Diwali ka Jua - 3 (Incest + Adultery) - Diwali Ki Raat – New Episode
रश्मी नें सिसककर उसकी आँखों मे देखा.जैसे कहना चाहती हौ कि 'यही सें तौ शुरुवात होगी बाकी केँ खेल कि.इसके बाद तोँ रुक नहीं पाऊँगी.'
पर्र वोँ कुछबोल नाँ सकी.
औऱ मोनू केँ हाथ धीरे-धीरे-2 सरकते हुए अंदर जाने लगे.औऱ जैसे हि उसकीबीच वाली उंगली नें रश्मी केँ मम्मों कां निचला भागछुआ, दोनो केँ जिस्म सिहर उठे.रश्मी नें अपने होंठ अपने दांतो तलेदबा लिए.ताकि उसकी सिसकी नां निकल जाए.औऱ मोनू केँ मुँह सें जौ साँसे निकलरही थि उससे रश्मी केँ बाल पीछे कि तरफ उड़ते चलेजा रहे थें.
मोनू नें अपनी उंगलियों कों रश्मी केँ पर्वतों केँ उपर चढ़ाना शुरुआत कर दिया.टी शर्ट काफ़ी ढीली थि.इसलिये उसकेहाथ आहिस्ता उसके मुममे कि चिकनी दीवारों सें होतेहुए मैन पॉइंट तक पहुँच गये.औऱ मोनू नें धड़कते दिल सें अपने अंगूठे औऱ बीच वाली उंगली केँ बीच उसकी मूँगफली कों लेकर ज़ोर सें दबा दिया.
''आहह-आहह। मोनू। धीरेएsssssssssssssssssss.''
उसकेबाद तोँ मोनू सें सब्र हि नहीं हुआ.उसने रश्मी केँ मुम्मे कों अपनी पूरी हथेली मे भरा औऱ ज़ोर-2 सें दबाने लगा.ऐसा नर्म एहसास तोँ उसनेआज तक नहीं लिया थां.औऱ उसके निप्पल्स यानी मूँगफलियाँ तौ सच मे बड़ी हि करारी थि.उन्हे वोँ जितना ज़ोर सें दबाता
वोँ औऱ भि ज्यादा उभरकर बाहर् निकल आती.औऱ निप्पल केँ चारों तरफ केँ घेरे मे छोटे-2 दाने जोँ थें.उन्हे भि मोनू अपनी उंगलियों सें रगड़रहा थां.
मोनू नें रश्मी कों पीछे कि तरफ करतेहुए फिन सें सीधा बिठा दिया.औऱ अब उसकी निकली हुईँ छातियों कों वोँ टी शर्ट केँ उपर सें हि दबाने लगा.
दोनो हाथों सें दोनो बॉल्स कों मसलरहा थां वोँ.रश्मी तौ पागल सि हुईँ जारही थि.किसी मर्द कां पहला स्पर्श जौ थां उसके शरीर पर्र इसतरह सें.उसने जोँ भि आज तक सोचाहुआ थां, वोँ सभी महसूस कररही थि अपने जिस्म पर्र.
मोनू नें अपनी उंगलियाँ सीधा लेजाकर उसके निप्पल्स पर्र रख दि.
रश्मी नें एक् गहरी साँस ली.औऱ उसकी दोनो छातियाँ थोड़ी औऱ बाहर् निकलआई.
मोनू नें आदेश सां दिया : "उतारो अपनीटी शर्ट.''
रश्मी कां सीनाउपर नीचे होनेलगा यह सुनकर.पऱ नाँ जाने क्याँ चमत्कार थां मोनू कि आवाज़ मे.उसके दोनो हाथों नें टी शर्ट केँ निचले हिस्से कों पकड़ा औऱ धीरे-धीरे-2 उपर सरकाना शुरुआत कर दिया.
ज़ीरो वॉट कां हल्का बल्बजल रहा थां ठीक मोनू केँ सिर केँ पीछे.औऱ हल्की मिल्की रोशनी रश्मी केँ बदन पऱ पड़रही थि.जोँ धीरे-धीरे-2 नंगा होँ रहा थां.
उसका सपाटपेट जैसे हि खत्महुआ, उसके उभारों नें उजागर होना शुरुआत कर दिया.औऱ धीरे-धीरे-2 करतेहुए एक् केँ बाद एक् दोनो पक्क कि आवाज़ करतेहुए उछलकर बाहर् निकल आए.औऱ रश्मी नें उसटी शर्ट कों सिर सें घुमाकर बाहर् निकाल दिया.औऱ अब वोँ बैठी थि अपने छोटे भइया मोनू केँ सामने टॉपलेस होकर.अपनी गोल-मटोल छातियाँ लेकर.मोनू नें अपनेहाथ ऊपर किये औऱ उन्हें दबाने लगा
मोनू उसकी सुंदरता कों बड़ीदेर तक निहारता रहा.औऱ फिन उसने एक् औऱ आदेश दिया अपनी बड़ी बेहन कों.
''खिलाओ.मुझे अबयह मूँगफलियाँ.''
उसका इशारा लालरंग केँ निप्पल्स तरफ थां, जौ भुनी हुईँ मूंगफली जैसालग रहा थां
रश्मी धीरे-धीरे सें आगे खिसकी.अपनी एक् ब्रेस्ट कों अपने हाथों मे पकड़ा औऱ मोनू केँ चेहरे केँ उपरझुक कर अपने निप्पल सें उसके होंठों पर्र दस्तक दि.
पर्र वोँ अपना मुँहबंद किए लेटारहा.
रश्मी नें अपने पैने निप्पल सें उसके होंठों कों रगड़ना शुरुआत कर दिया.पऱ वोँ तौ जैसेभाव खारहा थां.मजा भि उसको लेना थां औऱ भाव भि स्वयं हि खानेलगा.
पऱ इतनाकुछ होने केँ बादअब रश्मी पूरीतरह सें गरम हौ चुकी थि.अबकोई फ़र्क नहीं पड़ता थां कि वोँ पहलकरे याँ मोनू.बस दोनो किसी भि तरह सें पूरामजा लेना चाहते थें.
मोनू नें जब अपना मुँह नहीं खोला तौ रश्मी नें दूसरी ब्रेस्ट कों पकड़ा औऱ उसके निप्पल सें मोनू केँ होंठों कों रगड़ा.औऱ इसबार उसने थोडा ज़ोर लगाया तोँ उसका खड़ाहुआ निप्पल उसके होंठों कि दीवार भेदता हुआ अंदर दाखिल हौ गय़ा.पर्र उसने अपने दाँतआपस मे भींचरखे थें
रश्मी नें सिसककर कहा : "खोलो अब.वरना यह मूँगफलियाँ सील जाएँगी.इनका करारापन चला जाएगा.''
मोनू अपनी बेहन कि बात एक् हि बार मे मान गय़ा.औऱ जैसे हि उसने अपना मुँह खोला, रश्मी नें पूराभार उसकेउपर डालते हुए अपना पूरा कां पूरा मुम्मा उसके मुँह मे ठूस दिया.मूँगफली केँ संग-2 प्लेट भि अंदर घुसेड दि.मोनू कां मुँह काफ़ी बड़ा थां.उसने बड़ी हि कुशलता सें उसके पूरे मुम्मे कों अपने मुँह मे एडजस्ट किया औऱ उसे ज़ोर-2 सें चूसना शुरुआत कर दिया.जैसे कोईदूध पीता हैं
औऱ अपने भइया केँ दूध निकालने कि इसकला सें वोँ निहाल सि होकर सिसकारियाँ मारने लगी.
''आआययययययययययययययीीईईईईईईईईईई.,। उम्म्म्ममममममम। काटो भि इन्हे। दर्द सां होता हैं इनमें.''
रश्मी नें डॉक्टर मोनू कों अपनी तकलीफ़ बताई, औऱ वोँ उसका इलाज करने मे जुट गय़ा
मोनू उन्हे अपने दांतो सें चुभलाने भि लगा.जीभ सें उसे सहलाता औऱ दाँत सें काटकर निशान बना देता.एक्-2 करके उसने दोनो मुम्मो कों बुरीतरह सें चूस्कर लालकर दिया.
स्थान -2 उसके दांतो केँ निशान चमकने लगे.रश्मी नें कुछदेर केँ लिए उन्हे मोनू केँ हमले सें बचाया औऱ बाहर् निकाल लिया.औऱ फिन अपने गीले होंठों केँ संग मोनू पर्र हमलाकर दिया.
जैसे हि मोनू नें रश्मी केँ होंठों कों टच किया.उसका मीठापन किसी शरबत कि तरह मोनू केँ गले सें नीचे उतरता चला गय़ा.औऱ दोनो भूखे जानवरों कि तरह एक् दूसरे कों ज़ोर-2 सें स्मूच करनेलगे.
मोनू तोँ अक्सर यहसभी कर हि लिया करता थां.पऱ आज रश्मी कां पहला अवसर थां.अपने मम्मों औऱ होंठ चुसवाने कां.इसलिये वोँ स्वयं हि लालायित सि होकरयह काम करवारही थि औऱ मज़े भि लें रही थि.वोँ जानती तौ थि कि इसकाम मे मजाआता होगा.पऱ इतनाआता हैं, यहआजउसे अपने मुम्मे औऱ होंठ चुसवाने केँ बाद हि पता चला.एक् अलग हि दुनिया मे पहुँच गयीँ, थि वोँ.दुनिया कि कोई भि फीलिंग इनसे बढ़कर नहीं होँ सकती थि.ऐसा एहसास मिलरहा थां उसेआज अपनेबदन सें.असली मजा तोँ अब मिला उसको.अपने जवानबदन कां.काश यहसभी उसने पहले हि कर लिया होता.
स्मूच करते-2 रश्मी कां हाथ मोनू केँ लन्ड कि तरफ बढ़ने लगा.उसने पहले भि अपने भइया केँ लन्ड कों उपर-2 सें महसूस किया थां रसोई मे.पर्र अब उसको नंगा करके पकड़ना चाहती थि.उसने मोनू कि निक्कर केँ उपर सें हि उसके खड़ेहुए लन्ड कों अपनेहाथ मे पकड़कर ज़ोर सें दबा लिया.
मोनू कां मुँहखुल सां गय़ा.औऱ दोनो कि किस्स भि टूट गई,.
रश्मी तोँ अब खूंखार सि होँ उठी थि.वोँ मोनू कि आँखो मे देखते-2 नीचे कि तरफ खिसकने लगी.औऱ ठीक उसके लन्ड केँ उपर जाकर उसने अपना चेहरा रोक लिया.
रश्मी : "बहोत खाली तुमने मेरी मूँगफलियाँ.अब मेरी बारी हैं.तुम्हारा केला खाने कि.''
औऱ फिन रश्मी नें उसकी निक्कर कों दोनोतरफ सें पकड़कर नीचे खींच दिया.औऱ मोनू कां लन्ड एक् हि झटके मे लहराकर उसकी आँखो केँ सामने नाचने लगा.
उसनेजब मोनू औऱ रुची कों दोदिन पहले वोँ सभी करते देखा थां, तब तोँ काफ़ी दूर थि वोँ.पऱ अब इतने लगभग सें वोँ उसके लन्ड कों देखकर घबरारही थि.किअगर इसे अपनी बुर मे लेनापड़ गय़ा तौ केसे लेगी.कहां उसकी बुर कां 2 इंच कां छेद औऱ कहां यहआठइंच लंबा लौड़ा.
रश्मी कों ऐसे घहबराई हुई नज़रों सें अपने लन्ड कों निहारते देखकर मोनूसमझ गय़ा कि वोँ क्याँ सोचरही होगी.उसने अपने लन्ड कों पकड़कर उसके होंठों पऱ लगाया औऱ बोला : "अब ज्यादा मत सोचो दिदी.लो.चूसो इसको.आइस्क्रीम कि तरह.शाबाश.''
रश्मी नें अपनी आँखेबंद करली औऱ एक् हि झटके मे उसके लन्ड कों अपने मुँह मे डाल लिया.औऱ धीरे-धीरे-2 अपने मुँह कों उपर नीचे करनेलगी.
मोनू : "
शाबाश दिदी.ऐसे हि.अहहह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह। उम्म्म्ममममममम। कितना मजा आँ रहा हैं.आहह-आहह। चूसो इसको। उम्म्म्मममममममममम.ज़ोर सें.''
थोड़ी हि देर मे रश्मी उसके लन्ड कों ऐसेचूस रही थि जैसे बरसों सें यहीकाम करती आँ रही होँ वोँ.
वैसेकुछ लड़कियों मे यहगुण शुरुआत सें हि होता हैं.औऱ ऐसी लड़कियाँ हि अपने पार्टनर कों खुशरख पाती हैं.
मोनू केँ लॅंड कों रश्मी पूरा कां पूराचूस रही थि.कभी उसको बाहर् निकाल कर कुल्फी कि तरह सिर्फ़ जीभ सें चूसती.औऱ कभी उसकी बॉल्स कों भि मुँह मे भरकर निगल जाती.औऱ उसकारस रसगुल्ले कि तरह निकालती.उसने तौ सोचा भि नहीं थां कि लन्ड चूसने मे इतनामजा मिलता हैं.मोनू नें लाख कोशिश कि पर्र वोँ उसके लन्ड कों छोड़ने कां नाम हि नहीं लेँ रही थि.आख़िर उसके मुँह ताज़ा-2 खून जोँ लगा थां.
औऱ फिनवही हुआ, जिसका मोनू कों डर थां.उसके लन्ड सें भरभराकर रस कि पिचकारियाँ बाहर् निकलने लगी.औऱ गाड़े रस नें रश्मी केँ मुँह, होंठ औऱ चेहरे कों पूरीतरह सें अपनेरंग मे रंगकर भिगो दिया.
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औऱ अपने मुँह मे जैसे हि रश्मी कों थोडा बहोत स्वाद कां एहसास हुआ, उसने अजीब सां मुँह बनाया.औऱ फिन अगले हि लम्हा बिल्ली कि तरह अपनीजीभ सें सारा कां सारारस चाटने लगी.लन्ड केँ आसपास गिरारस.औऱ फिन मोनू केँ लन्ड सें अपने चेहरे कों रगड़ा औऱ उसपरलगे रस कों फिन सें लन्ड चूस्कर निगल गयीँ,.
रश्मी : "वाव.सभी कुछ कितना टेस्टी हैं यहा कां.मे तोँ फैन हौ गई, रे तेरेइस केले कि औऱ इसकेजूस कि।। म्*म्म्मममम ''
अब मोनू अपनेबेड सें उठ खड़ाहुआ.
औऱ उसने खड़े होकर सबसे पहले तौ अपने कपड़े उतारकर नीचे फेंके.औऱ पूरा नंगा हौ गय़ा.औऱ फिन उसने बड़े हि प्रेम सें रश्मी कां पायजामा भि नीचे खिसकाया.औऱ उसे भि अपनीतरह नंगाकर दिया.
रश्मी कि आँखेबंद थि.आख़िर पहलीबार पूरीतरह सें नंगी हौ रही थि वोँ किसी केँ सामने.
रश्मी कि बुर बिल्कुल चिकनी थि.शायद वोँ पहले सें हि रेडी होकरआई थि.चिकनी बुर सें हल्का पानी निकलकर बाहर् रिसरहा थां.
मोनू नें नीचे बैठे-2 हि उसकी एक् टाँग कों अपने कंधे पऱ रखा औऱ अपना मुँह सीधा उसकी बुर पऱ लगा दिया.
रश्मी नें उसकेबाल पकड़े औऱ ज़ोर सें चीखउठी.
''अहहsssssssssssssssss.ओह मायगॉड.ओहमाय गॉड.ओह मायगॉड''
उसने तौ सोचा भि नहीं थां कि नर्म बुर पर्र गरम होंठ कां संगमऐसा एहसास देगाउसे.
वोँ अपने आप् कों संभाल नहींपाई औऱ वोँ बेड कि तरफ झुकती चली गयीँ, औऱ उसपर गिरकर चादर कि तरहबिछ गयीँ,.
मोनू नें उसके दोनो पैरों कों फेलाया औऱ अपना मुँह अंदरडाल कर ज़ोर-2 सें उसकी बुर कों चूसने लगा.
रश्मी कि तोँ आँखेचढ़ गयीँ,.ऐसा सुखद एहसास तोँ उसे फिंगरिंग करने केँ बाद भि नहीं मिलता थां.
वोँ पहले सें हि उत्तेजित थि.इसलिये ज्यादा वक्त नहींलगा उसे झड़ने मे.औऱ वोँ हिचकियाँ लेती हुईँ मोनू केँ मुँह केँ अंदर हि झड़ने लगी.
''अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह।। उम्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म क्याँ मज़ा हैं अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह, चूस इसको, यहा सें, अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह येस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स आईएम कमिंगsssssssssssss ''
औऱ मोनू तौ प्राचीन खिलाड़ी थां इसखेल कां.उसने एक् भि बूँद बाहर् नहीं निकालने दि.अपना मुँह उसकी बुर सें तब तक नहीं हटाया जब तक वोँ पूरीतरह सें शांत नहीं हौ गयीँ,.
उसकेबाद मोनू भि उसकीबगल मे आकरलेट गय़ा.औऱ दोनो एक् दूसरे केँ होंठों कों चूस्कर अपना-2रस स्वयं हि चखनेलगे.
2 बज चुके थें यहसभी करते-2.मोनू कां लन्ड अपनी आख़िरी लड़ाई केँ लिए रेडी हौ चुका थां.
उसने धीरे-धीरे-2 अपनेबदन कों रश्मी सें रगड़ना शुरुआत कर दिया.
रश्मी भि समझ गई, कि अब वोँ क्याँ चाहता हैं.पऱ उसके अंदर हिम्मत नहींबची थि कुछ भि करने कि अभि.औऱ वोँ डर भि थां कि इतना बड़ा केसे अंदर जायेगा
एक् तोँ काफ़ी रात होँ चुकी थि.दूसरा उसे सुभह विद्यालय भि जानां थां.छोटी दीवाली पऱ विद्यालय मे सब कों उपहार लेने केँ लिए बुलाया गय़ा थां.
रश्मी : "मोनू.आज केँ लिए इतना हि.बाकी कल करेंगे.विद्यालय भि जानां हैं.''
मोनू नें भि कोई ज़बरदस्ती नहीं कि.रश्मी नें उसको एक् किस्स किया औऱ अपने कपड़े पहनकर वोँ मां केँ पास सोने केँ लिएचली गई,.
औऱ मोनूऐसे हि नंगासो गय़ा.अगले दिन होने वालेजुए केँ बारे मे सोचते हुए औऱ उसकेबाद होने वाली चुदाई केँ बारे मे सोचते हुए.
अगलेदिन रश्मी कि नींदखुल हि नहींरही थि.उसने अलार्म नां लगाया होता तोँ उसेपता हि नहीं चलता कि सुभह केँ 7 बज चुके हें.मन तोँ नहि थां, पर्र विद्यालय जानां भि ज़रूरी थां.वोँ जल्द सें उठी.नहा धोकर रेडी होँ गई, औऱ अपनेलिए गरमचाय रख दि। उसकी मां अभि तक सोरही थि। गरमचाय कां कपहाथ मे लेकर वोँ मोनू केँ कमरे मे गयीँ,.औऱ वहा कां हाल देखकर उसे एहसास हुआ कि रात कों उन दोनो नें वहा क्याँ धमाल मचाया थां.
मोनू केँ बेड कि चादर निकलकर नीचे गिरी हुइ थि.उसके कपड़े चारों तरफ बिखरे पड़े थें.पिल्लो भि गिरे पड़े थें इधर उधर.औऱ वोँ अपनेपेर फेलाकर गहरी नींद मे सोरहा थां.वोँ पूरा नंगा थां.औऱ उसकेमैन पार्ट केँ उपर तकिया पड़ा थां.शायद वोँ रात कों उसको अपनी टाँगो केँ बीच दबोचकर हि सोया थां.
रश्मी धीरे-धीरे-2 आगेआई औऱ उसने पिल्लो कों उठाकर साइड मे कर दिया.औऱ अब मोनू उसकी नज़रों केँ सामने पूरा नंगा थां.भले हि इस वक्त उसका सिपाही सोयाहुआ थां पर्र फिन भि वोँ बड़ा हि टेम्पटिंग सां लगरहा थां.इतना टेम्पटिंग कि रश्मी केँ मुँह मे पानी आँ गय़ा.उसने घड़ी देखी, अभि दस मिनट थें उसके पास.उसने सोचा कि गरमचाय तौ रोज पीते हें, आज फ्रेश जूस पीया जाए.औऱ उसनेगरम चाय कां कप टेबल पऱ रख दिया औऱ दरवाजा बंद करके उसकेबेड केँ पास आँ गई,.
शेर चाहेसो रहा होँ पऱ होता वोँ भि ख़तरनाक हैं.इसलिये रश्मी कों उसेहाथ लगाने मे डर भि लगरहा थां.पर्र जैसे हि उसके ठंडेहाथ गरम लन्ड कों छुए, उसके नर्म एहसास होँ महसूस करके रश्मी रोमांच सें भर उठी.पिछले 2-3 दिनों सें जोँ भि वोँ देख औऱ कररही थि, सबमेउसे मजा मिला थां.औऱ अबयह सुभह कि रोशनी मे नहाया हुआ मोनू कां लन्ड, वोँ तोँ सबसेअलग हि थां.वोँ धीरे-धीरे सें उसकेउपर झुकी औऱ पहले अपनीगरम सांसो सें औऱ फिनगरम जीभ सें उसेगुड मॉर्निंग कहा.
मोनू कों अभि तक मालूम नहीं थां कि उसकेसंग होँ क्याँ रहा हैं.वोँ रात कों 4 बजे तक जागता रहा थां.रश्मी केँ बारे मे सोच सोचकर.अब जब तक उसकेसंग कुछ ज़ोर ज़बरदस्ती नाँ होँ, तब तक उसकी नींद नहीं खुलने वाली थि.
कलरात कों तौ उसका लन्ड पूरा खड़ाहुआ थां, पऱ इससमय रश्मी केँ टच सें वोँ नींद सें जागने लगा.तभी कहते हें, लन्ड कां अपनाअलग दिमाग़ होता हैं.उसका मालिक भले हि सोरहा थां पर्र मोनू कां लन्ड अपने आप् कों मिलरहे स्पेशल ट्रीटमेंट सें काफ़ी खुश थां.औऱ कुछ हि देर मे वोँ खेत कि सरसों कि तरह लहराने लगा.
रश्मी नें अपने लिप्स पऱ पिंक ग्लॉस लगाया हुआ थां.जिसे उसने धीरे-धीरे-2 मोनू केँ लन्ड पर्र मल दिया.वोँ तेज़ी सें उसके लन्ड कों चूसरही थि.कलरात केँ जायके कों वोँ भूली नहीं थि अभि तक.इसलिये उसकेजूस निकलने कां बेसब्री सें वेटकर रही थि.
औऱ उसनेजिस तरह सें तेज झटके मारकर मोनू केँ लन्ड कों झटकेदिए, उसे नींद सें जागने केँ लिए उतने झटके काफ़ी थें.औऱ वैसे भि, नींद मे हि सही, उसे यह एहसास हौ रहा थां कि उसकाबस निकलने हि वाला हैं.औऱ जैसे हि वोँ घड़ी आई.उसके लन्ड कि टंकी औऱ उसकी आँखे एक् संगखुल गयीँ,
लन्ड कि टंकी सें भरभराकर गाड़ा पानी रश्मी केँ मुँह मे जानेलगा.
.औऱ वोँ अपनी अधखुली आँखो सें अपनी टाँगो केँ बीच लेटी हुईँ रश्मी कों देखकर हैरान औऱ परेशान हुएजा रहा थां.
पर्र जब तक वोँ कुछबोल पाता वोँ बिल्ली उसकी सारी मलाईचट कर चुकी थि.औऱफिन बड़े हि सेक्सी तरीके सें उसकी आँखो मे देखते हुए उसने अपने होंठों पऱ जमेरस कों चाटते हुएकहा : "गुड मॉर्निंग भइया.''
औऱ मोनू उसको पकड़कर कुछ औऱ कर पाता, वोँ खिलखिलाती हुइ सि कमरे सें बाहर् निकल गई,.उसके विद्यालय कां वक्त हौ गय़ा थां.
फिन 5 मिनट केँ बाद वोँ अपनाबेग वगेरह लेकरघऱ सें बाहर् निकल गई,.
मोनू अभि तक अपनेबेड पर्र नंगा लेटाहुआ सुभह केँ इस हसीन एनकाउंटर केँ बारे मे सोच सोचकर मुस्कुरा रहा थां.
Diwali ka Jua - 3 (Incest + Adultery) - Diwali Ki Raat – New Episode
Update 6
वोँ फिन सें सो गय़ा.लगभग 10 बजे केँ आसपास उसकी नींद खुली, उसकाफोन बजरहा थां.वोँ रुची कां मोबाइल थां.
मोनू (बुदबुदाते हुए) 'इसकी बुर मे भि सुभह-2 खुजली शुरुआत हौ जाती हैं'
फिन मोबाइल उठाकर बड़े हि प्रेम सें बोला : "हेलो डार्लिंग.कैसी होँ.''
रुची : "तुम्हे क्याँ पड़ी हैं मेरी फ़िक्र करने कि.दोदिन सें देखरही हू तुम् मुझे ध्यान न देनाकर रहे होँ.उस दिनजब रश्मी नें पकड़ लिया थां, उसनेकुछ बोला क्याँ.कहो.''
मोनू : "अरे नहीं बेबी.वोँ तोँ। काफ़ी खुश थि.औऱ तुम्हारी तारीफ भि कररही थि.बोल रही थि कि तुम् दोनो मे कुछ ग़लतफ़हमियाँ होँ गई, हैं, वरना वोँ अभि भि तुम्हे बहोत लाइक करती हैं.औऱ मेरे औऱ तुम्हारे ऐसे रीलेशन सें भि दिदी कों कोई प्राब्लम नहीं हैं.''
रुची (हैरानी सें) : "क्याँ सच मे.तुम् झूठ तौ नहींबोल रहे नां.''
मोनू : "डार्लिंग.मे भला क्योझूठ बोलूँगा.सच मे, वोँ अभि भि तुम्हे अपना साथी मानती हैं.''
रुची : "ग़लती मेरी हि थि पहले भि.औऱअब भि.इतनी अच्छी सहेली केँ संग मैनेऐसा व्यवहार किया.''
मोनू : "चलो, अब परेशान मत हौ, अगर तुम् दिदी केँ संगफिन सें दोस्ती करना चाहती होँ तोँ वोँ मुझपर छोड़ दो.अबयह बताओ, इतनी सुभह केसे मोबाइल किया.''
रुची (थोड़े नाराज़गी भरे स्वर मे) : "तुम्हे तोँ कुछ होता नहीं हैं.पर्र मेरी हालत बड़ी खराब हैं.बड़ा मनकररहा हैं तुमसे मिलने कां (चुदवाने कां)''
उसकी सेक्सी आवाज़ नें तोँ मोनू केँ सोएहुए शेर कों फिन सें जगा दिया.अभि 10 बजरहे थें.उसको नहाना भि थां औऱ ब्रेकफास्ट भि करना थां.मम्मी कों भि ब्रेकफास्ट करवाना थां.इंजेक्शन लगवाना थां.
मोनू : "तुम् ऐसाकरो, 3 बजे आँ जाओ.मम्मी तब तक खानां खाकरसो जाएँगी.फिन बस तूँ औऱ मे.''
रुची : "ओक.मे आतीहू, 3 बजे.''
फिन मोनू आहिस्ता उठा औऱ नहाया.अपनी भाग्य पर्र उसकोआज बड़ा हि नाज़ होँ रहा थां.
रश्मी औऱ रुची कि दोस्ती वोँ इसलिये करवाना चाहता थां कि उसकेमन मे कही नां कही एक् संग 2 केँ मज़े लेने कि बात थि.पर्र उसे क्याँ मालूम थां कि उसकीयह ख़्वाहिश इतनी जल्दसच हौ जाएगी.
क्योंकि रश्मी केँ विद्यालय मे दिवाली कां तोहफा मिलने केँ बाद 2 बजे छुट्टी होँ गयीँ,.औऱ वोँ घऱ कि तरफ निकल पड़ी.यह सोचते हुए कि एक् घंटे मे घऱ पहुँचकर वोँ खुलकर मज़े लेगी मोनू केँ संग.
रुची बलखाती हुई मोनू केँ घऱ कि तरफचली जारही थि.रास्ते मे खड़ेहुए मोनू केँ साथी उसकी मदमस्त चाल कों देखकर आहेंभर रहे थें.रिशू भि उनकेबीच हि थां.पर्र वोँ यह नहीं जानते थें कि वोँ मोनू केँ घऱ हि जारही हैं.
मोनू केँ घऱ केँ पास पहुँचकर रुची नें इधरउधर देखा औऱ अंदरघुस गयीँ,.हमेशा कि तरह मोनू नें दरवाजा खुला छोड़कर रखा थां.औऱ हमेशा कि तरहा रुचीफिन सें दरवाजा खुला छोड़कर उपर कि तरफचल दि.
सीढ़ियों केँ बिल्कुल सामने मोनू कि मां कां रूम थां, औऱ वोँ खर्राटे मारकर सोरही थि.वोँ निश्चिंत होँ गई,.औऱ उछलती हुइ सि मोनू केँ रूम मे गयीँ,.जहाँ वोँ फोन पऱ कुछचैक कररहा थां.
रुची करीब-करीब भागती हुइ सि मोनू केँ पास पहुँची औऱ धम्म सें उसकेउपर जा गिरी औऱ उसको बेतहाशा चूमने लगी
"ओह्ह्ह्ह्ह्ह। मोनू। कितना सताते हौ तुम् मुझे। मुआआआआअह। उम्म्म्ममम। मेरा बुराहाल कररखा हैं तुमने। मुचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचह ''
मोनू भि उसके मुम्मो कों पकड़कर उसकी घुंडीयां उमेठता हुआ बोला : "साली। तुम्हे तोँ आजकलरोज कां चस्का लग चुका हैं.''
रुची दाँत कटकटाते हुए बोलि : "अब क्याँ करू जालिम, यह जवानी हैं हि ऐसी चीज़.जब सें तूने इसकोचखा हैं, यहरोज तड़पती हैं.पता नहीं क्याँ नशा हैं इस चुदाई मे.सालाहर समयमन करता हैं कि बस तेरे लन्ड सें चुदती रहु.चुदती रहु.''
मोनू भि मज़े लेनेलगा औऱ बोला : "इतनी हि आगलगी हैं तेरी जवानी मे तोँ घऱ वालो कों बोल कि कहीं विवाह करवादे। फिनदिन रात चुदाई करवाईयो अपने पति सें.''
रुची (उसके लन्ड कों पकड़कर उमेठते हुए) : "विवाह तौ मे तेरेसंग हि करूँगी औऱ वोँ जब होगी, तब होगी.अभि केँ लिए तौ मेरा उधारचल रहा हैं इसकेसंग.चलअबदेर नाँ कर, बड़ी ज़ोर सें लगी हैं चुदाई कि प्यास.''
औऱ रुची नें हुंकारते हुए मोनू केँ पायजामे कों नीचे खींच दिया औऱ उसके हिनहिनाते हुए लन्ड कों अपने मुँह मे लेकर ज़ोर-2 सें सक्क करनेलगी.
मोनू भि उसके लन्ड चूसने कि कला कां दीवाना थां.वोँ अपनीजीभ औऱ होंठ केँ संग-2 हल्के दाँत भि इस्तेमाल करती थि.इसलिये मोनू कों चुस्वाते हुए ज़ोर-2 सें झटके भि महसूस होते थें जब उसके दाँत नर्मखाल सें छूते थें.
मोनू नें उसकेसिर पऱ हाथ फेरते हुए उसकीटी शर्ट कों सिर सें खींचकर निकाल दिया.औऱ फिनपीठ पर्र हाथ फेरते हुए एक् हि हाथ सें उसकी ब्रा भि खोल दि.उसकी ब्राढलक कर नीचेगिर गई,.औऱ उसने नीचेहाथ लगाकर उसके मुम्मों कां वजन नापा.
मोनू : "काफ़ी भारी होँ गये हें यहअब तोँ.मजेदार.भि ''
रुची : "सभी तेरा हि कमाल हैं.तूने हि इन्हे चूस चूस्कर औऱ दबाकर इतना बड़ाकर दिया हैं.''
मोनू नें उसके मुम्मे ज़ोर सें मसलदिए औऱ बोला : "मजा भि तोँ इसमे हि आता हैं मेरी जान.जब तक तेरे थनों कों चूस्कर इनकादूध नहींपी लेता, मेरी भि प्यास नहीं बुझती.''
औऱ उसने उसकीबगल सें पकड़कर रुची कों उपर खींच लिया औऱ उसके मुम्मो पऱ अपने तीखे दाँतलगा कर उन्हे चूसने लगा.
रुची दर्दभरे मज़े सें बेचैनी उठी.''आहह-आहह। येसस्सस्स मोनू। ऐसे हि.बड़ा सताते हैं रेयहरात भर। इनमे मीठा-2 दर्द सां होता हैं। चूसकर सारा दर्द निकाल देआज मेरा। उम्म्म्मममममममममम.''
मोनू केँ रुची कों अपनीगोद मे बिठाया औऱ अपने दाँत ज़ोर-2 सें उसके मुम्मो पर्र मारने लगा.औऱ नीचे सें उसने उसकी स्कर्ट भि खोलकर निकाल फेंकी, औऱ जल्द हि उसके खड़ेहुए लन्ड नें उसकी बुर कां मार्ग भि ढूँढ हि लिया औऱ रुची नें थोडा उचककर उसे अंदर लिया औऱ उसपर बैठती चली गई,.
मुम्मे पऱ मोनू केँ दाँत औऱ बुर पर्र उसके लन्ड नें कहर बरपा दिया थां एक् संग.दोनो तरफ सें एकसाथ हमला होनेलगा उसपर.औऱ वोँ दर्द औऱ मज़े केँ मिले जुले मिश्रण सें उतावलापन-2 कर उछलती रही उसकीगोद मे.
''आआआहहह मोनू। सस्स्स्सस्स.ऐसे हि चोदो मुझे। ओफफफफफफफफफफ्फ़.औऱ अंदर तक। आहह-आहह.बुझादो आज मेरी सारी प्यास। चोदो मुझे मोनू.ज़ोर सें चोदो.''
वोँ झड़ने केँ बहोत लगभग थि.
मोनू केँ लन्ड पर्र वोँ ज़ोर-2 सें धपा धप्पकर रही थि.औऱयह मोनू केँ लिए बहोत थां, उसके लन्ड सें रसभरी पिचकारियाँ निकलकर उसकी बुर केँ अंदर जानेलगी.
मोनू : "ओह। मेरी जान.मे तौ गय़ा.''
रुची चिल्लाई : "ओह नहियीईईईईईई। अभि नहीं.मेरा अभि नहींहुआ.''
पऱ तब तक मोनू निढाल सां होकर पीछे कि तरफगिर गय़ा.औऱ गहरी-2 साँसे लेने लगा.उसका लन्ड छोटाहुआ औऱ फिसलकर रुची कि गीली बुर सें बाहर् आँ गय़ा.
रुची : "यह क्याँ किया तुमने मोनू.एक् तौ वैसे हि मुझे इतने दीनो तक तड़पाया औऱ अब मुझे पूरा सेटिस्फ़ाई भि नहीं किया.ऐसा थोड़े हि करता हैं कोई.''
पर्र मोनूकुछ नाँ बोला.रुची भि उसकेउपर सें उतरकर उसकीबगल मे बैठ गई,.
रुची : "पऱ मे हार नहीं मानूँगी.मे अभि इसको दोबारा सजधजकर करती हूं.''
इतना कहकर वोँ उसके लन्ड पर्र फिन सें टूट पड़ी.मोनू केँ लन्ड पऱ लगारस उसने चूस्कर सॉफकर दिया.औऱ अपनेगरम मुँह सें चूस्कर उसके लन्ड कों फिन सें खड़ा करने मे लग गई,.
औऱ 2 मिनट मे हि उसके चूसने कि कला नें फिन सें कमालकर दिया.
मोनू कां लन्ड पहले सें भि ज्यादा खूंखार सां होकर लहराने लगा.
औऱ फिन रुची नें औऱ देर नहीं कि औऱ उछलकर उसके घोड़े पऱ बैठ गयीँ,.औऱ तेजी सें घुड़सवारी करनेलगी.
वोँ तौ पहले सें हि झड़ने केँ लगभग थि.इसलिये ज्यादा वक्त नहींलगा उसकोफिन सें उसी पॉइंट पर्र पहुँचने केँ लिए.औऱ वोँ ज़ोर-2 सें चिल्लाती हुईँ उसके लन्ड केँ उपर झड़ने लगी.
''आहह-आहह। एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स। अबआया असलीमजा। उम्म्म्ममममममममममममममममम। यही तौ चाहिए थां मुझे। असलीमजा। म्*म्म्ममममममम''
औऱ वोँ बेहोश सि होकर उसकी छाती पऱ गिर गई,.औऱफिन फिसलकर उसकीबगल मे भि.
अब क्रोध करने कि बारी मोनू कि थि : "ओह.रूको तोँ सही.थोड़ी देर औऱ.मेरा भि बस होने वाला हैं.रूको.''
पर्र तब तक रुची अपनी मदहोशी मे खोकर उसके लन्ड कां संग छोड़ चुकी थि.जोँ थोड़ी देर पहले मोनू नें किया थां वहीअब रुची नें भि कर दिया थां.
एक् मर्द कों सेक्स केँ लिए दोबारा सजधजकर करना काफ़ी आसान होता हैं.पऱ एक् महिला पूरीतरह सें संतुष्ट होने केँ बाद मुश्किल सें हि रेडी होती हैं लगातार अगली चुदाई केँ लिए.औऱ यहीइस वक्त रुची केँ संग भि थां.
वोँ बोलि : "अभि नहीं.अब नहीं हौ पाएगा.मुझे इचिंग सि हौ रही हैं अंदर.अब कल करेंगे.''
औऱ इतना कहकर वोँ अटेच बाथरूम मे घुस गई,.अपनी बुर कों गरम पानी सें साफ़ करने केँ लिए.
मोनू बेचारा अपने खड़े लन्ड कों मसलकर रह गय़ा.एक् बार तौ उसकेमन मे आया कि स्वयं हि मूठ मारकर थोडा रिलिव होँ जाए.पर्र फिनकुछ सोचकर वोँ रुक गय़ा औऱ अपने लन्ड वाले हिस्से कों चादर सें ढककर आँखेबंद करली.
औऱ यही वोँ वक्त थां जब नीचे रश्मी नें घऱ मे प्रवेश किया.बाहर् कां दरवाजा खुलाहुआ थां.वोँ समझ गयीँ, कि बेपरवाह मोनू नें उसेऐसे हि छोड़ दिया होगा.वोँ दरवाजा बंद करकेउपर कि तरफचल दि.
पहले उसने अपनी मम्मी केँ कमरे मे देखा, वोँ खानां खाकर औऱ इंजेक्शन लगवाकर गहरी नींद मे सोरही थि.औऱफिन वोँ मोनू केँ कमरे कि तरफचल दि.औऱ दरवाजा धकेलकर अंदर दाखिल हौ गई,.
अंदर जाकर उसने देखा कि मोनू तौ सुभह कि तरह अभि तक ऐसे हि नंगा लेटाहुआ हैं.अपने उपरआधी चादरतान कर, औऱ आँखेबंद करके.
अब पता नहीं वोँ ऐसे हि लेटा हैं याँ सोरहा हैं। यह जानने कां उसकेपास एक् हि उपाय थां
औऱ सुभह कि तरह एक् बारफिन सें रश्मी केँ मन मे उसके लन्ड कों चूसने कां ख़याल आँ गय़ा.सुभह भि उसकेरस कों पीकर वोँ पूरादिन तरो ताज़ा फील करतीरही थि.औऱउसी स्वाद कों दोबारा महसूस करने केँ ख़याल सें वोँ मुस्कुराती हुइ सि उसकीतरफ चल दि.औऱ पैरों कि तरफ सें उसकी चादर कों उठाते हुए अंदरघुस गई,.
औऱ उसकीआशा केँ अनुरूप वोँ अंदर सें नंगा हि थां.उसका शेर एक् तरफ लटकाहुआ सां पड़ा थां.उसने उसके लन्ड कों पकड़ा औऱ धीरे-धीरे-2 चाटने केँ बादउसे चूसना शुरुआत कर दिया.औऱ एक्-2 इंच करतेहुए उसे पूरा निगल गयीँ,.
मोनू कों जैसे हि एहसास हुआ कि उसके लन्ड केँ संगफिन सें छेड़ छाड़ कि जारही हैं.वोँ खुश हौ गय़ा.औऱ मन हि मन सोचा कि लगता हैं रुची कों मुझपर दया आँ हि गई,.अपनी बुर मे लेकर नहीं, पर्र अपने मुँह मे लेकर वोँ उसको झड़वाने कां इंतज़ाम कररही हैं.
औऱ वोँ आँखेबंद करके उसके गरमा गर्म मुँह कां मजा लेनेलगा.
औऱ तभी बाथरूम कां दरवाजा खुला.औऱ रुची नंगी हि बाहर् निकलकर आई.
मोनू कि नज़रें भि आवाज़ सुनकर उसतरफ गई,.
औऱ जैसे हि मोनू नें रुची कों वहा देखा.औऱ रुची नें किसी औऱ कों घोड़ी बनकर, चादर केँ अंदर घुसकर, मोनू कां लन्ड चूसते हुए देखा.दोनो केँ चेहरे पऱ अलग-2 एक्शप्रेशन आँ गये.
मोनूसोच रहा थां कि अगर रुची वहां हैं तौ उसका लन्ड कौनचूस रहा हैं.
औऱ रुचीसोच रही थि कि अभि कुछदेर पहले हि तौ वोँ मोनू कों छोड़कर अंदर गई,, इतनी हि देर मे यहकौन आँ गय़ा जौ उसके प्रेम पर्र ऐसे डाकामार रहा हैं.क्याँ मोनू उसको धोखा देने कि कोशिश कररहा हैं.
औऱ उसने गुस्से मे भरकर मोनू केँ उपर बिछी चादर कों एक् हि झटके मे खींचकर दूर फेंक दिया
Diwali ka Jua - 3 (Incest + Adultery) - Diwali Ki Raat – New Episode
औऱ चादर निकलते हि जौ सीन रुची नें देखा, उसकी तोँ शायद उसने कल्पना भि नहीं कि थि.मोनू कि सग़ी बेहन औऱ उसकी पुरानी सहेली रश्मी घोड़ी बनकर अपने स्वयं केँ भइया कां लन्ड चूसरही थि.
औऱ अपनेउपर सें ऐसे चादर निकल जाने केँ बाद मस्ती मे आँखेबंद करके लन्ड चूसती हुईँ रश्मी नें आँखे खोली औऱ सामने डर औऱ आश्चर्य केँ भावलिए अपने भइया केँ चेहरे कों देखा, जोँ कभी उसको औऱ कभी उसके पीछे खड़ी रुची कों देखकर यहसोच रहा थां कि अब क्याँ होगा.
मोनू कों ऐसे हैरान -परेशान देखकर औऱ उसकी आँखो कां पीछा करतेहुए जैसे हि रश्मी नें अपने पीछे खड़ी रुची कों देखा तौ उसेसभी समझ मे आँ गय़ा.
इसका मतलब उसकी एंट्री ग़लतसमय पर्र होँ गई,.मोनू औऱ रुची केँ बीच पहले सें हि चुदाई कां खेलचल रहा थां.वोँ ऐसे हि बीच मे घुसआई.
औऱ सबसे बड़ीबात, रुची नें उसे रंगे हाथों पकड़ भि लिया.वैसे देखाजाए तौ रुची भि नंगी-पुँगी खड़ी थि औऱ वोँ भि चुदाई करतेहुए रंगे हाथो पकड़ी गई, थि.पऱयहा मसला वोँ नहीं थां.
यहा प्राब्लम यह थि कि रश्मी पकड़ी गयीँ, थि, अपने भइया केँ लन्ड कों चूसते हुए.
रुची : "राआशममीई.तुम् !!!!!!!!!!!!!.औऱ वोँ भि अपने भइया केँ संग.''
तब तक रश्मी संभल चुकी थि.औऱयह भि सोच चुकी थि कि उसे केसे वोँ सिचुएशन हेंडल करनी हैं.
मोनू भि समझ चुका थां कि कोई बड़िया वालासीन होने वाला हैं वहा पर्र.
रुची केँ गुस्से कां रश्मी नें बड़े हि प्रेम सें जवाब दिया.:"हाँ.मे.क्यो.इतनी परेशान क्यो होँ रही हैं तूँ मुझेयह सभी करते देखकर.''
रुची : "मतलब.तूँ यह भि नहीं जानती कि मे परेशान क्यो हूं.तुँ मेरे बाय्फ्रेंड केँ संग, औऱ उसके भि उपर अपने स्वयं केँ भइया केँ संगयह सभीकर रही हैं.तुम्हारी तरफ लज्जा नहींआती.''
रश्मी : "पर्र यहसभी तोँ मे तेरे कहने पऱ हि कररही हू.''
अब हैरान होने कि बारी रुची केँ संग-2 मोनू कि भि थि.
रुची : "मेरे कहने पर्र ???? क्याँ मतलब हैं तेरा.!!!''
रश्मी : "तुम्हें याद हैं, तूने हि एक् बारकहा थां कि हम् एक् दूसरे केँ पार्टनर्स कों आपस मे शेयर करेंगे.फिन चाहे वोँ बाय्फ्रेंड हौ याँ हसबैंड ''
रुची (दिमाग़ पऱ ज़ोर डालते हुए) : "हाँ.याद हैं.पर्र वोँ तौ 2 साल पहले कि बात हैं.औऱ वोँ बातअलग थि.यहा तोँ तुँ अपने स्वयं केँ भइया केँ संगयह सभीकर रही हैं.''
रश्मी : "देख.मुझे इसबात सें कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि तेरा बाय्फ्रेंड कौन हैं.अगर तेराबी एफ एक् रिक्शा चलाने वाला भि होता तौ भि मे यही करती, मेरा भइया हैं, तब भि मे यहीकर रहीहू.''
रुची कां तोँ दिमाग़ हि चकरा गय़ा उसकी दलील सुनकर.औऱ मोनूमन मे अपनी बेहन कि तारीफ किए बिना नहींरह पाया.
रश्मी : "पिछली बारजब मैने तुम् दोनो कों रंगेहाथ पकड़ा थां तोँ मुझे भि ऐसे हि शॉकलगा थां.हमारे बीचभले हि बातचीत बंद हैं, पऱ मे अपने वादे कों आज तक नहीं भूली हू.जैसे कि मे अब तक अपनी दोस्ती कों भि नहीं भूली.तुम्हे अपनी दोस्ती औऱ वोँ वादायाद दिलाने केँ लिए हि मैनेयह सभी किया हैं.''
रश्मी नें बड़ी हि चालाकी सें रुची कां ध्यान अभि केँ इन्सिडेंट सें हटाकर अपनी दोस्ती केँ इमोशनल पॉइंट कि तरफकर दिया थां.
रश्मी : "उसदिन हि मैनेसोच लिया थां कि भले हि तुम्हें यहबात याद नहीं हैं, पऱ मे अपनी दोस्ती मे कियाहुआ वोँ वादा नहीं भूलूंगी, जौ हमने एक् संग किया थां.कि हम् एक् दूसरे केँ पार्टनर्स कों ऐसे हि खुश करेंगे, जैसे स्वयं केँ पार्ट्नर कों करते हें.मुझे भि पता हैं कि अपने भइया केँ संगयह सभी करना ग़लत हैं, पर्र मेरेलिए भइया सें बढ़कर अपनी दोस्ती मे कियाहुआ वादा हैं.जौ शायद तूँ भूल चुकी हैं.अपनी दोस्ती कि तरह.''
इतना बहोत थां रुची कि आँखों सें पश्चाताप केँ आँसू निकालने केँ लिए.
रुची रोती हुइ उसकीतरफ आई औऱ नंगी हि उसकेगले सें लिपटकर फूट-2कर रोनेलगी
रुची : "मुझे क्षमा करदे रश्मी.मैने तुम्हे कितना ग़लत समझा। पहले भि मेरी हि ग़लती थि.वरना तुझ जैसी सहेली कों खोकर मुझे भि अच्छा नहीं लगा.मुझे क्षमा करदे रश्मी.''
रुची केँ गले लगतेहुए रश्मी कां चेहरा मोनू कि तरफ थां.औऱ वोँ एक् कुटिल हँसी हंसकर उसेआँख भि माररही थि.
अचानक मोनू नें रश्मी कों इशारा किया कि वोँ दोनोआपस मे कुछ करे.क्योंकि उसने पिछली बार हि सोच लिया थां कि दोनो सहेलियों कों एक् संग चोदेगा.औऱ वोँ शायद जल्द हि होने भि वाला थां.पर्र उससे पहले वोँ उन दोनो कां लेस्बियन सेक्स देख्ना चाहता थां, जौ आज तक उसने सिर्फ़ मूवीस मे हि देखा थां.
रश्मी नें बुरा सां मुँह बनाया पर्र मोनू नें रोताहुआ चेहरा बनाकर अपने दोनोहाथ उसकेआगे जोड़ दिए.औऱ फिन अपने खड़ेहुए लन्ड कों उसकी आँखो केँ सामने लहराकर उसे वोँ लालच भि दिया, जिसके लिए वोँ जानेकब सें बेचैनी रही थि.
रश्मी नें भि सोचा कि यह भि ट्राइ कर हि लेना चाहिए.हालाँकि दोनो सहेलियों मे पहले काफ़ी खुलकर बात होती थि.पऱ दोनो नें एक् दूसरे केँ अंगो कों कभीटच नहीं किया थां औऱ नाँ हि एक् दूसरे कों कभी नंगा देखा थां.पर्र आज रश्मी नें रुची कों नंगादेख हि लिया थां.औऱ अब मोनू केँ कहने पऱ उसे भि उसी कि तरह नंगा होकरखेल खेलना थां अपने भइया कों खुश करने केँ लिए.
रश्मी नें एक् गहरी साँसली औऱ उसके दोनोहाथ सरकते हुएआगे कि तरफआए औऱ उसने रुची केँ दोनो मुम्मे पकड़ लिए.औऱ अपनी उंगलियों सें उसके निप्पल्स पकड़कर होले सें सहलादिए
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