रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 16
खालीबैड मे मेरी स्वप्न सुंदरी कि आशा मे मे करवटे बदलरहा थां, काजल अभि भि नहींआई थि, मुझे लगा कि फिन सें आज मेरेसंग धोखा तौ नहीं होँ जाएगा,
मे अपने लिंग कों भि तसल्ली देरहा थां,
“तूँ सोयारह भइया, जब जीवन केँ हि लवडे लगें हौ तौ अपना लवडा शांत हि रखना चाहिए”
मैंने अपने बाबूराव सें कहा.(जैसे शेक्सपियर कि किस्सा केँ लाइन कों लोग quote केँ रूप मे यूज करते हैं, आप् भि मेरीइस लाइन कों qoutation केँ रूप मे यूज़कर सकते हौ )
मगर मे गलत थां, मेरे कमरे कां दरवाजा खुला औऱ काजल अंदरआयी, उसनेआते हि मुझे प्रेम सें देखा, मेरा बाबूराव खड़ा होकर अकड़ने लगा, जैसे कहरहा हौ कि आजकुछ तूफानी करते हैं.
मे काजल पऱ टूट पड़ा, वोँ भि मुझे पागलो कि तरहकिस कियेजा रही थि
काजल कों पलंग पर्र पटकते हि मे अपने कपड़े खोलकर फेक दिया औऱ काजल केँ गालो कों खाने लगा, उसके गुलाबी सें गाल जोँ रस सें भरेहुए थें, मेने उसके गालो कों पूरीतरह सें भिगो दिया थां, मेरे थूक सें गिलाहुआ उसकागाल अपनी नरमी सें मुझेसुख देरहा थां औऱ मे औऱ भि टूटकर उसके गालो कों खारहा थां, अपने दांतो सें मेने उसके गालो मे निशान हि बनादिए जिसपर काजल नें मुझे एक् शिकायत भरे निगाहों सें देखा पऱ उसकी आंखों मे अब भि वही प्रेम थां जोँ मे हमेशा सें हि मेरेलिए महशुस करताहु…………….
उसके बालो कों अपने हाथो मे फसाकर मे उसे सहलाने लगा, औऱ वोँ भि बेहद कामुक अंदाज मे मेरे होठो पऱ टूट पड़ी, दो जिस्मो कि गर्मी नें हमारे शरीर मे एक् नई ऊर्जा कां संचार कर दिया थां,
मे काजल केँ कपड़ो केँ तरफरुख किया औऱ उसके कपड़ो कों धीरे-धीरे धीरे-धीरे उतारने लगा, मे उसकेभरे हुए नितंबो कों अपने हाथो सें भरकरउसे मसलने लगा, काजल औऱ भि गहरे सें मुझे चूमने लगी, मे उसका शर्ट खोलकर फेक चुका थां, शायद अब काजल कों सहन नहीं होँ रहा थां औऱ वोँ जल्द सें हि अपने कपड़े खोलने लगी, मगर मैंने उसको उसकी पेंटी खोलने सें मनाकर दिया वोँ मुझेफिन सें शिकायत केँ भाव सें देखने लगी, मे अपने पूरे कपड़े खोलकर नंगा होँ कर उसके सामने खड़ा हौ गय़ा, मेरे लिंग कों देखकर वोँ हल्के सें हँसी औऱ उसे पकड़कर उसे इतने प्रेम सें चूसने लगी जैसे कि वही वोँ चीज थि जिसके लिए वोँ इतनी प्यासी थि,.
मे उत्तेजना केँ शिखर पऱ पहुचरहा थां औऱ मे झरने कों बिल्कुल भि रेडी नहीं थां, मुझे तोँ अभि जितनी देर हौ सके अपनीजान केँ संग खेलना थां, मे काजल केँ मुह सें अपना लिंग निकलकर अलग किया, वोँ जल्द सें अपनी पेंटी निकालने कों हुई पऱ मैंने उसेफिन सें रोक दिया वोँ मुझे प्रश्नवाचक दृष्टि सें देखने लगी, औऱ मेरे होठो मे एक् शरारती सि मुस्कान उभरआयी.,.
“नहीं नां जानकरो नाँ “
उसने करीब-करीब रोतेहुए कहा, वोँ आमतौर पर्र इतनी बेताब नहीं होती पऱ आज तौ कई दिनों केँ बाद हम् प्रेम केँ गोते मे डूबने वाले थें.वोँ मछली जैसे तड़फने लगी औऱ मुझे उसकी तड़फन बहोत हि मजेदार औऱ मनमोहक लगरही थि, मे उसकेपास जाकरउसे लिटा दिया औऱ स्वयं उसके पेंटी केँ पास अपनीनाक लें जाकर जोरो सें सूंघ लिया, उसके कामरस सें भीगा वोँ अंतःवस्त्र इतने मादक खुसबू सें भरा थां कि मे फिन सें उसे जोरो सें सूंघने सें अपने कों नहींरोक पाया, मगर मेरीइस हरकत सें काजल कि हालात औऱ भि खराब होँ गयीँ, उसे होने वाले कां अंदेशा हौ चुका थां औऱ उसका जिस्म छटपटाने लगा थां वोँ अपनीकमर ऊपरकर मुझे आमंत्रण देरही थि औऱ जब मे अपनानाक उसके योनि केँ भाग सें लगाया वोँ अपनेकमर कों ऊपरकर मेरेनाक सें अपनी योनि कों रगड़ने लगी, काजल कि योनि सें बहतेहुए गीले गीले सें प्रेम कि धार नें मेरेनाक कों भि भिगो दिया औऱ मेरेमुख सें एक् मुस्कान सि निकल गई, ….
वोँ बस झरने हि वाली थि औऱ मे उसेयू बेताबी मे झरने नहीं देना चाहता थां उसे भि वोँ आनंद मिले जिसके लिए वोँ इतनी तड़फरही थि, मै उसकी पेंटी कों उसकी योनि केँ ऊपर सें हटाकर अपनीजीभ सें उसे चाटने लगा, काजल कां हाथ मेरेसर पऱ थां औऱ वोँ पूरे ताकत सें उसे अपने अंदर लेने कि चेष्टा कररही थि पर्र शायदउसे वोँ मजा नहींमिल पारहा थां जिसके लिए वोँ तडफरही थि औऱ आखिर मे वोँ हारकर मुझे अपनेऊपर खिंच हि लिया, आज मे काजल कि ताकत देखकर दंग हि रह गय़ा वोँ मुझे बिल्कुल हि धीरे-धीरे उलटाकर केँ मेरेऊपर चढ़ गई,, अपनेहाथ मेरे लिंग पऱ रखउसे अपनेआग कि उस भट्ठी मे डाल दि जोँ पानी सें भरी थि,.
काजल अंदर सें इतनीगरम होगी मुझेपता नहीं थां आज तोँ उसकी योनि मानोकोई भठ्ठी हि हौ, मेरे लिंग केँ अंदर जाते हि काजल कों ऐसेसुख कां अहसास हुआ जैसे सालो सें प्यासे कों कोई अमृत हि पिलादे,
“aaaahhhhhh जाआआआआन लवयु बेबीईईईईई “
वोँ अपनी रफ्तार तेज करनेलगी उसकी सिसकियों सें हि मे झट जाता इतनी मादकता अपने अंदरलिए हैं मेरी रानी काजल ……
“अहहअहह अहहअहह अहहअहह, ओओओअहह जआआआननन अहह जाआआआआआआनननन “
वोँ किसी पम्प कि तरह मेरेऊपर कूदरही थि औऱ मेरेहोश हि उड़ारही थि मुझेपता थां कि काजल इतनीगरम हौ चुकी थि कि वोँ अधिक वक्त तक नहीं टिकने वाली, मेरीअकड़ कों आज काजल शायदतोड़ हि देती वोँ बिल्कुल भि आराम केँ मूड मे नहीं थि, वोँ लगातार हि कूदरही थि,
“लवयू बेबी, लव यू, फ़कमि जानअहह अहहअहह, ”
“लवयू मेरी रानी “
हमारी सांसे कब उखाड़ जाती इसकाकोई भि भरोषा हि नहीं थां, पर्र आनद केँ उस सागर सें मे कभी भि बाहर् नहीं निकलना चाहता थां, मगर शायद काजल कों जल्द सें हि झरना थां वोँ अपनी बेताबी केँ इंतहा पऱ थि औऱ वोँ उस ज्वाला कों निकाल देना चाहती थि जोँ उसके अंदरभरी हुइ थि, काजल नें अपने स्तनों कों मेरेमुह मे ठूस दिया औऱ मे भि किसी आज्ञाकारी बच्चे कि तरह उसके स्तनों कां पान करने लगा.मे औऱ भि उत्तेजित हौ गय़ा औऱ उसे नीचे सें हि औऱ जोरो केँ धक्के देनेलगा पऱ शायद वोँ जोर नहींबन पारहा थां, काजल भि अब कूदना बन्दकर जोरो सें धक्के मारेजा रही थि मेरे अंडों मे एक् दर्दभर गय़ा पर्र उसी दर्द कां तोँ मज़ा थां,,.
हम् दोनो हि अपनेतरफ सें पूरी ताकत सें धक्के देरहे थें…
“अहह वोँ अहहअहह अहहअहह जानजान अहह “
दोनो केँ धक्के एक् संग मिलकर औऱ भि तेज औऱ प्रभावशाली हौ जाते औऱ दोनो केँ मुह सें हि एक् आहफुट पड़ती थि.उसके योनि सें रगड़ते हुए मेरे लिंग कि चमड़ी सें उठाने वाला वोँ आनद मे कभी भि खोना नहीं चाहता थां पर्र वोँ एक् धारा सि मेरे वृषनकोशों सें आती हुईँ मुझे प्रतीत हुई औऱ काजल भि अपनेचरम केँ नजदीक हि थि हम् दोनो हि आखिरी धक्कों पऱ अपनी पूरी कि पूरी ताकत खर्चकर रहे थें, औऱ वोँ ज्वाला फूटा औऱ काजल मेरेऊपर झरने सि धार छोड़ती हुइ लेट गयीँ,, मेरा भि हाल उससे अन्यथा नहीं थां औऱ मे भि उसके अंदर हि एक् तेज फुहारे कों छोड़ता हुआ हाँफने लगा,.
दोनो हि हाफरहे थें औऱ दोनो हि उसमजा मे डूबे थें जौ हमे अभि अभि मिला थां.वोँ गीलापन हमारे यौन अंगों सें बाहर् आँ रहा थां, चिपचिपे वीर्य मे मिला काजल कां कामरस मुझे ख़्वाहिश तौ हुइ कि उसेपी लू पऱ उठाने कि हिम्मत हि नहीं जुटा पाया औऱ मुझे पूरा यकीन थां कि यहीहाल काजल कां भि हौ रहा होगाउसे भि मेरा वीर्यपान करना बहोत हि पसन्द थां, खासकर जब गहरे संतोष कि दशाहमे घेरेहुए हौ …………………
उखड़ती सांसो मे मेरा प्रेम काजल केँ अंदरजा रहा थां औऱ वोँ भि मेरे वीर्य कों अपनी योनि सिकुडकर अपने अंदर हि रखने कां प्रयाश कररही थि, मे उसे औऱ भिगोना चाहता थां पर्र मेरे अभि कां कोटा पूरा हौ चुका थां …………।
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 17
काजल केँ नंगे शरीर कि गर्मी नें सुभह सुभह हि उत्तेजित कर दिया थां, रात कों उठाहुआ तूफान फिन सें उठखड़ा हौ गय़ा, खाट सें उठने केँ बाद एक् राउंड बाथरूम मे नहाते हुए भि निपटा लिया गय़ा थां…
सच मे यह प्रेम कई दिनों कों बाद हि उमड़कर आँ रहा थां, असल मे जब किसीचीज कों खोने कां डर ज़्यादा होँ तोँ प्रेम भि ज़्यादा होँ जाता हैं.यंही हमारे संग भि होँ रहा थां.
अक्सर पति पत्नि केँ रिस्तो मे कुछ सालोबाद हि एक् सुस्ती सि आँ जाती हैं, कारण साफ हैं कि जब आपकोपता हैं कि यहकही नहीं जाने वाली तौ आप् उसे महत्व देना हि बन्दकर देते हैं.यह चीज गर्लफ्रैंड बॉयफ्रेंड केँ रिलेशन मे भि दिखता हैं.मगर अगरकुछ ऐसा होँ जाए कि वोँ आपसेदूर होँ जाएतब उसकी अहमियत समझआने लगती हैं.
आज मे जल्द हि होटल पहुच गय़ा थां, पहुचते हि मुझे रूपचंद दिखाई दिया, वही जोँ कलरात शबनम केँ संग थां.
“वाउ दोस्त देवमान गए क्याँ कमाल कां माल दिया थां तुमने, पूरे 15 वसूल हौ गए, यह तोँ खान केँ काजल सें भि मस्त थि “
वोँ साला अपनी गंदी शक्ल केँ संग मुझे बेमकसद हि जलारहा थां, मे उस मोटे केँ संग काजल कों इमेजिंन भि नहीं करना चाहता थां, मन किया कि एक् झापड़ उसके गालो मे लगादु,,.मगर क्या बात है नॉकरी हँसकर हि बात करना पड़ता हैं.
“थैंक्यू सर आप् हमारे खास कस्टमर हैं, खास लोगो कों खासचीज हि दि जाती हैं, ऐसे आप् जारहे हैं.”
“हा अपनाकाम तोँ हौ गय़ा, मिलते हैं कभी औऱ कोईखास मालआये तौ रखना मेरेलिए ऐसा हि कोई तगड़ामाल.अभि अभि औऱ लेँ केँ आँ रहाहु उसकी “
वोँ हंसता हूं वँहा सें चला गय़ा, औऱ मेरे पांव अपने हि आप् उस कमरे कि ओरचले गए जंहा वोँ ठहरे थें, मेरे पासउस रूम कां पास थां, जिसे मुझे रूपचंद नें हैंडल किया थां.मे रूम खोलकर अंदर पहुचा, शबनम अभि अभि नहाकर निकली थि औऱ मुझे देखकर मुस्कुराने लगी, देखा तौ बैड केँ बाजू मे हि उसकी पेंटी पड़ी हुईँ थि जिसे उठाकर ओ डस्टबिन मे डाल देती हैं.
“अरे तुमने तोँ मुझेकहा थां कि तुम् फेंकती नहीं, धो कररखो गी.”
वोँ खिलखिला कर हँसने लगी.
“जब कोईइसे गंदा करने केँ लाखोदे रहा हौ तोँ 2-3 हजार कि पेंटी तौ लें हि सकतीहु नाँ “
“मगरउस दिन तौ.”
वोँ मेरेपास खड़ी थि औऱ उसकेबदन सें आती हुईँ गंध नें मुझे उत्तेजित कर दिया थां मैंने उसे अपने सें कस लिया.
“अरे देव बाबू, जब किसी केँ संग बिना पैसों केँ सोयाजाय तौ क्यो पेंटी कों फेकूँगी, यह तोँ उन कस्टमर केँ लिए हैं जौ हमे रुपया देते हैं, नया कस्टमर नई पेंटी “वोँ मेरे गालो मे एक् किसकर मुझसे अलग हौ गई, मेरे मन मे काजल केँ बेग सें निकली हुईँ पेंटी घूम गई.
“काजल केँ बेग सें भि मुझे एक् मिली थि “
वोँ मुझे थोड़े आश्चर्य सें देखी औऱ जोरो सें खिलखिलाकर हँसने लगी.
“तोँ वोँ भि सोई होगी किसी केँ संग बिना पैसेलिए “
वोँ अपने टॉवेल कों कि उसकेबदन सें लिपटा हुआ थां उतारकर फेक देती हैं, अब मेरे सामने पूरीतरह सें नंगीखड़ी थि, वोँ अपनेबेग सें एक् नयासेट निकालकर पहनने लगती हैं, औऱ फिन अपना ड्रेश पहनकर रेडी हौ जाती हैं.
“ऐसे क्याँ देखरहे होँ देव “
मे उसेयह सभी करतेदेख रहा थां, वोँ अभि दर्पण केँ सामने खड़ी थि औऱ अपना मेकअप लगारही थि …
“देखरहा हु कि किसे एक् परी सि खूबसूरत लड़की एक् भद्दे सें मर्द केँ संगरात बिता लेती हैं.औऱ उसकेबाद भि सुभहयू हँसती हुइ दिखती हैं”
मेरा स्वर ठण्डा थां.शबनम मुझे आश्चर्य सें देखरही थि वोँ मेरेपास आकर मेरे गालो कों सहलाने लगी.
“देबयह एक् धंधा हैं औऱ धंधे मे इमोशन कों बीच मे नहीं लाना चाहिए.अगर वोँ आया तोँ किसी केँ संग सोना तौ दूर किसी कों हाथ लगाने भि नहीं दियाजा सकता.औऱ जबहमे धंधा करना हि हैं तौ कस्टमर केँ चहरे मे क्याँ रखा हैं.हमने तोँ यही सीखा हैं कि स्वयं भि किसेमजे लिए जाय, यह देखो “
वोँ एक् दवाई अपनेबेग सें निकाल कर दिखाने लगी.
इसे कस्टमर कों खिलादो तौ भि हल्कबन जाता हैं, रात भर घोड़े केँ जैसे दौड़ता हैं, औऱ आंखेबंद करने केँ बादकौन सां किसी कां चहरा दिखाई देता हैं.हम् भि संतुस्ट औऱ कस्टमर भि खुस “
वोँ फिन सें खिलखिलाई, मगर मुझे उसकीबात पर्र आश्चर्य हुआ क्योकि मुझेआज पताचला कि शबनम जोँ कि इतनी खूबसूरत औऱ मासूमियत कि देवी लगती हैं, इस धंधे कि इतनीबड़ी खिलाड़ी हैं, वोँ सच मे किसी रंडी सि बाते करनेलगी थि.
इधर रश्मि भि इस धंधे कि पहली कमाई सें खुस थि, टाइम बीतता गय़ा औऱ हमारा होटल बहोत हि तेजी सें नाम कमाता गय़ा, होटल मे अभि कुछ 15-20 ऐसी लडकिया थि जोँ टाइमआने पर्र बदन कां धंधा करती थि, यहसबआम लड़कियों कि तरह हि थि जौ होटल मे काम करती थि, कोई देखकर नहींकह सकता कि यह क्याँ काम करती होगी, सब कां कंट्रोल शबनम केँ हाथो मे हि थां, मुझे मेरा कमीशन मिल जाया करता, जौ कि ग्राहक केँ ऊपर होता थां, मे भि इन कामो मे अब एक्सपर्ट सां बन गय़ा थां, MBA कि डिग्री कां यह तौ फायदा हुआ कि मे अच्छे सें मोलभाव कर लिया करता थां, मुझे लोगो केँ हैसियत कि पहचान थि, कम सें कम 1 लाख औऱ अधिक सें ज़्यादा 15-20 लाख तक कां सौदा होता थां, मे जितना ज़्यादा रुपया लड़कियों कों दिलाता उतना हि बड़ा कमीशन मुझे मिलने लगा थां.इतने पैसों कि तौ कल्पना भि नहीं कि थि जितने मुझे 1 महीने मे हि मिलगए थें…….
इधर काजल केँ होटल कि हालत बहोत हि खराबचल रही थि, खान साहब केँ बिजनेस मे बड़ाघटा हुआ थां, पुलिस कों उनकेकई गैरकानूनी धंधों केँ बारे मे पताचल गय़ा, जिससे अजीम औऱ खान साहब केँ ऊपर मुकदमो कि संख्या बढ़ती गई,.
मुझेपता थां कि यहसबकुछ काजल कां हि कियाधरा थां, मगर दुनिया कि औऱ अजीम औऱ खान कि नजरो मे वोँ उनकी सबसे करीबी सहलाकर बनकर उभरी, वही थि जौ अजीम केँ वकील केँ संग उसके मुकदमो मे जाया करती थि, याँ उससे मिलने जेल जाया करती थि, वहीखान पूरीतरह सें टूट गय़ा थां, एक् इकलौता बेटा जेल मे हौ औऱ धंधे मे इतनाघटा उसकेलिए सहन सें बाहर् हौ रहा थां, उसे सांत्वना देने कां काम भि काजल कां हि थां,.
वही रश्मि औऱ खान केँ बीच एक् अजीब सां कनेक्शन भि उभरने लगा थां, रश्मि मुझे लेकरखान केँ होटल गई थि,
“तुम् बाहर् बैठो मे आतीहु “
हम् खान केँ केबिन केँ बाहर् खड़े थें, बाहर् हि हमे काजलमिल गई जोँ कि खान केँ केबिन सें अभि अभि निकली थि, वोँ हमेशा कि तरह हि साड़ी मे थि, मगर उसकेबाल अभि बिखरे हुए थें, साड़ी थोड़ी अस्त व्यस्त दिखरही थि.वोँ हमेदेख कर चौकी नहीं, शायदखान नें उसेबता दिया होगा कि रश्मि आँ रही हैं, मगर मे उसकीयह हालत देखकर चौका.
“गुड मॉर्निंग मेडम “
काजल नें रश्मि कों हल्के सें मुस्कुराते हुए विस् किया.
“बीच (हिंदी मे कुतिया )”
रश्मि नें उसके अभिवंदन कां जवाब देतेहुए कहा, औऱ मुहबना कर अंदरचली गई.
काजल नें मुझे देखा जौ कि हैरत सें उसेदेख रहा थां वोँ मुझेआंख मारकर हल्के सें हंसते हुए वँहा सें चली गई, मे बाहर् हि रखे सोफे मे बैठ गय़ा.
रश्मि जिस व्यक्ति सें सबसे ज़्यादा चिढ़ती थि वोँ थि काजल …
उसे लगता थां कि काजल कि हि वजह सें उसके औऱ अजीम केँ रिश्तों केँ बीच मे दरारआयी हैं.ऐसे काजल नें मुझेयह बातबता दि थि इसलिये मुझे इससेकुछ फर्क नहींपड़ा मगरअब यहखान …….
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 18
रश्मि औऱ खान केँ बीच क्याँ बाते हौ रही थि यह तोँ मुझे नहींपता मगर इससे हमारा भविष्य औऱ हमे क्याँ करना हैं इसकी रूपरेखा जरूरतय हौ रही थि…
मे बैठेहुए बोर हौ रहा थां मे उठा औऱ काजल कों काल किया, मे टहलता हुआ एक् सीढ़ियों सें हि एक् फ्लोर ऊपरचला गय़ा, जहा मेहमानों केँ कमरेबने हुए थें, सामने एक् गैलरी थि जिसमे सें नीचे कां रिसेप्शन दिखरहा थां,
“हलो.”
काजल कि मधुरएवं मेरे कानो मे पड़ी
“क्याँ कररही थि खान केँ संग “
मैंने उसे छेड़ते हुएकहा
“क्याँ करोगे जानकर “वोँ मुझे जलाने लगी, मुझे वोँ नीचे रिसेप्शन मे दिखाई दि,
“ऊपर देखो “
उसनेसर उठाया मैंने हाथ हिलाया
“पागल होँ गए होँ क्याँ हाथ क्यो हिलारहे होँ, कोई देख लेगा तोँ “
“तोँ क्याँ “
“तौ कुछ नहीं प्रॉब्लम होँ जाएगी जानते हौ नाँ, मैंने तुम्हे क्याँ बताया थां….”
“हम्मऐसे सच मे जब भि तुम्हे किसी औऱ केँ संग देखता हुखून खोल जाता हैं”मेरी आवाज़ सें मेरेदिल कि जलनसाफ साफझलक रही थि जिसका आभास काजल कों भि होँ गय़ा,
“ओ मजनू जलनाबंद करोकुछ हि दिनों कि तौ बात हैं फिन मे मात्र औऱ केवल आपकी हि रहूंगी,,,, ”
हम् दोनो हि थोड़ेदेर कों चुप होँ गए
“अभि भि तौ केवल आपकी हि हु, मगर इसबदन कों किसी औऱ कों भि सौपना पड़ता हैं”
मेरेलिए उसकीयह बातसहन सें बाहर् हौ रही थि
“बसकरो दोस्त छोड़ोइन बातो कों “
“शुरुआत किसने किया थां “
अचानक मुझेकुछ हलचल कां आभासहुआ, मैंने पलटकर रूम कि तरफ देखने लगा, एक् कमरे कां दरवाजा खुला औऱ एक् लड़का बाहर् आया, मे उसे पहचानता थां, वोँ हर्ष थां, वही जिससे मे पार्किंग मे मिला थां, शायद वोँ भि मुझे देखकर पहचान गय़ा, उसके चाल सें लगा कि वोँ घबराया हुआ हैं, वोँ बड़ी जल्द जल्दआया औऱ मुझे क्रॉस करके सीधे लिफ्ट केँ पास पहुच गय़ा, लिफ्ट कों आने मे वक़्त थां वोँ सीढ़ियों सें हि उतरने लगा.मुझे उसकी हरकतबड़ी अजीबलगी क्योकि उसने मुझे एक् बार भि नहीं देखा …
“यह हर्ष कों क्याँ होँ गय़ा कमरे सें बाहर् आया औऱ इतनी जल्द मे भाग गय़ा, देखा भि नहीं मुझे जबकि हमारी नजर मिली थि औऱ मुझे पूरा यकीन हैं कि वोँ मुझे पहचान गय़ा होगा “
काजल जोँ कि किसी कों कोईकाम समझारही थि फिन सें ऊपर देखती हैं, इस बार उसकीअदा मे भि एक् डर कां आभासहुआ, दरवाजा फिन सें खुला, मेरीनजर दरवाजे पऱ थि क्योकि यहवही दरवाजा थां जंहा सें हर्ष निकला थां, एक् अधेड़ उम्र कि स्त्री कोई 55-60 साल कि उम्र कि बाहर् आयी, उसके चहरे मे एक् अजीब सें संतोष कां भाव थां, देखकर लगा जैसे अभि अभि सजधजकर हुई हौ, वोँ एक् मोटी सि आंटी टाइप कि औरत थि, वोँ भि मेरेपास सें गुजरी औऱ लिफ्ट तक आयीमगर हर्ष सें विपरीत वोँ मुझेदेख कर एक् स्माइल पासकर गई, यह एक् औपचारिक सि मुस्कान थि जौ कि हम् किसी अनजाने शख्स कों देखकर दिया करते हैं…
वोँ बड़े हि आराम मे थि.
“उसके लिफ्ट मे घुसते तक मे चुप थि थां.
“यह हौ क्याँ रहा हैं यंहा पऱ “
काजलअब भि लाइन मे थि “
“कुछ भि तौ नहीं “
“तुम् मुझसे छुपारही हौ …”मे थोड़ा क्रोध दिखाते हुए उससे बोला, तब तक वोँ स्त्री नीचे जाकर काजल केँ पास पहुच चुकी थि, उसने काजल कों गले सें लगाया थोड़ीबात कि औऱ चली गई …
“ओह तौ जोँ मे समझरहा हु क्याँ वही होँ रहा हैं यंहा पऱ “
मैंने जैसेकुछ समझ गय़ा थां
“यह आईडिया मेरा हैं, इसे अपने होटल मे ट्राय करने कि सोचना भि मत समझे….”
काजल कि बात सें मेरे चहरे मे एक् मुस्कान खिल गई,
“क्याँ करू दोस्त होटल इतने घाटे मे चलरहा हैं कि कुछ तोँ करना हि पड़ेगा नाँ, मे नहीं चाहती कि यह होटलबंद होँ जाए औऱ हमारे हाथ मात्र कुछ भि नहींआये, कुछ फायदा होँ तभी तोँ खानइसे चालू रखेगा “
मे जोरो सें हंसा
“तोँ हर्ष तेरे होटल कां जिगिलो हैं, दिखने मे तोँ मासूम सां लगता हैं”मे फिन सें हंसा
“दिखने मे मे भि मासूम हि लगतीहु, वोँ रश्मि औऱ तुम्हारी प्यारी सि शबनम भि मासूम हि लगती हैं.”
काजल नें प्यारी सि शबनम मे बड़ा जोरो डाला.
“क्योअब तुम्हे जलन हौ रही हैं “
“क्यो नाँ हौ.मगर फिन भि एक् तस्सली तोँ हैं कि वोँ तुम्हारा ख्याल रखरही हैं….”
काजल कि आवाज़ मे एक् प्रेम सां आँ गय़ा थां…
“मुझेआज रश्मि औऱ खान कि मीटिंग कों लेकरडर लगरहा हैं…”
मैंने अपनी चिंता जाहिर कि
“कोईबात नहीं मे जानती हु वोँ यंहा क्योआयी हैं, वोँ खान केँ कान मेरे खिलाफ भरना चाहती हैं, मगर फिक्र मतकरो, मर्दो कि कमजोरी कां मुझेपता हैं.औऱ मुझे नहीं लगता कि जौ मे खान कों दे सकतीहु वोँ रश्मि उसे देगी.आखिर वोँ ससुरजी हैं उसका.”
काजल कां कमीना पनफिन सें बाहर् आँ रहा थां.
“क्याँ देरही हौ तुम् खान कों “
मे थोड़ा सीरियस थां
“इन बातो सें दूर हि रहो क्यो स्वयं कों जलाना चाहते होँ …”
काजल नें ठंडे आवाज़ मे कहा.
“चलो शायद उनकी मीटिंग ख़त्म हौ गई होगी “
मे मोबाइल रखकर नीचे पहुचा, थोड़ी हि देर मे रश्मि औऱ खान दोनो हि बाहर् आँ गए थें.
“मैंने जोँ बोला हैं उसपरगौर कीजियेगा पिताजी”
रश्मि खान कों पिताजी बोलरही थि यानी अभि भि उसकेदिल मे रिश्तों कि मर्यादा बची थि, मतलब कि रश्मि नें खान कों वोँ नहीं दिया हैं जौ काजलउसे देती हैं.
“हा बेटा तुम् चिंता नां करो, मे ध्यान रखूंगा, औऱ तुम्हारी बात अजीम तक भि पहुचा दूंगा “
हम् दोनो हि वाहन सें जारहे थें जिसे रश्मि हि चलारही थि,
“क्याँ बात हुईँ तुम् लोगो मे “
मे ऐसे तोँ पूछना नहीं चाहता थां मगर थोड़ी हिम्मत करनेपूछ हि लिया, उसने मुझे देखकर बुरा सां मुह बनाया.
“वोँ साली रंडी उनकेमन मे सवार हैं.जबसभी बिक जायेगा तबसमझ आएगा उन्हें “
वोँ किस रंडी कि बातकर रहे थें वोँ तोँ मे समझ गय़ा थां…
मैंने अपना चहरा बुरा सां बना लिया, ऐसे उसकीबात पऱ मुझेदुख तौ नहींहुआ मगरयह करना जरूरी थां, क्यो???
यहबाद मे पताचल जाएगा.
“अब तुम् क्यो दुखी होँ रहे होँ “
“कुछ नहीं “मैंने ऐसेकहा जैसे काजल कों रंडी बोलने सें मुझे बहोत हि दुख पहुचा हैं.
“क्यो काजल कों रंडी बोलीं इसलिये, तुम्हारी बेहन कि सहेली हैं नाँ वोँ ….उससे अपनी बहनों कों दूर हि रखाकरो पता नहींकब उन्हें धंधे मे लें आये “
रश्मि नें बड़े हि रूखे स्वर मे कहामगर मेरेमन मे आया कि अभि इसकी अतड़िया निकाल कर निचोड़ दु …
“तुम् भि तौ खान कों बर्बाद करना चाहती थि “
मैंने रश्मि केँ जले मे नमक डालना चाहता थां जैसा कि उसने मेरे मे डाला थां.
“हाअब भि चाहती हु, मगर इसका फायदा मुझे होना चाहिए उस रांड कों नहीं “
रश्मि नें साफसाफ लफ्जो मे अपनीबात कह दि थि …
“तौ जौ वोँ खान कों देरही हौ वोँ तुम् भि देदो, आखिरऐसा क्याँ हैं उस मैनेजर मे जोँ खान साहब उनके दीवाने बनेफिन रहे हैं, जबकि उनका होटलआज इतने घाटे मे चलरहा हैं….”
मैंने अपनादाव खेल दिया, जिससे रश्मि बुरीतरह सें झल्ला गई, उसने गाड़ी कों जोरो सें ब्रेक मारा.
“आउट “
“वाट “
“आईसेस आउट, निकलो यंहा सें “
मेरीफट गई मे इसतरह केँ रिएक्शन कि तौ उम्मीद नहीं किया थां.
“बटवाय “
“जस्टआउट, मे तुमसे बहस नहीं करना चाहती औऱ मेरामूड बहोत हि खराब हैं मुझे समझने कि कोशिस मतकरो वरना.मे अपनाआपा खो दूंगी “
मे चुपचाप हि बाहर् निकल गय़ा उसने दरवाजा बन्द किया औऱ तेजी सें वाहन लेकरचली गई …….
वैसे उसकीइस हरकत सें मेरे होठो मे एक् मुस्कान आँ गई, काजल कां प्लान सचमेकाम कररहा थां, लेकिनमैंने आसपास नजर दौड़ाई कोईऑटो नहीं दिखा, मुझे ऐसी स्थान पऱ यहबात नहीं कहनी थि.अब सालाअब इतनेदूर मे जाऊंगा केसे ?????????
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) - Continue reading next part
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