रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 4
मेरी आंखे खुली तौ मैंने काजल कों अपनेपास पाया वोँ झीनी सि नाईटी मे मुझे दिखाई दि, उसके उजोरबड़े हि प्यारे लगरहे थें मैंने उसे सीधा लिटाया औऱ उसकी ख़ूबसूरती कों निहारने लगा, मैंने देखा कि वोँ आँखे मूंदे हुएबड़ी प्यारी लगरही थि, उसने अभि तक अपने माथे कि छोटी सि बिंदी नहि हटाई थि जोँ उसकेगोर चहरे कों औऱ भि सुंदर बनती थि, उसके होठो मे काटने कां निशान देख मेरीदिल कि धड़कनरुक सि गई, मुझेकल कि सारी बातेयाद आनेलगी, मैंने उसकेउस जखम कों छुआ, मुझे हल्का सां खून कां जमाव महसूस हुआ, मैंने उसके प्यारे चहरे कों फिन सें देखा, क्याँ मेरी प्यारी काजलऐसा कुछकर सकती थि कि मे उसपरशक करसकू पर्र यहखून कां जमाव, औऱ साफ़पता चलरहा थां कि किसी नें उसे दांतों सें काटा हैं, मेरे प्रेम मे क्याँ कमीरह गई, थि कि मेरी प्यारी बीबी किसीगैर मर्द कां बैडगरम करेगी, मुझेअब भि यह यकीं नहि हुआ मैंने फिन सें काजल केँ उरोजो कों देखा जोँ कि बहारआने कों बेताब थें मैंने उसे आजाद हि कर दिया, उनके आजाद होने पऱ काजल केँ मुह सें एक् मदभरी सि अहह निकली,
'नहि नां जी क्याँ कररहे होँ, 'मैंने देखा काजल नींद मे हि थि पऱ उसकाजी कहना मुझेचैन दे गय़ा क्योकि वोँ मुझे हि जीकहा करती थि, मैंने उसके उजोरो कों निहारा तौ मुझेलाल घेरे दिखाई दिए जैसे कि किसी नें उसे बुरीतरह सें मसला हौ, काजल बहोत गोरी थि औऱ मैंने उसेकभी कभी मसला भि थां उसके वोँ निशान ऐसे हि थें जैसा मेरे मसलने पर्र उसके वक्षो पऱ पड़ते थें, मेरी आंखेनम होनेलगी मैंने फिन उसके मासूम सें चहरे कि ओर देखा, मुझे यकीं नाँ आया कि वोँ मुझे किसी भि सूरत मे धोखादे सकती हैं, मैंने उसके उजोरो कों मसलना शुरुआत किया,
'नहि नाँ जान प्लीज् नहि नां कोई आँ जायेगा, 'काजल अभि भि नींद मे थि मैंने अपने होठो कों उसके होठो केँ पास लें जाकर उसके होठो कों चूमने लगा वोँ अपने होठो कों मेरेलिए खोल दि मैंने अपने होठो कों उसके होठो मे घुसा दिया मुझे दारू कि बूआनी शुरुआत होँ गयीँ,, हमारे लिए दारू पीनाकोई बड़ीबात नहि थि, शायद काजल नें कल शराबपि हौ मैंने अपनेहाथ उआकी नाईटी केँ निचे सें उसकी प्यारी योनी केँ पास लें गय़ा मैंने पाया कि उसमेकुछ कड़ा सां अहशास हुआमनो वीर्य सुख गय़ा हौ मैंने अपनेदिल कों समझाया कि यह वीर्य नहि होगा मे उसके निचे गय़ा उसके कपडे कों ऊपर उठाया, उसके गोर जांघ मेरे सामने थें मे उसे चटनेलगा, काजल बहोत हि नशे मे थि पऱ वोँ मचलने लगी थि मे जन्घो कों चाटते हुए उसकी योनी तक आँ गय़ा, मैंने पाया कि वो कुछकड़ा सां हैं मेरीलार पड़ते हि वोँ चिपचिपा हौ गय़ा मैंने उसेजीभ सें चखकर देखा, वोँ वीर्य हि थां मेरादिल बैठ गय़ा थां, मेरी आँखों मे आंसू थां पऱ मेरा लिंग वोँ तोँ ताना थां अपनी हि धून मे मुझेलगा थां कि मे उसेउठा केँ उसेमार हि डालू पऱ मैंने ऐसा नहि किया मुझेउसे भोगना थां, जाने किसने उसेभोग होगायह वीर्य किसका थां मुझे नहि पता थां पऱ.
मे मे तोँ बसअब पागल हि हौ गय़ा थां मैंने अपने कपडे उतार फेके औऱ उसकेऊपर चढ़ गय़ा मैंने यह परवाह नहि कि कि उसकी योनी मे गीलापन हैं याँ नहि मैंने अपनेथूक सें हि अपने लिंग कों भिगोया औऱ एक् जोरदार धक्का.
'अआह्ह्ह नहि नां क्याँ कररहे होँ, इतना तौ किये हौ नाँ अबबसकरो नां दर्द होँ रहा हैं घऱ भि जानां हैं, 'काजल कि बातो सें मे पूरीतरह टूट चूका थां मे अपने पुरेजोर सें उसेफिन सें धक्का लगाया काजल कि आँखेअब भि बंद थि औऱ उसने मुझे अपनीबहो केँ घेरे मे भर लिया
'आपका तोँ कभीख़तम हि नहि होता हैं नां 'उसने बहोत हि नशीली आवाज़ मे कहा,
'चलोअब जल्दकरो नां प्लीज, सर भि करेंगे क्याँ, 'अब तौ मे रो हि पड़ा मे चाहता थां कि मे वहा सें उठकरभाग जाऊ पऱ मैंने दूसरा मार्ग अपनाया मैंने एक् जोरदार झापड़ काजल कों मारा मेरे मारने सें वोँ तड़फ गयीँ, औऱ होश मे आकर मुझे देखने लगी,
'यह क्याँ कररहो हौ जी, हटो नाँ, मुझेमार क्यूं रहे हौ, '
'मदरचोद चुपचाप पड़ीरह रातभर दूसरो सें चुद्वाकर आई हैं औऱ अपने पति सें नखरेकर रही हैं, '
'अआह्ह्ह आह्हह्हह्हह्हह अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् प्लीज् नां जान, छोड़ दो नाँ रुकजाओ नां थोड़ीदेर बस.थोड़ीदेर बस जाआआन.'
मैंने बेहिसाब धक्के मारने शुरुआत करदिए, काजल दर्द सें तडफरही थि उसकी योनी अभि भि गीली नहि हुइ थि वोँ दर्द सें छटपटा रही थि पर्र मैंने कोईरहम नहि कि मैंने उसके चहरे कों अपने हाथो सें दबा लिया.यह पहलीबार थां जब मैंने काजल सें जबरदस्ती कि थि पर्र मे क्याँ करता मेरादिल आजटूट चूका थां मेरी प्यारी पत्नि बेवफा थि, मेरी चाहतलुट चुकी थि वोँ भि नां जाने कितनो सें.मैंने अपने वीर्य कि धार सीधे काजल केँ योनी मे छोड़ दि, वोँ कुछसमझ पाती इससे पहले हि मे वहा सें उठकर अपने बाथरूम मे चला गय़ा, पऱ जब मे बैड सें उठा तोँ मैंने एक् परछाई दरवाजे कि पीछे देखि जोँ जल्दी भाग गई, मुझे अहसास थां कि वोँ मेरी बहने हि थि जौ काजल केँ आवाज़ केँ कारन वो आँ गयीँ, थि,.
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 5
मे सुभह सें हि बिनाखाए पिए हि होटलचला गय़ा, आज मेरादिन बिलकुल हि बेकार होने वाला थां ऐसा मुझेलग रहा थां, मगर किसेपता थां कि क्याँ होना हैं, सुभह सें हि मे होटल स्टाफ कों व्यस्त रखा थां, सब मेरे स्वभाव सें परचित थें इसलिये उन्हें भि यहशक होँ चला थां कि मे आज बिलकुल हि अपसेट हु, दोपहर कों रश्मि आई औऱ आते हि उन्होंने मुझे अपने केबिन मे बुलाया,
"क्याँ बात हैं आज बहोत हि दुःखी हौ, "मे अब भि सर झुकाए खड़ा थां,
"तुसरकब उठाएगा मादरचोद"रश्मि चिल्ला केँ बोलि कि मेरीरूह भि काप गयीँ,, औऱ मेरे आँखों नें अपने सब्र कां बांधतोड़ दिया मे रोनेलगा, रश्मि ऐसे तौ बहोत हि खतरनाक औऱ प्रोफेशनल लड़की थि पर्र नाँ जानेउसे क्यूं मेरेलिए एक् सहानभूति सि पैदा होँ गई, थि, मे काँपता हुआ औऱ रोताहुआ वहाखड़ा थां औऱ वोँ मेरेपास आकर मुझे एक् पानी कां ग्लास पकड़ा देती हैं, औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे मेरेसर पर्र अपनाहाथ घुमाने लगती हैं, मुझेकुछ कुछ आराम मिला औऱ मैंने सोचा भि नहि थां कि इस होटल कि मालकिन औऱ इतनेबड़े बाप कि यह बिगलैड लड़की मुझे इसतरह सें प्रेम दिखाएगी,
"देव जानते हौ बापू नें मुझसे यहा कि जिम्मेदारी देतेहुए कहा थां कि तुम्हे यहा सें निकाल दू, तुम् किसीकाम केँ नहि, "मैंने सर उठाया तब तक वोँ अपने खुर्सी मे जाकरबैठ चुकी थि,
"मगर मैंने ऐसा नहि किया क्योकि मुझेपता हैं कि तुम् कितने काम केँ हौ, हमारा होटल बिनाकुछ गलतकाम किये भि चलरहा हैं तौ वोँ तुम्हारे हि लगन औऱ मेहनत केँ बदोलत हैं, हायहा पर्र वक़्त केँ संग बदलाव कि भि जरुरत हैं औऱ वोँ शायद दुनिया केँ नजर मे गलत भि हौ पऱ.बिजिनेस मे सभी जायज हौ जाता हैं समझे मिस्टर "रश्मि हलके सें हसीवही मेरादिल भि थोडा हल्का होँ गय़ा थां, मे अब रश्मि कों देखने कां साहसकर सकता थां,
"देव तुम् मुझे एक् मालकिन केँ तरह नहीं एक् मित्र कि तरह मानो जौ भि आईडिया तुम्हारे मन मे हौ वोँ मुझे खुलकर बताओ, खुलकर यानि समझते हौ नां, खुलकर बिना किसी भि हिचक केँ, मे तुम्हे एक् औऱ मौका देतीहु, पिताजी कों गलत साबित करने कां, सोचोअगर तुम्हारी जॉब गई, तौ तुम्हारी बहनों कां क्याँ होगा, "रश्मि कि सहानभूति औऱ अपनत्व नें मुझेजीत लिया थां, मे क्यूं दुःखी हु औऱ मे क्यूं वोँ नां करू जौ तरक्की केँ लिए औऱ पैसे कमाने केँ लिए जरुरी हैं, मेरी पत्नि तोँ अपनाबदन भि इसजॉब केँ लिएलगा रही हैं, उसे तोँ कभीगलत नहि लगा होगा औऱ मे किसी दूसरी लडकियों केँ लिए भि शर्मा रहाहु,
"मेडम मे आपकी बातो कों समझ गय़ा, मे अपना दिलोजान लगा दूंगा इस होटल केँ लिए, यह होटल हि यहा कां नंबरवन होटल होगा, मेरा आपसे वादा हैं, "मैंने इतनेजोश सें बोला कि रश्मि भि खुस होँ गयीँ, औऱ आश्चर्य सें मुझे देखने लगी,
"ह्म्म्म बढ़िया मगरदेव तुम् मुझे मेडम बुलाना छोडो दोस्त मुझे रश्मि हि बुलाया करो.पता नहि तुमसे कुछ अपना सां लगता हैं मुझे तुम् अच्छे व्यक्ति होँ, औऱ अगरकोई आईडिया होँ तौ बताओ अभि "मेरे भि चहरे पर्र एक् मुस्कान आँ गयीँ,,
"मेडमजी, (रश्मि नें मुझेघुर केँ देखा ) सॉरी रश्मि एक् आईडिया तौ हैं मेरेपास "वोँ उत्सुकता सें मुझे देखने लगी
"हमेंकुछ लडकिया हायर करनी पड़ेगी "रश्मि हसनेलगी
"यह भि कोईबात हुई कल हि तोँ यहबात हमनेकही थि, औऱ मैंने कुछ प्रोफेशनल लोगो सें बात भि कि हैं, वोँ भि लडकियों कि सप्लाई करने कों मान गई, हैं, "
"नहि मेडम, सॉरी रश्मि (रश्मि हसने लगती हैं ) मे प्रोफेसनल लडकियों कि बात नहि कररहा हु, मे बातकर रहाहु ऐसी लडकियों कि जौ प्रोफेसनल हि नाँ दिखे, वोँ बिलकुल सामान्य सि यहा पर्र काम करने वाली लडकिया लगनी चाहिए, मैंने ज्यादातर देखा हैं कि लोग शरीफ लडकियों केँ संग करना चाहते हैं, प्रोफेशनल तौ उन्हें कही भि मिल जाएगी पर्र सामान्य सि खुबसूरत औऱ कामकाजी लड़की जिसे वोँ पटाने कि सोच भि नहि सकतेबस देखकर हि खुश रहते हैं वोँ अगर उन्हें मिलजाए तौ कैसा रहेगा, "रश्मि नें मुझेबड़े गौर सें देखा
"ह्म्म्मम्म देव,.देव दोस्त तुम् तौ शराफत सें सीधे हि कमीनेपन मे उतरआये मैंने सोचा नहि थां कि तुम् इतनेबड़े कमीने होगे, पऱ यह होगा केसे एक् पढ़ी लिखी लड़की जिसे हम् उसके क्वालिफिकेशन केँ आधार पऱ नौकरी मे रखेंगे वोँ क्यूं अपनाबदन कां सौदा करने देगी, "मेरे चहरे पर्र एक् कातिल मुस्कान निखर गई,,
"हमें जादाकुछ भि करना हैं बसकुछ ऐसी बन्दिया हमें चाहिए जोँ यहकाम पहले सें कररही हैं, जैसे मेहता ग्रुप वाली hour शबनम, "रश्मि कि आँखे चौड़ी हौ गयीँ,, मैंने अपनीबात जारीरखी,
"देखिये होगायह कि यह मात्र क्लाईंट कां मनोरंजन हि नहि करेंगी बल्कि यहाकाम करने वाली लडकियों कों भि इसकाम केँ लिए उक्सयेंगी, उन्हें पैसे औऱ मजे कां लालच देंगी कोई भि पढ़ी लिखी शरीफ लड़की कों भि कभी नाँ कभी तौ इनसभी चीजो कि जरुरत पड़ती हैं नाँ मेडम सॉरी रश्मि जी "रश्मि नें हसकर मुझे देखा,
"हम्म्म्म तुम् सहीकह रहे होँ, एक् औऱ लड़की हैं मेरेमन मे जौ इसकाम मे एक्सपर्ट हैं, काजल.(मेरा चहरा हि उतर गय़ा जिसे उसनेसमझ लिया थां )सॉरी वोँ तोँ संस्कारी लड़की हैं नाँ जैसा तुमने कहा थां, "
"नहि मुझेसमझ आँ चूका हैं वोँ संस्कारी तौ नहि हैं पऱ मे उसकेसंग काम नहि करना चाहता, "रश्मि नें अपनेभव चड़ालिए,
"क्यूं "
मे ख़ामोशी सें उसे देखता रहा जैसे मे अपने सपनो मे गम हौ चूका थां
"बससमझ लीजिये कि उसने मेरादिल तोडा हैं औऱ अब वोँ भि मेरेलिए वैसे हि दुश्मन हैं जैसा कि अजीम आपकेलिए "मैंने रश्मि केँ कमजोर नश पर्र हाथरख दिया थां, पर्र उसके चहरे पऱ एक् मुस्कान खिल गयीँ, उसे भि यहसमझ आँ चूका थां कि मे औऱ वोँ मिलकर खान केँ होटल कों बर्बाद कर सकते हैं पर्र केसे.यह एक् स्टोरी हि थि.
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अध्याय 6
मे आजघऱलेट सें जाने कां प्लान बनाया मुझे शबनम सें अपने होटल कों जॉइन करने कि बात करनी थि, यह तोँ स्वाभाविक थां कि वोँ बहोत अधिक कीमत बोलने वाली थि मगर उसकेपास वोँ हुनर थां जोँ कोई सामान्य लड़की केँ पास नहीं मिलता….
वोँ पढ़ी लिखी थि विवाह शुदा थि, दिखने मे कातिल सि हसीन थि औऱ सबसेबड़ी बात वोँ अपनेबदन कां सौदा करना औऱ उसकी कीमत दोनो जानती थि….यंहा कां मैनेजर तौ मे थां मगरउसे हमने hour कां पोस्ट देने कि सौची, अभि जौ hour कां कामदेख रही थि वोँ भि बहोत टैलेंटेड लकडी थि इसलिये उसे हटाने कि स्थान हमनेदो पोस्ट बना दिए.क्योकि इसेकुछ अलग हि काम करना थां….
मे होटल केँ हि रेस्टारेंट मे बैठाहुआ शबनम कां प्रतीक्षा कररहा थां.
“ओहदेव “
वोँ बला कि सुंदर लगरही थि…जिसपर मेरीनजर थोड़ेदेर केँ लिएजम हि गई थि.
“हायराम आओआओ “मे उसके स्वागत केँ लिएखड़ा हुआ
“तोँ बहोत इमरजेंसी मे बुलाया हैं मुझे क्याँ बात हैं”
“कुछ नहीं एक् नौकरी कां ऑफर थां तुम्हारे लिए “
वोँ खिलखिला करहँस पड़ी
“नौकरी तुम् मुझे नौकरी ऑफरकर रहे हौ, दोस्त मैंने तोँ सुना कि तुम्हारी नौकरी मे हि खतरा हैं, कपूर साहब बहोत हि भड़केहुए हैं तुम्हारे ऊपर “
हाय उसकीअदा उसकी मुस्कान, इन गलियारों मे बाते इतनी तेजी सें फैलती हैं मुझेसमझ आँ गय़ा थां,
“ह्म्म्म वोँ कल कि बात थि मेडम.आज किस्सा कुछअलग हि हैं, हम् कुछनए रिक्रूटमेंट करना चाहते हैं, हमे एक् hour मैनेजर चाहिए तुम्हारे जैसी, औऱ कुछ लड़कियों कां भि रिक्रूटमेंट हैं.जौ तुम्हे हमारे संग मिलकर फाइनल करना होगा “
शबनम कों कुछ जैसेसमझ सां आँ गय़ा
“ओह, मुझेलगा कि तुम्हारे रहतेइस होटल कों कभी मेरे जैसे मैनेजर कि जरूरत नहीं पड़ेगी, ”वोँ थोड़ी सें दुःखी हौ गई थि नां जाने क्यो.
“तुम् क्यो दुःखी होँ रही होँ, आजकल टैलेंट सें क्याँ होता हैं “अब मे थोड़ा दुःखी होँ गय़ा
“पता नहीं क्योमगर तुम्हें यहसभी करते देख्ना अच्छा नहीं लगता, तुम् हमारे कालेज केँ टॉपर थें दोस्त, इतने टैलेंटेड हौ औऱ फिन भि “
शबनम मेरे हि कॉलेज कि जूनियर थि.
“ह्म्म्म छोड़ो वोँ सभी, अब अगर मार्किट मे बने रहना हैं तोँ सभीकुछ करना पड़ेगा “
उसके चहरे मे थोड़ीचमक आई, तभी एक् वेटर आँ गय़ा
“मेरेलिए ब्लैक बहुत औऱ तुम् “
“सेम “
“हम्म तौ मुद्दे कि बातकरे.”
“देखोदेव रविऐसे भि मुझे अच्छी खासी तनख्वाह देता हैं, जोँ कि मेरे टैलेंट सें कही ज़्यादा हैं.तौ मे तुम्हारा प्रपोसल क्यो एक्सेप्ट करू “
पता नहीं क्योमगर उसकी हुस्न नें मुझे दीवाना बना दिया थां,
“क्योकि बात केवल पैसों कि नहीं हैं, रवि केँ पास तुम्हारी इज्जत क्याँ हैं यह हम् दोनो कों पता हैं, यंहा तुम्हे इज्जत भि मिलेगा औऱ उससे अधिक रुपया भि,.”
“उससे अधिक रुपया.तुम् पागल हौ गए होँ कपूर जैसा कंजूस व्यक्ति उतने पैसेदे पायेगा, उतनी तोँ तुम्हारी सेलरी भि नहीं हैं “
“ह्म्म्म देखोअब कपूर साहब होटल केँ काम कों छोड़कर दूसरे बिजनेस मे ध्यान देने कि सोचरहे हैं, तौ यंहा कां पूराकाम रश्मि देखेगी, जाहिर सि बात हैं कि वोँ नएसोच कि लड़की हैं औऱ सच मानो पैसे खर्च करने मे कोईकमी नहीं करेगी, बस एक् चीज कि कमी नहीं होनी चाहिए …”
शबनम ध्यान सें मेरी बातो कों सुनरही थि,
“उन्हें काम सॉलिड चाहिए, तुम्हे हर बंदी कों सजधजकर करने पऱ इंसेंटिव भि मिलेगा जोँ कि सेलरी सें कही ज़्यादा होँ सकता हैं, रवि केँ जैसे यंहाकोई जबरदस्ती करने वाला नहीं होगा, तुम् अपने पति औऱ घऱ कों भि वक्तदे पाओगी औऱ पैसे.वोँ तौ तुमने सुन हि लिया “
“ह्म्म्म MBA किया थां तोँ सोचा नहीं थां कि यहसभी भि करना पड़ेगा “
शबनम हल्के सें हँसी जिसे देखकर मेरे चहरे मे भि हँसी आँ गई, हमारी बहुत आँ चुकी थि.
“दोस्त देवमगर एक् बात बताऊ, मुझसे अधिक टैलेंटेड तोँ काजल हैं, तुमने उसे हायर करना चाहिए थां “वोँ हल्के सें मुस्कुराई, मगर मेरा चहराउतर गय़ा.
“हम्म मुझेपता हैं तुम् दोनो केँ बारे मे “शबनम कि बात सें मे चौका औऱ उसकीओर देखने लगा.
“फिक्र मतकरो किसी कों नहीं बताऊंगी, मगर काजल मेरी अच्छी साथीरही हैं, हमारी बात होते रहती हैं औऱ वोँ भि तोँ बेचारी मेरे हि जैसे हैं बस उसके पति कों उसकेकाम कां पताचल गय़ा हैं “
शबनम केँ चहरे मे आयी हुईँ कातिल मुस्कान सें मेरे पैरो कि जमीन खिसक गई.
“तुम् तुम् बोल्ना क्याँ चाहती होँ “
“वही जोँ तूम सुनरहे होँ.मगर देखो दोस्त देव हमारा फील्ड हि कुछऐसा होँ गय़ा हैं, तुमने हि तौ कहा थां कि केवल टैलेंट सें आजकलकुछ भि नहीं होता,, उसे भि तोँ अपनी नौकरी बचानी पड़ी जैसे तुम्हें बचानी पड़ी.यहां बहोत कंपीटिशन हैं देव वोँ नहीं करेगी तौ कोई औऱ कर लेगा.औऱ अब तौ तुम् भि मानगए हौ कि इनसभी चीजो कि जरूरत तुम्हारे होटल कों भि हैं.मे भि तोँ विवाह शुदा होने केँ बाद भि रवि केँ संग.करना पड़ता हैं देव तुम् मर्द हौ तुम् नहीं समझो कि औरतों केँ दिल मे क्याँ गुजरती हैं जबकोई पराया मर्द …”
मेरे आंखों मे आंसू आँ गए थें…
शबनम नें मेरेहाथ कों अपने कोमल हाथो सें पकड़ा औऱ उसे सहलाया इसमें बहोत हि अपनत्व थां…
“मे जानती हु कि हम् गलतकर रहे हैं औऱ मे इसे पूरीतरह सें सही भि नहीं कहती, औऱ नाँ हि यह कहतीहु कि इसके बिना हम् रह नहीं पाएंगे, मगर हमारे खर्चे अब इतने हौ गए हैं कि इसे केवलकाम करके पूरा करना मुश्किल हैं.औऱ फिक्र मतकरो जोँ सीक्रेट हैं वोँ सीक्रेट हि रहेगा औऱ कब सें जॉइन करना हैं …”
शबनम कि बात सें मुझे थोड़ाचैन तोँ मिला, असल मे बात सें नहीं उसके कोमल हाथो केँ अहसास सें.
“कल सें “
“ओके “ वोँ खड़ी हुईँ औऱ मेरेपास आकर मेरे गालो मे एक् हल्की सें पप्पी लेकर वँहा सें निकल गई …….
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