मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) – New Episode
बदनसीबी तोँ जैसे मेरी दासीबन केँ रह गई थि। हर वक्त गुस्से मे रहनेलगा थां। अजीब सां युद्ध चलता रहता थां हर वक़्त हि मेरे अंदर। प्रत्येक नाता प्रत्येक संबंध मेरेलिए अब बेमानी सां हौ गय़ा थां। कभीकभी ऐसा लगने लगता हैं कि मे पागल होने वाला हूं।। एक् दिनऐसे हि रात केँ वक्त अपने कमरे मे लेटा अपने कमरे कि दीवारों कों खाली नजरों सें देखरहा थां कि अचानक उठा औऱ लैपटॉप ऑनलाइन किया औऱ एक् फिल्म देखने लगा, ये सोच कि क्याँ पताकुछ समय ध्यान कहीं औऱ होँ जाय ((पर्र सलमान कितना मूर्ख थां न् कि उसे क्याँ खबर थि कि ध्यान जहां वो लगा बैठा थां वहा सें ध्यान कां हटना उसकीमौत तक असंभव हि थां)) कुछदेर हि फिल्म देख पायाबोर होनेलगा औऱ फिल्म बंद दि। फिल्म केँ बंद होते हि बे ध्यानी मे मुझसे अश्लील फिल्मों कां फ़ोल्डर खुल गय़ा। जोँ कुछ अश्लील मूवीज़ आज सें बहोत वक्त पहले कि मैंने डाउनलोड करकेरखी हुई थीं। नां चाहते हुए भि मैंने एक् अश्लील मूवी चालूकर दि।। थोड़ी हि देर मे जब मूवी केँ अंदर तकरार शुरुआत हुई तौ मुझे अपनी सलवार केँ अंदरकुछ उठताहुआ महसूस हुआ, जी हें वो मेरा लन्ड हि थां। उसे तौ जैसे मे कब कां भूल हि गय़ा थां।। नां चाहते हुए भि मुझे अपने लन्ड कों अपनेहाथ मे थाम लिया थां, पहले सलवार केँ ऊपर सें औऱ फिनकुछ देरबाद हाथ अंदरडाल कर ((मेरे लन्ड नें मुझेकह हि डाला कि जब तक तुम् जीवित होँ कुछ जरूरतें मेरी भि हें जिन्हें पूरा तौ करना हि हैं, खानां भि तोँ खाते रहना थोडा हि सही पर्र खाते तौ हौ नां, ऐसे हि एकाधबार हि सही पऱ कुछ विचार मेरा भि तोँ रखो))
मे अपने लन्ड कों थामे, हिलाए जारहा थां, वहा सिनेमा मे तकरार बढ़रही थि औऱ यहा मेरे लन्ड पे मेरेहाथ कि गति।। अहहअहह कि आवाज़ केँ संग मेरा वीर्य निकलना शुरुआत हुआ औऱ फिन निकलता हि चला गय़ा।। इसबात कों सें इनकार नहि कियाजा सकता कि बहोत मजा आँ रहा थां मुझे।।। जहां एक् ओर वीर्य निकलरहा थां, वहीं दूसरी ओर एक् विचार मेरे मस्तिष्क मे उतररहा थां। छुट्टी होने केँ बाद अपनेबेड पे हि पड़े पड़े कितनी हि देर मे मन मे आएइस विचार केबारे मे सोचता रहा।। फिनकुछ सोचते हुए मैंने अपना वीर्य साफ किया, लैपटॉप ऑफ किया, सेल उठाया औऱ साना कों फोनलगा दिया।।।
साना नें फोन अटेंड कि औऱ बहोत गंभीर आवाज़ सें हाय हेल्लो कि। औऱ ऐसे हि फिन गंभीर सि आवाज़ मे मुझसे पूछा "तुम् केसे होँ सलमान?"
"मे ठीक हूं, आप् कैसी हें?"
"मे ठीक हूं, पऱ तुम् ठीक नहि होँ नां, पूछपूछ केँ थक सि गई हूं, पर्र तुम् हौ कि कुछ बताते हि नहि, बचपन केँ दोस्त हें हम् पताचल जाता हैं हम् दोनों कों कि कौनठीक हैं हम् मे सें औऱ कौनठीक नहि हैं, प्लीज़ बतादो, नहि तौ मे सोचसोच पागल हौ जाऊँगी "साना एक् हि सांस मे कितना कुछबोल गई।।
"मे ठीक हूं, औऱ सभीसेट हैं, तुम् सें एक् बात करनी थि"
"हां बोलो न् क्याँ बात हैं"
"कलमिल सकती होँ मुझे"
"कल? कहां? कितने बजे?हां नां क्यूं नहि मिल सकती" साना अपनीयह खुशी अपने सवालों मे छिपा न् सकी।। ((मैंने जिसदिन साना कों फिन न् छूने कां फैसला किया थां उसदिन केँ बादआज तक मैंने साना कों फिनकभी नहींछुआ थां, औऱ साना इसलिये बहोत परेशान भि थि कि क्याँ कारणहुआ कि मे अब उसके लगभग नहि आता, वो सोचती थि कि कोईबात मुझे बुरीलग गई हैं जिसवजह सें मे उससेदूर होताजा रहा हूं, औऱ वो इसडर मे भि थि शायद वो मेरे प्रेम कों खो नं बैठे, उस प्रेम कों जोँ मैंने उससेकभी किया हि नहि थां सना कों न् छूने केँ अलावा एक् फैसला औऱ भि किया थां कि मे वक़्त पे उसेये भि बता दूंगा कि मे उसे प्रेम नहि करता, पर्र फिन मेरा अपना टाइमऐसे बदला कि मेरे प्रेम, मेरी आत्मा, भावना, सबका हि खून हौ गय़ा))
"कल 4 बजे आँ जाऊं? वहीं चलेंगे जहां तुम्हारी बर्थडे पे गय़ा थां"
"ओकेठीक हैं मे प्रतीक्षा करूंगी" साना केँ लहजे मे निरन्तर खुशी औऱ बेसब्री बहुत थि।।।
"ओ केँ वक्त पे आँ जाऊंगा औऱ हाँघऱ मे किसी कों मत बताना कि मेरेसंग जारही होँ"
"क्यूं? औऱ अगर तुम्हें किसी नें मुझे तुम्हारे संगदेख लिया तोँ?"
"तोँ कोईबात नहि, पर्र तुम् मत बताना, बसयही कहना कि फ्रेंड्स केँ संगजा रही हूं ओ केँ "
" ओ केँ जैसा तुम् सही समझो "
कुछदेर यहावहा कि बातों केँ बाद हमनेकॉल आईएंड कि।।।
अगलेदिन मे निर्धारित वक़्त पे साना कों उठाई करनेआया। मौसम बहुतबदल चुका थां औऱ गर्मी कां जोर भि अब करीबटूट हि चुका थां।। साना कि फरमाइश कि गई जींस औऱ टीशर्ट पहनेहुए थां।। इसबार बार मैंने उसे व्हाइट सूट, सलवार पहनने केँ लिएकहा थां।।। साना कों मिसफोन कि औऱ उसका संदेश आया कि 2 मिनट।।। मे उसका प्रतीक्षा करनेलगा औऱ इस प्रतीक्षा मे मैने अपनी नजरें साना केँ घऱ पर्र हि ध्यान केंद्रित कि हुइ थि.
कुछ हि देर मे साना अपनेघऱ केँ गेट सें सामने आई औऱ गाड़ी कि ओर बढ़ी।। फुल व्हाइट ड्रेस उस पे बहोत जचरहा थां। ((हाँ मस्त हि तोँ लगरहा थां))।। गाड़ी मे बैठते हि साना अपनी विशिष्ट आवाज़ मे बोलि "हायराम हैंडसम हाउआर यू"
"ठीक हूं, प्यारी लगरही होँ"
"थैंक्स, चलें"फिन मैंने गाड़ी आगे बढ़ा दि। साना हमेशा कि तरह शुरुआत होँ गई यहावहा कि बातें औऱ मे बस"हाँ" हूं "हि करतारहा।। पार्क मे पहुंचने केँ संग हि पहले वाली स्थान पे गाड़ी पार्क करने केँ बाद मैंने साना सें कहा कि पिछली सीट पे चलकर बैठते हें। फिन हम् दोनों पीछे कि सीट पे जा बैठे औऱ अपनी अपनी साइड कि फ्रंट सीटआगे करके पीछे हौ गए।।
कुछदेर यूँ हि चुप रहने केँ बाद साना नें मेरेगाल पे अपना प्यारा नरमहाथ रखा औऱ पूछा"आज लास्ट वक्तपूछ रही हूं, तुमसे स्वयं हि जबमन किया तौ बुला लिया, क्याँ हौ गय़ा हैं तुम्हें क्यूं चुपचुप सें रहते हौ औऱ मुझ सें दूर भि "
" दूर तोँ नहि हूं देखो तौ तुम्हारे पास हि हूं "
" चुप क्यूं रहते होँ "
सच तौ ये थां कि मेरेपास साना कि बातों कां कोई जवाब नहि थां न् मुझ पऱ अबइन बातों कां कोई प्रभाव थां। जिसकी आत्मा कि हत्या हुई होँ, भलाउसे प्रेम भरी बातें कहां भाती हें। वो जौ एक् दोस्ती हम् दोनों मे कभीहुआ करती थि, साना कों क्याँ मालूम थां कि मे आजइस दोस्ती कां भि जनाज़ा निकालने आया हूं। मैंने कहा तुम् जरापास होकर बैठो नाँ मेरेसंग।। औऱ वो मेरेपास होँ गई।। उसकेपास होते हि मैंने उसके दोनों गालों पे हाथरखे औऱ उसके होंठों कों अपने होंठों मे लें लिया।।
उस मासूम परी केँ कोमल होंठ मेरे होंठों मे आते हि जैसे मे पगला गय़ा औऱ निरन्तर चूमने लगा मे उसके होठों कों। वो भि तौ आज जैसे बरसों कि प्यासी बनी मेरे होठों सें लगी अपनी प्यास बुझाने।। मुझेकिस करते करते साना हमेशा कि तरहदूर कहींखो चुकी थि। वैसे हि खोेये हुए साना नें किस करते करते मुझेकहा: अब मुझसे दूर तोँ नहि जाओगे नाँ, मे घबरा जाती हूं।।
मैंने कहा:हां अबकभी नहि जाऊँगा।। "साना अपनीजीभ मेरे मुँह मे डालो"ये सुनते हि साना नें देरकिए बिना अपनी गीलीजीभ मेरे मुंह मे डाल दि, जिसे मे अपने मुंह केँ अंदर बाहर् करके चूसने औऱ चूमने लगा।। कुछ हि देरबाद मैंने अपनी ज़ुबान साना केँ होंठों पे रखी औऱ उसके होंठों पे फेरा औऱ कहा : सानाअब तुम् इसे चूसो नां। यह कहते हि मैंने साना केँ होठों सें गुज़ारते हुए अपनीजीभ उसके मुँह मे डाल दि।। उसने आहिस्ता अपना मुंह खोला औऱ आइसक्रीम कि तरह मेरीजीभ कों चूसना शुरुआत करदिया आहह-आहह अहहमम कितने प्रेम सें चूसी थि उसने मेरीजीब। जब मेरीजीभ साना मुंह मे चली जाती तोँ वोँ अपनीजीब कों भि टकराती मेरीजीब सें।।।
इसी दौरान मैंने अपना एक् हाथ नीचे किया औऱ साना केँ बूब्स पे फेरने लगा।। वो अहह ऑश्फ्ह ओह्ह्ह्ह्ह कि आवाज़ें भि संग मे निकालने लगी।। बूब पे हाथ फेरते हि हाथ सें दबाते हि अहह ओह्ह्ह्ह्ह औऱ मेरीजीभ कों चूसते हुएमम मम कि आवाज़ें।।। कुछ हि देर मे मेरे दोनों हाथ साना कि कमीज केँ अंदर सें उसके बूब्ज़ सें खेलरहे थें। जबकि सानाअब मेरी गर्दन कों चूमरही थि औऱ उसके दोनों हाथ मेरे कंधो पे थें ((साना औऱ मैंने अपनी एक् टांगसीट केँ ऊपर हि कर फ़ोल्ड करली थि)) मे साना केँ मम्मे कों दबाते हुएउसे कहा: सानाजब मे तुम्हारे बूब्स सें खेलता हूं तौ तुम्हें मजाआता हैं।। साना नें अपनी नशीली आवाज़ मे कहा:हां जानी बहोत मजाआता हैं अहहहाँ नाँ जानी।। ((शायद इतने वक्त सें वो भि मेरे हाथों केँ टच कों मिसकर रही थि याँ शायद वोँ सावधान थि कि कहींफिन किसीबात पे खफा नं होँ जाऊँ))
मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) – New Episode
बहुतदेर साना केँ मोटे मम्मे दबाने केँ बाद मैंने उसकी कमीज कों ऊपर किया। उसके मखमली मम्मे औऱ उनकेऊपर मौजूद पिंक निप्पल मेरे मुंह केँ सामने थें।।। मैंने अपना मुँह खोला औऱ फिनकुछ सोचते हुएकहा: साना मुंह मे डाललूँ तुम्हारा मम्मा।
"हां जानी डालो नां, पूरा डालना मुंह मे" इतना सुनने कि देर थि कि मैंने साना केँ बूब्ज़ पे मुँह मारना शुरुआत कर दिया औऱ बारी बारी उसके दोनों स्तन कों चूसना शुरुआत कर दिया साना केँ जिस्म सें आती खुश्बू नें मेरे अंदर मौजूद वासना कि आग कों खूब भड़का दिया थां।। वो दोनों हाथ मेरेसिर केँ ऊपररखे, अपने मम्मे मुझसे चूसारही थि कि मैंने एक् हाथ नीचे किया औऱ उसकी योनी पे अपनेहाथ कि उंगलियां रखकर उसकी योनी कोरगड़ने लगा।।।
"" अहहअहह मम हम् अरेअहह जानीये तौ मतकरो अहह ""
"" "कैसालग रहा हैं"
"साना तड़पते हुए बोलि: अहहमत करो नां सलमान।।। एक् ओर बूब्स मेरे मुंह मे औऱ दूसरी ओर योनी मेरी उंगलियों कि चपेट मे, साना कि भावनाओं कों बहकाने केँ लिए इतना बहुत थां।
साना कि योनी कों रगड़ते रगड़ते मैंने अपना वो हाथऊपर किया औऱ उसकी सलवार केँ अंदरडाल दिया औऱ उसकी सलवार केँ अंदर मौजूद योनी कों अपनी उंगलियों कि सहायता सें आहिस्ता सहलाने लगा "
" सलमान प्लीज़,,, अहहहाह अहहउफ़ ममअहह ये क्याँ कररहे होँ सलमान ""
एक् ओर वो ये नहि चाहती थि कि मे उसकेसंग येसभी करू, पऱ दूसरी ओरयौन इच्छाएं उसेआगे बढ़ाए जारही थीं।।।। उसकी गीला योनी कों जब मैंने अपनी उंगलियों सें रगड़ा तोँ मेरी उंगलियां भि गीली होतीचली गईं। कितनी हि देर मे उसकी योनी उसकी सलवार केँ अन्दर हि हाथ डाले रगड़ता रहा
साना कि योनी कां टच, जिस्म कि खुश्बू नें मेरे अंदर वासना केँ पुजारी जानवर कों पूरीतरह सें जगा दिया थां, इसलिये मामला मेरी बर्दाश्त सें बाहर् होँ गय़ा थां।। मैंने सलवार सें हाथ बाहर् निकाललते हुए औऱ उसके स्तन सें मुंह हटाते हुए बोला कि साना सीधी होँ केँ लेटजाओ सेट पे औऱ अपनीऊपर फ़ोल्ड करलो।। साना बिखरे बालों, भावनाओं सें गुलाबी हुए चेहरे औऱ नशे सें चूर आँखों सें मुझे देखते हुए टूटी हुई आवाज़ मे बोलि: क्यूं "
" तुम् लेटो नाँ "" मैनेकहा
वो अपने सैंडल्स अपने पैरों कि सहायता सें हि उतारती हुइ सीट पऱ लेट गई औऱ अपनी टाँगों कों सीट पे फ़ोल्ड सां कर लिया।। इसी दौरान उसकी कमीज भि बहुत नीचे आँ गई थि। मैंने भि अपनेशूज उतारते हुए साना कि टाँगों कि ओर घुटनोब केँ बलसीट केँ ऊपर होँ गय़ा औऱ आगेबढ़ केँ अपनी टांगे ओपनकीं औऱ अपने आप् कों उसकी टाँगों केँ बीच मे एडजेस्ट किया। ((गाड़ी पुरानी थि, पर्र इम्पोटेड होने केँ कारण उसकी एक् सीट बहुत कमफरटेबल थि हमारी इस स्थिति केँ लिए)) मैंने साना कि सलवार पे दोनों हाथरखे औऱ उसको नीचे करनेलगा कि साना नें वैसे हि मजे मे डूबे डूबेकहा: नहि प्लीज़ ऐसामत करो प्लीज़, सुनोमत करोऐसे प्लीज़, देखोये सभी विवाह केँ बाद होगा नाँ।।
विवाह हूं माईफुट, मेरे अंदरये आवाज़ उठी औऱ वहीं पे हि दब केँ रह गई।। साना नें मेरेहाथ पकड़े हुए मुझे बहोत रोका, पऱ मेरे अंदर वो जंगली जानवर रुका नहि औऱ मे एक् तरह सें जबरन हि उसकी सलवार कों खोलता चला गय़ा।। मैंने उसकी कमीज भि ऊपर कों कर दि, अब वो करीब मेरे सामने पूरी हि नंगी थि। इसका विरोध रुका नहि। "सलमान येगलत हैं, समझो नां"
मैंने बिनाकोई उत्तर दिए उसकी योनी कों अपनी उंगलियों सें रगड़ना शुरुआत कर दिया।
"ससआहअहह हायराम अहह रुकोअहह नहि करोऐसे मम हम्"
"कैसालग रहा हैं?" "
" अहहअहह क्यूं कररहे होँ मुझे पागल सलमान "" विरोध केँ संगसंग अब सानाफिन मज़े सें सिसकियाँ भि लेनेलगी
"सानामजे लो, अहह, एंजाय करो ""
उसका भावनाओं सें गुलाबी हुआ सफ़ेद चेहरा अब लज्जा सें औऱ गुलाबी होँ चुका थां, उसने अपना मुंह लज्जा केँ मारे एक् तरफ मोड़कर अपनी प्यारी प्यारी आँखें बंदकर ली औऱ न् न् नहि मतकरो कि रट धीरे-धीरे धीरे-धीरे लगाकर हि रखी।।।
साना कि योनी एक् हाथ सें रगड़ते हुए मैंने दूसरे हाथ सें अपनी बेल्ट खोली औऱ फिन पैंट कां बटनखोल करकेजीप नीचे औऱ फिन पेंट औऱ अंडरवियर नीचे किया मेरा लन्ड उछलता औऱ झूमता हुआ बाहर् आँ गय़ा।। ((मेरा लन्ड बहुत लंबा औऱ मोटा थां औऱ उसकी टोपी भि बहुत मोटी थि)) सानाइस सबसे बेखबर अपनी योनी कि रगड़ाई सें लज़्जत मे डूबी आंखें बंदकिए उतावलापन रही थि।। फिन मैंने अपनाहाथ उसकी योनी सें उठाया औऱ आगे झुकते हुए अपना लन्ड साना कि योनी पे जा टिकाया मेरे लन्ड कि मोटी टोपी कां टच मिलते हि उसके जिस्म कों एक् झटका सां लगा औऱ वो घबरा केँ आंखेंखोलते हुए बोलि: ये क्याँ कररहे होँ, तुम्हें खुदा कां वास्ता ऐसा नहि करना। पऱ उस मासूम कली कों क्याँ मालूम थां कि बहोत देर होँ चुकी हैं।
मैंने उसके दोनों पैरों मे नीचे सें हाथ डालते हुए उसकी योनी कों थोडा ऊपर उठाया औऱ एक् जोर कां झटका मारा तौ लन्ड उसकी योनी मे।। सख्तहुआ लन्ड पहले हि झटके मे योनी मे घुसे बिना नं रहसका।। मेरा झटका इतना हैवानों जैसा थां औऱ थां भि बहोत ज़ोर कां बेचारी पहलीबार तौ वोँ चीखे बिना नं रहसकी।।।।।।।।
'' अहहहाय रे क्या बात है मर गई नहि करो निकालो इसे बाहर् अहहअहह "साना चीखने केँ संग रोना भि शुरुआत हौ गई" निकालो बाहर् इसे वास्ता हैं तुम्हें अहहअहह अम्मी मर जाउंगी ""
मेरी दरिंदगी औऱ वासना पे उसके रोने कां कुछअसर नहि पड़ा "" मैनेकहा चुप हौ जाओ, अब आराम आँ जाएगा, बस थोडा सां दर्द औऱ होगा ""
"मुझे नहि करनाये निकाल लो बाहर्"
"अभि वो कुछ औऱ भि कहने वाली थि कि मैंने एक् झटका औऱ दे मारा, मेराये झटका भि कारगर साबित हुआ औऱ मेरा लन्ड आधे सें अधिक उसकी योनी मे घुसता चला गय़ा।। साना केँ आंसू थें कि रुकने कां नाम नहि लेँ रहे थें औऱ चेहरा दर्द सें अजबहाल मे जा पहुँचा थां अगर मे मानवता कां बर्ताव उससे करता औऱ आहिस्ता येसभी होता तोँ तबउसे इतनापैन नहि होना थां, इतने दर्द कि वजह मात्र सिर्फ मेरा बर्बर पन थां।।
उसकी चीखें जैसे उसकेगले मे फँस केँ रहगईं, उसकी खूबसूरत आँखों सें आँसू बहतेरहे औऱ टिपटिप करतेसीट पे गिरते जारहे थें।
।। कुछदेर केँ लिए मे वहीं पे रुका औऱ इतने मे साना जैसे दुनिया मे वापसआई औऱ फिन सें चीखने औऱ रोनेलगी "" तुम् बहोत बुरे हौ, ये क्याँ हौ गय़ा आज तुम्हें अहहअहह अरे ""
उसकी बातों केँ उसकेइन आंसुओं कि मुझेकुछ परवाह नहि थि, औऱ मेरा उद्देश्य पूरा हौ रहा थां।।। मैंने एक् आखिरी झटका मारा औऱ मेरा मूंद उसकी योनी मे पूरा घुसता चला गय़ा।।
"" मममम हम् अहह सलमान अहहअहह अहह ""
"" बसअब होँ गय़ा अब हंगामा मतकरो चुप होँ जाओ, अब आराम आँ जाएगा "" साना कि योनी मे मेरा मोटा लंबा लन्ड जौ घुसा तौ मे नशे मे पागल हि हौ गय़ा।। मज़े औऱ मस्ती मे डूबाहुआ थां तब।।
फिनकुछ देर केँ अंतराल केँ बाद मैंने अपने लन्ड पीछे कि ओर खींचा औऱ फिन एक् झटकाआगे मारा। अब जोँ मेरा लन्ड आगे पीछे गय़ा तोँ पहले कि तुलना मे उसेकुछ धीरे-धीरे गय़ा।।। फिनये सिलसिला ऐसेचला कि इसमें गुजरते टाइम केँ संग मस्ती आरम्भ होँ गई औऱ साना कि चीखें सिसकियों मे औऱ फिन थोड़ी हि देर मे सिसकियों केँ संग मस्ती मे बदलना शुरुआत हौ गईं
"" अहहउफ़ प्लीज़ धीरे-धीरे करो, अहह धीरे-धीरे जानी आहिस्ता, अहहअहह उफ़ "
" धीरे-धीरे केसे करता, जब उद्घाटन किया, तब धीरे-धीरे नहि किया, तौ अब आहिस्ता क्यूं।।। अपनेइसी जोश सें साना कि योनी कों अपने लन्ड सें तारतार करने मे जुटारहा। मेरेहर धक्के पे साना मस्ती सें " 'अहह कहती" "औऱ शायद उसकादिल" "वाउ कहता" "यानी कि उसके अंदरअहह औऱ वाउ कां कम्बीनशन चलरहा थां।।। फिन साना केँ मुंह सें " "अहहअहह अहहमम हम् उफ़ हम् मम जानीअहह "कि आवाजें निकलने लगी औऱ मुझेलगा कि जैसे उसकी योनी नें मेरे लन्ड पे पानी सें फेंका हैं।।।
अबबात मेरे अधिकार सें भि बाहर् होँ चुकी थि। मैंने तेज सांसें लेते पूछा "साना तुम् डिस्चार्ज हौ गई होँ?"
"हां" "
" "अहह मे भि होने वाला हूं अहहअहह होनेलगा हूं बस"ये कहतेहुए मैंने अपना लन्ड एक् झटके मे साना कि योनी सें बाहर् निकाला, उसके मुंह सें अचानक आवाज़ निकली ""अह्ह्ह्ह धीरे-धीरे "
" औऱ मेरे मुँह सें "" "अहहअहह ममअहह हायराम" "औऱ साना कि योनीऊपर अपने वीर्य कि बूँदें छोड़ता चला गय़ा। जैसे उसकी योनी नें मेरे लन्ड कों नहलाने दिया थां अपने पानी सें, वैसे हि मैंने अपने वीर्य सें उसकी योनी कों नहलाने दिया।।।।
सानाउस दिन मेरे कंधे पे सररख केँ बहुतदेर रोतीरही औऱ मे उसे न् चाहते हुए भि चुप करवाता रहा।।। शायद इसलिये मुझे खेलने केँ लिए एक् खिलौना मिल गय़ा थां, हाँ एक् खूबसूरत खिलौना, हाँ एक् ऐसा खिलौना जिसेजब चाहूँ तोड़ भि सकता थां।
साना कों उसकेघऱ ड्राप करने केँ बाद मे अपनेघऱ वापस आँ गय़ा।।।
मे बाजी औऱ बहोत कुछ (Full Storyd) – New Episode
रात केँ खाने केँ बाद, रूम मे अपनेबेड कि टेक सें पीठलगा करबैठ गय़ा, पेर सीधेकिए औऱ कहीं अतीत कि यादों मे खोताचला गय़ा।।। मेरीइन यादों मे, जिन्हें अतीतबन जाने केँ बाद, आज तक सही सें मैंने टटोला नहि थां, खोला नहि थां, शायद एक् अजीबडर केँ कारण, उस डर कि वजह सें जोँ इंसान कों किसीआग कि नदी केँ किनारे खड़ेहुए महसूस हौ सकता हैं कि एक् कदमबाद याँ तौ जल केँ भस्म।।।।
हाँ, ये उसीदिन कि बात थि, जब मे कॉलेज मे साना केँ संग मौजूद थां औऱ मुझे दिदी कां संदेश आया थां कि "" तुम् ठीक होँ नाँ? ""।।।।।।
मेरेबस मे नहि थां, वरना वक्त कों एक् हि सेकंड मे आगेकर देता औऱ रात हौ जाती औऱ मे अपनी आत्मा केँ मालिक केँ पासजा पहुँचता पऱ मनुष्य केँ हिस्से मे बेबसी केँ सिवाय आया हि क्याँ हैं।।.एक् एक् समय जैसे बीतने सें पहले अपनी अहमियत याद दिलाए जारहा थां।।। ऐसी हालत पहले तोँ कभी नहि थि मेरी, फिन आज क्यूं? हां शायद इसलिये कि ऐसी करामात भि तौ प्रेम नें मुझे पहलेकभी नहि दिखाई थि।
समय गिनते गिनते गुज़र हि गए, रात हौ हि गई औऱ वो वक़्त आँ हि गय़ा। मैंने बाजी केँ रूम केँ डोर पे नोक किया, एक् समय भि नहि बीता कि दरवाजा खुल गय़ा, शायदआज जोँ आगइधर लगी थि औऱ ऐसी हि आगउधर भि लगी थि।। दरवाजा खुलने केँ बाद, जहां थां वही पे जाम होकर तौ रह गय़ा, सांसें रुक हि सि तोँ गईं आंखें झपकाना एक् पाप सां लगनेलगा तब, कालेरंग कां सूट सलवार पहने वो हूर अपनी पूरी ग्लो सें प्रकट होँ रही थि।।
"" क्याँ हैं? "" वो मुझसे मुखातिब हुई।।
मे वैसे हि उसकी सुन्दरता मे डूबेहुए बोला "" जीकुछ नहि ""
मे जैसे अपने आप् मे रहा हि नहि, उसके खूबसूरती केँ चमत्कार कि पकड़ मे आँ गय़ा थां। पहले सें हि ऐसी बेचैनी कां समुंदर अपने अंदरलिए, तड़पता हुआ तोँ आया थां उसकेपास, ऊपर सें जौ सितममुझ बेचारे दीवाने पे जौ किया उसके हुष्ण नें तोँ सह नं पायाये सभी।। मे ऐसे हि उसके खूबसूरती मे खोयाहुआ आगे बढ़ा औऱ हूर कों अपनी बाँहों मे लें लिया।।।
बाजी भि शायद इन्ही पलों केँ प्रतीक्षा मे थि, उन्होने भि मुझे अपने सें लगा लिया औऱ मेरीकमर पे प्रेम सें हाथ फेरने लगी।।। जाने कितना हि वक्तबीत गय़ा औऱ हम् दोनों एक् दूसरे सें यूं हि लगे अपनी आत्माओं कि प्यास बुझाते रहे।।। सच हि हैं कि आत्मा कां ऋण जीने नहि देता, जीनेतब देता हैं जब उतारदो, हाँ हम् दोनों ऋण चकाने केँ लिए हि तौ थें।।।।
"" तुम् ठीक हौ नाँ? "" बाजी कां सुभह वाला प्रश्न आवाज़ बन मेरे कानों सें टकरा गय़ा औऱ न् चाहते हुए भि होश कि दुनिया मे वापस आँ गय़ा
"जीअबठीक हूं" ये कहतेहुए मेरे होंठों पे एक् मुस्कान सि आँ गई।
"डोरबंद करलूं?"
"जी"
हम् दोनों न् चाहते हुए भि एक् दूसरे सें अलगहुए औऱ बाजी दरवाजा बंद करनेलगी। जाने प्रेमियों मे धैर्य कि कमी क्यूं होती हैं, वो एक् समय कि दूरी बर्दाश्त नहि कर सकते। ऐसा हि मेरेसंग हुआ औऱ बाजी जौ डोरबंद करके मुड़ने हि वाली थि, मैंने उन्हें पीछे सें हि हगकर लिया।। मेरेहाथ उनके बाजुओं केँ नीचे सें गुजरते हुए, उनकेपेट सें ज़राऊपर थें।।।
कितनी हि देर मे यूं हि बाजी कों हगकिए रहा। फिन मे अपनाएक हाथ उनकेपेट उठाया औऱ उनकेगाल पे रखा औऱ उन केँ चेहरे कों पीछे कि ओर धीरे-धीरे सें किया, ताकि पीछे कि ओर हम् दोनों केँ होंठ एक् दूसरे सें टकरा सकें। होंठजब एक् दूसरे सें टकराए तौ अजब हि मस्तियों मे मस्त हम् मस्ताने, होंठ कि छेड़छाड़ सें एक् प्यारे सें युद्ध मे डूबते चलेगए। इसजंग नें आज शुरुआत होते हि जैसे घोषणा सि कर दि थि कि उसे बहोत लंबे वक्त तक जारी रहना हैं।। समय केँ संगइस युद्ध मे जैसे तीव्रता सि आरम्भ होँ गई, हाँ शायदआज वक़्त कां तकाजा हि थां।।।
बाजी केँ नरम गुलाबी होठों कों पीछे सें खड़े खड़े हि चूमते हुए, अब मे अपनेपेट केँ जराऊपर हि मौजूद अपनेहाथ उनकेपेट पे फेरने लगा। बंद होते, खुलते, चपकते, लपटते होठों केँ संग, अब हम् दोनों एक् दूसरे केँ संग अपनीजीभ भि टकरारहे थें। इस प्रेम भरी लड़ाई कों लड़ते लड़ते मेरेकदम पीछे कि ओर होना शुरुआत हुए, औऱ फिन मेरेसंग बाजी केँ कदम भि पीछे कों होना शुरुआत हुए, हां मगर वो जंग, वो नहीं रुकी वो अपनी तीव्रता सें जारी हि रही। कदम पीछे कि ओर होतेचले गए औऱ मे बेड तक जा पहुँचा औऱ फिन बाजी कों अपनेसंग लेतेहुए धीरे-धीरे बेड पे बैठ गय़ा।।।
अब बाजी मेरीगोद मे बैठी हुइ थि। होंठ औऱ जीभ वैसे हि आपस मे व्यस्त रहे। अब मेराहाथ जौ उनकेपेट पे थां, वो ऊपरआया औऱ सूट केँ ऊपर सें उनके दोनों बूब्स कों धीरे-धीरे दबाने लगा.बूब्स कों मेरी पकड़ मे जातेदेख बाजी केँ मुंह सें "" "अहहअहह मममम हम् अहह सस्स "" आवाज़ निकली।।
कितने समयऐसे हि बीतगए खबर नहि कि फिन मेराहाथ नीचे खिसकता चला गय़ा औऱ मैंने बाजी कि कमीज केँ अंदरहाथ डाल दिया, हाथ आगे बढ़ते बढ़ते उनके ब्रा सें अंदरचला गय़ा औऱ मैंने उनकेबूब कों सहजता सें थाम लिया। बाजी मेरीगोद मे बैठेहुए मचलकर रह गई। मेरा उनके ब्रा मे मौजूद हाथ दोनों बूब्स कों बारी बारीथाम रहा थां, धीरे-धीरे सें दबारहा थां, सहलारहा थां कि मे नें शर्ट केँ अंदर हि उनके मम्मे ब्रा सें बाहर् निकाल दिया।
जुनून समय केँ संग शायद बढ़ता हि चलाजा रहा थां। बाजी नें अपनाएक हाथ वैसे हि बैठे बैठे पीछे किया औऱ मेरेसिर पे रखकर मेरे बालों कों धीरे-धीरे पकड़ लिया। हर बीतता लम्हा अपने अंदर मस्ती औऱ वासना कि एक् नई दुनिया लें केआता। मेरे होंठ बाजी केँ होंठों सें अलगहुए औऱ अपने दोनों हाथ उनकेपेट पे रखे औऱ उन्हें अपनेसंग लिएबेड केँ ऊपर खिसक गय़ा। वो अपनीकमर केँ बलबेड पलटी हुई थीं, यानी कि उनका मुंह दूसरी तरफ थां औऱ मे उनके पीछे उनकेसंग चिपका हुआ लेटा थां। इस दौरान उनकी शर्ट उनकीकमर सें बहुतऊपर कोसरक चुकी थि।
मेराहाथ उनकीकमर केँ नीचे सें होताहुआ उसकेपेट पे थां, जबकि दूसरा उनकीकमर केँ ऊपर सें होताहुआ उनकेपेट पे थां।। मेरे दोनों हाथअब कि बारएक संगऊपर कों बढ़े औऱ मे उनके दोनों बूब्स कों एक् संग शर्ट केँ अंदर हि अपने हाथों मे पकड़ा औऱ दबाने लगा। बाजी औऱ मे एक् संग हि मजे सें चिल्ला उठे "" "अहहअहह मम हमम्म्म्म ममममम धीरे-धीरे आहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह"
"" मे बाजी केँ मोटेतने हुए मम्मे दबाएजा रहा थां, औऱ अपने दोनों हाथों केँ दोनों अंगूठे औऱ उंगलियों सें उनके दोनों निपल्स कों रगड़े जारहा थां, औऱ नीचे सें अबयेहाल होँ चुका थां कि मेरा लन्ड बहोत हि कड़ा होँ केँ बाजी कि सलवार केँ ऊपर सें हि उसकी मोटी बाहर् निकली हुइ गान्ड कि गहरी लाइन मे फँसाहुआ थां। बाजी नें जोँ सलवार पहनरखी थि उसका कपड़ा बहोत बारीक थां, जिसवजह सें ऐसाफील हौ रहा थां कि उनकी गाण्ड औऱ मेरे लन्ड केँ बीचकोई बाधा नहि हैं। मजे कि अथाह गहराई मे डूबता हि चलाजा रहा थां कितनी हि देरबीत गई मे यों हि बाजी केँ मम्मे दबाता रहा औऱ अपना लन्ड उनकी गाण्ड मे फँसाकर लेटारहा।
फिन एक् विचार केँ मन मे आते हि मैंने अपने दोनों हाथ बाजी केबूब्स सें हटाए औऱ पीछे होँ गय़ा मे पीछे होकर थोड़ी नीचे सरका औऱ दोनों हाथ बाजी कि सलवार पे रखदिए। मेरे हाथों कों अपनी सलवार पे महसूस करते हि बाजी नें अपनाएक हाथ पीछे किया औऱ मेरेहाथ कों पकड़ केँ दबाया औऱ ऐसा करने सें मना किया। मैंने आगे होँ केँ बाजी केँ इसहाथ कों चूमा औऱ उसे प्रेम सेएक साइड पे किया औऱ फिन उनकी सलवार कों पकड़ केँ नीचे करनेलगा कि बाजी नें फिन सें मेरेहाथ कों पकड़ लिया "" नहि करो नाँ
"पऱ मे रुकता केसे, आज मे अपनीउस ख़्वाहिश कों पूरा करना चाहता थां, उस ख़्वाहिश कों जहां सें ये सारा सिलसिला शुरुआत हुआ थां। अपनीजिस ख़्वाहिश कि पूर्ति कां मैंने बहोत वक़्त प्रतीक्षा किया थां।। मैंने बाजी कां हाथफिन सें चूमा औऱ साइड पे करतेहुए "थोड़ी देर देखूंगा"
"" मानलो नाँ मेरीबात "" बाजी नें मस्ती भरी आँखों सें मुझे देखते हुएकाह।।।
"थोड़ी देरबस"
"सलमान जोँ गुनाह मुझसे हुएवही बहोत हैं यह क्याँ कररहे होँ, येमतकरो, मानजाओ नाँ"" बाजी नें मुझे मनाते हुएकहा
अपनी ख़्वाहिश कि पूर्ति कों इतनेपास देख मे जैसे उनकीकही बात कों अनसुनी कर बैठा। "बस थोड़ी देर"
बाजी नें अपना चेहरा आगे कि ओरकर लिया। मे फिन सें उनकी सलवार नीचे करनेलगा कि उन्होने फिन सें मेरेहाथ कों थाम लिया औऱ दबाया, पऱ इसबार मे रुका नहि।
मे बाजी कि सलवार नीचे करताचला गय़ा, यहां तक कि उनकी मोटी बाहर् निकली गाण्ड पूरी नंगी होँ गई। अहह मे जैसे उनकी गाण्ड कि सुंदरता मे खो सां गय़ा.एक् तोँ उनकी गाण्ड थि हि इतनी खूबसूरत, ऊपर सें कालीसूट, सलवार केँ बीच मे नंगी, अहह मे तौ जैसे अपनेहोश हि खो बैठा। तब मैंने ये जानां कि गाण्ड कां दीवाना मे ऐवें हि नहीं हौ गय़ा थां। यह गाण्ड थि हि इसके लायकउसे घंटों बैठे बैठे देखाजाए, औऱ उसे प्रेम कियाजाए
"ऐसेमत देखो नां" बाजी नें शरमाते हुएकहा
बाजी कि आवाज़ मुझे जैसेहोश मे लेँ आई। मैंने बाजी कों देखा तोँ वो मेरीओर हि अपनी आँखों मे नशा औऱ चेहरे पे हल्की सि तकलीफ़ लिएदेख रहीथीं, ऐसे जैसे कि उन्हें मेरीयह दीवानगी समझ नं आँ रही होँ। मुझसे नज़रें टकराते हि वो मुझे औऱ नहींदेख पाई, औऱ फिन उन्होंने अपना चेहरा आगेकर लिया, औऱ अपनाहाथ फिन सें सलवार पे रख केँ उसेऊपर कि ओर करनेलगी कि मे उन्हें हाथ सें पकड़ लिया, औऱ अपने मुंह कों आगे करतेहुए बाजी कि गाण्ड कि एक् साइड कों चूम लियाअहह अहहफिन दूसरी साइड कों चूम लियाअहह फिन चूमने कां जोँ सिलसिला शुरुआत हुआ कि बस मे चूमता हि चला गय़ा।
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