मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) – New Episode
बाजार पहुंचने केँ बाद शॉपिंग केँ दौरान मुझे पीछे सें एक् आवाज़ आई"हाय रामदेख केँ चलो, कहींगिर न् जाओ" आवाज़ जानी पहचानी थि।।। मैंने मुस्कुरा केँ पीछे देखा तौ साना खड़ी मुस्कुरा रही थि, संग मे उसकी अम्मी भि थि वो भि मुस्कुरा रही थि।।। साना कि अम्मी बहोत अच्छे सें मुझे जानती थि औऱ संग मे हम् दोनों कि दोस्ती कों भि।। इतनी मे मेरी अम्मी औऱ बाजी भि पीछेपलट आई साना कि अम्मी औऱ साना सें ओह हेल्लो कि।।। मैंने मुस्कुराते हुएकहा: ये तुम्हारा फयूरेट स्टाइल हैं?
साना नें कहा:कौन सां?
मैंने कहा: हमेशा पीछेसे आवाज़ देने वाला।।। साना मेरीबात पे हँस दि।
साना कि अम्मी कां नाम नीलम थां।। आंटी औऱ अम्मी एक् दूसरे कों मेरी औऱ साना कि दोस्ती केँ कारण जानती तौ थि, पऱ ऐसेफेस टूफेस मुलाकात पहलीबार हि कररही थीं।। आंटी नीलम औऱ अम्मी बातें करनेलगे औऱ बाजी उनकेसंग हि खड़ी हौ गई। मे औऱ साना बातें करते करते एक् साइड पे हौ गए। सानाआज बहोत प्यारी लगरही थि। पिंककलर कि शर्ट औऱ नीचे व्हाइट कलर कि सलवार साना पे बहोत सूटकर रही थि। साना कां रंग सफेद थां।। आजपता नहि क्यूं मैंने पहलीबार साना केँ बदन पे एक् निगाह डाली।।। साना नशीले रूप केँ संग जवान होँ रही थि बचपन केँ मित्र होने केँ बावजूद मैंने साना कों पहलेकभी ऐसे नहि देखा थां।। अभि भि साना केँ लिए मेरी निगाह मे इरादा गलत नहि थां पर्र फिन भि आज उसकेबदन पऱ एक् भरपूर निगाह जरूर डाली थि मैने। जिसकी समझ मुझे स्वयं नहि आई कि ऐसा मेरेसंग हुआ क्यूं।। शायद प्रेम कि वजह सें आने वाले परिवर्तनों मे सें एक् परिवर्तन ये भि थां।।
साना औऱ मेरेबीच ऐसी दोस्ती थि कि हम् एक् दूसरे कों मुंह पे जौ आएकह देते थें।।। मेरे मुंह सें निकल गय़ा कि: सानाआज बहोत खूबसूरत लगरही हौ।।
साना केँ लिएये बात मेरे मुंह सें निकलना बिल्कुल असंभव थां।। उसनेमुझ पे एक् गहरी निगाह डाली।।। जिससे मे घबरा गय़ा।। औऱ मुझेतब पताचला कि चाहे हम् दोनों जितने भि गहरे फ्रेंड्स हें। पऱ हम् ऐसा तौ कभी एक् दूसरे कों नहि कहा। मैंने बात कॉलेज कि ओर मोड़ दि कि कॉलेज फिन सें शुरुआत हौ गय़ा हैं वग़ैरह वग़ैरह।। मैंने साना सें बात करतेहुए अम्मी आदि कि तरफ देखा तोँ अम्मी आंटी नीलम सें गपशप मे लगीथीं, जबकि बाजी मुझे औऱ साना कों हि देखरही थि।। बाजी नें ज्यों हि मुझे देखा कि मे उनकीओर देखरहा हूं तोँ बाजी नें हम् पऱ सें नजरें हटाली।।।
इतने मे अम्मी औऱ आंटी नें बातचीत ख़त्म कि, औऱ आंटी कों कभीघऱ आने केँ लिएकहा।। औऱ फिन आंटी औऱ सानाचले गए। जाते-जाते मैंने आंटी औऱ साना कों पीछे मुड़ केँ देखा तोँ उसी वक़्त साना नें भि पीछे मुड़कर देखा साना चेहरे पे मुझे एक् संग बहोत सारे प्रश्न दिखे।।।
खरीदारी केँ बाद हम् घऱ कों निकले तोँ मे ड्राइविंग करते करते एक् मिरर सें बाजी कों भि संगसंग देखरहा थां।। बाजी गाड़ी सें बाहर् पता नहि किन विचारों मे खोई हुइ थि।।। मैंने आज बाजी कों मनाना थां। हरहाल मे हर कीमत पे।।। प्रेम केँ जिस मोड़ पे हम् दोनों बेहन भइया खड़े थें, इस मोड़ पे बाजी कि नाराजगी सें मेरीजान निकलरही थि।।।
रात केँ 11 बजरहे थें।।।। 12 बजने केँ प्रतीक्षा मे अपनेरूम मे हि चिंता मे चलरहा थां।। बैठने कि कोशिश कि पर्र बैठा नहि जारहा थां। ख़ैर 12 बजे औऱ मे अपने कमरे सें निकला औऱ बाजी केँ रूम कि ओर बढ़ा। बाजी केँ रूम कां गेटनोक किया।। तौ बाजी नेडोर नहि खोला।। मैंने फिननोक किया।। पऱ फिन भि गेट नहि खुला।।। मे परेशान हौ गय़ा।।। मे इसबात कि उम्मीद बिल्कुल नहि कररहा थां।।। जौ नहि सोचा थां, वहीहुआ औऱ बहुतदेर खड़ा रहने केँ बाद भि बाजी नें गेट नहि खोला।।
मे उदास औऱ परेशान अपनेरूम मे वापस पलटा औऱ अपनेरूम केँ दरवाजे पे पहुँच केँ जैसे हि मैंने अपनेरूम काडोर ओपन किया। बाजी नें अपनेरूम केँ दरवाजे कों खोला पऱ सामने नहि हुई, जस्ट अपनाडोर ओपन किया।।। मे वापस बाजी केँ रूम कि तरफ बढ़ा औऱ जब बाजी केँ रूम केँ दरवाजे केँ पासआया तोँ बाजी अपनेबेड पे बैठी अपनी पुस्तक पे सिर झुकाए उसमेगुम थि।। रूम मे प्रवेश कररूम काडोर बंद करने वाला थां कि दिदी नें ऊपरदेख कहा:इसे ऐसे हि रहनेदो।।
मे दरवाजा वैसे हि खुलारहने दिया। औऱ चेयर पे आँ केँ बैठ गय़ा।। बाजी नें अपनासिर फिन झुका लिया औऱ बुक कों देखते लगी।। बहुतदेर रूम मे ऐसे हि चुप्पी छाईरही।। औऱ मे चुपचाप इस दौरान बाजी कों हि देखता रहा।।। औऱ फिनइस चुप्पी कों मेरेसेल पे आने वालीकॉल आई कि आवाज़ नें तोड़ा फोन कि वजह सें मई चौंक गय़ा, क्योंकि इस टाइम मेरे नंबर पे किसी कि कॉलआई नहि आती थि। मैंने सेलजेब सें निकाला औऱ स्क्रीन पे साना कां नामआता देख केँ हैरान हौ गय़ा साना नें कभी मुझेइस वक़्त फोन नहि कि थि।। फिनआज ऐसा क्यूं। मे हैरान परेशान उसकानाम स्क्रीन पे देखता रहा। अचानक बाजी नें पूछा: किसकी फोन हैं।। मैंने कहा: साना कि।। बाजीफिन सें अपनीबुक पे झुक गई। मेरीजान मेरेलिए कुछ तोँ बोलीं इससे मेरे डूबते दिल कों कुछ सहारा मिला।।।
फिन मैंने फोन अटेंड कि।।। साना सें नमस्कार कहने केँ बाद मैंने उससे पूछा कि इस टाइम केसेफोन किया खैरियत हैं नां? साना नें कहा:बस वैसे हि हैलो क्या बात है केँ लिएकॉल आई कि थि।। मैंने कहाये वक़्त हैं हेलो क्या बात है कां।।। मेरे स्वर मे हल्का सां क्रोध थां।।। क्योंकि इस वक्त मे अपने प्रेम केँ पास बैठा थां। औऱ इस वक़्त कि डिस्टरबेंस मुझे अच्छी नहि लगी थि।।। साना नें अचानक कॉलआई काट दि।। शायद मैंने थोडा गुस्से मे उससेबात कर दि।। मुझेइस वक़्त साना कि नाराजगी सें कुछखास लेना देना नहि थां।।।
सेलजेब मे रखने केँ बाद मैंने बाजी कों देखा तोँ बाजी वैसे हि सिर झुकाए बैठी थि।। पर्र अब उनकेफेस पऱ एक्सपरेशनज़ बहोत अजीब सेथे। जिन्हें मे कम सें कमइस वक़्त समझ नहि पाया।। बाजी थि कि मेरीओर देख हि नहि रही थि। अब मेरी सहनशक्ति जवाबदे चुकी थि। मे उठा औऱ बाजी केँ पास आँ खड़ा होँ गय़ा। औऱ बाजी केँ एक् गाल पे हाथरख दिया।।। बाजी नें मेरेहाथ कों पीछे किया औऱ उठकर खड़ी होँ गई औऱ अपने बाथरूम मे चली गई औऱ बाथरूम केँ दरवाजे कों बंदकर दिया।।। मे अंदर सें जैसेकट रह गय़ा।।।
क्याँ बाजीअब जल्द बाहर् आएंगी? क्याँ बाजी मुझे सख्त नाराजगी कि वजह सें मुझेऐसे नज़रअंदाज़ कररही हें ताकिरूम सें चला जाऊं?ऐसे हि कितने प्रश्न मेरे दिमाग़ मे एक् हि वक़्त मे घूमे मे बहोत देर वहीं खड़ा बाजी कां वेट करतारहा पऱ बाजी बाहर् नहि आई।। अब मुझे पक्का यकीन होताजा रहा थां कि बाजी चाहती हों कि मे कमरे मे चला जाऊं। इसीलिए तौ इसहद तक नज़रअंदाज़ कररही हें।।
मे इन्ही विचार औऱ सवालों मे उलझाहुआ थां कि मेरेसेल पे किसी कां मेस्सेज आया।।। मुझेपता थां कि साना नें गुस्से मे किया होगा। जब मेस्सेज ओपन करकेचेक किया तौ यह मेस्सेज बाजी कां थां।।। मे हैरान होँ गय़ा कि बाजी तोँ बाथरूम मे हें तोँ वहा सें मेस्सेज कि क्याँ जरूरत हैं। मैसेज मे लिखा थां: साना तुम्हें क्यूं कॉलआई करती हैं? उसका तुम् सें क्याँ नाता हैं?
मे पहले तोसमझ नहि पाया। फिन ज्यों हि समझा एक् मुस्कान मेरे चेहरे पे आँ गई।।। तौ येबात हैं। बाजी मेरे औऱ साना केँ बीच दोस्ती सें आगेकुछ औऱ हि समझना शुरुआत हौ गई थीं।।। बाजी केँ अंदर कि लड़कीजाग चुकी थि। गलतफहमी पे हि सही पर्र जागी जरूर थि।। औऱ भड़क भि गई थि।।। बाजी बाजार मे भि तोँ मुझे औऱ साना कों हि देखरही थि।।।। औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे मुझे जबाब मिलते जारहे थें।। पऱ अब मुझे बाजी कों समझा नाँ थां कि ऐसाकुछ नहि हैं। इतनी मुश्किल सें उन्हें पा केँ अब एक् गलतफहमी कि वजह सें खो नहि सकता थां।
पऱ बाजी केँ इस प्रश्न सें मैंने ये भि सोचा जरूर कि साना नें मुझे मोबाइल किया क्यूं। वैसे तोँ कभी उसने मुझेइस टाइमफोन नहि कि। खैर मैंने साना वाले टॉपिक कों बाद पे छोड़ा औऱ बाजी केँ मैसेज कां रिप्लाई किया कि: साना मेरी मित्र हैं इससे ज्यादा औऱ कुछ नहि। आप् जानती हें कि आप् सें बढ़कर मेरेलिए औऱ कोई नहि।। एक् बार आपको अपने प्रेम कां सबूतदे चुका हूं अगर कहें तोँ एक् बार औऱ देदूं ? ? (मैंने अपनाहाथ काटने वालीबात कां ज़िक्र करतेहुए) मैसेज सेंड कियाकुछ सेकंड भीनहीं हुए थें कि बाथरूम काडोर खुला औऱ बाजी अपने ड्रेसिंग रूम सें होती हुईँ तेजी सें बाहर् आई औऱ आते हि मुझे एक् थप्पड़ दे मारा।। बाजी कां चेहरा गुस्से सें लालहुआ जारहा थां औऱ उनकेगाल बेहद गुस्से कि वजह सें कांप भि रहे थें।। उन्होंने मुझेकहा कि: आज केँ बादऐसा सोचा भि नां तौ मे तुम्हारी जान लेँ लूँगी।
मेरे मरने कि बात सें मेरी बेहन कों इतना क्रोध आँ जानां, मुझे बहोत अच्छा लगा, इतना अच्छा कि बाजी कां थप्पड़ हि भूल गय़ा औऱ आगेबढ़ कर बाजी कों गलेलगा लिया।।।। मैंने बाजी कों दोनों बाजुओं केँ घेरे मे लियाहुआ थां। जबकि बाजी केँ दोनों हाथ ढीले सें नीचे हि रहे।।। बाजी नें मुझे पीछे नहि किया। बहुतदेर गलेलगा केरखने केँ बाद मैंने अपना चेहरा बाजी केँ शोल्डर सें उठाया औऱ बाजी केँ चेहरे कि ओर देखा।।। मेरे इतनेपास सें देखने पे बाजी घबरा गई।। औऱ उन्होंने आंखें बंदकर ली।। मैंने अपने होंठ बाजी केँ होंठों पे रखे औऱ उन्हें चूमने लगा।।। कुछदेर बाजी नें मुझे रिटर्न मे किस नहि किया। पऱ कुछ हि देरबाद बाजी नें मेरे होंठों कों अपनेनरम होठों सें पकड़ा औऱ मेरे होंठों कों चूमने लगी।।। अजीब सां करंट थां बाजी कि किस पर्र।। मेरे पूरे जिस्म कों हिला केँ रख देती थि बाजी कि यह चुम्मि।।।
बाजी केँ किस मिलते हि जैसे मेरे दीवानेपन कि बेटरी फुल चार्ज हौ गई।।। मैंने किस करतेहुए बाजी केँ मुँह मे अपनीजीब घुसा दि।। औऱ बाजी कि जीब केँ संगटच करनेलगा।। बाजीने भि मेरीजीभ कों अपनीजीभ सें स्पर्श किया।। अब हम् दोनों बेहन भइया एक् संग ज़ुबान मिलारहे थें।। मैंने आहिस्ता आहिस्ता अपनीजीभ कों बाहर् निकालना शुरुआत कर दिया।। बाजी कि जीब मेरीजीब कां पीछा करते करते बाहर् आँ रही थि।।। जब मैंने अपनीजीब बाजी केँ मुँह औऱ होठों सें होतेहुए पूरी बाहर् निकाल ली तौ बाजी कि जीब उनके मुंह सें बाहर् आँ चुकी थि औऱ लेफ्ट राइट लेफ्ट राइट हरकतकर रही थि शायद वो मेरीजीब कि खोज मे थि।। मैंने बाजी कि बाहर् निकली जीब कों अपने मुंह मे लेँ लिया औऱ उसे चूसने लगा। मे बाजी कि जीब कों पूरा मुंह मे जब लेता तौ संग हि अपने होंठ बाजी केँ होठों सें स्पर्श करता औऱ अपनीजीब बाजी केँ ऊपर वाले होंठ पे फिराता औऱ फिन अपनीजीब बाजी कि जीब पे लेटा देता औऱ अपनीजीभ कों उनकीजीब सें रगड़ता औऱ अपने होंठों सें उनकीजीब कों चूसता।।।।
पता नहि कितनी देर हम् बेहन भइयाबदन कों मस्ती केँ समुंदर मे डुबो देने वालीवेट किसिंग करतेरहे।।
एक् समय कों मैंने आँखें खोल केँ बाजी केँ चेहरे पे नज़र दौड़ाई तौ बाजी कां चेहरा गुलाबी गुलाबी होँ चुका थां औऱ बाजी आंखें बंदकिए कहींखो चुकी थि।।। अब बाजी केँ मुँह मे मैंने जीब दि तौ बाजी नें भि वैसा हि किया जैसे मैंने उनकीजीब केँ संग किया थां।।।। फिन मैंने अपने होंठों कों पीछे करके बाजी केँ पूरे चेहरे कों चूमा।।। बाजी केँ चेहरे कों इंचइंच चूमने केँ बाद, मैंने अपने होंठ बाजी कि गर्दन पे जमालिए।। औऱ पागलों कि तरह बाजी कि गर्दन कों चूमने चाटने लगा।। गर्दन पे किस करने सें बाजी कों मैंने मस्ती केँ नशे मे जाते देखा थां।। इसलिये मैंने कल कि तरह बाजी कों फिन दीवार सें लगा दिया औऱ एक् हाथ मे बाजी केँ बाल पकड़लिए औऱ दूसरे हाथ कों बाजी कि कमर केँ चारों ओर घुमा लिया। औऱ बाजी कि गर्दन कों चूमने चाटने लगा। ऐसा करने सें बाजी कि साँसें बहोत तेज होने लगीं औऱ जितनी बाजी सांसें तेज लेती इतना हि मे औऱ बहकता जाता।
मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) – New Episode
दुनिया सें बेखबर दो दीवाने बेहन भइया एक् दूसरे मे खोयेहुए थें।।। इस प्रक्रिया मे बस बाजी कि हल्की हल्की सि आवाज़ मेरे कानों सें टकराती कि सलमान प्लीज़, सलमान नहि करो, आह्ह्ह्ह ह। बाजी कि गर्दन कों चूमते चाटते मे अपनाहाथ जौ बाजी कि कमर पे थां उसेआगे लाया औऱ शर्ट केँ ऊपर सें हि बाजी केँ मम्मे पे रख लिया, पऱ बाजी कां मम्मा दबाया नहि।। इसडर कि वजह सें कि बाजीफिन कल कि तरह नाराज न् हौ जाएं।। बहुतदेर बीतने केँ बाद भि बाजी नें जबकुछ न् बोला तौ मैंने आहिस्ता बाजी कां मम्मा दबाना शुरुआत कर दिया।। बाजी कि गर्दन मे इसीतरह चूमरहा थां औऱ अपनीजीभ फेररहा थां औऱ बाजी कि गर्दन कों गीलाकर रहा थां। बाजी कि सफेद सफेद गर्दन मेरे गीला करने सें चमकरही थि।। बाजी कि हल्की-हल्की सिसकियाँ मेरेतन जिस्म मे आगलगा रहीथीं। औऱ मे नशे मे डूबा अपनी बाजी कि गर्दन कों चूमने केँ संगसंग आहिस्ता उनका मम्मा भि दबारहा थां।।
बाजी कां मम्मा दबाते दबाते अचानक हि मैंने अपने होंठ बाजी कि गर्दन सें उठादिए। औऱ अपने दोनों हाथ बाजी केँ शोल्डर पे रखदिए औऱ अपने होंठ शर्ट केँ ऊपर सें हि बाजी केँ मम्मे पे रखे औऱ शर्ट केँ ऊपर सें हि बाजी केँ मम्मे कों चूमा। आहह-आहह हये मेरा अपने सपनों कि रानी केँ मम्मे पे पहलाकिस थां। कभीऐसा नहि सोचा थां कि मे कभी अपनी बाजी केँ मम्मे कों चूम पाउन्गा पर्र आजऐसा संभव होँ गय़ा थां। (साना वाला किस्सा आज नं होता तौ शायद मे कभी बाजी केँ बूब्ज़ कों किस नहींकर सकता हैं, अगरकर सकता भि तोँ शायद बहोत टाइम लगता मुझे) बाजी केँ मम्मे कों चूमते हि जाने मुझे क्याँ हुआ कि मे मम्मे कों चूमता हि चला गय़ा।।। औऱ फिन इतनाखो गय़ा मे इसनशे मे कि मे बाजी केँ दोनों बूब्ज़ कों चूमने लगा। बाजी केँ बदन कों अचानक हल्का साझटका लगा, औऱ बाजी नें मेरेसिर कों अपने दोनों हाथों सें पकड़ लिया औऱ आहिस्ता पीछे किया। मैंने बाजी कों देखा तोँ बाजी कि आँखें खुली हुइ थीं औऱ बाजी मेरीओर देखरही थीं। बाजी केँ होश उड़ेहुए, आँखें औऱ चेहरा गुलाबी गुलाबी हुआ पड़ा थां, बालों सें ढँकेहुए चेहर पे एक् रिकवेस्ट सि थि। एक् प्रेम भरी रिकवेस्ट।।।।
बाजी नें कहा: सलमान नहि येमतकरो प्लीज़।।। जोँ हमनेअब तक किया, ये पाप हैं, औऱ पापमत करवाओ मुझसे सलमान मे मर जाऊँगी।। बाजी नें ज्यों हि मरनेवाली बात कि मैंने अपने होंठ बाजी केँ होंठों पर्र रखदिए औऱ उनके होंठों कों चूमना शुरुआत कर दिया। हालात हि कुछऐसे बनगए कि बाजी नें भि मुझे किसिंग करना शुरुआत कर दिया औऱ अपने दोनों हाथ जोँ मेरेसर पे थें उन्हें पीछे कि ओर मेरी गर्दन केँ आसपास घुमा लिया। मैंने किसिंग करते करते अपना एक् हाथ बाजी कि गर्दन केँ चारों ओर घुमाया औऱ दूसरे हाथ सें बाजी कां मम्मा पकड़ केँ दबाने लगा। थोड़ी हि देरबाद अपनेहाथ कों नीचे कि ओर लें गय़ा औऱ नीचे सें बाजी कि कमीज केँ अंदर डालने लगा कि बाजी नें किसिंग करते करते अपने एक् हाथ कों नीचे कि ओर लें जाकर मेरेहाथ कों पकड़कर भीतर जाने सें रोका।। मे इसहद तक बेचैनी चुका थां कि मेरा रुकना मुश्किल हौ गय़ा थां।।।।।।।।।।।।।।
मैंने अंदर सें जोर लगाया औऱ हाथ कों अंदर सें डालने कि कोशिश कि पऱ बाजी नें मेरेहाथ कों अंदर नहि जाने दिया।।। मेरे ज्यादा जोर लगाने पे बाजी नें अपने होंठहटा लिए औऱ कहा: सलमान प्लीज़ नहि नां
मेरे मुंह सें बस इतना हि निकल पाया: "सिर्फ एक् बार पकडूंगा उसे" इसकेसंग हि मैंने अपने होंठ बाजी केँ होंठों पे फिनरख दिए औऱ किस करनेलगा औऱ अपनेहाथ कों जोर सें आगे कि ओर बढ़ाया। बाजीअब भि मेरेहाथ कों अंदर जाने सें रोकरही थि।। पर्र इसबार मे नहि रुका औऱ अपनाहाथ बाजी केँ मम्मे तक जोरलगा कर लें हि गय़ा औऱ बाजी केँ मम्मे कों मैंने बाजी कि ब्रा केँ ऊपर सें हि पकड़ लिया।।।। क्याँ मम्मा थां।। नरमनरम औऱ मोटा मोटा।। मेरेहाथ कि उंगलियां ज्यों हि बाजी केँ मम्मे सें टच हुईं।।। बाजी केँ होंठ जोँ मेरे होंठों मे थें वोँ मेरे होंठों सें निकले औऱ बाजी केँ मुंह सें बेइख्तियार हि आह्ह्ह्ह्ह्ह राजा कि आवाज़ निकली।।।।।
शालीनता हया सम्मान येसभी अपनी स्थान पऱ लड़की केँ बदन कों जब मर्द कां स्पर्श मिले, वो भि ऐसी लड़की जिसेआज तक किसी नें छुआ तक नहि थां, उसेइस टच सें पागल तोँ होना हि थां।।। बाजी कि आह्ह्ह्ह्ह्ह राजा कि आवाज़ जैसे मेरा कितना हौसला बढ़ा गई औऱ मेरेबदन कों नशे सें जैसे नहलाने लगी। मैंने फिन सें बाजी केँ होंठो पऱ शुरुआत कर दि। बाजी भि मुझे किसिंग करनेलगी। औऱ मे ब्रा केँ ऊपर सें हि बाजी कां मोटा मम्मा दबाने लगा बहुतदेर ऐसा करने केँ बाद मैंने अपनाहाथ बाजी केँ मम्मे सें उठाया।। (बाजी नें अभि तक मेरेहाथ कों अपनेहाथ सें पकड़रखा थां) औऱ मे बाजी कि ब्रा केँ नीचे सें हाथ अंदर डालने लगा। ताकि अपनीइस रानी, राजकुमारी कां मम्मा नंगाकर सकूँ औऱ फिन पकड़कर दबा सकूँ। बाजी नें धीरे-धीरे सें मेरेहाथ कों अपनेहाथ सें दबाया। यह बाजी कां मुझेरुक जाने कां संकेत थां।।। पर्र रुकना अब असंभव थां।।।। मैंने हाथ अंदर कि तरफ किया जोकि आहिस्ता अंदर हौ गय़ा। औऱ फिन मैंने दिदी कि ब्रा केँ अंदर पूराहाथ डालकर अपनीइस फूल जैसी बाजी कामोटा औऱ नंगा मम्मा पकड़ लिया।।।।।
आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह हह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह बाजी केँ पूरे नंगे मम्मे कों छूते हि मेरेबदन मे जैसे कपकपी शुरुआत होँ गई।।। बाजी नें अपने होंठ मेरे होंठों सेहटा लिए औऱ मेरी गर्दन औऱ शहोल्डर केँ बीच अपना चेहरा छिपा लिया।।।।। औऱ अहहअहह कि हल्की आवाज़ निकालने लगीं।।।। रूम मे पिन ड्रॉप साइलैंस मे बाजी कि हल्की-हल्की आहह-आहह हहहअहह कि अजीब हि मस्ती कि आवाज़े आँ रहीथीं।।। मैंने अपने होंठ बाजी गर्दन पे जमा दिये औऱ उनकी गर्दन ज़ुबान फेरने केँ संगकिस भि करनेलगा औऱ उनका नंगा मोटा मम्मा भि संग हि संग दबाने लगा।।।। अपना अंगूठा बाजी केँ मम्मे केँ निप्पल जितने हिस्से तक फेरता रहा औऱ शेष उंगलियों सें मम्मे कों भि दबाता। रहा।।। बहुतदेर ऐसे करने केँ बाद मैंने अपने अंगूठे औऱ एक् उंगली केँ बीच बाजी केँ मम्मे कां निप्पल पकड़ लिया औऱ उसे हल्के सें दबाया। बाजी कि हल्की सि सिसकी निकली औऱ मैंने उसे छोड़ दिया। औऱ अपने अंगूठे सें बाजी केँ मम्मे केँ निप्पल कों रगड़ने लगा।।।
बाजी कों ऐसा करने सें एक् ऐसानशा मिला कि बाजी नें अपने होंठ मेरी गर्दन पे रखे औऱ मेरी गर्दन कों चूमने लगी।।।। बाजी कां मेरी गर्दन पे किस करना मुझे भि भारीनशा दे गय़ा। तब मैंने जानां कि बाजी क्यूं गर्दन पे किस होते हि तड़प केँ रह जाती हें।।।। मैंने औऱ तेजतेज अपना अंगूठा बाजी केँ निपल्स पे फेरना शुरुआत कर दिया।। जैसे-जैसे मेरी स्पीड बढ़रही थि, वैसे-वैसे बाजी कि मेरी गर्दन पे किसिंग कि गति भि बढ़रही थि। औऱ संग हि बाजी कि हल्की-हल्की अहह आह्ह्ह्ह राजा कि आवाज़ें भि निकलरही थीं।।।
हम् दोनों बेहन भइया एक् दूसरे मे पूरीतरह खोयेहुए थें। मेरेअब सब्र केँ पुलटूट गए थें। मैंने अचानक अपना वो हाथ बाहर् निकाला औऱ अपने दोनों हाथो सें बाजी कि कमीज कों ऊपर कि ओर करनेलगा।।। बाजी नें मेरा एक् हाथ तोपहले सें हि पकड़ा हुआ थां, अब दूसरा हाथ भि जल्द सें पकड़ा औऱ मेरी गर्दन सें अपना चेहरा निकालते हुए मुझे देखा, बाजी कि हालत बहोत बुरी होँ चुकी थि चेहरा गुलाबी गुलाबी, बाल बहुत अधिक बिखरे हुए औऱ आँखों मे एक् ऐसानशा जोँ इस टाइमडूब जाने कां मनकररहा थां बाजी नें कहा: सलमान अबबस। प्लीज़ पूरे नहि, बहोत होँ गय़ा बाजीजब ऐसे हि बहोत कुछकह चुकी तौ मे आगे सें मात्र इतना हि कहा: बाजीबस एक् बार देखने हें।।
बाजी कि हालत इतनी खराब होँ चुकी थि कि उनके मुंह सें सांस हि बड़ी मुश्किल सें निकलरही थि।। उनकागला खुश्क होँ चुका थां।।। औऱ ऊपर सें मैंने जौ इतनी सेक्सी बात उनसेकह दि थि कि "दिदी बस एक् बार देखने हें। "।।। मेरेइस वाक्य नें बाजी केँ अंदरलगी आग कों बहुतहद तक औऱ भड़का दिया थां।। पर्र बाजी नें मुझे अनुमति फिन भि नहि दि औऱ दे भि केसे सकती थि।। कुछ हि दिन पहले वो क्याँ थि औऱ अब क्याँ।। येबात भि तौ उनकेमन मे कहीं नं कहीं मौजूद थि नां
मैंने फिन बाजी कि कमीजऊपर कि कोशिश कि जिसे बाजी नें ऊपर होने नहि दिया।।। औऱ मुझे रोकती रही।।। पऱ रुकना नहि थां मुझेआगे बढना थां।।। मैंने थोडा औऱ जोर लगाया औऱ बाजीपेट तक शर्टऊपर कर दि।। अब बाजी कां नंगा औऱ गोरापेट मेरे सामने थां। मुझसे रहा नहि गय़ा औऱ मैंने बाजी केँ नंगेपेट कों चूम लिया आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मेरी बाजी केँ नंगे जिस्म कि खुशबू अपने दीवाने भइया कों औऱ पागलकर गई।।।।
बाजी अपनेपेट पे मेरे होठों कां स्पर्श महसूस करते हि तड़पउठी औऱ बोलीं सलमान नहि नहि "गलत"बस।। पर्र दीवाने जब आत्मा केँ हों याँ बदन केँ वे रुकते औऱ सुनते कब हें।। मैंने अपनी बाजी केँ नरम गोरेपेट पर्र एक् केँ बाद एक् कई चुंबन करदिए।।।। बाजी अजीब सि स्थिति मे आँ गई थि।।। सम्मान बचाती याँ प्रेम।। यह फैसला उनका शरीर औऱ प्रेम उन्हें करने नहि देरहे थें।।। औऱ इन भावनाओं कोबहकाने वाला उनका भइया उनकी शर्ट कों ऊपरकिए अपने होंठों सें उनकेपेट कों चूमेजा रहा थां
कसूर मेरा नहि थां, कसूर उनका भि नहि थां।। दोषये किस्मत कां थां जिसने उसरात मेरीआँख उस वक्त पे खोलीजब मेरी बाजी करवटबदल केँ लेटी थि। औऱ मैंने उनकी गाण्ड कों सलवार केँ ऊपर सें देख लिया थां।।। यहीं सें तौ शुरुआत हुई थि यह बहकी, खाँमोश प्यार स्टोरी।।
मे बाजी केँ पेट कों चूमेजा रहा थां औऱ उन्होंने मदहोशी कि स्थिति मे हि अपना एक् हाथ जोँ मेरेहाथ कों पकड़े हुए थां उसे मेरे शोल्डर पे रखा औऱ मुझेजोर लगा केँ पीछे करने लगीं।।। पऱ जितना वे मुझे पीछे कि ओरजोर लगारही थीं उससे ज्यादा जोरलगा केँ मे उनकेपेट पे अपने होंठ जमाए उन्हें चूमेजा रहा थां। ये एहसास हि मेरी दीवानगी मे औऱ इज़ाफा किएजा रहा थां कि मेरे होंठ मेरा प्रेम केँ, मेरी रानी केँ, मेरे सपनों कि रानी केँ, मेरी बाजी केँ नरम गोरेपेट कों चूमरहे हें।
बाजी नें कहा: सलमान बस।। सलमान नहि।। मतकरो ऐसे।। मैंने मदहोशी केँ सें आलम मे हि डूबेहुए औऱ होंठपेट पे जमाएहुए हि अपनी नज़रें ऊपर बाजी केँ चेहरे कि ओरकीं, उनकी आंखें बंद थि औऱ चेहरे पे बहोत तकलीफ आसार नज़र आँ रहे थें।। जहां वो अपनेपेट पे मेरे होंठों केँ स्पर्श सें मदहोश हौ रहीथीं, शायद वहीं वोँ इसबात सें तकलीफ मे थि कि वो अपने हि भइया केँ संग प्रेम करतेहुए इस मुकाम तक आँ चुकी हें। एक् ऐसेजगह पे जोँ उनके अपने सपनों जैसा नहि थां।।।
बाजी केँ पेट कों चूमते चूमते अब मे धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपने होंठऊपर कि ओर लेँ जानेलगा। पऱ ज्यों हि बाजी नें मेरे होठों कि हरकत कों ऊपर कि ओर देखा तौ बाजी नें जौ हाथ मेरे शोल्डर पे रखा थां उसहाथ सें मेरेसिर केँ बालजोर सें पकड़कर खींचना शुरुआत करदिए। औऱ बाल खींचते खींचते मेराफेस अपनेपेट सें दूर किया। औऱ दूसरे हाथ सें उन्होंने मेरे दोनों हाथ जोँ उसकी शर्ट कों पकड़े हुए थें, पीछे झटकेदिए।
मे इतना मदहोश थां कि बाल खींचने पे इतनी तकलीफ नहि हुई हां पर्र इतनी तकलीफ़ जरूर हुइ कि मे होश मे करीब-करीब वापस आँ गय़ा। औऱ एक् हाथ मैंने अपनेसर पे वहारख लिया, जहां सें बाजी नें बाल पकड़ केँ खींचे थें।। अब मुझे हल्की हल्की तकलीफ भि होना शुरुआत हौ गई थि वहा। शायद मदहोशी मे डूबे होने केँ कारण दर्ददेर सें हुआ याँ वैसे भि इंसान कों कोईचोट लगे तौ जल्दी दर्द अधिक महसूस नहि होता।।
मैंने बाजी कों देखा तौ वो सिर झुकाए दुपट्टे सें अपना सीना औऱ सिरसही सें कवरकर रहीथीं।। मे वैसे हि हाथसिर पे रखे बाजी केँ रूम सें बाहर् निकल गय़ा।। औऱ अपनेरूम मे आँ गय़ा।।
रूम मे लौटकर मे अपनेबेड पे बैठ गय़ा औऱ हथेली सें सिर कों आराम सेरगड़ने लगा। बाजी नें बाल बहोत जोर सें खींचदिए थें। जिस कारण दर्द बहोत होँ रहा थां।। पऱ जौ भि थां मे बाजी कि स्थिति समझ सकता थां।।। जब सें मेरे औऱ बाजी केँ प्रेम कां सिलसिला शुरुआत हुआ थां, जिसवजह सें मुझे अपने कोजानने कां मौका मिला औऱ साना नें जोँ भि मुझे दिदी केँ बारे मे बताया थां वो सभी बातें मेरे दिमाग़ मे घूमरही थीं। बाजी जैसी लड़की केँ लिएये सभी करनापाप थां। वास्तव मे येपाप भि थां पर्र जिस्म औऱ आत्मा केँ प्रेम केँ मिलन कां जोँ जगह हैं, इसजगह पे पहुँच कर गुनाह कां एहसास बहोत पीछेरह जाता हैं। मेरा प्रेम तोँ इसजगह तक पहुँच चुका थां, पर्र हिना बाजी कां प्रेम जब भि इसजगह पऱ पहुँचने लगता तौ उनसे अपनी इज़्ज़त औऱ हया कि हत्या होते देखी नहीं जाती, औऱ हिना बाजी वहीं सें वापसइस बेरहम दुनिया मे चली जातीं, जहां हमारे इसप्यार कां वजूद वर्दाश्त नहि कियाजा सकता थां।।।
आत्मा कि हत्या चाहे होँ, पर्र सम्मान औऱ हया कों कुछ नहि होना चाहिए सोसायटी मे चाहेसिर उठाजी लो, पर्र अपनीइस भावना कां क्याँ? समाज मे जीना चाहिए याँ अपनीइस दुनिया मे जहां आत्मा जीवित हैं, जहां आत्मा पे कोईबोझ नहि, औऱ जहां आत्मा क्यूं कि जिस जिस्म मे रही तूने उसको कों भि जंग नहि लगने दिया। उसे वही दिया जौ उसे चाहिए थां।।।
मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) – New Episode
आज मेरे प्रिय नें फिन मेरी आत्मा कों प्यासा वापसभेज दिया।।। एक् लड़ाई बहोत तीव्रता सें मेरे अंदर, पता नहि कहां? पता नहि किस जहां मे? वोँ लड़ाई जारी थि।।। मुझेआज बहोत बोझलग रहा थां अपने पे। मुझेऐसे लगरहा थां कि आज मे पागल हौ जाऊँगा।।। इतनीकम उम्र मे मेरी क़िस्मत मेरेसंग ये केसे केसेखेल रही थि।। शायद मुझमे इसबोझ कों उठाने कां बल नहि थां, पर्र जौ भि होँ, क़िस्मत मे येभार अब मुझे उठाना हि थां। मैंने रूम कि लाइटऑफ कि औऱ बेड पे लेट गय़ा।। अपनीआदत सें अलगआज मैंने ज़ीरो वाट बल्ब भि ऑनलाइन नहि किया। आज अंधेरे मे डूब जानाचाहता थां।।।।
मैंने बेड पे लेटकर अपनीजेब सें सेल निकाल केँ साइड टेबल पे रखा। औऱ संग हि मुझेयाद आया कि साना नें मुझे मोबाइल किया थां। इस वक्त मे जैसा थां, कि मेरा साना कों फोन करके सॉरी कहने कां कोई इरादा नहि थां। पऱ जौ भि थां साना केँ संग मे बचपन सें थां।। औऱ ऐसा प्यारा संग कि उसकेसंग कों मे खो नहि सकता थां।। वो मेरा हौसला थि।। इसकेसंग जब भि होता थां, तब चाहे कितनी भि तकलीफ़ हौ मे कुछ वक्त केँ लिए आराम महसूस करता थां।। एक् मरहम कां काम करता थां साना कां संग।।।
यही सोचते सोचते मैंने सेल उठाया औऱ साना कों कॉलआई कि
(यहा मे जरा साना केँ बारे मे कुछबता दूँ कि साना केँ घऱ मे उसके अलावा एक् बेहन औऱ एक् भइया हैं औऱ अम्मी अब्बू हें।।। साना केँ पिता डॉक्टर हें (नाम, रफ़ीक आयु 55) औऱ अपना बहोत बड़ा प्राइवेट होसपटल चलारहे हें। साना कि अम्मी घऱ हि रहती हें (एज 47)।।। साना केभाई डॉक्टर हें (नाम, कामरान। आयु 28) अपने पिता केँ हॉस्पिटल कों भि टाइम देते हें औऱ संग हि अपनीआगे कि स्टडी कों भि वक्त देते हें। औऱ साना कि बड़ी बेहन नें एमबीए कियाहुआ हैं (नाम, हुमाआयु 23 औऱ घऱ पर्र हि रहती हैं)
बेलजा रही थि पऱ सानाकॉल आई अटेंड नहि कररही थि।।। शायद वो सो चुकी थि याँ नाराजगी ज्यादा थि, उसका जवाब मेरेपास नहि थां।। मैंने एक् बारफिन कॉलआई कि तोँ इसबार उसने थोड़ी देर मे कॉलआई अटेंड करली। (साना, उसकी बेहन औऱ उसके भइया कां सभी केँ सेपरेट कमरे हें) पर्र कुछ बोलीं नहि। मे "" हेलो "" बोला। सानाफिन भि चुप हि रही।।। मे पहले सें बहोत डिस्टर्ब थां औऱ अब साना भि कुछबोल नहि रही थि तौ मुझेफिन सें उस पे क्रोध आनेलगा। इसबार मैंने थोड़े गुस्से कां इजहार करतेहुए कहा कि: सानाअब कहो भि। नहि तोँ मे कॉलआई काटरहा हूं।। मेरी गुस्साई आवाज़ सुनकर दूसरी ओर सें मुझे हिचकियों कि आवाज़ सुनाई देना शुरुआत होँ गई औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे हिचकी केँ संग रोने कि आवाज़ भि आनेलगी। मेरी पहले कि सारी टेंशन औऱ क्रोध जैसे एक् समय मे हवा होँ गय़ा।। मे हैरान सां फोनकान सें लगाएहुए बस साना केँ रोने कि आवाज़ सुनता रहा। मे उससमय ये भि भूल गय़ा कि उससे पूछूँ कि आखिरहुआ क्याँ हैं, वोँ रो क्यूं रही हैं।।
साना कों मैंने हमेशा हंसते मुस्कुराते औऱ शरारती आँखों सें हि देखा थां।। पर्र आज वो रोती आँखें? ऐसे तौ मैंने साना कों कभी नहि देखा थां।।। आखिरकार मैंने बौखलाए हुए स्वर मे साना सें पूछा कि: सना क्याँ हुआ हैं तुम्हें ? पऱ साना तोँ ऐसेरोए जारही थि जैसे उसनेआज चुप न् होने कि शपथखा रखी होँ।। मेरेदिल सें अब साना कां रोना बर्दाश्त नहि हौ रहा थां। मेरे अंदर कि विवशता अब बढ़ती हि जारही थि कि इतने मे साना नें मेरी पहले सें हि बेचैन आत्मा पे एक् औऱ परमाणु बमदे मारा।।
साना नें मुझेकहा आईलवयू सलमान। मुझेऐसे लगरहा थां कि जैसे एक् संग किसी नें हजारों सुई मेरे जिस्म मे घुसेड़ दि हों।
अगर साना कि रोती हुई आवाज़ मुझेफिन सें नं झकझोरती तौ जानेकब तक मे आश्चर्य मे हि डूबा रहता।।। साना नें रोते रोतेकहा कि सलमान कहो न् कुछ जवाबक्यों नहि देरहे मेरीइस बात कां। जवाबआज मुझे चाहिए, अबचुप नहींरहा जाता मुझसे। ऐसे हि साना बहोत कुछकह गई मुझे।। औऱ मे विचारों केँ इस जंगल सें निकलने कां मार्ग खोजने लगा, एक् ऐसे जंगल सें जिसमे मुझे साना केँ इनतीन शब्दों नें धकेल दिया थां, एक् ऐसे जंगल सें एक् बार जौ जिसमे मे धकेल दियाजाए तौ बाहर् निकलने कां मार्ग खोजने केँ लिए बहोत मुश्किल होँ जाता हैं।।।
विचारों केँ इसी जंगल मे भटकते एक् डूबी हुइ आवाज़ मे, मे साना कों बोला कि: साना हम् यार हें।।
साना वैसे हि रोतेहुए बोलि कि: हम् यार हें, औऱ अभि भि हें औऱ हमेशा रहेंगे नाँ, जोँ मेरी तुम्हारे लिए भावनाएँ हें वो भि अपनी स्थान सच हें।।
मैंने उसी स्थिति मे डूबेहुए कहा साना तुम्हें क्याँ हौ गय़ा हैं।
सानाउसी स्वर मे बोलि: मुझे नहि पता मुझे क्याँ होँ गय़ा हैं। बहोत दर्दफील कररही हूं मे अपने अंदर। ""
सानासैफ तुम्हें लाइक करता हैं
"साना केँ रोने मे जैसेकुछ औऱ इज़ाफा होँ गय़ा औऱ वो तड़पकर बोलीं: तुम् मुझे बताओ कि तुम् मुझे लाइक करते होँ याँ नहि?
अचानक मेरेदिल नें बाजी कों बहोत शिद्दत सें याद किया। औऱ मेरादिल ऐसे धड़कने लगा जैसे अभि सीना फाड़ केँ बाहर् आँ जाएगा।।
मैंने कहा: साना मे तुम्हें लाइक करता हूं पऱ एक् यार कि तरह। मेरेइस स्पष्ट जवाब पे साना नें अचानक फोनकाट दि। शायद मेराऐसा कहना अभि सही थां याँ नहि।। मे साना कों धोखे मे नहि रख सकता थां। मे स्वयं किसी कि चाहत मे ऐसा गिरफ्तार थां कि मे जान सकता थां कि इस इनकार सें साना केँ दिल पे क्याँ गुज़री होगी। साना केँ अलावा अगरकोई औऱ भि होती तोँ मे किसी कों भि झूठी तसल्ली प्रेम केँ मामले मे कभी नं देता। एक् सच्ची दोस्ती केँ नाते मे साना कों सहारा दे सकता थां। यही सोचते हुए मैंने फिन सें साना कों कॉलआई कि। उधर सें जबफोन अटेंड हुइ औऱ दूसरी तरफ सें उस मासूम परी कि फिन सें रोने कि आवाज़ मेरे कानों सें टकराई। अब शायद मे भि बहुतहद तक स्थिति कों समझ चुका थां मैंने अपने आप् कों स्वयं सें हौसला दिया औऱ संभाला औऱ एक् गहरी सांस लेतेहुए साना सें बोला: साना।।
उसने वैसे हि रोतेहुए कहा:हाँ।। ""
सानाअब रोना नहि शांत होँ जाओ औऱ मेरीबात सुनो। साना तुम् चुपहोओ तोँ मे कुछ कहूँ नाँ बाबा प्लीज़ अबचुप हौ जाओ
"" साना बोलीं: ओ केँ वेट।। औऱ फिन थोड़ी देरलगी औऱ उसने अपने आप् कों कुछ संभाला औऱ कहा:हां कहोअब मेंठीक हूं।।
ये टाइम मेरेलिए बहोत बड़ी परीक्षा लें केँ आया थां, पऱ जोँ भि थां अब मुझेइस परीक्षण सें गुजरना थां।। मैंने बहोत मुश्किल सें अपने स्वर मे शरारत जोड़ते हुए साना कों कहा कहां ठीक होँ जरा अपनी आवाज़ तौ देखो, रो रो केँ केसे बिगाड़ दि हैं इतनी प्यारी आवाज़।।
सलमान क्याँ कहना चाहते थें, जौ बात हैं वो बोलो --साना नें कहा
मैनेकहा -उठो औऱ पहले पानीपी लो तोँ बात करते हें नां ""
"" ओ केपीती हूं "" पानीपी केँ सानाकहा: हांअब कहो।। "
" सानाये बताओ कि तुम्हें अचानक क्याँ होँ गय़ा हैं "
" साना नें जैसे हि येबात सुनी उसकी हिचकी लेने कि आवाज़ मुझेआई औऱ मुझे जल्दी संकेत मिल गय़ा कि वो अबफिन सें रोने वाली हैं, मे जल्दी कहा: साना नहि अब रोना नहि हैं,, हम् बातकर रहे हें नां इसलिये जौ बात भि करेंगे उसमे रोना धोनाठीक नहीं हैं।।।
साना नें अपने आप् कों संभालते हुएकहा: ओके अच्छा तोँ बताओ कि मैंने पूछा थां कि आप् मुझे लाइक करते हौ याँ नहीं
फिन सानाजब केहना शुरुआत हुइ वो सभीकह गई जोँ उसनेकभी नहि कहा थां "" पहले तोँ सभी सामान्य थां पर्र विद्यालय केँ बाद कॉलेज सें हि मुझेयह फीलहुआ कि मे तुम्हें लाइक करनेलगी हूं, मैंने हमेशा तुम्हारे इनकार केँ डर सें तुमसे स्वयं येबात नहि कही, क्योंकि मे जानती थि कि तुमने हमेशा दोस्ती सें आगे हमारे बारे मे कुछ नहि सोचा, इसलिये मैंने हमेशा येबात अपनेमन मे हि रखी, मुझे तुम्हारे इनकार सें हमेशा डर लगता थां, इसलिये मे चुप हि रही, फिन आजजब बाजार मे तुमने कहा कि मे आज हसीनलग रही हूं तौ सलमान मुझे नहि पतातब सें मुझे क्याँ होँ गय़ा हैं, आपनेआज पहलीदफ मुझेऐसी कोईबात बोलि सलमान बसफिन मुझसे रहा नहि गय़ा औऱ आज मैंने दिल कि बात कहने कां फैसला किया, जौ होगा देखा जाएगा, औऱ फिन जौ हुआ तुम्हारे सामने हैं इसकेसंग हि साना नें एक् लंबी साँसली।
मेरे औऱ साना केँ नसीब करीब एक् जैसे हि थें।। जिस मुंह सें येतीन शब्द सुनने केँ लिए उतावलापन रहा थां उसनेये तीन शब्दआज तक मुझे नहि कहे, औऱ जिसके बारे मे कभी सोचा नहि थां उसनेये तीन शब्द मुझेकह दिए, औऱ उसेअब मुझसे यह उम्मीद थि कि यहीतीन शब्द मे भि उसेकह दूँ, पऱ मे अपनी स्थान मजबूर थां कि यहतीन शब्द तौ जिस कि अमानत थें मैंने उसे सौंपदिए। अजीब हि घन चक्कर थां किस्मत "
" हेलोसो तोँ नहि गए "" साना कि आवाज़ नें मुझे झनझोड़ा
"नहि"
"साना बहुतहद तक संभल चुकी थि, शायद अपनेदिल कां हाल सुनाने सें उसकाबोझ हल्का हौ चुका थां। साना बोलीं सलमान मेरे कारण तुम् परेशान मत होना न् ये सोचना कि हमारी दोस्ती समाप्त, मे तुमसे प्रेम करती हूं औऱ ऐसे हि करती रहूंगी, उस पे मेरा नियंत्रण नहि हैं, हम् अबइस टॉपिक पर्र कभीबात नहि करेंगे, नं कभी मेरा प्रेम हमारी दोस्ती केँ बीच आएगा।।।।।।।।
उसदिन मैंने एक् बात औऱ जानी कि लड़कियाँ हम् लड़कों सें कहीं ज़्यादा मीचोर होती हें। केसे उसने लम्हा भर मे मेरी सारी मुश्किल आसानकर दि,
साना नें फिनकहा: सलमान अब तुम् सोजाओ, कप कॉफ़ी रात हौ गई हैं।। औऱ फिन हम् दोनों नें एक् दूसरे कों बाय बोला औऱ कॉलआई एंड कि।।।
कॉलआई तौ एण्ड होँ गई थि, पऱ जोँ विचारों कां समुद्र वोँ मासूम परी मेरे हवाले कर गई थि, उसी मे गोते खातेहुए जानेकब नींद मुझे आँ घेरा औऱ मे सो गय़ा।
सुभहजब मेरीआँख खुली तोँ रात कों बीते वोँ दोनो वाकये फिन सें मेरेमन मे घूमना शुरुआत होँ गए।। अजीबखेल खेला किस्मत नें कि जोँ लड़की मेरी बेस्ट फ्रेंड थि वही मुझसे प्रेम करनेलगी थि। यही सोचते सोचते मे उठा, फ्रेश होँ केँ नीचे आँ गय़ा।।।
अम्मी औऱ बाजी ब्रेकफास्ट कर चुके थें औऱ टी। वी देखते देखते संग मे गपशपकर रहीथीं।। अबू दफ़्तर जा चुके थें शायद। मैंने अम्मी औऱ बाजी कों सलाम किया। जिसका अम्मी नें तौ सही जवाब दिया पर्र बाजी नें काफ़ी धीमे सें लहजे मे जवाब दिया। बाजी पे पहली नज़र पड़ते हि वो दीवानगी कां आलम शुरुआत हौ गय़ा।। मस्तिष्क नें काम करना छोड़ दिया। मे कोशिश भि बहोत करता थां कि ऐसे मुझसे न् होँ, क्योंकि येबात मेरेलिए हानिकारक भि साबित हौ सकती थि। किसी कों भि मेरीइस दीवानगी सें मुझ पऱ शक होँ सकता थां।। बहोत प्रयास केँ बावजूद मुझसे ये दीवानगी नियंत्रित नहि होती थि।।
मे दीवानगी कि हालत मे चलते चलते डाइनिंग टेबल पे जा बैठा।। अम्मी किचन मे मेरेलिए ब्रेकफास्ट बनाने चली गई। मे बाजी कों वैसे हि देखता रहा।। बाजी नें मुझे बिल्कुल नहि देखा। औऱ टी। वी पे निगाहें जमाएरखी।। बाजी बहोत कंफ्यूज लगरही थीं। शायद मेरी उपस्थिति सें, याँ शायद मेरी नज़रों कों अपने पे महसूस कर याँ शायदकोई औऱ कारण य्चा इसका मुझेपता नहि थां।।। थोड़ी देर तक काम वाली मौसी ब्रेकफास्ट लेँ आई औऱ टेबल पे लगा दिया।। हम् बेहन-भइया भि उन्हें चाची हि कहते थें।। वो शायदतब सें हमारे घऱकाम कररही थि जब मे ** साल कां थां। अम्मी कि बहोत चहेती थि।। बहुत वक़्त सें किसी मजबूरी केँ आधार पे छुट्टी लेकर गई हुई थि।।। यहीं हमारे शहर कि हि थि औऱ साम कों अपनेघऱ वापसचली जाती थि।। मौसी नें कुछ औऱ लाने कां पूछा औऱ रसोई मे वापसचली गई।।।
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