सीड्स ऑफ़ लस्ट (Seeds Of Lust) – New Episode
बहोत हि जबरदस्त एपसोड दिया हैं! भावनाओं सें भराहुआ एपसोड थां ! दोनों केँ दिल एक् दूसरे केँ लिए धड़कते हें मगर दोनों कों अपनी भावनाओं कों छोड़कर अलग होना हि नियति लगरहा हैं!
बहोत अच्छा लिखरहे होँ भइया ! अगलाभाग भि थोड़ी जल्द देना दोस्त
सीड्स ऑफ़ लस्ट (Seeds Of Lust) – New Episode
UPDATE: 17
अगलेदिन सुभह हम् तीनों सोनिया, रोमा औऱ मे डाइनिंग टेबल पर्र बैठकर ब्रेकफास्ट कररहे थें औऱ शीतल फूफी हमें खानां परोसरही थीं।
"अरे रोमी, एक् बातबता! यह बोलेरो गाड़ी कां आईडिया तेरा थां?" मैंने अपनासिर उसकीओर घुमाते हुए, बातचीत कों हल्का रखने कि कोशिश करतेहुए पूछा, इस उम्मीद सें कि हम् दोनों केँ बीच जौ भारीपन आँ गय़ा हैं, उससे उसका ध्यान हटजाए।
जब उसने अपनी थाली सें ऊपर देखा तौ उसकी आँखें गुस्से सें चमक उठीं। "नहि, येउस इडियट कि चॉइस हैं, " वो दाँत पीसते हुए बोलीं, उसकी आवाज़ शांत कमरे मे एक् चाबुक कि तरह थि।
सोनिया कि हँसीफूट पड़ी, जिससे क्षणभर केँ लिए माहौल हल्का होँ गय़ा। “आकाश?” वो सिर हिलाते हुए हँसी। "उसकी पसन्द अलग हि हैं। "
"ठीक हैं, हम् सब कि अपनी-अपनी मनपसंद हैं, " मैंने बातचीत कों खतरनाक क्षेत्र मे जाने सें रोकने कि कोशिश करतेहुए कहा। "मगर मुझे लगता हैं कि तुम कोकोई औऱ आरामदायक औऱ स्पोर्टी वाहन केँ लिएउसे मनाना चाहिए। "
रोमा कि नज़रमुझ पर्र टिकीरही, उसका क्रोध आरामसे खत्म हौ रहा थां। "मेरी मनपसंद कौन पूछता हैं?" उसने बड़बड़ा केँ तंज किया, उसकी आवाज़ बमुश्किल सुनाई देरही थि। " बोलेरो कि डिमांड उनकीतरफ सें रखी गयीँ, थि। "
मैंने मुस्कुरा केँ सोनिया कि तरफ देखा, औऱ वो अचानक मेरीतरफ देखकर मुस्कुरा उठी। "ओह भैया, मुझे स्पोर्ट्स गाड़ी बहोत मनपसंद हैं, " उसनेकहा, उसकी आँखें उत्साह सें चमकरही थीं। "जौ तेज़ हौ औऱ स्लीक, जैसे फ़ेरारी याँ लेम्बोर्गिनी। "
रोमा कि निगाहें थोड़ी नरम होँ गईं, सोनिया कि बात सुनकर उसके होठों केँ कोनों पऱ मुस्कुराहट कां एक् संकेत खेलरहा थां। "तुम्हारी पसन्द अच्छी हैं सोनिया, " उसनेकहा, उसकी आवाज़ मे शरारत कि झलक थि। "पर्र वोँ बहोत महंगी हें"
सोनिया नें चंचलता सें कहा। "महंगी क्याँ दि, अपनी तोँ औकात सें हि बाहर् हैं" कहकर सोनिया हंसने लगी, उसे हँसता हुआदेख रोमा भि मुस्कुरा दि।
"देख, सोनी, " मैंने कहा, मेरी आवाज़ दृढ़मगर कोमल थि। "मुझेयह बता तुम्हें इनमें सें कौन सि गाड़ी पसन्द हैं?" मैंने अपनीजेब सें सेल्समैन द्वारा दिया गय़ा कागज कां पैम्फलेट निकाला औऱ मेज पर्र रख दिया।
जैसे हि उसने पन्ने पलटे, उसकी आंखें चमक उठीं औऱ वो बच्चों जैसे उत्साह केँ संग विभिन्न मॉडलों कि ओर इशारा कररही थि।
"यह बढ़िया हैं!" उसनेकहा, उसकी उंगली एक् काली एसयूवी पर्र जाकरटिक गयीँ,। "ये बहोत सुन्दर औऱ स्टाइलिश लगरही हैं। "
मैंने सिर हिलाया, इतने दिनों मे पहलीबार सचमुच मुस्कुराया। "मुझे भि यह पसन्द हैं, " मैंने कहा।
रोमा नें सोनिया केँ हाथ सें कागज लिया औऱ उस गाड़ी पऱ नज़र डाली। उसकी आँखें थोड़ी चौड़ी होँ गईं औऱ उसनेउसे वापस मुझे सौंप दिया। "अच्छी तोँ हैं, पऱ बोलेरो कां क्याँ होगा ?" उसने पूछा, उसकी आवाज़ धीमी थि।
"बोलेरो कि डिलीवरी मे थोड़ासमय लगेगा, रोमी, " मैंने उत्तर दिया, "सेल्समैन नें कहा कि अभि वो स्टॉक मे नहि हैं, औऱ नयीखेप आने मे १०दिन कां वक्त लगेगा। "
उसकी आँखें मेरी आँखों मे झूठ कां संकेत ढूँढ़ रहीथीं, मगरउसे कोईझूठ नहि मिला।
'अगर तूँ चाहे तोँ हम् बोलेरो कि स्थान इस वाहन कों लेँ सकते हें, ये बोलेरो सें ज़ादा आरामदायक औऱ महंगी हैं?' मैंने बातचीत कों तटस्थ बनाए रखने कि कोशिश करतेहुए रोमा सें पूछा।
स्थिति कि गंभीरता कों समझते हुए रोमा कि आँखों नें एक् समय केँ लिए मेरी आँखों कों खोजा।
"गाड़ी तौ अच्छी हैं भईया, पऱ तुम्हे औऱ ज़ादा खर्चा करने कि ज़रुरत नहि" उसने जवाब दिया, उसकी आवाज़ अनकही भावनाओं केँ बोझ सें कांपरही थि।
"पैसे कि चिंता मतकर, तेरीबस आकाश कों मनाने कि जरूरत हैं, " मैंने कहा, मेरेदिल मे उथल-पुथल केँ बावजूद मेरी आवाज़ स्थिर थि। "बाकीसभी मे देख लूंगा। "
रोमा कि आँखों नें मेरी आँखों कों खोजा, "उससे इजाजत लेने कि जरूरत नहि हैं, तुम् वहीकरो जोँ तुम्हें ठीकलगे" उसने गुस्से मे कहा।
कमरे मे गर्मी कि तरह महसूस होने वाले तनाव कों महसूस करतेहुए सोनिया कि आँखें हमारे बीच घूमीं। "सहीबात हैं भईया, सभी कुछ आकाश कि मनपसंद कां थोड़े हि चलेगा" उसनेकहा, उसकी आवाज़ मासूमियत सें भरी हुई थि।
"ठीक हैं फिन, मे आज हि जाके गाडी तैयार करवाता हूं" मैंने अपनी आवाज़ मे दृढ़ता लातेहुए उसे आश्वासन दिया। “तुम् लोग विवाह कि बाकी रस्मों पऱ ध्यान दो। ”
रोमा नें सिर हिलाया, उसकी आँखों मे दुःख औऱ गुस्सा कां मिश्रण थां। वो जानती थि कि मे सही थां—अब विवाह कि दिशा बदलने केँ लिए हम् कुछ नहि कर सकते थें। हमने अपने रास्ते तयकरलिए थें औऱ हमें उनपर हि चलना थां।
ब्रेकफास्ट करनेबाद मे घऱ सें निकला औऱ गाड़ी केँ शोरूम मे जाकर सबसे पहले वोँ गाड़ी परचेस कि औऱ पेमेंट औऱ डॉक्यूमेंटेशन कां काम निबटा कर दोपहर तक गाडी कि डिलीवरी लें ली।
नयी गाडी चलाने कां भि अपना एक् अलग हि मज़ा हैं, मख्खन कि तरह गियर शिफ्टिंग, चीते कि तरह रिसीव की उप औऱ ऊँगली केँ इशारे पऱ नाचता हुआ स्टीयरिंग एक् अलग हि फीलदे रहा थां।
गाड़ी सें घूमते हुए मैंने बाकी केँ सारेकाम निबटाये औऱ साम कों 8 बजे केँ आसपास घऱआया।
घऱ कंही सें भि ऐसा प्रतीत नहि होँ रहा थां केँ यंहा२ दिनबाद किसी कि विवाह हैं। घऱ केँ अंदर धीमी रौशनी औऱ सन्नाटा पसरा थां।
मेरीआहट सुनकर रोमा अपने कमरे सें बाहर् आयी, उसके चेहरे पर्र उदासी औऱ आँखों मे अभि भि सूनापन थां। "चाची भईया आँ गए हें, मे खानां लगाती हूं तुम् बर्तन साफ़कर दो" उसने रसोई कि तरफ बढ़तेहुए वंहाकाम कररही मंजू चाची सें कहा (मंजू चाची कों मैंने घऱ कि सफाई औऱ रसोई केँ काम केँ लिएकुछ दिन केँ लिएरखा थां। वोँ सुभह सें साम तक घऱ केँ काम देखती औऱ रात कों अपनेघऱ चली जाती )
मैंने हाथ मुंह धोये औऱ टेबल पर्र आकरबैठ गय़ा, रोमा नें प्लेट मे मुझे खानां दिया, मैंने रोटी कां कोर तोड़ते हुए पूछा "फूफी औऱ सोनिया दिखाई नहि देरहे ?"
रोमा रसोई कि तरफ जातेहुए पलटी औऱ जवाब दिया "वोँ अपने कपडे औऱ कुछ ज़रूरी चीज़ें लेने अपनेघऱ गई, हें, सुभह तक आएँगी"
"ओके, तूने खानां खा लिया?" मैंने अगला प्रश्न किया
"नहि, अभि भूख नहि हैं बाद मे खाउंगी" कहकर वोँ रसोई केँ अंदरचली गयीँ,।
खानां ख़त्म करने केँ बाद मे हॉल मे बैठकर टेलीविज़न देखने लगा, मन मे चलरही उथल पुथल सें यहबस थोड़ा ध्यान भटकाने जैसा थां। थोड़ीदेर बाद रोमा भि मुझसे थोड़ी दुरी पर्र आकरबैठ गयीँ, औऱ टेलीविज़न देखने लगी, कुछ समय केँ लिए हमारी नज़रें मिली औऱ हम् दोनों हि झेंप सें गए। हमने अपनी नज़रें टेलीविज़न पऱ स्थिर करली।
तभी मंजू चाची हमारे पासआयी, उन्होंने अपनी साड़ी केँ पल्लू सें हाथ पोंछते हुएकहा "किचनसाफ़ कर दि हैं औऱ बर्तन धोकररख दिए हें, " उनकी आवाज़ कमरे मे विस्फोटक तनाव केँ बिल्कुल विपरीत थि।
"ठीक हैं चाची, कल वक़्त सें आँ जानां, " मैंने जवाब दिया, मेरी आवाज़ मे तनाव आँ गय़ा।
मंजू चाची नें सिर हिलाया औऱ मुख्य दरवाज़ा सें बाहर् चली गई,। मे खड़ाहुआ, पूरेदिन कि भागदौड़ सें मेरे पांव अकड़गए थें। मे मुख्य दरवाज़े केँ पास गय़ा औऱ रोमा कि तरफदेख करपूछ बैठा "तूने अपनीनयी गाड़ी देखी?", रोमा कि नज़रें मेरा पीछाकर रहीथीं, "नहि तोँ" कहकर वोँ सोफे सें जल्दी उठी औऱ मेरेपास आयी।
उसने दरवाज़े केँ बाहर् पार्क कालेरंग कि चमचमाती वाहन कि तरफ देखा औऱ उत्सुकता केँ संग दरवाज़े सें बाहर् निकलकर गाड़ी केँ चारों औऱ घूमकर देखने लगी "बढ़िया हैं, " उसने मेरीतरफ देखकर कहा।
उसकीओर देखते हुए, मुझेलगा कि मेरादिल मेरे सीने मे जोर सें धड़करहा हैं। मुझेउसे छूने कि, उसके होठों कों चूमने कि प्रबल ख़्वाहिश हुई। मगर मे ये भि जानता थां कि अगर मैंने ऐसाकुछ किया औऱ अभि अपनी इच्छाओं केँ सामने हारमान ली, तौ पीछे मुड़कर नहि देखा जाएगा। मे एक् ऐसी रेखा कों पारकर लूंगा जिससे वापसी नामुमकिन होगी।
"चल मे सोनेजा रहा हूं, दरवाज़ा लॉककर लेना" कहकर मे अपने कमरे कि तरफबढ़ गय़ा। रोमा कां ज़ादादेर तक सामना करने कि हिम्मत मेरे अंदर नहि थि, सच कहूं तोँ मे बस उससे बचने कि कोशिश कररहा थां।
मे भारीमन सें ऊपर अपने कमरे मे चला गय़ा, मेरे कदमों कि आवाज़ खामोश घऱ मे गूँजरही थि।
अगलेदिन कि शुरुआत एक् ख़ूबसूरत धूप केँ रूप मे हुइ, पिछली रात कि तूफ़ान औऱ बारिश अपने पीछे एक् ताज़ा चमक छोड़ गई जौ दुनिया कों एक् उज्जवल रोशनी मे रंगती हुइ प्रतीत हुईँ। फिन भि, हवा मे भारीपन बनारहा, जौ बाहर् कि प्रसन्नता सें बिल्कुल विपरीत थां। सूरज खिड़कियों सें अंदर आँ रहा थां, घऱ पर्र एक् गरमचमक बिखेर रहा थां, मगर वो उस ठंडक कों भेद नहि सका जोँ मेरी आत्मा मे घुस गई थि।
"रवि, " दरवाज़े पर्र दस्तक देतेहुए मंजू चाची कि आवाज़ नें पुकारा। मे पलंग पऱ थकावट सें कराहने लगा, चादर मुझे अपने आलिंगन मे केसेहुए थि। दीवार पर्र लगी घड़ी मे सुभह केँ 9 बजे थें, औऱ मुझेपता थां कि मुझे उठना होगा। यंहा एक् विवाह कि तैयारी थि, एक् ऐसी विवाह जोँ मेरी अपनी इच्छाओं केँ आखिरी संस्कार कि तरह महसूस हौ रही थि।
भारीअहह केँ संग, मैंने चादर कों एक् तरफ फेंक दिया औऱ द्वार (दरवाज़ा) खोल दिया। मंजू चाची बाहर् गरमचाय कि ट्रेलिए खड़ी थि। "तुम् गरमचाय पीकर रोमा कों भि उठादो वोँ भि अभि तक सोरही हैं, "
"उसे सोनेदो चाची, आज वैसे भि वोँ बहोत बिजी रहने वाली हैं, " मैंने उनसेगरम चाय लेतेहुए जवाब दिया। कप कि गर्माहट मेरे हाथों मे अच्छी लगी, "आप् खानां तैयार रखनाजब वोँ उठे तौ उसेकुछ नं कुछ खिला देना"
मंजू चाची नें सिर हिलाया औऱ वापस नीचेचली गयीं, औऱ सुभह कि शांति मे मुझेगरम चाय पीने केँ लिए छोड़ दिया।
नहाने केँ बाद औऱ अपनी नीली जींस औऱ सफेदचेक शर्ट पहनने केँ बाद, मे सीढ़ियों सें नीचे उतरा, प्रत्येक कदम पिछले सें ज्यादा भारीलग रहा थां। फूफी औऱ सोनिया वापस आँ चुकी थि औऱ कुछ पड़ोस कि महिलाओं सें घऱ मे चहल-पहल थि। धूप औऱ मसालों कि महकहवा मे भर गई, जौ हॉल मे एकत्रित हमारे इलाके कि महिलाओं कि दूर सें हँसी औऱ बकबक कि धीमी आवाज़ केँ संगमिल गई।
औऱ फिन मैंने उसे देखा- रोमा। वो पीलेरंग कि कढ़ाई वाले सलवार कुर्ते मे अपने कमरे सें हॉल कि ओरजारही थि, उसकेबाल पीछे कि ओर एक् पोनीटेल मे बंधेहुए थें जिससे वो शुद्ध सुंदरता कां दर्शन करारही थि। वो आम लोगों केँ उस समुद्र मे एक् राजकुमारी कि तरहलग रही थि, उसकी सुंदरता औऱ मोहकता नें कमरे मे मौजूद सब लोगों कां मनमोह लिया थां।
मगर उसकीचाल मे कुछ अजीबबात थि - एक् हल्की सि लंगड़ाहट जिसने मुझे चिंतित कर दिया थां। ऐसालग रहा थां जैसे वो दर्द मे थि, औऱ मेरादिल मेरे सीने मे जकड़ गय़ा थां।
"क्याँ हुआ दुल्हन?" भीड़ मे सें ढोलकबजा रही एक् औरत नें चिढ़ाते हुएकहा, उसकी आँखें शरारत सें चमकरही थीं। रूम हँसी सें गूंजउठा।
रोमा केँ गालों पऱ गहरी लालिमा छा गई औऱ वो जबरन मुस्कुराने लगी। "अरे कुछ नहि भाभी, " उसनेकहा, उसकी आवाज़ मे तनाव थां। "बसपेर मे मोच आँ गई, हैं। "
उन्हें समझाने केँ बाद रोमा नें मेरीतरफ देखा, उसकी नज़रें मुझसे मिलीं औऱ उसके होठों पऱ एक् शरारती मुस्कान उभरआई।
जैसे हि महिलाएँ उसके चारों ओर इकट्ठा हुईं, मे उस पर्र ध्यान दिए बिना नहि रहसका जिसतरह सें वो उनकेसंग गपशप मे शामिल हौ रही थि औऱ कुछलचर चुटकुलों पऱ मुस्कुरा रही थि।
हँसी-मज़ाक केँ बीच, रोमा कि नज़रें मुझ पऱ टिक जातीथीं, एक् तेज़, चोरी-छिपे नज़र जिसेकोई औऱ नहि पकड़ पाता थां। ऐसालग रहा थां जैसे वो कोई राज़ चुरारही थि, विवाह कि तैयारियों कि आपाधापी केँ बीच केवल हमारे लिए एक् लम्हा।
एक् मजबूर मुस्कान केँ संग, मैंने उसेसिर हिलाया औऱ घऱ सें बाहर् निकलआया। आज नहि तोँ कल मे उसेइस तरह देख्ना बर्दाश्त नहि करसका। मुझे बाहर् निकलने कि ज़रूरत थि, जोँ होने वाला थां उसके भारीबोझ केँ अलावा किसी औऱ चीज़ पऱ ध्यान केंद्रित करने कि।
आसमान मे सूरज पिछली रात कि बारिश कि ठंडक कों कम करने केँ प्रयास कररहा थां।
मैंने एक् नंबर डायल किया, मेरी धड़कनें मेरे कानों मे गूँजरही थीं। एक्, दोबार घंटीबजी, एक् नींदभरी आवाज़ केँ उत्तर देने सें पहले, मैंने कुछ निर्देश दिए।
फिन मे बैंक गय़ा औऱ मम्मी केँ सारे फंड्स अपने खाते मे स्थानांतरित करवालिए क्योंकि मे उनका एकमात्र नामांकित शख्स थां। फिन मैंने उनके लॉकर मे पड़े सारे कीमती गहने निकाल लिए।
कैटरिंग सें लेकर वेन्यू कि साज सजावट मे पूरादिन बर्बाद हौ गय़ा। मेरेमन मे रोमा, हमारे गुप्त प्यार औऱ उस अपराधबोध केँ विचार दौड़रहे थें जिनसे बचने कि मे भरसक कोशिश कररहा थां।
रात कों करीब-करीब 8 बजे जैसे हि मे मुख्य दरवाज़े सें अंदर गय़ा, घऱ कि रोशनी सें रात मे बाहर् फैल गई, जिससे मार्ग रोशन होँ उठी। जैसे-जैसे मे अंदर पहुंचा, हँसी औऱ म्यूज़िक कि आवाज़ तेज़ हौ गई। मैंने एक् गहरी साँसली, आगे जौ होने वाला थां उसकेलिए स्वयं कों मजबूत किया।
जब मैंने हॉल मे कदमरखा, तौ मैंने शीतल फूफी औऱ सोनिया कों स्पीकर केँ म्यूजिक पऱ थिरकते हुए पाया, वोँ हँसते हुए किसी बॉलीवुड गाने पऱ झूमरही थि। मोहल्ले कि कुछ अन्य महिलाएँ भि उनकेसंग शामिल हौ गई थीं, उनकी रंग-बिरंगी साड़ियाँ उनके जिस्म केँ झटकों केँ संग लहरारही थीं। ये दृश्य आश्चर्यजनक थां, पूरेदिन मुझ पऱ छाएरहे उदासी भरेमूड सें एकदम विपरीत।
रोमा एक् कोने मे कुर्सी पऱ बैठी थि, उसका ध्यान नाचती हुई महिलाओं पर्र थां। वो लालरंग केँ सलवार सूट मे किसी दुल्हन सि लगरही थि, उसकी भारी चूचियां कपड़े मे कासी हुई थीं। उसकी त्वचा खुशी औऱ उत्साह कि चमक सें दमकरही थि, जौ उस उदासी सें बिल्कुल विपरीत थि जौ एक् रात पहले उसके चेहरे पऱ छाई हुईँ थि।
हमारी नजरें मिलीं, औऱ उसने मुझे एक् शरारती मुस्कान दि, उसकी नजरें फिन सें मेरी नजरों सें मिलने सें पहले फर्श कि ओरझुक गईं। रूम हमारे चारों ओरघूम गय़ा, हँसी औऱ म्यूज़िक पृष्ठभूमि मे लुप्त हौ गए क्योंकि मुझे रोमा केँ प्रति एक् खिंचाव सां महसूस हुआ।
जैसे हि मे महिलाओं केँ पास सें गुजरा, सोनिया नें मेराहाथ पकड़ लिया "भैया, तुम्हें भि हमारे संग डांस करना होगा" उसने विनती करतेहुए कहा। मैंने सिर हिलाया औऱ उनकेसंग शामिल हौ गय़ा। हमने डांस करना शुरुआत किया, थोड़ीदेर केँ संकोच केँ बाद मे उनकेसंग थिरकने लगा।
सोनिया नें अपने सामान्य उत्साह केँ संग रोमा कां हाथ पकड़ा औऱ उसे भि डांस केँ लिए खींच लिया। रोमा कि आँखें आश्चर्य सें फैलगईं, मगर उसने स्वयं कों डांसकर रहे लोगों केँ घेरे मे आने दिया, म्यूजिक कि धुन पऱ थिरकते हुए वोँ अपनी लंगड़ाहट भूल गयीँ,।
म्यूज़िक हमारे चारों ओर गूंजरहा थां, ताल हमारी रगों मे घूमरही थि औऱ हम् नाचरहे थें, हमारे बदन पूर्ण सामंजस्य मे चलरहे थें। सारे तनावों कों भूलकर हम् म्यूज़िक कि लय मे खोगए, हमारी मुस्कुराहटें वास्तविक थि, हमारी हंसी सामान्य थि।
मगर जैसे-जैसे रात बढ़ती गई, मेरे औऱ रोमा द्वारा साझाकिए गए रहस्य केँ बोझ सें मेरादिल भारी होता गय़ा। महिलाओं केँ संग 30 मिनट बिताने केँ बाद, मैंने अपने बहाने बनाए, मेरी धड़कनें तेज़ होँ गईं क्योंकि मे उत्सव कि गर्मी सें दूर हौ गय़ा। "मे थक गय़ा हूं, " मैंने कहा, मेरी आवाज़ फुसफुसाहट सें थोड़ी हि ऊपर थि।
महिलाओं नें मुझे अनुमति दि औऱ मे उनकीभीड़ सें बहार आँ गय़ा, मैंने पलटकर नाचती हुइ रोमा कि तरफ देखा, वोँ डांस मे मशगूल थि पऱ वोँ मेरी हि औऱ देखरही थि।
मैंने रोमा कों अपनेपास आने कां इशारा किया। उसने अपने डांस कों विराम दिया औऱ अपने कूल्हे बलखाती हुई मेरीओर आनेलगी। मे उसके कमरे केँ अंदरचला गय़ा औऱ वो मेरे पीछे आँ गई।
कमरे मे एक् लेद बल्ब कि धीमी रोशनी थि, जिससे उसकेखाट पऱ गरमचमक आँ रही थि, जिसमें हमारे रहस्यों कि यादें थीं। हवा प्रत्याशा सें भरी हुइ थि, हमारे बीच कि खामोशी शब्दों सें भि ज़्यादा जोर सें बोलरही थि।
रोमा कि नज़रें मेरी नज़रों सें मिलकर झुक गयीँ,, उसकी नज़रें मेरी नज़रों सें दोबारा मिलने सें पहलेबैड पर्र टिकगईं। उसकी नज़रों मे एक् भूख थि जौ मेरी नज़रों कों प्रतिबिंबित करती थि, उस ख़्वाहिश कि एक् मूक स्वीकृति जोँ इतने लंबे वक़्त सें सतह केँ नीचेउबल रही थि।
उसनेआगे बढ़कर मेराहाथ थाम लिया, जिसने मुझे हमारी स्थिति कि वास्तविकता सें परिचित कराया। उसने मेराहाथ कसकर पकड़ लिया, उसकी पकड़ करीब-करीब दर्दनाक थि, मानोउसे डर हौ कि मे हाथ खींच लूँगा। मगर मे कहीं नहि जारहा थां। मे उसके लगभग गय़ा, हमारे बदन करीब-करीब छूरहे थें, औऱ मे उसकेबदन सें निकलने वाली गर्मी कों महसूस कर सकता थां।
मैंने उसकेहाथ पऱ एक् छोटा सां बैगरख दिया"ये सभी तुम्हारा हैं रोमी, इसे सुरक्षित रखना"
"इसमें क्याँ हैं?" रोमा फुसफुसाई, उसकी आँखें चौड़ी हौ गईं औऱ उसने अपनेहाथ मे रखेबैग कों देखा।
"यह मां नें तेरेलिए रखे थें, " मैंने कहा, मेरी आवाज़ भावना सें भर्राई हुइ थि। "मम्मी केँ गहने हें। "
रोमा कि आँखें गीली होँ गईं क्योंकि उसेउस चीज़ कि गंभीरता कां एहसास हुआ जोँ मैंने उसे गिफ्ट मे दि थि। उसने मेरीओर देखा, उसकी निगाहों मे कृतज्ञता झलकरही थि। "थैंक्स, भैया" उसने सांसली, उसकी आवाज़ कांपरही थि। "ये तोँ बहोत कीमती हैं। "
"हाँ कीमती तौ हें, पर्र तुझसे ज़ायदा नहि" मैंने कहा, मेरी आवाज़ भावुकता सें भरी हुईँ थि।
उसकी आँखें मेरी तलाशकर रहीथीं, उसके गालों पर्र लाली गहरी हौ रही थि। "हम्म, " वो बड़बड़ाई, उसके होठों पर्र एक् हल्की मुस्कान तैररही थि।
मैंने सिर हिलाया, मेरे भीतर उमड़रहे भावनाओं केँ कोलाहल कों समझाने केँ लिए शब्द नहि मिलरहे थें। हमारे आसन्न अलगाव कां भार मेरे सीने पर्र एक् चट्टान कि तरह महसूस हुआ, जौ किसी भि क्षण मुझे कुचलने कि धमकीदे रहा थां।
जैसे हि मे रोमा केँ कमरे सें बाहर् निकला, वो मेरे पीछे आँ गई, उसकी आँखें मुझसे हट हि नहि रहीथीं। वो नरम रोशनी मे बिल्कुल आश्चर्यजनक लगरही थि, उसकी लाली औऱ मुस्कुराहट उस उदासी केँ बिल्कुल विपरीत थि जोँ पहले उसकी आँखों मे भर गई थि। उसकी निगाहें एक् मूक स्वीकारोक्ति थि, एक् वादा कि कल चाहेकुछ भि हौ, उसेकोई फर्क नहि पड़ेगा.
----too be continued------
bhut din baad aaye bhay lekin bhut emotional update bi diya Roma k chehre pr sararati muskan or uskah langda na kuch or rahasya paida krr raha h Ab aage k suspense thora sambal nahee raha lagta h ek sath sab padne ko mil jaye
सीड्स ऑफ़ लस्ट (Seeds Of Lust) – New Episode
रोमा कां दिलकुछ औऱ चाहरहा हैं औऱ रवि साहबये समझकर भि अनजान बनने कि कोशिश कररहे हैं।
दान दहेज कि परम्परा निभाई जा चुकी हैं, म्यूज़िक अदायगी रस्म पुरी होँ चुकी हैं, बारात दरवाज़ा पऱ लगने कि घड़ी आँ गई हैं, दुल्हन केँ फेरे केँ वक़्त नजदीक आँ गय़ा हैं मगरफिन भि रोमा केँ चेहरे कि चमककुछ कुछकथा मे ट्विस्ट जैसा संकेत उत्पन्न कररही हैं।
शायद रोमा कों हि साहस दिखाना होगा ! शायदपहल उसे हि करनी होगी ! अब तक केँ घटनाक्रम सें लगता नहींरवि साहबकुछ करना तोँ दूरकुछ सोचने लायक हालात भि पैदा करने कि हिम्मत कर सकते हैं !
देखते हें रवि साहब नें रोमा केँ दिल औऱ जिस्म मे जोँ चिंगारी लगा दि हैं वो बूझ पाता भि हैं याँ नहीं !
आउटस्टैंडिंग एंड अमेजिंग भाग भइया।
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