Diwali ka Jua - 3 (Incest + Adultery) - Diwali Ki Raat – New Episode
लास्ट कां वर्ड यानी फकिंग सुनते हि रश्मी एकदम सें सुलगकर रह गई,.दोसाल पहले तक, जब तक दोनो कि दोस्ती थि, उन्होने यही डिसाईड किया थां कि अपनी विवाह सें पहले किसी कों भि वोँ सभी नहीं करने देंगी.पर्र यह रुची कितनी चालू निकली.इन दो सालो मे वोँ कितनी बदल गयीँ, हैं.कहां सें कहां पहुँच गयीँ,.अपना वादा तोड़ दिया.औऱ चुदवा भि ली.औऱ वोँ भि उसके स्वयं केँ भइया सें.
रश्मी कों क्रोध तोँ बहोत आया.पऱ वोँ कर भि क्याँ सकती थि.उसकी अपनी लाइफ थि.वोँ जैसे चाहे, वैसे चलाए.वोँ बेकार मे हि क्रोध करके अपनाखून जलारही हैं.
वोँ थोडा नॉर्मल हुइ.पर्र 'फकिंग' शब्द सुनने केँ बाद वोँ अपने भइया सें नज़रें नहीं मिलापा रही थि.औऱयह जानकार भि कि छोटा होतेहुए भि उसका भइया उससेआगे निकल गय़ा हैं.यानी किसी केँ संग संबंध बना लिया हैं उसने.औऱ एक् वोँ हैं.अभि तक अपनी कुँवारी बुर कि घऱ बैठकर मालिश कररही हैं बस.
उसकेमन मे आया कि 'काश.ऐसी कोई स्थान होती.जहाँ कभी भि, कोई भि जाकरचुद सके.बिना कोई प्रश्न पूछे.बस वहाजाए, औऱ चुदाई करनी याँ करवानी शुरुआत कर दे.तोँ वोँ भि वहा जाती औऱ अपने प्यासे शरीर कि प्यास बुझा लेती.'
ऐसे बे-सिर-पेर केँ ख़याल अक्सर उसके दिमाग़ मे आते रहते थें.
अब मोनू कि बारी थि.पऱ उसकीसमझ मे नहीं आँ रहा थां कि वोँ पूछे भि तौ क्याँ पूछे.उसकी बेहन नें वोँ काम अभि तक नहींकिए थें.तोँ केसे वोँ आगे कि बाते पूछे.वोँ पूछना चाहता थां कि 'दिदी, आपने किसी केँ संगकोई संबंध नहीं रखा, पर्र क्याँ आपनेआज तक मूठ भि नहीं मारी.आपको कुछ होता नहीं हैं क्याँ अंदर सें.'
पर्र वोँ ऐसापूछ नहीं पाया.
फिन अचानक वोँ बोला : "आप् यह बताओ.यह केसेपता चला कि मेरी एक् गर्लफ्रेंड हैं.मैने तौ आज तक आपको बताया नहीं.औऱ रुची सें तौ आपकी 2 सालो सें बोलचाल बंद हैं.फिन पता केसेचला.''
रश्मी नें सिर झुकाते हुए धीरे-धीरे सें कहा : "वोँ.मैने.कई बार.तुम्हारे फोन पऱ मैसेजस पड़े हें.इसलिये.''
मोनू : ओह तेरी.तोँ ऐसेपता चला रश्मी कों.'
औऱ रश्मी कों उसकानाम शायद इसलिये नहींपता थां क्योंकि उसने अपनेफोन मे रुची कों ''शोना'' केँ नाम सें सेव कियाहुआ थां.औऱ यहनया नंबर थां, इसलिये रश्मी समझ नहींपाई कि यह ''शोना''असल मे उसकी पक्की सहेली रुची हि हैं.
मोनू : "चलोकोई बात नहीं.अब तौ आपकोपता चल हि गय़ा हैं.अब आप् फिन सें ब्लाइंड यानीकुछ औऱ पूछना चाहती होँ तौ पूछो.वरना अपने पत्ते खोलकर चालचलो.''
रश्मी केँ पास तोँ काफ़ी प्रश्न थें.पर्र पहलीबार मे हि वोँ सभी पूछकर वोँ मोनू कों भगाना नहीं चाहती थि.उसने अपने पत्ते उठा लिए.पर्र यह पत्ते उसकीसमझ मे नहींआए.
मोनू नें भि अपने पत्ते उठाकर देखे.उसके पास 5 कां पेयरआया थां.वोँ खुश होँ गय़ा.पऱ रश्मी केँ प्रश्नवाचक चेहरे कों देखकर बोला : "क्याँ हुआ दिदी.पत्ते ठीक नहींआए क्याँ.''
रश्मी : "पता नहीं.यह देखो ज़रा.''
उसने अपने पत्ते सामने फेंक दिए.वोँ थें इक्का, बादशाह औऱ बेगम.
मोनू : "दोस्त दिदी.आप् तौ कमाल होँ.पता हैं यह क्याँ हैं.सबसे बड़ी सीक्वेंस.इनको तौ सिर्फ़ औऱ सिर्फ़ ट्रेल हि काट सकती हैं.जौ बड़ी मुश्किल सें आती हैं.जैसी आपकेपास पिछली बारआई थि.इक्के कि ''
औऱ फिन मोनू नें रश्मी कों सबतरह केँ पत्तो केँ बारे मे बताया कि क्याँ बड़ा होता हैं.क्याँ छोटा.सुच्ची किसे कहते हें.कलर.पेयर.सीक्वेंस.सब कि जानकारी दि उसने.
मोनू : "यहगेम तोँ आप् जीत गई,.''
रश्मी : "अब पैसे तोँ रखे नहीं हैं हमने.फिन मुझे क्याँ मिलेगा.''
वोँ मंद -2 मुस्कुरा भि रही थि यह बोलते हुए.
मोनू कों उसकी हँसी कां जोँ मतलब नज़र आँ रहा थां.वोँ कहना नहीं चाहता थां.औऱ यह भि नहीं केहना चाहता थां कि जीतने केँ बाद वोँ क्याँ माँगने कि बातकर रही हैं.
मोनू : "वोँ बाद मे बता देना.अभि मुझेकुछ औऱ देख्ना हैं.''
रश्मी : "क्याँ ???"
औऱ जान बूझकर रश्मी नें अपने दोनोहाथ अपनी छातियों पऱ रख लिए.जैसे मोनू उन्हे हि देखने कि बातकर रहा हौ औऱ फिन मोनू केँ मासूमियत सें भरे चेहरे पऱ पसीना देखकर वोँ स्वयं हि हंस-हंसकर लोट-पोट हौ गई,.
रश्मी : "हाहाहा.मोनू तुँ भि नाँ.कितना बड़ा भोंदू हैं.पता नहीं तूने वोँ सभी केसे किया होगा रुची केँ संग.वोँ तोँ तुम्हे कक्चा खा गई, होगी.''
मोनू : "मुझे.औऱ वोँ.आप् यहबात केसेकह सकती हौ.''
वोँ ताश कि गड्डी कों पीसता हुआ बोला
रश्मी : "मुझेपता हैं.वोँ ऐसी हि हैं शुरुआत सें.जिस तरह कि बाते वोँ करती थि कि यह करेगी.वोँ करेगी.मे तोँ सोच भि नहि सकती थि वोँ सभी.औऱ वोँ बोल भि देती थि.उसकी बातें सुनकर हि मुझेपता चल गय़ा थां कि इसकेहाथ जौ भि पहला शिकार आएगा.वोँ उसका क्याँ हाल करेगी.औऱ मुझे क्याँ पता थां कि उसका शिकार मेरा भइया हि होकर रहेगा.हा हा''
औऱ वोँ फिन सें अपनापेट पकड़कर ज़ोर-2 सें हँसने लगी.अब मोनू अपनी बेहन कों क्याँ बताता.पहली बार उसने रुची कि बुर यहीं मारी थि.वोँ भि इसीबेड पऱ, जहाँ वोँ इस वक़्त खेलरहे थें.रश्मी विद्यालय गई, हुईँ थि औऱ मां किसीकाम सें मार्केट.
उस वक़्त उसने रुची कि ऐसी चीखे निकलवाई थि कि वोँ आज भि याद करकेसहम जाती हैं.बाद मे तोँ उसे मोनू केँ लन्ड कि आदतपड़ गयीँ,.पर्र बाद मे भि हरबार वोँ उसकीरेल बनाकर हि चुदाई करता थां.वोँ हारकर पस्त होँ जाती हैं.पर्र मोनू अपनीहार नहीं मानता.औऱ शायद इसलिये वोँ पिछले 1 साल सें किसी औऱ कि तरफ देखती तक नहीं हैं.ऐसी चुदाई करने वालाबी एफ आसानी सें थोड़े हि मिलता हैं आख़िर.
मोनू : "चलो, छोड़ो अबयहसभी सच बुलवाने वाली गेम्स.मेरे दिमाग़ मे कुछ आँ रहा हैं.वोँ चेक करनेदो पहले मुझे.''
औऱ फिन सें उसने दोनों कों 3-3 पत्ते बाँटे.औऱ फिन बिना ब्लाइंड याँ चालचले मोनू नें दोनो केँ पत्ते पलटकर सीधेकर दिए.
मोनू नें अपने पत्ते देखे.ऐसे हि थें.बेकार सें.पर्र रश्मी केँ पत्ते इसबार भि कमाल केँ थें.उसके पासपान कां कलरआया थां। मोनू नें फिन सें पत्ते बाँटे औऱ फिन सें उन्हे पलटकर सीधा किया.इस बार भि रश्मी केँ पास इकके कां पेयरआया। वोँ फिन सें पत्ते बाँटने लगा
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रश्मी : "यह तूँ कर क्याँ रहा हैं.मुझे भि तोँ बता ज़रा.''
मोनू : "रूको दिदी।.बस थोड़ी देर औऱ.''
औऱ उसकेबाद मोनू नें 3 बार औऱ पत्ते बाँटे.औऱ हरबार रश्मी केँ पत्ते भारी थें.औऱ हरबार उसकेपास चाल खेलने लायक हि पत्ते आँ रहे थें.कभी पेयर.कभी कलर.कभी सीक्वेंस। आख़िर मे मोनू बोला : "दिदी.लगता हैं आपके अंदरकोई शक्ति छुपी हैं.याँ कोई वरदान हैं, आप् देखरही होँ नाँ.हर बार आपके पत्ते कितने जबरदस्त आँ रहे हें.''
रश्मी : "हाँ तौ.''
मोनू (अपने चेहरे पऱ चालाकी भरी मुस्कान लातेहुए) : "दिदी.मेरेपास एक् प्लान हैं.''
रश्मी : "प्लान.? कैसा प्लान.औऱ किसलिए."
मोनू : "देखो दिदी.आजकल दीवाली कां वक्त हैं.औऱ इस वक्तसब लोगजुआ खेलते हें.वैसे जुआ खेलने वाले तोँ पूरासाल खेलते हें पऱ इन दिनों औऱ भि ज्यादा औऱ बड़ी-2 गेम्स होती हैं.औऱ इसलिये वोँ कल मे इतने पैसेजीत कर लाया थां.''
रश्मी : "हाँ.तौ.? "
मोनू : "तौ अगर हम् लोगयह जुआ खेले.मेरा मतलब हैं कि तुम्.तोँ शायद काफ़ी पैसे आँ सकते हें.मेरे जितने भि साथी हैं वोँ सभी खेलने वाले हें.उनके संग खेलेंगे.औऱ मुझे पूरा विश्वास हैं कि आप् हि जीतोगे.आप् देखरहे हौ नां, किसतरह केँ पत्ते आते हें हरबार आपकेपास.''
रश्मी कां तौ दिमाग़ हि घूम गय़ा उसकीबात सुनकर.
रश्मी : "तूँ पागल होँ गय़ा हैं.तूँ चाहता हैं कि मे तेरीतरह जुआ खेलूं.औऱ वोँ भि तेरेउन आवारा दोस्तों केँ संग.तुझे ही लज्जा नहीं आएगी कि तेरी बेहन बाहर् जाकरजुआ खेले.कभी सुना हैं तूने कि कोई लड़कीजुआ खेलती हैं.तुम्हारी तरफपता भि हैं कि कितनी बदनामी होगी हमारी.''
बोलते-2 उसकी आवाज़ काफ़ी तेज होँ गई, थि गुस्से कि वजह सें.
मोनू धीरे-धीरे सभी सुनता रहा औऱ आख़िर मे बोला : "दिदी.सबसे पहले तोँ यह ख्याल मन सें निकाल दो कि लड़कियाँ यहकाम नहीं करती.यह दीवाली केँ दिन हैं.औऱ इन दिनों लड़कियाँ औऱ औरतें हि सबसे ज्यादा खेलती हें.चाहे शगुन केँ लिए हि सही पऱ इन दिवाली केँ दिनों मे जुआ खेलना शुभ माना जाता हैं.औऱ आपको कहीं बाहर् नहीं जानां हैं खेलने, मे उन्हे यहीं बुला लूँगा.अपने घऱ पर्र.औऱ आपको मेरे होतेहुए किसी सें भि डरने कि जरुरत नहीं हैं.आप् शायद नहीं जानती कि मेरा कितना दबदबा हैं इस मोहल्ले मे.कोई आपकीतरफ आँखउठा कर भि नहींदेख सकता.''
रश्मी उसकीबात सुनती रही.शायद उसको वोँ सभीसही लगरहा थां अब.
रश्मी (थोड़े नरम स्वर मे) : "पर्र.मां हॉस्पिटल मे हैं औऱ हम् लोगऐसे घऱ मे बैठकर जुआ खेलेंगे.माना कि तेरेयार तेरे सामने नहीं बोलेंगे.पऱ पीछे सें तोँ हरकोई यही कहेगा नां कि मां हॉस्पिटल मे हैं औऱ इन्हे जुआ खेलने कि पड़ी हैं.''
मोनू : "यहसभी मै मम्मी केँ लिए हि कररहा हू.कल मेरी डॉक्टर् सें बात हुई थि.उन्हे घऱ लाने केँ लिए.तौ उन्होने कहा थां कि याँ तोँ 10 दिन तक उनका हॉस्पिटल मे रहकर इलाज करवा लो.याँ फिनघऱ लेजाकर एक् इंजेक्शन रोज लगवाना, 5 दीनो तक.जौ लगभग 3000 कां एक् हैं.हम् उन्हे कल हि घऱ लें आएँगे.औऱ इन पैसों सें उनकाघऱ पर्र हि इलाज करवाएँगे.''
रश्मी कों उसकीबात मे तर्क नज़र आया.क्योंकि यहबात डॉक्टर नें उसे भि कही थि.पर्र इतने पैसे कहां सें लाती वोँ, यही सोचकर उसनेउस बात पर्र अधिक ध्यान नहीं दिया थां.कहने कों तोँ यह सरकारी हॉस्पिटल थां पऱ उसमे भि उनके पैसेलग हि रहे थें.औऱ रोज -2 आने-जाने कि मशक्कत भि अलग सें करनी पड़ती थि.अगर मां कों घऱ लें आएँ तोँ यह सारी चिंता औऱ तकलीफ़ समाप्त हौ जाएगी.
रश्मी : "पऱ असली मे खेलते हुएअगर मे हार गई, तोँ, मेरा मतलब हैं कि अगर खेलते हुए लक्क नें मेरासंग नहीं दिया तौ ??"
मोनू : "आप् उसकी चिंता मतकरो, मैसभी संभाल लूंगा "
रश्मी चुप होँ गयीँ,.मोनू समझ गय़ा कि वोँ उसकी बातों पऱ विचार कररही हैं.
मोनू : "दिदी.आप् इतनामत सोचो.आजकल तोँ सब केँ घऱ पऱ जुआ चलता हैं.कल भि मै अपने साथी राजेश केँ घऱ पऱ हि खेलरहा थां.औऱ उसकी बीबी कों तौ आप् जानती हि हौ, दिव्या, वोँ भि खेलरही थि उसके संग.अब ऐसा त्योहार कां माहोल होँ तोँ घऱ कि औरतों कां भि थोडा बहोत एंटरटेनमेंट होँ जाता हैं.''
रश्मी तोँ पहले हि मान चुकी थि.मोनू बेकार मे अभि तक उसे मनाने केँ लिए इधर-उधर कि बातें कररहा थां.
वोँ जैसे हि बोला 'औऱ वोँ जोँ मेरायार हैं नाँ.'
रश्मी : "ओके.बाबा.समझ गयीँ,.अब चुपकर जा.समझ गई, मे.''
रश्मी नें हंसते हुएकहा तोँ मोनू भि खुशी केँ मारेउछल पड़ा.औऱ प्यार भाव मे आकर वोँ रश्मी सें लिपट गय़ा.
मोनू : "ओह.दिदी.मुझेपता थां कि आप् अवश्य समझोगी.भले हि यह ग़लत तरीका हैं पैसे कमाने कां.पऱ हमेंइस टाइमइन पैसो कि बहोत ज़रूरत हैं.''
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Update 2
रश्मी कि साँसे तेज हौ गयीँ,.दरअसल मोनू केँ शरीर सें निकलरही मर्दाना खुशबु उसे सम्मोहित सि कररही थि.ऐसा लगरहा थां कि जैसेकोई नशा हैं जौ मोनू केँ जिस्म सें निकलकर उसकी सांसो मे समारहा हैं.औऱ यहसभी महसूस करते-2कब उसके निप्पल बाहर् निकलकर मोनू कों चुभने लगगये, उसे भि पता नहीं चला.औऱ मोनू कों लगा कि शायद उसकेगले मे पड़ाहुआ लॉकेट चुभरहा हैं उसके सीने मे.पर्र फिनउसे यादआया कि वोँ तोँ काफ़ी उपर बँधा हैं.औऱ तबउसे एहसास हुआ कि यहकोई लोकेट नहीं बल्कि कुछ औऱ हैं.जोँ दोनोतरफ सें एक् बराबर चुभरहा हैं.औऱ उसे समझते देर नहि लगी कि वोँ क्याँ हैं
अब उत्तेजित होने कि बारी मोनू कि थि.उसने लाख कोशिश कि पर्र उसके लन्ड नें उसकी एक् नहीं मानी औऱ एकदम सें तनकर खड़ा होँ गय़ा.जिसे रश्मी नें भि अपनेपेट पऱ महसूस किया.
औऱ यह थां उसकेबदन पऱ किसी खड़े लन्ड कां पहला एहसास.
भले हि रात केँ वक्त वोँ कितने हि लड़को केँ लन्ड खड़े करके मज़े लेती थि पर्र उनके एहसास कों महसूस करने कां यह पहला अवसर थां उसकेलिए औऱ इस एहसास नें उसके जिस्म कों पसीने सें भिगो दिया.औऱ बुर कों भि महका दिया। दोनो एकदम सें अलग होँ गये.औऱ एक् दूसरे सें नज़रें चुराते हुए इधर-उधर देखने लगे.
मोनू : "ओके.दिदी.अबमै चलता हू.अपने रूम मे.गुड नाइट। औऱ हां आप् कल विद्यालय कि छुट्टी कर लेना.हम् दोनो सुभह हि हॉस्पिटल चलेंगे औऱ मम्मी कों घऱ लेँ आएँगे.''
रश्मी : "ओक.मै सुभह विद्यालय मे मोबाइल कर दूँगी.गुड नाइट.''
उस रात रश्मी नें अपने वर्चुअल आशिकों सें कोई भि बात नहीं कि.पऱजम कर अपनी बिना बालों वाली बुर कों रगड़ा.
इतना रगड़ा कि उसपरलाल निशान पड़ गये.औऱ जब वोँ झड़ी तौ उसके जिस्म केँ कंपन सें पूरा बिस्तर हिल गय़ा औऱ वोँ यह सोचकर मुस्कुरा उठी कि जब वोँ किसी केँ लन्ड कि वजह सें झड़ेगी तौ शायदयह बिस्तर टूट हि जाएगा। मोनू भि अपने कमरे मे जाकर पूरा नंगा हौ गय़ा.औऱ अपनेहाथ मे लन्ड लेकर ज़ोर-2 सें हिलाने लगा.वोँ चाहता नहीं थां कि इस टाइम उसकी बेहन रश्मी कां ख़याल भि आए.इसलिये वोँ अपनी आँखेबंद करके रुची केँ बारे मे सोचने लगा.उसके नंगे जिस्म केँ बारे मे सोचने लगा.उसे केसे चोदा थां वोँ याद करने लगा.पर्र अपने ऑर्गैस्म केँ लगभग जाते-2कब रुची कां चेहरा रश्मी मे बदल गय़ा, वोँ भि समझ नहीं पाया.औऱ अंत मे आकरजब उसके लन्ड सें पिचकारियाँ निकली
तोँ उस सफेद पानी केँ संग -2 उसके मुँह पऱ भि रश्मी कां हि नाम थां.
''आहह-आहह.ओह रश्मी। उम्म्म्मममममममममम''
फिन वोँ सभीकुछ साफ़ करकेसो गय़ा.ऐसे हि नंगा.
अगली सुभह रश्मी कि नींद जल्दखुल गई,.जोँ उसकी हमेशा कि आदत थि.भले हि उसेआज विद्यालय नहीं जानां थां पऱ नहा धोकर वोँ 8 बजे तक सजधजकर हौ गयीँ,.घऱ कि सफाई भि कर ली.वोँ रोज 8 बजे तक निकल हि जाती थि घऱ सें.औऱ मोनूघऱ पऱ सोता रहता थां.वोँ 10 बजे उठता औऱ लगभग 12 बजे तक हॉस्पिटल पहुंचता थां रोज.यही थां दोनो कां नियम पिछले एक् महीने सें.
रश्मी नीचे रसोई मे अपनेलिए गरमचाय बना हि रही थि कि बाहर् कां दरवाजा खुलने कि आवाज़ आई.उसने बाहर् भि झाड़ू लगाया थां इसलिये दरवाजा खुला हि रह गय़ा थां.वोँ रसोई सें निकलकर जब तक बाहर् निकली तौ उसने देखा कि रुची जल्द सें अंदर घुसी औऱ उसने दरवाजा अंदर सें बंद किया औऱ हिरनी कि तरह छलाँगें लगाती हुइ वोँ उपर मोनू केँ कमरे कि तरफचल दि.
उसने एक् टी शर्ट औऱ स्कर्ट पहनी हुई थि, जिसमे वोँ बड़ी सेक्सी लगरही थि
रश्मी केँ चेहरे पर्र शरारत भरी मुस्कान तैर गई,.रुची कों शायद नहींपता थां कि आज रश्मी घऱ पर्र हि हैं.औऱ शायद उसके विद्यालय चले जाने केँ बाद पीछे सें घऱ पर्र आनां उसकारोज कां नियम थां.
रश्मी नें सोचा 'अच्छा, तौ यह कारण हैं मोनू केँ रोज इतनीलेट हॉस्पिटल पहुंचने कां, रुचीकभी मेरे सामने तौ घऱ पर्र आँ नहि सकती, इसलिये मेरे विद्यालय जाने केँ बाद केँ समय पऱ हि आई हैं, अबमजा आएगा.उपर कां सीन देखने लायक होगा'
उसने जल्द सें गैस कों बंद किया औऱ दबे पाँवउपर चल दि। अपनी पुरानी सहेली औऱ अपने प्यारे भइया कों रंगे हाथों पकड़ने। रुची भागती हुइ सि मोनू केँ रूम मे पहुँची.वोँ चादरतान करसोरहा थां.
रुची : "गुड मॉर्निंग जानू.देखो मे आँ गई,.''
पर्र वोँ जागरहा होता तोँ जवाब देता नं.रात कों वोँ नां जाने कितनी देर तक अपनी बेहन औऱ जुए केँ बारे मे सोचता रहा थां.
रुची : "अबयह नाटक छोड़ो.मुझे पता हैं तुम् जागरहे हौ.नीचे कां दरवाजा तुमने मेरेलिए हि खोलकर रखा थां नां आज.''
पऱ फिन भि कोई जवाब नहीं मिला। रुचीआगे बड़ी औऱ उसने एक् हि झटके मे मोनू कि चादर खींचकर अलगकर दि औऱ जोँ उसने सामने देखा, उसे अपनी आँखो पर्र विश्वास नहींहुआ। मोनू मादरजात नंगा होकरसो रहा थां औऱ उसका 6.5 इंच कां लन्ड पूरा खड़ा होकर हुंकार रहा थां.
अबयह मॉर्निंग इरेक्शन थां याँ फिन वोँ कोई सपना देखारहा थां, यहअलग बात थि पर्र रुची कि आँखो मे एक् अजीब सि चमक आँ गई,.वोँ तौ वैसे भि उसके लन्ड कि दीवानी थि औऱ अभि भि चुदवाने केँ लिए हि आई थि.उसने मोनू कों ऐसी गहरी नींद मे सोतेहुए आज तक नहीं देखा थां.औऱ नां हि कभी नंगा सोते हुए.वोँ हमेशा शॉर्ट्स औऱ टी शर्टपहन कर हि सोता थां.
पर्र उसे क्याँ पता कि कलरात कों क्याँ-2 हुआ मोनू केँ संग औऱ अपनी बेहन रश्मी केँ बारे मे सोचकर मूठ मारने केँ बाद उसने कपड़े पहनने कि जहमत भि नहीं उठाई औऱ ऐसे हि सो गय़ा। यह भि बिना सोचे समझे कि सुभह किसी नें देख लिया तौ क्याँ सोचेगा। रुची केँ होंठसूख गये उसके लन्ड कों देखकर पऱ नीचे केँ होंठ गीले हौ गये.उसका एक् हाथ अपनी बुर पऱ चला गय़ा.औऱ दूसरे सें वोँ अपनी ब्रेस्ट कों मसलने लगी औऱ धीरे-धीरे-2 चलती हुई वोँ मोनू केँ बिस्तर पऱ बैठ गयीँ,। इसीबीच रश्मी भि उपर आँ चुकी थि औऱ दरवाजे केँ बाहर् छुपकर वोँ उनकी रासलीला देखरही थि पऱ जब उसने अंदर देखा तोँ उसकेहोश हि उड़गये उसका भइया बिस्तर पर्र नंगा लेटाहुआ थां यानीसो रहा थां औऱ उसका लन्ड बिल्कुल उपर कि तरफ मुँह करके हुंकार रहा थां। यह रश्मी कि जीवन कां पहला लन्ड थां जौ उसने अपनी आँखो सें देखा थां औऱ वोँ भि अपने स्वयं केँ भइया कां उसकी भि हालत रुची जैसी हौ गई, उपर केँ होंठसूख गये औऱ नीचे केँ गीले हौ गये। रुची तोँ निश्चिंत थि कि उन दोनो केँ अलावा कोई भि घऱ पऱ नहीं हैं औऱ किसी औऱ केँ एकदम सें आने कि भि आशा नहीं हैं क्योंकि दरवाजा वोँ स्वयं बंद करकेआई हैं। रश्मी नें देखा कि रुची केँ होंठ थरथरा रहे हें जैसे वोँ मोनू केँ लन्ड कों अपने मुँह मे लेकर चूसना चाहती होँ वोँ बाहर् खड़ी होकर स्वयं इतनी उत्तेजित होँ रही थि, अंदर खड़ी हुइ रुची कां पता नहीं क्याँ हाल होँ रहा होगा.
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