रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 11
आज भि मेरेआने पऱ काजल नहींआयी हुई थि, होटल कां काम बहोत हि बढ़ताजा रहा थां, हमे आगे केँ प्लान कों एक्सीक्यूट करने मे मेहनत करनीपड़ रही थि, हमारे पासकई नए इडियास थें, जिनपर हम् धीरे-धीरे धीरे-धीरे सें अमल करतेजा रहे थें, मे घऱ पहुचते पहुचते बेहदथक जाया करता थां, वोँ शारीरिक हि नहीं मानसिक थकान भि होती थि, औऱ काजल कों घऱ मे नां देखने सें एक् जलन सि होने लगती…….
मे जानता थां कि उसेरोक पानाअब मेरेलिए मुश्किल हैं औऱ मे तौ अबउसे रोकना भि नहीं चाहता थां, मैंने उसे उसकी जीवन मे आजादछोड़ दिया थां, मे अपने पति कां धर्म निभाने कों सजधजकर थां मगर उससे उसके पत्नि धर्म निभाने कि आशाछोड़ हि दि थि…….
हम् दोनो केँ बीच मे प्रेम तौ अब भि थां मगरकई दीवार खड़ी हौ गई थि, मे उसदिन कों कोसने लगा थां जब मुझे काजल कि असलियत कां पता चला, नां हि मुझे असलियत कां पता चलता औऱ नाँ हि मे दुखी होता, जीवन ऐसे हि चलती रहती…………
खैर अब मेरेघऱ मे मुझेचैन पहुचने केँ लिए मेरीदो प्यारी बहने भि तौ थि, मेरे जाते हि वोँ मेरी सेवा मे लग गई कोई मेरे जूते उताररहा थां तोँ कोईगरम चाय लाकरदे रहा थां.उन दोनो कों देखकर हि मेरी सारी थकानदूर होँ जाती थि…
मे फ्रेश होकर खानां खाने बैठा थां, आज तीनो नें संग मे हि खानां खाया, मे जब सोनेरम पहुचा तौ कल कि तरह हि निशा मेरे कमरे मे आँ गई, मगर आज उसकेसंग पूर्वी भि थि…
मे दोनो कों हि आंखे फाडेहुए देखरहा थां, वोँ दोनो इतनीबड़ी होँ गई थि औऱ मुझेपता हि नहींचला…….
दोनो केँ शरीर मे भरावआने लगे थें, निशा जंहा पूरीतरह सें भर गई थि वंही पूर्वी केँ नएनए विकसित अंगों मे मादकता भररही थि…
दोनो केँ हि स्तनों कि ऊँचाई अच्छी खासी हौ चली थि औऱ नितम्भो मे भि भरावआने सें उनकीचाल मे एक् मटक पैदा हौ गई थि, जंहा निशा नें आज भि वही नाइटी पहनी थि वही पूर्वी एक् स्लेवलेस स्पोर्ट टीशर्ट मे थि जौ कि डीपनेक भि थां औऱ उससे उसके उजोर पूरेतने हुए दिखाई देरहे थें, वही वोँ नीचे एक् छोटी सि निकर पहनेहुए थि, जोँ उसकीकमर केँ नीचे कि गोलाइयों कां भरपूर नजारा दिखारही थि ……
एक् बार मे दोनो कों घूरता रहाफिन अपनेमन कों झटका…
यह मुझे क्याँ हौ गय़ा, मे अपनी हि बहनों कि जवानी कों देखरहा थां…
दोनो मुझेऐसा देखकर हल्के सें मुस्कुराए औऱ मेरेआजु बाजूआकर लेटगए …….
पूर्वी नें जहा मेरे सीने मे अपनासर रख लिया थां वही निशाऊपर उठाकर मेरेसर कों दबाने लगी, मेरा सरअब उसकीगोद मे थां….
मेरेसर केँ बाल निशा केँ जांघो कों रगड़रहे थें औऱ उसकी रसीले सि त्वचा कां आभास मुझेचैन देरही थि ….
“चलो पत्नि नहीं हैं तोँ मेरी प्यारी बहनों केँ संगकुछ वक्त तौ बिताने मिलरहा हैं.”
मेरीबात सें दोनो हि मुस्कुराने लगे.
“हा भाई भाभी होती तौ ऐसेरूम मे घुसने थोड़ी देते, दरवाजा लगा केँ.”पूर्वी बोलकर हँसने लगीमगर इसबात सें निशा नाराज हौ गई
“कुछ भि बोलती रहती हैं थोड़ी भि तमीज नहीं हैं “
“अरे बोलने दे.मेरी प्यारी गुड़िया हैं यह, कुछ भि बोल सकती हैं मुझे.”मेरीबात सें पूर्वी खुस होकर मुझे औऱ जोरो सें जकड़ लेती हैं ….
थोड़ीदेर मे हि पूर्वी नींद केँ आगोश मे चली गई, ऐसे सो तौ मे भि गय़ा थां मगर मेरी नींद खुलीजब निशाउसे उसके कमरे मे लेँ जाने कों उठारही थि, पूर्वी जैसे नींद मे चलरही हौ वोँ अपने कमरे मे जाकरसो गई, निशाउसे पहुचाकर फिन सें आयी, औऱ मेरेगले सें लग गई, मे अभि थोड़े नींद मे तौ थां मगर मुझेयह पूरीतरह सें पता थां कि यह निशा हि हैं, मैंने भि उसे जकड़ा, उसकी झीनी नाइटी कि वजह सें उसके यौवन केँ सब उभारों कां आभास मुझे होँ रहा थां, मगर वोँ मेरी बेहन थि मेरीसगी बेहन.
“भाई …”
“ह्म्म्म “
“यह भाभीरात रातभर कहा रहती हैं आप् उसेकुछ बोलते क्यो नहीं होँ “
उसके प्रश्न नें मेरे होशं हि उड़ादिए, जैसे नींद मे किसी नें पानीडाल दिया होँ.
मे जानता थां कि निशाअब बड़ी औऱ समझदार होँ गई हैं, वोँ चीजो कों समझने लगी हैं औऱ दो दिनों सें उसकायू मेरेपास आकर सोना निरर्थक तोँ नहीं होँ सकता, जरूरकुछ बात तौ थि,
“अरेकाम होता हैं नाँ तूँ तोँ जानती हैं नाँ “
“हा जानती हुमगर फिन भि भाई, आप् तौ रात मे आँ जाते हौ, औऱ आपको नहीं लगता कि भाभी कां काम अभि अभि अधिकबढ़ गय़ा हैं, पहले तौ वोँ भि रात मे आँ जाया करती थि मगरकुछ दिनों सें उनकारात रुकना कुछ अधिक हि हौ गय़ा हैं “
निशा कि चिंता बेवजह तोँ नहीं थि मगर मे उसके नजरो मे काजल कों गिरा तोँ नहीं सकता थां……
“अरे तुँ भि कहा कि बातो मे पड़ गई, चलसोजा “
“नहीं भाई यह बेवजह कि बात नहीं हैं, ऐसे मे आपकी औऱ भाभी कि विवाह शुदा जीवन भि प्रभावित हौ जाएगी “
उसकीबात सें मे चौक गय़ा, यह मेरीवही छोटी बेहन हैं जोँ कभी मेरीगोद मे खेला करती थि, यह इतने समझदारी कि बातेकर रही हैं, हा अब वोँ कालेज जानेलगी हैं औऱ उसका जिस्म भि किसी महिला कि तरह विकसित होँ चुका हैं, शायद उसेसब चीजो कां ज्ञान भि होँ, मगरफिन भि थि तौ वोँ मेरी छोटी बेहन हि, मेरेलिए यह समझना हमेशा हि मुश्किल रहेगा कि वोँ बड़ी हौ गई हैं.
“प्लीज़ भाई बताओ नां कहीकोई प्रॉब्लम तोँ नहीं हैं “
“नहीं मेरीजान कोई प्रॉब्लम नहीं हैं बसकुछ हि दिनों कि बात हैं उसके होटल मे कोई जरूरी कामचल रहा हैं “मे उसे अपने सें औऱ भि सटाते हुए बोला.मगर मेरेमन मे कई बातेचल रही थि, मुझे काजल सें बात करकेयह सभीबंद करवाना होगाकम सें कमरात रुकना कम करवाना हि होगा, मे नहीं चाहता कि मेरी बहनों कों यहपता चले कि उनकी भाभी केसेकाम कररही हैं,
मे सोने कि कोशिस कररहा थां पऱ मेरी आंखों सें नींद बहुतदूर हौ चुका थां….
तभी मेरेफोन कि घंटीबजी, नंबर देखकर मे हैरान हौ गय़ा, यह रश्मि थि इतनेरात कों क्याँ होँ गय़ा इसे, मे बुझेहुए मन सें मोबाइल उठाया मुझेलगा कि शायदकोई काम आँ गय़ा होगा…
“हैलोदेव …”
“हा रश्मि “
“तुम् जल्द सें आँ जाओ बहोत गजब हौ गय़ा “
मे हड़बड़ाया औऱ रश्मि मुझे देखकर मेरेऊपर सें उठ गई
“क्याँ क्याँ होँ गय़ा …”
“दोस्त छापापड़ा हैं.”
मेरीफट केँ चार होँ गई अभि अभि तौ वोँ काम शुरुआत किया थां औऱ अभि छापा भि पड़ गय़ा.
“खान केँ होटल मे “
रश्मि कि इसबात नें मेरे अंदर पहले सें कही ज़्यादा डर कों भर दिया थां, क्योकि अगर मेरे होटल मे छापा पड़ता तोँ शायद रश्मि पैसे केँ बल मे मुझे स्वयं कों औऱ होटल कों बचा लेतीमगर खान केँ होटल मे तौ काजल थि …
आगर काजलये पकड़ी गई तोँ.मे बुरीतरह सें डराहुआ थां…
“हैल्लो “
रश्मि नें मुझेकुछ नाँ बोलता हुआ देखकर कहा
“हा सुनरहा हु “
“अजीम औऱ उसकी वोँ रांड काजल दोनो हि गिरिफ्तार होँ गए हैं, एक् कमरे सें लाश मिली हैं एक् लड़की कि, वोँ शराब केँ नशे मे थि औऱ उसी केँ कारण मारी गई, पुलिस कों शक हैं कि अजीमउस लड़की सें धंधा करवाता थां, काजल कों भि पुछताज केँ लिए लेँ जाय गय़ा हैं …”
“ओकेओके मे आता हूं “मे जल्द सें उठा औऱ रेडी होनेलगा,
“क्याँ हुआ भाई इतने परेशान क्यो हौ “निशा कि भवचढ़ गई थि.
“कुछ नहींबस मे आताहु, काम आँ गय़ा हैं, तुम् सोजाओ औऱ पूर्वी औऱ अपना ख्याल रखना “
मे निकलने हि वाला थां कि शबनम कां मोबाइल आँ गय़ा.वोँ काजल कों लेके बहोत हि डरी हुइ थि, मैंने अपनी गाड़ी होटल कि ओरमोड़ दि, मगर मुझे पोलिश स्टेशन भि जानां थां, मे दुविधा मे फंसाहुआ थां, मैंने शबनम कों काल किया
“तुम् भि रेडी हौ जाओ मे तुम्हे लेने आँ रहाहु, हम् पहले पुलिस स्टेशन चलते हैं नाँ जाने काजल कां क्याँ हाल होगा, मे अकेले नहींजा सकतामगर तुम्हारे बहाने जा सकताहु “
मेरीबात शबनमसमझ चुकी थि.
…………………।
रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 12
मुश्किल तौ थां, हा बहोत मुश्किल थां ….
स्वयं कों रोक पाना जबकि काजल मेरे सामने खड़ी थि, जब मे पुलिस स्टेशन पहुचा तौ काजल बैठे इंस्पेक्टर सें बातकर रही थि वही अजीम कां कहीअता पता हि नहीं थां, मेरे लिए आश्चर्य कि बात थि कि वँहा पऱ वोँ डॉ चुतिया भि मौजूद थां, उसने मुझेबड़े हि आश्चर्य सें देखामगर जब शबनम जाकर काजल सें गले मिलने लगी तोँ उसका आश्चर्य थोड़ाकम होँ गय़ा.काजल नें तिरछी नजरो सें मुझे देखा…
हम् दोनो हि मजबूर थें कि सभी केँ सामने हम् एक् दूसरे सें मिल भि नहीं सकते थें, मेरे दिल मे तोँ आया कि मे जाकर उसकेगले लगजाऊ मगर क्याँ करू, मे तोँ मजबूर थां, वही हाल काजल कां भि हौ रहा थां, वोँ भि मेरेगले लगने कों बेचैन थि, वोँ बारबार मेरीओर देखरही थि, वोँ अपना स्वाभाविक स्वभाव खो चुकी थि जिसका असर उसके हाव्भाव सें साफपता लगरहा थां,.
कोई भि एक्सपीरियंस व्यक्ति यहबता सकता थां कि हम् दोनो हि थोड़े बेचैन हैं…
औऱ मेरे ख्याल सें डॉ एक्सपीरियंस वाला थां, क्योकि उसके भि चहरे केँ भाव बदलने लगे थें, वोँ हमे ऑब्जर्व कररहा थां,.
वँहा क्याँ हुआ थां यह तौ मुझेपता नहींमगर मे काजल सें मिलने कों बहोत हि उत्तसुक जरूर थां.
“ओकेडॉ साहब थैंक्स.”
हम् बाहर् आँ चुके थें,
“अरे इसमें थैंक्स कि क्याँ जरूरत हैं, तुमने मेराकाम कर दिया औऱ मैंने तुम्हारा.यही तौ डील थि “
काजल कां काम.मे यह क्याँ सुनरहा थां, जैसे मे अचंभित थां वैसे हि शबनम भि अचंभित थि…
मगर काजल नें डॉ कों इशारा किया औऱ डॉ कों अपनी गलती कां अहसास होँ गय़ा…
“तौ मे निकलता हु.”
“ओकेडॉ “
काजल मेरीओर पलटी हि थि.
“ऐसे तुम् दोनो मे क्याँ चलरहा हैं.”डॉ केँ चहरे मे एक् कुटिल मुस्कान छा गई थि.
“कुछ.कुछ भि तोँ नहीं.”
काजलबड़ी हि तकलीफ़ सें बोलपाई.
“बेटा मेरानाम डॉ चुतिया हैं मुझसे छिपाकर क्याँ करोगे, ऐसे भि मे पतालगा हि लूंगा “
डॉ कि बात सें काजल थोड़े सकते मे आँ गई
“फिक्र मतकरो मे किसे बताने जारहा हु, नहीं बताना हैं तौ मत बताओ.”
डॉ नें हंसते हुएकहा
“यह मेरे पति हैं.”काजल नें आखिरडॉ केँ सामने राजखोल हि दिया.
“मगर प्लीज् किसी कों पता नाँ चले.वरना हमारी नॉकरी जा सकती हैं, औऱ जोँ अभि हौ रहा हैं उसमे तोँ हमारी जान भि जा सकती हैं.सबको यही लगेगा कि हम् दोनो मिलेहुए हैं.औऱ इनफार्मेशन लीक करते हैं”
“ओकेओके मेरीतरफ सें तुम् दोनो हि निश्चिंत रहो, मगर दोस्त ऐसेकाम औऱ ऐसे पैसे कां क्याँ करनाजब संबंध हि मुसीबत मे पड़जाय.औऱ जिसतरह कि जीवन तुम् जीरहे हौ याँ जीना चाहते होँ उससेकई प्रॉब्लम हौ सकती हैं…”
डॉ कि बातसही थि हम् अब भि कौन सि अच्छी जीवनजी रहे थें.
“जीडॉमगर ….जौ शुरुआत कर दिया हैं उसे समाप्त भि तोँ करना होगा नाँ…”
डॉ नें हा मे सर हिलाया औऱ वँहा सें चला गय़ा, मगर मेरेलिए बड़ी मुस्किल पैदाकर दि थि, काजल नें नां जाने क्याँ क्याँ मुझसे छिपाकर रखा थां…
मे उसे आंखेबड़ी करके देखने लगा, रात कां वक्त थां मगर स्टेशन मे अब भि कुछलोग थें.
“चलो तुम्हे घऱछोड़ देता हु.मुझे रश्मि नें बुलाया हैं “
मेरे काजल सें कहे पहले शब्द थें, हम् गाड़ी मे बैठे औऱ काजल मेरेसंग वालीसीट मे बैठी थि, उसने मेरेसर कों पकड़कर मेरे होठो कों अपने होठो मे मिला लिया…
मे भि बेताबी सें उसेचूम रहा थां.जब हम् अलगहुए,
“यहसभी क्याँ हैं काजल “
काजल कि होठो मे मुस्कान आँ गई, वोँ भि जानती थि कि मे नाँ जाने कितने देर सें यहसभी पूछना चाहता थां मगर नहींपूछ पारहा थां.
“सभीपता चल जाएगा, मगर यहसही स्थान नहीं हैं, आप् पहलेघऱ आइये.”
मे काजल कों घऱछोड़ कर होटलचला गय़ा, रश्मि बहोत हि बेचैन लगरही थि….
“कितनी देरलगा दि तुम् दोनो नें.”
वोँ सच मे बेचैन थि मुझे तौ लगा थां कि वोँ खुस होगी …
“वोँ रश्मि हम् पुलिस स्टेशन गए थें.”
शबनम नें कहा.मैंने उसे आश्चर्य सें देखाउसे यह बोलने कि क्याँ जरूरत थि.
“कुछपता चला “
रश्मि कों जैसेकोई फर्क नहींपड़ा.
“काजल कों छोड़ दिया गय़ा हैं, मगर अजीम नहीं दिखा, शायद उसेकही औऱ रखा गय़ा हौ.”
“हे ईश्वर “
, रश्मि अपनासर पकड़ केँ बैठ गई थि …
मुझे मामला कुछसमझ नहीं आँ रहा थां.
“रश्मि तुम् इतने चिंता मे क्यो होँ यह तौ अच्छा हि हुआ नाँ, इससे हमारे होटल कों फायदा होगा “
रश्मि नें मुझे घूरा …
“हम्ममगर अजीम मेरा पति थां, मेरा पहला प्रेम थां वोँ.”
यह लडकिया भि बड़ी अजीब होती हैं, जिस व्यक्ति कों बर्बाद करने कि शपथखाई थि आज उसकेलिए हि इतनी चिंता मे थि …
अब मे क्याँ बोलता.
“कोईबात नहींछूट जाएगा, खान साहब बहोत हि पहुचे हुए व्यक्ति हैं “
मे उसे थोड़ा शांत करने केँ लिएकहा …
“नहीं नहीं छूटेगा वोँ.उसके पापों कि तौ उसेसजा एक् नां एक् दिन मिलनी हि थि ….यहकोई छोटा मोटाकेस नहीं हैं, औऱ उसे फसाने वाला उसका हि कोई व्यक्ति हैं, वरना जंहा तक मे अजीम कों जानती हु वोँ साला एक् नंबर कां हरामी थां, वोँ इतनी जल्द फसने वालो मे तौ नहीं थां……….”
मेरे सामने काजल कां चहराउभर गय़ा, मगर वोँ उसे क्यो फसाने लगी ….
“कहाखो गए “
मे अपने खवाबो सें बाहर् आया
“कही नहीं….मगर तुम् तोँ उससे बदला लेना हि चाहती थि फिन क्यो इतना दुखी हौ रही हौ…”
मैंने यू हि पूछ लिया, वोँ एक् गहरी सासू माँ ली.
“तुम् नहीं समझोगे देव.पति-पत्नि कां नाता होता हि कुछऐसा हैं, माना हम् दोनो कां अब तलाकहोई चुका हैं, माना कि हम् गलत रास्ते पऱ थें, मगरफिन भि वोँ मेरा पति थां.कुछ दर्द तौ रह हि जाता हैं.जब तुम्हारी विवाह होगी शायदतब तुम्हे समझआये …….”
मेरी विवाह…????मुझसे अच्छा कौनजान सकता थां कि पति पत्नि कां नाता क्याँ होता हैं….उसका तौ तलाक हौ चुका हैं, मे तौ उसीघऱ मे रहता हु, एक् पलंग मे सोता हु, फिन भि मुझेपता नहींचल पारहा हैं कि आखिर उसके दिमाग़ मे चल क्याँ रहा हैं………
“ठीक हैं तुम् लोगजाओ.मे खामख्वाह तुम् लोगो कों परेशान कर दि “
रश्मि नें गहरी सांसली ………।
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अघ्याय 13
कमरे मे घुसते हुए मेरादिल जोरो सें धड़करहा थां,.
आज मेरी काजल मेरे कमरे मे मेरा प्रतीक्षा कररही होगी…….
मे जब अंदर पहुचा तोँ सच मे काजलजग रही थि, उसनेवही साड़ी पहनी थि जिसेपहन कर वोँ होटल गई थि, मगर उसके माथे मे गढ़ा सिंदूर थां औऱ गले मे मंगलसूत्र.हाथो मे लाल चूड़ियां सजी हुई थि, उसने यहरूप मेरे हि लिए हि बनाया थां,
“बहोत देरकर दि, क्याँ बोलरही थि आपकी रश्मि मेडम “
दरवाजे कि आवज सें वोँ उठाकर खड़ी हुईँ.
मे जाकर पलंग} मे बैठ गय़ा …
“शायद मुझेलगा थां कि तुम् प्रश्न नहीं जवाब दोगी …”
मैंने उसे घूरते हुएकहा.जिससे वोँ हल्के सें मुस्कुराई औऱ मेरे बाजू मे आकरबैठ गई.
“क्याँ जानना चाहते होँ “
“सभीकुछ “
हम् दोनो हि खामोश थें…
“मैंने अजीम कों उसके किये कि सजा दिलवा दि, अब वोँ कभी बाहर् नहीं आँ पायेगा.औऱ जब तक वोँ बाहर् आएगातब तक उसकेलिए कुछ भि अपना कहने कों बचा नहीं होगा.”काजल कां स्वर ठंडा थां मगर उसके बातो मे एक् अजीब सां दर्द थां, संग हि हौसला.
“क्याँ ऐसाकर दिया अजीम नें जौ तुम् उसेसजा दिलाना चाहती हौ.”
मे जानने कों उत्सुक थां…
वोँ हल्के सें मुस्कुराकर मुझे देखने लगी …
“जानने कि हिम्मत हैं आपमे …”
उसकीइस बात सें मुझे एक् धक्का सां लगा
“ऐसी क्याँ बात हैं जिसे जानने केँ लिए मुझे हिम्मत कि जरूरत पड़ेगी.ऐसे भि तुम्हारे बारे मे तौ मे जानता हि हु कि तुम् एक् रंडी होँ “
मेरेमुह सें निकली बात मे इतनी घृणा थि कि मुझे स्वयं हि अफसोस होनेलगा, मगर काजल केँ चहरे कि मुस्कान औऱ भि बढ़ गई, मगर उसमे दर्दकुछ अधिक हि टपकने लगा थां…
“हा मे एक् रंडीहु, औऱ मुझे एक् सीधी साधी लड़की सें एक् रंडी बनाने वाला अजीम थां…”
उसने बोल्ना शुरुआत किया.
“बाततब कि हैं जब हमारी विवाह भि नहीं हुईँ थि ……………………………….”वोँ अपनी स्टोरी बताते रही औऱ मेरेहाथ मुक्के कि तरह बंधने लगे.मे उन्हें औऱ भि जोरो सें कसनेलगा थां, बताते हुए वोँ नाँ जाने कितनी बाररोई थि, कितनी बार मेरेगले सें लग गई, मेरे आंखों मे आंसू थें औऱ दिल मे अंगारे धधकने लगे थें,,,
मे हरहाल मे उनसब कों खाक मे मिला देना चाहता थां जिन्होंने मेरीयह हालत कि थि …
वोँ मुझसे लिपटकर रोरही थि औऱ मे चुपचाप हि सभीसुन रहा थां, मुझे बदला लेना थां, ऐसा जौ दुनिया याद रखे, अजीम कों जेल भिजवाना तोँ बस शुरुवात हि थि, अभि तौ बहोत लोगो कों बर्बाद करना थां…
“अब तोँ आप् सभीजान गए, अब तौ आपकोपता चला कि मे यहसभी क्योकर रही थि, किसके लिए औऱ किसके कहने पर्र कररही थि …”
मैंने काजल कों जकड़ लिया,
“मे सबको बर्बाद कर दूंगा काजल जिन्होंने यह किया हैं सब कों बर्बाद कर दूंगा, सब कों उनके किये कि सजा मिलेगी काजल “
मेराबदन भि धधकने लगा थां, मे लाल हौ चुका थां.
“नहींजान जल्दबाजी सबकुछ हि बिगड़ देगा.हमारे अपने भि इसमें जल जाएंगे, नहीं हमेऐसा कुछ भि नहीं करना हैं जिससे उन्हें थोड़ा भि शक होँ, हमे उनके हि खेल मे उन्हें मात देनी हैं.हमे अपनो कों बचाना हैं, औऱ जिन्हें अपनी शोहरत औऱ दौलत कां इतना घमंड हैं उन्हें चकनाचूर करना हैं….”
काजल जानती थि कि मेरेलिए इसआग कों सम्हाल पाना कितना कठिन थां, वोँ सच मे यहसभी इतने दिनों सें सहरही थि ….
“तुम् मेरीनजर मे औऱ भि चढ़ गई होँ काजल, मैंने तौ कभी सोचा हि नहीं थां कि तुम् यहसभी सहरही हौ, वोँ भि मेरे औऱ मेरे परिवार केँ लिए “
काजल नें मेरी आंखों मे देखा, मे उससे बेपनाह प्रेम सें देखरहा थां.
“अब जोँ भि करना हैं हम् संग मिलकर करेंगे.औऱ मेरीशपथ खाओ जौ भि हौ जाएयह राजराज हि रहेगा…”
उसने मेराहाथ पकड़कर अपनेसर मे रखा.मे बदले केँ लिए जुनूनी हुआजा रहा थां, मगर बदले कां जस्बा तौ मुझसे ज़्यादा काजल केँ अंदरभरा हुआ थां, वोँ शांतमन सें एक् मंजिल कों पारकर गई थि, मगर वोँ जानती थि कि यह तौ अभि पहली सीढ़ी हि हैं ….
“मे शपथ खाताहु काजल …”
“औऱ आप् किसी कों भि पता नहीं चलने दोगे, निशा याँ पूर्वी कों भि “काजल नें बहोत हि जोर देकरकहा.
“हम्म मे अपने जज्बातों कों पूरीतरह सें काबू मे रखूंगा, तुम् फिक्र मतकरो, यहराज मेरे सीने मे रहेगा, औऱ हम् वैसी हि जीवन जिएंगे जैसा कि जीते आँ रहे हैं.मगर “
मे बोलते हुएचुप हौ गय़ा.
“मगर क्याँ “काजल नें मुझे परखने वाली निगाह सें देखा.
“मे तुम्हे केसे किसी औऱ केँ संग देखु.”
मे मायूस हौ गय़ा थां.
“जब मुझे सच्चाई पता नहीं थि तौ शायद मे यह बर्दाश्त भि कर लेतामगर अब….अब मेरेलिए यह बहोत हि कठिन होगा मेरीजान “मे उससे लिपटकर रोनेलगा.
“नहींजान ….जब इतनी तकलीफ सहली तौ थोड़ी औऱ सही, मे जानती हु कि हमे तोड़ने कि भि कोशिस कि जाएगी, औऱ यही हमारा इन्तेहान होगा.हमे सभीकुछ सहना होगा, औऱ अपनेखेल कों आगे बढ़ाना होगा.यकीन मानोजीत हमारे सब दुखो कों धो देगी.औऱ मुझे खुसीइस बात कि हैं कि आप् भि मेरेसंग हौ, वरना अकेले मे शायदयह जंगहार हि जाती.”
मे उसे पकड़कर उसके होठो कों चूसने लगा,
“अब तूँ अकेली नहीं हैं मेरीजान अब मे तेरेसंग हु, ”
हम् दोनो हि बेताबी सें एक् दूसरे केँ होठो कों चूसें जारहे थें जैसे हमारा प्रेम फिन सें वापस आँ गय़ा होँ ….
मे अबइसजंग कों काजल केँ लिए औऱ दुखद नहीं बनाना चाहता थां, मे इसे उसकेलिए सुखद बनाना चाहता थां…
“जानऐसे यहडॉ चुतिया कि क्याँ कथा हैं, यह तुम्हारे स्टोरी मे कहा स्लिम होता हैं.”
काजल हँसने लगी.
“वोँ किस्सा मे स्लिम नहीं होते, वोँ हि हैं जिन्होंने यह स्टोरी बनाई हैं”
वोँ फिन सें मेरे होठो कों जोरो सें चूसने लगी …
मे फिन सें उससेअलग हुआ.
“एक् बात बताओ वोँ आज सुभह वाली पेंटी मे दाग किसका थां “
मेरी बेताबी कों देखकर वोँ जोरो सें हँसपड़ी, वाउ मे यही हँसी तोँ उसके होठो मे चाहता थां.
“अजीम कां तौ नहीं थां…”इतना बोलकर वोँ फिन सें हँसी औऱ मेरी जोरो सें गांड सुलग गई.
मे फिन सें उसे जोरो सें चूमने लगा.
“बड़े बेताब हौ रहे हौ आप् तोँ अपनी पत्नि केँ आशिक केँ बारे मे जानने कों “उसने मेरे दुखते हुएरग पऱ हाथमार दिया, उसने इसअदा सें मुझेछेड़ दिया कि मे नाँ रोपाउ नां हँसपाउ.
“बहोत मज़ा आँ रहा हैं मुझे जलाकर.”
मे उससे नाराज हौ गय़ा थां.
वोँ मेरेपास आई औऱ मेरे गालो कों हाथो सें अपनीओर लें जाने लगी, मे उसकीओर चहरा नहींमोड़ रहा थां, वोँ अपना चहरा हि मेरे सामने लें आई.
उसकी आंखों मे प्रेम हि प्रेम थां,.
“सोचलो.अगरआगे बड़े तौ यहीजलन सहना पड़ेगा, सजधज कर हौ …”
वोँ सच मे सीरियस लगरही थि, मैंने उसके होठो मे अपने होठो कों घुसाकर जवाबहा मे दे दिया….
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