मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) – New Episode
बाजी केँ बूब्स चूस्ते चूस्ते मैंने अपना राइट वालाहाथ उनके लेफ्ट वाले मम्मे सें हटाया औऱ नीचे उनकेपेट पर्र सरका दिया। थोड़ी देर उनके केपेट पे हाथ फेरने केँ बाद मेराहाथ नीचे कि तरफ हौ गय़ा।। बहकी भावनाए, मजा, मस्ती, येसभी हम् दोनों पे ऐसे हावीहुए थें कि हम् दोनों बिल्कुल अपनेहोश मे नहि रहे थें। मैने औऱ नीचे कि तरफहाथ बढ़ाया अब बाजी कि भारी भारी जांघों पे हाथफेर रहा थां।। कुछदेर बाद मैने वो हाथ बाजी कि जाँघो पर्र फेरते फेरते बाजी कि थोड़ी सि खुली हुई टांगों केँ बीच मे डाल दिया औऱ अपनेहाथ कों बाजी कि योनी पे रख दिया औऱ बाजी कि योनी कों सलवार केँ ऊपर सें हि अपनेहाथ कि उंगलियों सेरगड़ने लगा।।।।।।।।।।।।।।।।
मेरेहाथ कों अपनी योनी पे फील करते हि बाजी केँ जिस्म कों जैसे करंट सां लगा औऱ वो हल्के सें चिल्ला पड़ी आह्ह्ह्ह्ह्ह आँ हअहह सलमान पीछेकरो अपनाहाथ वहा सें अहहअहह सलमान उफ़अहह। बाजी नें अपना एक् हाथ मेरेसिर सें उठाया औऱ मेरेउस हाथ पे रखा जोँ उनकी योनी पे थां औऱ मेरेहाथ कों पीछे करने कि कोशिश करनेलगी।।। मे एक् तोँ पहले सें हि सेक्स केँ नशे औऱ मजे मे डूबा थां ऊपर सें जब बाजी कि योनीहाथ मे आई तोँ जैसे बिल्कुल हि तीव्र भावनाओं सें बेकाबू सां हि हौ गय़ा पर्र।।। बाजी कि नं नं औऱ मुझे पीछे होने कां कहना हि जैसे मुझे औऱ हि मजे देताजा रहा थां।।। उनके बूब्ज़ कों वैसे हि चूसरहा थां औऱ संग हि अपनेहाथ कि उंगलियों सें उसकी योनी रगड़रहा थां। बाजी नेनीचे पैन्टी नहीं पहनी हुईँ थि, येबात जैसे हि उस वक़्त मैंने उनकी योनी कों टच कियातब हि मुझेपता चल गय़ा थां। मेरी उंगलियां बाजी कि योनी केँ लिप्स केँ बीच स्लिप हौ रहीथीं। बाजी कि हालतउस वक्तये थि कि न् उधर केँ रहे नं उधर केँ। बाजी एक् ओरमजे मे डूबी अपनी गीली योनी मुझसे रगड़वा रही थि औऱ दूसरी तरफ मुझे हल्के सें मना भि कररही थीं कि "" सलमान नहि प्लीज़ हाथ हटाओ यहां सें सलमान यह क्याँ कर दिया क्या बात है अहहअहह उफ़अहह पागलऐसे नहि अहहमम मम सलमान नहि।
सलमान भि इस वक़्त मरता क्याँ नं करता, पागलों कि तरह अपनीइस दीवानी जान केँ बदन मे डूबापता नहि कहां खोयाहुआ थां।।।। अचानक बाजी नें मेरेसर पे जोँ हाथरखा थां उसेजोर सें दबाना शुरुआत कर दिया मेरेसिर पे, जिससे मेरा मुँह उनके मम्मे पे दबना शुरुआत हौ गय़ा औऱ नीचे सें बाजी नें अपनी योनी कों ऊपर नीचेऊपर नीचे करना शुरुआत कर दिया। फिन धीरे-धीरे धीरे-धीरे बाजी कि इस प्रक्रिया मे तीव्रता आनेलगी। मुझे भि ऐसे लगनेलगा कि मे फारिग होने वाला हूं, मेरा लन्ड तब बाजी केँ एक् पेर केँ संगलगा हुआ औऱ लोहे कि तरह सख़्त हालत मे थां।। उधर बाजी भि फारिग होने वाली थि औऱ अपनी योनी कों ऊपर नीचेकर रही थि मेरेहाथ पर्र। इधर मे अपना लन्ड बाजी केँ पांव केँ संग घर्षण करके फारिग होने कि पूरी तैयारी मे थां। औऱ फिन बाजी नें अंतिम कुछ झटके मारे औऱ सलवार केँ अन्दर हि डिस्चार्ज होँ गई औऱ मे भि उनकेपेर केँ संग हि अपना लन्ड रगड़ते रगड़ते डिस्चार्ज होँ गय़ा।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
दिन बीतते जारहे थें। मेरेदिन रात हुश्न, प्रेम, प्रेम सें भरपूर औऱ भावनाओं मे, रमणीय आराम मे डूबेहुए गुजररहे थें। हांबस कुछकमी अभि भि बाकी थि। बाजी मिलन कि आखिरी सीमा तक मुझे जाने नहि देती थि औऱ मिलन केँ टाइम मुझसे ज़्यादा बात नहि करती थि। हांये भि सच हि थां कि मे स्वयं जाने क्यूं उस वक़्त उनसेबात करतेहुए बहुत घबराता थां। परसचये भि थां कि उस टाइम उनकेसंग जौ बिल्कुल थोड़ी सि बात भि होती थि उसमें मुझे सकून औऱ शांति बहोत मिलती थि।
आज मेरा कॉलेज प्रारंभ हौ रहा थां। मे उठा सजधजकर होँ केनीचे आया। ((बाजी कां कॉलेज अभि करीब 2 हफ्ते बाद प्रारंभ होना थां)) नीचे अम्मी अब्बू नाश्ते केँ टेबल पे हि थें। उन दोनों कों नमस्ते करने केँ बाद मैंने ब्रेकफास्ट प्रारंभ किया।
अचानक अबू नें पूछा: सलमान स्टडी कैसीजा रही हैं? "
" जीअबू बहोत अच्छी ""
"गुड मे हिना कि तरह तुम्हे भि डॉक्टर बनता देख्ना चाहता हूं"
"जीअबू"
फिनकुछ देरबाद अबू नें पूछा औऱ कोई प्रोब्लम तौ नहि?
"नहि अबूसभी ठीक हैं"
"ओ केँ गुड"
मैंने जल्द जल्द ब्रेकफास्ट खत्म किया औऱ अपनी पुस्तक उठाता हुआ बाहर् निकल गय़ा।। बाहर् आकर मे एक् गहरी साँसली। अबू केँ पास मेरा जितना भि वक़्त गुज़रता थां वो बिल्कुल ऐसे कि जैसे अभि मेरीजान निकल जाएगी।।। वोँ अगर सामान्य ढंग सें भि बात करते तोँ ऐसे लगता जैसेअब जान हि निकाल देंगे
कॉलेज आया हि थां कि सानाआई औऱ मुझे अपनेसंग लिए कॉलेज केँ बैक साइड पे आँ गई। जहां करीबकोई नहि आता जाता थां। मैंने कहा, "दोस्त बाकी दोस्तों सें तौ मिल लेनेदो"
साना बोलि "तुम्हें बहोत प्रेम आँ रहा हैं उन पे चुप करकेयहा बैठो" औऱ हम् दोनों वहा पे मौजूद बेंच पे बैठगए।।।
"सलमान तुम्हें पता हैं मैंने केसेये दिन बिताए, मरनेवाली होँ गई थि मे" कह केँ साना नें मेराहाथ पकड़ लिया।।।
ज्यों हि साना नें मेराहाथ पकड़ा मैंने उसकी आँखों मे देखा।। उसकी आँखों मे मेरेलिए मौजूद गहरा प्रेम झलकरहा थां, मैंने उसी लम्हा सोचा कि आज साना कों सचबता देता हूं कि मे उससे प्रेम नहि करता, उसकेबाद जौ होगा देखा जाएगा। पऱ अब मे साना कों औऱ धोखा नहि देना चाहता थां।।। साना जैसीपरी (हुश्न कि मालिका) धोखा खाने केँ लिए नहि बनी थि, वो तोँ इसलिये बनी थि कि उसेकोई बहोत प्रेम करे, इतना प्रेम करे कि पूरा जिंदगी उसकी पूजा मे हि गुज़ार दे।। वो दिल औऱ नेचर मे कमाल कि लड़की थि।।।
अपने अंदर मौजूद हिम्मत कों बढ़ाने केँ बाद साना कों सच बताने केँ लिए मुंह खोलने हि वाला थां कि साना नें मेरेगाल पे किसकर दि जब साना केँ नरम होंठजब मेरेगाल सें टकराए तौ मुझे एक् करंट सां लगा।। साना इतनी खूबसूरत हुश्न सें भरपूर लड़की थि कि जल्दी जैसे मेरेसब विचारों नें पलटा खाया औऱ मैंने एक् हारेहुए सिपाही कि तरह साना केँ खूबसूरती केँ आगे घुटने टेकदिए।।
मैंने साना कां हाथ पकड़ा औऱ उसे वहींपास हि मौजूद एक् पेड़ केँ पीछे लें गय़ा। यह पेड़ बहोत बड़ा औऱ बहोत प्राचीन थां।। वैसे तोँ उसकी पिछली साइड पे कोईआता नहि थां अगरकोई आँ भि जाता तौ हमेंदेख नहि सकता थां, क्योंकि उस पेड़ नें हमें छिपा लिया थां।।। पेड़ केँ पीछे जाते हि मैंने साना कि कमर पे एक् हाथरखा औऱ दूसरे हाथ कि उंगलियाँ उसके बालों मे बालों डाल दि औऱ हम् दोनों किसिंग करनेलगे। मेरे होठों कां स्पर्श साना कों बेहाल करने केँ लिए पर्याप्त साबित हुआ। मे भि साना केँ नरम हसीन होठों कि गर्मी सें अपने आप् कों पिघलने सें न् बचासका। हमारी किसिंग मे तीव्रता आतीजा रही थि।।।
एक् दूसरे सें जीब लड़ाने केँ बाद औऱ अच्छी सि किसिंग केँ बादअब मेरे होंठ साना कि गर्दन पे फिसलते जारहे थें औऱ साना केँ होंठ भि मेरी गर्दन पे अपना चमत्कार चलारहे थें।। साना केँ संगयह समय बिताते हुए मुझे आराम बिल्कुल नहि मिलरहा थां, क्योंकि दिल कां कनेक्शन तोँ आत्मा सें होता हैं औऱ मेरी आत्मा इस टाइम मेरे गिले शिकवों मे व्यस्त थि कि सलमान तुँ अपना प्रेम चाहत हासिल करके भि मेराखून करने पे क्यूं तुला हैं।।। पऱ सलमान पे तब नियंत्रण दिल कां नहि उसकेमन कां चलरहा थां।।।
मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) – New Episode
साना कि गर्दन पे किसिंग करते करते मैंने साना कों पेड़ केँ संगलगा लिया, हम् दोनों एक् दूसरे कों यूं हि चूमने मे व्यस्त थें कि मैंने अपना वो हाथ जोँ साना कि कमर पे रखा थां उसे साना केँ एक् बूब पे रखा औऱ उसका एक् बूब दबाने लगा। साना कां बूब दबाते दबाते अचानक मेरा लन्ड एक् झटकामार केँ जागउठा, बिल्कुल उस शख्स कि तरह जोँ कच्ची नींद मे सोया सपनादेख रहा होता हैं औऱ फिन सपना देखते देखते अचानक एक् झटके मे जाग उठता हैं। साना केँ मुँह सें सिसकियाँ निकलरही थि औऱ सानाकह रही थि "सलमान अहहअहह हम्ममम अहह नहि करो सलमान अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह। साना कां पहला प्रेम औऱ साना केँ जिंदगी मे वो पहला शख्स थां जोँ उसेछू रहा थां।।। अपनेबूब जैसी संवेदनशील स्थान पे मेरे स्पर्श सें साना कों शायद बहोत मजा आँ रहा थां।।।।
साना केँ बूब्स दबाते हुए अचानक मेरेमन मे कुछ विचार आया औऱ मैंने साना कों कहा: साना तुम्हारे बूब्स कितने मोटे हें
"सलमान धीरे-धीरे आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह"
हम् दोनों एक् दूसरे कीगरदन कों चूमेजा रहे थें औऱ संग हि संग मे उसकेबूब दबारहा थां फिन मे अपना वो हाथ नीचे किया औऱ साना कि कमीज केँ अंदर डालने लगा तोँ साना नें मेरा वो हाथ पकड़ लिया औऱ मदहोशी केँ आलम मे मुझेकहा सलमान ऐसेमत करो प्लीज़।।
मैंने साना कि बात अनसुनी करतेहुए हाथ अंदर डालने कि कोशिश जारीरखी।। पर्र साना नें मेराहाथ अंदर जाने नहि दिया। मैंने साना केँ कान केँ पास अपने होंठ लेँ जातेहुए फुसूफुसाया कि: बस थोडा प्रेस करना हैं।।
साना चरित्र कि एक् अच्छी लड़की थि, पऱ वो कहते हें नं प्रेम केँ आगे मजबूर। सो साना नें मेरेहाथ सें अपनाहाथ हटा लिया।।
फिन मैंने धीरे-धीरे अपनाहाथ अंदर डाला औऱ साना कि ब्रा सें उंगलियां टच होते हि, मैंने कोईदेर किए बिना अपनाहाथ ब्रा केँ अंदरडाल दिया।
एक् तरफ मेरे होंठ उसकी गर्दन पे चिपके हुए अपनाकाम कररहे थें, दूसरी ओरजब उसकेबूब कों मैंने पकड़ा तोँ जैसे साना नें अपने आप् कों पूरा हि मेरे हवाले कर दिया। उसने अपने लिप्स मेरी गर्दन सें उठादिए औऱ अपने दोनों हाथ मेरे शोल्डर सें गुज़ारते हुए मेरी गर्दन केँ आसपास रख दिये औऱ अपनेगाल मेरे शोल्डर पे रखदिए।। साना कां मम्मा बहुत मोटा औऱ तनाहुआ थां। मे उसकेबूब कों धीरे-धीरे दबारहा थां। मुझसे अपना मम्मा पंप करवा केँ सानामजे सें सिसकियाँ लें रही थि। मे उसके निपल्स पे भि अपना अंगूठा फेररहा थां।। बहुतदेर मम्मा दबाने केँ बादअब मे आगे बढ़ने कि सोच मे थां, इसलिये साना केँ हसीन औऱ खूबसूरत बदन कों औऱ ज़्यादा महसूस करने केँ लिए। ((काश साना कों मुझ जैसा स्वार्थी यारकभी नं मिलता, वो बेचारी तौ अपने प्रेम पे अपना जिस्म निछावर कररही थि, उसे क्याँ पता जिसे वो अपनासभी कुछ समझती हैं, वो तोँ अपनी वासना कि आग कों ठंडाकर रहा हैं))
अचानक मैंने अपना वो हाथ बाहर् निकाला औऱ दोनों हाथों सें साना कि कमीज पकड़कर ऊपर कों करनेलगा कि साना केँ जिस्म कों एक् झटका सां लगा औऱ वो पीछे कों हुई औऱ अपने हाथों सें मेरे हाथों कों पीछेझटका औऱ कहा: नहि सलमान नहि।।
मैंने आगे हौ केँ साना होंठों पे एक् किसकी औऱ कहा: सानाबस एक् बार देखने हें।।
साना केँ लिएयह बातें बहोत अजीब थि, मे ये भि जानता थां।। पर्र मे वासना कां मारा तोँ येबात जानकर भि साना सें ऐसी बातें करने सें नं चूका। मे तोँ बस साना केँ मासूम प्रेम कां फायदा उठाना चाहता थां।।
साना नें जब मेरीबात सें इनकार कर दिया तोँ मुझे क्रोध आँ गय़ा उस पे औऱ हाथ बांध केँ साइड मे खड़ा होँ गय़ा।। साना नें जब देखा कि मे सख्त नाराज़ हूं तोँ उस सें रहा न् गय़ा औऱ वो मेरेपास आई औऱ मेरे शोल्डर पे सिर रखतेहुए कहा: प्लीज़ नाराज मत होना, ये भि भलाकोई नाराज होने कि बात हें।।।।। साना नें पीछे होतेहुए मेरेगाल कों पकड़ा औऱ मेरी आँखों मे आँखें डालते हुए बोलि सलमान प्लीज़। उसदिन मैने साना केँ संग औऱ कुछ नहीं किया औऱ मे अपना मुँह फुलाकर घऱ केँ लिएचल दिया। साना बिचारी मुझे रोकती हि रह गई पर्र मे नहीं रुका.
जब कॉलेज सें घऱ वापसआया, तोँ अपने कमरे मे लेटे लेटे साना केँ बारे मे सोचने लगा। दिल मुझेये सभी साना केँ संग करने कों मनाकर रहा थां, जबकि तथ्यये थां कि मुझे स्वयं पे कोई कंट्रोल हि नहि रहता थां, जब साना मेरेपास होती थि औऱ ये होता कि मन कि जीत हौ जाती।। दिल औऱ दिमाग़ कि लड़ाई चलरही थि औऱ मे ऐसे हि रात केँ बारे मे सोचने लगा कि कबरात होँ औऱ मे अपनी बाजीपास पहुँच जाऊ औरजहाँ मेरेदिल कों चैन मिलता हैं, सुकून मिले मेरी आत्मा कों औऱ आत्मा औऱ दिल केँ गले शिकवे होतेरहे।
वक़्त बड़ी मुश्किल सें कटा औऱ रात आँ हि गई।।। मैनेबाजी केडोर पे नोक किया तोँ कुछदेर बाद दरवाजा ओपनहुआ। दुनिया मे रहने वाले जितने भि लोग थें उनकी नज़र आसमान पे, जबकि सलमान कि मंज़िल उसकी आँखों केँ सामने, अपने पूरे हि जोबन पे, नजरें झुकाए उसे एक् चुप सलाम प्रेम कि पेशकश कररहा थां। जब कमरे मे प्रवेश किया तोँ बाजी भि रूम काडोर बंदकर केँ मुड़ी, तौ मैंने उन्हें हगकर लिया।। आहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह दिल सें बेइख्तियार यह आवाज़ निकली।। सुभह सें हि तोँ मुझसे सेझगड़ा कररहा थां मेरादिल औऱ अब अपनी मंजिल पे पहुँच केँ जैसेउसे सुकून मिला।।। कितनी हि देरबीत गई, ऐसे हि हम् दोनों कों।
फिनहर रात कि तरह होंठ होठों सें टकराए औऱ अपनी प्यास बुझाने लगे औऱ ज़ुबान ज़ुबान सें मिलकर जैसे प्रेम सें भरपूर एक् लड़ाई (लड़ाई) सि लड़ने लगीआपस मे।। फिन हम् दोनों दीवाने दुनिया सें बेगाने होतेचले गए।। प्रेम कि बारिश, भावनाओं केँ सागर औऱ प्रेम केएकसंग कितनी हि नदियों कां मिलन, जब कि क्याँ न् थां इन पलों मे।।
होंठ, जीभ, चेहरे, गर्दन कों चूमने केँ बाद मैंने दिदी कों रूम कि दीवार सें जा लगाया औऱ अपने दोनों हाथ बाजी कि कमीज मे डाले औऱ उन केबूब्स पकड़ लिये।। बाजी औऱ मे दोनों हि एक् दूसरे केँ स्पर्श सें मजे मे डूब केँ रहगए। कितनी हि देर मे बाजी केबूब्स कों दबाता रहा औऱ फिन मैंने बाजी कि शर्ट औऱ ब्रा कों ऊपर करकेउन केबूब्स कों नंगाकर दिया। बाजी केबूब्स केँ सामने आते हि मे आहिस्ता उनकोचरम पे लें जाने केँ लिए उनके स्तन कों चूसना शुरुआत किया।।। उनके मम्मे मेरे हाथो मे थें औऱ चूसने केँ संगसंग उन्हें बहोत हि प्रेम सें दबा भि रहा थां।। बाजी बूब्स कों चुसवाने केँ संगमजे मे डूबीअहह ममममअहह अहह कि आवाज़ भि निकाल रहीथीं औऱ यह आवाज़ें मुझे ज्यादा सें ज़्यादा बेकाबू किएजा रहीथीं मजे मे बेकाबू। मुझसे रहा नहि गय़ा औऱ मैंने बाजी कों कहा बाजी पूराचूस रहा हूं अहहबंद, बहोत मोटा हैं मुँह मे नहि आँ रहा।।
बाजी स्वयं बेकाबू हुई सुख केँ सागर मे गोते पे गोतेखा रहीथीं, उन्होने ऐसे हि खुशी मे डूबी हुइ आवाज़ मे कहा: सलमान अहहअहह ऐसेमत बोलो, उफ़ सलमान अहह ओह्ह्ह्ह्ह्ह ममअहह अहह।।।
बाजी केँ स्तन कों चूसचूस कर मे इतना गीलाकर चुका थां कि अपने मुँह मे लेते हि, मेरे होंठ उनके स्तन पे स्लिप कर जाते औऱ उनके मम्मे मेरे मुँह सें बाहर् निकल जाते।। इससभी कुछ मे मेरे लन्ड कां येहाल थां कि ऐसा लगनेलगा जैसे मेरा लन्ड आजये साबित करनाचाह रहा होँ कि लोहे दृढ़ता कुछ भि नहि मे तौ लोहे सें भि ज्यादा कठोर हूं।
मैंने अपने होंठकुछ लम्हा बाजी केबूब्स सें हटालिए तोँ उनसेरहा न् गय़ा औऱ उन्होंने मेरेसर पे दोनों हाथ रखतेहुए, मेरेसिर कों अपनेबूब्स कि ओर दबाया। पर्र मैंने सिर कों पीछे करने कि ओरजोर लगाया। बाजी मेरीइस हरकत कों समझ नहि पाई कि आखिर मे चाहता क्याँ हूं। इतने मे मे बोला: तुम् कहो नां कि केसे चूसू। मेरीगरम तपती सांसें उनकेबूब्स सें टकराकर उन्हें पागलकिए जारही थीं।। बाजी नें उतावलापन करकहा: अहहअहह सलमान प्लीज़।।
पता नहि मुझे क्याँ हुआ औऱ मैंने एक् मम्मे पे मुँह मारते हुए औऱ उसे चूसते हुएकहा: बोलो नां मुझे कि सलमान चूसो इन्हें।
फिन बाजी केँ मम्मे कों चूसता औऱ संग हि कहता बोलो न् मुझे कि सलमान चूसो इन्हें।। बाजी मेरीइस हरकत सें तड़पती औऱ मचल केँ रहगईं औऱ ऐसे हि तड़पते हुए बोलि: सलमान अहह हूं उफ़मम नहि कहो नां ऐसे।।।
मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) – New Episode
अजब हि आलम थां तब। इसी पागलपन मे मेराहाथ बाजी कि योनी पे जा पहुँचा औऱ मैंने उनका मम्मा चूसने केँ संग योनी कों भि रगड़ना शुरुआत कर दिया। अपनी योनी पे रगड़ पड़ते हि बाजी अचानक सें अपनी सिसकी कों नहींरोक पाई"ओह अहहअहह मत किया करवो नहि मानते क्यूं नहि अहह।।। " बाजी कां एक् हाथ वैसे हि मेरेसिर कों अपनेबूब कि ओर दबाता रहा औऱ दूसरा हाथ उन्होंने मेरेउस हाथ पे रख दिया जोँ उनकी योनी पे थां।। कितनी हि देर मेरी उंगलियां बाजी कि योनी केँ लिप्स केँ बीच चलते चलते अपना चमत्कार दिखाती रहीं औऱ बाजी कों होश-ओ-हवास सें बेगाना करती रहीं। बाजी कि सांसों मे, बेचैनी मे, अदाओं मे मानोकुछ नशा औऱ मजाभरा थां। ऐसे हि नशे कि हालत मे अचानक मैंने बाजी केबूब्स सें अपना मुंह उठाया औऱ नीचे होँ केँ बैठ गय़ा।
इससे पहले कि बाजी मेरे अगले इरादे कों जानतीं, मैंने अपना औऱ दिदी कां हाथ उनकी योनी सें अलग किया औऱ अपने होंठ उनकी योनी पे सलवार केँ ऊपर सें हि रखदिए औऱ उनकी योनी कों सलवार केँ ऊपर सें हि चूम लिया औऱ अपनी ज़ुबान कों उनकी योनी पे फेर दिया।।। बाजी कों मुझसे इस हरकत कि उम्मीद बिल्कुल नहि थि।।। ये भि सच थां कि जहां वो मेरीइस हरकत सें परेशान हुईंवही उन्हें मेरीइस हरकत सें मजा भि पहुँचा "" ओहअहह अहहओह सलमान नहि करते, हटो यहा सेआहअहह हटो नाआह उम्म्म "" बाजी नें नीचे कि ओर हल्के सें झुकते हुए मुझे पीछे करने कि कोशिश कि औऱ इस कोशिश मे उनकी योनी औऱ ज्यादा मेरे मुंह पऱ दबतीचली गई। मे बाजी कि गीली योनी कों उनके गीले सलवार केँ ऊपर सें अपने होंठ औऱ जीभ कि सहायता सें औऱ ज़्यादा गीला करताचला गय़ा।। "" अहहअहह हाहअहह ओहमम हम् मम नहि करो नाँ "" दिदी कि नशे मे डूबी आवाज़ मे बहुत क्रोध सां थां।।।
बाजी केँ गुस्से पे मे उठ खड़ा हौ गय़ा औऱ अपने होंठइस बार उनकी गर्दन पे जा टीकाये, औऱ उनके बूब्स कों दोनों हाथों मे लेकर दबाने लगा। मेरा लन्ड इसी मदहोश हालत मे उनके पैरों केँ बीच मे जा पहुँचा। मेरा लन्ड सलवार केँ अंदर शायद लोहे सें भि ज्यादा कठोर हालत मे थां।। इसी मदहोशी मे जानेकब औऱ केसे मेरे लन्ड कि केप बाजी कि योनी सें टकराई पऱ शायद यहीं पे हम् दोनों कां बस होँ गय़ा, क्योंकि उसी लम्हा हि बाजी नें अपनी टांगों कों जोर सें भींचा औऱ कांपना शुरुआत हौ गईं औऱ मे उनके बूब्स कों जोर सें दबाते हुए अपने लन्ड कि टोपी कों अपनी योनी औऱ पैरों केँ बीच मे रगड़ते रहने कि नाकाम कोशिश करतेहुए डिस्चार्ज होँ गय़ा।।।।
दिन अपनी निर्धारित गति सें गुजरते जारहे थें।।।। बस एक् मिलन हि थां जोँ बहोत कुछ होँ जाने केँ बादअब भि अधूरा थां।। मिलन कां वो जगह जोँ मे पाना चाहता थां, उसजगह कों पाने केँ लिए अनुमति मुझे मेरीबाजी नहि देरही थि।। उसजगह पे पहुँचने सें बहोत पहले हि मुझे वो रोक देती थि औऱ मे एक् तरह सें प्यासा हि रह जाता थां।
मेरी औऱ साना बैठकें उस पेड़ केँ पीछे वैसे हि जारीथीं। शुरुआत कि तरहअब साना मे बहुतहद तक लज्जा कम हौ चुकी थि, पर्र फिन भि अब तक उस मासूम कि हया कि चादर कों नोचकर दूर करने मे पूरीतरह सफल नहि होँ पाया थां।।
एक् दिनऐसे हि हम् दोनों कॉलेज केँ उस पेड़ केँ पीछे खड़े एक् दूसरे कि जीभ सें जीभ औऱ होंठों सें होंठ मिलारहे थें औऱ मेरेहाथ साना कि कमीज मे घुसेउस केबूब्स दबाने मे व्यस्त थें।।।। हम् दोनों खूब मस्ती मे डूबे बहकेहुए थें कि इसी मस्ती मे हि बहकते हुए मैंने साना कि कमीज कों ऊपर उठाने कि कोशिश कि।। साना नें रोज कि तरहआज भि मुझे रोकने कि कोशिश कि कि: ऊपर नहि करो नं प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज अहह प्लीज़।। मुझे साना पे बहोत क्रोध आया औऱ अचानक गुस्से मे औऱ साना सें होँ रही मस्तियों केँ नशे मे हि बहकते हुए मैंने कहा: साना मुझसे बातमत करना, हाथ पीछेकरो अपने।।। साना मेरे गुस्से सें घबरा गई औऱ नशे सें गुलाबी हुई अपनी सुंदर आंखों कों बंद करतेहुए अपनासिर पेड़ केँ संगलगा लिया औऱ अपने हाथों कों मेरे कंधों पे रख दिया।
मैंने धीरे-धीरे साना कि कमीज कों ऊपर करना शुरुआत किया कि इतने मे वो आहिस्ता बोलि: प्लीज़ मत उठाओ नां प्लीज।। पऱ मे अपनाकाम पूराकर चुका थां।। साना केँ गोरे, तने औऱ मोटे मम्मे मेरी आँखों केँ सामने थें। बहुत हसीन मम्मे थें साना केँ।। मुझे साना केँ नग्न औऱ प्यारे प्यारे मम्मे देखकर रहा नं गय़ा औऱ मैंने आगे होँ उस कां एक् खूबसूरत मम्मा अपने मुँह मे लेँ लिया।। अपना मम्मा मेरे मुंह मे महसूस करके साना उतावलापन उठी "" अहहअहह ममअहह सलमान क्याँ कररहे होँ अहहअहह ""
"मेरेमन मे पता नहि उस टाइम क्याँ आया कि मैंने कहा" "तुम्हारा मम्मा चूसने जारहा हूं" ""
"" "अहहअहह मम हम् जानी बहोत बेशरम हौ गए हौ तुम्"
"साना केँ नरम मोटे मम्मे कों मस्ती औऱ मज़े मे समर्पित चूसेजा रहा थां।। उसकी सिसकियाँ मेरे कानों सें टकराकर मुझे मस्तकर रही थि।।
अपनी साथी कों पेड़ केँ संग खुले आसमान केनीचे मे उसके मम्मे चूसने मे मस्त थां।।। साना कि लज्जा शायद अपनी स्थान कायम थि परबूब्स कों चूसने सें वो भि बहोत मजे मे डूबी हुईँ थि।। धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसके दोनों बूब्स कों मुंह मे लें केँ चूसने लगा।।। मेरा लन्ड गरम औऱ कठोर हालत मे मेरे अंडरवियर मे मचलरहा थां।। कितनी हि देर मे साना केँ बूब्स कों चूसता रहा चातटा रहा औऱ फिन मुझे जाने क्याँ सूझी औऱ मैंने उसके दोनों स्तन पे हाथरखे औऱ उसके होंठों मे होंठडाल दिए। उसके स्तन कों दबाते दबाते औऱ उसके होंठों कों चुसते चूमते हुए मैंने अंडरवियर मे मौजूद लन्ड उसके पैरों केँ बीच मे रगड़ना शुरुआत कर दिया।।। अब शायद मामला मेरी बर्दाश्त सें बाहर् थां औऱ साना भि अब शायद मेरीइन हरकतों कों बर्दास्त नहि करपारही थि। इसलिये वो अपने घुटनों सें ऊपर वाले हिस्से कों आगे पीछे करती हुईँ औऱ मे अपने लन्ड कों उसके पैरों केँ बीच मे दबाता हुआ फारिग होताचला गय़ा।।।।।।।।
हरबार कि तरहआज भि जब मेरेमन केँ ऊपर सें वासना कां छाया पर्दा हटा, तौ मेरे अंदरदो आवाज़े आनेलगी, मुझे अपनी आत्मा कि आवाज़ सुनाई देने लगीं।।। आज आत्मा कि वजह सें जोँ बेचैनी मेरे अंदर पैदा हौ रही थि, ऐसी बेचैनी आज तक मेरे सीने मे पैदा नहि हुईँ थि मेरादिल जोरजोर सें धड़कने लगा, इतनेजोर सें कि जैसेअब वो मेरे अंदर रहना हि नहि चाहता होँ। मे पसीने मे सराबोर हौ गय़ा।। मेरी हालत बहोत अजीब सि होँ गई। इतने मे मेरेसेल पे संदेश आया। जब मैंने संदेश ओपन किया तौ वो संदेश किसी औऱ कां नहि, मेरे प्रेम मेरी चाहत, मेरीजान कां थां। संदेश थां "" तुम् ठीक हौ नां? ""
संदेश पढ़ मेरादिल चाहा कि मे जा केँ उस केँ कदमों मे गिर पडूं औऱ अपनेइस पाप कि माफी मांगू। हां शायदइसी कों तोकहते हें आत्मा सें आत्मा कां नाता कि यहाजब मेरी आत्मा तड़पी, तौ वहां उसकी आत्मा नें भि उसे हिला केँ रख दिया।।।
साना मेरीइस हालत कों देख परेशान होँ गई औऱ पूछा "तुम् ठीक तोँ हौ नाँ?"
"हां मे ठीक हूं तुम् जाओ मे आता हूं"
"नहि तुम् ठीक नहि लगरहे हौ, क्याँ हुआ हैं तुम्हें अचानक"
"मे ठीक हूं प्लीज़ तुम् जाओ "
साना वैसे हि परेशान हालत मे वहां सें चली गई, क्योंकि वो जानती थि कि मेरीजब तक ख़्वाहिश न् होँ तब तक मे कोईबात नहि बताता।।। साना केँ जाने केँ बाद मैंने दिदी कों रिप्लाई किया औऱ कहा कि "मे ठीक हूं, क्यूं क्याँ हुआ?" ((मे मानव जिज्ञासा केँ तहत उनसे पूछा))
उनका रिप्लाई आया "" वैसे हि अचानक दिल घबराया थां मेरा" "
आज प्रेम नें मुझे अपनाएक अजब सां हि जहां दिखा डाला।। मे अपनेखेल कों जौ साना केँ संगखेल रहा थां, खत्म करने केँ लिए दूरी औऱ येसोच लिया कि वक़्त पे मे येसच भि बता दूँगा कि मैंने तोँ कभी उससे प्रेम किया हि नहि थां।
जिंदगी कां यह मोड़, तोँ उनके प्रेम भरे पलों मे डूबे, जैसे मैंने कभी सोचा भि नहि थां। आत्मा कि हत्या क्याँ होती हैं ये वक़्त नें मुझे दिखा दिया। आज हिना बाजी कि विवाह हुए 2 सप्ताह बीत चुके थें। जीतेजी मरना बहोत सुना थां, पऱ इस एक् लाइन मे कितना दर्द, कितनी शिकायत, कितने दुख, कितनी वहशत छिपी हैं इसका मुझेकभी अंदाज़ा भि नहि थां। ये प्रेम जबहुआ थां मुझे, तब पत्थर दिल पिघलाने मे जौ मुश्किलें मे नें देखी, जोँ दर्द, मैंने देखा, वो दर्द औऱ मुश्किलें मुझेआज एक् चींटी सें भि कमलगरही थीं शायद.क्यूं कि आजजब वहशतो केँ काले बादल मेरेऊपर आकेछा जाते, जब दुख किसी हथौड़ों कि तरह मेरे पे चोट लगाते जब दर्दखून कि स्थान मेरीरग रग मे लगता, जब पीड़ा भरी घाटी मुझे आँ घेरती तोँ तबचाह कर भि नहि मर सकता नं जी सकता थां।।
मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) - Kahani ab aur interesting hogi
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