गलत संगत कां असर – New Episode
भाग –4
जब सें संजयपी केँ आनेलगा हैं वोँ ज़्यादा निधि पऱ ध्यान नहि देता हैं औऱ निधि भि घऱ केँ काम काज़ो मे थक जाती थि।
इसबीच वोँ अपनी वासना कों ध्यान नहि देतीमगर कोईचीज कब तक छुपीरहे सकती हैं।
उसदिन अपने बेटे केँ लन्ड कां अहसास पाके उसके अंदर कि वासना बाहर् आने कों तड़पाने लगी।
निधिरूम मे जाते हि खाट पऱ लेटकर अपनी साड़ी उतर केँ संजय कों आवाज़ देनेलगी। मगर संजय बिल्कुल बेहोश उसे दुनिया सें कोई मतलब हि नहि, निधि अपने पति कों सीधा केँ उसकी पैंटखोल कां उसका लंड बाहर् निकलती हैं जोँ कि बिल्कुल मुरझाया हुआ होता हैं निधि अपनेहाथ सें बहुतदेर पकड़ने केँ बाद भि उसके लंड पर्र कोईअसर नहि पड़ता।
थकहार कर निधि अपनी बुर कों पैंटी केँ ऊपर सें हि रगड़ने लगी।
निधि नें जैसी पैंटी कों किनारे करके जैसे अपनी उंगली डाली केँ अंदर डाला उसकीअहह निकल गई वोँ एक् दम सें होश मे आई। ( क्योंकि निधि कि बुर बहुतदिन सें न् चुदाने केँ कारण टाइट होँ गई थि औऱ उसने विवाह केँ बाद सें उंगली करना भि छोड़ दिया थां) ये मे क्याँ कररही हूं अपने बेटे केँ लंड कां एहसाह पाके स्वयं कों रोक नहि पारही। फिन निधि नें अपनी पैंटी औऱ साड़ी सही कि औऱ सो गई।
मगर कहते हैं नां धनुष सें तीर छुटे तोँ वापिस तरकश मे नहि जा सकता। निधिरात भर बेचैन रहीजब तक उसने अपनी प्यास उंगली करके नहि बुझाई।
दूसरी तरफइन सभी सें अनजान कोमल जिसको दोपहर कां नजारा बार - बारउसे याद आँ रहा थां वोँ चुपचाप सें कमरे सें बाहर् निकलती हैं ऊपर विक्की केँ कमरे केँ बाहर् कानलगा कर खड़ी हौ जाती हैं।
इधर विक्की भि अपने कमरे कों अंदर सें बंदकर केँ नंगा होँ गय़ा औऱ फोन निकल इंसेस्ट कथा पढ़ने औऱ दूसरे हाथ सें अपना लन्ड हिलाने लगा। विक्की अपनी माँ कां नाम लेकरमूठ माररहा औऱ विक्की कों आज शर्मिंदगी कि स्थान एक् खुशी सि महेसुस हौ रही थि।
विक्की लन्ड हिलाते हुए अपनी मां कां नाम लेँ रहा थां औऱ जोर सें चिल्ला रहा थां। उसे बहोत आनंद आँ रहा थां बहोत हि एंजॉय कररहा थां।
थोड़ी देरबाद विक्की केँ लन्ड मे ढेर सारामाल छोड़ दिया। औऱ विक्की वहीऐसा नंगा होँ करसो गय़ा।
अपनी मां कां नाम लेकर शायदआज विक्की केँ लन्ड नें बहोत अधिकमाल निकल दिया।
कोमलये सभीसुन केँ गर्म होँ जाती हैं औऱ जाके अपने कमरे मे लेती रहती हैं सुभह निधि केँ जगाने उसकीआंख खुलती हैं।
रोज कि तरहआज भि विक्की देर सें उठा औऱ नहा धोकररवि कों फोन करके जंगल कि तरफ निकल गय़ा सिगरेट फूंकने।
निधिनहा धोकर अपनेकाम मे लग गई औऱ कोमलनहा केँ अपनेरूम मे पढ़ने बैठ गई।
कोमल कां हालकल कि तरह थां उसकाआज भि मन नहि लगारहा थां।
कोमल किचेन मे पानी पीने केँ लिए गई।
निधि - क्याँ हुआ कोमलकोई दिक्कत हैं
कोमल - नहि मां वोँ मुझे आप् कां मोबाइल चाहिए थां अपनीयार कों कॉलआई करने केँ लिए।
निधि - हाहां क्यूं नहि, निधि अपना मोबाइल कोमल कों दे देती हैं औऱ अपनेकाम करने लगती हैं।
कोमल मोबाइल लेकरचुप चाप सें ऊपरछत पर्र निकल जाती हैं बात करने केँ लिए।
कोमल अपनी मित्र कों फोन लगती हैं। (कोमल कों ke प्रिया कों p)
दूसरी तरफ सें - हायराम कोमल केसे हैं तूँ
ke - हेलो प्रिया मैठीक हु तुँ बता कैसी
P - मैठीक हु तुँ बता औऱ केसे मोबाइल किया
ke - क्यूं नहि कर सकती तुझको फोनकही कि महारानी हैं तूँ
P - ओहो महारानी कों बहोत बातें आँ रही
ke - हा तोँ नहि आँ सकती बातें
P - बताओ केसेफोन कि तूँ जबकोई अर्जेंट काम होता हैं तभीफोन करती हैं।
ke - दोस्त तुम्हारी तरफ केसे बताऊं समझ मे नहि आँ रहा। तुँ अकेली हैं नाँ तेरेकोई आसपास तौ नहि हैं।
P - अरे बेफिकर होकेबोल कोई दिक्कत नहि मै अपनेरूम मै वहां अकेले हि रहती हैं।
ke - दोस्त कल मेरेये मेरे एक् दूर सें रिश्तेदार कां लड़काआया हुआ थां। (भइया कों डायरेक्ट नहि बोल सकते)
P - तोँ क्याँ उसने तुम्हे चोद दिया
ke - छी दोस्त कैसीबात कररही हि तुँ पहलेबात तोँ सुनफिन बीच मे केहना
P - अच्छा सॉरीअब बोल तूँ
ke - हा तोँ मे किसीकाम सें उसको बुलाने गई तौ मैने देखा कि वोँ अपने उससे अपनी माँ कां नाम लेकेकुछ कररहा थां।
P - मतलब नहि समझी तुँ कुछखुल केँ बोला
ke - बोला तौ अपने उससेकुछ कररहा थां
P - उससे मतलब लंड हिलारहा थां किसी कां नाम लेके
ke - हा दोस्त मुझे तौ बोलने मे भि लज्जा आँ रही हैं।
P - हाजब अंदर लेगीतब नहि आयेगी लज्जा, औऱ उसेमूठ मारना बोलते हैं।
ke - छी दोस्त तुँ कैसी बातें कररही हैं।
P - छी करना छोड़ये सभी लड़के लोग करते हैं औऱ रहीबात मम्मी कां नाम लेने सें लड़कों कि फैंटेसी होती कि उनका लंड किसको देखकर खड़ा होँ रहा हैं। किसका नाम लेकरमूठ मारने मे मज़ाआता हैं।
ke - क्याँ सच मे ऐसा होता होगा।
P - होने कों बहोत कुछ होता हैं होली केँ बाद मेरेघऱ आनां तुझको जन्नत दिखाऊं गी। तब तुँ समझेगी।
ke - OK बायजा रही हूं, माँ आवाज़ लगारही हैं।
P - OK बायटेक केयर अधिकलोड होँ तौ उंगली कर लेना
बेचारी कोमल भोली भालीइन सभी सें अनजान उसेकुछ मालूम नहि, वही दूसरी तरफ प्रिया जोँ बहोत बिगड़ैल लड़की हैं।
ऐसे पूरादिन निकल जाता हैं। वही विक्की मस्तघूम घाम केँ साम केँ 7 बजेघऱ आता हैं।
रोज कि तरहरात कों कोमल अपनेकान अपने भइया केँ रूम केँ बाहर्, निधि नीचे अपनी बुर मे उंगली करके अपने आप् कों ठंडा करते हैं।
आज होली कां दिन थां कुछलोग रंगखेल रहे थें बच्चे एक् दूसरे केँ ऊपर पिचरी सें पानी फेंकरहे थें। संजय देहात केँ बड़े लोगो सें आशीर्वाद लेके हुक्का खींचरहा थां वही कोमलआश पड़ोस केँ संग औऱ निधि भि पड़ोस वाले केँ संग होलीखेल रही होती हैं।
विक्की अपनेघऱ मे अकेले नीचे कमरे मस्त लेता हैं औऱ अपनी मां केँ सपने मे गुम होता हैं।
तभीकोई होता जोँ द्वार (दरवाज़ा) पीतरह हैं।
विक्की- कौन हैं
रवि-अबे विक्की मे हूं रवि,
विक्की- आया एक् मिनटरुक,
विकी नें गेट खोलाफिन दोनो नें एक् दूसरे सें होली मिली औऱ एक् दूसरे केँ रंग लगाया।
रवि- विक्की आजाचले बाहर् कहां तूँ घऱ केँ अंदर बैठा हैं।
विक्की- नहि दोस्त मेरामन नहि हैं तूँ हि जा।
रवि आजा चलते देहात घूमआते हैं औऱ बाग मे भि होँ लेँ गे।
फिन विक्की नें कुछ सोचा औऱ बोला अच्छा रुक एक् मिनट मे माँ कों बतादे फिन चलते हें।
निधि कों बताने केँ बाद विक्की औऱ रवि दोनों लोग निकल जाते देहात घूमने,
1घंटे तक घूमने केँ बाद
रवि - आजा वोँ सामने खेतदिख रहे वहां चलते हैं वोँ जमीन अपनी हैं वहां झोपडी मे बैठते चलके हैं।
विक्की - हाठीक हैं धूप भि बहोत हौ रही हैं। थोड़ी आराम करेंगे फिनघऱ चलते हैं।
हमलोग खेतपार करके झोपडी केँ पास पहुंचते हैं। मगर कुछदूर पहले सें कुछ आवाजे अंदर सें आने लगती हैं।
चुपचाप सें दोनों लोग अंदर झांकने कि कोशिश करते हैं। तौ देखते हैं अंदरकोई व्यक्ति कि महिला कि गांड़ मारता हैं। दोनों लोग पूरे नंगे होते हैं।
व्यक्ति: थोडा सही सें झुक अंदर नहि गय़ा अभि पूरा,
स्त्री: अब इससे अधिक नहि झुका जाता हैं। ऐसेकाम चलाओ।
व्यक्ति उसकीऐसे हि लेने लगता हैं।
महिला आवाजे निकलती हुइ आप् कों औऱ कोई स्थान नहि मिली थि।
व्यक्ति: नहि जानेमन आज पूरा देहात होली मनाने मे लगा हैं जौ कोई भि होँ वोँ मेरेघऱ जरूरआता हैं। अब मुझेकहा फुर्सत मिलती इसलिये तुम्हारी तरफये बुला लिया।
महिला: कोई दिक्कत तोँ नहि होगीये पर्र,
व्यक्ति: नहि येकोई आता नहि हैं यह अपनेयार कां हि खेत हैं औऱ लेबर छुट्टी पर्र हैं। तौ हमारे अभि 20 मिनट औऱ हैं।
महिला: नहि प्रधान जी 30 घंटे सें मेरी लेँ रहे हैं मे थक चुकी हूं। अबफिन कभी थोड़ी देरबाद वोँ व्यक्ति उसी स्त्री कि गांड़ मे झड़ जाता हैं।
हम् लोगों कों बहोत आश्चर्य होता हैं। ये व्यक्ति कोई औऱ नहि प्रधान कां बेटा होता हैं रंजू। औऱ वोँ स्त्री उसकेये काम करने वालेखास व्यक्ति रमेश कों पत्नि सविता थि।
रंजू अपनीजेब सें 5000 ये लें पकड़ औऱ जा होलीमना जाके।
सविता: क्याँ प्रधान जी इतने हि आप् कों आनंद पूरा दि हु।
रंजू: ज़्यादा नौटंकी मतकर कपड़े पहन औऱ जल्द निकल।
सविता कुछदूर निकलने केँ बाद रंजू कों मन हि मन गाली देती हैं सालाकुछ काम कां तौ हैं नहि 3 इंच कां छोटा लंड इसकी स्त्री इस साले कों हाथ नहि रखने देती होगीतभी साला मेरे पिछे पड़ा रहता हैं।
फिनकुछ देरबाद दोनों लोग वो सें चले जाते हैं।
ये दोनों मिलके उसकीचुप चाप सें विडियो बना लेते हैं।
उसके थोड़ी देरबाद विक्की औऱ रवि भि अपनेघऱ चले जाते हैं।
विक्की घऱ पहुचा देखा तौ गेटबंद थां।
खट खटाने केँ 10 मिनटबाद निधि नें गेट खोला।
निधि कों देखकर विक्की कां मुंह खुलेरह गय़ा कि आज सें पहले विक्की नें कभी अपनी मम्मी कों इसतरह सें नहि देखा थां।
निधि बिलकुल नहाकर केँ बाथरूम सें निकली थि औऱ उसके लंबे लंबेबाल खुलेहुए भीगे भीगे अच्छे लगरहे थें औऱ कपड़े केँ नाम पऱ मात्र उसकेबदन मे एक् पेटीकोट पहने हुई थि। जिसके ऊपर केँ बूब्स औऱ नीचे कि जांघसाफ दिखरही थि।
निधि, विक्की कों हिलाते हुए आवाज़ देती हुईँ अंदर आनां याँ नहींपता नहि कहां घूम गय़ा।
विक्की हदबदहत मे, वोँ माँ कहीं नहि वोँ बसऐसे बसबस। करनेलगा।
विक्की नें तुरन्त बात घुमाई कही मां कों शक नाँ होँ।
विक्की- वोँ मेरी मां इतनीदेर सें गेटखट खटारहा हूं कहा हैं सभीलोग।
निधि- कोमल नीचे औऱ मे ऊपर बाले बाथरूम मे नहारही थि। जैसे हि अंदर गई वैसे हि तुँ आँ गय़ा.तभी इतनीदेर लगी।
विक्की- अच्छा ठीक हैं।
वहां सें सीधा अपने कमरे मे चला गय़ा।
रूम मे जाके अपने कपडे उतार केँ सीधे बाथरूम मे नहाने चला गय़ा। बाथरूम मे एक् गजब कि खुशबू आँ रही थि। मेरी मम्मी केँ सोने सें जिस्म कि,
बाथरूम बंद करके केँ नल केँ ऊपर मां केँ टगेहुए कपड़े देखने लगा जिसमे साड़ी, ब्लाउज औऱ हटाने पे देखा तौ उनकी ब्रा नहि थि( शायदघऱ मे नहि पहनती होँ) मगर पैंटी वही टांगी हुइ थि।
मैंने बहोत सि कहानियों मे पढ़ा हैं कि शुरूआती ब्रा औऱ पैंटी मे मुठ मारने सें हि होती हैं।
सबसे पहले तोँ मे पूरा नंगा हूं औऱ फिनसब कपड़े साइड मे करके पैंटी कों उठाकर अपनीनाक केँ पास लें जाके सुघने लगाजीभ सें उनकी पैंटी कों चटा औऱ मूठ मरनेलगा। अपने लन्ड मे लपेटकर मुठी मारने लगा। धुली नं होने केँ कारण उनकी पैंटी सें बुर कि गंध आँ रही थि। सोनी सोनी,
पहलीबार पैंटी मे मूठ मारने मे आनंद आँ रही थि।
विक्की नें मूठमार केँ पैंटी कों ऐसे हि किनारे रख दिया औऱ नहाकर अपनेरूम मे जाके। थके होने केँ कारणसो गय़ा।
साम 5 बजेजब विक्की कि नींद खुलीतब दोपहर वाला मंजरफिन याद आँ गय़ा औऱ मन हि मनखुश होनेलगा।
थोड़ी देरबाद विक्की नीचे गय़ा। निधि जोँ रसोई मे गरमचाय बनारही थि। कोमलऊपर सभी कपड़े उताररही थि औऱ संजय कां कुछआता पता नहि थां।
(निधिजब अपने कपड़े धुलने केँ लिएऊपर गई तब उसने देखा कि उसकी पैंटी मे कुछचिप चिप सां लगाहुआ जौ उनसेदेख नजरअंदाज कर दिया। उसे लगा शायद उसका हि पानीछूट गय़ा होगा। )
विक्की चुप सें रसोई मे गय़ा औऱ माँ कों पीछे सें चिपककर आगे गर्दन पर्र हाथडाल कर उनके गालों पर्र किसकर दिया।
पहले तौ निधिडर गई, औऱ विक्की कों पीछे धकेल दिया।
मगर निधि नें देखा कि पीछे विक्की हैं तौ बोलि क्याँ बात हैं बहोत प्रेम आँ रहा हैं मां पे आज।
विक्की - हा माँ जब प्यारी होँ तोँ प्रेम स्वयं बखुद आँ हि जाता हैं।
आज सें 2 दिन पहले विक्की नें केवल सिगरेट मजे केँ लिएपी थि मगरअब उसे शायदलत लगनेलगी हैं। औऱ विक्की नें जौ पैंटी केँ संग किया वोँ निधि कों नां समझ पाना, बेटे केँ लंड कां एहसाह पाना,
ये निधि कि चाहत थि याँ उसकी पहेली गलतीसमझ कर छोड़ना।
जल्द मिलते हैं अगले
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गलत संगत कां असर – New Episode
भाग -5
लगभग 8 बजे विक्की अपनेघऱ सें रवि केँ घऱ केँ लिए निकल जाता हैं जहां पे विक्की कि मुलाकात पहले तौ उसकी मम्मी रजनी सें होती हैं।
(अबयहा पे बतादूं कि रवि केँ परिवार मे उसके बापू- सुरेंद्र कुमार
मां- रजनी
2 बड़े भइया- मोहन, राकेश
बड़ी बेहन श्रेया इनकी विवाह हौ गई यह यहांकभी कभीआती हैं। यहरवि केँ घऱ कि सबसे बड़ी बेटी थि इनके 2 बच्चे भि हें। मगरयह यहा सें मतलबकम रखते हैं।
छोटी बेहन निक्की यहरवि सें बड़ी हैं। यह दिखाने मे एक् नंबर कि माल थि क्यूं कि इन्होंने अभि अभि जवानी मे कदमरखा थां।
यह देहात सें रोज अपडाउन करतीशहर केँ लिए क्योंकि यह मेडिकल मे डी.फार्मा कररही हैं।
रवि केँ पिताजी शहर मे फैक्ट्री मैनेजर हें। उनको देहात सें ज़्यादा शहर अच्छा लगता थां इसलिये वोँ देहात कमआते थें। वहीहाल उनके लड़को कां थां विवाह केँ बादसभी लोगशहर मे रहनेलगे क्यूं कि देहात मे सुविधाएं कम होती हें। निक्की इसीलिए अपडाउन करती हैं क्योंकि वोँ अपनी माँ कों अकेला नहि छोड़ना चाहती।
रवि केँ घऱ मे उसकी बेहन निक्की उसकी मम्मी रजनी औऱ रवि रहते थें।
मगर त्योहार केँ टाइमसब लोगघऱ पऱ आते हें। )
अबकथा पे,
रजनी- औऱ विक्की बहोत दिनोबाद आया।
विक्की- वोँ आंटीजी समयकम मिलपता हैं।
रजनी- अच्छा मे आंटीजी होँ गई,।
विक्की- अरे सॉरी मेरी छोटी मम्मी गलती हौ गई। (मे रजनी कों छोटी मम्मी कहे केँ बुलाता हूं)
रजनी- औऱ कैसीरही होली, घऱ मे सभी बढ़िया,
विक्की- जी छोटी मम्मी होली तौ बढ़िया रही, औऱ घऱ मे भि सभीलोग ठीक हैं।
रजनी-चलो बढ़िया बात हैं इसकोकुछ सुधरो ये बहोत बिगड़ता जारहा हैं(रवि केँ लिए)। औऱ अबघऱआता रहाकर समझे,
विक्की- जी छोटी मम्मी बिल्कुल अबआया करूंगा, हा इसको बोलता तोँ रहता हूं पर्र ये समझता हि नहि, वैसे हैं कां पे रवि
रजनी- वोँ अपने कमरे हि होंगे।
विक्की- हां छोटी माँ मे जाता हूं रवि सें मिलने कों बाय।
रजनी - येलोगरम चाय पीतेजाओ।
विक्की - ठीक हैं
इतनाकहे कर विक्की वहां सें ऊपररवि केँ रूम मे चला गय़ा।
रवि केँ रूम पहले उसकी बड़ी बेहन निक्की कां रूम पड़ता हैं।
"निक्की एक् हसीन सभ्य प्यारी हमेशा चहेरे पर्र हल्की मुस्कान रखने वाली लड़की, जिसका उमर होगी लगभग 22 साल चहेरे कां रंग बिलकुल दूध कि तरहसाफ औऱ मीडियम साइज केँ मस्त बूब्स जिस पर्र कॉलेज केँ बहुत लड़के अपनीजान छिड़कते थें। मगर निक्की किसी कों भाव नहीं देती थि। "
विक्की जोँ निक्की कों मनपसंद करता हैं मगरउमर मे बड़ी होने केँ कारण औऱ दोस्ती केँ उसूल केँ चलते वोँ निक्की कों नज़रअंदाज़ करता थां।
निक्की अच्छी तरह सें जानती थि कि विक्की उसे मनपसंद करता हैं मगर निक्की हमेशा विक्की सें मजे लेने कि फिराक मे रहती थि।
विद्यालय मे 1-2 बार लड़कियों नें विक्की कों परपोज भि कियामगर विक्की केँ मन मे तोँ केवल निक्की हि थि।
सामने निक्की कों देखते हि विक्की नें आंख छुपाकर रवि केँ रूम मे जानेलगा।
निकी-अरे विक्की कहाजा रहे हौ चोरी छिपेजरा यहांआओ।
विक्की- अरे वोँ नहीं दि ऐसीबात नहीं मे तोँ यूंही,
विक्की जोँ निक्की कों देख एक् दम सें सभीभूल गय़ा क्योंकि निक्की आज एक् हीरोइन कि तरहलग रही थि।
निक्की -क्याँ हुआ विक्की कहाघूम हौ गए।
विक्की - अरे वोँ कही नहीं दि रवि केँ पासजा रहा हूं।
निक्की- अच्छा, औऱ बहोत दिनबाद दिखाई दिया।
विक्की - हा दि वोँ एग्जाम नजदीक हैं नाँ इसलिये,
निक्की - अच्छा अब तुँ पढ़ने लगा हैं वाउ, अच्छा एक् बातबता,
विक्की - हा दि
निक्की - कैसीलग हूं मै,
विक्की, निक्की कि बातसुन कर शर्मा गय़ा औऱ आंख चुराते हुए, अच्छी लगरही हैं आप्
निक्की - अच्छी कितनी अच्छी
विक्की - बहोत अच्छी
निक्की -मुझे तौ यकीन नहीं होँ रहा तुँ आंख मे आंखडाल करबोल फिन मे मनु कि तूँ सचबोल रहा हैं।
विक्की नें अपना चेहरा औऱ जैसेआंख सें आंख मिलाई उसकादिल जोरो सें दधकने लगा औऱ विक्की वहा सें भाग गय़ा सीधेरवि केँ रूम मे जाके रुका।
औऱ इधर निक्की पीछे सें आवाज़ लगाकर विक्की कों रोकने कि कोशिश कि मगरतब वहांजा चुका थां औऱ निक्की मन हि मन हसने लगी। क्योंकि निक्की कोई मौका नहि छोड़ती विक्की कों छेड़ने मे,
निक्की सें मिलने केँ बाद विक्की रवि केँ संगबाग वालेघऱ पऱ निकल गय़ा जश्न करने।
वाहा केवलरवि, विक्की औऱ उसके 2 मित्र औऱ 2 रंडिया थि।
अगलाभाग कल
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भाग -6
फार्महाउस पर्र रवि नें लॉन मे दारू कां इंतजाम एक् डीजे उसपे 2 रंडी बढ़िया नाचरही औऱ उसके 2 मित्र राहुल, नवीन औऱ रवि मिलके दारूपी रहे थें। जबकी विक्की केवल चखना केँ आनंद लें रहा थां औऱ संग रंडियों केँ संगनाच रहा थां।
(नवीन, राहुल दूसरे देहात सें आते हैं)
थोड़ी देरबाद नवीन नें 1 रंडी कों पकड़ा औऱ दूसरे कमरे मे लें जाकर चोदने लगा।
कुछ देरबाद राहुल नें भि बिल्कुल वैसे हि किया।
रवि दारू पीते-पीते रूम(जहा चुदाई चलरही थि) मे गय़ा औऱ अपनीजेब सें पैसे कि व्हीकल निकली औऱ उन चुदने बाली रंडियों केँ ऊपर पैसे उड़ाने लगा।
पीछे सें विक्की भि पहुुंच गय़ा। औऱ आज पहलीबार विक्की नें लाइव चुदाई देखी थि।
वोँ यहसभी देखकर गर्म हौ गय़ा थां औऱ उसका लन्ड खड़ा हौ गय़ा।
लगभग 20 मिनटबाद चुदाई कां कार्यक्रम ख़त्म हुआ वोँ दोनो रंडियों नें पैसेलिए औऱ चली गई।
लगभगआधे घंटेबाद राहुल औऱ नवीन भि चलेगए। अब मात्र विक्की औऱ रवि अकेले।
विक्की- अच्छा दोस्त अनूपअब मे भि चलता हूं।
रवि-अबे पागल वागल हैं अब तौ बर्थडे पार्टी शुरुआत हुई हैं।
विक्की- मतलब
रवि- अबे मतलब केँ बच्चे अब तेरे औऱ अपनेलिए 2 रशियन बुलाई मस्तआज रात उनको बजाये गे।
विक्की- नहि दोस्त यहसभी गलत हैं औऱ मुझसे नहि होगा।
रवि- अबे दोस्त कब तक वर्जिन रहेगा हा, तुम्हे कितनी बार एक् बातसमझ आएगी।
कभी तोँ जीवन मे मज़ा आएगा याँ ऐसेमर जाएगा। औऱ उनकेलिए देख देसी अपनेलिए रसियन मतलबमजे मजे हैं।
आजाआज तुम्हें असली मर्द बनाता हुं।
विक्की औऱ रवि नें दारु औऱ चकना उठाया औऱ अपने कमरे मे चलेगए।
रवि नें दारू गिलास मे दाल 2 पैग बनाने लगा।
रवि- विक्की कभी तूने दारूपी हैं।
विक्की- नाँ भइया इसको मुझसे दूररख बहोत अधिक अच्छा मेरेलिए।
रवि- अच्छा आज मेरे खाने पऱ ट्राई करो
विक्की- नहि भइयायह नहि हौ पायेगा
रवि- अच्छा भइया दोस्ती कि खातिर
विक्की- नहि भइया किसी केँ लिए खातिर नहि,
रवि नें पेग बहोत हल्का बनाया जिसमें केवल पानी थां औऱ हल्की सि दारु।
औऱ रवि नें जबरदस्ती विक्की कां मुंह पकड़ केँ उसको दारु पिला दि।
पहले विक्की कों दारु कां स्वाद कुछ ख़राब औऱ बदबूदार लगा।
मगर एक् पेग केँ बादरवि नें दोबारा विक्की कों गिलास दियाइस बार विक्की नें कोईझिग झीग नहि कि औऱ चुपचाप पी लिया।
इस बीच निधि कां मोबाइल आता हैं विक्की केँ मोबाइल पऱ मगर विक्की नशे मे होने केँ कारणउसे पता हि नहि चलता।
लगभगआधे घंटेबाद विक्की कों दारूकर असर होनेलगा औऱ उसकासर घूमने लगा औऱ उसेऐसा लगारहा जैसे वोँ आसमान मे उड़रहा होँ।
विक्की नशे मे- क्यूबे तूँ तोँ काहेरहा थां रसियन आएगा।
रवि पहले सें नशा करता थां तोँ उसे अधिकअसर हुआ नहि।
रवि-हा आएगीबस 5 मिनट औऱ वेटकर।
अब यहां सें शुरुआत होता हैं रवि कां प्लान, जौ चाहता थां रवि कों टल्ली कर उसका इस्तेमाल करना थां।
अब आप् लोगो कों बताऊं कि रवि एक् गांड मारा हैं मतलबउसे गांड मारने कां शौक हैं।
यहलतउसे बहोत पहले सें थि। इसके बारे मे विक्की कों भि पता नहि थां। )
रवि नें गेटबंद कर केँ अपने पूरे कपड़े उतारे औऱ नंगा होकेखाट पऱ चढ़ गय़ा।
विक्की- क्यूबे तूँ नंगा क्यूघूम रहा हैं।
रवि-अबे तुझेही चुदाई नहि करनी क्याँ?
अपनाफोन निकाल कर उसने एक् गे पोर्न लगा दि।
विक्की नें पहलीबार देखा थां कि लड़के आपस मे केसे करते हें।
इतनाकहे रवि नें विक्की केँ पेंट केँ ऊपर सें लन्ड पकड़ लिया औऱ उसे दबाने लगा।
विक्की अभि बाहर् चुदाई देखकर गर्म थां तौ उसे भि बहोत मज़ा आँ रहा थां।
विक्की- अबे रहनेदे,
रवि-बस अब तूँ चुपचाप बैठारहे तुम्हारी तरफमजे देरहा हूं।
रवि नें बेल्ट औऱ बटनखोल कर विक्की कि पेंट निकाल दि औऱ अंडरवियर केँ ऊपर सें लन्ड पकड़ केँ दबनेलगा।
विक्की- अबे दोस्त यह तूँ क्याँ कररहा हैं। येसभी ग़लत हैं।
नशे मे मात्र विक्की बातकर रहा थां। औऱ रवि सें छूटने कि कोशिश भि कि मगर नाकामयाब रहा।
ये सभी करने कां विक्की पहला अनुभव थां उसे बहोत हि मज़ा भि आँ रहा थां। फिन रवि नें उसका शर्ट औऱ बनियान उतारदिए।
औऱ उसकी छाती, कमर औऱ पेट पर्र हाथ फेरने लगा.उसके जिस्म पर्र किस करनेलगा औऱ जीभ सें छाती कों चाटने लगा।
फिन रवि नें उसे खड़ा किया औऱ उसका अंडरवियर उतार दिया औऱ झटके सें उसका 7.5 इंच लंबा लन्ड सामने आँ गय़ा।
अनूपउस पऱ हाथ फिराने लगा तौ विक्की कराह लेनेलगा।
फिनरवि नें उसके लंड पर्र किस किया औऱ जीभ फेरने लगा। विक्की भि अबमजे लेने औऱ सर पर्र हाथ फेरने लगा.
फिन रवि उसका लंड अपने मुंह मे लें लिया औऱ चूसने लगा.
उसकेमुख सें अहह … उह … उम्म … ओह्ह उम्म्ह कि आवाज़ आनेलगी औऱ वो सिर कों पकड़कर अपने लंड पऱ दबाने लगा।
करीब 5 मिनट तक मैंने उसका लंड चूसा औऱ फिनरवि खड़ा हौ गय़ा। औऱ बैड पर्र घोड़ी बनकर खड़ा हौ गय़ा।
फिनरवि एक् तेल कि शीशी लाया औऱ अपनी गान्ड पऱ तेल लगाया औऱ थोडा तेल विक्की केँ लंड पऱ भि उसनेतेल लगाया।
औऱ अपनेहाथ सें लंड पकड़कर अपनी गांड़ केँ छेद पर्र लगा दिया औऱ विक्की सें बोला कि अब धक्का लगाए।
तेल लगाने सें गांड़ कां छेद थोडा नर्म हौ गय़ा।
जिससे उसका सुपारा एक् हि बार मे गांड केँ अंदरचला गय़ा।
औऱ रवि कों बहोत तेज दर्दहुआ, एकदम सें चीखपड़ा, ऐसालगा जैसे किसी नें ब्लेड चला दिया हैं गांड मे,
मगर विक्की नशे मे थां उसेकुछ समझ मे नहि आँ रहा थां वोँ बिना रुके धक्के मारने लगा औऱ रवि दर्द केँ मारे चिल्लाये जारहा थां थोड़ी देर मे रवि कों दर्द मे आनंदआने लगा औऱ वो अपनीकमर आगे पीछे करनेलगा औऱ झटका मारने लगा।
कुछ देरबाद विक्की झटके तेज-तेज माररहा थां, जौ रवि केँ लिए बर्दास्त करना मुश्किल थां, 10 मिनटबाद भि विक्की कां पानी नहि निकला थां।
अनूप नें अपनी गांड सें विक्की कां लन्ड निकाल कर विक्की कों लिटा दिया औऱ उसका लन्ड मुँह मे लेकर चूसने लगा।
विक्की- अबे साले क्याँ कररहा हैं तुँ.
विक्की कों बहोत अजीब सां लगामगर कुछदेर बाद विक्की कों भि मज़ाआने लगा।
थोड़ी देर चूसते-2 विक्की नें पूरामाल रवि केँ मुंह मे झाड़ दिया औऱ रवि नें बिनादेर किया पूरामाल पी लिया।
औऱ ऐसे दोनोलोग बिना कपड़ो केँ औऱ अनूप विक्की कां लन्ड पकड़ केँ सोगए।
सुभहजब विक्की कि नींद खुलती हैं तब वोँ पता हैं कि बेड पऱ रवि औऱ वोँ एक् दूसरे सें चिपटे हुए औऱ दोनों लोग बिल्कुल नंगे,
विक्की एकदम सें उठा औऱ अपने दिमाग़ पऱ जोरडाल करयाद करनेलगा कि कल क्याँ हुआ थां।
उसके दिमाग़ मे एक्-एक् सीनयाद आने लगता हैं उसकासिर चकराने लगा। वोँ जल्द सें उठकर कपड़े पहन केँ मोबाइल उठता हैं। फोन मे निधि केँ मिसकॉल देखकर डर जाता हैं।
तब तक रवि उसको उठकरगुड मॉर्निंगन बोलता हैं। औऱ पीछे सें आके पकड़ लेता हैं।
मगर विक्की जिसके ऊपर क्रोध सवार थि वोँ रवि कों धक्का देकर गुस्से मे एक् थप्पड़ मार केँ गांडमारा बोल केँ
चल जाता हैं।
रविवही बैठकर सोचता रहता हैं कि ये क्याँ हुआ औऱ विक्की वहांघऱ केँ लिएचल गय़ा।
अगला एपसोड जल्द,,
गलत संगत कां असर - Kahani ab aur interesting hogi
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