रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
असल मे डॉ चूतिया कां तौ नाम हि चूतिया हैं मगर सालाअसल चुतिया तौ यहदेव हैं जोँ पैसे औऱ काजल केँ अंधे प्रेम मे फसकर काजल केँ काली दुनिया केँ साम्रज्य कों फैलारहा हैं औऱ वोँ साली काजलउसे बहनों केँ संग मस्तकर केँ रोज़रात मज़ेलूट रही हैं
रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 19
मे लगभगरात 9 बजेघऱ आया, मुझे 8 बजे हि काजल कां संदेश मिल गय़ा थां कि वोँ आजघऱ नहीं आँ रही हैं,,, आजकल काजल मुझे पहले सें हि संदेश कर देती हैं, उसने मुझसे बहोत सि बाते छुपानी छोड़ दि हैं, मगर जोँ वोँ छुपती हैं मैंने उसे पूछना भि बंदकर दिया, मेरे लिए सबसे इम्पोर्टेन्ट अबयहसभी जल्द सें जल्द ख़त्म कर एक् आरामदायक जीवन जीना थां, मे एक् नार्मल सां इंसान हु जौ कि जीवन कि ज़्यादा उथल पुथल कों सह नहीं पाता, मुझे शांति चाहिए थि, मुझे एक् आम जिंदगी जीना थां, मगरअब वोँ पूरीतरह सें संभव नहींरहा,
मे उन मर्दो मे नहींहु जोँ कि अपनी बीबी कों अपना गुलाम समझते हैं औऱ किसी औऱ मर्द सें संग कल्पना भि नहींकर सकते, नां मे ऐसे मर्दो मे शामिल हु जौ कि अपनी बीबी केँ गुलाम हैं औऱ उसे किसी दूसरे मर्दो केँ संग देखकर उत्तेजित होँ जाते हैं जिसे हम् CUCKOLD कहते हैं.मे दोनो हि तरह कां नहींहु नां हि दोनो केँ बीच कां हि हु …
मे अपनी बीबी सें अपने परिवार सें बेपनाह प्रेम करताहु, मगर मे उनका गुलाम नहीं हु, मे अपनी बीबी याँ बहनों कों किसी मर्द केँ संग नहींदेख सकतामगर अगर वोँ मजबूर होँ याँ अपनी ख़्वाहिश सें किसी कारण सें यहकररहे होँ तौ मे उनके विरोध मे भि नहींजा सकता….शायद इसीलिए मे इतना परेशान थां, अगर मे दोनो मे सें एक् होता तौ मेरेलिए यहसभी सहन करना अधिक मुश्किल नहीं थां, मे याँ तोँ काजल कों मार चुका होता याँ तलाकदे चुका होता, याँ उसकी चुदाई देखकर हिलारहा होता, मगर मे इनमें सें कुछ भि नहींकर रहा थां……
घऱ मे मेरा स्वागत हमेशा कि तरह मेरी बहनों नें बड़े प्रेम सें किया, जब उन्हें पताचला कि आज काजल नहीं आँ रही हैं तोँ दोनो केँ चहरेखिल गए …
“मतलबआज हम् आपकेसंग सोएंगे.”मेरी प्यारी पूर्वी नें बड़ेचहक केँ कहा
“तुम् मेरेसंग क्यो मे तुम्हारे संगसो जाताहु “
“मतलब “पूर्वी कों मेरीबात समझ नहींआयी थि
“मलतब मेरी बहना रानी कि मे तुम्हारे कमरे मे सो जाताहु “
मेरेइस बात सें दोनो नें एक् दूसरे कों देखा, जैसे कि कोईशॉक लग गय़ा हौ.
“नहीं नहीं भाई हम् आपके हि कमरे मे सोएंगे “निशा नें जल्द सें कहा, उसके चहरे मे एक् डरसाफ झलकरहा थां, मेरे होठो मे एक् मुस्कान आँ गई थि, क्योकि काजल नें मुझेकुछ ऐसा पहले हि बता दिया थां जिसके कारणयह मुझे अपने कमरे सें दूर हि रखनाचाह रही थि, मगर काजल नें यह भि कहा थां कि अगर मे सभीकुछ ठीक करना चाहता हु तौ मुझे अपने इमोशन पर्र काबू करना होगा, मैंने कुछ दिनों कि प्रेक्टिस सें अपने चहरे कां भाव बदलने औऱ उसे छुपाने कि थोड़ी खूबी तोँ हासिल कर हि ली थि, जिसका उपयोग मे आज रश्मि केँ सामने करकेआया थां,
“क्याँ हुआ “मैंने जोर दिया
“वोँ क्याँ हैं भाई हमारे कमरे कां बैड बहोत छोटा हैं 3 लोग केसे आएंगे,, औऱ समान भि इधरउधर पड़ाहुआ हैं आप् देखोगे तोँ डाटोगे …”
पूर्वी नें जल्द जल्द सें कहा,
वाउरे मेरी प्यारी बहना, कितने सफाई सें झूटबोल रहे होँ, उनकेइस झूट मे भि मुझेबड़ा प्रेम आया औऱ आंखों मे आंसू हि आँ जातेमगर मैंने स्वयं कों सम्हाल लिया, मेरी मासूम सि पूर्वी कों नां जाने क्याँ क्याँ सहनापड़ रहा थां, वोँ किसी कों बचाने केँ लिए कितने आहिस्ता झूटबोल रही थि, मगर उसकी आंखे …….
वोँ अभि भि उतनी हि मासूम थि औऱ उसकी आंखों अब भि सचबोल रही थि, उसकी आंखों मे डर औऱ झूट सें आयी हुई ग्लानि साफसाफ झलकरही थि, मगर मैंने उन्हें कुछ भि नहींकहा…
“ओकेचलो ठीक हैं रेडी होकर मेरे कमरे मे आँ जाओ “
“जी भाई दोनो हि एक् संगखड़े होँ गए “
मे अपने कमरे मे सोयाहुआ आने वाले भविष्य कि संभावनाएं तलाशरहा थां कि दोनो परिया मेरे कमरे मे दाखिल हुईँ.
दोनो केँ ऊपर काजल कां प्रभाव साफसाफ झलकरहा थां, उनकेयह कपड़े काजल कि हि मनपसंद केँ थें, मगर काजल इन्हें मुझे याँ पता नहीं किसे किसे उत्तेजित करने केँ लिए पहना करती थि, वोँ कपड़े मेरी बहने मेरेसंग सोने केँ लिए हि पहनकर आँ जाती थि …
मुझेइस बात पऱ हँसी भि आयी औऱ उनके खूबसूरती कों देखकर मे उनपर मोहित भि हौ गय़ा, खासकर पूर्वी केँ लिए मेरेदिल मे बहोत हि प्रेम उमड़ जाता थां, नई नईकली कि तरह उनखिली हुईँ मेरी पूर्वी मासूमियत औऱ चंचलता सें भरी हुई थि, औऱ मेरेलिए उसका असीम प्रेम उसकी आंखों सें हि झलक जाता थां, वही निशा उसके अपेक्षा बदन सें कही ज़्यादा भरी हुईँ थि, औऱ किसी भि मर्द कि पहली पसन्द निशा हि होतीमगर निशा मे वोँ मासूमियत नहीं थि जोँ कि पूर्वी केँ हर एक् अदा सें झलकती थि.
हमेशा कि तरह हि दोनो मेरेआजु बाजूआकर लेटगए औऱ पूर्वी नें मुझे अपनी बांहो मे कस लिया, उसकी कोमलता औऱ कोमल बूब्ज़ औऱ उसका चहरा मेरे सीने मे आँ धसे.वही निशा कां चहरा मेरे चहरे केँ पास हि थां वोँ मुझे हि देखरही थि, वोँ मुझसे ऐसेसटी हुइ थि कि उसके मम्मों मेरे कोहनियों सें लगरहे थें, मे भि उसपरजोर दे देता, वोँ अपने बांहो कों मेरेगले सें लपेटली, वोँ मेरेऊपर आनां चाहती हि मगर वँहा पहले सें हि पूर्वी कां राज थां, उसका मेरेऊपर अधिकार पूर्वी केँ बाद हि आता थां.वोँ प्रतीक्षा करनेलगी कि कब पूर्वी नींद मे चली जाय, औऱ उसे उसके कमरे मे छोड़कर आयाजाय.
उसके चहरे मे पूर्वी केँ लिए थोड़े गुस्से कां भाव आँ गय़ा, जिसे मे आसानी सें पढ़ सकता थां, जिससे मेरे होठो मे एक् मुस्कान आँ गई.
“वोँ छोटी हैं रे “
मैंने उसके कानो मे कहा
“तौ क्याँ हमेशा आपकेऊपर चढ़ जाती हैं, मुझे स्थान हि नहीं मिलता “
उसने रूठने वाले स्वर मे कहा,
“तौ क्याँ हुआ बेचारी जल्दसो भि तोँ जाती हैं, फिन तोँ तूँ हि पूरीरात मेरेऊपर चढ़े रहना “
मुझे अपनी हि बात पऱ हँसी आँ गई क्योकि हम् यह क्याँ बोलरहे थें.
“हम्म इसीलिए तोँ इसेकुछ नहीं बोलती “निशा नें मेरे गालो मे एक् किस करतेहुए कहा ….
नां जानेऐसे हि मेरी नींदकब लग गई, शायद मे आज इतनाचला थां कि थक चुका थां, नींद टूटी किसी कोमल होठो केँ अहसास सें जोँ कि मेरे होठो कों छूरहा थां, उस होठ कां गीलापन मेरे होठो सें मिलरहा थां, मैंने हल्के सें हि आंखे खोली, यह निशा थि जौ मुझे सोताहुआ पाकर मेरे होठो कों हल्के हल्के चूमरही थि, उसने पूर्वी कों उसके कमरे मे रुला दिया थां, मे थोड़ीदेर तक ऐसे हि रहामगर फिन मैंने अपनाहाथ उसकेकमर सें लपेट लिया.
वोँ ऐसे हड़बड़ाई जैसे कि उसकी चोरी पकड़ी गई होँ
“क्याँ हुआ मेरीजान, क्याँ कररही हौ “
मैंने निशा कों छेड़ा
“सॉरी भाई “वोँ झेप सि गई
मैंने अपनाहाथ उसकेकमर केँ नीचेरखा मुझे उसके सुडौल गोलगोल नितम्भो कां आभास हौ रहा थां, उसकी नाइटी थि हि इतनी झीनी सि कि मुझे उसकी पेंटी केँ इलास्टिक तक कां पताचल रहा थां, मेरेइस हरकत सें वोँ भि थोड़ी मचली, उसने मुझसे दूर हटने कि बजाय औऱ मुझसे चिपक गई………
उसकासर मेरे गालो केँ पास थां, जबकि उसकीकमर मेरेकमर केँ ऊपर, उसकेबड़े रसीले वक्ष मेरे सीने सें दबेहुए थें, उसकेबदन कि गर्मी मेरे शरीर मे घुलने लगी थि….
मे बिना किसीरोक टोक केँ उसके नितम्भो कों सहलारहा थां, वोँ हल्की आई आहों केँ संग मुझसे औऱ सटने कि कोसिस कररही थि, याँ शायद मेरे सीने सें अपने वक्षो कों सहलारही थि, उसकीइस हरकत सें मेरे लिंग मे भि एक् हरकत आँ गई,
मे अपनीसगी छोटी बेहन केँ संग थां, औऱ मेरा लिंग अकड़कर उसके जांघो केँ बीचरगड़ खारहा थां…
नाँ जमाने कि नाँ हि इस पवित्र रिश्ते कि कोई भि परवाह मेरेमन मे बची थि, अब हम् दोनोबस शरीररह गए थें, एक् लड़की औऱ एक् लड़के कां शरीर, जौ मिलन कों बेकाबू होनेलगे थें…
मेरे हाथो कां दबाव उसके नितम्भोपर औऱ भि जोरो सें बढ़ताजा रहा थां, मे उसेमसल हि रहा थां, वोँ भि बेकाबू हौ रही थि, उसकी सांस उखड़ने लगी थि, वोँ अपने गालो कों मेरे दाढ़ी केँ कारण थोड़े खुरदुरे गालो मे रगड़ने लगी थि, शायद उससेउसे कोई दर्द सां उठा औऱ वोँ अपने चहरे कों मेरे चेहरे केँ पास लायी…
उसकी आंखें थोड़ीबंद सि हौ गई थि, बिखरे बाल, अध खुली आंखे औऱ माथे मे आया पसीना.वोँ पूरीतरह सें वासना केँ गिरफ्त मे मतवाली हौ चुकी थि.
हमारी आंखे मिली औऱ संग हि होठ भि मिलगए…
इसबार मैंने उन्हें चूसने मे कोईकमी नहि दिखाई, जब मेरे औऱ निशा केँ होठो नें एक् दूजे केँ थूक सें स्वयं कों मिला लिया थां, औऱ उस गीलेपन सें उठाने वाले आनन्द मे हम् दोनो हि मगन होँ गए थें ठीकउसी टाइम निशा केँ जांघो केँ बीच मेरातना हुआ लिंग भरपूर मालिस कररहा थां, औऱ उसकी नाइटी उसकेकमर सें ऊपर होँ चुकी थि जिससे मेरेहाथ सीधे उसके नितम्भो कों उसकी पेंटी केँ ऊपर सें हि पूरीतरह सें महसूस करपारहे थें, वही उसकी पैंटी केँ आगे केँ भाग जोँ अपने मे उसकी कोमल योनि कों छुपाए हुए थें, वोँ गिला होकर मेरे निकट कों सामने सें गीलाकर रहा थां……
हवस….हवस, वासना, कामयह आग हि ऐसी हैं जौ सब मर्यादाओ औऱ रिस्तो कों भुला देती हैं, निशा मेरी छोटी बेहन, वही निशा जिसे मैंने बचपन सें खिलाया थां, अपने बांहो मे उठाया थां, एक् बाप केँ रूप मे जिसकी मे परवरिश कररहा थां, जोँ मुझे अपना ईश्वर मानती थि, जिसके लिए मे हि सबकुछ थां, वही निशा मेरे नीचे थि औऱ मे एक् मर्दबना हुआ उसकेऔरत केँ बदन कों मसलेजा रहा थां, औऱ वोँ भि इसकेआनद मे डूबरही थि, मर्यादाओ कों बचाने एक् दीवार हमारे बीच थि जौ कपड़ो केँ रूप मे थि, हमारे अंतःवस्त्रों केँ रुप मे थि, मेरे हाथअब उनतक भि पहुचने लगे थें, मे उस इलास्टिक कों अपने उंगलियों सें फंसाकर उसे नीचे करने कि कोशिस कररहा थां, वोँ भि उसकेकमर कों छोड़कर नीचे होनेलगे थें, उसके नितम्भ अब पूरीतरह सें आजाद थें, उसकी कोमल गोलाइया मेरे हाथो मे सामने लगे थें, मे उन्हें उसे भि नीचेकर रहा थां, जिससे उसके सामने कां भाग भि नंगा होने लगा, उसके योनि केँ बालो कां अहसास मुझे होनेलगा थां,
“भाई ऊह “वोँ मचलने लगी शायदउसे भि पता थां कि इस तूफान कां क्याँ अंत होने वाला हैं, सब मर्यादाओ कां अंत, औऱ दो नंगे जिस्मो कां मिलन जौ कि मात्र बदन होंगे, बिना रिस्तो केँ किसी बंधन केँ, उसकी पेंटी कमर सें उतरकर जांघो तक पहुच गई थि औऱ उसने थोड़ी मेहनत करकेउसे अपने पैरो सें नीचे उतार दिया, मगर अभि भि मे निकर मे हि थां, जिसे उतारने कि शुरूवार निशा नें हि कि, वोँ मेरे निकर केँ दोनो छोरो कों पकड़कर उसे नीचे खिंचने लगी औऱ आहिस्ता आहिस्ता मेरे शरीर मे बस एक् अंडरवियर हि बच गय़ा थां, जिसमे सें मेराकड़ा लिंग उसके नंगे यानी मे रगड़खा रहा थां औऱ उसे औऱ भि उत्तेजित कररहा थां, मेरे अंडरवियर कां आगे कां भाग उसके कामरस औऱ मेरे प्रिकम सें बुरीतरह सें गीला हौ चुका थां….
इधर हमारे होठो मे एक् दूसरे केँ होठो सें मानोजंग हि छेड़ दि थि, जैसे जैसे हमारे कपड़े उतरे थें वैसे वैसे हि हम् औऱ उत्तेजित होकर एक् दूसरे पर्र आक्रामक रूप सें टूटपड़े थें, बस एक् आखरी दीवार हमारे सामने थि जिसका भि कोई भरोषा नहीं कि वोँ कबहटजाए,.
अभि तक मेरेऊपर चढ़ी हुईँ निशा कों मैंने अपने नीचे खिंच लियाअब मे उसकेसंग मनमानी करने कों पूरीतरह सें आजाद थां वही उसने भि मुझे अपनासभी कुछसौप दिया थां, वोँ पूरीतरह सें समर्पण कि स्तिथि मे आँ गई थि, वोँ अपने हाथो कों मुझसे लपेटे हुएबस आहे लेँ रही थि, मे अपने अंडरवियर कि पतली दीवार केँ बावजूद भि उसमे घुसने कों जोरलगा रहा थां, जिससे मेरा लिंग केँ हल्के सें कपड़े कि दीवार केँ माध्यम सें हि सहीमगर उसके योनि कों फांको कों बुरीतरह सें रगड़रहा थां, गीलापन बढ़नेलगा थां औऱ मुझसे औऱ सहन नहीं होँ रहा थां वहीहाल शायद निशा कां भि रहा हौ, हम् अपने वासना केँ चरम पर्र थें, निशा नें अपनाहाथ मेरे अंडरवियर केँ इलास्टिक पऱ रख दिया थां, उसकी उंगलिया उसमे फसनेलगी थि वोँ मेरेबदन मे बसकुछ हि देर कां मेहमान थां औऱ उसके उतरते हि जोँ होने वाला थां उससे हम् दोनो हि बाकिफ थें………
मगर शायद कुदरत कों कुछ औऱ हि मंजूर थां, इससे पहले कि निशा अपने उंगलियों केँ माध्यम सें मेरे अंतिम कपड़े कों उतार फेकेहमे गेट केँ खुलने कि आवाज़ सुनाई दि, शायद वोँ हाल कां गेट थां, यानी काजल केँ आने कां संकेत.हम् दोनो कि हि सांसे बेकाबू थि,
“मुझे भाभी पऱ इतना क्रोध कभी नहीं आया, रोज तौ 5-6 बजे हि आती हैं आज 4 बजे हि आँ गई”निशा नें बड़े हि गुस्से मे कहा औऱ जल्दी हि अपने कपड़ो कों ठीक करनेलगी मे भि जल्द सें अपने निक्कर कों पहनकर सो गय़ा, निशा जल्द हि अपनी पेंटी कों ढ़ंढने लगी औऱ उसेपहन कर मुझसे लिपटकर सोने कि एक्टिंग करने लगी.यह उस वक्तहुआ जब काजल नें हमारे कमरे कां गेट खोला, हम् दोनो कि हि सांसे अब भि तेजचल रही थि, काजल नें कमरे कि लाइट नहीं जलाई औऱ अपनाबेग रखकर सीधे हि बाथरूम मे चली गई, बाथरूम केँ प्रकाश सें हमारा रूम भि रौशन होँ गय़ा थां,
“अरे भाभी आप् आँ गई, मे अपने कमरे मे जातीहु “
निशा आंखों कों मलतेहुए बोलीं औऱ सीधे अपने कमरे मे चली गई, मगर मे….मुझे तौ सोने कि हि एक्टिंग करनी थि….
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 20
निशा केँ जाने केँ कुछदेर बाद हि काजल फ्रेश होकर बाहर् आयी उसकेबदन सें नहाने केँ बाद भि उसके परफ्यूम कि खुसबू मेरेनाक मे आँ रही थि, जिस खुसबू कां मे दीवाना थां…
मे पहले सें हि बहोत हि उत्तेजित थां मगरफिन भि मुझे सोने कि एक्टिंग तोँ करनी हि थि,
मे सोया हि रहा, काजल मेरेपास आयी औऱ मेरे गालो मे एक् किस करने सोनेलगी,.मेरीनीद तौ गायब थि, जब निशाचली गई औऱ मेरा लिंग थोड़ा ठंडाहुआ तब मैंने सोचा कि आखिर मे कर क्याँ रहा थां, यह बात सोचते हि मेरामन मे ग्लानि केँ भाव आँ गए कि मे अपनी हि बेहन केँ संग …???
मे सच मे गिराहुआ व्यक्ति हु….जब तक लिंग मे अकड़ थां मेरे अंदरहवस कि आग थि तब तौ मुझेकुछ भि समझ नहीं आँ रहा थां, शायद इसीलिए हवस, काम वासना, गुस्सा, लोभ, मोह, मद, कों आगकहा गय़ा हैं क्योकि सबसे पहले सोचने समझने कि क्षमता कों हि जला देता हैं……
मे जबउठा तोँ काजल नींद मे थि मैंने उसके गालो मे किस किया औऱ बाथरूम कि तरफ बढ़ा, मेरी नजर उसके पर्स पऱ चली गई, नाँ जाने क्योकोई आकर्षण मुझे उसतक लेँ गय़ा जब मैंने अंदर देखा तौ एक् लालरंग कि पेंटी दिखाई दि, मैंने उसे छुवा नहींमगर मेरा दिमाग़ फिन सें खराब हौ गय़ा, काजल रातभर किसी सें बिना पैसों केँ चुदकर आयी थि इसका मलतब थां कि वोँ शायदखान होगा, मादरचोद खान, अपने बेटी कि उम्र कि लड़की कों ठोकरहा थां,.
मे इसबात सें थोड़ा अपसेट भि थां क्योकि काजल कां इसतरह खान कों सबकुछ देना औऱ इधर मेरी हि बेहन केँ संग मेरे संबंधों नें मुझे थोड़ा झकझोर दिया थां, मुझे पता थां कि मे दोनो कां हि कुछ नहींकर सकता, आज संडे थां उर जैसेसब आज केँ दिन छुटिया मानते हैं हमारे लिएआज सबसे अधिक बिजीदिन होता हैं, हमारा रेस्टारेंट औऱ बारआज करीब-करीब फूल होता हैं, मे जल्द सें हि होटल कों निकल गय़ा.
होटल पहुचते हि मुझे सूचना दि गई कि रश्मि नें मुझेयाद किया हैं, मेरामूड औऱ भि खराब होँ गय़ा क्योकि नाँ जानेअब इसे क्याँ होँ गय़ा थां, ऐसे भि जोँ कलहुआ थां मुझेलगा कि वोँ अब भि गुस्से मे होगी, मझे बताया गय़ा कि वोँ स्विमिंग पुल मे थि ……
मे जब स्विमिंग पुल पर्र पहुचा तोँ रश्मि एक् बिकिनी मे दिखी औऱ मुझे देखकर मुझे स्माइल पास कि, मुझे थोड़ी राहत हुईँ क्योकि वोँ मुझसे अब क्रोध नहीं हैं, मुझे देखकर वोँ पुल सें निकली.
उसे देखकर मेरामुह थोड़ा सां खुल गय़ा थां मगरउसे मैंने जल्द हि बंदकर लिया.वोँ मुस्कुराती हुइ मेरेपास आयी औऱ मुझे बैठने कों कहा, जबकि वोँ एक् चेयर मे सो गई जिससे उसकेसब मूल्यवान समान मेरे सामने खुलकर आनेलगे थें.
“कल केँ लिए सॉरीदेव मुझेऐसा नहीं करना चाहिए थां.”
वोँ फिन सें मुस्कुराई
“मे तोँ आपका नॉकरहु मेडम आपकेपास नॉकरी करताहु, आप् कि मर्जी आप् जोँ भि करो मेरेसंग “
उसने मुझे आश्चर्य सें देखा जबकि मे अपना चहरा दुःखी बनाये हुए थां, इन दिनों मे मे एक् अच्छा एक्टर तोँ बन हि गय़ा थां, बाहर् सें मे दुःखी दिखरहा थां मगर अदंर सें मेरा लिंग अकड़ने लगा थां, शायद कलहुए हादसे केँ बाद मुझे हिला लेना थां, मे अपने कों असंतुष्ट महसूस कररहा थां जिसका असर मेरे लिंग मे साफसाफ महसूस होँ रहा थां….
रश्मि केँ चहरे मे एक् मुस्कान आँ गई.
“अच्छा इतना क्रोध, रश्मि सें मे मेडम हौ गई औऱ मैनेजर सें तुम् मेरे नॉकर हौ गए “
“जोँ सही हैं उसे बदला तौ नहींजा सकता नाँ”
“ओहो.चलो तुम्हारा मूडठीक करने लिये मे तुम्हे एक् इनाम देतीहु “
मे चौककर उसे देखने लगा, कही वोँ स्वयं मेरेसंग तोँ नहीं सोने वाली.मे मन हि मन मे खुस हौ रहा थां…
“असल मे तुम्हारी बात केँ बारे मे मैंने बहोत सोचा औऱ मुझे तुम्हारा आईडिया भि मनपसंद आया, जौ काजल उन्हें देरही हैं वोँ तौ मे भि दे सकतीहु “
वोँ मुस्कुराने लगीमगर मेरीफट गई, क्याँ यहसच मे अपने ससुरजी केँ संग …….क्याँ पता कि रुपया लोगो सें क्याँ क्याँ करवा सकता हैं…
“मगर अभि तुम्हारे इनाम कि बात, आज तुम्हारी छुट्टी “
उसनेऐसे कहा जैसे किसी बंधवा मजदूर कों एक् दिन कि छुट्टी मिल गई होँ, साला एक् दिन कि छुट्टी सें मेरा क्याँ होने वाला हैं, ऐसे भि मे घऱ मे रखकर भि क्याँ उखाड़ लेता.
“नहीं मेडम रहने दीजिये, मेरेपास ऐसे भि घऱ मे कोईकाम नहीं हैं औऱ आज संडे हैं आज यंहा पर्र भीड़ भि अधिक होगी “
वोँ मुझेदेख कर मुस्कुराई.
“अभि इनाम पूरा नहींहुआ हैं, आज तुम् मैनेजर केँ काम सें छुट्टी लेँ रहे हौ मगर तुम्हे आज शबनम केँ संगकाम करना हैं, वोँ एक् विशेष जश्न कां आयोजन कररही हैं, उसके काम कों एक् महीना पूरा हौ गय़ा हैं, यानी हमारा पहला कस्टमर एक् महीने पहलेआया थां, तब सें लेकर अभि तक हमनेकई कस्टमर कि सेवा कि हैं औऱ लाखो कमाए हैं, तौ शबनम कां प्लान हैं कि हमारे खास औऱ मालदार कस्टमर कों एक् ट्रीट दि जाए, आज उन्हें जिसेमन करेउसे फ्री मे करने दिया जाय.तोँ साम सें हि कस्टमर आने शुरु होँ जाएंगे, औऱ रात सें कार्यकम शुरुआत होँ जाएगा, आज कि सब तैयारी कि जिम्मेदारी तुम्हारे औऱ शबनम केँ कंधों पर्र हैं.तोँ इसलिये यंहा केँ काम सें तुम्हारी छुट्टी …औऱ हायहकाम ऐसे होना चाहिए कि यंहा केँ किसी भि कस्टमर कों इसकीभनक नाँ लगे, बहोत हि गुप्त रूप सें बाकीसभी शबनम समझा देगी ….”
यह क्याँ बात हुईँ साला एक् दिन कि छुट्टी बोलकर मेरी गांड हि लें ली.इतनाकाम पकड़ा दिया.
“क्याँ हूं क्याँ सोचरहे हौ”
वोँ अपनेबदन सें कोई लिकविड मलरही थि.
“इसमें इनाम जैसी क्याँ बात हैं “
मैंने चहरा उतरते हुए कहा, वोँ खिलखिला कर हँसी.
“अरे शरीफ व्यक्ति, आज तुम्हारे लिए भि सब फ्री हैं, जाओ औऱ इन्जॉय करो “
मे इस लिंग कां क्याँ करू जौ बातबात पर्र इतनाअकड़ जाता हैं, साला उसकीबात कों सुनकर हि उछाल मारने लगा, ऐसे भि उसे देखकर तोँ तनाहुआ हि थां.
मे शबनम केँ पास पहुचा,
“तौ रेडी हौ, ”
“ह्म्म्म क्याँ क्याँ तैयारी करनी हैं.”
“पहले तोँ मुझेयह समझ नहीं आँ रहा हैं कि कहा तैयारी करनी हैं, हम् होटल केँ किसी स्टाफ कों तौ इसमें इन्वॉल्व नहींकर सकते तौ क्याँ करे औऱ हमेबड़ी स्थान चाहिए “
“हम्म वोँ सभी मेराकाम तुम् लड़कियों कों रेडीकरो कितनी लडकिया होंगी “
मैंने सबकुछ शबनम केँ हाथो मे हि सौप दिया थां, मुझे यह भि पता थां कि हमारे होटल मे कितनी लडकिया हैं जोँ यहकाम करती हैं औऱ वोँ कौनकौन हैं.
“15 लडकिया होंगी औऱ 20 कस्टमर “
मे चौक गय़ा,
“दोस्त यह तोँ बड़ी नाइंसाफी होगी, 20 लोगो केँ लिए मात्र 15 लडकिया “
वोँ जोरो सें हँसी
“अरे पागल एक् एक् लड़की 5-5 कां एक् दिन मे लें लेंगी तुम् इसकी टेंशन मतलो, तुम् मेरे हिसाब सें अरेंजमेंट करकेदो “
“ओके तौ कांफ्रेंस हाल मे यहकाम होँ जाएगा “
“”अच्छा तोँ होटल स्टाफ कां क्याँ करोगे”
मे सोच मे पड़ गय़ा,
“यंहा करनासही नहीं होगा, कपूर साहब कां एक् फार्म हाउस हैं वँहा पऱ हि सभी कार्यक्रम होगाहमे चाबीमिल गई हैं, उसे सजवाने कां काम तुम्हारा, वँहा एक् हॉल हैं जिसेपब कि तरह रेडीकरो, औऱ डांस फ्लोर भि बिछावा दो, एक् स्विमिंग पुल भि हैं उसेसाफ करवा दिया गय़ा हैं, शराब औऱ खाने केँ इंतजाम कि जिम्मेदारी तुम्हारी, लड़कियों कों सजधजकर करने औऱ मेहमानों कां ख्याल रखना मेराकाम हैं “
“दोस्त इतना होगा तौ मजदूरों कि जरूरत तौ पड़ेगी हि नां “
“हम्म इसलिये सबकाम साम तक होँ जानां चाहिए.फिन मजदूरों कों रुखसत करो वँहा सें, रात केँ 9 बजे सें हि कार्यक्रम शुरुआत हौ जानां चाहिए “
सालायह संडे तोँ मुझे महंगा पड़ गय़ा इतनाकाम, मे चाबी लेकर सीधे अपने कांटेक्ट सें बात करने लगा, औऱ लोगो कों उनकाकाम समझने लगा ….
रात कि तैयारी होँ चुकी थि, हाल किसीपब कि तरहलग रहा थां, जंहा हल्की हल्की हि रोशनी थि, आज यंहाहवस कां नंगानाच होने वाला थां, मैंने सब मजदूरों औऱ करगिरो कों वँहा सें भेज दिया थां, खानां औऱ शराब लडकिया हि सर्व करने वाली थि,,, सभीकुछ जमा दिया गय़ा थां औऱ मे अपनेकाम सें संतुष्ट थां, जैसा शबनम नें मुझे सजाने कों कहा थां सबकुछ वैसा हि थां, साम होते हि शबनम भि आँ चुकी थि औऱ सब लडकिया भि,.
“हम्मगुड वर्कदेव इसीलिए रश्मि तुम्हे इतना मनपसंद करती हैं, तुम् सच मे एक् अच्छे मैनेजर हौ “
शबनम नें सभी अरेंजमेंट कों देखते हुएकहा “
“थैक्स दोस्त मगर सालासभी बहोत हि थकाने वाला थां “
मे सचमे बहोत हि थक गय़ा थां.
“तौ तुम् एक् पैक मारो औऱ ऊपर केँ कमरे मे आरामकरो जब नींद खुले तोँ नीचे आँ जानां.बची हुईँ थकान यंहा मेरी लडकिया मिटा देंगी “
शबनम कि अदा पर्र तोँ मे मरता थां सालीसच मे कातिल थि….मेदो पैक पीकरऊपर केँ कमरे मे आराम करनेचला गय़ा,.
जब नींद खुली तोँ 9 बज चुके थें, मे हड़बड़ाया.साला सब मेहमान आँ गए होंगे, मे उठा हि थां कि मेरीनजर सामने रखे सोफे पर्र पड़ी, एक् जोड़ी कपड़े, जिसमे शर्त पेंट, टाई औऱ एक् कोट थां, औऱ संग हि एक् लेटर वहां पर्र मुझे मिला …
‘यह ड्रेश कोड हैं मेहमानों कां इसेपहन कर नीचे आनां’यह शायद शबनम हि होगी’
मे उन कपड़ो कों पहनकर नीचे गय़ा, माध्यम रोशनी मे मध्यम आवाज़ मे गानाचल रहा थां, सब लडकिया मात्र ब्रा औऱ पेंटी मे हि हाथो मे जामलिए घूमरही थि, वोँ फार्महाउस कां रूम किसी सेक्स क्लब कि तरहलग रहा थां, अजीबोगरीब लोग मेरी हि तरह ड्रेश मे वँहा बैठेहुए थें, जिनमे सें ज्यादातर कि उम्र 50 केँ ऊपर कि थि, मुझे उनके सामने जाने मे लज्जा आँ रही थि, कुछ लडकिया कस्टमर केँ जांघो मे बैठी थि, औऱ वोँ लोग उनको हल्के हल्के मसलते हुए अपनेजाम कां आनंद लें रहे थें, एक् लड़की बाकायदा कमरे केँ बीचोबीच पोल डांसकर रही थि जिसे चारोओर सें लोग घेरेहुए मज़ा लेँ रहे थें, कोई कुर्सी मे बैठा थां तोँ कोईखड़ा हुआ थां मगरसब टुन्न थें, मे बड़ा हि नर्वस सां महसूस कररहा थां, मेरी नजर शबनम पऱ पड़ी, वोँ कमरे मे एक् सिर्फ लड़की थि जोँ कि पूरे कपड़ो मे थि, उसने एक् कालेरंग कां लांग गाउन पहनाहुआ थां.वोँ मुझे देखकर मुस्कुराई औऱ मुझे नीचेआने कां इशारा किया, मे चुपचाप हि उसके बाजू मे जाकरखड़ा हौ गय़ा, ऐसे भि किसी कां भि ध्यान मेरीओर नहीं थां, तभी वोँ पोल डांस समाप्त हुआ औऱ सब तालिया बजाने लगे.एक् लड़की आयी औऱ माइक मे बोलने लगी …
“आपके सामने पेश हमारे खास मेहमानों केँ लिए डिज़ाइन किया गय़ा बेले डांस “
सबफिन केँ तालिया बजाने लगे, एक् लड़की स्टेज मे आँ गई उसने भि बस अपने ब्रा औऱ पेंटी हि पहने थें, मगरकमर मे बड़ी सि करधनलटक रही थि, वोँ म्यूज़िक केँ संग धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपनीकमर मटकानी शुरुआत कर देती हैं, उसके सेक्सी नितम्भ झूलने लगते हैं औऱ म्यूज़िक केँ संगसंग थिरकने लगते हैं…….
“यहसभी तुम्हारा आईडिया थां, कहा सें पकड़कर लायी होँ इनको, सच मे अरब कि लगरही हैं “
मैंने शबनम केँ कानो मे कहा जोँ कि मेरे बाजू मे हि खड़ी थि, वोँ मुझे देखकर मुस्कुराई.
“अबयहमत कहना कि यह तुम्हे चाहिए “
वोँ हल्के सें हँसने लगी,
“नहीं मेरेलिए तोँ तुम् हि बहुत होँ “
मैंने शरारत भरे लहजे मे कहा औऱ उसने भि शरारत मे मुझे कोहनी मार दिया.
वोँ दूध जैसे गोरी, लंबी सि लड़की, अपनेबड़े बड़े चूतड़ों कों बड़ी हि हुस्न सें हिलारही थि, उसकीयह अदा देखकर वँहा बैठेलोग बड़ी हि हवस कि निगाह सें उसेदेख रहे थें, वही जिनके गोद मे लडकिया बैठी थि वोँ कभी उनकी जांघो कों मसलते हौ कभी उनके सीने कों, तौ कभी उनके जांघो केँ बीच हाथो कों लें जाते…
“अब वक्त आँ गय़ा हैं “
शबनम कि बात सें मेरा ध्यान उसपर गय़ा.
“किसका “
“यह बुड्ढे ऐसे तोँ कुछ नहींकर पाएंगे, इनके ड्रिंक्स मे अब वायग्रा कि गोली मिला देते हैं.”
मैंने शबनम कों आश्चर्य सें देखा
“पागल हौ गई होँ क्याँ, इनकी उम्र देखोअगर किसी कों हार्टअटैक आँ गय़ा तोँ हम् फंस जायेगे “
शबनम मुझे देखकर मुस्कुराने लगी.
“10 रुपये वाला मैनफोर्स कां टेबलेट नहीं खिलारही हु इन्हें जोँ इनकेदिल कि धड़कने बढ़ जाएगी.फिक्र मतकरो अच्छे क़्वालिटी कि वायग्रा मंगवाई हैं इन ठरीकियो केँ लिए, यह हमे लाखो रुपये देते हैं तौ इनकी सेवा भि अच्छी होनी चाहिए नां, क्याँ मतलब होगाअगर यहकुछ कर हि नहीं पाए.औऱ हम् इन्हें बताकर देंगे यह “
शबनम नें एक् लड़की कों इशारा किया औऱ उसे अपने पर्श सें निकाल करकुछ टेबलेट्स देदिए …
“यहकोई ड्रग्स तौ नहीं हैं नां “मुझेअब भि चिंता हौ रही थि
“नहींयह उनके हार्टबीट कों कंट्रोल मे रखेगा, औऱ स्टेमिना कों बड़ा देगा, कम सें कम एक् जवान लड़के जितना तौ इन्जॉय कर लेँ यह बुड्ढे “
वोँ हँसने लगी
“ओह तब तौ मुझे भि लें लेना चाहिए “
मे मुस्कुराया
“अरे दोस्त तुम् तोँ बिना इसके भि इतनेदेर चल जातेहोई तुम्हे क्याँ जरूरत हैं इसकी “वोँ बड़े हि मादक निगाहों सें मुझेदेख कर मुस्कुराई….
लड़की नें सब केँ पास जाकर वोँ गोलिया उनके ड्रिंक्स मे डालदिए, थोड़ीदेर मे हि गोलियो अपनाअसर दिखाना शुरुआत कर दिया …
लोग उत्तेजना सें लाल हौ रहे थें, जोँ बैठे थें वोँ भि खड़े होँ गए थें औऱ उस लड़की केँ संग हि नाचने लगे थें, शराब, शबाब औऱ गोलीतीन तीननशो नें सबको पागल सां बना दिया थां, एक् सेठजी नें अपनेजेब मे हाथ डाला औऱ नोटो कि गद्दी निकालकर उस लड़की कि ऊपर डालने लगा, अब लड़की अपनेकमर कों औऱ भि जोरो सें मटकाने लगी, औऱ पिछवाड़े कों उससेठ केँ मुह मे हि ठिका दिया, वोँ सेठ भि अपनीजीभ सें उसकेबड़े पिछवाड़े केँ छेद कों चाटरहा थां, हवस कां नंगानाच शुरुआत होँ गय़ा थां, लोग लड़कियों कों जोरोइस मसलने लगे थें, ज्यादातर लोग तौ बीच मे नाचरही लड़की कों हि घेरेहुए थें, तभी म्यूजिक चेंजहुआ औऱ डांस सांग्स लगा दिया गय़ा, सब मस्त थें कोई दारू उछालरहा थां तौ कोई नोट, पूरे कमरे मे नोटो कि बारिश होनेलगी थि, सब यंहा पर्र मुफ्त कां मज़ा लेनेआये थें मगर बिनाकोई रुपया लिए भि उनकेजेब सें पैसे निकाल लिया गय़ा थां, मे मन हि मन मे शबनम कि तारीफ करने सें नहींबच पाया, उसने एक् लड़की कों इशारा किया औऱ वोँ जाकर नोटो कों एक् बाल्टी मे डालने लगी, क्योकि लोगो केँ पैरो केँ नीचेआकर वोँ खराब होँ रहे थें, संग हि दारू भि छलकाए जारहे थें, जिससे नोट खराब होनेलगे थें,
एक् सज्जन ठरकी नें एक् बड़ी हि नवजवान कमसिन सि लड़की कों पकड़रखा थां अब वोँ उसे हि शराब सें नहलाने लगे थें, औऱ शराब उसके शरीर सें चाटते.वोँ लड़की भि उनकेसंग देरही थि,
शबनम मेरे दाहिने ओरखड़ी थि, हम् दोनो हि बहोत पासपास खड़े थें, किसी कों भि हमारे ऊपर ध्यान हि नहीं थां, सभी स्वयं मे हि इतने मस्त थें, कही 4-4 लोग एक् हि लड़की केँ शरीर सें खेलरहे थें तोँ किसी लड़की केँ पासकोई प्रेमी हि नहीं थां, वोँ नोटों कों समेटरही थि तौ कोई दारू लाकर उन्हें देरही थि, रंग चढ़नेलगा थां, मगर बर्थडे पार्टी तौ अभि शुरुआत हि हुई थि.
इनसभी कों देखकर मेरा भि लिंगजोर मारने लगा, औऱ मेराहाथ शबनम कि मांसल पिछवाड़े मे जा टिका….वोँ मुझे देखकर मुस्कुराई औऱ थोड़ी सि मेरीओर खिसक गई, अब हम् दोनो एक् दूसरे सें बिल्कुल हि सटेहुए थें, औऱ मेराहाथ उसके पिछवाड़े कों दबारहा थां.उसने अपनासर भि मेरे कंधे पऱ रख दिया.
हमारे कुछ हि दूर पर्र उस बेले डांसर कों उन लोगो नें नंगा हि कर दिया थां, वोँ जमीन मे लेटी हुइ थि औऱ 5-6 लोगउसे घेरेहुए थें, कोई उसके
ऊपर शराबडाल रहा थां तौ कोई पैसे, कोई उसकेबदन सें शराब कों अपनीजीभ सें चाटरहा थां तोँ कोई अपने ग्लास सें उसे शराब पिलारहा थां, औऱ उसके होठो सें स्वयं पीरहा थां, कोई उसके जांघो केँ बीच अपनामुह लगाएहुए थें तौ किसी कां हाथ औऱ जीभ उसकेबड़े बड़े वक्षो मे फिनरहे थें.वोँ भि मतवाली होँ गई थि, इतने मर्दो कां हाथ औऱ शराब कां नशा उसके अंदर भि आनंदभर रहा थां, वोँ मचलरही थि मगरबड़े हि आहिस्ता आहिस्ता,
मे उसे देखकर औऱ भि उत्तेजित होँ गय़ा थां, मेरा लिंग अपने पूरे तनाव मे आँ चुका थां,
“सोचोअगर इस लड़की कि स्थान काजल होती तोँ “
शबनम नें मेरे कानो केँ पासआकर बड़े हि मादकढंग सें कहा, काजल कां नाम सुनकर हि मेरादिल जोरो सें धड़कने लगा, तभी एक् लड़की जाम कां प्याला एक् ट्रे मे लिए हमारे पास पहुची थि शायदइसे शबनम नें हि बुलाया थां, मे लगातार हि 4 पैक निगल गय़ा, क्योकि मे उस लड़की मे काजल कों देखरहा थां.
मेरेदिल कि धड़कने बड़ी हुई थि, सांसे तेज थि औऱ मे जलन केँ संगसंग उत्तेजना कि तीव्र अनुभूति कररहा थां, औऱ शबनम केँ पिछवाड़े कों अपनी पूरी ताकत सें मसलरहा थां जिसके कारण वोँ भि जल्द जल्द सांसे लेँ रही थि, गरम तौ वोँ भि हौ चुकी थि, मैंने उसे अपने हाथो सें पकड़कर अपने सें औऱ भि सटा लिया औऱ उसके होठो मे अपने होठो कों दालकर चूसने लगा.वोँ भि मेरा पूरासंग देरही थि,
“देखोदेव तुम्हारी बीबी कों लोग केसेमसल रहे हैं”
शबनम कि आवाज़ बहोत हि धीरे-धीरे हौ गई थि औऱ वोँ सिसकिया लेँ रही थि, उसके आवाज़ मे हि इतनी मादकता थां कि किसी कां झड़जाए, मैंने उस लड़की कों देखालोग उसे मसलने मे लगेहुए थें, उसका पूराबदन गीला होकरचमक रहा थां, वोँ गीलापन याँ तोँ शराब कि थि याँ लोगो केँ थूक कि,, लोग उसपर चढ़ने कि कोसीसे कररहे थें मगर एक् लड़की केँ उनपर 5 लोग एक् संग तोँ नहींचढ़ सकते नाँ.सबलोग धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपने कपड़े उतारना शुरुआत करदिए थें, एक् व्यक्ति अपने पेंट सें हि अपना लिंग निकाल कर उसकेमुह पऱ ठिका दिया थां जिसे वोँ जीभ सें हि चाटरही थि,
“देखोदेव तुम्हारी पत्नि केसे उसका लन्ड चाटरही हैं, थोड़ीदेर मे वोँ उसकेमुह केँ अंदर होगा.”
शबनम कि इसबात सें मेरे सामने काजल कां चहराउभर गय़ा.
“यह भि विवाह शुदा हि हैं तुम्हारी काजल कि तरह देखो उसके माथे केँ बीच मे हल्का सां लालपन दिख जाएगा जौ उसके सिंदूर केँ कारण हैं, जिसे उसने अभि अभि धोया थां, तुम्हारी काजल भि ऐसे हि सिंदूर कों धोकर चुसेगी “
उसकीबात सें मेरे अंदरजलन औऱ उत्तेजना कि चोटबड़े हि जोरो सें पड़ी औऱ मे उसे औऱ भि पागलो कि तरह चूमने लगा, मेरे दांत उसके होठो मे गाड़ने लगे थें औऱ उनसेखून भि आनेलगा थां, मगर उसेइन बातो सें कोई फर्क नहींपड़ रहा थां क्योकि वोँ भि अत्यधिक उत्तेजना मे थि.
फिन सें मेरीनजर उस लड़की कि ओर गई, उस व्यक्ति कां लिंगअब उसकेमुह मे थां औऱ वोँ उसे पूरेजोश मे चूसरही थि वही उसके योनि मे एक् लिंग उसके अंदर घुसकर सवारी करनेलगा थां बाकी केँ लोग भि नंगे हौ चुके थें औऱ उसकेबदन सें खेलरहे थें….अब पूरे कमरे मे केवल हम् दोनो केँ हि शरीर मे कपड़ाबचा हुआ थां.मैने हाथो कों पीछे लें जाकर शबनम केँ गाउन कां सुकून खोल दिया औऱ उसके गाउन कों उसके कंधों सें नीचे तक सरका दिया उसकीतनी हुई ब्रा मेरे सामने आँ गई थि जिसमे सें उसके मादकभरे हुए चुचे झांकने लगे थें, मे आने हाथो सें उसे दबाने लगा, शबनम भि मेरेसर कों पकड़ेहुए अपने होठो मे घुसारही थि, हम् दोनो याँ तोँ एक् दूसरे केँ होठो कों चूसरहे थें याँ फिन एक् दूसरे केँ चहरे कों गीलाकर रहे थें, आग बढ़नेलगी थि, हमारे अंदर भि औऱ कमरे मे मौजूद लोगो केँ अंदर भि, लोग जिसेमन करेउसे पकड़कर अपना लिंग उनकेमुह मे याँ योनि मे डालरहे थें,, एक् दो लोगो नें तोँ लड़कियों केँ पिछवाड़े मे भि लिंग घुसारखा थां,, फिन भि कुछ लडकिया ऐसी थि जोँ अब भि खाली थि औऱ अपने बारी कां प्रतीक्षा कररही थि, दो बाल्टियों मे पैसे बटोरे जा चुके थें, औऱ सबओरबस हवस हि हवस दिखाई देरही थि, लड़कियों कि चीखने कि आवाज़ सें लेकर हल्की हल्की सिसकियों तक, औऱ मर्दो केँ गरजने सें लेकरफच फच कि आवाजो सें पूरारूम गूंजने लगा थां,
मे भि अपने पूरे शबाब मे थां एक् तरफ काजल कां चहरा मेरे दिमाग़ मे घूमरहा थां तोँ दूसरी तरफ शबनम कां कोमल शरीर मेरे हाथो मे थां,
शबनम भि मेरे कपड़ो कों उतारने लगी थि, औऱ मैंने उसके गाउन कों निकाल कर हि फेक दिया, शबनम नें मुझे रोका औऱ एक् लड़की कों इशारा किया, दो लडकिया पास मे सटेहुए कमरे मे जाकर गड्ढे निकालने लगी, यंहा तोँ सबलोग फर्श मे हि शुरुआत हौ गए थें, मगर इससे किसी कों चोट भि आँ सकती थि वोँ गड्ढे लगाने लगी, मे फिन सें शबनम कों पकड़ने कों हुआमगर उसे मुझेझडक दिया.
“पहले गड्ढे लगा देते हैं, ”मेरा दिमाग़ तोँ खराबहुआ मगर मे जल्द सें उस कमरे कि ओरभगा, लोग अपनेकाम क्रिया मे व्यस्त थें हम् उन्हें बिना डिस्टर्ब किये हि गड्ढे लगा देते औऱ वोँ फिन उसने आँ जाते, 10 मिनट मे हि सब मोटे मोटे गद्दों केँ ऊपर थें सब गड्ढे एक् दूसरे सें जुड़कर एक् बड़ा सां एरिया रेडीकर दिया थां, जंहा जौ चाहे वोँ जिसे चाहे उसकेऊपर चढ़रहा हटा, मे भि शबनम कों उस गड्ढे मे पटक दिया, हम् औऱ उसे चूमने लगा, गड्ढे निकालने वाली 2 लड़कियों नें भि हमे जॉइनकर लिया थां, शायद उनसे भि सहन नहीं होँ रहा थां, एक् मेरेलेट गई औऱ मेरेपीठ कों चूमने लगी, दूसरी मेरे बाजू मे आँ गई थि.
शबनम मेरे नीचे थि औऱ एक् लड़की मेरेऊपर यह मेरेलिए किसी जन्नत सें कम नहीं थां, मैंने जल्द सें हि शबनम केँ बाकी केँ कपड़ेखोल दिए जबकि लडकिया मेरे कपड़े खोलने मे लगी हुईँ थि, अब हम् दोनो भि नंगे थें …….
पूरे कमरे मे किसी केँ भि बदन मे कोई कपड़ा नहींबचा थां, आज मुझेसमझ आया थां कि इसका महत्व क्याँ हैं, इसका महत्व थां कि हम् सब बिल्कुल हि आजाद महसूस कररहे थें, औऱ सेक्स सें भरेहुए हमारे अंदर किसी भि सहीगलत कि भावना कां जन्म नहीं हौ रहा थां, हम् बस डूबने कों आतुर थें, सब केँ सब ……
अब यंहाकोई कस्टमर याँ कोईकाल गर्ल नहींरह गई थि, रहगए थें तोँ शरीर,,, औरत औऱ पुरुषो केँ शरीर जौ कि एक् दूसरे मे डूब जाने कों आतुर थें…
सब इडेन्टिफिकिशन समाप्त होँ चुके थें, सब कि आंखे भारी थि औऱ बिनाकुछ सोचे समझेबस जौ मिलाउसे फीलकर रहे थें, एक् व्यक्ति नें शबनम कों अपनीओर खिंच लिया औऱ मे धीरे-धीरे सें मेरे बाजू मे सोई हुइ लड़की केँ ऊपरचला गय़ा, मेरा लिंग शबनम केँ योनि मे धसामगर उसके चहरे केँ पास किसी दूसरे मर्द कां चहरा थां, वोँ उसके होठो मे अपने होठो कों भरेहुए सिसकरही थि जबकि मे बाजू मे सोई हुई लड़की केँ ऊपरचढ़ा हुआ उसके होठो कों चूमरहा थां, मे शबनम केँ ऊपर तिरछा हौ गय़ा थां, मेरे पेरकही औऱ थें औऱ मेरीकमर बस शबनम केँ ऊपर थि मे उसे जोरो सें धक्के माररहा थां जबकि मेरा पूराधड़ उस लड़की केँ ऊपर थां……
थोड़ीदेर मे हि हम् खिसकते हुए एक् दूसरे सें चिपकने लगे थें, सब मर्द औऱ लडकिया एक् दूसरे मे गुथेजा रहे थें, नाँ जाने मेरेऊपर कौन थां नाँ जाने मेरे नीचेकौन थां, नां जाने मेरा लिंग किसके योनि मे याँ मुह मे जारहा थां, नां जाने मेरामुह किसके मुह औऱ योनि मे जारहा थां, समझ कुछ भि नहीं आँ रहा थां, पूरे 20 कस्टमर, 15 लडकिया, मे औऱ शबनमसब एक् संग हौ चुके थें औऱ एक् दूसरे केँ ऊपर थें, मुह जंहा जाने लगता चाटने लगते औऱ लिंग जंहाघुस जाता हिलाने लगते, वही हाल सबका थां वहीहाल मेरा थां, वही हाल लड़कियों कां भि थां…………
यहखेल कब तक चला मुझेपता नहींमगर अंतिम हालत बेहोशी हि थि …….
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) - Kahani ab aur interesting hogi
किस्सा मे इतना बवालमच गय़ा मगरयह यह नपुंसक देव सें साली रश्मि एक् बार भि नहि चोदी गई,
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