रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 28
“हैल्लो इन्स्पेक्टर ठाकुर केसे हैं आप् “
डॉ नें इंस्पेक्टर सें हाथ मिलाते हुएकहा,
“आपकी कृपा हैं सर “
दोनो केँ हि होठो मे मुस्कान आँ गई
“हैल्लो देव”ठाकुर नें अब अपनाहाथ मेरीओर बढ़ाया,
मे ऐसे भि अभि तक इसबात कों लेकर चिंतित थां कि आखिरडॉ नें मुझे अपनेसंग आने कों क्योकहा हैं, यह वही इंस्पेक्टर थां जिसने मुझे अरेस्ट किया थां साम कां वक्त थां औऱ मे होटल सें थकाहुआ अपनेघऱ जाने कों हि निकला थां, आज पूर्वी भि हॉस्पिटल सें घऱ शिफ्ट हौ गई थि, पिछले 3 दिनों सें निशा मुझसे नजरे चुरारही थि, अब मुझे भि उससेबात करने कि ख़्वाहिश जागने लगी थि मगरफिन भि जब तक पूर्वी हॉस्पिटल मे थि हमेऐसा वक्त हि नहींमिल पारहा थां कि हम् कुछबात कर पाए, मे घऱ कों निकला हि थां कि काजल कां कालआया उसने मुझे जिला सेंटर जेल मे बुलाया थां, मे चौकामगर फिन भि क्याँ करता, वही मुझेडॉ मिलने वाले थें जौ कि बाहर् हि मिल गए, काजल कों आने मे वक्त थां, अभि अभि ठाकुर साहब पहुचे थें……
“आखिरबात क्याँ हैं सर”
मैंने डॉ कि तरफरुख किया.
“हम् अजीम सें मिलने आये हैं “
सुनकर मे दंगरह गय़ा, अगर काजल कों हि मिलना थां तौ मुझे लाने कि क्याँ जरूरत थि,
शायदडॉ कों मेरीनजर समझ आँ गई
“असल मे वोँ चाहती थि कि अब तुम् भि हमारे हि संग रहो, ”मुझे कुछसमझ तोँ नहींआया मगर मुझे समझने कि कोई जरूरत भि तौ नहीं थि, आखिर जोँ होँ रहा हैं वोँ देख्ना बस तौ थां मुझे …
मैंने जेल केँ गेट मे काजल कि कर रुकते देखी, हम् सब अभि गेट केँ बाहर् हि थें.
वोँ उतरकर सीधे ठाकुर केँ पास पहुची
“क्याँ हुआ हैं अजीम कों “
उसकी आवाज़ मे एक् अजीब सि घबराहट थि लगा जैसे वोँ अजीम केँ लिए बहोत हि चिंतित हैं …
“पता नहींकुछ अजीब सि हरकते कररहा हैं, अभि तक खान कों पता नहींचला हैं उसेकुछ पताचले उससे पहले मैंने डॉ कों बताना सही समझा …
अचानक हि काजल केँ चहरे मे आयाहुआ चिंता कां भाव थोड़ाकम हुआ
“हम्म तोँ चले “
डॉ नें ठाकुर कों निर्देश दिए.
आज मुझेपता चला कि पॉवर कां इस्तमाल केसे किया जाता हैं, जिस जेल मे सामान्य कैदी केँ परिवार कों मिलने केँ लिए लाइन लगानी पड़ती हैं, औऱ एक् निश्चित टाइम दिया जाता हैं, अगर आपके पॉवर हौ तोँ लाइन छोड़िए टाइम कि भि कोई पाबंदी नहीं होती, इंस्पेक्टर हमे सीधे जेलर केँ कमरे मे लेँ गय़ा, वोँ भि थोड़ी औपचारिक बातचीत केँ बाद सीधेहमे एक् दूसरे कमरे मे लेँ गय़ा …
वोँ एक् अंधेरा रूम थां जंहा पर्र एक् बड़ा सां कांचलगा थां, देखने सें हि समझ मे आँ रहा थां कि यह इंवेस्टिगेशन केँ लये बनाया गय़ा हैं……
वँहाउस कांच कि दीवार सें हमे दूसरे कमरे कां नजारा साफदिख रहा थां, जंहा पर्र अजीम बैठाहुआ थां, वोँ असली इन्वेस्टिगेशन रूम थां, मुझे नहींपता थां कि जेलों मे भि इसतरह कि सुविधा होती हैं, जेलर केँ संगकुछ औऱ भि पुलिस वाले वँहा पहुचे थें.
“आप् बातकर लीजिये जब हौ जाए तोँ मुझेबता देना मे बाहर् हि हु “
यह कहतेहुए जेलर औऱ ठाकुर दोनो हि बाहर् निकलगए.
काजल नें फिन किसी कां प्रतीक्षा किये बिना हि अंदर केँ कमरे कि ओररूख किया, अजीम केँ संग भि एक् पोलिस वाला मौजूद थां, जौ काजल कों देखते हि बाहर् निकल गय़ा.
“ओह तुम् आँ गई “पुलिस वाले केँ जाते हि अजीम नें काजल कों गले सें लगा लिया, वोँ अभि कैदी केँ कपड़ो मे थां, औऱ जोरो सें रोरहा थां, मैंने महसूस किया कि उसकावजन कुछकम हौ गय़ा हैं, चहरे कां तेज फीकापड़ा हुआ हैं, यह वही व्यक्ति थां जोँ कि गरजकर बाते किया करता थां आज उसकीयह हालत देखकर तौ मुझे भि उसकेऊपर दया आँ गई …….
वोँ बहोत हि मजबूर औऱ कमजोर लगरहा थां.
उसने काजल कों ऐसेपकड़ रखा थां जैसे कि अमरबेल कि लताये किसी वृक्ष कों ….मगर मुझेइस बात सें बिल्कुल भि जलन नहीं हुइ क्योकि वोँ इतना मजबूर दिखरहा थां औऱ काजल इतनी मजबूत कि मुझे तौ अजीम केँ ऊपर हि तरस आँ रहा थां, ऐसा लगरहा थां जैसे वोँ सालो सें काजल कि राहदेख रहा हौ……….
काजल उसकेपीठ कों थपथपा रही थि जैसे वोँ उसे सांत्वना देरही हौ …
“आओ आहिस्ता बैठो “काजल नें उसेपास कि हि कुर्सी मे बिठा दिया, हमे उनकी आवाज़ स्पीकर केँ जरिये साफसाफ सुनाई देरही थि वही आईने सें ऐसालग रहा थां जैसे कि वोँ हमसेकुछ हि दूरी मे बैठेहुए बातेकर रहे होँ.
“काजल.काजल मे पागल होँ जाऊंगा “
उसकी आवाज़ मे एक् अजीब सि तडफ थि….
वोँ फफककर रोपड़ा, औऱ उसने बैठे हि बैठे काजल केँ कमर कों जकड़ लिया, अब उसकासर काजल केँ पेट पर्र थां, काजल अब भि खड़ी हुईँ थि, काजल नें उसके बालो कों सहलाना शुरुआत किया, इससे उसे जरूर हि बहोत शुकुन मिला होगा, वोँ किसी बच्चे कि तरह काजल सें लिपटा हुआ थां वही काजलउसे किसी मां कि तरह दुलार कररही थि, अब मुझेसमझ केँ आया कि रश्मि क्यो काजल सें इतना जलती हैं……….
“मे आँ गई हु नां सभीठीक हौ जाएगा “
“मे मरना नहीं चाहता काजल मरना नहीं चाहता प्लीज् मुझे यंहा सें निकालो “
वोँ तड़फता रहा,
काजल केँ कांच कि ओर देखा जिसके दूसरे सिरे मे हम् उसेदेख रहे थें, उसके चहरे मे एक् कमीनी मुस्कान खिल गई,
सच पूछो तोँ मेरादिल हि धककररह गय़ा,.
उसकी मुस्कान हि उसके विजय कि गाथाकह रही थि, ऐसालगा जैसे काजल कों उसेइस हालत मे देखकर अपार संतोष हुआ हौ…….
मेरी काजल इतनी बेरहम होगीयह तोँ मैंने भि नहीं सोचा थां.काजल कां यहरूप पहलीबार मेरे सामने थां…
“तुम् फिक्र मतकरो.बस अपने पिता औऱ उस रश्मि कि बातो मे मतआया करो, नहीं तोँ मे तुमसे रूठ जाऊंगी “
काजल केँ इतना कहते हि उसने काजल कों औऱ भि जोरो सें कस लिया.
“मुझेमाफ करदो काजल, मे बहक गय़ा थां मुझेलगा कि मेरे पिता मुझे छुड़ाना चाहते हैं मगर तुमने मेरी आंखेखोल दि वोँ तौ रश्मि केँ बदन केँ बहकावे मे आकर मुझे हि फांसी पर्र चढ़वाना चाहते हैं, दोनो हि मिलकर मेरी जायजाद हड़पना चाहते हैं, मुझे माफकर दो काजल ….प्लीज् मुझसे मत रूठना, तुम् रूठ गई थि तोँ मे पागल हि होँ गय़ा थां ”वोँ औऱ जोरो सें रोनेलगा औऱ काजल कि मुस्कान औऱ भि गहरी होँ गई.
मे समझ गय़ा थां कि काजल नें उसे किसीतरह सें खान साहब औऱ रश्मि केँ बारे मे भड़का दिया हैं.मगर केसे ?
वोँ उसके बालो पऱ हाथ फेरेजा रही थि,
“तुम् फिक्र मतकरो मे अब तुमसे नहींदूर नहीं होने वाली, औऱ तुमसे मिलने भि आया करूँगी, यहलो तुम्हारे सब दुखो कि दावा “
उसने हाथो सें एक् पुड़िया निकाल कर अजीम केँ आगेकर दि, जिसे देखकर अजीम कां चहरा हि खिल गय़ा, मुझे समझते देर नहींलगी कि काजलउसे ड्रग्स देरही हैं.मे अंदर सें कांप गय़ा.
“थैंक्स काजल, तुम् मेरेलिए इसे भि लेँ आई, मे तोँ इसके बिना पागल हि होँ गय़ा थां “वोँ बड़ी हि उतावली सें उसे देखने लगा जैसेकोई बच्चा चॉकलेट कों देखता हैं, उसने हाथ बढ़ाया मगर काजल नें मुठ्ठी बंदकर ली.वोँ बेचैन होँ उठा, अब मुझेसमझ मे आया कि काजल नें उसे केसे अपनेवश मे आररखा थां.
“पहले प्रोमिश करो कि मेरेऊपर शक नहीं करोगे औऱ उन दोनो सें दूर हि रखोगे “
वोँ ललचाई निगाहों सें उसेदेख रहा थां,
“प्रोमिश मे तुम्हारी शपथ खाताहु काजल प्लीज् अबमत तड़फ़ाओ “काजल कि एक् जोरदार हँसी कमरे मे गुज गई उसनेबड़े हि प्रेम सें उसके माथे कों किस किया औऱ उसके हाथो मे वोँ पुड़िया थमा दि.
“मे जेलर सें बोलकर तुम्हरे लिएनए कमरे कां इंतजाम करवा देतीहु “
अजीम काजल कों ऐसेदेख रहा थां जैसे कि वोँ उसके हि अहसानो पर्र जिंदा हौ …
“तुम् मेरेलिए कितना करती हौ काजल औऱ एक् मेरे पिता हैं जौ मुझे यंहाआकर भि लेक्चर हि देते रहते हैं, स्वयं तोँ बाहर् मेरी पत्नि केँ संग अय्याशी करते हैं…”उसकी आंखेनम थि
“तुम् फिक्र मतकरो तुम्हरे बाहर् निकलते हि हम् उन्हें सबक सिखाएंगे, बस तुम् जल्द सें बाहर् आँ जाओ, मे पुलिस कों खरीदने कि पूरी कोशिस कररही हु, ताकि केस मे कोई सबूत हि नाँ मिलपाय याँ जोँ सबूत मीले हैं वोँ सब नष्टकर दिएजाए, उसकेलिए भले हि मुझे अपना शरीर भि देनापड़े मगर मे तुम्हे छुड़ाने मे पीछे नहीं हटूंगी.”काजल कि बातो सें अजीम औऱ भि भावविभोर हौ गय़ा थां …
“औऱ मुझे थोड़े पैसे चाहिए …”काजल थोड़ेदेर केँ लिए शांत होँ गई ….
“यहसभी यंहा तक लाने केँ लिएसब कों खिलाना पड़ता हैं तुम् तौ समझते हि होँ.तुम्हारे पिता जी तौ देने सें रहे औऱ होटल कां बिजनेस भि ऐसा नहींरहा कि तुम्हरे बिना पैसों कां इंतजाम होँ जाए, रश्मि नें अपने होटल मे वहीकाम शुरुआत कर दिया हैं जोँ कि हम् करते थें, औऱ अब वोँ औऱ भि पॉवरफूल होँ गई हैं, तुम्हे बर्बाद करने कि तोँ जैसेशपथ हि खा केँ बैठी हैं वोँ, खान साहब भि क्याँ करे उनके सामने तौ जैसे हि वोँ अपने कपड़े खोलती हैं वोँ चुप हि हौ जाते हैं….अब तुम् हि बताओ अजीम मे सबकेलिए पैसेकहा सें लाऊ….यह सब तौ तुम्हारे लिये अपना शरीर बेचकर कररही हु…”
काजल रोनेलगी ….
मुझेपता थां कि उसका रोना केवल एक् एक्टिंग हि हैं औऱ उसे पैसे कि कोईकमी भि नहीं हैं, होटल कां पूरा कारोबार हि उसकेपास थां औऱ होटल इतने भि घाटे मे नहींचल रहा हैं, उसके अलावा उसने होटल कों अच्छे सें सम्हाल लिया थां जिससे पूरे मुनाफे कां 10-20 % तौ काजलशो हि नहीं करती थि यानी वोँ सब पैसे काजल केँ पास थें, इससेखान कों लगता थां कि होटल घाटे मे चलरहा हैं.खान काजल पऱ आंख मूंदकर विश्वास कररहा थां जैसे कि अभि अजीम ….
“तुम् फिक्र मतकरो काजलकुछ करते हैं, तुम्हरा बदनअब मेरेलिए हैं औऱ किसी केँ लिए नहीं जितना तुम्हे करना थां वोँ तुम् कर चुकी होँ अब नहीं “अजीम थोड़ा कॉन्फिडेंट दिखरहा थां, शायद वोँ अपने जिंदगी कि सबसेबड़ी भूल करनेजा रहा थां……
“क्याँ करोगे तुम्.”काजल नें एक् व्यंग सां मार दिया जिससे वोँ तिलमिला गय़ा, औऱ खड़े होकरइधर उधर घूमने लगा.
“मेरेपास एक् प्लान हैं “
काजल नें धीरे-धीरे सें कहा, अजीम कि नजर भि उसपर हि जम गई
“होटल केँ ज्यादातर शेयर तुम्हारे नाम हैं, तुम् उनमे सें कुछ मेरेनाम करदो.अब यंहा रहतेहुए बसयही कियाजा सकता हैं.अभि होटल कि हालत खस्ता जरूर हैं मगर हमारे होटल कां कुछनाम तोँ हैं, हौ सकता हैं कि उन्हें बेचकर हमेकुछ पैसेमिल जाए.”अजीम कि निगाहे काजल पऱ हि जम गई थि जैसे वोँ कुछ सोचने लगा होँ
मगर काजल नें इतने स्वाभाविक तरीके सें कहा कि कोई भि उसकी बातो मे आँ जाता,
“मे जानती हु अजीम कि तुम् सोचरहे होंगे कि उन शेयर कि कीमत हि कितनी होगी जौ हमारे काम आएगी, मुझेपता हैं कि शेयर केँ भावहमे ओरिजनल कीमत सें कई गुनाकम मिलेगा मगर इससे हमारी समस्या तोँ कुछदेर केँ लिएकम होगी …”काजल नें अपनी आंखों मे आंसूला लिया थां.मे तोँ उसकीइस एक्टिंग सें हि हैरान थां, खान केँ होटल केँ शेयर केँ कम पैसे मिलेंगे, वाउ रे काजल …….
ओरिजनल कीमत सें कम सें कम 20 गुना ज़्यादा पैसेउस शेयर केँ मिलते, इतना तौ उस होटल कि हालत देखकर कोई भि जानकर व्यक्ति बता सकता थां मगर अजीम कों यह समझादिए गय़ा थां कि होटल कि हालत बहोत हि खस्ता हैं, संग हि खान केँ बाकी केँ कारोबार भि डप्प होँ रहे हैं, औऱ इन सबका कारण उसकी गिरफ्तारी हैं,
अजीम बेचैनी सें कमरे मे घूमने लगा, काजल नें उसे अपनेपास खिंच लिया, औऱ उसकेगले सें हाथडाल दिया औऱ उसकी आंखों मे देखने लगी …
“तुम् फिक्र मतकरो मे सभी सम्हाल लुंगी ….मैंने तौ अपनासभी कुछ हि तुम्हारे नामकर दिया हैं औऱ तुम् होँ कि थोड़े सें शेयर केँ लिए भि सोचरहे होँ, जबकि तुम्हे पता हैं कि उनसे भि पैसों कि समस्या ख़त्म नहीं होगी, मगर मे औऱ पैसों कां इंतजाम कर लुंगी ….तुम्हरे लिएसभी कुछ “
वोँ हल्के सें मुस्कुराई औऱ उसके होठो मे अपने होठो कों घुसा दिया, इस दृश्य कि मैंने कल्पना भि नहीं कि थि, मे बुरीतरह सें झेप गय़ा थां, मेरी पत्नि मेरे हि सामने किसीगैर मर्द केँ होठो कों अपने होठो मे भरेहुए चूसरही थि, जैसे कि दोनो केँ होठ हि जमगए होँ ….मैंने नजरफेर ली, मेरी हालत देखकर डॉ केँ चहरे मे मुस्कान आँ गई,
“ठिक हैं तुम् बताओ कि मुझे क्याँ करना हैं “
मुझे अजीम कि आवाज़ सुनाई दि,
“बसदो मिनट रुकोतब तक तुम् एक् शॉटमार लो, औऱ कम हि यूज़ करनाइसे बहोत कीमती हैं औऱ बड़ी मुश्किल लगती हैं यंहा लाने मे “काजलउसे देखकर मुस्कुराई औऱ उसके होठो मे फिन सें एक् किस देकर बाहर् निकलआयी,
जैसे हि हम् दोनो कि नजर मिली उसकीनजर नीचे होँ गई थि वहीहाल मेरा भि थां, डॉ नें कुछ पेपर काजल केँ सामने करदिए,,
“पूरे तैयार हैं, बस एक् साइन औऱ 60% तुम्हरे नाम होँ जाएगा “
मे बुरीतरह सें चौक गय़ा,
“क्याँ 60% वोँ इतना पागल नहीं हैं कि 60% मे सिग्नेचर कर देगा “मे चीखा
दोनो हि मुस्कुराने लगे,
“वोँ तौ नहीं करेगा मगर जौ वोँ अभि अपनीनाक मे डालरहा हैं वोँ यह जरूर करवा देगा “
मे कांच सें देखरहा थां, अजीम पुड़िया खोलकर उसे सूंघने लगा थां.उसका चहरालाल पड़नेलगा जैसे कि वोँ किसीअलग हि दुनिया मे पहुच गय़ा हौ ….
“काजल एक् बारफिन सें सोचलो हम् इस पैसे केँ बिना भि खुसरह सकते हैं, औऱ किसी कों ऐसेनशे मे धोखा देना ???”
मेरी आंखों मे चिंता साफ थि मगर काजल कि आंखेकुछ औऱ हि किस्सा कहरही थि …
“जौ इसने मेरेसंग इसनशे मे किया हैं उसके सामने शायदयह कुछ भि नहीं “काजल कि आवाज़ भारी होँ गई थि लगा जैसे वोँ रोने वाली हौ …
मे उसे देखता हि रहाजब वोँ अंदर गई औऱ अजीम नें हंसते हंसते उसे बांहो मे भरकर काजल मे साइनकर दिए,.
काजल नें कांच कि दीवार कों देखा उसके चहरे मे विजय कि मुस्कान थि ………….
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अध्याय 29
“रुको “मेरी आवाज़ सें निशारुक गई जिसने अभि अभि मेरेलिए दरवाजा खोला थां,
जेल सें आने केँ टाइम काजलफिन केँ होटलचले गई थि, निशा नें दरवाजा खोला औऱ सर झुकाए जानेलगी, मुझेयह बात बहोत हि तकलीफदेह लगरही थि कि मेरी हि बेहन मुझसे ऐसेपेश आँ रही थि, शायद वोँ उसदिन कि मेरी बातो कों अब भि अपने दिमाग़ मे बसाकर रखे थि…
“तुम् ऐसे मुझसे भाग क्योरही होँ “निशापलट भि नहींरही थि औऱ सर झुकाए खड़ी थि …
“कुछ भि तौ नहीं भाई “
“पूर्वी कैसी हैं “
“ठिक हैं अपने कमरे मे हैं “मैंने निशा सें अभि बात करना उचित नहीं समझा, मे सीधे हि उनके कमरे कि ओर बढ़ा, आज उसने मुझे नहीं रोका, मे कमरे मे थां औऱ मेरे सामने मेरी प्यारी बेहन पूर्वी लेटी हुई थि, मुझे देखते हि वोँ खुसी सें उछाल पड़ी, वोँ आज हि घऱआयी थि औऱ मे उससे अभि मिलरहा थां…
“कैसी हैं मेरीजान “मे उसकेपास हि बैड मे जाकरबैठ गय़ा, वोँ उठाने कों हुइ मगर मैंने उसे लिटा दिया.
“अरे मुझेकोई उठाने क्यो नहीं देता हैं “
उसकी मासूमियत मे तौ दुनिया कुर्बान थि.
मे हंसा
“मे पूरीतरह सें ठीकहु भाई अब तोँ मे कालेज भि जा सकतीहु “
कालेज ?????
मैंने तोँ यह सोचा हि नहीं थां, अब क्याँ मेरी बहनों कां कालेज जानां ठीक होगा क्योकि जौ मैंने किया थां उससे पूरे कालेज मे इन्ही कि चर्चा हौ रही होगी, औऱ उनको खतरा भि होगा …
मेरे मनोभाव शायद पूर्वी कि समझ मे आँ गए थें.
“अरे जिसका आपके जैसा भइया होँ उन्हें अबकोई कुछ नहीं बोलेगा आप् क्यो फिक्र कररहे होँ “
पूर्वी नें मेरेमन कि बातसुन ली थि,
“कुछदिन रेस्ट कर लें फिन मे हि तुम्हे कालेज छोड़कर आँ जाऊंगा “मैंने उसके बालो कों सहलाते हुएकहा,
“क्याँ भाई आप् भि ….कितना रेस्ट करूँगी मे, बोरहोई जातीहु यंहा लेटे लेटे.औऱ आप् फिक्र मतकरो मेरीअब मुझेकुछ भि नहीं होगा “
“ह्म्म्म “
मे भि चुप हौ गय़ा औऱ उसके जख्मो कों देखने लगा, अधिक गहराघाव नहींबना थां, मगर जलने वाली स्थान मे निशान बच गय़ा थां, घाव पूरीतरह सें ठीक थां औऱ उसकी चमड़ी सें उसकेनस दिखरहे थें, ऊपर कि त्वचा जल गई थि, मुझेउसे देखकर फिन सें बड़ा दुखीहुआ,
“देखो नाँ भाई सभी तोँ ठीक हौ गय़ा हैं औऱ मुझेकोई कमजोरी भि नहीं हैं अब “
वोँ उठकर मेरेगले मे झूल गई, मुझे मेरी पुरानी पूर्वी वापसमिल गई थि, मे उसे अपनेगले सें लगाकर रखा रहा, मेरी नजरउस कमरे मे पड़ी….
यही वोँ रूम थां जंहा मेरेआने सें मेरी बहनों कों तकलीफ़ थि, आज उन्हें कोई तकलीफ़ नहीं होँ रही थि इसका मतलब थां कि उन्होंने वोँ चीजहटा दि होगी, मे ध्यान सें देखने लगासब कुछ तौ ठीक थां बस एक् चीज केँ, एक् दीवाल जोँ कि पलंग केँ बाजू नें हि थां, मुझे लगा कि उसपरकोई पोस्टर चिपका हुआरहा होगा जिसे अभि अभि निकाला गय़ा थां, क्योकि पोस्टर तौ निकल गय़ा थां मगरउस स्थान कां कलर बाकी दीवाल केँ कलर सें अलग थां, मे फिन सें नजर दौड़ाया औऱ मुझे वोँ पोस्टर भि दिख गय़ा, जोँ कि निशा केँ स्टडी टेबल केँ नीचे मे मोड़कर रखा गय़ा थां, क्याँ थां उस पोस्टर मे जिसे मेरी बहने मुझसे छिपारही थि, ???
मे अधिक खुफिया गिरी नहीं करना चाहता थां …
मुझे निशा कां आभासहुआ जोँ कि मेरे पीछे हि खड़ी थि, मे जब पलटा तौ उसनेफिन सें नजर झुका लिया, मैंने पूर्वी कों देखा औऱ आंखों हि आंखों मे पूछा कि क्याँ हुआ.
उसने उसने अपनीनजर बड़ी करके मुझे बताया कि आपके हि कारणहुआ हैं यहअब मनाओ.उसका चहरा औऱ एक्प्रेशन देखकर मुझे हँसी आँ गई मगर मे बस मुस्कुराया …
मैंने निशा कां हाथ पकड़ा औऱ खाट मे बिठा दिया, वोँ अब भि नजर गड़ाएहुए बैठी थि,
“मुझसे नाराज होँ ???”
मैंने कहा हि थां कि वोँ वँहा सें उठकरचली गई, मैंने देखा थां कि उसके आंखों मे आंसू थें.हम् दोनो हि उसे जातेहुए देखते रहेमगर कोईकुछ भि नहींबोल पाया, वोँ कमरे सें बाहर् चली गई शायद रसोई मे …
“इसे क्याँ हौ गय़ा हैं “मे पूर्वी कि तरफ मुड़ा जौ कि दुःखी दिखरही थि.
“भईया …….”वोँ भि चुप होँ गई औऱ उसनेउस पोस्टर कि तरह उंगली कि जोँ कि गोल मोड़कर रखा गय़ा थां, मुझे पता थां कि यही वोँ पोस्टर हैं जोकिकभी इस दीवार मकेलगा रहा होगा.
“उसे देखो “
पूर्वी नें दुःखी स्वर मे हि कहा.
मे उठकरउस तक पहुचा औऱ उसे खोला …
मेरीनजर फ़टी कि फ़टीरह गई थि, यह थां जिसे मेरी बहने मुझसे छिपारही थि ……
मे चौककर फिन सें पूर्वी कों देखने लगा
“हम् नहीं चाहते थें कि आपको इसकापता चलेमगर ….दीद आपसे बहोत प्रेम करती हैं भाई औऱ यह इसका सबूत हैं, ”
मेरी बेहन मुझसे प्रेम करती हैं तौ इसमें छिपाने वाली क्याँ बात थि ???
यहउस पोस्टर सें पतालग रहा थां, जिसके बीच मे एक् दिलबना हुआ थां जिसपर मेरी फ़ोटोलगी थि, उसके चारोओर मात्र मेरी हि फ़ोटो थि, ऐसा लगरहा थां कि किसी नवजवान लड़की कों प्रेम होँ गय़ा होँ औऱ वोँ अपने महबूब कि तस्वीरों सें दीवाल कों सजाने केँ लिएइसे बनाया होँ, निशा कि मेहनत इसमें साफनजर आँ रही थि, मेरीकुछ चुनिंदा तस्वीरों सें उसने एक् आदमकद कां पोस्टर बनाया थां.मेरी आंखेभर गई.
“मे भि आपसे प्रेम करतीहु भाई मगर दिदि कां प्रेम कुछअलग हि हैं.वोँ आपकेलिए पागल हैं, यहां तक कि जब आपकी विवाह हुईँ थि तब सबसे ज़्यादा वहीरोइ थि.मे जानती हु कि यहगलत हैं मगर ……….”
पूर्वी थोड़ीचुप होँ गई, मुझे काजल नें कुछ तोँ बता दिया थां मगरआज मे इसेफील भि कर सकता थां …
“दिदि नें तोँ भाभी कों भि धमका दिया थां, वोँ तौ भाभी कों भि …….”जैसे पूर्वी कों होशंआया होँ कि वोँ क्याँ बोलरही हैं, वोँ चुप होँ गई जैसेकोई सदमालगा होँ, मे उसकेपास जा बैठा
“भाभी कों भि क्याँ “
पूर्वी केँ चहरे मे एक् डर आँ गय़ा थां मे जानता थां कि वोँ क्याँ बोल्ना चाहती थि.
“कुछ नहीं भाई “
“मुझसे कब तक तुम् लोगझूट बोलकर निशा कों बचाने कि कोशिस करोगे.मे जानता हु कि उसने काजल कों मारने कि कोशिस कि थि औऱ तेरी भि ….”कमरे मे एक् अजीब सां सन्नाटा पसर गय़ा थां …
“मे यह भि जानता हु कि जौ एसिड अटैक तेरेऊपर हुआ वोँ उसी नें करवाया थां…”
अब पूर्वी रोनेलगी थि,
मैंने उसे अपने सीने सें जकड़ लिया,
“मे जानता हु मेरीजान कि तुम् निशा कों कितना प्रेम करती होँ, उसकीहर गलतियों केँ बावजूद औऱ मे यह भि जानता हु कि निशा केँ लिएयह सहना बहोत हि मुश्किल होता हैं कि मे उसके अलावा किसी औऱ कों प्रेम दिखाऊ, मे जानता हु कि वोँ बीमार हैं औऱ उसेअगर कुछठीक कर सकता हैं तौ मेरा प्रेम.मगर इसकायह तौ मतलब नहींहुआ कि मे तुझेही प्रेम करनाबंद कर दूंगा ……….अब तौ निशा भि जानती हैं कि मुझे उसके बारे मे पताचल गय़ा हैं शायदइसी लिए वोँ मुझसे इतनीदूर भागरही हैं, मगर वोँ दिल कि अच्छी हैं, वरना अभि तक वोँ काजल औऱ तुझपर औऱ भि हमले करवा सकती थि, उसे अपनी गलती कां अहसास हैं मगर वोँ बीमार हैं, जबउसे उत्तेजना होती हैं तब उसमें कुछ भि सोचने समझने कि शक्ति नहींबच पाती, औऱ जब गलती हौ जाए तोँ फिन पछताने केँ सिवा औऱ कोई चारा नहीं बचता “
पूर्वी मेरे सीने सें लगी हुई सिसकरही थि.
“भाई सच मे दिदि अच्छी हैं, मेरेऊपर हमला तौ करवा दियामगर फिन वोँ इतनारोइ हैं,,,,,,, वोँ तौ ठीक सें खानां भि नहींखा पारही हैं प्लीज् उसे मनाओ शायदजब आप् उसे समझाओगे तभी तोँ ठीक होँ पाएगी.सच मे हमशे बहोत बड़ी गलती होँ गई, हमे आपकोसभी कुछ पहले हि बता देना थां, अगर हम् आपको पहले हि बता देते तौ शायद मुझेपर यह अटैक नाँ होता औऱ नाँ हि भाभी मुसीबतों मे फंसती “वोँ रोतीरही.
“फिक्र मतकर मेरीजान मे सभीकुछ सम्हाल लूंगा अबउसे सम्हालना मेरेऊपर हैं …”
मे थोड़ेदेर औऱ पूर्वी केँ संग हि बैठारहा औऱ फिन बाहर् जाकर निशा कि ओररुख किया, वोँ अभि रसोई मे हि थि………
“यह क्याँ कररही होँ “
मे निशा कों देखकर चौक गय़ा थां, उसके बाल बिखरे हुए थें औऱ वोँ रसोई मे जमीन मे बैठी थि, ऐसालग रहा थां जैसे वोँ बहोत हि रोई हौ, उसने मुझे देखा उसकी आंखेबता रही थि कि उसकी हालत क्याँ थि, आंखों कां काजल आंसुओ कि वजह सें फैल गय़ा थां, कपड़े अस्त व्यस्त थें जैसे उसनेउसे जोरो सें खिंचा होँ, वोँ एक् बहोत हि दर्दनाक मानसिक द्वंद सें गुजररही थि …
मगर मेरेलिए डर कां कारण थां वोँ धारदार चाकू जौ उसने अपने हाथो मे पकड़रखा थां.मुझे देखते हि वोँ ऐसे चौकी जैसेकोई चोरचौक जाता हैं,
उसके इरादे समझकर मेरेदिल कि धड़कने हि रुक गई.
“नहीं निशा …”मे जोरो सें बोल गय़ा औऱ दौड़कर उसकेपास पहुचा, वोँ मुझसे बचनेलगी जैसे मे उसका बलात्कार करने वालाहु …
वोँ मुझे स्वयं कों छूने भि नहीं देना चाहती थि
“नहीं भाई मतछुओ मुझे.मैंने पाप किया हैं भाई.मैंने पाप किया हैं…”
मैंने हाथ बढ़ाया मगर वोँ फिन सें पीछेहट गई.
‘मेरी बेहन मेरीबात सुन मे तुझसे बहोत प्रेम करताहु, निशा मेरीजान सुन मेरीबात “
मेरे आंखों मे पानीआने लगा, ऐसा लगा जैसे उसकीइस हालत कां जिम्मेदार मे हि थां, दिल तडफ गय़ा औऱ आंखों सें वोँ पानी टूटकर गिरपड़ा,
“नहीं भाई, मैंने पाप किया हैं भाई मुझेमत छूना आप् भि गंदे होँ जाओगे भाई, मुझे मर जानां चाहिए मुझेमर जानेदो.”
मे जैसेरो हि पड़ामगर निशा कों जैसेकुछ फर्क हि नहींपड़ रहा थां, वोँ अभि भि सिमटी हुईँ बैठी थि मेरे रोने सें उसेकोई फर्क नहींपड़ रहा थां, वोँ अपने हि धुन मे थि मगर उसकीइस हालत कों देखकर मे बुरीतरह सें टूट गय़ा थां,
मगरयह टाइम टूटने कां नहीं थां, अगर मे टूटा तोँ होँ सकता थां कि मे अपनी बेहन कों हमेशा केँ खो दु, क्याँ मे इतना भि मजबूत नहीं थां जितनी मेरी छोटी बेहन औऱ मेरी पत्नि थि जिन्होंने इतने दिनों तक मुझसे यहबात छुपाए रखी थि.औऱ निशा कों पूरीतरह सें सम्हाल कररखा थां…
मगरआज निशा कि हालत सबसे खराब थि, कारण थां मेरे द्वारा उसे बोलेगए वोँ शब्द जोँ उसे अंदर हि अंदर सें खोखला कररहे थें, अगर मुझेपता होता कि इसकी हालतऐसी होँ जाएगी तोँ मे उस पऱ कभीयह जाहिर हि नहीं होने देता कि मुझेसभी कुछपता हैं, मे इसे साधारण ऑब्सेशन समझरहा थां मगरआज मुझेपता चला कि काजल नें मुझे जल्दकुछ करने कों क्योकहा थां,
निशा बहोत हि बेचैन औऱ डरी हुई लगरही थि, जैसे किसी लड़की केँ संग जबरदस्ती कि जारही होँ औऱ वोँ एक् कोने मे सिमटकर बैठी होँ, वही हालतइस टाइम निशा कि थि वोँ एक् कोने मे सिमटकर बैठी हुइ थि.औऱ मुझेदूर रखने कों कहरही थि,
मेरे सामने सबसेबड़ी प्रॉब्लम थि वोँ चाकू जिसे उसनेकस करपकड़ रखा थां, मैंने उसका ध्यान भटकना हि ठीक समझा.
“निशा,,, मेरी बेहन मेरी आंखों मे देख, क्याँ तुम्हे लगता हैं कि मे तुझसे नाराज हु ….”
वोँ थोड़ीदेर कों शांत हुइ
“देख मेरी आंखों मे मे तौ दुनिया मे सबसे ज़्यादा तुझसे हि प्रेम करताहु.फिनयह गलत केसेहुआ मेरी बेहन.क्याँ तुँ भूल गई उसदिन कों अगर काजल नहींआती तौ हम् एक् हि होँ जाते ….हैं नाँ “
मेरीबात सें वोँ बहोत हि शांत हौ गई थि मगरअब भि उसकेहाथ चाकू पऱ मजबूती सें बंधेहुए थें.
वोँ एक् सोच मे पड़ गई थि जिसने मुझे एक् मौका दिया.
“अगर तुम को मेरीबात पऱ यकीन नहीं तोँ मेरे कमरे मे चल, मे तुझेही पूर्वी औऱ काजल सें भि ज़्यादा प्रेम करताहु, मे तुझेही सभी सें ज़्यादा प्रेम करताहु “
मे एक् उमंग मे बोल गय़ा, मैंने अपनेबात मे पूरीतरह सें फिलिंग भरी क्योकि मे नहीं चाहता थां कि उसे मेरेझूट कां पताचले,
“सच्ची.”उसकी आवाज़ मे एक् अद्भुत भोलापन थां
“आप् झूट तौ नहींबोल रहे हौ “
वोँ धीरे-धीरे सें बोलीं
“पागल मेरीबात तुम्हें झूटलग रही हैं.मेरेगले सें लग केँ देख.आँ मेरेपास आँ “
वोँ अब भि झिझकरही थि, मे उसकेपास नहींजा रहा थां क्योकि वोँ हड़बड़ाहट मे कोईगलत कदम भि उठा सकती थि.
“आनां.अपने भइया पऱ तुम्हे भरोषा नहीं हैं, मे तोँ सोचता थां कि तुम् मुझे बहोत प्रेम करती होँ मगर तुम्हे तौ मुझपर भरोषा हि नहीं हैं …”मैंने रूठने कि एक्टिंग कि
“औऱ जब भरोषा हि नहीं हैं तोँ छोड़ो मे जारहा हु “
यह बोलते हुए मेरेदिल कि धड़कने भि रुक गई थि क्योकि मे वँहा सें नहीं जानां चाहता थां मगर निशा कों यह केहना पड़ा, अगर वोँ कोई प्रतिक्रिया नहीं करती तौ मेरेलिए सचमे एक् मुसीबत खड़ी होँ जाती.मे थोड़ा मुड़ने कों हुआ
“नहीं …”
निशा कि आवाज़ नें मुझे हिम्मत दि मे झट सें उसकीओर हुआ
“नहीं मे आपकेऊपर भरोषा करतीहु भाई “
उसके आंसूसुख चुके थें वोँ अभि अभि नार्मल कंडीसन मे नहींआयी थि औऱ मुझे अभि उसे नार्मल नहीं करना थां अभि तोँ मुझे उसकेहाथ सें वोँ चाकू छुड़वाना थां
“तौ आँ मेरेगले लगजा, वरना मे चला “
वोँ मेरे आंखों मे देखने लगी जैसे मुझेनाप रही हौ …
“सच मे तूँ मुझसे प्रेम वयार नहीं करती, सभी दिखावा हैं तेरा “
मे हल्के गुस्से मे बोला ताकि उसकेदिल मे बातलगे औऱ वोँ जल्दी कुछऐसा करे जिससे मुझे मौकामिल जाए,
“नहीं भाई मे आपसे बहोत प्रेम करतीहु “
वोँ मेरीओर बड़ी औऱ मैनेउसे खीचकर अपने सीने केँ लगा लिया, जैसे एक् ज्वालामुखी फटा हौ वोँ जोरो सें रोनेलगी, मुझसे लिपटे हुए उसके आंसुओ सें मेरे कपड़े भीगने लगे थें मैंने उसे अपने सीने सें ऐसेकसा थां जैसे मे उसे अपने अंदर समाना चाहता थां, मे जानता थां कि उसकेलिए रोना कितना जरूरी थां,,, मैंने उसके हाथो सें वोँ चाकू निकाल करदूर रख दिया औऱ उसे जकड़कर बसवही बैठ गय़ा, उसका रोनाबंद नहींहुआ मगर उसने मेरे गालो मे चुम्बनों कि बरसात हि कर दि, उसकेथूक सें मेरा पूरा चहरा गीला हौ गय़ा थां, वोँ मुझे पागलो कि तरहचूम रही थि.
“I LOVE YOU BHAIYA.I LOVE YOU BHAIYA.I LOVE YOU BHAIYA,.I LOVE YOU BHAIYA.I LOVE YOU BHAIYA.I LOVE YOU BHAIYA.I LOVE YOU BHAIYA.I LOVE YOU BHAIYA,.I LOVE YOU BHAIYA.I LOVE YOU BHAIYA “
वोँ बोलते हुएथक भि नहींरही थि औऱ मुझे चूमेजा रही थि उसकेमुह सें बस एक् हि बात निकलरही थि, मैंने तौ जैसे उसके सामने स्वयं कों सिलेंडर हि कर दिया थां, जब वोँ रुकी तौ मैंने फिन सें उसे जोरो सें जकड़ा, मे उसे उठाकर अपने कमरे मे लेँ गय़ा औऱ पलंग मे डाल दिया, उसके आंखों मे अब भि आंसू थें, मे उसके बाजू मे सोया औऱ उसेजकड़ लिया, वोँ फिन सें मुझे चूमने लगी.
“भाई क्याँ आप् सचकहरहे होँ सबसे अधिक मुझे प्रेम करते होँ …”
मे मुस्कुराया
“केसे साबित करू, इतना भि यकीन नहीं हैं अपने भाई पर्र “
वोँ मुझसे लिपट गई
“नहीं भाई मे बस आपको खोना नहीं चाहती “
“दुनिया कि कोईऐसी ताकत हैं क्याँ जौ मुझे मेरी बेहन सें जुदाकर दे.औऱ तुम को काजल औऱ पूर्वी सें क्याँ डर हैं, क्याँ तुम्हे लगता हैं कि उनके कारण मे तुझसे अलग हौ जाऊंगा, अरे पागल तूँ मेरी हैं औऱ मे तेरा हु, तूने ऐसासोच भि केसे लिया कि काजल औऱ पूर्वी तेरी मुझसे अलगकर देंगे,,, क्याँ तुम को मेरे प्रेम मे विस्वास हि नहीं हैं “
नाँ जानेकब मे एक्टिंग करते करतेसच बोलने लगा थां, मेरी हरबात मानो मेरेदिल सें आँ रही थि औऱ मेरे आंखों कां वोँ आंसू भि झूठा नहीं थां जोँ अभि अभि मेरे आंखों सें गिरा थां …
“मुझेमाफ करदो भाई मे आपकोसमझ हि नहींपाई “
मैंने उसेफिन सें जकड़ लिया, वोँ सुबकते हुए हि मेरे सीने मे समाई हुईँ सोनेलगी थि, वोँ मानसिक थकान उसकेऊपर हावी होँ गय़ा थां औऱ वोँ धीरे-धीरे धीरे-धीरे नींद केँ आगोश मे जारही थि.मेरेदिल मे आया कि मे उसके होठो कों चूमलू मगरआज वोँ सही टाइम नहीं थां, मुझे अपनी बेहन कि बेहद हि फिक्र होँ रही थि, जिसतरह कि मानसिक स्थिति उसकी थि वोँ प्रेम सें अधिक पागलपन बन चुका थां, मुझे पहले अपने प्रेम केँ बल मे हि उसेसही करना थां औऱ मे इसकेलिए कुछ भि करने कों सजधजकर थां…….
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 30
“हद हुई हैं, अब हुइ हैं, जीने मरने दीजिये,.
.छोड़कर दुनिया मुझे वैरागी बनने दीजिए,
घूमआया हुआफ़क़त दुनिया कि सारीभीड़ मे, भीड़ हि मे बन नं जाऊ, कुछ अपना सां करने दीजिये ………”
दिल सें निकली एक् शायरी जोँ नाँ जाने क्योदिल केँ किसी कोने सें निकलआयी,
निधिअब भि मेरीबात कों ध्यान सें सुनरही थि, उसनेहाथ सें अपना चहरा ठिकारखा थां औऱ उसकी निगाहे मुझे हि देखरही थि, हम् टेबल मे बैठेहुए थें मेरे सामने ब्रेकफास्ट लगाहुआ थां मगर मेरे अंदर केँ कुछ निकलने कों बेताब हौ रहा थां, पूर्वी औऱ निशा दिनों हि मेरी बातो कों ध्यान सें सुनरहे थें…
“भाई आप् क्यो बैरागी बनोगे ?/”
पूर्वी कां स्वाभाविक सां सवाल थां,
“बसकुछ अबसो जानां चाहता हु, सभी कुछ छोड़कर.”
“ऐसा क्योबोल रहे हौ “निशा चौकी
“क्याँ बोलरहा हु”
“क्याँ छोड़ना चाहते हौ आप्, अपनी जिम्मेदारियां ??
याँ हमे.”
उससे पहले कि निशा कि आंखों मे आंसू आँ जाए मे हँसपड़ा.
“पागल हौ तुम् लोग तुम्हे क्यो छोड़ने लगा मे, मे तौ सोचरहा थां कि काम बहोत हौ गय़ा, क्यो नाँ कही छुट्टी मनाने चले.”
देखते हि देखते मेरी दोनो परियों केँ चहरेखिल गए,
“वाओ भाई यकीन नहीं होता कि आप् ऐसाबोल रहे हौ “पूर्वी बोलपड़ी
“क्यो ?? क्यो यकीन नहीं होता “मे चौका
“अरे आप् तोँ वर्कोहोलिक(जिसे काम कां नशा हौ ) हौ, मुझे लगा थां कि आप् कभी छुट्टी नहीं लेते “पूर्वी फिन सें बोलपड़ी मगरइस बार उसके होठो मे मुस्कान थि,
“तौ डिसाइड करो कि कहा जानां हैं मे साम कों मिलता हु “
दोनो हि खुस हौ गए …
“स्थान तोँ अच्छी हैं मगर तुम् जानते हौ कि मे नहींजा पाऊंगी “
काजल नें मोबाइल मे हि अपनी मजबूरी जाता दि, मे जानता थां कि वोँ नहींजा पाएगी.इसीलिए तौ यह प्लान किया थां.
“ओकेजान मगर मे बहनों कों प्रोमिश कर चुकाहु “
“ठीक हैं जानू, आप् सभीचले जाओ 3 दिनों कि हि तौ बात हैं, ऐसे भि अभि मेरेपास बहोत सां काम हैं”
काजल नें एक् गहरी सांस छोड़ी जैसेसच मे काम सें बहोत थक गई होँ……
“तौ तुम् रेडी हौ क्याँ सोचा तुमने “
मे रश्मि केँ केबिन मे बैठा थां,
“मेरा जवाबहा हैं, ”
मेरे जवाब सें वोँ सुभह केँ फूलो कि तरह सें खिल गई
“थैंक्स देव “वोँ उठी औऱ मेरेगले सें लग गई, पहलीबात मे उसके इतनेपास थां, उसके शरीर सें आतेहुए खुसबू नें मुझे बहोत शुकुन पहुचाया औऱ मे उसे एक् अपनत्व कां अहसास दिलाने हल्के सें जकड़ लिया, ऐसा लग हि नहींरहा थां कि वोँ मेरीबॉस हैं बल्कि यहलगरहा थां कि वोँ मेरी साथी हैं,
“तोँ पेकिंग करना शुरुआत करो “
वोँ उछलते हुए बोलि जैसे कि बच्ची हौ
“डोंटवरी वोँ आज हि होँ जाएगा औऱ कल सें 3 दिनों केँ लिए मे केशरगढ़ मे “
वोँ बहोत हि खुसलग रही थि,
“जानते हौ नां तुम्हे किससे मिलना हैं …तुम् उनसेमिल चुके हौ “
उसने मुझेयाद दिलाया
“हा जानता हु, डॉ चुन्नीलाल तिवारी यरवादवाले.उर्फडॉ चुतिया सें……। “
रश्मि कां चहराखिल चुका थां ………।
रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 31
गाड़ी अपने रफ्तार मे चलरहा थां, पीछे पूर्वी बैठे बैठे हि सो गई थि, मेरेमन मे कई प्रश्न मचलरहे थें वही उसकेसंग हि एक् उत्सुकता भि मेरेमन मे थि,
मेरे बाजू मे बैठी हुइ निशा जैसे पूर्वी केँ सोने कां हि प्रतीक्षा कररही थि वोँ बारबार मेरे हाथो सें अपने हाथो कों टच करती औऱ ऐसे दिखाती जैसे कि वोँ बिल्कुल हि अनजाने मे हौ गय़ा हौ, मे गाड़ीचला रहा थां औऱ वोँ मेरे बाजू कि सीट पर्र हि बैठी थि, उसकेइस हरकत सें मेरे होठो मे एक् मुस्कान सि खिल जाती थि,
ऐसेलग रहा थां जैसेकोई जोड़ा अभि अभि बंधन मे बंधा होँ औऱ एक् दूसरे कों लुभाने कां प्रयास कररहा होँ, मुझे काजल केँ संग बिताये कालेज केँ वक़्त कि याद आँ गई जब हमारे शरीर नहीं मिले थें मगरमन मिल चुके थें, छोटी छोटी बातो पऱ शर्माना फिन हल्के सें मुस्कान बिखेरना, छोटी छोटी सि वोँ शरारते, वोँ जवानी केँ सबसे अच्छे दिन होते हैं, हल्की छेड़छाड़ औऱ बहोत सारा प्रेम ….
मे वोँ सभीसोच कर एक् गहरी सांसली, औऱ निशा कि तरफ देखा, काजलइसी उम्र कि थि जब हम् दोनो प्रेम मे पड़गए थें, यह उम्र होती हि ऐसी हैं ….
मे निशा कों देखकर मुस्कुराया औऱ वोँ बिल्कुल हि स्वाभाविक रूप सें शर्मा गई …
मुझे तोँ ऐसालग रहा थां जैसे हम् दोनो हनीमून मे जारहे होँ, वही एक् अजीब सां डर औऱ उत्साह दोनो हि एक् संग होता हैं…
शायद निशा मुझसे एक् प्रेमी सां वर्ताव चाहती थि, शायद वोँ चाहती थि कि मे हि आगे बढूंमगर क्याँ मे यहकर पाऊंगा, वोँ मेरी प्रेमिका नहीं थि वोँ मेरी बेहन थि, मेरीसगी छोटी बेहन….यह सभीसोच कर मेरे जिस्म मे एक् झुनझुनी सि भर गई, बड़ी अजीब सि दशा थि मेरी, मेरी बेहन चाहती थि कि मे उसकेसंग प्रेमियों जैसा वर्ताव करू, औऱ मेरेदिल मे भि उसकेलिए एक् आग उठनेलगी थि, बसडरयही थि कि कहीउस आग मे हमारी मर्यादा हि नाँ जलजाए, उसआग मे रिश्तों कि महीनडोर हि नां जलजाए, हवस कि आगबड़ी हि जालिम होती हैं वोँ कभी भि नहीं देखती कि सामने कौन हैं …
मे इससोच मे जैसेडूब हि गय़ा, मेरा जिस्म हल्के सें कांप गय़ा थां, मगर मेरे नजरो केँ सामने उसदिन कां नजारा भि घूम गय़ा जब मे औऱ निशाआगे बढ़ चुके थें, उसकेबदन कां हर कटाव मेरे आंखों केँ सामने सें होकर गुजर गय़ा, मे बुरीतरह सें घबराया औऱ जल्दी हि निशा कि ओर देखा.
वोँ मुझे हि ताड़रही थि मगर उसकी आंखेकुछ औऱ हि कहरही थि,
क्याँ वोँ भि वहीसोच रही थि जोँ कि मे सोचरहा थां, जैसे वोँ एक् नशे मे थि, आंखे हल्की सि बोझील थि, क्याँ वोँ हवस केँ नशे मे थि ????
इससे पहले मे कुछ भि समझ पाता वोँ इठलाकर मेरेपास आँ गई औऱ मेरे बांहो कों अपने हाथो सें जकड़कर अपनासर मेरे कंधे मे ठिका दिया, उसने अपनी आंखेबंद करली औऱ मुझे बहोत हि चैन कां आभासहुआ,
मे धीरे-धीरे गाड़ीचला रहा थां जबकि वोँ मुझे किसी प्रेमिका कि तरह जकड़ेहुए थि, वोँ एक् हल्के गुलाबी सें कसेहुए सलवार कमीज मे थि, ईश्वर नें उसे बहोत हि हसीन बनाया थां नाँ मात्र खूबसूरत चहरा दिया थां जबकि कसेहुए बदन सें भि नवाजा थां, उसकी छातिया जैसे किसी पहाड़ सि उसके कमीज सें बाहर् झांकरही थि, नाँ जाने उसनेयह जानबूझ करकिए थां याँ यह किसी औऱ कारण सें हुआ थां मगर उसका दुपट्टा उसके सीने सें गिरकर उसकेगोद मे आँ गय़ा थां औऱ उसके वोँ पहाड़ मुझे अपने तराइयों कों दिखारहे थें, उसने जोँ कालेरंग कि ब्रा पहनी हुई थि उसकी इलास्टिक तक मुझे दिखने लगी थि, मे तोँ कुछदेर केँ लिएनजर जमा नहीं बैठा थां जैसे पहलीबार किसीऔरत केँ यौवन कों देखरहा हु,
मैंने अपनासर झटका, ’यह मेरी बेहन हैं ‘
मरेमन नें मुझसे कहा, मगर अगरयह मेरी बेहन नां भि होती तौ भि इसे देखने कां कोई कारण मेरेपास नहीं थां क्योकि मैंने कभी किसी पराई लड़कियों कि तरहनजर नहीं गड़ाई थि, मे बहोत शर्मिला लड़का रहाहु, हायहबात अलग थि कि कुछ लड़कियों केँ संग मेरे संबंध बनगए हैं मगर वोँ मात्र एक् इत्तफाक हि थां औऱ संग हि संग वोँ अभि किसीअलग तरह कि लडकिया थि, मगर मैंने कभी किसी अच्छी लड़की केँ लिए बुरा नहीं सोचा थां, मे तौ उन लड़कियों केँ लिए भि बुरा नहीं सोचा थां, मगर क़िस्मत हि ऐसी थि कि लड़कियों कि फ़ौज मेरे सामने आँ गई, औऱ अब उनमे मेरी स्वयं कि बेहन भि शामिल हौ गई थि ……
लगभग 4 घण्टो केँ सफर केँ बाद हम् केशरगढ़ केँ उस गेस्टहाउस मे पहुचगए जंहाहमे रुकना थां, कोई खासबड़ी स्थान नहीं थि वोँ, किसी कस्बे जैसा थां मगर बहोत हि उन्नत लगरहा थां, हरियाली औऱ साफ सफाई मेरी बहनों कों यह स्थान मनपसंद आने वाली थि, पास हि एक् किला भि थां औऱ ऊंचे ऊंचे पहाड़ भि गेस्टहाउस सें दिखरहे थें, शहर सें ऐसी स्थान आने पऱ कुछ नहींबस हरियाली हि दिखजाए तौ काम होँ जाता हैं, मुझे बहनों कों थोड़ा घूमना थां औऱ डॉ सें मिलकर कुछपता करना थां, वोँ भि मुझेयही मिलने वाले थें,
मैंने निशा कों सीट मे हि लिटा दिया थां वोँ बैठे बैठेसो गई थि, पूर्वी तौ पहले सें हि सोई हुईँ थि, गेस्टहाउस पहुचते हि मैंने उन्हें उठाया …
“आइये साहब हम् आपकी बहोत हि देर सें इंतज़ार कररहे थें, ”एक् अधेड़ सां व्यक्ति भागते हुए हमारे पास आया, यह सरकारी गेस्ट हाउस थां, कुछ पुलिस केँ लोग भि दिखरहे थें, सब मुझे इतनी इज्जत देरहे थें जैसे मे कोई ऑफिसर हु, शायदडॉ नें हि यह अरेंजमेंट किया थां, पता नहींडॉ मुझे क्याँ दिखाने वाला थां औऱ क्याँ समझने वाला थां मगर इसकेलिए मे बहोत हि उत्साहित थां संग हि रश्मि भि, उसने जल्द सें जल्द मुझेडॉ सें मिलने कां आदेश दिया थां, पता नहीं केशरगढ़ क्याँ क्याँ खेल खेलने वाला थां, एक् तरफ मेरी बेहन थि जौ मुझे अपना प्रेमी याँ शायद पति मान बैठी थि औऱ दूसरी तरफडॉ केँ द्वारा बताया जाने वाला रहस्य थां.मे एक् गहरी सांस लेकर छोड़ा औऱ गेस्टहाउस केँ अंदर जानेलगा ……….
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अघ्याय 32
कमरे कि बत्तियां हल्के प्रकाश फैलारही थि औऱ मे बेचैन सां लेटाहुआ छत कों निहार रहा थां, आज पूर्वी औऱ निशा दोनो हि बाजू केँ कमरे मे सो चुकी थि, मुझे तौ लगा थां कि वोँ मेरेसंग सोने कि जिद करेंगी मगरऐसा कुछ भि नहींहुआ थां…
अचानक दरवाजा खुला, जैसा मुझे यकीन थां निशा अंदरआयी वोँ मुझे देखकर मुस्कुराने लगी, उस हल्के रोशनी मे भि उसकेबदन कां हर कटाव मुझेसाफ साफ दिखाई देरहा थां, वोँ मेरेपास आकरलेट गई थि, उसने एक् बहोत हि पतली सि नाइटी डालरखी थि, उसे देखकर मे थोड़ा घबराया क्योकि मुझेपता थां कि आजहमे रोकने वालाकोई भि नहीं हैं, मगर मैंने स्वयं कों वक़्त केँ हाथो मे सौपने कि हि ठानली,
उसके आंखों मे एक् अजीब सां नशा थां जौ आजतक मैंने किसी भि दूसरी लड़की केँ आंखों मे नहीं देखा थां, एक् अजीब सि चाहत औऱ जुनून उसकी आंखों मे दिखरहा थां,
अगर वोँ मेरी बेहन नाँ होकर मेरी पत्नि होती तोँ शायद मे उसे देखकर खुस होँ जातामगर यहनशा नां जाने क्यो मुझेडरा रहा थां…
“नींद नहीं आँ रही हैं क्याँ “
मैंने उससेपूछ लिया, वोँ मेरे बांहो मे आकेसो गई थि,
“केसे आएगी भाई जब आप् मेरेपास नहीं हौ “
उसकी आवाज़ थोड़ी भारी थि जैसे उसने अभि अभि गहरी सांसली हौ शायद उसकी सांसे भि तेज होँ रही थि, वोँ मेरेपास आने सें पहले हि उत्तेजना केँ शिखर मे थि …
“क्याँ चाहती होँ “मे अनायास हि बोल गय़ा.
“भाई अब मे कुछ भि नहि करना चाहती, मे बस आपकी होना चाहती हु, पूरीतरह सें आपकी, मुझे नहि पता मे क्याँ करूँगी पर्र मुझे इतनापता हैं, जौ भि होगा वोँ मेरा प्रेम होगा, '
मैंने सजल नैनों सें उसके मस्तक पर्र एक् चुम्बन कां तिलक किया, औऱ अपने होठो सें उसके होठो कों मिला दिया औऱ हमारे बीच कि सब दूरिय उसी क्षण सें ख़तम हौ गयीँ,, हम् अब एक् हि थें औऱ कोई दूजा नाँ थां, हम् बस अपने कों एक् दूजे मे समेटने कि पूरी कोसिस कररहे थें,,, नाँ जाने कितने टाइम तक हम् एक् दुसरे केँ होठो कों चूसते रहे थें हमारी सांसे थि पर्र मेरे लिंग मे कोई भि अकडन नहि थि औऱ नाँ हि इसकाभान हि रह गय़ा, टाइम जैसेरुक सां गय़ा होँ, हम् एक् दूजे कों अपनी बांहों मे भरेबस खो जानां चाहते थें, मुझेतब थोडा होशआया तब मेराहाथ निशा केँ स्कर्ट केँ अंदरघुस आया थां, औऱ उसकीपीठ कों सहलारहा थां, उसकी नंगीपीठ पर्र अपने हाथो कों चलतेहुए मैंने उसके स्कर्ट कों निकल फेका मेरा सीना पहले सें हि नग्न थां, निशा केँ नर्म स्तनों केँ आभास नें मुझेफिन सें किस केँ खुमार सें बहार निकला मैंने अपने हाथो सें उसे दबाना शुरुआत किया पऱ होठो कों नहि छोड़ा निशा नें अपने हाथो कों मेरेसर पर्र कसलिए थें औऱ पूरी शिद्दत सें मेरे होठो कों अपने मे समांरही थि, उसे शायद मेरे हाथो केँ हलचल तक कां आभास नहि होँ रहा थां, पऱ जब मैंने पूरी ताकत सें एक् वक्ष कों दबाया,
'आहह-आहह भाई थोडा धीरे-धीरे, 'निशा साँस लेती हुइ बोल पायी उनकी सांसे उखड़ी हुइ थि, वोँ साँस लें पाती इससे पहले हि मैंने फिन सें अपनामुह उसकेमुह मे घुसा दिया, मैंने उसेपीठ केँ सहारे लिटाया औऱ उसकेऊपर छा सां गय़ा, मैंने दोनों हाथो सें उसका चहरा पकड़ा औऱ उसके होठो कों छोड़ाफिन, फिन उसकेगाल, उनकी आँखे उनकीनाक, उसका माथा, आँखों कि पुतलिया, गरदन, कन्धा, छाती, उजोर, पेट, नाभि,.मे बस चूसता गय़ा मुझे नहि पता थां कि मे क्याँ कररहा हु, नाँ निशा कों हि पता थां, हम् बसखो सें गए थें मैंने फिन उसके उजोरो कों पकड़ा औऱ उसके उन्नत निपलो कों अपने होठो मे समां लिया, निशाबस छटपटा रही थि,
'आःआःह भाई, आः आः आआअह्ह्ह्ह भाआआआआआई, 'मैंने अपनेमन भरउसे चूसाजब तक कि वोँ लाल नहि हौ चुके थें, नीचे मुझे उसकी पेंटी केँ ऊपर सें जन्घो केँ बीच कां गीलापन मुझे दिखाई दिया, मुझे अपने जांघो केँ बीच एक् विशाल खम्भे सां दिखाई दिया, जिसकी अकडन सें अब मुझे दर्द होनेलगा थां, मैंने उसे आजादकर दिया, मैंने पेंटी केँ छोरो कों अपने दोनों हाथो सें पकड़ा, मैंने निशा कि औऱ देखा निशाकाप रही थि, वोँ एक् दिवार थि जौ मुझे हमेशा केँ लिए गिरानी थि, जिसे गिराकर हि मे निशा कों अपनाबना सकता थां,
“इजाजत हैं “
मैंने निशा कों छेड़ा
“अब भि इजाजत लोगे क्याँ “
मुस्काते हुए उसने पूछा औऱ मुझे अपनेऊपर खीच लिया मेरे होठो कों फिन अपने होठो मे भर लिया,
“मेरे भाई, ”
निशा नें मेरे हाथो कों पेंटी केँ ओर लें गयीँ, वोँ मेरे आँखों मे हि देखरही थि उसके चहरे पर्र अब भि वोँ मुस्कान थि औऱ आँखों मे वही प्रेम, मेरे हाथो मे दबाव बनाते वोँ पेंटी कों निकल दि औऱ अपने पैरो सें निकाल निचेफेक दिया, वोँ अब मेरे सामने नंगी थि, पर्र मुझे इसकी फिकर हि नहि थि नां हि मैंने यह देखने कि जहमत कि, मे तौ फिन निशा केँ होठो कों चूसने लगा, हम् दोनों पूरीतरह सें नंगे थें मे उसकेऊपर लेटा थां, औऱ निशा अपनी आँखेबंद कियेबस खोयी हुई थि, मेरा अकड़ा लिंग निशा केँ गिले योनी मे हलके हलकेघिस रहा थां, थोडा गीलापन सें भीगकर लिंग भि फिसलने लगा मैंने एक् दबाव दिया पर्र वोँ जन्घो सें जा टकराया, ऐसाकई बार होतारहा पऱ मुझे इससेकोई फर्क नहि पड़रहा थां, क्योकि यह बिलकुल स्वाभाविक तौर सें हौ रहा थां, मे कोई मेहनत नहि कररहा थां, मैंने तौ निशा कों किस करने मे डूबाहुआ थां, पऱ निशा नें मेरे लिंग कों पकड़ा जैसा कि उसका पहला मौका नहि थां उसनेउसे सही स्थान लगाया, वहा पहुचकर वोँ चिपिचिपा गिलापण मेरे लिंग कों फिन सें घेर लिया, मैंने स्वभावतः फिन झटका मारामगर यह क्याँ मेरेमुह सें एक् चीख सि निकली जौ निशा केँ होठो मे खो सि गई,, मेरी लिंग कि चमड़ी नें इस घर्षण कां आभास किया थां मगरउस अतिरेक आनद सें बढकर मेरेलिए कुछ भि नहींरह गय़ा थां, मैंने फिन एक् जोरदार झटका मारा औऱ,
'आआह्ह्ह्ह भाईई याँ भा ईईईईईईई याँ '
'निशा आआआआ आह्ह्ह्ह 'हमारा मिलन होँ चूका थां पऱ अभि तोँ उफान कि शुरुवात भर थि,
मैंने औऱ निशा नें आँखे खोलकर एक् दूजे कों देखा, हम् एक् रहत कि साँस लेँ रहे थें, हमारी आँखे मिली दोनों केँ चहरे पर्र एक् मुस्कान फैली औऱ मैंने फिन एक् जोरदार धक्का मार दिया,
'अआह्ह्ह 'दोनों केँ मुह सें निकला औऱ दोनों एक् दूजे कों देखहस पड़े,,, मैंने धीरे-धीरे धीरे-धीरे अंदर बहार करनेलगा, मेरा लिंग निशा केँ योनीरस सें पूरीतरह सें गिला होँ चूका थां औऱ हम् फिन एक् गहन तन्द्रा मे प्रवेश कररहे थें जहाबस प्रेम थां औऱ दुनिया कि कोईशय नहि.
हमारी आँखेफिन बंद होनेलगी। मे तौ किसी भि तरह सें आंखेखोल भि पारहा थां पऱ निशा कि आँखे इतनी बोझिल होँ चुकी थि वोँ अपनी आँखेखोल हि नहि पारही थि, मेरे धक्के एक् लयपकड़ चुके थें औऱ हमारी सांसे औऱ आंहे, उसी लय मे चलरहे थें, टाइमखो चूका थां, औऱ साराजहा भि खो चूका थां, हम् एक् दुसरे कों काटरहे थें, चूसरहे थें चूमरहे थें, पर्र हमें नहि पता थां कि हम् क्याँ कररहे हैं, कोई कण्ट्रोल हमरेऊपर नहि थां, नाँ हमारा नाँ औऱ किसी कां, पहले धीरे-धीरे धीरे-धीरे आःहहाय सें लेकरतेज तेज सांसे औऱ अहहउह ओह तक पहुच जातेफिन धीरे-धीरे- मध्यम- तेजयह सिलसिला नां जानेकब तक चलतारहा, हमें आँखेखोल एक् दूजे कों देखने कि फुर्सत नहि थि, जैसे किसी नें कहा हैं, ’
बिना किसी केँ परवाह केँ, बिना किसी मांग केँ, बिना किसी तलाश केँ, बिना किसीचाह केँ, हम् थें औऱ बस हम् थें,,,.एक् दूजे मे ऐसेघुल रहे थें कि पता लगाना भि मुस्किल थां कि मे औऱ तुँ अलग भि हैं, बस मेरा मुझमे नां रहा जौ होवतसो तोर, तेरा तुझको सोपते क्याँ लागत हैं मोर.
सांसो मे अपनी आखिरी गहराई तक हमें डूबा दिया, जब लक्ष्य लगभगआने कों थि तौ बस थोड़ीदेर केँ लिए सांसे रुक गई, मेरे अंदर सें एक् विस्फोट हुए नां जाने कितनी ताकत सें मे धक्के लगाये जारहा थां मगरउस विस्फोट नें मुझे शांतकर दिया एक् गढ़ा सफ़ेद, चिपचिपा सां द्रव्य, मेरे अंदर सें निकल निशा कि योनी कों भिगो दियावही निशा कि योनी सें नां जाने कितनी बार फुहारे निकल चुकी थि, लडकियों कि एक् खासियत होती हैं कि अगर वोँ प्रेम कि गहराई कां आभासकर पायी औऱ उससे सेक्स करे जिसे वोँ प्रेम करती हैं तौ वोँ एक् नहि कईचरम सुख (ओर्गोस्म )कां अनुभव आसानी सें कर पाती हैं, एक् सम्भोग मे करीब-करीब 7 तालो कां ओर्गोस्म संभव हैं, ऐसा शोधो नें पता लगाया हैं.निशा नें भि आज किसी गहरे तालो पऱ इसका अनुभव किया थां, औऱ मैंने भि, तूफ़ान तोँ शांत होँ चूका थां पऱ जैसे हम् जम हि चुके थें, हमारे जिस्म एक् दूजे सें अलग हि नहि होँ रहे थें, हम् पसीने सें भीगे थें हमारी सांसे उखड़ी थि, पऱ हमारे चहरे मे एक् परम शांति कां आभास थां, सबकुछ शून्य हौ चूका थां, खो चूका थां, इतनी शांति कां आभास मैंने कभी नहि किया थां, ऐसा लगरहा थां जैसे मे खाली हौ चूकाहु, बिलकुल हल्का.हम् एक् दूजे केँ चुमते रहे हमारे होठ जैसेकभी एक् दूजे सें नाँ बिछड़ेंगे वैसे हि चिपके रहे, हमारे जिस्म इक दूजे केँ पसीने सें सने थें, चहरा औऱ होठ एक् दूजे कि लार सें सने थें औऱ निशा कि योनी सें मेरा वीर्य अब बहारआने लगा थां, मेरेकमर अब भि हलके हलकेचल रह थें…….
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) - Kahani ab aur interesting hogi
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