आई: साथीयार नाँ रहा प्रेम प्रेम नं रहा।।।
मैंने मुश्किल सें हंसते हुएकहा खैरियत हैं न् सरकार आजफिन पुराने गाने?
साना नें कहा: हुजूर अब क्याँ यह सितम जौ हम् पे हौ चुका, अब यहीकुछ गुनाहे नहि।। "
" साना तूनेमार खानी हैं याँ सीधे सीधे बताना हैं कि क्याँ हुआ?
साना नें अब थोड़ी सि नाराजगी सें कहा: सलमान साहबआज किसी कां बर्थडे औऱ किसी नें विश नहि किया।।।।
आज साना कां बर्थडे थां औऱ हमेशा सेपहले मे हि उसेविश किया करता थां, सभी दोस्तों सेपहले।।। पर्र अब मे उसे क्याँ बताता कि मराहुआ आदमी किसी कों विश केसेकर सकता हैं।। फिन भि दिल सें दोस्ती कि थि उससे, औऱ निभानी भि थि।।
मे जबर्जस्ति गुनगुनाते हुएकहा "" "हैप्पी बर्थडे टूयू, हैप्पी बर्थडे टूयू, हैप्पी बर्थडे डीयर साना, हैप्पी बर्थडे टूयू"
"साना कि प्यारी सि हँसी कि आवाज़ मेरे कानों मे पड़ी।। " "थॅंक्स सरकार थैंक्स, सलमान कितने सालों सें तुम् मुझेविश करते आँ रहे हौ आज पहलीबार गलती कि हैं इसलिये क्षमा "
" मैंने कहा: अगलीबार ऐसा नहि होगा सरकार "
" ओर औऱ सुनाओ क्याँ हौ रहा "
"मैंने जवाब दिया:""कुछ खास नहि" ""
"अच्छा एक् योजना हैं मेरेपास"
"मैंने पूछा: क्याँ।। "
"कहींशहर सें बाहर् किसी स्थान चलते हें वहा मेरी बर्थडे सेलीबरेट करेंगे "
" मे नं चाहते हुए भि हामीभर ली औऱ कहा:सभी फ्रेंड्स कों भि बता दिया हैं।। "
" नहि नहि केवल तुम् औऱ मे होंगे मेरी बर्थडे केँ संगसंग हम् दोनों हमारी फ्रेंडशिप भि बर्थडे भि एक् संग सेलीबरेट कर लेंगे "
" नं चाहते हुए भि साना कि बात सें मेरे होठों पे मुस्कान आँ गई, बात हि इतनी प्यारी बोलदी थि साना नें लड़कियाँ जितनी मीचोर होती हें उतनी हि संवेदनशील भि होती हें।।। मैंने पूछा: तोँ बाकी फ्रेंड्स कहां छोड़ेंगे तुम्हें।।
साना बोलि: उन्हें मैंने संभाल लिया हैं, कि अभि कुछ प्राब्लम हैं, जब कॉलेज शुरुआत होगा तौ वहीं पे ट्रीट दे दूंगी।।
हम् नें एक् स्थान डेसाईड कि औऱ ये प्लान बना कि साना कों उसकेघऱ सें उठाई करूंगा औऱ फिन हम् वहा जाएंगे।।। फिनबाय बोलकर कॉलआई एंड हुईँ।।
निर्धारित वक़्त पे साना केँ घऱ पहुँचा औऱ उसे बाहर् आने कां कहा।। थोड़ी हि देर मे वो अपनेघऱ केँ गेट केँ सामने आई औऱ मेरी गाड़ी कि ओर बढ़ी।। साना नें आज न्यू फैशन केँ अनुसार एक् खूबसूरत सां रेडएंड व्हाइट कलर कां ड्रेस पहनाहुआ थां (लाल कमीज औऱ सफेद सलवार)।।। बड़ी-बड़ी आकर्षक आँखें, सफेदरंग, गुलाबी पतले-पतले सें होंठ औऱ स्मार्ट सि मध्यम ऊंचाई कि थि साना।। साना कां खूबसूरती देखने वाले कि आंखों कों अपनीजकड़न मे लिए बिना नहि छोड़ता थां औऱ मे तोँ थां हि इसी हुश्न नाम कि चीज़ कां बीमार, भला केसे प्रभावित नं होता।।।
साना गाड़ी मे आकरबैठ गई औऱ जैसे मेरादिल दिमाग़ फिन ताज़ा होँ गय़ा साना केँ परफ्यूम कि खुश्बू लेकर। इस इत्र कि खुशबू मेरी गाड़ी मे जैसे जिंदगी कां एहसास लेकरआई।। हायराम हेलो केँ बाद मैंने गाड़ी आगे बढ़ा दि।। औऱ यों हि हल्की फुल्की गपशप चलतीरही औऱ फिन हम् शहर सें बाहर् बने एक् पार्क मे पहुंचे।।। पार्क मे वाहन एंट्री करकेकोई स्थान देखने लगा जहां किसी पेड़ कि छाया मे गाड़ी पार्क करूँ बहुतखोज केँ बादकुछ पेड़ों केँ बीच एक् स्थान मिली औऱ मैंने वहीं गाड़ी पार्क कि "
" हाँ तोँ हुजूर पहुँच गए आपकी ख़्वाहिश केँ अनुसार यहा, अब बताओ क्याँ करना हैं बाहर् बेंच हें वहाबैठ जाएँ याँ यहा हि वाहन मे बैठे रहें "
" साना मुस्कुराई औऱ कहा: यहीं बैठते हें, पर्र एक् सीट पे।।
मैंने कहा:ओ केँ हुजूर
एसी कि वजह सें वाहन कों स्टार्ट हि रखाबैक सीट पे साना बैठी औऱ मे अपनी ड्राइविंग सीट कि एक् सीट पे बैठ गय़ा। एक् सीट पे बैठ केँ हमने वाहन कि फ्रंट सीट कों आगेकर दिया, ताकि हम् ईजी हौ केँ बैठ सकें।। हम् दोनों हि थोडा एक् दूसरे कि ओर मुड़कर बैठगए।।
ये पार्क शहर सें बहुतडोर थां औऱ बहोत बड़े क्षेत्रफल मे फैला थां।। औऱ यहांलोग इतने ज़्यादा नहि आते थें।। बहोत शांत माहौल थां इस पार्क कां।। मे औऱ सानायहा वहा कि बातें करतेरहे।। फिन मैंने वो केक कां डिब्बा खोला जोँ साना केँ लिए लें केँ आया थां। सानाजब केक काटने लगी तोँ मुस्कुरा केँ बोलि: दोनों मिल केँ काटेंगे नां, वो फ्रेंडशिप कां भि तौ बर्थडे हैं नाँ।।। मे मुस्कुरा दिया औऱ साना केँ नरम नाजुक औऱ चकमता दमकता हाथथाम लिया औऱ हमने मिलकर केक काटा।।। औऱ मिलकर हैप्पी बर्थडे टूयू भि गुनगुनाया फिनवही मुस्कान, वही शरारत।। मैंने केक कां एक् टुकड़ा काटा औऱ साना कों खिलाया औऱ फिन साना नें मुझेऐसे हि खिलाया
इसी हँसी मज़ाक मे जैसे मे कुछ लम्हा केँ लिए अपना वो दर्दभूल गय़ा थां।। जैसे हि उस दर्द कां अहसास फिन सें हुआ तोँ अचानक चुप होँ गय़ा।।
साना नें कहा: क्याँ बात हैं सलमान ऐसे अचानक चुप क्यूं हौ गये।।
मैंने साना कि ओर देखते हुएकहा, कुछ नहीं वैसे हि।। "
" नहि सलमान तुम् ऐसे नहि थें दोस्त, हर टाइम हंसते रहते थें, अब तौ अगर स्वयं हसते हौ तोँ ऐसा लगता हैं जैसे एहसान कररहे हौ, हर वक़्त खोएखोए रहते होँ, कुछ तोँ हैं मित्र? ?
साना नें जौ भि कहा थां वो सच थां, साना कि बातें सुन केँ बाद मे मुझे अपनेहाल पे तरस आँ गय़ा औऱ फिन वोँ हुआ जौ आज सें पहले मे नें बाजी केँ अलावा किसी केँ सामने नहि किया थां।। मे रो पड़ा, एक् हाथ मेरी दोनों आँखों पे औऱ बच्चों कि तरह रोना शुरुआत हौ गय़ा।।
साना घबरा गई, उसे तोँ बिल्कुल मेरे सें इसबात कि उम्मीद नहि थि। साना मुझेचुप कराने लगी "" सलमान सलमान, ये क्याँ? इधर देखो, सलमान "" साना नें अपना एक् हाथ मेरे शोल्डर पे रखा थां औऱ मुझे शोल्डर दबादबा केँ झींझोड़ रही थि।।। साना कि बातों सें मेरे अंदर एक् तूफान सां आँ गय़ा थां, इस तूफान कां हंगामा इतना थां कि मुझेकुछ औऱ सुनाई नहि देरहा रहा थां
शाना केँ शब्द सुनाई देते हि मैंने अपनाहाथ अपनी आँखों सें हटा दिया औऱ अपनी शर्ट सें हि अपने आंसूसाफ करने कि नाकाम कोशिश कि औऱ साना देखा जोँ मेरे शोल्डर पे हाथरखे मुझे परेशान नज़रों सें देखरही थि।। मैंने एक् हाथआगे बढ़ाया औऱ साना केँ सिर कों एक् साइड सें बालों सें पकड़ा औऱ साना कों अपनीओर खेंचा औऱ उसके गुलाबी पतले हसीन होठों कों अपने होठों मे लें लिया औऱ साना कों किस करनेलगा।।। साना कों ख्वाब मे भि यह लगता नहि थां कि मे ये हरकत भि कर सकता हूं।। वो तौ शायद अपने प्रेम कां मातममना भि होँ चुकी थि।। साना नें दूसरा हाथ भि मेरे अन्य शोल्डर पे रखा औऱ मुझे पीछे कि ओर धकेलने कि कोशिश कि।। पर्र मैंने अपनेहाथ मे जकड़े साना केँ बालों पऱ अपनी गिरफ़्त इतनी मजबूत करली कि अब मुझे पीछे हटाना करीब-करीब असंभव हौ चुका थां।।।।।
साना कों इस अचानक हमले केँ शॉक नें बहुतदेर अपनी चपेट मे रखा, पऱ फिन थोड़ी देर बीतने केँ बाद उसने मुझे पीछे धकेलने कि कोशिश रोकदी।।। अब साना केँ हाथ मेरे शोल्डर केँ दूसरी ओर बेजान सें झूलरहे थें।। साना किसी औऱ हि दुनिया मे खो गई थि औऱ जौ हौ रहा थां शायदउसे गहराई सें फीलकर रही थि।। मैंने अपने एक् हाथ कि हथेली साना केँ गाल पे रखी औऱ अपने अंगूठे कों साना केँ रसीले गाल पे फेरने लगा।। मे सातवें आसमान पर्र थां, उसके उरोज मेरे सीने सें भींचे हुये थें, मे उसके होंठों कों चूसचूस कर सुखारहा थां
अब साना नें भि धीरे-धीरे धीरे-धीरे मेरेकिस कां जवाब देना शुरुआत कर दिया। उसने अपनेनरम गुलाबी होठों सें मेरे होठों कों लेकर बहोत हि सहजता सें दबाना औऱ फिन बहोत हि धीरे-धीरे चूसना शुरुआत कर दिया। जन्मो जन्मों कां प्रेम थां साना कि किस मे। मे भि ऐसे हि साना केँ होंठ चूमे, चूसेजा रहा थां।। साना केँ होंठों कों चूमते चूमते अब मैंने उसके होंठों पे अपनी ज़ुबान कों भि फेरना शुरुआत कर दिया औऱ साना केँ होंठों सेरगड़ते औऱ अपनी ज़ुबान कों स्लिप करते करते मैंने साना केँ मुंह मे भि डालना शुरुआत कर दिया औऱ फिन अंदरडाल कर बाहर् निकाल लेना औऱ फिन वैसे हि आहिस्ता अंदरडाल देना।।।
साना नें अपने दोनों हाथऊपर कि ओरकिए औऱ दोनों हाथों कि उंगलियां मेरेसिर केँ बालों मे डाल दि औऱ बहोत प्रेम सें मेरे बालों मे घुमाने लगी। वो अपनी आँखें बंदकिए हुएउस प्रेम केँ दायरे मे गुम थि। साना नें अपने मुँह मे औऱ होठों पे मेरीजीभ महसूस करली थि, वो अब भि वैसे हि मेरे मुंह मे अपनी ज़ुबान डालना औऱ निकाल लेना शुरुआत हौ गई।। इन क्षणों मे एक् खुशबू सि मेरे अंदर उतरती जारही थि।। वो मुझे अपने प्यारे प्यारे होठों सें चूमरही थि कि मैंने अपने होंठ उसके होंठों पऱ सें हटाए, मेरेजिस हाथ मे उसकागाल थां वोँ हाथ मेंने उसके शोल्डर पे रखा औऱ उसके गालों पे अपने होंठरख दिए औऱ उसकेगाल चूमने लगा, उसकेनरम नरम गालों पे होंठरखे तोँ होंठों कों अपनेगाल केँ अंदर दबताहुआ महसूस किया।। कितनी हि देर अपने होंठों केँ संगउसे उसके खूबसूरत गालों सें खेलता रहा
उसके गालों सें खेलते हुएअब मैंने अपने होंठ उसके माथे औऱ नाक पऱ रखे औऱ चूमा, फिन मैंने उसकी हसीन आँखों पे अपने होंठरखे, मेरे होंठ रखते हि साना कि आंखों मे हल्की सि अशांति पैदा हुइ।। मैंने उसकी आँखों कों बहुतदेर चूमा औऱ फिन साना केँ कानों कों चूमते चूमते अपने होंठ साना कि गर्दन पे लें गय़ा। औऱ अपना वो हाथ जिससे साना केँ बालों कों पकड़रखा थां उसे साना केँ शोल्डर पे रख दिया। मेरे होंठ जैसे हि साना कि गर्दन टचहुए साना केँ मुंह सें एक् सिसकी निकली औऱ साना केँ दोनों हाथ जौ मेरेसिर पे थें, साना नें अपने हाथों सें मेरेसिर कों आगे कि ओर दबाया, अहह साना केँ बदन कि खुशबू मेरेदिल दिमाग़ कों ताज़ा कररही थि।। मे साना कि नरम रसीले गर्दन चूमेजा रहा थां औऱ मेरी सांसें भि साना कि गर्दन सें टकरारही थि, जिससे साना कि सिसकियाँ औऱ खुशी मे डूबीअहह अहह मे वृद्धि होतीजा रही थि साना केँ हाथों कां दबाव मेरेसिर पे बढ़ता हि जारहा थां।।।
ऐसा लगनेलगा थां कि वो अपने आप् मे नहि हैं औऱ वोँ कहीं बहोत दूर निकल गई हैं, साना केँ बदन कि खुशबू सें महकता महकता उसकी खूबसूरत औऱ कोमल गर्दन कों चूमेजा रहा थां कि धीरे-धीरे धीरे-धीरे मेरा राइटहाथ इसके शोल्डर सें नीचे कि तरफ हौ गय़ा। औऱ फिन एक् नरमनरम सि चीज सें जा टकराया। उसनरम चीज सें टकराते हि मैंने उसनरम औऱ मोटी चीज़ कों अपनेहाथ मे लेँ लिया।। अहहये नरम औऱ मोटी चीज़ साना कां राइट वाला मम्मा थां। हाँ मेरी बेस्ट फ्रेंड साना कां मम्मा।। साना कां मम्मा शर्ट केँ ऊपर सें पहलीबार मैंने तब ध्यान लगाकर देखा थां जब साना मुझे बाजार मे मिली थि।।। साना कां मम्मा जितना शर्ट केँ ऊपर सें देखने मे शानदार लगा थां, उतना हि शानदार अपनेहाथ मे पकड़कर लगा।। साना कां मम्मा बहुत मोटा औऱ नरम थां उसकी हमउम्र लड़कियों सें शायद साना कां मम्मा ज़्यादा मोटा थां।।। उसने थोडा विरोध दिखाया पर्र जब मैने उसके स्तनों औऱ निप्पलों कों मसला उसने विरोध छोड़ दिया औऱ आनन्द लेनेलगी। मे साना कि गर्दन कों वैसे हि चूमेजा रहा थां औऱ संग हि शर्ट केँ ऊपर सें साना कां मम्मा भि दबारहा थां।।
सानाअब तक उसीतरह पता नहि किसी औऱ हि दुनिया मेंखोई हुई थि औऱ शायद वो उसी स्थिति मे थि जिस स्थिति मे कभी किसी केँ संगहुआ करता थां।। मे साना केँ बूब कों धीरे-धीरे दबाएजा रहा थां औऱ अपना अंगूठा भि शर्ट केँ ऊपर सें हि उसकेबॉब केँ निपल पऱ फेररहा थां कि साना जैसेउस नशे, मस्ती, मजा औऱ दीवानगी सें भरपूर दुनिया सें वापस आँ गई।।।
औऱ फिन साना नें दोनों हाथ मेरे शोल्डर्स पे रख मुझे पीछे कि ओर किया औऱ कहा: नहि: औऱ संग हि मेराहाथ अपनेबूब सें पीछेकर दिया।। उत्तेजना मे उसका गोरा चेहरा काम भावनाओं कि वजह सें गुलाबी गुलाबी हौ चुका थां, बाल बिखरे पड़े थें, साना नें अपनी स्थिति सही कि औऱ गाड़ी सें बाहर् निकल गई औऱ सामने सीट पे जा केँ बैठ गई औऱ मुझेकहा: डेटिंग ख़तम, देर हौ गई।।
साना केँ चेहरे पे प्रेम मे जीत कि खुशी, पर्र प्रेम मे हद सें आगे निकल जाने कि वजह सें डर प्रमुख थां।।।
सारे रास्ते हम् दोनों नें आपस मे कोईबात नहि कि।।। बातअब दोस्ती केँ रिश्ते सें बहोत आगेजा चुकी थि।।। साना जैसी हसीन लड़की केँ संग जौ समय मैंने बिताए थें, उन पलों कि एक् बात तौ सच थि कि मुझेइन पलों मे जिस्म कि खुशियां मिलीं बदन कों महका देने वाली खुशियां पर्र मेरे अंदर मौजूद मेरी आत्मा, मेरी आत्मा तोँ बहोत बेचैन थि, बहोत परेशान थि।। इसीतरह जब मे अपनी बाजी केँ संग करता थां तोँ मेरा जिस्म औऱ आत्मा दोनों समर्पित होँ जाते थें। नं मेराबदन तब मुझेकोई शिकायत करता थां न् मेरी आत्मा।। आजबदन तोँ खुश हौ गय़ा, पऱ आत्मा, आत्मा तोँ जैसे प्यास कररह गई थि
मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) – New Episode
एक् समय मे औऱ दूसरे लम्हा मे क्याँ होँ ये जिंदगी, किसी कों पता हैं।।। मेरी आत्मा केँ संग जौ हादसा हुआ, इस दुर्घटना सें मुझेये एहसास तीव्रता सें होनेलगा कि मैंने साना कों अपनादिल बहलाने केँ लिए इस्तेमाल किया हैं।। मैंने आज तक एक् हि सें प्यार किया थां औऱ वो मेरी बाजी थि।।।। बाजीजब मेरे होठों कों चूमती थि तौ ऐसे लगता थां कि मेरेबदन सें प्राण निकलने वाले हैं औऱ जब साना नें मेरे होठों कों चूमा तौ जाने क्यूं वो बात नहि थि साना कि किस मे।। साना केँ संग वोँ आराम वो नशा न् आने केँ कारण मेरी आत्मा नें मुझेबता दि थि।।
बदन सें जिस्म केँ मिलन कां नाम प्रेम नहि। जब जिस्म औऱ आत्मा दोनों कां मिलन अपने प्रेमी केँ बदन औऱ आत्मा सें होता हैं, तब प्यार कि पूर्ति होती हैं। ऐसा मिलन मेरा एक् हि शख्स केँ संग होता थां औऱ वो थि मेरी बाजी। साना कां उपयोग तौ कर बैठा थां पऱ अब मे अजीब हि तकलीफ़ मे फंस गय़ा थां।। सानाये समझना शुरुआत हौ गई थि कि मे उससे प्रेम करनेलगा हूं।। अबअगर साना कों कहता कि मे उससे प्रेम नहि करता तौ वो मुझसे ये पूछती कि फिन मैंने उसके जिस्म कों किस अधिकार सें छुआ हैं? याँ फिनउसे ऐसी वैसी लड़की समझता हूं कि मैंने उसकेसंग यहसभी कुछ किया? ?।।।।। अगर साना कि स्थान कोई औऱ लड़की होती तौ मे उसेकह भि देता कि मुझसे गलती हौ गई पर्र साना कों येबात कहने कि मुझ मे हिम्मत नं थि।।।।
दिल केँ करीबी रिश्ते भि अजीब होते हें, व्यक्ति कभीकभी उनसेसच नहि कह सकता, वो सच जोँ वो किसी औऱ केँ मुंह पे आसानी सें कह सकता हैं।।। पहले हि बाजी कां प्रेम इतना निढाल कररखा थां ऊपर सें अब साना केँ संगकिए गए दुर्व्यवहार नें मुझे जैसेकाट रखा थां।।। दिन तकलीफ़ केँ संग गुजररहे थें कि एक् दिन मे सुभह केँ वक्त नीचे गय़ा तोँ अम्मी किसी सें मोबाइल पे बहुतहंस हंस केँ बातकर रही थि।। फिन थोड़ी देरबाद अम्मी नें जबकॉल आई डिस्कनेक्ट कि तौ अम्मी स्वयं हि बताने लगी कि: साना कि अम्मी कि फोनआई थि, उसकी बड़ी बेटी हुमा कि विवाह हैं औऱ वो हम् सभी कों इनवाइट कररही हैं विवाह पे, कार्ड कि भि कहरही थि कि आज भिजवाएँगी पऱ विशेष कॉलआई भि कि कि जरूर आँ नां हैं।। हुमा बाजी कि विवाह कां साना मुझे बहुतदिन पहले हि मोबाइल पे बता चुकी थि।।।
फिनकुछ दिनबाद हुमा बाजी कि मेंहदी वालादिन भि आँ गय़ा।। मे सजधजकर हौ केँ नीचेआया तौ मेरा ध्यान बाजी पर्र ठहर चुका थां।।।। मेरे महबूब पे तौ आजनजर नहि ठहररही थि।।।। वैसे मेरा माझी थां हि कुछअलग हि तरह कां।। उस जैसा तोँ इस धरती पे कोई नहि भेजा गय़ा थां नां।।।। पीलेरंग कां ड्रेस उनके सफेदरंग पे जॅंचरहा थां जैसे पीलारंग बनाया हि मेरे महबूब केँ लिए गय़ा हैं।। वो जन्नत कि हूर जोँ अपनेइस दीवाने कों एक् नज़र भि नहि देखरही थि।।।
अबू बोले: आप् लोग औऱ मेरीओर सें रफ़ीक साहब सें माफी लेना औऱ तबीयत कां कह देना।।। अबू वैसे भि विवाह वग़ैरह मे अधिक नहि जाते थें सिर्फ़ करीबी रिश्तेदारों कि शादियों केँ अलावा। हम् लोग साना केँ घऱ पहुँचे तोँ साना जैसे हमारी हि राहदेख रही थि। वो अम्मी औऱ बाजी सें बहोत प्रेम सें मिली औऱ फिन मुझसे भि हायरे हेलो कि औऱ फिन हमें अपने परिवार सें मिलवाने लें गयीँ,। उसके घरवालों कां सभी मुझे पहले सें हि पता थां, अम्मी औऱ बाजी पहलीबार हि साना कि बाजीअबू औऱ बाकी लोगों सें भि मिलरही थि। मे उनसब सें अरे हेलोकर पीछे खड़े अपनीएज केँ मित्र लड़कों सें जा केँ गपशप करना शुरुआत हौ गय़ा। घऱ बहुत बड़ा होने कि वजह सें उन्होने अपनेघऱ मे हि विवाह कां अरेंजमेंट कियाहुआ थां।। हल्की आवाज़ मे रीमिक्स इंडियन सॉंग्स लगेहुए थें। जिसतरफ नज़र जाती थि लड़कियां रंग बिरंगे कपड़ों मे सजधजकर नजर आँ रहीथीं औऱ सबने एक् दूसरे केँ कानों मे मुंह घुसाए हुए थें औऱ बातों मे व्यस्त थीं। लड़के कम हि थें, शायद मेंहदी कां समारोह होता हि लड़कियों केँ लिए हैं इसलिये, याँ शायदये लड़की वालों कां घऱ थां इसलिये।।।। दिल मे हि आराम न् होँ तोँ सभीकुछ जैसे खाने कों दौड़ता हैं।।। जितने लोग भि वहां मौजूद थें सभीखुश थें सिवाय मेरे।।।
बहुतदेर बीतने केँ बाद साना मेरेपास आई औऱ मुझेकहा कि सलमान एक् मिनटबात सुनो।। मे उसकेपास गय़ा तोँ उसने मुझे अपने पीछेआने कों कहा। फिन वो मुझे अपनेघऱ कि एक् साइड मे लें आई। साना कां घऱ बहुत बड़ा थां घऱ केँ चारों ओर हि वैसा हि ग्रीन एरिया थां।। वहा पहुँच कर मैंने साना सें पूछा कि वोँ मुझेयहा क्यूं लाई हैं तौ उसनेकहा कि सॉरी सलमान मे तुम्हें टाइम नहि देसकी आज।। मे बोलाकोई बात नहि मे समझ सकता हूं कि तुम् बिजी होँ। "
" यहा इसलिये लाई कि सोचाकुछ देर तसल्ली सें बातकर लें "
" ऐसे हि बातें करते करते धीरे-धीरे धीरे-धीरे मे साना कि आँखों मे खोना शुरुआत होँ गय़ा। मे तौ वो शख्स थां जिससे उसके प्रेम नें सभीकुछ छीन लिया थां औऱ मुझे एक् चलती फिरती लाशबना दिया थां। शायद इसीलिए मे साना कि आँखों मे खो सां गय़ा थां। हां मे मानता हूं कि शायदइस वक़्त अपने प्रेम मे खोने केँ कुछ लम्हा अपनीइस चलती फिरती लाश कों सकून देना चाहता थां।।।।।।।
खोने कि देर थि कि पता हि नहि चलाकब मेरे होंठ साना केँ होंठों सें टकराए औऱ हम् दोनों नें हि अपनी आँखें बंदकर लीं औऱ फिनहोश तबआया जब एक् आवाज़ मेरे कानों सें टकराई "सलमान" "
मुझेऐसे लगा जैसेअब मे कभी आँखें खोल नहि पाऊंगा। मे जहां थां वहीं पर्र जम सां गय़ा।। साना नें मुझे पीछे सें धक्का दिया।। मे आधामृत हालत मे पीछे कि ओर देखा औऱ वहा मेरी बाजी खड़ी थि।।।। बाजी केँ चेहरे पे क्रोध थां, दुख थां, उतावलापन थि, घाव थें, येसभी मेरी आँखों नें देखने कि बहोत कोशिश कि परदिखाई कुछ न् दिया, क्योंकि मेरी आंखों केँ सामने अंधेरा सां होँ गय़ा थां।।। बाजी नें कहा कि अम्मी बुलारही हें, घऱ चलना हैं।।
कुछसमझ नहि आया कि घऱ तक केसे वाहन लेकरआया।।। घऱ मे घुसते हि मे अपनेरूम मे आँ गय़ा औऱ बेड पे गिर गय़ा औऱ बेड केँ फोम मे मुंह घुसा दिया।।। मे इस वक्तकिन विचारों मे किन सोचों मे थां, इसबात कां पता मुझे भि नहि थां।। थोड़ी देर भि नहि गुज़री थि कि मेरेरूम काडोर किसी नें ओपन किया।। फिरभी ऐसा तोँ कभी नहि हुआ थां, अगर किसी कों भि आनां होता थां तौ पहले मेरेडोर पर्र नोक करता थां।।
मैंने बहोत हिम्मत करके अपनी आँखें खोली तौ सामने वहीहूर यानी कि मेरी बाजी पीले ड्रेस मे खड़ी थि।। लगरहा थां कि वो अपने कमरे मे नहि गईं औऱ सीधा मेरेरूम मे हि आँ गई हें।।। बाजी नें रूम केँ दरवाजे कों अंदर सें बंदकर दिया थां औऱ मेरीओर देखरही थीं।।। मे हिम्मत करकेउठ करबैठ गय़ा बेड पे।।। बाजी कां चेहरा गुस्से सें लाल होँ चुका थां औऱ बाजी इतनी ज़्यादा नाराज थि कि वो गुस्से सें कांपरही थीं।। मेरीसोच तोँ पहले सें हि मेरासंग छोड़ चुकी थि मे खाली आँखों सें बाजी कि ओरदेख रहा थां कि दिदी आगे बढ़ी औऱ मेरे मुंह पे एक् थप्पड़ दे मारा औऱ संग हि उसकी प्यारी हसीन आँखों सें आँसू गिरना शुरुआत होँ गए। बाजी नें एक् केँ बाद एक् थप्पड़ मेरे मुंह पे मारने शुरुआत करदिए औऱ एक् हि शब्द उनके मुंह सें निकलना शुरुआत हौ गय़ा "क्यूं" क्यूं "क्यूं"।।
बाजी केँ ठप्पाड़ों सें जैसे मे होश कि दुनिया मे वापस आँ गय़ा। मुझ मे हिम्मत नहि हुइ कि मे उनकाहाथ पकड़कर उन्हें रोक सकूँ।।। इतने मे दिदी नें पास हि साइड टेबल पे पड़ी मेरी एक् पुस्तक उठाली औऱ वो मेरे मेरेसर पे मारना शुरुआत कर दिया औऱ संग हि कहनेलगी "" क्यूं तुमने ऐसा "क्यूं सलमान" "मेरेसंग ऐसा क्यूं किया तुम् नें बताओ मुझे ""
मे अचानक उठा औऱ अपने एक् हाथ सें बाजी कां हाथ पकड़ लिया औऱ दूसरे हाथ कों बाजी केशोल्डर बैक सें घुमा केँ उन काशोल्डर पकड़ लिया औऱ उन्हें ऐसे हि पकड़े हुए अपनेबेड पे बैठा दिया औऱ स्वयं भि उनकेसंग बैठ गय़ा।। फिन मैंने अपनेहाथ कों जोँ बाजी केशोल्डर पे थां, उसे बाजी केँ सिर पे रखा औऱ उनकासिर अपने सीने सें लगा लिया औऱ अपना चेहरा बाजी केँ सिर पे रख दिया।।।। बाजी वैसे हि रोएजा रही थि। धीरे-धीरे धीरे-धीरे मेरी भि आँखों सें आंसू निकलना शुरुआत होँ गये। जिसदिन प्रेम इंसान केँ दिल मे बसता हैं शायदउसी दिन सें रोना उसके क़िस्मत मे लिख दिया जाता हैं।।।
बाजी केँ आँसुओं नें मेरी शर्ट कों भिगोकर रख दिया औऱ मेरे आंसुओं नें बाजी कां सिर।।। उस मैनेदिन यहबात जानी कि महिला सभीकुछ सहनकर सकती हैं, स्त्री अपनासभी कुछ कुर्बान कर सकती हैं, पर्र जिसे वोँ प्रेम करेउसे किसी औऱ केँ संगकभी साझा नहि कर सकती। इस मामले मे पुरुष अलग होँ सकता हैं। महिला सारी दुनिया कों आगलगा केँ रखदे पर्र अपने प्रेम कों कभी किसी औऱ केँ संग नहि देख सकती.
ऐसे हि रोतेहुए मैंने बाजी कों कहा कि बाजी मेरा साना केँ संगकोई नाता नहि हैं मे बस आप् सें प्रेम करता हूं बस आप् सें।।
।। बाजी जैसे मेरीइसी बात कां प्रतीक्षा कररही थि उनके रोने मे कुछ इज़ाफा हौ गय़ा औऱ उन्होंने कहा कि झूठमत कहो मैंने अपनी आँखों सें तुम्हें उस केँ संग घटिया हरकत करते देखा हैं, मे कोई बच्ची नहि हूं कि तुम्हारी इसबात पे यकीनकर लूंगी, पीछे हौ मुझे जानेदो, तुम् एक् घटिया औऱ धोकेबाज़ हौ, घृणा होँ गई हैं आज मुझे तुम् सें। यह कहतेहुए बाजी नें मुझे पीछे करने कि कोशिश कि पऱ मैंने उन्हें उठने नहि दिया औऱ उन्हें अपनेसंग जाकड़ केँ रखा।।। मे अजीब मुसीबत मे थां। उन्हें अपने प्रेम कां यकीन दिलाता भि तौ केसे? ? ?
मेरीवजह सें मेरीये नाजुक सि इश्क, मेरा प्रेम, मेरेदिल कि राहतरोए जारही थि।। मैंने अपने आप् कों बहोत कोसा "
" बाजी मेरीबात तौ सुनो मे साना सें प्रेम नहि करता वो मुझसे प्रेम करती हैं, उस वक्त जोँ भि हुआ मुझेसमझ नहि आया, उसने मेरेसंग ज़बरदस्ती कि, जौ आपने देखा।।।। मैंने अंत मे झूठबोल दिया औऱ झूठ बोलकर प्रेम कां पहला सिद्धांत हि तोड़ दिया, शायद इसलिये कि गुजरते पलों औऱ अपने प्रिय कों मे खोना नहींचाहता थां।।। नं हि मे अपनी प्रेमिका कों येकह सकता थां कि मे उस वक़्त कमजोर पड़रहा थां, यहसच बताने केँ बाद शायद मे पूरे जिंदगी केँ लिए अपनेउस प्रेम खो देता।। एक् ऐसे प्रेमी कों जौ जब मेरेसंग होता थां तोँ जीवन सुहानी लगती थि खुशी कां एहसास मेरी रगों मे दौड़ने लगता थां।। हां इसलिये हि मे नें झूठ बोला, नहि जिया जाता थां मुझसे इस अलगाव मे, एक् ऐसा एकांत जिसमें वहशत औऱ दर्द केँ सिवाकुछ नहि थां
जाने क्यूं येझूठ बोलने केँ बाद मेरी आँखों सें आँसू बहनेरुक गए, शायद मेरी सच्ची इश्क मे आजझूठ कि मिलावट हौ चुकी थि।। पर्र मैंने जब अपने अंदर झांका तोँ उस प्रेम कों वहींऐसे हि मौजूद पाया, प्रेम कि तीव्रता मे तौ कोईकमी नहि आई थि। शायद मे प्रेम कि उस ऊँचाई कों छूरहा थां जहांऐसे झूठ कि कोई स्थान नहि थि।। पर्र प्रेम जब सच्चे दिल सें कियाजाए तोँ ऐसेसौ झूठ प्रेम मे शायददब केँ रह जाते हें।। येबात मन मे आते हि जैसे एक् विश्वास सां मेरे अंदरफिन सें जाग गय़ा, जोँ झूठ नें कुछ पलों केँ लिए सुला दिया थां।।।।।
मेरे आँसूफिन सें निकलना शुरुआत हौ गए थें।।। ऐसे हि रोते रोते मैंने अपनेजिस हाथ सें बाजीहाथ पकड़रखा थां उसहाथ सें मैंने बाजी केँ हाथ मे पकड़ी बुकली औऱ साइड पे रख दि औऱ अपना चेहरा बाजी केँ सिर सें हटा दिया औऱ अपनेहाथ कि एक् उंगली सें उनका चेहरा अपने सीने सें ऊपर कि ओर उठाया।।। अब उनका चेहरा मेरी आँखों केँ सामने थां।। उस नाजुक सि हूर नें रोरो केँ अपनी स्थिति अजीबकर ली थि, आँखें बंद औऱ आंसू आंखों सें ऐसेबहे जारहे थें जैसेकब सें आज हि केँ दिन केँ प्रतीक्षा मे थें कि आजखुल केँ बहेंगे।। मैंने अपने होंठ बाजी केँ होंठों पे रखदिए औऱ फिन नाजाने कितनी देर हम् दोनों प्रेम केँ मारे दीवाने ऐसे हि होंठ पे होंठरखे हि बस रोते हि रहे।। हम् दोनों कि आत्मा एक् दूसरे कि बाँहों मे खोई हुई घूमरही थीं।।। आंसू तौ थें हम् दोनों कि आँखों मे पऱ एक् आराम थां, एक् सकून थां जिसे शब्दों मे बयान करना मेरेबस सें बाहर् हैं।।।
ऐसे हि बाजी केँ होंठों पे होंठरखे मैंने उन्हें बेड पे लिटा लिया। हम् दोनों केँ पैरों बेड सें नीचे औऱ बाकीबदन बेड पे थां।।। अब धीरे-धीरे धीरे-धीरे मैंने अपने होठों सें बाजी केँ होंठों पे किस करना शुरुआत कर दिया औऱ कुछ हि देरबाद वो राहत अमीर, वो समय लें केँ आई जिसका मुझेकब सें प्रतीक्षा थां।। उन्होंने भि मुझेकिस करना शुरुआत कर दिया।। ऐसे हि बाजी कों किस करतेहुए एक् डर सां मेरे अंदरभरा हुआ थां औऱ मैंने उनके होंठों सें अपने होंठ उठाये औऱ कहाअब मुझे छोड़कर कभीमत जानां, नहि जी सकता तुम्हारे बिना, मुझेडर लगता हैं तुम्हारे बिना जीने मे, मे मर जाऊँगा।।।
मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) – New Episode
बाजी नें मेरीबात कां कोई जवाब नहि दिया पऱ अपनी आँसुओं सें लथपथ आँखें खोल केँ एक् बार मेरीतरफ देखा। जाने उनकीउन आँखों मे क्याँ प्रतिक्रिया थि जिसे मे उस वक्त नहि पढ़सका।।।। उस नाजुक सि कली नें एक् बारफिन सें अपनी आंखें बंदकर ली औऱ मैंने अपने होंठों कों फिन सें उनके होठों पे रख दिया।। धीरे-धीरे धीरे-धीरे हम् दोनों दीवानों कि आंखों सें आंसू निकलना बंद होँ गए, याँ शायद खुश्क होँ गए।। हम् दोनों कि साँसों मे पहले सें कुछ तेजी आँ चुकी थि।। बाजी नें मेरे नीचे दबाएहुए अपनेहाथ कों निकाला औऱ मेरेसिर केँ एक् पे बालों मे हाथ कि उंगलियां फेरने लगी औऱ दूसरे हाथ कों ऊपर करके मेरेसिर केँ दूसरी तरफ बालों मे हाथ कि उंगलियां भि फेरने लगी।।। चमत्कार औरउसका असर औऱ नशा तौ महसूस मे तब हि करता थां जब मे अपनी बाजी केँ संगऐसे पलों कों जीता थां।।। बाजी मेरे होंठों कों चूमेजा रही थि उनकेनरम गुलाबी होंठ मेरे होंठों सें अपनी प्यास बुझारहे थें।।।
अब बाजी कों किस करते करते मैंने अपनी ज़ुबान उनके होठों सें गुज़ारते हुए उनके मुंह मेंडालना शुरुआत कर दि।। नरमनरम प्यारे सें होठों पर्र अपनी गीलीजीभ घुमाते हुए एक् अजीब सां हि नशामुझ पे छारहा थां।।। अबजब मेरीजीभ अंदर कों जाती तोँ बाजी भि अपनीजीभ सें मेरीजीभ कों मिलाती।। हम् दोनों कि साँसें अब पहले सें भि कुछतेज हौ गई थि।।। हम् दोनों कितनी हि देरऐसे एक् दूसरे केँ होठों सें होंठ औऱ जीभ सें जीभ मिलाते रहे कि फिन मैंने अपने होंठों सें बाजी केँ गाल आँखों नाक यानी कि चेहरे केँ हर हिस्से कों चूमा।।
ऐसे हि चूमते हुए मैंने अब बाजी कि हसीन नाजुक सि गर्दन पे अपने होंठजमा दिए।। बाजी केँ बदन कां प्रत्येक भाग एक् अलग सां हि चमत्कार करता थां मुझ पऱ जिससे हर हिस्से कों छूते औऱ चूमते हि मज़े केँ समुंदर कि गहराई मे डूबता औऱ डूबता बस डूबता हि चलाजा रहा थां।। अबऐसा लगनेलगा थां कि इस मस्ती केँ समुद्र कि गहराई कि कोई सीमा नहि हैं औऱ अगर हैं तोँ इस गहराई कि हद तक जाने कि चाहत मेरे अंदरजाग चुकी थि। ऐसी चाहतबस उसी केँ संग पैदा हौ सकती हैं जिससे मनुष्य कां बदन औऱ आत्मा दोनों कां नाता हौ।।। बाजी कि गर्दन कों चूमते हुएसंग मे ज़ुबान भि फेररहा थां। बाजी केँ मुँह सें हल्की हल्की सिसकियाँ निकलरही थीं जोँ मेरे कानों सें जब टकराती तौ मेरी मस्ती औऱ बढ़ जाती।।।।
अचानक बाजी नें आगे कि ओरबढ़ कर मेरी गर्दन पे अपने होंठरख दिए औऱ अपनेनरम होठों सें मेरी गर्दन कों चूमने लगी मैंने जोँ हाथ उनकेसर पे पहले सें रखा थां हाथ कि उंगलियों सें बाजी केँ बालों कों प्रेम सें पकड़ा औऱ बाजी केँ सर कों अपनी गर्दन सें दबाया जिससे बाजी केँ कोमल होंठ औऱ गुलाबी हुआ चेहरा मेरी गर्दन मेंदबता चला गय़ा।।। बाजी नें अब अपने होंठों केँ संग अपनी गीलीजीभ कों भि मेरी गर्दन पे फेरना शुरुआत कर दिया थां अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आम्ह्ह्ह ओहह कि सिसकी मेरे मुंह सें निकली।।
थोड़ी देर तक बाजी मेरी गर्दन पऱ अपनीजीब कां चमत्कार चलाती रही। अब मैने बाजी कों अपनी बाहों मे भींच लिया औऱ फिन अपनी ज़ुबान सें बाजी कि गर्दन कों चाटने लगा बाजी कि गर्दन पे भि मेरीजीभ नें एक् चमत्कार सां कर दिया थां कि बाजी भि ऐसे हि मेरेसिर कों अपने दोनों हाथों सें अपनी गर्दन पर्र दबारही थि, ऐसेलग रहा थां कि दोनों कि इस टाइमबस एक् जैसी हि ख़्वाहिश थि।।
मस्ती केँ दरिया मे डूबेहुए मैंने अपना वो हाथ जोँ बाजी केँ गाल पे रखा थां उसे नीचे लाया औऱ शर्ट केँ ऊपर सें हि बाजी कां एक् मम्मा पकड़ लिया अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह फिनवही एक् अलग सां चमत्कार।। अहह क्याँ सॉफ्ट औऱ सॉफ्ट केँ संग एक् तनाव थां बाजी केँ मम्मे पऱ।।। मे धीरे-धीरे धीरे-धीरे उनका मम्मा दबाने लगा।। बाजी केँ मुंह सें निकला: उफ़उफ़ सलमान नहि मतकरो नां, छोड़ो उसे, अहह सलमान पीछेकरो हाथ अपना।।।। औऱ यही सोचते हुएमजे कि हालत मे मे बाजी केँ मम्मे कों औऱ दबाने लगा कि बाजी सिर्फ़ अपने मुंह सें मुझेकह रही हैं, जबकि अपना मम्मा छुड़ाने कि उन्होने कोई कोशिस हि नहीं कि। ऐसे हि जाने कितनी देर हौ गयीँ, मुझे बाजी केँ बूब कों दबाते हुए। बाजी केँ दिल पर्र जौ चोटआज साना केँ संग मुझेदेख करलगी थि, ये उसका हि तौ नतीजा थां कि बाजी मेरेबेड पे मेरे नीचे औऱ उनके जिस्म पर्र मे आधा झुकाहुआ थां बाजी केँ बूब कों दबाते दबाते मे अपनेउसी हाथ कों नीचे लाया औऱ बाजी कि कमीज केँ अंदरहाथ डालने लगा कि उन्होंने अपने एक् हाथ सें मेरेहाथ कों पकड़ा। इसबार बाजी कां मुझे इशारा थां कि इससेआगे नहि।।। पर्र मे रुका नहि औऱ अपनेहाथ आगे बढ़ाता चला गय़ा। अब मेराहाथ बाजी केँ पेट सें स्पर्श हौ रहा थां।। ऐसे हि हाथआगे कि ओर लें जाता गय़ा औऱ बाजी नें वैसे हि मेरेहाथ कों पकड़े रखा।। अब मेराहाथ बाजी कि ब्रा कों छूरहा थां। मैंने बाजी कि ब्रा कों छूते हि अपनी उंगलियां उसकी ब्रा केँ नीची सें हि अंदर सें बढ़ाने कि कोशिस कि जौ थोड़ी सि कोशिश सें अंदर होँ गईं औऱ मैंने अपनेहाथ मे अपनी हुश्न परी बाजी कां मम्मा पकड़ लिया औऱ धीरे-धीरे दबाने लगा।। \
मेरे हाथों केँ टच कों बाजीसह नहींपाई औऱ कहा:अहह अहह सलमान नहि सलमान अह्ह्ह्ह्ह औऱ अपनेचहरे कों मेरी गर्दन सें हटा दिया औऱ वापसबेड पे अपनासिर रख दिया, जिस हाथ सें उन्होंने मेरेहाथ कों पकड़ा थां उसहाथ कों उन्होंने अपनी ब्रा केँ ऊपर रखकर अपनी ब्रा केँ अंदर मौजूद मेरेहाथ कों पकड़ा औऱ आहिस्ता दबाने लगी।।।। बाजी बहोत मदहोश होँ चुकीथीं।। मैंने बहुतदेर उनका मम्मा दबाने केँ बाद अपनेहाथ कों उनके ब्रा सें बाहर् निकाला औऱ उनकाहाथ पकड़कर उनकी शर्ट सें बाहर् निकाल दिया। अब मैंने अपने होंठ भि उनकी गर्दन सें हटालिए जोँ मेराहाथ उनकेसिर केँ नीचेदब गय़ा थां उसे भि वहां सें निकाला। अब बाजी कां एक् हि हाथ थां जोँ मेरेसिर केँ बालों कों प्रेम सें पकड़े हुए थां।।। थोडा बाजी केँ ऊपर औऱ बढ़ा जिससे बाजी कां वो हाथ भि मेरे बालों सें निकलकर बेड पे गिर गय़ा।।। मैंने अपने दोनों हाथों सें बाजी कि कमीजऊपर कि औऱ अभि उनका सफ़ेद पेट हि नंगाहुआ थां कि उन्होंने अपने दोनों हाथों सें मेरे दोनो हाथों कों थामा औऱ अपनी आंखें खोलते हुए बहोत प्रेम सें मुझे देखते हुएकहा: नहि सलमान।।
मैंने अपने होंठ उनके होंठों पे रखे औऱ एक् किस कि औऱ कहा बाजी एक् बार देखने दोबस औऱ कुछ नहि करना। बाजी नाँ मे गर्दन हिलारही थि, पर्र मैंने अपनी कोशिश जारीरखी।
बाजी कों शायद महसूस हौ गय़ा थां कि अब उनके बूब्स देख केँ हि छोड़ूँगा, इसलिये उनके चेहरे केँ भाव हि बदलने लगे। वो अब बुरा सां मुंह बनाए मुझेमना कररही थीं।। मे अंदर सें डर गय़ा थां कि यह न् हौ कि बाजीफिन मुझे पीछे कों धक्का दें।। अभि तक वो मेरेहाथ पकड़े मुझेमना हि किएजा रहीथीं। मैंने धीरे-धीरे धीरे-धीरे करते करते शर्ट बहुतऊपर कों कर दि थि। बाजी कि हालत अजीबकम होतीजा रही थि कि मैंने आगे हौ केँ उनके खूबसूरत होठों कों अपने होठों मे लें लिया।। बाजी एक् तरफ मेरे दोनों हाथों कों पकड़े मुझेरोक रही थि दूसरी ओरअब बाजी अपनासिर झटक केँ अपने होंठ मेरे होंठों सें अलग करने कि कोशिश कररही थि।।। मेरे हाथों कि उंगलियां बाजी कि ब्रा कों स्पर्श होँ रहीथीं, मैंने इसबार बहुतजोर लगा केँ अपने हाथों कों आगे कि ओर किया
अब बाजी कि कमीज उनके बूब्स सें करीब-करीब हट चुकी थि, इसबात कां अंदाज़ा मुझे उनके नग्न बूब्स कों औऱ ब्रा कों स्पर्श करने सें होँ रहा थां।। मैंने पहले दोनों हाथ उनके दोनों बूब्स पे रखे औऱ उनके बूब्स कों उनकी ब्रा केँ ऊपर सें हि दबाता रहा।।।
बाजी केँ होंठ मेरे होंठों मे थें औऱ जैसे हि मैंने बूब्स दबाना शुरुआत किया उनके मुंह सें बेइख्तियार निकला अह्ह्ह्ह्ह आँ हहहम औऱ बाजी नें अब अपने होंठ पीछेहटाने कि कोशिश भि छोड़ दि। औऱ मेरे होठों कों आहिस्ता चूमने लगी।।। उन्होंने मेरे हाथो कों वैसे हि पकड़े रखा।।। मैंने बहुतदेर उनके बूब्स दबाये औऱ फिन मैंने दोनों हाथों सें उनका ब्रा आहिस्ता नीचे सें पकड़ा औऱ उनकीऊपर उठी शर्ट केँ अंदरकर दिया औऱ बाजी केँ दोनों नंगे बूब्स पकड़लिए "" अहहअहह सलमान "" बाजी अपने बूब्स पे मेरेहाथ लगतेसंग हि जैसे प्यास उठी।।।
मैंने अपने होंठ बाजी केँ होंठों सें उठादिए क्योंकि अब मुझसे औऱ सबर नहि होँ रहा थां, मे अपनीजान केँ नग्न चुचों कां दीदार करना चाहता थां।।।। ज्यों हि मे पीछे कि ओरहुआ औऱ मेरी नजरें बाजी केँ नग्न चुचों सें टकराई, मेरामन उनकी हुस्न कों देखता हि रह गय़ा।। मुझे यकीन नहि आँ रहा थां कि मेरीजान, मेरे सपनों कि रानी, मेरी रानी, मेरी बाजी केँ मम्मे कभी नग्न भि देख सकूंगा।। क्यूं विश्वास करता मुश्किल भि तोँ बहोत थां नाँ। क्यूं बहोत मुश्किल मंज़िलें तयकर यहां तक आया थां।। जैसेउस वक़्त मेरी आँखें एक् समय मे बंद होँ जाती थि औऱ एक् लम्हा मे खुल जातीथीं जब बाजी कों सोतेहुए देखता थां, मेरी आँखें खुली हुइ थीं पऱ इसतरह कि स्थिति मे ऐसा होता हैं कि जिस चीज़ कों इंसान नें इतनी मुश्किल सें पाया होँ वो जब आँखों केँ सामने आए तौ देखने वाले कों तोँ उसकी कि आँखें खुलीनजर आएंगी, पऱ उस व्यक्ति कि आँखों कां हालकुछ अजब हि होगा।।।
बाजी केँ नग्न औऱ मोटे मम्मे मेरे हाथों मे थें, बाजी कि पीली सलवार केँ ऊपर उनका गोरा सफ़ेद पेट, वहा ऊपरआते आते उनके सफेदगोल, तनेहुए नंगे मम्मे जिनको थोडा सां बाजी कि कमीज नें कवर कियाहुआ थां। बाजी कि पीली शर्ट केँ संग उनके गोरे मम्मे औऱ उनके गोरे स्तन पे गुलाबी निप्पल।।। क्याँ कमाल कां नज़ारा थां, दिलचाह रहा थां कि जिंदगी इसी नज़ारे मे हि बीतजाए। मे धीरे-धीरे धीरे-धीरे बाजी केँ चुचे दबाने लगा औऱ उनके गुलाबी निपल्स पे अपना अंगूठा फेरने लगा।।।। मेरी हालत ख़राब सें ख़राब होतीजा रही थि
मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) - Kahani ab aur interesting hogi
Relavant source : click here