𝐊𝐊𝐊 - (𝐊𝐢𝐫𝐚𝐧 𝐊𝐢 𝐊𝐚𝐡𝐚𝐧𝐢) | incest indian sex story – New Episode
Chapter 5
अपने लन्ड कों भारी गाँड केँ अंदर रखे-रखे हि उसने मुझेपलट दिया। मे उलटीलेट गयीँ, औऱ वोँ मेरेऊपर आकर मेरी रसीली गाँड मारने लगा। मुझे बहोत हि तकलीफ होँ रही थि। मेरीआँख सें आँसू निकलरहे थें पऱ वोँ मेरी एक् नहि सुनरहा थां औऱ गोल गाँड मारने मे बिज़ी थां। मेरेपेट केँ नीचे उसने एक् तकिया जैसा कुशनरख दिया थां जिससे मेरीगोल गाँड थोड़ी ऊपरउठ गयीँ, थि औऱ वोँ गोल गाँड मे अपना लन्ड पेलरहा थां। वोँ अपने लन्ड कों पूरा निकाल-निकाल केँ मेरी छोटी सि रसीली गाँड मे घुसेड़ रहा थां औऱ फिन उसकी स्पीड बढ़ गयीँ,। जैसे-जैसे उसके झटके तेज़ हौ रहे थें, तकलीफ केँ मारे मेरीजान हि निकली जारही थि औऱ फिन अचानक मुझे उसकी मलाई अपनीगोल गाँड मे गिरती महसूस हुइ औऱ थोड़ी हि देर मे अपने लन्ड कि मलाई मेरी मोटी गाँड मे गिरा केँ वोँ शाँतपड़ गय़ा औऱ मेरेबगल मे आकरलेट गय़ा। पऱ मेरी मोटी गाँड तोँ दर्द केँ मारेफटी जारही थि। जितना मजा चुदाई मे आया थां अब उतनी तकलीफ होँ रही थि। मे सुहैल सें बोलि कि “आगे सें कभी मेरी भारी गाँड नहि मारना, मुझे बहोत हि दर्द होँ रहा हैं। “
वोँ हंसा औऱ कहा कि “वोँ तौ मेरा लन्ड गलती सें तुम्हारी रसीली गाँड मे घुस गय़ा तोँ मुझेमजा आया औऱ मैंने मोटी गाँड मार दि, नहि तौ मेरा इरादा तौ तुम्हारी भारी गाँड मारने कां नहि थां। ठीक हैं अगर तुम्हें पसन्द नहि तौ अगलीबार नहि मारूँगा। “ फिन थोड़ी देर केँ बाद एक् औऱ टाईम उसने मुझे चोदा जिससे मेरी रसीली गाँड मे तकलीफ खतम हौ गयीँ, औऱ बुर मे फिन सें मजा आँ गय़ा औऱ पता नहि ऐसी चुदाई केँ बाद मे कबसो गई,।
सुभहउठी तौ देर होँ चुकी थि। आज कॉलेज नहि जानां थां। ब्रेकफास्ट कर केँ थोड़ी देर नीचे हि हम् सभी बातें करतेरहे औऱ बसऐसे हि सारादिन गुज़र गय़ा। मे औऱ सुहैल अगले एक् हफते तक खूब चुदाई करतेरहे रोज़रात कों वोँ माँ डैडी केँ सो जाने केँ बादऊपर आँ जाता औऱ हम् जमकर चुदाई करते। एक् हफते केँ बाद वोँ चला गय़ा औऱ जाने सें पहले मे उससे लिपट केँ खूब रोयी। मुझेलगा जैसेकोई मेरालवर मुझे छोड़ केँ जारहा हैं। वोँ मेरे सारे शरीर पे हाथ फेरता रहा औऱ प्रेम करतारहा औऱ कहा, “सुनो किरन, अगर तुम्हारे पीरियड्स मे कोई गडबड़ होँ जाये तोँ मुझे फ़ौरन मोबाइल कर देना, मे कुछ इंतज़ाम कर दुँगा!” पऱ अगले हि महीने मे मेरे पीरियड्स टाईम सें कुछ पहले हि शुरुआत होँ गये तौ मैंने इतमिनान कि साँसली औऱ सुहैल कों मोबाइल कर केँ बता दिया। फिन जबकभी सुहैल आता तौ हम् खूब चुदाई करते।
मैंने अपनी ग्रेजुयेशन पूरीकर ली औऱ एक् दिन मुझेपता चला केँ मेरा निकाह किसी अशफाक नाम केँ व्यक्ति सें फिक्स हौ गय़ा हैं। उसकेघऱ वाले हमारे घऱआये थें औऱ मुझे मनपसंद भि करगये औऱ फिन निकाह कि डेट फिक्स कर केँ मेरा निकाह कर दिया गय़ा।
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Chapter 6
मे अभि निकाह कि डीटेल्स मे नहि जानां चाहती औऱ डायरेक्ट अपनी सुहाग रात केँ बारे मे बता देती हूं। निकाह होँ गय़ा औऱ मे अपने ससुराल आँ गयीँ,। साराघऱ अच्छी तरह सें सजाहुआ थां। घऱ बहोत बड़ा भि नहि औऱ बिल्कुल छोटा भि नहि थां, बसठीक ठाक हि थां। उसकेघऱ कों पहुँचते-पहुँचते रात होँ चुकी थि। डिनर तोँ कर हि चुके थें मैरिज हॉल मे। अशफाक कां रूम भि ठीकठाक हि थां। बेड पे चमेली केँ फूल बिखरे पड़े थें। पिंककलर कां नरमबेड बहोत अच्छा लगरहा थां। सारे कमरे मे चमेली केँ फूलों कि भीनी भीनी खुशबू आँ रही थि। बेहद अच्छा लगरहा थां। एक् दम सें ऐसे हि रोमैंटिक थां जिसकी हर लड़की ख्वाहिश करती हैं।
अशफाक कि छोटी बेहन, रुखसाना नें मुझेबेड पे बिठा केँ मुस्कुराते हुएकहा कि “भइयाजान अभि आँ जायेंगे, आप् थोडा रेस्ट लेँ लें” औऱ कमरे सें चली गयीँ,। मुझे अपनी सहेलियों केँ किस्से यादआने लगे जिनकी विवाह होँ चुकी थि। किसी नें कहा कि मेरी तोँ रातभर चुदाई हुइ औऱ सुभह मुझसे चला भि नहि जारहा थां। किसी नें कहा थां कि बसऐसे हि रहा, कोई खासमजा नहि आया थां। किसी नें कहा कि अपने लौड़े कों बुर केँ अंदर डालने सें पहले हि बुर केँ ऊपर अपनी मलाई निकाल केँ सो गय़ा थां। मे बहुत एक्साईटेड थि कि पता नहि मेरा क्याँ हशर होगा क्योंकि सुहैल सें चुदवाये हुए भि तकरीबन एक् साल सें ज्यादा हि होँ चुका थां। बुर केँ मसलफिन सें टाइट होँ गये थें। थोड़ी हि देर मे वोँ कमरे मे आँ गय़ा। अशफाक बहोत स्मार्ट लगरहा थां। गोरारंग, मीडियम हाईट औऱ मीडियम बिल्ट। सभी मिलाकर एक् अच्छा स्मार्ट व्यक्ति लगरहा थां। मुझे अपनी फ्रैंड्स कि बातें याद आँ रही थि जिनकी विवाह हौ चुकी थि, जैसे कि सुहाग रात कों क्याँ होता हैं औऱ केसे हसबैंड अपनी वाइफ कों अपनी बातों सें पता केँ चोद डालता हैं औऱ लड़की कों कितना मजाआता हैं। औऱ संग मे हि मुझे सुहैल भि याद आँ गय़ा औऱ सुहैल केँ संग हुई मेरी पहली चुदाई भि मुझेयाद आँ गई, तौ मस्ती सें मेरा शरीर टूटने लगा औऱ एक् लंबे मोटे लन्ड कां सपना लिये बैठीरही, जोँ मेरी बुर मे घुस केँ मुझे चोदेगा, मेरी प्यासी बुर कि प्यास कों बुझायेगा औऱ मजा देगा।
अशफाक कमरे केँ अंदर आँ गय़ा औऱ बेड पे बैठ गय़ा। पहले तौ मेरी हुस्न कों निहारता रहा, मेरे गालों पे हाथ फेरता रहा औऱ फिनगाल पे किस किया तोँ मेरे शरीर मे बिजली दौड़ने लगी औऱ बदन जलनेलगा। थोड़ी देर मे वोँ उठा औऱ अपने कपड़े चेंजकर केँ बेड पे आँ गय़ा औऱ बहोत धीमी रोशनी वाला लाइट पिंककलर कां नाइट लैंपजला दिया। मेरादिल ज़ोर-ज़ोर सें धड़कने लगा। सारेबदन सें पसीना छूटने लगा औऱ मुँह सें गर्म-गर्म साँसें निकलने लगी। अब अशफाक चेंजकर केँ आँ गय़ा औऱ हम् दोनों लेटगये। पहले तोँ मेरी खूबसुरती कों निहारता रहा औऱ आहिस्ता उसकेहाथ मेरी चूचियों पे आँ गये औऱ वोँ उनको दबाने लगा तोँ बदन मे सनसनी सि फैल गयीँ,। ऐसे हि बातें करते-करते वोँ मेरे कपड़े उतारता चला गय़ा। सारे कपड़े निकाल केँ मुझे नंगाकर दिया। मेरे मुँह सें एक् बात भि नहि निकलरही थि। नयेघऱ मे नये लोगों केँ संग रहने सें एक् नयापन हि लगरहा थां। सुहैल तोँ फिन भि कज़न थां, उतना नयापन नहि महसूस हुआ थां मगरयहा तौ हरकोई अजनबी थां। शरम भि आँ रही थि औऱ एक्साइटमेंट भि थि। मे बेड पे नंगी लेटीरही। शरम सें बुराहाल थां पर्र क्याँ करती, ज़माने केँ रिवाज यही थें कि पहलीरात कों हसबैंड अपनी वाइफ कों चोद देता हैं औऱ सारी उम्र केँ लिये वोँ सिर्फ़ अपने हसबैंड कि हि होकेरह जाती हैं। वोँ थोड़ी देर तक मेरे नंगेबदन कों देखता रहा औऱ अपनेहाथ मेरे सारेबदन पे फेरता रहा। मेरे सारेबदन मे जैसे चिंटियाँ घूमने लगीहों। बुर मे भि अब खुजली शुरुआत होँ गई, थि।
वोँ मेरे नंगेबदन पे हाथफेर रहा थां। वोँ मेरी चूचियों कों दबारहा थां औऱ कभी-कभी चूचियों कों चूस लेता। धीरे धीरे उसकाहाथ मेरी बुर पे आँ गय़ा औऱ वोँ मेरीउसी दिन कि शेव कि हुईँ मक्खन जैसी चिकनी बुर पे आँ गय़ा औऱ वोँ बुर कां मसाज करनेलगा। मेरेबदन मे बिजली दौड़रही थि औऱ मुझे बहोत अच्छा लगरहा थां। मैंने दिल मे सोचा कि यह तौ खिलाड़ी लगरहा हैं, शायद चुदाई कां एक्सपीरियंस होगा औऱ उसकाहाथ मेरी बुर पे लगते हि जैसे मेरी बुर मे फ्लड आँ गय़ा औऱ वोँ बे-इंतहा गीली होँ गयीँ, औऱ रस सें भर केँ अब रसीली बुर हौ गयीँ,।
अशफाक नें अपने कपड़े भि निकाल दिये औऱ नंगा होँ गय़ा। मैंने एक् तिरछी नज़र उसके लन्ड पे डाली तोँ दिलधक सें रह गय़ा। उसका लन्ड बसऐसे हि थां, कोईखास नहि थां, टोटल इरेक्ट होने केँ बाद शायदचार इंच याँ पाँचइंच कां हि होगा। मैंने सोचा कि शायद थोड़ी देर केँ बाद वोँ औऱ अकड़ केँ बड़ा हौ जायेगा। खैरअब वोँ मेरी चूचियों कों चूसरहा थां औऱ हाथ सें मेरी बुर कां मसाजकर रहा थां। कभी-कभी बुर केँ अंदर अपनी उंगली डाल देता तोँ मे “ससससीसीसी ईईईईई” कर केँ सिसकरी लें लेटी।
अब उसने मेराहाथ अपनेहाथ मे लेकर अपने लन्ड पे रख दिया। मे कुछदेर तक ऐसे हि अपनाहाथ उसके लन्ड पे रखीरही तोँ उसने मेरेहाथ कों अपनेहाथ सें पकड़ केँ दबाया तौ मे समझ गयीँ, कि शायद वोँ चाहता हैं कि मे उसका लन्ड अपनी मुट्ठी मे लेकर दबाऊँ। मैंने उसके लन्ड कों एक् याँ दोबार हि दबाया थां कि उसने मेराहाथ हटा दिया औऱ सीधा मेरेऊपर चढ़आया औऱ मेरी टाँगों कों फैला केँ मेरेऊपर लेट गय़ा। लन्ड कों मेरी बुर केँ लिप्स केँ अंदर सुराख पे सटाया औऱ झुक केँ मुझेकिस करनेलगा औऱ एक् हि झटके मे उसका लन्ड मेरी समंदर जैसे गीली बुर केँ अंदरघुस चुका थां औऱ वोँ अचानक ज़ोर-ज़ोर सें धक्के मारने लगा औऱ बसचार याँ पाँच हि धक्के लगाया थां कि उसके मुँह सें “ऊऊऊऊहहहह” कि आवाज़ निकली औऱ उसकी मलाई मेरी बुर मे गिर गयीँ,। मुझे तोँ उसका लन्ड अपनी बुर केँ अंदरसही तरीके सें महसूस भि नहि हुआ औऱ उसकी चुदाई पूरी होँ चुकी थि। मेरीकुछ फ्रैंड्स नें बताया थां कि कभी-कभी एक्साइटमेंट कि वजह सें औऱ कभी बुर कि गरमी सें लन्ड सें मलाई जल्द हि निकल जाती हैं पऱ कुछ दिनों मे जब चुदाई डेली करते रहते हें तोँ फिनठीक हौ जाता हैं औऱ अच्छी तरह सें चोदने लगाता हैं औऱ यह कि ऐसाअगर कभी हौ तोँ कोई फिक्र कि बात नहि हैं। यहीसोच केँ मे खामोश होँ गयीँ, कि हौ सकता हैं कि एक्साइटमेंट याँ बुर कि गर्मी सें वोँ जल्द हि झड़ गय़ा होँ पऱ बाद मे अच्छी तरह सें चोद डालेगा।
मैंने भि सोचा कि शायद एक्साइटमेंट मे उसकी क्रीम जल्द निकल गई, होगी औऱ यहकोई नयीबात नहि होगी। वोँ गहरी-गहरी साँसें लेताहुआ मेरे शरीर पे पड़ारहा औऱ मेरी बुर मे पहले सें ज्यादा तूफ़ान उठरहा थां औऱ मेरामन कररहा थां कि किसीतरह सें सुहैल आँ जाये औऱ मुझे इतना चोदे कि मेरी बुर फट जाये पर्र ऐसा हौ नहि सकता थां नां। मे कुछ नहि कर सकती थि। इंतजार किया कि शायद अशफाक केँ लन्ड मे फिन सें जान पड़ेगी औऱ वोँ कुछसही ढंग सें चुदाई करेगा पर्र ऐसाकुछ नहि हुआ औऱ वोँ मेरेबगल मे लेट केँ गहरी नींदसो गय़ा औऱ एक् हि मिनट मे उसके खर्राटे गूँजने लगे।
सुभह हुई तौ उसकी बेहन रुखसाना कमरे मे आयी औऱ मुस्कुराते हुए एक् आँखबंद कर केँ पूछा, “क्यूं भाभीजान! रात सोयी याँ भइयाजान नें सारीरात जगाया?” मे उस पगली कों क्याँ बताती कि उसका भइया मेरी बुर मे आगलगा केँ सो गय़ा औऱ मे सारीरात जागती रही औऱ इंतजार करतीरही कि होँ सकता हैं कि उसका लन्ड फिन सें जाग जाये पर्र ऐसाकुछ हुआ नहि औऱ रुखसाना सें केसे बताती कि उसके भइया कों आग लगाना तोँ आता हैं पऱ उसआग कों बुझाना नहि आता। मैंने बनावटी लज्जा सें नज़र नीचेकर ली औऱ मुस्कुरा दि औऱ दिल मे सोचा कि पता नहि इसे कैसा शौहर मिलेगा, पहलीरात कों चोद-चोद केँ बुर कां भोंसड़ा बना देगा याँ मेरीतरह बुर मे आगलगा केँ सो जायेगा। तब मे पूछूँगी उससे कि रात कैसी गुजरी, रातभर चुदाई होतीरही याँ स्वयं मलाई निकाल केँ सो गय़ा औऱ तुम्हारी बुर मे आगलगा केँ तुम्हें सोने नहि दिया। मगर अभि इस प्रश्न कों पूछने केँ लिये तोँ टाईम हैं।
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Chapter 7
इसीतरह सें एक् हफ्ता हौ गय़ा औऱ मुझेकोई खासमजा नहि आया। बस वोँ अपने हिसाब सें चोदता रहा औऱ हरबार चोद केँ मुझसे पूछता कि "मजाआया किरन?" तौ मे मुँह नीचेकर केँ चुप हौ जाती औऱ वोँ समझता कि शायद मे उसकी चुदाई कों इंजॉय कररही हूं। पता नहि क्याँ प्रॉबलम थां उसको कि चुदाई सें पहले उसका लन्ड अकड़ता तोँ थां मगर बुर कि गर्मी सें उसकी मलाईदूध बन केँ निकल जाती थि। ऐसा लगाता थां कि लन्ड बुर केँ अंदर सिर्फ़ मलाई छोड़ने केँ लिये हि जाता हैं। मुश्किल सें दो याँ तीन हि धक्कों मे उसकाकाम तमाम होँ जाता थां। शुरुआत-शुरुआत मे तोँ मे समझी कि शायद एक्साइटमेंट कि वजह सें होगा औऱ समय केँ संगठीक होँ जायेगा पर्र ऐसाकुछ नहि हुआ। विवाह केँ बाद पूरेदो हफ्ता उसकेघऱ रहकर हम् शहर मे चलेआये जहाँ उसका बिज़नेस थां।
अशफाक केँ घऱ वालेशहर केँ आऊटर मे रहते हें औऱ अशफाक एक् बिज़नेसमैन हैं। उसका रेडीमेड गार्मेंट्स कां बिज़नेस हैं जोँ बहुत अच्छा चलता हैं। वोँ अपने बिज़नेस केँ लिये डेली आऊटर सें शहर मे नहि आँ सकता थां औऱ इसी लिये उसने एक् शानदार फ्लैट शहर मे लेँ रखा थां जिस मे हम् दोनों हि रहते हें। घऱ मे किसी चीज़ कि कमी नहि थि। कभी-कभी उसके माँ औऱ डैडी आँ जाते याँ कभी उसकी बेहन रुखसाना आँ जाती तोँ एक् याँ दोदिन रह केँ चले जाते। घऱ मे मे अकेली हि रहती हूं।
समयऐसे हि गुजरता रहा। वोँ मेरी बुर मे सारीरात आग लगाता रहता औऱ स्वयं सुभह सुभहउठ केँ चला जाता औऱ मे जलती हुईँ बुर केँ संग सारादिन गुजारती रहती। करती भि तौ क्याँ करती। इसी तरह सें तीन महीने गुज़र गये। बहोत बोर होती रहती थि घऱ मे बैठे-बैठे। सभीनये -यहलोग थें। किसी सें भि कोईजान पहचान नहि थि। हमारे घऱ केँ लगभग हि एक् लेडी रहती थि। उनकानाम थां सलमा। वोँ होंगी कोई छत्तीस याँ सैंतीस साल कि। बहुतखुश अखलाक़ औऱ तहज़ीब याफ्ता स्त्री थीं। वोँ अक्सर हमारे घऱ आँ जाया करती हें औऱ इधरउधर कि बातें करती रहती हें। मे उन्हें आँटी कहनेलगी। वोँ जबआती तोँ दो-तीन घंटे गुज़ार केँ हि जाती। कभी खानां पकाने मे भि सहायता कर देती औऱ कभी-कभी तौ हम् दोनों मिल केँ खानां भि खा लेते। वोँ अपने अपियरेंस कां बेहद ख़याल रखतीथीं औऱ हमेशा सलीके सें कपड़े, गहने वगैरह पहने होतीथीं औऱ हल्के सें मेकअप मे बेहद हसीन दिखती थीं। मैंने भि उनसे बहुतकुछ सीखा।
अशफाक तोँ बिज़नेस केँ सिल सिले मे शहर सें बाहर् जाते हि रहते हें औऱ जबकभी किसीदूर केँ शहर जानां होता तोँ वोँ तीन-चार दिन केँ लिये जाते औऱ मे घऱ मे अकेली हि रहती हूं। कईबार आँटी नें कहा कि “किरन तुम् अकेली रहती होँ, अगर तुम् बोलो तोँ मे तुम्हारे पास आँ केँ सो जाया करूँ!”
मैंने हमेशा हँसते हुए उनकेइस इरादे कों टाल दिया औऱ अब वोँ मेरेसंग सोने कि बात नहि करती। कभी-कभी अगर बातें करते-करते रात कों देर भि होँ जाती तोँ वोँ अपनेघऱ चली जाती थि। उनके शौहर मर्चेंट नेवी मे इंजीनियर थें औऱ साल मे दो-तीन दफ़ाकुछ हफ़्तों कि छुट्टियों मे आते थें। उनकी बारहसाल कि एक् बेटी थि जोँ बोर्डिंग विद्यालय मे पढ़ती थि। उनकेपास एक् बड़ा सां कुत्ता थां जिसे वोँ दिल-ओ-जान सें चाहती थीं। सलमा आँटी अपने कुत्ते केँ संग अकेली रहतीथीं।
एक् दिन आँटी दोपहर केँ समय आँ गयीं। मे उसीसमय बाहर् सें कुछ शॉपिंग करके वापस लौटी थि औऱ गरमचाय पीकर थोडा सुस्ताने कां दिलकर रहा थां क्योंकि आज बादल छायेहुए थें औऱ कभी भि बारिश होँ सकती थि औऱ ठंडीहवा चलरही थि। हकीकत मे मौसम सुहाना हौ रहा थां पर्र मुझेरात केँ गैर तसल्ली बक्श सैक्स सें सारा शरीर टूटाजा रहा थां। मैंने घऱ मे कदमरखा हि थां औऱ अभि सैंडल भि नहि उतारे थें कि ठीकउसी टाईम पे आँटी आँ गई,। आँटी नें पूछा कि मे कहींजा रही हूं क्याँ तोँ मैनेकहा। “नहि आँटी! बल्कि अभि-अभि आयी हूं” तौ आँटी नें पूछा केँ “थक गई, होगी। बोलो तौ मे तुम्हारा बदनदबा दूँ” तौ मैंने हँस केँ कहा कि “नहि आँटी, ऐसी कोईबात नहि। “ इतनीदेर मे एक् दम सें बहोत ज़ोरों कि बारिश शुरुआत हौ गयीँ,। मेरेइस घऱ मे आने केँ बादयह पहली बारिश थि तौ मेराजी चाहरहा थां कि मे ऊपरजा केँ बालकोनी सें बारिश देखूँ। इसी लिये मैंने आँटी सें कहा कि “चलिये ऊपरचल केँ बैठते हें औऱ बारिश कां मजा लेते हें। “
हम् दोनों बालकोनी मे आँ गये। हमारा फ्लैट आठवीं मंज़िल पर्र बिल्डिंग कां सबसेऊपर वाला फ्लैट हैं औऱ हमारी बिल्डिंग केँ सामने मार्ग थि औऱ दूसरी तरफ छोटी सि मार्केट थि जहाँ सब्ज़ी, दूध औऱ तकरीबन डेली इस्तेमल कि सब चीज़ें मिल जाया करती थि। इतनी बारिश कि वजह सें सारा मार्केट सुना पड़ाहुआ थां। कभी-कभी कोई इक्का दुक्का सायकल वाला याँ कोई व्यक्ति बरसाती ओढ़े गुज़र जाता थां। हम् दोनों बालकोनी मे रखी कुर्सियों पे बैठगये औऱ बाहर् कां सीन देखने लगे। कभी-कभी बारिश कां थोडा सां पानी हमारे ऊपर भि गिर जाता थां। मौसम ठंडा होँ गय़ा थां औऱ ऐसा अंधेरा थां कि साम केँ पाँचबजे हि ऐसालग रहा थां जैसेरात केँ आठ-नौबज रहेहों। मे चाय़ बनाने उठी तौ आँटी नें कहा कि, “ऐसे मौसम मे जिन याँ रम पीने मे बहोत मजाआता हैं!” मे उनकीबात सुनकर चौंक पड़ी। फिर भी मे स्वयं अशफाक केँ कहने पऱ उसकेसंग कभी-कभी बियरपी लेती थि पर्र आँटी पीने कां शौक रखती होंगी, इसबात कि मुझे उम्मीद नहि थि। मैंने आँटी सें कहा कि “जिन याँ रम तौ नहि हैं क्योंकि अशफाक व्हिस्की पीना मनपसंद करते हें.” तोँ आँटी नें कहा कि “वही लें आओ। “
मे जा केँ दो ग्लास औऱ अशफाक कि अलमारी सें व्हिस्की कि बोतल लेँ आयी। व्हिस्की पीने कां यह मेरा पहला मौका थां। हम् दोनों पैग पीते-पीते बाहर् कां सीन देखते रहे औऱ इधरउधर कि बातें करते-करते बारिश केँ मज़े लेनेलगे। एक् छोटा सां पैग पीने सें हि बदन मे थोड़ी सि गर्मी आँ गयीँ,। आँटी तोँ इतनीदेर मे एक् बड़ापैग पी चुकीथीं औऱ दूसरा पैगखतम होने कों थां। उन्होंने जोर देकर मेरे लिये अपने जैसा हि बड़ा सां पैगबना दिया। वोँ मेरे लेफ़्ट साईड मे बैठीथीं औऱ ईधर-उधर कि बात करते-करते पता नहि आँटी कों क्याँ सूझा कि मुझसे मेरी सैक्स लाईफ केँ बारे मे पूछने लगी। मेरीसमझ मे नहि आँ रहा थां कि क्याँ बताऊँ औऱ व्हिस्की कां हल्का सां सुरूर भि छानेलगा थां। आँटी एक्सपीरियंस्ड थीं। शायद मेरी खामोशी कों घूर गयीं औऱ धीरे-धीरे सें पूछा, “रात कों मजा नहि आता नाँ??”
मैंने नां मे सर हिलाया मगरकुछ ज़ुबान सें बोलि नहि। उन्होंने मेराहाथ अपनेहाथ मे लिया औऱ धीरे-धीरे सें दबाया औऱ कहा कि “मुझे भि नहि आता, मे भि ऐसे हि तड़पती रहती हूं। “ औऱ मेराहाथ अपनेहाथ मे लेकर उसका मसाज करनेलगी। उन्होंने अपनी सुहाग रात केँ बारे मे बताया जौ मेरी सुहाग रात कि हि तरह हुई थि औऱ फिन बताया कि केसे वोँ अपनी सैक्स कि प्यास कों बुझाती हें। मे हक्की बक्की उनकी किस्सा सुनरही थि। उन्होंने बताया कि उनका एक् दूर कां भाँजा हैं जोँ शहर मे हि कॉलेज मे पढ़ता हैं औऱ हॉस्टल मे रहता हैं। वोँ कभी-कभी आँटी कि चुदाई करके उनकी प्यासी बुर कि प्यास कों बुझा देता हैं। मे आँटी कि किस्सा सुन केँ हैरत मे पड़ गई, औऱ सोचने लगी कि मे अपनी प्यासी बुर कि प्यास बुझाने केँ लिये क्याँ करूँ।
अबठंड थोड़ी सि बढ़ गयीँ, पर्र व्हिस्की केँ सुरूर औऱ गर्मी सें बहोत अच्छा लगरहा थां औऱ हम् बैठे व्हिस्की पीतेहुए बारिश केँ मज़े लें रहे थें औऱ अपनी अपनी चुदाई कि कहानियाँ एक् दूसरे कों सुनारहे थें। आँटी अपनी कुर्सी घुमा केँ मेरीतरफ मुँह करकेबैठ गयीं औऱ बीच-बीच मे मेराहाथ अपनेहाथ मे लेकरमसल रहीथीं औऱ अपनी टाँग बढ़ाकर मेरी सलवार ऊपर खिसकाते हुए अपने सैंडल कों मेरी मेरी टाँगों पर्र हल्के-हल्के फिरारही थीं औऱ मेरेबदन मे गर्मी आँ रही थि। फ्लैट आठवीं मंज़िल पर्र होने कि वजह सें कोई हमें मार्ग सें देख नहि सकता थां औऱ वैसे भि मार्ग इतनी बारिश कि वजह सें सुनसान हि थि। वैसे मे इस वक़्त थोड़े नशे मे थि औऱ इतनी मस्त होँ चुकी थि कि मुझे किसीबात कां खयाल भि नहि थां। ऊपर सें अपनी टाँगों पर्र उनके सैंडल कां प्यारा सां लम्स औऱ बाहर् कां ठंडा मौसम। फिन आँटी नें सुहाग रात कि औऱ अपनी चुदाई कि दास्तान शुरुआत करके मेरे शरीर मे फिन सें आगलगा दि थि।
मुझे सुहैल सें चुदवाई हुइ वोँ रातें याद आँ रही थि जब मेरी बुर मे सुहैल कां लंबा मोटा लन्ड घुस केँ धूममचा देता थां औऱ बुर-फाड़ झटके मार-मार केँ मेरी बुर कों निचोड़ केँ अपने लन्ड कां सारारस मेरी बुर केँ अंदर छोड़ केँ केसेमजा देता थां। मेरा पूरादिल औऱ मन सुहैल कि चुदाई मे थां। मुझेपता हि नहि चला केँ कब आँटी कां पांव मेरी सलवार केँ ऊपर सें जाँघों पे फिसलने लगा औऱ मेरे सारे शरीर मे एक् मस्ती कां एहसास छानेलगा औऱ बे-साख्ता मेरी टाँगें खुल गयीं औऱ मैंने महसूस किया केँ आँटी कां हाई-हील वाला सैंडल मेरी जाँघ सें फिसल केँ टाँगों केँ बीच सलवार केँ ऊफर सें बुर पे टिक गय़ा औऱ वोँ बुर कां आरामसे मसाज करनेलगी औऱ मुझेमजा आनेलगा।
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