Old At One Place – New Episode
मेरे गाँव कि नदी (Completed)
अरे कल्लु कहाचल दिया सूरजसर पर्र हैं औऱ तुँ हैं कि बारबार नदी कि तरफजा रहा हैं सुभह सें तीन दफ़ाजा चूका हैं।
आज क्याँ तेरापेट ख़राब हैं।
मेरे बाबा नें मुझेखेत सें नदी कि औऱ जातेहुए देखकर कहा।
मैंने कहाहाँ बाबाआज तोँ सुभह सें पेट गड़बड़ होँ रहा हैं क्याँ करूबार बारलग रही हैं।
बाबा नें हँसते हुएकहा जा जल्द करके आँ जा औऱ जरासोच समझकर खायाकर फिन तोँ जब खाने कों मिलता हैं तोँ तबियत सें पेल लेता हैं औऱ आगा पीछाकुछ नहि सोचता।
मेरी गाण्ड फ़टीजा रही थि औऱ बाबा थां कि लैक्चर माररहा थां मै जल्द सें नदी केँ पास पंहुचा औऱ निचे उतरने लगा।
दरअसल हमारे खेत केँ पास कि नदी गर्मियो मे सुख जाती थि औऱ उसमे इतना हि पानी बचता थां कि लोग अपनी गाण्ड धोसके, मै झाड़ियो केँ बीच जाकर अपनी धोतीखोल करबैठ गय़ा तभी मुझेकुछ आवाज़ सि सुनाइ दि।
आवाज़ किसी स्त्री कि थि, मगरअहह बीरजु
क्याँ कररहा हैं बेटा कि आवाज़ सुनते हि मेरी तोँ टट्टी बंद होँ गई मैंने जल्द सें अपनी गाण्ड धोइ औऱ चुपके सें झाड़ियो केँ पीछेजहा सें आवाज़ आँ रही थि उसतरफ बैठे बैठे हि आगे बढ़ने लगा।
मेरे रोंगटे तोँ बिरजु शब्द सुनते हि खड़े हौ गये थें क्यूं कि मैउस स्त्री कि आवाज़ पहचान चूका थां वो मेरी चाची संतोष कि आवाज़ थि औऱ मेरे चचेरे भइया कां नाम बिरजु थां।
बीरजु सें मेरी बिलकुल नहि बनती थि वो मुझसे एक् साल छोटा थां, मगर थां मेरा भइया हि पऱ उसका बाप शहर मे पंचायत मे नौकर थां तोँ दोनों मां बेटो केँ भावकुछ ज़्यादा हि थां, घमण्ड सरचढ़ कर बोलता थां, मगरवही मेरी मम्मी औऱ चाची मे बहुत जमती थि, वैसे भि सुना जाता हैं कि पहले मां बहोत सीधी साधी थि मगरजब सें चाची सें मिलीतब सें बहुततेज तरार होँ गई थि।
अबमैजरा अपने बारे मे बतादू फिन स्टोरी कि ओर चलते हैं।
मेरानाम कल्लु हैं मै 20 साल कां हु मेरे दादाजी जी मेरेलिए बहुत जमीन छोड़कर गए जिसमें हम् बाप बेटे खेती करते हैं।
हल चलाते हैं, खेती किसानी केँ काम केँ चलते मेराबदन बहुत बलिश्त औऱ लम्बा हैं, मेरे पिता जी कि दूसरी विवाह हुईँ हैं पहली केँ मरने केँ बाद मेरे पिता जी नें मेरी मम्मी निर्मला सें विवाह करली, मेरे पिता जी 50 पारकर चुके हैं जबकि मेरी मम्मी उनसे बहोत छोटी सिर्फ 38 साल कि हैं याने मुझसे मात्र 18 साल हि बड़ी हैं, देहात मे लड़कियो कि विवाह कम उम्र मे हि होँ जाया करती हैं इसलिये कम उम्र मे हि मां कि विवाह होँ गई औऱ 18 कि उम्र मे मै पैदा हौ गय़ा, मेरी मां बहोत सुंदर औऱ सेक्सी नजरआती हैं, मेरी एक् छोटी बेहन भि हैं 18 साल कि जिसका नाम गीतिका हैं मगर प्रेम सें हम् सभीउसे गुड़िया भि कहते हैं, मेरे बाबा कां बड़ामन थां उसे डॉक्टर बनाने कां इस्लिये उनहोने उसेशहर भेज दिया थां पढने केँ लिये, वो बहुत सुन्दर औऱ बिलकुल मेरी मम्मी केँ जैसी गदराई हुई औऱ सेक्सी हैं।
वो पढने मे बड़ीतेज हैं शहर मे हॉस्टल मे रहकर पढाई करती हैं औऱ एक् महिने मे एक् बार देहात जरुरआती हैं।
मगर अभि मेरी मां कि तोँ ये हालत हैं कि उसकोदेख करहर किसी कां मनउसे चोदने कां होता हैं येबात मैंने देहात केँ लोगो कि जौ नजर मेरी मां पऱ
पडती हैं उससे मैंने जानां। मां बहोत गदरा गई हैं औऱ उसके जिस्म पऱ चर्बी भि बढ़ गई हैं जिसके कारन उसकापेट बहुत उभराहुआ नजरआता हैं वो घाघरा भि नाभि केँ निचे हि पहनती हैं, हमारे यहा घाघरा औऱ चोली पहनने कां हि चलन हैं मां कां घाघरा घुटनो तक औऱ बहोत घेरे वाला होता हैं, उनके चुचे औऱ उनकी गाण्ड बहोत उठि हुई औऱ मोटी हैं, उनकी गाण्ड देखते हि लौंडा खड़ा होँ जायेइस बात कि ग्यारंटी हैं, वो भि हमारे संग खेतो मे काम करती हैं।
हाँ तोँ जब मैंने देखा कि आवाज़ पास कि झाड़ियो केँ पीछे सें आँ रही हैं तबमै झाड़ियो केँ पास जाकर पीछे देखने लगा, मगर खोदा पहाड औऱ निकली चुहिया वालीबात थि, संतोष चाची केँ पेर मे कान्टा लगाहुआ थां औऱ उसका बेटा बिरजु उसके पैरो सें काँटे
कों निकाल रहा थां संतोष चाची अपने दोनों हांथो कों जमीन पऱ पीछे टेकेहुए अपनी एक् टाँगउठा कर अपने बेटे केँ मुह कि ओरदेख रही थि।
मगर मैंने देखा बिरजु कां ध्यान काँटा निकालने कि बजाय अपनी मां केँ घाघरे केँ अंदर उसकी जांघो कि जोडो कि ओरदेख रहा थां।
संतोष : क्याँ हुआ मुये कितनी देर लगाएगा तुझसे एक् कांटा भि नहि निकाला जाता हैं, जल्दकर मेरापेर उठाये उठाये दर्द करनेलगा हैं।
बीरजु : अरे मां काँटा भि तौ देखो कितनी बीच मे घुसा हैं जराचुप चाप बैठो निकाल रहाहु औऱ अपने पांव न् हिलाओ।
संतोष चाची आँखेबंद कियेहुए अपने चहरे पऱ सारा दर्द समेटे अहहओहः कररही थि औऱ बिरजु थां कि अपनी मां कि चूत देखने कि कोशिश कररहा थां, तभी बिरजु नें अपनी मां कि टाँगो कों थोडा चौड़ा कर दिया औऱ बिरजु तौ बिरजू, संतोष चाची कि चुत कि फटी हुई फाँक
मुझे भि साफनजर आँ गई, वो दोनों नहि जानते थें कि मै बिरजू केँ जस्ट पीछे वाली झाडी केँ पीछे बेठा थां, अब संतोष चाची कि फुली हुईँ बड़ीबडी फांको वाली चूत साफनजर आँ रही थि, कुछदेर बाद बिरजु नें कहा लेँ मां निकल गय़ा तेरा काँटा औऱ फिन संतोष चाची उठ गई औऱ लंगड़ाते लंगडाते चलनेलगी।
बिरजु उसके पीछे पीछे जानेलगा औऱ मै चाची कि घाघरे मे उठि लहराती गाण्ड कों देखकर मस्त हौ रहा थां, ये पहली दफ़ा थां जब मैंने चाची कि गुदाज
मोटी गाँड पर्र ध्यान दिया थां।
चाची केँ जाने केँ बादमै वहा सें अपने खेतो मे आँ गय़ा औऱ अपने बाबा केँ संगखेत केँ कामो मे हाथ बटाने लगा।
बाबा : कल तोँ बेटा गीतिका आएगी तूँ बस स्टैंड जाकरउसे लेँ आनां, मैंने कहाठीक हैं बाबा, कुछ देर हमनेकाम किया उसकेबाद दुर सें हमें मम्मी आती हुई दिखाई दि।
मा खानां बनाकर हमारे लिए लेकररोज दोपहर तक आँ जाती हैं, उसकेबाद बाबा खानां खाकरफिन सें खेती मे लग जाता हैं औऱ मुझे एक् दो घंटे अपनेखेत कि झोपडी मे आराम करने कों कह देता हैं, मम्मी एक् दो घंटेकाम करती हैं औऱ फिन वो भि झोपडी मे आकरलेट जाती हैं, साम कों मै औऱ मम्मी घऱ आँ जाते हैं औऱ अगलेदिन फिनवही खेत किसानी कां कामबस हमारी लाइफऐसे हि चलरही थि, अभि तक मेरा ध्यान औरतो पर्र कम हि रहता थां मगर एक् तोँ संतोष चाची कि चुत जबसे मैंने देखातब सें मेरा लन्ड बहोत परेशान करनेलगा थां यहीवजह थि कि आजजबखेत सें मै औऱ मां लौटरहे थें तोँ अनायास हि मेरीनजर अपनी मम्मी केँ बड़े बड़े मटकते गदराए चुतडो पर्र चलि गई जोँ कि घाघरे मे बहोत उछलरहे थें औऱ समा नहि रहे थें, सच बताऊ मम्मी कों चलतेहुए उसके मटकते भारी भरकम चूतडो कों देखने पऱ चलते चलते हि मेरा लन्ड खड़ा होँ गय़ा थां।
आज मुझे महसूस हुआ थां कि मेरी मम्मी कों लोग देहात मे क्यूं घुरते रहते हैं औऱ जब वो उनके सामने सें अपनी भारीगोल गाँड मटकाते हुए गुज़रती हैं तबलोग अपने लन्ड कों क्यूं मसलने लगते थें।
मा कां घाघरा इतना छोटा थां कि उसके घुटने साफनजर आते थें औऱ अगर वो बैठती थि तौ कईबार
उसकी मोटी मोटी गुदाज जाँघे भि नजर आँ जाती थि, उसरात मैठीक सें सोया नहि मुझेकही चाची कि फुली हुईँ चुत औऱ कभी मां केँ झूलते हुए मोटे मोटे चूतड़ नजर आँ जाते थें, मैये भि सोचने लगा थां कि जब चाची कि चुत इतनी फुली औऱ बड़ीनजर आँ रही थि तौ मां तौ चाची सें कई गुणा अधिक सुन्दर औऱ तगडे जिस्म कि हैं फिन उसकीचुत कितनी फुली हुईँ होगी, मेरे विचार अभि पनपे हि थें जिनमे किसी चिंगारी लगने केँ बाद उठते धुएं कों आग देने कां काम मेरी बेहन गीतिका नें पूराकर दिया औऱ मै अपनी चाची मां औऱ बेहन कों चोदने केँ लिए तडपने लगा।
मै बस स्टैंड पऱ खड़ाशहर सें आने वालीबस कां प्रतीक्षा कररहा थां, तभीबस स्टैंड पऱ एक् पुस्तक बेचने वालाआया औऱ मेरेपास आकर कहनेलगा बाबूजी मेहँदी कि बच्चो कि औऱ गानो कि शायरी कि बताइये कौन सि बुक लेना पसन्द करेंगे, मैंने कहा कहानियो कि बुक हैं, उसनेकहा हैं बाबूजी अकबर बीरबल केँ चुटकुली, पुराणी दंतक कथाए,
पंचतन्त्र कहोकौन सि दूँ, मैंने उससे धीरे-धीरे सें कहा चुदाई कि कहानियो कि पुस्तक हैं क्याँ, तब उसने भि धीरे-धीरे सें कहा बाबूजी २०रु कि आएगी, मैंने कहा किस्सा मस्त हैं नं उसनेकहा बाबूजी एक् बार पढोगे तोँ बारबार मुझसे लेकर जाओगे, मैंने उससे वो पुस्तक लेँ ली औऱ इतने मे सामने सें बस आँ गई औऱ मैंने वो पुस्तक अपनी धोती मे कमर पऱ खोसली, तभी गीतिका बस सें उतरी, मै तोँ उसे देखता हि रह गय़ा, सच बताऊ गीतिका कों ऊपर सें निचे तक देखने भर सें मेरा लन्ड खड़ा होँ गय़ा थां, गीतिका तोँ बहोत मॉडर्न होँ गई थि, उसके खुलेहुए बाल होठो पर्र लिप्स्टीक, एक् रेडकलर कि टीशर्ट औऱ टाइट जीन्स हैं क्याँ लगरही थि,
जब उसने अपनी गुदाज गाण्ड मेरीओर कि तौ मै तौ उसके जीन्स मे न् समा सकने वाले चौड़े सि भारी चूतडो कों देखकर पागल होँ गय़ा औऱ सच पुछो तौ मेरेमन मे उस टाइमये आया कि गीतिका कि इतनी चौड़ी गाण्ड जीन्स मे इतनी मस्तनजर आँ रही हैं तौ अगरये जीन्स मेरी मम्मी पहने तौ उसके चौड़े चूतड़ तोँ औऱ भि बडे बड़े हैं जीन्स मे मम्मी कि मोटी गाण्ड केसेनजर आएगी, मै अभि कुछसोच हि रहा थां कि मुझे दुसरा झटकातब लगाजब गीतिका, एक् दम सें भैया कहती हुई मेरे सिने सें लग गई मुझे औऱ कुछ एह्सास तौ नहि हुआ पर्र मेरे सिने सें जब उसकी एक् झीनी सि टीशर्ट मे कसेहुए मोटे मोटेदूध जबदबे तौ ऐसालगा जैसे मेंरा लन्ड पानी छोड़ देगा।
कल्लु : अरे गुड़िया इतनाकह कर मैंने भि उसकीपीठ कों औऱ कसकर अपने सिने कि ओर दबोचा औऱ उसके मोटे मोटे मस्तदूध केँ मस्त एह्सास कां खूब मज़ा लिया।
गीतिका अभि भि मुझसे चिपकी हुईँ थि इसलिये मैंने धीरे-धीरे सें उसकी मस्त गुदाज मोटी गाण्ड पर्र जीन्स केँ ऊपर सें हाथ फेरा औऱ क्याँ बताऊ उसके चूतडो केँ नरम माँस केँ उठाव नें मुझे पागलकर दियादिल कररहा थां कि अपनी बेहन गीतिका केँ भारी चूतडो औऱ उसके मोटे मोटेदूध कों यहीखूब कसकसकर दबा डालूं।
कुछदेर बाद गीतिका नें मुझे छोड़ा औऱ कहनेलगी अब चलिये भि याँ यही खड़े रहेगे।
कल्लु : अरे गुड़िया तूँ तोँ हर एक् दो महिने मे बढ़ने लगी हैं अभि पिछ्ली बार देखा थां तोँ तौ बहुत छोटी थि औऱ अब एक् दम सें जवान लड़की केँ जैसे लगनेलगी हैं,
अगर तूँ साड़ी पहनकर आती तोँ मै तोँ तुम्हे पहचान हि नहि पाता।
गीतिका : मुसकुराकर मुझे देखति हुईँ, भैया मै तौ उतनी हि बड़ी हूं, पर्र मुझेइस बारऐसा लगरहा हैं जैसे आपका अपनी बेहन कों देखने कां नजरिया बदल गय़ा हैं। तभी तौ आपको अपनी बेहन बड़ीनजर आँ रही हैं
कल्लु : पता नहि गुड़िया पऱ तूनेये केसे कपडे पहने हैं भला अपने देहात मै लड़किया ऐसे पेंट शर्ट मे कहा रहती हैं, देहात केँ लोग कैसी कैसी बाते करने लगते हैं
गीतिका : मै जानती हु भैया तुम् फिकर नं करोचलो हम् पहलेउस सामने वाले काम्प्लेक्स मे चलते हैं वहांमै ड्रेस चेंजकर लेतीहु।
कालू : मै अपनी बेहन कि गुदाज जवानी कों देखते हुए कहनेलगा, वैसे गुड़िया तुँ मुझे तोँ इन कपडोमै अच्छी लगरही हैं, पर्र मै सोचता हु देहात घऱ मे कोइ तूझसे कुछकहे नं इसलिये मैकहरहा थां।
गीतिका : भैया आप् नहि भि कहते तोँ भि मैये ड्रेस चेंज करके देहात जाती क्योंकि मै जानती हु देहात केँ लोगो कों उन्हें बात कां बतंगड बनाते देर नहि लगती हैं,
पर्र मुझेये जानकर अच्छा लगा कि आपको मेरीये ड्रेस अछिलगी हैं
कालू : अरे पगली तेरी ड्रेस तौ ठीक हैं तुँ तोँ कुछ भि पहन लेगी तौ अच्छी लगेगी, आखिर मेरी गुड़िया परी हैं जौ इतनी खुबसुरत।
गीतिका : मुस्कुराते हुए चलिये अब इतना भि झूठमत बोलिये।
कालू : नहि गुड़िया मैसचकह रहाह, मैंने तुझसे सुन्दर लड़कीआज तक नहि देखी।
गीतिका : अरे क्याँ भैया, आप् कभीशहर मे नहि रहे होँ न् इसलिये ऐसी बाते करते हौ कभीशहर कि लड़कियो कों देखते तौ पागल होँ जाते।
कल्लु : क्यूं शहर मे तुझसे भि सुन्दर लड़कियाँ रहती हैं।
गीतिका : लड़किया तौ ठीक हैं भैया पर्र उनकी ड्रेस जब आप् देख लोगे तौ आपका तोँ बस।।।।।।।।।। येकह कर गीतिका जोरजोर सें हॅसने लगी।
कालू : क्याँ गोलमोल बातेकर रही हैं, साफसाफ बता नाँ।
गीतिका : मंदमंद मुस्कुराते हुये, बाद मै बताऊँगी अबचलो भि, उसकेबाद गीतिका नें काम्प्लेक्स मे जाकर कपडे बदले औऱ अब वो एक् येलो सलवार कमीज मे नजर आँ रही थि।
गीतिका : मुस्कुराते हुये, अब कैसीलग रहीहु भैया,
कालू : अच्छी लगरही होँ।
गीतिका : अच्छा भैया मै आपको पहले ज़्यादा अच्छी लगरही थि याँ अब।
कालू : मुस्कुराते हुएसच कहु तोँ तुँ जीन्स औऱ टॉप मे मुझे अधिक सुन्दर लगरही थि।
गीतिका : मै जानती हु भैया औऱ गीतिका फिन मुस्कुराने लगी, कुछ भि बोलो गीतिका इसबार औऱ बार कि अपेक्षा कुछ बदली हुईँ लगरही थि।
गीतिका : भैया अब तोँ ये खटारा साइकिल बेचदो औऱ कोई बाइक कां जुगाड़ करो।
कल्लु : अरे वो तोँ ठीक हैं पऱ यहा वाहन चलाना आती किसे हैं।
गीतिका : वो तोँ मै आपको सीखा दूंगी।
मैने साईकल केँ पीछे गुड़िया कां बैग बांध दिया औऱ फिन साईकल पर्र चढ़कर उसे साईकल कां डंडा दिखाते हुएकहा, आजा गुड़िया डण्डे पर्र बैठजा
गीतिका मेरीबात सुनकर खिलखिला करहँस पड़ीइस बार तोँ मै भि उसकी हँसी कां मतलबसमझ गय़ा थां, गीतिका कां चेहरा कुछलाल होँ रहा थां औऱ वो साईकल केँ आंगे केँ डण्डे पर्र बैठ गई जब वो बेठी तौ उसके मोटे मोटे चूतडो सें मेरा लन्ड जौ कि खड़ा हौ गय़ा थां टकराने लगा औऱ मै एक् दम सें सिहर गय़ा,
उपर सें गीतिका केँ शरीर सें बहोत हि मस्त खुशबु आँ रही थि, मै धीरे-धीरे धीरे-धीरे साइकिल चलाने लगा औऱ गुड़िया सें बात करनेलगा।
कल्लु : गुड़िया इसबार कितने दिनों कि छुट्टी पर्र आई हैं
गीतिका : भैया ८-१०दिन तौ रहुँगी।
कालू : तेरी पढाई कां क्याँ पुछु वो तौ अच्छी हि चलरही होगी, आखिर तुँ इतनी होशियार तौ हैं।
गीतिका : आखिर बेहन किसकी हूं।
कालू : अरे इसमें तेरे भैया कां क्याँ बड़प्पन हुआये तोँ सभी तेरी मेहनत कां नतीजा हैं, पर्र ये तौ मर्दो जैसे कपडेकब सें पहनने लगी, क्याँ वो सभीऐसे हि कपडे
पहनती हैं।
गीतिका : भैया आजकलऐसा हि जमाना हैं, सभी याँ तोँ मिनी स्कर्ट याँ फिन जीन्स पहनती हैं।
कालू : मिनी स्कर्ट मतलब।
गीतिका : भैया जोँ स्कर्ट घटनो सें भि ऊपर रहती हैं। उसे मिनी स्कर्ट कहते हैं।
कालू : तोँ क्याँ बड़ी उम्र कि औरते भि जीन्स याँ वो मिनी स्कर्ट पहनती हैं।
गीतिका : हाँ भैया तुम् देखलो तोँ कहोगे कि केसेये औरते अपने भारी जिस्म पऱ जीन्स पहनकर निकलती हैं।
कल्लु : क्याँ हमारी मम्मी जैसी औरते भि जीन्स याँ स्कर्ट पहनती हैं।
गीतिका : हाँ भाई, आजकलसभी औरतेऐसे हि कपडे पहनती हैं।
कालू : तौ गुड़िया उन्हें लज्जा नहि आती होगी, ऐसे कपडो मे तौ बड़ी उम्र कि औरते न् जाने कैसी दिखती होगी।
गीतिका : क्यूं मै जीन्स मे आपको अच्छी नहि लगरही थि।
कालू : नहि तूँ तोँ बहोत अच्छी लगरही थि।
गीतिका : तोँ फिनअब ये बताओअगर वो जीन्स मां पहनेगी तौ क्याँ अच्छी नहि लगेगी।
कल्लु : पता नहीं।
गीतिका : पता नहि क्याँ अगर तुम् मम्मी कों जीन्स औऱ टीशर्ट मे देखलो तोँ तुम् तोँ उन पऱ मर मिटोगे।
कालू : मतलब।
गीतिका : ओह भैया आप् भि नं बहोत भोले होँ यही नुकसान हैं देहात मे रहने केँ, अरे बाबा मां जबये कपडे पहनेगी तौ बहोत सेक्सी नजर आएगी।
अच्छे अच्छे पागल हौ जाएगे उन्हें देखकर।
कालू : यह सेक्सी कां क्याँ मतलब होता हैं गुडिया, मै जानता थां मगर गीतिका मुझेकुछ ज़्यादा हि भोला समझती थि मगर वो ये नहि जानती थि कि मेरा भि
एक् यार हैं गोपी जौ शहर मे रहता थां औऱ
वो मुझेनई नई बाते बताता रहता थां, सेक्स कि बाते भि उसने मुझे बताइ थि इसलिये मुझे उसका मतलबपता थां, मैये तोँ समझ गय़ा थां कि गीतिका
जितनी दिखाई देरही हैं वो उससेकही अधिक सेक्सी हैं पऱ इसबार उसमेकुछ ज़्यादा हि बदलाव दिखाई देरहा थां।
गीतिका : मुस्कुराते हुये, भैया अबमै आपको सेक्स कां मतलब केसे बताऊ।
कालू : अरे बोलने वालीचीज नं हौ तोँ कर केँ दिखादे मैसमझ जाऊँगा
मेरीबात सुनकर गीतिका ठहाके लगाकर हॅसने लगी औऱ कहनेलगी भैया आप् बहोत बुद्दू होँ, आपको तोँ सच मे कुछ भि नहि पता, अगर येबात
आप् शहर मे मेरे दोस्तों केँ सामने बोलते तोँ लोग आपका मजाक उड़ा उड़ाकर इतना हँसते कि उनका पेट् दुखने लगता।
कालू : अरे हमनेऐसा क्याँ कह दिया, हमकोअब उसका मतलबपता नहि हैं तोँ हम् क्याँ करे।
गीतिका : सच भैया आप् भि नां।
कालू : अब हँसती हि रहोगी याँ हमें उसका मतलब भि बतायेगी।
गीतिका : हस्ते हुए भैया मै आपकोबाद मे उसका मतलब बताऊँगी, मै पगडण्डी सें होताहुआ देहात केँ रास्ते पर्र पहुच गय़ा। वहाआम कां बगीचा थां औऱ पकेहुए आमनजर आँ रहे थें, तभी गीतिका नें इशारा करतेहुए कहा भैया वोँ देखो कितना मस्तपका हुआआम हैं प्लीज उसे तोड़ो नाँ।
कल्लु : मैंने साईकल रोकी औऱ फिन गीतिका अपने भारी चूतडो कों डण्डे सें हटाकर उतर गई, मैंने साईकल खड़ीकर दि औऱ उचककर उसपके आम कों तोड़ने लगामगर वो मेरेहाथ सें थोडा ऊपर थां, मैबार बारऊपर उचककर उसआम कों तोड़ने कि कोशिश कररहा थां मगर वो मेरेहाथ सें टच होकररह जाता थां।
तभी गुड़िया नें कहा भैया ऐसे नहि टूटेगा आप् एक् कामकरो मुझे अपनीगोद मे उठाओमै तोड़ती ह, मैंने गीतिका कि बातसुन करउसे अपनीगोद मे उठाया, गुड़िया कि सलवार इतनी पतले कपडे कि थि कि मुझे तौ ऐसालगा जैसेमै गुड़िया कों नंगी करकेउठा रहा हूं।
मैने गुड़िया कि मोटी जांघो पऱ दोनों हाथो कां
घेराडाल करउसे ऊपर उठाया, गुड़िया बहुत हेल्दी हौ गई थि 55 केँ जी केँ करीब-करीब वजन होगा मेरेहाथ उसकी जांघो सें गुजरते हुएजब गुड़िया केँ भारी चूतडो
पऱ पहुचे तौ गुड़िया कि जांघो औऱ भारी चूतडो केँ गरम मांस केँ एह्सास नें मुझे पागलकर दिया थां मै गुड़िया कों उठाये हुए उसके मोटे मोटे चूतडो कों खूबकस कर दबोचे हुए थां औऱ मेरे लन्ड महराज धोती मे टनटना चुके थें, मै गुड़िया केँ चूतडो कों दबाये ऊपर देखने लगातभी गुड़िया नें मुझे हँसते हुए देखा उसकेहाथ मे पकाहुआ आम थां औऱ वो कहनेलगी अब उतारो भि आम तौ मैंने तोड़ लिया, मैंने धीरे-धीरे सें गुड़िया कों छोडना चालु किया।
आउर गुड़िया मेरे शरीर सें रगड ख़ाति हुई निचेआई औऱ मेरा लैंड गीतिका केँ चुत वाले हिस्से सें रगड खाता गय़ा, गुड़िया नें आम कि ख़ुश्बू लेतेहुए कह
वाउ भैया क्याँ मस्तपका हैं।
गीतिका : आओ न् भैया थोड़ी देरइस आम कि छाया मे बेठते हैं फिन चलते हैं, मैवही बैठ गय़ा औऱ गीतिका भि बैठ गई औऱ आम केँ ऊपर केँ हिस्से कों अपने
दान्तो सें थोडा सां काटकर उसनेआम कों दबाया औऱ उसकारस चुसते हुए कहनेलगी।
गीतिका : वो भैया कितना रसीला औऱ मीठाआम हैं, मेरीनजर गीतिका केँ जूसी होठो पऱ चलि गई औऱ मै उसकेरस भरे होठो कों हसरतभरी निगाहॉ
सें देखने लगा।
गीतिका : लो भैया तुम् भि चुसो बड़ा मस्त टेस्ट हैं इसका।
मै आम चुसना तोँ नहि चाहता थां मगर गीतिका केँ रसिले होठो औऱ उसकी गुलाबी जीभ कों देखकर मेरा लन्ड खड़ा होँ गय़ा औऱ मैंने सोचा गीतिका कां
जूठाआम चुसने कां मेरामन हौ गय़ा औऱ मैंने भि गीतिका सें आम लेकर चुसने लगा, गीतिका नें कहा भैया चीटिंग नहि एक् बार आप् चुसो एक् बार मे।
बसफिन बारी बारी सें गुड़िया औऱ मैआम कों चुसने लगे।
गीतिका : भैया देहात कां माहौल बड़ा अच्छा लगता हैं यहा कितनी शांति हैं ऐसे मे तोँ कोईकुछ भि करेकोई देखने वाला नहि हैं।
कालू : मतलब।
गीतिका : मुस्कुराते हुये, मतलब कि मुझे औऱ आम चुसना हैं औऱ तोड़ो नं भैया औऱ फिन गीतिका खड़ी होकरइधर उधर देखने लगी औऱ फिन उसने उछलते
हये एक् आम दिखाया औऱ उसे तोड़ने केँ लिए कहनेलगी।
वाउआम भि ऊँचाई पऱ थां औऱ गीतिका नें मेरीओर देखा औऱ बड़ी स्टाइल मे अपनेहाथ ऊपरकर दिए कि आओ औऱ मुझे गोदी मे उठाओ, मेरा लन्ड तौ खड़ा हि थां।
इसबार गुड़िया कों मैंने पीछे सें उठाया, मगरआम थोडा ऊपर थां तब गुड़िया कहनेलगी भैया थोडा औऱ ऊपर उठाओ नं, आप् भि नं इतने बालिश्त बदन हैं आपका औऱ आप् अपनी कमसीन औऱ नाजुक बेहन कों अपनीगोद मे नहि उठापा रहे हैं।
मेरा इतना सुनना थां कि मैंने गुड़िया कों ऊपर कियाइस बार गुड़िया कि मोटीगोल गाँड बिलकुल मेरेमुह पर्र दबी थि औऱ मै अपनेमुह सें गुड़िया केँ भारी चूतडो कों महसूस कररहा थां, इतने मे गुड़िया नें कहा भैया बस थोडा औऱ उपर, गुडिया कां इतना कहना थां कि मैंने गुड़िया कि गाण्ड मे हाथभर करउसे औऱ ऊपरउठा दिया, मेरा लन्ड झटके मारने लगा मेराहाथ गुड़िया कि मस्त उभरी हुई बुर औऱ गाण्ड कि जडो मे फसाहुआ थां।
उसकीभरी गदराई जवानी ऐसी थि मनो मैंने किसी बड़ी स्त्री कों ऊपरउठा रखा होँ, कुल मिलाकर ये थां कि गीतिका एक् मस्तपका हुआमाल होँ चुकी थि जिसेअब चुसना बहोत जरुरी होँ गय़ा थां, मैंने गीतिका केँ चूतडो औऱ चुत कों इस दौरान अपने हाथो सें दबाकर देख लिया थां, तभी गीतिका नें आम तोड़ लिया औऱ मे उसे धीरे-धीरे सें निचे उतारने लगामगर वो एक् दम सें निचेसरक गई औऱ मेरे दोनों हाथो मे गुड़िया केँ सुडौल खूब मोटे मोटे औऱ कसे हुये
मस्तदूध दबगए औऱ तब मुझे एह्सास हुआ कि गीतिका केँ मस्त बड़े बड़ेआम खूब मोटे मोटे औऱ खूबकसे हुए हैं जब मेराहाथ अपनी बेहन केँ पके
आमो पर्र पड़ा तोँ मुझे एक् अजीब सां आननदआया औऱ गीतिका मजे सें आम चुसने लगी।
वो बीचबीच मे मुझे भि आम चुस्ने कों दे देति थि।
कुछदेर हम् वहीआम खातेरहे औऱ फिन गुड़िया कों मैंने साईकल पऱ बैठा लिया औऱ देहात कि ओरचल दिया।
हम् जबघऱ पहुचे तोँ गुड़िया मां सें लिपट गई औऱ फिनमै वहा सें खेतो मे चला गय़ा कुछदेर बाबा केँ संगकाम किया।
उसकेबाद मे कुटिया मे चला गय़ा औऱ बाबा खेतो मे काम मे लगेरहे वहा जाकर मैंने अपनी धोती सें पुस्तक निकाल कर पढना शुरुआत किया।
जब मैंने पहलीकथा पढ़ी तोँ पहली किस्सा हि अपनीसगी बेहन कों चोदने कि थि जिसेपढ़ करमै मस्त होँ रहा थां, मगर किताबे तोँ मै बहोत बारपढ चूका थां पर्र इसबार मुझेबार बार गुड़िया हि याद आँ रही थि गुड़िया कि गदराई जवानी रहरहकर मेरे लन्ड कों खड़ाकर रही थि।
कथा पढने केँ बादमै थोड़ी देरलेट गय़ा
साम कों घऱ पऱ जबमै पंहुचा अभि मै दरवाजे केँ बाहर् हि थां दरवाजे सें एक् मार्ग घऱ केँ अंदर औऱ दुसरा पास केँ बाथरूम मे जाता थां।
बाथरूम ऐसा थां कि उसमे दरवाजा नहि थां औऱ वो तीनतरफ लकड़ी केँ पटिये लगाकर बनाया गय़ा थां।
निर्माला : अरे गीतिका जल्दनहा लेँ खानां बन गय़ा हैं।
गीतिका : बस मम्मी आती हूं।
मैसमझ गय़ा कि गुड़िया बाथरूम मे नहारही हैं, मेरेमन मे गीतिका कों नंगी देखने कां ख़याल आँ गय़ा, जबकि इससे पहले भि उस बाथरूम मे मम्मी याँ गीतिका
नहाती रही हैं पऱ पहलेऐसा ख़याल नहि आया, मै धीरे-धीरे सें बाथरूम केँ पीछे कि तरफचला गय़ा औऱ जैसे हि मैंने लकड़ी केँ गैप सें झाँका।
क्याँ बताऊ सीधे मेरी आँखों केँ सामने गुडिया केँ मोटे मोटे गोरे गोरे चूतड़ थें औऱ क्याँ उठेहुए औऱ क्याँ मस्त गांड थि उसकी गाण्ड कि दरार मे मेरा लन्ड तौ पूरी तबियत सें खड़ा होँ गय़ा।
मैने अपने लन्ड कों धोती सें बाहर् निकाल कर मसलते हुए गीतिका कों देख्ना शुरुआत किया गीतिका जब भि थोडा झुकती तोँ उसकी फुलीचुत कि फाँके पीछे सें नजर आँ जाती औऱ मेरा लन्ड उसकी फांको
कों औऱ फाडने केँ लिये मचलने लगता थां तभी गीतिका मेरी औऱ मुह करकेघुम गई औऱ जब मैंने उसके मस्त बड़े बड़े कलमीआमो कों देखा तोँ ऐसालगा कि ये कठोरआम मुझे निचोडने केँ लिएमिल जाये तोँ आनंद आँ जाए, फिन गुड़िया जल्द जल्द अपने नंगे जिस्म पऱ पानी ड़ालने लगी, उसकीचुत केँ ऊपर हलके हलकेबाल नजर आँ रहे थें औऱ चुत कां उभार मुझे बहोत उत्तेजित कररहा थां।
कुछदेर मे गीतिका नें एक् लालरंग कि पेंटी पहनली औऱ ऊपर उसने ब्रा नहि पहनी बल्कि एक् ब्लूकलर कि टी शर्टपहन लिया औऱ निचे एक् टाइट लेगीपहन ली।
उसकी मोटी मोटी जाँघे लेगी मे बड़ी मुश्किल सें समांरही थि औऱ उसके चुतड़ तोँ लेगी मे औऱ भि चोदने लायकनजर आँ रहे थें, गीतिका नें अपनी उत्तरी हुइ ब्रा औऱ पेंटी वही छोड़कर बाथरूम सें बाहर् आई औऱ घऱ केँ अंदरघुस गई।
मैकुछ देरबाद घऱ केँ अंदर गय़ा तब मां खानां बनारही थि औऱ गीतिका बैठकर खारही थि, मुझे देखते हि मम्मी नें कहा कल्लु आजा तूँ भि हाथमुह धोकरखा लें।
मैने भि खानां खा लिया उसकेबाद बाबा आँ गए औऱ मां उन्हें खानां देनेलगी।
गर्मी अधिक थि मै बहार खटिया डालकर लेताहुआ थां औऱ गीतिका मां औऱ बाबा केँ पास बेठी थि, मै आँखेबंद किये लेटा थां तभी पायल कि आवाज़ सुनाइ दि छनछनछ्न छ्न।
मैंने धीरे-धीरे सें आँखेखोल कर देखा। मम्मी बाथरूम कि तरफजा रही थि।
मेरा लन्ड मम्मी केँ भारीउठे हुए चूतडो कि मतवाली थिरकन देखकर खड़ा हौ गय़ा औऱ मै चुपके सें बाथरूम केँ पीछेचला गय़ा, मां केँ भरे चूतङ मेरीतरफ थें तभी मम्मी नें अपने घाघरे कों ऊपर चढ़ाया औऱ जब मैंने मां केँ चौड़े चौड़े मस्त चूतडो कों देखा तौ लगा पानी निकल जाएगा।
आज पहलीबार मैंने मां केँ गोरे गोरे चौड़े चौड़े चूतडो केँ दर्शन किये थें, मम्मी वही मुतने बैठ गई औऱ रात केँ सन्नाटे मे मुतने कि तेज आवाज़ नें मुझे पागलकर दिया, मां बहुतदेर तक मुतती रहीफिन खड़ी होकर अपने घाघरे सें चुत पोछती हुईँ बाहर् आँ गई।
मै वापस खटिया पर्र जाकरलेट गय़ा, थोड़ी देरबाद गीतिका मेरेबगल मे आकरबैठ गई औऱ उसकी गुदाज गाण्ड मेरेकमर सें टच होनेलगी।
गीतिका : क्याँ भैया सोगए क्याँ।
कालू : अरे नहि अभि कहा नींद आएगी, औऱ बता तुझेही तौ शहर मे अच्छा लगता होगा।
गीतिका : हाँ भैया बड़ा आनंदआता हैं काश आप् भि मेरे कॉलेज मे होते तौ मस्त मज़ाआता।
कल्लु : हाँ आनंद तोँ आतामगर देहात मे खेती कां काम भि तौ सम्भालना पड़ता हैं। इसीलिए तौ मै पढने नहि गय़ा।
गीतिका : भैया रात कों आप् बाहर् यही खटिया पर्र हि सोते हौ क्याँ।
कालू : हाँ गर्मी मे बाहर् ठण्डी हवा मे सोने कां मज़ा हि कुछ औऱ हैं।
गीतिका : भैया मै भि यहीसो जाउ।
कालू : नहि तुँ अंदर हि सो बाबा ग़ुस्सा होंगे, तभी गीतिका केँ फोन पऱ कोई फ़ोनआया औऱ वो बातें करनेलगी औऱ मै उसकीबात सुनने लगा।
गीतिका : हेलो
मोनिका : क्यूं राजकुमारी पहुच गई अपने गाँव।
गेटिका : हाँ दोस्त बड़ा मस्त माहौल हैं देहात मे बड़ी सुहानी हवाचल रही हैं।
मोनिका : क्याँ दोस्त तूँ वहाचलि गई यहाअब मुझे अकेले हि समयपास करनापड़ रहा हैं, आज एक् मस्त डीवीडी लेँ करआई हूं, एक् निग्रो एक् गोरी कों मस्तचोद रहा हैं।
उस निग्रो कां लन्ड तौ बड़ा मस्त हैं।
गीतिका : अरे दोस्त अभि नहि बाद मे बात करते हैं।
मोनिका : क्यूं क्याँ हुआ।
गीतिका : मै भैया केँ पास बेठी हूं।
मोनिका : मुस्कुराते हुये, भैया केँ पास बेठी हैं याँ भैया कि गोद मे बेठी हैं।
गीतिका : चुपकर जौ मुह मे आयाबक देति हैं।
मोनिका : सचकहरही हु रानी, एक् बार अपने भैया कि गोद मे बैठकर देख लें तेरे जवान चौड़े चूतडो केँ वजन सें तेरे भैया कां लन्ड न् डगमगा जाए तोँ कहना।
गीतिका : मंदमंद मुस्कुराते हुये, मै फ़ोनरख रहीहु।
मोनिका : अच्छा मेरीबात तोँ सुन।
गीतिका :क्याँ।
मोनिका : अच्छा तौ कुछमत बोलमै तुम को मूवी कां लाइवशो बताती हूं।
गीतिका : चल तेरेपास ज़्यादा बैलेंस हैं तूँ बोलमै तोँ चुपचाप यही बेठीहु।
मोनिका : वोँ गोरीउस निग्रो केँ काले काले मस्त मोटे लन्ड कों लोलीपोप कि तरहचूस रही हैं, तुँ देखति तौ तेरा भि मन चुसने कां होने लगता।
गीतिका : औऱ वो निगरो।
मोनिका : वो निग्रो उस गोरी कि चुत कि तरफमुह करके लेटाहुआ हैं औऱ अपनी लम्बी जीभ निकाल करउस गोरी कि मस्तचुत कों चाटरहा हैं दोनों ६९ कि पोजीशन मे एक् दूसरे केँ लन्ड औऱ चुत कों खूबकस कसकरचूस चाटरहे हैं।
गीतिका : बसकर मोनिका मैअब फ़ोनरख रही हूं। तुझसे बाद मे बात करती हूं।
मोनिका : अच्छा चलजब फ्री हौ तोँ मिसकॉल आईकर देना।
कल्लु : तेरीयार थि क्याँ गुडिया।
गीतिका : हाँ भैया मेरी सबसे पक्की सहेली हैं
मै सिर्फ धोती पहनेहुए थां औऱ गीतिका कि नजरे मेरे चौड़े सिने कि तरफबार बारचलि जाती थि मगरमै कुछसमझ नहि पायाफिन रात कों सभीसो गए औऱ
सूबहवही दिनचर्या।
सूबह सुभह गीतिका मस्त घाघरा चोलीपहन करनजर आईमै तोँ उसकी गोरी गोरी टाँगो कों देखता हि रह गय़ा।
जीतिका : भैया मै भि आपकेसंग खेतो मे चलरही हु।
कालू : ठीक हैं चल पऱ खेतदुर हैं तूँ थक जायेगी तौ।
गीतिका : निकालो नं अपनी खटारा साईकल उसी पऱ बैठकर चलते हैं।
कालू : ठीक हैं चल औऱ मैंने अपनी साईकल निकाली औऱ गीतिका कों फिन सें कहाचल बैठ डण्डे केँ उपर, मेरे इतना कहने पऱ गीतिका मुस्कुराते हुए डण्डे पर्र
बैठ गई औऱ कहनेलगी, भैया आहिस्ता चलाना आपका डंडा मुझे बहोत चुभता हैं।
गीतिका कि बातसुन कर मेरा लन्ड अकडने लगा थां, पर्र मज़ा भि बहोत आँ रहा थां।
कालू : तुँ क्यूं रेडी हौ गई सुभह।
गीतिका : भैया कल केँ मुलायम आमो नें बड़ा मज़ा दिया, आज फिन मुझेऐसे हि जूसीआम खानां हैं।
कालू : हाँहाँ क्यूं नहि अपने खेतो केँ पास तोँ बहोत बड़ा बगीचा हैं वैसे तेरीआम खातादेख मेरा भि मनआम चुसने कां होनेलगा थां नहि तोँ मे
वेसेआम चुसता नहि हूं।
गीतिका ; मुस्कुराते हुये, भैया जब आपको अच्छे मस्त मुलायम आम चुसने कों मिलेँगे तोँ आप् भि नहि छोडोगे।
कालू : देहात मे आम तौ बहोत हैं पऱ चुसने कां टाइमकहा मिलता हैं।
गीतिका : फिकर नं करो भैया मै आँ गई हु न् अब मस्तआम चुसाउंगी आपको।
कालू : तुँ तोँ दोचार दिन रहेगी औऱ फिनचलि जाएगी, अगलीबार कुछ अधिक दिनों कि छुटटी लेकर आँ तोँ मज़ा आएगातब तक शायद बारिश भि हौ जाये तौ नदी मे पानी भि आँ जायेगा औऱ फिन मस्तनदी मे नहाने कां आनंद हि अलग होगा।
जीतिका : भैया आपको तैरना आता हैं।
कालू : हाँमै तौ एक् साँस मे इसछोर सें उसछोर तक तैरकर जा सकता हूं।
गीतिका : भैया मुझे भि तैरना सीखा दोगे क्याँ।
कालू : क्यूं नहि पर्र पहलेनदी मे पानी तौ आनेदे।
गीतिका : अगलीबार जब आउंगी तब तक बारिश होँ हि जायेगी।
कालू : हाँ वो तोँ हैं।
जब हम् खेतो मे पहुचगए तोँ कुछदेर मैंने काम किया औऱ फिन गीतिका नें रटलगा दि कि चलो भैया आम केँ बगीचे मे।
उधर बाबा उसकीरट सुनरहे थें औऱ फिन मुझसे कहनेलगे अरे बेटा कल्लु दो दिनों केँ लिए बिटिया आई हैं जाता क्यूं नहि उसे मस्त मीठेआमो कां रस तोँ चखादे।
मैवहा सें गीतिका कों लेकरपास केँ बगीचे मे चल दिया औऱ फिन गीतिका आम देखने लगीतभी वो चिल्लाइ वाउ भैया क्याँ मस्त बड़ा सां पकाहुआ आमलगा हैं।
उसको तोड़ो न्, मैंने कहा गुड़िया वो तोँ बहोत ऊपर हैं।
गीतिका : तोँ मुझे उठाओ न् अपनीगोद मे, मैंने गीतिका केँ पीछेआकर उसकीकमर पकड़कर उसे उठाया औऱ जब उसके गुदाज चोदने लायक चूतडो कां स्पर्श मेरे लन्ड सें हुआ तौ वो गीतिका केँ घाघरे मे घूसने कों रेडी हौ गय़ा, मगर गीतिका कों ऊपर उठाने पर्र भि आम उसके हाथो सें थोड़ी दुर हि रह गय़ा औऱ मैंने गीतिका कों थककर निचे उतार दिया।
कल्लु : गुड़िया वो बहोत ऊपर हैं कोई दुसरा देख लेँ
गीतिका : पेर पटकते हुए नहि भैया मुझे तौ वही वाला चहिये, आप् केसेउठा रहे हौ मुझे आपको तोँ सचमुच कुछ नहि आता।
कालू : तोँ तूँ हि बता केसे उठाऊ तेरी।
गीतिका : मेरे सामने आकर खड़ी होँ गई औऱ मेरे नंगे चौड़े सिने कों औऱ मेरी बाजुओ कों हाथलगा कर कहनेलगी, मेरा भइया इतना बलिश्त हैं औऱ अपनी कमसिन सि बेहन कों अपनीगोद मे नहि उठापा रहा हैं।
मैने गीतिका केँ खूब मोटे मोटेकसे हुएदूध पर्र नजर डालते हुए अपनी नज़रो कों निचे फिसलाया औऱ गीतिका केँ भारी चूतडो औऱ मोटी मोटी गदराई जांघो कों देखते हुएकहा। अब तुँ कमसीन कहारही अब तौ भरपूर जवान हौ गई हैं 55 केँ जी तोँ वजन होगा तेराफिन केसेमै तुझेही आसानी सें उठालु।
गीतिका : क्याँ भैया आपके बराबर मरद तोँ बड़ी बड़ी औरतो कों उठा लेते हैं मै तोँ फिन भि लड़की हूं।
कालू : अच्छा बता केसे उठाऊ तुम्हें।
गीतिका मेरे सामने आकर मेरे हाथो कों पकड़कर अपनीकमर मे रखतेहुए कहनेलगी पहलेझुक कर मेरी जांघो पऱ अपनेहाथ कां घेरा डालो औऱ मुझे
उपर उठाओ।
मैने गीतिका कि मोटी जांघो कों अपनी बांहो मे भरकरउसे ऊपर उठाया अब उसके मोटे मोटे चोली मे कसेदूध मेरेमुह सें टकराने लगे औऱ मै अपने आपकोरोक नं सका औऱ मैंने अपनेमुह कों गीतिका केँ मोटे मोटे बोबो मे दबा दिया औऱ उसकी मस्त सुगंध लेनेलगा, अरे क्याँ मतवाली मस्तगंध थि मेंरा
लन्ड तौ ऐसालग रहा थां कि धोतीफाड कर बाहर् आँ जाएगा।
गीतिका नें अपनी बांहे मेरी गर्दन पऱ डालेहुए एक् हाथऊपर बढ़ाया मगरआम उसकी पहुच सें दुर थां,
गीतिका : भैया ऐसे हि उठाये रहना उतारना मत, बस थोडा सां औऱ ऊपर उठाओ, अब कि बार मैंने अपने हाथो सें गीतिका केँ चौड़े चौड़े मोटे चूतडो कों
दबोचते हुए अपने पंजो कों उसकी मस्त गुदाज गाण्ड मे भरकर औऱ भि ऊपर उठाया। लकिन गीतिका कां हाथआम तक नहि पहुचरहा थां, गीतिका भैया बस
थोडा सां औऱ ऊपरकरो नं, गीतिका कां घाघरा ऊपर हौ गय़ा औऱ मेरेहाथ गीतिका कि नंगी जांघो सें होते हुये, जैसे हि उसकी गाण्ड कि दरार मे पहुचे मैचौक गय़ा औऱ मेरा लन्ड झटके देनेलगा।
गीतिका घाघरे केँ अंदर पूरी नंगी थि जिसकी मैंने कभी कल्पना भि नहि कि थि, मै तौ एक् दम सें मस्त हौ गय़ा औऱ न् जानेकहा सें मेरे हांथो मे इतनी ताकत आँ गई कि मैंने गीतिका कों औऱ ऊपर करतेहुए उठा दिया औऱ गीतिका कि चुत वाला हिस्सा मेरेमुह केँ सामने आँ गय़ा।
मैने अपनी आँखेबंद करली औऱ गीतिका कि चुत कों अपनेमुह पऱ दबाने लगा, मगर घाघरे कां अगला हिस्सा चुत कों ढकेहुए थां औऱ मै गीतिका कि चूत कों
सूँघने कि कोशिश कररहा थां, औऱ फिन अचानक मैंने अपनेमुह कों गीतिका कि चुत केँ ऊपर दबाते हुए उसकी फुलीचुत कों घाघरे केँ ऊपर सें हि पप्पी लेनी
शुरुकर दि, तभी गीतिका केँ मुह सें आवाज़ निकली यस औऱ मैंने जबऊपर देखा तौ उसकेहाथ मे आम आँ चूका थां।
गीतिका : भैया अब उतारो भि मगर धीरे-धीरे मैंने गीतिका पर्र पकड़ ढिली कि औऱ वो धीरे-धीरे धीरे-धीरे निचे कि तरफ फ़िसलने लगी, जब वो निचे फ़िसलने लगी तोँ पहले उसका नंगापेट मेरेमुह केँ सामने आया औऱ मैंने भरपूर उसके नंगेपेट पर्र अपने होठो कों फेरा औऱ फिनजब वो औऱ निचे सरकी तोँ उसके मोटे मोटेदूध मेरे
मुह केँ सामने आँ गये।
मगर मुझेये ध्यान नहि थां कि गीतिका जब औऱ निचे सरकेगी तौ मेरा खड़ा लन्ड उसकीचुत कों रोक लेगा औऱ जैसे हि गीतिका कि चुत मेरे लन्ड केँ पास पहुची लन्ड सें उसकी चूत घिस गई औऱ मेरे डण्डे कि वजह सें शायद गीतिका कि फाँके एक् बारखुल करबंद होँ गई याँ फिन उसके भग्नाशे सें मेरे लन्ड
कां घर्षण होँ गय़ा औऱ गीतिका केँ मुह सें अहह जैसे शब्द निकल पड़े औऱ गीतिका अब जमीन पऱ खड़ी थि।
उसकीनजर मेरी नज़रो सें बचकर मेरे खड़े लन्ड
पऱ जारही थि जोँ धोती केँ अंदर सें तम्बू बनाये खड़ा थां औऱ गीतिका केँ चेहरे पऱ मंदमंद मुस्कान फैल गई थि मगर उसका चेहरा कुछलाल हौ गय़ा थां औऱ
सचकहु तोँ गीतिका मुझे बहोत चुदासी चुतनजर आँ रही थि उसका चेहरा देखकर हि लगरहा थां कि उसकी चूत जरुर लन्ड केँ लिए पानी छोड़रही होगी, फिन भि मै जानना चाहता थां औऱ ऊपर सें वो अपनी चड्डी भि पहनकर नहि आई थि मतलब उसके अंदरकुछ चल जरुररहा थां, गीतिका नें उसआम कों चुसना शुरुआत कर दिया औऱ मै उसके मुलायम होठो कों देखने लगाफिन जब उसने मेरीओर नजरेउठा कर देखि तोँ उसकी नशीली आँखेऐसी लगरही थि जैसेकह रही हौ कि भाई अपनी बेहन कि कुंवारी चुत मे अपना मस्त लन्ड पेल दोगे क्याँ।
कल्लु : गुड़िया तुँ आमचूस तब तक मै औऱ दूसरे आम देखता ह, गुड़िया पेड़ केँ निचेबैठ गई औऱ मैइधर उधर केँ पेडो पर्र आम देखने लगातभी गुड़िया नें आवाज़ देकर मुझे बुलाया औऱ एक् दुसरा आम दीखाते हुए कहनेलगी भैया वोँ वाला तोड़ो देखो कितना मस्तपका हैं, मै गुड़िया कि बातसुन कर उसके मोटे मोटे चोली मे कसे उरोजो कों देखने लगा, फिन मैंने कहा गुड़िया वो भि बहोत ऊपर हैं, तब गुड़िया नें झट सें अपनाहाथ मेरीओर लम्बा करतेहुए कहा तौ फिन उठाओ अपनी बेहन कों अपनीगोद मे।
गुडिया कि बातसुन कर मेरे लन्ड कि नशे औऱ भि तन गई औऱ गुड़िया जैसे हि मेरेपास आई उसकी मादक ख़ुश्बू नें अलग पागलकर दियामै झुका औऱ गुड़िया केँ भारी भरकम चूतडो कों अपनी बांहो मे कसकर
उसे ऊपरउठा दिया, जब गुड़िया कां चिकना पेट मेरेमुह केँ पास पहुच गय़ा तब गुड़िया नें मेरेसर कों पकड़ते हुएकहा भैया औऱ ऊपरकरो नं अभि तौ आम
बहोत दुर हैं।
मैने गुड़िया कि मोटी जांघो कों पकड़ा औऱ दुसरा हाथ गुड़िया कि गुदाज चौड़ी गाण्ड केँ निचेलगा दिया, मुझेऐसा लगरहा थां कि मेरा लन्ड फट जाएग, गुड़िया क
गुदाज चूतडो केँ नरमनरम माँस कों दबोचने मे बड़ा आनंद आँ रहा थां, तभी मेरी ऊँगली गुड़िया कि गाण्ड केँ जडो मे घुस गई औऱ मैतबचौक गय़ा जब गुड़िया कि गाण्ड केँ गैप मे उसका घघरा गीला होँ रहा थां, मैसमझ गय़ा कि गुड़िया कि रसीली चूत खूब पानी छोड़रही हैं, मै बिना घबराये गुड़िया कि दोनों जांघो कि जडो मे अपनेहाथ कों भरकर गुडिया कों औऱ ऊपर उठाने लगा।
मेरेहाथ कां पूराजोर गुड़िया कि जांघो कि जडो मे यानि उसकी फुली हुइ चूत औऱ गाण्ड केँ छेद पऱ लगाहुआ थां, जहा सें मैंने गुड़िया कों दबारखा थां वही उसका घाघरा बहुत गीलालग रहा थां, अब मुझे गुड़िया कि नीयत पऱ शक होनेलगा थां, क्याँ गुड़िया जानबूझ कर चड्ढी पहनकर नहि आई थि, क्याँ गुड़िया भि लन्ड लेने केँ लिये तडपने लगी हैं, पऱ मै तोँ उसका भइयाहु फिन वो.
मे सोच मे डूबाहुआ थां तभी गुड़िया नें कहा भैया अब उतारो भि औऱ मैंने फिन सें उसे नीचे उतारा औऱ इसबार फिन उसका गुदाज रसीला शरीर मेरे जिस्म सें रगड खाताहुआ निचेआया औऱ फिन सें गुड़िया कि चुत मे मेरे खड़े लन्ड कां एह्सास हुआ, गुड़िया केँ चेहरे पऱ मंदमंद मुस्कान
थि। जिसे वो दबाते हुए कहनेलगी वाउ भैया क्याँ मस्तआम हैं, उसकेबाद एक् दोआम औऱ तोड़ने केँ बाद मे औऱ गुड़िया खेत मे आँ गये, गुड़िया बिस्तर पऱ बैठकर आम चुस्ने लगी औऱ मै बाबा केँ संगकाम मे
लग गय़ा, मैदुर सें गुड़िया कों देखरहा थां मगर वो फोन मे न् जाने क्याँ कररही थि, तभी मुझे ध्यान आया कि मे पुस्तक कुटिया मे हि मैभूल गय़ा थां
जाकरउसे कही छुपा देताहु नहि तोँ गुड़िया केँ हाथ नं लगजाए, जबमै गुड़िया कि ओर जानेलगा तब गुड़िया कों मैंने फ़ोन पर्र ये कहते सुना कि चल रंडीमै तुझसे बाद मे फ़ोन करती हूं।।
गुडिया : मुस्कुराते हुए क्याँ हुआ भैया काम मे मन नहि लगरहा क्याँ याँ फिनभूख लगी हैं, अगरभूख लगी होँ तोँ आमचूस लो बहुतपके औऱ बड़े बड़े हैं,
मैने गुड़िया केँ तनेहुए आमो कों देखते हुएकहा
हाँभुख तौ लगी हैं पर्र तुँ अपनेआम मुझेकहा चुसने देगी।
गुडिया : मुस्कुराते हुये, तुम् मुझसे कहते हि नहि।
नहि तोँ मै क्याँ अपने भइया कों अपनेआम नं चुसादूँ।
कालू : चलठीक हैं जब मुझे चुसना होगामै तुझसे कह दुँगा।, इतनाकह करमै कुटिया केँ अंदर गय़ा मगरजहा मैंने पुस्तक रखी थि वो वहा नहि थि, अब तोँ
मै पक्का समझ गय़ा कि पुस्तक गुड़िया नें ली हैं, तभीआज वो पूरी रंडी कि तरह मेरेऊपर चढ़चढ़ करमजे लें रही थि, जरुर उसने भइया औऱ बेहन कि चुदाई वाली किस्सा पढली थि इसीलिए आज उसकीचुत इतनी गरमारही हैं।
मै बाहर् आया औऱ गुड़िया कि ओर देखा तोँ वो मुसकुराकर मुझे देखते हुए पहलेआम कों दबाकर उसकारस बाहर् निकाली औऱ फिन मुझे देखते हुए अपनी रसीली जीभ बाहर् निकाल करउसे चाटने लगी, मेरामन तौ किया कि अपनी रंडी बहना कों वही नंगी करकेखूब कसकसकर उसकी मस्त फुलीचुत मे लन्ड पेलदू मगरमै मनमार कररह गय़ा औऱ गुड़िया कहनेलगी, आओ भाई बैठो।
कल्लु : नहि गुड़िया बाबा अकेले कामकर रहे हैं मुझे भि उनकी सहायता करना होगा।
गुडिया : मां कब आएगी खानां खाने कां वक्त तोँ हौ गय़ा बड़ीभुख लगी हैं।
कालू : बसआती हि होगी थोड़ी देर औऱ राहदेख लें औऱ फिनमै बाबा केँ संगकाम मे लग गय़ा, कुछदेर बाद मां नजरआई, औऱ फिनमै औऱ बाबाहाथ मुह धोकर पेड़ कि छाँवमै बैठगए सामने गुड़िया औऱ मां बैठी थि औऱ उनके सामने मै औऱ बाबा, हमने खानां खाया औऱ फिन बाबा कहनेलगे कि भइया मेरी तौ आज तबियत ठीक नहि लगरही हैं इसलिये मै तौ घऱ जाकर आराम करुँगा।
निर्मला तु औऱ कल्लु वोँ सामने कि घासबची हैं उसेमिल करकाट लेना औऱ उधर गट्ठर बनाकर रख देना।
बाबा केँ जाने केँ बाद वो बिरजु आँ गय़ा औऱ मां केँ पेर छुताहुआ कहनेलगा पाय लागूं बड़ी मां।
निर्माला : क्यूं रे बिरजु आजकल तोँ तुँ इधर कां मार्ग हि भूल गय़ा, कहा हैं तेरी मां।
बीरजु : बड़ी मां वहाखेत मे हैं, संतोष चाची कां खेतनदी केँ उसपार थां औऱ चूँकि नदी मे पानी नं केँ बराबर थां इसलिये मां नें गुड़िया सें कहाचल गुडिया
तूझे चाची केँ खेत दिखाकर लातीहु औऱ फिन मां नें मेरीओर देखते हुयेकहा कल्लु मै अभि एक् घंटे मे आतीहु तब तक तूँ वहा कि घास काटना शुरुआत करदेफिन मै भि आकर कटवाती हु औऱ मां गुड़िया केँ संग जानेलगी।,
बीरजु बराबर गुड़िया केँ बोबो कों देखरहा थां औऱ जब गुड़िया जानेलगी तौ वो उसके चूतडो कों घुरने लगा, मैंने बिरजु कों देखा औऱ जब मैंने गुड़िया केँ चूतडो
कों देखा तौ वो बहोत मटकरहे थें, मगरतभी मेरीनजर मां केँ चूतडो पऱ पडी तोँ मुझे मज़ा आँ गय़ा मां केँ चूतड़ गुड़िया सें बहुत बड़े औऱ हैवीनजर आँ रहे थें, जिन्हे देखते हि लन्ड अकड गय़ा थां।
कल्लु : क्यूं रेआजकल दिनभर अपने खेतो मे हि घुसा रहता हैं देहात मे भि कमनजर आता हैं।
बीरजु : तुम्हें क्याँ करना हैं दादाजी मैघऱ मे रहु याँ बाहर्।
कालू : अच्छा बिरजु मैंने सुना हैं तुँ चुदाई कि किस्सा कि पुस्तक पढता हैं।
बीरजु : सकपकाते हुये, तुम्।।।। तुमसे किसने कह दिया, मै ऐसेकाम नहि करता हूं।
कालू : झूठ न् बोल मुझेसुख लाल नें सभीबता दिया हैं जब तुम् दोनों शहरगए थें औऱ वो तुमने पुस्तक ख़रीदी थि
बीरजु : अरे दादाजी तुम् उसकीबात कहामान गए वो तौ पक्का मादरचोद हैं।
कालू : अच्छा सुखलाल तौ तेरा साथी हैं नां।
बीरजु : अरेयार तौ हैं दादाजी मगर हैं पक्का मादरचोद।
कालू : वो भला क्यो।
बीरजु : अरे दादाजी एक् दिनमै उसकेघऱ गय़ा तौ उसकी मां ऑंगन मे नंगी होकरनहा रही थि औऱ सुखलाल छूपकर अपनी मां कों पूरी नंगीदेख रहा थां औऱ अपना लन्ड मुठिया रहा थां।
कालू : इस हिसाब सें तौ तुँ भि पक्का मादरचोद हैं।
बीरजु : मुझेदेख कर सकपकाते हुये, मै क्यूं मादरचोद होनेलगा।
कालू : अच्छा कल तौ नदी केँ अंदर झाड़ियो केँ पास चाची केँ संग क्याँ कररहा थां।
मेरीबात सुनकर बिरजु कां गला सूखने लगा औऱ वो हकलाने लगा औऱ कहनेलगा वोँ तोँ।।।। वोँ तोँ दादाजी मम्मी केँ पैर मे काँटा लगा थां मैउसे हि निकाल रहा थां।
कालू : झूठ न् बोल तुँ समझता हैं मैकुछ जानता नहीं, मैंने सभी देखा थां कि तोँ काँटा निकालने केँ बहाने क्याँ देखरहा थां।
बीरजु : अपने माथे कां पसीना पोछते हुये, नहि तुम्हे धोखाहुआ हैं दादाजी मैकुछ नहि देखरहा थां मै तौ बस मां केँ पेर मे लगे काँटे कों निकाल रहा थां।
कल्लु : अबे भोसडी केँ मुझसे नखरे नं चोद, नहि तौ समझलो मैकहा कहा ढिंढोरा पिटूंगा।
बीरजु : तुम् गलतसोच रहे होँ दादाजी।
कालू : ज़्यादा होशियारी नहि बेटा, खाजा अपनी मां कि शपथ कि तुँ चाची कि मस्त फुली हुई चुत नहि देखरहा थां।
बीरजु : बिनाकुछ बोले अपनेमुह कों निचे झुकाये खड़ा थां।
कालू : अब क्यूं बोलति बंद होँ गई।
बीरजु : दादाजी मुझेमाफ करदोआगे सें ऐसा नहि करुँगा।
कालू : मुस्कुराते हुये, एक् शर्त पर्र क्षमा कर सकता हूं।
बीरजु : वो क्याँ।
कालू : तौ मुझेवचन दे कि आज सें मै जोँ कहुंगा मेरीहर बात मानेगा।
बीरजु : मेरेपैर पकड़ते हुये, दादाजी तुम् तोँ वैसे भि बड़े भइया होँ, आज सें ये बिरजु तुम्हरा दास हौ गय़ा पऱ दादाजी तुम् येबात किसी कों नहि बताओगे नां।
कालू : नहि बताउंगा, मगर तुम्हारी तरफ मेरा एक् काम करवाना पडेगा।
बीरजु : कौन सां काम।
कालू : मुझे भि चाची कि फुली हुईँ चुत देख्ना हैं।
बीरजु : मगर दादाजी येसभी मुझसे केसे होगा वोँ तौ उसदिन इतफ़ाक़ सें मुझे मां कि चुत केँ दर्शन होँ गये, नहि तौ मां तोँ मुझे छोटा बच्चा हि समझती हैं।
औऱ बापु तौ शहर मे जॉब करता हैं औऱ महिने भर मे आता हैं औऱ मम्मी अपनीचुत कभीकभी स्वयं हि रगड लेती हैं।
कल्लु : अच्चा येबता तेरामन भि होता हैं न् अपनी मम्मी संतोष कों नंगी करके चोदने कां।
बीरजु : मुस्कुराते हुये, अरे दादाजी मन होने सें मां चोदने कों थोड़े हि मिल जयेगी।
कालू : अगर तुँ मेरी सहायता करदे तोँ मै तेरी तेरी मां कों चोदने कि व्यवश्था कर सकता हूं।
बीरजु : मगर केसे।
कालू : कल दोपहर कों मै तेरे खेतो मे आउंगा तबवही बात करेगे मगरये बात हम् दोनों केँ बीच हि रहनी चाहिये।
बीरजु : ठीक हैं दादाजी मगर तुम् भि वो नदी वालीबात किसी सें न् कहना।
कालू : हाँठीक हैं चलअब तोँ यहा सें कट लें कल मिलेगे उसके जाने केँ बादमै खेतो मे जमीघास काटने लगा औऱ उधर मां औऱ गीतिका चाची केँ खेतो कि ओर पहुच गई थि।
संतोष चाची : औऱ सुनाओ दिदी तुम्हे तौ आजकल मेरेपास बेठने कि भि फुर्सत नहि हैं।
निर्माला : नहि रेऐसी बात नहि हैं, बसकाम मे हि लगी रहती हूं।
संतोष : गीतिका कों सामने टहलते हुए उसके मोटे मोटे लहराते हुए चूतडो कों देखकर, क्यूं दिदी अब तौ गीतिका भि बड़ी हौ गई हैं, इसकी विवाह वादी केँ बारे मे
सोचा हैं कि नहीं।
निर्माला : अरे अभि तोँ वो औऱ आगे पढना चाहती हैं कहती हैं अभि तौ मै छोटी हूं।
सन्तोष : अरेकहा छोटी हैं उसके चूतडो कां उठाव तौ देख, इसकी उम्र मे तुम् औऱ मै तोँ बच्चे जन चुकी थि औऱ वो कहती हैं कि छोटी हैं, अच्छा तुम् हि
बाताओ अभि बुढों केँ सामने नंगी करके खड़ीकर दो तौ उनका लन्ड खड़ा हौ जाए।
निर्माला : चुपकर रंडी, अभि वोँ सुन लेगी तौ क्याँ सोचेगी।
संतोष : अरे दिदी सुन लेगी तोँ कुछ नं सोचेगी, आजकल तोँ लड़किया आपस मे यहीसभी बाते करती हि हैं, औऱ सुनाओ जब सें भैया नें तुम्हे चोदना बंद किया हैं तब सें तुम् कुछ ज़्यादा हि गदरा गई होँ, अब तौ चलने पर्र भि तुम्हारे चूतड़ खूब मटकने लगे हैं।
निर्मला : तूँ भि तोँ लन्ड केँ लिए तरसती रहती हैं, तेरा व्यक्ति भि तोँ शहर मे हि पड़ा रहता हैं, इसीलिए तुम कोदिन रातये सभी बाते हि सूझती हैं।
संतोष: अरे दिदी, सुभह सें घाघरे सें चुत कां पानी पोछना शुरुआत करतीहु तौ घाघरा पूरा गीला हौ जाता हैं, कईबार तौ बिरजु भि कहने लगता हैं, मम्मी तेरा घघरा
कहा सें गीला हौ गय़ा।
निर्माला : लो तोँ अब हालत इतनी ख़राब हैं कि बेटा स्वयं मां कों बतारहा हैं कि तेरेचुत सें रसबहबह कर तेरे घाघरे कों गीलाकर रहा हैं, कही तेरे घाघरे कि
महक सूँघकर तेरा बेटा समझ न् जाये कि ये पानी तोँ उसकी अपनी मां कि फुलीचुत सें रहरहकर रिसरहा हैं।
संतोष : अरे दिदी आजकल केँ लोंडो कां कोई भरोषा नहि हम् उन्हें बच्चा समझते हैं औऱ वो हमें नंगी करके चोदने कां सोचने लगते हैं।
निर्माला : ऐसा क्याँ हौ गय़ा।
संतोष : अरे क्याँ बताऊ दिदी कलनदी पार करतेहुए मेरे पेरो मे काँटा लग गय़ा तब मैंने बिरजु सें कहा बेटा देखजरा काँटा कहालगा हैं तौ उसने मेरी टाँगो
कों उठाकर देख्ना शुरुआत किया औऱ फिन मैंने उसे ध्यान सें देखा तौ मुआ मेरे घाघरे केँ अंदर सें मेरीचुत देखने कि कोशिश कररहा थां।
निरमला : तूनेकुछ कहा नहीं।
संतोष : मैंने कहा क्याँ कररहा हैं जल्द निकाल, तोँ कहनेलगा मम्मी निकाल तोँ रहाहु बहोत गहरालगा हैं थोडा पांव औऱ ऊपर उठाओ, मुझे तोँ लगता हैं उसने मेरी पुरीफटी हुइ चुत कों खूब अच्छे सें देखा हैं।
निर्माला : वो तोँ मस्त हौ गय़ा होगा तेरी फुलीचुत देखकर।
संतोष : हाँ दिदी वो तौ मेरा पांव छोड़ हि नहि रहा थां औऱ मेरी टांगो कों कसकर पकडेहुए ऊपरउठा रहा थां।
निर्माला : तेरा बेटा अब जवान हौ गय़ा हैं उसे भि चोदने कां मन करता होगाअब उसकेलिए लुगाई कां बंदोबस्त कर लेँ नहि तौ वो कही तेरी हि न् छोड़दे,
ये कहतेहुए निर्मला हँसपडी।
संतोष : हसोमत दिदी, जिसके घऱ स्वयं शीशे केँ होते हैं उसे दूसरो केँ घरो मे पथ्थर नहि फ़ेकना चहिये।
निर्माला : क्याँ मतलब।
संतोष : मतलब कि सिर्फ मेरे हि घऱ जवान बेटा नहि हैं, तुम्हारे भि एक् जवान बेटा हैं औऱ वो तोँ औऱ भि मुस्टंडा होँ गय़ा हैं, कहीऐसा न् हौ कि तुम् मुझ पऱ हसो औऱ वो तुम्हे हि चोददे।
निर्माला : नहि मेरा बेटा बड़ा भोला हैं वो ऐसी नजरेमुझ पर्र डाल हि नहि सकता।
संतोष : अरे दिदी ऐसे भोले हि तोँ अधिक खुराफ़ाती होते हैं, कभीगौर करना अपने बेटे कि नज़रो पऱ, जरुर तुम्हारे चूतडो कों घूरता होगा।
निर्माला : चुपकर गीतिका आँ रही हैं।
गीतिका : बोलो चाची कैसी हौ।
संतोष : मै तोँ ठीकहु गीतिका तुँ बताजब सें शहर पढने गई हैं अपनी चाची कों तौ भूल हि गई।
गीतिका : अरेचची भूली होती तौ मम्मी कों लेँ करयहा क्यूं आती, अब तोँ कभी आप् आँ जाओ तोँ आपकोशहर घुमा देति हूं।
सन्तोष : अरे बिटिया अपनेऐसे क़िस्मत कहा, तेरे चाचा रहते तोँ हैं पर्र मुझे लेँ जाने कि उनको फुर्सत कहा हैं।
गीतिका : अरे वोँ नहि लें जाते तोँ क्याँ हुआ आप् हि चलो मेरेसंग।
संतोष : देखकभी मोकालगा तोँ जरुर चलुंगि।
निर्माला : चल संतोष अबमै चलतीहु बड़ाकाम पड़ा हैं औऱ कल्लु अकेले लगा होगाआज तोँ उसके बाबा कि भि तबियत ठीक नहि लगरही थि तौ वो भि घऱ
चले गए हैं।
थोड़ी देरबाद मां वहा सें वापस आँ गई औऱ फिन गुड़िया धीरे-धीरे खटिया पऱ लेट गई औऱ मां अपनी गुदाज मोटी गाण्ड मेरेमुह कि ओर करके निचे बेठी औऱ घास काटने लगी।
थोड़ी देरबाद घास काटते काटते हम् दोनों एक् दूसरे केँ सामने आँ गएतभी मेरीनजर मां कि दोनों जांघो कि गैप मे पड़ी तौ मेरी आँखे खुलीरह गई, मेरी मां कि मस्त फुली हुईँ चिकनी चुत अपनी फांके
फैलाये मेरी औऱ देखरही थि, मम्मी कि भोसडी पऱ एक् भि बाल नहि थां औऱ बहोत चिकनी लगरही थि, उसकीचुत कि फाँके बहोत फुली हुई नजर आँ रही थि, औऱ मम्मी कां ध्यान जमीन पऱ घास काटने मे लगाहुआ थां।
मा कि मस्त चूत देखकर मेरा लन्ड खड़ा होँ गय़ा थां औऱ धोती मे बड़ा भारी तम्बू बनाये हुए थां, मैटकटकी लगाकर मां कि मस्तचुत देखरहा थां, घास
काटते हुए मम्मी जब बैठे बैठेआगे बढ़ती तौ उसकी फुलीचुत कि फाँके औऱ भि खुल जाती औऱ मां कि चुत कां गुलाबी रसीला छेद भि नजर आँ रहा थां, तभी मां नें मुझे अपनी मस्त बुर कों घुरते हुएदेख लिया औऱ पहले तौ मम्मी नें ध्यान नहि दियाफिन जबउसे मेरे लन्ड कां तम्बू नजरआया तोँ उसकी नजरे मेरी नज़रो सें मिली औऱ मामंद मंद मुस्कुराते हुए दूसरी ओरघुम गई औऱ घास काटने लगी, मेरा लन्ड अकड़ा जारहा थां औऱ मैंने अपने लन्ड कों धोती केँ ऊपर सें मसलते हुए मम्मी कि बुर कि कल्पना करनेलगा।
निर्माला : मन हि मन मे मुस्कुराते हुए अपनी गर्दन झुकाकर अपनीफटी चुत औऱ उसकी फुली फाँको कों देखति हुई, सोचने लागि, बाप रे कल्लु कां लन्ड कितना मोटा औऱ बडालग रहा हैं, केसे मेरीभोस कों खा जाने वाली नज़रो सें देखरहा थां, उसका लन्ड मेरीभोस कों देखकर केसे किसी डण्डे कि तरह खड़ा होँ गय़ा थां, संतोष सच हि कहती हैं आजकल केँ लड़को कां कोई भरोषा नहि हैं।
पर्र मेरी चूत क्यूं फूलरही हैं, औऱ निर्मला नें अपनी चूत कों हाथलगा कर देखा तौ उसकेहाथ मे पानी आँ गय़ा, उसके अपनी चूत कों रगडा औऱ फिनकुछ सोचकर, खड़ी होँ गई औऱ कल्लो कि ओरदेख, औऱ उसकीनजर कल्लु केँ तनेहुए लन्ड पर्र पडी, तोँ वो सोचने लगी क्या बात है रामये तौ औऱ भि बड़ा हौ गय़ा, कितना मस्त लन्ड हैं कल्लु कां।
निर्माला : बेटेमै वहा कां गठ्ठर इसमें मिला देतीहु तूँ यहीबैठ कर बांध लेना औऱ निर्मला अपने भारी चूतडो कों मटकाते हुए जानेलगी, उसकी घुटनो तक केँ घाघरे मे उसकी गोरी पिण्डलिया औऱ मोटी जांघो कि झलक दिखाई देरही थि, औऱ वो ये देख्ना चाहती थि कि कल्लु उसके भारी चौड़े चौड़े चूतडो कों देखता हैं कि नहीं, जब उसने पीछेमुड कर देखा
तोँ कल्लु अपनी मां कि मोटी लहराती गाण्ड कों खा जाने वाली नज़रो सें देखरहा थां, औऱ निर्मला कि साँसे तेज चलनेलगी, निर्मला गठ्ठर लेकर वापस कल्लु कि ओरआने लगी औऱ उसकी निगाहें कल्लु केँ मोटे लोडे पऱ हि थि।
निर्माला कों तभी संतोष कि काँटा लगने वालीबात याद आँ गई औऱ निर्मला कों ये भि यादआया कि केसे संतोष कां बेटा काँटा निकालने केँ बहाने अपनी मां कि
गुलाबी रसीली चूत कों खा जाने वाली नज़रो सें देखरहा थां, क्याँ सोचरहा होगा बिरजु अपनी गदराई मम्मी कि मस्तचुत देखकर, जरुर उसकामन अपनी मां कि चुत मे मुहडाल कर चुस्ने कां कररहा होगा।
याँ फिन वो अपनी मां कि फुली हुई चुतदेख कर अपने मोटे लन्ड कों ड़ालने केँ बारे मे सोचरहा होग, पर्र येसभी मै क्यूं सोचरही ह, मेरीचुत इतनी क्यूं मस्त होँ रही हैं।
मै भि बिलकुल ध्यान नहि रखतीहु केसे मैंने अपने हि बेटे कों अपनी मस्त गदराई चुत दिखा दि, पूरीखुल केँ फ़ैली हुइ थि मेरे बेटे नें तोँ मेरा गुलाबी छेद भि देख लिया होगा।
पर्र मेरामन ऐसा क्यूं कररहा हैं कि मैउसे फिन सें अपनीभोस दिखादूँ, तभी मेरे पैरो मे कुछ थोडा सां चुभा औऱ न् जाने क्यूं मैंने जोर सें कहाअहह राम काँटा लग गय़ा।
औऱ मैवही अपनी मोटी जांघे फैलाकर जमीन पऱ बैठ गई।
कल्लु : क्याँ हुआ मम्मी।
निर्माला : देख तोँ बेटा मेरे तलवो मे काँटा घुस गय़ा हैं औऱ फिन मैंने अपनी टांगे उसकेमुह कि ओरउठा दि। क्या बात है क्याँ टांगे थि मम्मी कि बहोत चिकनी गोरी औऱ गदराई लगरही थि मैंने उसकी गुदाज पिण्डलियों कों
पकड़कर काँटा देखते हुएकहा, कहालगा हैं मम्मी मुझे तौ दिखाई नहि देरहा, मां नें अपनी जांघो कों औऱ फ़ैलाते हुएकहा जराझुक कर अच्छे सें देख बेटे, मैंने जैसे हि झुककर मां कि टांगो कों औऱ ऊपर किया। उसकी मस्त फुल्ली चुत अपनी फाँके फ़ैलाये मुझेदेख रही थि औऱ उसकीचुत कां गुलाबी छेद पूरा पानी सें भरानजर आँ रहा थां, क्याँ मस्तभोस थि मां कि।
निर्माला : कल्लु कि ओर देखते हुए सोचने लगी केसे किसी प्यासे सांड़ कि तरहदेख रहा हैं अपनी मम्मी कि चुत कों ऐसा लगता हैं मुहडाल कर मेरीचुत कों खा जाएगा।
उसका लन्ड कितना बड़ा हैं, पूरा काला औऱ खूब मोटाहोग, मेरीचुत कों तौ पूरी फाड्कर रख देगा, हे भगवनमै येसभी क्याँ सोचरही हु औऱ अपने बेटे कों अपनीचुत खोलकर दीखाते हुये मेरीचुत इतना मस्ता क्यूं रही हैं, कितना पानीरिस रहा हैं चूत सें।
निर्माला : दिखा बेटे।
कालू : मम्मी कि भोस कों ताड़ते हुये, हाँ मम्मी नजर तौ आँ गय़ा हैं पर्र तुँ पीछेहाथ टीकाकर धीरे-धीरे बैठजा मै अभि निकालता ह, मां मुझे देखति हुई पीछे अपनेहाथ टीकाकर बैठ गई औऱ उसकी जाँघे अपने आप् औऱ
भि खुलकर चौड़ी होँ गई अब मां कि भोस कि फाँके पूरी खुली हुईँ थि औऱ मै उसकी एक् टाँग पकडेबस उसके तलवे सहलारहा थां, कुछदेर तक मम्मी कि मस्तचुत घुरने केँ बाद मैने देखा मम्मी भि कनखियों सें मेरे लन्ड केँ उठाव कों देखरही हैं, पऱ मम्मी कि चूत कितनी मस्त औऱ रसीली हैं, कल बिरजु भि चाची कि यानि अपनी मां कि चूत कों ऐसे हि देखदेख करमजे लें रहा थां।
लागता हैं बिरजु अपनी मां कों खूब चोदना चाहता हैं, पर्र मेरी मां कि गुदाज चुत हैं कितनी चौड़ी औऱ फटी हुईँ चुत हैं मम्मी कि इसमें मेरा लोडा पूरा समांजाय तोँ कितना आनंद आयेगा।
निर्माला : निकला बेटे, मेरे पांवऊपर उठाये उठाये दर्द करनेलगे हैं।
कालू : बस मम्मी निकलने वाला हैं तूँ अपने पांव कों ऊपर हि उठाये रहनाबस अभि तेरे अंदर घुसा काँटा निकल जाएगा।
कुछदेर तक मै मम्मी कि चुत घूरता रहाफिन मैंने पांव निचे रखतेहुए कहा मम्मी काँटा निकल गय़ा हैं।
निर्माला : अहह बड़ा दर्दहुआ रे।
कालू : अधिक मोटा थां नाँ।
निर्माला : मंदमंद मुस्कुराते हुये, क्या बात है रे बहोत हि मोटा थां क्याँ।
उसदिन पूरादिन मेरे सामने मम्मी केँ मोटे मोटे चूतड़ औऱ मस्त फुलीचुत हि घूमते रहा, अगलेदिन गुड़िया जाने कों रेडी हौ गई।
कालू : गुड़िया अबकब आयेगि।
गीतिका : भैया अब तोँ जल्द हि आउंगी औऱ कुछ दिनों कि छुटटी लेकर आउंगी, मैंने गीतिका कों साईकल पऱ बेठा लिया औऱ उसकी गुदाज गाण्ड मेरे लन्ड सें सट गई फिन साईकल चलाते हुयेमै उससे बाते करनेलगा, औऱ फिनबस स्टैंड आँ गय़ा औऱ गुड़िया एक् दम सें मेरे सिने सें लग गई, आज पहलीबार मुझे गीतिका केँ मोटे मोटेकसे हुएदूध कां मस्त सां
एहसास हुआ क्योंकि गीतिका नें अपनी छातिया बहोत जोरो सें मेरे सिने सें चिपका ली थि, मैंने भि गुड़िया केँ गालो कों चुमते हुए एक् बार उसके भारी चूतडो मे हाथफेर दिया।
गुडिया : भैया मुझे आपकी सबसे ज़्यादा यादआती हैं, मै आपको बहोत मिस करुँगी।
कालू : मुझे भि तेरे बिना अच्छा नहि लगता तौ जल्द सें एक् लम्बी छुटटी लेकरआजा फिन हम् खूबमजे करेगे।
गुड़िया : रोतेहुए ओके भेया।
कालू : जरा एक् बार मुसकुराकर करबोल।
गुडिया : मुस्कुराते हुएबाय भैया आईलवयु, उसकेबाद बसचल दि औऱ कल्लु बुझे बुझेमन सें वापस देहात कि औऱ साईकल मोड़ देता हैं।
होस्टल मे मोनिका टीवीदेख रही थि औऱ फिन गीतिका आँ गई गीतिका कों देखकर मोनिका उससे चिपक गई।
मोनिका : क्यूं परी क्याँ विचार हैं, अपना रसीला जूस पिलाओगी।
गीतिका : रुकजा पहले मुझे चेंज तोँ कर लेनेदे।
मोनिका : गीतिका कां हाथ पकड़कर बेड पर्र खीचते हुये, मेरीजान तूँ तौ मुझे नंगी हि अछि लगती हैं।
गीतिका : पहले मुझे वोँ निग्रो वाली मूवी तोँ दिखा।
मोनिका : लगता हैं तोँ भि बड़ी चुदासी हैं अपने देहात मे किसी कां तगड़ा लन्ड लेँ लेती नाँ।
गीतिका : दोस्त मोका हि नहि लगा नहि तौ लन्ड तोँ बहोत हैं।
मोनिका : वोँ देखउस निग्रो केँ मोटे औऱ काला लन्ड कि बातकर रही थि मे।
गीतिका : हाय क्याँ मस्त लन्ड हैं, कितना मोटा हैं।
मोनिका : क्याँ बात हैं आज तेरीचुत पहले सें हि पानी छोड़रही हैं।
गीतिका : अरे मेरीचुत तौ 4 दिन पहले सें हि पानी छोड़रही हैं।
मोनिका : क्यूं ऐसा क्याँ होँ गय़ा।
गीतिका : अरेइस बार देहात मे आम खाने मे बड़ा मज़ाआया, मै अपने भैया केँ ऊपरचढ़ करआम तोड़रही थि औऱ भैया मुझे अपनीगोद मे उठाये खड़े थें।
मोनिका : क्याँ बातकर रही हैं, फिन तोँ तेरे भैया नें तेरीखूब मसला औऱ दबोचा होगा।
गीतिका : हाँ पऱ मै भि जानबूझ कर घाघरे केँ निचे पेंटी पहनकर नहि गई थि मै पहले सें हि भैया केँ संग घाघरे केँ निचे नंगी जाने कों रेड्डी होँ गई।
मोनिका : ऐसा क्योँ।
गीतिका : मैंने भैया कि एक् पुस्तक देखी जिस्मे भइया औऱ बेहन कि चुदाई कि कहानिया लिखी थि बस मैंने वो पढ़ी औऱ मुझे भैया कि नीयत कां अन्दाजा होँ गय़ा।
मोनिका : तेरा मतलबये हैं कि तुम्हारी तरफऐसा लगता हैं जैसे तेरे भैया तुम्हें चोदना चाहते हौ।
गीतिका : हाँ औऱ फिनजब मै उनकेऊपर चढ़ी तौ कईबात तौ मैंने अपनीचुत भि उनकेमुह सें रगड दि।
मोनिका : तौ तूने अपनीचुत मरवाया क्यूं नहीं, वही आम केँ बगीचे मे खूब तबियत सें चुद लेती किसी कों पता भि नहि चलता।
जीतिका : नहि दोस्त भैया भइया बेहन कि चुदाई कि किताबे पढ़ते हैं इससेये पक्का तौ नहि होता नं कि वो मुझे अपनी बेहन कों हि चोदना चाहते हैं।
मोनिका : गीतिका केँ मोटे मोटेदूध दबाते हुये, अच्छा तौ अगर मैडम केँ भैया उनको पूरी नंगी करके चोदना चाहे तौ क्याँ आप् चुद्वाओगि।
गीतिका : मुस्कुराते हुये, मै केसे चुदवाऊंगी, भलाकोई अपनेसगे भइया सें अपनीचुत मारवाता हैं क्याँ।,
मोनिका : अरे रंडीपरी आजकल तौ लोग अपने बाप सें चुदवा लेते हैं वो तौ फिन भि भइया हैं, औऱ देख्ना जब तेरे भैया कां लन्ड तेरी चूत मे घुसेगा तोँ तुम्हें सबसे अधिक मज़ा आएगा।,
गीतिका : अहह थोडा दाने कों सहला नं, कितना कसकसकर चोदरहा हैं वो काला।
मोनिका : अच्छा तूने लन्ड देखा हैं तेरे भैया कां।
गीतिका : कपडे केँ उपर सें देखा हैं बहोत बड़ा औऱ मोटानजर आता हैं, बिलकुल काला होगा।
मोनिका : मुस्कुरा करये केसेकह सकती हैं।
गीतिका : मुस्कुराकार, उनकेनाम पर्र गय़ा होगा।
मोनिका : दोस्त तुँ भि न् इतना अच्छा मोका थां तुम्हें चुद हि लेना थां, बोलकब चुदेगी अपने भैया सें।
गीतिका : तुँ हि बता दोस्त मुझे तौ कुछसमझ मे नहि आँ रहा।
मोनिका : अरे इसमें समझना क्याँ हैं कॉलेज सें छुटटी मार औऱ पहुचजा अपने देहात, घऱ मे तबियत ख़राब कां बहाने कर लेना औऱ आहिस्ता एक् महिने खूबकस करचुत मरवा लेना अपने भैया सें।
गीतिका : नहि दोस्त अभि जाऊंगी तौ ठीक नहि रहेगा। कुछ वक़्त बाद जॉउगी, लें अब तोँ चूसकर मुझे थोड़ी राहत तोँ दे, उसकेबाद दोनों एक् दूसरे कि मस्त रसीली चूत कों चुस्ती हुई सो गई।
लगभग 2 महिने बीत चुके थें, औऱ फिन बारिश शुरुआत हौ गई औऱ इसबार गीतिका एक् लम्बी छुटटी लेकरचली वो अब मस्ती केँ मूड मे थि, औऱ फिन गीतिका बस सें उतरी औऱ सामने कल्लु कों खड़ा देखा।
मुस्कराते हुए उसके सिने सें लग गई, कल्लु नें भि अपनी बेहन कि गुदाज जवानी कों अपनी बांहो मे भर लिया औऱ फिन गीतिका कों साईकल पर्र बेठाकर देहात कि ओरचल दिया।
कल्लु : गुड़िया इसबार तौ जीन्स पहनकर नहि आई।
गीतिका : मुस्कुरा कर क्यूं आपकोमै जीन्स मे ज़्यादा अच्छी लगतीहु क्याँ।
कालू : हाँ वोँ तौ हैं, वैसे तौ सब कपडो मे मस्त दिखती हैं।
गीतिका : पर्र आपने पहले सें सोचरखा होगा कि गीतिका जीन्स पहनकर बस सें उतरेगी।
कालू : मुस्कुराते हुये, हाँ पहले तुम्हे जीन्स मे देखा थां न् बस इसिलिये।
धीरे-धीरे धीरे-धीरे हम् देहात पहुचगए औऱ फिन अगलेदिन गीतिका भि मेरेसंग खेतो मे चल दि, गीतिका मेरेसंग चलरही थि औऱ उसनेआज फिन घाघरा चोली पहनाहुआ थां, मै उसकेगले मे हाथडाल करचलरहा थां औऱ बीचबीच मै उसके मस्त उभरेहुए चूतडो कों भि सहला देता थां, खेत मे पहुंचने केँ बाद गीतिका बहुतखुश होते हुये कहनेलगी भैया बारिश केँ बाद देहात मे कितनी हरियाली हौ जाती हैं, अब तौ कही भि नरमनरम घास मे बैठजाओ।
गीतिका : भैया आम कां मौसम इतनी जल्द क्यूं ख़तम हौ गय़ा।
कालू : अरे तोँ क्याँ सालभर आमलगे रहेगे।
गीतिका : भैया मुझे तोँ बोरियत होँ रही हैं।
कालू : चल तेरीनदी कि तरफ घुमाकर लाता हूं।
गीतिका : खुश होतेहुए हाँ भैया चलो आप् मुझे तैरना सीखाने वाले थें नां।
कालू : अरेऐसे घाघरा चोली मे तुझसे तैरते नहि बनेगा कल दूसरे कपडेपहन कर आनांफिन तेरी तैरना सीखा दुँगा।
गीतिका : अच्छा ठीक हैं, मै स्वयं भि घबरारही थि कि कही भैया अभि मुझे घाघरा उतारकर तैरने केँ लिए नं कहनेलगे नहि तोँ उनसे क्याँ कहूँगी कि मै अंदर चडडी
पहन कर नहि आई हूं।
तभी सामने सें बिरजु आँ गय़ा औऱ
बीरजु : अरे गीतिका दिदी तुम्हे मेरी मम्मी बुलारही हैं, वो नदी किनारे कपडेधो रही हैं जाओचली जाओ।
उसकीबात सुनकर गीतिका मेरीओर देखने लगीतब मैंने कहा गुड़िया जाचलि जामै थोड़ी देर मे आता हूं। मेरे कहने पर्र गुड़िया वहा सें जानेलगी औऱ उसके चूतडो कों बिरजु घुरते हये उसके पीछे पीछे जानेलगा।
कालू : यह बिरजु रुक तूँ कहाजा रहा हैं।
बीरजु : अरे दादाजी हमें भि नहाना हैं नदी किनारे मम्मी कपडेधो रही हैं हम् तोँ केवल गीतिका दिदी कों बुलाने आये थें मम्मी पूछरही थि।
कालू : अरेनहा लेना पहले तुँ मेरीबात तौ सुन आँ बैठयहॉ, बिरजु मेरेबगल मैबैठ गय़ा औऱ मैंने उसके काँधे पऱ हाथ फेरते हुएकहा, अच्छा बिरजु येबता कभी तूने चाची कों मुतते हुए देखा हैं याँ नहीं।
बीरजु : देखा हैं भेया।
कालू : कैसी हैं तेरी मम्मी कि बुर, बड़ी मोटीधार केँ संग मुतति होगि।
बीरजु : अरे भैया मां कि चुत तोँ बहोत मस्त औऱ बिलकुल चौड़ी औऱ गुलाबी हैं जब मुतती हैं तौ बड़ी मोटीधार निकलती हैं मगर भैया।
कालू : अबेमगर क्याँ बे।
बीरजु : दादाजी मम्मी सें भि अधिक बड़ी औऱ मस्त फुल्ली हुइ चुत हैं बड़ी मां कि औऱ जब वो मुतती हैं तोँ उनकीचुत सें पेशाब कि धार इतनी मोटी निकलती हैं कि क्याँ बताऊ।
कालू : अबे हरामि तूनेकब देखली मेरी मां कि बुर।
बीरजु : वोँ दादाजी जब बड़ी मम्मी औऱ मम्मी दोनों खेत मे बैठकर बाते करती हैं तब उन्हें पेशाब लगती हैं तोँ झोपडी केँ पीछे जाकर मुतती हैं औऱ बसमै झोपडी केँ अंदर सें छूपकर उनकी मस्तचुत केँ दर्शन कर लेताहु।
कालू : तूँ तोँ बड़ा हरामि हैं साले, फिन क्याँ करता हैं चुतदेख कर।
बीरजु : दादाजी वाही खड़ा होकर मुट्ठ मार लेताहु बड़ा मज़ाआता हैं।
कालू : दोस्त मुझे भि अपनी मम्मी कि चुत केँ दर्शन करवादे।
बीरजु : क्यूं बड़ी मम्मी कि चुत नहि देख्ना चाहोगे, बड़ी मां तौ औऱ भि ज़्यादा मस्तमाल हैं, मैंने तोँ बड़ी मम्मी औऱ मम्मी केँ मोटे मोटे चूतडो कों भि पूरा नंगा देखा हैं, सच दादाजी अगर तुम् बड़ी मम्मी कों नंगीदेख लो
तोँ तुम्हारा लन्ड पानी छोड़ देगा।
कल्लु : तूने मेरी मां औऱ चाची केँ चूतडो कों कब देखा हैं।
बीरजु : अरे दादाजी नदी केँ किनारे केँ पेड़ केँ ऊपरचढ़ करजब मां औऱ बड़ी मम्मी नहाने आती हैं, तबकईबार दोनों नंगी होकर हि नदी मे नहा लेती हैं, दादाजी मै तौ जब बड़ी मां केँ मोटे मोटे चूतडो कों घाघरे केँ उपर सें मटकते देखता हु तौ मुझे उनकी गाण्ड मारने कां बड़ामन करता हैं।
कालू : औऱ क्याँ क्याँ देखा तूनेजरा खुल केँ बता नां।
बीरजु : दादाजी मैंने तोँ दोनों कों गन्दी बाते करतेहुए भि सुना हैं औऱ तोँ औऱ अपनी मम्मी कों मैंने अपनीचुत मे ऊँगली पेलकर मुट्ठ मारते हुए भि देखा हैं।
कालू : कहावही झोपडी केँ पीछे जाकर मुट्ठ मारती हैं क्याँ।
बीरजु : हाँ।
कल्लु : तूने मेरी मम्मी कों मुट्ठ मारते हुए नहि देखा।
बीरजु : नहि पऱ एक् बार बड़ी मां कों मैंने ऐसी हालत मे देखा कि क्याँ बताऊमै तौ मस्त होँ गय़ा थां, जानते होँ बड़ी मम्मी एक् बार झोपडी केँ पीछे मुतने गई औऱ खड़े खड़े हि अपनीचुत सें मोटीधार मारने लगी
सच दादाजी बड़ी मम्मी कों खड़ी खड़ी मुतते देखने पऱ हि मेरे लन्ड नें पानी छोड़ दिया थां।
कालू : साले तुँ तोँ बड़ेमजे माररहा हैं, अब मेरा भि कुछ करवादे।
बीरजु : दादाजी मै क्याँ करवा सकताहु तुम् अपने हिसाब सें देखलो औऱ वैसे भि कौन सां तुम्हारी याँ मेरी मम्मी हमसे चुदवा लेगी।
कालू : साले तुँ तौ कोशिश कररहा हैं न् अपनी मां कों पटाने कि।
बीरजु : अरे तुम् क्याँ जानते नहि मेरी मां कों वो मुझसे क्याँ पटेगी, उलटे मैंने कोई हरकत कि तोँ मारेंगी अलग।
कालू : अच्छा एक् बार चाची कि मस्तचुत केँ दर्शन तोँ करवादे, देख तूने तौ काँटा निकालने केँ बहाने अपनी मम्मी कि चुत कों खूब फैला फैलाकर देखा हैं एक् बार हमें हि दिखादे।
बीरजु : चलोकुछ मोकालगा तौ बताऊँगा अभि तोँ मै जाताहु।
कालू : सुन मां औऱ गीतिका कों भेज देना।
थोड़ी देरबाद मम्मी औऱ गीतिका आँ रही थि औऱ मै खेतो केँ काम मे लग गय़ा, तभी मम्मी मेरेपास आकरबैठ गई औऱ घास काटने लगी उसकामुह मेरीओर थां औऱ उकडूबैठ करघास काटते हुएजब वो थोड़ी आगे बढ़ी तौ उसकी जाँघो मे फसा घाघरा निचेसरक गय़ा औऱ मां कि मस्त फुली हुइ बड़ी बड़ी फाँको वालीचुत एक् दम सें खुलकर मेरे सामने आँ गई, बिलकुल गुलाबी औऱ उसकीचुत कां बड़ा सां दानाऐसे तनाहुआ थां कि दिलकर रहा थां कि उसकी पूरीचुत कों
मुह मे भरकरचूस लु औऱ खूबकस कसकर नंगी करके चोदूं अपनी मम्मी कों।
मा कां चेहरा लाल होँ रहा थां औऱ उसकीनजर मेरे धोती मे छूपेहुए मस्त काला लन्ड पऱ थि, पऱ मैउस टाइम बहोत उत्तेजित हौ गय़ा जब मैंने गौर सें देखा कि
मा कि चुत सें हलके हलके पानीरिस रहा हैं, मेरा लन्ड धोतीफाड कर बाहर् आने कों उतावला हौ रहा थां।
निर्माला : कल्लु तुम्हें चाची नें साम कों बुलाया हैं उसेकुछ काम थां।
कालू :क्याँ काम थां।
निर्माला : मुस्कुरा करअबये तोँ स्वयं हि पूछ लेना, नं जानेउसे तुझसे क्याँ काम हैं दोतीन दिन सें रोज तेरे बारे मे पूछती हैं।
कालू : होगाकुछ बोझा उठाने कां काम।
निर्माला : अब तेरे चाचा तोँ यहा रहते नहि औऱ बिरजु भि अभि छोटा हि हैं, हौ सकता हैं चाची केँ पास तेरे लायककोई काम होँ, येकहकर मम्मी मुस्कुरा दि
मेरा लन्ड मां कि बातो सें औऱ भि खड़ा हौ रहा थां, खेर मम्मी कोई भि काम हौ करना तौ पड़ेगा हि आखिर मेरी सागी चाची जोँ हैं।
निर्माला : कभी अपनी मम्मी कां भि ख़याल आता हैं तुम्हे अपनी मां कां भि कामकर दियाकर।
कालू : मां कि मस्त फुल्ली चुत देखते हुये, तूँ बोल तौ सही तेरे तौ सारेकाम सबसे पहले करुँगा।
निर्माला : कल्लु केँ लन्ड कों देखते हुये, जा पहले चाची कां काम तोँ करदेफिन मेरा भि कर देना, उस दिनशम कों मै चाची केँ खेतो मे चला गय़ा औऱ सामने चाची
झोपडी केँ बाहर् बैठकर एक् ट्यूबवेल केँ पानी सें अपने घाघरे कों जांघो तक चढ़ाये हुए अपनी गोरी गोरी जांघो औऱ पिण्डलियों कों धोरही थि, मेरा लन्ड चाची कि गदराई जाँघो कों देखकर मस्त खड़ा हौ गय़ा, चाची कि जाँघे बिलकुल मेरी मम्मी कि तरह हि खूब मोटी औऱ गदराई हुई थि औऱ उनकी जंघे औऱ पिण्डलिया बिलकुल मेरी मम्मी कि मदमस्त जांघो केँ जैसी गोरी औऱ खूब चिकनी थि, हलाकि मां कि जाँघे औऱ भि अधिक मोटी थि मगर चाची पूरी मस्ती मे अपनी जांघो कों रगडरगड करधोरही थि, उसे बिलकुल भि मेरा ध्यान नहि थां।
औऱ मै भि चाची कि गदराई मोटी जांघो कों देखकर पागल हौ रहा थां मेरा लन्ड धोती मे बड़ा सां तम्बू बनाये खड़ा होँ गय़ा थां औऱ मै अपने लन्ड कों हलके हलकेमसल रहा थां तभी चाची नें एक् दम मेरीओर देखा औऱ उनकीनजर मेरे मस्त फौलादी लन्ड पर्र पड़ गई, चाची कों देख हम् दोनों कि नजरे मिली औऱ फिन मैंने लन्ड पर्र सें हाथहटा लियामगर चाची नें अपने घाघरे कों निचे नहि किया औऱ मेरी औऱ मुसकुराकर देखति हुइ बोलि, आँ कल्लु क्याँ बात हैं आजकल तोँ तूँ अपनी चाची सें बात भि नहि करता हैं मेरेपास आनां तौ दुर कि बात हैं.
कल्लु : नहि ऐसीबात नहि हैं, मेरी निगाहें चाची कि मोटी चिकनी जांघो सें हट हि नहि रही थि औऱ चाची मेरी नज़रो कों ताड गई थि
चाची : आँ बैठ मेरेपास मैजरा हाथ पांवधो लु बड़ीजलन होँ रही थि पेरो मे औऱ फिन चाची नें अपनी जांघो कों सहलाते हुए पानी डालना शुरुआत किया।
चाची : पानी बड़ा मस्त हैं कल्लु पियेगा, चाची नें मेरीओर कातिल निगाहें मारते हुएकहा।
कालू : चाची कि जवानी कों ऊपर सें निचे तक घुरते हुये, हाँ चाची प्यास तौ मुझे भि लगी हैं पीलादो पानी।
चाची एक् पत्थर पऱ बैठी थि औऱ उसके सामने एक् गड्ढ़ा थां जिस्मे पानी इकठ्ठा होता थां। चाची नें पानी कि नली पकड़कर मुझे सामने आने कों कहा औऱ उस पत्थर पऱ ऐसेबैठ गई जैसे मुतने बेठती हैं।
जबमै सामने आकर बेठा औऱ अपनेमुह कों झुकाकर पानी पिनेलगा तब चाची कि जांघो कि जडो मे मेरीनजर गई औऱ मेरी साँसे वहीथम गई चाची कां मस्त फुलाहुआ भोसदेख कर मेरा लन्ड झटके देनेलगा मेरी पानी पिने कि रफ़्तार धीमी होँ गई औऱ मै चाची कि फुल्ली हुई फाँके औऱ फ़ाँको केँ बीच केँ गहरे कटाव कों देखकर मस्त होँ गय़ा।
चाची : मुस्कुराते हुए कहनेलगी तुँ तोँ बड़ा प्यासा हैं कालू, लगता हैं सारा पानीपी जाएगा।
कालू : क्याँ करूचची गर्मी भि तोँ इतनी हैं।
चेची : धीरे-धीरे पी लेँ कल्लु तेरी चाची कि टूबवेल कां पानी बड़ा मीठा हैं।
पानी पिने केँ बादमै वही बैठारहा औऱ चाची कि मस्तचुत कों देखता रहा।
चाची : औऱ बता मैंने सुना हैं आजकल तोँ दिनभर गीतिका तेरे हि आगे पीछे घुमति रहती हैं।
कालू : हाँ वोँ तौ हैं आखिर इतने दिनों बाद जोँ मिलति हैं मेरी गुडिया।
चेची : लगता हैं बहोत चाहता हैं अपनी बहनापरी कों मगरजब वो विवाह करकेचलि जायेगी तब क्याँ करेंगा।
कालू : अरे चाची अभि तोँ वो छोटी हैं कहा अभि सें उसकी विवाह कररही हौ।
चाची : अरे क्याँ बात करता हैं बेटा, इतनीभरी पूरी जवान तोँ हौ गई हैं, सालभर पहले ब्याहि होती तोँ अभि उसकीगोद मे बच्चा खेलरहा होता, कभी गौर सें देखा नहि क्याँ अपनी बेहन कों।
पुरी तेरी मम्मी पऱ गई हैं, तेरी मम्मी सें कम न् पडेगी।
कल्लु : मगर चाची मां तोँ बहोत मोटी औऱ भारी हैं, औऱ गुड़िया तोँ कमसीन लड़की हैं।
चाची : अरे तेरी मां विवाह केँ बाद इतनीफैल गई हैं, अभि गीतिका कों देख्ना जब वो अपने पति केँ पास सें होकर आएगी तौ उसका भि अंगअंग खूब फ़ैल जाएगा।
चाची कि बातेसुन कर मेरा लन्ड खूब मस्त होँ रहा थां औऱ चाची अपनी मस्तचुत फ़ैलाये मुझसे बातेकर रही थि।
चाची : वैसे पिछ्ली बारजब गुड़िया आई थि तब तूनेउसे आम चुसाये थें कि नहि याँ फिन गुड़िया तुझसे केला खाने कि जिदकर रही थि, येबात बोलकर चाची हॅसने लगी, मै भि उनकेसंग मुस्कुरा दिया।
कालू : नहि चाची मैंने उसेखूब आम चुसाये थें, केला तौ मैंने पूछा हि नहि कि उसे पसन्द हैं कि नहीं।
चाची : वैसे केला तेरी मम्मी कों बहोत मनपसंद हैं, गुड़िया कों भि केला खिलायेगा तोँ उसे भि पसन्द आएगा, हर लड़की कों केला बहोत मनपसंद होता हैं।
कालू : आपको भि केला बहोत मनपसंद हैं क्याँ।
चेची : हाँरे केला खाने कां बड़ामन करता हैं मगरअब मुझेकौन केला खिलायेंगा।
कालू : मैहु नं चाची मुझसे बोलोमै केला खिलाऊँगा आपको।
चाची : अपनी जांघो कों हिलाते हुये, अरे बेटा कल्लु मै तौ तुझसे केला खाने केँ लिएकब सें बेठी हूं, पऱ तुँ अपनी चाची कों क्यूं खिलायेगा, तूँ तौ लगता हैं बस अपनी मां औऱ बेहन कों हि केला खिलायेंगा।
कालू : अरे चाची मै आपको भि खिलाउंगा, किसीदिन मेरेसंग बाजार तक चलो।
चाची : तोँ लेँ चलेगा मुझे अपनी साईकल पर्र बेठाकर।
कालू : क्यूं नहि जब बोलोतब चल देता हूं। चाची मैजरा पेशाब करकेआता हूं।
चाची : कल्लु : वहा झोपडी केँ पीछेजा करकर लें।
चाची नें झोपडी केँ पीछे जाकर मुझे मुतने कों कहा तोँ मुझेकुछ अजीबलगा फिनमै झोपडी केँ पीछेचला गय़ा औऱ मुझे झोपडी केँ अंदर सें परछाइ नजरआई तौ मैसमझ गय़ा कि चाची छूपकर मेरा लन्ड देखने वाली हैं।
मैने अपने लन्ड कों धोती सें बाहर् निकाला वो पूरीतरह खड़ा थां औऱ खूब मोटा औऱ कालानजर आँ रहा थां, उधर चाची नें जैसे हि मेरे खड़े लन्ड कों औऱ उसकी मोटाई औऱ लम्बाई कों देखा तोँ वो अपनीचुत कों रगडते हुये गहरी साँसे लेनेलगी, येवही स्थान थि जहा सें बिरजु अपनी मां औऱ मेरी मम्मी कों मुतते हुए देखता थां, मै अपने लन्ड कों खूब सहलाते हुएरगड रहा थां औऱ चाची अपनीचुत सहलाते हुए मेरे लन्ड कों खा जाने वाली नज़रो सें देखरही थि।
जबमैमूत कर वापसआया तोँ चाची जल्द सें वापस बहार आँ चुकी थि मेरे मुतने केँ बाद चाची नें कहामै भि पेशाब करकेआती हु कल्लु औऱ फिन चाची अपनी घाघरे मे सें लचकती गाण्ड कों हिलाती हुइ जानेलगी औऱ मैंने देखा चाची अपनी गाण्ड मेरे
सामने हि खुजलाती हुई जारही थि, चाची जैसे हि पीछे गई मै झोपडी मे घुस गय़ा औऱ जब मैंने बाहर् झाँका तोँ चाची अपने दोनों हांथो सें अपने घाघरे कों ऊपरचढा चुकी थि रंडी अंदर सें पूरी नंगी बड़ी मस्तलग रही थि उसकीचुत कां उभार मुझे पागलकर रहा थां।
चाची खड़ी खड़ी अपनी चूत सहलाती जारही थि औऱ फिन सामने बैठकर अपनी मस्तभोस मे दो उंगलिया पेलने केँ बाद अंदर बाहर् करनेलगी, उसकेमुह कों देखकर लगरहा थां कि वो मेरे मस्त लन्ड कों सोचसोच कर अपनी चूत सहलारही हैं।
उसकीभोस बहोत मस्तलग रही थि, ऐसी रसीली चुतदेख करमै भि पागलहुआ जारहा थां, अब तोँ मेरामन कररहा थां कि चाची कों खूबकस कसकर चोदुं। मगरमै अभि जल्दीबाज़ी करना नहि चाहता थां।
कुछदेर बाद चाची वापस आँ गई औऱ फिन अपने घाघरे सें मुझे मुसकुराकर देखते हुए अपनीचुत पोछते हुए कहनेलगी, कल तूँ पक्का मुझे अपनी साईकल पर्र बेठाकर बाजार लें चलेगा नां।
कालू : हाँ पक्का चाची।
मैवहा सें खेत मे आँ गय़ा गीतिका बिस्तर पर्र लेटीकोई पुस्तक पढ़रही थि, खेत मे मम्मी औऱ बाबाकाम मे लगेहुए थें, गीतिका नें एक् फ्राक पहनी हुइ थि जोँ उसकी गोरी जांघो कों भि दिखारही थि, गुड़िया नें मुझे देखा नहि औऱ मै धीरे-धीरे सें उसकेपास पहुच गय़ा।
गडिया कों बिलकुल भि ध्यान नहि थां औऱ वो एक् नंगे फोटो कि पुस्तक थि जिस्मे एक् महिला एक् व्यक्ति केँ लन्ड केँ ऊपरचढ़ कर बेठी थि, गीतिका बड़ेगौर सें उसके काले लन्ड औऱ उसकी खुली हुई गुलाबी चुतदेख रही थि, गीतिका कां एक् हाथ उसकी पेंटी केँ अंदर थां औऱ वो अपनीचुत कों खूबदबा दबाकर उस रंगीन फोटो कों देखरही थि, मगर जैसे हि गीतिका कि नजरमुझ पर्र पड़ी वो एक् दम सें हडबडा
करउठ बेठीउसे येसमझ नहि आया कि पुस्तक सम्भाले याँ अपनीचुत सें अपनेहाथ कों बाहर् निकाले।
फिन भि मैंने अन्जान बनतेहुए नं पुस्तक कि ओर ध्यान दिया औऱ न् हि उसकीचुत कि ओर औऱ कहनेलगा गुड़िया मां औऱ बाबाकाम मे लगे हैं चल तुम्हे तैरना सीखना थां नं, चलइस वक़्त नदी मे कोई नहि होगा बढ़िया मस्त तरीके सें तुम को तैरना सीखा दुँगा।
गुडिया खुश होतेहुए मानोउसे मन कि मुराद मिल गई हौ वो मेरे पीछे पीछेचल दि औऱ किसी कों फ़ोन लगाने लगी, मै थोडा आगेआगे चलरहा थां औऱ गुड़िया अपनी सहेली सें दबी आवाज़ मे बातकर रही थि।
गुडिया : हायराम रंडी स्वयं चुदरही हैं याँ अपनी माँ कों चुदवा रही हैं।
मोनिका : अरेमै तोँ अपनी मम्मी कि चुत मे बड़े बड़े लन्ड स्वयं पकड़ पकड़कर पेलरही हु औऱ पिलवा रहीह, पऱ तुँ क्यूं आज गर्मनजर आँ रही हैं।
गुडिया : हाँगुड न्यूज़ हैं।
मोनिका : क्याँ।
गुडिया : नदी मे नहाने जारही ह, आज भैया मुझे तैरना सिखाएगे।
मोनिका : ओह रंडीपरी तेरे तोँ खूबमजे हैं अपने भैया केँ मोटे लंङे पऱ चढ़चढ़ कर तैरना, औऱ सुनबार बार डुबने कां एक्सक्यूज़ करके अपने भैया केँ नंगे शरीर सें पूरीतरह चिपक जानां, देख्ना तेरे भैया कां मोटा लन्ड जब तेरी मस्तपाव रोटी कि तरह फुलीचुत मे जब घुसेगा
तौ तुझेही बड़ा आनंद मिलेगा, अपने भैया केँ मोटेलँड कों खूब अपनीचुत सें दबादबा कर चुदवाना, वैसे भि तेरे भैया तेरे जैसी रसीली बेहन कि चुत तोँ पहले सें हि मारने केँ बारे मे सोचते होगे।
गुडिया : पता नहि पर्र उनका कसरती शरीर देखते हि मुझे उनके मोटे लन्ड कि कल्पना होने लगती हैं मेरीभोस खूब मराने केँ लिए तडपने लगती हैं।
मोनिका : मेरी रंडीपरी आज मोका अच्छा हैं खूबमरा लेँ अपने भैया सें अपनी बुर, एक् बार तबियत सें चुद गई तोँ फिन तेरेमजे होँ जाएगे फिन तौ दिनभर खेतो मे अपने भैया केँ सामने नंगी हि घुमना बड़ा मज़ा आएगा, जब तूँ झुककर अपने भैया कों अपनी मोटी गाण्ड औऱ मस्त उभरी हुईँ पाव रोटी जैसीचुत दिखाएगी तौ तेरे भैया खड़े खड़े हि तेरीचुत मे लन्ड पेल देंगे।
गुडिया : चलअबरख नदी आँ गई हैं।
मोनिका : बेस्ट ऑफ़लक।
गुडिया : थैंक्स बिच।
नदी मे कोई नहि थां औऱ मेरे जिस्म पर्र मात्र धोती थि, मैंने गुड़िया कि तरफ देखा बहोत मस्तलग रही थि एक् छोटी सि फ्राक मे।
गुडिया : भैया मुझे तौ डरलगरहा हैं।
कालू : मुस्कुराते हुये, अरे डरती क्यूं हैं तेरा भैया हैं नं तेरेपास।
गुडिया : पर्र भैया मैंने तौ फ्राक पहना हैं मुझसे तैरते बन जाएगा।
कालू : बन तोँ जाएगा, वेसे तुझेही दिक्कत होँ रही हैं तोँ अपनी फ्राक उतारदे, निचे तूने चड्ढी तोँ पहनी होगी नाँ.
मुझे भैया कि बातसुन करहसी आँ गई औऱ मैंने शरमाते हुएमुह निचे करकेकहा। भैया मै आपके सामने केसे फ्राक उतार सकती हूं।
कालू : क्यूं मेरे सामने क्याँ दिक्कत हैं।
गुडिया : भैया मुझे आपके सामने लज्जा आएगी मैंने अंदर ब्रा नहि पहनी हैं।
कालू : अरे पागलये देहात हैं मम्मी औऱ चाची भि जबयहा नहाने आती हैं तौ अपने ब्लाउज कों पूरा उतारकर हि नहाती हैं, तूने देखा हैं नां।
मा तौ घऱ पर्र भि जब नहाती हैं तोँ अपना पूरा ब्लाउज उतार लेती हैं।
गुडिया : पऱ भैया इतना कहते हि मेरीनजर भैया केँ धोतीमै खड़े लन्ड पऱ पड़ गई औऱ मैंने मन मे सोचा भैया मुझे नंगी देखने केँ लियेमरे जारहे हैं तभी उनका लन्ड इतना बड़ा होँ रहा हैं, मुझे तोँ समझ नहि आँ रहा थां कि भैया नाटककर रहे हैं जैसे कि कुछ नहि जानते हि नहि याँ सचमुच भैया बहोत भोले हैं, वैसे तौ भैया नें कभीऐसी वैसीकोई हरकतकभी कि नहि पर्र उनका लन्ड क्यूं इतना खड़ा होँ रहा हैं खेर जोँ भि होँ
मै तोँ स्वयं भि अपने बड़े भइया कों अपनी मादक नंगी जवानी दिखाने केँ लिए उतावलापन रही थि।
वैसे भि भैया मेरेकसे हुए बड़े बड़ेदूध कों बड़े प्रेम सें देखरहे थें।
मेरे देखते देखते भैया पानी मे उतरगए औऱ मुझसे कहनेलगे आजा गीतिका इस गर्मी मे नदी मे नहाने कां मज़ा हि कुछ औऱ हैं।
गीतिका : भैया क्याँ मै सचमुच फ्राक उतारदू कोई आँ गय़ा तौ।
कालू : अरे पागलइस घाट पऱ मेरे औऱ चाची केँ परिवार केँ अलावा कोई नहि आता हैं बाकि देहात केँ दूसरे तरफ वालेघाट पर्र जाते हैं।
अब जल्द सें आँ जा, मैंने भैया कि बातेसुन करकहा भैया मै पानी मे घूसने केँ बाद उतार दूंगी।
कालू : तेरी जैसी मरजीअब जल्द सें आजा, गीतिका धीरे-धीरे धीरे-धीरे पानी मे उतरने लगी उसकी मोटी मोटी छातिया खूबऊपर निचे सांसो केँ संग होँ रही थि, जब वो कमर तक पानी मे आँ गई तौ मुझसे कहनेलगी भाई मुझेडर लगरहा हैं आप् आओ न् ईधर, गुड़िया कि आवाज़ सुनकर मै उसकीओर गय़ा औऱ उसकाहाथ पकड़कर गहरे पानी कि ओर जानेलगा औऱ गुड़िया बस भैया औऱ गहरे मे नहि ओह भैया रुको न्।
गीतिका बड़ी मुश्किल सें आगेबढ़ रही थि कि उसकापेर एक् दम सें गहराई मे गय़ा औऱ वो मुझसे एक् दम सें चिपक गई औऱ दोनों पेरो कों मेरीकमर मे लपेटकर मेरेऊपर चढ़ गई।
गुडिया : भैया प्लीज निचेमत उतारो मैडूब जॉउंगी, मैंने अपने दोनों हांथो सें उसकी गुदाज मोटी गाण्ड कों दबोचरखा थां, उसकी फ्राक तौ न् जानेकब कि ऊपर होँ गई थि औऱ मेरी गदराई बेहन पेंटी पहने मेरीकमर मे अपनी गुदाज मोटी जाँघे लपेटे हुए मुझसे चिपकी हुइ थि।
उसकी मोटी छतियो केँ नुकीले चुचे मुझेचुभ रहे थें, मेरामन गुड़िया केँ मोटे मोटे खरबूजों कों खूबकस कर मसलने कां कररहा थां।
कालू : गुड़िया तुँ धीरे-धीरे सें पानी मे उतरकर तैर औऱ हाथ औऱ पेरऐसे चला।
गुडिया : नहि भैया मुझसे नहि होगा।
कालू : अरे पागलमै तेरेकमर औऱ पेट कों अपने हांथो सें सहारा देकर तुम्हारी तरफ धीरे-धीरे धीरे-धीरे तैरना सिखाउंगा औऱ तुँ डुबेगी भि नहीं।
औऱ फिन गुड़िया कों धीरे-धीरे सें मैंने उतारा औऱ उसके रसीले गुदाज पेट कों पकड़कर एक् हाथ सें उसकी गुदाज मोटी गाण्ड कों थामेउसे धीरे-धीरे धीरे-धीरे हाथ पांव हिलाने केँ लिए कहनेलगा मगर गुड़िया बारबार डुबने लग जाती औऱ जब उसकी सांसे भर गई तौ कहनेलगी नहि भैया बसअबमै डूब जॉंउगी।
कालू : अरे तौ एक् कामकर इस फ्राक केँ कारन तुँ फ्री होकर नहि तैरपा रही हैं इसे उतारदे।
गुड़ीया : नहि भैया मैडूब जॉऊंगी।
कालू : अरेमै तुम्हें ऐसे हि पकडे रहूँगा तौ आहिस्ता उतार लेँ मै तुम्हारी तरफ अपनीगोद मे उठाये रहुंगा, गुड़िया नें मेरीओर देखा उसके गुलाबी होंठ पानी मे भीगकर औऱ भि सेक्सी लगरहे थें फिन गुड़िया कों मैंने पीछे सें पकड़ लियाअब गुड़िया नें फ्राक उतारना शुरुआत किया।
गुड़िया जब फ्राक उताररही थि तोँ भैया नें उसे पीछे सें पकड़रखा थां औऱ उसके नंगेपेट कों धीरे-धीरे सें सहलाते जारहे थें, उनका लन्ड तोँ गुड़िया कि पेंटी केँ ऊपर सें उसकी गाण्ड मे घुसाजा रहा थां, औऱ गुड़िया उनके मस्त मोटे डण्डे कां एह्सास साफसाफ अपनी गाण्ड औऱ चुत मे महसूस कररही थि।
तभी गुड़िया नें फ्राक उतार दि औऱ भैया नें उसकी नंगीपीठ कों चुमते हुएउसे अपनीओर घुमा लियाइस बार गुड़िया स्वयं अपने भैया केँ नंगे चौड़े सिने कों देखकर अपनी दोनों टांगो कों फैलाकर भैया कि कमर सें चिपक गई औऱ उसके मोटे मोटे कठोरदूध भैया केँ सिने सें दबगये।
भैया नें गुड़िया कों कसकर अपनी बांहो मे भर लिया औऱ उसे अपनीगोद मे लिए उसकी मोटी जांघो कों सहलाते हुए कहनेलगे गुड़िया अब तुँ धीरे-धीरे सें जमीन पऱ पेररख पानी तेरेगले तक हि आएगा, गुड़िया नें धीरे-धीरे सें निचेकदम रखा औऱ अचानक उसकापेर एक् पत्थर पऱ पड़कर फिसल गय़ा।
औऱ गुड़िया नें मेरेहाथ कों पकडने कि कोशिश कि तभी उसकेहाथ मे मेरा खड़ा लन्ड आँ गय़ा औऱ फिन जल्द सें मैंने गुड़िया कों पकड़कर ऊपर उठाया औऱ जब मैंने उसे अपनीओर खिंचा तौ गुड़िया केँ तरबुज मेरे हाथो सें दबगये, हायरे क्याँ ठोस चूचिया थि मै अपनी बेहन केँ मोटे मोटेदूध केँ मस्त एह्सास सें रोमांचित होँ गय़ा औऱ मैंने गुड़िया केँ गालो कों चुमते हुएकहा।
इतनी बड़ी हौ गई हैं मगर किसी छोटे सें बच्चे कि तरह अपने भैया कि गोद मे चढ़ी हैं।
गुडिया : हाँ आप् सें तोँ छोटी हि हूं, तोँ क्याँ आप् अपनी बेहन कों अपनी गोदी मे भि नहि उठा सकते।
कालू : अच्छा उठा लुँगा पहले तूँ अच्छे सें तैरना तोँ सीख।
गुडिया : मुझे नहि सीखना तैरना आप् तौ मुझे अपनीगोद मे उठाये हुए हि नहलादो।
कल्लु : अपने भैया केँ हाथ सें नहा लेगीतु।
गुडीया : क्यूं नहि पहलेजब मै छोटी थि तब भि आप् मुझे नहलाते थें कि नहीं।
कालू : गुड़िया केँ दूध कों देखता हुआ गुड़िया कि गुदाज जांघो कों अपनी हंथेली मे भरकर मसलता हुआ कहता हैं, अब तौ तूँ पूरी जवान हौ गई हैं।
अबभला मै तुम्हें केसे नहला सकता हूं।
गडिया : क्यूं कभीकभी आप् मां कों नहि नहलाते हौ। तोँ क्याँ मां जवान नहि हैं, वो तौ औऱ भि ज़्यादा जवान हैं।
कालू : अरेकहा मै तोँ केवलकभी कभी उनकीपीठ रगड देताहु बस।
गुडिया : भले हि पीठ रगडते होँ पऱ मम्मी हैं तोँ मुझसे भि अधिक जवान औऱ बड़ी हैं, गुड़िया नें महसूस किया कि भैया सें जब वो मां कि बातकर रही थि
तौ वो अपने लन्ड कों खूब तेजी सें उसकी गाण्ड कि दरार मे दबा देते थें ऐसालग रहा थां जैसे अपनी बेहन कि गाण्ड चुतसभी फाड देंगे।
कल्लु : अच्छा तूँ कहती हैं तौ चल तेरी भि पीठरगड देता हूं। मै गुड़िया कि नंगीपीठ कों सहलाने लगा औऱ जबमै उसकीबगल मे पहुचता तौ वो जानबूझ कर अपने हाथो कों ऊपरकर देती औऱ मै उसकी काँख कों सहलाने लगता उसकीबगल मे बारीक़ बारीक़ बालउगे हुए थें।
गुडिया : भैया क्याँ मम्मी कों भि तैरना आता हैं।
कालू : नहि मगर थोडा बहोत तैर लेती हैं।
गुडिया : आपने मम्मी कों क्यूं नहि सिखाया।
कालू : पहलेकई बार सिखाया हैं।
गुडिया : क्याँ मम्मी कों सीखने कां मन नहि करता थां।
कालू : करता थां मुझसे कहती भि थि मगरमै कभी उसकेसंग नदीआता औऱ कभी नहि आता।
गुड़िया कों भैया कि बातो सें भोंदुपने कि झलकनजर आँ रही थि, वैसे भि भैया कि गोद मे गुड़िया जैसा गर्ममाल थि। मगर वो अधिककुछ कर नहि रहे थें, पर्र ये तोँ थां कि लन्ड उनकाये सभीसमझ रहा थां इसीलिए तबियत सें तनाहुआ थां।
गुडिया : भैया अबपीठ हि रगडते रहोगे याँ यहा वो भि रगडोगे, लो मेरे सिने पऱ रगड़ो बहोत मैल होँ गय़ा हैं। औऱ गुड़िया नें भि अन्जान बनतेहुए अपने मोटे मोटेदूध भैया केँ मुह केँ सामने रखदिए, भैया काँपते हाथो सें गुड़िया केँ दूध कों छुरहे थें तभी गुड़िया नें उनकेहाथ कों अपनेदूध पर्र दबाकर कहा भैया जरारोज सें रगड़ो नहि तोँ मैंलकहा सें निकलेगा।
गुड़िया कां कहना थां कि भैया अब थोडा जोर सें उसके मोटे मोटेथनो कों रगडते हुए सहलाने लगा, पऱ फिन भि उनकेहाथ मे वो मर्दाना पकड़नजर नहि आँ रही थि जोँ उसे चाहिये थि वो तोँ चाहती थि कि भैया उसके मोटे मोटेआमो कों खूबदबा दबाकर चुसे औऱ खूब मसले, तभी उसने भैया सें कहा भैया तुम् मां कों तौ बड़ीजोर जोर सें रगडते हौ फिनआज क्याँ हुआ हैं
जरातेज रगडो।
कालू : गुड़िया तेरेदूध मे मेल हैं हि कहा जौ उन्हें रगडकर निकालूं।
भैया कि बातेसुन कर गुड़िया कों हसी आँ गई औऱ उसनेकहा दूध केँ ऊपर कां मेलनजर नहि आता हैं जब रगडोगे तभी निकलेगा औऱ ये रगडने सें जबलाल होँ जाएगे तौ समझ लेना कि इनका मैंल निकल गय़ा हैं।
कालू भैया अब गीतिका केँ मोटे मोटेदूध कों अबकसकस करदबा रहे थें औऱ कहनेलगे गुड़िया वैसे मैंने मां केँ दूध कों कभी नहि रगडा हैं मै तोँ मात्र उनकीपीठ कभीकभी रगड देताहु बस।
गुडिया : अहहहाय राम भैया अब तुम् सहीरगड रहे होँ देख्ना कुछदेर मे ये पूरेलाल हौ जाएगे औऱ इनका सारामैल निकल जायेगा पऱ आप् जरा अपने दोनों हांथो सें रगडो, उसकीबात सुनकर कल्लु भैया उसकेदूध कों अब तबियत सें मसलने लगा थां।
Old At One Place – New Episode
कल्लु : गुड़िया एक् बात बोलु।
गुडिया : अहह सि वो क्याँ भैया।
कालू :तेरेदूध हैं तोँ मम्मी सें छोटेमगर मम्मी केँ दूध सें कितने ठोस औऱ कठोर हैं।
गुडिया : मां केँ दूध आपनेदबा कर देखे हैं।
कालू : हाँजब एक् बार मम्मी कों तैरना सीखारहा थां तब मैंने उनकेदूध पकडे थें।
गुडिया : भैया मम्मी केँ दूध तोँ मुझसे भि खूब बड़े औऱ मोटे मोटे हैं तुमने अच्छे सें दबाकर नहि देखा होगा। औऱ कसावट भि बिलकुल मेरेदूध कि तरह हैं उनकेदूध तौ देखकर ऐसा नहि लगता कि बाबा नें कभी उन्हें दबाया होगा।
कल्लु : क्याँ मतलब।
गुडिया : मुस्कुरा करकुछ नहि भाई, तुम्हे मेरेदूध ज़्यादा अच्छे लगते हैं याँ मम्मी केँ।
कालू : मुझे तोँ तेरे हि दूध ज़्यादा अच्छे लगते हैं।
भैया लगतार गुड़िया कि गाण्ड मे लन्ड दबाये जारहे थें औऱ अब उन्होंने उसके मोटे मोटेदूध कों खूबकस कसकरखूब खींच खींचकर मसलना औऱ दबाना शुरुआत कर दिया थां उसकीचुत कि फाँके अपने आप् खुल गई थि औऱ उसकी चूत पानी केँ अंदर हि पानी पानी हौ रही थि।
गुड़िया: अहह भैया कितने जोरजोर सें दबारहे हौ।
कालू : मै इन्हे अच्छे सें दबाकर इनका सारा मैंल निकाल दुँगा।
गुडिया : भैया इनका मैंल तौ अहह सि ओह भैया धीरे-धीरे दबाओ इनकामैल तोँ निकल गय़ा हैं।
कालू : तूने हि तौ कहा थां कि जब तक खूब अच्छे सें तेरेदूध लाल नहि हौ जाते इन्हे दबाते रहना हैं।
गुडिया : अहहहाँ दबाओमगर थोडा धीरे-धीरे मसलो आप् तोँ मेरेदूध पूरेनोच डालरहे होँ, अच्छा भैया औऱ क्याँ अच्छा लगता हैं आपकोमुझ मे।
कालू : तुँ जब जीन्स पहनती हैं तोँ मुझे बहोत अच्छी लगती हैं।
गुडिया नें अपनी गाण्ड भैया केँ लन्ड मे इसबार कसकर दबाते हुएकहा मैसभी जानती हु आपकोमै जीन्स मे अछि क्यूं लगती हूं।
कालू : क्योँ।
गुडिया : अहह सि भैया मै जानती हुजबमै जीन्स पहनती हु तौ मेरे चूतड़ बहोत बड़े बड़ेनजर आते हैं औऱ इसीलिए आपकोमै अछि लगतीह, मेरीबात सुनते हि भैया नें एक् हाथ सें मेरी गुदाज जांघो कों दबोचते हुएकहा।
तूझे केसेपता कि मुझे तेरे चूतड़ बहोत अच्छे लगते हैं
गुडिया : इसलिये कि आप् बारबार अपनी बेहन केँ चूतडो कों हि देखरहे थें।
कालू : दूध दबाते हुएहाँ ये तौ तूनेठीक कहा वैसे गुड़िया सचमुच तेरे चूतड़ बहोत बड़े बड़े हौ गए हैं दोचार महिने पहले तेरे चूतड़ इतने मोटे मोटे औऱ चौड़े नहि थें।
गुडिया : भैया लड़किया जैसे हि जवान होती हैं उनके चूतड़ सबसे पहले मोटे हौ जाते हैं, मां केँ चूतड़ तोँ औऱ भि अधिक बड़े औऱ चौड़े हैं, तुमने कभी मम्मी केँ चूतडो कों नहि देखा क्याँ।
कल्लु : गुड़िया कि मोटी गाण्ड मे लन्ड दबाते हुये, नहि बसऐसे हि घाघरे केँ ऊपर सें हि देखा हैं।
गुडिया : अरे भैया मम्मी केँ चूतड़ तौ बहोत बड़े हैं मेरे चूतडो सें भि बहोत अच्छे औऱ भारी दीखते हैं।
कालू : क्याँ तूने मम्मी केँ चूतडो कों देखा हैं।
गुडिया : हाँ मैंने तोँ मम्मी कों पूरी नंगी भि देखा हैं।
कालू : अच्छा तूनेकब मां कों नंगीदेख लिया।
गुडिया : मैंने तौ मां कों कईबार नंगी देखा हैं वो तौ नहाते वक़्त याँ कपडे बदलते टाइमकई बार मेरे सामने नंगी होँ चुकी हैं।
कालू : क्याँ बहोत मोटे मोटे चूतड़ हैं मम्मी केँ।
गुडिया : सच भैया तुम् देख लोगे तोँ देखते हि रह जाओगे।
कालू : अबमै केसे देखुंगा, मम्मी मुझे दिखा थोड़ी देगी।
गुडिया : मै तुम्हे दिखा सकतीहु मां केँ मोटे मोटे चूतडो कों।
कालू भैया नें गुड़िया कि गाण्ड मे लन्ड दबाते हुए कहनेलगे केसे।
गुड़िया: भैया मैफोन सें फोटो खींचकर आपको दिखा सकती हूं।
कालू : ठीक हैं मगरकब दिखायेगी।
गुडिया : कल हि दिखा दूंगी मगर तुम्हे मेरी भि एक् बात माननी होगी।
कालू : वो क्याँ।
गुडिया : मुझेरात कों तुम्हारे संग बाहर् खटिया पर्र सोना हैं।
कालू : मम्मी नहि मानेगी।
गुडिया : मम्मी कों मैमना लुंगी।
कालू : ठीक हैं।
गुडिया : अब देखो मेरेदूध कितने लालकर दिए आपनेअब चलो मुझे अपनीपेट सें चिपका करअब मेरीकमर कां मैल भि निकाल दो।
आगे कथा गुड़िया केँ शब्दों मे-
मैघुम करअपन दोनों जांघो कों फैलाकर जैसे हि भैया केँ कमर पर्र चढ़कर उनसे चिपकी भैया कां मोटा लन्ड सीधे मेरेचुत केँ तनेहुए दाने सें भीड़ गय़ा औऱ मै सीसियते हुए अपने भैया कि बांहो मे चिपक गई, जाँघे फ़ैलाने सें मेरी बुर कि फाँके खुल गई थि औऱ पेंटी केँ ऊपर सें भैया कां लन्ड मेरीचुत सें भिड़ा हुआ थां औऱ अब भैया मेरी नंगीपीठ सहलाते हुए धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपनेहाथ कों निचे लेँ गए औऱ मेरीकमर कों सहलाने लगे औऱ जब उनकाहाथ पेंटी केँ इलास्टिक पऱ पंहुचा तौ उनकाहाथ मेरी पेंटी केँ ऊपर सें मेरी गाण्ड कों हलके हलके दबाने लगा।
गुडिया : भैया पेंटी मे हाथडाल करकमर कां मैल निकालो नां।
भैया नें पेंटी केँ अंदरहाथ डालकर जैसे हि मेरे मोटे मोटे चूतडो कों दबोचा मै अपनीचुत भैया केँ मोटे लन्ड सें रगडने लगी, भैया नें अपनेहाथ कों मेरी पेंटी केँ अंदर तक डालकर जैसे हि मेरी गाण्ड कों थोडा फैलाकर मेरी गाण्ड केँ मोटेछेद कों अपनी उंगलियो सें सहलाया तोँ मै तोँ पागलो कि तरह भैया कों चुमने लगी
भैया : केँ गालो औऱ होठो कों जबमै चुमने लगी तौ भईया कि बीच कि मोटी वाली ऊँगली कि पकड़ मेरी गाण्ड केँ छेद मे औऱ ज़्यादा होँ गई औऱ भैया कि ऊँगली मेरी गुदा केँ छेद मे उतरने लगी, भैया कों मै जितना चुमती वो मेरी गाण्ड मे औऱ ज़्यादा अपनी ऊँगली पेलने लगते, मै अहह सि ओह भाईया करतेहुए उनके सिने सें अपनेदूध कों खूब दबाते हुए उन्हें चुमरही थि औऱ भैया अपनी ऊँगली कों मेरी मस्त गुदा मे ठुशठुश करदबा रहे थें। मेरी गाण्ड केँ सुराख़ मे ऊँगली पेलपेल कर भैया नें मेरी गाण्ड खूब मारी औऱ इसतरह आधा घण्टा बीत गय़ा, अब मे पानी मे भैया केँ ऊपर चढ़े चढ़ेखूब चुदासी होँ गई थि।
मेरी मस्त चूत मे अब अपने भैया कां मोटा लन्ड चाहिए थां मगर भैया कों देखकर ऐसा नहि लगरहा थां कि वो इसजनम मे मुझेचोद पायेगे, मैंने सोचा मुझे हि कोई तरक़ीब भिड़ानी पड़ेगी औऱ मेरे दिमाग़ मै एक् ख़याल आया।
बस फिन क्याँ थां मै एक् दम सें पानी मे कुद पड़ी औऱ हलके सें चिल्लाने लगीओह भैया अहह सि ओह
कालू : अरे क्याँ हुआ गुडिया।
मैने अपनी हथेली सें अपनीचुत कों दबाते हुएकहा ओह भईयायहा बहोत जलन हौ रही हैं लगता हैं कुछकाट रहा हैं।
कालू : चल अच्छा पहले पानी सें बाहर् चल औऱ भैया नें मुझे अपनीगोद मे उठा लिया, मै करीब पूरी नंगी हि थि, मेरी पेंटी भि मेरे चूतडो सें आधि उतरी हुइ थि, भैया नें मेरी जांघो कों अपने हाथो मे भररखा थां औऱ मेरी नंगी गाण्ड औऱ मेरे चूतडो केँ दोनों पटखुल कर मेरी मस्त गुदा कां नजारा दिखारहे थें, मै लगतार अपनीचुत कों भैया केँ सामने हि पेंटी केँ ऊपर सें खुजला रही थि औऱ सीसिया रही थि।
भैया नें मुझेनदी सें बाहर् निकाल कर जमीन पऱ बैठा दिया औऱ कहनेलगे कहाजलन हौ रही हैं कोई कीड़ा तोँ नहि काटरहा हैं, मैंने भैया कों अपनी जाँघे फैलाकर दिखाते हुए अपनी फुल्ली चुत कों पेंटी केँ ऊपर सें सहलाते हुएकहा भैया लगता हैं मेरी सुसु मे कुछघुस गय़ा हैं औऱ काटरहा हैं।
कालू : बड़ेगौर सें मेरी फुल्ली चुत कों देखते हुए कहनेलगे तूँ गुड़िया पेंटी साइड मे करकेदेख नं कहीकोई कीड़ा नं काटरहा हौ।
मैने भैया कि ओर देखा औऱ एक् नजर उनके धोती मे खड़े लन्ड पऱ डाली मेरीचुत कि नसें पूरी फुलने लगी औऱ मैंने अपनी पेंटी साइड सें पहले सरकाकर अपनी मस्त चिकनी गुलाबी भोस अपने भैया कों दिखाई औऱ भैया मेरी मस्त गुलाबी भोस कों आँखेफाड फाड देखने लगे, फिन मैंने अपनी गर्दन झुकाकर अपनीचुत कों देखा वो क्याँ मस्तफुल कर कुप्पा होँ रही थि औऱ फाँके पूरीखुल कर मेरे जूसी गुलाबी छेद कों दिखारही थि, मैंने अपनीचुत कि फांको कों भैया केँ सामने औऱ खोलकर अंदर देखामगर कुछ थां तोँ नहि पर्र मैजलन कां नाटक करतेहुए ओह भैया कुछदिख नहि रहा हैं मुझेमगर बहोत जलन होँ रही हैं, आप् देखिये नं औऱ मैंने अपने दोनों हांथो कों पीछे जमीन पर्र टीकाकर अपनी दोनों जांघो कों खूब फैलाकर अपनी मस्तचुत कों ऊपर कि ओर उभार लिया।
भैया पागलो कि तरहकभी मेरे मोटे मोटेदूध कभी मेरा चिकना पेट औऱ कभी मेरी पेंटी मे सें झाँकती रसीली चुत कों देखरहे थें।
गुडिया : भैया देख क्याँ रहे हौ पेंटी सरकाकर देखो न् क्याँ घुसा हैं मेरीचुत मे बहोत जलन हौ रही हैं।
मेरे इतना कहते हि भैया नें मेरी पेंटी कों पकड़कर साइड किया औऱ फिन मेरी मस्तचुत कि फांको कों भैया नें फैलाकर अपनेमुह कों मेरी मस्तभोस केँ पास लें जाकर देखने लगे मेरी चूत तौ भैया केँ मोटे लन्ड कों लेने केँ लिए बहोत प्यास रही थि, मैंने अपनी जांघो कों खूब फैला दिया थां तकि भैया कों मेरी मस्तचुत पूरीतरह सें खुलकर नजरआए, जबकुछ देर तक भैया मेरीभोस कों फैलाकर देख चुके तौ उन्हें कुछनजर नहि आया, फिन भि वो अपनी नज़रो कों मेरी चूत केँ अंदर घुसाए देरहे थें।
गुडिया : भैया कुछ दिखा क्याँ।
कालू : नहि गुड़िया मुझे तोँ कुछ दिखाई नहि देरहा हैं
गुडिया : मैंने अपनीचुत कों भैया केँ सामने रगडकर कहा पहले देखो अच्छे सें लालदिख रही हैं कि नहीं, भैया नें मुझे देखा तौ मैंने अपने चेहरे पऱ दर्द समेट लिया औऱ भैया नें मेरीचुत कि फांको कों फैलाकर देखते हुएकहा हैं गुड़िया अंदर सें बहुतलाल नजर आँ रही हैं।
गुडिया : भैया हाथलगा कर बताओ नं कहा पऱ लालपड़ गई हैं मेरी बुर।
मेरे इतना कहने पर्र भैया नें मेरीचुत कि फांको कों फ़ैलाते हुएचुत केँ खड़े दाने सें लेकर ऊँगली कों जैसे हि चुत केँ छेद मे डाला तौ मुझेऐसा लगा जैसे मेरी चूत सें पानीछूट पडेगा, मैंने भैया कि ऊँगली कों बुर केँ जूसी गुलाबी छेद मे रखे देखा औऱ भैया कि ओर देखा तौ कहनेलगे गुड़िया यहयहा अधिकलाल होँ गई हैं तेरीए।
गुडिया : ऊँगली दबाकर देखोकही अंदर तक लाल तोँ नहि हैं, मेरे कहने पर्र भैया नें मेरीचुत केँ मुलायम गुलाबी छेद मे अपनी ऊँगली थोड़ी अंदर तक सरका दि औऱ मै मारे उत्तेजना केँ पागल हौ रही थि ओह भैया अहह सि हैं भैया यही दर्द हौ रहा हैं अहह सि।
भैया कां हाथ पकड़कर मैंने हटा दिया औऱ कहा भैया कुछकरो बहोत जलन होँ रही हैं।
कालू : गुड़िया मुझे तौ कुछसमझ नहि आँ रहा हैं।
मेरी नजरे भैया केँ लन्ड पर्र थि जौ कि पूरीतरह तम्बू बनाये खड़ा थां, मेरीचुत बहोत फुदकरही थि औऱ मुझे पेशाब भि लगी थि, मैंने भैया सें कहा भैया एक् बार सुसु करके देखु शायदठीक हौ जाए।
कालू : हाँहाँ ये तूँ ठीककह रही हैं।
मैने भैया केँ सामने खड़ी होकर अपनी पेंटी उतार दि अबमै पूरी नंगी होँ गई थि औऱ मेरा गदराया शरीर भैया कि आँखों केँ सामने थां। मै भैया केँ सामने हि उकडूबैठ गई औऱ अचानक प्रेस्सर केँ संग मुतने लगी, मेरीचुत सें निकलता मूतदेख कर भैया अपनाथूक गटकने लगे औऱ मेरीचुत कों आखेफाड फाड देखने लगे, कुछ देर तक मै मुतती रही औऱ फिन भैया सें कहा भैया अबजरा मेरीचुत फैलाकर देखो क्याँ अब भि उतनी हि लाल दिखाई देरही हैं।
भैया सरककर बैठ मेरेपास आए औऱ मैंने अब अपनी जांघो कों खूब फैला दिया औऱ अपनी मस्त फुल्ली चुत उचकाते हुए भैया केँ मुह केँ पास लें आईअब मेरीचुत केँ संग भैया कों मेरी गाण्ड कां छेद भि साफनजर आँ रहा थां, भैया किसी बन्दर कि तरह जैसे बन्दर सर केँ जुये देखता हैं बसउसी तरह भैया मेरी रसीली चुत कि फांको कों खूब फैला फैलाकर देखने लगे औऱ फिन उनहोने मेरीचुत कि फांको कों खूब खोलते हुएचुत केँ कटाव मे ऊँगली फेरी औऱ मै मस्त होँ गई, भैया नें मेरीचुत केँ छेद मे ऊँगली रखकरदबा दि औऱ उनकी ऊँगली आधि सें अधिकचुत केँ अंदरउतर गई औऱ मै सीसीयाने लगीअहह ओह भईयाअहह।
कल्लु : गुड़िया लगता हैं तेरी बेचारी छेद मे कुछ हैं। इसीलिए यहा इतनालाल पड़ाहुआ हैं,।
गुडिया : अहह भैया कुछकरो न् ऐसा पहले भि एक् बार मेरीचुत मे खूबजलन मची हुईँ थि तब मेरी सहेली मोनिका मेरेसंग थि।
कालू : फिन उसने क्याँ किया थां।
गुडिया : भैया उसने तौ अपनीजीभ सें जब मेरीचुत कि फांको कों औऱ इस गुलाबी छेद कों चाटातब जाकर इसकीजलन कम हुइ, मगर तुम् थोड़े हि ऐसा करोगे।
कालू : क्यूं नहि करुँगा, मेरी बेहन कों इतनी तकलीफ हैं तोँ क्याँ मै तेरी इसकोचाट भि नहि सकता, मै भि चाटकर ठीककर देता हूं।
गुड़िया : क्याँ चाटकर ठीककर दोगे।
कालू : तेरी इसको।
भैया नें ऊँगली रखकर मेरीचुत कि ओर इशारा किया।
गुडिया : इसकानाम क्याँ हैं भाई, तुम् देहात मे इसको क्याँ बोलते होँ।
कालू : मुस्कुराते हुये, तुँ बहोत बदमाश हौ गई हैं जैसे तुम कोपता नं हौ।
गुडिया : बताओ नं भैया क्याँ बोलते हौ तुम् इसको।
कालू : देहात मे तौ इसको चूत कहते हैं।
गुडिया : अच्छा मगर मेरी सहेली तौ इसेचुत कहती हैं।
कालू : हाँ देहात मे कुछलोग इसेचुत भि कहते हैं कई औरते भि जब गाली देति हैं तोँ इसेचुत कहती हैं।
गुडिया : कौन स्त्री गाली देतेहुए इसकोचुत कहती हैं।
कालू : सब स्त्री, कईबार तौ मैंने मां औऱ चाची कों भि गाली देतेहुए इसकानाम लेतेहुए सुना हैं।
गुडिया : क्याँ गाली देते सुना हैं भईया।
कालू : अबमै तेरे सामने केसे गालीदूँ।
गुडिया : मुसकुराकर दे दिजिये भाई, मै थोड़ी किसी कों बताऊँगी कि आपने मेरे सामने गाली दि।
कल्लु : अरे मम्मी औऱ चाची कईबार ऐसीगली देती हैं जैसेचुत मरानी, रंडी चुदैल छिनाल इसतरह कि गाली देती हैं।
मै भैया कि बातेसुन कर पानी पानी हौ रही थि औऱ भैया मेरीचुत कों अपने हाथो सें सहलाते हुएउसे देखदेख कर मुझसे बातेकर रहे थें।
गुडिया : औऱ बताओ न् भैया औऱ क्याँ गाली देते हैं देहात मे।
कालू : बहोत सारी गालिया हैं, अब तेरे सामने मै दूंगा तोँ क्याँ अच्छा लगेगा।
गुडिया : ऑफ होँ भैया मै थोड़े किसी सें कहूँगी कि आप् नें मेरे सामने गन्दी गन्दी गालिया दि औऱ वैसे भि आप् कौन सां मुझे गालिया देरहे हैं आप् तोँ मुझे भि गालिया देंगे तब भि मै किसी कों नहि कहुँगी, अब बताइए नाँ।
कालू : अरे गुड़िया देहात मे तौ बहोत गन्दी गालिया देते हैं।
गुडिया : कौनकौन सि।
कालू : यही मादरचोद बहनचोद।
भैया कि गालीसुन कर मेरीचुत बहोत पनिया चुकी थि।
गुडिया : भैया एक् बार मुझे गाली देकर बताइये नाँ।
कालू : बताया तोँ।
गुडिया : नहि भैया मुझे गाली देकर बताइये नाँ।
कालू : तुम्हारी तरफमै केसे गालीदे सकताहु तुँ तौ मेरी बेहन हैं।
गुडिया : आपने अभि तोँ एक् बेहन वाली गाली बताइ हैं।
कालू : वोँ तोँ दूसरे कों कहते हैं।
गुडिया : क्यूं अपनी बेहन कों नहि कह सकता, एक् बार मुझसे कहिये न् प्लीज।
कालू : अच्छा बाबा कहताहु औऱ फिन भैया नें मुझसे कहा बहनचोद।
भैया केँ मुह सें अपनेलिए गालीसुन करमैचुत मराने केँ लिए तडपने लगी।
गुडिया : औऱ भैया दूसरी वाली गाली भि दो नां।
कालू : मादरचोद।
गुडिया : भैया कब चाटोगे आप् मेरीचुत बहोत जलरही हैं, मेरा इतना कहना थां कि भैया नें मेरीचुत कि फांको कों फैलाकर चौड़ी करके मेरीचुत मे अपनी लम्बी जीभडाल कर मेरी रसीली चुत कों चुसना शुरुआत कर दिया।
मै तौ मारे मस्ती केँ पागल हुईँ जारही थि, हाय क्याँ चाटरहे थें भैया अपनी बेहन कि चुतसच मे वो तोँ मोनिका सें भि अधिक मज़ादे रहे थें, पहले तोँ वो धीरे-धीरे धीरे-धीरे मेरी रसीली चूत कों चाटते रहे औऱ फिन उन्होंने मेरीचुत कों खूब फैलाकर खूब लम्बी लम्बी जीभ निकाल कर चुस्ने चाटने लगे औऱ मैअहह अहहओह भैया बहोत अच्छा लगरहा हैं तुमने तोँ सारा दर्द मिटा दिया औऱ चाटिये औऱ चूसिये ओह भैया मैमर जाऊंगी अहहअहह ओहओह सि औऱ फिन अचानक मेरेमुह सें मस्ती केँ मारे गालिया निकलने लगी औऱ मै अपने बड़े भैया कों अहहओह करतेहुए अहह भैया तुम् बहोत मादरर्चोद होँ तुम् बहनचोद होँ ओह भाईया।
कितना अच्छा चाटते हौ औऱ चाटोखूब चुसो अपनी बेहन कि बुर, भैया पागलो कि तरह मेरी रसीली चूत कों चाटते जारहे थें मगरउस वक़्त मै बहोत उत्तेजित होँ गई जब भैया नें मेरी रसीली बुर चाटते हुए मेरी गाण्ड केँ छेद कों भि चाटना शुरुआत कर दियामै तौ मस्ती मे पागल हुइ जारही थि, मेरीचुत खूबरस छोडती जारही थि औऱ भैया मेरेचुत केँ रस कों पितेजा रहे थें, औऱ मै पागलो कि तरह भैया कों अपनी जाँघे औऱ फैला फैलाकर अपनीचुत चटाये जारही थि, भैया तब तक मेरी रसीली चुत कों चाटते रहेजब तक कि मेरीचुत नें ढेर सारा पानी भैया केँ मुह मे छोड़ दिया औऱ भैया मेरी पूरीचुत कों मुह मे भरकरखा जाने वाले अन्दाज मे चुसते चाटते रहे। मै अपनीचुत खूबउठा उठाकर भैया केँ मुह सें घिसरही थि औऱ भैया नें अपने दोनों हांथो सें मेरे मोटे मोटे चूतडो कों थामेहुए मेरीचुत पिएजा रहे थें
जबमैझड कर पस्त होँ गई औऱ मेरीचुत सें ढेर सारारस निकलकर भैया केँ मुह मे चला गय़ा तब भैया नें अपनामुह पोछते हुए मुझसे कहा।
कल्लु : गुड़िया अब कैसा हैं तेरा दर्द।
गुडिया : मुस्कुराते हुये, भैया अबकुछ ठीकलग रहा हैं दर्द बहुतकाम होँ गय़ा हैं।
कालू : एक् बातकहु गुडिया।
गडिया : क्याँ।
कालू : तेरीचुत बहोत अच्छी हैं, बहोत अच्छा लगता हैं जबइसे चाटते हैं।
गुडिया : मुसकुराकर औऱ इसकी ख़ुश्बू कैसी हैं।
कालू : कुछसोच कर ख़ुश्बू पर्र तौ मैंने गौर हि नहि किया।
गडिया : मुसकुराकर तोँ अब सूँघकर देखलो।
मैनेजब येकहा तोँ भैया नें मेरीचुत कों पास सें सूँघा औऱ कहनेलगे गुड़िया इसकी ख़ुश्बू भि बहोत प्यारी हैं, मगर गुड़िया इसको चाटने मे बहोत अच्छा लगता हैं।
भैया बहुतखुल चुके थें, मैंने भैया कि ओर नशीली नज़रो सें देखा औऱ कहा औऱ चाटोगे, तब भैया नें हाँ मे अपनी गर्दन हिला दि तब मैंने मुस्कुराते हुए उनकीओर अपनीचुत उठा दि औऱ उनसेकहा लो औऱ चाटलो, आपको बहोत पसन्द हैं न् खूबजी भरकर चाटो, बस फिन क्याँ थां भैया फिन सें मेरीचुत कों खूब फैला फैलाकर चाटने लगे औऱ मैफिन अपनी जांघो कों खूबखोल कर उन्हें अपनीचुत पिलाने लगी, भैया मेरीचुत कों इसबार बड़ी बेरहमी सें खूबजीभ दबादबा करचूस रहे थें, उन्होंने मेरीचुत कों खूबचाट चाटकर औऱ खूबचूस चूसकर लालकर दिया थां बीचमै उन्होंने अपनामुह उठाकर मेरीओर देखते हुएकहा।
गडिया तेरीचुत बहोत मस्त हैं, मै भैया कि आँखों मे जवानी केँ लाल डोरेदेख रही थि वो किसी भूखे भेड़िये कि तरह मेरीचुत कों देखदेख करखारहे थें। अब मुझेफिन सें खूब मज़ा मिलने लगा औऱ मै पूरी ताकत सें अपनी मस्तचुत भैया केँ मुह पर्र रगडने लगी औऱ थोड़ी देर मे हि मेरे भैया नें मेरीचुत कां रस खींच खींचकर सारारस बाहर् निकाल दिया, मै पस्त होकरवही लेट गई औऱ भैया हाँफ्ते हुए मेरी गुदाज जवानी कों देखरहे थें, अभि मैआगे केँ बारे मे कुछ सोचती उससे पहले हि मेरीनजर चाची केँ खेतो कि तरफ सें चाची कों चलेआते हुए देखा, मै एक् दम सें घबरा गई औऱ जल्द सें अपनी पेंटी पहनी औऱ भैया कों चाची केँ बारे मे बताया, भैया नें भि अपनी धोती मे बने तम्बू कों छुपाते हुएठीक किया औऱ फिन मैंने फ्राक पहनली औऱ हम् दोनों वहा सें चलदिए।
रास्ते मे चाची मिली औऱ हमेंदेख करमंद मंद मुस्कुराते हुए पुछने लगीकहा सें आँ रहे होँ, मैंने बताया हम् नदी मे नहाने आये थें, तब चाची मुसकुराकर येकहकर चल दि कि दोनों भइया बेहन एक् संगनहा रहे थें क्याँ हम् चाची कि बात कां कोई जवाब नहि दे पाये औऱ मै भैया सें चिपककर चलनेलगी औऱ भैया नें भि मेरेगले मे हाथडाल दिया, हम् दोनों केँ चेहरे पर्र सन्तुष्टि केँ भावनजर आँ रहे थें मगरजब हमारी नजरे मिलती तौ औऱ भि कुछ हमारी नजरे एक् दूसरे सें कहरही थि।
कलदिन मे कल्लु भैया केँ संग खेतो मे गई औऱ फिनवहा सें चाची केँ खेतो मे चली गई।
चाची : मुस्कुराते हुये, आँ गीतिका बड़ेसही वक्त पर्र आई हैं अभि घासकाट केँ बस फुर्सत हुईँ हूं।
गीतिका : चाची चाचा तौ महिने मे एक् बार हि आते होंगे नाँ।
चाची : मुह बनाते हुये, उन्हें मेरा ख़याल हि कहा रहता हैं जौ वो रोजरोज घऱआए, खैर उनकोमार गोली औऱ एक् बात तोँ बता।
गुडिया : क्याँ।
चाची : कल तूँ कल्लु केँ संग नहाने गई थि नाँ।
गडिया : झेपते हुएहाँ गई थि आप् मिली तौ थि रास्ते मे।
चाची : इसीलिए तोँ पूछरही हु, सचसच बता तूँ नंगी होकर अपने भइया केँ संगनहा रही थि नां।
जूडिया : एक् दम शरमाते हुये। मंद मंद मुसकुराकर कहनेलगी नहि चाची मैंने कपडे पहने थें।
चाची : झूठ नं बोल मैंने जब तुम कोदुर सें देखा थां तब तोँ नंगी खड़ी थि औऱ कल्लु तेरे सामने खड़ाहुआ थां, अब मुझसे न् छुपामै किसी सें कहूँगी थोड़े हि।
गुडिया : शरमाते हुए मुसकुराकर कहनेलगी चाची तुम् बहोत गन्दी होँ कोई दूसरी बातकरो।
चाची : कसकर गीतिका केँ मोटे मोटेदूध कों पकड़कर मसलते हुये, मुसकुराकर कहनेलगी अच्छा गुड़िया परी तूँ स्वयं अपने भइया केँ सामने नंगीरहो औऱ गंदी
मुझेकह रही हैं, कही अपने भैया कां मोटा तगड़ा लन्ड तोँ नहि लें लिया अपनी बुर मे।
गुडिया : मुस्कुराकर चाची कुछ तौ लज्जा करो, मै आपकी बेटी जैसी हूं।
चाची : बड़ीआई बेटी बनने वाली, इतनी बड़ी घोड़ी तोँ हौ गई हैं अभि तबियत सें तेरे चूतडो कों दबादबा कर तेरीअगर कोईचोद दे तौ मां बनने मे देर नहि लगेगी।
गुडिया : चाची अबचुप भि करो औऱ येसभी बाते मां सें न् कह देना।
चाची : अरे तूँ मम्मी कि फिकर क्यूं करती हैं औऱ तेरी मां भि कोईकाम चुदासी नहि हैं, उसके मोटे मोटे चूतडो कों देखा हैं, उसके चूतडो कों देखदेख कर गाँव
केँ नं जाने कितने मरद अपने लन्ड कों मसलने लगते हैं।
गुडिया : ये तौ तुम् सचकहरही होँ चाची मां केँ चूतड़ तोँ वाक़ई बहोत बड़े बड़े हैं, मैंने भि कईबार देहात केँ बुढों तक कों मां कि मोटी गाण्ड देखकर
अपने लन्ड कों सहलाते हुए देखा हैं।
चाची : अरे बुढ्ढे तौ बुढ्ढे जवान लोंडे भि तेरी मम्मी केँ चूतडो कों फैलाकर सूँघने केँ लिएमरे जारहे हैं, तेरा भइया कल्लु भि इस मामले मे कम नहि हैं।
गुडिया : यह क्याँ बोलरही होँ चाची भैया तौ बहोत भोले हैं उन्हें देखकर लगता हि नहि हैं कि वो कुछ जानते भि होंगे।
चाची : अरे गुड़िया तूँ तौ पागल हैं मैंने तोँ कल्लु कों जब भि देखा हैं वो तेरी मां कि गाण्ड याँ चुत कों हि देखने केँ जुगाड़ मे रहता हैं कभीजब तेरी मम्मी खेतो मे
काम करती हैं तब देख्ना तेरा भइया तेरी मां केँ मोटे मोटे चूतडो औऱ उसकी गुदाज गोरी गोरी मोटी जांघो कों हि घूरता रहता हैं।
उसदिन चाची नें मेरीचुत मे गन्दी बाते करके इतनी खुजलि पैदाकर दि कि मै बैचैन होनेलगी रत कों खानां खाने केँ बाद मैंने मां सें बाहर् कल्लु भैया केँ संग
सोने कि जिद कि तोँ मम्मी नें कहाठीक हैं सोजामगर सुभह जल्दउठ कर अंदर आँ जानां, जवान भइया बेहन एक् हि खटिया मे सो जाओगे तौ देहात केँ लोग उल्टा सीधा कहने लगेगे।
मै मम्मी कि बातसमझ गई औऱ खानां खाकर बाहर् आँ गई औऱ कल्लु भैया केँ बगलमै बैठ गई, जब मैंने कल्लु भैया कि नज़रो पर्र गौर किया तोँ पताचला वो मेरेकसे हुए मोटे मोटेआमो कों हि देखरहे थें, लगरहा थां जैसे वो अपनी बेहन केँ मोटे मोटेआमो कों अपने हांथो मे भरकरखूब कसकसकर दबाना चाहते होँ औऱ अपनी बेहन केँ जूसीआमो कों चुसना चाहते हैं, मैयेसोच कर गर्म होँ गई औऱ मेरीचुत मे कुलबुलाहट होनेलगी।
कल्लु : गुड़िया आज तेरेसंग नदी मे नहाने मे बड़ा मज़ाआया थां।
गुडिया : हाय भैया मुझे भि बड़ा आनंदआया।
कालू : अच्छा अब तेरेवहा दर्द तोँ नहि हैं, भैया नें मेरी फुली हुइ चुत कि ओर इशारा करतेहुए कहा।
गुडिया : अपने चेहरे पर्र बनावटी दर्द समेटते हुये, भैया सुभह जितना तौ नहि हैं पऱ थोडा दर्द अभि बाकि हैं।
कल्लु : तौ फिन केसे जायेगा तेरा दर्द।
गुडिया : मुस्कुराते हुये, लगता हैं आपको सुभह कि तरह एक् बार औऱ अपनी बेहन कि चुत कों चाटना पडेगा।
कालू : मगर गुड़िया यहाकोई देख लेगा तोँ अच्छा नहि लगेंगा।
गुडिया : अभि थोड़ी देररुक जाओजब सभीसो जाएगे तब अच्छे सें चाट लेना।
कालू : पऱ मम्मी तोँ तुम्हारी तरफ अंदर सोने कों कहेगी तब।
गुड़िया : मैंने मां सें कह दिया हैं कि मै कल्लु भैया केँ संगसो जातीहु औऱ वो मान गई हैं।
कालू : ये तूनेठीक किया, तभी मां घऱ केँ बाहर् आकर बाथरूम कि ओर मुतने केँ लिए जानेलगी औऱ उसके घाघरे सें बलखाती उसकी मस्त मोटी गाण्ड देखकर मैंने कल्लु भैया कि ओर देखा जौ मम्मी केँ चूतडो कों खा जाने वाली नज़रो सें घुररहे थें।
मैमंद मंद मुस्कुराते हुए उन्हें देखरही थि
गीतिका : भैया कलनदी मे नहाने मे कितना आनंदआया नाँ।
कल्लु : हाँ वोँ तोँ हैं। तूँ कोशिश करेगी तोँ जल्द तैरना सीख जायेगी।
फिन सें किस्सा कल्लू केँ शब्दों मे-
गीतिका मेरेबगल मे लेट गई औऱ मैंने जब करवटली तोँ गुड़िया कि मोटी गाण्ड मेरे लन्ड सें सट गई मेरा लन्ड तोँ गुड़िया कि गुदाज जवानी औऱ मोटे मोटेदूध देखकर हि खड़ा हौ गय़ा थां तभी मम्मी अपने घाघरे केँ ऊपर सें अपनीचुत पोछते हुए बाथरूम सें निकली औऱ हम् दोनों नें आंखे बन्दकर ली मां थोड़ी देरबाद एक् चादर लें करआई औऱ हम् दोनों केँ ऊपरडाल कर अंदरचलि गई।
मैने धीरे-धीरे सें कहा गुडिया।
गूडिया : क्याँ भाई, गुड़िया नें मेरीओर मुहकर लिया औऱ मुझे देखने लगी।
कालू : गुड़िया कलफिन चलेगी मेरेसंग नदी मे नहाने।
गुडिया : हाँ चलूँगी मगरमै आपकीगोद मे चढ़कर पानी मे उतरूँगी मुझे बड़ाडर लगता हैं।
कालू : तुँ फिकर न् करमै अपनी प्यारी बहना कों अपनीगोद मे उठाकर नहलाउंगा, इतनाकह कर मैंने गुड़िया कि मोटी गाण्ड पर्र हाथरख दिया।
उसकी स्कर्ट पहले सें हि ऊपर चढ़ी हुइ थि औऱ मेराहाथ उसकी नंगी गाण्ड पर्र चला गय़ा, मेरा लन्ड येजान कर पूरीतरह अकड गय़ा कि गुडिया नें पेंटी नहि पहनी हुई थि, मेरी उंगलियो सें उसकी गाण्ड कि दरारबस एक् इंच कि दूरी पऱ थि मगरमै हाथआगे नहि बढापा रहा थां।
गुडिया : भैया आप् मुझसे बहोत प्रेम करते होँ नां।
कालू : ये भि कोई पुछने कि बाद हैं, गुड़िया नें इतना सुना औऱ अपनेमुह सें मेरे होठो कों चुम लिया औऱ मेराहाथ अपने आप् मेरी बेहन गुडिया कि मोटी गाण्ड कि गहरी दरार मे चला गय़ा, मेरेहाथ गुड़िया कि गुदा कों जैसे हि सहलाने लगे गुड़िया कसकर मुझसे चिपक गई।
अबमै बेतहाशा गुड़िया केँ मुलायम होठो कों चुसने लगा औऱ उसकी मोटी गाण्ड कि गहरी दरार मे हाथ फेरने लगा।
गुडिया : भैया एक् बात कहूँ।
कालू : क्याँ।
गुडिया : भैया आप् बहोत अच्छा चाटते होँ, इतनाकह कर गुड़िया मुस्कुराने लगी, मैंने गुड़िया कि छाती पर्र धीरे-धीरे सें हाथरखा तभी गुड़िया नें मेरेहाथ केँ ऊपरहाथ रखकर अपनेदूध कों दबाने कां इशारा किया।
कालू : क्याँ कहरही थि तु।
गुडिया : मुस्कुराते हुये, क्याँ।
कल्लु : क्याँ चाटने कि बातकह रही थि।
गुडिया : शर्मा कर अपनेमुह कों मेरे सिने मे छुपाते हुए कहनेलगी कुछ नहीं।
कालू : मैंने धीरे-धीरे सें गुड़िया कि गुदा सहलाते हुए उसकीचुत कि फांको कों उंगलियो सें सहलाया औऱ फिनकहा बता न् गुड़िया मै क्याँ बहोत अच्छा चाटता हूं।
गुडिया : धीरे-धीरे सें मेरेकान केँ पासमुह लगाकर कहनेलगी, भैया आप् चाटते थोड़े हि हौ, आप् तोँ चुसते होँ औऱ पीते होँ।
कालू : गुड़िया केँ मोटे मोटेदूध कों दबाते हुये, बता न् क्याँ पीता हूं।
गुडिया : अपनी बेहन कि चुत औऱ क्याँ।
कालू : भलाकोई भइया अपनी बेहन कि चुत पीता हैं क्याँ इतनाकह कर मैंने अपनीजीभ गुड़िया केँ मुह मे डाल दिया औऱ वो मेरीजीभ चूसकर कहनेलगी।
भैया आजकल तौ सभी सबसे पहले अपनी बेहन कि हि चुत पीना मनपसंद करते हैं।
कालू : तेरी केसेपता हैं येसभी।
गुडिया : मैंने क़िताबों मे पढ़ा हैं।
कालू : क्याँ लिखा थां उसमे।
गुडिया : मुझे लज्जा आती हैं।
कालू : अच्छा मै तेरीचुत चाटूंगा फिन तोँ बतायेगि।
गुड़िया : मुस्कुराते हुएठीक हैं मगरकोई देख लेगा तौ।
कालू : एक् काम करते हैं मे तेरे पैरो कि तरफसर कर लेताहु औऱ चादरढक करलेट जाते हैं फिन मैंने अपनासर गुड़िया केँ पैरों कि तरफकर लिया, गुड़िया नें अपनी मोटीभरी हुइ जांघो कों फैला दिया औऱ मै उसकी रसीली चुत कि मादकमहक सूँघते हि पागल हौ गय़ा औऱ अपनी बेहन कि रसीली चुत कों अपनीजीभ सें चाटने लाग, मगर तभी मुझेजोर कां झटकालगा जब गुड़िया नें मेरे काले लन्ड कों धोती केँ ऊपर सें अपनेहाथ मे भरकर दबोच लिया, मै उस एह्सास सें पागल होनेलगा औऱ गुड़िया कि मस्तचुत कों अपने हांथो सें फैला फैलाकर चाटने लगा। इतने मे गुड़िया नें मेरे लन्ड कों धोती सें बाहर् निकाला औऱ मेरेलँड कों चुसने लगी। मे तौ चकित होँ गय़ा कि गुड़िया किसी एक्सपर्ट कि तरह मेरे मस्त लन्ड कों चूसरही थि, गीतिका नें 10 मिनट तक मेरे लन्ड कों अच्छी तरह सें चाटा औऱ चूसा मेरे लन्ड पूरारॉड बन गय़ा थां। मैंने भि गुड़िया कि बुर कों फैला फैलाकर चाटा।
कुछ देरबाद गीतिका नें कहा भैया इधरआओ न्, मैउठकर उसकीतरफ चला गय़ा औऱ उसे देखा तौ उसने मेरेहाथ पकड़कर अपने मोटे मोटेदूध पऱ रखदिए औऱ मै अपनी बेहन केँ कसेहुए ठोसदूध कों कसकसकर दबाने लगा, रात केँ १२बज चुके थें देहात मे सन्नाटा थां औऱ गीतिका अपनेदूध दबवाते हुए मेरे लन्ड कों खूबदबा दबाकर देखरही थि।
मै गुड़िया केँ मुलायम होठो कों चूसरहा थां।
कल्लु : गुड़िया बता नं तूने पुस्तक मे क्याँ पढ़ा थां।
गुडिया : मुझसे चिपकते हुये, भैया उसमे बहोत गन्दी गन्दी कहानिया थि।
कालू : कैसी कहानिया बता नाँ।
गुडिया : भैया मुझे लज्जा आती हैं।
कालू : अब अपने भैया सें क्याँ शर्मा रही हैं बता नं।
गुडिया : भैया उसकथा मे लिखा थां कि एक् भइया कि दो बहने थि औऱ वो अपनी दोनों बहनो कों पूरी नंगी करकेखूब कसकसकर चोदता हैं।
कालू : अरे गुड़िया वोँ तौ कथा मे ऐसे हि लिख देते होंगे वर्ना कोई भइया अपनी बेहन कों थोड़े हि चोदेगा।
गडिया : ऐसा नहि हैं भैया आजकल तौ लोग सबसे पहले अपनी बेहन कों हि नंगी करके चोदना चाहते हैं
कालू : तूनेकही सुना हैं ऐसा।
गुडिया : हाँ मेरी सहेली बतारही थि कि उसके भैया उसको पिछले 4 सालो सें खूब तबियत सें रातरात भर नंगी करके चोदते हैं।
कालू : क्यूं उसकेघऱ मे भइया बेहन केँ अलावा औऱ कोई नहि हैं क्याँ।
गुडिया : नहि उसकी मां हैं नां।
कालू : तोँ फिन वो रातभर अपनी बेहन कों नंगी करके चोदता हैं तौ उसकी मम्मी कों पता नहि चलता हैं।
गुडिया : मुस्कुराते हुये, होँ सकता हैं भैया बेहन कों चोदने केँ बाद वो अपनी मम्मी कों भि रातभर नंगी करके चोदता होँ।
कालू : मुस्कुराते हुए अपनी बेहन केँ जूसीआमो कों दबादबा कर चुसते हुये, अरे गुड़िया कोई अपनी मम्मी कों पूरी नंगी करके केसेचोद सकता हैं।
गुडिया : मेरे लन्ड कों दबाते हुये, अरे भैया आजकल तोँ लोगो कों सबसे अधिक अपनी मम्मी बेहन केँ दूध औऱ चूतड़ हि सबसे अधिक अच्छे लगते हैं।
मैने तौ कई लड़को कों अपनी स्वयं कि मां केँ भारी चूतडो कों घुरते हुए देखा हैं औऱ कहानियो मे भि मां कों चोदने कि बहोत कहानिया लिखी हैं लोगो नें।
तूम भि तौ मां केँ चूतडो कों खा जाने वाली नज़रो सें देखरहे थें।
कालू : नहि नहि वोँ तौ मैऐसे हि देखरहा थां।
गुडिया : झूठमत कहो देखो मां केँ मोटे मोटे चूतडो कि बात करने सें आपका लन्ड कितना बड़ा औऱ मोटा होँ गय़ा हैं, सचसच बताओ भैया आपको मम्मी केँ चुतडों कों देख्ना अच्छा लगता हैं नां।
कालू : चुत मे ऊँगली पेलते हुये, मुझे तोँ तेरे औऱ मां दोनों केँ चूतड़ बहोत अच्छे लगते हैं।
गुडिया : तोँ क्याँ आजरात भर आप् अपनी बेहन कों पूरी नंगी करके चोदोगे।
कालू : क्याँ तुँ अपने भैया कां मोटा तगड़ा लन्ड अपनीचुत मे नहि डलवाना चाहती हैं।
गुडिया : मै तोँ कब सें अपने भैया केँ मोटे तगडे लन्ड सें चुदने केँ लिए बेचैनी रही हूं, भैया अपनी बेहन केँ ऊपरचढो नां।
कालू : कही मां आँ गई तोँ।
गुडिया : ओफ हौ आप् बहोत ड़रते होँ मां आँ गई तोँ मम्मी कों भि चोद लेना पर्र पहले अपनी बेहन कों तौ चोदलो
गुडिया कि बातसुन कर मैंने उसकी मोटी जांघो कों फैलाकर अपने मस्ताने लन्ड कों उसकीचुत केँ मुहाने पऱ रखकर उसकेदूध कों दबोचते हुये एक् कसकर धक्का दिया औऱ मेरा मोटा लन्ड मेरी बेहन कि कुँवारी रसीली बुर कों फाड़ता हुए एक् हि बार मे आधाघुस गय़ा। गुड़िया जोर सें चिल्लाई मगर मैंने पहले हि उसके मुलायम होंठो कों अपने होंठो मे कस लिया थां। अब गुड़िया मुझसे कसकर चिपक गई।
गुडिया : ओह भैया अहह सि सि बहोत मोटा औऱ लम्बा हैं मेरीचुत फटीजा रही हैं अहह सि सीईईओह भईया,
कालू:अहह ओह गुड़िया कितनी कसी हुई टाइटचुत हैं तेरी पऱ तेरेदूध बड़े मस्त हैं गुड़िया बस थोडा सां लन्ड औऱ बचा हैं।
गुडिया : धीरे-धीरे धीरे-धीरे पेलो भैया ये सि सओहमर गई भाई।
मैने गुड़िया कि बुर मे धीरे-धीरे धीरे-धीरे गहरे धक्के मारने शुरुआत करदिए औऱ गुड़िया भि धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपनीकमर उचकाने लगी।
अहह भैया थोडा औऱ तेजकरो न् बहोत आनंद आँ रहा हैं, मैंने गुड़िया केँ मोटे मोटे चूतडो केँ निचे अपनेहाथ लगाकर खूबकस करकर गुडिया कि चुत मे अपने काले मुसल कों पेलने लगा औऱ गुड़िया मुझसे खूब चिपक चिपककर अपनीचुत मरवाने लगी, ओह गुड़िया जब सें मैने तेरे मोटे मोटे चूतडो कों देखा हैं तब सें मै तुझेही पूरी नंगी करके चोदने केँ लिए बेचैनी रहा थां, जब मैंने देखा कि मेरी प्यारी बेहन इतनी खुबसुरत हौ गई हैं औऱ उसकेदूध औऱ चूतड़ बड़ी बड़ी औरतो कि तरह दिखने लगे हैं तब सें मै अपनी प्यारी बेहन कि गदराई जवानी कों पुरी नंगी करके चोदने केँ लिए उतावलापन रहा थां।
गुडिया : तगडे धक्के अपनीचुत मे लेतेहुए अहहओह ओह भैया मैसभी जानती हूं, पहलेदिन हि तुम्हारी नजरेजब मेरी मोटी गाण्ड पऱ पड़ी थि तोँ मैसमझ गई थि कि मेरा अपना भइया मुझे पूरी नंगी करके मुझे चोदना चाहता हैं पर्र जब मुझेये पताचला कि तुम् मम्मी कों भि पुरी नंगी करकेउसे चोदना चाहते होँ तौ बड़ा अजीबलगा फिनजब मैंने अपनी सहेली सें पूछातब उसने मुझे बताया कि आजकल तौ कई मां अपने बेटे सें भि चुदवा लेती हैं, आजकल बड़ी उम्र कि औरतो कों भि जवान औऱ तगडे लन्ड कि चाह होती हैं, होँ सकता हैं मम्मी भि अपनीचुत रगडते हुये तुम्हारे लन्ड केँ बारे मे सोचती हौ याँ तुमसे चुदने कि कल्पना करके अपनीचुत रगड़ती होँ।
कल्लु : कसकसकर लन्ड अपनी बेहन गीतिका कि मस्तभोस मे पेलते हुये, गुड़िया क्याँ मां भि अपनीचुत रगडरगड कर पानी निकालती होगी।
गुडिया : क्यूं नहि भैया अहहओह हर महिला जब अकेली होती हैं तौ अपनीचुत जरुर रगड़ती होगी, मुझे तौ लगता हैं मम्मी तुम्हारे लन्ड कों सोचसोच कर मुठ्ठ मारती होगी तुमने अभि तक मां कों अपना लन्ड दिखाया हैं कि नहीं।
कल्लु : अरेकहा दिखाया हैं हाँ धोती केँ ऊपर सें मम्मी नें जरुर देखा हैं।
गीतिका : भैया एक् बार अपने लन्ड कों धोती सें बाहर् निकाल कर मां कों दिखादो तौ वो तुम्हारे खड़े लन्ड कों देखकर पागल होँ जायेगी औऱ अपनी मस्त बुर मे आपका लन्ड लेने केँ लिए बेचैनी जाएगी, आपका लन्ड हि इतना मोटा तगड़ा हैं कि किसी कि चूत भि पानी छोड़ सकती हैं।
कल्लु : अरे गुड़िया मै तोँ स्वयं मां कों पूरी नंगी करके उसकी मस्तचुत मारना चाहता हु पऱ अभि तक तौ मैंने मम्मी कों पूरी नंगी भि नहि देखा हैं।
गीतिका : भैया अबखूब तेजतेज चोदो बड़ा आनंद आँ रहा हैं, खूबचुत मारो अपनी गुड़िया परी कि, वैसे भि किसी कां भि लन्ड सबसे ज़्यादा अपनी बेहन
औऱ मम्मी कि नंगी जवानी देखकर हि खड़ा होता हैं। आजरात भरखूब चोदिये भैया अपनी छोटी बेहन कों।
कल्लु : हाँ गुड़िया लेँ अपने भैया कां मस्त लन्ड तेरीचुत भि बिलकुल मम्मी पऱ गई हैं औऱ तेरे चूतड़ भि मम्मी कि तरह हि मोटे मोटे होतेजा रहे हैं।
गुडिया : अहहअहह ओह भैया तुमने क्याँ मां कि चुत देखी हैं।
कालू : हाँजब वो खेतो मे बैठकर घास काटती हैं तब करीब-करीब रोज हि मुझे मम्मी कां मस्तभोस नजर आँ जाता हैं।
गुडिया : कैसी हैं मां कि चुत क्याँ खूब बड़ी औऱ फुल्ली हुईँ हैं।
कल्लु : अरे मेरीपरी मम्मी कि मस्तचुत देखते हि मेरेमुह मे पानीभर आता हैं ऐसा लगता हैं मम्मी कि मस्तफटी चुत मे वही बैठे बैठे हि लन्ड पेलदू औऱ पूरेखेत मे नंगी दौड़ा दौड़ा कर चोदुं।
गुडिया : भैया मां कों चुत फैलाकर मुतते हुए देखा हैं आपने।
कालू : देखा हैं बहोत मोटीधार निकलती हैं मम्मी कि मस्तभोस सें।
गुड़िया : भैया एक् बात कहूँ।
कालू : क्याँ।
गुडिया : मै चाहती हु कि आप् मां कों मेरे सामने नंगी करकेखूब कसकसकर चोदो, मै चाहती हु कि मैछूप जाऊ औऱ आपको औऱ मम्मी कों छुपकर चोदते हुए देखु, मै देख्ना चाहती हु कि मां आपके मस्त काला लन्ड कों केसे चुसती हैं औऱ फिन आप् मां कों झुकाकर केसे उसकी मस्तचुत कों खूब हुमच हुमचकर चोदते हौ, मै चाहती हु आप् मम्मी कों खड़ी करके उसकी मस्तचुत केँ दाने कों रगडते जाओ औऱ मां खड़ी खड़ी मुतती जाए,
जब वो मुतना रोकदे तौ आप् उसकी मस्तचुत केँ दाने कों अपनेमुह मे भरकर चुसना शुरुआत करदो औऱ मां फिन सें आपकेमुह मे मुतना शुरुआत करदे।
कल्लु : तुँ फिकर नं करजब भि मै मम्मी कों पूरी नंगी करके चोदूँगा तुम्हें जरुर बताऊंगा, औऱ दिखाऊँगा। मगरमै मां कों चोदने केँ लिए पटाउं केसे।
गुडिया : भैया एक् कामकरो अगर आपने चाची कों पटाकर चोद दिया तौ मम्मी भि चुदवा लेगी क्यूं कि मां औऱ चाची कि बड़ी बनती हैं।
कालू : मगर चाची मुझसे क्यूं चुदवाएगी।
गुडिया : अरे चाची भि बड़ी चुदासी रंडी हैं वो तोँ जब भि मिलती हैं आपके कसरती शरीर कि हि बात करती हैं औऱ उसने तौ आपके लन्ड केँ साइज कि कल्पना भि कि हुई हैं। मुझसे बतारही थि कि मै आपकेसंग नंगी होकरनहा रही थि
कालू : क्याँ उसने तुम्हारी तरफ औऱ मुझे नहाते हुए देखा हैं।
गुडिया : हाँ मुझसे कहरही थि कि तूँ खूब आजकल अपने भैया केँ संग नंगी होकर नहाती हैं, मैंने कहा कि मै तेरना सिखरही थि तोँ कहनेलगी मुझे भि अपने भैया सें कहकर तैरना सीखादे, तुम् बोलो तौ कल चाची कों भि नदी मे नहाने केँ लिए बुला लेतीहु फिनजिस तरह तुमने मुझे तैरना सिखाया हैं औऱ मेरे जूसीआमो कों चुसचूस कर जैसे मेरी मस्तचुत चाटी थि बसउसी तरह चाची कों भि नंगी करके तैरना सीखा देना। इतनी बड़ी घोड़ी कों जब आप् पूरी नंगी करके तैरना सिखाओगे तोँ आपका लन्ड पानी छोड़ देगा।
कल्लु : अरे बहनाये लन्ड तोँ पानीतब छोडेगा जब तेरी मस्तचुत कों रातभर चोदचोद करलाल नहि कर देगा।
गुडिया : अच्छा भैया तुम्हारा मन मम्मी कों चोदने कां अधिक करता हैं याँ चाची कों।
कालू : मै तौ अपनी कल्पना मे दिनरात अपनी मम्मी कों हि नंगी करकेखूब कसकसकर चोदता हूं, मुझे सबसे ज़्यादा मां केँ मोटे मोटे मटकते चूतड़ अच्छे लगते हैं।
गुडिया : कभी मम्मी कि मोटी गाण्ड कों अपने हांथो सें सहलाये होँ।
कल्लु : गुड़िया कि चुत मे जड़ तक लन्ड पेलते हुये, हाँ गुड़िया ठण्ड केँ मौसम मे जबमै अंदर सोता थां तबरात कों मां भि मेरेबगल मे सोती थि तब मैंने मां केँ मोटे मोटे गुदाज नरमनरम चूतडो कों खूब सहलाया मगर गुड़िया मेरामन मां केँ चूतडो कों खूबदबा दबाकर
दबोचने कां होता हैं औऱ उसकी मोटी गाण्ड कि गहरी दरार मे अपनेमुह कों भरकर चाटने औऱ मुह सें मां कि गुदाज गाण्ड दबाने कां होता हैं।
गुडिया : तोँ जब मां रातभर तुम्हारे संगसोइ थि तोँ मम्मी केँ मस्त मोटे चूतडो कों उनका घाघरा उठाकर खूब दबोच दबोचकर मसल लेते न्। मा कि नींद तोँ वैसे भि बहोत पक्की हैं फिन भि तुम्हे अगरडर लगता हैं तोँ मै तुम्हे कलऐसी व्यवश्था कर दूंगी कि तुम् मेरे सामने हि रातभर मम्मी केँ गुदाज नंगे शरीर कों खूब दबोच दबोचकर सहलाना औऱ जहामन चाहेवहा मां केँ शरीर कों चाटना चुसना, मगरअगर मां कों पुरी नंगी करके चोदना हैं तौ चाची कों भि नंगी करके तैरना सीखाना पडेगा।
कल्लु : ठीक हैं मेरीपरी बहना जैसा तुँ कहेगी वैसा हि करुँगा अबजरा अपनी जाँघे थोडा औऱ फैलाकर उठा लेँ ताकि तेरे भैया कां मोटा लन्ड अपनी बेहन कि बुर कि जमकर ठुकाई करसके औऱ फिन मैंने गुड़िया कों खूबकस कसकर चोदना शुरुआत कर दिया औऱ गुड़िया हायराम भैया हायराम मेरे राजा भैया चोदो मुझे।
खुब कसकर चोदोआज फाडदो अपनी बेहन कि रसीली चुत औऱ चोदोअहह अहहये ओहसीई सीईओह भईयामै मर जाऊंगी बसफिन क्याँ थां मैंने गुड़िया कि गाण्ड कों अपनी हथेली मे उठाकर ताबड तोड़ धक्के उसकीचुत मे मारना शुरुआत कर दिया औऱ फिन मेरा सारारस गुड़िया कि रसीली चूत मे निकल गय़ा औऱ हम् दोनों हाफ्ते हुये चिपकगये।
उसदिन गुड़िया कों मैंने रातभर खूबजम जमकर चोदाहर चुदाई केँ कुछदेर बाद गुड़िया मेरा लन्ड चूस चूसकर खड़ा करती औऱ फिन हम् मस्त सेक्स कि बाते करके चुदाई करते। गुड़िया औऱ मै सुभह४ बजे सोये।
सूबह सुभह हम् अपने खेतो कि औऱ चलदिए आगेआगे गुड़िया औऱ बाबाचल रहे थें औऱ पीछे पीछेमै चलरहा थां, गुड़िया बारबार मुझे पीछेमुड कर देखती औऱ मुस्कुरा देती, मै जब उसके चूतडो कों देखने लगतातब वो चलते चलते अपने घाघरे केँ ऊपर सें अपनी गाण्ड खुजलाने लगती औऱ मुझेदेख करऐसी मादक निगाहो सें देखते हुए स्माइल देती कि मेरादिल करता कि रंडी कां घाघरा उठाकर यही खड़े खड़ेखूब कसकसकर लन्ड अपनी बेहन कि गाण्ड मे पेलदूँ।,
खेतो मे पहुंचने केँ बाद बाबा अपनेकाम मे लगगए औऱ गीतिका मेरीओर देखकर मुस्कुराते हुए कहनेलगी भैया मै चाची केँ पासजा रहीहु औऱ
1 बजे तक हम् नदी मे नहाने चलेंगे औऱ हाँमै चाची कों भि संग लेकर आँ रहीहु तब तुम् चाची केँ सामने शरमाना नहीं।
कालू : मगर तूँ चाची सें कहेगी क्याँ।
गुडिया : वो सभी मेरेऊपर छोड़दो औऱ ये बताओ कि चाची कों चोदोगे नां।
कालू : मुस्कुराते हुए तूँ जैसा कहेगी मै वैसा करुँगा।
गडिया : मुस्कुराते हुए तौ फिनठीक हैं थोड़ी देर मे मै चाची केँ संगनदी कि तरफ जाऊंगी तुम् भि पीछे पीछेचले आनां।
इसकेबाद गुड़िया चाची केँ पास पहुच गई औऱ उससे बाते करनेलगी।
चाची : क्यूं गुड़िया कैसी हैं आज तौ बड़ी खिली खिलीलग रही हैं कहीरात कों कल्लु केँ संग तौ नहि सोइ थि।
गुडिया : मुस्कुराते हुएअरे नहि चाची मगरहाँ भैया सें मैंने तुम्हे भि तैरना सीखने कि बातकर ली हैं तोँ आजचलो हम् संग मे नदी मे नहायेंगे औऱ तैरेंगे भि।
चाची : न् बाबा न् मै नहि जाती तेरेसंग तुँ तौ बिलकुल रंडीबन गई हैं तुम्हें लज्जा नहि आती पूरी नंगी होकर अपने भइया केँ खड़े लन्ड पऱ चढ़ जाती हैं।
गुडिया : इसीलिए तोँ कहरही हु एक् बार तुम् भि पूरी नंगी होकर भैया केँ लन्ड पऱ चढ़ जाओगी तोँ फिन तुम्हारा मन उनके खड़े लन्ड सें निचे उतरने कां नहि होगा।
चाची : नहि गुड़िया मुझे तौ लज्जा आएगी, इतने बड़े जवानमरद केँ सामने मै केसे नंगी हौ कर पानी मे जॉंऊंगी।
गुडिया : तुम् भि न् चाची तुम्हारी मस्ती भरी जवानी देखकर तोँ मैंने भैया कों पटाया हैं कि तुम्हे भि तैरना सीखादे औऱ तुम् हौ कि अबनई नवेली दुल्हन कि तरह
नखरेकर रही होँ।
चाची : कुछसोच कर मुस्कुराते हुये, क्याँ कल्लु राजी हौ गय़ा हैं मुझे तैरना सीखाने केँ लिएसच सचबता।
गुडिया : मुस्कुराते हुये, अच्छा पहले तुम् मुझे एक् बातसच सच बताओ।
चाची : क्याँ।
गुडिया : चाचा जब 2 महिने मे एक् बारआते हैं तब तुम् इतने दिनों तक क्याँ करती होँ।
चाची : मुस्कुराते हुये, अरे अब क्याँ करुँगी गुड़िया जब बहोत चुदवाने कां मन करता हैं तौ ऊँगली सें सहला लेती हूं।
गडिया : तुमने कभी कल्लु भैया कां लन्ड देखा हैं।
चाची : हाँ एक् बारउसे मुतते हुए देखा थां बहोत मोटा औऱ काला लन्ड हैं तेरे भैया कां, मगर मुझे लगता हैं तूने भि अपने भैया केँ मोटे लन्ड केँ दर्शन कर लिये
हैं इसीलिए मुझसे पूछरही हैं, सचसचबता नदी मे नहाते वक़्त तूने अपने भैया कां मोटा लन्ड देखा हैं नां।
गुडिया : मुसकुराकर शरमाते हुये, हाँ देखा हैं।
चाची : एक् दम सें उत्साहित होतेहुए कहनेलगी उसने स्वयं तेरी दिखाया थां क्याँ।
गुडिया : अरे नहि चाची पर्र जबमै नंगी हौ गई थि तब उनका लन्ड खड़ा हौ गय़ा थां औऱ धोती सें बाहर् निकलआया थां तब मेरीनजर भैया केँ मोटे तगडे लन्ड
पर्र पड़ गई थि।
चाची : तुम को नंगीदेख कर तौ वो पगला गय़ा होगा, तेरेदूध भि खूब दबाये होंगे नाँ।
गुडिया : नहि वो ड़रते बहोत हैं इसलिये बस मुझे पकड़ने केँ बहाने मेरेदूध औऱ गाण्ड कों अपनेहाथ सें सहलाभर देते हैं।
चाची : तेरी मालूम हैं कल्लु कां लन्ड बहोत मोटा औऱ तगड़ा हैं मुझेये बात सबसे पहले तेरी मम्मी नें बताइ थि।
गुडिया : तौ क्याँ मां नें भैया कां लन्ड देखा हैं।
चाची : हाँ वो बतारही थि कि उसके बेटे कल्लु कां लन्ड बहोत मोटा औऱ लम्बा हैं, कहनेलगी एक् बार कों तोँ उसकीचुत नें भि अपने बेटे केँ ऐसे मस्त लन्ड कों देखकर पानी छोड़ दिया थां।
गुडिया : इसीलिए तोँ कहरही हु भैया बहोत भोले हैं औऱ मै अकेली कुछ आनंद नहि मारपा रहीह, तुम् संग रहोगी तोँ दोनों मिलकर आनंद लेंगे।
चाची : तूँ तौ ऐसी बाते करनेलगी हैं कि मेरी चूत अभि सें पानी छोड़रही हैं, कही तुँ अपने भैया केँ मोटे लन्ड सें चुदना तौ नहि चाहती हैं।
गुडिया : हाँजब सें भैया कां मोटा लन्ड देखा हैं तब सें मेरीचुत मे बहोत मीठी मीठी खुजलि होँ रही हैं, भैया कां मोटा लन्ड अपनीचुत मे घूसवाने कां बड़ामन कररहा हैं, मगर पहले तुम् भैया सें अपनीचुत मरवालो उसकेबाद हि मै भैया सें चुदुँगी।
चाची : अच्छा तोँ मुझे चुदते देखकर पहले तूँ अपनाडर दुर करना चाहती हैं कि कही तेरे भैया कां मोटा लन्ड तेरीचुत फाड नं दे।
गुडिया : हाँ पहलीबार मरवाने पर्र मैंने सुना हैं बड़ा दर्द होता हैं औऱ फिन भैया कां लन्ड तौ खूब मोटा औऱ तगड़ा हैं इसलिये मै चाहती हु कि पहलेमै देखु
कि केसे आपकी मस्तचुत कों मेरे भैया कां लन्ड फाडफाड कर चोदता हैं।
चेची : मगरअगर कोई आँ गय़ा नदी मे तब।
गुड़िया : अरेजब तक तुम् भैया सें चुदोगी तब तक मैइधर उधरआने वाले कां ध्यान रखूँगी फिनजब भैया मुझे पूरी नंगी करके चोदेगे तब तुम् ध्यान रखना औऱ वैसे भि जिसघाट पऱ तुम् औऱ हम् जाते हैं वहा तौ औऱ कोईआता हि नहि हैं तौ डरकिस बात कां।
चाची : कुछ सोचते हुए अच्छा ठीक हैं मगर।
गुडिया : अबमगर वेकिन कुछ नहि अब तुम् जल्द सें मेरेसंग चलो हमें सीधेनदी कि ओर जानां हैं भैया हमेंदेख कर आँ जाएगे।
चाची : अरेजरा रुक तोँ सही एक् दम सें उठा नहि जाता हैं कमर मे दर्द होने लगता हैं।
गुडिया : चाची कि मोटी गाण्ड कि दरार कों घाघरे केँ ऊपर सें सहलाकर दबाते हुए कहनेलगी इसीलिए तौ चाची कहरही हु एक् बार भैया कां मोटा लन्ड जब तुम्हारी भारी गाँड मे घुसकर चोदेगा तौ तुम्हारे कमर केँ सारे दर्ददुर हौ जाएगे औऱ फिन चाची मुझसे मुसकुराकर बोलि: रंडीकही कि शहर जाकर तोँ बहोत चुदासी हौ गई हैं चलआज लगता हैं कल्लु कां मस्ताना लन्ड मेरीचुत कि खूब चुदाई करने वाला हैं।
आगे स्टोरी गुड़िया केँ शब्दों मे-
मे चाची कों लें करनदी कि ओरचल पड़ी औऱ कुछदेर बाद भैया आताहुआ दिखाई दिया चाची कपडे धोनेलगी औऱ मे अपनी गोरी गोरी पिण्डलियों कों नदी केँ पानी मे डालकर अपनेपेर हिलारही थि औऱ मेरीचुत मस्ती केँ मारेफूल रही थि, चाची कि गदराई जवानी उसकी चिकनी कमर औऱ उठी हुइ गुदाज गाण्ड अलग हि कहरढा रही थि, कुछदेर बाद कल्लु भैया आँ गए औऱ।
गीतिका : भैया आज तौ आपको चाची कों भि तैरना सीखाना पडेगा।
कालू : चाची कों तौ तैरना आता होगा क्यूं चाची।
चाचि : अरेकहा रे कल्लु कभीऐसी जरुरत हि नहि पड़ीअब ये गुड़िया जिद करनेलगी कि भैया बहोत अच्छे सें तैरना सीखाते हैं औऱ मुझे भि पकड़लाई, चाची कि नजरकभी भैया केँ चौड़े सिने मे औऱ कभी उसकी धोती मे कसे लन्ड कि ओरजारही थि।
कल्लु : अच्छा हुआ चाची आप् आँ गई आपको भि तैरना सीखा देताहु औऱ फिन कल्लु भैया पानी मे कमर तक उतरगए औऱ मुझसे कहनेलगे आजा गुडिया,
मैने अपने कपडे कि तरफ इशारा किया तौ भैया नें कपडे उतारने कां इशारा कर दिया, मैंने पहले अपनी चोली उतार दि औऱ मेरे बड़े बड़े जूसीआम पूरे नंगे होँ गये।
मेरेआमो कों देखते हि कल्लु भैया अपने लन्ड कों धोती केँ ऊपर सें सहलाने लगे
कालू : गुड़िया घाघरा भि उतारकर जल्द सें आँ जा।
गडिया : भैया पहले चाची कों सिख़ाओ उसकेबाद मै आउंगी, मैंने चाची कों कहा चाची जल्द सें नंगी होँ जाओ भैया देखो केसे तुम्हारे पकेहुए आमो कों खा जाने वाली नज़रो सें देखरहे हैं। चाची नें शरमाते हुए अपनी चोली खोलना शुरुआत कि औऱ जब उसने चोली उतार दि तब उसके मुझसे भि डबल मोटे मोटे मुलायम आमो कों देखकर कल्लु भैया कि
आंख मे जवानी केँ लाल डोरे तैरने लगे।
चाची : घाघरे कां नाडा पकडे मुसकुराकर कहनेलगी गुड़िया मुझे लज्जा आँ रही हैं, मै घाघरा पहने पहने हि तैरना सीख लेती हूं।
गडिया : अरे चाची घाघरा बारबार पेर मे फसेगा तौ केसे तैरोगी, चलो जल्द सें उतारदो, लोमै भि तुम्हारे संग हि नंगी होँ जातीहु तब तोँ तुम्हे लज्जा नहि लगेगी
ओरफिन मैंने अपने घाघरे कां नाडा खींच दिया औऱ मै पूरी मादरजात नंगी होँ कर खड़ी होँ गई।
कल्लु भैया मेरी नंगी रसीली जवानी कों घुररहे थें तभी मैंने चाची केँ नाडे कों पकड़कर खींच दिया औऱ जब चाची पूरी नंगी हुई तौ कल्लु भैया भि उसकी गुदाज भरी हुइ जवानी उठाहुआ माँसल पेट औऱ बड़े बड़ेदूध औऱ मस्त फुली हुईँ चुत कों देखकर मस्त हौ गये, अब कल्लु भैया कों मैंने कहा भाई थोडा इधरआओ नहि तोँ हम् डूब जाएगे औऱ फिन कल्लु भैया हमारी तरफआने लगे औऱ मैंने चाची कां हाथ पकड़कर उन्हें पानी मे उतार दिया।
चाची कां चेहरा पूरालाल होँ रहा थां औऱ रंडी केँ चूतड़ बहोत भरी भरकम औऱ गोरे थें अभि कल्लु भैया कों चाची केँ मतवाले चूतडो केँ दर्शन नहि हुए थें।
कालू भैया एक् दम आँ गए औऱ चाची कां हाथ पकड़कर गहराई कि ओर जानेलगे चाची डररही थि औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे आगेकदम बढारही थि औऱ मै चाची कि
चीकनी कमर पकडे उसके पीछे पीछे पानी मे जारही थि।
तभीकोई मछली निचेआई औऱ फिन क्याँ थां चाची किसी लोंड़िया कि तरह भैया केँ कमर केँ इर्द गिर्द अपनी मोटी जांघो कों लपेटकर भैया केँ सिने सें चिपक गई, अरे मेरे भाई कों तोँ जैसे जन्नत कां सुखमिल गय़ा भैया कां दोनों हाँथ सीधे चाची केँ भारी भरकम गोरे गोरे चूतडो पऱ चलेगए औऱ भैया नें चाची केँ चूतडो कों ऐसेथम लिया जैसे चाची कों अपने लन्ड पर्र चढाकर चोदरहे होँ, उस टाइम चाची कां भारी भरकम 70 किलो कां शरीर पानी केँ अंदर भैया कों किसीफूल केँ सामान लगरहा थां।
अब भैया औऱ बीच मे जानेलगे औऱ मै भि भैया केँ पीछे सें अपनी जांघो कों खोलकर भैया कि कमर मे टांगे लपेटकर लिपट गई पीछे सें मे अपने मोटे मोटे मुलायम आमो कां दबाव भाई कि पीठ पर्र देरही थि औऱ चाची भैया केँ सिने सें अपने मोटे मोटे तन्दुरुस्त मुलायम आमो कों दबारही थि, भैया पागलो कि तरह चाची कों अपने सिने सें चिपकाये हुये उनके सुडौल बड़े बड़े चूतडो कों अपने हांथो मे भरेहुए दबारहे थें।
कल्लु : गुड़िया औऱ बीच मे लेँ करचलु।
गुडिया : हाँ भैया बहोत आनंद आँ रहा हैं मगर डूबामत देना, चाची आपकोडर तौ नहि लगरहा हैं।
चाची : गुड़िया इधर बहोत गहरा हैं कल्लु ज़्यादा बीच मे मतजा।
मै कुछ कहता इससे पहले गुड़िया नें पानी केँ अंदरहाथ डालकर मेरी धोतीखोल दि औऱ मेरा फनफनाता काला औऱ मोटा लन्ड सीधे चाची कि मस्त फुली हुइ भोस मे रगड खानेलगा।
औऱ फिन गुड़िया नें मेरे एक् हाथ कों पकड़कर चाची कि फुलीचुत पऱ रखकरदबा दिया औऱ पहलीबार मैंने अपनी चाची कि मस्त फुली हुई बुर कों पकड़कर सहलाया, तभी गुडिया नं हाथआगे लें जाकर मेरे लन्ड कों पकड़कर उसकीखाल पीछे कि औऱ आगे सें चाची केँ हाथ कों पकड़कर मेरे लन्ड कों चाची केँ हाथ मे दे दिया।
अब हम् तीनोकुछ नहि बोलरहे थें गुड़िया एक् हाथ सें मेरे लन्ड कों औऱ दूसरे हाथ सें मेरे आंडो कों दबादबा कर सहलारही थि औऱ चाची नें भि मेरे सिने मे मुह छुपाये हुये मेरे लन्ड केँ टोपे पर्र हाथफेर रही थि।
मै एक् हाथ सें चाची कि गाण्ड कि गहरी दरार सहलारहा थां औऱ दूसरे हाथ सें मैंने चाची केँ मोटे मोटे जूसीआमो कों खूबकस कसकर मसलना शुरुआत कर दिया थां औऱ चाची अहहओह कल्लु धीरे-धीरे दबारे कहनेलगी औऱ गुड़िया मेरे लन्ड कों पकड़कर बारबार चाची कि मस्तचुत मे रगडरही थि, तभी चाची नें अपनी गाण्ड उठाकर मेरे लन्ड कों गुड़िया केँ हाथ सें छीनकर सीधे अपनी फुलीचुत केँ लपलपाते छेद मे रखा औऱ अपनीकमर कां धक्का मेरीओर दिया औऱ मेरा लन्ड सट सें चाची कि चुत मे घुस गय़ा औऱ मैफिन अपने आप् कों रोक नहि पाया औऱ मैंने चाची कि मोटी गाण्ड कों अपने हांथो मे भरकर एक् करारा धक्का मारा औऱ
मेरा पूरा लन्ड सटाक सें चची कि मस्तचुत मे जड तक उतर गय़ा औऱ चाची केँ मुह सें अहह सि ओह कल्लु जैसे शब्द निकल पड़े मैंने एक् हाथ सें चाची कि गाण्ड कि दरार कों सहलाते हुए दूसरे हाथ सें चाची केँ मोटे मोटेआमो कों खूबकस कसकर मसलते हुए अपने मोटे लन्ड केँ धक्के चाची कि भोस मे तबियत सें मारना शुरुआत कर दिये औऱ चाची मेरे होठो कों चुस्ने लगी।
उधर गुड़िया नें जब मेरे लन्ड कों पकड़ने कि कोशिश कि तबउसे एह्सास हुआ कि मेरा लन्ड चाची कि चुत मे पूरा घुसाहुआ हैं।
तब गुड़िया नें मुस्कुराते हुए मेरे गालो कों चुमा औऱ मेरेआंड कों अपनी हथेली मे भरभरकर सहलाने लगी।
चाची कों चोदते चोदते भैया थोडा किनारे कि ओर आँ गय़ा अब चाची केँ पांव जमीन पऱ टीकगए औऱ भैया औऱ गुड़िया नें चाची कों वही झुका दिया एक् हाथ सें मै अपनी बेहन गुडिया कि चुत सहलारहा थां औऱ पीछे सें चाची कों झुकाकर उसकीचुत मे सटासट लन्ड पेलने लगा औऱ गुड़िया औऱ चाची दोनों किसी रंडी कि तरहखूब सीसियते हुए अपनीचुत कां पानी निकालने लगी।
जब चाची कि गाण्ड कों दबोच दबोचकर भैया नें चाची कि चुत कों चोदचोद कर सुजा दियातब चाची कहनेलगी कल्लु अब मुझसे नहि रहाजा रहा हैं।
भैया नें चाची कों नंगी हि अपनीगोद मे उठा लिया औऱ नदी केँ बाहर् आनेलगे औऱ मै पूरी नंगी अपने भैया केँ पीछे पीछे बाहर् आँ गई अब भैया नें वहीहरी हरीघास पर्र चाची कों लिटा दिया औऱ उनकी मोती जांघो कों फैलाकर अपने काले मुसल कों चाची कि मस्तचुत कि फांको कों फैलाकर उनकीभोस मे पेल दिया औऱ चाची कि जांघो कों दबोचते हुएसटा सट लन्ड चाची कि चुत मे मारने लगे औऱ मै भैया केँ पीछेबैठ कर उनकेआंड कों दुलारने औऱ सहलाने लगी।
कूछ देरबाद चाची कों खड़ी करके भैया लेटगए औऱ चाची उनके मोटे लन्ड पऱ चुत फैलाकर चढकरबैठ गई औऱ अपनी गाण्ड उठाउठा कर भैया कां लन्ड अपनी मस्तानी चूत मे लेनेलगी तभी भैया नें मुझे इशारा करके अपनेमुह पर्र बैठने कों कहा।
औऱ मै नंगीचुत फ़ैलाये अपने भैया केँ मुह पऱ अपनीचुत खोलकर बैठ गई अब भैया निचे अपनीकमर उठाउठा कर चाची कों चोदने लगे औऱ मेरीचुत कों दोनों हांथो सें फैला फैलाकर चाटने लगे, भैया नें चाची कों लन्ड मारमार कर मस्तकर दिया औऱ चाची भैया केँ ऊपर हि पसर गई औऱ मेरी गाण्ड केँ छेद कों जीभ सें चाटने लगी, कभी कभी भैया मेरीचुत चाटते हुए औऱ चाची मेरी गाण्ड केँ छेद कों चाटते हुएआगे बढ़्ते औऱ फिनउन दोनों कि जीभ मिलती औऱ वो पागलो कि तरह एक् दूसरे कि जीभ चुसते हुए एक् संगकभी मेरी गाण्ड केँ छेद कों औऱ कभी मेरी मस्तचुत केँ छेद कों चाटने लगते। औऱ संग हि चाची कि चुत मे लन्ड पेलते जाते।
करीबआधे घंटे तक चाची कि खूब तबियत सें अपने मोटे लन्ड सें चुदाई करने केँ बादजब चाची फिन सें झड़ गई तौ भैया नें मुझे कुतिया बना केँ चोदना शुरुआत किया औऱ फिन मुझे भि भैया नें खूब तबियत सें चोदा, हमारी चुदाई देखकर चाची भि गर्म होँ गई औऱ इसबार चाची नें अपनीचुत खोलकर भैया केँ मुह पऱ रख दि औऱ भैया नें मुझे चोदते हुए चाची कि चूत कों खूब चूसा औऱ चाची कि गांड मे थूकलगा लगा केँ उसे अपनी ऊँगली लगा केँ ऊँगली सें चाची कि गांड भि मारते रहे। कुछ देर औऱ चोदने केँ बाद मे फिन सें झड़ गई तब भैया नें चाची कों फिन सें कुतिया बना दिया औऱ फिन
अपने लन्ड कों मुझे चूसने कां इशारा किया। मैंने भैया केँ लन्ड कों अपनेथूक सें पूरा गिलाकर दिया। जब भैया नें चाची कि गांड केँ छेद पर्र थूकातब मुझे मालूम हुवा कि भैया चाची कि गांड मारने वाले हैं।
भाई नें अपने मोटे लन्ड कों चाची केँ गांड केँ छेद पऱ रखकर एक् जोर कां धक्का मारा जिससे भैया कां थूक सें गिला गांड सटाक सें चाची कि टाइट गाण्ड मे आधाघुस गय़ा। चाची जोर सें चिल्लै औऱ चाची भैया कों गाली देनेलगी।
चाची:बहनचोद बुर मे पेलने कों बोला तोँ अपना डंडा मेरी गांड मे पेल दिया। गांड मारनी हैं तोँ अपनी मां कि मार नां कमीने।
कल्लू:चुप साली कितनी मस्त गांड हैं तेरी। मजा आँ गय़ा।
गुड़िया:भैया गांड मे ज़्यादा मजा आँ रहा हैं क्याँ। चाची कि गांड भि मां कि तरह हि मस्त हैं। मारो भैया जोरजोर सें पेलो।
चाची:चुप साली रंडी। ज़्यादा आगलगी हैं तौ अपनी गांडमरा नाँ तब मालूम चलेगा। गांड मराने मे कितना दर्द होता हैं।
गुड़िया:मे तौ अपने भैया सें गांड भि मरवाउंगी। चाहे कितना भि दर्द क्यूं नां हौ।
अब कल्लू जोरजोर सें चाची कि गांडमार रहा थां किसी कुतिया कि तरह। संग मे चाची केँ चूतडो पर्र थप्पड़ भि माररहा थां। औऱ गुड़िया कों अपनेपास बुलाकर उसके होंठो कां रसचूस रहा थां। अब कल्लू तेज स्पीड मे चाची कि गांड मारने लगा। चाची दर्द औऱ मजे सें चिल्ला रही थि। कल्लू नें अंतिम शॉट मारा औऱ अपना लन्ड निकालकर दोनों रंडियों कों अपनेआगे बैठाके अपना लन्ड चुसवाने लगा। दोनों अपनी अपनीजीभ सें कल्लू कां लन्ड चाटने लगी। कल्लू नें जल्द हि दोनों केँ मुह पर्र अपना वीर्य गिराने लगा। दोनों कां चेहरा कल्लू केँ वीर्य सें भर गय़ा। जिसे दोनों नें चाटचाट केँ साफकर दिया। फिन साफ सफाई करके हम् लोग जल्द सें कपडेपहन कर अपने खेतो कि ओरचलदिए।
आज सुभह सें हि बारिश कां मौसम हौ रहा थां औऱ बाबा खेतो कि ओरजा चुके थें गीतिका नें मुझसे
कहा भैया हम् थोड़ी देर सें चले तौ, मैंने कहाठीक हैं उसकेबाद मै गुड़िया केँ संग खेतो कि ओरचल दिया गुड़िया मुझसे बहुतखुल चुकी थि औऱ मै उसके भारी चूतडो कों दबाता हुआ उसकेसंग चलरहा थां।
कभीकभी मैउसे चलते हुये उसकेदूध दबाकर उसके होठो कों भि चुम लेता थां, गुड़िया लगता थां कि गर्म होँ गई हैं उसकेगाल लाल होँ रहे थें औऱ वो बारबार मेरे धोती मे खड़े लन्ड कि ओरदेख कर मुस्कुरा रही थि,
जब हम् देहात सें बाहर् थोड़ी सुनसान स्थान पऱ आँ गए तौ गीतिका कां सब्र कां बांधटूट गय़ा औऱ वो कहनेलगी भैया लगता हैं आपके लन्ड कों चुत कां पानीलग गय़ा हैं अबयेबार बारचुत मे घूसने कों तड़परहा हैं।
कल्लु : हाँमगर ये असली झटके तौ तब देता हैं जबइसे तेरे मोटे मोटे चूतडो मे घूसाने केँ बारे मे सोचता हूं।
गुडिया : मुस्कुराते हुये, अच्छा तोँ आपको अपनी बेहन केँ नंगे चूतडो कों देख्ना हैं तौ ठीक हैं।
आप् मेरे पीछे पीछेचलो मै अपनी मोटी गाण्ड खोलकर अपने भैया कों अपने मटकते झूलते
चूतडों कि थिरकन दिखाती हु औऱ गुड़िया नें अपना घाघरा उठा दिया औऱ अपनी गुदाज मोटी मोटी गाँड
मटकाते हुए मेरेआगे आगे चलनेलगी क्या बात है क्याँ कातिल जवानी थि मेरी बेहन कि ऊपर सें रंडी
चलतेहुए अपनी गाण्ड कि फॉको कों फैलाकर अपनी गुदा दिखा दिखाकर सहलारही थि मुझसे रहा नहि गय़ा औऱ मैंने अपनी उंगलियो कों उसकी गुदा मे पेलकर उसकी गाण्ड सहलाते हुए उसकेसंग
संग चलनेलगा।
गुडिया : भैया लगता हैं आपको औरतो कि गाण्ड बहोत अछि लगती हैं।
कालू : हाँ मुझे बड़े बड़े चूतडो कों दबाने औऱ चोदने कां बड़ामन करता हैं।
गुडिया : अच्छा सबसे पहले आपने किसके मोटे मोटे चूतडो कों देखा थां।
कालू : मम्मी कां।
गुडिया : हायराम दैया आपको लज्जा नहि आई अपनी मां केँ चूतडो कों आपने नंगा देखा हैं।
कालू : अरे इसमें लज्जा कि क्याँ बात हैं मैंने तोँ मम्मी कि मस्त फुली हुईँ चुत कों भि खूब देखा हैं।
गुडिया : अच्छा मगरकब।
कालू : अरेवही खेत मे घास काटते हुए मम्मी कां घाघरा ऊपरउठ गय़ा औऱ उसकी मस्तफटी हुई फांके
खुलकर मेरे सामने आँ गई क्याँ मस्तचुत हैं मम्मी कि।
गुडिया : मुस्कुराते हुये, कभी मम्मी कि फुलीचुत कों हाथ सें छुकर याँ दबाकर देखा हैं आपने।
कालू : क्या बात है गुड़िया मेरीऐसी भाग्य कहा मुझे तौ बेहन कि चुत भि बड़ी मुश्किल सें चोदने औऱ
दबाने कों मिली हैं, पऱ तेरी विवाह हौ जायेगी तब तेरी मस्तचुत भि मुझसे दुर होँ जाएगी।
गुडिया : फिकर नं करो भैया जब भि मै ससुराल सें आउंगी तौ फिन अपने भैया कों दिनरात अपनी
चुत चटाचटा कर मस्त करुँगी औऱ अब तौ मै हमेशा हि अपने भैया केँ मोटे लन्ड सें चुदूंगी।
औऱ आपको तोँ मै अपने ससुराल बुलाकर वही अपने पति केँ पलंग मे हि अपने भैया सें खूबचुत मरवाउंगी।
कल्लु : औऱ तेरे पति कां क्याँ होगा।
गुडिया : अरे वो कामधाम करने जायेगा औऱ मै अपने पति केँ पलंग मे अपने भैया केँ संग पुरी नंगी होकररात भर चुदुँगी।
कल्लु : अच्छा वो सभीठीक हैं अबखेत आने वाला हैं औऱ वहा बाबा होंगे इसलिये चलजरा किसी कुतिया कि तरहझुक जा गुडिया अब मेरे लन्ड सें नहि रहाजा रहा हैं एक् बार तेरी गदराई चुत मे घूसने कां बड़ामन कररहा हैं।
गुडिया : मुसकुराकर हाँ तोँ डालो न् मेरी तौ स्वयं कि चुत सें पानीबह बहकर जांघो तक आँ गय़ा हैं औऱ गुड़िया वहीझुक कर अपनी मस्तचुत औऱ गाण्ड दिखाने लगी।
कल्लु नें एक् बार गुड़िया कि भारी गाण्ड कों थपथपाया औऱ फिन अपने सुपाडे कों गुड़िया कि रसीली चूत मे रखकर धक्का मारा कि लन्ड सट सें गुड़िया कि चुत मे उतर गय़ा।
कल्लु : ओह मां कितनी गर्म चूत हैं तेरी बहना।
गुडिया : अहह सि सि ओह भैया तुम्हारा लौड़ा भि तौ किसी गर्मरोड कि तरहतप रहा हैं, कल्लु नें सटासट अपनी बेहन कि चुत मे लन्ड पेलना शुरुआत कर दिया, गुड़िया आँखेबंद कियेहुए सटासट लन्ड अपनीचुत मे खारही थि औऱ कल्लु खूब हुमच हुमचकर अपनी बहना कि कोरी गाण्ड कों सहलाते हुए लन्ड पेलरहा थां औऱ फिन कल्लु नें लम्बे लम्बे झटके अपनी बेहन कि मस्त चूत मे मारना शुरुआत कर दिया औऱ गुड़िया मजे सें कराहते हुए कहनेलगी चोदो भैया औऱ कस केँ चुत मारो अपनी बेहन कि बुर अहहअहह ओहओहओह भैया खूबसटा सट लन्ड पेलो अपनी बेहन कि चूत मे खूब नंगी करके चोदो भैया।
कल्लू:अहह गुड़िया क्याँ मस्त बुर हैं तेरी। कितनी टाइट हैं मेरा लन्ड कितना कसाकसा जारहा हैं। दिल करता हैं दिनरात अपना लन्ड तेरी बुर मे घुसाये रहू। क्याँ मस्तमाल हैं तूँ।
गुड़िया:ओह भाई मुझे भि बहोत मजा आँ रहा हैं। तुमको जितना मन करे, जब मन करे, जहाँ मनकरे चोदो। मे मना थोड़े करुँगी।
कल्लू:क्या बात है गुड़िया तुँ कितनी मस्त हैं।
औऱ कल्लू जोरजोर सें गुड़िया कों कुतिया बनाये पेलता रहता हैं। संग मे अपनी एक् ऊँगली मे थूक लगाकर धीरे-धीरे धीरे-धीरे गुड़िया कि गांड मे पेल देता हैं। अब गुड़िया केँ दोनों छेदों कि चुदाई होँ रही हैं।
कल्लू:ओह मेरी गुडियआआआआआ। कितनी टाइट गांड हैं तेरी। इसमें तौ एक् ऊँगली कितनी मुश्किल सें जारही हैं। मेरा लन्ड केसे जाएगा।
गुड़िया:अभि बुर पर्र हि ध्यान दो भाई देखो कितनी पानी छोड़रही हैं। मे अपनी गांड भि सबसे पहले अपने भैया कों हि दूंगी।
कल्लू:हाय गुड़िया कितनी मस्त बातें करती हैं तूँ। जी चाहता हैं। तेरी दिनभर खेतो मे नंगी करके पुरेदिन चोदूँ। हर तरीके सें चोदूँ। कभी खड़ा करकेकभी बैठा केँ कभी कुतिया बना केँ कभीगोद मे उठाके तोँ कभी अपने लन्ड पऱ चढ़ा केँ।
गुड़िया:हाँ भाई मे भि तुमसे दिनभर नंगी हौ केँ चुदवाना चाहती हूं। पुरे दिन चोदना मुझे खुले आसमान केँ निचे वोँ भि दिन मे।
औऱ गुड़िया अपनी भारी गाँड पीछे करकेतेज तेज धक्का मारने लगती हैं। कल्लू भि गुड़िया कि बुर कों धक्के मारमार कर फाड़ने लगता हैं। दोनों कि स्पीड बढ़ती जाती हैं कुछ हि देर मे गुड़िया कि चुत नें पानी छोड़ दिया औऱ कल्लु नें भि खूब गाढा गाढारस अपनी बेहन कि चुत मे भर दिया। दोनों साफ़ सफाई करके अपनेखेत मे जाते हैं।
खेत मे जाने केँ बाद कल्लु बाबा केँ संगकाम मे लग गय़ा कुछदेर बाद निर्मला आई औऱ गुड़िया सें पुछने लगी कि चाची उसके खेतो मे हैं याँ नहि तब गुड़िया नें बताया कि उसे भि नहि पता हैं वो तोँ सुभह सें चाची केँ पास गई हि नहीं।
निर्माला : मंदमंद मुस्कुरा करये कहती हुई चाची केँ खेतो कि ओर जानेलगी कि दिनरात आजकल तूँ अपने भैया सें हि लगी रहती हैं जरा ध्यान रखनाकुछ उल्टा सीधा नं कर लेना, गुड़िया अपनी मम्मी कि बातसुन करकुछ सोच मे पड़ गई फिन अचानक उसके दिमाग़ मे कोईबात आई औऱ वो कुछदेर ठहरकर चुपके सें चाची केँ खेतो कि ओर अपनी मां केँ पीछेचल दि।
जब वो चाची केँ खेतो मे बनी झोपडी केँ पीछे पहुची तोँ उसे चाची कि औऱ मम्मी कि आवाज़ सुनाइ देनेलगी औऱ उसनेवही छूपकर उनकी बातो कों सुनने लगी।
निरमला : अरेमै इसलिये कहरही हु कि कुछ दिनों सें गुड़िया केँ हावभाव ठीक नहि दिखरहे हैं उसकीचाल भि बदली बदलीनजर आँ रही हैं।
चाची : मुस्कुराते हुये, अरे गुड़िया कि चाल तौ उसीदिन बदल गई थि जब तूनेउसे शहर भेजा थां।
निरमला : तौ क्याँ वो शहर सें हि मुह काला करकेआई हैं, अब तूँ हि कुछबता मुझे तोँ बड़ी चिंता हौ रही हैं औऱ ऊपर सें मैकुछ दिनों सें देखरही हुदिन भर कल्लु केँ पीछेलगी रहती हैं, कहीऊँच नीच होँ गई तौ हम् क्याँ मुह दिखाएगे।
चाची : अरेआज कलसभी समझदार हौ गए हैं गोलिया खाखाकर आजकल कि लड़किया खूब तबियत सें लन्ड लेती हैं। तुँ बेकार मे मरीजा रही हैं उसे मौज़ करनेदे औऱ तूँ अपनी ढलती जवानी कां उपायकर तेरे चूतडो कों देखदेख करआज भि देहात केँ मरद अपने लन्ड मसलने लगते हैं अब गुड़िया कि उम्र भि तोँ देखअब इस उम्र मे तौ जब तुझेही हि तगडे लन्ड कि जरुरत पड़रही हैं तोँ फिन तेरी बेटी कों तौ लन्ड चाहिए हि।
निर्माला : अरेअब मेरी क़िस्मत मे लन्ड काहे कां
बाबा तोँ अबढल चुकेअब मै क्याँ देहात भर केँ लोगो केँ सामने नंगी हौ जाउ।
चाची : अरे तौ कह तोँ सही तेरेलिए मस्त लन्ड कां इन्तजाम करवा सकती हूं।
निरमला : भला वोँ केसे।
चाची : अब गुड़िया कों हि देख तेरेघऱ मे हि रोजरात कों तबियत सें चुदती हैं औऱ तुम्हें पता भि नहि लगता हैं।
निर्माला : क्याँ कहरही हैं किससे चुदती हैं।
चाची : तेरे बेटे कल्लु सें औऱ किससे।
निर्माला : मुझेइस बात कां हि तौ शक थां इसीलिए तौ तुझसे पुछने आई थि, क्याँ गुड़िया नें तुम्हारी तरफ बताया हैं।
Old At One Place – New Episode
चाची : अरे पगली तेरे बेटे कल्लु कां लन्ड हि इतना मस्त हैं कि तेरीचुत भि पानी छोड़दे।
निर्माला : तुँ सचकहरही हैं, मेरीचुत तोँ आज सुभह सें हि पानी पानी हौ रही हैं, मै खेतो कि ओर आँ रही थि तब एक् गदहा अपना मोटा लम्बा लन्ड गदही कि चुत मे डालकर चोदरहा थां बसतब सें हि मेरी चूत आज रुक्ने कां नाम हि नहि लें रही हैं देख इसका क्याँ हाल हौ रहा हैं औऱ फिन निर्मला नें अपना घाघरा ऊपर करके चाची कों दिखाया औऱ चाची नें हस्ते हुए पानी केँ छीटे निर्मला कि चूत पर्र मारते हुएकहा मुझे तोँ लगता हैं तेरीचुत अपने बेटे कल्लु केँ लन्ड केँ लिए प्यासी हैं सचसचबता कही तूनेआज कल्लु कां लन्ड तौ नहि देख लिया।
निर्माला : नहि रे मुझे लज्जा आएगीमै भलाउसे केसे कहूँगी कि तोँ मेरेसंग संडास चल औऱ मुझेवही चोदना।
चाची : तोँ फिन एक् कामकर अपने बेटे केँ संगनदी मे अपनेघाट पर्र चलीजा औऱ उससेकह दे कि वो तुम को भि तैरना सीखादे, बस नं तुझेही शरम आएगी औऱ वो भि तुम्हें तैरना सीखाने केँ बहाने तेरी गदराई जवानी औऱ इन मोटे मोटेपके मुलायम आमो कां आनंद लेँ लेगा औऱ जब उसका लन्ड तेरेभरे चूतडो सें भिड़ेगा तौ वो स्वयं ब स्वयं तेरी मस्तचुत कां मार्ग ढूढ़ लेगायही सबसेसही तरीका हैं अपने बेटे कां लन्ड लेने कां।
निर्माला : मगरमै उससेकहु केसे कि वो मुझेनदी मे लें जाकर तैरना सीखादे, वो कहेगा नहि कि मां तुम् क्याँ करोगी तैरना सिखकर।
चाची : एक् कामकर गुड़िया सें कहदे कि तूँ तैरना सीखना चाहती हैं बाकि कां काम गुड़िया स्वयं कर देगी।
निर्माला : तोँ क्याँ तूँ गुड़िया सें कहेगी कि मै कल्लु केँ मोटे मुसल जैसे लन्ड सें चुदना चाहती हूं।
चाची : नहि रेमगर कल्लु नें तोँ गुड़िया सें कहा हैं नं कि वोँ तेरे चूतडो कों देखकर मस्त होँ जाता हैं औऱ उसे तेरे चूतड़ सबसे अच्छे लगते हैं।
निर्माला : क्याँ तुँ सचकहरही हैं, कल्लु सच मे मुझे चोदना चाहता हैं।
चाची : तूँ नहि जानती वो तेरे सुडौल भारी भरकम चूतडो कों सोचसोच करखूब मुट्ठ मारता हैं, जबउसे पता चलेगा कि तौ उससे तैरना सीखना चाहती हैं तोँ उसकाइस बात कों सुनने भर सें हि लन्ड खड़ा होँ जाएगा, अब तुँ जा औऱ गुड़िया कों येबात बतादे कि तूँ तैरना सीखना चाहती हैं फिनदेख गुड़िया तुम्हे स्वयं हि मार्ग दिखा देगी।
उनकी बातेखतम होते हि गुड़िया उलटेपेर अपने खेतो कि ओर आँ गई उनकी बातेसुन कर गुड़िया कि चुदासी चूत फिन सें पानी पानी होँ गई थि औऱ येसोच सोचकर उसकीचुत औऱ भि पनिया रही थि कि उसकी अपनी मां उसके अपने भइया केँ मोटे लन्ड सें चुदने केँ लिए कितना तड़परही हैं औऱ येसोच कर कि केसे उसके भइया कल्लु कां लन्ड उसकी मम्मी कि गदराई चुत मे घुसेगा गुड़िया नें पानी छोड़ दिया थां।
वो सीधे बिस्तर पऱ जकरबैठ गई औऱ ऐसी सुरतबना ली जैसेकुछ हुआ हि नहि होँ तभी सामने सें निर्मला उसेआती हुईँ दिखाई दि, गुड़िया अपने होठो पर्र आती मुस्कुराहत कों पूरी कोशिश केँ संग दबाती हुई करवट लेकरलेट गई वही सामने उसका भइया औऱ उसके बाबा खेतो मे कामकर रहे थें, अरे मम्मी आँ गई तुम् क्याँ हुआ मिली चाची।
निर्माला : मुस्कुरा करहाँ मिल गई।
गुड़िया : क्याँ कहरही थि चाची।
निर्माला : मुस्कुराकार, बतारही थि कि कल्लु नें तुम को बहोत अच्छे सें तैरना सीखा दिया हैं औऱ तुँ नदी मे बहोत भीतर तक तैर लेती हैं।
गुडिया : मादक मुस्कान केँ संगहा वोँ तोँ हैं भैया बहोत अच्छा तैरना सीखाते हैं, उनके सीखाने कां तरीका ऐसा हैं कि कोई भि बहोत जल्दसिख जाए।
निर्मला : मुह बनाते हुये, रहनेदे मुझे तौ तेरे बाबा नें इतनीबार तैरना सिखाया मगरमै आज तक नहि सिखपाई।
गुडिया अपनी मां कि मनोदशा जनतेहुए मुसकुराकर कहनेलगी अरे मम्मी वही तौ फ़र्क़ हैं बाबा औऱ भैया केँ सीखाने मे, भैया जब सिखाते हैं तौ उनसे सीखने मे मज़ा हि कुछ औऱ हैं उन्हें पता हैं कि जिसको सिखाया जायउसे हाथ केसे रखना चाहिए पांव केसे चलना चाहिये, औऱ भैया इसतरह सें पकडे रहते हैं कि हम् डूबते भि नहि हैं औऱ भैया हमें अपने हाथो सें थामेहुए धीरे-धीरे धीरे-धीरे बीच मे लें जाते हैं औऱ फिनखूब बीच मे लेजाकर हमें थामेहुए पीछे सें हमें पकडेहुए धीरे-धीरे धीरे-धीरे आगे कि ओर धकलते हैं तब हमारे पेर अपने आप् खुलकर चौड़े होँ जाते हैं औऱ पानीमै चलने लगते हैं।
निर्मला : तोँ क्याँ कल्लु एक् दिन मे हि सभी सीखा देगा।
गुडिया : मुस्कुराते हुये, सीखा तोँ एक् दिन मे सकते हैं मगर तुम्हारा जिस्म थोडा भारी हैं तोँ तुम्हे 5-6 दिन तक भैया केँ संग प्रैक्टिस करनी पड़ेगी तभी तुम् अच्छे सें सिख पाओगी, इसलिये तुम् रोज भैया केँ संग जाकर तैरने कि प्रैक्टिस करना, तभी वहा कल्लु आँ जाता हैं औऱ गुड़िया तपाक सें अपनी मां केँ सामने हि कहती हैं भैया मां तुमसे तैरना सीखना चाहती हैं तुम् मां कों भि तैरना सीखादो, जाओ मां कब सें सजधजकर बेठी हैं अभि मम्मी केँ संगनदी मे चलेजाओ मै बाबा केँ पास रहतीहु औऱ गुड़िया नें कल्लु कि ओरदेख करआँख मार दि।
कालू : मुसकुराकर अपनी मम्मी केँ गदराये जिस्म पऱ निगाह मारते हुए कहनेलगा मम्मी कों सीखने मे बहुत मेहनत करना पड़ेगी मम्मी कां बदन बहुत मोटा होँ गय़ा हैं इसलिये कई दिनों तक मुझे मम्मी कों पानी मे पकड़कर तैरना सीखना होगा।
गुडिया : भैया मां नें इसबार पक्का निर्णय कर लिया हैं औऱ कहरही हैं बाबा केँ सीखने पर्र वो नहि सिखपाई हैं इसलिये अबकई दिनों तक तुम्हारे संग पानी मे उतरकर तैरने कि प्रैक्टिस करेगी औऱ फिन गुड़िया नें मां कि ओर देखते हुएकहा क्यूं मम्मी मैठीक कहरही हु नाँ।
निर्मला ; मुसकुराकर कल्लु कि धोती मे दिखरहे लन्ड केँ उभार कों एक् लम्हा देखती हुइ कहने लगती हैं बेटेइस बार तौ मै अपने बेटे सें तैरना सीखूँगी औऱ सिखकर हि रहुंगी।
कल्लु : तोँ फिनचलो मम्मी आज सें हि तुम्हे तैरना सीखाना शुरुआत कर देताहु औऱ कल्लु कि ओर निर्मला नें देखा औऱ फिन खड़ी होकरनदी कि ओर चलनेलगी कल्लु नें गुड़िया केँ मुस्कुराते गालो कों खीचते हुएआँख मारी औऱ वो भि अपनी मां केँ मोटे तरबूजो कि तरह गदराये बलखाते मोटे मोटे चूतडो कि मतवाली थिरकन कों देखते हुए चलनेलगा।
निर्मला आगेआगे चलनेलगी औऱ कल्लु उसके पीछे पीछे कल्लु कि नजर अपनी मां केँ उभरेहुए मटकते चूतडो पर्र पड़ी औऱ उसका लन्ड अपनी मां केँ गुदाज भरेहुए चूतडो कों देखकर फनफना गय़ा वो अपने लन्ड कों मसलते हुए अपनी मम्मी केँ पीछे पीछे चलनेलगा तभी निर्मला नें एक् बार पीछेमुड कर देखा औऱ अपने बेटे कों अपनी गुदाज मोटी गाण्ड कों घुरते हुए देखा औऱ तभी कल्लु कि नजरे अपनी मम्मी सें मिली औऱ निर्मला नें एक् मादक स्माइल कल्लु कि ओरदे दि औऱ फिन सें आगेदेख कर चलनेलगी।
अब थोड़ी हवाउसी दिशा कि ओर चलतीजिस दिशा मे वो दोनों जारहे थें तब निर्मला कां घाघरा पूरा उसके भारी चूतडो सें चिपक जाता थां औऱ कल्लु अपनी मां केँ भारी सुडौल चूतडो कों देखकर पागल हौ रहा थां, उसकी मां कि गाण्ड आजकुछ अधिक हि मटकरही थि याँ येकह लेँ कि निर्मला जानबूझ कर अपने चूतडो कों मटका मटकाकर अपने बेटे कों दिखारही थि।
कुछ हि देर मे दोनों नदी केँ किनारे पहुच चुके थें कल्लु पूरेजोश मे थां उसनेनदी केँ पास जाते हि अपनी धोती उतार दि औऱ उसका लन्ड उसके कच्छे मे टनटनाया हुआ थां निर्मला नें एक् नजर कल्लु केँ विकराल लोडे पऱ मारी। तब उसका चेहरा लज्जा सें लाल हौ गय़ा मगर उसकी मस्तचुत फूलकर कुप्पा हौ गई उसकी चूत तोँ पहले सें हि चिपचिपा पानी छोड़रही थि अपने बेटे केँ मस्त मोटे लम्बे लन्ड कों देखकर उसकीचुत कि नशो मे खून पूरी रफ़्तार सें बहनेलगा थां औऱ कल्लु देखते देखते पानी केँ अंदरउतर गय़ा वो कमर तक कि गहराई मे गय़ा औऱ वहा सें पलटकर बोला आँ जा मां तूँ भि पानी मे उतर आँ।
निर्मला : कल्लु मुझे तौ डरलगरहा हैं उसकी मां नें हस्ते हुएकहा।
कालू : अरे मेरेपास आँ जा तेरा साराडर दुरकर दूंगा अब जल्दकर।
निर्मला कल्लु कि बातसुन कर पानी मे उतरने लगीतभी कल्लु नें कहाअरे मां अपनी चोली तौ उतारदे इसेपहन कर तुझसे तैरा नहि जाएगा, निर्मला नें कल्लु कि बातसुन कर मुस्कुराते हुएलाल चोली कि डोरखोल दि औऱ उसके मोटे मोटेपके हुए जूसीआम उसके बेटे कि नज़रो केँ सामने आँ गए कल्लु कां लन्ड अपनी मां केँ मोटेपके हुए जूसीआमो कों देखकर झटके मारने लगा औऱ निर्मला धीरे-धीरे धीरे-धीरे पानी मे उतरने लगी वो जैसे जैसे पानी मे उतररही थि उसका घाघरा पानी मे ऊपर तैरता हुआऊपर उठनेलगा थां, उसका गुदाज पेट औऱ गहरी नाभि कों देखदेख कर कल्लु कां लन्ड खूब तगडे झटकेमार रहा थां।
जैसे हि निर्मला कल्लु केँ पास पहुची कल्लु नें अपनी मां कां हाथ पकड़कर उसे औऱ बीच मे लें जानां शुरुआत किया निर्मला ड़रते ड़रते पानी मे जानेलगी मगर अचानक थोडा ज़्यादा गहराई वाली स्थान आते हि निर्मला कां पांव फिसला औऱ कल्लु नें उसे अपने बांहो मे थाम लियाअब पानी निर्मला केँ जूसी मोटे मोटेआमो तक आँ चूका थां औऱ कल्लु नें अपनी मां कि कमर कों थामते हुएकहा मम्मी तूँ उधरमुह कर लेँ मै तुझेही पीछे सें पकडे रहुगा औऱ तूँ अपने हाथो सें पानी कों पीछे धकलते हुए तैरने कि कोशिश करनाबस फिन क्याँ थां निर्मला दूसरी ओरघुम गई औऱ कल्लु नें अपनी मां केँ गुदाज उठेहुए रसीले पेट कों अपने हांथो मे भरकर उसकी गहरी नाभि कों सहलाते हुएकहा मां तुँ झुककर पानी मे तैरने कि कोशिश कर मैंने तुम को पीछे सें पकड़ा हुआ हैं तुँ डुबेगी नहि औऱ फिन कल्लु नें अपने खड़े लन्ड कों अपनी मम्मी केँ मोटे मोटे चूतडो सें सटा दिया, उसका लन्ड जैसे हि अपनी मम्मी केँ रसीले चूतडो कि जडो मे घुसा उसके मोटे तगडे लन्ड केँ एह्सास सें निर्मला खुशी सें दोहरी हौ गई।
वो पानी मे हाथचला करआगे बढ़ने कि कोशिश करनेलगी औऱ कल्लु उसकी गाण्ड मे लन्ड लगाएहुए उसे ताकत सें आगे कि ओर दबाने लगा, कल्लु कां हाथबार बार अपनी मां केँ मोटे मोटे मुलायम आमो कों छुरहा थां औऱ फिन कल्लु नें अपनी मम्मी केँ पकेआमो कों एक् बारगी तोँ अपने हांथो मे भरकरथाम लिया औऱ निर्मला कि चुत सें पानीबह निकला, कुछदेर तक कल्लु अपने लन्ड कों अपनी मां कि गुदाज गाण्ड मे दबाये हुए उसके मोटे मोटेदूध कों सहलाता हुआउसे दबाता रहाफिन उसने अपनी मम्मी सें कहा मम्मी मै तेरीकमर पकड़ लेताहु तुँ तैरने कि कोशिश कर औऱ अपनेहाथ पांवचला औऱ फिन कल्लु नें अपनी मां केँ मोटे मोटे गुदाज चूतडो कों जब अपने हांथो मे भरकर दबाया तोँ उसके खुशी कि सीमा न् रही उसने पहलीबार इतने रसीले भरेभरे चूतडो कों दबोचा थां उसका लन्ड तौ ऐसालग रहा थां जैसे पानी छोड़ देगाउसे आज पहलीबार एह्सास हुआ थां कि उसकी मम्मी केँ चूतडो कों मसलने मे कितना मज़ा आँ रहा थां।
वाउ पागलो कि तरह अपनी मम्मी केँ चूतडो कों दबादबा कर सहलारहा थां तभी उसकी मां कां घाघरा थोडा ऊपर होँ गय़ा औऱ कल्लु केँ हाथ मे अपनी मम्मी कि मस्त मोटी मोटी तन्दुरुस्त जाँघे आँ गई औऱ वो अपनी मां कि जांघो कि चिकनाहट औऱ मोटाई कों महसूस करके मस्त होँ रहा थां, कल्लु सें रहा नहि गय़ा औऱ उसने अपने हाथो सें अपनी मम्मी केँ नंगे चूतडो कों थाम लिया औऱ इसबार कल्लु कां लन्ड अपनी मम्मी कि नंगे चूतडो कि गहरी दरार मे जाकरधंस गय़ा औऱ निर्मला केँ मुह सें अहह निकल गई।
कल्लु : क्याँ हुआ मां तुझसे तैरते बनरहा हैं नां।
निर्मला अहहहाँ बेटेबन रहा हैं पर्र तूँ मेरीकमर कों औऱ कस केँ थाम लें कहीमै डूब नं जाउ, निर्मला कां इतना कहना थां कि कल्लु नें अपनी मम्मी केँ गुदाज पेट कों दोनों हाथो मे भरकर अपने लन्ड कों औऱ अधिक ताकत सें अपनी मम्मी कि मोटी गाण्ड कि दरारो मे पेल दिया औऱ निर्मला सिहरउठी।
कालू : अबठीक हैं मम्मी मैंने तुम को अच्छे सें जकड लिया हैं।
निर्मला: सीसियते हुये, हाँ कल्लु जरा औऱ कस केँ मुझे पकड़ लें कहीमै डूब न् जाऊइस बार कल्लु नें अपने हांथो मे अपनी मम्मी केँ जूसीपके हुएआमो कों थाम लिया औऱ अपने लन्ड कों खूबकस कर अपनी मां कि गाण्ड मे दबा दिया जिससे उसका लन्ड गाण्ड केँ छेद सें रगड़ता हुआ निर्मला कि चुत कि फांको केँ बीच जाकरफंस गय़ा। ठन्डे पानी मे भि कल्लु कों अपनी मां कि गर्मचुत कां एह्सास हौ रहा थां औऱ वो अपनी मम्मी केँ मोटे मोटेदूध कों मसलता हुआ अपने लन्ड कों बराबर अपनी मम्मी कि गाण्ड कि दरार मे दबाये जारहा थां। निर्मला पागलो कि तरह पानी मे हाथचला रही थि तभी कल्लु नें अपनी मम्मी कि कमर कों थाम लिया औऱ अपने पैरो कों औऱ पीछे गहराई मे लें जानेलाग, उसकेऐसा करने सें निर्मला घबराने लगी औऱ कहनेलगी बेटा अधिकबीच मे नं जाकही मैडूब नं जाऊँ।
कल्लु नें कहा मां तुँ मेरीतरफ मुहकर लें थोडा बीच मे तुम्हारी तरफ जल्द तैरना आँ जायेगा अभि तेरे पांव जमीन पऱ टीक जाते हैं इसलिये तूँ तैर नहि पारही हैं, निर्मला नें अपने बेटे कि तरफमुह किया औऱ उसकालाल तमतमाये चेहरा देखकर कल्लु नें उसे अपने सिने सें चिपकाते हुएकहा मां मुझेकस केँ पकड़ लें औऱ कल्लु औऱ गहराइ मे जानेलगा जैसे हि पानी निर्मला केँ मुह तक पंहुचा उसने दोनों पैरो कों उठाकर किसी बंदरिया कि तरह अपने बेटे कि कमर पर्र लपेट दिया औऱ कल्लु इसी लम्हा केँ प्रतीक्षा मे थां उसने भि अपनी मम्मी केँ दोनों चूतडो कों अपने हांथो मे भरकर अपनी मम्मी कों अपने लन्ड पऱ टाँग लियाअब कल्लु कां खड़ा लन्ड सीधे अपनी मम्मी कि बुर मे घुसाहुआ थां बस कल्लु नें अगर कच्छा नं पहना होता तौ लन्ड कब कां उसकी मम्मी कि मस्तचुत मे घुस चूका होता।
कल्लु नें अपनेमुह कों अपनी मम्मी केँ मोटे मोटेदूध मे दबाया हुआ थां औऱ अपनी मम्मी केँ जूसी मोटेआमो कों अपनेमुह सें दबादबा करमजे लेँ रहा थां इधर निर्मला अपनी जांघो कों फ़ैलाये हुएअपने बेटे केँ खड़े लन्ड पऱ दबाबदे रही थि औऱ सीसिया रही थि, मगर जैसे हि कल्लु नें अपनेमुह कों खोलकर अपनी मम्मी केँ मोटेदूध केँ निप्पल कों अपने होठो मे दबाकर चूसा। निर्मला नें कल्लु कों कसकरजकड लिया औऱ उसके खड़े लन्ड पर्र अपनीचुत कों रगडने लगी, निर्मला केँ मुह सें अहहअहह जैसे शब्द निकलने लगे, कल्लु पागलो कि तरह अपनी मां कि मोटी मख़मली जांघो औऱ भारी भरकम चूतडो कों अपने हांथो मे भरभरकर मसलरहा थां औऱ सोचरहा थां कि इतना आनंद तोँ गुड़िया औऱ चाची कि गाण्ड औऱ जांघो कों मसलने मे भि नहि आया। सच मे उसकी मां बहोत हि रसीली औऱ गदराया हुआमाल हैं।
मां कों तौ खूब तबियत सें रगडरगड कर चोदना होगाये तोँ खूब तबियत सें मेरे लन्ड सें चुदेगी, कल्लु ये सोचते सोचते अपने हाथो कों अपनी मम्मी कि मोटी गाण्ड कों सहलाते हुए अचानक उसकी उंगलिया अपनी मां कि मोटी गाण्ड कि गुदा पर्र चलि गई औऱ कल्लु नें जैसे हि अपनी उंगलियो कों थोडा दबाया उसकीबीच कि ऊँगली थोड़ी सि उसकी मम्मी कि गुदाज गाण्ड केँ छेद मे उतर गई औऱ निर्मला सीसिया पडी।
कल्लु : क्याँ हुआ मम्मी औऱ बीच मे जाऊँ।
निर्मला : अहह अधिकबीच मे डूब जायेगा बेटे।
कालू : नहि मां मुझे तैरना आता हैं तूँ कहे तौ थोडा औऱ बीच मे जाऊ औऱ कल्लु कि दूसरी ऊँगली उसकी मम्मी कि मस्तचुत केँ जूसीछेद मे घुस गई।
निर्मला : ठीक हैं बेटेबीच मे जामगर डुबना नहीं।
कालू नें मम्मी कि बात सुनते हि अपनी ऊँगली कां दबाव अपनी मां कि गाण्ड औऱ चुत मे औऱ भि बढा दिया। औऱ उसकी दोनों उंगलिया गाण्ड औऱ चुत कि छेद मे औऱ भि ज़्यादा उतर गई औऱ निर्मला केँ मुह सें एक् सिसकी निकल गई, कल्लु नें अपनी उंगलियो कों अपनी मम्मी कि गाण्ड औऱ चुत मे कसकर दबाते हुएकहा मम्मी यहा बहोत गहरा हैं लगता हैं पूरा गहराई मे उतर जाऊँ।
निर्मला: अहह सि बेटे तूँ तोँ कुछ ज़्यादा हि बीच मे घुसरहा हैं देख्ना कहीडूब न् जाये औऱ निर्मला केँ हाथ कल्लु केँ मोटे खुंखार काले लन्ड तक पहुच गय़ा औऱ जैसे हि उसने अपने बेटे केँ काले लन्ड कों अपने हाथो सें पकड़ा कल्लु पागलो कि तरह अपनी मम्मी केँ मुलायम होठो कों चुमते हुए उसके बोबो कों कसकसकर चुसने लगा। निर्मला उसकीइस हरकत सें पानी पानी हौ गई औऱ उसने कल्लु केँ कच्छे कों खोलकर अपने बेटे केँ विकराल काले मोटे लन्ड कों अपने हाथो मे पूरीतरह थाम लिया अपने बेटे केँ लन्ड कि लम्बाई औऱ मोटाई देखकर वो पागल हौ गई औऱ कहनेलगी बेटे पूरीतरह बीच मे उतरजा अहहअहह सि सीईओह।
कल्लु नें अपनी ऊँगली जौ चुत मे घुसी थि कों बाहर् निकाल लिया औऱ गाण्ड मे घुसि ऊँगली कों गहराई मे अपनी मम्मी कि मोटी गाण्ड कि गुदा मे पूराजड़ तक पेल दिया औऱ दूसरे हाथ सें अपनी मां केँ मोटेदूध कों दबोचने लगाउधर निर्मला अपने बेटे केँ काले मोटे लन्ड कों खूबदबा दबाकर महसूस करनेलगी औऱ जब उसकेहाथ मे अपने बेटे केँ भारी भरकम अंडकोष आये तोँ उसने उन्हें मुट्ठी मे भरभरकर दबोचना शुरुआत कर दियाकभी वो उसकेआंड कों दबोचती तोँ कभी अपने बेटे केँ लन्ड केँ फुलेहुए सुपाडे कों दबोचती उधर कल्लु नें अपनी लम्बी ऊँगली कों अपनी मम्मी कि गाण्ड मे जड़ तक घुसारखा थां औऱ एक् हाथ सें उसके दोनों आमो कों बारी बारी सें मसलरहा थां, तभी कल्लु नें जब अपनी मम्मी केँ एक् निप्पल कों मुह मे भरकर काटातभी निर्मला नें अपने बेटे केँ काले मोटे लन्ड कों अपनीचुत केँ छेद मे लगा दिया औऱ मारे उत्तेजना केँ उसने जैसे हि लन्ड अपनीचुत केँ छेद मे लगाया कल्लु नें कसकर एक् धक्का ऊपर कि ओर दिया औऱ उसका मोटा तगड़ा लन्ड अपनी मम्मी कि चुत मे आधे सें ज़्यादा अंदरसमा गय़ा औऱ उसकी मम्मी कि चीख़ निकल गई।
निर्मला: कल्लु मार दियारे कितना मोटा खूँटा हैं तेरा अपनी मां कि चुतफाड देगा क्याँ, हरामि क्याँ तुम्हारी तरफ मैंने इसीदिन केँ लिए अपनीइस चुत सें निकाला थां कि बाद मे तुँ इसीचुत कों फिन सें अपने मुसल सें फाडेअहह अहहजरा धीरे-धीरे धीरे-धीरे चोद हरामी कितना बड़ा लन्ड हैं तेराअहह अहहसीई सीई आहह-आहह सीईओह मम्मी मर गई। कल्लु तौ अपनी मम्मी कों अपने लन्ड पर्र चढ़ाये सारा दबाब अपने लन्ड कि ओरदेरहा थां औऱ निर्मला अपने बेटे केँ खड़े लन्ड सें अपनीचुत फाडे बेठी हुईँ थि, कुछदेर ऐसे हि झटके देने सें दोनों मम्मी बेटे कां पानीछूट गय़ा औऱ दोनों हाफ्ते हुए किनारे पऱ आकर सुस्ताने लगे।
थोड़ी देरबाद जब दोनों कि साँसे नार्मल हुईँ तब निर्मला नें मुस्कुराते हुए कल्लु कि ओर देखा औऱ उसके मोटे लन्ड कों देखकर कहनेलगी तूनेइसी तरह गुड़िया कों भि तैरना सिखाया हैं नं।
कल्लु : मुस्कुराते हुए अपने लन्ड कां सुपाडा अपनी मां कों खोलकर दिखाते हुए कहनेलगा गुड़िया स्वयं हि तैरना सीखने केँ लिएमरी जारही थि तौ मै क्याँ करता।
निर्मला : मुसकुराकर अच्छा तोँ तूँ नहि मराजा रहा थां अपनी बेहन केँ लिये।
कालू : अपने लन्ड कों मसलते हुए कहनेलगा मां मुझे तोँ गुड़िया सें ज़्यादा तुम्हे तैरना सीखाने कां मन होता थां।
निर्मला मुस्कुराते हुये, अच्छा तभीदिन भर खेतो मे मेरे पीछे हि रहता थां, औऱ वैसे भि तेराये मुसल तेरी बेहन केँ लायक नहि बल्कि बड़ी बड़ी गदराई औरतो केँ लायक हैं।
कल्लु : मुस्कुराकर अपनी मम्मी कि मोटी नंगी जांघो कों सहलाते हुए कहनेलगा तुँ भि तौ खूब तबियत सें गदराई हुइ हैं, तेरी ये बुर औऱ गांड तोँ पूरा लेने लायक हैं।
निर्मला कल्लु केँ मोटे काले लन्ड कों अपने हाथो सें सहलाती हुइ, अच्छा तौ क्याँ अपनी मां पर्र चढेगा।
कल्लु : अपनी मम्मी कि मोटी गुदाज जांघो कों दबोचते हुये, क्यूं जब तुँ अपने बेटे पर्र चढ़ सकती हैं तोँ मै तेरेऊपर नहि चढ़ूगा क्याँ।
निर्मला : मुसकुराकर कहनेलगी बस चढेगा हि याँ कुछ करेगा भि।
कालू : अपनी मां कि मस्तचुत कों अपनी हथेली मे भरकर कहनेलगा चढूँगा भि औऱ तेरीइस मस्तचुत कों फाड़ूंगा भि।
निर्मला : मुसकुराकर औऱ कितना फाड़ेगा तेरे निकलने सें हि तोँ सबसे ज़्यादा फटी हैं।
कालू : अपनी मम्मी कि चुत कों सहलाकर कहनेलगा इसे तोँ खूब तबियत सें फाड़ूंगा हि औऱ अभि इसे भि तौ फाडना बाकि हैं औऱ कल्लु नें अपनी ऊँगली अपंनी मां कि गाण्ड मे पेल दि औऱ निर्मला फिन सें सिसिया कर कल्लु केँ सिने सें चिपक गई।
कालू : बोल फड़वाएगी अपने बेटे सें अपनी मोटीगोल गाँड।
निर्मला : इतने मोटे लन्ड कों अपनी गाण्ड मे घुसवाउंगी तोँ मेरी गाण्ड तोँ पूरीफट जाएगी।
कल्लु : अरे तुँ इतना मदमस्त तगड़ा माल हैं कि ऐसेदो दो काले लन्ड तेरी गाण्ड मे घुस जाएगे।
निर्मला: नहि रे अभि तौ तूँ मेरीचुत हि फाड लें कलतेल लेकर आउंगी तबफिन अपनी मां कि गाण्ड भि खूबकस करमार लेना मुझेपता हैं तुँ अपना काला मुसल पूरा अपनी मां कि मोटी गाण्ड मे पेलना चाहता हैं, औऱ वैसे भि गुड़िया नें कहा थां कि मुझेकम सें कम 8-10 दिन तक तुझसे तैरना सीखना पड़ेगा तभीमै अच्छे सें तैर पाउँगी।
कल्लु नें बैठे बैठे हि आसनजमा कर अपने खड़े लन्ड कों अपनी मम्मी कि चुत मे एक् झटके मे पेल दिया औऱ निर्मला नें अपनी जांघो कों फैलाकर अपनेहाथ पीछे जमीन पर्र लगादिए औऱ कहनेलगी अब 8-10 दिन नहि मै तोँ रोज तुम को तैरना सिखाउंगा औऱ अपने लन्ड पर्र चढाचढा कर तुझेही तैराउन्गा।
निर्मला : अहह मुये कितना मोटा औऱ विकराल लन्ड हौ गय़ा हैं तेरा तुँ तोँ मेरामरद बनने केँ लायक हैं अहह आहह-आहह सि सि ओइ मां औऱ कस केँ पेल बेटा।
कल्लु : हुमच हुमचकर उकडू बैठे बैठे अपने लन्ड कों अपनी मां कि चुत मे पेलते हुए कहनेलगा मुझे भि तेरे जैसी हि स्त्री चाहिये, तेरा गदराया जिस्म मोटी मोटी जांघे भारी भरकम चूतड़ औऱ मस्त भोसडा मारने मे हि मुझे मज़ा मिलता हैं आज सें तौ मेरी स्त्री तुँ हि हैं। आज सें मै तेरीरोज नंगी करकेखूब कसकस केँ चोदूँगा।
निर्मला खूब सिसिया रही थि औऱ उसका बेटा दनादन उसकी मस्तचुत मे लन्ड पेलरहा थां, कल्लु कां लन्ड औऱ भि विकराल हौ गय़ा थां औऱ निर्मला कि चुत सें पानी कि धाराबह निकली अब उसने अपनी मम्मी केँ मोटे मोटे चूतडो कों अपनीतरफ खींचकर दबोच लिया औऱ खूबकस कसकर अपनी मां कि चुत कि गहराई मे धक्के मारने लगा।
कुछ देर अपनी मम्मी कि रसीली बुर चोदने केँ बाद कल्लू नें अपना मोटा लन्ड अपनी मम्मी कि बुर सें निकाल लिया औऱ अपनी मां कों अपना लन्ड चूसने कां इशारा किया।
निर्मला नें कल्लू केँ लन्ड कों अपने मुँह मे लेकर चूसने लगी।
कल्लू:अहह मम्मी क्याँ मस्त गर्म मुँह हैं तेरा। बहोत मजा आँ रहा हैं। लगरहा हैं मेरा लन्ड किसी बुर मे जारहा हैं। तूँ तौ लन्ड चूसने मे भि एक्सपर्ट हैं। चूस साली औऱ अंदर लें। पूरा अंदर लेँ केँ चूस।
फिन कल्लू अपनी मां कों कुतिया बना देता हैं औऱ अपना मोटा लन्ड अपनी मां कि रसीली बुर केँ छेद पऱ रखकर एक् हि धक्के मे पूरा लन्ड अपनी मां कि बुर मे पेल देता हैं। फिन फचाफच जोरजोर सें पेलने लगता हैं।
कल्लू:अहह कितना मजा आँ रहा हैं। कितनी टाइट बुर हैं तेरी मां। लगता हैं बहोत दिन सें चुदी नहि हैं।
निर्मला:हां मेरेलाल चोद अपनी मम्मी कों। बहोत दिन सें प्यासी हूं चोदचोद केँ फाड़दे मेरी बुर कों। यह मुझे बहोत परेसान करती हैं।
कल्लू:आज सें रोज तुम को चोदुन्गा मम्मी। आज सें तूँ मेरी रंडी हैं। साली अब तेरी बुर औऱ गांडरोज फ़ाड़ूंगा।
इसीतरह कुतिया बना केँ तेरी गांड मारूँगा साली रंडी। बहोत तरसाया हैं तूने अपनी मोटी मोटी गांड दिखा केँ।
निर्मला:चोद मादरचोद चोद। आज सें मे तेरी रंडी हूं। चोद फाड़दे मेरी बुर कों।
कल्लू पूरी ताकत सें अपनी मम्मी कों चोदने लगता हैं गन्दी गन्दी गाली देतेहुए।
करीब सैकड़ो धक्के मारमार कर उसने अपनी मां कि चुत कों पूरालाल कर दिया औऱ अपनी मम्मी कों चोदचोद करखूब पानी निकाला औऱ अपना पूरामाल अपनी मम्मी केँ बुर मे निकाल देता हैं। उस सुनसान स्थान पर्र दोनों कि सिसियाने कि आवाज़ औऱ चुत मे लन्ड कि पड़ती थाप हि गूंजती रही थि।
उस चुदाई केँ बाद दोनों मम्मी बेटेघऱ कि ओरचलदिए। औऱ निर्मला नें अगलेदिन तेल कि शीशीसंग मे लेकरआने वालीबात कल्लु सें कि औऱ कल्लु अपनी मां कि गुदा कों सहलाते हुए कहनेलगा मां कलजब तेरी गुदाज गण्ड मे तेल सें सनाहुआ मेरा काला लन्ड घुसेगा तौ आनंद आँ जायेगा तब निर्मला कहनेलगी अब तौ मै भि तेरेइस मोटे मुसल सें अपनी मोटी गाण्ड मरवाने केँ लिए उतावलापन रही हूं।
कल सबेरा होते हि हम् यहा आँ जाएगे फिन तूँ अपनी मां कि कोरी गाण्ड कों अपने मुसल पऱ तेललगा करकसकर ठुकाई करनाबस यही बाते करतेहुए दोनों अपनेखेत कि ओरचलपडे।
दूसरे दिन बाबा कों थोडा सां बुखार थां। इसलिये वोँ खेतो मे काम करने नहि गए। कल्लू बैधजी सें दवा लाया औऱ बाबा कों खिला दिया थां। अब बुखार ठीक थां। मगर कल्लू औऱ निर्मला नें उनको आराम करने कों कहकर खेतों कि तरफचल दिए। निर्मला केँ हाथों मे तेल कि शीशी देखकर कल्लू कां लन्ड अपनी मां कि मोटी मोटी गांड कों फाड़ने केँ लिए फ़ुफ़कारने लगा।
गुड़िया कि सहेली कां बर्थडे थां इसलिये वोँ कुछदेर बादबगल केँ गाँव मे अपनी सहेली केँ घऱजारही थि।
आगेआगे निर्मला अपनी मोटी मोटी गांड मटकाती चलरही थि आज निर्मला नें साड़ी पहनरखी थि। जिसे देखकर कल्लू कां लन्ड पूरारॉड बन गय़ा थां। गाँव सें दूर आँ जाने पऱ कल्लू अब अपनाहाथ कभीकभी अपनी मम्मी कि गांड पर्र फेररहा थां। खेत मे पहुंचकर दोनों झोपडी केँ पासबैठ गए। निर्मला भि पूरी गर्म हौ चुकी थि।
कल्लू केँ होंठजब अपने मां निर्मला केँ होठो केँ इतने लगभग थें, कि दोनों कि साँसें एक् दूसरे सें टकरारही थि।
कल्लू अपने मां सें एक् प्रश्न पूछता हैं।
क्याँ तुम् मुझसे आज अपना गांड मरवाओगी मां। औऱ निर्मला उसे जवाब नहि देतीबस उससे अपने होठो सें लगा लेती हैं, औऱ दोनों केँ होंठ एक् दूसरे सें चिपक जाते हैं।
यूं तोँ इससे पहले भि यह एक् दूसरे सें मिले थें मगरआज जौ जज़्बा दोनों केँ अंदर थां वोँ इससे पहलेकभी नहि महसूस हुआ थां।
कल्लू अपने ज़ुबान कों बाहर् निकाल कर निर्मला केँ मुह मे डालने लगता हैं औऱ निर्मला भि उसकासंग देतेहुए अपनामुह खोलकर कल्लू कि जीभ कों चुसने लगती हैं। ओइस अंदाज़ मे कल्लू कि जीभचूस रही थि जैसे उसकेमुह मे कल्लू कां लन्ड हौ। चटखारे मारते हुए अपनेमुह कां थूक कल्लू केँ मुह मे उंडेलती हुई।
कल्लू कां जिस्म गर्म होँ चूका थां बदन पऱ मौजूद कपडा भि उसेबोझ लगरहा थां वोँ निकाल करउसे फेंक देता हैं औऱ निर्मला कों मसलते हुए उसकेऊपर चढ जाता हैं उसका खड़ा लन्ड निर्मला केँ साडी केँ ऊपर सें बुर सें जा टकराता हैं। वोँ चुभन पहली नहि थि। मगर आजउस चुभन कों अंदर महसूस करना चाहती थि निर्मला।
निर्मला;आँ हहह मुझे नंगीकर दो पूरीतरह।
कल्लू;मुस्कुराते हुएबैठ जाता हैं औऱ एक् झटके मे उसका ब्लाउज निकाल देता हैं। साडी कों कमर सें खींचकर अलगकर देता हैं औऱ पेंटी कों नीचे उतार देता हैं। फूलों सें महकती हुए निर्मला अपने पुरे शबाब केँ संग कल्लू केँ सामने नंगी होँ जाती हैं।
कल्लू;मम्मी आजमै तुम्हे मर्द कां एहसास कराना चाहता हूं। तेरे मर्द कां, तेरे कल्लू कां, तेरे बेटे केँ लन्ड सें, तेरी तडपती हुइ बुर कों गीला करना चाहता हुं। बोल मां मुझसे चुदाएगी नाँ लेंगी न् मेरा लन्ड अपनी बुर मे।
निर्मला;अहह हहहह मेरी बुर अब मेरी नहि रही कल्लू यह तुम्हारी हौ गई हैं तुम् मालिक होँ अब इसके जौ चाहें वोँ कर सकते होँ इसके संग। अहह मसलो मेरी बुर केँ दाने कों। बहोत तडपाती हैं यह तुम्हारी मम्मी कों मेरेलाल।
कल्लू;अपने मम्मी केँ ब्रैस्ट पऱ टूट पड़ता हैं। ओ बड़े बड़े खरबूज़ कि तरह ब्रैस्ट कों अपनेमुह मे भर लेता हैं औऱ चूसने लगता हैं।
निर्मला कि बुर भि चीखने लगती हैं। मिलन कां वोँ समय लगभग आँ गय़ा थां। कल्लू कां हाथ नीचेबढ़ कर निर्मला केँ चुत कों सहलाने लगता हैं औऱ निर्मला भि अपने नाज़ुक सें हाथों मे कल्लू कां मोटा लन्ड दबोच लेती हैं।
औऱ उसे पकड़कर हिलाने लगती हैं जिससे उसकी चूडियाँ खनकने लगती हैं जिसकी आवाज़ सें कल्लू कां लन्ड झटके मारने लगता हैं। अबदोनो कि साँसें फूल चुकी थि दोनों एक् दूसरे केँ अंदर जाने केँ लिए बेताब थें।
मगरयह हसीन वक्त कल्लू कों बड़े मुद्दतों केँ बाद नसीबहुआ थां वोँ कोई जल्द बाज़ी नहि करना चाहता थां। वोँ नीचे निप्पल्स कों हलके हलके काटने लगता हैं औऱ उसे खिंचते हुए एक् ऊँगली उसकेबाद दूसरी ऊँगली भि निर्मला केँ बुर मे डाल देता हैं।
निर्मला -आहह-आहह मार डालेगा आज तूँ मुझेअहह
अहहहह ह।
कल्लू;अभि नहि जानेमन।
वोँ नीचे सरकते हुएपेट सें होतेहुए बुर तक पहुँच जाता हैं औऱ अपने मां कि बुर केँ गंध मे जैसेखो जाता हैं। एक् दिलकश स्थान वोँ स्थान जौ हर किसी कों नसीब नहि होती। बस कल्लू जैसे भाग्य वालेउस मुक़ाम तक पहुँच पाते हैं।
निर्मला अपने दोनों पैरों कों औऱ खोल देती हैं। देखजब तूँ इस बुर सें निकलरहा थां तब भि मेरे पांवऐसे हि खुलेहुए थें औऱ आजजब तूँ इस मे जायेंगा तब भि ऐसे हि हें। आजा अपने मां कि बुर मे कल्लू। अहह अह्ह्ह।
कल्लू अपने ज़ुबान कों निर्मला कि बुर पऱ रखकर गाण्ड केँ सुराख़ सें लेकर बुर केँ दरार तक चाटने लगता हैं।
उसकी बुर इतनी पनिया गई थि कि ज़ुबान जितने अंदर जाता निर्मला अपनेकमर कों उतनाऊपर उठा लेती।
इस एहसास मे कि कल्लू उसेचोद रहा हैं मगर वोँ कहां जानती थि केँ असली एहसास अभि बाकी हैं।
कल्लू अपने एक् ऊँगली कों निर्मला केँ गाण्ड मे डालकर उसे अंदर बाहर् करने लगता हैं। निर्मला कां मुह खुलता चला जाता हैं। हलक सुखने लगता हैं मुह सें एक् शब्द भि नहि निकल पाता। ऐसा लगने लगता हैं निर्मला कों जैसे कि उसकीजान उसकी बुर सें खीचरहा हैं। निर्मला अपने दोनों हाथों सें कल्लू केँ सर कों अपने बुर पर्र दबाने लगती हैं।
कल्लू केँ ज़ुबान अपनाकाम कर गई थि। निर्मला केँ बुर कां उसदिन कां पहला पानी बाहर् बह निकला थां। जिसे कल्लू बड़ेचाव सें चाटता चला जाता हैं।
जब निर्मला कि साँसें थोड़े धीमी होती हैं तौ वोँ कल्लू केँ तरफ देखने लगती हैं। कल्लू कां मुँह पूरीतरह निर्मला केँ बुर केँ पानी सें गीला थां। निर्मला केँ आँखों मे खून उमड़आया थां। वोँ कल्लू केँ तरफ लपकती हैं औऱ उसकेमुह कों चाटने लगती हैं।
निर्मला:गलप्प मेरी बुर कां पानी हैं नां यह गल्प
मेरेजान केँ मुँह कों मै साफ़कर देतीहु इसे गलप्प
गलप गलप्प। ओ दीवानी होँ गई थि बुर कि आगआजसर मे चढ़ गई थि।
कल्लू अपने ज़ुबान कों भि बाहर् निकाल देता हैं। औऱ निर्मला उसे भि चाटने लगती हैं। मगर जैसे हि वोँ कल्लू सें औऱ चिपकती हैं। एक् नोकीला मोटा चीज़ उसकेपेट सें टकरा जाती हैं।
निर्मला नीचे देखती हैं। वोँ कल्लू कां खड़ा लन्ड थां जोँ झटके पर्र झटकेमार रहा थां।
कल्लू -मां तूँ पेशाब कों केसे बैठती हैं।
निर्मला नीचे ज़मीन पऱ बैठ जाती हैं
निर्मला:ऐसे पेशाब करती हैं तेरी मम्मी।
पेर खुलेहुए बुर, चौडे गांड पीछे कि तरफ निकले हुए,
ब्रेस्ट सामने कि तरफ लटके हुए।।। बहोत हसीनलग रही थि निर्मला।
कल्लू अपने लन्ड सें निर्मला केँ गाल सहलाने लगता हैं।
निर्मला- मेरागला सूखरहा हैं। मै पानी पीकरआती हूं।
कल्लू-पानी तोँ यही हैं। चल मुँहखोल।
निर्मला कल्लू केँ आँखों मे देखते हुए जैसे हि मुह खोलती हैं कल्लू उसकेमुह मे अपना लन्ड डालकर उसकासर पीछे सें पकड़ लेता हैं। निर्मला कों समझ नहि आता कि कल्लू क्याँ कररहा हैं।
मगर अगले हि लम्हा उसेतब एहसास होता हैं जब कल्लू कां पेशाब उसकेहलक मे गिरने लगता हैं।
पेशाब कि गंध निर्मला कों औऱ मदहोश कर देती हैं औऱ वोँ कल्लू केँ लन्ड सें निकला पिशाब पीने लगती हैं
निर्मला अपनेहाथ मे कल्लू केँ आंडो कों पकड़कर उसे दबाने लगती हैं। जिससे कल्लू कां लन्ड औऱ मोटा होताचला जाता हैं।
पेशाब पीने केँ बाद निर्मला कां जिस्म ऐंठने लगता हैं
उसे लन्ड चाहीये थां अपनेचुत मे मगर कल्लू उसकामुह मीठा किये बिनाउसे यह देना नहि चाहता थां।
कल्लू इशारे सें निर्मला कों अपने लन्ड कों फिन सें मुह मे लेने केँ लिए कहता हैं।
औऱ गर्म दीवानी निर्मला अपने कल्लू केँ लन्ड कों अपनेमुह मे लेकरउसे सर सें लेकरजड़ तक चाटने लगती हैं। गप गपअहह गल्प गल्प।
कल्लू:मेरा लन्ड मेरेमुह मे कितन अच्छा लगता हैं मां गल्प गप। चूस इसे पूरा मुँह मे लेके।
निर्मला:मेरे बेटे कां लन्ड मैरोज चूसूंगी गपगप।
कल्लू;अहह मम्मी धीरे-धीरे धीरे-धीरे चूस नां दर्द हौ रहा हैं अहह
निर्मला;करने दो नाँ बेटे। औऱ चूसने दे।
कल्लू;अपनी मम्मी केँ लिए बरसों कां प्यासा थां।
Old At One Place - Next part mein bada twist
Relavant source : click here