झिलमिल ओढ़नी – New Episode
4th पन्ना
"भइया, औऱ कितना waqt रहोगे यहा, शहर हाथ सें जारहा हैं, मुबीर नें इलाका बढ़ा लिया तोँ गए हम् काम सें " आतिफ़ सें मिलने आये उसके छोटे भइया आदिल नें कहा।
"परेशान क्यूं हौ रहा हैं छोटे। आतिफ़जब तक जिन्दा हैं, जोधपुर उसकी मुट्ठी मे रहेगा। जब मे नां रहा, तौ तूँ होगा। वैसे भि, कुछ waqt तक यहा रहना जरूरी हैं। बाहर् खतरा हैं। माहौल ठंडा होनेदे। सबकी मां चोद दूंगा। " कांस्टेबल कोठरी केँ अंदरआता हैं औऱ दो ठन्डे कि बोतल रखकेचला जाता हैं। वैसे आतिफ़ कि कोठरी कों कोठरी कहनागलत होगा। एक् छोटाबेड, जिसपर एक् मखमली गद्दा, पानी पिने केँ लिए एक् छोटा फ्रिज, जिसमे बियरभरी रहती हैं। दिन मे 5 गरमचाय वोँ भि मसाले वाली औऱ एक् मसाज करने वाला आदमी। सरकार मे हरतरफ पेंठ हैं आतिफ़ कि। बचपन मे कबाड़ इकट्ठा करने सें काम शुरुआत किया, फिन गांजा बेचा औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे अमल कां बड़ा कारोबार खड़ाकर दिया। पुरे भारत मे जाने वालीअमल कां 20% हिस्सा आतिफ़ केँ हाथो सें गुजरता हैं। करोड़ो कां बिज़नेस हैं। सेंकड़ो व्यक्ति जौ आतिफ़ केँ टुकड़ो पऱ पलते हैं, एक् इशारे कि इंतज़ार मे रहते हैं।
टाइम केँ संग आतिफ़ कां छोटा भइया आदिल भि इसदौड़ मे शामिल होँ गय़ा। दोनों भाइयो नें मिलकर जोधपुर कों अपना किलाबना लिया औऱ अबयही सें सारा व्यापार नियोजित होता हैं।
"पर्र भइया, वोँ मुबीर." आदिल बोला तौ आतिफ़ नें बीच मे हि रोक दिया।
"उस भड़वे कि औकात जल्द हि पतालग जाएगी। अगरउसे लगता हैं कि आतिफ़जेल चला गय़ा तोँ सभी उसका हौ गय़ा, तोँ उसेइस वहम मे रहनेदे। मौका मिलते हि उसे जहन्नुम कि सेर करवा देंगे। "
मुबीर दूसरा नाम थां जोधपुर केँ गुंडाराज मे। आतिफ़ औऱ मुबीर कभीयार हुआ करते थें। आतिफ़ कों कामयाब होतादेख मुबीर भि इसदौड़ मे शामिल होँ गय़ा। पर्र जँहा आतिफ़ ईमान कां पक्का थां, मुबीर पीठ पीछे छुरा घोंपने कां शौकीन थां। उसे ईमान सें मतलब नां होकर व्यकिगत फायदे भुनाने मे ज़्यादा मज़ाआता थां। धंधे केँ शुरूआती दिनों मे 40 किलोअमल ग़बन करने केँ बाद मुबीर गायब होँ गय़ा। उस वक़्त आतिफ़ कां इतनाबड़ा नाम नहि थां तौ वोँ कुछ नहि कर पाया। उस 40 किलो कि बदौलत मुबीर नें भि अपना साम्राज्य खड़ाकर लिया। देर सवैरइन दोनों गुटों मे गोलिबारी होती रहती हैं। मुबीर कां बाप जोँ मुबीर केँ संगइस धंधे मे थां, कों आतिफ़ नें मार दिया। जिसका कारण भि मुबीर कि धोखेबाजी थि। रोजाना होने वाली भिड़ंत सें दोनों गुटों कों तकलीफ़ कां सामना करनापड़ रहा थां जिसके चलते जोधपुर MLA भरत सिंह भाटी नें आतिफ़ औऱ मुबीर कि मुलाक़ात करवाने कां फैसला किया पर्र मुबीर केँ शैतानी दिमाग़ मे जिस विचार नें जन्म लिया उसने जोधपुर कां भविष्य हमेसा केँ लिएबदल दिया। दोनों बाप बेटे नें चाल बनाई कि इसी meeting मे आतिफ़ कां काम तमामकर दिया जाये। पऱ एन वक़्त पे ऐसी उलटफेर हुई कि मुबीर केँ बाप कों आतिफ़ नें गोलियों सें छल्ली कर दिया औऱ दोनों भइयाभाग निकले वहा सें। मामला बहोत गर्म थां औऱ 3 दिन तक मुबीर अपने बाप केँ बदले कि आग मे सुलगता रहा। MLA भरत सिंह आतिफ़ कां खास थां क्युकी आतिफ़ चुनाव मे उसकी सहायता करता थां तोँ उसने आतिफ़ कों यह सलाह दि कि वो मामला ठंडा होने तक जेल मे चला जाये।
"तूँ एक् कामकर, ओमान जाने वाले आसाइनमेंट कि सिक्योरिटी बढ़ादे। रूटबदल दे। बड़ा असाइनमेंट हैं छोटे, अगर कुछ हौ गय़ा तौ लेने केँ देनेपड़ जायेगे। " सिगरेट सुलगाते हुए आतिफ़ नें कहा।
"आप् बेफिक्र रहें भइया, मे स्वयं जारहा हूं ओमान, देख लेंगे कोई क्याँ उखाड़ता हैं साला" आदिल नें बोला तोँ आतिफ़ नें उसके कंधे पर्र हाथ रखकर उसकेसर कों अपनेसर सें जोड़ लिया
"तूँ हि मेरा सबसेबड़ा खजाना हैं छोटे, अगर तुम्हे कुछ हौ गय़ा तोँ इस दुनिया कों आगलगा दूंगा"
बाहर् केदीयों मे चर्चा चलपड़ी थि कि आतिफ़ कां भइयाआया हैं औऱ जरूरकुछ खिचड़ी पकरही हैं। भानु औऱ बलदेव पार्क मे बैठे बातेकर रहे हैं।
"क्याँ लगता हैं भइया? फिरसे कोई लफड़ा होगा क्याँ?" बलदेव बोला।
"आतिफ़ भइया लफड़ा करने कि हालत मे नहि हैं अभि, पर्र क्याँ पता, यहा एक् समय मे कुछ भि हौ सकता हैं" भानु नें अहह भारी औऱ बीतेकल कि तस्वीर उसके चितवन मे घेरा करकेचली गई,।
"क्याँ सोचरहा हैं साले। कोई जिए याँ मरे हमें क्याँ?"
"सहीकह रहा हैं भइया, बस डर लगता हैं अबइस लफड़ेबाजी सें। मुझेपता हैं अपनाकोई मैटर नहि हैं फिन भि लगता हैं जैसेकही दोबारा इसगरत मे फस नाँ जाऊ " भानुसच मे डररहा थां, चुंकि इसबार कि जीवन उससे बर्दास्त नहि होगीयह सोच सोचकर वोँ परेशान होँ रहा थां।
"वैसे तुझपर आतिफ़ कां हाथरहा हैं यहा, वरना जीना मुश्किल हौ जाता" बलदेव नें आतिफ़ केँ पांव टूटने वाली घटना कां जिक्र किया।
"मेने उन्हें बोला थां कि मुझे उनकी सहायता नहि चाहिए पऱ ठीक हि हैं, कम सें कमयह वक़्त बिनाकोई लफड़े केँ निकल गय़ा "
"सभी पैसे कां खेल हैं भइया। उसकेपास पैसे हैं तभी नां वोँ इतना ताकतवर हैं वरना बाजुओं कि ताकत केँ मामले मे वोँ तेरे सामने कुछ भि नहि, जिस चक्की कां पलड़ा आतिफ़ केँ पांव पर्र गिरा थां, उसमे कितना वजन होता हैं मालूम हैं? तूनेउस पलड़े कों किसी छोटे बच्चे कि तरह उछाल केँ फेंक दिया थां। तभी नां आतिफ़ तेरेसंग इतना अच्छा बर्ताव करता हैं" बलदेव नें भानु कि तारीफ करतेहुए कहा औऱ यहसच भि थां कि भानु मे बहोत अधिक ताकत थि। 6 फ़ीट 3 इंच कां हाइट औऱ सांड जितना वजन, फिर भी वोँ दिखने मे मोटा नहि लगता थां, हाइट कि वजह सें उसका ज़्यादा वजन उसपर जचता हि हैं।
"बसबस भइया इतनी तारीफ बहोत हैं, अब मे चला अपनी कसरत करने"
"जा जा साले, मे बाते सुनकर आता हूं फिन तेरी बताता हूं"
जेल केँ अंदरबने जेलर केँ दफ़्तर मे, आदिल सोफे पर्र बैठा थां औऱ सामने जेलर साहेब, कमरे कां माहौल गंभीर थां औऱ एक् शांति बिखरी हुइ थि।
"आपका बहोत बहोत धन्यवाद जेलर साहेब, मेरे भइया कों इतने अच्छे सें रखने केँ लिए, आपका हिस्सा आपकेघऱ पहुंच जायेगा"
"हम् तौ सरकारी नौकर हैं आदिलजी, जौ आदेशआता हैं मानना हि पड़ता हैं, पऱ ध्यान रखियेगा, यहसभी कागजो मे नहि हैं। एक् बात औऱ, इसबार थोड़ी कड़कीचल रही हैं, पत्नि हीरो कां हार मांगरही हैं, बड़ी कृपा होंगी अगर थोड़ा ज़्यादा मिल जाता तौ" जेलर केँ चेहरे पर्र कमीनी मुस्कान थि। उसेपता थां आदिल अपने भइया केँ लिएकुछ भि करेगा।
"जरूर जरूर, जेलर साहेब, पर्र ध्यान रखियेगा, अगरजेल मे मेरे भइया कों खरोंच भि आई तौ फिन वोँ हीरो कां हार फांसी बन जायेगा, उम्मीद हैं आप् समझरहे होंगे"
पेसो केँ इसखेल कों जेल कि चारदिवारी देखरही थि। ताकतवर कों आराम थां औऱ कमजोर जूझरहा थां। जिस घेरे केँ किनारो पर्र इन जैसे कमीनो कि भीड़ थि उसमे भानु जैसे कि क्याँ स्थान बनती हैं यह वक़्त हि बताएगा, फिलहाल उसने अपनी रफ़्तार बनारखी हैं। जोधपुर मे साम नें पहराडाल दिया हैं औऱ पंछीघऱ कों जारहे हैं। नयी सुभह केँ इंतज़ार मे सलाम.
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5th पन्ना
"जब तक वोँ जेल मे हैं, हम् कुछ नहि कर सकते भइया। सुना हैं जेल सें हि चुनाव लड़ने वाला हैं साला आतिफ़। अगर जीत गय़ा तोँ हौसला औऱ बुलंद होँ जायेगा उसका। " मुबीर केँ अड्डे पऱ मिलने आये सेखु नें कहा, जोँ कि मुबीर कां बांया हाथ हैं। मुबीर केँ उस कों काम कों जिसमे दिमाग़ कि जरूरत पड़े, सेखु हि अंजाम देता हैं।
मुबीर नें सिगरेट जलाई औऱ धुंआहवा मे छोड़ा, लग रहा थां जैसे वोँ किसी गहरी चिंता मे हैं। हौ भि क्यूं नाँ, जीवनभर जिस मुबीर नें आतिफ़ कि नाक मे दम करकेरखा, आज उसीके पसीने छूटरहे हैं।
"आतिफ़ कों बाद मे देखेंगे, तुँ पहले रुपया इकट्ठा कर जितना हौ सके। कितना माल हैं अपनेपास?" किसी गहरीचाल कों बुनते हुए मुबीर बोला।
"नहि भइया, बहोत रिस्की हैं। सरकार आतिफ़ कि जेब मे हैं। अगर हमनेजरा सां माल भि इधरउधर किया तौ लोड़ेलग जाएंगे"
मुबीर गुस्से सें खोलउठा औऱ अपनेपास पड़ेमेज कों लात मेरी जिससे सेखुडर गय़ा
"ए साला इसकी मां कां। आतिफ आतिफ आतिफ। नहि छोड़ूगा उसे। " मुबीर गरजउठा। सेखु मुबीर कों शांत करता हैं औऱ उसे वापिस कुर्सी पऱ बैठाता हैं, पासखड़े उसके व्यक्ति डर केँ मारे कंपने लगते हैं।
"आप् बैठो भइया। इस वक़्त हमें दिमाग़ ठंडा रखना होगा। पहले भि गरमजोशी मे हमारा बहोत नुकसान हुआ हैं। "
"तोँ क्याँ अबऐसे हि हाथ पे हाथ धरकेबैठ जाऊ?"
"नहि भइया, अब बारी हैं प्यादे आगे बढ़ाने कि" सेखु केँ चेहरे पर्र शैतानी मुस्कुराहट थि।
"साफसाफ बोल साले"
"भइया, अब मंडोर कां एरिया खाली हैं। आतिफ़ केँ जेल जाने सें मंडोर केँ सेठखुश हैं। हम् उनको सिक्योरिटी देंगे ओर अपनेनये ठिकाने बनाएंगे।
चित्तोड़ कां अमल चमत्कार करेगा भइया। ठेको कि जिम्मेदारी मेरी। खेतो सें माल सीधा राजस्थान पार करके गुजरात औऱ पंजाब जायेगा भइया। "
"यह प्लान तूँ दूसरी बारबता रहा हैं, कितने व्यक्ति चाहिए तुम को?"
"50 भइया, मे कल हि निकलता हूं चित्तोड़ कों, इससे पहले वोँ आदिल पहुंचे, मे वहा केँ MLA कों खरीद लूंगा"
"जौ करना हैं कर, मुझे मंडोर दिला" मुबीर केँ चेहरे पऱ चैनदिख रहा थां। मंडोर जोधपुर कां हि हिस्सा हैं पऱ जिसने मंडोर पऱ कब्ज़ा जमा लिया, राजस्थान उसका हौ जायेगा।
भरत सिंह केँ कहने पर्र आदिल नें अपने ठिकानो कों बंदकर दिया थां मंडोर मे। जागीरदारों औऱ सेठों कों परेशान करके आतिफ़ उनसे पैसे एंठा करता थां। जिसमे भानु कां बाप भि शामिल थां। जोधपुर कि राजनीति इतनी उलझी हुई थि कि उनका आतिफ़ सें निजात पाना नामुमकिन लगरहा थां। MLA भरत सिंह कों मुँह मांगी कीमत देकर उन्होंने हि इस meeting मे आतिफ़ कों भेजनें कां प्लान बनाया थां। उन्हें पता थां कि इसमें आतिफ़ याँ मुबीर मे सें किसी एक् याँ दोनों केँ मरने केँ हालात बन हि जाएंगे। पऱ दोनों हि बचगए औऱ मुबीर कां बाप मारा गय़ा। अबसब कों डर थां कि आतिफ़ कों अगरइस षड़यंत्र कां पताचल गय़ा तौ वो उन्हें नहि छोड़ेगा। यहबात मुबीर जानता थां औऱ इसीलिए वो इन सेठों कों सिक्योरिटी देने कि बातकर रहा हैं।
"चित्तोड़ सें आने केँ बाद एक् meeting बुला, जोधपुर कां हरबड़ा सेठ औऱ जागीरदार चाहिए मुझे उसमे" मुबीर नें सेखु कों समझाया।
"होँ जायेगा भइया, वोँ सभी वैसे भि आपसे मिलना चाहरहे हैं"
प्लान बन चूका थां औऱ कुछबड़ा होने केँ आसार बननेलगे थें। भरत सिंह अपने दफ़्तर मे बैठा हैं औऱ गहरीसोच मे डूबा हैं। उसेपता हैं कि जिस षड़यंत्र कां हिस्सा वो बन चूका हैं उससे निकलना इतना आसान नहि होने वाला। पऱ वो एक् कूटनीतिज्ञ हैं। गाँव केँ सरपंच बनने सें लेकर MLA केँ चुनाव जीतने तक कां सफर उसनेइसी कूटनीति सें किया हैं। उसेपता हैं इस मुसीबत सें केसे बचना हैं। अब टाइम आँ गय़ा थां आतिफ़ कों किनारे करके मुबीर सें हाथ मिलाने कां। वैसे भि राजनीती इसी कां तोँ नाम हैं। गुंडे आते जाते रहते हैं पऱ नेता हमेसा बच जाता हैं।
"तुम्हें जितना कह रहें हैं उतनाकर, इस रविवार कों हम् स्वयं मिलने जाएंगे उससे। तूँ बसपता कर वोँ कहा छुपा हैं बाकी मे स्वयं देख लूंगा " अपने खबरी सें बात करतेहुए भरत सिंह बोला। वातावरण कि गर्मी बढ़ने केँ कारण मुबीर छुपाहुआ थां औऱ वंही सें प्लान कररहा थां।
इस छुपम छुपाई कां आगाजआज नां होकर बहोत वर्षो पहले होँ गय़ा थां। जोधपुर राजस्थान केँ बड़े नेताओं कि भूमि हैं औऱ जितना भि कालामाल राजस्थान मे आता याँ जाता हैं, एक् बार जोधपुर जरूर पहुँचता हैं। यही केँ अन्य नामचीन गुंडों मे सें कुछऐसे भि हैं जौ मानवीय व्यापार करते हैं। पर्र अमल कां कारोबार सबसेबड़ा हैं। चित्तोड़ औऱ जोधपुर कां नाता भि इसीअमल केँ सहारे बना थां औऱ आज भि इनका एक् अहम् हिस्सा हैं।
राजनितिक प्रचार हौ याँ नशे कि दुनिया, पेसो कां यह चक्र युही चलता रहता हैं। इन पेसो मे एक् बड़ा हिस्सा जोधपुर केँ सेठों कां हैं। जिस मंडोर पऱ कब्जे कि बात मुबीर कररहा हैं वहां केँ प्रसिद्ध जागीरदार हैं ठाकुर रामकिशन, भानु केँ पापा। बड़ी हस्ती होतेहुए भि उन्होंने भानु कों जेल जाने सें नहि बचाया क्युकी वे न्याय मे विश्वास रखते हैं औऱ उनके हिसाब सें जिसने जुर्म किया उसकासजा भुगतना भि आवश्यक हैं। भानु कों पता नहि थां कि जिन अमीर लोगो कों आतिफ़ परेशान करता हैं उनमे उसके पापा भि शामिल हें। वो 20 साल कां एक् नवयुवक थां जबजेल मे आया थां पऱ अब 25 साल कां एक् प्रीपक्व इंसान बन चूका हैं। जुर्म औऱ राजनीती कि इस दुनिया मे उसकी क्याँ स्थान बनती हैं ये टाइम हि बताएगा। फिलहाल शहर कों ख़ामोशी घेरेहुए हैं जैसे तूफान सें पहले कि शांति हौ.
लगता हैं मेरी स्टोरी अच्छी नहि हैं। अपनीराय जरूर देवे। मे असमंजस मे हूं कि आगेबढू याँ रहनेदू। शुक्रिया
कोसिस यही रहती हैं, पऱ क्याँ करे? दैनिक जिंदगी मे वक़्त नहि मिल पाता। थोड़ा सब्रकरे, नियमित update आते रहेंगे।
झिलमिल ओढ़नी – New Episode
6th पन्ना
उस झीने कपड़े मे सें सुई आसानी सें पार होँ रही थि जैसेकोई कश्ती लहरों कां आंनद लें रही हौ। कपड़े सिलने कि शौकीन सुषमा अपनेनये सूट कों धागों केँ जाल मे बुनरही हैं। सलवार कि तिरपाई कठिनकाम होता हैं क्युकी उसमे सिल्वटे बहोत होती हैं। आमतौर पऱ वो राजपुताना पोशाक पहनती हैं पर्र बदलाव केँ खिलाफ नां होने केँ कारणसूट भि पहनती हैं। उसके कलाकार हाथबड़ी कोमलता सें चलते हैं औऱ एक् केँ बाद एक् टांका लगरहा होता हैं तभीउसे घऱ मे किसी केँ प्रवेश कि आवाज़ आती हैं।
"रामराम बाई सां" सुषमा कां भइया पर्वत सिंहघऱ मे आते हि नमस्ते करता हैं औऱ पेर छूता हैं।
"आओ भाईजी, अच्छा किया आप् आँ गए, मे भाभी सें कहरही थि कि शहर तौ आँ हि रहे हैं मिलने भेज देना" सुषमा नें समाचार सुनाया।
"हांबाई सां, कुछकाम थां यहा"
"आप् बैठो, मे पानी लाती हूं" बड़े सें बरामदे मे नियत सें लगे सोफे पर्र पर्वत सिंहबैठ जाता हैं औऱ सुषमा उसकेलिए पानी लेँ आती हैं। पानी पीकर गिलास सामने लगी कांच कि टेबल पऱ रखकर वो सुषमा केँ सम्मुख होता हैं तभी सुषमा बोल पड़ती हैं,
"खानां खाएंगे याँ पहलेगरम चाय पियेंगे?"
"नाँ बाई सां, अभि कुछ नां लेंगे, आप् बैठो, फिन मुझे निकलना भि हैं"
"इससे अच्छा तौ आप् आया हि नां करें, जब भि आते हैं इतना हि रुकते हैं" सुषमा कों शिकायत कां मौकामिल गय़ा।
"ऐसीबात नहि हैं बाई सां, दरअसल मंडोर मे हालात बदल रहें हैं। जीजा सां सें बात नहि होँ पारही थि इसलिये मुझे आनांपड़ा। वोँ दफ़्तर मे भि नहि मिले, तभी नां मे घऱआया हूं। " पर्वत सिंह नें कारण बताया।
"ऐसा क्याँ कामआन पड़ा भइयाजी, कही फिरसे बुरे आसार नाँ बन जाये?" सुषमा केँ चेहरे पर्र चिंता दिखरही थि।
"वही तोँ चिंता हैं बाई सां, डीएसपी साहब सें बात करकेपता किया कि हमेंकब तक इस गुंडाराज कां सामना करना पड़ेगा तोँ उन्होंने बताया कि यह राजनीती कां हिस्सा बन चूका हैं। जीजा सां उनकेखास हैं इसीलिए वोँ हमारी भि सुन लेते हैं। पर्र अब वोँ भि परेशान हैं, ऊपर सें प्रशासन कां दबावअलग। इसी मामले कों लेकरसब इक्कट्ठा हौ रहें हैं तौ मे जीजा सां सें पूछना चाहरहा थां कि हमें प्रोटेक्शन लेनी चाहिए याँ नहि "
"मुझे चिंता होँ रही हैं भइयाजी, इनका क्याँ हैं? यह तौ बोल देंगे जौ होता हैं देखा जायेगा। पऱ आप् तौ समझदार हैं, आप् उन्हें समझाइये कि सुरक्षा लेना अकल्मन्दी कां काम हैं। यह गुंडे आज हैं औऱ कल भि होंगे, ऊपर सें मेरा भानु भि तौ यहा नहि हैं। इन्होने तोँ उसे बचाने कां प्रयास तक नहि किया थां"
"आप् चिंता नां करेंबाई सां। मे करता हूं उनसेबात। वैसे भानु सें बात हुईँ आपकी?"
"हां भइयाजी, हुई थि"
"केसा हैं वोँ?"
"वोँ तोँ यही कहता हैं कि वोँ ठीक हैं, पऱ मुझेपता हैं उसकी हालत। बचपन सें जिसे नाजों सें पाला वोँ उस बदनसीब स्थान केसा होगा मेरादिल जानता हैं। " सुषमा कि आँखों सें अश्रु छलकउठे थें जिसेदेख कर पर्वत कां कलेजा भरआया।
"मत रोइये बाई सां, मे भि पागल हूं जोँ उसका जिक्र कर दिया। कुछ दिन पहले मिलके आया थां मे उससे। अब कितने हि दिन बच्चे हैं उसकी रिहाई केँ, जल्द हि वोँ हमारे पास आँ जायेगा"
पर्वत सिंह भानु कां सगा मामाजी नहि थां पर्र सगे सें भि बढ़कर थां। वो सुषमा कां राखी भइयाबना थां जब सुषमा कां ब्याह हुआ थां। उसी केँ गाँव मे उसका पड़ोसी थां पर्वत जिसने ब्याह मे भइया केँ सारे फर्ज़ निभाए थें। बाद मे सुषमा नें उसे अपना राखी भइयाबना लिया थां औऱ उसका बिज़नेस चलवाने मे अपने पति सें कहकर सहायता कि थि।
दोनों कि बातें ज़्यादा देर तक नहि चली क्युकि पर्वत सिंह कों जल्द थि अपने जीजा सां सें मिलने कि।
"ठीक हैं बाई सां, मे चलता हूं, आप् अपना ख्याल रखना"
"आप् भि भइयाजी" औऱ पर्वत सिंहचला जाता हैं। सुषमा काम मे व्यस्त होँ जाती हैं। पर्वत सिंह नें ठाकुर रामकिशन कों ढूंढने कां भरसक प्रयास किया पर्र वो नहि मिले। दोपहर सें साम होँ गई, पऱ उनकीकोई खबर नहि थि। इसी केँ संग पर्वत सिंह कों पताचला कि ठाकुर रामकिशन केँ संग अन्य 3-4 सेठ औऱ भि गायब हैं, जिसे जानकर उसका माथा ठनका। वो अपनेखास, सेठ गिरिराज केँ दफ़्तर मे जाता हैं जँहा शांति छाई हुई थि।
"यह क्याँ हौ रहा हैं भइया साहब, जीजा सां कां कुछपता नहि हैं, नां हि इंद्र जी औऱ 2-3 औऱ भि हैं जौ गायब हैं। "
"यह आतिफ़ कां काम हैं पर्वत जी। हमेंपता चला हैं कि मुबीर सें होने वाली मुलाक़ात कि खबरउस तक पहुँच चुकी हैं। हड़बड़ी मे उसके भइया नें ऐसाकाम कर दिया हैं जिसका अंजाम बहोत बुरा होने वाला हैं। "
"साफसाफ बताइये भइया साहबबात क्याँ हैं?" पर्वत सिंह केँ माथे पर्र चिंता कि लकीरें दिखना शुरुआत होँ गयीँ, थि।
"अब मे आपको केसे बताऊसमझ मे नहि आँ रहा, जानने केँ बाद आप् क्याँ कर बैठेंगे मुझेउस बात कि चिंता हैं। "
"भइया साहब, आप् कृपा करके पहेलियाँ नां बुझाये, जिससेठ राम किशन कि बात हम् कर रहें हैं वोँ कितनी बड़ी हस्ती हैं आप् जानते हैं अच्छी तरह सें औऱ आज वोँ हि लापता होँ चुके हैं, उनकेसंग जोँ औऱ भि लापता हुए हैं, जोधपुर उनकेनाम सें जानां जाता हैं। मुझे बताइये बात क्याँ हैं? सबडरे डरे सें क्यूं हैं?"
"आपके जीजा सां रामकिशन जी, इन्द्र जी, रघुवीर जी औऱ भैरवजी, इनका क़त्ल होँ चूका हैं, आदिल नें उन्हें अगवा किया औऱ मार दिया। "
इतना सुनते हि पर्वत सिंह कांपने लगता हैं औऱ चक्कर खाकर गिरने हि वाला होता हैं कि तभी गिरिराज उसेपकड़ लेता हैं।
"आप् जानते भि हैं आप् क्याँ कह रहें हैं? अगरयह मजाक हैं तौ हमेंऐसा भद्दा मज़ाककतई मनपसंद नहि हैं गिरिराज जी"
"हम् ऐसी हालत मे भला क्यूं मजाक करनेलगे भइया साहब। आदिल केँ पीछे हमने एक् खबरी छोड़ा थां जिसने हमेंयह खबर दि। अभि आधे घंटे पहले हि आदिल नें उन चारो कों गोली मारी हैं। "
पर्वत सिंह धड़ाम सें कुर्सी पर्र बैठ जाता हैं। चंद हि छणो मे मामला संगीन हौ गय़ा थां। जिनचार लोगो कों आदिल नें मारा थां वोँ कोई मामूली व्यक्ति नहि थें। उसनेताव मे आकर बहोत बड़ाकदम उठा लिया थां। फिरभी आतिफ़ कों इसबात कि खबर नहि थि कि उसके भइया नें यह काण्ड कर दिया हैं, नाँ हि वोँ उसेऐसा कुछ करने देता पर्र पागल आदिल कों जबयहबात पताचली कि जागीरदारों औऱ सेठों नें मिलकर आतिफ़ कों मरवाने कि योजना बनाई थि तौ वो गुस्से मे पागल हौ गय़ा थां। पिस्तौल सें निकली उनचार गोलियों सें जोधपुर कि हवाबदल गयीँ, थि औऱ आने वाले तूफान कि शांति भंग करके भानु केँ बाप कि सीने मे उतर गई, थि। अभि तक केवल गिरिराज, पर्वत सिंह औऱ गिने चुने लोगो केँ अलावा मुबीर कों भि इसखबर कां पताचल चूका थां पऱ डरने कि बजाय उसके चेहरे पऱ मुस्कान तैररही थि क्युकि उसेपता थां आतिफ़ केँ भइया नें एक् गलतीकर दि हैं जिसका खामियाजा आतिफ़ कों भुगतना हि पड़ेगा। हवा ठंडी औऱ निरंतर बहरही हैं पर्र वातावरण मे गर्मी बढ़ चुकी हैं। भविष्य कि आशंकाओ केँ संग सलाम.
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