𝐊𝐊𝐊 - (𝐊𝐢𝐫𝐚𝐧 𝐊𝐢 𝐊𝐚𝐡𝐚𝐧𝐢) | incest indian sex story – New Episode
Chapter 29
उसका लन्ड तोँ अभि तक नरम नहि हुआ थां, बल्कि मेरे चूसने सें उसका लन्ड औऱ भि ज्यादा अकड़ गय़ा थां औऱ अब वोँ मेरे मुँह कों चोदरहा थां। वोँ आगेझुक कर मेरी मेरी बुर मे अपनी उंगलियाँ अंदर-बाहर् करके चोदने लगा। मे इतनी मस्ती मे आँ गयीँ, औऱ गर्म होँ गई, कि उसके लन्ड कों बहोत हि ज़ोर-ज़ोर सें चूसने लगी औऱ वोँ भि अपनी भारी गाँड उठा-उठा केँ मेरे मुँह कों चोदने लगा। उसनेजब मेरी बुर मे चार उंगलियाँ घुसेड़ीं औऱ अंगूठे सें क्लिटोरिस कों रगड़ा तौ मे काँपने लगी औऱ बहोत ज़ोर सें झड़ गयीँ,। मेरी बुर सें जूस निकलने लगा औऱ मे कुछ अधिक हि मस्ती सें उसके लन्ड कों ज़ोर-ज़ोर सें चूसने लगी औऱ मुझे महसूस हुआ कि उसका लन्ड मेरे मुँह मे हि औऱ अधिक हि मोटा होँ रहा हैं। मे समझ गई, कि अब उसकी क्रीम भि निकलने वाली हैं औऱ उसी टाइम उसने अपने लन्ड कों मेरेहलक मे पूरा अंदर तक घुसा दिया जिससे मेरी आँखें बाहर् निकल आयीं औऱ साँसबंद होनेलगी। उसके लन्ड सें मलाई कि गाढ़ी-गाढ़ी पिचकारियाँ निकलनी शुरुआत हौ गयीँ, औऱ डायरेक्ट मेरेहलक मे गिरने लगी। उसके लन्ड मे सें मलाई निकलती हि चली गई,। निकलती हि चली गई, औऱ इसकदर निकली कि मुझेलगा जैसे मेरापेट उसकी क्रीम सें हि भर जायेगा। पता नहि इतनी क्रीम केसे निकली उसके लन्ड सें।
हम् दोनों झड़ चुके थें औऱ दोनों केँ जूस निकल चुके थें औऱ दोनों गहरी-गहरी साँसें लें रहे थें। उसका लन्ड मेरे मुँह मे हि थां औऱ उसका मुँह मेरी बुर पे। अब उसका लन्ड मेरे मुँह मे थोडा-थोडा नरम होँ गय़ा थां पर्र उसकेयंग लन्ड मे अभि भि सख्ती थि। थोड़ी हि देर केँ बाद मैंने उसको अपनेऊपर सें हटा दिया औऱ वोँ नीचे मेरीबगल मे लेट गय़ा। हम् दोनों करवट सें लेटे थें औऱ अभि भि मेरा मुँह उसके लन्ड केँ सामने थां औऱ मेरी बुर उसके मुँह केँ सामने। मैंने उसके लन्ड सें खेलना शुरुआत कर दिया औऱ उसने मेरी बुर मे उंगली डाल केँ फिन सें क्लीटोरिस कों मसलना शुरुआत कर दिया। उसका लन्ड एक् हि मिनट केँ अंदरफिन सें कुतुब मिनार जैसे खड़ा हौ गय़ा तोँ मैंने उसको सीधा लिटाया औऱ उसकेऊपर चढ़ गयीँ, औऱ उसके मूसल लन्ड कों पकड़ केँ अपनी बुर केँ छेद पर्र एडजस्ट करके बैठने लगी। गीला लन्ड धीरे धीरे गीली बुर केँ अंदर घुसने लगा। उसका मूसल जैसा लन्ड मेरी बुर मे घुसता हुआ बेइंतेहा मजादे रहा थां। मे पूरीतरह सें उसके लन्ड पे बैठ गयीँ, औऱ उसका लन्ड जड़ तक मेरी बुर मे घुस चुका थां। मेरे मुँह सें मस्ती कि सिसकियाँ निकलरही थि। अब मैंने उसके लन्ड पे उछालना शुरुआत कर दिया जिससे मेरी चूचियाँ उसके मुँह केँ सामने डाँसकर रही थि। मे उसके लन्ड पे ऐसे सवार थि जैसे घुड़सवार हॉर्स रेस केँ समय घोड़े पे सवर होता हैं। उसने मेरी चूचियों कों पकड़ केँ मुझे अपनी तरफ़ झुकाया औऱ चूसने लगा। अभि हम् मस्ती मे चुदाई कररहे थें कि रूम मे जलती मोमबत्ती खतम होँ गयीँ, थि औऱ कमरे मे एक् दम सें अंधेरा हौ गय़ा थां। पर्र हमारा ध्यान तोँ चुदाई मे थां। मे उछल-उछल केँ उसके लन्ड पे बैठरही थि औऱ उसका लन्ड मेरी बुर केँ बहोत अंदर तक घुसरहा थां।
चुदाई फ़ुल स्पीड सें चलरही थि। मे उछल-उछल कर उसके कुतुब मिनार जैसे लन्ड पे अपनी बुर माररही थि। उसके घुटने मुड़े हुए थें औऱ मेरे चूतड़ उसकी जाँघों सें लगरहे थें। मेरेबाल सैक्सी स्टाईल मे उड़-उड़ क्र मेरे मुँह केँ सामने आँ रहे थें। मे ज़ोर-ज़ोर सें उछलरही थि। मेरे उछलने सें कभी तोँ पूरा लन्ड बुर केँ बाहर् तक निकल जाता औऱ जब मे ज़ोर सें उसके लन्ड पे बैठती तौ उसका लोहे जैसा लन्ड गचाक सें मेरी बुर मे घुसकर मेरी बच्चे दानी सें टकराता तोँ मेरेबदन मे बिजली सि दौड़ जाती औऱ मे काँपने लगती। फिन अचानक ऐसेहुआ कि मे जबउछल रही थि तौ उसका पूरा लन्ड मेरी बुर केँ बाहर् निकल गय़ा औऱ जब मे ज़ोर सें उसके लन्ड पे बैठी तोँ उसका लन्ड थोडा सां अपनी पोज़िशन सें हिल गय़ा औऱ उसका मूसल लन्ड मेरी बुर मे घुसने कि बजाये मेरीगोल गाँड मे घुस गय़ा। मेरीगोल गाँड केँ छेद कों पता हि नहि थां कि रॉकेट लन्ड मेरी भारी गाँड मे घुसेगा। इसलिये गोल गाँड केँ मसल रिलैक्स नहि थें औऱ एक् दम सें पूरा कां पूरा लन्ड मेरी टाइटगोल गाँड मे घुसते हि मेरी चींख निकल गयीँ,, “ऊऊऊऊऊऊईईईईईईईई अल्लाहहह.आंआंआंआंआं”, पऱ अब क्याँ होँ सकता थां, लन्ड तोँ गोल गाँड मे घुस हि चुका थां। मे थोड़ी देरऐसे हि उसके लन्ड कों अपनी रसीली गाँड मे रखेरही औऱ जब मेरीगोल गाँड उसके लन्ड कों अपने अंदर एडजस्ट कर चुकी तोँ मे उछल-उछल केँ अपनीगोल गाँड मरवाने लगी। अब उसका लन्ड मेरी भारी गाँड मे आसानी सें घुसरहा थां। वोँ फ़ुल स्पीड सें मेरी टाइट भारी गाँड माररहा थां। बीच-बीच मे मे रुककर अपनी बुर कों उसके नाफ़ केँ हिस्से सें रगड़ती थि। मे फिन सें झड़ने लगी औऱ उसका लन्ड भि मेरी रसीली गाँड केँ अंदर फूलने लगा औऱ अनिल नें अपनी मोटी गाँड उठाकर अपना मूसल लन्ड मेरी भारी गाँड मे पूरा अंदर तक घुसा दिया। फिन उसने भि अपनी क्रीम मेरी भारी गाँड केँ अंदर हि निकाल दि। मे भि झड़ चुकी थि औऱ मदहोश हौ कर उसकेबदन पर्र गिर पड़ी। हम् दोनों एक् दूसरे सें लिपटगये औऱ पता नहि कब हमारी आँखलग गई, औऱ हम् एक् दूसरे सें लिपटे हुए नंगे हि सोगये। इतनी ज़बरदस्त तस्कीन बक़्श चुदाई केँ बाद नींद भि बहोत मस्तआयी। सुभह मेरे सारे शरीर मे मीठा-मीठा सां दर्द होँ रहा थां। बार-बार अंगड़ायी लेने कां दिलकर रहा थां औऱ चुदाई कां सोचसोच कर स्वयं-ब-स्वयं हि मुँह पे मुस्कुराहट आँ रही थि।
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Chapter 30
मे सुभह जल्द हि उठ गयीँ, औऱ देखा तोँ अनिल केँ उठने सें पहले हि उसका लन्ड उठ चुका थां। उसका मोर्निंग इरेक्शन देखकर मे मुस्कुरा दि औऱ उसके हिलते हुए लन्ड कों अपनेहाथ मे पकड़ केँ पूछा, “क्याँ यह अभि भि भूखा हैं? सारीरात तौ चोदता रहा मुझे औऱ अबफिन सें अकड़ गय़ा.” तौ वोँ आँखें बंद कियेहुए मुस्कुराया औऱ बोला कि “ऐसी प्यारी बुर मिले तोँ यहरात दिन खड़ा हि रहे” औऱ फिन हम् दोनों हँसने लगे।
दोनों नंगे हि थें औऱ उसने मुझे अपनेऊपर खींच लिया औऱ एक् बारफिन सें मुझेचोद डाला। सुभह कि पहली चुदाई मे भि एक् अजीबबात होती हैं, जल्दकोई भि नहि झड़ता। यह चुदाई भि काफ़ी देर तक चलतीरही। उसका लोहे केँ मूसल जैसा लन्ड मेरी बुर कों चोद-चोद कर भोंसड़ा बनाता रहा औऱ तकरीबन आधे घंटे कि फर्स्ट-क्लास चुदाई केँ बाद हम् दोनों झड़गये औऱ कुछदेर तक ऐसे हि नंगे एक् दूसरे सें लिपटकर लेटेरह औऱ एक् दूसरे कों किस करतेरहे। कभी वोँ चूचियों कों चूसता रहा औऱ कभी मे उसके लन्ड कों ऐसे दबाती रही जैसे मुझे औऱ चुदाई करनी हैं औऱ लन्ड पकड़ केँ सिसकारियाँ भरतीरही।
जल्द हि मेरी बुर मे लगी क्रीम सूख गयीँ, औऱ फिन थोड़ी देर केँ बाद हम् दोनों उठगये। वहा उसकेपास शॉवर लेने कि कोई स्थान तौ थि नहि, बस मैंने वैसे हि अपने कपड़े पहन लिये औऱ अभि मे अंदर हि बैठीरही। बाहर् सें रोशनी अंदर आँ रही थि।
मेरेघऱ मे भि कोई नहि थां तोँ मुझेकोई प्रॉबलम नहि थि कि रात कहां सोयी थि। रातभर तेज़ बारिश हौ रही थि, इसलिये बिजली औऱ टेलीफोन केँ तार लूज़ हौ गये थें। नां बिजली थि औऱ नाँ टेलीफोन केँ कनेक्शन। आज छुट्टी होने कि वजह सें उसकी दुकान भि बंद थि औऱ उसकेपास कोई वर्कर भि नहि आने वाले थें। इसलिये हमेंकोई मुश्किल नहि हुईँ। सुभह केँ लगभगदस बजे केँ लगभग उसने दुकान कां शटरआधा उठा दिया औऱ मे अभि भि अंदर केँ रूम मे हि बैठी थि। बाहर् अभि भि थोड़ी-थोड़ी बारिश हौ रही थि। थोड़ी देर केँ बाद वोँ लगभग केँ होटल सें कुछ ब्रेकफास्ट पैक करवा केँ लेँ आया औऱ गरमचाय भि। हम् दोनों नें ब्रेकफास्ट किया औऱ गरमचाय पीकर थोड़ी देर अंदर हि बैठेरहे। उसने मुझे बहोत किस किया औऱ मेरी चूचियों कों दबाता हि रहा। मुझेलगा कि मेरी बुर फिन सें गीली होनी शुरुआत हौ गयीँ, हैं औऱ वोँ अबफिन सें फ़ुल चुदाई केँ मूड मे आँ गय़ा हैं पऱ उसने चोदा नहि। शायदयह सोचा होगा कि फिनकभी मौके सें चुदाई करेगा।
जब देखा मार्केट कि कुछ दुकानें खुल चुकी हें तौ मे पहले तौ दुकान केँ बाहर् काऊँटर पे आँ करकऐसे खड़ी होँ गयीँ, जैसेकोई कस्टमर खड़ा होता हैं। अनिल नें कपड़े एक् हफते केँ बाद देने कां वादा किया औऱ कुछदेर केँ बाद मे अपनेघऱ कों चली गई,। घऱजाकर पहले तोँ गर्म पानी कां शॉवर लिया। पिर गर्म-गर्म गरमचाय पी औऱ बेड मे लेट केँ रात कि चुदाई केँ बारे मे सोचने लगी जिससे मेरे चेहरे पे स्वयं-ब-स्वयं मुस्कुराहट आँ गई, औऱ मेराहाथ स्वयं-ब-स्वयं मेरी बुर पे आँ गय़ा औऱ मे बुर कां मसाज करनेलगी। थोड़ी देर केँ बाद मे झड़ गई, औऱ गहरी नींदसो गई,।
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Chapter 31
अब तौ ज़िंदगी बेहद हसीन हौ गयीँ, थि। वैसे मे इसकदर हवस-परस्त (सेक्स-ऐडिक्ट) हौ चुकी थि कि मेरी चुदाई कि तलब मिटती हि नहि थि। हर वक्त‘यह बुर माँगे मोर’ वालीबात थि। खुदा केँ फ़ज़ल सें चुदाने केँ लियेअब तोँ दो-दो मस्त लौड़ों कां इंतज़ाम थां औऱ लेस्बियन सेक्स केँ लिये भि सलमा आँटी औऱ डॉली थि। वैसे भि अब तोँ मे मुकर्रर बाइसेक्सुअल होँ चुकी थि औऱ मर्दों औऱ औरतों कों एक् हि नज़र सें देखती थि। फिनतीन हफ़्तों बाद एक् औऱ वाक़िया हुआ जिसके बाद मेरी हवस-परस्ती अगले मक़ाम पे पहुँच गयीँ, औऱ मे कुत्ते सें भि चुदवाने लगी। मेरीइस बेरहरवी कां क्रेडिट भि सलमा आँटी कों हि जाता हैं जिहोंने मुझेइस लुत्फ़ सें वाक़िफ़ करवाया।
उसदिन मे ग्यारह बजे केँ लगभग दफ़्तर गयीँ, थि। हमेशा कि तरह एस-केँ केँ चेंबर मे पहले तौ काम कि बातों केँ संग-संग दोपैग शराब पिये औऱ फिन एस-केँ सें अपनी बुर औऱ भारी गाँड दोनों मरवायीं क्योंकि एस-केँ केँ उसदिन दोपहर कि फ्लाइट सें चारदिन केँ लिये अहमदाबाद केँ लिये निकलने वाला थां। फिनघऱ आकर थोड़ी देर आराम किया औऱ उसकेबाद खानां खाकर लगभगदो घंटे कम्प्यूटर पे दफ़्तर कां काम किया। फिन साम कों सातबजे केँ लगभग मे रेडी होके सलमा आँटी केँ घऱ गयीँ,। वैसे तौ सलमा आँटी हि अधिकतर मेरेघऱ आतीथीं मगर अश्फ़ाक़ भि दो दिनों सें एक् हफ़्ते केँ लियेटूर पे गयेहुए थें औऱ एस-केँ भि नहि थां तोँ उसदिन मे पहली दफ़ारात कों भि सलमा आँटी केँ घऱ पे हि रुक गयीँ,। हस्ब-ए-दस्तूर हम् दोनों अपने-अपने सैंडलों केँ अलावा बिल्कुल नंगी होँ गयीं औऱ शराब पीतेहुए हम् दोनों नें उनके बेडरूम मे एक् ब्लू-फिल्म देखी। फिन बहुतदेर तक आपस मे गुथमगुथा होकर एक् दूसरे कों चूमा, सहलाया, औऱ सिक्स्टी नाइन पोज़िशन मे एक् -दूसरे कि चूतें चाटती रहीं। फिन हमने आमने-सामने लेटकर आपस मे अपनी टाँगें कैंची कि तरह फंसाकर सलमा आँटी केँ दो-रुखे डिल्डो कां एक्-एक् सिरा अपनी-अपनी चूतों मे घुसेड़ कर बहुतदेर तक चुदाई कां मजा लिया औऱ हम् दोनों कईं दफ़ा फारिग हुईं।
एक् दूसरे केँ आगोश मे थोडा सुस्ताने केँ बाद हम् दोनों फिन व्हिस्की पीने लगीं औऱ सलमा आँटी नें ब्लू-फिल्म कि एक् नयी सि-डीलगा दि। हम् दोनों बेड पऱ हि हेडबोर्ड औऱ तकियों केँ सहारकमर टिकाये टाँगें लंबी करके बैठीथीं। फिल्म केँ पहलेसीन मे दो अंग्रेज़ लेस्बियन औरतें आपस मे हम्-जिंसी चुदाई कां मजा लेँ रहीथीं। इसतरह कि फिल्में मैंने सलमा आँटी केँ संग पहले भि कईं दफ़ा देखीथीं। बहुत गर्मसीन थां औऱ हम् दोनों व्हिस्की कि चुस्कियाँ लेतेहुए वक़फ़े-वक़फ़े सें एक् दूसरे केँ होंठों कों भि चूमरही थीं। मैंने सिसकते हुए सलमा आँटी सें कहा कि “बेहदहॉट सीन हैं आँटी“ तोँ वोँ बोलीं, “जब अगलासीन देखोगी तोँ होशउड़ जायेंगे.!“
हक़ीकत मे उस फिल्म केँ अगलेसीन नें मेरेहोश उड़ा दिये। पिछले सीन वाली लेस्बियन औरतों मे सें एक् महिला नंगी हि कमरे सें बाहर् गयीँ, औऱ जबलौट करआयी तौ उसकेसंग एक् कालेरंग कां बड़ा सां कुत्ता थां जिसके कंधेउस लंबी अंग्रेज़ महिला केँ चूतड़ों केँ ऊपर तक पहुँच रहे थें। उसकेबाद वोँ दोनों औरतें उस कुत्ते केँ संग चुदाई मे शरीक़ होने लगीं। इससे पहले मैंने सुना-पढ़ा अवश्य थां कि कुछलोग इंसानों केँ बजाय जानवरों सें चुदाई करते हें मगर मैंने कभीइस पर्र इतनागौर नहि किया थां। मैंने एक् घूँट मे अपना गिलास खालीकर दिया औऱ ताज्जुब सें आँखें फाड़े उस पर्वर्टेड चुदाई कां दिलफ़रेब नज़ारा देखरही थि। फिल्म मे उन दोनों औरतों कि मस्ती-भरी सिसकियों औऱ चींखों सें ज़ाहिर थां कि कुत्ते केँ बड़ी-सि गाजर जैसे लन्ड सें चुदवाने मे उन्हें बेहदमजा आँ रहा थां। मुझे हवस-ज़दा देखकर सलमा आँटी नें प्रेम सें मेरी चूचियाँ मसलते हुए पूछा, “हैं नाँ कमाल कां सीन.मजा आया?”
“ऊँऊँह। आँटी.दिस इज़सो किंकी। मगर क्याँ यह मुमकीन हैं। ऑयमीन कि हक़ीक़त मे। कुत्ते सें। चुदाई। रियली?” मे इसकदर मग़लूब औऱ इक्साइटिड थि कि ठीक सें बोल भि नहि पारही थि। व्हिस्की कां नशा इक्साइटमेंट मे औऱ इज़ाफ़ा कररहा थां।
सलमा आँटी मेरी रहनुमाई करतेहुए बोलीं, “येस डार्लिंग। यह हक़ीक़त हि हैं। निहायत अमेज़िंग हक़ीक़त! इसमें हैरानी वालीकौन सि बात हैं। दुनिया भर मे काफ़ी औरतें इसतरह कि चुदाई कां खूबमजा लेती हें। कुत्ते मर्दों केँ मुक़ाबले कहीं ज़्यादा एनर्जेटिक होते हें औऱ पूरे जोश-ओ-खरोश सें ज़बर्दस्त चुदाई करते हें! मालूम हैं कुत्ते कां लन्ड असल मे बुर केँ अंदर जाकर फूलता हैं.?” यह कहतेहुए उन्होंने शोखी सें मुस्कुराते हुए मुझेदेख करआँख मार दि।
“आप् तोँ ऐसेकह रही हें जैसे कि आप् कों इसका तजुर्बा.?” मे हंसते हुए बोलने लगी तौ आँटी नें कबूल करतेहुए कहा, “हाँ मेरीजान। तजुर्बे सें हि बोलरही हूं.!” सलमा आँटी नें कन्फेस किया तौ मे हक्की बक्की रह गयीँ, औऱ मेरा मुँह खुला कां खुलारह गय़ा। “अरे अल्लाह। रियली.? यह आप् क्याँ कहरही होँ। आप् कुत्ते सें?” मेरी आवाज़ सदमे औऱ व्हिस्की केँ नशे सें लरज़रही थि। दो मिनट तक हम् दोनों मे सें कोई नहि बोला।
“शायद मुझेयह सभी तुम्हें नहि बताना चाहिये थां!” मेरा रिएक्शन देखकर आँटी नें कहा। “मे.नहि। मे मे वोँ। मेरा मतलब.कब सें। क्याँ ऑस्कर केँ संग?” पशोपेश कि हालत मे मैंने हकलाते हुएकहा।
सलमा आँटी नें साइड-टेबल सें व्हिस्की औऱ सोडे कि बोतल लेकर हम् दोनों केँ खाली गिलासों मे पैग बनाये औऱ फिन मुझे देतेहुए धीरे-धीरे सें बोलीं, “येस डियर। ऑस्कर केँ संग। हि इज़ वंडरफुल। ऑस्कर सें तोँ पिछले पाँच-छः सालों सें तकरीबन हर रोज़ चुदवा रही हूं। मगर ऑस्कर मेरी ज़िंदगी मे पहला कुत्ता नहि हैं। बल्कि मेरी बुर सबसे पहले किसी मर्द सें नहि बल्कि कुत्ते सें हि चुदी थि!” फिन सलमा आँटी नें तफ़्सील बताया कि केसे बीस-इक्कीस साल कि उम्र मे उन्होंने औऱ उनकीदो लेस्बियन सहेलियों नें एक् दिन अपने पालतू कुत्ते कों फुसला कर अपनी वर्जिनिटी खोयी थि। उसकेबाद तौ जब भि उन्हें मौका मिलता वोँ अपने कुत्ते सें चुदवा करखूब मजा करतीथीं औऱ यह सिलसिला उनकी विवाह तक ज़ारी रहा। विवाह होने केँ बाद वोँ कईं सालों तक इसतरह कि बेरहरावी सें दूर रहीं। मगर उनके शौहर मर्चेंट नेवी मे थें औऱ साल मे कभी-कभार हि छुट्टी पे घार आँ पाते थें तोँ अपनी जिस्मनी तस्कीन केँ लिये आँटी जल्द हि गैर-मर्दों औऱ औरतों केँ संग हमबिस्तर होने लगीं। फिन कुछ सालों बादजब ऑस्कर उनकी ज़िंदगी मे आया तोँ ज़ाहिर हैं कि वोँ स्वयं पर्र काबू नहि रख सकीं औऱ उससे चुदवाना शुरुआत कर दिया।
मे व्हिस्की पीतेहुए हैरत सें आँटी कि बातें बड़ेगौर सें सुनरही थि औऱ मेरी बुर बेहद गीली होँ गयीँ, थि औऱ पूरे शरीर मे औऱ दिमाग़ मे सनसनी सि फैली हुई थि। अगर्चे यहसभी पर्वर्टिड थां मगर शायदइसी वजह सें मुझेयह सभी बेहद दिलचस्प औऱ इक्साइटिंग लगरहा थां। मैंने पूछा, “कैसा। कैसा लगता हैं। कुत्ते सें चुद। चुदवाना?”
“जस्ट अमेज़िंग। गज़ब कि मस्ती भरी औऱ बेइंतेहा तसल्ली बख़्श धुंआधार चुदाई होती हैं। ऑस्कर जब मेरीकमर पे चढ़ केँ औऱ मेरी रसीली गाँड सें चिपककर मुसलसल पंद्रह बीस मिनट तक अपना अज़ीम लन्ड मेरी बुर मे दनादन पिस्टन कि तरह अंदर-बाहर् चोदता हैं तोँ। बस जन्नत कि सैरकरा देता हैं। बुर भि बार-बार पानी छोड़-छोड़ केँ बेहाल हौ जाती हैं। कुत्ते कां लन्ड बुर मे अंदर जाने केँ बाद पूरा फूलता हैं। औऱ फिनजब उसके लन्ड कि जड़ मे गाँठफूल कर बुर मे फ़ंस जाती हैं तोँ वोँ एहसास मे बयान नहि कर सकती। बीस-बीस मिनट तक फिन हम् दोनों चिपके रहते हें औऱ उसकीमनि मेरी बुर मे मुसलसल गिरती रहती हैं.!” आँटी नें मस्ती भरे अंदाज़ मे कहा औऱ फिन मेरे होंठों कों चूमते हुए बोलीं, “वैसे तुम्हें स्वयं हि ऑस्कर सें चुदवा करयह निहायत अमेज़िंग मजा लेँ कर देख्ना चाहिये!”
सलमा आँटी कि बात सुनकर मे व्हिस्की कां बड़ा सां घूँट पीतेहुए लरजती हुई आवाज़ मे बोलीं, “क्याँ.? मे। मे। रियली। मगर.आर यू श्योर.!” कुत्ते सें चुदवाने केँ ख्याल सें मेरे शरीर मे सनसनती लहरें दौड़ने लगीं। फिन आँटीउठ कर हाई-हील केँ सैंडलों मे अपनी मस्त मोटी गाँड मटकाती हुई ऑस्कर कों लाने केँ लिये कमरे सें बाहर् चली गयीं। साम सें हम् दोनों नें बहुत ड्रिंक करली थि औऱ सलमा आँटी केँ कदमों मे थोड़ी-सि लड़खड़ाहट ज़ाहिर हौ रही थि। दो मिनटबाद हि वोँ दूसरे कमरे सें ऑस्कर कों अपनेसंग लेकर वापस आयीं औऱ बेड पर्र बैठते हुएशोख अंदाज़ मे बोलि, “सोआरयू तैयार। अपनी ज़िंदगी कि सबसे बेहतरीन चुदाई कां मजा लेने केँ लिये?”
“ऊँहूँ?” मैंने धीरे-धीरे सें मुस्कुराते हुए गर्दन हिलायी। हमारे घऱ मे कभी भि कोई पालतू कुत्ता याँ कोई औऱ जानवर नहि थां इसलिये मुझे कुत्तों केँ ज़ानिब ज़्यादा जानकारी नहि थि। इसवजह सें थोड़ी एइंगज़ाइअटी औऱ घबराहट सि महसूस हौ रही थि मगरनशे मे मतवाला हवस-ज़दा दिमाग़ औऱ बदनइस बेरहरावी मे शऱीक होने केँ लिये बेकरार थां। ऑस्कर भि बेड पर्र चढ़ गय़ा औऱ सलमा आँटी केँ सैंडल औऱ पांव चाटने लगा। आँटी उसकी गर्दन सहलाने लगीं औऱ मुझे भि ऐसा हि करने कों कहा तोँ मे भि उसकीकमर सहलाने लगी। ऑस्कर कां नोकिला लाल लन्ड लगभग एक्-दो इंच अपने बाल-दार खोल मे सें बाहर् निकला हुआ थां। फिन आँटी नें ऑस्कर कां चेहरा मेरी टाँगों कि तरफ़ किया औऱ उसे मेरी बुर चाटने केँ लियेकहा तोँ बासाख़्ता मैंने अपनी टाँगें फैलाकर अपनी बुर खोल दि। ऑस्कर नें मेरी टाँगों केँ बीच मे अपना मुँहडाल कर अपनी लंबी भीगी ज़ुबान मेरी रानों पर्र फिरायी तौ अजीब सां एहसास हुआ। तीन-चार दफ़ा मेरी रानों कों चाटने केँ बाद उसने अपना थूथना मेरी भीगी बुर पर्र लगाकर अपनी ज़ुबान नीचे सें ऊपर चाटते हुए मेरी क्लिट पर्र भि फिरायी तोँ मेरा पुराबदन थरथरा गय़ा। सलमा आँटीउसे सहलाते-पुचकरते हुए उसकी हौंसला अफ़ज़ाई कररही थीं।
ऑस्कर बहुतजोश मे मेरी बुर चाटने लगा। उसकी ज़ुबान मेरी रसीली-भीगी बुर मे घुसते हुए उसमें सें निकलता हुआरस चाटरही थि। मे आँखें बंद करके मस्ती मे ज़ोर-ज़ोर सें चींखने लगी। एस-केँ, अनिल, सलमा आँटी औऱ डॉलीसब सें बुर चटवाने मे मुझे बेहदमजा आता थां मगर ऑस्कर कि ज़ुबान कि बात हि अलग थि। अपनी बुर औऱ क्लिट पर्र उस जानवर कि लंबी-खुर्दरी भीगी ज़ुबान कि चटाई सें मेराबदन बेपनाह मस्ती मे भरकर बुरीतरह थरथरा रहा थां। उसकी ज़ुबान मेरी बुर मे इतनी अंदर तक जारही थि जहाँ तक किसी इंसान कि ज़ुबान कां पहुँच पाना मुमकिन नहि थां। एक् तरह सें वोँ अपनी ज़ुबान सें मेरी बुर चाटने केँ संग-संग चोद भि रहा। मैंने ज़ोर-ज़ोर सें कराहते हुए मस्ती मे अपने घुटने मोड़कर खाट मे अपने सैंडल गड़ाते हुए अपने चूतड़ ऊपरउठा दिये औऱ अपनी बुर उसके थूथने पर्र ठेल दि। उसकी ज़ुबान मेरी बुर मे अंदर तक घुसकर फैलती औऱ फिन बाहर् फिसलकर मेरी धधकती क्लिट पऱ दौड़ती।
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