Incest माँ को पाने की हसरत - चुदाई – New Episode
चंपा : अब कां करे? हमको नां बड़े जल्द हि नज़रलग जाती हैं.इसलिये हमारी एक् काकी नें हमकोयह पहना दिया (चंपा नें अपने ताबीज़ पे उंगली रखतेहुए कहा)
आदम : ह्मअब इतनी हसीन सुंदर हौ तोँ नज़र तौ लगनी हि हैं
चंपा : हम् तोँ सबको हसीन सुंदर हि लगते हैं
आदम नें चंपा केँ नाभि कों फिन पिंच किया जिससे चंपा केँ स्वर मे आहह-आहह फुट पड़ी औऱ उसने अपने निचले होंठ कों कस केँ दाँतों सें भींच लिया."इस्शह".चंपा नें सिसकते हुए कहा.आदम नें चेहरे कों नीचे लें जातेहुए आख़िर पेट पे अपने चुंबन कि मोहरमार दि.चंपा कां पेट काँपरहा थां.आदम नें मुस्कुराते हुए नाभि मे जीबडाल दि औऱ कुरेदने लगा.चंपा केँ हाथआदम कि पीठ पे अपने नाख़ून गढ़ारहे थें.
आदम कां लन्ड पॅंट औऱ चड्डी मे कसा फहुंकार माररहा थां.जैसे आज़ाद होना चाहारहा हैं.लन्ड कां सिग्नल दिमाग़ कों मिला.औऱ आदम कों महसूस होते हि उसने अपनी बाहों मे चंपा कों नीचे सें उठा लिया.आदम खड़ा थां औऱ अब उसकीगोद मे चंपा कां पूरा जिस्म थां.
उसने हल्के सें चंपा कों लिटाया औऱ उसके ब्लाउस उतार फैका.फिन उसकी सफेद ब्रा भि.चंपा नें हल्के सें अपनेबाल कों झटकते हुएउसे खोल दिया.चंपा लेटे लेटेआदम कों अपनी शर्ट औऱ बनियान उतारते देखरही थि.जीन्स कि ज़िप पे हाथ पहुचते हि चंपा नें अपने होंठो पे ज़ुबान फैरनी शुरुआत कर दि.जैसे लन्ड कों देखने केँ लिए कितनी उत्साहित हौ.
आदम नें अपनी जीन्स औऱ कछि कों भि एक् झटके मे टाँगों सें अलगकर दिया.औऱ जब चंपा केँ चेहरे केँ लगभग आया.तोँ चंपा कों सॉफ दिखा उसका झूलता सांवला लन्ड एकदम कड़क औऱ गर्म होके खड़ाहुआ थां.चंपा नें उसे हाथो मे लेके मसलना शुरुआत कर दिया.मुत्ठियाते हुए वोँ आदम कि आँखो मे झाँकने लगी
आदम नें तब तक चंपा केँ पेटिकोट कों नाडाखोल दिया औऱ उसे एक् हाथ सें हि उतारने कां प्रयास किया.पर्र चंपा नें बाएहाथ मे हि लिंग कों मुठियाते हुए उठकर अपनी पेटिकोट औऱ पैंटी कों एक् झटके मे अपनी टाँगों तक सरका दिया.बाकी कां कामआदम नें स्वयं कर दिया.अब बैड केँ नीचे चंपा केँ सारे कपड़े पड़ेहुए थें औऱ पलंग केँ उपर चंपा मदरजात नंगीआदम सें चिपकी लेटी हुईँ थि
अबआदम नें चिकनी जांघों उपरहाथ फेरते हुए टाँगों केँ बीचहाथ लाया तौ उसेआधी उंगली बराबर चंपा कि झान्टे दिखी.उसके रोयेदार झान्टो पे हाथ फेरते हुए उसने बुर कों खोजा औऱ फिन दोनो हाथो सें बुर कों फैलाया छेद केँ चारोतरफ कां गुलाबी माँस दिखने लगा थां
बुर पूरी गुलाबी गीली औऱ हल्के हल्के उगती झान्टो सें धकि हुईँ थि.आदम कभी भि बुर पे मुँह नहीं लगाता थां खासकरके चंपा कि.क्यूंकी चंपा कयिओ सें चुदवाति होगी.तोँ इसवजह सें आदम कों बीमारी कां डर लगता थां.आदम नें वैसे हि बुर कि मुंहाने मे हाथ फेरते हुए उंगली करनी शुरुआत कर दि.चंपा टाँगों कों इधरउधर पटाकने लगी उसकी दोनोपाओ मे बँधी पायल पांव पटाकने सें छान्न छान्न कि मधुर आवाज़ निकाल रही थि
आदम उंगली करतारहा औऱ अपना लन्ड करीब चंपा केँ मुँह केँ लगभगरखा हुआ थां.जिसे चंपा मुत्ठियाते हुएइस बार मुँह मे लेके चूसने लगी.उसे तौ कोई झिझक नहीं थि.चुदाई केँ दौरान वोँ एकदमखुल जाती थि.हालाँकि इसबार भि उसेलगा कि शायदआदम उसकेवहा मुँह दे.पऱआदम नें वैसा नहीं किया.आदम बस उंगली करता रहा.चंपा केँ पाँव काँपने लगे औऱ आदम नें उंगली तेज़कर दि
चंपा : ओह आहह-आहह आहह-आहह हौ स्स्स्सिईईईईईईई आहह-आहह (चंपा केँ ज्यादा हिलने सें आदम उंगली भीतर तक घुसाने पे मज़बूर हौ जाता क्यूंकी बारबार उंगली बुर सें बाहर् निकल जाती)
अंगूठा बुर मे प्रवेश करते हि उंगली केँ संग.चंपा कां शरीर शिथिल पड़ गय़ा औऱ एक् ज़ोर कि कपकपाहट केँ संग चंपाचीख उठी उसकी बुर सें रस बहनेलगा थां.आदम नें चेहरा थोडा बुर केँ लगभग लाया औऱ उसे सूँघा बुर सें अज़ीब सि महेक आँ रही थि.इससे उसका लन्ड औऱ भि कड़क होँ गय़ा.औऱ चंपा केँ गर्म मुँह मे अपना प्रीकम छोड़ने लगा.
चंपाउसे चटकर गयीँ, औऱ उसने लन्ड कों मुँह सें बाहर् खींचा."आओ राजाअब कराती हूं जन्नत कि सैर तुम्हें".चंपा एकदम सें उठ बैठी औऱ तब तक आदम कों धकेलते हुए उसनेउसे लेटा दिया.अब आदमलेट चुका थां.चंपा नें लिंग कों तभी मुत्ठियाते हुए अपनी दोनो चुचियो पे सुपाडे कों रगड़ने लगी.आदम मोन करनेलगा.
आँखे मुन्दे हि रहाफिन चंपा नें चुदाई कि शुरुआत कि.औऱ औऱ उसने अपनी दोनो टाँगें आदम कि कमर केँ दोनोतरफ इर्द गिर्द फैला लिए.फिन टट्टी करने कि मुद्रा मे वोँ लन्ड कों पकड़के उसे अपनी बुर पे टीकाने लगी.धीरे-धीरे धीरे-धीरे लिंग किसी जलती भट्टी मे घुसने लगा औऱ चंपा नें पूरा लन्ड अपने अंदरसमा लिया.छेद थोडा कसा हुया थां शायद गान्ड कों टाइटकर रखा थां चंपा नें.
"हाएरे चंपा सस्स निकल जाएगा अब तोँ बसअब शुरुआत कर".आदम नें लेटे लेटे हि जवाब दिया
"अभि कहां सरकार अभि तौ राउंड शुरुआत हुआ हैं.जन्नत मे प्रवेश हुआ हैं कम सें कमहमे तोँ सुख लेने दीजिए बुर मे लिंग घुसाके उसी लम्हा पानी छोड़ देना चुदाई नहीं असंतुष्टि कहलाती हैं".आदम उसकी बातों सें औऱ भि अधिक तराकी होँ रहा थां
चंपाअब धीरे-धीरे धीरे-धीरे लिंग कों अंदर बाहर् लेँ रही थि.अब धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसकीगति बढ़ने लगी औऱ वोँ करीब-करीब आदम कि जांघों केँ उपर जैसेकूद रही थि.लिंग सतसट अंदर बाहर् हौ रहा थां.बुर बुरी तरीके सें गीली हौ चुकी थि आदम कों चंपा कि बुर कां गर्मरस छूटता महसूस होँ रहा थां.पर्र चंपारुक नहींरही थि उसकी आँखे एकदमलाल थि.औऱ वोँ अपनेलाल लाल होंठो कों काटरही थि
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"आअहह चंपाआ औऱ ज़ोरर सें आहह-आहह औऱ ज़ोरर्र सें ससस्स"."जी सरकार बस लेने तोँ दीजिए मजा आहह-आहह".अबकी बार चंपा लिंग कों बुर मे दबाते हुए अंडकोषो पे अपनी गान्ड बैठी बैठी हि रगड़ने लगीइस मुद्रा कों अगर आप् लोगदेख लेते तौ शपथ सें पानी छोड़ देते.
आदम अपनेमन मे बुदबुदा रहा थां "कंट्रोल कंट्रोल बेटा कॉंटरोल्ल सस्स".आदम कों सिसकता मज़े लेता आँखे मूंदता देखके चंपा फिरसे लन्ड पे कूदने लगी.
"आहह-आहह हाहह आहह-आहह आअहह".चंपा ज़ोर ज़ोर सें चीखरही थि.आदम नें क़ास्सके उसके मुँह पे हाथरख दिया.बेज़्ज़ती सां महसूस नाँ हौ इसलिये
चंपा हँसने लगी औऱ वोँ आदम केँ गलेलग गयीँ,.उसके बालआदम केँ चेहरे पे थें जिन्हें समेटते हुएआदम नें उसकेकान औऱ गाल कों चूमा.चंपा फिन बुर मे लिंगलिए आदम केँ उपर लेटे लेटे दुबारा उसके अंडकोषो पे अपनी गान्ड घिसने लगी.आदम नें कसकर उसकीपीठ कों थाम लिया औऱ नाख़ून गढ़ाने लगा.अब चंपा भि आदम कि गर्दन औऱ चेहरे पे चुम्मा करनेलगी.
"आअहह ओह्ह्ह्ह मयी बाबयययी ससस्स एम्म्म".आदम केँ चेहरे कों पकड़के उसने उसके होंठो कों मुँह मे लेँ लिया.चंपा ज़ोर ज़ोर सें आदम कों किस करने लगी.दोनो होंठो कों चूस्ते हुए अपनीजीब वोँ आदम केँ मुँह मे देरही थि.
बैड प्राचीन थां इसलिये दोनो केँ ज्यादा हिलने सें आवाज़ कररहा थां.चंपा नें देखा कि आदम बड़बड़ा रहा हैं.चंपा नें हालात कों देखते हुए लन्ड कों खींचते हुएउसे बाहर् निकाल लिया औऱ आदम केँ उपर सें उठ बैठी.फिन उसने लन्ड कों ज़ोर ज़ोर सें मुठियाना शुरुआत कर दिया."आहह-आहह हाहह आहह-आहह आहह-आहह आहह-आहह"."हां बाबू हान्न्न आहह-आहह हां बाबू".लन्ड कों ज़ोर सें मसल्ते हुए चंपाआदम कों उत्साहित कररही थि जोँ लेटे लेटे सिसकिया भररहा थां
आदम : आहह-आहह हौ माआ आहह-आहह (चंपा कों कुछ अज़ीब लगा मां नाम सुनके उसेलगा शायदआदम केँ लिंग मे ज़ोरो सें दर्द हौ रहा होगा.पऱ खुशी केँ इसचरम अहसास पे मां मम्मी बारबार कहना जैसे चंपा कि हथेली मे नहीं बल्कि मां केँ हाथ मे वोँ मुठिया रहा होँ.जिस महिला नें मजा मिलता हैं उसी कां नाम ज़ुबान पे आता हैं जिस महिला कों याद करतेहुए मर्द झड़ता हैं.ज़बान पे बसउसी कां नामआता हैं)
चंपा नें फिन तीव्र गति सें आदम कों औऱ उत्साहित किया.पऱ आदम नें उसकाहाथ पकड़ लिया.चंपा समझ नाँ पाई."रोक क्यूं दिया बाबू तुम्हारा निकल जाता".आदम नें मुट्ठी मे लिंग कों अपनेकस केँ थामा औऱ चंपा केँ हाथ कों हटा दिया.कुछ देर मे उसने अपनेउपर नियनतरण पा लिया थां
आदम : तेरी गान्ड भि मारूँगा
चंपा : सस्सह ओह्ह्ह होँ तभी बुर मारके चंपा कां दिल नहीं भरता वैसे आप् भि हमारे बाकी चाहनेवालो कि तरह शौकीन होँ गये हैं
आदम : मज़ेदे तौ पूरादे औऱ मे तोँ तेरा साथी हूं सो प्ल्ज़्ज़
चंपा : गर्लफ्रेंड नहीं हूं जौ रिक्वेस्ट कररहे होँ रंडी हूं औऱ आज कि साम तुम्हारी रंडी जैसे बोलॉगे वैसे चुदवाउन्गि किस पोस्चर मे चोदोगे घोड़ी बनके याँ कुतिया
आदम : जैसा तूँ बन
चंपा : ह्म घोड़ी बनू चाहे कुतिया चोदोगे तोँ गान्ड हि नाँ.तोँ ठीक हैं हमारी बात मानना चाहते होँ तोँ कुतिया हि कि मुद्रा मे हमे चोदो वोँ क्याँ हैं नाँ? घोड़ी याँ गाय बनने मे खड़ा होके झुकना पड़ता हैं औऱ टाँगें दुख जाती हैं मोड़ने सें दर्द हौ गय़ा हैं.
आदम : तोँ ठीक हैं चल कुतिया बन
चंपा नें थूक अपनेहाथ मे लिया औऱ उसे अपनी गान्ड मे मलने लगी.आदम नें चंपा केँ कुतिया बनते हि उसकी दोनो टाँगसही सें मोडी औऱ उसकी हथेलियो कों भि सही सें सीधाकर दिया.अब चंपा कुतिया बन चुकी थि
चंपा कि गोरी गोरी नितंबो पे थप्पड़ मारते हुए उसकीगोल गान्ड कों कस कस्के दबोचने लगा मे.फिन उसकेर गान्ड कि फांकों मे छेद पे अंगुल करना शुरुआत कियाछेद सिकुड़के बंदकर लेती तौ कभीखोल लेती.पास मे नारियल तेल पड़ा थां उसकीकुछ बूँदें आदम नें छेद केँ मुंहाने पे डाल दिया औऱ छेद कों औऱ गान्ड कों चिकना कर दिया.चंपा कां छेद कुलबुलाने लगा
आदम जैसे चंपा केँ उपर खड़ा थां फिन उसने धीरे-धीरे धीरे-धीरे लन्ड कों पकड़े हि छेद मे रगड़ना शुरुआत कर दिया.घपप सें लन्ड छेद केँ भीतर डालने कि नाकाम कोशिश करने लगा."ससस्स आहह-आहह आहह-आहह दर्द होँ रहा हैं ओह्ह्ह्ह".एक् बार चंपा चीखी पर्र उसने दर्द बर्दाश्त कर लिया
चंपा : बाप रे बहोत मोटा हैं आपका दर्द होँ रहा हैं
आदम : मतलब इतने दिनो सें सिर्फ़ मेरा हि लन्ड गान्ड मे लेतीरही तूँ
चंपा : औरो कों घिनआती हैं तौ कोईकर नहीं पाता औऱ आपका तोँ हद सें अधिक बड़ा हैं अच्छा हैं कि पहले सें अंगुली औऱ लन्ड लिए नाँ दोनो छेदो मे वरना आप् तौ डाल डालके मुरब्बा बना देते
आदम : तब तौ तेरीफटी बुर औऱ गान्ड कोई नहीं पेलता
चंपा : अब बातें बंद औऱ डालो
शुक्रिया मित्रो
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आदम रुका पड़ा थां फिन उसनेझट सें लन्ड कों छेद केँ अंदर तक एक् साँस मे पूरी ताक़त केँ संग घुसा दिया.चंपा कां पूरा शरीर काँप गय़ा.उसने दर्दपी लिया नां जाने कितनी बारखाट पे उसेपटक पटक केँ रफ चुदाई कि थि मर्दो नें इसलिये उसेनये दर्द केँ अहसास कों भि सहने कां दम थां
आदम धीरे-धीरे धीरे-धीरे लिंग अंदर बाहर् करने लगा.पऱ छेद इतना सिकुडा हुआ थां कि बारबार चंपा कों गान्ड ढीली छोड़ने कों कहनी पड़ी थि.फिन आदम नें धक्के तेज़किए औऱ अबआदम ताबड़तोड़ धक्के लगाने लगा पिछले माहजब वोँ यहाआया थां तोँ उसने चंपा कि गान्ड आधी हि मारी थि क्यूंकी चंपा कां कोई जानने वाला क्लाइंट आँ गय़ा थां जिसे चंपा नां नां करसकी औऱ बीच मे हि आदम कों उसकी चुदाई रोकनी पड़ी थि
आजआदम नें वोँ सारीकसर आज निकाल दि औऱ चंपा कि गान्ड कों चोदने लगा.फ़च फ़च्छ करतेहुए गान्ड मे लन्ड फिसलने सें आवाज़ें निकलरही थि.बीच बीच मे आदम गान्ड सें लन्ड बाहर् खींच लेता औऱ छेद कों सिकुडत खुलता देखफिन लन्ड घप्प सें अंदर घुसा देता.चंपा हर रगड़ सें मस्तिया रही थि.कुछ हि समय मे उसे महसूस हुआ कि आदमरुक नहीं रहा.उसे पेशाब भि उससमय लगनेलगी पर्र उसनेआदम कों उसकी चुदाई करने दि
आदम नें काफ़ी देर चुदाई केँ बाद लिंग बाहर् खींचा औऱ चंपा कों सीधा किया लन्ड कों टीसू पेपर सें सॉफ किया औऱ चंपा केँ मुँह मे डाल दिया."चुउस्स्स चंपा औऱ प्रेम सें अहांन".चंपा बड़ी बड़ी निगाहो सें आदम कों देखते हुए लन्ड कों हलक तक लिएचूस रही थि.कुछ हि देर मे आदम नें मुठियाते हुए चंपा कां मुँह खुलारखा औऱ अपना गर्म गाढ़ा सफेद वीर्य उसके चेहरे औऱ मुँह मे छोड़ने लगा.चंपा नें नें आखरी बूँद कों भि लन्ड सें चाट केँ सॉफकर लिया.औऱ अपने होंठो कों हाथो सें पोछती हुईँ आदम कि तरफ देखने लगी
दोनो हान्फ्ते हुएबैड पे ढेर होँ गये."उफ़फ्फ़ बड़ी गर्मी हैं दोस्त".आदम आँखे मुन्दे अपना पसीना पोंछते हुए चंपा कों देखरहा थां जिसका पूरा चेहरा लाल थां.वोँ नाक सिकुड़ते हुए बाथरूम मे चली गई,.एक् रूम थां इसलिये बाथरूम अटॅच थां.अंदर चंपामूत रही थि जिसकी आवाज़ आदम केँ कानो तक आँ रही थि.आदम अपने लिंग कों टिश्यू पेपर सें सॉफ करनेलगा.
अब उसके दिलो दिमाग़ सें थरकउठ चुका थां."ह्म देखा बाबूयह होता हैं मजा".चंपा आदम केँ बगल मे आकेलेट गयीँ, औऱ अपने औऱ आदम केँ उपर चादरढक दिया.
."ह्म सो तौ हैं".आदम नें चंपा कि चुचियो कों हाथो मे लेकेमसल दिया.
चंपा : लगता हैं कुछ करनाभूल गये?
आदम : चुचियाँ चुस्स नहीं पाया हाहहा
चंपा : तौ लो अभि लोयहकिस मर्ज़ कि दवा हैं
चंपा नें आगे बढ़के अपने दोनो मम्मों आदम केँ चेहरे पे करीब-करीब दबा दिए.आदम दोनो चुचियो कों बारी बारी सें चूसने लगा एक् कां निपल चुस्के फिन दूसरे कां निपल मुँह मे भर लेता.दोनो चुचियो कों हाथो सें मसल्ते हुए चूसने केँ बादआदम नें चंपा कों अपनेअलग कर दिया
चंपा : आजकलदेख रही हूं थरक कि आग बहोत जल्द लगती हैं औऱ बुझती हैं आज मुठियाते वक्त आपने अपनी मम्मी कां नाम लिया?
आदम : उहह हान्ं वोँ ग़लती सें
चंपा : जिसके संगबैड गर्म करने मे मजाआए उसकानाम तौ ज़ुबान पे आँ हि जाता हैं चाहे वोँ बेहन हौ याँ मां
आदम नें कस्स्के चंपा कां गला दबोच लिया "साली दोस्ती कां फ़ायदा उठाती हैं क्याँ बकरही हैं तूँ".आदम कां स्वर बदला वोँ बुरीतरह शर्मिंदा होँ गय़ा थां
चंपा : अर्रे आप् तोँ नाराज़ होँ गये ? (चंपा नें आदम केँ सख़्त हाथो कों नर्मी सें छुड़ाते हुए खींचा)
आदम नें गला छोड़ा."आइ आम सॉरी पर्र ऐसीबात क्यूं करती हैं?".आदम नें झिझकते हुएकहा
चंपा : होँ सकता हैं मेरी सुनने कि भूल पर्र मे जानती हूं आप् कही नां कही अपनी मां सें बहोत प्रेम करते हैं
आदम : यह तोँ हैं पर्र इससेइन सभी कां क्याँ ताल्लुक ?
चंपा : नाम तोँ मेरा भि लेँ सकते थें क्यूंकी सबसे अधिकमजा मे हि आपको देती हूं औऱ यक़ीनन शायद मे इकलौती स्त्री हूं जोँ आपकी ज़िंदगी मे हैं जिससे सहवात पूरी करने आप् यहाआते होँ क्यूंकी नाँ आपको मुझे पटाना पड़ता हैं नाँ विवाह ब्याह कां वादा करना जोँ औऱ लड़कियो केँ लिए लड़के करके उनकीतब लेते हैं कोई विवाह सें पहले तोँ कोई विवाह केँ बाद
आदम : तुँ सचकहरही हैं नाँ जाने क्यूं? पऱ यह ग़लत हैं दोस्त वोँ मम्मी हैं छीयहसभी
चंपा : हम् समझते हैं पऱ यह जिन्सी आदतें थोड़ी एक् बार ज़ुबान पे जिसकी लज़्ज़त लगजाए तोँ बसउसी केँ नाम कि मुठियाते हैं ज़रूरी नहीं कि लोग हीरोइनो कि नाम कि याँ किसी जानने वाली कि जोँ उन्हें अज़ीज़ लगेमूठ मारे.नाम औऱ नाताकोई सां भि हौ सकता हैं
आदम : मगर चंपादेख मे अपनी मम्मी कों ऐसी नज़रों सें नहीं देखता औऱ उनकोअगर मालूम पड़ा कि मे यहाआता हूं तौ हमारा मां बेटे कां नाता भि नाँ बचेगा
चंपा : ह्म (सिगरेट जलके चंपा नें दोकशलिए औऱ एक् कशआदम कों लगाने दिया)
आदम : स्मोकिंग किल्स
चंपा : शाना साला(आदम हँसने लगा चंपा कि बात कों सुन चंपा उसकेसंग नंगी चादर उसके औऱ अपनी छातियो तक रखके सिगरेट कां कश लेतेहुए धुआ छोड़रही थि)
अचानक आदम कों खाँसी उठ गयीँ, चंपा कों लगा शायदधुआ बर्दाश्त नहींहुआ होगा पर्र अचानक आदम कलेजा पकड़ केँ बैठ गय़ा वोँ ज़ोरो कि आहह-आहह भरनेलगा
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super hot updates dear
Nice update................ keep writing ...............
Keep writing dear, Excited for NEXT Update . . . .
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