Diwali ka Jua - 3 (Incest + Adultery) - Diwali Ki Raat – New Episode
रश्मी यह देखकर फिन सें हँसने लगी, औऱ बोलीं : "तुँ तोँ एकदम लड़कियो कि तरह सें शरमाता हैं.सीधा बोल नां, मालजब तक अंदर सें बाहर् नहीं निकलता, तकलीफ़ होती हैं.''
अपनी बेहन कों ऐसे बेशार्मों कि तरहा बोलता देखकर मोनू कां मुँह खुलारह गय़ा
रश्मी : "ऐसे क्याँ देखरहा हैं तूँ.तुम्हे क्याँ लगा, मुझेयह सभी नहीं पता.लगता हैं तुझेही रुची नें कुछ भि नहीं बताया.कि हम् दोनो केँ बीच कैसी-2 बातें होती थि पहले.''
मोनू : "नहीं.उसके संगऐसी बातें करने कां समय हि नहीं मिलाकभी.''
रश्मी (आँखे घुमाते हुए) : "हाँ, उसकेसंग तोँ तेरीबस एक् हि काम करने कां समय मिलता होगा.औऱ उसमे भि मे बीच मे टपक पड़ती हू। हि हि''
मोनू भि हंस दिया.
रश्मी : "अच्छा एक् बात तोँ बता.अभि भि तूँ उसके बारे मे सोचकर हि यहकररहा थां नां.''
अबमजा लेने कि बारी मोनू कि थि.
मोनू : "मे.मे क्याँ कररहा थां अभि ?''
रश्मी : "अच्छा.अब मुझसे छुपाने कां क्याँ फायदा.अभि मेरेआने सें पहले तुँ वोँ कररहा थां नाँ.''
मोनू : "नहीं दिदी.मे तोँ बस कपड़े चेंजकर रहा थां.मैने पायज़ामा नीचे उतारा हि थां कि आप् आँ गयीँ,.''
रश्मी : "झूठमत बोल.मे सभीदेख रही थि दरवाजे केँ पीछे सें.तूँ अपना वोँ रगड़रहा थां.माल निकालने केँ लिए.बोल.''
मोनू : "क्याँ रगड़रहा थां दिदी.खुल करकहो नां.''
अब रश्मी भि समझ चुकी थि कि उनकेबीच कां एक् औऱ परदागिर चुका हैं.अब खुलकर वोँ सभीबोल सकते हें.
रश्मी : "अपना लन्ड रगड़रहा थां तुँ.यही सुनना चाहता थां नां.बोल, रगड़रहा थां याँ नहीं.''
अपनी सेक्सी बेहन केँ मुँह सें लन्ड शब्द सुनकर तकिया थोडा सां औऱ उपर हौ गय़ा.उसके लन्ड नें अंदर हि अंदर झटके मारने शुरुआत करदिए थें.
मोनूकुछ नहीं बोला.बस मुस्कुराता रहा.
उसकी नज़रें फिन सें उसकीटी शर्ट मे उभरे निप्पल्स कों घूरने लगी.
.मोनू कि जलती हुई आँखे उसकेबदन मे जहाँ-2पड़ रही थि, उसेऐसे लगरहा थां कि वोँ हिस्सा जलरहा हैं.उसकी छातियाँ.उसकी नाभि.उसके होंठ.उसके कान.आँखे.औऱ बुर भि बुरीतरह सें सुलगरही थि उसकी.
रश्मी : "बोल नाँ.उसके बारे मे हि सोचरहा थां नां तुँ.''
वोँ पूछ तौ अपनी सहेली केँ बारे मे रही थि.पर्र मोनू केँ मुँह सें अपनानाम सुनना चाहती थि.
मोनू : "नहीं.उसके बारे मे सोचकर नहीं.किसी औऱ केँ बारे मे सोचकर.''
इतना सुनते हि रश्मी कां मनहुआ कि मोनू सें लिपट जाए.उसके होंठों कों चूस लेँ.औऱ एकदम सें नंगी होकर उसके लन्ड पर्र सवार होँ जाए.
उसकेदिल नें फिन सें धाड़-2 धड़कना शुरुआत कर दिया.
रश्मी : "तौ फिनकिस …… किसके.बारे मे.सोचकर.यह.कररहा थां.''
उसके होंठ काँप सें रहे थें.उसके कानलाल हौ उठे.जैसे अपनानाम सुनने कि तैयारी कररहे हौ.
मोनू भि अबगेम मे आँ चुका थां.वोँ भि रश्मी कों तड़पाना चाहता थां, जैसे वोँ अभि उसको तडपारही थि.
मोनू : " हैं कोई.उससे भि खूबसूरत.उससे भि हसीन.उसकी आँखे तोँ कमाल कि हें.औऱ उसके बूब्स.वोँ तौ जैसेनाप तोलकर बनाएहुए हें.औऱ उसके निप्पल्स, वोँ तौ कहर भरपा दे, उन्हे चूसने भर सें हि शायद सारी प्यास बुझजाए मेरी.''
मोनू कां हर शब्द रश्मी कि बुर सें रिसरहे पानी कों औऱ तेज़ी सें बाहर् धकेलरहा थां.जौ शायद मोनू केँ खाट पर्र आज कि रात धब्बे केँ रूप मे रहने वाला थां.
रश्मी : "नाम तोँ बता मुझे.ऐसे नहींसमझ आँ रहा.''
उसकी आँखों मे लाल डोरे तैरने लगे थें.हल्का पानी भि आनेलगा थां उनमे.
मोनू : "उसकानाम तुम् मेरे मित्र सें पूछलो.''
औऱ मोनू नें ग़जब कि हिम्मत दिखाते हुए अपना तकिया नीचे गिरा दिया.औऱ अपना विशालकाए लन्ड अपनी सग़ी बेहन रश्मी कि आँखो केँ सामने लहरा दिया.
रश्मी कि आँखेफैल गयीँ, उसके लन्ड कों इतने लगभग सें देखकर। पास सें देखने सें वोँ औऱ भि बड़ालग रहा थां.उसके सिरे पर्र प्रिकम कि बूँदउभर कर चिपकी पड़ी थि.
रश्मी तोँ सम्मोहित सि होकरउसे देखेजा रही थि.जैसे आँखो हि आँखो मे उसे निगलरही हौ.
मोनू नें अपने लन्ड कों हिलाते हुएउपर नीचे किया
औऱ उसे रश्मी कि तरफ करतेहुए बोला : "लो दिदी.पूछ लो मेरे साथी सें.मे किसके बारे मे सोचकर इसे रगड़रहा थां.''
रश्मी कां दाँया हाथ कांपता हुआ सां आगे कि तरफ बड़ा.उसके मुँह सें साँसे तेज़ी सें बाहर् निकलने लगी.छातियाँ उपर नीचे होने लगी.औऱ उसने अपने ठंडे हाथों सें मोनू केँ गरमागरम लन्ड कों पकड़ लिया.
औऱ जैसे हि रश्मी केँ ठंडे औऱ नर्महाथ उसके लन्ड सें टकराए, उसने ज़ोर सें हल्की चीख मारते हुएकहा : "ओह.रश्मी.''
मोनू केँ साथी नें तौ नहीं, पऱ उसने वोँ नाम स्वयं हि बता दिया अपनी बेहन कों.
औऱ अपनानाम सुनते हि रश्मी कां पूरा शरीर झनझना उठा.औऱ उसने अपने प्यासे होंठ तेज़ी सें अपने भइया कि तरफ बड़ादिए.
तभी बाहर् सें उनकी मम्मी कि आवाज़ आई : "रश्मी.मोनू.कहां हौ तुम् दोनो.''
रश्मी कां तौ चेहरा हि पीलापड़ गय़ा अपनी मम्मी कि आवाज़ सुनकर.उनके रूम कां तोँ दरवाजा भि खुलाहुआ थां.रश्मी नें भि आतेहुए मोनू केँ रूम कां दरवाजा बंद नहीं किया थां.अभि तौ उनकी तबीयत खराब हैं, इसलिये वोँ बेड सें उठ नहीं सकती.वरना अगर वोँ ऐसेसमय पर्र उस कमरे मे आँ जाती तोँ उन दोनो कों रंगे हाथों पकड़ लेती.
रश्मी नें एक् हि झटके मे मोनू केँ लन्ड कों छोड़ दिया औऱ भागती हुई सि अपने कमरे कि तरफ गई,
''आईईईई मम्मी.''
औऱ वहा पहुँचकर देखा तोँ वोँ बेड सें उठने कि कोशिश कररही हैं.
रश्मी : "रूको मम्मी.अभि उठो मत.कहो क्याँ चाहिए.''
मान : "तुँ इतनीरात कों कहां थि.मे कितनी देर सें तुम्हारी तरफ आवाज़ें लगारही थि.''
रश्मी : "वोँ.मोनू अभि-2 आया थां.उसके लिए खानां गरमकर रही थि.''
उसने बड़ी हि सफाई सें झूठ बोलकर स्वयं कों औऱ मोनू कों बचा लिया.
कुछ हि देर मे उसकी मम्मी केँ खर्राटे गूंजने लगे कमरे मे.पर्र उसकेबाद रश्मी कि हिम्मत नहीं हुई कि वापिस मोनू केँ कमरे मे जाए.बस अपनी बुर कों मसलकर वोँ वहींसो गयीँ,.
मोनू नें भि अपने लन्ड कों रगड़ -2 कर अपनेमाल सें दीवार पर्र रश्मी लिख दिया.
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Update 5
अगलेदिन मोनू केँ उठने सें पहले रश्मी विद्यालय केँ लिए निकल गई,.मोनू भि करीब-करीब 11 बजेउठा औऱ ब्रेकफास्ट वगेरह करके मां केँ पास बैठारहा, उन्हे खानां भि खिलाया, दवाई भि दि औऱ पास हि केँ डॉक्टर कों बुलवा कर वोँ इंजेक्शन भि लगवा दिया.
उसकेबाद पूरी दोपहर वोँ रात केँ बारे मे सोचता रहा.उसे अब पूरी उम्मीद होँ चुकी थि कि वोँ अपनी सेक्सी बेहन रश्मी केँ संगहर तरह केँ मज़े लेँ सकता हैं.पर्र उसे जोँ भि करना थां वोँ सभी काफ़ी सोचसमझ कर हि करना थां.
उसने एक् चीज़नोट कि, वोँ यह कि रश्मी उसकीहर बातमान लेती हैं.चाहे वोँ उसके दोस्तों केँ सामने कपड़े बदलकर आने वाली होँ, उनकेसंग जुआ खेलने वाली.याँ फिनकल रात कों उसके कमरे मे कही गयीँ, सारी बातें.
उसेलग रहा थां कि शायद रश्मी काफ़ी दिनों सें यहीसभी कुछ चाहती हैं.औऱ शायद इसलिये वोँ उसकीबात एक् हि बार मे मान लेती हैं.उसने मन मे सोच लिया कि आज वोँ इसबात कां इत्मीनान करके रहेगा कि वोँ जोँ बातसोच रहा हैं वोँ सही भि हैं याँ नहीं.अगर हैं तोँ उसके तौ काफ़ी मज़े होने वाले हें.औऱ उसके दिमाग़ केँ घोड़े काफ़ी दूर तक भागने लगे.
खैर, इनसभी बातों केँ अलावा उसने अपने दोस्तों कों भि मोबाइल करकेबोल दियाआज कि रात कों दोबारा आने केँ लिए.रिशू औऱ राजू तौ कल भि वापिस जानां नहीं चाहते थें.सेक्सी रश्मी केँ संग 3 पत्ती खेलने कां मजा हि कुछ औऱ थां.
साम कों 7 बजे केँ आसपास रश्मी भि आँ गयीँ,.मोनू नें दरवाजा खोला तोँ दोनों केँ चेहरों पर्र एक् अलग हि स्माइल थि.मोनू कां तौ मनकररहा थां कि वहीं केँ वहीं उसकेगले लग जाए.पर्र वोँ पहलेयह यकीन भि कर लेना चाहता थां कि कल वालीबात सें वोँ नाराज़ तोँ नहीं हैं.
रश्मी उपर अपने कमरे मे चली गई,.कुछ देर मम्मी केँ पास बैठी.अपने कपड़े बदले औऱ नीचेआकर रसोई मे गरमचाय बनाने लगी.
मोनू अंदर बैठा टेलीविज़न देखरहा थां.रश्मी नें रसोई सें हि आवाज़ लगाई : "मोनू.तूने भि गरमचाय पीनी हैं क्याँ.''
मोनू सीधा उठकर रसोई मे हि चला गय़ा औऱ बोला : "आप् पिलाओगी तौ कुछ भि पी लूँगा.''
रश्मी उसकीबात कां दूसरा मतलब समझकर मंद-2 मुस्कुराने लगी.मोनू ठीक उसके पीछेआकर खड़ा हौ गय़ा.औऱ बोला : "दिदी.वोँ कलरात वालीबात सें.आप् नाराज़ तोँ नहीं हैं नाँ.''
रश्मी एकदम सें उसकीतरफ पलटी.वोँ इतनापास खड़ा थां कि पलटते हुए रश्मी केँ बूब्स उसकी बाजुओं सें छूगये.
रश्मी : "तुँ पागल हैं क्याँ.हम् छोटे बच्चे हें जोँ इन बातों कि समझ नहीं हैं हमें.आजकल सभीकुछ ओपन हैं.सभी चलता हैं.हम् दोनो हि अगर एक् दूसरे कि हेल्प नहीं करेंगे तोँ कौन करेगा.''
मोनू : "यानी.आप् भि यही चाहती हें.थैंक गॉड.मे तौ पूरीरात सो नहीं पाया.यह सोचकर कि पता नहीं आप् क्याँ सोचरही होंगी.''
रश्मी नें उसके दोनोहाथ अपने हाथों मे पकड़लिए : "रिलेक्स.अधिकमत सोचाकरो.''
औऱ फिन उसने मोनू कों अपनेगले सें लगा लिया.मोनू नें भि अपनी बाहें उसकीकमर मे डालकर उसे अपनीतरफ खींच लिया.औऱ आज कि यहहग औऱ दिनों सें कुछ ज्यादा हि ज़ोर सें थि औऱ कुछ अधिक हि लंबी.
मोनू केँ हाथ उसकीकमर पर्र उपर नीचे होँ रहे थें.उसके दोनो बूब्स कों वोँ अपनी छाती पर्र महसूस करपारहा थां.उसके बदन सें आँ रही खुश्बू कों वोँ सूंघकर मदहोश सां हुएजा रहा थां.
उसका लन्ड खड़ा होकर रश्मी केँ नीचे वाले दरवाजे पऱ दस्तक देरहा थां.रश्मी कों फिन सें वहीरात वालासीन याद आँ गय़ा.जब वोँ उसके लन्ड कों पकड़कर हिलारही थि.औऱउसे चूमने भि वाली थि.
रश्मी नें एकदम सें उसके लन्ड केँ उपरहाथ रख दिया.औऱ धीरे-धीरे-2 सहलाने लगी.
रश्मी : "इसको थोड़ी तमीज़ नहीं सिखाई तुमने.अपनी बेहन कों देखकर भि खड़ा होँ रहा हैं यह तौ.''
मोनू : "बेहन तोँ मेरी होँ तुम्.इसकी नहीं.यह तौ मेरा मित्र हैं.औऱ आजकल अपने मित्र कि बेहन पर्र हि सबसे अधिकलोग लाइन मारते हें.''
रश्मी : "अच्छा जी.इसका मतलब हैं कि तुम् भि अपने दोस्तों कि बेहन पर्र लाइन मारते होँ.याँ फिन हौ सकता हि कि वोँ मुझपर लाइन मारते हौ.''
मोनू : "मे तौ बस तुम्हारी फ्रेंड पऱ लाइन मारता हू.वोँ तोँ आपकोपता चल हि चुका हैं.औऱ रहीबात आपकेउपर लाइन मारने कि तोँ सबसे पहलाहक मेरेइस यार कां हैं आपके उपर.उसके बाद किसी औऱ कां.''
रश्मी यह सोचने सिर्फ सें हि सिहरउठी कि उसके भइया केँ अलावा उसके सारे साथी भि उसे चोदने लिए रेडी बैठे हें। एकदम सें गरमचाय उबल गयीँ,
रश्मी : "ओहो.चलो छोड़ो मुझे.अंदर जाओ.मे गरमचाय लेकरआती हू.''
मोनू नें बेमन सें उसे छोड़ दिया.औऱ अंदर जाकरबैठ गय़ा.कुछ हि देर मे रश्मी गरमचाय लेकर आँ गयीँ, औऱ दोनों चुस्कियाँ लेतेहुए गरमचाय पीने लगे.औऱ बातें करनेलगे.
रश्मी : "आज भि आँ रहे हें क्याँ वोँ दोनों.रात कों खेलने''
मोनू : "वोँ तौ कल भि जानां नहीं चाहते थें.मैने उन्हे दिन मे हि मोबाइल कर दिया थां.वोँ ठीक 9 बजे आँ जाएँगे.''
अभि 7:30 बजरहे थें.
रश्मी : "ओहो.मुझे थोडा जल्द करना होगा.खानां भि बनाना हैं.मम्मी कों दवाई भि देनी हैं बाद मे.उन लोगो केँ आने सें पहले मां कों सुला देना हैं.वरना उन्हे बेकार कि तकलीफ़ होगी.
मोनूसमझ गय़ा कि अभि कुछ नहीं हौ सकता.अंदर रसोई मे हि एक्-दो किस्सेस लें लेनी चाहिए थि उसको.
गरम चाय पीने केँ बाद रश्मी फटाफट काम पऱ लग गई,.खानां बनाकर उसने मां कों खिलाया औऱ मोनू कों भि.औऱबाद मे स्वयं ऊपर कमरे मे चली गयीँ,.यहसभी करते-करते 9 बजगये औऱ ठीक 9 बजे उनकेघऱ कि बेल बजी.मोनू नें जाकर दरवाजा खोला तोँ दोनो बाहर् खड़े थें.उनके मुँह सें शराब कि भि गंध आँ रही थि.शायद साम सें हि दोनो पीने मे लगे थें.रश्मी केँ बारे मे सोच-सोचकर.
मोनू नें उन्हे अंदर बिठाया औऱ भागकर उपर गय़ा, मां सो चुकी थि औऱ रश्मी अपना खानां खारही थि.
मोनू : "दिदी.वोँ लोग आँ गये हें.आप् जल्द सें चेंज करके नीचे आँ जाओ.''
यह मोनू कां इशारा थां कि वोँ अपनेवही वाले कपड़े पहनकर नीचे आँ जाए, जिसमें वोँ जीतरही थि.
औऱ फिन वोँ नीचेआकर बैठ गय़ा औऱ पत्ते बाँटने लगा.
वोँ पहलीबार मे हि रश्मी कों गेम खिलाकर उनकेमन मे शक़ पैदा नहीं करना चाहता थां.
जब पत्ते बंटगये औऱ सब कि बूट केँ बाद 2-2 चाल भि आँ गयीँ, तोँ मोनू नें सबसे पहले पत्ते उठाकर देख लिए.उसके पास सिर्फ़ एक् इक्का थां औऱ दो छोटे पत्ते.उसने पेककर दिया.
राजू औऱ रिशू खेलने लगे.
खेलते-2 राजू बोला : "आज रश्मी नहीं खेलेगी क्याँ.?"
वोँ दोनो शायद काफ़ी देर सें वोँ बात पूछना चाहते थें.मोनू भि मन हि मन मे उनकीबात सुनकर हंस दिया.
मोनू : "पता नहीं.मैने बोला तोँ थां.पर्र शायदकल वोँ काफ़ी बारहार गई, थि.इसलिये मनाकर रही थि.शायद आँ भि जाए.''
रिशू : "अरे, यह तोँ खेल हैं.कोई नां कोई तोँ हारता रहता हैं.इसमे दिल छोटा करने वाली क्याँ बात हैं.''
मोनूकुछ नहीं बोला औऱ दोनो कि गेम चलती रही.वोँ गेम रिशू जीता, उसकेपास पेयरआया थां.
जैसे हि रिशू नें पत्ते बाँटने शुरुआत किए, उन्हे रश्मी केँ नीचे उतरने कि आवाज़ आई.सब केँ सब सीडियों कि तरफ देखने लगे.रिशू भि पत्ते बाँटकर उसीतरफ देखने लगा.
औऱ जैसे हि अपनी गेंदे उछालती हुई वोँ नीचे उतरी,
उसकेअलग हि अंदाज मे डांस करतेहुए मुम्मे देखकर वोँ दोनो हरामी समझगये कि उसने अंदरकुछ नहीं पहना हैं.औऱ सब कि तेज नज़रें टी शर्ट केँ पतले कपड़े केँ नीचे उसके निप्पल ढूँढने लगे औऱ उन्हे एक् हि बार मे सफलता भि मिल गई,, एक् तौ उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी थि औऱ उपर सें उसके निप्पल आम लड़कियों केँ मुक़ाबले कुछ ज्यादा हि मोटे थें.इसलिये नन्ही-2 चोंचसॉफ दिखरही थि.
रश्मी : "मोनू.मुझे खेलने दो नाँ.''
मोनू हंसता हुआउठ गय़ा.औऱ रश्मी कों सामने देखकर दोनो केँ मुँह सें पानी टपकने लगा.
मोनू : "रिशू.अब रश्मी आँ गई, हैं, इसलिये पत्ते दोबारा बाँटो.''
रिशू कों कोई तकलीफ़ नहीं थि, उसनेताश दोबारा फेंटी औऱ फिन सें पत्ते बाँटने लगा.
रश्मी कि तरफ सें चाल चलने औऱ पत्ते देखने कां काम मोनू कां हि थां.इसलिये 2-2 ब्लाइंड केँ बाद मोनू नें एकदम सें डबल ब्लाइंड चल दि.उसकी देखा देखी रिशू औऱ राजू नें भि डबल ब्लाइंड चल दि.वोँ तोँ बस रश्मी कों घूरने मे लगे थें.
मोनू नें फिन सें ब्लाइंड कां अमाउंट बड़ा दिया औऱ 600 रुपयबीच मे फेंक दिए.अब राजू कि फटने लगी.उसने अपने पत्ते उठा लिए.औऱ फिनकुछ सोचकर उसने 1200 बीच मे फेंके औऱ चालचल दि.
अबचाल बीच मे आँ चुकी थि, इसलिये राजू नें भि अपने पत्ते देख लिए.वोँ काफ़ी देर तक सोचता रहा औऱ आख़िर मे जाकर उसनेपेक हि कर दिया.
अब बारी थि रश्मी कि.उसने मोनू कि तरफ़ देखा तौ मोनू नें 600 कि ब्लाइंड फिन सें चल दि.
रिशू नें भि 1200 कि चाल रिपीट कर दि.
अब थि असली इम्तिहान कि घड़ी.रश्मी केँ इम्तिहान कि घड़ी.उसकी क़िस्मत केँ इम्तिहान कि घड़ी.
मोनू नें पत्ते उठाए.उन्हे चूमा.औऱ फिन एक्-एक् करतेहुए उन्हे देखा.
पहला हुकुम कां पत्ता थां 10 नंबर.
दूसरा भि हुकुम कां हि निकला.बेगम.
अब तोँ मोनू कों पक्का विश्वास होँ गय़ा कि उसकेपास हुकुम कां कलरआया हैं.
पर्र जैसे हि उसने तीसरा पत्ता देखा, लाल रंग देखकर उसकादिल टूट गय़ा.
पर्र अगले हि समय वोँ खुशी सें उछाल पड़ा.क्योंकि वोँ लालरंग मे हि सही पर्र गुलाम थां.
यानी उसकेपास सीक़ुवेंस आया थां.10, 11, 12.
उसने वोँ सभीशो नहीं होने दिया.औऱ बड़े हि आहिस्ता रिशू कि चाल सें डबलचाल चलतेहुए 2400 रुपयबीच मे फेंकदिए.
अब रिशू भि समझ चुका थां कि मोनू केँ पास बाड़िया वाले पत्ते आए हें.इसलिये उसने एकदम सें डबल कि चालचली हैं.पर्र उसकेपास भि पत्ते चाल चलने लायक थें, इसलिये वोँ अभि तक खेलरहा थां.वोँ आगेचाल तोँ चलना नहीं चाहता थां पर्र शो अवश्य माँग लिया उसने.
मोनू नें शो करतेहुए अपने पत्ते सलीके सें उसके सामने फेंकदिए.
उन्हे देखकर एक् दर्द सां उभरआया रिशू केँ चेहरे पऱ.जैसे अक्सर जुआ हारने वाले केँ चेहरे पर्र आँ जाता हैं.
उसने भि अपने पत्ते फेंकदिए.
उसकेपास 9 कां पेयर थां.
औऱ मोनू नें हंसते हुए सारे पैसे अपनीतरफ खिसका लिए.
इतने सारे पैसे अपने सामने देखकर रश्मी खुशी सें चिल्ला पड़ी.
वोँ करीब-करीब 10 हज़ार थें, जौ एक् हि बार मे उनकेपास आँ गये थें.
हारने कां गम मनाते हुए रिशू कों रश्मी केँ उछलते हुए मुम्मो कों देखकर कुछदेर केँ लिए सांत्वना अवश्य मिली.पर्र उसकामूड खराब होँ चुका थां.
एकदम सें रश्मी बोलीं : "मे कुछ खाने केँ लिए लाती हूं अंदर सें.''
औऱ वोँ उठकर अंदरचली गई,।
उसके जाते हि मोनू उसकीसीट पर्र आकरबैठ गय़ा.यह सोचकर कि एक् गेम वोँ भि खेल लें, औऱ हारजाए, ताकि वोँ खेलने केँ लिए बैठे रहे.वरना जुआरियों कों हमेशा यहीलगा रहता हैं कि अगरकोई बड़ीगेम हार जाते हें तौ उसकेबाद निकलने कि सोचते हें.
पर्र उसके बैठते हि रिशू एकदम सें बोला : "अब तुम् रश्मी कों हि खेलने दो.ऐसे बीच मे बदल-2कर मत खेलो.''
मोनू चुपचाप उठ गय़ा.औऱ वापिस सोफे केँ हत्थे पर्र बैठ गय़ा.
रिशू औऱ राजू एक् तरफ हि बैठे थें.दोनो एक् दूसरे केँ पास मुँह लेजाकर ख़ुसर फुसर करनेलगे.
रिशू : "दोस्त.यह तौ मेरा बैठे-2 निकलवा कर रहेगी आज.साली बिना ब्रा केँ बैठी हैं सामने.मन तोँ कररहा हैं कि इसके मोटे-2 निप्पल पकड़कर ज़ोर सें दबादूं.''
राजू फुसफुसाया : "हाँ दोस्त.साली बिल्कुल सामने बैठकर ऐसे हिलारही हैं अपने दूधों कों कि मनकररहा हैं उन्हे दबोचने कां.साली रंडीलग रही हैं बिल्कुल.एक् बारबस मिलजाए इसकी.यह सारे पैसे हारने कां भि गम नहीं रहेगा.''
औऱ दोनोखी-2 करतेहुए हँसने लगे.
मोनू उनकी बातें सुनने कि कोशिश कररहा थां पऱ उसेकुछ सुनाई हि नहींदे रहा थां.
पर्र यह तोँ वोँ समझ हि चुका थां कि वोँ दोनो रश्मी केँ बारे मे हि बातकर रहे हें.
तभी रश्मी कि आवाज़ आई अंदर सें : "मोनू.वोँ बेसन वाली मूँगफली कहां रखी हैं.मिल नहींरही मुझे.''
मोनू उठकर अंदरचला गय़ा.
अब राजू औऱ रिशू थोडा खुलकर बाते करनेलगे रश्मी केँ बारे मे.
मोनू जैसे हि अंदर पहुंचा, रश्मी नें उसे अपनीतरफ घसीटकर उसे अपने सीने सें लगा लिया.
एकदम सें रश्मी कि इस हरकत पर्र वोँ बोखला सां गय़ा.क्योंकि उन दोनो केँ बाहर् बैठेहुए रश्मी सें ऐसी हरकत कि उम्मीद नहीं थि उसको पऱ उसके नर्म रसीले मुम्मो केँ एहसास कों अपनी छाती पऱ महसूस करकेउसे मजा बहोत आया.औऱ वोँ एक् हि समय मे यहभूल गय़ा कि उसके दोनो साथीकुछ हि दूर यानी बाहर् बैठे हें। रश्मी कि खुशी देखते हि बनती थि
रश्मी : "मोनू.तुमने बिल्कुल सच बोला थां.हम् जीत गये.वोँ भि इतने सारे पैसे एक् संग.वाव.आई एमसो हैप्पी.''
औऱ इतना कहतेहुए उसने एकदम सें उपर होतेहुए मोनू केँ होंठों कों चूम लिया.वोँ स्मूच तोँ नहीं थां पऱ उसके नर्म औऱ ठन्डे होंठों केँ एहसास कों एक् समय केँ लिए हि सही, महसूस करते हि उसकेतन जिस्म मे आग सि लग गयीँ,.उसने भि रश्मी केँ चेहरे कों पकड़कर उसे चूमना चाहा पर्र तभी बाहर् सें रिशू कि आवाज़ आई
''अरे भइया.मूँगफली मिली याँ नहीं.''
रश्मी एकदम सें मोनू सें अलग होँ गई,.पऱ उसकी आँखो कि शरारत साफ़बता रही थि कि वोँ भि मोनू केँ लिए अभि उतनी हि उतावली होँ रही थि, जितना कि वोँ हौ रहा थां उसकेलिए.
अचानक मोनू नें उसके दोनो मुम्मों कों दबोच लिया औऱ ज़ोर सें दबा दिया.
रश्मी एक् दम सें चिहुंक उठी.यह उसके भइया कां सीधा औऱ प्रहार थां उसके स्तनों पर्र.जिसे महसूस करके उसका शरीर भि ऐंठने लगा.
रश्मी फुसफुसाई : "छोड़ो मोनू.वोँ बाहर् हि बैठे हें.कोई अंदर नाँ आँ जाए.छोड़ो नाँ.यह कर क्याँ रहे होँ तुम्.''
मोनू नें भि शरारत भरी मुस्कान सें कहा : "मूँगफली ढूँढरहा हू.''
औऱ इतना कहते-2 उसने रश्मी केँ दोनो निप्पल पकड़कर ज़ोर सें भींचदिए.
औऱ बोला : "मिल गई, मूँगफलियाँ.''
रश्मी कसमसाकर बोलीं : "कमीने होँ तुम् एक् नंबर केँ.जाओ अभि बाहर्.यह मूँगफलियाँ रात कों मिलेंगी.''
मोनू बेचारा बेमन सें बाहर् निकल आया.पऱ यह सांत्वना भि थि कि आजरात कों अवश्य कुछ ख़ास होकर रहेगा.
मोनू केँ आने केँ एक् मिनट केँ अंदर हि रश्मी भि आँ गयीँ,.औऱ आदत केँ अनुसार रिशू औऱ राजू कि नज़रें फिन सें एक् बार उसके निप्पल्स पर्र चली गयीँ,.औऱ इसबार उन्हे यह देखकर औऱ भि आश्चर्य हुआ कि वोँ तोँ पहले सें भि बड़ेदिख रहे थें.ऐसा क्याँ होँ गय़ा रश्मी कों एकदम सें.ऐसा तोँ तब होता हैं जब लड़की पूरीतरह सें उत्तेजित होती हैं.
तौ क्याँ रश्मी उन्हे देखकर हि उत्तेजित होँ रही हैं.
क्योंकि मूँगफली कि प्लेट नीचे रखतेहुए वोँ जिस तरीके सें उन्हे देखरही थि.सॉफ पताचल रहा थां कि वोँ भि उनमे इंटरस्ट लेँ रही हैं.
उन दोनो केँ लन्ड तोँ खड़े होकर बग़ावत करनेलगे.
खेल कि मम्मी कि बुर.उन्हे तोँ बस रश्मी मिलजाए इस वक्त, वोँ अपने सारे पैसेऐसे हि उसे देने केँ लिए रेडी थें.
पर्र रश्मी तौ अलग हि दुनिया मे थि.उनके मन मे क्याँ चलरहा हैं इसबात सें भि अंजान.
औऱ इसबार रश्मी नें पत्ते बाँटने शुरुआत किए.औऱ वोँ बेचारे बेमन सें अगलीगेम खेलने लगे.
रश्मी केँ चेहरे कि हँसी जाने कां नाम हि नहीं लें रही थि.ऐसा अक्सर होता हैं, नये-2 जुआरियो केँ संग.
अगलीगेम केँ लिएबूट औऱ ब्लाइंड कि राशि 500 कर दि गई,.औऱ 3-3 ब्लाइंड चलने केँ बादजब एक् बार औऱ रश्मी कि तरफ सें मोनू नें ब्लाइंड चली तोँ राजू औऱ रिशू कां मनहुआ कि पत्ते उठाकर देख लेँ.पर्र फिन नाँ जाने क्याँ सोचकर दोनो एक्-2 बाजी औऱ ब्लाइंड कि खेल गये.यही तोँ मोनू भि चाहता थां.क्योंकि उसे तौ पक्का विश्वास थां कि रश्मी केँ पत्ते तौ अच्छे होंगे हि.इसलिये उसनेइस बार ब्लाइंड कि रकम भि दुगनी करतेहुए 1000 कर दि.
अब तौ सबसे पहले रिशू कि फटी.क्योंकि पिछली गेम मे वोँ काफ़ी पैसेहार चुका थां.औऱ यह ग़लती वोँ इसबार नहीं करना चाहता थां.
उसने अपने पत्ते उठा लिए.उसके पास 2 कां पेयरआया थां.पत्ते तोँ काफ़ी छोटे थें.पऱ चाल चलने लायक थें.उसका एक् मन तोँ हुआ कि पेककर दे.पऱफिन रिस्क लेतेहुए उसने 2000 बीच मे फेंककर चालचल दि.
राजू कि बारीआई तौ उसनेझट सें अपने पत्ते उठा लिए.उसके पास इक्का औऱ बादशाह आए थें.संग मे थां 7 नंबर.कोई मेल हि नहीं थां.चाल चलने कां तौ मतलब हि नहीं थां। उसनेपेक कर दिया.
अब एक् चालबीच मे आँ हि चुकी थि.पर्र फिन भि मोनू नें रश्मी केँ पत्ते देखे बिना एक् औऱ ब्लाइंड चल दि.औऱ हज़ार कां नोटबीच मे फेंक दिया.
इतनी डेयरिंग तोँ आज तक इनमे सें किसी नें नहीं दिखाई थि.ऐसा लगरहा थां कि मोनू कों पूरा विश्वास थां कि वोँ हि जीतेगा.इतना कॉन्फिडेंस कही उसकाओवर कॉन्फिडेंस नाँ बनजाए.
अब रिशू केँ सामने चुनोती थि.पऱ एक् तरह सें देखाजाए तौ उसका पलड़ा हि भारी थां अब तक.मोनू नें पत्ते देखे नहीं थें.औऱ उसकेपास पेयर थां 2 कां.ऐसे मे उसके मुक़ाबले केँ पत्ते होना एक् रिस्क हि थां मोनू केँ लिए.पऱ फिन भि वोँ चाल केँ उपर ब्लाइंड खेल गय़ा.शायद यह सोचकर कि अगरजीत गय़ा तोँ तगड़ा माल आएगा हाथ.औऱ अगरहार भि गय़ा तोँ कोईगम नहीं.क्योंकि पिछली गेम मे वोँ काफ़ी मालजीत हि चुका थां.
रिशू कि नज़रें रश्मी केँ उपर थि.तोँ थोड़ी टेंशन मे आँ चुकी थि अपने भइया कों ऐसे ब्लाइंड पर्र ब्लाइंड चलते देखकर.
रिशू नें फिन सें एक् बार रिस्क लेतेहुए 2000 कि चालचल दि.अब तोँ रश्मी कि टेंशन औऱ भि बढ़ गयीँ,.टेंशन केँ मारे उसके निप्पल उबलकर बाहर् कि तरफ निकल आए.औऱ उसने जाने अंजाने मे हि अपने दाँये निप्पल कों पकड़कर नाँ जाने क्यो उमेठ दिया.
Diwali ka Jua - 3 (Incest + Adultery) - Diwali Ki Raat – New Episode
Update 6
वैसेयह उसकी हमेशा कि आदत थि.जब भि वोँ उत्तेजित होती थि.यानी रात केँ टाइम याँ फिन फ़िन्गरिंग करते वक्त.वोँ अपने खड़ेहुए निप्पल्स कि खुजली कों मिटाने केँ लिए उन्हे ज़ोर-2 सें उमेठ देती थि.ऐसा करने मे उसकी खुजली भि मिट जाती थि औऱ उसे अंदर तक एक् राहत भि मिलती थि.
पर्र आज वोँ भले हि उत्तेजित नहीं थि.पर्र उसके निप्पल्स मे होँ रही खुजली ठीक वैसी हि थि जैसीरात केँ वक्तहुआ करती थि.औऱइस टेंशन वाली खुजली कों भि उसने अपनी उंगलियों केँ बीच दबोचकर मिटा दिया.
भले हि यहसभी करतेहुए उसका स्वयं पर्र नियंत्रण नहीं थां.पऱ उसकीइस हरकत कों देखकर सामने बैठे दोनो ठरकियों केँ लौड़े कबूतर कि तरह फड़फड़ाने लगे.
अभि कुछदेर पहले हि मूँगफली कि प्लेट नीचे रखतेहुए जिसअदा केँ संग रश्मी नें उन दोनो कों देखा थां औऱ स्माइल किया थां.अब उसेफिन सें खुलेआम अपने निप्पल कों मसलते देखकर उन्हे पूरा विश्वास होँ गय़ा कि वोँ उन्हे लाइनदे रही हैं.एक् तोँ पहले सें वोँ बिन ब्रा केँ औऱ ऊपर सें ऐसी रंडियों वाली हरकतें.उन्होने मन हि मनयहसोच लिया कि एक् बार वोँ भि अपनीतरफ सें ट्राइ करके रहेंगे.शायद उनका अंदाज़ा सही हौ औऱ रश्मी जैसामाल उन्हे मिलजाए
मोनूइन सभी बातो सें अंजान अपनेगेम कों खेलने मे लगा थां.उसका एक् मन तौ हुआ कि वोँ एक् औऱ ब्लाइंड चल दे.पऱकही कुछ गड़बड़ होँ गई, तोँ सारे पैसे एक् हि बार मे जाएँगे.
यह सोचते हुए उसने अपने पत्ते उठालिए.
औऱ अपने पत्ते देखकर एक् लम्हा केँ लिए तौ उसके माथे पर्र भि तकलीफ़ कां पसीना उभरआया.
उसकेपास 3 कां पेयरआया थां.
अब देखाजाए तोँ वोँ जीत हि रहा थां रिशू सें.मगर उसे तौ यहबात पता नहीं थि नाँ.
पत्ते भले हि मोनू केँ पासचाल चलने लायक थें.पर्र वोँ औऱ चाल चलकरखेल कों आगे नहीं बढ़ाना चाहता थां.क्योंकि सामने सें रिशू 2 चालें चल हि चुका थां.यानी उसकेपास भि ढंग केँ पत्ते आए होंगे.मोनू कों चिंता सताने लगी कि कहीं वोँ यह बाजीहार नां जाए.याँ फिन हारने सें पहले वोँ पेककर दे तोँ कम सें कमशो करवाने केँ 2000 औऱ बच जाएँगे.
वोँ कशमकश मे पड़ गय़ा.
फिन उसने एक् निश्चय किया.रश्मी कों उसने वोँ पत्ते दिखाए.औऱ धीरे-धीरे सें पूछा। : "दिदी.आप् कहो.शो माँगलू याँ पेककर दू.''
अब रश्मी इतनी समझदार तौ थि नहीं जोँ इसखेल कों इतनी अंदर तक समझ पाती.पऱ उसनेजब देखा कि उनकेपास 3 कां पेयर हैं.औऱ मोनू नें यही सिखाया थां कि पेयर ज़्यादातर गेम्स जीताकर हि जाते हें.उसने हाँ मे सिर हिलाकर शो माँगने कों कहा.औऱ मोनू नें उसकेबाद बिनाकुछ सोचे समझे 2000 बीच मे फेंकते हुएशो माँग लिया.
अब यहगेम अगर वोँ हार जाते तौ अभि तक केँ सारे जीतेहुए पैसे एक् हि बार मे चले जाने थें.पर्र ऐसा होना नहीं थां.क्योंकि रिशू नें जैसे हि अपने पत्ते उन्हे दिखाए.मोनू नें बड़े हि जोशीले तरीके सें 2 केँ पेयर 3 कां पेयर फेंकते हुए सारे पैसे अपनीतरफ करने शुरुआत करदिए.
औऱ इतने सारे पैसे एक् बारफिन सें अपनीतरफ आते देखकर रश्मी तोँ झल्ली होँ गयीँ,.औऱ उसने खुशी केँ मारे उछलते हुए अपने भइया कों गले सें लगा लिया.
उसके दोनो मुम्मे बुरीतरह सें बेचारे मोनू केँ चेहरे सें रगड़ खातेहुए पिसगये.
औऱ उसकीयह हरकत देखकर रिशू औऱ राजू मोनू कि भाग्य कों फटी हुइ आँखो सें देखरहे थें.
वोँ बड़े हि जोशीले तरीके सें मोनू केँ चेहरे कों दबोचकर चिल्लाती जारही थि : "हम् जीत गये.याहूऊऊऊओ.हम् जीतगये.''
मोनू नें बड़ी हि मुश्किल सें अपने आप् कों उसके नर्म रसीले मुम्मे केँ हमले सें छुड़वाया.वोँ ऐसा करना तोँ नहीं चाहता थां पर्र अपने दोस्तों कों ऐसे मुँह फाड़कर उसे औऱ अपनी बेहन कों हग करता देखकर वोँ स्वयं कों छुड़वाने पऱ मजबूर होँ गय़ा.
अब मोनू करीब 20-25 हज़ार जीत चुका थां.
रश्मी नें सारे नोटो कों सलीके सें एक् केँ उपर एक् रखकर गड्डी बनानी शुरुआत कर दि.औऱ एक् मोटी सि गड्डी बनाकर उसे अपने कुल्हों केँ नीचेदबा करबैठ गयीँ,.
उफफफ्फ़.काश.हम् नोट होते.बस यही सोचते रहगये रिशू औऱ राजू.
आज काफ़ी पैसेहार चुके थें वोँ दोनो.औऱ उन दोनो कि जेबें करीब खाली हौ चुकी थि.
रिशू : "मोनू भइया.आज केँ लिए यहीं खत्म करते हें.अगर गेम लंबीचली गयीँ, तोँ अधिकचाल चलने केँ पैसे नहीं हैं आज.कल आएँगे हम्.वैसे भि कल छोटी दीवाली हैं.औऱ परसो दीवाली.अब तोँ उसके हिसाब सें हि आएँगे.बस इनदो दिनों कां हि खेलरह गय़ा हैं अब तौ.उसके बाद तोँ फिन सें अपने धंधे पानी कि तरफ देख्ना पड़ेगा.''
राजू : "हाँ भइया.आज केँ लिए तौ मे भि चलूँगा.आज काफ़ी मालहार गय़ा.पर्र कोईगम नहीं इसका.इसी बहाने रश्मी तौ खुश हुई नां.''
वोँ जैसे रश्मी कों मक्खन लगाने केँ लिएयह सभीकह रहा थां.
रश्मी भि उसकीबात सुनकर मुस्कुरा उठी.वैसे भि राजू उसको शुरुआत सें हि आकर्षक लगता थां.उसकी डीलडोल सबसेअलग थि.औऱ शायदयह सोचकर कि उसका लन्ड भि ऐसा होगा.वोँ अंदर सें सिहरउठी.
जाते-2 रिशू एकदम सें पलटा औऱ बोला : "मोनू.अगर तूँ कहे तोँ कल हम् लाला कों भि लेते आए.उसका मोबाइल आया थां आज सुभह औऱ बोलरहा थां खेलने केँ लिए.मैने तौ बोल दिया कि आजकल हम् मोनू केँ घऱ बैठते हैं.पऱ वोँ अगर कहेगा तभीआने केँ लिए कहूँगा.''
मोनूकुछ देर केँ लिएसोच मे पड़ गय़ा.
लाला उनका प्राचीन मित्र थां.औऱ एक् नंबर कां हरामी भि.लड़कियों कों चोदने औऱ उनके बारे मे बात करना, बस यहीकाम थां उसका.एक्-दो बार मोनू नें उसके मुँह सें रश्मी केँ बारे मे सुन लिया थां, कहासुनी भि हुईँ थि दोनों मे, तबसे वोँ उसकेसंग दूरी बनाकर रखता थां.औऱ यहबात सब कों मालूम थि.
पऱ जुआ खेलने मे वोँ एक् नंबर कां अनाड़ी थां.चाल कब औऱ केसे चलनी हैं, इसकाउसे अंदाज़ा नहीं थां.उसे बसउपर केँ खेल कि जानकारी थि.जैसी जानकारी रश्मी कों थि.ठीक वैसी हि.
पऱ वोँ खुलकर पैसे लगाता थां अपनीहर गेम मे.औऱ आजजिस तरह सें मोनू केँ हाथजुआ जीतने कां मंत्र हाथलगा थां, उसकेबाद तौ ऐसे हि जुआरियों केँ संगजुआ खेलने कां मजाआता हैं
उसनेहां दि.
उनके जाने केँ बाद रश्मी नें पूछा : "यह लालाकौन हैं.?''
मोनू : "वोँ कल हि देख लेना.इनकी तरह हि एक् मित्र हैं वोँ भि.पऱ अधिक खेलना नहींआता उसको.''
रश्मी : "पर्र आजमजा बहोत आया मोनू.इतने पैसेजीत गये हम्.यह देखो.''
उसने अपनी गांड केँ नीचे सें नोटो कि गड्डी निकाल कर दिखाई.जौ अच्छी तरह सें दबने केँ बाद सीधे होँ चुके थें.मोनू भि उन नोटो कि गर्मी सें यह अंदाज़ा लगाने कि कोशिश कररहा थां कि यहअसल मे कौनसी गर्मी हैं.उसकी बेहन कि गांड कि याँ हरे-2 नोटों कि.
सारे पैसे मोनू नें रश्मी कों रखने केँ लिएदे दिए.वोँ पलटकर जैसे हि उपर अपने कमरे मे जानेलगी, मोनू एकदम सें बोला : "मूँगफली.''
औऱ वोँ शब्द सुनकर रश्मी कों एकदम सें वोँ बातयाद आँ गई, जोँ रसोई मे उसने मोनू सें बोलि थि.किरात कों वोँ अपनी मूँगफली खिलाएगी उसको.औऱ वोँ याद करते हि उसकी दोनो मूंगफलियां यानि निप्पल्स टाइट होँ गयीँ,.वोँ गहरी साँसे लेने लगी.औऱ उसकादिल ज़ोर-2 सें धड़कने लगा.
अगर इससमय मोनू उसको पीछे सें पकड़कर उसकी दोनो चुचियाँ ज़ोर सें दबा देता तोँ वोँ वहीं केँ वहीं पिघल जाती.लिपट जाती उसके संग.नोच फेंकती अपने औऱ उसके कपड़े.औऱ खिला देती अपने भइया कों अपनी मूँगफलियाँ.
उसने हकलाते हुएकहा : "क.क्याँ कहा.तुमने.''
मोनू : "यह मूँगफलियाँ तौ अंदररख दो दिदी.बाहर् पड़ी हुई सील जाएँगी.इनका करारापन चला जाएगा.''
उसने प्लेट मे रखी मूँगफलियों कि तरफ इशारा किया.
रश्मी : "ओह्ह्ह.मे समझी.उम्म्म्मम। ओक.रख देतीहू.''
औऱ इतना कहकर उसने जल्द सें वोँ प्लेट उठाई औऱ भागकर रसोई मे चली गयीँ,.फिन वोँ बाहर् निकलकर जैसे हि अपने कमरे मे जाने लगी.पीछे सें मोनू नें धीरे-धीरे सें कहा : "औऱ दिदी.उन मूँगफलियों कां क्याँ.जौ मुझे खिलाने वाली थि आज आप्.''
एक् बारफिन सें सुलगउठी रश्मी, अपने भइया कि यहबात सुनकर.
उसने धीरे-धीरे सें पीछे देखा औऱ बोलीं : "फ़िक्र मत करो.उनका करारापन नहीं जाएगा.''
मोनू : "जब तक चेक नाँ कर लू.मुझे विश्वास नहीं होगा.''
रश्मी : "बदमाश.तौ तुँ नहीं मानेगा.''
रश्मी तौ स्वयं यहीचाह रही थि कि आज वोँ नाँ हि माने.
मोनू नें नां मे सिर हिला दिया.ऐसा मौकाभला वोँ क्यो छोड़ता.
रश्मी : "अभि मम्मी कों चेक करकेआती हूं.सोना मत.ह्म्म्म्म.''
औऱ वोँ अपनी बड़ी सि गांड मटकाती हुईँ उपरचली गयीँ,.औऱ मोनू खुशी-2 अपने कमरे कि तरफ.
अपने कमरे मे जाते हि मोनू नें अपने सारे कपड़े उतार फेंके.औऱ अगल-बगल डियोलगा लिया.औऱ फिन सिर्फ़ एक् निक्कर औऱ टी शर्टपहन कर अपनेबेड पऱ लेट गय़ा.वोँ औऱ उसका लन्ड बड़ी हि बेसब्री सें रश्मी कां प्रतीक्षा करने लगे.रात केँ 12 बजने वाले थें.उसकी आँखो मे नींदभरी हुई थि.पऱ वोँ सोना नहीं चाहता थां.बस अपनी आँखो कों बंद करके वोँ रश्मी केँ आने केँ बाद क्याँ-2 करेगा यही सोचने लगा.औऱ यह सोचते -2 कब उसकीआँख लग गई,, उसे भि पता नहींचला.
''मोनू.मोनू.सो गये क्याँ.''
दूर सें आती आवाज़ सुनकर मोनू कि नींदखुल गयीँ,.वोँ तौ सपनों कि दुनिया मे थां.ठंडी बर्फ मे.पूरा नंगा.औऱ रश्मी केँ पीछेभाग रहा थां.उसके बचे खुचे कपड़े उतारने केँ लिए.औऱ वोँ भागेजा रही थि.भागे जारही थि.
''मोनू.उठो.मे आँ गई,.''
रश्मी कि आवाज़ सुनते हि वोँ एकदम सें अपने ख्वाब कि दुनिया सें बाहर् निकला.वोँ उसकीबगल मे हि बैठी थि.औऱ उसकाहाथ मोनू केँ माथे पऱ आए पसीने कों पोंछरहा थां.
रश्मी : "क्याँ हुआ.कोई सपनादेख रहे थें क्याँ.कहो.''
मोनू नें हाँ मे सिर हिलाया.
रश्मी : "बताओ.क्याँ देखरहे थें.''
वोँ शायद जानती थि कि वोँ उसके बारे मे हि सोचरहा थां ड्रीम्स मे.पर्र फिन भि उसके मुँह सें सुनना चाहती थि.
मोनू : "वोँ मैनेबता दिया तोँ आप् शरमा जाएँगी.बहोत कुछ हौ रहा थां ड्रीम्स मे तौ.''
औऱ मोनू कि यहबात सुनकर वोँ सच मे शरमा गयीँ,.
मोनू कि नज़रें उसके चेरहरे सें होती हुइ नीचे तक आई.उसकी क्लिवेज उफनकर बाहर् आँ रही थि.इतना गहरागला तोँ उसनेआज तक नहीं देखा थां अपनी बेहन कां.ऐसा लगरहा थां जैसे उसनेजान बूझकर अपने मुम्मे बाहर् कि तरफ निकाले हें, ताकि मोनू उन्हे देखसके.
रश्मी नें उसकी नज़रों कां पीछा किया औऱ बोलि : "एक् नंबर केँ बदमाश होँ तुम्.मैने तोँ पहले सोचा भि नहीं थां कि तुम् ऐसे होगे.पऱ पिछले 2-3 दिनों सें जोँ भि तुम्हारे बारे मे पताचल रहा हैं, उसके हिसाब सें तोँ तुम् बड़ी पहुँची हुई चीज़ हौ.''
मोनू नें अपनाहाथ आगे करतेहुए रश्मी कि कमर कों लपेटा औऱ उसे अपनीतरफ करतेहुए खींच लिया.वोँ आगे कि तरफ होती हुइ उसकी छाती पर्र गिर गयीँ,.औऱ अब रश्मी कां चेहरा सिर्फ़ 2-3 इंच कि दूरी पर्र हि थां.दोनों कि साँसे टकरारही थि आपस मे.रश्मी केँ दोनो मुम्मे उसकेउपर गिरकर पिचक चुके थें.औऱ रश्मी कि पीठ पीछे मोनू कां लन्ड अपना पूरारूप लें चुका थां.
मोनू केँ हाथ धीरे-धीरे-2 रश्मी कि टी शर्ट केँ अंदर घुसने लगे.उसकी कमर केँ कटाव सें होकर जैसे हि मोनू कां हाथ अंदर दाखिल हुआ.रश्मी एकदम सें बोलि : "यह.क्याँ कररहे होँ मोनू.मुझे लज्जा आँ रही हैं.''
उसकी आँखो मे गुलाबी लकीरें उतर आई.हल्का पानी भि आनेलगा.
मोनू : "दिदी.आपने हि तौ कहा थां कि मूंगफलियां खिलाएँगी.अब हमने इतनी गेम्स जीती हें.उनके बदले सिर्फ़ यही एक् चीज़ तौ माँगरहा हू.''
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