Diwali ka Jua - 3 (Incest + Adultery) - Diwali Ki Raat – New Episode
रुची : "आहह-आहह। क्याँ कररही हौ रश्मी.''
रश्मी : "एक् नयी दोस्ती कि शुरूवात.''
रुची नें उसको सवालिया नज़रों सें देखा.औऱ फिन एक् नज़र मोनू पऱ डाली.उसने भि गर्दन हिलाकर औऱ पलकें बंद करतेहुए अपनी सहमति दे दि.कि करनेदे, जोँ रश्मी करना चाहती हैं.उसके बाद रुची नें कुछ नहींकहा औऱ बस देखती रही कि आख़िर रश्मी कहां तक जाती हैं.
रश्मी नें रुची केँ सिर केँ पीछेहाथ रखा औऱ उसे अपनीतरफ खींच लिया औऱ उसके होंठों कों ज़ोर-2 सें चूसने लगी.
यहकाम रश्मी हमेशा सें करना चाहती थि.जब वोँ दोनो पक्की सहेलियाँ थि तब वोँ हमेशा हि रुची कि सुंदरता कि प्रशंसक रही थि.वोँ स्वयं उसे चूमना चाहती थि.उसके नंगेबदन सें खेलना चाहती थि.पऱऐसा मौका हि नहीं मिला कभी.सिर्फ़ बातें होती थि दोनो केँ बीच सेक्स कों लेकर.एक् दूसरे केँ बाय्फ्रेंड कों शेयर करने केँ बारे मे.पऱजब तक बातआगे बड़ पाती, दोनो मे झगड़ा होँ गय़ा औऱ बातचीत बंद हौ गई,.यह तोँ अच्छा हुआ कि आज वोँ ऐसी परिस्थिति मे आकर रुची केँ नंगेबदन सें फिन सें मज़े लें पारही हैं.वरना ऐसाकुछ वोँ कर पाएगी, उसने सोचा भि नहीं थां.औऱ उपर सें मोनू नें भि रश्मी कों उकसा दिया थां.इसलिये वोँ अपने भइया कि मरजी कि आड़ मे अपनीदबी हुईँ ख़्वाहिश कों पूराकर रही थि.
रश्मी तौ रुची केँ नर्म होंठों कों ऐसेचूस रही थि, जैसे आज कां दिन उसकी जीवन कां आख़िरी दिन हैं.उसके होंठ, गाल, आँखे, गर्दन.सब कों बुरीतरह सें चूम औऱ चाटरही थि.औऱफिन वोँ उसके मदमस्त स्तनों केँ उपरआकर रुक गई,.अपने दोनो हाथों मे लेकर उनकावजन नापा औऱ बोलीं : "काफ़ी बड़े होँ गये हैं यह पहले सें.लगता हैं भइया काफ़ी मेहनत करता हैं इनपर.''
यही बातकुछ देर पहले मोनू नें भि कही थि.औऱअब रश्मी भि कररही थि.दोनो भइया-बेहन केँ विचार कितने मिलते-जुलते थें.रुची यहसोच हि रही थि कि रश्मी नें उसके मुम्मो पर्र फिन सें हमलाकर दिया.औऱ उन्हे नींबू कि तरह निचोड़कर उभरेहुए निप्पल्स कों मुँह मे लेकर ज़ोर-2 सें चूसने लगी.
''आहह-आहह। धीईईईरए.रश्मी। तूँ तोँ मोनू सें भि आगे निकलरही हैं। आहह-आहह.इतनी ज़ोर सें तोँ वोँ भि नहीं चूसता.''
पऱ रश्मी नें उसकी एक् नां सुनी औऱ उसकी गोलाइयों केँ संग नोच-खसोट करतीरही.
रुची केँ हाथ उसकीपीठ पऱ थें.औऱ जैसे हि रश्मी नें एक् बारफिन सें उसके निप्पल पर्र दाँत मारा, रुचीजोर सें चीख पड़ी औऱ उत्तेजना मे भरकर उसकेहाथ रश्मी कि ब्रा स्ट्रेप पर्र ज़ोर सें कसगये औऱ उसने उन्हे अपनीतरफ खींच डाला.औऱ उसकी ब्रा केँ पिछले हुकइस बेदर्द हमले कों झेल नहींपाए औऱ वोँ टूटते चलेगये.
पऱ रश्मी पर्र इसकाकोई असर नहीं थां.वोँ अपनाकाम करतीरही.
रुची नें भि आवेश मे आकर उसकेसूट कि कमीज़ कों पकड़कर उपर खींच दिया औऱ गले सें घुमाकर निकाल दिया.ब्रा तौ पहले सें हि टूट चुकी थि.इसलिये वोँ भि सूट केँ संग-2 बाहर् आँ गयीँ,.औऱ अब रश्मी उपर सें नंगी होकर रुची केँ मुम्मे चूसरही थि.
रुची कां ध्यान अब मोनू कि तरफ गय़ा.वोँ देख्ना चाहती थि कि अपनी बेहन कों ऐसेउपर सें नंगा देखकर वोँ भला क्याँ करता हैं.रुची केँ हिसाब सें तोँ आजयह भइया बेहन पहलीबार हि एक् दूसरे कों ऐसे नंगादेख रहे थें.उसे क्याँ पता थां कि पिछले कुछ दिनों सें दोनो केँ बीच क्याँ-2 हुआ हैं औऱ वोँ दोनो कहां तक निकल चुके हें.भले हि उनकेबीच चुदाई नहीं हुईँ, पर्र बाकी केँ सभीकाम वोँ अच्छी तरह सें कर चुके थें.
रुची नें देखा कि रश्मी कों टॉपलेस देखकर मोनू केँ हाथ अपने लन्ड पऱ औऱ तेज़ी सें सरकने लगे औऱ वोँ उन्हे ज़ोर-2 सें मसलकर अपने लन्ड कों खुश करने मे जुट गय़ा.
रुची नें सोचा कि जबइन दोनो भइया-बेहन कों कोई प्राब्लम नहीं हैं तौ वोँ क्यो पीछे रहे.वैसे भि किसी लड़की नें आज पहलीबार उसकोइस तरह सें उत्तेजित किया थां.औऱ अपने प्रेमी केँ सामने वोँ किसी सें ऐसे मज़े लें, यहबात भि उसे अंदर सें उत्तेजित कररही थि.
उसने रश्मी कां नाड़ा खींचकर उसकी सलवार भि निकाल दि.
मोनू कि नज़रों केँ सामने पहलीबार एक् संग 2-2 जवान लड़कियाँ नंगी थि.जौ उसकी फॅंटेसी रही थि हमेशा सें.वोँ उन दोनो कों एक् दूसरे सें गुत्थम - गुत्था होकर चूमा चाटी करते देखकर बुरीतरह सें उत्तेजित होँ चुका थां.वोँ चाहता तौ अभि केँ अभि बीच मे कूदकर दोनो सें अच्छी तरह केँ मज़े लें सकता थां.पऱ पहले वोँ उन दोनो कां लेस्बियन सेक्स देख्ना चाहता थां
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रश्मी भि अपनेदिल कि दबी हुइ इच्छाओं कों पूरा करतीजा रही थि.रुची केँ मुम्मे चूसने केँ बाद वोँ धीरे-धीरे-2 नीचेबैठ गयीँ, औऱ उसकी बुर पर्र अपने नर्म होंठ रखकर उन्हे चूसने लगी.
''आहह-आहह। ओह रुची। आईविल डाई। मतकरो ऐसे.''
रुची कां वोँ वीक पॉइंट थां.उसकी बुर कों मोनूजब भि चूसता थां तोँ रुची कां बुराहाल होँ जाता थां.औऱ यहीकाम अब उसकी बेहन उसकेसंग कररही थि.
रुची दीवार सें जाकरसट गई, औऱ धीरे-धीरे अपनी बुर चटवाने कां मजा लेनेलगी.
उसकासिर इधर-उधर घूमरहा थां.मजा हि ऐसामिल रा थां उसको कि वोँ तौ जैसे आसमान पर्र उड़ती जारही थि.
रश्मी नें अपनी एक्-2 करतेहुए चारों उंगलियाँ उसकी बुर केँ अंदर उतार दि.औऱ अंदर बाहर् करती हुइ, जीभ सें चाट्ती भि रही.
.ऐसा सुखद एहसास एक् लड़की हि एक् लड़की कों दे सकती हैं.
रुची अपने होंठों कों दांतो तले दबाकर मज़े लेँ रही थि.
वोँ झड़ने केँ लगभग पहुँच गयीँ,.पऱ रुचीयह मज़ेदूर तक लेना चाहती थि.
उसने रश्मी कों उपर खींच लिया औऱ उसके बुर केँ रस सें भीगे होंठों कों मुँह मे लेकर चूसने लगी.संग हि वोँ उसके दोनो मुम्मो कों भि दबारही थि.ऐसा सीन देखकर मोनू कां बुराहाल होँ रहा थां.पऱ वोँ दोनो तौ जैसेअब मोनू केँ बारे मे भूल हि चुकी थि.दोनो बसआपस मे मज़े लेकर हि एक् दूसरे केँ अंदरसमा चुके थें.
अब रुची कि बारी थि.उसने रश्मी कों घसीटकर साइड मे बनी एक् शेल्फ केँ उपर चड़ा दिया औऱ उसकी टांगे फेलाकर अपने होंठवहा लगादिए.
आज उसका भि यह पहला मौका थां किसी कि बुर चूसने कां.पऱ वहा होंठ लगते हि उसेजब बुर केँ रस केँ स्वाद कां एहसास हुआ तौ उसकेबाद वोँ रुकी हि नहीं.औऱ अपनीजीभ निकाल कर अंदर तक चूसने लगी.चाटने लगी.
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रश्मी भि एक् हाथ सें अपने मुम्मे कों औऱ दूसरे सें रुची केँ बालों कों सहलाकर आँखेबंद करके सिसकारियाँ मारने लगी.
''ओह.रुची.माय डार्लिंग। उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़। कहां थि इतने दिनों सें। आहह-आहह.सकक्क मी बेबी.अंदर तक चूसो मुझे.आहह-आहह.बहोत मजा आँ रहा हैं। बहोत अच्छा चूसरही होँ तुम्.''
रश्मी केँ मुँह सें अपनीकला कि तारीफ सुनकर वोँ औऱ भि बावली सि होकर अपनी सहेली कों मजा देनेलगी.
औऱ फिन जल्द हि रश्मी कि सिसकारियाँ चीखों मे बदलने लगी.क्योंकि वोँ झड़ने केँ लगभग आँ गई, थि.
रश्मी नें आख़िरी समय मे रुची केँ सिर कों पकड़कर उपर खींच लिया औऱ उसकेरस सें भीगे होंठों कों पकड़कर अपने मुँह मे दबोच लिया.
औऱ रुची नें अपनी उंगलियों कों अपने होंठों कि स्थान लगाकर रश्मी कि बुर कों मसलना जारीरखा.
औऱ रुची केँ होंठों कों चूस्टे हुए, उसकी उंगलियों कों अपनी बुर पऱ महसूस करतेहुए रश्मी बुरीतरह सें झड़ने लगी.
उसकी बुर मे सें देसीघी निकलकर रुची कि उंगलियों कों भिगो गय़ा.
औऱ रश्मी निढाल सि होकरउस स्लेब सें नीचे आँ गयीँ,.औऱ सोफे पर्र धम्म सें जाकरबैठ गयीँ,.
पर्र उसे मालूम थां कि अबउसे रुची कों भि ऐसा हि एहसास देकर झाड़ना होगा.उसने संग बैठी रुची कों पकड़कर उसकी बुर मे अपनी 2-3 उंगलियाँ पेल दि औऱ बिना किसी वॉर्निंग केँ अंदर बाहर् करनेलगी.
रुची भि सोफे पऱ लेट सि गयीँ,.औऱ उसने रश्मी केँ गले मे हाथ डालकर उसे अपनीतरफ खींच लिया.मोनू तौ दूर बैठा उन्हे ऐसा करतेहुए देखरहा थां, ऐसालग रहा थां जैसेउन दोनो केँ बीच रेसलिंग हौ रही हैं.
रश्मी नें रुची कों घोड़ी बनाया औऱ उसकी बुर कों पीछे सें चाटने लगी.संग हि संग वोँ अपनीजीभ सें उसकी गांद केँ छेद कों भि कुरेद रही थि.यहकाम मोनू नें भि कईबार किया थां उसके संग.पर्र आज रश्मी केँ द्वारा ऐसा करनाउसे उससे भि अधिक पसन्द आँ रहा थां.
औऱ फिनवही हुआ, जिसके लिए इतनी मेहनत कि जारही थि.रुची एक् बारफिन झड़ने लगी.अपनी सहेली केँ मुँह केँ अंदर हि उसने अपना साराजूस निकाल दिया.
''आहह-आहह। ओहमाय गॉड। रश्मी। यूआर अमेजिंग। आईएम लविंग इट.''
औऱ उसके मुँह केँ उपर अपनी गद्देदार गांड रगदकर उसनेबचा खुचारस उसके चेहरे पऱ मल दिया.
दोनो केँ चेहरे पऱ एक् अजीब सि खुशी थि.
दोनो एक् दूसरे कों चूमने लगी.औऱ चेहरे औऱ होंठों पऱ लगेरस कां पता भि नहींचला कि कहां चला गय़ा.दोनो केँ चेहरे ऐसेचमक रहे थें जैसे किसी ब्यूटी पार्लर सें होकरआई हौ.
औऱ उन दोनो केँ दमकते चेहरे देखकर मोनू केँ लन्ड कां खून दुगनी तेज़ी सें दौड़ने लगा.
औऱ दोनो सहेलियो नें भि आँखो -2 मे इशारा करके एक् दूसरे कां ध्यान मोनू केँ हिनकते लन्ड कि तरफ खींचा.
औऱ फिन दोनो मुस्कुराती हुइ सि मोनू कि तरफचल दि.ऐसे हि.नंगियाँ.
मोनूसमझ गय़ा कि अब वोँ लम्हा आँ गय़ा हैं जिसका उसेकब सें प्रतीक्षा थां.यानी रश्मी कि चुदाई कां.
वोँ अपने लन्ड कों मसल-2
कर रश्मी कि लश्कारे माररही बुर कों देखेजा रहा थां.वोँ फूलकर डबलरोटी जैसी होँ गई, थि.औऱगोर सें देखने पर्र पताचला कि वोँ थिरक भि रही हैं.जैसे एक् अलग सें दिल धड़करहा हौ उसकी बुर केँ अंदर.
वोँ दोनो जैसे हि मोनू केँ बेड केँ पास पहुँची, मैनगेट कि घंटी ज़ोर सें बजनेलगी
टिंग टोंग। टिंग टोंग। टिंग टोंग
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Update 7
कोई बाहर् खड़ा होकर लगातार घंटी बजाएजा रहा थां.औऱ मोनू कि तौ झाँटे सुलगउठी घंटी कि आवाज़ सुनकर ''अबकौन आँ मरा.अपनी मम्मी चुदवाने.'' यह शायद पहलीबार थां जबऐसी गाली मोनू नें दि थि.रश्मी केँ सामने। उसने रश्मी कों इशारा करके खिड़की खोलकर बाहर् झाँकने कों कहा, जहाँ सें देखाजा सकता थां कि बाहर् कौन हैं.वोँ तोँ नंगी थि.फिन भि अपने भइया कि बातमान कर उसने धीरे-धीरे सें खिड़की खोली औऱ थोडा सां खोलकर बाहर् झाँका, बाहर् मोनू कां मित्र रिशू थां रश्मी : "रिशू हैं बाहर्.यह इससमय क्याँ करने आँ गय़ा.'' इसबीच रुची भि शायदसमझ चुकी थि कि अबयहखेल यहीं खत्म करना पड़ेगा.इसलिये उसने तौ अपने कपड़े समेटकर पहनने भि शुरुआत करदिए थें। मोनू झल्लाता हुआउठा औऱ अपनीटी शर्टपहन कर उसने पूरी खिड़की खोल दि औऱ बाहर् झाँककर बोला : "बोल रिशू। क्याँ काम हैं.'' रिशू नें उपर देखा औऱ बोला : "मोनू भइया.जल्द सें दरवाजा खोलो.एक् बहोत ज़रूरी बात करनी हैं.'' मोनू (गुस्से मे ) : "दोस्त.साम कों तोँ मिल हि रहे हें नां.तभी कर लेंगे.अभि मुझे सोनेदे.'' वोँ किसी भि तरहउसे टरका देना चाहता थां.क्योंकि इससमय तौ उसके सामने अपनी बेहन कि कुँवारी बुर घूमरही थि। रिशू : "नहीं भइया.साम कों नहीं.अभि.साम कों लाला भि होगा नां यहा.उसके बारे मे हि बात करनी हैं.'' अब मोनू कां भि दिमाग़ ठनका.यह लाला केँ लिए क्याँ बात करना चाहता हैं.उसको लेकर तौ वोँ स्वयं कलरात सें कितने प्लान बनारहा थां.उसके जैसे बंदे सें जुआ जीतने मे कितना मज़ा मिलेगा, वोँ सभी स्कीमें बनारहा थां वोँ कल सें। मोनू : "अच्छा रुक जा.मे अभि आताहू.'' औऱ इतना कहकर उसने खिड़की बंदकर दि.रुची अपने कपड़े पहन चुकी थि औऱ वोँ रश्मी केँ सूट कि जीप कों पीछे सें बंद करने मे उसकी हेल्प कररही थि। रश्मी (नाराज़गी भरे स्वर मे) : "क्याँ मोनू.तुम् भि नां, उसकोभगा नहीं सकते थें क्याँ.इतना सही सरूरबन चुका थां.सालाएन वक्त पर्र आँ टपका.'' मोनू : "दोस्त दिदी। क्रोध तोँ मुझे भि आँ रहा हैं.पऱ अब मे भि क्याँ करू.कोई ज़रूरी बात करनी हैं उसे.साम केँ जुए केँ बारे मे.हम् तौ अबयहकाम कभी भि कर लेंगे.'' रश्मी : "ओहो। तब तौ जाकरसुन हि लो। शायदकोई काम कि बात करनेआया हौ.औऱरही बात मेरी, तौ मैनेआज तक इतनेसाल वेट हि तोँ किया हैं.कुछ देर औऱ सही.'' वोँ अपनी बुर कों मसलते हुए बोलीं। जुए केँ बारे मे दोनो भइया-बेहन कों ऐसेबात करते देखकर रुची चोंक गयीँ, औऱ बोलि : "जुआ। इसका मतलब आजकलयहा जुआचल रहा हैं.औऱ यह रश्मी इसमे इतना इंटरस्ट क्यो लें रही हैं.'' मोनू : "यह सिर्फ़ इंटरस्ट हि नहीं लें रही, बल्कि खेलती भि हैं.समझी.मे नीचे चलताहू, बाकी कि किस्सा तुम्हे दिदी सुना देगी.'' औऱ रश्मी वोँ सभी रुची कों बताने लगी जिसे सुनकर रुची हैरान होतीचली गई,.औऱउन दोनो कों वहीं बाते करता छोड़कर मोनू नीचे आँ गय़ा औऱ दरवाजा खोल दिया रिशू अंदरआकर सोफे पर्र बैठ गय़ा। मोनू : "बोल रिशू, क्याँ बोल्ना चाहता हैं.'' रिशू : "मोनू भइया.यह लाला साला बड़ा चालू होँ गय़ा हैं आजकल.'' मोनू : "केसे.'' रिशू : "भइया.आप् तौ जानते हि होँ, उसकेपास पैसे कि कमी तोँ हैं नहीं.पर्र साले कों खेलना भि नहींआता, यह भि वोँ जान हि चुका हैं.इसलिये आजकलजब भि वोँ खेलता हैं तौ अपनेसंग गुड्डू कों रखता हैं.औऱ गुड्डू केँ बारे मे तोँ आप् जानते हि हौ भइया, वोँ साला एक् नंबर कां जुवारी हैं.बड़े-2 केसिनो मे जाकरजुआ खेलता हैं औऱ हमेशा जीतकर हि आता हैं.औऱ इसलिये उसकोकोई भि अपने अड्डे पर्र याँ केसिनो मे आकर खेलने नहीं देता.क्योंकि कोई भि उसकेसंग खेलना नहीं चाहता.'' गुड्डू केँ संग भि मोनूकई बारखेल चुका थां.उसकी भाग्य कहलो याँ हाथ कि सफाई, वोँ कभी भि हारकर गेम सें नहीं उठता थां.औऱ अब लाला केँ संग गुड्डू कां रहनासच मे मुसीबत वालीबात थि। मोनू : "पर्र ऐसेकोई अपनेसंग किसी कों लाकरखेल नहींखेल सकता.'' रिशू : "भइया, मैने भि यही बोला थां लाला कों, कि अगर आनां हैं तौ अकेले आनां, किसी कों संग मे लेकरजुआ खेलने कां कोईरूल नहीं हैं अपनी गेंग मे.पर्र भइया, रश्मी औऱ आप् भि तोँ ऐसे होँ, इसलिये मैंने ज़्यादा जोर नहि दिया '' मोनू : "फिन, क्याँ बोला वोँ हरामी.'' रिशू : "बोल्ना क्याँ थां भइया.सॉफ मनाकर दिया.बोला, मेरे कों चूतिया बनाकर आजतक जीतने लोगो नें मेरा रुपया जीतना थां वोँ जीत लिया.अब मेरेसंग खेलना हैं तोँ गुड्डू मेरेसंग रहेगा.जमता हैं तोँ कहो.वरना रहनेदो.'' मोनू : "वोँ साला इतना अकलमंद लगता तौ नहीं हैं.इसमे अवश्य गुड्डू कां कुछ कियाधरा होगा.वरना उसे क्याँ पड़ी थि कि अपनेसंग गुड्डू कों लेकर घूमता.'' रिशू : "भइया, आप् समझे नहीं.लाला नें गुड्डू केँ संग 50-50 कि पार्टनरशिप कररखी हैं.जोँ भि जीत कां माल होगा, उसमे सें दोनो मिलकर शेयर करेंगे.अब गुड्डू कों जितना भि मिलरहा हैं, उसकेलिए बहोत हैं.वैसे भि उसकेसंग कोईजुआ नहीं खेलता.औऱ दूसरी तरफ लाला केँ लिए भि फायदे कां सौदा हैं.सुना हैं जब सें उसने गुड्डू कों संग मे लिया हैं, वोँ हारा नहीं हैं अब तक.हमेशा जीतकर हि निकला हैं.अब पैसे जाने सें अच्छा तोँ आनेलगे हैं उसके पास.उसे भि यह पार्टनरशिप सहीलग रही हैं.'' मोनू गहरीसोच मे डूब गय़ा। मोनू : "तोँ तुँ क्याँ चाहता हैं अब.'' रिशू (धीरे-धीरे सें) : "देखो भइया.मै यहा सिर्फ़ एक् बात बोलने आया हू.अगर आप् बोलो तौ लाला कों हाँबोल दू.अगर ऐसा हौ जाता हैं तोँ वोँ गुड्डू केँ संग आएगा औऱ वोँ दोनो मिलकर बैठेंगे.ऐसे मे अगर हम् दोनो भि मिलकर खेले.मतलब दूसरो केँ लिए हम् अलग हि होंगे.पऱ आपस मे हमारी भि पार्टनरशिप होगी.तोँ हम् दोनो मिलकर उसे औऱ राजू कों भि आसानी सें हरा सकते हें.'' मोनू नें सोचा, यह साला मेरेसंग पार्टनरशिप कि बातें कररहा हैं.यह इतना भि नहीं जानता कि उसकेसंग रश्मी हैं, औऱ उसकी क़िस्मत मे तोँ हारना लिखा भि नहीं हैं। पऱ अच्छी सें अच्छी भाग्य भि संग नहीं देतीअगर गुड्डू हाथ कि सफाई दिखाकर जुआ खेलने पऱ आँ गय़ा.ऐसे मे पार्टनरशिप करकेकम सें कम नुकसान झेलना पड़ेगा। काफ़ी देर तक सोचने केँ बाद मोनू बोला : "मुझे लगता हैं तुँ सहीकह रहा हैं.हमे भि पार्टनरशिप कर लेनी चाहिए.'' इतना कहकर उसने रिशू सें हाथ मिलाया औऱ कुछ औऱ बाते करके रिशूचला गय़ा.
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