Incest माँ को पाने की हसरत - चुदाई – New Episode
आदम नें झट सें अपनी जीन्स औऱ कच्छा नीचे टाँगों तक उतार दिया.ठीक उसीसमय ताहिरा औऱ सुधिया काकी केँ सामने आदम कां लन्ड फूँकारे मारते हुए उत्तेजना मे खड़ा सलामी देनेलगा.
सुधिया : ह्मयह तोँ पूरा अपनी औकात पे खड़ा हैं (सुधिया काकी केँ मज़बूत हाथो नें मेरे लिंग कों जौ पकड़ा तौ मेरे पूरे जिस्म मे सनसनी दौड़ गई, )
सुधिया : अभि पानी नहीं निकाला इसलिये एकदम लोहे जैसा सख़्त होँ रखा हैं.ह्म इलाज हौ जाएगा इसका मुझेआज कां वक्तदे (काकी नें मेरे लिंग कों मुट्ठी मे कस्के इधरउधर घुमाके बड़ेगौर सें देखा)
"1 महीने कि मालिश मे हि इसका औऱ भि लंबा औऱ मोटा होँ जाएगा औऱ छूटने पे काबू पाने लगेगा जिससे यह लंबी चुदाई करेगा औऱ औरतों कों संतुष्ट भि कर सकेगा".ताहिरा कि आँखो मे चमक सि आई वोँ मुझे देखके मुस्कुराइ
ताहिरा : तब तोँ जल्द सें जल्द इलाज शुरुआत करदो
सुधिया : मगरयह इलाज मुझे हि करना होगा क्यूंकी मेरेहाथ सख़्त हैं औऱ तुम्हारी तरफ भि शरीक होना होगा पऱ यादरहे इस 1 महीनो केँ अंदरआदम तुम्हें किसी केँ संगयौन संबंध नहीं बनाना वोँ मालिश कि औषधि मे एक् वैद सें लेँ आउन्गि इसकी मालिश मे स्वयं करूँगी
आदम : तोँ कितना देना होगा?
सुधिया : हट पगोल रुपया क्यूं देगा तुँ? ताहिरा कां भांजा मतलब मेरा भि ख़ासकोई पैसे वैसे देने कि ज़रूरत नहीं मे दवाईकल लाके ताहिरा कों दूँगी तुम् मौसी केँ पासआके लेँ लेना बाकीरही मालिश कि तौ मुझे यहीं करना होगा
ताहिरा : यहा नहींकल तोँ रविवार हैं
सुधिया : तौ स्थान मुक़र्रर कर
आदम : अर्रे आप् लोग चिंता क्यूं करते हैं? मे अकेले रहता हूं कोईसंग मे नहीं हैं आप् लोग मेरेयहा आँ जाइएगा मे आपकोघऱ तक कां किराया दे दूँगा प्ल्स नाँ मत कीजिए बस इलाज जल्द सें जल्द करवा दीजिए
ताहिरा : हां काकी
सुधिया : तोँ ठीक हैं कल मे औऱ ताहिरा तुम्हारे घऱआके वही सें तुम्हारी मालिश शुरुआत कर देंगे पऱ ध्यान रहेकोई हम् तीन केँ अलावा नां हौ
आदम : उसकी फिकर नां कीजिए मेरे अलावा औऱ आप् लोगो केँ अलावा कोई नहीं होगा
इरादा तय होँ गय़ा.सुधिया काकी औऱ कुछदेर तक बात करके हमसेफिन चली गयीँ, जाते जाते मुस्कुरा केँ कह गयीँ, अधूरा काम जल्द निपटा लो मौसी औऱ मे शर्मा गये.ताहिरा मासीलेट होँ रही थि इसलिये वोँ मुझे झूठा क्रोध दिखाते हुए कपड़े धोने गुसलखाने चली गई.अभि मौसा याँ किसी केँ आने कां वक्त नहीं थां.मे बहोत एग्ज़ाइटेड थां कि ताहिरा मौसी नें मेरे इलाज कां इंतज़ाम कर दिया हैं औऱ ताहिरा मौसी भि रोमांचित थि मेरे इलाज सें मेरे मोटे लंबे लिंग कों लेने कि चाहत उनमें भि कहीं नां कहीं थि
जौ अधूरा रह गय़ा थां उसे पूरा करने दियाजाए सोचके मैनेरूम ठीक सें बंद किया औऱ गुसलखाने पे दस्तक देने लगा.मौसी नहाने कि तय्यारी कररही थि."अर्रे कौन हैं?".मौसी ज़ोर सें बोलीं
आदम : मौसी दरवाजा खोलो नाँ
मौसी : आदमबाज आजा तुँ इतना बेशरम होँ गय़ा हैं सुधिया काकी नें देख लियाअब भि जी नहींभरा तेरा
आदम : वोई तोँ जी नहींभरा मेरा
मौसी : हाए अल्लाह तुँ तोँ तेरे मौसा सें भि अधिक थर्कि हैं रुक तेरी विवाह करवानी पड़ेगी
आदम : मौसी अभि हाथ मे समय हैं खोलदो नां
मौसी : नहीं बाबा मुझेनहा लेनेदे फिनकभी
आदम : प्लज़्ज़्ज़ नाँ मौसी एक् बारबस एक् बार प्लज़्ज़्ज़
काफ़ी उकसाने समझाने केँ बाद लोहे कां दरवाजा हल्का सां खुला मैनेझट सें दरवाजा आधा खोला औऱ अंदर दाखिल होके फटाक सें कुण्डी लगा दि.मौसी हड़बड़ा केँ उठ गई, उनके पूरे शरीर पे साबुन लगाहुआ थां औऱ फर्श पे कपड़े थें जौ अब भि धोरही थि.मैने अपने कपड़े जैसे तैसे उतारे औऱ कच्छा भि उतार लिया.मेरा फन्फनाता लन्ड देखके मौसी कि आँखे बड़ी बड़ी होँ गयीँ,
मौसी : देख कितना काम पड़ा हैं अब तक तोँ मे निपट भि जाती
आदम : अच्छा लाओ मे सहायता कर देता हूं
मौसी कि नहीं सुनी औऱ सीधे कपड़ों कों निचोड़ने लगा हम् दोनो झुकेहुए थें इसलिये ताहिरा मौसी केँ झुकने सें उसकी झूलती साबुन लगी चिकनी छातियो कों मे घूर्रने लगा.एक् कों हाथ मे लेकेदबा सां दिया तौ मौसी केँ मुँह सें आआहहफुट पड़ी.
कपड़े निचोड़के धो देने केँ बाद मैने मौसी कों अपनी बाहों मे खेंच लिया उसकीकमर मे हाथ लपेटे हुए उसके हाथो मे अपना लन्ड दे दिया.वोँ मेरे मोटे लन्ड कों आगे पीछे करके हिलाने लगी.पास मे मग थां जिससे मे उनकेबदन पे औऱ अपनेबदन पे पानी डालने लगा.मौसी कि टाँगों केँ बीच काफ़ी झान्टे उगी हुई थि औऱ कांख मे भि बाल थें जोँ शायदकयि महीनो सें सॉफ नहीं कि थि मौसी
Happy Republic Day 2018:
Incest माँ को पाने की हसरत - चुदाई – New Episode
मे उनके कांख केँ बाल पे हाथ फेरने लगा औऱ फिन अपना लिंग उन्हें सहलाने कों बोला.उन्होने लन्ड कों सहलाया औऱ उसे बड़ेगौर सें देखने लगी.
ताहिरा : वाक़ई तेरा लन्ड मोटा हैं सस्स कितना कठोर हैं?
आदम : मुँह मे लेके देखो
ताहिरा : छीघिन आती हैं
आदम : अच्छा मौसाजी कां भि तौ चुस्ती होगी तुम्
ताहिरा मौसी कां जवाब नां पाके मे समझ चुका थां.मे उनके चेहरे पे आगे बढ़के लिंग कां दबाव देने लगा.तोँ उन्होने अपने चेहरे सें लिंग हटाते हुए अपने मुँह मे लेँ लिया औऱ दो-तीन बार बड़े प्रेम सें चुस्के मुँह सें बाहर् निकाल दिया जैसे उनसे हौ नहींपा रहा होँ पऱ मैने सख्ती सें उनकेबाल पकड़े औऱ उनके मुँह मे अपना लन्ड घुसा दिया.वोँ फिन सें मेरे लन्ड कों उगलने लगी पर्र मे डटारहा औऱ उनकेबाल नहीं छोड़े पूराजड़ तक हलक मे घुसा दिया वोँ अओउूउ अओउू करनेलगी उनकी आँखे बाहर् कों आँ गयीँ, फिन मैने लिंग कों उनके मुँह सें निकाला वोँ ख़ासने लगी औऱ फिन मुँह सें थूक फैक्ते हुए मेरे लिंग कों दुबारा चूसा.इस बार बड़े प्रेम सें कुछदेर चुसवाने केँ बाद मैने अंडकोष केँ नीचे उनका मुँह लाया वोँ मेरे टट्टो कों चाटने लगी उसमें अपना चेहरा रगड़ने लगी.वोँ किसी पेशेवर रांड़ कि तरहदिख रही थि
फिन उसके मुँह मे लन्ड दिया उसनेफिन चूसा.उसके बाद मेरे लन्ड पे ढेर साराथूक लगा दिया.मेरे गीले लन्ड कों उसने हाथो मे लिए दबोचा.मैने उन्हें उठाया औऱ उनके चेहरे कों पकड़के स्मूच करने लगा.हम् दोनो एकदुसरे केँ होंठो कों चुस्सते रहे.एक् अज़ीब सां सुख प्राप्त हौ रहा थां जैसेहमे एकदुसरे कि ज़ुबान औऱ होंठो कों चूस्ते हुएमजा आँ रहा थां.उनके मुँह सें आती गर्महवा मुझे अपने मुँह मे महसूस हौ रही थि.
फिन हमने होंठअलग किए मौसी अब तक चुदने कों तय्यार हौ चुकी थि आँखें लाल होँ चुकी थि.मैने उन्हें वोई गुसलखाने मे लेटा दिया औऱ उनकी टाँगों कों अपनीकमर मे इर्द गिर्द लपेट दिया अपने लिंग कों उनकी बुर मे अड्जस्ट करने लगा.उनकी झान्टो केँ बालों मे लिंग कों रगड़ते हुए बुर केँ मुँह पे लन्ड रखा औऱ धक्का दिया.लन्ड अंदरफ़च सें घुस्स गय़ा मौसी कि बुर नें मेरा लन्ड खा लिया
आदम : ओह्ह क्याँ गर्म भट्टी हैं? सस्शह उफ़फ्फ़
मौसी : उफ़फ्फ़ आहह-आहह मार धक्के इस्सह आदम (वोँ मुझे अपनी नंगी छातियो सें लगाने लगी उनकी खरबूजे जैसी चुचियाँ मेरे सीने सें दब गई, )
मे नीचे सें धक्के पेलने लगा.उफ़्फ़ उनकी बुर काफ़ी रसभरी औऱ गर्म थि अंदर सें.हर धक्के मे मुझे पूरी ताक़त लगानी पड़ती अपनी कुल्हो मे.मेरे चूतड़ आगे पीछे हौ रहे थें औऱ वोँ बुरीतरह छटपटा रही थि सरइधर उधरमार रही थि.मे 5 धक्के हि लगाया होउंगा कि मेरा छूटने केँ कगार पे पहुच गय़ा मे कुछदेर शांतरहा तोँ एक् जलन कां अहसास हुआ बुर कि गिरफ़्त मे मेरा लन्ड थां
औऱ मौसी नें बड़े कस्के मेरे लन्ड कों दबोच लिया थां.फिन उन्होने अपनी पकड़ ढीली छोड़ी औऱ स्वयं नीचे सें लन्ड कों भीतर सें रगड़ने लगी बुर सें.मे उनकी चुचियो कों चुस्सने लगा उन्हें शांत करने लगा.मगर वोँ मुझे चोदने केँ लिए उकसारही थि
ताहिरा : औऱ कर नां ?
आदम : मौसी निकल जाएगा
ताहिरा : आदमकर कुछ नहीं होगा
मे फिन धीरे-धीरे धीरे-धीरे धक्के मारने लगाइस बार संयम सें.अब तक मेरा लिंग छोटापड़ गय़ा थां.मेरे धक्के मारते हि मुझेकुछ गर्म गर्म अहसास हुआ ताहिरा मौसी झढ़ चुकी थि वोँ आँखें मुन्दे सि पड़ी थि बस मुँह सें ओह्ह्ह ओह्ह्ह आहह-आहह उम्म्म कि आवाज़ें आँ रही थि.कुछ धक्को बाद मैने बुर सें लन्ड कों पूरी ताक़त सें बाहर् खींचा औऱ उसकेबाद उनकी बुर कि फांकों कों देखने लगा जोँ बैगनी रंग कि थि.उनकी बुर केँ दाने कों मुँह मे भरकेतीन उंगली बुर मे करने लगा.मौसी कों मजा आँ रहा थां
उन्होने अपनी टाँगें चौड़ी कर ली.मे उंगली तेज़ी सें करने लगा.उसके बाद मैनेतीन उंगली जब बाहर् निकाली तौ वोँ मौसी केँ रस सें भीगी हुइ थि एक् कों जब मुँह मे लिया तौ उसका स्वाद नमकीन सां थां.मैने मौसी कों हाथ देके खड़ा किया औऱ उन्हें घोड़ी बनाया अब उनकी गान्ड कि फांकों केँ बीच मे थां मेरा लन्ड मे उनकी गान्ड मारना चाहरहा थां.
ताहिरा : नहीं गान्ड नहीं वोँ मतमार ससस्स बहोत दिनो सें नहीं मारी इसलिये टाइट होँ गयीँ, हैं
आदम : मे उंगली करके चौड़ा कर देता हूं
ताहिरा : नहीं नहीं तूँ बुर मार लें
आदम : अर्रे कुछ नहीं होगा थोडा घुसा लेनेदो दर्द ख़तम होँ जाएगा
ताहिरा : ठीक हैं जल्दकर
मैने पूरी ताक़त सें उनकी गान्ड कों चौड़ा किया औऱ अपने लन्ड पे औऱ उनकी गान्ड केँ छेद पे ढेर साराथूक डालके उसमें उंगली करके गीलाकर दियाअब मे लन्ड कों उनकेछेद मे आहिस्ते आहिस्ते फिराते हुए घुसाने लगा जैसे काफ़ी मुस्किलो बाद सुपाडा अंदर दाखिल हि हुआ थां तौ मौसी नें अपने मुँह पे हाथरख लिया.इतने मे बाहर् सें मौसा कि आवाज़ सुनाई दि.वोँ घऱ कि कुण्डी लगीदेख बाथरूंम मे आवाज़ लगारहे थें
मौसा : क्याँ री? बिशल कि मां अंदर होँ क्याँ?
ताहिरा औऱ मे फिन एक् बार हड़बड़ाये.ताहिरा मौसी कों मैने इशारा करतेहुए कहा कि जवाबदे ताहिरा मौसी नें डरतेहुए जवाब दिया कि वोँ नहारही हैं 10 मिनट लगेगा.मौसा नें कोई जवाब नहीं दियाबस इतना बोले कि उन्हें ज़ोरो कि भूकलगी हैं इतनाकह कर वोँ पास केँ कमरे मे दाखिल हौ गये थॅंकगॉड संग मे कोई कपड़ा नहीं लाया थां वरना पूछते कि कौनआया हुआ हैं? औऱ कहां हैं?.ताहिरा ख़ौफ्फ भरी निगाहो सें मेरीओर देखने लगी.मैने उन्हें फिन घोड़ी बनाके झुकाया औऱ उनके नितंबो केँ बीच केँ छेद मे फँसे मेरे लन्ड पे पूरा दबाव देनेलगा
धीरे-धीरे धीरे-धीरे लिंग अंदर घुस्सने लगा औऱ आधा लिंग जैसे अंदर गय़ा वोँ तड़पने लगी.मे वैसे हि धक्के पेलने लगा.वोँ हल्की हल्की आहेंभर रही थि.मौसा कों मालूम नहीं कि गुसलखाने मे उनकी पत्नि अपने भानजे सें चुदरही हैं इधर मौसी कि गान्ड मे आधा लिंग घुसाए मे उनकी चुदाई कररहा थां
अब मेरासबर कां बाँध टूटने लगा औऱ मैने मौसी कि खरबूजे जैसी चुचियो कों कस कस्स्के दबोचते हुए मुट्ठी कस्सली औऱ ठीकउसी समय मेरे लिंग नें बेतहाशा पानी छोड़ा जौ उनकी गान्ड कों गीली करतेहुए अंदर दाखिल होँ रहा थां.उनका पूरा शरीर काँपउठा फिन झड़ने केँ बाद मे किसी सांड़ कि तरह उनकेउपर सें उतर गय़ा उनके गान्ड केँ छेद सें लिंग बाहर् कों हल्के सें निकाला जौ अंदर कि गंदगी औऱ मेरे वीर्य सें लथपथ थां औऱ फिन उनकी गान्ड केँ छेद कि तरफ देखा जोँ खुलरहा थां सिकुड रहा थां.औऱ मेरा वीर्य उगलरहा थां छेद सें लेके बुर केँ हिस्से तक मेरा गाढ़ा सफेद वीर्य बहरहा थां.औऱ फर्श पे टपक भि रहा थां.
मौसी उठ खड़ी हुइ फिन हम् दोनोसंग मे नहाए औऱ उसने मार्ग देखके केँ जैसे तैसे मुझे बाहर् जाने कां इशारा किया मे बाहर् निकलके दबेपाओ गली सें बाहर् हौ लिया उसके एक् चक्कर बादजब वापिस आया तौ सीधे कमरे मे आया मौसा सें मिला.वोँ मुझसे गले लगे.कुछ देरबाद मौसी पीलेरंग कि नाइटी पहन केँ अंदरआई मुझे देखके शरमाने लगी.रात तक मे रुका थां
रूपाली भि आई जिसे देखके मेरेदिल कि धड़कन फिन तेज़ होँ गई, मगर उसके पति केँ आते हि कुछदेर हम् संगरात केँ खाने केँ वक्त बैठे गपशपकिए मगर उसकेबाद रूपाली अपने पति केँ संग उठकेरूम मे चली गई,.रात मे मौसी केँ संगफिन कोई चुदाई कां प्रोग्राम नहींबना क्यूंकी मौसा औऱ मौसी भि अपने कमरे मे जा चुके थें
रात कों संग मे परिवार केँ संग भोजन करने कां अलगमजा थां…रूपाली सें इसबीच काफ़ी बातचीत करने कां मनबना हालाँकि उसके पति केँ सामने इतनाकुछ सवालात तौ कर नाँ सका पऱ खातिरदारी मे मौसी औऱ रूपाली नें कोईकसर नहीं छोड़ी थि औऱ मौसा औऱ भइया सें मिलके भि अच्छा महसूस होँ रहा थां…
मगर पूरीरात नींद नहीं आँ रही थि मुझे.आज भीषण चुदाई जोँ कि थि ताहिरा मौसी कि स्स्स अब भि आँखो मे उनकी सिकुद्ती खुलती गान्ड केँ छेद सें निकलता मेरा वीर्य दिखरहा थां.केसे गुसलखाने मे हि उनकी मस्त चुदाई कि थि.अभि सोच कि कशमकश मे डूबा सां थां.कि एक् शैतानी हरकत सूझी
अगलेभाग कां इंतजार रहेगा
Incest माँ को पाने की हसरत - चुदाई – New Episode
बरामदे सें ठीक दूसरे कोने वाले कमरे मे मे सोरहा थां जोँ कि अक्सर गेस्ट केँ लिए हि खाली पड़ारहा करता थां.पर्र अक्सर झड़प मिया पत्नि केँ बीच होते हि बिशल याँ तोँ मौसाजी यहीआके सो जाया करते थें पर्र आज मे कमरे मे अकेला थां.सुभह कां 1 बज चुका थां.दूर कहीं किसी काली केँ मंदिर मे धन्न धन्न कि आवाज़ सुनाई देरही थि शायदयहा रात्रि पूजा होती हैं
मे उठके पानी पीने केँ लिए बाहर् बरामदे मे आया.फ्रिड्ज सें पानी कि बोतल निकालके गटागट पाँच घूँट मारें औऱ फिन मूतने केँ लिए गुसलखाने मे घुस गय़ा.अचानक मूतते समय रूपाली कां ख्याल आँ गय़ा हाय बिशलउसे बड़ी जल्द कमरे मे लें गय़ा थां.वोँ भि मां बाप केँ सामने बेशर्मी सें क्याँ वोँ लोगअब भि चुदाई कररहे होंगे? पर्र इतनीदेर मे चुदाई कां भूत उसकेसर सें उठ चुका होगा.क्यूं नां एक् बार झाँका जाए उनके कमरे मे
सोचते हि मेरा लिंग फनफना कर खड़ा हौ गय़ा.मूतने मे बड़ी दुविधा हुई। बाहर् आया औऱ अपने खड़े लिंग कों पाजामे केँ भीतर हि अड्जस्ट करताहुआ पहले मौसा मौसी केँ कमरे केँ दरवाजे केँ पासआके कान लगाने लगा.अंदर सें कोई आवाज़ नहीं आँ रही थि चारोतरफ खामोशी छाई हुई थि
फिन मे सामने वाले यानी बिशल केँ कमरे केँ नज़दीक आया उसके कमरे कां दरवाजा लगाहुआ थां.कान लगाके सुनने लगा पऱ पंखे कि आवाज़ छोड़के मुझेकुछ औऱ सुनाई नाँ दिया.फिन मे चप्पल पहनकर गली सें बाहर् कि ओर निकला वैसे तोँ इतनीरात गये रास्ते पे कोई चहेल पहेल नहीं होतीफिन भि दूरदूर मे कुत्तो कि रोने कि आवाज़ें आँ रही थि.मगर जिसके दिमाग़ मे उस वक्त सेक्स कां हि ख्याल उमड़ा हुआ होँ वोँ इंसान जोश मे अपनेआस पास क्याँ होँ रहा हैं इस पे ध्यान नहीं देता मेरी हालत बिल्कुल वैसी हि थि.
मे बाहर् आया औऱ ठीक जहाँ सें ताहिरा मौसी कां घऱ दर्ज़ी कि दुकान पे ख़तम हौ जाता हैं उसके दरमियाँ एक् खिड़की थि औऱ मुस्किल यह थि कि वोँ खिड़की कोने कि नाली केँ ठीकउपर थि.मेरी लंबाई थोड़ी लंबी थि इसलिये मे धीरे-धीरे धीरे-धीरे करके थोडा उचक केँ खिड़की कों हल्का सां धक्का देने लगा.अचानक अंदर कि रोशनी जल पड़ी औऱ मेरीफॅट गयीँ,
मे दुबक केँ दीवार सें नीचेसटा बैठा रहा.आस पास बहुतों केँ घर-मकान थें कोई भि देख लेता तौ चोर समझके हंगामा मचा देता याँ उसी वक्त मुझे पकड़ लेता पर्र गनीमत थि सभी अपने अपनेघरो मे बंद थें.मैने हिम्मत करकेसर थोडा उपर उठाया तोँ कमरे कां दृश्य दिखने लगा.अंदर नीलेरंग कि जॉकी कां कच्छा पहने मेरा भइया बिस्तर पे चारो खानेचित खर्राटे भररहा थां औऱ उसके कच्छे कां उभार सामने दिखरहा थां जबकि दूसरी ओर मुझे रूपाली दिखी जौ अभि तक सोई हुईँ नहीं थि वोँ बिशल कों देखते हुए आहिस्ते आहिस्ते चादरठीक कररही थि.पास कि दराज़ केँ उपर अस्ट्रे मे एक् बुझी सिगरेट पड़ी हुइ थि.औऱ रूपाली नाइटी मे हल्के पीलेरंग कि। काश 2 मिनट पहलेआता तौ उसे नंगी अवश्य देख लेता
रूपाली औऱ बिशल कि शायद दोनो कि काफ़ी देर पहले चुदाई हुईँ थि औऱ इसीवजह सें रूपाली कों अब तक नींद नहींआई हुइ थि.जबकि बिशल नापकीयत मे हि सो गय़ा थां.रूपाली कि चालढाल औऱ मुरझाया चेहरा औऱ बिखरे बाल देखके सॉफदिख रहा थां कि बिशल नें उसे काफ़ी देर तक चोदा हैं हालाँकि उसकी आँखे बोझल सि अवश्य लगरही थि
मे जल्दी हड़बड़ाते हुए खिड़की कों बिना सटाये वापिस गली सें अंदर बरामदे मे आया औऱ जल्दी गुसलखाने मे घुस गय़ा मुझेवोई ठीक लगा.क्यूंकी रूपाली पेशाब करने केँ लिए गुसलखाने हि घुसती.मैने दरवाजा आधा सटाया औऱ टाय्लेट कि नाली केँ पास झूंटमूठ कां बैठके ज़ोर लगाने लगा
लिंग वैसे हि एकदम खड़ा थां.इतने मे गुसलखाने कि लाइटऑन हुई औऱ अचानक रूपाली नें आधा दरवाजा खोले मुझे अधनंगा पेशाब करतेहुए बैठा पाया तौ हड़बड़ा कर दरवाजा लगाए बाहर् उतर गई,.मे झूंटमूठ कां पानी डाले बाहर् आया औऱ उससे माँफी मागने लगा
रूपाली : अर्रे तुम् अभि तक सोए नहीं?कम सें कम लाइटजला लेते मुझेलगा बाथरूम मे कोई नहीं हैं
आदम : असल मे मुझेलगा इस वक्त तौ सभीसो रहे हैं औऱ मे थोडा नींद मे थां ध्यान नहीं दिया
रूपाली : हाहाहा कोईबात नहीं (उसके चेहरे पे सॉफ उत्तेजना देखी थि मैने शायद उसने मेरे लन्ड कों पूरी तरीके सें देख लिया)
वोँ उससमय बिना ज्यादा कुछकहे मुस्कुराए गुसलखाने मे चली गयीँ, कुछदेर मे हि मुझे उसके पेशाब करने कि आवाज़ सुनाई दि.शायद उसकीचुत नें मोटीधार पेशाब कि अपनेछेद सें एक्सक्यूज़ शुरुआत किया थां.मगर क़िस्मत खराब मे उसे नंगीदेख नहीं पाया क्यूंकी दरवाजा लोहे कां थां औऱ उसमें कोईछेद नहीं थां.
मे अपने कमरे मे आँ गय़ा ताकिउसे यह नाँ लगे कि मे जानभुज्के बाहर् अब भि उसके इन्तिजार मे खड़ा हूं छोटे टाउन कि लड़की हैं नां जाने क्याँ उसकेमन मे विचार आए? मे जल्द सें कमरे मे आँ गय़ा दरवाजा हल्का सटा दिया औऱ अपने सारे कपड़े उतारके चादरओढ़ ली.मुझे गुसलखाने केँ दरवाजे केँ खुलने कि आवाज़ सुनाई दि फिनबंद होने कि फिन लाइटऑफ करने कि फिनबगल वाले कमरे कां दरवाजा ज़ोर सें लगाए जाने कि.मे चाहता तौ आगे क्याँ हुआफिन खिड़की सें झाँक केँ देख सकता थां.पर्र आँखेजल रही थि औऱ मुझेकल सुभह जल्द उठना थां इसलिये मे सो गय़ा
अगलेदिन प्रोग्राम मे साला थोड़ी बाधापड़ गयीँ,.भारी भीषण बरसात शुरुआत होँ गई,.सुधिया काकी थोडा दूर सें आती थि इसलिये ताहिरा मौसी नें सुभह सुभह नाश्ते मे यहजता दिया थां कि शायदआज प्रोग्राम कॅन्सल होँ सकता हैं.मैने उन्हें कहा कि मे थोडा घऱ होके आँ जाता हूं एक् बार चक्कर भि लगा लूँगा पहले तौ ताहिरा मौसी नें मना कियाफिन वोँ राज़ी होँ गयीँ,
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