रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 7
मुझेघऱ जाने कां मन हि नहींकर रहा थां, मे बड़े हि भारीमन सें घऱ पहुचा, मेरी बहनेबड़ी हि बेसब्री सें मेरा प्रतीक्षा कररही थि, उनके प्यारे चहरो कों देखकर मेरेमन कि सब थकानमिट गई, अगर मैंने कोई गलती कि तौ इन लोगो कां क्याँ होगा, मुझे इनकेलिए जीना थां, इन लोगो केँ लिए मुझे काजल कां संग चाहिए थां, ताकि मे इनकोपढ़ा सकू, कुछ ऐसी स्थान मे भेजसकू जंहा इनको वोँ नां करनापड़े जौ कि काजलकर रही थि.मे सोफे मे बैठाहुआ उन्हें देखरहा थां औऱ मेरी आंखों मे पानी आँ गय़ा, पूर्वी मेरेगोद मे आकरबैठ गई, कितनी प्यारी थि मेरीजान, मैंने बड़े हि प्रेम सें उसके माथे कों किस किया, निशा भि आँ चुकी थि उसके हाथो मे पानी कां ग्लास थां, औऱ मेरेलिए ब्लैक बहुत …
वोँ भि मेरे बाजू मे आकरबैठ गई थि, मे उसके बालो कों सहलाने लगा,
“तुम् लोगो कि पढ़ाई कैसीचल रही हैं, ”
“अच्छी चलरही हैं भाई मगरयह शहर केँ लोगलोग बड़े हि अजीब सें हैं, ”पूर्वी नें अपने मासूम अंदाज मे कहा
“क्यो क्याँ हुआ “
“कुछ नहीं यंहा केँ लड़के सालेपता नहीं कैसी कैसी ड्रेश पहनते हैं, औऱ बाल देखो तौ हँसी आँ जाती हैं, औऱ लडकिया भि कितने मॉर्डन टाइप केँ कपड़े पहनती हैं “
“तौ तुम्हे भि पहनना हैं क्याँ “
मैंने उसके गालो कों पकड़कर खिंचा
“आउच दर्द होता हैं अब बच्ची नहींहु जोँ गालो कों खिंचते रहते होँ “पूर्वी कां क्रोध मुझे सबसे भाता थां
“अच्छा बहोत बड़ी हौ गई हैं तूँ “
“वोँ तोँ हौ गई हु, लड़केदेख केँ सीटियां मारते हैं मुझे “
निशा उसकीबात सें गुस्से मे आँ गई
“कोई तमीज नहीं हैं क्याँ तुम को भाई केँ सामने ऐसेबात कररही हैं “
शायद पूर्वी कों इसका अहसास हौ गय़ा, औऱ मुझे भि कि मेरी बहनेअब बच्ची नहींरह गई हैं औऱ मुझे इनकेऊपर थोड़ा औऱ ध्यान देना होगामगर मेरेपास वक़्त कि कहा थां,, अगर यह देहात मे हि रहती तौ ऐसीबात मेरे सामने नहींकह पातीमगर अब मुझेलगा कि उन्हें भि शहर कां थोड़ारंग चढ़रहा हैं, मगर मे अपनी बहनों कों बांधकर भि तौ नहींरख सकता थां नां हि रखना चाहता थां, बस वोँ बिगड़ नां जाएयही दिल मे एक् डर सां लगा रहता थां,
“कोईबात नहीं निशायह तौ पागल हैं.तौ तुम् लोगो कों भि ड्रेश चाहिए क्याँ “मैंने दोनो कों पूछा
“नहीं भाई वोँ सभी बहोत महंगी आती हैं “निशा बहोत हि समझदार कि तरहबात करनेलगी थि
“तौ तेरा भइया क्याँ इतना गरीब हैं, औऱ ऐसे भि मुझे इंक्रीमेंट भि मिलने वाला हैं “मैने उन्हें खुस होतेहुए बताया
“ऐसे भाई एक् बात बोलू बुरा तोँ नहीं मानोगे “निशा थोड़ा धीरे-धीरे सें बोलि
“हम्म क्याँ हौ गय़ा “उसकेइस तरह केहना मुझे अजीबलगा थां,
“वोँ भाभी नें आजहमे बहोत सारी ड्रेशस दिलवाई हैं, मगर उन्होंने कहा कि आपकोपता लगेगा तोँ शायद आप् हमे डांटेंगे.”उसकासर झुक गय़ा थां,
“वोँ कबआयी “
“वोँ तोँ दोपहर सें आँ गई हैं, हम् बाहर् शॉपिंग किये औऱ बाहर् हि खानां खाकर आँ रहे हैं, आपके लिए भि पैक करवा केँ लाया हैं….वँहा सें आने केँ बाद वोँ थककरसोई हुईँ हैं.प्लीज उन्हें मत डांटना आप् लोगो कां कल भि झगड़ाहुआ थां “
निशा कि बात सुनकर मैंने निशा कों देखा, वोँ सहम गई.अब मेरेघऱ मे दो जवान बहने थि जिनकी जिम्मेवारी मेरेऊपर थि, औऱ मे भि पागलो जैसे काजल केँ संगऐसा बर्ताव कर बैठा मुझेपता थां कि काजल मेरी बहनों कां ध्यान अपनी बहनों कि तरह हि रखती हैं, मे तोँ अपने हि कामो औऱ परेशानियो मे उलझा रहता थां मगर काजलजब भि वक़्त मिलता मेरी बहनों केँ संग हमने फिरने चली जाती, वोँ उनकेलिए दोस्तो जैसी थि औऱ मे….मे किसी खड़ूस बाप कि तरह, मुझेअब अपनी बहनों सें नजदीकियां बढ़ानी थि ताकि मे उन्हें वक़्त देपाउ औऱ उन्हें खुस भि रख पाउ.मैंने प्रेम सें निशा केँ सर पर्र हाथ फेरा औऱ उठाकर अपने कमरे मे चला गय़ा, वँहा काजल बेफिक्र सोई हुई थि, मैंने उसे जगाना भि ठीक नहीं समझा ….
मगर मेरीआहट सें वोँ जाग चुकी थि औऱ आंखों मे थोड़ाडर लिए मुझे हि देखरही थि, उसका वोँ मासूम चहरा,,,
मे तौ बसउसे निहारता हि रह गय़ा, यह मेरी काजल थि, मेरी जान.;मगर क्याँ करूअब मे इससे वोँ प्रेम नहींकर सकता थां जोँ कभी किया करता थां, मैंने इसे पटाने केँ लिए नाँ जाने क्याँ क्याँ पापड़ बेले थें, मे एक् गहरी सांस छोड़कर बाथरूम कि तरफ जानेलगा मगर मे फिन सें मुड़ा, उसका चहरा मायूस थां औऱ वोँ थोड़ी सहमी हुईँ लगरही थि, मे फ्रेश होकरआया वोँ भि थोड़ी पूरीतरह सें उठ चुकी थि, हम् दोनो नें हि कोई बातचीत नहीं कि जब तक कि हम् फिन सें अपने कमरे मे नहीं आँ गए, हम् दोनो हि खामोश बैड मे बैठेहुए थें….बोलने कों कुछ बाकी भि तोँ नहीं थां,
“तुमने जोँ बहनों कों कपड़े दिलवाए उनकेलिए थैंक्स “
असल मे मुझेयह खामोशी खाएजा रही थि.
“वोँ मेरी भि बहने हैं “
उसने एक् सपाट सां जवाब दिया,
“तुम् शबनम सें बात करती हौ…”मुझसे रहा नहींजा रहा थां,
“ह्म्म्म “
“तब तोँ यह भि जानती होगी कि मे उसे अपनेसंग रखरहा हु “
“ह्म्म्म “
“हरचीज उसे बताती हौ, हमारे बेडरूम कि बाते भि “
अब काजल खामोश थि, मे उसके चहरे कों नहींदेख रहा थां, मगर मुझे उसकी सिसकिया सुनाई देनी शुरुआत होँ गई थि,
मैंने उसे देखा, मे क्याँ कहता.कि कोईबात नहीं जोँ हुआऐसा होता हैं, मैंने तुम्हे माफकर दिया.यह तोँ मे नहींकह सकता थां, तौ क्याँ कहता कि निकलजाओ मेरी जीवन सें ….
नहींयह भि मे नहींकह सकता…
“रो क्योरही हौ”मैंने यहकहा, क्योकि मेरेपास कहने कों कुछ थां भि तोँ नहीं.वोँ हल्के सें मुझे देखी, मेरी आंखों मे झांकते हुए वोँ मेरे सीने सें लग गई, औऱ उसके आंसू मेरे सीने कों हि भिगोने लगे, मेरे हाथ नां जानेकिस ताकत केँ कारण उसके बालो कों सहलाने लगे थें.मे उसपर प्रेम तोँ बिल्कुल भि नहीं जताना चाहता थां मगर क्याँ करू,.
मैंने उसे पलंग मे लिटा दिया, उसके कालेबाल पलंग मे हि फैलगए थें
उसके गुलाबी फुलेहुए गाल आंसुओ सें गीले थें, आंखों मे अभि भि नमी थि, पलके अब भि झुकी हुई थि, होठअब भि फड़फड़ा रहे थें, सिसकिया अब भि हल्के हल्के सें निकलरही थि, धड़कने अब भि थोड़ीतेज थि, सांसे अब भि थोड़ीगरम थि,
मेरेहाथ उसके गालो कों सहलाने लगे, मेरा मन चाहता थां कि मे उससे लड़ाई करू, उसे जान सें मार डालू औऱ मे किसी प्रेमी कि तरहउसे निहार रहा थां, शायद वोँ भि मेरेइस व्यवहार कों लेकर थोड़े आश्चर्य मे थि मगर मेरा स्वयं पऱ काबू हि नहींरहा, मे उसके फड़फड़ाते हुए होठो केँ पास अपने होठो कों लेजाकर उसकी नरमी कों महसूस करने लगा, उसकी सिसकिया अबबंद होँ गई थि मगर उसकी सांसे थोड़ीतेज हौ चली थि, मेरे होठो कि त्वचा हल्के हल्के हि उसके होठो सें स्पर्श कररही थि, उसके सांसे उत्तेजना सें बढ़नेलगी थि, वोँ एक् अजीब सें दौर सें गुजररही थि, वैसा हि कुछहाल मेरा भि तौ थां, एक् डर, उसके जेहन मे थां मगर वोँ इस अचानक हुए बदलाव सें औऱ भि घबराई हुइ थि, वही नफरत औऱ दर्द मेरे जेहन मे थां पऱ मे अपने उमड़ते हुए प्रेम कि धार कों रोक हि नहींपा रहा थां, मे भि इसबात कों लेकर घबराया हुआ थां औऱ अपने होठो कों उसके होठो सें मिलने सें रोकना चाहता थां, मगर मेरे अंदर कां वोँ प्रेमी जौ इस सामने लेटेहुए व्यक्ति सें बेपनाह मोहोब्बत करता थां वोँ मुझेरोक रहा थां, वोँ मुझे उसकेओर बड़ारहा थां, मे जैसे किसी लोहे कि तरहउस चुम्बक कि ओर खिंचा जारहा थां,
हमारे फड़फड़ाते हुएहोठ एक् दूसरे मे मिल हि गए, मे उन्हें उतने हि प्रेम केँ चूमरहा थां जितने कि जिंदगी मे कभी किया होऊ.वोँ हल्के हल्के सें रोनेलगी थि, उसके हाथ मेरेगले सें आकर लिपटगए, वोँ भि अपने होठो कों ताकत सें मेरे होठो मे भरने लगी.हम् दोनो हि एक् दूसरे मे गुथेजा रहे थें, हमारा पूरा अस्तित्व हि एक् दूसरे मे मिलने लगा थां…….
जब हम् अलगहुए हमारी सांसे उखड़ी हुई थि, आंसू कि एक् बून्द मेरे आंखों सें भि टपक गई, काजल केँ चहरे मे छोटी सि हि सहीमगर मुस्कान थि, वोँ मेरे बालो कों सहलाने लगी मे उसके आंखों मे देखने लगा …….
“तुम्हारी बेवफाई केँ लिए मे तुम्हे माफ नहींकर सकता “
मेरेमुह सें यह अल्फाज निकलेंगे यह तोँ नां काजल नें सोचा थां नां मैंने, वोँ दंग सि रह गई वोँ बस मुझे देखती रही
“मगर क्याँ करू तुम्हे प्रेम करना भि तोँ नईछोड़ सकता “
मे भि जानता थां औऱ वोँ भि कि मेरेदिल नें जौ यह दोनो बातेकही हैं वोँ सच हि तौ थि.वोँ मुझे जोरो सें अपनीओर खिंची औऱ मे उससे लिपट गय़ा.
“मे जानती हु….मे जानती हु कि जोँ मैंने किया वोँ माफी केँ काबिल नहीं हैं, औऱ मे यह भि जानती हु कि आप् मुझे बेतहासा प्रेम करते हैं,.मगर एक् बार आप् हि बताइये कि मे अब क्याँ करू, जौ आप् बोलोगे वोँ मे करूँगी …”काजल कि बातो मे सच्चाई थि मगर उसने मेरेलिए हि मुश्किल पैदाकर दि थि, अब मे उसे केसेकहु कि उसे क्याँ करना चाहिए वोँ तौ मुझे भि नहींपता थां.
मे उठा औऱ एक् सिगरेट जलाकर सीधे बालकनी मे पहुच गय़ा,
मे गहरेकस लगताहुआ गहरेसोच मे थां…काजल मेरेपास आकरखड़ी होँ गई थि,
“तुम् वोँ होटलछोड़ दो “
“तुम्हे लगता हैं यह इतना आसान हैं, हमारा घऱलोन मे हैं, औऱ बहनों कि पढ़ाई औऱ आगे कां खर्च.”
“मे जितना कमाता हु उसमे हम् अच्छे सें जी सकते हैं, औऱ किसी दूसरे होटल मे कोई नौकरी तौ तुम्हें मिल हि जाएगी, ”
“बात मात्र पैसों कि नहीं हैं देव.तुम्हे क्याँ लगता हैं अजीम मुझे होटल छोड़कर जाने देगा “
मेरी आंखे चौड़ी होँ गई मे काजल कों देखने लगा.
“वोँ इतना शरीफ नहीं हैं देव, मेरेलिए होटल छोड़कर जानां शबनम जितना आसान नहीं हैं, वोँ बहोत हि कमीना हैं देव.मुझे अपनी चिंता नहीं हैं पऱ मेरीवजह सें बहनों कि जीवन मे कोई तकलीफ नहींआनी चाहिए …”
काजल कि बात सें मे दंगरह गय़ा,
“हादेव अजीम पागल हैं, रश्मि सें पूछो कि उसनेउसे क्यो छोड़ा थां, वोँ बहोत हि खतरनाक हैं.”
“तौ क्याँ मे ऐसे हि हाथ पऱ हाथधरे बैठे रहू, मे अपनेजान मे खेल जाऊंगा काजल तुम् एक् बार हिम्मत तोँ करो हम् यहशहर हि छोड़कर चले जाएंगे.”
मैंने काजल कि बांहो कों पकड़ लिया थां.
“देवबात कों समझो, जब प्रॉब्लम इतनीबड़ी नहीं हैं तोँ क्योइसे बड़ा बनाना “
“मतलब “मुझेकुछ समझ नहीं आँ रहा थां,
वोँ मेरे सीनेइस लागकर मेरेपीठ कों सहलाने लगती हैं…
“देखो, अजीम अपने कारोबार केँ लिए औऱ अपने स्वार्थ केँ लिए मेरायूज़ करता हैं मगर बदले मे अच्छे खासे पैसे भि तोँ देता हैं, मेरी सेलरी तुमसे 5 गुनी ज़्यादा हैं, औऱ वोँ मुझेकोई तकलीफ भि तोँ पहुचने नहीं देता………”
मे उसके तर्क सें हैरान थां.
“औऱ तुम् हि सोचोकल सें पहले क्याँ तुम्हे मेरे प्रेम मे कोईकमी दिखाई दि थि,.मे तुमसे दिलोजान सें प्रेम करतीहु देव, क्याँ जोँ चलरहा हैं वैसा हि नहींचल सकता, यह नाँ मात्र हमारे केरियर कां प्रश्न हैं बल्कि हमारी खुसी भि इससे जुड़ी हुइ हैं, मे अपनेकाम सें खुसहु देव मुझेकोई भि तकलीफ़ नहीं हैं, मगर क्याँ तुम् मुझेइस रूप मे स्वीकार कर पाओगे.मे तुमसे वादा करतीहु कि तुम्हारे लिए मेरा प्रेम कभीकम नहीं होगा.”
काजल कि बातो पऱ मुझे विस्वास हि नहीं हौ रहा थां, वोँ चाहती क्याँ थि ??
वोँ चाहती थि कि मे उसके दुसरो केँ संग सोने पर्र स्वीकृति देदु,.
“तुम् पागल हौ गई हौ “मैंने उसे अपने सें हटा लिया
“तुम् समझती क्याँ हौ मुझे, मे तुमहे पैसे केँ लिएबेच दु “
काजल कि आंखेफिन सें नम होनेलगी थि जबकि मुझे क्रोध आँ रहा थां
“देव मेरीजान, यह एक् बिजनेस हैं तुम् समझते क्यो नहीं, किसी औऱ केँ चोदने सें मेरीचुद घिस नहीं जाएगी “
काजल कि इसबात पर्र मुझे विस्वास हि नहींहुआ वोँ ऐसा केसेबोल सकती हैं, वोँ किसी रंडी कि तरहबोल रही थि.
मेरे चहरे मे आयेभाव कों उसनेपढ़ लिया,
“देव मेरा प्रेम केवल तुम्हारे लिए हैं, अगर मेराबदन किसी औऱ कां हौ भि जाय तौ क्याँ फर्क पड़ता हैं, क्याँ हम् एक् ओपन रिलेशनसिप मे नहींरह सकते.मेरीतरफ सें तुम् किसी केँ संग भि सेक्स करने कों आजद होँ, औऱ मुझे मेरी आजादी दे दो, क्यो हम् इस रिश्ते कि वजह सें अपने केरियर औऱ आजादी कों दाव पऱ लगारहे हैं देव…”
उसकीबात मेरेमन केँ ऊपर सें जारही थि, मैंने आज तक उसके सिवा किसी दूसरी लड़की सें सेक्स नहीं किया थां औऱ वोँ.वोँ मुझेओपन रिलेशन मे लाना चाहती थि.
“क्याँ तुमने कभी शबनम केँ बारे मे गलत नहीं सोचा, सच सच बताना देव क्योकि मुझेसभी कुछपता हैं”
काजलबात सें मे थोड़ासहम गय़ा,
“देव तुम् उसके बारे मे सोच सकते होँ मगर मे तुम्हारे सिवा किसी केँ बारे मे नहींसोच सकती, जोँ मे करतीहु वोँ बस मेराकाम हैं, मुझे ग्राहकों कों खुस करने केँ हि तौ पैसे मिलते हैं”
“तुम् एक् रंडी कि तरहबात कररही हौ “मे उग्र होँ गय़ा थां.
“देव आहिस्ता सोचना इस बारे मे, कोई जल्द नहीं हैं, औऱ तुम् मुझे रंडी बोलो याँ औऱ कुछमगर असलिलयत यही हैं कि मे तुमसे बहोत प्रेम करतीहु,,,, ”
वोँ मेरे गालो मे एक् किस देकरबैड मे चली गई, औऱ मे सिगरेट केँ गहरेकस लगाता हुआबस काजल कों देखता रहा औऱ उसके प्रस्ताव केँ बारे मे सोचता रहा…….
क्याँ सही औऱ क्याँ गलत केँ खेल मे मेरेसर मे दर्द होनेलगा थां, मे बालकनी मे हि बैठा बैठा सोनेलगा थां…….
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रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 8
शबनम अभि भि नंगी लेटी हुई थि औऱ मेरे वीर्य कों अपने पेंटी सें पोछरही थि.मुझेतब आश्चर्य हुआजब उसने अपनी पेंटी कों अपने पर्स मे डाल लिया,
“अरेयह क्याँ कररही होँ, फेक दोइसे “
वोँ जोरो सें हँसी …
“इतनी महंगी पेंटी फेकदु.औऱ ऐसे भि यह मुझे तुम्हारी याद दिलाएगा, इसे मे नहीं धोने वाली.”उसने मुझेआंख मारी, मगर उसकीबात सें मेरे लिंग मे एक् उछाल जरूर आँ गय़ा…
“चलो रश्मि मेडम सें भि मिल लेताहु औऱ तुम् उन लकड़ियों कि ट्रेनिंग शुरुआत करदो ….
मे रश्मि केँ केबिन मे बैठाहुआ थां, वोँ किसी सें मोबाइल सें बातकर रही थि, हमेशा कि तरह सुंदर रश्मि, अच्छी खासीकद थि, गोरों चिट्टी लड़की, औऱ चहरे मे मालकिनों वाला रुआब,,.
“ह्म्म्म तौ मिस्टर देव कैसारहा पहलादिन शबनम केँ संग “वोँ मोबाइल रखतेहुए बोलि, उसके चहरे मे एक् मुसकान थि,
“अच्छा थां मेडम “
“तुम् नहीं सुधारोगे “
मुझे अपनी गलती कां अहसास हुआ,
“सॉरी रश्मि “
वोँ फिन सें हल्के सें मुस्कुराई औऱ अपनी कुर्सी सें उठाकर मेरे सामने टेबल मे आकरबैठ गई, उसके मिनी टाइट स्कर्ट सें उसकी दोनो जाँघे चमकने लगी, वोँ कमाल कि सेक्सी लगरही थि, होठो पे लगाहुआ लाल लिपिस्टिक औऱ उसके काले खुलेहुए बालउसे औऱ भि सेक्सी लुकदे रहे थें, रश्मि कों इतना सजकरआते मैंने पहलीबार देखा थां,
“नजरबचा केँ क्योदेख रहे हौ सीधे हि देखलो.”
वोँ फिन सें हँसी, मगर मे झेप गय़ा, उसने मुझे अपनी जांघो कों छुपकर देखते पकड़ लिया थां, वोँ मेरे बालो मे हाथ फेरकर मुस्कुराई.
“कमान दोस्त देव, इतना शर्माना बंदकरो अब तौ तुम्हे कस्टमर औऱ लड़कियों केँ संगडील करना पड़ेगा…”
वोँ साली कातिल थि, गजब कि मुस्कान थि, आज तौ दिल औऱ लन्ड दोनो हि बेताब हौ रहा थां, पहले शबनम औऱ फिनयह …
शायदउसे मेरे पेंट कि ऊँचाई कां पताचल गय़ा.
“ओह मिस्टर, ऐसे ऊँचा करने कि जरूरत नहीं हैं, फ्रेंड बोला हैं तुम्हे बॉयफ्रेंड नहीं “
उसने मेरे पेंट कि तरफ इशारा करके मुझे हल्के सें डांट दिया औऱ मे थोड़ा घबरा सां गय़ा,
“सॉरी वोँ,.”
“क्याँ सॉरी साले घंटेभर सें तुम् शबनम केँ संग ऐयासी कररहे थें औऱ फिन सें खड़ाकर रहे होँ,.”वोँ टेबल सें उठकरफिन सें अपनी कुर्सी मे बैठ गई मगर इससे मेरेदिल मे एक् डरभर गय़ा, वोँ सच मे मुझसे इतना फ्रेंडली थि अगर वोँ क्रोध हौ गई तोँ…
“सॉरी मेडम …”मैंने अपनासर झुका लिया थां,
“चलोकोई नहीं आईन्दा सें ध्यान रखना, हम् मित्र हैं उससे अधिक बढ़ने कि कोशिस मत करनाओके “
“ओके मेडम “
मे अभि भि सर झुकाए हुए थां,
“अबअगर एक् बार भि तुमने मुझे मेडमकहा तौ सालेजान सें मार दूंगी “वोँ झूठे गुस्से सें बोलीं औऱ हँसपड़ी, मे भि उसकीबात सें थोड़ा रिलेक्स हौ गय़ा थां….
“तोँ….मुझे होटल केँ सारे डिटेल्स चाहिए, खासकर अकाउंट केँ, हौ सके तौ आज हि.”
“जी …….रश्मि “मैंने अपने कों सुधारते हुएकहा जिससे वोँ हल्के सें मुस्कुराने लगी ………
आज रश्मि कों होटल कां पूरा कारोबार समझते मुझेदेर होँ गई थि, शबनम केँ संगहुआ एनकाउंटर औऱ इतना सारा माथापच्ची वालाकाम, मे बुरीतरह सें थकाहुआ घऱ पहुचा, निशा सोफे मे हि सोई हुई मिली, रात 1 बजरहे थें…
मे उसकेपास जाकरबैठ गय़ा औऱ उसके माथे मे हाथ फेरने लगा …
मेरे स्पर्श सें वोँ जागी,
“आप् आँ गए भाई “वोँ सोफे सें उठ चुकी थि
“हाथ पांवधो लीजिये खानां लगा देतीहु “
“अरे पागल तुँ क्यो परेशान होँ रही हैं मे खा केँ आया हु, तेरी भाभी आँ गई, ”
“नहीं थोड़ीदेर पहले तौ फिन सें गई हैं, रात कों नहीं आँ पाऊंगी बोलरही थि…”उसकी बात सुनकर मेरा चहरा थोड़ा दुःखी हौ गय़ा, जिसे निशा नें पढ़ लिया,
“भाई आपके औऱ भाभी केँ बीच सबकुछ ठीक तोँ हैं नाँ ……”
“हा मेरीजान सभीठीक हैं, जा जाकेसो जा, ”
मे अपने कमरे मे आँ गय़ा, औऱ फ्रेश होकरखाट मे लेट गय़ा, बीते हुए पूरेदिन कि तस्वीर मेरे दिमाग़ मे आनेलगी थि, मेसोच रहा थां कि आखिर काजल क्याँ प्लान कररही हैं.उसके पास इतने पैसेकहा सें आने वाले हैं,
काजल जैसी भि हौ मगर वोँ मूर्ख तौ नहीं थि, वोँ पढ़ी लिखी थि, औऱइस बिजनेस कि एक्सपर्ट भि थि, वोँ टैलेंट केँ मामले मे भि कमाल कि मैनेजर थि, उसे अकाउंट कि भि अच्छी जानकारी थि, तोँ मे इतना तोँ समझता थां कि अगर वोँ कुछ करने वाली हैं तौ उसकेपास कुछ तौ सॉलिड प्लान होगा….
क्याँ मुझे उससे पूछना चाहिए, क्याँ मुझे उसकी सहायता करनी चाहिए…????
मेरेमन मे हरचीज बहोत हि तेजी सें चलरही थि कि दरवाजे मे दस्तक हुइ, दरवाजा लॉक नहीं थां तोँ वोँ खुलता चला गय़ा, वोँ निशा थि, उसने अभि अभि चेंज किया थां वोँ एक् कालेरंग कि झीनी सि नाइटी मे थि, आज पहलीबात मे उसेइस रूप मे देखरहा थां, हा वोँ मेरी बेहन थि औऱ मे उसके बारे मे कुछ भि गलत नहींसोच सकतामगर वोँ सच मे सेक्सी लगरही थि, वोँ धीरे-धीरे सें मेरेपास आयी औऱ मेरेसंग हि खाट मे लेट गई औऱ मुझे कसकरपकड़ लिया …
“क्याँ हौ गय़ा बड़ा प्रेम आँ रहा हैं भइया पऱ.औऱ यह किसने दिया.”
“नींद नहीं आँ रही भाई, इसे तौ भाभीजी नें लिया हैं हमारे लिए, बहोत सें मॉर्डन कपड़े दिलवाए हैं.कैसी हैं “
वोँ मुझे छोड़कर उठी औऱ अपने कपड़े कों पकड़कर मुझे दिखाने लगी.
“हम्मठिक हैं पऱ सोते वक्त हि पहनाकर इसे, बहोत ट्रांसपरेंट हैं, आज मुझे भि पताचला कि मेरी बेहन कितनी बड़ी होँ गई हैं”
मे यहसभी अचानक हि बोल गय़ा थां मगर निशा नें जैसेसभी समझ लिया उसका चहरा लज्जा सें लाल होँ गय़ा थां,
“छि भाई मे जारही हु, ”
वोँ पलंग सें उठाने वाली थि कि मे उसकाहाथ पकड़कर खिंचते हुएउसे अपने सीने सें चिपका लिया.वोँ भि मेरे बालो सें भरे नंगे सीने मे स्वयं कों समेटने लगी, उसके गाल मेरे बालो सें रगड़ खानेलगे थें जिसका कोमल अहसास मेरा प्रेम औऱ भि बढ़ारहा थां, मे उसके बालो मे हाथ फेरने लगा थां.मेरी बांहे उसके कोमल शरीर कों समेटे हुए थि औऱ उसकी सांसे मे अपने सीने मे महसूस करपारहा थां, नाँ हि वोँ कुछबोल रही थि नां हि मे मगर मुझे इससे बहोत चैनमिल रहा थां, दिन भर कि थकान औऱ मन कां पूरा टेंसन हि धूल गय़ा, मे उसकेसर पर्र एक् किस करके अपनी आंखेबंद करबस उसके अहसास कों महसूस करनेलगा…….
बदन कि थकावट नें आंखेकब लगा दि पता भि नहींचला …….
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hmm kajal ne shareef dev ko uske aage uski hi behnein paros krr uski jubaan band krr di or shabnam bi kya isi game kaa hissa h ?
Kajal jali So muze sukun mili Meri yeh review yaad haen. sandy sir, brego4 ji, kamdev99008 ji, aka3829 ji & Dr sahab, black boy, luckylonda, & my other dear xp fnds +25 diye the sabhi ne
याद हैं नैनाजी, वोँ xp केँ दिनफिन सें xf पऱ लौट केँ आँ रहे हें. 1 साललगा मगरसब न् सही ज़्यादातर पुराने मित्र वापसमिल गए
रंडियो कां घऱ (Full Storyd) – New Episode
अध्याय 9
जबआंख खुली तौ सूरज भि चढ़ चुका थां, औऱ मेरे बाजू मे सोने वाली निशा कि स्थान अब काजल नें लें लिया थां, वोँ मुझे अपने बांहो मे समेटे हुएसो रही थि, हमारे बीच जोँ कुछ भि चलरहा हैं उसकेबाद भि वोँ मुझसे ऐसे लिपटी हुई थि जैसे कि अब भि वोँ मुझसे उतना हि प्रेम करती हौ, मे उसके मासूम सें चहरे कों देखरहा थां, उसके तन कां वोँ पतला कपड़ा उसके यौवन कों ढक पाने मे असमर्थ थां, उसके स्लेवलेस नाइटी सें झांकते हुए उसके उजोर औऱ जांघो केँ बीच सें झांकते हुए उसके योनि केँ भागइस बात कां इशारा देरहे थें कि उसने नीचेकुछ भि नहीं पहना हैं, मेरे सीने मे सररखे वोँ एक् मासूम सि बच्ची लगरही थि, उसके लिए मेरेमन मे प्रेम हि प्रेम थां, जौ उसे देखते हि उमड़कर सामने आने लगा, मगर………….???
मगर पूरीरात वोँ नाँ जाने क्याँ गुल खिलाकर आई थि, उसकी इस मादक जवानी कों भोगने वाला मे नहींकोई औऱ हि थां, उसके कोमल उरोजों कों मसलने औऱ अपने दांतो केँ निशान उसमे छोड़ने वाला मे नहींकोई औऱ हि थां, उसके योनि केँ रस सें भीगाहुआ लिंग मेरा नहीं किसी औऱ कां रहा होगा…….
जलन, ईर्ष्या, दुख, औऱ क्रोध.सब मेरेमन मे एक् संग आँ करचले गए, वही मे प्रेम, दर्द, उत्तेजना, केँ कम्पन कों भि अपनेदिल मे महसूस कररहा थां, यह आज भि, सभी जानते हुए भि, मेरे लिएसोच पाना कठिन हौ गय़ा थां कि काजल कां शरीर मेरे सिवा किसी औऱ कां भि हैं, मगर….
मगरजिस वक्त मैंने शबनम कि पेंटी उतारी थि उसी वक्त काजल मेरे प्रेम केँ बंधन सें आजाद होँ चुकी थि,.अब वोँ बंधी नहीं थि क्योकि मैंने भि इस बंधन कों तोड़कर आजदी कों चुना थां, अब यह आजादी मुझे कितना दर्द देने वाली थि यह तौ मुझे भि नहींपता थां……….
मे उठाने कों हुआ तोँ काजल मचली, औऱ मुझे औऱ भि जोरो सें जकड़ लिया, मे अपने होठो कों उसके होठो केँ पास लाकर उसके गुलाबी होठो मे अपने होठो कों रख दिया, मे हल्के हल्के सें उसे चूसना चाहता थां ताकि वोँ जग नाँ जाए.मे डरनेलगा थां….मे डरनेलगा थां काजल कों अपना प्रेम दिखाने सें, मे नहीं चाहता थां कि उसेपता चले कि मे उससे कितना प्रेम करता हु, वोँ बसयही समझे कि मे उससे नफरत करनेलगा हु,
मगर बाबू प्यार मुश्क छिपता तौ नहीं …
मे तौ बहोत हि हल्के हल्के हि उसके होठो कों चूमरहा थां मगर उसने मेरे बालो मे अपनेहाथ रखदिए औऱ इससे पहले कि मे वँहा सें उठ भागता उसने अपनी पूरीजीभ हि मेरे होठो मे घुसा दि,.दोस्तो सच बताऊ कि यह मजबूरी क्याँ थि??
मे उसेछोड़ भि नहीं सकता थां औऱ पकड़ भि नहीं.मे अपने हि मन केँ कोलाहल मे घूम सां होँ चुका थां,, मगर मे उसके होठो कों चूसने लगा, मे भूल जानां चाहता थां कि मे क्याँ हु, वोँ क्याँ हैं…
जब हम् अलगहुए तोँ काजल कि आंखे मुझे हि देखरही थि औऱ होठ.होठो मे एक् मुस्कान फैलेहुए थां जैसे मेरी चोरीपकड़ ली हौ…
मे थोड़ा नर्वस थां मे जल्द सें उठाना चाहता थां मगर काजल नें मुझेजकड़ लिया थां औऱ वोँ अब मेरेऊपर आँ गई, उसके बाल फैलेहुए थें, माथे कां सिंदूर थोड़ा फीकालग रहा थां, उसकेकमर मेरेकमर केँ ऊपर थें, मेरा लिंग उसके नंगे जांघो केँ बीचरगड़ खारहा थां, उसके बाल मेरेमुह मे फैलगए जिसे मैंने हटाया, वोँ बहोत हि मादकता सें मुस्कुरा रही थि, शायद मे इस कां दीवाना हि होँ जाताअगर मुझे असलियत पता नं होती…
मगर अब भि तौ मे उसका दीवाना हि थां….
उसने मेरे हाथो कों अपनीकमर मे रख दिया औऱ झुककर मेरे गालो कों, माथे कों, नाक, होठ, आंखे बल, गला सभी अपने होठो सें भिगोने लगी थि, उसके हाथ मेरे छाती मे चलते, पीठ मे चलते, मेरे कमर केँ नीचे पहुचते, बालो केँ सहलाते याँ दोनो हाथो सें मेरे चहरे कों पकड़ लेते औऱ वोँ मुझे बेतहासा चूमती….
वोँ पागल होँ गई थि, इतनी जितनी कि वोँ पहले होती थि, मुझसे रहा नहीं गय़ा औऱ मैंने भि उसके बालो कों पकड़कर उसके चहरे कों अपने चहरे सें मिला लिया….
उसकी आंखों सें टपकाहुआ आंसू मेरे गालो मे फैल गय़ा थां, औऱ मे उसके होठो कों अपने होठो सें अलग करना हि नहीं चाहता थां,.
हम् तब तक ऐसे हि रहेजब तक कि निशा नें दरवाजा नहीं खटखटाया, हम् दोनो हि एक् दूसरे सें अलगहुए औऱ एक् दूसरे केँ चहरे कों देखकर मुस्कुराए ….
“भाई.ब्रेकफास्ट लगादु क्याँ …”
“रुक फ्रेश होकेआता हु “
मे लेटेहुए हि चिल्लाया.
“रुको नाँ थोड़ीदेर “
काजलअब भि मेरेऊपर हि थि.
“अगर तुम् रात कों आँ जायाकरो तौ सारीरात तुम्हारे संग बिताऊंगा “
मैंने बुझे स्वर मे कहा जिसका कोई भि जवाब उसकेपास नहीं थां, उसका खिलाहुआ चहरा मुरझा गय़ा औऱ वोँ मेरेऊपर सें हटी, मे सीधे बाथरूम मे घुस गय़ा….
मे दफ़्तर केँ लिए रेडी हौ रहा थां, काजल बाथरूम मे थि, तभी उसकाफोन बजा.
“देव देखो तोँ किसका कालआया हैं”
वोँ बाथरूम सें हि चिल्लाई,,,
उसकाफोन उसके पर्स मे रखा थां मैंने उसे खोलाफोन निकाल करउसे दे दिया, वोँ बाथरूम मे हि बात करनेलगी,.तभी मेरीनजर उसके पर्श पर्र पड़ी, एक् कालेरंग कां कपड़ा उसके अंदर थां जोँ कि फोन केँ संग थोड़ा बाहर् आँ गय़ा थां, मे जाकरउसे बाहर् निकाला, वोँ पेंटी थि…
काजल कि पेटी जिसपर किसी केँ वीर्य कों पोछा गय़ा थां, जिसके कारण वोँ कड़ा होँ गय़ा थां, जैसे शबनम नें मेरे वीर्य कों पोछा थां…
काजलबात करके मुझेफोन देने कों हाथ बाहर् निकाली औऱ उसकीनजर मेरेऊपर गई जौ कि उस पेंटी कों ध्यान सें देखरहा थां,
“उसे भि देदो, धो लेतीहु “
उसका स्वर ठंडा थां, मैंने उसके हाथो सें फोन लिया औऱ पेंटी उसके हाथो मे थमा दिया …….
एक् बार हम् दोनो कि आंखे मिली,
“अब छुपाने कों हमारे बीचरहा क्याँ हैं देव…….”
काजल कि बात कां जवाबदिए बिना मे पीछे मुड़ा हि थां,
“मगर तुम् मुझसे छिपाने लगे हौ “मे आश्चर्य सें भराहुआ फिन सें मुड़ा.इस बार काजल कि आंखे पानी सें भरी हुइ थि,
“अपना प्रेम.तुम् मुझसे अपना प्रेम छुपाने लगे होँ देव”
उसका गाला रुंधा हुआ थां, मेरे पास उसके प्रश्न कां कोई जवाब भि तौ नहीं थां, मे जल्दी हि वँहा सें निकल गय़ा…….
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अध्याय 10
होटल मे घुसते हि मुझे रिसेप्शन मे हि रवि दिखाई दिया (मेहता एंड सन्स होटल कां मालिक) वोँ शबनम केँ संगखड़ा हुआ थां संग हि, एक् अधेड़ व्यक्ति औऱ एक् बहोत हि हसीन सि लड़की भि खड़ी हुई थि…
“गुड मॉर्निंग सर “मे रवि सें मिलते हुएकहा.
“गुड मॉर्निंग मिस्टर देव.दोस्त तुमने तौ हमे कंगाल हि कर दिया, हमारी सबसे अच्छी बंदी कों तुम् अपनेपास लेँ आये”
उसने शबनम कि तरफ इशारा किया औऱ शबनम मुस्कुराने लगी.
“सर नथिंग पर्सनल इट जस्ट बिजनेस “
“वोँ सभी तौ ठिक हैं देवजी मगर एक् बात तोँ हैं रश्मि इस होटल कों बहोत आगे लेके जाएगी, जंहा तुम् जैसा मैनेजर हौ औऱ शबनम जैसी hour उसेकौन रोक सकता हैं.”
“थैंकयु सर “
मैंने सोचा नहीं थां कि रवि मुझसे इतने प्रेम सें बात करेगा.
“हम्म औऱ इनसे मिलोयह हैं डॉ चुतिया, औऱ यहआई इनकी सेकेट्री मिस मेरी मारलो “
उन्होंने उस अधेड़ औऱ उस सुंदर लड़की कि ओर इशारा करतेहुए बोले.मे उनकीबात सें चौक हि गय़ा, किसी कां नाम चुतिया केसे हौ सकता हैं.औऱ मेरी मारलो.
“हैल्लो सर “
“हैल्लो, दोस्त मुझे तुम्हारे होटल मे एक् रूम चाहिए.एक् डबल बेडरूम, मेरे औऱ नंबर हौ 123 …”
मे कभीरवि कों देखता तौ कभीउस आदमी कों रवि अपने होटल मे नां लेजाकर उसे मेरे होटल मे क्यो लें आया थां.
“ओक्के सर पर्र यह 123 मे कोईखास बात हैं क्याँ.मतलबकोई दूसरा रूम मिले तौ, ”
साला ठरकी थां, एक् हि बेडरूम चाहिए थां उसे अपने औऱ अपनी सेकेट्री केँ लिए
“हा मेरा लक्की नंबर हैं इसलिये.रवि केँ होटल मे वोँ नंबर खाली नहीं थां तौ मे यंहाचला आया “
रवि नें स्वयं इसे यंहा तक छोड़ा थां तौ यहकोई आम व्यक्ति तौ होगा नहीं, मेरेमन मे कई बाते एक् संगचल गई
“ओकेसर ओके.मे अभि देखता हु “
मे जल्दी हि काउंटर मे जाकर 123 कों बुक करनेकहा औऱ संग हि उनकासब समान उनके कमरे मे पहुँचवा दिया, आश्चर्य थां कि समान केँ नाम पर्र उनकेपास कुछ भि नहीं थां, सिर्फ एक् बेग …
दोपहर मे जब मे होटल केँ राउंड पर्र थां मुझेफिन सें डॉ चुतिया दिखाई दिए, वोँ रेस्टारेंट मे अपनी सेकेट्री केँ संग बैठेहुए थें, संग हि एक् औऱ लड़की भि थि जिसे मे पीछे सें पहचान नहीं पाया थां, मे जाकर उनका कुशलछेम पूछना चाहता थां क्योकि यही तौ मेराकाम थां.मे उनकेपास पहुचा.
“हैल्लो सर, रूम मे कोई प्रॉब्लम तोँ नहीं हुइ, कैसालगा आपको हमारा यह होटल “
मे बड़े हि नम्रता सें सर झुकाए हुए उनसेबात कररहा थां,
“हम्म बहोत अच्छा, औऱ हा इनसे मिलोयह खान साहब केँ होटल कि मैनेजर मिस काजल, आई थिंक तुम् इसे जानते होंगे “
काजल, मैंने जल्दी हि उनकेसंग बैठी हुईँ लड़की कों देखा, काजल मुझे देखकर मुस्कुरा रही थि, यह यंहा क्याँ कररही थि…., वोँ मेरे बोलने सें पहले हि बोलपड़ी.
“जीसर हम् दोनो हि एक् दूसरे कों जानते हैं, ओह देव केसे हौ.”
“अच्छा तुम् कैसी हौ.”
“बहोत अच्छी …”
“हम्म अच्छी तौ होगी हि, बहोत तरक्की जोँ कररही होईखान साहब केँ होटल मे “मे थोड़ीदबी हुईँ आवाज़ मे बोला जिसका मतलब काजल कों साफसाफ समझ मे आँ गय़ा थां…
“लगता हैं तुम् दोनोकुछ पर्सनल बातकर रहे हौ, बहोत हि कोड मे.”डॉ हँसने लगा
“नहींसर कुछ नहीं.अच्छा सर मे चलती हु, मेरे प्रस्ताव पऱ ध्यान दीजिएगा “काजल बोलकर उठ गई, औऱ उन्हें नमस्कार करतेहुए वँहा सें निकल गई,
“बहोत हि खूबसूरत लड़की हैं क्योदेव …”
डॉ नें फिन सें मुझसे कहा
“जी जीसर.एस्क्युस मिसर “
मे भि जल्द सें वँहा सें निकला, काजल गेट पऱ हि मुझे मिली, वोँ मुझे देखकर पार्किंग वाले स्थान मे जानेलगी औऱ अपनी गाड़ी केँ पास जाकररुक गई, उसेपता थां कि मे उसके पीछे हि आँ रहाहु
“क्याँ हुआ तुम् मेरे पीछे क्यो आँ रहे हौ “
“यहचल क्याँ रहा हैं ….रविइसे हमारे होटल मे छोड़कर जाता हैं औऱ तुम् इससे मिलने आती होँ बात क्याँ हैं “
मैंने एक् हि सांस मे बोला, जिससे काजल केँ चहरे मे एक् मुस्कान उभर गई,
“तुम् औऱ तुम्हारी मेडम रश्मि दोनो हि होटल बिजिनेस केँ खेल मे कच्चे होँ “
वोँ इतना हि बोलकर गाड़ी कां दरवाजा खोलने लगी, मे जल्दी हि दरवाजा बंदकर दिया औऱ उसका मार्ग रोककर खड़ा होँ गय़ा.
“मतलब “
मैंने उसेदेख कर देखा,
“मतलब कि यहडॉ चुतिया उर्फडॉ चुन्नीलाल तिवारी यरवदा वाले हैं, औऱ अभि यह यंहा इंस्पेक्टर कि हैसियत सें आये हैं, होटल केँ निरक्षण केँ लिए औऱ उसे रेटिंग देने केँ लिए, मुझे हैरानी हैं कि तुम्हारी मेडम कों भि यहबात नहींपता नां हि तुम्हे.हम् तौ इन्हें खुस करने केँ लिएकुछ भि करने कों सजधजकर बैठे हैं, मगर इन्हें तुम्हारे होटल सें नां जाने क्याँ दिलचस्पी हैं.जोँ कि यह यंहाआकर ठहरगए …”
काजल कि बात सुनकर मुझे अपने हि ऊपर क्रोध आनेलगा औऱ रश्मि केँ ऊपर भि, उसेइन सभी चीजो कि जानकारी होनी चाहिए थि.
काजल नें मुझे हटाया औऱ दरवाजा खोलकर फिन सें निकलपड़ी.अब मुझेसभी कुछसमझ आँ गय़ा थां, काजल डॉ कों अपने होटल बुलाने कों हि यंहाआयी होगी, शायदउसे अच्छी रेटिंग केँ लिएकोई डील भि दि होगी.जोँ भि हौ यह बिजिनेस थां औऱ काजल नें मुझेडॉ केँ बारे मे बताकर मेरेऊपर हि अहसान किया थां, मे फिन सें भागाहुआ वापस पहुचा इसबार डॉ, रश्मि केँ संगखड़ा हुआ दिखाई दिया.मे उनकेपास पहुचा …
“ओहदेव तुम् इनसे मिलेयह हैं डॉ.”रश्मि केँ बोलने सें पहले हि डॉबोल उठा
“यह आज इससे तीसरी मुलाकात हैं, सच मे तुम्हारा होटल तौ कमाल कां हैं जितना सोचा थां उससेकही अच्छा “
“थैंकयु सर “मैंने आभार व्यक्त किया
“अंकल आप् कब तक रुकरहे हैं यंहा पऱ “
रश्मि डॉ कों अंकलबोल रही थि,
“बस बेटा कुछदिन मेराकाम होँ जाएफिन मे चला यंहा सें “
“ओके औऱ देवयह हमारे पर्सनल मेहमान हैं इन्हें कोई भि कमी नहीं होनी चाहिए “
“जी मेडम “
रश्मि नें मुझे देखा
“कितनी बात समझना पड़ेगा तुम्हे “
मे हैरान थां कि वोँ क्याँ केहना चाहरही हैं,
“मेरानाम हैं …”
मुझे अपनी गलती कां अहसास हुआ
“सॉरी रश्मि “
वँहाखड़े सब हँसने लगे …………
मे अभि रश्मि केँ सामने हि खड़ाहुआ थां, औऱ थोड़े गुस्से मे भि थां,
“रश्मि दोस्त तुमने मुझे बताया क्यो नहीं, ”
“ओहअब मे दोस्त बन गयीँ,.”रश्मि नें मुझेबड़े हि अदा सें देखा
“तुम् पहले डिसाइड करलो कि मे तुम्हे क्याँ बोलू,.”इस बार मे गुस्से मे थां औऱ मेरा क्रोध देखकर वोँ हँसरही थि,
“अच्छा अच्छा मजाककर रही थि, तुम्हे जोँ भि केहना हैं वोँ बोललो मगरकहो तौ सही कि क्याँ नहीं बताया …”
“यही कि डॉ चुतिया यंहा होटल कों रेटिंग देनेआये हैं, कम सें कम मे तैयारी…”
मगर रश्मि नें मुझेटोक दिया
“क्याँ क्याँ अंकल यंहा होटल कों रेटिंग देनेआये हैं, पागल हौ गए हौ तुम् किसने कहा तुम्हे …”
अब चौकने कि बारी मेरी थि …मे आंखे फाडेहुए उसेदेख रहा थां,
“तुम् पहले अपने इंफॉर्मर्स कों सही करो, अगर वोँ ऐसे न्यूज़ देंगे तोँ तुम् इस होटल कां बंटाधार कर दोगो …”
रश्मि नें मुझेझडक दिया …
“मगर ….वोँ किसकाम सें यंहाआये हैं “
मे मूर्खो जैसेपूछ बैठा.
“अब तुम् कस्टमर सें उनके पर्सनल कामो कों भि पूछोगे “
रश्मि नें मुझेआंख दिखाया औऱ मे सॉरी बोलकर वँहा सें निकल गय़ा……
मे झल्लाया हुआ थां, काजल केँ कारण मुझेआज रश्मि केँ सामने बेइज्जत होनापड़ा थां.मे अपने केबिन कि तरफजा रहा थां कि मुझे शबनम किसी सें फोन मे बात करतेहुए आती दिखी, वोँ हँसरही थि जैसेफोन मे कोईउसे जोक सुनारहा हौ …
मुझे देखते हि वोँ रुकी मे भि रुक गय़ा,
“ओके मे बाद मे बात करतीहु “वोँ मोबाइल रखकर मुझे देखने लगी, मुझे देखते हुए वोँ अपनी हँसी कों कंट्रोल कररही थि,
“ऐसे क्याँ हँसरही होँ, औऱ तुम्हे पता हैं आज काजल यंहाआयी थि “
“अच्छा “उसने थोड़ा सीरियस होने कि एक्टिंग कि जिसमे वोँ बिल्कुल भि नाकाम हौ रही थि क्योकि उसके चहरे मे अब भि मुस्कुराहट फैली हुईँ थि.
“क्याँ अच्छा, यह काजल समझती क्याँ हैं अपने आप् कों उसके कारण मुझे रश्मि सें डांट खानीपड़ गई “
जौ जोरो सें हँसने लगी जैसे बहोत देर सें हँसीदबा केँ रखी होँ औऱ हंसते हंसते हि मेरे कंधों पर्र हाथरख लिया उसकी हँसी इतनी ज़्यादा थि कि वोँ खड़े भि नहीं होँ पारही थि, उसने अपना चहरा मेरे सीने सें ठिका लिया,
“ऐसे क्यो पागलो जैसेहँस रही होँ “मुझे औऱ भि क्रोध आया
“औऱ नहीं तोँ क्याँ करू वोँ तुम्हे फिन सें मूर्ख बना गई.औऱ क्याँ जरूरत थि उसका पीछा करने कि “
वोँ हंसते हुए मुझसे अलग हुईँ,
ओह तोँ इसेसभी पता हैं, शायद अभि अभि वोँ काजल सें हि बातकर रही थि,
मे नाराज होकर वँहा सें जानेलगा मगर शबनम मेरे पीछे हि मेरे केबिन मे आँ गई,
“अरे सुनो तौ “
“कुछ नहीं सुनना मुझे तुम् औऱ तुम्हारी सहेली.साला मेरी तौ कोई औकात हि नहीं हैं “
मे धड़ाम सें अपने चेयर मे बैठा, शबनम मेरे बाजू मे आकरखड़ी थि, सामान्य सें साड़ी पहनेहुए.उसकेकमर कि नंगी चमड़ी मेरे चहरे केँ पास थि जिसे देखकर मुझेकुछ होनेलगा मगर मे अभि गुस्से मे थां…
वोँ मेरेगोद मे बैठ गई.
“क्याँ डील हुई हैं डॉ औऱ उसकेबीच जिसके बारे मे उसे सोचने कों कहरही थि.”
मैंने अपनेमन कि बात जाननी चाही, उसने अपनी बांहे मेरेगले केँ चारोओर डालकर रखा थां, औऱ मेरे चहरे कों देखरही थि, ऐसालग रहा थां जैसे हम् प्रेमी प्रेमिका हि हैं.
“तुम् काजल केँ मामले मे क्यो जानना चाहते होँ देव, छोड़ो उसे …”
वोँ मेरे बालो कों सहलाने लगी, मे किसी बच्चे कि तरह रूठाहुआ बैठा थां,
“अच्छा अगर नहीं बताना हैं तौ जाओ यंहा सें,.उठो मेरी गोदी सें “
मेरेबात कों सुनकर वोँ हल्के सें मुस्कराई,
“अच्छा तुम् तोँ ऐसे हुक्म झाड़रहे होँ जैसे तुम् मेरे प्रेमी हौ …”वोँ मेरी आंखों मे देखकर कहनेलगी,
“सच कहती हैं काजल कि तुम् बहोत हि मासूम होँ, अब जाकर मुझे यकीन हौ गय़ा”
वोँ मेरे बालो कों सहलारही थि, इतने प्रेम सें जैसे कि सच मे उसका औऱ मेराकोई गहरा नाता होँ, मैंने उसकी आंखों मे देखा औऱ उसके बालो कों पकड़कर उसे अपने चहरे केँ पासला दिया औऱ उसके होठो मे अपने होठो कों डालकर चूसने लगा, वोँ भि मेरा पूरासंग देरही थि, उसके होठो कि नां जाने कितनी लिपिस्टिक मेरे होठो केँ माध्यम सें मेरे अंदर आँ गई थि …
“बताओ नाँ जान क्याँ डील हैं “मैंने उसे छोड़ते हि कहा, मे जानने कों बहोत हि उत्सुक थां.वोँ मेरे गालो मे हल्की सि चपतलगा कर हल्के सें हँसने लगी …
“तुम् सच मे मेरे प्रेमी बनतेजा रहे हौ देव,.इतनी मोहोब्बत तौ मेरे पति नें भि आज तक नहीं दिखाई.दुनिया केँ लिए मे एक् रांडहु औऱ पति केँ लिएबस सेक्स औऱ पैसे कि मशीन.तुम् हि एक् होँ जोँ इतना प्रेम दिखारहे हौ.”शबनम कि भावनाएं बढ़रही थि, शायद हम् दोनो केँ तरफ सें, मे फिन सें उसे खीचकर उसके होठो कों चूसने लगा.जब मैंने उसे छोड़ा तोँ दोनो केँ हि आंखों मे एक् चमक थि …
“अब इमोशनल करके बातो कों घुमाओ मत बताओ कि क्याँ डील हैं…”
वोँ हँसी …
“तुम् तोँ पीछे हि पड़गए दोस्त ….मुझे भि नहींपता कि क्याँ डील हैं.सच मे तुम्हारी शपथ.”
उसने मेरेसर पऱ हाथरख दिया, ऐसे तोँ हमारा नाता इतना नहीं थां कि वोँ मेरीशपथ खायेमगर फिन भि मैंने उसकीबात मान ली, याँ यह बोलो कि दिल नें मुझे मानने केँ लिए मजबूर हि कर दिया.
“हम्म तौ वोँ क्याँ डील लेकरडॉ केँ पासआयी थि ????”
मे थोड़ा अचंभित थां,
“उसनेकहा हैं कि कल कां अखबार देख लेना तुम्हे पताचल जाएगा “
शबनम कि बात सें मे फिन सें आश्चर्य मे पड़ गय़ा थां, आखिर क्याँ हुआ हैं….डॉ किसकाम सें यंहाआया हैं, औऱ वोँ हैं कौन.क्याँ होने वाला हैं आज जौ कल केँ अखबार मे आने वाला हैं…
मैंने अपनासर झटका …
“अब छोड़ोयह सभी जोँ भि होगापता तौ चल हि जाएगा नाँ “
शबनम केँ चहरे मे मुस्कुराहट तैररही थि, उसके गुलाबी होठो कि लाली मुझे नाँ जाने क्यो इतने आकर्षित करते थें, उसका मादकबदन देखकर कोई भि उसे छूने कों बेताब हौ जाए.तोँ मे क्याँ थां, मेरे हाथ उसकेकमर मे चले गए, मे उसके खुलेहुए कमर कों मसलरहा थां, वोँ हल्के नाराजगी भरे स्वीकृति सें मुझे देखने लगी,
“चलो नाँ जान लग्जरी रूम मे चलते हैं “
सच मे मुझेबड़ा मन होँ रहा थां उससे सेक्स ….नहीं नहीं प्रेम(इस नाम सें सेक्स करने मे मज़ाआता हैं).करने कां …
वोँ मुस्करा कर मुझे देखने लगी.
“अच्छा जी, एक् रात कां 1-5 लाखरेट हैं मेरा औऱ तुम् फोकट मे हि मेरीरोज लेना चाहते होँ …”
मैंने उसकेकमर कों औऱ भि जोरो सें रगड़ा.
“यहहवस नहीं मेरीजान प्रेम हैं मेरा “
मैंने आवाज़ कों नशीला करतेहुए एक् अदा सें कहा.
“ओह जनाब कां प्रेम मेरे पिछवाड़े मे गड़नेलगा हैं.”वोँ जोरो सें हँसी, सच मे मेरा लिंग तनकर उसके नितम्भो मे गडनेलगा थां.मे भि हल्के सें मुस्कुराया.
“चलो नाँ दोस्त “
उसने मेरे होठो मे अपनी उंगली रख दि,
“चुपरहो, बहोत काम हैं, औऱ रोजरोज करकेआदत खराब नहीं करनी मुझे.तुम्हारे पत्नि कि साथी हु, तुम्हारी कलीगहु। तुम्हरी प्रेमिका नहीं …”वोँ हंसते हुएखड़ी हुई थि कि मैंने उसके हाथो कों पकड़कर उसेफिन सें अपनेगोद मे बिठा लिया.
“मेरीजान लक्षण तोँ अब प्रेमिका वाले हि दिखरहे हैं.औऱ पैसे कां क्याँ हैं जान मांगो तौ वोँ भि देदे …”
मे हल्के सें मुस्कुराया
“हायराम क्याँ अदा हैं तुम्हारी औऱ यह गरीबो वाले डायलॉग मत कहो, जिनके पास पैसे नहीं होते वोँ हि जान देने कि बात करते हैं….औऱ ऐसे भि तुम्हारी जान तौ काजल कि मुझे क्याँ दोगो “
उसकी वोँ बात सीधेदिल मे लगीमगर थि तोँ सच्ची हि, मेरीपकड़ उसकी सच्ची बात सें हि ढीली होँ गई, जिसका अहसास उसे होँ गय़ा, वोँ शायद मुझे नाराज याँ दुखी नहीं करना चाहती थि वोँ मेरे कानो केँ पासआयी औऱ मेरे कानो मे फुसफुसाने लगी.
“जान.इस बदन कि जोँ कीमत तुम् देते हौ वोँ कोई नहींदे सकता, मगर रोज नहीं, प्लीज़ “उसकीइस अदा नें मेरेदिल कों बहोत चैन पहुचाया मे उसेफिन सें अपनीओर खीचकर उसके होठो पर्र टूट पड़ा, औऱ उन्हें तब तक चूसता रहाजब तक दिल नहींभर गय़ा, औऱ वोँ कमरे सें चली नहीं गई ………।
रंडियो कां घऱ (Full Storyd) - Kahani ab aur interesting hogi
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