𝐊𝐊𝐊 - (𝐊𝐢𝐫𝐚𝐧 𝐊𝐢 𝐊𝐚𝐡𝐚𝐧𝐢) | incest indian sex story – New Episode
Chapter 32
मेरेबदन मे इसकदर मस्ती भरी लहरें दौड़रही थीं कि मुझसे अब औऱ बर्दाश्त नहि होँ रहा थां औऱ मेरी बुर पिघलकर पानी छोड़ने लगी। खाट कि चादर अपनी मुठ्ठियों मे कसकर जकड़ते हुए मे मस्ती मे बेहद ज़ोर सें चींखी, “आआआहहह आँटी ईईईई। मेरी बुर। झड़ीईईई। हायराम अल्लाह। ऑय.ऑयएम कमिंग.!” मेरी बुर सें बे-इंतेहा पानी निकलाने लगा जिसे ऑस्कर नें अपनी ज़ुबान सें जल्द-जल्द चाटने लगा। ऐसा लगरहा थां जैसे कि मेरा पेशाब निकल गय़ा होँ। इसकदर गज़ब कां ऑर्गैज़म थां कि बेहोशी सि छा गयीँ, औऱ मे आँखें बंद करके हाँफने लगी। ऑस्कर अभि भि मेरी बुर चाटते हुए मेरेपनी केँ अंतिम कतरेपी रहा थां। सलमा आँटीउसे पुचकारते हुए बोलीं, “बस.बस। इतना बहुत हैं। डार्लिंग!” औऱ ऑस्कर कों अपनी तरफ़ घसीटकर उसे सहलाने लगी।
बेहतरीन ऑर्गैज़म केँ लुत्फ़ कां एहसास करतेहुए मे चार-पाँच मिनट तक आँखें बंद किये लेटीरही। मुझे बेहद तसल्लुत महसूस होँ रही थि। जब मैंने आँखें खोलीं तौ देखा कि सलमा आँटी घुटनों पे बैठी ऑस्कर कां लाल गाजर जैसा लन्ड प्रेम सें सहलारही थीं। लगभग सात-आठ इंच लंबा औऱ मोटा सां नोकीला लन्ड सख्त होकर फड़करहा थां जिसेदेख कर मेरे चेहरे कि चैनभरी मुस्कुराहट हैरत मे तब्दील हौ गयीँ,। आँटी नें मुझे सेहर-ज़दा नज़रों सें ऑस्कर केँ लन्ड कों घूरते हुए देखा तोँ बोलीं, “हैं नां लाजवाब? पासआकर इसेहाथ मे महसूस करके देखो!” मे स्वयं कों रोक नहि सकी औऱ शोखी सें मुस्कुराते हुएउठ कर घुटने मोड़कर बैठ गई, औऱ अपना एक् हाथ ऑस्कर केँ पेट केँ नीचे लेँ जाकर उसके सख्त औऱ लरज़ते हुए गर्म लन्ड कों सहलाने लगी। उसके लन्ड कों आगे सें पीछे तक सहलाते हुए उसके लन्ड कि फूली हुइ नसें मुझे अपनेहाथ मे धड़कती हुई महसूस हौ रहीथीं। ऑस्कर केँ लन्ड सें मुसलसल चिकना औऱ पतला-सां रसचूरहा थां। मोटी गाजर जैसा उसका लन्ड मेरेहाथ मे धड़कता हुआ औऱ अधिक फूलने लगा औऱ उसकी दरार मे सें सफ़ेद झाग जैसारस औऱ अधिक चूनेलगा औऱ मेराहाथ औऱ उंगलियाँ उस चिकने रस सें सन गयीं। इतने मे सलमा आँटी उसके टट्टों कि फुली हुइ एक् हाथ मे पकड़कर मुझे दिखाते हुए बोलीं, “देखोयह किसकदर लज़ीज़ मनि सें भरेहुए हें.। “ औऱ अपने होंथों पऱ ज़ुबान फिराने लगीं।
फिन अचानक नीचेझुक कर आँटी उसकेरस सें सनेहुए लन्ड पर्र जीभ फिराने लगीं औऱ उसका रिसता हुआ लन्ड अपने मुँह मे भरकर चूसना शुरुआत कर दिया। ऑस्कर मस्ती सें रिरियाने लगा। आँटी कों ऑस्कर कां लन्ड चूसते देख मेरे मुँह मे भि पानी भरनेलगा। बेसाख्ता मे अपनाहाथ अपने होंठ औऱ नाक केँ लगभग लेँ गई, तौ ऑस्कर केँ लन्ड केँ चिकने रस कि तेज़ खुशबू मेरी साँसों मे समा गई, औऱ मे ऑस्कर केँ लन्ड केँ रस सें सनी अपनी उँगलियों मुँह मे लेकर चाटते हुए उसका ज़ायका लेनेलगी। मुझे एस-केँ औऱ अनिल कि मनि बेहद पसन्द थि मगर ऑस्कर केँ इसरस कां ज़ायका थोडा अलग थां मगर थां बेहद लज़्ज़तदार। ऑस्कर कां लन्ड अपने मुँह सें निकालकर चटखारा लेतेहुए आँटी भि बोलीं, “ऊँऊँ यम्मी। तुम् भि चूस केँ देखो। बेहद लाजवाब औऱ अडिक्टिव ज़ायका हैं इसका। मेरा तौ इससेदिल हि नहि भरता!” आँटी कि बात पूरी होने सें पहले हि मे झुककर अपनी ज़ुबान ऑस्कर केँ लन्ड कि रिसती हुई नोक पऱ फिराने लगी। मैंने अपनी ज़ुबान पऱ उसके लन्ड सें रिसता हुआरस अपने मुँह मे लेकर घुमाते हुए उसका ज़ायका लिया औऱ फिन अपने हलक़ मे उतार लिया। अपनीइस बेरहरावी पे मस्ती मे मेरी सिसकी निकल गई,। मे फिन उसके कुत्ते केँ गर्म लन्ड पे अपनी ज़ुबान घुमा-घुमा कर लपेटते हुए चुप्पे लगाने लगी औऱ उसमें सें चिकना ज़ायेकेदार रस मुसलसल मेरी ज़ुबान पे रिसरहा थां।
फिन मैंने उसके लन्ड कि नोक कों चूमते हुए उसका लन्ड अपने मुँह मे लेँ लिया औऱ मस्ती मे अंदर-बाहर् करतेहुए उसे चूसने लगी। मुझे बेहदमजा आँ रहा थां औऱ ऑस्कर भि रिरियाने लगा औऱ झटके मारने लगामगर सलमा आँटी नें उसे पकड़रखा थां औऱ उसे पुचकार भि रहीथीं। मे अपनेहलक तक उसका लन्ड लें-लें कर चूसते हुए उसके चिकने रस कां मजा लें रही थि औऱ अब उसकीमनि केँ इखराज़ होने कि मुंतज़िर थि। थोड़ी हि देर मे ऑस्कर कां रिरियाना तेज़ हौ गय़ा औऱ उसका लन्ड मेरे मुँह मे औऱ भि फूल गय़ा। मेरे होठों केँ बाहर् उसके लन्ड कि जड़ गेंद कि तरहफूल गयीँ, औऱ अचानक मेरा मुँह उसकी गाढ़ी चिपचिपी मनि सें भर गय़ा। मे उसकी बेशकीमती मनि गटक-गटक कर पीतेहुए अपने मुँह मे स्थान बनारही थि औऱ ऑस्कर फिन मेरा मुँहभर देता थां। कुत्ते केँ लन्ड औऱ टट्टों मे सें उसकीमनी चाट-चाटकर पीतेहुए मे बेहद मस्ती औऱ मदहोशी केँ आलम मे थि। ऑस्कर केँ लन्ड कि मनि मेरे होंठों केँ किनारों सें बाहर् बहनेलगी मगर मैंने उसके लन्ड कों अपने मुँह मे चूसना ज़ारी रखा। मनि कां अंतिम कतरा इखराज़ होने केँ बाद भि मे उसके लन्ड कों कुछदेर तक चूसती रही।
जब मैंने ऑस्कर कां लन्ड अपने मुँह सें रिहा किया तोँ अचानक सलमा आँटी नें मेरे होंठों पे अपने होंठरख दिये औऱ मेरे मुँह मे जीभ डालकर अपने कुत्ते कि मनि कां ज़ायका लेने लगीं। मे तोँ पहले हि बेहद गर्म थि औऱ सलमा आँटी सें कसकर चिपक गयीँ, औऱ हम् दोनों किसिंग करतेहुए फिन सें आपस मे गुथमगुथा होकर एक्-दूसरे कों सहलाने लगीं। लगभग पाँच मिनट तक हमारी ज़बरदस्त स्मूचिंग ज़ारी रही। फिन मे आँटी सें बोलि, “मजा आँ गय़ा आँटी ऑस्कर कां लन्ड चूसकर। मगर आपने पहलेकभी इसबात कां ज़िक्र क्यूं नहि किया। मुझे इतनेदिन इस नायाब तजुर्बे सें महरूम रखा आपने?”
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Chapter 33
आँटी मुस्कुराते हुए बोलीं, “इसतरह केँ मामलों मे बहुत एहतियात बरतनी पड़ती हैं। औऱ सिर्फ़ तुम् हि हौ जिसे मैंने अपनेइस हसीन राज़ मे शरीक़ किया हैं। मगर अभि तुमने असलीमजा लिया हि कहां हैं। ऑस्कर कां लन्ड बुर मे नहि लोगी क्याँ?”
“लूँगी क्यूं नहि। मेरी बुर तौ बेकरार हैं ऑस्कर केँ लन्ड सें चुदने केँ लिये.मगर ऑस्कर तौ जस्ट अभि-अभि फारिग हुआ हैं.!” मे तड़पते हुए बोलि। ऑस्कर पलंग सें उतरकर नीचेबेड केँ लगभग खड़ा हमारी तरफ़ देखते हुए पूँछ हिलारहा थां। आँटी बोलीं, “अरेखूब स्टैमिना हैं मेरे ऑस्कर मे। लगातार चार-पाँच दफ़ा फारिग होकर चुदाई करने कि ताकत हैं इसके अमेज़िंग लन्ड मे। “ मैंने आँटी सें कहा कि पहले मे जल्द सें पेशाब कर केँ आती हूं औऱ उठकर अटैच्ड बाथरूम मे चली गयीँ,। नशे कि खुमारी कि वजह सें हाई पेन्सिल हील कि सैंडल मे चलतेहुए मेरेकदम ज़रा लड़खड़ा रहे थें। जब मे पेशाब करके वापसआयी तोँ सलमा आँटी ऑस्कर कां लाल लन्ड सहलारही थीं जोँ फूलकर चोदने केँ लिये सजधजकर थां। आँटी बोलीं, “चलो घुटने मोड़कर कुत्तिया कि तरहझुक कर अपनी ज़िंदगी कि सबसे थ्रिलिंग चुदाई केँ लिये सजधजकर होँ जाओ!” मे जल्दी बेड पे कुत्तिया कि तरहझुक गयीँ,। “गुड.मगर अपनी टाँगें थोड़ी चौड़ी फैलाओ। थोड़ी सि औऱ चौड़ी.!” आँटी बोलीं तोँ मैंने अपनी टाँगें चौड़ी फैलादीं औऱ अपना चेहरा तकिये पे टिका लिया। ऑस्कर सें चुदने कि बेकरारी मे मेरे पूरेबदन मे मस्ती भरी लहरें दौड़रही थीं औऱ मेरी बुर मे तोँ जैसे शोलेदहक रहे थें।
अपनीगोल गाँड ऊँची उठाये औऱ थरथराती रानें चौड़ी फैलाये हुए मैंने तकिये पे गाल टिकाकर अपनी गर्दन मोड़कर पीछे देखा तौ ऑस्कर अपना जबड़ा खोले खड़ा थां औऱ उसकेकान सीधे खड़े थें। उसकी पिंक ज़ुबान बाहर् लटकी हुइ थि। सलमा आँटी नें मेरे चूतड़ों कों सहलाते हुए उन्हें फैलाया औऱ भर्रायी आवाज़ मे अपने कुत्ते सें बोलीं, “ऑस्कर बेबी! देखो कितनी हसीन रसीली गाँड हैं.!” औऱ फिन स्वयं हि मेरी मोटी गाँड केँ छेद पऱ अपनी ज़ुबान फिराने लगीं। मेरे पूरे शरीर मे सनसनी फैल गयीँ, औऱ मे सिसकने लगी। ऑस्कर भि मेरे सैंडल औऱ पांव चाटने लगा औऱ फिन मेरी रानों पे अपनी ज़ुबान फिराने लगा औऱ अचानक भोंकते हुए रिरियाया तोँ सलमा आँटी हंसते हुए बोलीं, “ओके बाबा। लें तुँ चाट लें। तेरी बारी.गो अहेड!” मुझे अपने चूतड़ों पे ऑस्कर कि गर्म साँसें महसूस हुईं औऱ फिन उसकी लंबी ज़ुबान मेरे चूतड़ों कि दरार केँ बीच मे घुसकर चाटने लगी। सलमा आँटी नें मेरे चूतड़ पकड़कर चौड़े फैलाये हुए थें। ऑस्कर कि गर्म भीगी ज़ुबान मेरी भारी गाँड सें बुर औऱ फिन क्लिट तक ज़ोर-ज़ोर सें चाटने लगी। मुझसे इतनी मस्ती बर्दाश्त नहि हौ रही थि। मैंने सिसकते हुए आँटी सें कहा, “ऊँऊँहहह प्लीज़ आँटी.अब जल्द सें इसके लन्ड सें चुदवा दो नाँ। आँआँहह। नहि तौ मे फिनऐसे हि झड़ जाऊँगी। “
फिन मुझे अपने चूतड़ों पे ऑस्कर कां भारीबदन महसूस हुआ औऱ उसके अगले पांव मेरीकमर कों जकड़े हुए थें औऱ वोँ अपनी पिछली टाँगों पर्र खड़ा थां। याँ अल्लाह! अब वोँ जानवार मुझे अपनी कुत्तिया बनाकर चोदने केँ लिये मेरेऊपर सवार होँ रहा थां औऱ। औऱ सलमा आँटी भि उसे उकसारही थीं। “वेरीगुड ऑस्कर डार्लिंग.! वैसे हि मज़े सें चोदना जैसे तूँ मुझे चोदता हैं.!” आँटी ऑस्कर सें कहरही थीं औऱ फिन मुझसे मुखातिब होकर बोलीं, “तुम् भि घबराना नहि डियर! बेइंतेहा मजा आयेगा तुम्हें!” फिन मुझे अपनी गर्म बुर पे ऑस्कर केँ लन्ड कि ठोकर महसूस हुइ तौ मस्ती मे मेरे मुँह सें ज़ोर सें सिसकी निकल गई,। फिन मुझे उसके ताकतवर मज़बूत शरीर कां धक्का अपने चूतड़ों पे महसूस हुआ औऱ उसका हड्डी वाले लन्ड नें मेरी बुर पे जोर सें ठोकरें मारी। मेरी सुलगती बुर मे अपना फड़कता हुआ गाजर जैसालाल मोटा लन्ड घुसाने कि कोशीश करतेहुए बेकरारी सें वोँ ज़ोर सें रिरियाया औऱ मेरे चूतड़ों पर्र झटके मारते हुए उसने मेरीकमर पे अपनी अगली टाँगें औऱ ज़्यादा ज़ोर सें कसदीं। मे भि उसका लन्ड लेने कि बेकरारी मे अपनी मोटी गाँड गोल-गोल घुमाने लगी। मेरी साँसें भि ज़ोर सें चलरही थीं औऱ दिल भि खूब ज़ोर सें धड़करहा थां। ऑस्कर केँ लन्ड सें चुदने कि उतावलापन अब मुझसे बर्दाश्त नहि हौ रही थि।
मेरी हालतदेख कर सलमा आँटी बोलीं, “उसकी हेल्प करो!गो ऑन। उसका लन्ड पकड़ केँ अपनी बुर मे डालो.!” मेरे मुँह सें मुसलसल हल्की-हल्की ‘ऊँहऊँह’ निकलरही थि। मैंने एक् हाथ पीछे अपनी रानों केँ दरमियान लेँ जाकर ऑस्कर कां सख्त चिकना लन्ड पकड़कर अपनी बुर पे दबाते हुएउसे अंदर कां मार्ग दिखाया। स्वयं-ब-स्वयं ऑस्कर नें फ़ितरती तौर पे आगे धक्का मारा औऱ उसका लन्ड ज़ोर सें मेरी तड़पती मेरी भीगी बुर कों बेहद चौड़ा फैलाकर बड़ी बेरहमी सें चीरते हुए अंदर गहरायी तक घुस गय़ा। “ऊँहऊँह ऊँह ऊऊऊहहह अल्लाहहह!” ऑस्कर केँ मुसलसल झटकों सें उसका लन्ड अपनी बुर मे ठंसाठंस भराहुआ महसूस करके मे मस्ती मे सिसकने लगी। उसका फूलाहुआ लाल लन्ड पुरा कां पूरा मेरी फैली हुई बुर मे घुसकर बुरीतरह सें चोदरहा थां। मनि सें लबालब भरेहुए टट्टे ज़ोर-ज़ोर सें झूलते हुए मेरी बुर पऱ थपेड़े माररहे थें। ऑस्कर कां लन्ड मेरी बुर मे ज़ोर-ज़ोर सें चोदते हुए औऱ अधिक फूलता जारहा थां औऱ मेरी बुर कि दीवारों कों फैलाते हुएखूब प्रेशर डालरहा थां। “ओह.ओंह। ओह मेरे खुदा.आँह। ओंह.!” मेरे हलक़ सें ज़ोर-ज़ोर सें सिसकियाँ निकलकर मेरेआधे खुले होंठों सें छूटरही थीं औऱ मे आँखें फाड़े साईड मे ड्रेसिंग टेबल केँ आइने मे ऑस्कर कों पीछे सें अपनी बुर मे ज़ोर-ज़ोर सें चोदते हुएदेख रही थि।
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Chapter 34
ऑस्कर केँ ज़ोरदार धक्कों सें सिर तकिये पे ज़ोर-ज़ोर सें रगड़रहा थां। मे भि अपनी मोटी गाँड पीछे ठेल-ठेल कर ऑस्कर केँ बेरहम धक्कों कां जवाब देनेलगी। मे अपनी दहकती बुर मे ऑस्कर केँ लन्ड कि बेरहम चुदाई सें मे इतनी मस्त औऱ मदहोश होँ गई, थि कि उससमय मुझे सलमा आँटी कि मौजूदगी कां एहसास भि नहि थां। इस दरमियान मे दो दफ़ा चींखते हुए बेहद ज़बर्दस्त तरीके सें झड़ीमगर ऑस्कर नें पुर-जोश चोदना ज़ारी रखा। मेरी साँसें तेज़-तेज़ चलरही थीं औऱ मेरी कराहें औऱ मस्ती भरी चींखें पूरे कमरे मे गूँजरही थीं। ऑस्कर कां लन्ड शुरुआत सें मेरी बुर मे गर्म-गर्म रस मुसलसल छोड़रहा थां जिससे मेरी बुर कि आग औऱ अधिक भड़करही थि। फिन मैंने महसूस किया कि कुछदेर सें ऑस्कर केँ लन्ड कि जड़ कि फूली हुइ गाँठ बहोत ज़ोर सें मेरी बुर पे टकरारही हैं औऱ ऑस्कर ज़ोर-ज़ोर सें धक्के मारते हुएउसे मेरी बुर मे ठूँसने केँ लिये बड़ी शिद्दत सें कोशिश कररहा थां। ऑस्कर केँ लन्ड कि टेनिस बॉल जैसी गाँठ अपनी बुर मे लेने केँ ख्याल सें मेरेबदन मे मस्ती कि लहरें सनसनाने लगीं। आँटी नें भि ज़िक्र किया थां कि कुत्ते केँ लन्ड कि गाँठ बुर मे लेने मे बेहदमजा आता हैं। कुछ ज़बरदस्त धक्के मारने केँ बाद आखिरकार ऑस्कर कि कोशिश कामयाब हुई औऱ मेरी बुर कि दीवारें उसकी फूली गाँठ कों अंदर लेने केँ लियेफैल गयीं। “आआआईईईई अल्लाहहह। मेरी बुर। आँटीईईई। ऊँऊँईईईई”, मे दर्दओर मस्ती मे बड़ी ज़ोर सें चींखी। आँटी प्रेम सें मेरीकमर औऱ चूतड़ सहलाने लगीं।
अपने लन्ड कां सबसे मोटा हिस्सा मेरी बुर मे ठूँसकर फंसाने केँ बाद ऑस्कर नयेजोश केँ संग चोदने लगा। उसकी गेंद जैसी गाँठ नें मेरी बुर कों बेहद चौड़ा फैलारखा थां औऱ मेरी बुर भि उसकेऊपर कसके जकड़ी हुइ थि। अब चोदते हुए उसका लन्ड मेरी बुर सें बाहर् नहि आँ रहा थां औऱ अंदर फंसाहुआ हि फूल-फूल केँ बुर मे धड़कते औऱ कूदते हुए चुदाई कररहा थां। यह चुदाई ट्रडिश्नल चुदाई सें अलग थि मगर बेहद ज़बरदस्त औऱ निहायत मज़ेदार थि। लगभग पंद्रह मिनट ऑस्कर मुझेइसी तरह चोदते हुए मेरी बुर मे लगातार मनि छोड़ता रहा औऱ मे लगातार ज़ोर-ज़ोर सें कराहरही थि, सुबकरही थि, सिसकरही थि औऱ जब मेरी बुर पानी छोड़ती तौ ज़ोर-ज़ोर सें चींख भि रही थि। मेरी बुर तौ बार-बार झड़-झड़ केँ निहाल होँ गई, थि। यह मेरी ज़िंदगी कि सबसे निहायत औऱ बेहतरीन चुदाई थि।
ऑस्कर केँ झटके अचानक पहले सें तेज़ होँ गये। हालाँकि उसकीमनी शुरुआत सें हि मेरी बुर मे इखराज़ हौ रही थि मगर ऑस्कर एक् तरह सें अब झड़ने वाला थां। मेरी बुर उसका लन्ड औऱ उसकी गाँठ बे-इंतेहा फूलगये औऱ फिन अचानक ऑस्कर नें हिलना बंदकर दिया। उसका लन्ड बेहद ज़ोर सें मेरी बुर मे फड़कने लगा औऱ मुझे उसकीमनी कां इखराज़ भि पहले सें ज़्यादा तेज़ होताहुआ महसूस हुआ औऱ मेरी बुर नें भि एक् दफ़ाफिन सें पानी छोड़ दिया। ऑस्कर ढीला होकर दो-तीन मिनट मेरीकमर पे हि रहा औऱ फिन आँटी नें उसे मेरीकमर सें उतारा तोँ भि उसके लन्ड कि गाँठ मेरी बुर मे हि फंसी थि। आँटी नें मेरी तसल्ली कि कि यह नॉर्मल हैं औऱ पाँचदस मिनट मे ऑस्कर केँ लन्ड कि गाँठ सिकुड़ने केँ बाद उसका लन्ड मेरी बुर मे सें आज़ाद हौ जायेगा। वैसे मुझे भि ऑस्कर सें कुत्तिया कि तरह चिपके हुएमजा हि आँ रहा थां। उसके लन्ड औऱ फूली हुइ गाँठ कि लरज़िश औऱ प्रेशर मुझे अपनी बुर मे बेहद अच्छा लगरहा थां। थोड़ी देरबाद ऑस्कर कां लन्ड सिकुड़ मेरी बुर सें रिहा होँ गय़ा औऱ मे औऱ आँटी एक्-दूसरे केँ आगोश मे चिपककर सोगये।
उसदिन केँ बाद तौ मे ऑस्कर कि दीवानी हौ गई, औऱ रोज़-रोज़ साम कों आँटी केँ घऱ जाकर ऑस्कर सें चुदवाती हूं। एस-केँ औऱ अनिल केँ संग भि पहले कि तरह हि चुदाई कां खूबमजा लेती हि हूं मगर ऑस्कर सें चुदवाये बगैर मुझे सुकून नहि आता। मैंने तौ अब स्वयं ऑस्कर जैसा बड़ी नस्ल वाला कुत्ता पालने कां फैसला कर लिया हैं औऱ अशफ़ाक कों भि इसके लिये राज़ी कर लिया हैं। इसके अलावा मुझेइस बात कां भि शक़ हैं कि मेरे औऱ एस-केँ केँ रिलेशन केँ ज़ानिब अशफाक कों शायदपता चल चुका हैं पर्र वोँ खामोश हैं। अशफाक हमें एक् दूसरे केँ संग रहने कां ज्यादा सें ज्यादा मौका देता रहता हैं। बेचारा कर भि क्याँ सकता हैं। उसको तौ बसआग लगाना हि आता हैं जिसे बुझाने केँ लिये मुझे एस-केँ, अनिल औऱ ऑस्कर केँ लन्ड कि ज़रूरत पडती हैं। एस-केँ न्यू-यॉर्क केँ ट्रेवलिंग प्लैन मे लगाहुआ हैं। मेरा पासपोर्ट भि आने वाला हैं औऱ दो महीने केँ बाद मे एस-केँ केँ संग एक् महीने केँ लिये न्यू-यॉर्क चली जाऊँगी। उधर अनिल नें एक् बड़े फैशन-शो मे उसके कपड़ों केँ लिये मुझे मॉडलिंग करने कि ऑफर दि हैं। मैंने जब अशफ़ाक़ सें इस बारे मे बात कि तोँ इसके लिये भि खुशी-खुशी रज़ामंद होँ गय़ा। फैशनशो अगले हि महीने हैं औऱ आजकल रिहर्सल औऱ तैयारी केँ बहाने मे अनिल सें भि हर रोज़ चुदवाने जाती हूं।
𝐊𝐊𝐊 - (𝐊𝐢𝐫𝐚𝐧 𝐊𝐢 𝐊𝐚𝐡𝐚𝐧𝐢) | incest indian sex story - Kahani ab aur interesting hogi
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