गलत संगत कां असर - Real Story Continue Part 1
नमस्ते दोस्तो,
मे आप् लोगो केँ बीच मे अपनी दूसरी कहानी पेश करनेजा रहा हूं। (संगत कां असर)
इस पऱ भि अपना प्रेम बरसाए रखना।
"गलत संगत कां असर"
इस स्टोरी मे थोडा समलेंगिग थोडा बहोत प्रेम औऱ भरपूर चूदाई देखने कों मिलेगी।
ये कहानी मे विक्की जौ कि हीरो हैं।
कोमल औऱ उसकी मां कि किस्सा हैं औऱ लोगो कां परिचय एपसोड मे देंगे।
गलत संगत कां असर – New Episode
–>भाग -1<––
परिचय,
यह किस्सा एक् परिवार कि हैं जोँ राजस्थान केँ कोटाशहर केँ पास मे देहात मे रहता हैं। एक् मध्यम वर्गीय परिवार कि कथा हैं। केसे धीरे-धीरे धीरे-धीरे सभीकुछ बदल गय़ा।
हमारा देहात सें शहर कि दूरी केवल 30- 40मिनट कि थि।
परिवार मे कुल 5 सदस्य हैं।
1.बापू- संजय
उम्र:47साल केँ, जोँ एक् प्राइवेट टीचर हैं। कोमल इन्हीं केँ संग विद्यालय जाती हैं। बापूइसी विद्यालय मे पढ़ते भि हैं। कुछ इनके दोस्तों केँ कारण इनको शराब कि लतलग गई।
2। माँ- निधि
उम्र: 40 साल कि, एक् हाउस वाइफ हैं। संग हि पहले मां प्राइवेट टीचर थि। मगर विवाह केँ बाद पढ़ना छोड़ दिया। अबघऱ पऱ हि रहती हैं।
बापू माँ आपस मे बहोत खुश रहते हें। मगर कहां जाता हैं नाँ हाथी केँ दांत खाने केँ औऱ देखने केँ औऱ।
3। बड़ी बेटी - नैना दिदी जोँ स्नातक कररही हैं उम्र 24 कि हैं। मुझसे 5 साल बड़ी हैं। येशहर मे किराए पऱ रूम लेके रहती हैं संग बच्चों कों ट्यूशन देती हैं अपना खर्चा चलने केँ लिए, त्यौहार याँ कोई जरूरी काम होँ तभीघऱ आती हैं।
4.सबसे छोटी बेहन- कोमल उम्र नहि बताऊंगा आप् लोग अंदाजा लगाइये। 11वीं कक्षा मे पढ़ती हैं। ये पिताजी केँ विद्यालय मे पढ़ती हैं उन्हीं केँ संग जाती हें। औऱ बसआती हैं।
4। यानि कि मेरी किस्सा कां मुख्य हीरो विशाल (विक्की) हैं। मेरीउमर 19 साल कि हैं। हा पढ़ने मे थोडा ठीकथक हूं। मुझेघऱ सें बाहर् इसलिये नहि भेजा जाता क्योंकि थोडा शरारती औऱ घऱ इकलौता बेटा इसलिये।
औऱ अंतिम मे,
5। मेरा मित्र रवि जोँ मेरा सबसे अच्छा मित्र हैं। हम् दोनों बहोत अच्छी बनती हें। देहात कां सबसे बिगड़ैल लड़काये इसउमर सें सारेकाम करता हैं। देहात केँ शुरुआत मे बाग केँ अंदर इसका 2 मंजिल कां घर-मकान हैं याँ येकहे लो इसका अय्याशी कां अड्डा हैं। रवि केँ 2 भइया 2 बेहन हैं। बड़ी बेहन औऱ दोनों भाइयों कि विवाह होँ चुकी हैं औऱ 4 नंबर पर्र आती हैं निक्की औऱ 5 नं पे रवि पिताजी शहर मे रहते हैं। बाकी औऱ लोगो कां परिचय बाद मे करवाते हें जरुरत पड़ने पऱ।
हमारे देहात मे सबसे मशहूर प्रधान देहात केँ सबसे अमीर शख्स हैं हरबार कि तरह प्रधानी उनकेघऱ सें निकलती हैं। सरल स्वभाव केँ अच्छे शख्स हैं ऐसा मेरा सोचना थां मगर हकीकत क्याँ हैं ये आपकोकथा मे पता चलेगा।
अब बारीआती हैं मेरेघऱ कि तोँ मेराघऱ 2 मंजिल कां बनाहुआ हैं। नीचे पूरा हैं, जबकी ऊपर 2 कमरे औऱ बाथरूम बनाहुआ हैं।
नीचे,
बीच मे एंट्री गेट उसके लेफ्ट ओर बाथरूम हैं,
फिन उसकेआगे बड़ा सां हॉल जहां एक् टेलीविज़न औऱ सोफासेट औऱ किनारे रसोई केँ साइड डाइनिंग टेबलरखी हैं,
औऱ हॉल समाप्त होने केँ बाद रसोई, उसके राइटओर सीढ़ियां हें।
फिन स्टोर रूम याँ तहेकन बोलोफिन कोमल कां रूम उसकेबगल मे मां बापू कां रूम (उनकेरूम मे बाथरूम अटैच हैं) फ़िर गार्डन बस इतना हि बड़ा मेराघऱ हैं।
औऱ ऊपर कि तरफ 2 कमरे औऱ 1 बाथरूम
गलत संगत कां असर – New Episode
एपसोड-2
तौ कहानी शुरुआत होती हैं गर्मियों मे करीब-करीब महीना मार्च कां होगा।
विक्की अपनारोज कां रूटीन फॉलो करके अपने मित्र यानीरवि केँ संग विद्यालय केँ लिए निकल गय़ा। रवि शुरुआत सें थोडा गुंडा गर्दी औऱ रौब मे रहने वाला लड़का हैं। दोनों लोग एक् दोस्त विद्यालय जाते थें क्योंकि देहात मे पास हि मे विद्यालय थां।
घऱ सें विद्यालय जाने केँ दो रास्ते हें एक् बीच देहात सें जबकी दूसरा थोडा जंगली इल्का हैं वहां ज़्यादा कोईआता नहि हैं। मगर हम् दोनों वहीं सें आते जाते थें। क्योंकि रवि कों कोईडर नहि थां।
विक्की औऱ रवि कि दोस्ती केँ किस्से पूरे विद्यालय मे मशहूर हें याँ बोलो पूरे देहात मे मशहूर थें। दोनों एक् दूसरे केँ लिए, जान देने तक कों सजधजकर रहते हें।
पऱ जोँ जैसे दिखता हैं वैसा होता नहि,
विद्यालय सें घऱ जातेसमय रवि विक्की सें,
रवि- औऱ विक्की अब तौ होली कि विद्यालय मे हफ़्ते भर कि छुट्टी हैं, कुछ प्लान वघेरा हैं क्याँ? इतना कहतेरवि नें विक्की केँ गले मे हाथडाल लिया।
विक्की- नहि दोस्त हम् लोगों कां क्याँ प्लान हैं, हरबार कि तरह 2 दिन पहलेघऱ कि साफ सफाईफिन होली बालेदिन रंग खेलोरात मे मिलन समारोह बस समाप्त छुट्टियाँ।
अनूप-अबे दोस्त तेराहर बार कां यही हैं। कुछअलग कोशिश कर। देख अबकी मैंने मिनी होली बर्थडे पार्टी रखी हैं। जिसके हम् 4-5 साथीलोग हें। मे चाहता हूं कि तुभी शामिल हौ।
विक्की- बर्थडे पार्टी, हम्म अच्छी बात हैं दोस्त तुम् वैसे भि अमीर परिवार केँ हौ, तेरी मेरीकहा कि बाराबरी हैं।
रवि-देख विकी दोस्ती केँ बीच मे अबकीबार पैसे लाया। तौ मे तेरे सें बात नहि करुंगा.
औऱ रहीबात जश्न कि तौ भइया तुम् कब तक बच्चा बना रहोगे कभी तोँ बड़ा हौ। (इतना कहते हि रवि नें अपनेबैग सें सिगरेट निकाली औऱ जलाकर पीनेलगा।
विक्की - दोस्त तेरी कितनी बारमना किया हैं कि मेरेसंग हुआकर तोँ यहसभी मत कियाकर। मेराघऱ बालों कों औऱ शक होनेलगा हैं मेरेऊपर।
रवि - अरे मेरे भइयाये बीच जंगल मे कौन हम् लोगों कों देखरहा हैं। बाद मे यहीसमय तौ याद आयेंग। चुपचुप करमजे करना।
विक्की मे तौ कहता हूं तूँ भि एक् बार ट्राई करकेदेख। नां मज़ाआए तोँ कहना।
विक्की- हां मुझेदिख रहा हैं कि तेरेऊपर यहसही मे असरकर रही हैं। जौ मुझे ज्ञान देरहा हैं।
चलते चलते हम् लोगबाग केँ पास पहुंच गय़ा थें। (हम् दोनोलोग बाग केँ अंदरचल दिए)
बाग केँ थोडा अंदर हम् दोनों लोगनदी केँ किनारे पेड़ केँ नीचे धीरे-धीरे लेटकर बातें करने लगते हें।
अनूप - विक्की दोस्त, क्याँ तूँ कभी भि जीवन मे यहसभी नहि करेगा।
विक्की- नहि दोस्त यहसभी गलत हैं।
रवि हस्ते हुए - अब दोस्त तुँ तौ ऐसे सीधेबन रहा हैं जैसे सुहागरात पऱ अपनी म्हेरिया कि लेगा भि नहि। तेरा खड़ा भि होता हैं हां नहि।
विकी गुस्से मे - तेरेपास औऱ बात नहि हैं इसके अलावा।
रवि- अच्छा चलठीक हैं कोईबात नहीं, तोँ फिन तुँ बर्थडे पार्टी आएगी नां। देख पूरा इंतज़ाम हैं दारू, सिगरेट डीजे औऱ रात कों 2 रंडी भि आएगी नचने केँ लिए औऱ बजाने केँ लिएअगर तूँ आएगा तौ याद रखेगा बर्थडे पार्टी अपनी जीवनभर।
विक्की- तूँ यहसभी अपनेघऱ पऱ करेगा। औऱ कोई तुझसे कुछ कहेगा भि नहि, तेरेसही हैं दोस्त.
रवि- नहि वे, वोँ बाग वालेघऱ पर्र यहसभी इंतज़ाम हैं। औऱ घऱ वालों कों यह थोड़ी नां मालूम हैं कि मे दारु औऱ रंडीबाजी करूंगा। औऱ अभि नां बापूआने कों नहि भैया तोँ मे करूंगा छैया छैया,
विक्की- दोस्त तेरासही हैं तेरेघऱ वाले तुम्हे बहोत छूट देते हें। मेरेघऱ वाले तौ मुझसे ताने हि मारे रहते हैं। कहीं यहकरो वोँ करो पढ़ाई करो नंबर नहि आँ रहे, आवारा होताचला जारहा हैं। दुनिया भर कि बातें सुनते रहते हें।
रवि-तभी तौ कहेरहा हूं भइयाजब तक विवाह नहि होतीतब तक मौजकर लें फिन तौ वही जिम्मेदरिया हि हैं। फिन तुँ अपनी खिचड़ी मे पड़ जाएगा, मे अपनी मे, कि क्याँ करे क्याँ नहीं,
फिन हम् दोनों इतना वक्तआपस मे कहा बिता पाएंगे।
औऱ फिन यहीं बीतेहुए समय तौ याद आएंगे।
विक्की- नहि दोस्त रवि मेरी मजबूरी समझकर तेरे माँ-बापू कूल हें मगर सबके एक् जैसे नहि होते नां।
रवि-सुन भइयाकूल नहि एंजॉय करने केँ लिए केवल हल्का सां झूठ, अब मे अंतिम बारबोल रहा हूं। तेरी अपनी दोस्ती कि शपथ तूँ बर्थडे पार्टी मे आँ रहा हैं। बस औऱ कोईबात नहि करनी मुझे। तुम्हें दिक्कत हैं तौ मे तेरी मां सें बातकर लेता हूं।
विक्की- दोस्त देखयह सभीशपथ वसममत दियाकर, ठीक हैं मे अपनीतरफ सें कोशिश करूंगा आने कि तूँ मत टांग अड़ने आँ जानां
औऱ अबघऱचल साम होने कां आँ रही हैं।
रवि- दोस्त तूँ एक् बार सिगरेट ट्राई करके क्यो नहीं देखता आनंद आएगी।
विक्की- नां मेरे मम्मी बाप नें यह सिखाया औऱ नहि मुझसे यहसभी होँ पाएगा। औऱ सिगरेट केवल बुरेलोग हि पीते हें।
रवि-हां सहीकह रहा हैं जैसे मेरेघऱ वाले तौ मुझे ट्रेनिंग देते हें कि यहसभी करो। औऱ मे तोँ गुंडा हूं तभी तौ यहसभी करता हूं।
देख विकी आनंद लेना हैं तोँ रिस्क लेना हि पड़ेगा समझे।
औऱ रवि नें अपनी सिगरेट विकी कों दे दि औऱ बोलाअब भइया तेरेहाथ मे हैं कि मर्द बनाना हैं तौ सिगरेट मुहूं लगा औऱ एक् कशखीच याँ ऐसे हि कुंद रहना हैं तोँ नीचे फेंकदे।
औऱ मे ज़्यादा नहि मात्र एक् कश फुकने केँ लिएकह रहा हूं।
विक्की कों अबसमझ नहि आँ रहा थां कि क्याँ करे। वोँ एक् तारिके सें दलदल मे फंस गय़ा थां। मगररवि कि कड़वी बातें कहीं नां कहीं विक्की केँ मन नें आगलगा रही थि।
विक्की नें जैसे हि सिगरेट कां कश खींचा विक्की जोरजोर सें खसनेलगा औऱ रवि खुशी सें ताली बजाने लगायह हुई नां बात औऱ जोश मे आके उसने विक्की केँ गाल पऱ किसकर दिया। औऱ अबये हुई मर्दों वालीबात,
विक्की होश संभालते हुएयह क्याँ कररहा थां तूँ।
रवि-अबे अबहुए हम् पक्के जोड़ीदार औऱ पगलेयह दोस्ती कि किस होँ हम् लोगकोई गे थोड़ी नाँ पागल।
औऱ यह चिगुम खा लें तेरे मुंह सें गंध नहि आएगी। औऱ अगरघऱ पे नशा सां लगे तौ निम्बू चाट लेना तोँ सही हौ जाएगा।
औऱ अँधेरे भि हौ रहा हैं अब हमेंघऱ भि चलना चाहिए।
विक्की- हां भइया बहुतदेर हौ गई। औऱ दोनो अपनाघऱ निकलगये।
रवि – अगरकोई दिक्कत समझ मे आए तौ कॉलआई कर लेना।
औऱ हम् दोनोवहा सें निकलगए।
विक्की जिसने आज तक एक् सुपारी तक नहींखाई थि। उसने दोस्ती केँ कारणआज सीधे सिगरेट कों पिया हैं। अब आगे देखते हैं क्याँ क्याँ होता विक्की केँ संग मिलते हैं।
अगले एपसोड मे,
गलत संगत कां असर - Kahani ab aur interesting hogi
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