Diwali ka Jua - 3 (Incest + Adultery) - Diwali Ki Raat – New Episode
औऱ जब रिशू बाहर् जारहा थां तोँ उपर सें रुची औऱ रश्मी नीचेउतर रही थि.उन दोनो कों एक् संग देखकर उसके लन्ड मे खुजली सि होने लगी.वोँ वहींरुक गय़ा औऱ उपर सें नीचे आँ रही रश्मी औऱ रुची केँ उछलते हुए मुम्मे देखकर ठंडी आहें भरनेलगा.
रिशू : "अरेवाउ रश्मी.लगता हैं पुरानी सहेलियो मे फिन सें दोस्ती होँ गयीँ, हैं.अच्छी जोड़ी लगरही हैं तुम् दोनो कि.''
उसकी ठरकी नज़रों कों रुची अच्छी तरह सें पहचानती थि.क्योंकि वोँ बात तौ रश्मी सें कररहा थां पऱ उसकी नज़रें उसकी छातियों पर्र थि.औऱ उसके उभरेहुए निप्पल्स देखकर वोँ उत्तेजित हौ रहा थां.शायद रश्मी जल्दबाज़ी मे बिना ब्रा केँ नीचे आँ गई, थि.
अब रुची कों क्याँ पता थां कि बिना ब्रा केँ तौ वोँ पिछले 2 दीनो सें घूमरही हैं रिशू औऱ राजू केँ सामने.
रश्मी : "अब नज़रमत लगाओ हमारी दोस्ती कों तुम्.''
औऱ इतना कहती हुईँ वोँ उसकीबगल सें निकलकर अंदर कि तरफचल दि.
औऱ जब रुची रिशू केँ पास सें निकलने लगी तोँ रिशू फुसफुसाकर बोला : "भर गयीँ, हौ पहले सें ज्यादा.''
ऐसी फब्तियाँ तोँ वोँ कईबार कस चुका थां उसकेउपर, जब भि वोँ गली सें निकलती थि.पर्र वोँ तब भि उसकोकुछ नहींबोल पाती थि औऱ नां हि अबबोल पाई.
इसकायह मतलब नहीं थां कि वोँ डरती थि.बल्कि अंदर हि अंदर उसकोयह सभी अच्छा लगता थां.अब हर लड़की तौ खुलकर नहींबोल पाती नां कि उसे भि यह छेड़छाड़ पसन्द हैं.बस मुँह फिराकर आगे निकल जाती.औऱ अपने पीछे घूमने वाले छिछोरे लड़को मे एक् औऱ नाम शामिल कर लेती.
रिशू केँ जाने केँ कुछदेर बाद रुची भि चली गई,.वैसे भि उसको काफ़ी देर हौ चुकी थि.
अबफिन सें एक् बार दोनो भइया बेहन अकेले थें.जैसे हि रश्मी नें दरवाजा बंद किया, मोनू नें पीछे सें आकर उसको एक् बारफिन सें जकड़ लिया.औऱ अपनेहाथ आगे लेजाकर उसके मुम्मो पऱ टीकादिए औऱ उसकी उभरी हुईँ गांड पर्र अपना लन्ड रगड़ने लगा.
रश्मी : "ओहो.छोड़ो नां मोनू.तुम् तोँ हर टाइम रेडी रहते होँ.अभि थोड़ी देर पहले अपनीजी एफ कि मारी हैं.अब मेरे पीछे लगकर खड़े हौ गये हौ.''
मोनू : "तुम्हारी शपथ दिदी.उसकी जब भि मारता थां तौ मेरी आँखो केँ सामने उससमय भि सिर्फ़ औऱ सिर्फ़ तुम्हारी तस्वीर रहती थि.अब मुझसे सब्र नहीं होगा.''
मोनू नें उसके बिना ब्रा केँ बूब्स कों अपनी मुट्ठी मे जकड़ते हुएकहा.
रश्मी : "ओके। ओके। मुझे सीधा तोँ होनेदो नाँ पहले.''
बड़ी मुश्किल सें मोनू नें उसके शरीर कों अपनी गिरफ़्त सें आज़ाद किया.मन तोँ नहींकर रहा थां उसकी मखमली गांड कों छोड़ने कां.
औऱ जैसे हि रश्मी उसकी गिरफ़्त सें छूटी वोँ भागकर उपर कि सीडिया चड़ती चली गई, औऱ जीभ निकाल कर उसने मोनू कों चिढ़ाया औऱ बोलि : "कुछकाम रात केँ लिए भि छोड़दो.''
औऱ देखते हि देखते वोँ भागकर अपनी मम्मी केँ कमरे मे घुस गई,.शायद वोँ भि तडप-2कर उसे अपनी बुर देना चाहती थि.क्योंकि तड़पाने केँ बादजब चुदाई होती हैं तौ उसकामजा हि निराला होता हैं। यहबात उसको अभि - २ रुची समझाकर गयीँ, थि
मोनूसाम कि तैयारी मे जुट गय़ा.खाने पीने कि चीज़े लेकर आया.आज वैसे भि छोटी दीवाली थि.पूरे मोहल्ले मे रोशनी फेली हुईँ थि.दोनो भइया बेहन नें मिलकर घऱ केँ बाहर् लाइट लगाई औऱ अपनेघऱ कों भि सॉफ सुथरा करके चमका दिया.फिन रश्मी खानां बनाने मे जुट गयीँ,.
साम कों ठीक 8 बजे रिशू औऱ राजू आँ गये.औऱ कुछदेर केँ बाद लाला औऱ गुड्डू भि पहुँच गये.
कुछ देर कि बातो केँ बादखेल शुरुआत हुआ.
तब तक रश्मी उपर हि थि.मम्मी कों खानां खिलारही थि वोँ.
पहली बाजीलगी.
सबनेबूट केँ 100 रुपयबीच मे डालदिए.
औऱ फिन सबने 3-3 ब्लाइंड चली.औऱ फिन सबसे पहले लाला नें 500 बीच मे फेंककर ब्लाइंड कों उपर बढ़ाया.
तब तक गुड्डू उसकीबगल मे हि बैठाहुआ थां.ठीक वैसे हि जैसे खेलते हुए मोनू औऱ रश्मी संग बैठते हैं.
राजू नें ब्लाइंड नहींचली औऱ अपने पत्ते उठाकर देख लिए.उसने कुछसोच समझकर 1000 रूपए कि चालचल दि.चाल आते हि रिशू नें भि अपने पत्ते उठा लिए.पऱ उसके पत्ते इतने बेकार थें कि उसने बुरा सां मुँह बनाते हुए उन्हे नीचे फेंक दिया.
अब बारी थि मोनू कि.उसने भि कुछ सोचने केँ बाद ब्लाइंड केँ 500 रूपएबीच मे फेंकदिए.
चालआने केँ बादकोई ऐसा नहीं करता.पर्र मोनू नें कर दिया.शायद कल केँ जीते पैसे उसकीजेब मे गर्मी पैदाकर रहे थें.
लाला नें गुड्डू कि तरफ देखा, गुड्डू नें भि ब्लाइंड चलने केँ लिए हि कहा.औऱ लाला नें ब्लाइंड कों बढ़ाकर 1000 कर दिया.
अब एक् बारफिन सें राजू कि बारी थि.उसके पासकोई चारा नहीं थां.उसे तोँ ब्लाइंड सें डबल पैसे फेंकने थें बीच मे.उसने बड़ी मुश्किल सें अपनीजेब सें 2000 रूपए निकाले औऱ बीच मे फेंकदिए.
हालाँकि उसकेपास पेयरआया थां, 2 कां, पऱ फिन भि वोँ डररहा थां कि कहीं दोनो मे सें किसी एक् केँ पास अच्छे पत्ते आँ गये तौ वोँ बेकार मे मारा जाएगा.
मोनू नें भि अपनी दरियादिली एक् बार औऱ दिखाते हुए 1000 कि ब्लाइंड चल दि.
अब एक् बारफिन सें लाला कि बारी थि.उसने गुड्डू कों देखा औऱ गुड्डू नें लाला केँ आगे सें 2000 रुपयउठा कर एक् बारफिन सें ब्लाइंड चल दि.
अब तोँ राजू कि फट गई,.सामने सें ब्लाइंड पर्र ब्लाइंड चलरही थि औऱ वोँ डबल करतेहुए चाल पऱ चालचल रहा थां.ऐसे मे अगर उसके पत्ते पिटगये तोँ उसका तोँ डबल नुकसान होगा.उसने मन मारते हुए पेयर होने केँ बावजूद पैककर दिया.क्योंकि अगलीचाल केँ लिए वोँ 4000 रूपए कि बलि नहीं चड़ा सकता थां.
अब सिर्फ़ लाला औऱ मोनूबचे थें बीच मे.
मोनू भि जानता थां कि ब्लाइंड खेलकर गुड्डू शायद उनको डराना चाहता हैं.पर्र अभि केँ लिए वोँ कोई औऱ रिस्क नहीं लेना चाहता थां.क्योंकि उसकालक यानी रश्मी जौ नहीं थि उसकेसंग.
उसने अपने पत्ते उठालिए.
उसकेपास सबसे बड़ा पत्ता बेगम थि.
वोँ काफ़ी देर तक सोचता रहा औऱ फिन उसने 4000 बीच मे फेंककर शो माँग लिया.
लाला नें गुड्डू कि तरफ देखा.औऱ उसे पत्ते उठाने केँ लिएकहा.
जब वोँ पत्ते उठारहा थां तोँ मोनू औऱ रिशू बड़ेगोर सें उसेदेख रहे थें, कि कहीं वोँ बीच मे अपनीहाथ कि सफाई दिखाकर पत्ते नां बदल डाले.पऱ ऐसाकुछ हुआ नहीं.क्योंकि पत्तो कों अपने सामने खिसकाने केँ बाद गुड्डू नें एक्-2 करतेहुए अपने पत्ते सामने फेंकने शुरुआत करदिए.
पहला पत्ता थां 10 नंबर.
दूसरा थां 3 नंबर.
यह दोनो पत्ते देखकर तौ मोनू कों यकीन सां होनेलगा कि आज वोँ बिना रश्मी केँ भि जीत सकता हैं.क्योंकि बीच मे करीब-करीब 10 हज़ार रुपय थें.
पऱ जैसे हि गुड्डू नें आख़िरी पत्ता फेंका, मोनू कां चेहरा उतार गय़ा.
वोँ बादशाह थां.
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मोनू नें भि बुरा सां मुँह बनाते हुए अपने पत्ते ज़ोर सें पटक दिए.सिर्फ़ एक् पत्ते सें हारा थां वोँ.क्रोध आनां तौ लाजमी थां.
औऱ मोनू सें ज्यादा क्रोध तौ राजू कों आँ रहा थां अपने उपर.क्योंकि उसकेपास पेयर थां औऱ उसके बावजूद उसनेपैक कर दिया थां। अगर उसनेपैक नहि किया होता तोँ वोँ यह बाजीजीत चुका होता
पर्र अबकुछ नहीं होँ सकता थां.
अगलीगेम कि तैयारी होनेलगी.
राजू पत्तों कों ज़ोर-2 सें पीटने लगा, शायद अपना क्रोध उनपर उताररहा थां वोँ.
औऱ जैसे हि वोँ पत्ते बाँटने लगा, पीछे सें रश्मी कि सुरीली आवाज़ आई
''आज मेरे बिना हि खेल शुरुआत कर दिया आप् लोगो नें.
रिशू औऱ राजू तौ कब सें उसका प्रतीक्षा कररहे थें.पऱ लाला नें जब देखा कि रश्मी भि वहाआकर खड़ी होँ गयीँ, हैं औऱ वोँ बहोत हि सेक्सी नाइट ड्रेस मे.तोँ उसकी बाँछे खिल उठी.उसके बारे मे सोचकर वोँ कितनी मूठमार चुका थां.कितनी लड़कियों कों उसकेसंग कम्पेयर कर चुका थां, पऱ उस जैसी लड़कीउसे पुर मोहल्ले मे नहीं दिखी थि.
औऱ जबउसे गोर सें देखने केँ बाद लाला कों यह एहसास हुआ कि उसने ब्रा नहीं पहनी हैं तोँ उसका लन्ड जींस केँ अंदर बड़ी ज़ोर सें कसमसाने लगा.
उसनेसोच लिया कि जब सामने सें वोँ स्वयं चलकर आँ रही हैं तोँ उसपर एक् बार तोँ चांस लेना बनता हि हैं.
सब नें रश्मी कां स्वागत किया खड़े होकर.औऱ रश्मी लचकति हुईँ सि आई औऱ मोनू कि बगल मे आकरबैठ गई,।
रिशू नें लाला कों समझा दिया कि वोँ भि एक्-दो दिनों सें उनकेसंग खेलरही हैं.अपने भइया केँ संग याँ उसकी स्थान पर्र.इस बात सें भला लाला कों क्याँ प्राब्लम होँ सकती थि, क्योंकि वोँ तोँ स्वयं हि गुड्डू केँ भरोसे खेलरहा थां.
पर्र लाला केँ दिमाग़ मे एक् हि बातचल रही थि कि केसे रश्मी कों शीशे मे उतारकर उसकेसंग मजा लियाजाए.
अभि तौ खेल शुरुआत हि हुआ थां.अभि तौ पूरीरात पड़ी थि उसकाम केँ लिए.
अब तौ लाला किसी भि तरह रश्मी कों इंप्रेस करना चाहता थां.उसने गुड्डू केँ कान मे बोल दिया कि अब वोँ बिना उसकी हेल्प केँ खेलेगा.क्योंकि यहबात वोँ भि जानता थां कि जब गुड्डू उसकी हेल्प नहीं करता तोँ वोँ हारता हि हैं.औऱ रश्मी केँ हाथो हारकर वोँ उसेखुश करना चाहता थां औऱ इंप्रेस भि.
गुड्डू समझ गय़ा कि लाला बावला हौ गय़ा हैं लोंडिया देखकर.पऱ वोँ कर भि क्याँ सकता थां.उसके पैसे तोँ थें नहीं जोँ वोँ चिंता करता.वोँ आहिस्ता पीछे होकरबैठ गय़ा औऱ खेल देखने लगा.
अगलीगेम शुरुआत हुई.
सबनेबूट केँ 100-100 रुपएबीच मे डाल दिए.सबसे पहली ब्लाइंड चलने कि बारी लाला कि हि आई, उसने ब्लाइंड केँ लिए सीधा 500 रुपयबीच मे फेंकदिए.
राजू कि तोँ पहले सें हि फटी पड़ी थि.उसने अपने पत्ते उठालिए, उसकेपास 2, 3, 5 आया थां.यानी सबसे छोटे औऱ बेकार पत्ते.उसने अपना माथापीट लिया औऱ पत्ते नीचे फेंकदिए.
अब रिशू कि बारी थि, उसने भि ब्लाइंड केँ 500 नीचे फेंकदिए.
रश्मी तोँ जैसे जानती हि थि कि वोँ हि जीतेगी, उसने ब्लाइंड कों डबल करतेहुए 1000 रुपएबीच मे फेंक दिए.इतनी दरियादिली तोँ गुड्डू नें भि किसी मे नहीं देखी थि.लाला भि रैरान सां होकररह गय़ा, वोँ समझरहे थें कि वोँ अपनी नादानी मे ऐसे 1000 कि ब्लाइंड खेल गयीँ,.पऱ लाला भि पीछे रहने वालो सें नहीं थां.उसे तोँ रश्मी कों वैसे भि इंप्रेस करना थां.इसलिये उसने भि ब्लाइंड कों.डबल करतेहुए 2000 बीच मे फेंकदिए.
औऱ इन दोनो केँ बीच बेचारा रिशूफँस कररह गय़ा.2000 कि ब्लाइंड चलने कां उसे शोंककोई नहीं थां.उसने झट सें पत्ते उठा लिए.औऱ उन्हे देखते हि उसकेदिल कि धड़कन तेज होँ गई,.उसके पास सीक़वेंस आया थां.8, 9, 10.
उसने अपनी खुशी कों चेहरे पर्र नहींआने दिया, औऱ कुछ सोचने केँ बाद 4000 कि चालचल दि.
रिशू जैसे बंदे कि तरफ सें चालआती देखकर मोनूसमझ गय़ा कि उसकेपास अवश्य बढ़िया पत्ते हि आए होंगे.उसने रश्मी कों पत्ते उठाने केँ लिए कहा.पहले तौ रश्मी नें मनाकर दिया, क्योंकि वोँ कल सें एक् भि गेम नहीं हारी थि.औऱउसे विश्वास थां कि यहगेम भि वही जीतेगी.पऱ मोनू केँ ज़िद करने केँ बाद उसने पत्ते उठालिए.
लाला कि नज़रें गेम सें ज्यादा रश्मी कां बदन नापने मे लगी थि.वोँ उसकेहर अंग कों अपनी आँखों सें चोदरहा थां.अपने होंठों पर्र जीभ फिराता हुआ लाला भूखी नज़रों सें रश्मी कों घूरेजा रहा थां.वोँ सोचने लगा कि काशइस समय रश्मी बिना कपड़ों केँ उसके सामने बैठी होती, वोँ तोँ अपनी सारी दौलत लुटा देता उसकेउपर.
वैसे भि बिना ब्रा केँ वोँ करीब नंगी हालत मे हि थि.क्योंकि काफ़ी गोर सें देखने पऱ उसके उभारों केँ उपर हल्के-2 भूरेरंग केँ निप्पल सॉफ दिखाई देरहे थें.पऱ शायदइस बात कां रश्मी औऱ मोनू कों एहसास नहीं थां, क्योंकि पास सें देखने मे कुछ नहींदिख रहा थां, दूर बैठे लाला कों वोँ साफ़दिख रहा थां, शायद कपड़े केँ रंग कि वजह सें ऐसा थां। वैसे एक् बात औऱ भि हैं, ऐसे ठरकी लोगों कों अंदर तक कां सामान दिख हि जाता हैं, लड़कियां कितना भि छुपाना चाहे, ठरकी लड़के उनके कपड़े भेदकर सभीपता लगा लेते हें, औऱ यहा तौ रश्मी खुल्लम खुलासभी दिखती हुईँ सि बैठी थि, वोँ भला केसेबच पाती लाला कि चुदासी भरी नजरों सें
औऱ इधर मोनू औऱ रश्मी भि अपनी खुशी कंट्रोल नहींकर पारहे थें.उनके पास पत्ते आए हि ऐसे थें.मोनू तौ प्राचीन खिलाड़ी थां, इसलिये उसने खुशी केँ भाव चेहरे पऱ नहींआने दिए, पर्र रश्मी केँ चेहरे कि चमकबता रही थि कि इसबार भि उसका जलवा चलने वाला हैं.
मोनू नें भि 4000 कि चालचल दि.
अब लाला कों भि पत्ते उठाने हि पड़े, क्योंकि जिसके लिए वोँ पैसे लूटारहा थां वोँ तोँ स्वयं हि चालचल बैठी थि.
उसने अपने पत्ते देखे.औऱ गुड्डू कों भि दिखाए.भले हि उसने पहले उसकी हेल्प लेने सें मनाकर दिया थां, पर्र २-२चाल आने केँ बाद उसने गुड्डू कि सलाह लेनी हि उचित समझी, पत्ते तोँ उनकेपास अच्छे हि आए थें.कुछ देर सोचने केँ बाद गुड्डू नें उसेचाल चलने केँ लिए कहा.शायद यह सोचकर कि रश्मी केँ पासकुछ खास नहीं होगा.औऱ नाँ हि रिशू केँ पास.
यहा लाला एक् बारफिन सें रश्मी कों इंप्रेस करने केँ चक्कर मे चाल कों डबल करतेहुए 8000 पऱ लेँ गय़ा, अब बारीफिन सें रिशू कि थि.उसके पास पत्ते तोँ काफ़ी जबरदस्त थें, पऱ एक् प्राब्लम भि थि.वोँ आज केँ लिए सिर्फ़ 30 हज़ार रुपय हि लाया थां घऱ सें.अगर ऐसी 2-3 चाले औऱ चलनी पड़ी तोँ वोँ आगेखेल हि नहीं पाएगा.पऱ फिन भि एक् चाल औऱ चलनी तौ बनती हि थि.यह सोचकर कि शायद सामने सें कोई पीछेहट जाए औऱ वोँ दूसरे सें शो माँग लेँ, ऐसे मे जितने भि आँ जाएँ, वही बहोत हैं.
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रश्मी कि बारीआते हि मोनू नें बिना किसी झिझक केँ 8 हज़ार निकाल कर नीचे फेंकदिए.
औऱ इसबार लाला नें चालडबल नहीं कि, पऱ चाल अवश्य चल दि 8 हज़ार कि.
अब तौ रिशू कां दिल धड़कने लगा.पत्ते तोँ उसकेपास अच्छे हि थें.औऱ जेब मे सिर्फ़ 16-17 हज़ार केँ आसपास बचे थें.
उसनेमन कों कड़ा करतेहुए एक् निर्णय लिया औऱ 16000 बीच मे फेंकते हुए दोनो सें शो माँगली.
अब उसकीजेब मे कुछ भि नहींबचा थां.पर्र अंदर सें उसे विश्वास थां कि वही जीतेगा.
अपने पत्ते रिशू नें नीचे फेंक दिए.औऱ लाला कि तरफ देखा.
लाला नें भि अपने पत्ते सामने रखदिए, उसकेपास इक्के कां कलरआया थां.पर्र सीक्वेंस केँ आगे वोँ भि बेकार थें.रिशू खुश होँ गय़ा.
अब बारी थि रश्मी कि.पऱ रिशू केँ पत्तो कों देखने केँ बाद वोँ थोड़ी कन्फ्यूज़ थि.औऱ वोँ किसलिए थि, वोँ भि जल्द हि पताचल गय़ा.क्योंकि उसनेजब अपने पत्ते सामने फेंके तोँ उसकेपास भि सीक़वेंस थां.औऱ वोँ भि सेमटू सेम रिशू जैसा 8, 9, 10.
रश्मी तोँ ज्यादा नहीं जानती थि खेल केँ बारे मे कि ऐसी स्थिति मे क्याँ होता हैं.पऱ उन जुआरियों कों वोँ पता थां, औऱ दोनोतरफ केँ पत्ते देखने केँ बाद गुड्डू एकदम सें बोला : "यह बाजी रश्मी कि हुईँ.उसके पास हुक्म कां 10 हैं.''
औऱ यहसही भि थां.सेम पत्तो मे जब बाजीफँस जाती हैं तौ सबसे बड़े पत्ते कों देखा जाता हैं, जिसके पास हुक्म कां आँ जाए, वही जीत जाता हैं.
रिशू कों तोँ विश्वास हि नहीं होँ रहा थां कि उसकी भाग्य इतनी खराब भि होँ सकती हैं, पहलीबार ढंग केँ पत्ते आए औऱ वोँ भि क्लैश करगये रश्मी केँ संग.औऱ अंत मे वोँ जीत भि गयीँ,.
लगभग 45 हज़ार जीत गयीँ, थि रश्मी एक् हि झटके मे.
वोँ तोँ खुशी सें चिल्ला हि उठी.औऱ सारे पैसे अपनीतरफ करतेहुए उसके निप्पल्स भि पहले सें ज्यादा उभरकर बाहर् आँ चुके थें.औऱ यह देखकर लाला बड़ा हि खुश हुआ.जैसे उसके सारे पैसे वसूल हौ गये हौ.लाला नें यह भि नोट किया कि पैसे देखकर रश्मी कितनी खुश हैं.वोँ सोचने लगा कि क्याँ पैसे देकर वोँ उसकी बुर भि लेँ सकता हैं.
पहलीगेम हि इतनी मोटी होँ गयीँ, थि कि आने वाली गेम्स मे क्याँ होगायह सब सोचने लगे.
पऱ रिशू कि हालत खराब थि.वोँ अपने सारे पैसेहार चुका थां, उसने मोनू सें कुछ पैसे उधार माँगे, क्योंकि उन दोनो मे पहले भि उधार चलता रहता थां, औऱ मोनू वैसे भि काफ़ी मालजीत चुका थां, इसलिये उसने रिशू कों आगे खेलने केँ लिए 20 हज़ार रुपय उधारदे दिए.
एक् बारफिन सें गेम शुरुआत हुई.पर्र शुरुआत होने सें पहले हि रिशू बोला : "देखो भाइयों, मेरेपास तोँ ज्यादा पैसे हैं नहीं.इसलिये रिक्वेस्ट हैं कि मोटीगेम मत खेलो.ब्लाइंड भि 500 सें ज्यादा नहीं औऱ चाल भि 1000 सें अधिक नहीं.''
उसकीबात सुनकर राजू भि बोल पड़ा : "सहीकहा रिशू.मेरे पास भि ज्यादा माल नहीं हैं.ऐसे तौ हम् आधे घंटे मे हि खाली होकरबैठ जाएँगे.आज तौ पूरीरात कां प्रोग्राम हैं नां.''
मोनू तोँ मोटामाल जीत चुका थां, इसलिये उसने आपत्ति उठाई : "अरे नहीं, ऐसा केसे होगा.जिसकी जितनी मर्ज़ी होगी, वोँ उतना खेलेगा.''
औऱ लाला नें भि उसकासंग दिया.वोँ बोला : "सहीकहा मोनू.ऐसे छोटीगेम मे मजा हि नहींआता.
तभी रश्मी बीच मे बोल पड़ी : "मेरेपास एक् प्लान हैं.जौ बड़ी ग़मे खेलना चाहते हें, वोँ अलग खेले औऱ जोँ छोटी खेलना चाहते हें, वोँ अलग.''
उसकीबात सब कों जाच गयीँ,.अब बड़ीगेम खेलने वालो मे सिर्फ़ रश्मी औऱ लाला हि थें.औऱ उनके निकल जाने केँ बाद पीछे सिर्फ़ राजू औऱ रिशू हि बचते थें.क्योंकि गुड्डू औऱ मोनू तोँ सिर्फ़ संग देने केँ लिए बैठे थें.
पर्र मोनू कां दिमाग़ बड़ी तेज़ी सें चलरहा थां.वोँ अच्छी तरह सें जानता थां कि उसकी बेहन कों तौ कोईहरा हि नहीं सकता.एक् पर्सेंट शायद हौ भि सकता हैं कि वोँ हारजाए अगर लाला केँ संग गुड्डू रहा तोँ.इसलिये लाला औऱ गुड्डू कों अलग करना ज़रूरी थां.पर्र ऐसा क्याँ कियाजाए कि दोनोअलग होँ जाए। औऱ वोँ यह अच्छी तरह सें जानता थां कि अगर रश्मी औऱ लाला अकेले खेलेंगे तोँ रश्मी हि जीतेगी.
मोनू अचानक सें बोला : "एक् काम करते हें, मे भि इस छोटे वाले ग्रुप मे खेलता हूं.औऱ गुड्डू तुम् भि आँ जाओ यहीं पर्र, तुम् भि अपनाहाथ आजमाओ.''
अपने ग्रूप मे शामिल करके वोँ गुड्डू औऱ लाला कि जुगलबंदी कों तोड़ना चाहता थां.गुड्डू नें इसलिये कुछ नहीं बोला क्योंकि वोँ जानता थां कि जुआ खेलकर वोँ जीतगा हि.औऱ लाला इसलिये नहीं बोला कि रश्मी केँ संग अकेले मे खेलने कां मौका जोँ मिलरहा थां उसको.
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