सौतेला बाप complete - Garma Garam Kahani - Real Kahani Part 1
फ्रेंड्स यह स्टोरी अशोक नें दूसरे फोरम मे लिखी हैं औऱ अभि रन्निंग कन्डीशन मे हैं
सौतेला बाप
लेखक- अशोक
यह किस्सा हैं मुम्बई मे रहने वाली मम्मी-बेटी कि
मम्मी कां नाम हैं रश्मि, उम्र 38 साल, भराहुआ जिस्म, गोरी-चिट्टी
औऱ उसकी बेटी काव्या, 12th मे पड़ने वाली, उम्र **, छातियों केँ उभार अभि उभरने शुरुआत हि हुए हें, पऱ इसके लम्बे निप्पल दूर सें हि दिख जाते हें
काव्या जैसी हि विद्यालय सें घऱआयी, उसकी मां रश्मि नें उसे अपनेपास बिठा लिया.
वैसे तोँ ऐसे मिलकर बैठना मां-बेटी कां रोज कां काम थां पऱ आज शायदकुछ ख़ासबात थि, क्योकि अपनी मां रश्मि कों काव्या नें इतना परेशान कभी नहि देखा थां.
अपने पिता कों पांचसाल पहले एक् एक्सीडेंट मे खो देने केँ बाद उसने अपनी मां कों कभीखुश नहि देखा थां, वोँ हमेशा गुम-सुम सि रहती थि, बापू केँ बदले उन्हें उसी कम्पनी मे दफ़्तर कोर्डिनेटर कि नौकरी मिल गई, थि जिसकी वजह सें उनकेघऱ कां खर्च जैसे - तैसेचल रहा थां, वोँ घऱ कां भि साराकाम करती औऱ उसकीदेख भाल करती, खानां खाती औऱ सो जाती। बसयही दिनचर्या थि उसकी मम्मी कि.
पऱ पिछले कुछ दिनों सें उनमे बहुत बदलाव आये थें, वोँ थोडा सजधजकर दफ़्तर जानेलगी थि, गाने भि गुनगुनाती रहती थि, हंसने भि लगी थि औऱ यह सारे बदलाव काव्या कों बहुत अच्छे लगरहे थें.
काव्या केँ विद्यालय सें आने केँ बाद दोनों मम्मी बेटी घंटो एक् दूसरे सें गप्पे मारती.
पऱ आजफिन सें अपनी मम्मी कों परेशान देखकर काव्या केँ मन मे डर सां बैठ गय़ा कि कहीकोई प्रॉब्लम तौ नहि हैं.
वैसे प्रॉब्लम दूर करने कि उसकी स्वयं कि कोई उम्र नहि हैं, मात्र 12th मे पड़ने वाली काव्या भला अपनी मम्मी कि परेशानियों कों केसेदूर करेगी.
काव्या : "क्याँ हुआ माँ ?? आप् इतनी परेशान क्यूं होँ !! ''
रश्मि : "काव्या, वोँ। मुझे तुझसे एक् जरुरी बात करनी थि ''
काव्या : "हां माँ कहो नं "
रश्मि थोड़ी देर तक चुपरही औऱ फिन एकदम सें बोलीं : "मे विवाह कररही हु ''
रश्मि कि बात सुनकर थोड़ी देर तक तौ काव्या कों समझ नहि आया कि वोँ क्याँ करे
उसकी मम्मी विवाह कररही हैं, इस उम्र मे.
38 कि उम्र वैसे तोँ अधिक नहि होती पऱ उनकी एक् जवान बेटी हैं, ऐसा केसेकर सकती हैं वोँ.
पर्र फिन उसने अपनी मां केँ नजरिये सें सोचा, अभि तोँ उनके सामने पूरी जीवन पड़ी हैं, वोँ स्वयं एक् दिन पराये घऱचली जायेगी, फिन पीछे सें उसकी मम्मी कां ध्यान कौन रखेगा, इसबात कि चिंता तौ हमेशा उसे रहती थि औऱ जबआज उसका समाधान सामने आया हैं तोँ वोँ ऐसे क्यूं बिहेव कररही हैं.
उसने सारी नेगेटिव बातों कों अपनेसर सें झटक दिया औऱ चेहरे पर्र ख़ुशी केँ भाव लातेहुए बोलि : "वाव, यह तौ बहोत अच्छी बात हैं मम्मी, कौन हैं वोँ, मेरा मतलब, मेरे होने वाले बापू, किससे विवाह कररही होँ, कबकररही हौ, केसे डिसाईड किया आपनेयह सभी, बताओ न् ??''
काव्या केँ चेहरे पऱ आयी ख़ुशी औऱ इतने सारे प्रश्न औऱ उसकी उत्सुक्तता देखकर रश्मि नें सुकून कि सांसली, वोँ डररही थि कि उसकी बेटी क्याँ सोचेगी अपनी मम्मी केँ बारे मे, पर्र उसने समझदारी सें उसकीबात समझकर रश्मि केँ सर सें एक् बोझ उतार दिया थां।
रश्मि नें बताना शुरुआत किया
"देख काव्या, तूँ तोँ जानती हैं, तेरे बापू केँ जाने केँ बाद सें हमारे घऱ कि हालत कैसी थि, अगर मुझेउसी कम्पनी मे यहजॉब न् मिली होती तोँ शायद हमारी हालत इससे भि बुरी होती, तेरा विद्यालय, घऱ कां खर्च, कुछ भि ढंग सें नहि हौ पाता, औऱ यहसभी हुआ हैं कंपनी केँ मालिक समीरसर कि वजह सें, उन्होंने अगरसही वक़्त पर्र सहारा नहि दिया होता तोँ आजयहसभी नहि होता, औऱ पिछले हफ्ते हि उन्होंने मुझसे विवाह करने कि बातकही हैं, उनका तलाक हौ चूका हैं, औऱ वोँ अपनेघऱ पर्र अकेले रहते हैं, पऱ मैंने उन्हें साफ़कह दिया थां कि जब तक मेरी बेटी इस विवाह केँ लिए राजी नहि होगी, मे यह विवाह नहि करुँगी, पऱ आज तूने अपनी सहमति जताकर मेरेसर सें इतना बड़ाबोझ उतार दिया हैं, थेंक्स बेटा …''
औऱ फिन मम्मी काव्या सें लिपटकर अपनी भावनाओ पर्र काबू पातेहुए सुबकने लगी.
औऱ काव्या अपनी मम्मी कि बाते सुनने केँ बाद अपनी आँखे चौड़ी करके आपने वाले दिनों केँ ड्रीम्स बुनने लगी,
उसने भि देखा थां समीरसर कों, लगभग 45 कि उम्र थि उनकी, उन्हें हँसते हुएकभी नहि देखा थां काव्या नें, हमेशा सीरियस रहते थें, एक् बार उनकेघऱ मे हुईँ बर्थडे पार्टी मे काव्या अपनी मम्मी केँ संग उनके बंगले पऱ गई, थि, इतना आलिशान घऱ उसने केवल फिल्मो मे हि देखा थां, घऱ केँ पीछे कि तरफ स्विमिंग पूल भि थां, औऱ करीब-करीब दस कमरे थें पुरे बंगले मे, औऱ रहने वाला केवल एक्.
काव्या सें मिलते हुए भि समीरसर केँ चेहरे पर्र कोई ख़ुशी नहि थि, इसलिये पहलीनजर मे हि काव्या कों अपनी मां कां बॉस एक् खडूस इंसान लगा थां.
पऱ आजवही खडूस इंसान उसका पिता बननेजा रहा हैं, औऱ वोँ अपनी मां केँ संगउसी घऱ मे रहेगी जिसे देखकर उसकी आँखे चुंधिया गई, थि, वोँ भि नए-२ फेशन करेगी, शौपिंग पऱ जाया करेगी, अपनी अमीर सहेलियों कि तरह.
औऱ अमीर सहेलियों कां ख्याल आते हि उसकेमन मे सबसे पहले अपनी ख़ास सहेली श्वेता कां ध्यान आया, वोँ सबसे पहलेयह बातेउसे बताना चाहती थि
उसने अपनी मम्मी सें कहा : "मम्मी, मुझे बहोत ख़ुशी हैं कि आप् दूसरी विवाह कररही हैं, आप् उन्हें अभि फ़ोन करकेहाँ बोलदो, औऱ तब तक मे यहबात श्वेता कों बताकर आतीहु ''
इतना कहकर वोँ बिना अपने कपडे बदलेघऱ सें बाहर् कि तरफभाग गई,
श्वेता केँ पिताजी पुलिस मे एक् ऊँची पोस्ट पऱ थें औऱ वोँ पास कि हि एक् सोसाईटी मे बहुत बड़े फ्लैट मे रहते थें.
जैसे हि वोँ मार्ग तक पहुंची, सामने सें उसे विक्की आताहुआ दिखायी दिया, वोँ उसकीगली मे हि रहता थां औऱ आते-जाते हमेशा काव्या कों गन्दी नजरों सें देखकर भद्दी-२ बातें कहकरउसे छेड़ता थां
विक्की : "हायरे मेरी फुलझड़ी, कहाचली अपनी तोपें लेकर ''
उसका इशारा काव्या केँ नुकीले निप्पलस कि तरफ थां
काव्या वैसे तोँ उससेकभी बोलती नहि थि, पऱ आज उसनेउसे आनंद चखाने कां मनबना लिया : "जहाँजा रहीहु वहा पऱ नां तोँ ऐसी गंदगी होगी औऱ औऱ नाँ हि तेरे जैसे कुत्ते ''
हमेशा चुप रहने वाली काव्या केँ मुंह सें ऐसी बाते सुनकर विक्की भि हैरान रह गय़ा, वोँ कुछबोल पता इससे पहले हि काव्या वहा सें निकल गयीँ,
श्वेता केँ घऱ पहुंचकर वोँ उससे लिपट गयीँ, औऱ एक् हि सांस मे उसे पूरीबात बता डाली
श्वेता अपनी उम्र केँ हिसाब सें बहुत पहले जवान होँ चुकी थि, उसकी उम्र 18 साल थि, औऱ अपने नशीले औऱ जवान जिस्म कां इस्तेमाल कब औऱ कहा करना हैं, उसे अच्छी तरह सें पता थां, पर्र वोँ थि अब तक कुंवारी
श्वेता भि उसकीबात सुनकर बहुतखुश हुई औऱ फिन वोँ दोनों सहेलियां मिलकर बातें करनेलगी कि क्याँ - २ होगाआने वाले दिनों मे।
काव्या केँ जाने केँ बाद रश्मि आईने केँ सामने जाकर खड़ी होँ गई,, उसने अपने पुरेबदन कों निहारा, औऱ फिन नां जाने क्याँ सोचकर उसने अपनी साडी उतारनी शुरुआत कर दि, ब्लाउस मे फंसेहुए उसके मोटे मुम्मे बाहर् निकलने कि गुहार कर रहें थें, उसने उनकीबात मानते हुए अपने ब्लाउस केँ हुक भि खोलदिए औऱ उसकेबाद अपनी ब्रा कों भि उतार फेंका, अपने हि पसीने कि महक उसके नथुनो मे समा गई,, जोँ उसे हमेशा सें बहोत अच्छी लगती थि, इन्फेक्ट उसका पति भि उसकीमहक कां दीवाना थां, रश्मि कों अभि भि याद हैं कि उसे चोदते हुए वोँ उसके दोनों हाथों कों ऊपर करकेजब झटके मारता थां तौ अपना मुंह उसकीबगल मे डालकर वोँ जोर सें साँसे लेता थां, औऱ वोँ महक सूंघकर वोँ औऱ भि ज़्यादा उत्तेजना केँ संग उसकी चुदाई करता
वोँ सभी बातेयाद करते-२ उसकी बुर गीली होनेलगी
उसने अपना पेटीकोट भि उतार दिया, औऱ फिन कच्छी भि, पूरी नंगी हौ गई, वोँ एकदम सें
पूरीतरह सें नंगी होने केँ बाद वोँ घूम-घूमकर अपने पुरे जिस्म कां मुवायना करनेलगी औऱ फिन स्वयं सें हि बाते करनेलगी : "ओहो …कितनी मोटी हौ गयीँ, हु मे, पेट भि निकलआया हैं, ब्रैस्ट भि मोटे हौ गए हैं, लटक भि गए हैं, औऱ पीछे सें तौ, ओहो इन्हे अब जल्द हि कम करना होगा ''
सौतेला बाप complete - Garma Garam Kahani – New Episode
वोँ एक् ऐसी लड़की कि तरह बिहेव कररही थि जोँ विवाह सें पहले अपनावजन कम करने कि चिंता मे डूबी हुइ होँ, वैसेयह चिंता होना स्वाभाविक हि थां रश्मि केँ लिए, वोँ पहलेऐसी नहि थि, विवाह सें पहले भि औऱ बाद तक भि, जब तक उसका पति जिन्दा थां वोँ हमेशा स्लिम रहती थि, जिम भि जाती थि, उसने करीब-करीब दस सालों तक जिम मे जाकर एरोबिक औऱ कार्डिओ करके अपने पुरे जिस्म कों फ़िल्मी हेरोइनो कि तरह लचीला औऱ परफेक्ट बना लिया थां, पर्र पिछले पांच सालो नें उसकी जीवन कों पूरीतरह सें बदल दिया, काव्या कि देखभाल औऱ दफ़्तर केँ काम कि वजह सें उसे अपनेलिए वक्त हि नहि मिलता थां, पर्र अब जबकि उसकी दोबारा विवाह होने वाली हैं, उसने निश्चय कर लिया कि वोँ जल्द हि इस थुलथुलेपन सें छुटकारा पायेगी, जिम जायेगी, डाइटिंग करेगी, पर्र अपने जिस्म कों पहले जैसा बनाकर रहेगी.
आखिर समीरसर भि तोँ देखे कि वोँ चीज क्याँ हैं
समीरसर कां ध्यान आते हि उसकेदिल कि धड़कने एक् दम सें बढ़ने लगी, उसे उनकी गहरी नजरों कि याद आँ गई, जोँ उसनेकई बार महसूस कि थि, औऱ जिसे महसूस करके उसकारोम रोम खड़ा होँ जाता थां
उनके बारे मे याद करके अनायास हि उसकेहाथ अपनी बुर कि तरफसरक गए, वोँ बेड पर्र लेट गयीँ, औऱ अपनी आँखेबंद करके अपनी बुर कों सहलाने लगी
आज पांच सालोबाद उसने अपनी बुर कि खोजखबर ली थि, इसलिये उसकी बुर भि अपना गिला मुंह खोले अपनी मालकिन कां खुलेदिल सें स्वागत कररही थि
रश्मि नें अपनी बुर केँ तितली जैसे परों कों फैलाया औऱ अपनी एक् ऊँगली अंदर खिसका दि
औऱ सिसक पड़ी
''अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह समीर उम्म्म्म्म्म्म्म ''
लाल बुर केँ अंदर सें रसीला पानी बुरीतरह सें बहताहुआ बाहर् कि तरफ आँ रहा थां, जिसे रश्मि अपनी उँगलियों सें इकठ्ठा करके अपनी बुर केँ चेहरे पऱ मलरही थि
उसकेमन मे अपने आप् एक् काल्पनिक मूवी चलनेलगी
रश्मि अपनी दफ़्तर कि कुर्सी पऱ बैठी थि, पूरी नंगी, दफ़्तर मे कोई भि नहि थां
उसके टेबल कां फ़ोनबजा औऱ समीरसर नें उसे अंदर बुलाया
वोँ नंगीउठी, अपनानोट पेड उठाया औऱ उनके केबिन मे चली गयीँ,
वोँ अपनीसीट पर्र बैठा थां
वोँ भि पूरा नंगा
रश्मि सामने जाकर खड़ी होँ गयीँ,
समीर अपनीसीट सें उठा औऱ उसके पीछेआकर खड़ा हौ गय़ा, औऱ उसेकुछ डेटानोट करने केँ लिएकहा
वोँ टेबल पर्र झुकी औऱ नोट करनेलगी
तभी पीछे सें समीर नें अपना लन्ड उसकी बुर मे डाल दिया
उसने अपनी आँखेबंद कियेहुए अपनीतीन उँगलियाँ अपनी बुर केँ अंदरपेल दि
समीर बोलता जारहा थां
रश्मि लिखती जारही थि
औऱ झटके लगतेजा रहे थें
रश्मि केँ मुंह सें बसयही निकलरहा थां
''येस्स सर, अह्ह्हह्ह सर, उम्म्म्म सर, ओकेसर।.''
उसेबंद आँखों केँ संग अपनी उँगलियाँ समीर केँ लन्ड कि तरहफील होँ रही थि
फिन समीर सें उसे टेबल पऱ पीठ केँ बल लिटा दिया औरअपना लन्ड उसकी बुर मे पेलकर उसे बुरीतरह सें झटके देनेलगा
औऱ वोँ चीखरही थि, येस्स येस्स बोलरही थि
औऱ ऐसे हि येस्स सर करते-२ उसकी बुर सें कब पानी निकल गय़ा, उसे भि पता नहि चला
झड़ने केँ बादआयी खुमारी नें उसकेभरे हुएबदन कों निढाल सां कर दिया
औऱ वोँ एक् पतली सि चादर अपनेबदन पऱ डालकर वहीँलेट गई, औऱ याद करनेलगी अपने औऱ समीर केँ बारे मे जब सें उसने दफ़्तर ज्वाइन किया थां
शुरुआत केँ तीन सालो तक तौ उसेपता हि नहि थां कि दफ़्तर मे काम केँ अलावा भि कोई जीवन हैं, उसकाकाम केवल लैटर टाइप करना, कोटेशन बनाकर क्लाइंटस कों मेल करना, महीने केँ आखिर मे रिपोर्ट्स बनाना, बसयही थां
समीरसर सें उसका सामना कभी कभार हि होता थां, वोँ भि बस उसकेविश कां जवाब देकर निकल जाते थें
औऱ करीब-करीब 1 साल पहले समीरसर कि पर्सनल सेक्रेटरी नौकरी छोड़कर चली गई,, औऱ इतनी जल्दकोई नयी सेक्रेटरी नाँ मिल पाने कि वजह सें रश्मि कों हि टेम्परेरी तौर पऱ समीरसर कि सेक्रेटरी बना दिया गय़ा तब उसनेनोट किया कि काम केँ मामले मे वोँ कितने संजीदा किस्म केँ इंसान हैं, उन्हें अगरकोई याद न् कराये तौ वोँ दोपहर का खाना करना भि भूल जाते थें औऱ यहबात रश्मि कों सही नहि लगी, उसने सबसे पहलेसही वक़्त पर्र उन्हें लञ्च करने कि आदत डाली, समीर भि रश्मि केँ अपनेपन कों नरअंदाज नहि कर पाता थां औऱ सही वक्त पर्र दोपहर का खाना औऱ अपनी दवाइयां लेनेलग गय़ा
औऱ ऐसे हि काम करतेहुए कम्पनी मे एक् ऐसादिन आयाजब समीर नें सब कों यह बताया कि उनकी कंपनी नें पिछले साल केँ मुकाबले सत्तर प्रतिशत अधिक बिज़नेस किया हैं औऱ संग हि उन्हें कनाडा केँ लिए एक् बड़ा एक्सपोर्ट आर्डर भि मिला हैं, जिसकी वजह सें उनका बिज़नेस अगलेसाल तक डेडसौ प्रतिशत अधिक बढ़ेगा
औऱ तब रश्मि नें यह सुझाव दिया कि ऐसे मौके कों सेलेब्रेट करना तौ बनता हैं औऱ तब समीर नें अपने आलिशान बंगले मे एक् बर्थडे पार्टी रखी जहाँ काव्या नें पहलीबार समीर कों देखा थां
तब तक रश्मि केँ लिए समीर केँ मन मे एक् सॉफ्ट कार्नर तोँ बन हि चूका थां औऱ वोँ मन हि मनउसे अपना जीवनसाथी बनाने केँ ख्वाब देखने लगा, क्योंकि अब वोँ भि अपनीबोर सि लाइफ सें तंग आँ चूका थां, औऱ पिछले कुछ दिनों सें रश्मि कि तरफ सें मिलरही केअर कि वजह सें समीर कों पूरा विश्वास हौ गय़ा थां कि वोँ उसकी जीवन औऱ घऱ कों अच्छी तरह सें सम्भाल सकती हैं
पऱ काव्या सें मिलने केँ बादउसे यह एहसास हुआ कि रश्मि कि टीनेजर लड़की हैं जौ ऐसाकभी नहि चाहेगी कि उसकी मम्मी इस उम्र मे विवाह करे औऱ इसलिये उससमय काव्या सें सीधे मुंहबात भि नहि कि थि समीर नें
धीरे-धीरे-२ समय गुजरने लगा, समीर कि आँखों मे छुपे प्रेम कों रश्मि नें भि कईबार महसूस किया थां, पऱ अपनी औकात औऱ समाज मे उसकी स्थान उसे भि पता थि,
समीर कां एक् वकीलयार थां, लोकेश दत्त, जिसके संग वोँ अपनी सारी बाते शेयर करता थां
औऱ ऐसे हि एक् दिनजब दोनों साथी बैठेहुए जाम छलकारहे थें तौ समीर नें अपनेदिल कि बातउसे बता दि
लोकेश : "दोस्त समीर, यह तोँ तूने बहोत अच्छी बात सोची हैं, तूँ जल्द सें जल्दइस मामले कों निपटा डाल''
समीर : "पर्र दोस्त। एक् प्रॉब्लम हैं, उसकी एक् टीनेजर लड़की हैं, औऱ मुझेडर हैं कि कहीं उसकेडर सें रश्मि मुझसे विवाह करने केँ लिएमना नं करदे, याँ फिन वोँ लड़की अपनी मां कों विवाह करने कि परमिशन नां दे ''
लोकेश : "दोस्त, तुँ भि कैसी दकियानुसी बातों कों लेकर बैठा हैं, तुँ एक् बार रश्मि सें बात तोँ करकेदेख, अपनी बेटी कों मनाना उसकाकाम हैं, औऱ मुझे विश्वास हैं कि अपनी बेटी केँ सुनहरे भविष्य केँ लिए वोँ मान जायेगी औऱ अपनी बेटी कों भि मना लेगी ''
औऱ इसतरह सें अपने मित्र कि बात सुनकर समीर नें हिम्मत करके अपनेदिल कि बात रश्मि कों कह दि
रश्मि केँ लिएयह बात एक् शॉक जैसी हि थि, उसने समीर कि आँखों मे अपनेलिए लगाव तौ देखा थां, पऱ वोँ लगाव इतना होगा कि वोँ उसे अपना जीवनसाथी बनाने केँ लिए कहेगा, उसने सोचा भि नहि थां
पऱ संग हि समीर नें यह भि कहा कि काव्या कि रजामंदी केँ बिनाकोई निर्णय मत लेना, औऱ वैसे भि रश्मि ऐसा करना नहि चाहती थि
वोँ एक् सही मौके कि तलाश करनेलगी, जब वोँ अपनी बेटी कों वोँ सच्चाई बताये जिसके बाद दोनों कि जीवन पूरीतरह सें बदल जाने वाली थि
औऱ आज अपनी बेटी कां संग पाकर उसने सुकून कि सांसली थि
उसने अपनाफोन निकला औऱ वैसे हि नंगी लेटेहुए समीर कों फ़ोन मिलाया
समीर : "हेल्लो रश्मि, इस वक्त केसे फ़ोन किया, सभीठीक तौ हैं न् ''
रश्मि कि समझ मे नहि आँ रहा थां कि वोँ केसे बताये
वोँ मंदमंद मुस्कुराती हुईँ हूं हाँ करतीरही बस
औऱ फिन आखिर मे उसनेबोल हि दिया : "मैंने काव्या सें बात कि थि आज ''
समीर : "अच्छा, क्याँ,,, क्याँ बोलि वोँ ??"
उसकी धड़कने बड़ गई,
रश्मि : "वोँ, वोँ मान गई, औऱ बहुतखुश भि थि वोँ ''
रश्मि कि बात सुनकर समीर नें भि सुकून कि सांसली
उसे अपनीबंद आँखों केँ पीछे रश्मि अपनेघऱ मे दुल्हन केँ लिबास मे नजरआने लगी
उसने जल्द हि विवाह कि फॉर्मेलिटी पूरी करने कि बात करतेहुए फ़ोनरख दिया, वैसे भि विवाह कोर्ट मे होनी थि, इसलिये ज़्यादा तामझाम कि जरुरत हि नहि थि
उसने लोकेश कों फ़ोन करके सारे बंदोबस्त करने केँ लिएकहा
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जल्द हि विवाह कां दिन भि आँ गय़ा, रश्मि नें तयकर लिया थां कि वोँ अपनेइस घऱ कों कभी बेचेगी नहि, इसलिये उसने अपने एक् कज़न कों वोँ घऱ रहने केँ लिएदे दिया, क्योंकि वोँ कहीं किराये पर्र रहरहा थां, उसने सोचाइस तरह सें घऱ कि देखभाल भि होती रहेगी औऱ उसके कज़न कां किराया भि बच जाएगा.
विवाह कोर्ट मे हुई, पर्र काव्या तोँ उसदिन भि ऐसेसजी हुई थि जैसेसच मे किसी विवाह मे आयी हौ, उसने लहंगा चोली पहनाहुआ थां, जिसमे उसका सपाटपेट साफ़दिख रहा थां, वोँ आज बहोत खुश थि, आज उसकी मां कि जीवन बदलने वाली थि, वोँ भि अपनी मां केँ संगनए घऱ मे जाने वाली थि.
विवाह कि रस्मे समाप्त होने केँ बादसब घऱ कि तरफचल दिए, रास्ते सें काव्या नें श्वेता कों फ़ोनकर दिया कि वोँ जल्द पहुंचे, साम कों दोनों नें एक् संग सजने-सँवरने कां प्रोग्राम बनाया थां.
समीर नें साम कों अपने आलिशान बंगले मे रिसेप्शन बर्थडे पार्टी रखी थि, जिसमे बहुत मेहमान आयेहुए थें, पुरेघऱ मे चहलपहल थि.
औऱ ऊपर काव्य अपने कमरे मे बैठकर श्वेता सें बाते भि कररही थि.
दोनों नें फेसपेक लगारखा थां.
श्वेता : "दोस्त तेरी तोँ ऐश होँ गई,, इतना सेक्सी रूम हैं तेरा, सुपर्ब ''
काव्या : " थेंक्स दोस्त, मुझे तोँ स्वयं भि विश्वास नहि हौ रहा हैं कि यह मेरारूम हैं, मेरा अपना पर्सनल रूम ''
औऱ वोँ रूमसच मे शानदार थां, एलईडी, बालकनी, अटैच बाथरूम, कंप्यूटर औऱ संग हि एक् बड़ी सि अलमारी जिसमे समीर नें पहले सें हि काव्या केँ लिएहर तरह केँ कपडेभर दिए थें.
वोँ बहोत खुश थि.
श्वेता : "दोस्त, तेरे पिताजी नें तेरेलिए इतनाकुछ किया हैं, तेरी भि कुछ करना चाहिए उनकेलिए ''
काव्या : "मुझे। क्याँ ???"
श्वेता : "आज उनकी सुहागरात हैं, तेरी मां केँ संग, क्यूं न् हम् दोनों मिलकर उनकारूम डेकोरेट करे ''
काव्या नें तोँ यहबात सोची भि नहि थि, औऱ कोई भि ऐसा नहि थां जौ यहकाम करता, उन्हें हि यह करना होगा.
दोनों नें तय किया कि उनके कमरे कों गुलाब केँ फूलो सें सजा दियाजाए औऱ इसकेलिए श्वेता नें अपने भइया नितिन कों फ़ोन किया.
नितिन केँ बारे मे बतादू, वोँ श्वेता सें दोसाल बड़ा हैं औऱ कॉलेज जाता हैं, औऱ मन हि मन वोँ काव्या पर्र मरता भि हैं.
जैसे हि श्वेता नें नितिन कों सारीबात बतायी, वोँ झट सें मान गय़ा, वोँ काव्या कों देखने कां एक् भि अवसर छोड़ना नहि चाहता थां.
नितिन मार्किट सें जाकर एक् फ्लावर शॉप वाले कों लेँ आया औऱ उसने अपनेदो साथियो केँ संगआकर पूरारूम गुलाब सें सजा दिया.
नितिन कि नजरेरह रहकर काव्या कों देखरही थि, उसकी नाभि उसनेआज पहलीबार देखि थि, अंदर कि तरफ धंसी हुइ, वोँ मन हि मनउसे चूसने कि सोच हि रहा थां कि श्वेता बोलि : "थेंक्स भइया, तुम्हारी वजह सें यहसभी आसानी सें होँ सका ''
किसी औऱ चीज कि हैं ''
काव्या : "किसचीज कि ''
श्वेता : "सुहागरात कि, आज इतने सालो केँ बादइन दोनों कों कोई मिलेगा, धमाल होगाआज तोँ इनके कमरे मे''
अपनी मां केँ बारे मे ऐसी बाते सुनकर काव्या शरमा गई,, उसकेमन मे चलचित्र उभरने लगे, जिसमे उसकी मम्मी औऱ समीर बापू नंगे एक् दूसरे केँ बदन सें लिपटे हुए हें औऱ प्रेम कररहे हें.
उसकी आँखों मे गुलाबीपन उतरआया.
श्वेता नें उसे शर्माते हुए देखा औऱ धीरे-धीरे सें उसकेकान मे बोलीं : "मुझेपता हैं तूँ क्याँ सोचरही हैं ''
काव्या नें चोंककर उसकी आँखों मे देखा, औऱ उसकी शरारती नजरों मे छुपीबात कों वोँ समझ गई, क्योंकि वोँ जानती थि कि श्वेता इन मामलो मे कितनी तेज हैं, उसनेफिन सें अपनी नजरें झुकाली.
श्वेता धीरे-धीरे सें बोलीं : "एक् आईडिया आया हैं, अगर तुँ संगदे तोँ मज़ा आएगा "
काव्या : "क्याँ ??"
श्वेता : "इन दोनों कि सुहागरात देखते हें, छुपकर, बोल क्याँ कहती हैं ''
काव्या कि आँखे आश्चर्य सें फ़ैल गई,, उसने सोचा भि नहि थां कि श्वेता ऐसाकुछ कहेगी.
श्वेता आगे बोलीं : "देख, अभि जश्न सें सभीलोग चले जायेंगे, कोई रिश्तेदार रुकने वाला नहि हैं रात कों, पुरेघऱ मे मात्र तेरे मां पिताजी औऱ तूँ रहेगी, मे नितिन कों बोल दूंगी कि मे रात कों यहीं रुकूँगी, औऱ फिनरात कों हम् दोनों मिलकर दोनों कि लाइव सुहागरात देखेंगे, वॉव, कितना मज़ा आएगा, हमें भि कुछ सीखने कों मिलेगा, हैं न् ''
काव्या चुपचाप उसकी बाते सुनती रही.
श्वेता आगे बोलि : "औऱ वैसे भि, अपनी मां कि सुहागरात देखने कां मौका मिलता भि किसे हैं, युआर लक्की वन''
काव्या कि हंसी निकल गयीँ, औऱ उसने हँसते हुए अपनासर हिलाकर उसे अपनी सहमति दे डाली.
वैसे तोँ उसने इतनी सि देर मे बहुतकुछ सोच लिया थां कि यहसभी गलत हैं, अपनी मम्मी कों ऐसे सेक्स करतेहुए देख्ना गलत होगा, समीरसर भि अब उसके बापू हैं, अपने बापू कों नंगा देख्ना कितना गलत हैं यह वोँ अच्छी तरह सें जानती थि, पऱ उसकी उम्र हि ऐसी थि कि यहसभी गलत बातो कों दरकिनार करतेहुए उसने श्वेता कि बातमान ली.
श्वेता नें नितिन कों वापिस घऱभेज दिया औऱ माँ कों भि फ़ोन करकेबता दिया कि आज वोँ वही रुकेगी.
धीरे-धीरे-२ सब मेहमान चलेगए.
दोनों सहेलिया समीर केँ बेडरूम मे छुपने कि स्थान देखरही थि.
बंगले मे सब बेडरूम फर्स्ट फ्लोर पऱ थें औऱ सब बेडरूम कि बड़ी सि बालकनी एक् दूसरे सें मिली हुई थि, बसबीच मे छोटी सि दिवार थि, समीर केँ बेडरूम औऱ काव्या केँ बेडरूम केँ बीच एक् स्टोर रूम भि थां, जिसके पीछे भि एक् बालकनी थि.
दोनों सहेलियो नें डिसाईड किया कि काव्या केँ रूम कि बालकनी सें टापते हुए वोँ उसकी मम्मी केँ बेडरूम तक जायेंगे औऱ वहा सें छुपकर अंदर कां नजारा देख्नेगे.
बाहर् सें अंदर देखने केँ लिए उन्होंने एक् कोने कां पर्दा थोडा सां खिसका करऊपर कर दिया, वैसे भि बालकनी मे बहुत अँधेरा थां, वहाकोई छुपकर बैठजाए तौ दिखायी हि नहि देगा
रात कां 1 बजरहा थां, सबथककर अपने-२ कमरे कि तरफ जानेलगे.
अपने कमरे केँ अंदर जातेहुए काव्या नें रश्मि कों देखा तौ उसने अपना अंगूठा ऊपर करतेहुए कहा : "आलद बेस्ट फॉरयूर न्यू लाईफ ''
औऱ फिन वोँ अपने कमरे कि तरफचली गई,, जहा श्वेता बैठी उसका इन्तजार कररही थि.
औऱ अपने बेडरूम मे जाते हि वहा कि सजावट देखकर रश्मि औऱ समीर आश्चर्यचकित रहगए, वोँ समझगए कि यहसभी काव्या नें किया हैं.
समीर नें दरवाजा बंदकर दिया औऱ रश्मि कों अपनेपास बुलाया औऱ उसे अपनी बाहों मे लपेटकर जोर सें हग किया.
रश्मि कां दिल धड़करहा थां, आजयह पहला मौका थां जब समीरउसे अपनी बाहों मे लेँ रहा थां.
इसीबीच काव्या औऱ रश्मि बालकनी फांद-२ करवहा तक पहुँच गई, थि, औऱ बाहर् छुपकर सारा नजारा देखरही थि.
समीर नें अपनी बाहे रश्मि केँ चारों तरफ लपेट दि औऱ झुककर उसकी गर्दन पर्र अपने होंठरख दिए रश्मि सिसकउठी.
समीर केँ हाथ उसके कुलहो पऱ फिसलरहे थें, उसने साडी कां पल्लू नीचे गिरा दिया, औऱ कमर मे फसी हुई साडीखोल कर नीचे गिरा दि.
उसके मोटे-२ मुम्मे बड़े हि दिलकश लगरहे थें समीर कों, उसने अपने हाथों कों उसके उरोजों केँ नीचेरखा औऱ धीरे-धीरे सें बोला : "इन्ही दशहरी आमों नें मुझे तुम्हारा दीवाना बनाया हैं ''
उसकीबात सुनकर रश्मि शर्माती हुईँ समीर केँ सीने सें लिपट गई,.
समीर नें एकदम सें रश्मि केँ चेहरे कों पकड़ा औऱ अपने होंठ उसके होंठों पऱ रखकर उन्हें बुरीतरह सें चूसने लगा.
समीर केँ हाथ रश्मि केँ जिस्म पऱ फिसलरहे थें, उसके मुम्मो कों मसलरहे थें,
उसने रश्मि कों चूमते-२ हि उसके ब्लाउस केँ हुकखोल दिए, औऱ उसकी ब्रा केँ कप नीचे खिसका कर उसके स्तनों कों नंगाकर दिया.
औऱ फिन अपना चेहरा नीचे करतेहुए उसने एक्-२ करतेहुए रश्मि केँ नन्हे बच्चो कों बेतहाशा प्रेम किया.
उसकेहाथ रश्मि केँ कूल्हों कों मसलरहे थें, उसके पेटीकोट कों ऊपर करते-२ उसेकमर तक लेँ आये, औऱ एक् हि झटके सें समीर नें रश्मि कि पेंटी कों दोनों तरफ सें खींचकर उसकी बुर औऱ गांड केँ बीचऐसे फंसा दिया जैसेकोई पतली सि रस्सी, अपनी दरारों पर्र पेंटी कां दबाव पड़ते हि रश्मि प्यास उठी औऱ अपने पंजों पर्र खड़ी होकर सीत्कार उठी.
''अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स उम्म्म्म ''
पर्र समीर सें अब सब्र नहि हौ रहा थां, इतने सालो तक अपनी पत्नि सें अलग रहने केँ बाद उसनेआज तक बाहर् मुंह नहि मारा थां, औऱ आज उससे सब्र नहि हौ रहा थां.
रश्मि कां भि करीब-करीब यहीहाल थां, उसेआज करीब पांचसाल बाद किसी मर्द नें इसतरह सें पकड़ा थां, वोँ अपनी बुर वाले हिस्से कों उसके लन्ड पर्र रगड़ती जारही थि, औऱ उसके मुंह सें अजीब-२ सि आवाजें भि निकलरही थि.
औऱ यहसभी नजारा बाहर् छुपी हुइ दो जवान लड़कियां अपना मुंह फाड़े देखरही थि.
श्वेता तौ रश्मि केँ मुम्मे देखकर बुदबुदा उठी : "वाव, क्याँ ब्रेस्ट हैं तेरी मां कि, उम्म्म्म्म्म्म्म ''
उसकामन कररहा थां कि अंदरजाए औऱ उन्हें चूस डाले.
समीर नें एक् हि झटके मे रश्मि कां पेटीकोट भि नीचे गिरा दिया, औऱ फिन नीचे बैठते हुए उसकी पेंटी भि नीचे तक उतार दि.
अब वोँ रश्मि कि बुर केँ आगे घुटनो केँ बल बैठाहुआ थां, उसकी चकनी बुर कों देखकर उसके मुंह मे पानी आँ गय़ा औऱ उसने अपना मुंहवहा लगा दिया.
रश्मि कां पूराबदन थरथरा उठा।
उसके पति नें भि आज तक उसकी बुर नहि चूसी थि, यह पहला मौका थां जब उसकी बुर कों किसी केँ होंठों नें छुआ थां
उसने अपनी आँखेबंद करली औऱ अपना एक् पांवउठा कर समीर केँ कंधे केँ पीछेकर दिया, औऱ अपनी खुली हुईँ बुर केँ अंदर समीर कि जीभ कों पूरीतरह सें महसूस करनेलगी.
काव्या कों ऐसा लगनेलगा कि उसकी बुर केँ अंदर चींटियाँ रेंगरही हैं, उसनेहाथ फेरा तौ पाया कि वहा सें कुछ गीला-२ निकलरहा हैं.
औऱ यहीहाल श्वेता कां भि थां, उसने तोँ अपने पायजामे केँ अंदरहाथ डालकर अपनी बुर सहलानी भि शुरुआत कर दि थि.
रश्मि सें अब खड़ा नहि हुआजा रहा थां, वोँ पीछे कि तरफ होती गई, औऱ बिस्तर पऱ जाकरपीठ केँ बललेट गई,, गुलाब कि पंखुड़ियों सें सजीउस सेज पर्र एक् तूफ़ान सां आँ गय़ा जब समीर नें रश्मि कि दोनों टांगो कों फेलाकर अपनीजीभ कों किसी लन्ड कि तरह उसकी बुर केँ अंदर उतार दिया औऱ बुरीतरह सें ऊपर नीचे होकरउसे चोदने लगा.
बालकोनी मे छुपी हुईँ श्वेता औऱ काव्या कां बुराहाल थां, काव्या तोँ नीचे बैठी थि, औऱ श्वेता उसकीपीठ केँ पीछे खड़ी थि, श्वेता नें नां जानेकब अपने पायजामे कों नीचे खिसका कर अपनी बुर कों नंगाकर लिया थां, इसबात कां काव्या कों भि अंदाजा नहि थां.
अंदर कां माहोल औऱ भि गरम हौ गय़ा जब समीर नें उठकर अपनाकोट पेंट उतार फेंका औऱ अपने लन्ड कों निकाल कर रश्मि केँ सामने लहरा दिया
औऱ उस लन्ड-भसंद कों देखकर रश्मि केँ संग-२ काव्या औऱ श्वेता कि आँखे भि फट गई,.
करीब-करीब आठइंच कां लन्ड थां समीर कां औऱ तीनइंच मोटा.
रश्मि नें आज तक लन्ड नहि चूसा थां पर्र अपनी बुर चुस्वा करआजउसे इतना मज़ाआया थां कि उसनेझट सें उसके लन्ड कों पकड़ा औऱ अपने मुंह मे लेकर जोरों सें चूसने लगी.
समीर केँ मुंह सें एक् लम्बी आआअह निकल गयीँ,।
थोड़ी देर तक अपना लन्ड चुस्वाने केँ बाद समीर असलीकाम पर्र आँ गय़ा, उसने अपने बाकी केँ बचे खुचे कपडे उतार फेंके औऱ रश्मि कों भि पूरा नंगाकर दिया.
औऱ एक् हि झटके मे उसकी बुर केँ अंदर अपना लन्ड पेलकर उसे चोदने लगा। उसके जूसी औऱ थरथराते हुए चूतड़ अपनी जांघ पर्र महसूस करतेहुए समीर कि मस्ती कि कोई सीमा हि नहि रही
दोनों कों नंगा देखकर एक् समय केँ लिए तौ काव्या भि शरमा गयीँ,.
अपनी मां कों हालाँकि उसनेकई बार नहाते हुए याँ कपडे बदलते हुए देखा थां, पर्र इसतरह सें नहि, पूरी नंगी होकर वोँ किसतरह सें बिहेव कररही थि
औऱ श्वेता नें तौ सोचा भि नहि थां कि सेक्स करतेहुए एक् दूसरे केँ संग इतनेमजे आते हें, उसनेआज तक केवल अपनेबी ऍफ़ केँ संग शोकिया तौर पर्र किस्स वगेरह हि कि थि, अपनी ब्रैस्ट औऱ बुर पर्र तोँ उसने किसी कों हाथ भि नहि लगाने दिया थां
पर्र आज इतनीतरह सें सेक्स कि कार्यवाही देखकर उसकेमन कि भि कई शंकाए मिट सि गयीँ, थि.
समीर कां लन्ड अंदर - बाहर् होताजा रहा थां औऱ अचानक रश्मि कों अपने अंदर एक् गुबार बनताहुआ महसूस होनेलगा औऱ अगले हि समय वोँ गुबार फूट गय़ा औऱ वोँ बिलबिलाती हुइ सि झड़ने लगी.
''अययययीईईईईईई अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ओह्हह्हह्हह्हह ''
औऱ उसने अपनी बुर केँ मुहाने पर्र चिपचिपा सां द्रव्य छोड़ दिया, उसकी चिपचिपाहट कों अपने लन्ड पर्र महसूस करके समीर नें भि अंतिम मौकाआते हि अपना लन्ड बाहर् निकाला औऱ पिचकारी बनाकर उससे रश्मि केँ बदन कों पूरारंग दिया
औऱ उसके मुम्मों केँ गद्दे पर्र गिरकर गहरी साँसे लेनेलगा.
काव्या औऱ श्वेता वहा सें निकलकर अपने कमरे मे आँ गए.
पर्र समीर कों पता थां कि अभि तौ यह शुरुवात हैं, इतने सालो सें जमा कि हुईँ एनेर्जी सें कम सें कमतीन - चारबार चोदना थां उसेआज रात रश्मि कों.
काव्या केँ कमरे मे पहुँचते हि श्वेता नें अपना पायजामा औऱ पेंटी उतार फेंकी औऱ अपनीबीच वाली ऊँगली अपनी बुर केँ अंदरडाल करजोर - २ सें हिलाने लगी
काव्या आँखे फाड़े उसे देखने लगी
दोनों नें पहले भि कईबार मास्टरबेट किया थां औऱ एक् दूसरे कों बताया भि थां कि केसे औऱ किसे सोचकर वोँ सभी किया, पऱ एक् दूसरे केँ सामने उन्होंने कभी नहि किया थां, यह पहला मौका थां जब काव्या नें श्वेता कों ऐसे देखा थां, नीचे सें नंगी.
औऱ उसकी सुनहरी बुर कों देखकर वोँ मंत्रमुग्ध सि हौ गयीँ,, बिलकुल सफाचट बुर, बिना बालो केँ उसकी बुर ऐसेलग रही थि मानो चेहरे केँ होंठ चिपके होँ वहा, मुलायम औऱ मोटे.
वोँ बोलीं : "श्वेता, कुछ लज्जा हैं याँ नहि, मेरे सामने हि शुरुआत होँ गई, तूँ ''
श्वेता अपनी ऊँगली अंदर करतेहुए बड़ी मुश्किल सें बोलीं : "दोस्त, मुझसे तौ वहा सब्र हि नहि होँ रहा थां, मास्टरबेट करतेहुए मेरे मुंह सें चीखे निकलती हैं वर्ना वहीँ शुरुआत हौ जाती मे ''
इतना कहतेहुए उसने एक् जोरदार चीख मारी
'''आआयययययययययीईईईईई स्स्स्स्स्स्स्स्स ''
काव्या : "धीरे-धीरे चीख पागल, तुँ तोँ मरवाएगी मुझे, मां बापू नें अगरसुन लिया तोँ क्याँ सोचेंगे ''
तभी उनके कमरे सें भि मां कि चीखआयी.
''अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह गोड ……''
औऱ वोँ भि बहुततेज.
श्वेता (मुस्कुराते हुए) : "यहबात जब वोँ नहि सोचरहे तोँ तुम्हारी तरफ क्याँ जरुरत हैं ''
उसने अपनी स्पीड औऱ तेजकर दि.
सौतेला बाप complete - Garma Garam Kahani - Aage kya hua? Next part padhiye
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