Incest माँ को पाने की हसरत - चुदाई – New Episode
दोनो नें संग मे ब्रेकफास्ट किया.औऱ फिनकुछ देरबात करने लगे.बिशल यानी रूपाली केँ हज़्बेंड कां रवैया विवाह केँ बाद पहले जैसा हौ गय़ा थां अब वोँ मां केँ संगसंग पत्नि कों भि गाली गलोच करनेलगा थां औऱ घऱ मे आएदिन कलेश करता रहता थां.अब तोँ घऱ चलना मुस्किल सां हौ गय़ा हैं रूपाली जॉब करती हैं तौ कुछ पैसेवोई घऱ मे लगाती हैं बाकी मौसाजी जुआ कि दुकान सें थोडा बहोत जोँ मिलता हैं उससेघऱ कां खर्चा निकाल देते हैं अपना औऱ अपनी पत्नि कां.फिन मौसी उसकी बीमारी कों लेके बातचीत करनेलगी
मौसी : ह्म तोँ तुम्हारी तरफ मर्दाना कमज़ोरी सि लगती हैं तुँ भि नां खामोखाः अपनी ज़िद्द केँ आगेऐसी गंदी दवाइयाँ यूज़कर बैठाअब भुगत
आदम : जौ हौ गय़ा सो हौ गय़ा मौसी अब तोँ आपकेपास हूं अब आप् हि मेरे बीमारी कां कोई घरेलू इलाजबता सकती हैं जिससे कोई प्राब्लम भि नां हौ
मौसी : सुधिया काकी कों आनेदे उसके पति डेढ़मास होँ गय़ा इंतेक़ाल कों ओझा थां उसकेपास हर बीमारी कां नुस्ख़ा औऱ खासकरके मर्दो कि बीमारी कां उसी नें तोँ टोटके दिलाए वरना तेरे मौसा तोँ मुझेजुए मे बेच हि खाते भागने तक कि नौबत आँ गयीँ, थि जुए कि ऐसी बुरीलत लगी उन्हें उपर सें उनका वोँ काला सां गुंडा यार उसने तौ उसरात तौ मेरी इज़्ज़त लूट हि ली थि यह तौ भला हौ कि उसरात घऱ जल्द सुधिया काकी आँ गई, थि वरना वोँ कमीना तौ तेरी मौसी कि इज़्ज़त लूट हि लेता
आदम : माइगॉड इतनाकुछ होँ गय़ा औऱ आपने मुझे बताया तक नहीं
मौसी : बेटा तूँ आता हि कब हैं? जोँ मालूम चलेगा परिवार वाले तोँ मुझे लालची ख़ुदगार कमीनी नाँ जाने क्याँ क्याँ कहते हैं? मुझे उनकी परवाह नहीं पऱ अबआया हैं तोँ मुझसे दूर नां होनाकही तुँ भि नाँ भूल जानां मुझे
आदम : ऐसा बिल्कुल नहीं होगा मौसी यक़ीनन सुधिया काकी तोँ बहोत कुछ जानती हैं जिसके टोटके इतने कारगर हौ सकते हैं उसकेपास तोँ मेरी बीमारी कां भि इलाज होगा
मौसी : वोँ साम कों आँ सकती हैं खैर तूँ तब तक मुँहहाथ धोके आरामकर आजा सबसे मिलके खानां वाना ख़ाके कल सुभह हि जानां
आदम : अर्रे पहले सें छुट्टी कररखी हैं धंधे मे प्राब्लम हौ जाएगा
मौसी : छुपकर अबआया हैं तोँ रहना पड़ेगा वरना तुम्हे खूब मारूँगी
आदम : हाहाहा चलोठीक हैं अर्रे क्याँ हुआ (इतना मे मौसी कि कमर मे जैसेलचक आँ गई, वोँ कमर पकड़े दाँतों पे दाँत रखकेबैठ गयीँ, )
मौसी : हाए अल्लाह इस्शह लगता हैं कल कां दर्दफिन बढ़रहा हैं
आदम : क्याँ हुआ थां मौसी?
मौसी : कलपेर फिसल गय़ा गुसलखाने कि सीडियो पे गिर पड़ीबच गयीँ, वरनाकमर कि हड्डी टूट जाती औऱ सर बाल्टी पे लग्के फॅट जाता किसीतरह बॅलेन्स बना लिया थां.मगर हाएरे यहमोच कां दर्द
आदम : एक् कामकरो मे मालिश कर देता हूं मुझे मालिश आती हैं
मौसी : नहीं नहीं तुँ क्यूं तक़लीफ़ कररहा हैं आनेदे नाँ सुधिया काकी कों
आदम : मौसी मुझसे हुज़्ज़त मतकरो प्ल्ज़्ज़ आपको दर्द हौ रहा हैं लाओ मे मालिश करदूं मुझेआती हैं
आदम कि ज़िद्द केँ आगे मौसी नें हारमान ली.एक् तोँ घऱ पे कोई नहींउपर सें दिल मे हिम्मत सि पैदा हौ गयीँ,.मौसी कि झिझक कां मतलबआदम कों समझ आया.उन्होने नाइटी केँ अंदर ब्रा याँ पैंटी कुछ भि नहीं पहना थां.क्यूंकी रात कों नशे मे धुत्त जब मौसाघऱ लौटते थें तोँ उन्हें अपनी पत्नि कि चुदाई करने मे मुस्किल नहीं चाहिए होती थि.इसलिये ताहिरा स्वयं हि अंदरकुछ नहीं पहनती थि औऱ उपर सें नाइटी डाल लेती थि.मगर कुछ दिनो सें मौसा कों नयी बीमारी डाइयबिटीस नें आँ घैरा थां जिससे उनका शुगर लेवेल बढ़ गय़ा औऱ वोँ एक् हि चुदाई करने केँ बादठीक ढंग सें मौसी कों संतुष्ट भि नाँ कर पाते औऱ कभीकभी तौ बीच मे हि कराह भरके कमज़ोरी सें सो जाते.बेचारी ताहिरा अपनी उंगलियो सें हि अपनी बुर कि आग शांतकर लेती.एक् विवाह शुदा औऱ एक् जवान लड़के कि मम्मी थि पऱ जिन्सी हसरत गई, नहीं थि बदन सें
दो बच्चों केँ बाद ऑपरेशन करा लिया थां.खैर आदम नें नारियल कां तेल लिया औऱ पलंग पे शीतलपाटी बिछा दि.उस पऱ मौसी लेट गई,."बेटा तूँ रहने मैने अंदरकुछ पहना नहीं हैं खामोखा तुम्हें दिक्कत होगी".मौसी नें आखरी प्रयास किया पऱ आदम नें बिनाकुछ सोचे उन्हें पेट केँ बल लिटाया औऱ उनकीपीठ कि मालिश करनेलगा
पीठ कों नाइटी केँ उपर सें हि मालिश करने सें ताहिरा शांत सि होँ गयीँ, आँखे मूंदली उसने.उसके खुलेगले होने सें नाइटी केँ कपड़े केँ भीतर दोनोहाथ तेल सें सने लें जातेहुए नंगीपीठ कों मलना शुरुआत किया वोँ खड़ा थां.औऱ करीब घुटने मोडबैड पे जैसे खड़ा थां.उसका लिंग मारे उत्तेजना मे तोप कि तरह खड़ा हौ गय़ा.उसने बड़े हि धीरे-धीरे धीरे-धीरे औऱ बड़ी मजबूती सें पीठ दबानी शुरुआत कि
ताहिरा : अहः उम्म्म अच्छे सें करहां अच्छा कररहा हैं
आदम : तुम्हारा दर्दछू मंतर होँ जाएगा मौसी
ताहिरा : तुँ यहसभी कहां सें सीखा?
आदम : एक् लौंडा हैं थाइलॅंड कां नेट पे दोस्ती हैं उसी सें औऱ पता हैं उसकी गर्लफ्रेंड क्याँ हैं? पोर्न्स्टार
ताहिरा : पोर्न्स्टार?
आदम : ह्म जौ अश्लील फ़िल्मो मे करवाती हैं
ताहिरा : छीछीऐसी सें इश्क
आदम : इश्क नाँ जात देखती हैं नां धरम नां रिश्ते देखती हैं नां उमर
ताहिरा : उम्म्म्म
आदम : म्म्म आपकेबीच केँ हिस्से मे नस चढ़ि हुई हैं रुकिये इसेठीक कर देता हूं (आदम नें चोट कों पकड़ लिया.उसने मौसी कि वहा जोँ कि कूल्हें केँ करीब लगभग हि थि वहा मालिश करने केँ लिए अपनाहाथ नाइटी केँ नीचे कि तरफ सें अचानक सें डाल दिया पर्र उसीसमय उसे ज़ोर कां झटकालगा दिल मुँह कों आँ गय़ा औऱ लिंगरह रहके तड़पने लगा बुरीतरह अकड़ गय़ा पॅंट मे)
मौसी नें पैंटी पहनी नहीं थि.औऱ उनके नितंब केँ उपर सें आदम अपनाहाथ लोवरबॅक तक लेँ आया थां.मौसी एक् समय केँ लिए हड़बड़ाई.पऱ उसने अधिक विरोध नहीं किया वोँ एकदम सख़्त होँ गयीँ, थि.आदम नें बिनाकुछ सोचे समझेपीठ कि मालिश शुरुआत कर दि धीरे-धीरे धीरे-धीरे दबाते हुए उसने धीरे-धीरे धीरे-धीरे नाइटी कों उपर उठाना शुरुआत कर दिया.
उसने पहलेझट सें जाके कमरे कां दरवाजा लगा लिया नाँ परवाह कि कोई आँ भि सकता हैं? औऱ दोनो कों बंद कमरे मे देखके बातें भि बन सकती हैं.आदम नें नाइटी कों पूराउठा दियाअब मौसी पीछे सें पूरी नंगी थि उनके काले नितंब उठेहुए थें उनकेपेट सें लेकेकमर चर्बिदार थि उसकी तोंद कों मुट्ठी मे लेकेआदम नें दोतीन बार दबाया औऱ पूरीपीठ कों नितंबो तक मालिश करना शुरुआत किया
जितनी तारीफ़ कि जाय उतनी हि कम हैं साथी..........अति खूबसूरत
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मौसी : कौके बोलबी नां ? (मौसी नें अपनी तेज़ चलती साँसों पे काबू पातेहुए उसे हिदायत दि) किसी कों कहेगा नहीं
आदम : चुपचाप मालिश केँ मज़ेलो मौसी
मौसी : सस्स्सह उम्म्म्म
कुछ हि देर मे मौसी कों आराम मिलने लगा औऱ उनका दर्द कहींहद तक कम होँ गय़ा पंखाबंद थां इसलिये दोनो पसीने पसीने होँ रहे थें पूरीपीठ तेल औऱ पसीने सें भीग चुकी थि.आदम नें नाइटी वापिस ढकनी चाही पर्र उसके अंदर कां सोयाहुआ शैतान उसेइस बात कि इज़ाज़त नहींदे रहा थां
उसने फ़ौरन अपनी पॅंटखोल दि औऱ उसे सरकाते हुए एक् ओर फ़ैक् दिया.बेखौफ़ होके उसने अपने कच्छे कों टाँगों तक उतार दियाफिन धीरे-धीरे धीरे-धीरे ताहिरा केँ शरीर पे झुकने लगा औऱ उसने नितंबो केँ बीच अपना लिंग लाके रगड़ना शुरुआत कर दियाहाथ कां नहीं बल्कि किसी लोहे कां गर्म चुभता डंडा जैसा महसूस करते हि ताहिरा कि साँसें तेज़ होँ गयीँ, औऱ उसकी आँखेलाल औऱ बड़ी बड़ी होँ गयीँ, अब तक मालिश नें उसकीआग भड़का दि थि औऱ अब उसका भांजा उस पर्र चढ़ने कों थां
ताहिरा : अर्रे पागॉल कि कोर्चीस? पागल होँ गय़ा हैं तूँ क्याँ कररहा हैं? (ताहिरा हड़बड़ा कर उठने कों हुइ पऱ आदम नें उसेपीठ सें वापिस लेटा दिया)
ताहिरा : बाबायह सभीठीक नहीं हैं मे तेरी मम्मी कि उमर कि हूं
आदम : सस्सह मौसी मे अधिककुछ नहीं करूँगा बस मुझेब अपने सें दूर नां होनेदे मे तुम्हें चोदुन्गा नहींबस उपरउपर सें
ताहिरा : नहीं तूँ उठ मे कहरही हूं नाँ उठ तूँ पागल हौ गय़ा हैं क्याँ?
ताहिरा इतनाकुछ कह अवश्य रही थि पऱ अंदर हि अंदर उसकी भि लालसा जागरही थि आख़िर वोँ एक् थर्कि स्त्री थि.पर्र रिश्तो केँ दायरे मे अब भि बंद थि उसेयाद आयाजब कमसिन उमर मे आदम नें उसके सोते वक्त उसकी नाभि औऱ होंठो कों चूमा थां.उसका चुंबन फ्रेंच किस जैसा होने लगता तोँ ताहिरा उसे अपने सें धकेल देती पऱ उसकी नादानी औऱ शरारत समझके उसे मांफकर देती पऱ आजआदम उसके बेहद लगभग आँ गय़ा
आख़िरकार ताहिरा कों उसकेआगे घुटने टैकने परे.पऱ उसने मुँह सें विरोध करना नां छोड़ा बोलती रही बोलती रही पर्र आदम उसकी गान्ड केँ बीच मे अपना लिंग घिस्सने लगा.ताहिरा केँ मुँह सें सिसकारिया निकलने कों हौ गयीँ,.औऱ उसने काफ़ी विरोध करने केँ बाद अपनी आँखे मूंद ली.आदम नें कुछदेर लिंग कों घिस्सने केँ बाद गान्ड कि फांकों कों चौड़ा किया गान्ड कां सिकुडा छेद औऱ चिकनी बैंगनी बुर उसके सामने थि.उसकी सूजी बुर फूली हुई सि थि
उसने ताहिरा कों पेट केँ बल लेटा दिया ताहिरा कों ख्याल आया कि वोँ जैसे सम्मोहित बेजान भान्जे केँ संगबैड गर्मकर रही थि.ताहिरा कि नाइटी करीब-करीब आदम नें उसकेगले तक उठा दि.औऱ उसकी भारी भारी 38 इंच कि चुचियो कों घूर्ने लगा जिसके काले मोटे निपल्स सख़्त थें.आदम नें थोडा तेल लिया औऱ उसकी चुचियों पे मलने लगा.ताहिरा नें दोबार हाथ झटका पऱ तीसरी बार मे वोँ सहन नाँ कर पाई.ताहिरा नें हाथ इर्द गिर्द फैलालिए आदम उसकी चुचियो कि तेल सें मालिश करनेलगा
एक् चुचि कों दोनो हाथो सें मालिश करनापड़ रहा थां.छाती उपर नीचे हौ रही थि ताहिरा कां गलासुख चुका थां.आदम नें काफ़ी देर तक वैसी मालिश कि.अचानक दरवाजे पे दस्तक होनेलगी "क्याँ रे ताहिरा ताहिरा मां? दरवाजा तौ खोलबंद क्यूं कररखा हैं सोरही हैं क्याँ अर्रे ताहिरा?".आदम औऱ ताहिरा मौसी सकपका गये
उसने जल्द जल्द अपनी नाइटी कों ठीक किया औऱ आदम कों करीब-करीब दाँत पे दाँत रखके बोलि जल्द सें पॅंट पहनने कों.आदम नें जल्द सें अपना कच्छा पहन लिया औऱ पॅंट भि जैसे तैसेपहन ली नतीजन ज़िप औऱ बटन लगाना भूल गय़ा
ताहिरा नें स्वयं कि साँसों पे काबू पाया.अभि जोँ कुछ होनेजा रहा थां वोँ आगेबढ़ भि सकता थां.शायद चुदाई तक पहूचके ताहिरा आदम कों रोक देती.पर्र उसी वक्त नां जानेकौन आँ मरी थि?
Nice keep it up.
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दरवाजा खुलते हि आदम औऱ ताहिरा कों बंद कमरे मे देख वोँ महिला थोडा अस्चर्य चकित हुई.करीब-करीब 62 कि उमर थि पुरानी सि साड़ी पहनरखी थि.देखके हि लगरहा थां घरो पर्र काम करती होगी ग्राम क्षेत्र कि थि फिगर उसका चर्बिदार जिस्म.चुचियाँ जैसे ब्लाउस फाड़के लटक जाए.गोल गहरी नाभि जिसके नीचे सें थोडा पेटउठा हुआ थां.भारी उचे नितंब थें वजन करीब-करीब 76 किलो तौ होगा अढेढ़ उमर कि स्त्री थि नाम थां सुधिया.सुधिया काकी जोँ ताहिरा मौसी केँ घऱ आनां जानां करती थि.जिसके बारे मे ताहिरा मौसी नें पहले बताया थां
ताहिरा मौसी उसको देखके सकपकाई अवश्य पर्र उसकी घबराहट गायब हुईँ.
सुधिया काकी : तुँ बंद कमरे मे क्याँ कररही थि औऱ यह लड़काकौन हैं?
मौसी : यह मेरी बेहन अंजुम कां बेटा मेरा भांजा
सुधिया : ओह अच्छा बेटा कैसा हैं तुँ? तेरी मौसी तेरे बारे मे बड़ीबात करती रहती हैं तेरी मां ठीक हैं?
आदम : हां काकीजी
मौसी : वोँ दरअसल यह मेरी मालिश कररहा थां
यह सुनके आदम थोडा सां चौंक अवश्य गय़ा.पऱ सुधिया काकी मुस्कुराइ जैसेउसे कमरे केँ अंदर क्याँ चलरहा थां इसबात कि भनक जैसीलग गयीँ, हौ.पर्र उसेकोई अधिक हैरानी नहीं हुईँ.सॉफ ज़ाहिर थां खेलीखाई स्त्री थि कुछकुछ समझरही थि.
ताहिरा मौसी : अर्रे सुधिया काकीमगर आप् इतनी जल्द केसे आँ गई, ? आप् तोँ साम कों आने वाली थि नां
सुधिया काकी : गाओं गई, थि नां तौ सोचा जल्द सें टाउन आँ जाउ मोबाइल आनेलगे थें बर्तन कपड़े धोना थां चारघऱ कां 2 दिन सें छुट्टी कररखी थि सोचा जल्द हि आँ जाउ
ताहिरा मौसी : यह तोँ आपनेठीक किया (ताहिरा अब भि हाँफरही थि उसका पूरा जिस्म काँपरहा थां चेहरा लाल सां थां उसकी हालत कों सुधिया काकी नें नोटीस कर लिया औऱ वोँ आदम कों भि देखने लगी मेरे जीन्स केँ बटन औऱ ज़िप खुली देखके वोँ मुस्कुराइ जिसे भाँपते हि आदम जल्द जल्द ज़िप लगाने लगा)
सुधिया काकी : वाउ लगता हैं भानजे नें मालिश अच्छी कि पर्र ताहिरा कम सें कम अंदरकुछ पहन तौ लियाकर
ताहिरा मौसी कों समझ मे आते हि वोँ हड़बड़ा सि गई, उसकी ज़ुबान लरखड़ाने लगी.सुधिया काकी कों उसकी नाइटी केँ बाहर् सें चुचियो केँ सख़्त कठोर निपल्स सॉफदिख रहे थें.
ताहिरा मौसी : ह.हां क्याँ कर.ए ? वोँ रात कों बड़ी गर्मी लगती हैं नाँ इसलिये सिर्फ़ नाइटी पहन लेती हूं
सुधिया काकी : हाहाहा मुझसे नां छुपा तेरा पति भि इसउमर मे भि बड़ा थर्कि हैं मधमेय कां रोगी हैं पर्र अब भि खड़ा होँ जाता हैं उसका (मौसी केँ गालशरम सें लाल होँ गये औऱ सुधिया केँ लफ़्ज़ों नें आदम कां लन्ड औऱ खड़ा करवा दिया)
ताहिरा मौसी : काकीआदम सुनरहा हैं क्याँ सोचेगा आप् भि नाँ ?
सुधिया काकी : अर्रे यह क्याँ सोचेगा? यह तौ नयानया जवानहुआ हैं क्याँ मर्द स्त्री केँ बीच कां नाता जानता नहीं होगा.मगर तेरीशरम आनी चाहिए कि कम सें कम पीछे दीवार कि छोटी सि खिड़की तौ बंद करके मालिश करवाती
ताहिरा औऱ आदम अचंभित होके एकदुसरे कां मुँह देखने लगे.यानी चोरी पकड़ी जा चुकी थि.आदम जनता थां सुधिया काकी सें कुछ छुपा नहीं हैं
सुधिया काकी : इतना घबराने याँ डरने कि ज़रूरत नहीं तुम् दोनो कों मुझे आजतक लगताआया हैं कि इसखेल मे सिर्फ़ मे हि खिलाडन हूं पऱ यहा तौ ताहिरा तुँ भि खिलाड़ी बनी बैठी हैं अपने हि भानजे केँ संग
ताहिरा : नहीं नहीं वोँ बस क्याँ बोलूं
सुधिया काकी : अर्रे तौ छुपाना कैसा वोँ भि सुधिया सें मे क्याँ पराई हूं? तूँ भि महिला हैं औऱ मे भि
ताहिरा : इसका मतलब आप् भि अपने परिवार मे किसी सें
सुधिया काकी : किसी भानजे याँ भतीजे सें नहीं अपने बेटे रामदीन सें
ताहिरा : क्याँ रामदीन? (एकाएक ताहिरा मासी कां मुँह खुला कां खुलारह गय़ा यानी कि अब तक उन्हें भि सुधिया काकी किससे फसि हुई हैं यह मालूम थां नहीं)
अड़ेढ़ उमर कि थि अवश्य मगर लगता हैं भोसड़ी मे अब भि खुजली बरक़रार थि जोँ सहावत वोँ अपने बेटे सें पूरीकर रही थि.उसका बेटा रामदीन कोई 23 साल कां लौंडा थां जौ शहर मे काम करता थां औऱ 15 15 दिनघऱ बैठा रहता थां.बाप रिकक्षावाला थां 2 साल पहलेमर गय़ा उन्ही दो सालो केँ अंदर रामदीन सुधिया काकी यानी अपनी मम्मी कों चोदने लगा थां.इसमें पहल मम्मी नें हि कर दि थि
आख़िर उसे बुर कि इतनी खुजली थि कि मिटाने वालाकोई थां नहीं.हालाँकि चुदक्कड किसम कि महिला थि औऱ उसकेकाई नाजायेज़ रिश्ते रहे थें पर्र 1 राउंड केँ बादकोई उसकी चूत मे लन्ड नहीं डालता थां क्यूंकी साली मर्दो कों इसउमर मे भि थका देती थि औऱ शायद बुढ़िया होने कि वजह भि कहीं थि.रामदीन कों एकदिन मम्मी नें रंगे हाथो एक् रंडी कों खेतो मे चोद्ता देख लिया.जिसके बाद दोनो मम्मी बेटों मे कुछदिन तक झगड़ा बरक़रार रहा.मगर बेटे नें सॉफकह दिया मुझे विवाह नहीं करनीबस ऐसे हि औरतों केँ संग संबंध बनाने हैं अब तूँ किसी सें भि बनवा.सुधिया बेशरम स्त्री थि बेटे केँ लिंग कों उसने देखा थां कितना मोटा औऱ लंबा थां उसेडर लगा कहीं ग़लत इरादा करके वोँ घऱ छोड़ नां दे जिससे कि वोँ मार्ग पे आँ जाए औऱ उसने फ़ैसला करतेहुए अपने बेटे केँ सामने नंगीपेश हौ गयीँ,.शुरुआत शुरुआत मे बेटे कों थोडा अज़ीब लगा पऱ अबकाम सें फारिग होके वोँ अपनी हसरत मम्मी केँ संगघऱ कि चार दीवारी मे उसकी बुर गान्ड कि चुदाई करके निकालता थां
ताहिरा औऱ आदम कां डर गायब हौ गय़ा औऱ वोँ निसचिंत हुए कि चलो उनकी चोरी किसी कि आँखो मे नहींआई.सुधिया ताहिरा कों मशवरा देनेलगी औऱ उसे औऱ प्रोत्साहन करनेलगी कि वोँ आदम कों ढंग सें चुदाई करना सिखाए तभीउसे पूरामजा मिलेगा.ताहिरा आदम केँ सामने बेशर्मो कि तरहसुन रही थि आदम कां लिंग अपनी औकात मे खड़ा थां
सुधिया : पीछे कि गलीबंद अवश्य हैं पर्र कभीकभी कोई नाँ कोई गुज़र जाता हैं तेरी पीछे कि खिड़की खुली थि औऱ मे तफ़सील करनाचाह रही थि कि तूँ घऱ मे हैं कि नहींबस जैसे हि खिड़की सें देखा तौ तेरायह भांजा तेरीपीठ कि मालिश करतेहुए तेरी गान्ड मे अपना मोटा लिंग रगड़ने लगा थां.उसके बाद इसने तेरी पलटा दिया औऱ तेरी छातियो कि मालिश कर हि रहा थां इतने मे मुझेलगा कि कोईसच मे तेरेघऱ आँ नां जाए वरना तेरीपोल तौ खुल जाएगी इसलिये मे स्वयं तेरेयहा आँ गई, कबकौन आँ जाए क्याँ पता तेरा बेटा याँ बहू आँ जाते तौ तुँ क्याँ करती? वैसे मालिश तौ तेरा भांजा अच्छे सें करता हैं मैनेगौर किया हैं
आदम कां चेहरा लाल होँ गय़ा उनकी बातों सें
ताहिरा : ह्म पऱ आपने अच्छा किया दरअसल मे औऱ ये इतने ज्यादा बहेकगये कि समय औऱ स्थान देखा हि नहीं
सुधिया : चलकोई बात नहीं पर्र मुझे खुशी हैं कि तेरे पीछेकोई तौ हैं अब
ताहिरा कां मुँहलाल हौ गय़ा शरम सें वोँ आदम सें जैसे नज़र चुराने लगी.फिन आदम नें हि बात छेड़ी औऱ सुधिया काकी कों अपनी समस्या बताई.ताहिरा भि आदम कि बीमारी उन्हें बताने लगी सुधिया काकीकुछ देर सुनके काफ़ी गंभीर चुपचाप खड़ीरही
सुधिया : ह्म समस्या हैं पऱ गंभीर नहीं सुधिया किस मर्ज़ कि दवा हैं इसकेलिए आदम तुम्हें एक् दवा खानी होगी औऱ अपने लिंग कि मालिश भि
आदम : क्याँ मालिश?
सुधिया : हां एक् बार औज़ार दिखाना
आदम शर्मा गय़ा औऱ ताहिरा मौसी कि ओर देखने लगा."अब शरमाना कैसा? सुधिया काकी सबकुछ जान चुकी हैं चल तुझेही डर हैं तोँ अंदर केँ कमरे मे सुधिया काकी कों दिखा दे.आदम नें हामीभरी औऱ तीनो कमरे मे आए
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