मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) – New Episode
बाजी नें देख लिया कि अब मे उनके बूब्स कों देखदेख दबारहा हूं औऱ उनके बूब्स सें खेलरहा हूं तौ उन्होंने अपनी आँखें बंदकर ली औऱ उनके मुंह सें सिसकी औऱ तरहतरह कि अजीब आवाजें निकलने लगीअहह हाह आँ हम्।।।।। मेरा इतना प्रेम सें निपल्स औऱ चुचों सेखेलना बाजी कों शायद बहोत अच्छा लगरहा थां।।। ऐसे हि खेलते खेलते औऱ देखते देखते पता नहि मुझ दीवाने कों क्याँ हुआ कि मैंने अपने हि जैसीइस दीवानी कां मोटा, गोल, तनाहुआ मम्मा अपने मुँह मे डाल लिया, जितना भि मम्मा मेरे मुंह मे आँ सकता थां मैंने उतना मम्मा अपने मुँह मे डाल लिया औऱ उस प्यारे सें, भावनाओं केँ समुंदर मे हलचल पैदा करने वाले मम्मे पे अपनी ज़ुबान फेरना शुरुआत कर दिया। मम्मा मेरे मुँह मे थां औऱ अपने मुँह मे हि लिए मे उसके निपल पर्र अपनी ज़ुबान फेरेजा रहा थां।।
पहले मैंने बाजी केँ निप्पल केँ अलावा जौ मम्मा मेरे मुँह मे थां उसकेऊपर ज़ुबान फेरी, फिन मैंने उनके निपल्स पे ज़ुबान फेरना शुरुआत कर दिया दूसरी औऱ जैसे हि मैंने बाजी कां मम्मा अपने मुँह मे लिया थां तौ उनके मुंह सें बेइख्तियार निकला: सलमान हायराम सलमान अहहअहह सलमान। बाजी कि सिसकियों नें तोँ जैसे भावनाओं केँ सागर मे एक् सुनामी सां ला दिया। मे पागल दीवानों कां सरदार बन गय़ा।। मैंने मम्मे कों अब होंठो सें चूसना शुरुआत कर दिया।।।। मे मम्मे कों चूसकर जब अपने मुंह सें बाहर् निकालता तौ पलभर कों उनकेबूब कों देखता, जौ मेरे मुंह केँ अंदर जाने सें गीला होँ केँ चमकने लगा थां।।। बाजी कां निप्पल मेरे मुंह कों इतनाभा गय़ा कि पता नहि मुझे क्याँ हुआ कि मेरीनाक उनके निपल्स सें टकराई औऱ मैंने अपनीनाक केँ संग उनके निपल्स सें खेलना शुरुआत कर दिया।। अजीब हि समां थां औऱ अजीबखेल चलरहा थां हम् दो दीवानों, पतंगों केँ बीच।
इस तानाशाह कों भि पीला ड्रेस आज हि पहनना थां, पीलेकलर कि वजह सें हि तौ उसके हसीन मम्मे आज क़यामत सें बढ़ केँ कुछ सितमकर रहे थें।। अबकुछ देरबाद फिन सें उनकेबूब कों मुंह मे लें केँ चूसना शुरुआत कर दिया। बाजी कि आवाजों मे कुछकमी पैदा नहि हुइ थि।। अब मामला उनकी सहनशक्ति सें शायद बाहर् होँ चुका थां उन्होंने अचानक वो किया जोँ मुझेमजे कि उन ऊंचाइयों पऱ लें गय़ा, जिनका आज तक मैंने सोचा भि नहि थां।। उन्होंने अपने दोनों हाथ मेरे कंधों सें उठादिए औऱ मेरेसिर केँ ऊपररख दिए औऱ मेरेसिर कों अपने मम्मे कि ओर दबाया।।। मेरा चेहरा तौ जैसे उनके मम्मे मे दबता हि चला गय़ा।
उनके मोटे मम्मे कां जौ हिस्सा मेरे मुंह सें बाहर् थां वो मेरीनाक औऱ आंखों सें टकराने लगा।।। "" अहहउफ़ अहहअहह सलमान ""। अचानक बाजी केँ पेर मेरेबदन सें टकराएँ, जिससे मुझे अंदाज़ा हुआ कि उन्होंने अपने पांवबेड केँ उपरकर लिए हें। फिन बाजी कां जिस्म जोर सें कांपना शुरुआत हौ गय़ा "" "" "ममममअहह हम् हाँ" "" "फिनकुछ गहरे सांस लेने केँ बाद बाजी एकदम शांत होँ गई।।।।
बाजी नें मेरेहाथ औऱ बाकी मेराबदन जोँ करीब-करीब उनकेऊपर थां उसे पीछे किया औऱ अपनी आँखों पे एक् हाथरख लिया।। मे समझ नहि सका कि ये अचानक उन्हें हुआ क्याँ हैं।। मे फिन सें आगे होँ केँ बाजी केँ चुचे पकड़ने लगा तौ उन्होंने मुझे पीछे कि ओर धकेला औऱ उठ केँ बेड पे बैठ गई औऱ अपनी शर्ट नीचेकर ली।। उनका ब्रा अभि भि यादृच्छिक सां उनकी शर्ट केँ ऊपर सें दिखरहा थां। वो बेड सें उठीं तौ मैंने उन्हें रोकने कि कोशिश कि पऱ वो नहि रुकी औऱ अपने यादृच्छिक सें ड्रेस औऱ स्थिति केँ संग हि मेरे कमरे सें बाहर् निकलगईं।।।।।।।।
आजकुछ वक्त केँ लिए हि सही, पर्र प्रेम कि जीत हुईँ थि।। प्रेम नें कुछ टाइम केँ लिए हि सही, पर्र अपनालाल झंडाइस अन्यायपूर्ण समाज कि धरती पे गाढ दिया थां।।। मे अभि भि प्यासा थां, पऱ फिन भि बहोत खुश थां।।
ड्रेस चेंज करते वक्तजब मैंने अपनीजेब सेल निकाला तौ उस पे बाजी कि बहुतमिस फोन औऱ मेसजज़ थें औऱ फोन औऱ मेसजज़ कां जोँ वक़्त थां वो तब कां थां जब मे साना केँ घऱ एक् साइड मे उसकेसंग थां।।।। बाजी नें मुझेघऱ वापस चलने केँ लिएकॉल आई औऱ मेसजज़ किए थें औऱ मेरासेल साईलनट पे होने कि वजह सें रिप्लाई नहि करसका। फिन वो किसीतरह सें मुझ तक पहुँच गई औऱ फिन जौ हुआ, उसने आत्मा औऱ जिस्म दोनों कों इसजगह पे ला खड़ा किया जहां पे चारों ओर नज़र दौड़ाने पे प्रेम हि प्रेम नज़र आँ रहा थां औऱ कुछ नहि
बाजी लौटकर आँ चुकीथीं औऱ उनके प्रेम नें एक् बारफिन सें मुझे जीवित कर दिया थां। पऱ डर भि तौ संग हि थां नं मेरे कहींफिन सें मेरीजान कहीं मुझसे मुंह न् मोड़ लें। इस पूछेहुए प्रश्न कां जवाब भि तोँ उसनेऐसे दिया थां कि जिसे मे समझ हि नहि सका थां।
सुभहजब मे उठा तौ कितनी हि देर अपनेबेड केँ उस हिस्से पे हि हाथ फेरता रहा जहाँ मेरी सपनों कि रानी केँ संग मैंने प्रेम भरे लम्हा बिताए थें। फिन जाने मुझे क्याँ हुआ औऱ मैंने बेड केँ उस हिस्से कों किस करना शुरुआत कर दिया औऱ फिन कितनी हि देरकिस करतारहा, इसका अंदाजा मुझे नहि।
जब मुझेहोश आया तौ वक्त देखा तोँ बहुतलेट हौ चुका थां। मे उठा, रेडीहुआ औऱ नीचे आँ गय़ा, अपने धड़कते हुएदिल केँ संग कि आज जाने वो मेरेसंग क्याँ सलूक करेगी, जाने क्याँ सितम करेगी अपनी चुप्पी केँ माध्यम सें मेरेसंग।.नीचेआकर देखा तोँ अबू तोँ दफ़्तर जा चुके थें। औऱ अम्मी औऱ बाजीआपस मे बातचीत कररही थीं।। अम्मी नें मुझे देखा तौ पूछा बेटा आजलेट नीचेआए होँ? "
" अम्मी रात बहुतदेर तक पढ़ाई करतारहा तौ लेट सोया "" अम्मी ये सुनकर बहोत खुश हुई औऱ मेरेसर पे हाथ फिराते हुए रसोई कि तरफ़चली गईं मेरेलिए ब्रेकफास्ट बनाने केँ लिए।।
मैंने जब बाजी कों देखा तोँ उनके चेहरे पे कुछ अजीब सि लज्जा औऱ एक् हल्की सि मुस्कान थि। आज मेरे प्रेम मे यहसमय मुझे पहलीबार नसीबहुए थें, कि मेरीजान मुझेदेख यूं शरमाई औऱ मुस्कुराई थि।। अब जैसे वो मेरे हाथों मे हाथ दिये प्रेम केँ संग दुनिया मे जीना चाहती थि, उनके दायरे मे जहाँ दुनिया कि बनाई हुई सीमाओं कि चिंता व्यक्ति सें बहोत दूर हौ जाती हैं।।
मैंने बाजी कों सलाम किया, जिसका उन्होंने जवाब दिया पर्र सिर औऱ अपनी दृष्टि कों झुकाए रखा।।। कितने आराम औऱ राहत सें भरपूर लम्हा थें ये। मेरादिल किया कि बाजी कों अपनी बाँहों मे भरलूँ।।
ब्रेकफास्ट करते वक़्त भि मेरी नजरें बाजी केँ चेहरे पे हि जमी हुई थि, वो भि थोड़ी थोड़ी देरबाद मेरीतरफ देखरही थि औऱ जब मुझे अपनीओर हि देखता हुआ पाती तोँ शरमाकर घबराकर अपनी नज़रें नीचेकर लेती।। आज बाजी कि आँखों मे वो प्रेम थां मेरेलिए, जिसे उनकी आँखों मे देखने केँ लिए मुझे जानेकब सें प्रतीक्षा थां।।।। अभि मे ब्रेकफास्ट कर हि रहा थां कि घऱ केँ नंबर पे फोनआई औऱ अम्मी नें कॉलआई अटेंड कि। अम्मी कि बातों सें मुझे अंदाजा हौ गय़ा कि साना कि अम्मी कि फोन हैं। अम्मी उन्हें आज न् आने कां कहरही थि। फिनकुछ देरबाद अम्मी नें मोबाइल रख दिया औऱ मुझे कहनेलगी कि: आज मेरी भि तबियत कुछठीक नहि औऱ हिना भि नहि जानां चाहती, इसलिये मैंने उन्हें कह दिया कि आज हम् नहि आएंगे।। मे कहाओ केँ अम्मी जैसे आप् चाहते हें। मे ब्रेकफास्ट फिनिश करके अपनेरूम मे आँ गय़ा।
मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) – New Episode
रूम मे आकर मैंने अपनासेल साइड टेबल सें उठाया तौ उस पे साना कि मिसफोन थीं।। टाइमिंग देखी तौ रात औऱ अब सें कुछदेर पहले कि भि मिसफोन थीं।।। मैंने साना कों कॉलबैक कि तौ कॉलआई अटेंड होने पे दूसरी ओर सें साना कि घबराई हुईँ आवाज़ आई: सलमान तुम् ठीक तौ होँ नां?
"हाँ हूं मे ठीक हूं" " मैने जवाब दिया
" रात सें फोनकर रही हूं दोस्त, मेरीजान निकली हुई हैं, आदमी रिप्लाई हि कर देता हैं, तुम्हें पता भि थां कि मे परेशान होउंगी। "
" सॉरी मेरासेल हि साईलनट पे थां "" "
" हिना बाजीकुछ कहा तोँ नहि? याँ कोई प्रोब्लम तोँ नहि बनी?सोच सोच केँ पागल होँ रही हूं कि मे उन्हें अबफेस केसे करूंगी? "" साना एक् हि सांस मे कितने प्रश्न कर गई।
((मैंने मन मे सोचा, मे जितना तुम्हारा धन्यवाद अदा करूँ उतना हि कम हैं, तुम् न् होती तौ मे बाजी केँ प्रेम कों कभी प्राप्त हि नहि कर सकता थां, ये तुम् हि तोँ थि जिसके प्रेम कि चोटों नें इस पत्थर दिल कों पिघला दिया))
मे कहा: दोस्त कुछ नहि होता, उन्होने किसी कों भि येबात नहि बताई, सभी सामान्य हैं, तुम् परेशान नं हौ।।
"थैंक्स गॉड, पऱ मुझे अभि अम्मी नें बताया कि तुम् लोगआज नहि आओगे, ऐसा क्यूं?" साना नें पूछा
"अम्मी कि तबीयत कुछठीक नहि हैं इसलिये नहि आँ रहे, तुम् परेशान न् होँ, बाकीसभी ठीक हैं" मैने साना कों तसल्ली दि
साना नें येसुन एक् गहरी साँसली औऱ कहा:ओ केठीक हैं, बटआईएम मिसिंग यूसोमच इतनी घबराई हुई हूं औऱ चाहती हूं कि तुम् मेरेपास हौ।। "
" कुछदिन बाद कॉलेज भि प्रारंभ हौ रहे हें, तबरोज हि मिलना होगा " मैने जबाव दिया
" सलमान यहदिन बहोत मुश्किल सें गुज़रेंगे। "। साना नें दुःखी होतेहुए कहा
अब सलमान उस मासूम परी कों अपने स्वार्थ कां केसे बताता कि जिस सलमान कों वो पागलों कि तरह चाहती हैं, वो सलमान तोँ एक् बहोत स्वार्थी इंसान हैं, जिसने अपने आराम केँ लिए हमेशा अपनी सबसे अच्छी मित्र कां इस्तेमाल किया।। ऐसे हि थोड़ी देर बातचीत केँ बाद हमनेफोन डिस्कनेक्ट कि औऱ मे ये सोचने लगा कि केसे साना कों कहूँ कि मैंने उससेकभी प्रेम किया हि नहि। अब मे साना कों औऱ धोखा नहि देना चाहता थां।
रात 11। 30 बजे, मे अपनेबेड पे लेटा अपनी पोजिशन बारबार चेंजकर रहा थां। वक्त थां कि बीतने कां नाम हि नहि लेँ रहा थां।। दिल कीधड़कन भि शायद यादृच्छिक सि हुई पड़ी थि।। बारबार टाइमचेक करता कितनी विवश्ता थि।। जिंदगी केँ हसीन लम्हा जैसे वक़्त केँ मोहताज हौ केँ रहगए थें।
फिन जैसे हि 12 बजे मे अपनेरूम सें निकला औऱ बाजी केँ रूम कि ओरचल पड़ा औऱ जाकर बाजी केँ डोर कों नोक किया।। कुछ हि देर मे बाजी नेडोर ओपन किया औऱ एक् साइड मे हौ गई औऱ मुझे अंदरआने कां मार्ग दिया।।। मेंने अंदर प्रवेश किया तौ उन्होंने डोरबंद कर दिया।। ऐसा उन्होंने पहलीबार किया थां। अब जैसे हम् दोनों प्रेम केँ रास्ते पे एक् दूसरे कां हाथ थामे, एक् दूसरे सें कदम सें कदम मिला केँ चलरहे थें, मे बहोत खुश थां, बहोत खुश। चेयर पे जा केँ बैठ गय़ा औऱ बाजी अपनेबेड पे।।।
कुछदेर कमरे मे यूं हि चुप्पी छाईरही औऱ फिन मे उठा औऱ बाजी केँ संग उनकेबेड पे जा बैठा।। बाजी केँ बदन कों जैसे एक् झटकालगा औऱ उन्होंने मेरीओर देखा औऱ कहा "" हम् मम क्याँ
"मे कहा: कैसी होँ तुम्। "
"ठीक हूं" बाजी नें शरमाते हुएकहा
"मैंने बाजी कां एक् हाथ पकड़ लिया औऱ बाजी नीचे देखने लगी।। मुझेकुछ समझ नहि आँ रहा थां कि क्याँ करूं। फिन कुछदेर बीतने केँ बाद मैंने धड़कते दिल केँ संग, वैसी हि बैठे बैठे साइड सें बाजी कों हगकर लिया।
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परफेक्ट हग नहि थां फिन भि इस भावना नें हि मुझे बेहाल कर दिया थां कि मेरीजान मेरी बाहों मे हैं। कुछदेर हि गुज़री तौ बाजी भि नें मुझेयूं हि हगकर लिया।। कितनी हि देर हम् दोनों एक् दूसरे कि बाँहों मे यूं हि खोेये रहे।
बहुतदेर बीतने केँ बाद मे पीछे कों हुआ औऱ अपने दोनों हाथ बाजी केँ दोनों गालों पे रखदिए औऱ बाजी केँ चेहरे कों अपनीओर किया औऱ बाजी कि आँखों मे आँखें डाली।।। प्रेम कां एक् समुद्र मुझे उनकी आँखों मे नज़रआया। फिन वो हुआ जोँ ऐसे समुंदर मे मेरे जैसे तैराक केँ संग होता हैं। मे डूब गय़ा। मेरे होंठ उनके होंठों पे जा टिके औऱ ऐसेलगा कि जैसे वो भि जन्मों सें इसी क्षण कि खोज मे भटक रहींथीं। उसने मेरे होंठों कों अपने होंठों सें इतने प्रेम सें थाम लिया कि मुझेऐसा लगा जैसे मेरीजान हि निकल जाएगी। हम् दोनों एक् दूसरे केँ होंठों कों चूमना शुरुआत हौ गए। कितनी हि देर होठों कि प्यास बुझाते रहे हम् एक् दूसरे केँ संग। अब हम् होठों कि प्यास बुझाने केँ संग अपनी ज़ुबानों कों भि एक् दूसरे केँ संग जोड़ने लगे। फिन प्रेम कां वो खेल शुरुआत हौ गय़ा, जोँ हम् दोनों सुभह सें शिद्दत सें प्रतीक्षा कररहे थें।।
आज बाजी नें भि मेरे चेहरे केँ एक् हिस्से कों चूमा। अब हम् दोनों नें एक् दूसरे कि गर्दन होंठ लगाए, एक् दूसरे कि गर्दन कों चूमेजा रहे थें।। बाजीजब मेरी गर्दन पे अपनी ज़ुबान फेरती तौ बेइख्तियार मेरे मुंह सें निकल जाता "" आईलवयू "औऱ बाजी उत्तर मे बस" हम्, हम् "हें।।। मेरेकान बाजी केँ मुँह सें आईलवयू सुनने केँ लिएतरस औऱ प्यास कररहगए थें, पर्र उन्होंने आज तक मुझे जवाब मे ये नहि कहा थां।।
बाजी कि गर्दन कों चूमते चूमते मैंने बाजी कों शोल्डर्स सें पकड़ा औऱ उन्हें बेड पे लिटा दिया। एक् अजीब सां पागलपन थां हम् दोनों केँ इस मिलन मे, साँसें उखड़ी हुइ कपड़े अस्त व्यस्त सीने केँ अंदर मौजूद भावनाए यादृच्छिक। बाजी कों बेड पे लेटाकर मे भि करीबआधे सें ज्यादा उनकेऊपर हि लेट गय़ा थां।। अबफिन सें मेरे होंठ बाजी केँ होंठों पे आँ चुके थें औऱ मेरा एक् हाथ जोँ उनके राइट शोल्डर पे थां वो हाथ रेंगता हुआ उनके लेफ्ट वाले मम्मे कों थाम चुका थां। जैसे हि मैंने उनके मम्मे कों पकड़ा तौ उनके मुंह सें बेइख्तियार अहहहाय राम निकला। एक् तरफ उनकेनरम होंठ मेरे होंठों मे थें औऱ दूसरी ओर उनकानरम मम्मा मेरेहाथ मे थां।। ऊपरनरम होंठ मेरे होंठों मे दबरहे थें औऱ नीचेनरम मम्मा मेरेहाथ मे दबरहा थां
बहुतदेर बीतने केँ बाद मैंने अपना वो हाथ नीचे किया औऱ बाजी कि कमीज केँ अंदर डालने लगा तौ दिदी नें मेरा वो हाथ पकड़ लिया औऱ अपने होंठ पीछे करतेहुए भावनाओं मे डूबी औऱ टूटी हुईँ आवाज़ मे कहा कि "सलमान ऐसेमत करो नाँ "मैंने बाजी कि आँखों मे आँखें डालकर कहा बाजी धीरे-धीरे सें दबाउंगा बस।। मेरीये बातसुन केँ बाजी केँ चेहरे पे हया कां एक् रंग आँ केँ गुजरा औऱ उनका भावनाओं कि तीव्रता सें लालहुआ चेहरा औऱ लाल होँ गय़ा।।। बाजी बोलि: पागल व्यक्ति, ऐसे नहि कहते।। बाजी केँ चेहरे पे हयादेख औऱ उनकीये बात सुनकर मेरे होंठों पे एक् मुस्कान सि आँ गई।। मेरे होठों कि मुस्कान बाजी कि हयासह नं पाई औऱ उन्होंने अपनी आंखें बंदकर ली।। पर्र मेरेहाथ कों वैसे हि पकड़े रखा।।
मे अपनेहाथ कों ऐसे हि उनकी शर्ट मे डालने कि कोशिश करतारहा, तौ कुछ हि देर कि कोशिश औऱ एक् प्रेम भरी चुप्पी कि लड़ाई केँ बाद मे उनकेबूब कों ब्रा केँ अंदर सें पकड़ने मे सफल होँ हि गय़ा। उनके नंगेबूब कों पकड़ना शायद उन्हें भि बहोत अच्छा लगा कि उनके मुंह सें सिसकियाँ निकलने लगी। कितना हि वक्तबीत गय़ा औऱ मे उनकेबूब कों ऐसे हि दबाता रहा औऱ उनके निपल्स केँ संग भि खेलता रहा।।
ऐसे हि करते करते मे पीछे कों हुआ औऱ मैंने दूसरा हाथ भि बाजी कि कमीज मे डालकर उनके दूसरे मम्मे कों भि पकड़ लिया औऱ बाजी नें मजे मे डूबी आवाज़ मे कहा: "नहि सलमान अहहअहह छोड़ो नाँ उफ़मम मम"अब मे बाजी दोनों मोटे मम्मे दबारहा थां औऱ बाजी आंखें बंदकिए अपनेसिर कों मजे मे डूबीउधर उधरझटक रहीथीं। बाजी केँ बूब दबाते दबाते अब मैंने अपने दोनों हाथ बाहर् निकाले औऱ बाजी कि कमीज कों ऊपर कि ओर करनेलगा तोँ उन्होंने बहोत प्रेम सें मेरे दोनों हाथ पकड़कर मुझेमना करने कि कोशिश कि। यह वोँ भि जानती थि कि अब मे रुकने वाला नहि हूं, औऱ फिनवही हुआ मैंने बाजी कि कमीज ब्रा सहितऊपर कर दि औऱ उनके दोनों क़यामत खेज मम्मे नंगेकर दिए।। ज्यों हि बाजी केँ मम्मे नंगेहुए औऱ मेरी निगाहों सें बाजी कि निगाहें टकराई तौ बाजी नें लज्जा केँ मारे अपनी आँखें बंदकर लीं औऱ अपने दोनों हाथ अपने चेहरे पे रखकर चेहरा छिपा लिया।।।
उनकीये अदा मेरेदिल कों बहोत हि भइया मे आगेहुआ औऱ बहोत हि प्रेम सें उनके लेफ्ट वाले मम्मे केँ निप्पल कों होंठों मे लें लिया औऱ बहोत प्रेम कियाउसे।।। बाजी कां नन्हा मुन्ना सां निप्पल मेरे होंठों केँ बीच मे आँ केँ पूरेरूप मे प्यास उठा थां, औऱ फिन जैसे हि मैंने उस पे अपनीजीब फेरी तौ ऐसेलगा जैसे मुझेकह रहा होँ कि क्यूं करते होँ मुझे इतना दीवानों कि तरह प्रेम।। ऐसे हि प्रेम करते करते मैंने अपने होंठ बाजी केँ दूसरे बूब पे रखदिए औऱ उसके निप्पल कों भि ऐसा हि प्रेम किया।। आज मे उनके पूरे चुचे कों मुंह मे नहि डालरहा थां बस निपल्स हि चूसेजा रहे थें, चाटता जारहा थां औऱ बाजी कि हालत खराब होतीजा रही थि। इतने मे बाजी नें पास पड़ा अपनासेल उठाया औऱ उस पे कुछ करके साइड मे रख दिया औऱ फिन दोनों हाथों सें अपना चेहरा छिपा लिया। मे वैसे हि निपल चूसेजा रहा थां कि कुछदेर बाद बाजी नें कहा सलमान तुम्हारा सेल किधर हैं। मैंने कहा यहीं पर्र। "
" सलमान सेल साइलेंट पे हैं तुम्हारा " बाजी नें कहा
" जी "
दिदी नें मुंह बनाते हुएकहा: गलती सें उसे जनरल पे कर लियाकरो नां, निकालो अपनासेल।।
मैंने कुछ नं समझआने वाले अंदाज मे अपनीजेब सेल निकाला औऱ देखा तोँ उस पऱ बाजी कां हि मैसेज आयाहुआ थां। मैंने मैसेज ओपन किया तोँ लिखा थां "" पूराकरो नां "
मुझेसमझ नहि आया कि बाजी केँ कहने कां मतलब क्याँ हैं।। मैंने पूछा:ये आपने क्याँ लिखा हैं मुझेसमझ नहि आया। बाजी नें अपने चेहरे कों यूँ हि हाथों मे छिपाए हुएकहा: कुछ नहि केसे कहूँ मे।।।
"पता नहि क्याँ आपने" मैनेफिन पूछा
"सलमान प्लीज़ चुप हौ जाओ" बाजी नें शरमाते हुएकहा
मैंने उन्हें एक् हाथ सें पकड़ते हुए उनके चेहरे कों पीछे किया औऱ पूछा:पता नहि क्याँ कहना चाहती हें आप्। बाजी कि आँखें अब भि बंद थि। मैंने उनके होठों पे एक् किस किया औऱ फिन पूछा:
पता नहीं,, बाजी नें कहा
नाँ बाजी नें अपनी आँखें खोली औऱ न् हि मेरे प्रश्न कां जवाब दिया। अब बल्कि उनके चेहरे सें यों लगनेलगा जैसे वो मेरेइस प्रश्न सें चिढ़ना शुरुआत हौ गई हें। मैंने सोचा कि इससे पहले वो मुझेफिन सें एक् धक्का दें बेहतर यही हैं कि उन्हें ज़्यादा तंग न् करूँ औऱ प्रेम भरेखेल कों जारी रखूं।
मैंने फिन सें बाजी केँ निप्पल कों मुंह मे लेँ लिया औऱ उसे प्रेम करनेलगा औऱ हम् बेहन भइयाफिन सें मजे केँ समुद्र मे डूबते चलेगए।।। थोड़ी हि देर बीती थि कि मेरे नंबर पे बाजी नें एक् औऱ संदेश किया।। अजीब हि सिलसिला थां ये प्रेम कां, हम् एक् दूसरे सें रोमांस केँ रिलेटड बात संदेश पे कररहे थें। मैंने संदेश ओपन किया तौ बाजी नें लिखा थां "उल्लू उसेफुल किसकरो"
मेरे होंठों पे एक् मुस्कान आँ गई। अब मे समझा कि मेरीजान मुझे कहना क्याँ चाहती हैं।। बाजी कां मतलब थां कि उनके पूरे मम्मे कों किस करूं। ये पहलीबात थि जोँ बाजी नें मुझेकही थि औऱ मुझेऐसे लगनेलगा जैसे वो सुख कां एक् जहांन मेरी झोली मे लाकरडाल रही हैं।।। मैंने शरारती अंदाज़ मे मुस्कुरा केकहा: क्याँ कहरही हें करूँकिस "
" सलमान "
" बाजी केँ इतना हि कहने कि देर थि कि उनका जितना बूब मेरे मुँह मे आँ सकता थां मैने अंदर लिया औऱ उसे चूसने लगा।। उनके चुचे पे गोलगोल ज़ुबान फिराने लगा औऱ ऐसे हि उनके निपल्स कों भि अपनी ज़ुबान सेरगड़ने लगा।
बाजी कां मम्मा अपने मुँह मे डाल केँ चूसता हुआ बाहर् निकाल लेता औऱ फिनऐसे हि जितना मेरे मुंह मे जा सकता हैं मे अपने मुंह मे डाल लेता औऱ चूसता।।। रोमांस केँ बीच बाजी सें बात करना मुझे बहोत अच्छा लगरहा थां, पर्र बाजी मेरी किसीबात कां रिप्लाई नहि करतीथीं ((सही हि तौ थां बाजी औऱ मे अभि भि हम् चलते चलतेजिस जगह पे आँ गए थें, उसजगह कां आज सें कुछ वक़्त पहले शायद बाजीकभी कल्पना भि नहि कर सकतीथीं।। इसजगह पे बाजी कों लाने वाला भि तोँ उनका दीवाना छोटा भइया हि हि थां अगर बाजी पे होता तोँ हमारा ये प्रेम कभी जन्म हि नहीं लेता )) अब मैंने उनके दोनों चुचों कों इसीतरह बारी बारी चूसना शुरुआत कर दिया। हम् दोनों दीवाने यूँ हि मस्ती मे खोेٔये हुए दुनिया सें बेगाने अपने प्रेम मे व्यस्त थें।। बाजी कि सिसकारियों मे पहले सें भि तेजी आँ चुकी थि।।। औऱ उनकीमजे मे डूबी आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ह ह्ह्ह्ह्हआह हम् ममअरे कि आवाज़ मेरे कानों सें टकरारही थीं। अब मैंने बाजी केँ दोनों स्तन कों अपने हाथों मे थाम लिया थां औऱ मजे लें लेँ लेकरदबा रहा थां औऱ मजे लेँ लें लेकरचूस रहा थां। अब मैंने बाजी केँ गोरे, गोल, मोटे स्तन कों साइड सें भि चूसना शुरुआत कर दिया थां, क्योंकि ये साइड अभि मेरे चूसने कि चपेट मे नहीं आँ सकी थि।
बाजी केँ चुचों पर्र मेरे होंठ औऱ जीभ केँ हमले गंभीर सें गंभीर होतेजा रहे थें। उनके मुंह सें बेसाखतह यह आवाज़ निकलरही थि: उफ़अहह हम् मम सलमान अरे अहहमम पागल होँ तुम् आँ ह।। बाजी नें अपने दोनों हाथअब मेरेसिर केँ ऊपररख लिए थें औऱ मेरे बालों मे अपनी उँगलियाँ बहोत प्रेम सें फेररही थीं।।
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