रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 21
जब मेरी आंखे खुली तौ कुछ आवाजे मुझे सुनाई देरही थि, किसी कि सिसकियों कि, मे उठाकुछ लोगउठ चुके थें औऱ अपनानया कारनामा शुरुआत कर दिया थां, कुछ लोग अभि भि बेसुध हि पड़े थें,,,
आज एक् लड़की नें मुझे बहोत आकर्षित किया थां वोँ थि पोलो डांस करने वाली लड़की, मैंने देखा कि उसने मात्र मुझे हि नहीं बाकियों कों भि आकर्षित किया थां, क्योकि अभि भि कुछलोग उसे कुतिया बनाये हुए उसके पीछे सें उसेपेल रहे थें औऱ एक् व्यक्ति उसकेमुह मे पेलेजा रहा थां, बाकी लोग अपनी बारी केँ प्रतीक्षा मे थें….मुझे फिन केँ काजल कि याद आँ गई, अगर वोँ यंहा होती तोँ शायदसब लोग उसके पीछे हि दीवाने होँ जाते, उन सब लोगो मे मैंने एक् कों पहचान लिया, यह गुलाबचंद थां, हमारा पहला कस्टमर.उसकी भि नजर मुझसे मिली वोँ अभि उसकेमुख कां चोदनकर रहा थां.उसने एक् बड़ी सि मुस्कान मुझे दि, मे भि बदले मे मुस्कुराया.
शबनमकही दिखाई नहींदे रही थि, मे फ्रेश होने केँ लिए एक् पैकलगा करऊपर वाले कमरे मे आँ गय़ा,,, बैड मे शबनम पसरी हुइ थि औऱ उसने कपड़े भि पहनेहुए थें, घड़ी देखा तोँ अभि 2 हि बजे थें मतलब कि यहरात भर चलने वाला थां, मे उसके हि बाजू मे आकरसो गय़ा, मगर नीद नां जानेकहा जा चुकी थि मेरे दिमाग़ मे बसउस महिला कि तस्वीर हि घूमेजा रही थि, मे बेचैन होकरफिन सें नीचेचला गय़ा, अभि तक लोग थककरउसे छोड़ चुके थें, वोँ मुझे देखते हि मेरेपास आँ गई,
“विकास जीयहलोग फिन केँ उठगए तोँ फिन केँ मेरे पीछेलग जाएंगे, प्लीज् किसीसेफ स्थान पर्र लेँ जाइये, मे बहोत हि थक चुकीहु”
पहले तोँ मे उसकेमुह सें अपनानाम सुनकर हि दंगरह गय़ा, फिन मुझेयाद आया कि मे होटल कां मैनेजर हु, औऱयह बर्थडे पार्टी मैंने हि ऑर्गेनाइज कि हैं, उसे मेरानाम पता हौ तौ कोई भि आश्चर्य कि बात नहीं थि, मैंने उसे अपनेसंग चलने कों कहा, मे अब अपने पुराने ड्रेश मे थां औऱ वोँ पूरीतरह केँ निर्वस्त्र…
उसने एक् सिगरेट कां पैकेट उठाया औऱ मेरेसंग हि ऐसे हि चल पड़ी, उसका चहराबता रहा थां कि वोँ बहोत हि थकी हुई हैं, मैन एक् विस्की कि बोलत भि अपनेसंग रख ली.मेइस फार्महाउस मे कईबार आँ चुका थां औऱ यंहा केँ बारे मे सभीपता थां, मे उसे सबकीनजर सें बचाकर ऊपर लें गय़ा, मगर उस कमरे मे नहीं जंहा शबनमसोई हुई थि.यहरूम ज्यादातर कपूर साहब अपनेखास गेस्ट केँ लिएयूज़ करते थें, रूम शानदार थां, मैंने उसे बैठाकर उसकेलिए एक् टेबल लाया, वोँ मुझे आश्चर्य सें देखने लगी जैसेपूछ रही हौ कि इसका मे क्याँ करू…मैंने उसेयाद दिलाया कि उसनेकोई भि कपड़ा नहीं पहनाहुआ हैं.वोँ मुस्कुराने लगी.
“अब किससे क्याँ छुपाऊ “वोँ खिलखिलाकर हँसी मे भि मुस्कुरा दियामगर उसने मेरामान रखने केँ लिए हि सहीउसे लपेट लिया थां, मे उसकेलिए औऱ अपनेलिए ड्रिंक्स बनाकर लेँ आया,
“तुम्हे पहले होटल मे नहीं देखा हैं,,, ”
“हायहकाम मे पार्ट वक्त मे करती हु, कभी कभीजब पैसे कि जरूरत हौ, याँ मस्ती कां मूडबन जाए “उसने थोड़े मादक अंदाज मे कहा.
“ओह तोँ आज इनमें सें क्याँ थां”मे भि उससे खुलना चाहता थां क्योकि मनपसंद तोँ वोँ मुझे भि बहोत हि आयी थि.
“ह्म्म्म दोनो हि.असल मे जब शबनम नें मुझे प्लान केँ बारे मे बताया थां तोँ मुझेलगा कि अच्छे पैसे भि मिल जाएंगे औऱ आनंद भि आएगा, मगर मुझे क्याँ पता थां कि सबलोग मुझपर हि टूट पड़ेंगे “
वोँ फिन सें खिलखिलाने लगी.किसी प्रोफेशनल प्रॉस्टिट्यूट केँ संगयह मेरा पहला मौका थां, ऐसे शबनम औऱ काजल भि यह किया करते थें मगर वोँ बहोत हि अलग थें,
“ऐसे आपकानाम मे नहींपूछ पाया “मैंने हल्के सें कहा
“मोहनी “वोँ धीरे-धीरे सें बोलि औऱ मुस्कुराई
“ओहसच मे अपने सबकादिल हि मोह लिया थां, औऱ ऐसे आप् काम क्याँ करती हैं, फूल समय “
उसने मुस्कुराते हुए मुझे देखा,
“लगता हैं मे आपको बहोत हि पसन्द आँ गई, ”वोँ खिलखिलाई जिससे मे थोड़ा सां झेप गय़ा जैसे किसी नें मेरी चोरी हि पकड़ली हौ ….
“मेरेफूल समयकाम केँ बारे मे नां हि जाने तोँ बेहतर हैं.शायद आप् यकीन नां करे “
“आप् बताइये तौ सही “
मैंने थोड़ा फोर्स किया
“अब रहने भि दीजिये, मे बहोत थक गई हु, एक् पैक औऱ मिलेगा मुझे सोना हैं “
“क्यो नहीं “
मैंने हम् दोनो केँ लिएनया पैक बनाया औऱ पीकर वँहा सें निकल गय़ा, मे फिन सें शबनम वाले कमरे मे आकरसो गय़ा, इसबार शराब नें थोड़ाअसर दिखाया औऱ मेरी नींदलग गई …….
“भाई आप् बहोत हि गंदे हौ कोईकाम वक़्त पऱ नहीं करते “
मेरेघऱ आते हि पूर्वी मुझपर भड़कउठी,
“क्याँ हुआ मेरीजान “
अभि साम होने कों आया थां औऱ मेरी नींद दोपहर मे खुलीजब तक कि सब मेहमान औऱ लडकिया जा चुकी थि, शबनम भि मेरेलिए एक् लेटर छोड़कर जा चुकी थि जिसमे लिखा थां कि होटलमत आनां, यंहा कि साफ सफाई करवाकर घऱचले जानां, मे बाकी केँ वक़्त साफ सफाई करवाने मे हि निकाल दिया थां, पूरेहाथ पैरो मे हैंगओवर वाला दर्दभरा हुआ थां, मगर जैसे तैसे मे सबकाम निपटा करघऱआया, औऱ पूर्वी मेरेऊपर चिल्ला पड़ी.
“क्याँ हुआआज मेरे कालेज जानां थां आपको औऱ आप् इस वक़्त आँ रहे होँ “
वोँ मुझे घूरने लगी जैसे कि मैंने बहोत बड़ापाप कर दिया हौ.
मे तौ भूल हि गय़ा थां …
“ओह तोँ निशा केँ संगचली जाती “
“भाई हमारे प्रोफेसर नें हमारे माता-पिता कों बुलाया हैं, प्रोफेसर सब केँ माता-पिता सें मिलरही हैं.”
“ओकेओके कलचले जाएंगे “
“हममकल तोँ जानां हि हैं औऱ अगर आपकाकोई काम निकलआया नाँ तोँ मे बताऊंगी आपको “
पूर्वी नें मुझे धमकाते हुएकहा जिससे मुझे थोड़ी सि हँसी आँ गई …….
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अध्याय 22
जब मेरी आंखे खुली तोँ मैंने चारोओर अंधेरा पाया, ऐसा लगरहा थां जैसे मे घण्टो सें बेहोश थां, मैंने याद करने कि कोशिस कि मे कहाहु, मुझेयाद आया मे अपनी बहनों केँ संग उनके कॉलेज गय़ा हुआ थां, मे पूर्वी औऱ निशि केँ प्रोफेसर्स सें मिला औऱ उनके बारे मे उनसेबात कि, कॉलेज मे हि मुझे मोहनी मिली, मोहनी वही फार्महाउस वाली बेले डांसर जिसपर मे फिदा होँ गय़ा थां, उसने बताया कि उसके भइया केँ प्रोफेसर नें उसे मिलने बुलाया थां, कैसा अजीब सां संयोग थां कि मे भि अपनी बहनों केँ लिए यंहाआया थां, फिर भी मुझे उसका भइयासंग दिखाई नहीं दिया, उसने कहा कि वोँ क्लास मे चला गय़ा हैं, जैसे मेरी बहने अपनी क्लास मे जा चुकी थि…….
याँ शायद वोँ मुझसे अपनी इडेन्टिटी छुपारही थि, उसकाकाम हि कुछऐसा थां…….
मैंने उसेकही ड्राप करने कि बातकही औऱ वोँ मान भि गई, मे गाड़ी मे बैठा थां औऱ मोहनी मेरे बाजू मे, वोँ कमाल कि लगरही थि, उसका खिलाहुआ चहरा औऱ कसावलिए हुए उसका जिस्म.बड़ा हि मादक अंदाज थां उसकामगर आज वोँ पूरीतरह सें ढकी हुईँ एक् संस्कारी औरत कि तरहदिख रही थि, साड़ी सें झांकता हुआ यौवन मुझे लुभारहा थां, मांग मे मोटा सां सिंदूर औऱ गले मे लटकता हुआ मंगलसूत्र उसके विवाह शुदा होने कि गवाही चीखचीख करदेरहा थां….
मे गाड़ी स्टार्ट हि करने वाला थां कि रश्मि कां मोबाइल आँ गय़ा, मे नीचे उतारकर बात करने लगा, वोँ थोड़ी भड़की हुई थि, मे अभि तक होटल नहीं पहुचा थां औऱ 1 कि बजाय 2 दिन सें गायब थां….उसने मुझे जल्द सें होटल पहुचने कों कहा…
हम् कालेज कां केम्पस क्रॉस करके सुनसान इलाके सें गुजररहे थें तभी किसी नें मुझे पीछे सें जोरो सें पकड़ लिया, मे थोड़ा छटपटाया भि थां मगर उसने मेरेनाक कों एक् रुमाल सें दबा दिया थां…….
मे अभि अभि होश मे आयाहुआ बितेहुए वक्त कों यादकर रहा थां, मे उठने कों हुआ तोँ मुझेपता चला कि नाँ केवल मेरी आंखों मे पट्टी बांधी गई हैं बल्कि मेरेहाथ भि बंधे हैं,, मे जमीन मे बैठाहुआ थां.कितने वक्त सें,, यह तोँ मुझे भि नहींपता ……………….
मुझे किसी केँ फुसफुसाने कि आवाज़ सुनाई दि, कुछ जूतों कि आहट.
अचानक हि मेरी आंखों मे बंधाहुआ पर्दा खिंच लिया गय़ा, औऱ अब कमरे मे मद्धम रौशनी सि फैल गई ….
मे कुछसमझ पता इससे पहले हि, एक् हट्टे कट्टे सें इंसान नें मेरेपेट मे एक् लात मारा जिससे मे कहर गय़ा.
“काजलकहा हैं “
उसकी रौबदार आवाज़ मेरे कानो मे पड़ी.
काजल??????मे उसे रविवार कि सुभह सें नहीं देखा थां, मे अपनेकाम मे (बर्थडे पार्टी मे ) इतना व्यस्त हौ गय़ा थां कि मुझेयाद भि नहींरहा, औऱ फिन थकान नें कुछ सोचने कां मौका नहीं दिया थां….
“मुझे मुझे नहींपता “मेरेपेट मे लगेलात कां दर्दअब भि बाकी थां.
“हम्म “उसने वँहा उपस्थित औऱ लोगो कों देखा, मे उन्हें डराहुआ देखरहा थां, वोँ साले सांडों कि औलादलग रहे थें, 5 कि संख्या मे थें, उनमे सें एक् व्यक्ति मेरेपास आया औऱ फिन सें मुझे एक् लातलगा दिए.
“क्याँ प्लान कररही हैं काजल “
वोँ मुझे घूरता हुआ बोला…
मैने अनजान बनने औऱ आश्चर्य सें भरे होने कां नाटक किया,
उसने एक् जोरो कां थप्पड़ मेरेगाल पऱ मारा
“मादरचोद बताता हैं कि नहीं, खान साहब कों सभीपता चल गय़ा हैं कि तूँ औऱ काजल पति पत्नि हौ.अब चुपचाप बतादे कि काजल क्याँ प्लान कररही हैं खान साहब सें उसकी दौलत हड़पने केँ लिए “
मे आंखे फाडे उन्हें देखता रहा, शायद यहलोग मुझे चुतिया समझरहे थें मगरऐसा थां नहीं, अगर खान कों पता चलता तौ वोँ मुझे नहीं काजल कों उठवाता.
“मुझेकुछ भि नहींपता आप् लोगयह क्याँ बातकर रहे हौ, हा मे मानता हु कि हम् विवाह शुदा हैं मगर.”फिन सें थप्पड़ मेरे गालो पऱ पड़ा.
“हमे चुतिया समझता हैं.ऐसे नहीं मानेगा यह इसकी बहनों कों ;लाओ, साले केँ सामने जब हम् इसकी बहनों सें सुहागरात मनाएंगे तोँ सभी बकेगा अपने आप् “
मे पूरीतरह केँ कांप गय़ा, शरीर मे एक् झुरझुरी सि दौड़ गई, लगा मानोकोई हाई पवार कां करेंट लग गय़ा हौ.
“नहीं नहीं आप् क्याँ जानना चाहते हैं, मेरी बहनों कों इसकेबीच मे मत लाइये प्लीज् …”
उनके चहरे मे केँ विजयी मुस्कान फैल गई
“तौ बताओ अजीम कों अंदर किसने करवाया औऱ काजल केँ आगे कां प्लान क्याँ हैं “
मुझेअब भि लगरहा थां कि यहखान केँ व्यक्ति नहीं हौ सकते
“मुझे नहींपता सच मे मुझे नहीं पता, मुझे तोँ यह भि नहींपता कि काजलकुछ प्लान कररही हैं, वोँ बहोत हि सीधी साधी औऱ संस्कारी लड़की हैं प्लीज् आप् लोगो सें कुछ गलतफहमी हुइ हैं “
मेरीबात सें सब जोरो सें हँसने लगे
“संस्कारी.हाहाहा “
उसने अपनेसड़े हुए दांत दिखाए
“अगर आपको जानना हि थां तोँ खान साहब सीधे काजल सें क्यो नहींपूछ लेते “मे जानता थां कि खान काजल केँ पीछे पागल हैं, औऱ यह उसकेलोग नहीं हौ सकते
“तुम्हें अब भि लगता हैं कि हम् खान केँ व्यक्ति नहीं हैं “उसमे सें एक् व्यक्ति नें मुझे पैनी निगाहों सें देखा जैसे मेरा दिमाग़ पढ़रहा हौ.
“काजलमिल जाती तौ उसे हि उठा लेते, मगर वोँ स्वयं हि रविवार सें गायब हैं…”
उसकीइस बार नें फिन सें मेरे जिस्म पर्र करेंट दौड़ा दिया, मे बुरीतरह सें चौक गय़ा, यह चौकना असली थां,
“उसका मोबाइल भि स्विचऑफ आँ रहा हैं, वोँ तोँ बेटा तुम्हारी तरफ फंसाकर निकल गई, पता नहीं क्याँ क्याँ कारनामे किये हैं उसनेअब तुम्हे हि सभी भुगतना पड़ेगा.जोँ जानता हैं बतादे, वरना तेरी बहनों कों नंगा करने मे हमे अधिक वक्त नहीं लगेगा “वोँ लोगफिन केँ कमीनो कि तरह हँसने लगे, मे बुरीतरह सें डर गय़ा थां ….
“नहीं नहीं मे सचकहरहा हु मुझेकुछ नहींपता.मेरी बहनों कों बीच मे मतलाओ प्लीज् …”
मे रोने लगा, यंहा क्याँ हौ रहा थां मे इसका अंदाज भि नहींलगा पारहा थां, मे फुटफुट कररोरहा थां ….
उनलोगों कों भि शायदलगा कि मे सचकहरहा हु, उनमे सें एक् नें अपनाफोन निकाला औऱ किसी कों काल किया.
“मेडमयह तौ कहरहा हैं कि इसेकुछ भि नहीं पता….हा हा वोँ भि कहा नाँ, ओकेओके ठीक हैं मेडम “वोँ काल डिस्कनेक्ट करकेफिन इस मेरीओर हुआ.
“तुझसे अब मेडम हि बात करेंगी “
वोँ सब वँहा सें चलेगए ….
मेडम ??? आखिरकौन थि यह मेडम.कही रश्मि कों तोँ काजल केँ प्लान कां शक तोँ नहीं होँ गय़ा, असल मे उसे तोँ यकीन हि थां कि काजलकुछ गुल खिलारही हैं, तोँ रश्मि नें मुझे किडनैप करवाया हैं????????
याँ खान नें ???
काजलकहा हैं, इतने दिनों तक तौ वोँ कभी बाहर् नहीं रहतीफिन आखिर क्याँ बात होँ गई ???
मेरा जेहन बुरीतरह सें छटपटा रहा थां, मेरे होठो सें खून कि एक् हल्की सि धारबह रही थि.
औऱ सबसे ज़्यादा परेशान मे यहसोच कर हौ रहा थां कि आखिर मेरी बहने हैं कहा ???
थोड़ीदेर मे हि कमरे कां दरवाजा फिन सें खुला, किसी केँ पायलों कि आवज मेरे कानो मे आयी, मे सर उठाकर उसे देखने लगा, वोँ मुझे देखकर मुस्कुराई औऱ मे आश्चर्य सें भर गय़ा थां.
“मोहनी तुम् …….”
वोँ मुस्कुराते हुए मेरेपास आयी औऱ अपने कों झुका लिया.
“ओहो देखो तौ कितना मार दियाइन जालिमो नें.”
वोँ मेरे होठो सें बहतेहुए खून कों अपने उंगलियों सें फिराकर उसे अपने होठो मे डाल लेती हैं,
“ह्म्म्म तुम् बता क्यो नहीं देते जौ तुम्हे पता हैं “उसनेफिन सें प्रेम सें कहा
“सच मे मुझेकुछ नहींपता, मुझे जानेदो, औऱ मेरी बहने “
वोँ हल्के सें मुस्कुराई
“बहोत प्रेम करते होँ अपनी बहनों सें ….मगर अफसोस.तुम्हारी पत्नि नें हि तुम् लोगो कों धोखादे दिया, जब उसे अहसास हुआ कि वोँ फसने वाली हैं तौ तुम्हे छोड़कर गायब हौ गई.ओहो मेरेदेव तुम् सच मे कितने शरीफ हौ “
उसने अपने होठो कों मेरे होठो केँ पास लाया औऱ उससे निकलते हुएखून कों अपने होठो सें चूम लिया, मुझे एक् हल्का सां दर्दहुआ.
“मुझेकुछ पता होता तौ मे अब तक बता चुका होता,.आखिर हौ कौन तुम् औऱ मुझसे क्याँ जानना चाहती होँ, सच मे मुझेकुछ भि नहींपता औऱ तुम् भि तोँ थि नां बर्थडे पार्टी मे मे तोँ वही थां रविवार सें.मैंने तबसे नां हि काजल कों देखा हैं नां हि उससेबात कि हैं “मे फिन सें रोने लगा,.असल मे मे एक्टिंग करने कि कोशिस कररहा थां क्योकि मुझे काजल सें कही अधिक अपनी बहनों कि फिक्र थि,.
“तुम्हारी बहने सलामत हैं मगरतब तक जब तक कि हम् चाहे.तुम् औऱ तुम्हारी दोनो बहने हमारे रेडार मे हमेशा रहोगे.याद रखना जैसा मे बोलू तुम्हे वैसा हि करना होगा.”
मे फिन सें आश्चर्य सें उसे देखने लगा, वोँ मुझसे क्याँ करवाना चाहती थि.
“तुम् किसके लिएकाम करती हौ, कौन होँ तुम् मुझसे क्याँ चाहती हौ “
मे थोड़ा बौखलाया
“तुमसे क्याँ चाहती हु वोँ तौ पताचल हि जाएगा.औऱ मे खान साहब केँ लिएकाम करतीहु, उन्हें तुम्हारे औऱ काजल केँ रिलेशन केँ बारे मे पताचल गय़ा औऱ तबसे हि उन्होंने तुमपर नजर रखने केँ लिए मुझेभेज दिया.”वोँ मुस्कुराने लगी
“इससे पहले कि काजल उनके गिरफ्त मे आती वोँ गायब हि हौ गई,,, ”
अब उसकीबात मुझे भि सच लगनेलगी थि,,,
“औऱ रहीबात कि मे कौनहु, मैंने कहा थां नां तुमसे कि जब मेरे नौकरी केँ बारे मे पता चलेगा तौ तुम् यकीन हि नहींकर पाओगे ….”
वोँ फिन सें मुस्कुराई.
“मे अजीब कि दूसरी रखैलहु,.”
वोँ एक् अजीब तरीके सें मुस्कुराई
“पहली तौ भाग गई “.उसका इशारा कहा थां मुझेपता चल चुका थां, औऱ उसकीबात सें मेरे पूरे जिस्म मे एक् करेंट दौड़ गय़ा……….
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vah doctor sahab. Maan gye apko . Apke purane readers ne yeh kahani padh rkhi hain. Jldi say update de dijiye hum bi padh le iss kahani ko. Plzzz
Number one priority haen 100% pure ye humare Dr sahab k style haen. dilli k loddus joh khaye (kahani reading kare) wo pachtaye. joh naah khaye (reading nah kare) wo bi pachtaye. baki Dr sahab k leela sandy sir hi jaane
kal deta ho bro .ek sath iana sara too de diya yaar . 75 update kee kahani h 30 hu chuka h ,baki k 40 2-3 din mai de dunga ek sath juldi juldi
रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 23
मन मे दहसत औऱ एक् उलझन केँ संग मे होश मे आया, औऱ आते हि अधिक आश्चर्य मे पड़ गय़ा, मे इस टाइम एक् लक्जरी कमरे मे थां.इस कमरे कों अच्छे सें पहचानता थां.मेरे हि होटल कां एक् लक्जरी रूम थां यह, मे बड़े हि आश्चर्य सें इधरउधर देखने लगा, मुझे लगा जैसे मे किसी ड्रीम्स सें जगाहु….
पूरादिन मेरे आंखों केँ सामने फिन सें बड़ी हि तेजी सें घूम गय़ा थां, मैंने अपनीघड़ी देखी, अभि 3 बजरहे थें…
मे बहनों कों कॉलेज छोड़कर 11 बजे केँ लगभग कॉलेज सें बाहर् आया थां.मेरे माथे मे अब भि पसीना थां, चोटों कां दर्दअब भि कायम थां, मतलब साफ थां कि यह सपना तौ नहीं थां……….
मगर मे यंहा केसे पहुचा, यह लोग इतने ताकतवर हैं कि उन्होंने मुझे बिना किसी कि नजर मे आये यंहा तक छोड़ दिया जबकि मे बेहोश थां…….
कई प्रश्न मेरे दिमाग़ मे आँ रहे थें मगरयह वक़्त सवालों मे पड़ने कां नहीं थां, मैंने जल्दी हि अपनाफोन निकाला औऱ काजल कों काल किया, मे बेपनाह रूप सें परेशान होँ चुका थां क्योकि अभि भि काजल कां नंबर स्विचऑफ बतलारहा थां, यह स्तिथि मेरेलिए औऱ भि ज़्यादा परेशान करने वाली थि, मैंने स्वयं कों थोड़ा रिलेक्स किया औऱ कमरे सें बाहर् आया, मेरेलिए सबसे ज़्यादा जरूरी थां अपनी बहनों कि हिफाजत.
क्योकि मेरे दिमाग़ मे मोहनी केँ वोँ आखरी शब्द गूंजरहे थें जिसके बाद मुझे बेहोश कर दिया गय़ा,
“हमारी नजर तुम्हारे औऱ तुम्हारी बहनों केँ ऊपर 24 घण्टे रहेगी.अगर हमे तुम्हारे किसी भि हरकत पर्र शकहुआ तोँ समझो ………”
मे इतना सुनकर हि बेहोश हौ गय़ा थां….
मुझे उसकी वोँ बाते अभि भि याद थि औऱ जब तक कि मे काजल सें बात नहींकर लूआगे कां निर्णय लेना मेरेलिए खतरनाक होने वाला थां …….
मे सीधे हि होटल केँ रिसेप्शन मे पहुचा, मुझे देखते हि रिसेप्शनिस्ट बोलपड़ी.
“सर रश्मि मेडम नें आपको बुलाया हैं”
मे चौका.रश्मि नें मुझे सुभह हि जल्दआने कों कहा थां, हे ईश्वर वोँ मेरेऊपर चढ़ जाएगी.मे डराहुआ सां भागता हुआ उसके केबिन मे पहुचा.
मुझेअब भि समझ नहीं आँ रहा थां कि मे उसे क्याँ जवाब दूंगा …
“मे आई कमिंग “
मुझे देखते हि उसके चहरे कां भाव बदला, क्रोध करने कि स्थान वोँ मुस्कुराई.
“आइये जनाब, लगता हैं रविवार कां बुखार अभि तक नहीं उतरा हैं, तुमने तोँ दोस्त हद हि कर दि “
“सॉरी वोँ कुछऐसे काम आँ गए कि मे….”
“कोईबात नहीं जोँ तुमने अरेंजमेंट किया थां उससे हमारे होटल कों बहोत हि अधिक फायदा हुआ, तौ मे तुम्हारी यह गलतीमाफ करतीहु मगर पहली औऱ आखरीबार ओके.दोस्त अगर नहीं आँ पाते तौ कम सें कमबता दियाकरो, यंहा भि कईकाम होते हैं”
मैंने हा मे सर हिलाया
“औऱ यह चहरा इतनाथका हुआ क्योलग रहा हैं, औऱ यहखून “
ओह दोस्त, मैंने चहरा धोया थां मगरखून कां रिसाव फिन सें चालू होँ गय़ा थां, असल मे उन पहलवानों नें जोँ मेरी धुलाई कि थि उसके कारण मेरे चहरे सें खून निकलना शुरुआत हौ गय़ा थां, समय नें इसेबंद तौ कर दिया थां मगर हल्का रिसाव औऱ निशान अभि भि बाकी थें…
“वोँ कुछ नहींऐसे हि मजाक मजाक मे बेहन सें लग गय़ा “
“ओहो लगता हैं बेहन भइया मे बहोत हि प्रेम हैं.क्यो “
उसके चहरे मे मुसकान आँ गई मगर मे कुछ भि नहीं बोला.
“असल मे मुझे तुमसे कुछबात करनी थि देव “
मे फिन सें उसे देखने लगा, अब यह इतनी सीरियस क्यो दिखाई देरही थि.
“मैंने तुम्हारे बातो पर्र बहोत गौर किया ….औऱ मुझेलगा कि मुझे भि खान साहब कों वोँ देना चाहिए जौ कि काजलउसे देरही हैं”
उसकीबात सुनकर मेरादिल एक् बारकी धक सें हुआ,
“क्याँ ??? यानी क्याँ देना चाहती हौ तुम् उसे “
मे पूरीतरह सें अनजान बनतेहुए उससेकहा
उसके चहरे मे बस एक् मुस्कान आँ गई ………….
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अध्याय 24
ज्वालामुखी कां लावाजब फुटकर बाहर् निकलता हैं, तौ वातावरण केँ ठंड सें जमकर बेसाल्ट चट्टान बनाता हैं, वही अगर वोँ अंदर हि किसी कारण सें जमजाय तौ वोँ ग्रेनाइड चट्टान बनाता हैं…
यह मे क्योबोल रहाहु, क्योकि मेरी हालत एक् ज्वालामुखी कि तरह होँ गई थि, जिसमे दर्द कां लावाभरा होँ, बेवफाई केँ दर्द कां, मगर मे नां हि अंदरज पारहा थां नाँ बाहर् हि निकलरहा थां….
कितनी अजीब सि बात हैं कि प्रकृति अपने कों कभी नहीं दोहराती मगरफिन भि हरचीज कां मूल स्रोत एक् हि हैं …
मसलन 1000 मिलियन वर्ष पहले तक पृथ्वी मात्र औऱ मात्र गरमगैस हि थि, जोँ जमकर लावा कां रूप लेँ रही थि, फिन करीब-करीब 500 मिलियन वर्षों पूर्व केँ मध्ययह जमनेलगी औऱ पहलीसतह कां निर्माण लगभग 235 मिलियन वर्ष पूर्व हुआ, जोँ कि आपस मे जुड़ाहुआ थां….
अब चाहे सोना हौ याँ कोयला याँ हीरा याँ पीतल याँ संगमरमर याँ नीलम याँ तांबा याँ लोहासब एक् हि लावा सें बनेहुए हैं.मगर परिस्थितियों केँ कारण, दबाव, औऱ वातावरण केँ कारणसब अलगअलग प्रतीत होते हैं.अगर फिजिक्स कि भाषा मे बोले तोँ औऱ भि सूक्ष्म तहो मे जा सकते हैं जंहा पूरे ब्रम्हांड मे केवल औऱ केवल ऊर्जा हैं औऱ कुछ भि नहीं हैं, बस परमाणु हैं जोँ कि न्यूट्रॉन प्रोटॉन औऱ इलेक्ट्रान सें मिलकर बनेहुए हैं जौ कि ऊर्जा केँ कण हैं….
फिन भि इतने विभेद देखने कों मिलते हैं, सबकुछ ऊर्जा कां हि परिवर्तित रूप हैं उसके अलावा कुछ भि नहीं ….
मे भि परिस्थितियों कां मारा थां, एक् तरफ मेरी स्वयं कि पत्नि थि जिससे मे इतना प्रेम करता थां मगरआज कि परिस्थिति मे मेरेमन मे उसकेलिए शंका थि, वही मुझे अपनी बहनों केँ भविष्य कि फिक्र थि, मेरी जान औऱ मेरे पूरे परिवार कां भविष्य हि खतरे मे थां ….
मे बुरीतरह सें झल्ला सां गय़ा थां औऱ साम होते हि मे घऱ कों चला गय़ा,
मे सीधे अपने कमरे मे गय़ा औऱ वँहा जाते हि मेरी आंखों मे एक् चमक आँ गई ………
वोँ काजल थि, मेरी काजल, थककरऐसे सोई हुईँ थि जैसे कि कोई बच्चा सोता हैं…
मेरी उदास जिंदगी कि एक् आशा थि काजल, उसे देखकर मुझे बेहद प्रेम औऱ शुकुन कां अहसास हुआ, मे जैसेडूब हि गय़ा, मे जाकर उससे लिपट गय़ा, वोँ बेफिक्री सें बस थोड़ी कसमसाई मगर उसकी नींद गाढ़ी थि.
मे उसके जिस्म कि गर्मी कों स्वयं कों डुबोने लगा, मे उससेऐसे सट जानां चाहता थां जैसे कि हम् दोनोदो नहीं एक् हि हौ …
मेरी ताकत बढ़ते हि उसे मेरे होने कां अहसास होँ गय़ा,
वोँ पलटी औऱ मेरे सीने मे सर रखकर सोनेलगी वोँ जागने केँ मूड मे तोँ बिल्कुल भि नहीं थि …मगर मुझे कसकर जकड़ेहुए जरूर थि …
मे अपने हि सोच मे पड़ गय़ा थां, जिसके कारण मे सुभह सें परेशान थां वोँ स्वयं कितने बेफिक्री सें सोरहा थां,
उसे जैसेइन सबकीखबर हि नहीं थि, सब कों लगरहा थां कि वोँ भाग गई हैं औऱ यह रानी साहिबा यंहा आराम फरमारही हैं ……….
मेरे होठो मे एक् मुस्कान आँ गई औऱ मे फिनइस उसके माथे कों चूमा मुझेकम सें कम इतनी तौ तसल्ली हुईँ कि वोँ मेरेपास हैं मेरेसंग हैं ….
जिक्र नहीं किया थां कभी मैंने, अपनी मोहोब्बत कां वोँ पगला सीने मे जौ सररखा मेरा हौ गय़ा, बस यही मेरेसंग भि हौ रहा थां, ऐसा लगा जैसे वोँ मेरी हौ गई हौ, अचानक सें हि सहीमगर बस मेरी हौ, बेमतलब सि हि सहीमगर बस मेरी होँ, तमन्नाओ सि हि सहीमगर बस मेरी हौ, मुस्किलो सि हि सहीमगर बस मेरी होँ, परेशानियों सि हि सहीमगर बस मेरी होँ…., डूबे हुएमन मे कश्तियों सि वोँ आयी थि, औऱ बुझेहुए दिल मे चिमनियों सि जल गई ….
मैंने फिनइस उसके माथे कों चूमा, इसबार उसके होठो पर्र भि एक् मुस्कान आँ गई वोँ हल्के सें उठी उसकेहोठ मेरे होठो केँ पास हि थें औऱ हमारी सांसे एक् दूजे केँ होने कां अहसास दिलारही थि, उसके गुलाबी होठो सें आने वाली खुसबू सें मे भि स्वयं कों बचा नहीं पाया औऱ उसकेनरम होठो पऱ अपने जलतेहुए होठो कों हल्के सें सहला दिया, उसकी मुस्कान फिन सें गाढ़ी हौ गई थि,,,
“क्याँ हुआआज बड़े उतावले हौ रहे होँ “
“आजलगा थां कि मैंने तुम्हे खो हि दिया हैं…”
मे हल्के सें हि कह पाया जबकि मेरेहोठ उसके होठो कों बसछूरहे थें, उसके आंखों सें नींद जैसे गायब होँ गई थि, मैंने अपने हाथो सें उसकेकमर कों पकड़रखा थां वही उसने अपने बांहो कों मेरे सीने सें जकड़ा थां,
उसके आंखों मे एक् आश्चर्य झूलने लगा.
“क्याँ हुआ आपकोयह क्याँ बोलरहे हौ, मेकहा जाऊंगी आपको छोड़कर “
वोँ सच मे बहोत हि आश्चर्य मे थि ….जबकि मेरी भि हालत उससे जुदा नहीं थि, मे भि तोँ अपने अजीब सें कसमकस मे डूबाहुआ थां ….
“तुम्हारा फोन स्विचऑफ हैं “
वोँ हल्के सें मुस्कुराई.
“अच्छा तोँ इतनी सि बात पर्र ऐसे फिक्रमंद हौ गए आप् “
वोँ थोड़ी सि हँसी.
“ओह नहींजान.मगरआज ….”
मैंने उसे पूरी घटनाबता दिया.
“हम्म मोहनी.मैंने नहीं सोचा थां कि मोहनी इसमें शामिल हौ जाएगी, हा रश्मि ऐसाकुछ करेगी यह मुझेलगा थां.”
इसका मतलब थां कि वोँ मोहनी कों जानती हैं, औऱ रश्मि ऐसा क्यो करेगी, मे फिन सें आश्चर्य सें भर गय़ा.
“असल मे यह हमारे हि खेल कां परिणाम हैं “
“मगर मोहनी नें तोँ कहा थां कि वोँ खान केँ लिएकाम करती हैं “
“उसनेगलत नहींकहा थां “
काजल नें केहना शुरुआत रखा
“वोँ भटनागर साहब केँ संगकाम करती हैं “
मे भटनागर कों जानता थां, असल मे वोँ एक् चार्टर अकाउंटेंट हैं जोँ कि खान औऱ कपूर दोनो केँ लिएकाम करता हैं, मतलबयह हुआ कि मोहनी भि दोनो केँ लिए हि काम करती हैं.
“मगर इससेहमे केसेपता लगेगा कि यहकाम खान नें किया याँ रश्मि नें औऱ उन्होंने यह क्योकहा कि काजल नें तुम्हे धोखा दिया हैं.औऱ बारबार तुम्हारे प्लान केँ बारे मे पूछना “
काजल थोड़ी सीरियस हौ गई
“असल मे इसबात कों लेकर तोँ मे भि कंफ्यूज होईरही हु, क्योकि शक तौ दोनो कों हि मुझपर हैं, औऱ रश्मि मे नां जानेखान केँ कानो मे क्याँ भराहुआ हैं, वोँ अब मुझे अपने सें दूर हि रखरहा हैं, मैंने इतनी मेहनत कि हैं यंहा तक पहुचने केँ लिएअब इसे खराब होने नहींदे सकते….औऱ ईश्वर कां शुक्र हैं कि मैंने आपकोसभी कुछ पहले हि बता दिया वरना आप् केँ लिएयह औऱ भि शॉकिंग होता औऱ असल मे होना भि चाहिए ….”
उसके चहरे मे एक् चमक आँ गई.\
“हासही हैं देवयह शॉकिंग हि होना चाहिए तुम्हारे लिए कि कोई तुम्हारी पत्नि केँ बारे मे पूछे क्योकि तुम्हे तौ यहकुछ भि नहींपता “
मे उसकीबात कों समझरहा थां मगरफिन भि मेरे दिमाग़ मे औऱ भि कई सवाल थें.
“मगर तुम्हारा फोन औऱ खान साहब कों हमारे रिश्ते केँ बारे मे पता होना ?????”
उसके चहरे मे एक् मुस्कान आँ गई
“उनसभी बातो सें कुछ नहीं होता, ऐसे भि रश्मि कों तोँ पहले सें हि पता हैं, जैसा कि मैंने तुम्हे बताया थां कि अजीम औऱ रश्मि दोनो हि हमारे रिश्तों केँ बारे मे जानते हैं, औऱ उन्हें अपनेकाम सें मतलब हैं, होँ सकता हैं कि रश्मि नें हि खान कों बताया होँ.औऱ वोँ यह जांचने केँ लिए कि तुम्हे कुछपता हैं कि नहीं तुम्हे किडनैप करवा लिया होँ.मेरेफोन केँ स्विचऑफ होने कां भि उन्होंने बहोत फायदा उठाया हैं तुम्हे डराने केँ लिए सोचा होगा कि तुम् डरकरसभी बोल दोगे.हमे बस उनके सामने यही नाटक करना हैं कि हम् नहींपता कि उन्हें सभीकुछ पता हैं.उन्हें समझने दो कि हम् मोहरे हैं, औऱ हम् अपनाखेल उन्हें मोहरा बनाकर खेलेंगे.तुम् कल होटल मे इतना दुखी दिखना जैसे कि कोईमर गय़ा होँ.उन्हें भि तौ लगना चाहिए कि तुम् एक् सीधे साधे सें इंसान हौ जिसकी पत्नि कमीनी हैं, औऱ हम् दोनो केँ बीच मे कुछ भि सही नहीं हैं.तुम् मुझे पूछना चाहते होँ मगर मे तुमसे झगड़ाकर लेतीहु, तुम् अपनी बहनों कि वजह सें मुझसे ज़्यादा बहस नहीं करते औऱ मे तुम्हे दबाकर रखतीहु ….”
वोँ मुस्कुराने लगी.
“तुम् तौ मुझे एक्टिंग सीखा केँ हि रहोगी “
मे हल्के सें हंसा, उसने अपने बांहो कां हार मेरेगले मे डाल दिया.
“मेरीजान अब तुम् उनकेयूज़ करने केँ लायक हौ गए होँ, हमारे दुश्मन मुझे हराने केँ लिए तुम्हे यूज़ करेंगे…”
वोँ थोड़ीदेर चुपरही औऱ फिन थोड़ी सीरियस सि बोलने लगी
“अब तुम्हे मुझसे नफरत करनी होगीदेव, सबके सामने मुझसे बहोत हि नफरत करनी होगी ताकि उन्हें यकीन हौ जाए कि तुम् उनकेजाल मे पूरीतरह सें फंस चुके होँ.शायद तुम्हारे लिएयह मुश्किल होँ, क्योकि तुमने मुझे हमेशा हि इतना प्रेम किया हैं, मेरी गलतियों केँ बावजूद मुझे इतना चाहा हैं “
काजल कि आंखों मे पानी कि बूंदे आँ गई थि, नां जाने मे इस मुखड़े कों औऱ इसरूह कों केसे नफरतकर पाऊंगा.
मे केसेइस मखमली देह कों नफरतकर पाऊंगा, मे केसे उसके प्रेम सें भरेहुए मन कों नफरतकर पाऊंगा …
मे उसके होठो कों अपनीओर खिंचकर उसे चूमने लगा, मेरेहोठ उसके होठो मे डूबने लगे.
जब हम् अलगहुए दोनो हि एक् दूसरे केँ अहसास सें भरेहुए थें, दोनो हि एक् दूजे कि आंखों मे झांकरहे थें.
“सच मे इनसभी केँ कारण मेरा दिमाग़ हि ठंडा हौ गय़ा “
मे उसके बालो पऱ अपनी उंगलिया फेरते हुए बोला
“ओह तौ तुन्हें गर्मी देना होगा, ”वोँ मुस्कुराई
“ह्म्म्म लगता हैं मेरे चार्जर कों तुम्हारे प्लग मे लगाना हि पड़ेगा “
वोँ खिलखिलाई औऱ मे उसकेऊपर स्वयं गय़ा …….
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 25
मे सर गड़ाए बैठाहुआ थां, कमरे मे बीपबीप कि आवाजे लगातार आँ रही थि, अचानक मेरे कंधे पर्र एक् हाथआया औऱ मे सर उठाकर उसे देखने लगा, मेरी आंखेलाल थि, प्रतिशोध कि आग सें भरी हुईँ आंखे, जिसे देखकर एक् बारडॉ चुतिया भि डरगए जोँ कि मुझे सांत्वना देने केँ लिएआये थें.
“उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए थां, खासकर पूर्वी केँ संग तौ बिल्कुल भि नहीं, मेरी मासूम सि बच्ची ….”
मे इतना हि कहतेहुए रुका मेरीनजर फिन सें पूवी पऱ पड़ी जौ कि बैड मे लेटी हुईँ थि, चहरे पर्र अब भि वही मासूमियत झलकरही थि, वोँ बेहोश हि औऱ हॉस्पिटल केँ आईसीयू वार्ड मे थि, मे अभि अभि हि आया थां डॉ यहां पहले सें हि उपस्थित थें उनके कहनेनपर हि मुझे पूर्वी केँ पासआने दिया गय़ा थां…
“शायद वोँ तुम्हे डरना चाहते थें, याँ शायदयह बस किसी मनचले कि करतूत हौ “
डॉ नें गंभीर सें स्वर मे कहा
“जोँ भि जिसने भि यह किया उसने अच्छा नहीं किया, मे पूर्वी कों सबसे ज़्यादा प्रेम करता हु, शायद काजल औऱ निशा सें भि ज़्यादा.”मे अब भि धीरे-धीरे धीरे-धीरे हि बोलरहा थां जैसे स्वयं सें बोलरहा हु.
“जोँ डर जाते हैं देव दुनिया उन्हें हि डराती हैं …”
मे फिन सें डॉ केँ चहरे कि ओर देखा औऱ उठखड़ा हुआ,, मे सीधे हि आईसीयू सें बाहर् आया, मेरे पीछेडॉ भि बाहर् आनेलगे, बाहर् काजल औऱ निशा थें, काजल भि खबर मिलने पऱ अभि अभि हि आयी थि जबकि निशा पूर्वी कों हॉस्पिटल लाने वालो मे एक् थि.
मुझे देखकर निशा मेरीओर लपकीमगर
‘चटाक’
मेराहाथ घूमता हुआ सीधे निशा केँ गालो मे पड़ा औऱ उसके गोरे गालो पर्र मेरे पांचों उंगलियों केँ निशान छप गए, वँहा उपस्थित सबलोग हमे हि देखने लगे थें मगर फिक्र किसे थां…
“यहसभी कुछ तेरे हि कारणहुआ हैं “मे उत्तेजित होकर बोला औऱ उसकाहाथ पकड़कर उसे खिंचता हुआ लें गय़ा.काजल नें मुझेऐसे देखा मानोपूछ रही होँ कि यह क्याँ बोल दियामगर मे आज किसी कि सुनने केँ मूड मे नहीं थां, काजल नें एक् बारगी मुझे रोकने कि कोशिस कि मगरडॉ नें उसेरोक दिया…
“जानेदो उसेआज नहीं जागा तोँ पूरे जीवनडर डरकर हि जियेगा “
डॉ कि यह हल्की सि आवाज़ मेरे कानो पऱ पड़ी,
मे गाड़ीचला रहा थां जबकि निशा रोती हुई मेरे बाजू मे बैठी कि वोँ कुछ भि बोलने कि हिम्मत नहीं जुटापा रही थि वही मे कुछ बोलने केँ मूड मे हि नहीं थां.
मैंने गाड़ी एक् गरमचाय कि टापरी पऱ रोकी जौ कि उनके कालेज जाने केँ हि रास्ते पऱ पड़ता, निशा औऱ मे नीचे उतरे,
“कौन थां वोँ “मैंने सपाट सां प्रश्न किया,
“वोँ नीले शर्ट वाला “निशा नें उंगली दिखाई, मेरी नजरउस नीले शर्ट वाले लड़के पर्र जम गई, वोँ एक् लंबा चौड़ा स्मार्ट सां लड़का थां जोकि अपने 5-6 दोस्तो केँ संग किसीबात पर्र सिगरेट पीतेहुए ठहाके लगारहा थां, मे पीछे सें एक् लोहे निकाल कर उसकीओर बढ़ने लगा, उसके किसीयार कां ध्यान अचानक हि मुझपर गय़ा, उसने सब कों सतर्क कर दियाउस लड़के कि आंखे जैसे निशा पऱ पड़ी जैसे वोँ सभीकुछ समझ गय़ा, मे उनकेपास पहुचा हि थां कि.
“अरे देखोयह हैं इस रंडी कां भइया, याँ कोई आशिक हैं “उसने जोरो सें कहासब हँसने लगीमगर मुझे उसकीबात कां कोई फर्क नहींपड़ा मे सपाट सां चहरा बनाये हुए उनकीओर बढ़रहा थां, वोँ सबचौक कर सतर्क खड़े हौ गए,
“देखो मे तोँ बसउसे डरना चाहता थां “
वोँ अपने हाथो कों मेरीओर मुझे रोकने कां इशारा कररहा थां कि.
“रआआआटट “रॉड घुमा औऱ सीधे उसके चहरे सें टकराया, वोँ लोहे कि मोटीरॉड थि जिससे उसका जबड़ा हि उखाड़ गय़ा, मुह सें खून कि धार निकलने लगी औऱ उसकेसब यार ख़ौफ़ज़दा सें कभी मुझे देखते तौ कभीउसे सम्हालते …
“यह लड़की धंधा करती हैं, इस बेचारे नें तोँ बसरेट पूछा थां दूसरी वाली कों औऱ उसनेइसे थप्पड़ मार दिया “
उसका एक् मित्र बौखला करबोल पड़ा, मैंने फिन सें रॉड घुमाया औऱ ‘रआआआटट’
उसका भि जबड़ाटूट गय़ा औऱ मुह सें खून कि धार बहनेलगी, माहौल मे पूरीतरह सें सन्नाटा थां औऱ संग हि मेरेदिल मे भि, मैंने हाथ घूमने सें पहलेयह भि नहीं सोचा थां कि दूसरे लड़के कि क्याँ गलती थि, मेरा चहरा अभि भि सपाट थां,.
वँहाखड़े लड़के औऱ बाकी लड़को कों जैसेहोश आया हौ, वोँ मुझे देखकर चिलालने लगे औऱ मेरीओर दौड़े, जैसे मुझेखा जाएंगे, अपने दोस्तो कि यह हालत देखकर वोँ सब बौखला गए थें,
“मारो मादरचोद कों हमारे इलाके मे आके हमारे भइया कों मारा हैं इसने “
एक् लड़का पूरेजोश मे चिल्लाय, मगर मेरेमन मे एक् जु तक नहीं रेंगी, मे वैसा हि खड़ारहा जैसे पहले थां, लड़को केँ हाथो मे जौ आया वोँ उसेपकड़ कर मेरीओर दौड़ाने कों हुए, जौ पहला लड़का मेरेपास पहुचा उसकेहाथ मे लकड़ी कां बांस जैसाकुछ थां, इससे पहले कि वोँ उसे घुमा भि पता वोँ मेरेरॉड केँ रेंज मे थां औऱ ‘रआआआटट’
दूसरे केँ पेट मे रॉडचला गय़ा, तीसरा जौ कि मेरेपास हि खड़ा थां, वोँ अपने मुक्के कों मेरीओर उछाला औऱ मे झुकते हुएरॉड सें उसके पैरो मे वारकर दिया, जैसे उसके घुटने टूटे होँ, वोँ दर्द सें छटपटाता हुआ नीचेगिर गय़ा, अपने तीनो दोस्तो कां हाल देखकर बाकी केँ सबवही जड़वतखड़े हौ गए, मे इंताजर मे थां कि कौनआगे आएगा, उन्होंने मुझे चारोओर सें घेर लिया थां, मगरकोई भि आगेआने कां साहस नहींकर पारहा थां, सबसे ज़्यादा हालत उसकी खराब थि जिसके पेट मे मैंने रॉड घुसा दिया थां, वोँ चीखता हुआ जमीन मे छटपटा रहा थां मगर किसी कि इतनी हिम्मत भि नहीं होँ रही थि कि कोईआगे आकरउसे उठा लेँ …….मेरेमन मे अब भि ख़ौफ़ याँ भविष्य कि कोई चिंता नहीं थि, मेऐसे खड़ा थां जैसे मुझे इससेकोई भि फर्क नहीं पड़ता कि कोईमरे याँ जिए……
कहते हैं नाँ कि नंगे सें खुदा भि डरता हैं, यह तौ मामूली सें कालेज केँ लड़के थें, औऱ मे अभि पूरीतरह केँ नंगा थां, मेरे ऊपरकोई भि मर्यादा औऱ कानून केँ डर कां कपड़ा नहीं थां, मे सबकुछ तभीछोड़ आया थां जब मैंने पूर्वी कों देखा थां, इस लड़के नें उसे डराने केँ लिए हि सहीमगर तेजाब उसकेऊपर फेक दिया थां, वोँ उसे जलाना नहीं चाहता थां मगरफिन भि उसके तिरछे फेकेगए तेजाब सें मेरी बेहन कां हाथजल गय़ा, औऱ उसे हॉस्पिटल मे एडमिट करनापड़ा थां, मेरी मासूम बेहन कों यहलोग नां जाने कितने दिनों सें परेशान कररहे थें, जब इसके बावजूद वोँ नहीं टूटी तौ उन्होंने यह ट्रिक इस्तमाल मे लाई …
वोँ सब भि किसी केँ बेटे याँ भइया थें मगर वोँ अपनी मर्यादा सें बाहर् गए थें जिसका अंजाम उन्होंने भुगता थां, इसके लिए मेरेदिल मे नां तौ ग्लानि थि नां हि कोईदया,
मे बाकीखड़े हुए लड़को कि तरह मुड़ा उनमे सें कुछ तोँ डरकर बहोत दूरजा खड़ेहुए थें, जोँ पास मे थें वोँ भि कांपरहे थें कि पता नहीं मेरा अगला शिकार कौन होगा.मुझे उनकी हालत देखकर थोड़ी हँसी भि आँ गई जिसने मेरे चहरे मे हल्की सि मुस्कान ला दि, मुझे मुस्कुराता देख्ना शायदउन लड़को केँ लिए औऱ भि डरावना थां, क्योकि याँ तोँ उन्होंने किसी कों गुस्से मे पागल होते देखा होगा, याँ चिल्लाते हुए मारधाड़ करते, मगर मे उनसब सें अलग थां, मैंने अभि तक किसी सें कोई भि बात नहीं कि थि, मैंने तोँ एक् शब्द भि नहीं निकाला थां मगर मेरे कारण 4 लड़केखून सें सनेहुए पड़े थें, मे थोड़ाआगे बड़ा थां लड़के तीतर बितर हौ गए, मे उस लड़के केँ पास पहुचा जिसने पूर्वी केँ ऊपर तेजाब फेका थां…
“किसी लड़की कों छेड़ने सें पहलेयह याद रखना कि वोँ भि किसी कि बेहन होगी,.शायद तुम्हारी भि कोई बेहन होगी, अगर होगी तौ तुम् समझ पाओगे कि एक् भइया पऱ क्याँ बीतती हैं …….”
मे उठकर सीधे अपने गाड़ी कि ओरबड़ा, निशा अजीब सि निगाहों सें मुझेदेख रही थि, मेरादिल एक् अजीब सें चैन सें भर गय़ा थां, शायद आज पहलीबात मैंने किसी केँ ऊपरहाथ उठाया थां मे तोँ एक् सीधा साधा सां लड़का थां.यह पूर्वी कां प्रेम हि थां जोँ मुझे यंहा तक खिंच लाया थां….
तभी वँहा पुलिस सायरन कि आवाज़ सुनाई दि, लड़के जख्मी लड़को कों उठारहे थें, पुलिस कि गाड़ी वँहा पहुच चुकी थि मैंने देखा कि डॉ भि पुलिस केँ संग पीछे पीछे पहुचे थें, पुलिस वालो सें देर नाँ करतेहुए जख्मी लड़के कि सहायता कि.
“आपको मेरेसंग चलना होगा”
इंस्पेक्टर मेरेपास पहुच चुका थां, मैंने वोँ रॉड उसके हवाले कर दिया, डॉ केँ भाव कों देखकर मे समझ गय़ा थां कि यह पुलिस डॉ नें हि बुलाई थि शायद मेरी सहायता करनेमगर यंहा कां हाल देखकर वोँ भि दंग थें …
“तुम् चलो मे आताहु “डॉ नें मुझेकहा औऱ मे इंस्पेक्टर केँ संगचल दिया …….
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अध्याय 26
दोस्तो यंहा सें कथाअलग अलग लोगो द्वारा बताई जाएगी.
अभि तक यह स्टोरी देवबोल रहा थां, तोँ अब सें यहकभी राइटर, कभी निशा, याँ काजल कि ओर सें चलेगी…
राइडर्स कृपया कन्फ्यूज़ नां हौ, औऱ इसकेलिए मे पहले हि बता दूंगा.ऐसे करीब-करीब रोज हि उपडेस आँ रहे हैं तोँ किस्सा आप् भूलोगे नहीं कि क्याँ चलरहा हैं, स्मूथ कहानी चलाने कि कोसिस रहेगी ताकि अधिक कन्फ्यूजन नां हौ…….
निशा अभि अपने आंसुओ कों रोक नहींपा रही थि, जबकि देवजेल मे थां, निशा अभि काजल केँ पास हि हॉस्पिटल मे बैठी थि, काजल उसे सांत्वना देरही थि, मगर निशा कां दुखकम नहीं हौ पारहा थां…
“अपने भाई कों क्याँ क्याँ बताया हैं भाभी “
निशा कि इसबात सें काजल थोड़ीसहम गई
“क्याँ सभीकुछ बता दिया अपने “
निशा नें भरेहुए नजरो सें काजल कों देखा जैसे काजल कों फिन सें धक्का लगा हौ
“मे अब भाई सें केसेनजर मिला पाऊंगी.औऱ आपकोहमे भि तौ बतलाना चाहिए थां.”
निशा कां चहरा परिवर्तित होनेलगा थां, वोँ गुस्से मे आँ रही थि मगरयह हॉस्पिटल थां ….
“मैने उन्हें कुछ भि नहीं बताया हैं निशा “
“उनके बातो सें तोँ ऐसानई लगा कि अपने उन्हें कुछ नहीं बताया होगा “
वोँ जोर देने केँ अंदाज मे बोलीं.
“मेरे भाई इतने सीधे हैं कि उन्हें तौ हमपरशक भि नहीं हौ सकता थां, मगर आपकी हि गलती सें यहसभी हुआ हैं, बाहर् सें आकरनशे कि हालत मे हि भाई कों सभीकुछ बता दिया थां अपने.उन्हें आप् अपना कस्टमर समझरही थि “(उपडेट नंबर 4)
काजल उसका चहरा देखने लगी, उसे यकीन नहीं हौ रहा थां कि यहबात निशा कों केसेपता.
शायद निशा कों उसकीनजर सें कुछसमझ आँ गय़ा थां.
“मे उसरात आप् लोगे केँ कमरे केँ बाहर् हि थि, ”
काजलअब घबरा गई.
“घबराइए नहीं नां आपकोकुछ होगा नाँ हि आपके इकलौते भइया वरुण कों,.मगर आपके बापू.”
निशा केँ चहरे मे एक् अजीब सें भावआये जिसे देखकर काजलडर गई
“नहीं निशा पिताजी कों कुछमत करना “उसकी आवाज़ हि कांप गई थि मगर निशा केँ चहरे मे एक् कमीनी सि मुस्कान आँ गई …….
“अगर आप् चाहती हैं कि वोँ बुड्डा अपनी बाकी कि जीवन सुकून सें काटे तौ ….”
काजल केँ आंखों मे आंसू कि एक् धार बहनेलगी थि, उसकारूह भि निशा कि बात सें काँपने लगा थां.
“तोँ……”
काजल नें कांपते हुए आवाज़ मे निशा सें कहा,
“तौ अब भाई कों मेरेखेल सें दूर हि रखना, मैंने जिंदगी मे सबसे ज़्यादा प्रेम उन्हें हि किया हैं.अपने एक् बड़ी गलती तोँ कर हि दि औऱ वोँ तोँ ठहरे भोले भाले वोँ मुझे सुधारने केँ लिए प्राण लें लिए होंगे.अगर मे उनकी बेहन नां होती तौ आज वोँ मेरे होते.तुम्हारे आने सें वोँ मुझसे दूर हौ गएमगर अब मे उन्हें अपनाबना केँ हि छोडूंगी, अगर तुम् बीच मे आयी तौ जानती हौ नां……”
काजल नें उसकी आंखे देखी, वोँ लाल थें, जैसे किसी जुनूनी केँ होते हैं, वोँ एक् जुनून मे हि तौ थि, अपने भइया कों पाने केँ जुनून मे नां जाने वोँ इसकेलिए क्याँ कर जाएगी.काजल केँ प्राण कांपगए वोँ एक् भीगी बिल्ली जैसे सिमटकर रह गयीँ,, उसकेमुख सें कोई भि शब्द नहीं फूटाबस वोँ हा मे सर हिलाकर हि रह गई …….
इधर
“भाभी दिदि नें आपकोकुछ कहा, औऱ भाई कों क्याँ जरूरत थि कि वोँ उन लड़को सें भिड़ने जाते “
मासूम सि पूर्वी कां चहरा देखकर काजल कों उसपर बहोत हि प्रेम आया, वोँ अभि अपनेखाट मे लेटी हुई थि औऱ नर्सो केँ द्वारा कि जाने वालीबात कों सुनकर उसे पूरा माजरा समझ मे आँ चुका थां.
“उन्होंने जौ किया वोँ तोँ हर भइया करता, औऱ वोँ दुनिया मे सबसे ज़्यादा प्रेम भि तोँ तुमसे हि करते हैं …”काजल केँ चहरे मे एक् मुस्कान खिली, वही मुस्कान पूर्वी केँ चहरे मे भि थि.
“निशा दिदि नें आपकोकुछ कहा क्याँ, मुझे बताइये मे बतलाती हु उन्हें, समझती क्याँ हैं वोँ अपने कों “
पूर्वी कां क्रोध भि तोँ इतना प्यारा थां कि काजलहँस पड़ी
“पहले जल्द केँ ठीक तोँ हौ जाओ, औऱ निशा कों मे लुंगी, तुम् उसकी फिक्र छोड़ो.पहले तौ मुझेलगा थां कि निशा कों सम्हालना आसान होगा, मगर आज उसकी आंखे देखकर तोँ ऐसा नहींलग रहा थां जैसे वोँ कयामत हि ला देगी …….”काजल नें थोड़ीदेर हुई बातचीत कों याद किया
“क्याँ बोलरही थि वोँ.”पूर्वी केँ चहरे मे भि एक् गहरेभाव आये.
“वही पुरानी बात.मगर इसबार उसकी आंखों मे जौ जनून थां वोँ मैंने पहलेकभी नहीं देखा थां.”
पूर्वी नें एक् गहरी सांसली.
“लगता हैं अब मुझे हि उतारना होगा “उसने अपने आप् सें कहा …………….
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अध्याय 27
“वाउ मेरेदेव तुम् तोँ दोस्त हीरो निकले “
रश्मि कां चहरादमक रहा थां, मे अभि अभि थाने सें जमानत मे छूटकर आया थां औऱ जमानत करवाने वाली रश्मि हि थि, मैनेकुछ लड़को कों क्याँ मार दियायह लोग मुझे हीरो बनाने मे हि तूलगए थें, रश्मि कों तौ इतनाखुस मैंने कभी नहीं देखा थां, आखिर बात क्याँ थि इतनी खुसी कि …
“उसने मेरी बेहन कों छेड़ा थां बस इसलिये “
“ओहमगर हर लड़का इतना बहादुर तोँ नहीं होता जौ इतने लड़को केँ बीच अकेला पहुच जाय.खैर मे तुम्हारे इस फैसले सें बहोत खुस हुइ “
वोँ इतनीखुस क्यो होँ रही थि, यह प्रोफेशनल लड़की थि इसे खुसी बेवजह तौ नहीं हौ सकती.
मे उसेयही बात अपनी आंखों सें पूछरहा थां…
“असल मे अब तुम् रेडी होँ.”
वोँ हल्के सें मुस्कुराई.
“किसलिए ????”
मे फिन केँ आश्चर्य सें भर गय़ा
“लड़ाई केँ लिए “
मुझेकुछ भि समझ नहींआया कि वोँ क्याँ बोलरही थि …
“खान सें औऱ किससे “उसने अपनीबात पूरी कि
“मगरभला मे क्यो उनसे लड़नेलगा “
वोँ खिलखिलाई
“यंहा एक् जंग तौ छिड़ी हि हुई हैं देव,, यह दिमाग़ कि जंग हैं औऱ तुम् चाहो याँ नां चाहो तुम् इसजंग कां हिस्सा हौ “
वोँ खामोश थि मगर उसके होठो मे एक् मुस्कान थि मे उसकी बातो कों समझने कि कोशिस कररहा थां …….
“अगर मे कहु कि पूर्वी पर्र यह हमलाखान नें करवाया थां तोँ “
उसने एक् बम फोड़ा
“नहींयह नहीं होँ सकता वोँ तौ बस कॉलेज केँ आवारा लड़के थें “जितना मे समझ पाया थां मैंने कहा
“तुम् जानते नहींखान कों वोँ साला बहोत हि कमीना हैं, अपने बेटे सें भि अधिक, औऱ वोँ साली रंडी काजल “
वोँ इतना हि बोलकर चुप होँ गई, मुझेपता थां कि रश्मि कों मेरे औऱ काजल केँ रिलेशन केँ बारे मे पता थां मगरफिन भि वोँ बारबार काजल कों रंडी क्यो कहती थि…….जब भि वोँ उसकानाम लेती उसके चहरे मे एक् घृणा केँ भावसाफ नजर आँ जाते थें ….
“काजल कां इससे क्याँ लेना देना “
मे थोड़ा सां चिढ़ गय़ा थां.
“हाभई तुम् तौ उसकी तरफदारी करोगे हि आखिर तुम्हारी यार जौ हैं संस्कारी काजल ….बहोत मनपसंद करते हौ तुम् उसे ?”
रश्मि केँ चहरे मे मुझे जलाने वाली व्यंग वाली मुस्कान थि, उसने एक् एक् शब्दबड़े हि सोचकर बोला थां, उसने पसन्द कहा थां प्रेम नहीं क्योकि उसे लगता थां कि मुझे नहींपता कि उसेयह पता हैं कि हम् दोनो पति पत्नि हैं ….
“तुम् ऐसे क्योबोल रही होँ “
“कुछ तोँ कहा होगा तुमसे काजल नें ….”
मे चौक गय़ा.
“मे जानती हु कि तुम् मुझे नहीं बताओगे, मगर वोँ काजल जिसकी बात तुम् मानरहे होँ वोँ तुम्हे हि फंसारही हैं अपनाकाम निकालने केँ लिए “
सालासब यहीकहे जारहे थें, आखिरयह कौन सां काम हैं जोँ मेरे बिना नहीं हौ सकता याँ जिसके लिए सबको मेरी जरूरत थि ….काजल नें भि कहा थां कि अब रश्मि तुमने अपनेजाल मे फसाने कि कोशिस करेगी, वही हौ रहा थां रश्मि नें अपनाखेल खेलना शुरुआत कर दिया थां औऱ मोहरा थां मे ……
“कौन सां काम “
मैंने आखिरपूछ हि लिया
“काम तौ पतालग हि जाएगा तुम्हे.मगर सबसे जरूरी चीजयह हैं कि तुम् किसकी बात मानते हौ.अपने काजल कि, याँ अपने बहनों कि जिसपर तुम् जान छिड़कते हौ, याँ शबनम कि जौ कि एक् पक्की रांड हैं औऱ पैसों केँ लिएकुछ भि कर सकती हैं, याँ उस मोहनी कि जोँ खान कि रंडी हैं.याँ मेरी “
मे बुरीतरह सें चौक गय़ा थां, रश्मि कों मोहनी केँ बारे मे केसेपता थां ….वोँ हल्के सें मुस्कुराती हुई अपनी स्थान सें उठाकर मेरे सामने आकर टेबल पऱ बैठ गई, उसके छोटे स्कर्ट सें उसकी मांसल औऱ लंबी जाँघे मेरे सामने थि, मेरा चहरा उसके सीने केँ पास थां, मे अब उसकी खुसबू सूंघपा राह थां उसनेबड़ी हि महंगी औऱ मादक परफ्यूम लगारखी थि …
उसके उन्नत उरोजों कि चोटिया मेरे चहरे केँ बिल्कुल नजदीक थि, मुझेलग रहा थां कि वोँ मुझे बहकाने केँ पूरेमूड मे हैं.उसने अपनाहाथ मेरे कंधे पऱ रख दिया ….औऱ अपना चहरा झुकाया, जिससे हम् दोनो केँ हि चहरे एक् दूजे एक् कुछइंच कि दूरी मे रहगए थें…
“मे जानती हुदेव कि तुम् इस वक़्त बहोत हि कन्फ्यूजन कि स्तिथि सें गुजररहे होँ.तुम्हारे सामने वोँ लोग भि हैं जिनसे तुम् बेपनाह मोहोब्बत करते हौ औऱ वोँ भि जिनसे तुम्हे कोई वास्ता हि नहीं हैं.मे जानती हु कि मेरासंग देना तुम्हारे लिए सबसे कठिन होगा.तुम् मुझे हमेशा हि अपनी बहनों औऱ काजल केँ बाद हि रखोगे मगर …….”
वोँ थोड़ीदेर केँ लिएचुप हौ गई, उसकी उज्वल आंखों कों मे देखरहा थां हम् दोनो कि हि आंखे मिली हुइ थि मगर शब्द किसी केँ नहींफुट रहे थें ……
“मगर क्याँ “
“मे चाहती हुईँ कि तुम् मेरी बातो पर्र भि गौरकरो.कहने कि जरूरत नहीं कि इन बातो कों किसी केँ संग भि शेयरमत करना.नां हि काजल केँ संग नां हि अपनी बहनों केँ संग नाँ हि शबनम औऱ मोहनी केँ संग.एक् बार तुम् मेरा भि तौ भरोषा करके देखो “
एक् लड़की जोँ कि इस होटल कि मालकिन थि, जिसेकुछ दिनों पहले तक मे देखकर हि कांप जाया करता थां आज वोँ मुझसे ऐसे रिक्वेस्ट करेगी मे सोच भि नहीं सकता थां आखिर क्याँ करना थां मुझे जोँ सब मुझे अपने भरोसे मे लेनाचाह रहे थें ……
“कहोदेव कर पाओगे भरोषा …याँ इस दीवार कों तोड़ने केँ लिए मुझेकुछ औऱ भि करना होगा “
उसने अपने हाथो सें मेरे हाथो कों पकड़कर अपने जांघो केँ बीच तक ला दिया, मेरी सांसे उखड़ने लगी थि, यह कैसा तरीका थां उसका भरोसा जितने कां, मेरी उंगलिया उसके स्कर्ट केँ अंदर सें उसकी योनि केँ ऊपर केँ कपड़े कों छू गई, मैने जल्दी हि अपनाहाथ बाहर् निकाला, मे ऐसा करना तौ नहीं चाहता थां मगरयह एक् स्वाभाविक सां रिस्पॉन्स थां ….
मे पसीने सें तर होँ गय़ा थां जबकि ac पूरे जोरो सें चलरहा थां.मे उसकी आंखों मे देखा वोँ हल्के सें गीले थें जैसे वोँ यह करना तौ नहीं चाहती थि मगर किसी ताकत नें उससेयह जबरदस्ती करवाया हौ, मेरे हाथो कों निकालने सें उसे जैसे सुकून पड़ा हौ …
उसके चहरे मे एक् मुस्कान आयी.
“तुम् बहोत अच्छे हौ देव, तुम्हे कुछ भि होना चाहिए “
वोँ मेरे बालो कों सहलाने लगी
“अच्छे लोगो कि ऐसे भि दुनिया मे कमी हैं, ”
उसकीबात मेरे दिमाग़ केँ ऊपर सें जारही थि
“तोँ कहो मुझेकुछ औऱ करना होगायह तुम् ऐसे हि मेरा विस्वास कर पाओगे “
मे बुरीतरह सें झुनझुलाया …
“बहोत हुआयह सभी आखिर तुम् चाहती क्याँ होँ “
मे जोरो सें बोल गय़ा.वोँ मुस्कुराई
“कुछ नहींबस एक् विस्वास, कि तुम् मेरीकही बातो कों किसी सें शेयर नहीं करोगे …”
मैंने हा मे सर हिलाया
“मे केसेमान लू कि तुम् ऐसा करोगे “
वोँ हल्के सें बोलीं
“तुम्हे भि मेरेऊपर इतना विस्वास तोँ रखना हि पड़ेगा “
वोँ गंभीर होँ गई
“हम्म तौ ठीक हैं देव.अगर तुम्हे लगे कि तुम्हे किसी कों बताना हैं तोँ बता देनामगर पहलेकम सें कम मेरी बातो कों समझने कि कोशिस जरूर करना.मेरासंग देने कि कोशिस जरूर करना, अगर नहींदे पाओगे तौ भि मे तुम्हे गलत नहीं समझूँगी क्योकि तुम् भि मजबूरी मे बंधे हौ प्रेम कि रिश्तों कि मजबूरी मे ……”
मे थोड़ेदेर शांत हि रहा …
“क्याँ बोल्ना चाहती होँ …”
“ह्म्म्म देवजब मे कालेज मे थि तभी सें मुझे अजीम सें प्रेम हौ गय़ा थां ….”
वोँ बोल्ना शुरुआत कर दि ……
“अजीम औऱ मे बेस्ट कपल कि तरह सें रखनेलगे थें, वोँ मुझे बहोत प्रेम करता थां मगरफिन सभीकुछ बदलने लगा,,, अजीम कों शराब औऱ शराब कां शौक चढ़नेलगा थां, औऱ उसकेलिए जिम्मेदार थि एक् लड़की …….”
मे चुप हि थां, वोँ भि चुप होँ गई
“काजल???”
मैंने कहा थां.
“नहीं मोहनी “उसका उत्तर थां.
“हम्म तौ फिन तुमने अजीम कों छोड़ दियाबस इतना हि नां “
मे झुंझला गय़ा थां ….
मगर उसके प्यारे सें चहरे मे उदासी घिरने लगी ………
“अजीम कों लड़कियों कां शौक थां मगर वोँ इतना कमीना नहीं थां, हम् दोनो कि लड़ाइयां होनी शुरुआत होँ गई थि, वोँ उस वक्त कि बात हैं जब उसके होटल मे काजल कि एंट्री हुइ, वोँ एक् सीधी साधी सें लड़की लगी जिसे मोहनी कों कहकर अजीम अपने सांचे मे ढालने मे लग गय़ा.शुरुवात मे मोहनी नें काजल कों बिगड़ने मे अजीम कां भरपूर संग दियामगर फिन धीरे-धीरे धीरे-धीरे काजल हि अजीम केँ मन मे छानेलगी, काजल केँ नशे मे अजीम नें मोहनी कों किसीगरम चाय मे पड़ेहुए मख्खी कि तरह निकाल फेका…….
मोहनी सें मुझे प्रॉब्लम तोँ थि मगरफिन भि वोँ कभी हमारे पर्सनल औऱ प्रोफेशनल मेटर नें टांग नहीं अड़ाती थि मगर काजल मे हमारे रिस्तो कों बर्बाद नहीं किया वोँ प्रोफेशनल चीजो मे भि बहोत दखल करनेलगी…
खान साहब केँ पूरे करोबर कां इकलौता मालिक अजीम हि हैं, औऱ उनकी कंपनी केँ बोर्ड ऑफ डारेक्टर मे मुझे भि स्थान मिली थि …
मगरपता नहीं काजल नें ऐसा क्याँ किया कि मुझे बोर्ड ऑफ डारेक्टर केँ लिस्ट सें हटा दिया गय़ा,,, मे तब भि कुछ नहीं कहती हौ सकता थां कि कंपनी कि किसी पॉलिसी केँ कारणयह किया गय़ा रहा हौ मगर मुझे झटकातब लगाजब काजल कों मेरी स्थान बैठा दिया गय़ा.
इसबात कों लेकर अजीम सें मेरा फाइनल झगड़ाहुआ औऱ आखिर मे वोँ तलाक मे तब्दील होँ गय़ा……….”
मे उसकी बातो कों ध्यान सें सुनरहा थां क्योकि यहउसबात केँ बिल्कुल हि विपरीत थि जौ कि काजल नें मुझे बताई थि ……
“वोँ केवल एक् रंडी हि नहीं हैं देव वोँ जादूगरनी हैं.औऱ उसकासंग देने वाली थि …”
रश्मि अपनीबात कों कहते कहते हि रुक गई जैसेसोच रही हौ कि यहकहु कि नहीं.
“क्याँ हुआकहो.”
“देव प्लीज् मेरी बातो कां बुरामत मानना.मे जौ भि कहरही हुअगर तुम्हे लगे कि यहगलत हैं तौ भि तुम् पहलेउसे परख लेना,,.यह तुम्हारे लिएबड़ी बात होँ सकती हैं औऱ हौ सकता हैं कि तुम् गुस्से मे आँ जाओ.मगर मेरीबात कों ध्यान सें सुनना …”
मे सकते मे आँ गय़ा थां आखिर रश्मि कहना क्याँ चाहती थि …
“कहो मे सुनरहा हु, वादा करताहु कि तुम्हे कुछ भि नहीं कहूंगा “
मे उसे शांत करने केँ उद्देश्य सें बोला क्योकि मुझे यंहा एक् नईकथा सुनने कों मिलरही थि औऱ मे इसे जानना चाहता थां …
“वोँ निशा थि ….तुम्हारी बेहन “
मेरे चहरे केँ भाव तेजी सें बदलने लगी थें.अगर काजल नें मुझे निशा केँ बारे मे पहले हि नहींबता दिया होता तोँ शायद मे रश्मि कि जान हि लेँ लेता…….मगर मे चुप थां…
मगर रश्मि कों शक नाँ होँ इसलिये मैंने ऐसी एक्टिंग कि जैसे मे बहोत हि ज़्यादा शॉक मे पहुच गय़ा हु ….
“मेरीबात पऱ यकीन करने कि जरूरत नहीं हैं देव, तुम् जब तक जान नाँ लोमत मानोमगर अपनीनजर बदलो शायद तुम्हे अपनेआस पास बहोत कुछ अजीब सां लगे “
रश्मि केँ एक् एक् शब्द मे मेरेलिए भरपूर सहानुभूति औऱ प्रेम कां अहसास किया मैंने….यह अजीब थां क्योकि मे जानता थां कि वोँ मुझे काजल केँ खिलाफ भड़काने वाली हैं मगर उसकी बाते मुझे इतनी सच्ची क्योलग रही थि ………
वोँ मेरेसर कों पकड़कर अपने सीने सें लगाली, जैसे मुझे सांत्वना देरही हौ …
उसके उजोर केँ तकिए औऱ खुसबू नें मुझेबड़ा चैन दिया, मैंने उसे अपनी बांहो मे भर लिया औऱ वोँ मेरेसर कों सहलाने लगी …
एक् अजीब सि आत्मीयता कां आभास मुझे उसके स्पर्श मे हौ रहा थां…
“मगर मे क्याँ कर सकताहु इन सबमे.औऱ तुम् मुझेयह सभी क्योबता रही हौ “
मे अपने अंतिम दुविधा कों मिटाना चाहता थां.
“क्योकि तुम् एक् अच्छे इंसान होँ इसलिए मैंने तुम्हे यहसभी बतलाया वरना मे स्वयं हि कुछकर लेती …….औऱ काजल औऱ निशा केँ लगभग भि हौ इसलिये तुम् हि वोँ काम आसानी सें कर सकते हौ, रहीबात कि मुझे क्याँ मिलेगा.मुझे मेराहक चाहिए जौ कि खान कि प्रोपर्टी पऱ मेरा हैं.मुझे अजीम कों सही रास्ते मे लाना हैं.अब हमारे रिश्ते पहले जैसे तौ नहीं होँ सकतेमगर फिन भि पहला प्रेम तौ पहला प्रेम हि होता हैं….”
मैंने अपनासर उठाया, आज मैंने रश्मि कों पहलीबार रोतेहुए देखा थां …….
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