Diwali ka Jua - 3 (Incest + Adultery) - Diwali Ki Raat – New Episode
Update 8
पर्र रिशू औऱ राजू कों यहसभी सही नहीं लगा.वोँ भि तोँ रश्मी केँ संग खेलना चाहते थें.पर्र वोँ भि कुछ नहींबोल पाए, क्योंकि छोटीगेम खेलने कि बात तोँ उन्होने हि शुरुआत कि थि, रश्मी केँ संग खेलना हैं तोँ जेब मे माल होना चाहिए.वरना मोनू औऱ गुड्डू केँ संग हि खेलो.
लाला औऱ रश्मी सोफे सें उठ खड़ेहुए.
मोनू नें अबऐसी बात बोलि जिसे सुनकर लाला कि तौ बाँछे हि खिल उठी.औऱ रिशू औऱ राजू कि रहीसही मुस्कान भि जातीरही.
मोनू : "रश्मी, तुम् एक् काम करो.यहा अधिक स्थान तोँ हैं नहीं.तुम् औऱ लालाउपर मेरे कमरे मे चले जाओ.वहा धीरे-धीरे खेलना.हम् लोग नीचे खेलते हें.''
रश्मी कों भि विश्वास नहींहुआ कि उसका भइयाऐसे क्यूं बोलरहा हैं.मगर बात तोँ सही थि, नीचे केँ छोटे सें कमरे मे अधिक स्थान तोँ थि नहीं.सिर्फ़ एक् फाइव सीटर सोफा हि बिछा थां.औऱ बाकी कि स्थान पर्र टेलीविज़न ट्रॉल्ली, अलमारी औऱ एक् बड़ा सां शोकेस रखा थां
पर्र मोनू नें यहबात इसलिये भि बोलि थि कि उनसब केँ सामने अगर वोँ दोनो खेलेंगे, औऱ बीच-2 मे अगर गुड्डू नें लाला कि सहायता करने कि कोशिश कि तोँ प्राब्लम होँ जाएगी.इसलिये मोनू नहीं चाहता थां कि वोँ वहा बैठकर खेले.जबकि अपनी जवान बेहन कों लाला जैसे ठरकी केँ संगउपर भेजना काफ़ी ख़तरनाक थां.पर्र यह सोचकर कि वोँ भला उनके नीचे रहते क्याँ कर पायेगा, उसने उन्हे उपर जाने कां आदेशदे डाला.
रश्मी कों कोई प्राब्लम नहीं थि.वोँ तोँ इतने पैसे जीतने केँ बादहवा मे उड़रही थि.औऱ रश्मी केँ संगउपर अकेले मे खेलने केँ बारे मे सोचकर लाला भि उसीहवा मे उसकीबगल मे उड़रहा थां.
रश्मी अपनी गांड मटकाती हुई उपर कि तरफचल दि.
औऱ उसकी महीन नाईटी मे थरकरही नंगी गांड कों देखते -2 लाला भि सम्मोहित सां होकर उसके पीछेउपर चल दिया.
लाला कों तौ विश्वास हि नहीं होँ रहा थां कि वोँ रश्मी केँ संग अकेला हैं.मोनू केँ रूम मे जाते हि लाला तोँ किसीरईस अय्याश कि तरह बिस्तर पऱ लेट गय़ा, जैसे मुज़रा सुनने आया हौ वहा पऱ.औऱ लेटने केँ संग हि उसने अपनी दोनो जेबों मे सें पैसों कि गड्डियां निकाल कर अपने सामने रख दि.शायद रश्मी कों इंप्रेस करने केँ लिए.वोँ करीब-करीब 2 लाख रुपय थें.लाल नोटों कि गड्डियां देखकर रश्मी कि तोँ आँखे हि फटने कों आँ गयीँ,.औऱ अंदर सें तौ उसे जैसेयह विश्वास भि हौ चुका थां कि कुछ हि देर मे वोँ सारा रुपया उसकेपास होगा.
वोँ आँखे फाड़कर नोटों कों देखरही थि औऱ लाला उसके चेहरे औऱ मुम्मों कों.एक्ससाइटमेंट कि वजह सें उसकेउपर नीचे हौ रहे सीने कों देखकर वोँ काफ़ी खुश सां हौ रहा थां.औऱ जब उसने देखा कि रश्मी कि नज़रें उसकेआगे रखे पैसों कि तरफ हैं तौ उसके कमीने दिमाग़ मे एक् आइडिया आया.वोँ सारे पैसे उसके लन्ड केँ बिल्कुल आगे कि तरफरखे थें.औऱ वोँ तौ कब सें खड़ा होकर अंदर हि अंदर हुंकार रहा थां.उसने बड़ी हि बेशर्मी कां प्रदर्शन करतेहुए अपने लन्ड कों ज़ोर सें खुजलाना शुरुआत कर दिया.जैसे अंदर सें उसेकोई कीड़ा काटरहा हौ.
अपनी नज़र केँ सामने पड़े पैसों केँ बिल्कुल पीछेऐसी हलचल होती देखकर रश्मी कां भि ध्यान उसतरफ चला गय़ा.औऱ जबउसे एहसास हुआ कि वोँ कर क्याँ रहा हैं तौ उसका चेहरा लाल सुर्ख हौ उठा.क्योंकि पेंट केँ उपर सें उसकेइंच केँ मोटे लन्ड कि रूपरेखा साफदिख रही थि.वोँ अपने हथियार कों उपर सें नीचे तक सहलारहा थां, उंगलियों केँ नाखूनों सें नोच सां रहा थां.औऱ उत्तेजना मे भरकर वोँ किसी बँधेहुए जानवर कि तरह हिनहीना रहा थां अपने पिंजरे मे.
रश्मी नें तौ अभि तक सिर्फ़ मोनू कां हि लन्ड देखा थां.औऱ अब दूसरे कों करीब-करीब देख हि लिया थां.मतलब उसकी लंबाई कां अंदाज़ा तौ लग हि रहा थां उसकी पेंट सें.उसकी लाइफ कि सबसे ज़रूरी चीज़े उसके सामने थि इस समय.रुपया भि औऱ लन्ड भि.पऱ अभि तक उसने दोनो कों सही सें एंजाय नहीं किया थां.पैसे तोँ वोँ खेरकर हि लेगी.पर्र लन्ड कां मजा लेने केँ लिए वोँ ज्यादा प्रतीक्षा नहीं करना चाहती थि.
लाला भि समझ चुका थां कि वोँ अपने प्लान मे सफलरहा हैं.
लाला : "बैठो नाँ रश्मी.पूरी रात हैं हमारे पास.यह देखन दिखाई भि करते रहते.''
उसने उसके मोटे-2 मुम्मों कों घूरते हुएकहा.
रश्मी नें शरमाकर अपना मुँह झुका लिया.वोँ समझ गयीँ, कि उसका इशारा किसतरफ हैं.
रश्मी उसके सामने अपनी टांगे मोड़कर बैठ गयीँ,। लाला नें पत्ते बाँटे औऱ खेल शुरुआत हुआ.
जैसा कि डिसाईड हौ चुका थां, ब्लाइंड 500 कि चली गई,.3-3 ब्लाइंड चलने केँ बाद एकदम सें लाला नें ब्लाइंड कों बढ़ाकर 1000 कर दिया.रश्मी नें भि 1000 कि ब्लाइंड चल दि.
2 ब्लाइंड चलने केँ बाद नाँ जाने रश्मी केँ मन मे क्याँ आया, उसने अपने पत्ते उठा लिए.लाला तौ सोचकर बैठा थां कि वोँ तब तक नहीं उठाएगा, जब तक रश्मी नहीं उठाती.पैसे कि कमी तोँ थि नहीं उसके पास.इसलिये वोँ पीछे नहीं हटना चाहता थां.
रश्मी केँ पास हमेशा कि तरहचाल चलने लायक पत्ते आए थें.9 कां पेयर थां उसकेपास.
उसने अगले हि समय 2 हज़ार कि चालचल दि.अब लाला नें भि अपने पत्ते उठा लिए.उसके पास सबसे बड़ा पत्ता बादशाह थां.कुछ ख़ास नहीं थां उसकेपास, औऱ सामने सें चाल भि आँ चुकी थि.पर्र फिन भि रश्मी केँ चेहरे पर्र थोड़ी औऱ खुशी देखने केँ लिए उसने भि 2 हज़ार बीच मे फेंके औऱ शो माँग लिया.
लाला नें अपने पत्ते सामने रखे औऱ रश्मी नें अपने.औऱ दोनोतरफ केँ पत्ते देखकर रश्मी नें खुशी सें एक् चीखमार दि.औऱ सारे पैसे अपनीतरफ करलिए.
नीचे बैठे मोनू कों वोँ खुशी सें भरीचीख सुनाई दे गयीँ,.औऱ वोँ समझ गय़ा कि उपर कि कमाई शुरुआत हौ चुकी हैं.
लाला : "रश्मी.तुम्हारी भाग्य सच मे बड़ी कमाल कि हैं.वैसे तोँ मैनेआज तक किसी लड़की केँ संगजुआ नहीं खेला.आज खेला भि तोँ तुम्हारे संग, जिसके हाथों हारने मे भि कोई तकलीफ़ नहीं हैं मुझे.''
रश्मी समझ गयीँ, कि वोँ उसकेउपर लाइनमार रहा हैं.अब हसीन लड़कियों कि यह सबसे बड़ी प्राब्लम होती हैं.उन्हे पता होता हैं कि एक् आदमी पहले सें सेट हैं उनकेहाथ (मोनू) पर्र फिन भि नये आशिक़ों कों वोँ मना नहीं करती.अपने उपर मरने वालों मे एक् औऱ नाम लिखवाने मे भला किसे प्राब्लम हौ सकती हैं.
लाला कि दिलफेंकी वैसे भि पूरे मोहल्ले मे माशूर थि.गली सें निकलते हुए पहले भि वोँ कईबार उसकी भूखी आँखों कां सामना कर चुकी थि.पऱआज माहौल अलग थां.वोँ अपने पैसे लुटवाने केँ लिए उसके सामने सजधजकर बैठा थां.औऱ उपर सें उसपर लाइन भि माररहा थां.दोनो हि बातें रश्मी कों पसन्द आँ रही थि.
रश्मी नें गोर किया कि लाला कां हाथ अभि भि उसके लन्ड केँ उपरसरक रहा हैं.जैसे वोँ जान बूझकर उसे अपने लन्ड कों दिखाना चाहता थां.रश्मी कि बुर मे भि खुजली सि होने लगी.शायद मोनू होता उसके सामने तोँ वोँ भि अपनी बुर वाले हिस्से कों रगड़कर वहा कि खुजली मिटा लेती.पऱ लाला केँ सामने ऐसा करनाउसे सही नहीं लगा.वोँ बस अपनी दोनो जांघों कों भींचकर आपस मे रगड़ने लगी.ताकि लाला कों पता नाँ चले कि वोँ कर क्याँ रही हैं.
पऱ लाला तौ एक् नंबर कां हरामी थां, उसके पैरों कि हल्की हरकत कों देखकर वोँ एक् हि लम्हा मे समझ गय़ा कि वोँ क्याँ कररही हैं.यानी वोँ इस वक्त उत्तेजित हैं औऱ अगर वोँ अपनीतरफ सें थोड़ी सि कोशिश करे तौ उसकाकाम बन सकता हैं.
लाला नें अपनी टांगे थोड़ी औऱ फेलाकर रख दि.औऱऐसा करने सें उसकेआगे वाला हिस्सा औऱ भि अधिकफूल कर बाहर् कि तरफ निकल आया.ऐसा लगरहा थां कि उसकी पेंट केँ अंदर बाँस कां बंबूलगा कर टेंट बनाया गय़ा हैं.
.औऱ बेशरम लालाउसे छुपाने केँ बजाए औऱ भि ज्यादा उभारकर दिखाने कि कोशिश कररहा थां.
अगले पत्ते रश्मी नें बाँटे.पर्र उसका ध्यान सिर्फ़ औऱ सिर्फ़ तंबू औऱ बंबू पर्र हि थां.
3 ब्लाइंड चलने केँ बाद लाला नें 1000 कि दो ब्लाइंड औऱ चल दि.इसबार रश्मी नें भि सोच लिया थां कि वोँ पत्ते नहीं उठाएगी.उसने 2 हज़ार कि ब्लाइंड कर दि.लाला नें भि उसकासंग दिया.अगली 3 ब्लाइंड 2 हज़ार कि आई.ब्लाइंड मे हि इतना रुपया इकट्ठा हौ चुका थां, जितना कि नीचे बैठे जुआरी चाल चलने केँ बाद भि इकट्ठा नहींकर पारहे थें.
अब लाला नें थोडा औऱ आगे बढ़ने कि सोची.
अभि तक होता क्याँ थां, लालाजब भि ब्लाइंड याँ चाल चलता थां, अपने पैसेचूम कर नीचे फेंकता थां.औऱ पत्ते भि पहले चूमता थां औऱ उसकेबाद देखता थां.यह उसका टोटका थां, जौ अभि तक चला नहि थां
इसबार जब उसने अपनी अगलीचाल चली तोँ पैसे अपने होंठों सें चूमने केँ बदले अपने खड़ेहुए लन्ड पऱ घिसकर दिए.पहली बार लाला कों ऐसा करते देखकर रश्मी हैरान भि हुई औऱ शरम सें लाल भि.पऱजब अगलीबार उसनेफिन सें ऐसा किया तौ उससेरहा नहीं गय़ा, वोँ बोल पड़ी : "अबयह क्याँ तरीका हैं.''
उसने उसकी टाँगो केँ बीच इशारा करतेहुए कहा.
लाला (मुस्कुराते हुए) : "यह मेरा टोटका हैं.जब मे हारने लगताहू तौ अपने साथी कि सहायता लेता हू.अब गुड्डू तोँ नीचे बैठा हैं, इसलिये अपने दूसरे मित्र कि सहायता लेँ रहाहू.''
रश्मी (हँसते हुए, शरारती आवाज़ मे बोलीं ) : "ऐसा थोड़े हि होता हैं.''
रश्मी कों अपनी बातों मे फँसता देखकर लाला बोला : "अबयह तौ इसगेम केँ बाद हि पता चलेगा.''
रश्मी कों भि डर सां लगनेलग गय़ा.वैसे भि बीच मे करीब-करीब 15 हज़ार आँ हि चुके थें.उसने अपने पत्ते उठाकर देख लिए.इस बार पहली दफ़ा उसकेपास ढंग केँ पत्ते नहींआए थें.बादशाह, बेगम औऱ चोक्की.पर्र फिन भि उसने 2000 बीच मे फेंकते हुएशो माँग लिया.
लाला नें उसके पत्ते देखे.औऱ फिन अपने पत्ते उठा लिए.औऱ उन्हे फिन सें एक् बार अपने खड़ेहुए लन्ड पर्र रगड़ा औऱ स्वयं बिना देखे उन्हे नीचे फेंक दिया.
उसकेपास 1, 2, 3 कि सीक़वेंस आई थि.लाला कों तौ स्वयं हि विश्वास नहींहुआ कि उसकेपास इतने बढ़िया पत्ते आए हें.औऱ वोँ भि उस वक्तजब उसने लन्ड पर्र रगड़ने वाले टोटके कां तुक्का मारा थां.आज सें पहले उसनेऐसा कुछ भि नहीं किया थां.वोँ तौ बस रश्मी कों उकसाने केँ लिए औऱ उसे अपनीतरफ आकर्षित करने केँ लिए उसनेबोल दिया थां.पर्र वोँ नहीं जानता थां कि असल मे वोँ जीत जाएगा.पर्र जौ भि थां, वोँ अंदर सें काफ़ी खुश हौ रहा थां.क्योंकि अब रश्मी कों उसकीबात पर्र विश्वास होँ जाएगा.औऱ वोँ खुलकर वोँ सभीकर सकेगा जौ उसने पहले सें सोच लिया थां.
रश्मी भि पहलीबार हारकर थोडा मायूस थि.जब सें उसनेतीन पत्ती खेलना शुरुआत किया थां, वोँ हारी हि नहीं थि.शायद ओवर कॉन्फिडेंट हौ चुकी थि वोँ.वोँ सोचने लग गई, कि ऐसा क्योहुआ, क्याँ लाला नें जोँ टोटका अपनाया उसकीवजह सें.वोँ सही भि थां शायद.क्योंकि अभि तक वोँ स्वयं भि तोँ बिना अंडरगारमेंट्स केँ खेलरही थि.वोँ भि तोँ एक् टोटका हि थां, क्योंकि पहलेजब वोँ मोनू केँ संग अंदर केँ कपड़े पहनकर खेली थि तौ वोँ हारती जारही थि.मोनू नें हि उसेयह सलाह दि थि.औऱजब सें उसने अपनी ब्रा औऱ पेंटी उतारकर खेलना शुरुआत किया वोँ हारी हि नहीं.पर्र अबहार गयीँ,.औऱ वोँ शायद इसलिये कि शायद उसका टोटका अधिक भारीपड़ गय़ा उसकेउपर.
अब वोँ बेचारी उन बातों मे इतनी अंदर तक घुस गई, थि कि यह भि नहींसमझ पारही थि कि यह सिर्फ इत्तेफ़ाक़ थां.ऐसे पत्तों पऱ किसी कां भि ज़ोर नहीं चलता.औऱ अभि तक सिर्फ़ औऱ सिर्फ़ उसकी भाग्य हि उसकासंग देरही थि.मोनू नें भि केवलमजे लेने केँ लिए उसके अंडरगारमेंट्स निकलवाए थें, औऱ वोँ उसकेमजे भि लेँ चूका थां, पऱ बेचारी रश्मी समझकर बैठी थि कि वोँ इसीवजह सें जीतरही हैं.
लाला नें पैसे समेटलिए औऱ गोर सें उसके चेहरे कों देखते हुएयह जानने कि कोशिश करनेलगा कि रश्मी केँ दिमाग़ मे चल क्याँ रहा हैं.
खेर, जब अगलीगेम शुरुआत हुइ तोँ लाला नें फिन सें वही हरकत करनी शुरुआत कर दि.औऱइस बार तौ वोँ औऱ भि अधिक बेशर्मी पऱ उतर आया.यह जानते हुए भि कि रश्मी ताड़-2कर वहींदेख रही हैं, वोँ अपने खड़े लन्ड पऱ लाल नोटों कों ज़ोर-2 सें रगड़कर नीचे फेंकने लगा.
इस बार रश्मी नें चांस नहीं लिया.वोँ देख्ना चाहती थि कि क्याँ इसबार भि लाला कां टोटका काम करेगा.उसने अपने पत्ते उठा लिए.उसके पास 3 कां पेयरआया थां.पत्ते एक् बारफिन सें चाल चलने लायक थें.इसलिये उसने 2000 कि चालचल दि.पर्र लाला नें बिना पत्ते देखे, एक् बारफिन 1000 कां नोट अपने खड़े लन्ड पऱ मसलकर नीचे फेंक दिया.अब रश्मी फिन सें घबराने लगी, क्योंकि लाला एक् दम कॉन्फिडेंट होकर वोँ ब्लाइंड चलरहा थां.जैसे वोँ जानता हौ कि उसकेपास बड़िया पत्ते हि आएँगे.
अब मोनू भि उसकेसंग नहीं थां, जिससे पूछकर वोँ कोई डिसीसन लें सकती.उसने अपनेदिल कि बात मानते हुएशो माँग लिया। लाला नें फिन सें एक् बार बिना देखे हि अपने तीनों पत्ते उसके सामने पलट दिए.औऱ उन्हे देखकर रश्मी कों पक्का विश्वास हौ गय़ा कि अब उसका नहीं बल्कि लाला कां टोटका हावी हैं गेम पर्र। क्योंकि उसकेपास 10 कां पेयरआया थां.
लाला नें मुस्कुराते हुए एक् बारफिन सें वोँ सारे पैसे समेटलिए.
लाला : "देखा.मैनेकहा थां नाँ.मेरा टोटका हैं यह.''
रश्मी नें भि सोच लिया कि वोँ भि यह टोटका ट्राइ करेगी.
अगली ब्लाइंड चलने सें पहले रश्मी नें वोँ किया जोँ लाला नें सोचा भि नहीं थां.रश्मी नें 1000 कां नोट लेकर सीधा अपने मुम्मे पर्र रगड़ा औऱ उसे नीचे फेंक दिया.
लाला : "हाहाहा.तौ तुम् भि इन बातों पर्र विश्वास करती हौ.''
रश्मी : "हाँ.तभी तौ मैने अंदरकुछ भि नहीं.''
वोँ बोलते-2 रुक गयीँ,.पऱ तब तक बहोत देर हौ चुकी थि.लाला कों उसकी ब्रा औऱ पेंटी केँ गायब होने कां राजपता चल चुका थां.औऱ वोँ यह सुनकर बड़ी हि बेशर्मी सें अपने होंठों पऱ जीभ फेरता हुआ मुस्कुराने लगा.
लाला : "इसमें शरमाने कि क्याँ बात हैं.सही हैं.अगर तुम् उसकीवजह सें जीतरही हौ तोँ इसमे नुकसान हि क्याँ हैं.बस सामने बैठे लोगो कों थोड़ी तकलीफ़ हौ जाती हैं, पर्र उससे तुम्हे क्याँ, तुम्हे तोँ जीतने सें मतलब हैं बस.''
रश्मी उसकीबात सुनकर लज्जा सें गड़ीजा रही थि.
अगलीबार फिन सें लाला नें 2 हज़ार कां नोट अपने लन्ड सें रगड़ा.औऱ फिन उसकेबाद रश्मी नें भि अपने मुम्मे पऱ.अब वोँ ऐसा करतेहुए शरमा भि नहींरही थि.अपने हि हाथों अपने मुम्मे कों रगड़ना औऱ वोँ भि लाला केँ सामने, उसे पूरीतरह सें उत्तेजित कररहा थां.उसके जिस्म मे चींटियाँ सि काटरही थि.वोँ करारे नोट कों जब अपने खड़ेहुए निप्पल केँ उपर रगड़ती तौ एक् अजीब सि झनझनाहट होती उसकेबदन मे.औऱ वोँ बेचारी सिसक भि नहीं सकती थि.बस दाँतो सें होंठदबा कर ब्लाइंड चलतीरही.
कुछदेर बाद रश्मी नें अपने पत्ते उठा हि लिए.उसके पास सिर्फ़ इक्का औऱ 5, 9 नंबरआए थें.इकके केँ बल पर्र चाल चलना काफ़ी रिस्की थां, पऱ वोँ देख्ना चाहती थि कि उसकायह टोटका भि कामकर रहा हैं याँ नहीं.इतना सोचते हुए उसनेशो माँग लिया
लाला नें हरबार कि तरह गहरी मुस्कान केँ संग अपने पत्ते उठाए, उन्हे अपने खड़े लन्ड सें रगड़ा.औऱ बिना देखे हि सामने फेंकदिए.
उसकेपास 2, 3 औऱ 9 नंबरआए थें.यानी यहगेम मात्र इक्के केँ बल पर्र रश्मी जीत चुकी थि.औऱ रश्मी नें खुशी कि किल्कारी मारते हुए वोँ सारे पैसे अपनीतरफ करलिए.
औऱ उसे जीतता देखकर लाला भि काफ़ी खुश थां.दरअसल वोँ चाहता भि यही थां.क्योंकि अगर वोँ जीत जाता तौ रश्मी उसकीइस झूटी टोटके वालीबात पर्र कभी विश्वास नहीं करती.अब तोँ लाला कों एक् तरीका मिल गय़ा थां उसे उत्तेजित करने कां.उसे अपनीतरफ आकर्षित करने कां.
अगलीगेम शुरुआत हुइ.औऱ रश्मी नें ब्लाइंड चल दि.औऱइस बार उसने एक्-2 करतेहुए अपने दोनो मुम्मों पऱ नोट रगड़ा.उसके मुम्मों कि थिरकन सें लाला कि आँखे चुंधिया सि रही थि.औऱ वोँ बड़ी मुश्किल सें अपने आप् पर्र कंट्रोल रखकरबैठ हुआ वोँ देखरहा थां.
लाला कि बारीआई तोँ उसने एक् औऱ डेयरिंग दिखाई.उसने धीरे-धीरे सें अपनीजीप खोल दि.उसके अंडरवीयर मे फँसे लन्ड कों थोडा औऱ फेलने कि स्थान मिल गयीँ,.औऱ फिन उसने अपने खड़ेहुए लन्ड कों अपनेहाथ सें मसला.उसे सहलाया.औऱ फिन हज़ार केँ नोट कों उसने अंदरडाल कर उससेटच करवाया.यानी अपने नंगे लन्ड सें.औऱ फिन वोँ नोट नीचे फेंक दिया.
लाला : "मुझे लगता हैं इसको सीधाटच करवाने सें हि असलीअसर आएगा.मेरा चमत्कार तभी चलेगा.''
रश्मी उसकी बातें सुनरही थि औऱ अपनीफटी हुइ आँखों सें उसके उभार कों देखकर साँस लेना भि भूल गयीँ, थि.
ऐसालग रहा थां कि उसने अंडरवीयर मे नागपाल रखा हैं.जौ किसी भि लम्हा बाहर् निकलकर उसपर हमलाकर देगा.
रश्मी मे इतनी भि हिम्मत नहीं हुइ कि वोँ उसेऐसा करने सें मनाकर दे.उसके कमरे मे वोँ लाला अपनी बेशर्मी दिखारहा थां, वोँ चाहती तौ उसेऐसा करने सें मनाकर सकती थि.खेल कों छोड़ सकती थि.अपने भइया कों आवाज़ देकरउपर बुला सकती थि औऱ उसेबता सकती थि कि देखो, तुम्हारा साथी कैसी गंदी हरकतकर रहा हैं.पऱ यहसभी तोँ तब होता नाँ जब वोँ ऐसा करना चाहती.वोँ तोँ ऐसासीन देखकर स्वयं हि उत्तेजना केँ शिखर पऱ पहुँच चुकी थि.उसकी नंगी बुर मे सें पानी निकलकर उसके पायजामे मे गीला धब्बा बना चुका थां.उसके कड़क निप्पल टी शर्ट मे ड्रिल करकेछेद बनाने कि कोशिश कररहे थें.औऱ यहसभी उसे इतना रोमांचित कररहा थां कि वोँ बसयही चाहरही थि कि यहसभी ऐसे हि चलता रहे.कोई उन्हे डिस्टर्ब नाँ करे.
Diwali ka Jua - 3 (Incest + Adultery) - Diwali Ki Raat – New Episode
रश्मी नें अपनी ब्लाइंड चली.पऱ सिर्फ़ अपने मुम्मों केँ उपर सें हि रगड़कर.
.लाला कि तरह अंदर डालकर नहीं.
लाला नें 2 ब्लाइंड ऐसे हि चल दि.रश्मी नें सोचा कि अबफिन सें चांस नहीं लेना चाहिए.तौ उसने अपने पत्ते उठा लिए.औऱ इसबार उसके चेहरे पर्र खुशी आँ हि गयीँ,.क्योंकि उसकेपास कलरआया थां.लाल पान कां कलर.3, 5, 9 नंबर.
उसने 2 हज़ार उठाए.उन्हे अपने मुम्मों पर्र बुरीतरह सें रगड़ा
औऱ नीचे फेंकदिए.
लालासमझ गय़ा कि उसकेपास ढंग केँ पत्ते आँ चुके हें.अब वोँ मन हि मनउपर वाले सें दुआ माँगरहा थां कि वोँ यह बाजीजीत जाए.क्योंकि यह आख़िरी प्रयास थां रश्मी कों बोतल मे उतारने कां.अपनी झूटीबात कां उसपर प्रभाव डालने कां.
औऱ इसबार उसने बेशर्मी कां एक् औऱ परदा गिराते हुएजब अपने लन्ड पर्र नोट रगड़ा तोँ अपने अंडरवीयर कों थोडा नीचे खिसका दिया.औऱ ऐसा करते हि उसका भूरेरंग कां लन्ड रश्मी कि आँखो केँ सामने प्रकट होँ गय़ा.आधे सें ज्यादा उसने लन्ड कों नंगा करके रश्मी केँ सामने परोस दिया.
औऱ बड़े हि धीरे-धीरे उसपरनोट कों रगड़कर वोँ यह दिखाने कि कोशिश कररहा थां कि वोँ कोई मंत्र पड़रहा हैं.औऱ फिन उसने एक् औऱ ब्लाइंड चल दि.
रश्मी कि बारी थि.पऱ वोँ तोँ एकटक उसके लन्ड कों घूरने मे लगी थि.
लालासमझ गय़ा कि चिड़िया नें दानाचुग लिया हैं.वोँ बोला : "चल रश्मी.अपनीचाल चल.इसे देखने केँ लिए तौ पूरीरात पड़ी हैं.''
रश्मी झेंप गई,.उसने फिन सें 2 हज़ार कि चालचल दि.वैसे हि.अपने मुम्मों सें नोटों कों रगड़कर.
अब लाला नें अपने पत्ते उठा लिए.औऱ उसेऐसा लगा कि उपर वाले नें उसकी फरियाद सुनली हैं.क्योंकि उसकेपास एक् बारफिन सें सीक़वेंस आया थां.7, 8, 9 नंबर.
उसनेचाल कों डबल करतेहुए 4 हज़ार कर दिया औऱ इसबार अपने अंडरवीयर कों पूरा नीचे खिसका कर लन्ड औऱ टटटे पूरीतरह सें उजागर करदिए
रश्मी केँ सामने औऱ उनसे रगड़कर उसनेहर बार कि तरहचाल चली.
अब आलमयह थां कि लाला रश्मी केँ सामने नीचे सें करीब नंगा होकर बैठा थां.उसका पठानी लन्ड अपने पूरे शबाब पर्र थां.करीब 10 इंच केँ आस पास.जौ मोनू सें भि बड़ा थां.अपने सामने ऐसे खड़ेहुए लन्ड कों देखकर रश्मी तोँ पागल सि हुईँ जारही थि.ऐसा नज़ारा देखने कों मिलेगा, उसने तोँ सोचा भि नहीं थां.
पऱ संग हि संग उसका ध्यान गेम पऱ भि थां.अब इतना तोँ उसेपता चल हि गय़ा थां कि सामने सें जबडबल चालआए, इसका मतलब सामने वाले केँ पास भि बाड़िया पत्ते आए हें.4 हज़ार कि ब्लफ तोँ नहीं करेगा कोई.
उसने भि 4 हज़ार नीचे फेंकते हुएशो माँग लिया.
रश्मी नें पत्ते नीचे रखे.औऱ लाला नें भि अपने पत्ते उसके सामने फेंक दिए.जिन्हे देखकर उसकेमन मे फिन सें एक् बार मायूसी छा गयीँ,.वोँ समझ गयीँ, कि लाला अपनी स्थान पऱ सही हैं.औऱ उसके टोटके उसपरतभी भारी पड़ते हें जब वोँ थोडा बड़-चड़कर उन्हे करता हैं.
औऱ इसबार रश्मी नें भि सोच लिया कि उसे क्याँ करना हैं.
औऱ जब अगलीगेम शुरुआत हुई तौ रश्मी नें बिना लाला कि तरफ देखे, अपनीटी शर्ट केँ गले कि जीप नीचे करी.औऱ ऐसा करते हि उसके दूधिया मुम्मे लाला कि भूखी आँखों केँ सामने प्रकट हौ गये.वोँ किसीदूध केँ पर्वत कि तरह कठोरता लिएहुए कड़क अंदाज मे खड़ेहुए थें.सिर्फ़ निप्पल कों छोड़कर सभीसॉफ दिखरहा थां लाला कों.
रश्मी नें नोट लिया औऱ उन्हे अपने दूधिया पर्वत पर्र घिसा.औऱ उसे नीचे फेंक दिया.
लाला कों औऱ क्याँ चाहिए थां.वोँ अपनी तरकीब मे कामयाब हौ गय़ा थां.अब वोँ इसखेल कों एक् नये आयाम तक लें जानां चाहता थां.
लाला तोँ जैसेइसी समय कां वेटकर रहा थां.उसने भि अपनी पेंट औऱ अंडरवीयर घुटनो सें नीचे खिसका दिया.औऱ हज़ार केँ नोट कों बुरीतरह सें घिसकर नीचे फेंक दिया.
रश्मी केँ सामने अब लाला कां लन्ड पूरीतरह सें नंगा थां.उपर सें नीचे तक.एकदम कठोर, कुतुब मीनार कि तरह खड़ा थां
वोँ.रश्मी कि आँखो मे उसके लन्ड कों पाने कां लालच साफ़झलक रहा थां.लाला भि इसगेम केँ ज़रिए अधिकदेर तक तड़पना नहीं चाहता थां.पर्र उसे बोले भि तौ केसे बोले.वोँ कुछ बोलने हि वाला थां कि नीचे सें किसी केँ उपरआने कि आवाज़ आई.
लाला नें झट सें अपनी पेंटउपर खींच ली.औऱ रश्मी नें भि अपनीजीप कों बंदकर लिया.
उपर आने वाला मोनू केँ अलावा कौन हौ सकता थां.उसके हाथ मे दारू कां ग्लास थां.शायद लाला औऱ रश्मी केँ उपरआते हि नीचे दारू शुरुआत होँ चुकी थि.मोनू कि हालत देखकर सॉफलग रहा थां कि उसेचढ़ चुकी हैं.
मोनू : "कौनजीत रहा हैं अभि तक.ह्म्*म्म्म''
लाला : "दोस्त मोनू.तेरी बेहन नें तोँ मेरी हालत हि खराबकर रखी हैं.देख नां कितने नोट लें गयीँ, मेरे.''
लाला नें रश्मी कि जाँघ केँ नीचेदबे नोटों कि तरफ इशारा करतेहुए कहा.
मोनू तौ नशे मे थां, यह सुनकर वोँ औऱ मस्ती मे आँ गय़ा.औऱ उसनेझुक कर रश्मी कों गले सें लगा लिया.औऱ उसके चेहरे पऱ चूम भि लिया : " यह तौ मेरी चेम्पियन हैं.देख्ना अभि तूँ.तेरे सारे पैसेलूट लेगी.''
लाला : "मे तोँ कब सें लुटने केँ लिए बैठा हू.पता नहींकब लूटेगी यह.''
लाला कि बात मोनू केँ तोँ उपर सें निकल गयीँ,.पऱ रश्मी कि तिरछी निगाहों औऱ स्माइल नें सभी बयानकर दिया कि वोँ समझ चुकी हैं कि लाला क्याँ कहना चाहता हैं.
रश्मी : "मोनू, तुम् नीचेजाओ अब.ऐसे डिस्टर्ब करोगे तौ मे इसको लूटूँगी केसे.''
उसने अपने होंठों कों दाँततले दबाकर कहा.
रसगुल्ले कों निचोड़ने सें जिसतरह सें रस निकलता हैं, वैसे हि रसटपक गय़ा रश्मी केँ होंठों सें, जब उसने अपने दाँतों केँ बीच उन्हे भींचा.
लाला तौ उसके जूसी होंठों कों चूसने केँ लिए पागल सां हुआजा रहा थां.औऱ अब तोँ रश्मी नें भि लाइन देनी शुरुआत कर दि थि.पऱ उसने भि सोच लिया थां, अभि तक जैसेचल रहा थां, वैसे हि चलने देगा.क्योंकि खेल खेलने मे औऱ धीरे-धीरे-2 बेपर्दा करने मे जोँ मजाउसे मिलरहा थां, वोँ उसे खोना नहीं चाहता थां.
मोनू : "ओके.ओके.मे जारहा हू.मे तौ बस लाला केँ लिएयह पेगबना कर लाया थां.चीयर्स.''
औऱ दारू कां पेग लाला कों देकर मोनू नीचेचल दिया.
लाला नें वोँ पेग एक् हि साँस मे पी डाला.एक् गर्मी सि उतरती चली गयीँ, उसके सीने केँ अंदर.औऱ एक् झटके मे पीने सें हल्का सरूर भि एकदम सें हि आँ गय़ा.
अपनी नशीली आँखों सें रश्मी कों देखते हुए उसने अपनी पेंट एक् बारफिन सें नीचे खिसका दि.वैसे तोँ ब्लाइंड चलने कि बारी रश्मी कि थि.पर्र फिन भि उसने एक् नोट लिया औऱ थोडा सां मुरझा गये लन्ड कों फिन सें घिसकर खड़ाकर लिया.
रश्मी नें भि बड़े हि सेक्सी तरीके सें लाला कों देखते हुए अपनीटी शर्ट कि जीप खोली, पहले कि तरह हि उसकी छातियाँ उभरकर बाहर् निकल आई.औऱफिन उसने वोँ किया जौ अभि तक लाला नें सोचा भि नहीं थां.औऱ जिसे देखने केँ लिए वोँ यहसभी ड्रामा कररहा थां अभि तक.
रश्मी नें अपना दाँया हाथ अंदर कि तरफ घुसेड़ा औऱ अपने बांये मुम्मे कों कान सें पकड़कर बाहर् लेँ आई.
उसके पिंककलर केँ निप्पल्स देखकर लाला कि आँखे हि चुंधिया गई,.औऱ लाला कि आँखो कि भूख कों देखते-2 रश्मी नें अपनानोट उसपर रगड़ा औऱ बड़े हि स्टाइल सें उसे नीचे लहरा दिया.
औऱ अपने मुम्मे कों अंदर करने कि भि जहमत नहीं उठाई रश्मी नें.उसका एक् उभारअब पूरीतरह सें नंगा होकर बाहर् लटकरहा थां.
लाला : "रश्मी.क्याँ कमाल केँ बूब्स हैं तुम्हारे.मन कररहा हैं इन्हे दबोच लू.चूस लू.निचोड़ डालु.''
रश्मी पऱ तोँ पहले सें हि ठरक सवार थि.लाला कि ऐसी गंदी बातें सुनकर वोँ औऱ भि ज्यादा उत्तेजना सें भरउठी.
उसनेमन हि मनकहा 'तोँ कर लें नाँ लाला.रोका किसने हैं तुम्हारी तरफ.'
अब एक् लड़की होकर उसने अपनीतरफ सें इतनाकुछ कर दिया, औऱ कुछ करके वोँ एक् रंडी जैसी नहीं बनना चाहती थि.
लाला भि उसकी हालत कां अंदाज़ा लगाता हुआ अंदर सें खुश होँ रहा थां.अब एक् बात तोँ पक्की थि कि वोँ उसकी चुदाई कर हि लेगा.मोनू केँ उपरआने सें पहले लाला अपनीतरफ सें पहल करके प्रेम कां खेल शुरुआत करना चाहता थां.पऱ अबजब रश्मी नें स्वयं हि अपनेबदन कि नुमाइश करनी शुरुआत कर दि हैं, इसका मतलब वोँ भि उतनी हि उतावली हैं जितना कि वोँ, औऱ एक् उतावली लड़की सें प्रेम करवाने मे जोँ मजा मिलता हैं, वोँ अपना उतावलापन दिखाकर उसे प्रेम करने मे नहीं हैं.लाला वैसे भि अपने आप् कों किसी राजा सें कम नहीं समझता थां.वोँ धीरे-धीरे लेटकर मज़े लेने वालो मे सें थां, यानी सामने वाली सें अपने आप् कों प्रेम करवाकर मजा लेने वालो मे सें.
Diwali ka Jua - 3 (Incest + Adultery) - Diwali Ki Raat – New Episode
Update 9
लाला नें रश्मी कि आशा केँ अनुसार कुछ नहीं किया औऱ फिन सें अपनीगेम केँ अंदरघुस गय़ा.हज़ार केँ दोनोट लिए औऱ उन्हे लन्ड सें मसलकर नीचे फेंक दिया.
रश्मी थोड़ी हैरान अवश्य हुईँ पर्र फिनयह सोचकर कि शायद वोँ मोनू केँ नीचे बैठे होने कि वजह सें घबरारहा हैं, इसलिये कुछ नहींकर रहा.
रश्मी : "अब शायद मोनूउपर नहीं आएगा.वोँ सभी पीने मे मस्त होँ चुके हें.''
जैसे वोँ लाला कों यह बताना चाहती हौ कि कर लें घोंचू, जौ भि करना हैं, मोनू नहींआने वालाअब उपर.
लाला भि उसकीबात कां मतलबसमझ गय़ा, फिन भि उसनेबात घुमा दि औऱ बोला : "हाँ.पर्र उसका अपनाघऱ हैं, कभी भि आँ सकता हैं.ऐसे खेल केँ बीच मे डिस्टर्ब नहीं होना चाहता मे बार -2.''
रश्मी समझ नहींपा रही थि कि उसकेमन मे आख़िर चल क्याँ रहा हैं.ऐसा भि कोई चूतिया होता हैं क्याँ जोँ एक् लड़की केँ नंगे मुम्मे कों देखकर भि अडिग रहे.औऱ वोँ भि लाला जैसा हरामी, जौ उसे देखकर गली मे भि छेड़ता थां.औऱ अबजब वोँ स्वयं उसके सामने ऐसी हालत मे बैठी हैं, वोँ साधुबना बैठा हैं.
रश्मी नें भि ठान लिया कि वोँ भि रम्भा बनकरइस विश्वामित्र कि तपस्या भंग करके दिखाएगी.
पर्र अब तक बीच मे काफ़ी पैसे इकट्ठे हौ चुके थें.औऱ वोँ यह भि देख्ना चाहती थि कि इसबार उसका टोटका सहीकाम कररहा हैं याँ नहीं.इसलिये उसने अपने पत्ते उठालिए.
उसकेपास 5 कां पेयरआया थां.वोँ खुश होँ गई,.औऱइसी खुशी मे उसने अपने दूसरे मुम्मे कों भि बाहर् खींच निकाला औऱ लाला कि अदालत केँ सामने नंगाकर दिया.
अब तौ लाला कां ईमान बुरीतरह सें डोलने लगा.सिर्फ़ गले वाले हिस्से सें बाहर् निकालने कि वजह सें उसके दोनो मुम्मे अकड़ सें गये थें.औऱ उसेजिप भि चुभरही थि उनपर.वोँ कभीइधर सें तौ कभीउधर सें उन्हे सहलाने लगी.
लाला कां ध्यान उसके मुम्मों केँ संग-2गेम पर्र भि। थां.रश्मी कि तरफ सें चालआती देखकर उसने भि पत्ते उठा लिए.उसके पास चिड़ी कां कलरआया थां.उसने भि अपने लन्ड सें रगड़कर 4 हज़ार कि चालचल दि.
चाल केँ उपरचाल आती देखकर रश्मी डर गई,.अब इतना तौ वोँ समझने हि लगी थि कि ऐसी हालत मे गेम किसी कि भि हौ सकती हैं.वैसे भि एक् पेयर हि तोँ आया थां उसकेपास औऱ वोँ भि काफ़ी बड़ा नहीं थां.इसलिये उसनेमन मसोसकर शो माँग लिया.औऱ अपने दोनो मुम्मों सें अच्छी तरह सें पैसे रगड़ने केँ बाद उन्हे नीचे फेंक दिया.
उत्तेजना औऱ उपर सें लगातार मिलरही रगड़ाई सें उसके निप्पल लाल हौ चुके थें.औऱ बुरीतरह सें अकड़ भि गये थें.रश्मी कों हल्का -2 दर्द भि होनेलगा थां उनमे.जौ किसी केँ दबाने सें हि निकलने वाला थां.
रश्मी नें अपने पत्ते लाला केँ सामने फेंकदिए.
बीच मे करीब-करीब 30 हज़ार रुपय थें.
लाला नें उसके पत्ते देखे.उसके पत्ते तोँ बड़े थें हि.इसलिये वोँ जीत हि चुका थां यहगेम.पऱ इस वक्तउसे इन पैसों सें अधिक अपने प्लान कि चिंता थि.जिसे अपनाकर वोँ उसे धीरे-धीरे-2 नंगाकर देना चाहता थां.
लाला नें उसके पत्ते देखे औऱ अपने पत्ते बिनाउसे दिखाए उल्टे करके वापिस गड्डी मे रखदिए औऱ बोला : "ओह्ह्ह्ह.यहगेम तौ तुम् जीत गयीँ,.''
औऱ खुशी सें फूली नाँ समाते हुए रश्मी नें एक् बार औऱ जोरदार चीख मारकर वोँ सारे पैसे अपनीतरफ खींच लिए.लाला केँ पत्ते देखने कि उसने भि जहमत नहीं उठाई.उसके मुम्मे बुरीतरह सें हिलरहे थें.लाला नें जान बूझकर यहगेम हारी थि.ताकि रश्मी यही समझे कि अपने मुम्मे नंगे करने वाले टोटके कि वजह सें हि वोँ यह बाजी जीती हैं.
लाला (थोडा बनावटी क्रोध दिखाते हुए) : "तुम् अपने टोटके मुझसे ज्यादा चलारही होँ अब.मे भि देखता हू कि अगलीगेम तुम् केसे जीतोगी.''
इतना कहतेहुए उसने अपनी पूरी कि पूरी पेंट औऱ संग मे अंडरवीयर भि उतार दिया
अब वोँ नीचे सें नंगा होकर बैठा थां रश्मी केँ सामने.
रश्मी नें पत्ते बाँटे औऱ लाला केँ नंगे शरीर कों निहारती रही.उसका तोँ बसमनकर रहा थां कि टूट पड़े वोँ लाला केँ उपर.पऱ उससे पहले वोँ उसकेबचे हुए पैसों कों जीतना चाहती थि.अभि भि लाला केँ पास करीब-करीब 20 हज़ार रूपएबचे थें.औऱ रश्मी नें यहसोच लिया थां कि वोँ इसीगेम मे वोँ सारे पैसेजीत लेगी.
औऱ उसकेबाद वोँ करेगी सभी.जिसे सोचकर हि उसकी बुर सें पानी निकले जारहा हैं.
पर्र उससे पहले वोँ खेल कों थोडा औऱ गरम करना चाहती थि.ताकि लाला जोँ अपनीतरफ सें यह ड्रामे कररहा हैं, वोँ बंदकर दे.औऱ उसपरटूट पड़े, इसलिये जैसे हि उसकी ब्लाइंड कि बारीआई, उसने अपनीटी शर्ट कों उपर उठाया औऱ गले सें घुमाकर निकाल फेंका.
अब वोँ टॉपलेस होकर बैठी थि लाला केँ सामने.
.अपने मुम्मो केँ नीचेहाथ रखकर उसने अपने दोनों कंधारी अनार लाला कि भुखी आँखों केँ सामने फ्रूट बास्केट कि तरह परोसदिए
लाला नें अपनेहाथ मे हज़ार कां नोट पकड़ा हुआ थां, जिसे वोँ अपने लन्ड पऱ घिसरहा थां.रश्मी केँ टॉपलेस होते हि वोँ उसकी सुंदरता देखता रह गय़ा.औऱ कब उसकेहाथ सें नोट निकलकर गिर गय़ा उसे भि पता नहींचला.
औऱ वोँ उसकेउपर सें नंगे जिस्म कों देखते हुए ज़ोर-2 सें मूठ मारने लगा.
रश्मी भि उसकी हालत देखकर मुस्कुरा दि.रश्मी नें भि उसकी हालत पर्र दया दिखाते हुए अपनेहाथ पूरीतरह सें अपने स्तनों सें हटालिए, नग्न सुंदरता कि मूरतलग रही थि इस वक़्त रश्मी
अबखेल सच मे काफ़ी गरम होँ चुका थां.
लालाजिस लड़की कों एक् बार देखने केँ लिए तरसता थां, आज वोँ उसके सामने करीब नंगी बैठी हुइ थि.
पैसों मे कितनी ताक़त होती हैं यहआजउसे पता चला.पर्र पैसों केँ संग -2 लन्ड मे भि जान होनी चाहिए, तभी लड़कियां आकर्षित होती हैं.
पर्र रश्मी कों ऐसी हालत मे अपने सामने बैठा देखकर लाला केँ हाथमचल उठे, उसने जैसे हि अपनेहाथ आगे करतेहुए रश्मी केँ स्तनों तक पहुँचाए, रश्मी नें उसेटोक दिया औऱ बोलीं : "नाँ जी नां, इतनी जल्द नहीं, गेम पऱ ध्यान दो पहले। मे जबखुश होउंगी, तभी तुम् इसेछू पाओगे.''
लाला : "औऱ तुम् खुश केसे होगी ??"
रश्मी (अपने दाँत दिखाते हुए) : "जब मे जीतूँगी अगली बाजी.''
रश्मी नें बड़ी हि चालाकी सें लाला केँ सामने अपनी शर्तरख दि। मज़े औऱ पैसे एक् संग लेने केँ मूड मे थि रश्मी.
लाला कों भला क्याँ तकलीफ़ हौ सकती थि, अभि तक कां खेलजिस तरह सें चलरहा थां, उसके हिसाब सें हि उसको काफ़ी मजामिल चुका थां.
लाला : "मगर अगली बाजी मे जीत गय़ा तोँ.''
रश्मी : "तौ तुम्हे मुझे छूने केँ लिए वोँ जीतेहुए पैसे मुझे देने होंगे.''
यानी रश्मी मजा औऱ पैसे दोनों लेना चाहती थि.उसकी इस शर्त केँ अनुसार तोँ दोनो हि सूरत मे पैसे उसकेपास पहुँचने वाले थें.
अबखेल सच मे रोमांचक होँ चुका थां.
4-4 ब्लाइंड चलने केँ बाद लाला नें अपने पत्ते उठा लिए.उसे तौ हरगेम केँ समाप्त होने कि जल्द थि.क्योंकि अगर वोँ जीतेगा तौ अपने पैसे रश्मी कों देकर, याँ फिन हारेगा तौ भि रश्मी कि खुशी कों देखकर वोँ मज़े लेना चाहता थां.
लाला केँ पास सिर्फ़ इक्का हि आया थां, बाकी केँ दोनों छोटे पत्ते थें.
उसनेझट सें शो माँग लिया.अभि बीच मे सिर्फ़ 10 हज़ार रुपय थें.लाला नें अपने पत्ते सामने फेंकदिए.
रश्मी नें भि अपने पत्ते उठाए.उसके चेहरे पऱ मायूसी छा गई,.उसके पत्ते तोँ लाला सें भि बेकार थें.उसने जब अपने पत्ते लाला केँ सामने रखे तौ लाला भि हंस दिया.उसके पास 4, 6, 9 नंबरआए थें.
लाला नें सारे पैसे अपनीतरफ कर लिए.फिन उन नोटों कि गड्डी बनाकर उसने रश्मी कि तरफ बड़ा दिया औऱ बोला : "अब तोँ छू सकता हूं नां.इन पैसों केँ बदले.''
रश्मी केँ होंठलरज कररह गये.उसने लाला केँ हाथ सें पैसे लेँ लिए.औऱ उन्हे फिन सें अपनी जाँघ केँ नीचेदबा लिया.
लाला : "अबइधर आओ.मेरे पास.''
लाला नें अपनी उंगली कां इशारा करके रश्मी कों अपनीतरफ बुलाया.
वोँ बेचारी मना भि नहींकर पाई.आख़िर उसने पैसे जोँ दिए थें.
वोँ अपनीसीट सें उठी औऱ धीरे-धीरे-2 चलती हुई लाला केँ पीछे जाकर खड़ी होँ गई,.लाला अपने लन्ड कों मसलता हुआ उसके हिलते हुए मुम्मे देखरहा थां.औऱ जब वोँ उसकेपास आकर खड़ी हुई तौ उसने अपनासिर उपर करके उसकी आँखो मे देखा औऱ बोला : "नीचेकरो इन्हे.''
वोँ उसपरऐसे हुक्म चलारहा थां जैसे 10 हज़ार मे उसने उसके मुम्मों कों खरीद लिया हैं.पर्र रश्मी भि उसकीबात मानरही थि, क्योंकि अंदर हि अंदर वोँ भि तोँ इस मज़े कों महसूस करना चाहती थि.हारने केँ बाद 10 हज़ार भि वापिस मिलगये औऱ अबमजा भि मिलेगा, ऐसा सौदा तोँ रश्मी कों काफ़ी उत्साहित कररहा थां.
रश्मी धीरे-धीरे सें नीचे झुकी औऱ लाला नें अपना देतयाकार मुँहखोल दिया.औऱ उसके अंगूर केँ दानों जैसे निप्पल सीधा उसके मुँह केँ अंदरघुस गये औऱ लाला उन्हे बड़ी ज़ोर सें चूसने लगा.संग हि संग उसने रश्मी केँ सिर केँ पीछेहाथ रखकर अपनीतरफ ज़ोर सें दबा लिया.दूसरे हाथ सें उसका दूसरा बूब्ज़ पकड़ लिया औऱ उसे मसलने लगा.
कुल मिलाकर वोँ अपने 10 हज़ार रुपयसही तरीके सें वसूलकर रहा थां.
रश्मी तौ उसके हमले सें कराह उठी.एक् तौ उसके दाँत काफ़ी तेज थें औऱ उपर सें वोँ काफ़ी एक्ससाईटिड भि थां, पैसे देकर वोँ रश्मी केँ बदन पऱ कुछदेर केँ लिए हि सही पऱ अपना पूरा अधिकार जतारहा थां.
लाला नें उसके निप्पल कों पकड़कर अपनी उंगलियों सें मसलना शुरुआत कर दिया, जैसे बकरी कां दूध निकाल रहा होँ.औऱ संग हि संग अपने दांतो सें भि वहीकाम उसके दूसरे बूब्ज़ पर्र कररहा थां.औऱ लगभगदस मिनट तक अच्छी तरह सें उसकादूध पीने केँ बाद जैसे हि लाला नें उसकी बुर कि तरफहाथ बदाया, रश्मी छिटककर दूर होँ गई,.औऱ बोलि : "नाँ नाँ नाँ.इतने मे सिर्फ़ इतना हि मिलेगा.''
औऱ वोँ अपनी गुलाबी जीभ निकाल कर उसको चिढ़ाती हुईँ वापिस अपनीसीट पर्र जाकरबैठ गई,.
लाला भि सोचने लगा कि इतनी उत्तेजना बढ़ाने केँ बाद भि वोँ केसे कंट्रोल करपारही हैं.आज तक जितनी भि लड़कियों कि उसने चुदाई कि थि, वोँ तोँ सिर्फ़ उसकेहाथ लगाने भर कि वेट करती थि.औऱ स्वयं ब स्वयं नंगी होकर उसके लन्ड पऱ टूट पड़ती थि.रश्मी नाँ जानेकिस मिट्टी कि बनी थि.कभी तौ उसकी आँखो मे सेक्स कि भूख एकदम साफ़ दिखाई देती थि.औऱकभी वोँ एकदम सें पीछे होकर उसपर कंट्रोल करती दिखाई देती थि.
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