Diwali ka Jua - 3 (Incest + Adultery) - Diwali Ki Raat – New Episode
पर्र लाला सें अब कंट्रोल नहीं होँ रहा थां.भले हि वोँ स्वयं कों राजासमझ कर उसपर पैसे लुटाता हुआ अभि तक मज़े लें रहा थां, पऱ अब अपनी सेक्स कि भूख उससे बर्दाश्त नहीं हौ रही थि.वोँ रश्मी कों पाने केँ लिए राजा सें भिखारी बनने केँ लिए भि सजधजकर थां अब.
लाला : "ऐसा नां करो रश्मी.देखो नां, मेरे लन्ड कि क्याँ हालत हौ रही हैं.सिर्फ़ एक् बार इसको सक्ककर लो.प्लीज़.मे तुम्हारे हाथ जोड़ता हू.मेरी हालत पऱ तरसखाओ.''
लाला तौ अबभीख माँगने पऱ उतरआया थां। रश्मी कि नज़रें अभि भि उसकेपास पड़े पैसों केँ उपर थि.जोँ लगभग 20 हज़ार रुपय थें। रश्मी कि आँखो कां इशारा लालासमझ गय़ा.उसने अपने 20 हज़ार रुपय एकदम सें निकाल कर रश्मी केँ आगेरख दिए.
रश्मी : "तूने मुझेकोई धंधे वाली समझा हैं क्याँ.जौ इन पैसों केँ बदले तेरी सेवा करूँगी। जोँ भि करूँगी, गेम खेलकर हि, पैसे जीतकर, ऐसेभीख लेने कि आदत नहीं हैं मेरी.''
लालासहम सां गय़ा, वैसे भि वोँ रश्मी कों नाराज़ करके अपनेलिए कोई घाटे कां सौदा नहीं करना चाहता थां.
यानी रश्मी कां मतलब साफ़ थां.अगली गेम शुरुआत करो। लाला कों भि सारे पैसे हारने कि जल्द थि, इसलिये उसने अगलीगेम शुरुआत कर दि। पत्ते बाँटे गये, औऱ इसबार लाला नें सीधा 2 हज़ार कि ब्लाइंड चल दि, अपने लन्ड सें रगड़कर। लाला कां उठाहुआ लन्ड रश्मी कों काफ़ी लालायित कररहा थां.इसलिये उसकेहाथ अपने आप् हि बुर कि तरफबड़ जाते थें.उसने अपने पायजामे कों नीचे खिसका दिया औऱ पहलीबार लाला नें उसकीनयी नवेली बुर केँ दर्शन किए.
रश्मी भि अबकोई परदा नहीं रखना चाहती थि.इसलिये उसने धीरे-धीरे-2 करतेहुए अपने पायजामे कों घुटनो सें नीचेकर दिया.औऱ अब उसकी सफाचत बुर लाला कि नज़रों केँ सामने पूरी नंगी थि.
.पर्र बेचारा चाहकर भि उसेछू नहीं सकता थां वोँ.उसकी बुर कि चिकनाहट देखकर लाला कां मनउसे चूसने कां करनेलगा.
रश्मी भि समझ नहींपा रही थि कि केसे वोँ इतनी बेशर्मी सें अपने शरीर सें कपड़े हटाती जारही हैं औऱ नंगेपन कि नुमाइश लाला केँ सामने कररही हैं.पऱ नाँ जाने क्योउसे यहसभी अच्छा भि लगरहा थां.वोँ शायद इसलिये भि क्योंकि वोँ कुछऐसा हि मोनू केँ संग भि कर चुकी थि.अपने भइया केँ संग करतेहुए जबउसे शरम नहींआई तौ इसकेसंग क्योआए औऱ वोँ भि तबजब वोँ उसकेउपर अँधा होकर पैसे भि लूटारहा थां.
लाला नें अगली ब्लाइंड जबचली तौ नोट पऱ उसके लन्ड सें निकला पानी साफ़चमक रहा थां.ऐसा सीन देखकर अच्छे -2 कां प्रीकम निकल जाता हैं.रश्मी कां तोँ मन किया कि वोँ नोट उठाए औऱ उसेचाट करसॉफ कर दे.साला केसे तरसारहा हैं उसे वोँ लाला.रश्मी नें भि उसको सताने कि सोची औऱ अपनी रसीली चाशनी मे हज़ार केँ दो नोटों कों अच्छी तरह सें घुसाकर उन्हे पूरा गीलाकर लिया औऱ फिन उन्हे नीचे फेंक दिया.
लाला नें जल्दी वोँ नोटउठा लिए औऱ बड़ी हि बेशर्मी सें उन्हे चाटने लगा.सारा रसचाट गय़ा वोँ उन नोटों सें। रश्मी उसेऐसा करतेहुए देखती रही.औऱ फिन उसने भि लाला वाला वोँ नोटउठा लिया जिसपर उसका प्रीकम लगाहुआ थां.औऱ धीरे-धीरे सें उसपर अपनीजीभ लगाई.एकदम टेस्टलेस थां वोँ.पर्र उसकीगंध बड़ी हि कामुक औऱ मदहोशी सें भरी थि.रश्मी नें एक् लंबी साँस लेकरउसे अंदर तक महसूस किया औऱ अपनीजीभ पऱ उसके स्वाद कों काफ़ी देर तक महसूस करतीरही.
लाला भि समझ चुका थां कि अब तौ नाम केवल कि दीवार रह गयीँ, हैं दोनो केँ बीच। दोनो एक् दूसरे केँ सामने नंगे होकरखेल रहे थें.लाला केँ पास अभि भि करीब 10 हज़ार रुपय थें, जौ उसको गँवाने थें। रश्मी नें अगली ब्लाइंड नहींचली औऱ अपने पत्ते उठा लिए.औऱ उन्हे देखकर उसे एक् बारफिन सें विश्वास होँ गय़ा कि उसकीहर बार टोटके कों बड़ चड़कर करनाइस बार भि सफल होँ गय़ा हैं.क्योंकि इसबार उसकेपास ऐसे पत्ते आए थें जिनका शायद हि कोई तोड़ होता.बादशाह कि ट्रेल.यानी 3 बादशाह आए थें उसकेपास.
उसने एक् हि बार मे 4 हज़ार कि चालचल दि.लाला तौ पहले सें हि लूटने केँ लिए बैठा थां.इसलिये उसने अपने पत्ते नहीं देखे बल्कि अपनी ब्लाइंड कों भि डबल करतेहुए 4 हज़ार कर दिया औऱ लन्ड सें रगड़कर फिन सें पैसे नीचे फेंकदिए। रश्मी तोँ पूरे कॉन्फिडेंस मे थि.उसने भि चाल कों डबल किया औऱ आठ हज़ार बीच मे फेंक दिए.औऱ इसबार उसनेहर नोट कों ऐसे अपनी बुर पऱ रगड़ा जैसे उसपर अपनेरस कि परत चड़ा देना चाहती होँ.गीले-2 नोटों कां अंबार सां लगताजा रहा थां बीच मे.किसी पऱ रश्मी कि बुर कां रस थां तोँ किसी पर्र लाला केँ लन्ड कां पानी.
अब तौ लाला केँ पास सिर्फ़ 2 हज़ार हि थें.इसलिये उसने अपने पत्ते उठा लिए.औऱ अपने पत्ते देखकर वोँ भि दंगरह गय़ा.उसके पास सीक़वेंस आई थि, औऱ वोँ भि सुच्ची, पाने केँ पत्तो कि, 8, 9, 10 नंबर.ऐसे पत्ते तौ कभी कभार हि आते हें.पऱ उसकेपास चलने केँ लिए पैसे हि नहीं थें.सिर्फ़ 2 हज़ार थें औऱ शो माँगने केँ लिए भि कम सें कमउसे 8 हज़ार चाहिए थें.पर्र ऐसे पत्तों केँ संग वोँ शो नहीं माँगना चाहता थां, बल्कि गेम कों आगे खेलकर जीतना चाहता थां, औऱ जीतेहुए पैसों कों वापिस करके वोँ रश्मी सें मज़े लेना चाहता थां.इसलिये उसने रश्मी सें 20 हज़ार उधार माँग लिए.रश्मी नें भि देदिए क्योंकि वोँ जानती थि कि उससे अच्छे पत्ते लाला केँ पास हौ हि नहीं सकते.
लाला नें पैसेलिए औऱ 8 हज़ार कि चाल चली.रश्मी नें 14 हज़ार कि चालचली.क्योंकि अब लाला केँ पास उतने हि पैसेबचे थें.लाला नें भि नाँ चाहते हुएशो माँग हि लिया.वैसे तोँ उसे विश्वास हि थां कि वही जीतेगा.पर्र जैसे हि रश्मी नें अपने पत्ते उसके सामने रखे तोँ रश्मी केँ 3 बादशाह देखकर उसकासिर हि चकरा गय़ा.उसने अपनी कल्पना मे भि ऐसा नहीं सोचा थां कि रश्मी केँ पास ट्रेल आएगी.
लाला बेचारा सिर झुकाकर बैठ गय़ा। रश्मी नें हंसते हुए सारे पैसे अपनीतरफ करलिए.
रश्मी नें लाला केँ दुःखी चेहरे कों देखा औऱ बोलीं : "ऐसे मुँह लटकाकर क्योबैठ गये.मैने कहा थां नां कि जब मे खुश होउंगी तब भि तुम्हारा हि फायदा हैं.''
लाला कि आँखेचमक उठी.उसने ललचाई हुइ आँखों सें रश्मी कों देखा.
रश्मी बड़े स्टाइल मे बोलीं : "कब तक मेरेजूस कों नोटों केँ उपर सें चाटते रहोगे.सीधा हि आँ जाओ.''
लाला कों तोँ जैसेइसी बात कां प्रतीक्षा थां.वोँ उछलकर रश्मी केँ पास पहुंचा औऱ एक् हि झटके मे उसेबेड पऱ लिटाकर उसकी जांघों केँ बीचझुक गय़ा.औऱ एक् गहरी साँस लेने केँ बाद अपनी पेनीजीभ निकाल कर उसकी गुल्लक केँ छेद जैसी बुर मे डाल दि.
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Update 9.1
रश्मी सिसकउठी औऱ उसने लाला केँ सिर पर्र हाथ रखकर अपने औऱ अंदर घुसा लिया.
''आआआआआआआआहह। ओह। येसस्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स। कब सें तरसरही थि इसकेलिए.
अहहssssssssssssssssssssssss.औऱ अंदर तक डालोजीभ। औऱ अंदर। उम्म्म्ममममममममममममम.''
दूसरी तरफ लालाऐसी बुर कों चाटकर काफ़ी खुश थां.ऐसी गंध औऱ स्वाद सिर्फ़ रश्मी कि बुर कां हि हौ सकता थां.वोँ ज़ोर-2 सें अपनीजीभ केँ ब्रश सें उसकी बुर कि दीवारों कि पुताई करने लगा.उसकी जीभ केँ हर प्रहार सें रश्मी कि गांडउछल जाती औऱ वोँ अपनीतरफ सें झटके देकर उसके मुँह पर्र औऱ ज़ोर सें अपनी बुर कां दबाव डालती.
रश्मी नें काफ़ी देर सें अपने आप् कों संभाला हुआ थां.औऱ आख़िरकार वोँ झड़ हि गई,.
.औऱ झड़ी भि तौ ऐसे कि उसकेरस कों अपने मुँह मे समेटना लाला केँ लिए काफ़ी मुश्किल होँ गय़ा.औऱ इधर-उधर सें रिसकर चादर पर्र गिरने लगा.
''अहहssssssssssssssssssssssssssssss। आईएम कमिंग। उम्म्म्मममममममममममम.''
लाला नें घड़ी देखी.1 बजने वाला थां। उसकेपास ज्यादा वक़्त नहीं थां.उसने रश्मी कों अपनीतरफ खींचा औऱ अपने खड़ेहुए लन्ड कों उसके मुँह केँ हवाले कर दिया। रश्मी तोँ अपनी खुमारी सें अभि तक निकली भि नहीं थि.इसलिये लाला केँ लन्ड कों मुँह मे रखकर लेटीरही.
.लाला नें उसके नर्म रसीले मुँह केँ अंदर धीरे-धीरे-2 झटके देने शुरुआत कर दिए.औऱ फिन धीरे-धीरे-2 अपना पूरा लन्ड अंदर उतार दिया
.औऱ जब रश्मी कों अपनीहलक तक उसका लन्ड महसूस हुआ तौ वोँ होश मे आई औऱ उसने अपनी आँखे खोली.
वोँ भि इसकाम कों जल्द सें जल्द निपटाना चाहती थि.क्योंकि मोनूकभी भि उपर आँ सकता थां.अपनी चुदाई करवाने कां उसकाकोई इरादा नहीं थां अभि.क्योंकि वोँ अपना कुँवारापन अपने भइया कों देना चाहती थि आज। इसलिये उसने लाला केँ लन्ड कों ज़ोर-2 सें चूसना औऱ चुभलाना शुरुआत कर दिया.औऱ संग हि संग वोँ उसके अंडकोष कों भि सहलारही थि
.औऱ फिन अचानक बिना किसी वॉर्निंग केँ लाला नें अपने लन्ड सें उसके चेहरे कों सींचना शुरुआत कर दिया.
गरमागरम गाड़े पानी कि बूंदे उसके चेहरे पर्र पड़ने लगी औऱ वोँ उन्हे महसूस करती हुई मजा सागर मे गोते लगाने लगी.
रश्मी : "अब जल्द सें अपने कपड़े पहनो औऱ निकलो यहा सें.''
लाला : "पर्र.वोँ। कुछ औऱ नहीं करना क्याँ.''
रश्मी समझ गई, कि वोँ क्याँ कहना चाहता हैं.वोँ बोलि : "तुम् मरवाओगे मुझे.मेरे हि घऱ मे यहसभी केसे पॉसिबल हैं.इसके बारे मे बाद मे बात करेंगे.''
इतना कहते-2 वोँ अपनीटी शर्ट औऱ पायजामा पहन चुकी थि औऱ टावल सें अपना चेहरा भि सॉफकर लिया उसने। लाला नें भि मन मसोसकर अपने कपड़े पहन लिए.औऱ नीचेउतर आया। नीचे भि बाजी समाप्त हौ चुकी थि, रिशू नें जीतलिए थें सारे पैसे.मोनू भि अपने 10 हज़ार हार चुका थां.औऱ राजू भि कंगला होँ चुका थां.अब वोँ आहिस्ता बैठकर दारूपी रहे थें.
मोनू नें लाला कां लटकाहुआ चेहरा देखा तौ वोँ समझ गय़ा कि वोँ अपने सारे पैसेहार चुका हैं.भले हि वोँ स्वयं नीचे बैठकर 10 हज़ार हार गय़ा थां पऱ वोँ यह जानता थां कि उपर बैठकर उसकी बेहन नें बहुत रूपए जीते हैं आज, वोँ लगभग 90 हज़ार जीत गयीँ, थि.कुल मिलाकर वोँ काफ़ी फायदे मे थां। रात काफ़ी होँ चुकी थि.इसलिये सब अपने-2घऱ चल दिए.अगले दिन दीवाली थि, इसलिये सबनेजम करजुआ खेलने कि बातकही.
मोनू नें भि सभीकुछ समेटा औऱ दरवाजा बंद करकेउपर चल दिया। वोँ सीधा अपनी मां केँ रूम मे गय़ा पहले.वोँ सोरही थि.पऱ रश्मी वहा नहीं थि.वोँ शायद उसके कमरे मे हि थि अब तक। वोँ झूमता हुआ सां अपने कमरे कि तरफचल दिया। औऱ जैसे हि वोँ अंदर पहुंचा, रश्मी उसके पीछे सें आई औऱ अपनी बाहें उसकेगले मे डालकर उसकीकमर पर्र झूल गयीँ,। मोनू नें उसकाभार संभालने केँ लिए जैसे हि अपनेहाथ पीछे करकेउसे पकड़ा तोँ उसकानशा एक् हि बार मे उड़ गय़ा। वोँ पूरी नंगी थि.
.मोनू केँ हाथ सीधा उसके नंगे चूतड़ों पर्र जालगे। औऱ रश्मी तोँ बदहवास सि होकर उसकी गर्दन कों अपने होंठों सें चूसरही थि.उसे चूमरही थि। मोनूसमझ गय़ा कि आज कि रात वोँ अपनी बेहन केँ संग वोँ सभी करने वाला हैं, जिसके लिए वोँ नाँ जानेकब सें तरसरहा थां.
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Update 10
उसने रश्मी कों लेजाकर अपनेखाट पऱ पटक दिया.औऱ वोँ पलंग पूरा नोटों सें ढका पड़ा थां.जोँ रश्मी नें आजजुए मे जीते थें.औऱ वोँ उन्ही नोटों केँ पलंग पऱ अपने कुंवारेपन कों लुटाना चाहती थि। गरमा गर्म करारे नोटों केँ उपर रश्मी कां नंगाबदन मचलरहा थां.वोँ पूरीतरह सें सुलगी हुईँ थि.उसने शरीर सें उठरही गर्मी नें बेड पर्र पड़े नोटों कि गर्मी कों औऱ बड़ा दिया थां.उसके अंदर सें निकलरही गर्मी सें वोँ नोट औऱ करारे हौ गये थें.
रश्मी बड़े हि सेक्सी तरीके सें उसे देखने लगी.आज वोँ बड़ी हि बेशर्मी सें इसतरह सें खुलकर अपने भइया केँ सामने लेटी थि.
.शायद जौ थोड़ी बहोत शुरूवाती शरम थि वोँ लाला केँ संगजुआ खेलते हुए नंगी होकर निकल चुकी थि.वोँ लाला कि हवसभरी आँखो केँ सामने अपने आपको रखकर उतनीखुश नहीं थि, जितनी अब मोनू केँ सामने रखकर हौ रही थि। रश्मी नें अपनी दोनो टांगे फेला दि.उसकी गुलाबी बुर कि फांके रस सें भरी होने कि वजह सें आपस मे चिपकी हुई थि.पऱफिन भि अंदर कां गुलाबीपन देखकर मोनू कि आँखेउबल कर बाहर् आने कों हौ गयीँ,.
उसने अपनी बाहें भि उपर करतेहुए उसे अपनीतरफ बुलाया : "आओ नाँ मोनू.औऱ कितना तड़पाओगे.आजकरलो मुझे अपना.समा जाओ मुझमे.''
मोनू नें उसके नंगे जिस्म कों देखते हुए अपने कपड़े निकालने शुरुआत करदिए औऱ कुछ हि देर मे वोँ पूरा नंगा होकर खड़ा थां रश्मी केँ सामने.अपनी तोप कि सलामी देताहुआ औऱ मोनूजंप मारकर सीधा रश्मी केँ उपरकूद गय़ा। पऱ उसके कूदने सें पहले हि रश्मी बेड सें फिसलकर साइड मे होँ गयीँ,.औऱ खड़ी होकर हँसने लगी.अब मोनू कि स्थान पऱ वोँ खड़ी थि औऱ रश्मी कि स्थान पर्र मोनू लेटाहुआ थां.
रश्मी (उसको चिड़ाते हुए) : "हाहाहा। बड़ी जल्द हौ रही हैं तुझेही। ह्म्*म्म्म.''
उसने अपने दोनोहाथ अपनीकमर पऱ रखेहुए थें.औऱ एक् पेरउठा कर उसनेबेड पर्र रख दिया.ठीक मोनू कि टाँगो केँ बीच.
मोनू : "मुझेपता हैं दिदी, आप् भि यही चाहती हैं.कल सें तड़परहा हू मे भि.अब औऱ नाँ तरसाओ.''
रश्मी : "तरस तौ मे भि रहीहू नां मोनू.औऱ संग हि मेहनत भि कररही थि.देख लेँ, जिन नोटों पऱ तुँ लेटाहुआ हैं वोँ मैने जीते हैं.''
मोनू : "वोँ तोँ हैं.पऱ आप् शायदयह भूलरही हैं कि यहखेल भि मैने हि सिखाया हैं आपको.''
रश्मी : "अपनी भाग्य कि भि बात होती हैं.मुझसे अच्छा तोँ तूँ खेलता हैं, फिन भि तूँ हमेशा हारता हि हैं.औऱ संग हि संग मेरे खूबसूरती कां भि कमाल हैं यह.इसके बिना भि यह पैसे कमाने मुश्किल थें.''
मोनू उसकीयह बात सुनकर चोंक गय़ा.औऱ बोला : "कहीं आपने अपनेइसी खूबसूरती कां इस्तेमाल करके हि तौ यह पैसे नहीं कमाए नां.मतलब कहीं आपने लाला केँ संगकुछ.''
रश्मी : "अरे मेरे लल्लू भइया.तुँ इतना क्यो सोचता हैं.अगर थोड़े बहोत मज़े लें भि लिए तौ तेरेपेट मे क्यो दर्द होँ रहा हैं.''
मोनू कि नज़र सीधा उसकी बुर पर्र जा टिकी.शायद वोँ सोचरहा थां कि कहीं लाला नें उसकी कुँवारी बुर तौ नहीं फाड़ डाली.औऱ रश्मी भि उसको अपनी बुर कि तरफ देखती हुइ समझ गई, कि वोँ क्याँ सोचरहा हैं.
वोँ बोलीं : "फ़िक्र मत कर.वहा तक बात नहीं पहुँची.यहा तौ सिर्फ़ औऱ सिर्फ़ मेरे भइया कां हक हैं.''
मोनू नें राहत कि साँस ली.पर्र वोँ इतना तौ समझ हि चुका थां कि चाहे पूरे नां सही पऱ कुछ तोँ मज़ेलिए हि हैं लाला नें उसकी बेहन केँ संग.तभी वोँ नीचेआकर इतनाखुश सां लगरहा थां.अपने सारे पैसे हारने केँ बाद भि.
रश्मी नें अपना पांव खिसका कर औऱ आगे किया औऱ सीधा उसके लन्ड पऱ रख दिया, मोनू बेचैनी उठा.उसके पेर केँ नाख़ून चुभरहे थें उसके लन्ड पऱ। वोँ समझ गय़ा कि रश्मी उसको देगी अवश्य पर्र तडपा-2कर.
रश्मी बेड पऱ चढ़ गई, औऱ उसके मुँह पर्र अपने पांव कां पंजारख कर बोलि : "चाटो इसको.''
मोनू केँ लिएयह समय इतना उत्तेजना सें भरा थां कि उसका दिमाग़ तक सुन्न होँ गय़ा.वोँ हमेशा सें यही चाहता थां कि उसका पार्ट्नर बेड पर्र अपना हुक्म चलाए औऱ वोँ किसी गुलाम कि तरह उसका पालन करतारहे, बिनाकुछ बोले। औऱ यहाइस वक्त रश्मी उसपर अपना हुक्म चलारही थि.अपना स्लेव बनाकर.
उसने अपनीजीभ बाहर् निकाली औऱ उसकेपेर केँ अंगूठे कों चाट लिया.रश्मी पहले सें हि यहसभी सोचकर आई थि, इसलिये उसने अपने पैरों कों अच्छी तरह सें धोरखा थां.उसके पांव कि गुलाबी उंगलियाँ बेचैनी उठीजब उनके दोस्त अंगूठे कों मोनू नें चूसना शुरुआत किया.
। औऱ फिन धीरे-धीरे-2 मोनू नें उसकेपेर कि हर उंगली कों चूसा.उनका रस पिया.औऱ वहां सें मिलरही गुदगुदी सें रश्मी कां पूरा जिस्म ऐंठरहा थां.वोँ हर चुस्के सें सिसक उठती.बेचैनी उठती.
''अहहssssssssssssssssssssss। ऑश मोनू। ज़ोर सें चूसो इन्हे.''
औऱ धीरे-धीरे-2 करतेहुए वोँ नीचेबैठ गयीँ,.मोनू नें उसेबैड पर्र लिटा दिया.औऱ अपने दहकते हुए होंठ उसके लबों पर्र रखदिए.
''उम्म्म्मममममममममममम पुचहssssssssssssssssssssssssssssssssssss ''
औऱ एक् लंबे चुंबन मे डूबगये दोनो। मोनू नें उसकोबेड पऱ लिटा दिया.औऱ उसकी टाँगो कों फेलाकर उसकी बुर कों चूम लिया। रश्मी नें उसकेसिर पर्र हाथ रखकर अपनीतरफ खींच लिया.औऱ उसके गीले-2 होंठों नें रश्मी कि रसीली बुर कों अपने कब्ज़े मे लें लिया.
''ओह मोनू। सकक्क मी.हार्डरsssssssssssssssssssssssssssssss। आहह-आहह। ओह। जैसे रुची कि चूसरहा थां.
। वैसे हि कर। आहह-आहह। ओह.मेरी क्लिट.आहह-आहह.हन.उसकोचूस.सही सें.अंदर लें उसको.उम्म्म्मममममममममम.आहह-आहह.ओह मोनू। मेरीजानsssssssssssssssssssssss.''
उसे अपने भइया पऱ एकदम सें बड़ा प्रेम आँ गय़ा.वोँ इतनी अच्छी तरह सें सेवा जोँ कररहा थां उसकी। मोनूबीच-2 मे खड़ा होँ जाता औऱ रश्मी सें अपने लन्ड कों मसलवा करफिन सें उसकी बुर कों चूसने मे लग जाता। वोँ बड़े हि मज़े लेँ-लेकर उसकी बुर कां रसपीरहा थां। अपनीजीभ सें उसे चुभलाता.उसकी फांको कों खोलता औऱ उनकेबंद होने सें पहले हि अपने होंठ अंदर रखकर उसकी उभरी हुइ क्लिट कों दबोच लेता औऱ चूस लेता.
रश्मी भि अपने भइया कि कलाकारी देखकर बेचैनी रही थि नोटों सें भरेबैड पऱ। काफ़ी देर तक चूसने केँ बाद जैसे हि वोँ झड़ने केँ लगभग पहुँची, मोनू नें उसको चूसना छोड़ दिया.औऱ उसे घोड़ी बना दिया.क्योंकि उसकेमन मे शुरुआत सें हि यह ख़्वाहिश थि कि जब भि वोँ रश्मी कि कुंवारी बुर पहलीबार मारेगा, ऐसे हि मारेगा, उसको घोड़ी बनाकर.
रश्मी भि अपनासिर नीचे टीकाकर औऱ अपनी गांड कों हवा मे लहराकर लेट गयीँ,.उसका दिल जोरों सें धड़करहा थां.पहली बार जौ थां उसके संग.उसे डर भि लगरहा थां कि मोनू कां लन्ड उसकी बुर मे जाएगा भि याँ नहीं.उसने बेड कि चादर कों मुँह मे ठूस लिया, ताकि उसकीचीख भि निकले तौ दबकररह जाए.
पऱ मोनू जानता थां कि ऐसाकुछ नहीं होगा, उसने चूसा हि इतना थां उसे कि उसकी बुर बुरीतरह सें रस मे डूब चुकी थि.ऐसे मे उसके लन्ड कों अंदर जाने मे कोई तकलीफ़ नहीं होनी चाहिए थि। मोनू नें उसकेभरे हुए कुल्हों कों पकड़ा औऱ अपने लन्ड कों धीरे-धीरे सें उसकी बुर केँ होंठों पर्र लगाया.औऱ एक् जोरदार झटका दिया.रश्मी नें भि उसीसमय अपनीकमर कों पीछे कि तरफ झटकामार दिया.ताकि जोँ भि होना हैं एक् हि बार मे हौ जाए.औऱ वोँ होँ भि गय़ा एक् हि बार मे। मोनू कां लंबा साँप उसकी सुरंग मे सरसरता हुआ घुसता चला गय़ा.
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