𝐊𝐊𝐊 - (𝐊𝐢𝐫𝐚𝐧 𝐊𝐢 𝐊𝐚𝐡𝐚𝐧𝐢) | incest indian sex story – New Episode
Chapter 8
मेरी प्यासी बुर पे आँटी केँ सैंडल केँ लम्स औऱ मसाज सें मुझे अपने विद्यालय कां एक् किस्सा याद आँ गय़ा। हम् उन दिनो ग्यारहवीं क्लास मे थें। सुहैल सें चुदाई सें पहले कि बात हैं। हुआयह थां कि मेरी क्लासमेट, ताहिरा, मेरे पड़ोस मे हि रहती थि औऱ कभी वोँ मेरेघऱ आँ जाती औऱ हम् दोनों मिलकर रात मे पढ़ाई करते औऱ एक् हि बेड मे सो जाते। कभी मे उसकेघऱ चली जाती औऱ संग पढ़ाई करते औऱ मे वहीं उसकेसंग उसकेबेड मे हि सो जाती। एक् रात वोँ मेरेघऱ आयी हुइ थि औऱ हम् रात कों पढ़ाई कर केँ मेरेबेड पे लेटगये। मेरारूम घऱ मे ऊपर केँ फ़्लोर पे थां औऱ मां औऱ डैडी कां नीचे। मे ऊपर अकेली हि रहती थि तौ हमें अच्छी खासी प्राईवेसी मिल जाती थि। दोनों पढ़ाई खतमकर केँ सोने केँ लियेलेट गये। ताहिरा बहोत हि शरारती थि। उसने अपने माँ डैडी कों चोदते हुए भि कईबार देखा थां। कभी सोने कां एक्सक्यूज़ कर केँ कभी विंडो मे सें झाँककर औऱ फिन मुझे बताती थि कि केसे उसके डैडी नंगे हौ कर उसकी मां कों नंगाकर केँ चोदते हें, कभी लाईट खुलीरख केँ तोँ कभी लाईटबंद कर केँ। वोँ चुदाई देखती रहती थि औऱ मुझेबता देती थि कि उसके डैडी नें आज उसकी मां कों केसे चोदा औऱ यह भि बताती कि उसकी माँ नें केसे उसके डैडी केँ लन्ड कों चूसा औऱ सारी मलाईखा गयीँ,।
हाँ तोँ वोँ मेरेसंग बेड मे थि। हम् ऐसे हि बातें कररहे थें। वोँ अपने माँ औऱ डैडी केँ चुदाई केँ किस्से सुनारही थि औऱ अचानक उसने पूछा, “किरन तेरा साईज़ क्याँ हैं?” मैंने पूछा, “कौन सां साईज़?”, तौ उसने मेरी चूचियों कों हाथ मे पकड़ लिया औऱ पूछा“अरे पागल इसका!” औऱ हँसने लगी। उसकाहाथ मेरे बूब्स पे अच्छा लगरहा थां औऱ उसने भि अपनाहाथ नहि हटाया औऱ मैंने भि उससेहाथ निकालने कों नहि कहा औऱ वोँ ऐसे हि मेरी चूचियों कों दबाने लगी। रात तौ थि हि औऱ हम् ब्लैंकेट ओढ़ेहुए थें औऱ लाईटबंद थि। ऐसे मे मुझे उसका मेरी चूचियों कों दबाना अच्छा लगरहा थां। मैंने उसकाहाथ नहि हटाया। मैंने बोला कि “मुझे क्याँ मालूम!”, तोँ उसनेकहा “ठहर मे बताती हूं तेरा क्याँ साईज़ हैं!” मैंने बोला, “तुम को केसे मालूम?” तोँ वोँ हँसने लगी औऱ बोलि “मुझेसभी पता हैं”, औऱ वोँ मेरेऊपर उछल केँ बैठ गयीँ,। मे सीधे हि लेटी थि औऱ वोँ मेरेऊपर बैठकर मेरे बूब्स कों मसलरही थि। अब उसने मेरी शर्ट केँ अंदरहाथ डाल केँ मसलना शुरुआत कर दिया तौ मुझे औऱ मजाआने लगा। मैंने बोला, “क्या बात है ताहिरा, यह क्याँ कररही हैं?” तोँ वोँ बोलीं कि “मेरे अब्बू भि तोँ ऐसे हि करते हें मेरी अम्मी केँ संग। मैंने देखा हैं जब अब्बू ऐसे करते हें तोँ अम्मी कों बहोत मजाआता हैं। बोल तुम्हे भि आँ रहा हैं याँ नहि?” मैंने कहा, “हाँ मजा तौ आँ रहा हैं.!” तौ उसनेकहा कि “बस तोँ ठीक हैं, ऐसे हि लेटीरह नाँ, मजा लें बस”, औऱ वोँ ज़ोर ज़ोर सें मेरी चूचियों कों मसलाने लगी।
मेरेऊपर बैठे-बैठे हि उसने अपनी शर्ट भि उतार दि औऱ मुझसे बोलीं कि मे भि उसके बूब्स कों दबाऊँ तौ मे भि हाथ बढ़ा केँ उसके बूब्स कों अपनेहाथ मे लेकर मसलने लगी। ताहिरा कि चूचियाँ मेरी चूचियों सें थोड़ी सि बड़ीथीं। लाईटबंद होने सें कुछ दिखायी नहि देरहा थां, बस दोनों एक् दूसरे कि चूचियों कों दबारहे थें। ऐसे हि दबाते-दबाते वोँ मेरी टाँगों पे आगे पीछे होनेलगी। हमारी चूतें एक् दूसरे सें मिलरही थीं औऱ एक् अजीब सां मजा बुर मे आनेलगा। अब वोँ मेरेऊपर लेट गई, औऱ मेरी चूँची कों चूसने लगी। मेरे मुँह सें “आआआआआहहहहह” निकल गयीँ, औऱ मे उसकेसर कों पकड़ केँ अपनी चूचियों मे घुसाने लगी। थोड़ी देरऐसे हि चूसने केँ बाद वोँ थोडा आगेहटी औऱ अपनी चूँची मेरे मुँह मे घुसेड़ डाली औऱ मे चूसने लगी। वोँ भि “आआआआहहहह” कि आवाज़ें निकाल-निकाल केँ मज़े लेनेलगी।
अब हम् दोनों मस्त होँ चुके थें। वोँ थोडा सां पीछे खिसक गई, औऱ मेरी बुर पे हाथरख दिया तोँ मेरीगोल गाँड अपने आप् हि ऊपरउठ गयीँ,। हम् अबकोई बात नहि कररहे थें बस एक् दूसरे सें मज़े लें रहे थें। उसने मेरी सलवार कां नाड़ा खोल दिया औऱ संग मे अपना भि औऱ स्वयं अपने घुटनों पे खड़ी हौ केँ अपनी सलवार निकाल दि औऱ नंगी होँ गई, औऱ मेरी सलवार कों भि पकड़ केँ नीचे खिसका दिया। मैंने भि अपनी रसीली गाँड उठा केँ उसको निकालने मे सहायता कि। अब हम् दोनों नंगे थें। अभि हमारी चूतों पे ठीक सें बालआने भि नहि शुरुआत हुए थें। एक् दम सें चिकनी चूतें थीं हम् दोनों कि। अबफिन सें वोँ ऐसेबैठ गई, जिससे हम् दोनों कि चूतें टच होँ रही थि। वोँ आगे पीछे होनेलगी औऱ बताया कि “मेरी अम्मी जब अब्बू केँ ऊपर बैठती हैं तौ ऐसे हि हिलती रहती हैं। “
हमारी चूतें एक् दूसरे सें रगड़खा रही थि औऱ हमें बहोत हि मजा आँ रहा थां। दोनों कि चिकनी-चिकनी बिना बालों वाली मसके जैसी चूतें आपस मे रगड़रही थि। फिन वोँ थोडा सां नीचे कों होँ गई, औऱ मेरी बुर पे किसकर दिया तौ मे पागल जैसी हौ गई, औऱ मैंने उसकासर पकड़ केँ अपनी बुर मे घुसा दिया औऱ वोँ किस करते-करते अब मेरी बुर केँ अंदरजीभ डालकर चूसने लगी तौ मेरे शरीर मे लहू तेज़ी सें सर्क्यूलेट होनेलगा औऱ मन मे साँय-साँय होनेलगा। मुझेलगा जैसेकोई चीज़ मेरी बुर केँ अंदर सें बाहर् आने कों बेताब हैं पर्र नहि आँ रही हैं औऱ मुझेलगा जैसे सारारूम गोल-गोल घूमरहा हौ। इतना सारामजा आँ गय़ा औऱ मे अपनी बुर उसके मुँह मे रगड़ती रही। थोड़ी देर मे यह कंडीशन खतम हौ गयीँ, तौ वोँ बगल मे आकरलेट गयीँ, औऱ मुझे अपनी टाँगों केँ बीच मे लिटा लिया औऱ मेरासर पकड़ केँ अपनी बुर मे घुसा दिया। उसकी मक्खन जैसी चिकनी बुर कों किस करना बहोत अच्छा लगरहा थां औऱ अब उसने मेरेसर कों पकड़ केँ अपनी बुर मे घुसाना शुरुआत कर दिया औऱ मेरे मुँह मे अपनी बुर कों रगड़ने लगी। उसकी बुर कां टेस्ट मुझेकुछ नमकीन लगा पर्र वोँ टाईमऐसा थां केँ हम् दोनों मज़े लें रहे थें औऱ फिन उसने मेरे मुँह मे अपनी बुर कों औऱ भि तेज़ी सें रगड़ना शुरुआत कर दिया औऱ मुँह सें अजीब आवाज़ें निकालने लगी औऱ फिन वोँ शाँत होँ गई,। मेरा खयाल हैं कि विद्यालय केँ दिनो मे ऐसी फ्रैंड्स जोँ एक् दूसरे केँ घऱरात बिताती हें, यह चूचियों कों दबाना याँ बुर कों मसाज करना याँ किस करनासभी नॉर्मल सि बात होगी क्योंकि ताहिरा नें मुझे अपनी औऱ दो फ्रैंड्स केँ बारे मे बताया कि वोँ भि ऐसे हि करती हें। शायदयह उम्र हि ऐसी होती हैं।
खैर तोँ मे कहरही थि कि आँटी कां सैंडल वाला पांव मेरी बुर पे लगने सें मेरेबदन मे एक् आग जैसीलग रही थि। मेरादिल औऱ दिमाग़ अब ताहिरा औऱ मेरी गुजरी हुई पुरानी हर्कतों सें हटकर आँटी कि तरफ़ आँ गय़ा थां। पता नहि आँटी नें अब तक क्याँ बोला। मे तौ अपनी औऱ ताहिरा कि गुजरी हुईँ बातें हि यादकर रही थि। तब केँ बादआज किसी फिमेल कां लम्स मेरी बुर मे महसूस होँ रहा थां। असल मे मुझेयह फीमेल औऱ फीमेल कां सैक्स यानी लेस्बियनिज़्म मनपसंद नहि हैं पऱ वोँ समयऐसा हि थां कि मे फिन सें बहक गयीँ, औऱ आँटी कों अपनी बुर दे बैठी।
हम् दोनों बालकोनी मे हि करीब-करीब आमने-सामने बैठे थें। अब आँटी केँ सैंडल कि हील सलवार केँ ऊपर सें हि मेरी बुर केँ लिप्स कों खोल केँ ऊपर नीचे हौ रही थि। आँटीकभी बुर केँ सुराख मे सैंडल कि हीलडाल देती तोँ कभी क्लीटोरिस कों मसल देती तोँ मेरा मस्ती केँ मरे बुराहाल हौ जाता। बुर मे सें लगातार जूस निकलरहा थां औऱ बुर पूरीतरह सें गीली हौ चुकी थि। फिरभी मैंने दूसरा पैग पीने केँ बाद औऱ नहि लिया थां पर्र अब मेरानशा औऱ बढ़ने लगा थां औऱ मुझसे कुर्सी पर्र ठीक सें बैठा नहि जारहा थां। आँटी नें तौ मुझसे भि अधिक व्हिस्की पीरखी थि पर्र उन्हें आदत थि। इसलिये नशा होने केँ बावजूद वोँ मुझसे बेहतर हालत मे थीं। मुझे झूमते हुएदेख कर उन्होंने मुझे सहारा देकर पहले ज़मीन पऱ बिठा दिया औऱ मेरी सलवार औऱ पैंटी उतारकर मुझे तकरीबन नंगाकर दिया औऱ फिन मेरी बुर मे उंगली करने लगीं। मे तोँ नशे मे मस्तथीं औऱ बालकोनी मे अपनीइस नंगी हालत कि मुझेकोई फिक्र नहि थि। मुझेपता भि नहि चला कि कब आँटी नें भि अपने सारे कपड़े उतार दिये औऱ मेराहाथ लेकर अपनी बुर पे रख दिया। जब मेराहाथ उनकी बुर मे लगा तोँ मुझेऐसा लगा जैसे मेराहाथ किसी जलती हुईँ भट्टी याँ गर्म चुल्हे मे लगा दिया हौ। इतनी गर्म थि आँटी कि बुर। मैंने भि आँटी कि बुर कां मसाज शुरुआत कर दिया औऱ कभी अपनी उंगली अंदरडाल केँ सुराख मे घुसेड़ देती तोँ कभी क्लीटोरिस कों मसल देती तौ आँटी केँ मुँह सें “आआआहहहह ऊऊऊऊईईईई” जैसी आवाज़ें निकल जाती। दोनों ज़ोर-ज़ोर सें एक् दूसरे कि चूतों कां मसाजकर रहे थें औऱ मज़े सें दोनों कि आँखें बंद हौ चुकी थि।
सलमा आँटी नें मुझे लिटा दिया औऱ मेरे पैरों केँ बीच मे बैठ गयीं औऱ झुककर मेरी टाँगें औऱ पांव चूमने-चाटने लगीं। मैंने गर्दन उठाकर देखा तौ दंगरह गई, कि वोँ मेरे पैरों मे बंधे सैंडलों कों भि बड़ी शिद्दत सें चाटरही थीं। फिन वोँ मेरी सैंडल कि लंबीहील कों मुँह मे लेकरइस तरह चूसने लगीं जैसे लन्ड चूसरही हों। यह नज़ारा देखकर मेरी बुर औऱ भि फड़कने लगी। फिन उन्होंने आगे झुककर बुर पे किस किया औऱ अपनीजीभ मेरी बुर केँ अंदरडाल कर चाटना शुरुआत किया तौ मेरी मुँह सें “आआआआआआ आआआहहहहह” कि सिसकरी निकल गयीँ, औऱ मैंने आँटी कां सर पकड़ केँ अपनी बुर मे दबा दिया औऱ उसी वक़्त मेरी अंगारे जैसी गर्म बुर झड़ने लगी। मेरी आँखें बंद हौ चुकी थि औऱ मस्ती मे मे गहरी-गहरी साँसें लें रही थि। फिन आँटी मेरेऊपर सिक्स्टी-नाईन कि पोज़िशन मे आँ गयीँ, औऱ मेरे मुँह पे अपनी बुर कों रगड़ने लगी तोँ मेरा मुँहखुल गय़ा औऱ सलमा आँटी कि बुर कां इस्तक़बाल किया। उनकी गर्म बुर मे सें नमकीन गाढ़ा जूस निकलने लगा। मैंने आँटी कि पूरी बुर कों अपने मुँह मे लेकर दाँतों सें काट डाला तोँ उनके मुँह सें चींख निकल गयीँ,, “आआआआहहहाह्ह ओंहओंहओंहओंहओंह आआआआआ ईईईईईईई ऊऊऊऊहहहहह”, औऱ उनकी बुर मे सें जूस निकलने लगा औऱ वोँ झड़ने लगी। बहोत देर तक हम् बिनाकोई बात कियेऐसे हि सिक्स्टी-नाईन कि पोज़िशन मे लेटेरहे। फिन थोड़ी देर केँ बाद आँटी नें कहा कि “आज मे बहोत दिनों बाद इतना झड़ी हूं औऱ बहोत मजाआया!” मेरा भि कुछऐसा हि हाल थां। अशफाक तौ मेरी बुर मे आगलगा केँ स्वयं झड़ केँ सो जाते थें औऱ मे रातों मे तड़पती रहती थि। ऐसे मे आँटी कि बुर कों चूसने सें बहोत सकून मिला। उस दिन केँ बादजब कभी आँटी कों झड़ना होता तोँ वोँ अपनी बुर कों अच्छी तरह सें शेव करके मेरेपास आती औऱ फिन हम् दोनों व्हिस्की पीकर घंटों तक एक् दूसरे कि बुर चाटते औऱ आपस मे अपनी चूतें रगड़कर मजा करते। सलमा आँटी केँ पासदो तरह केँ डिल्डो भि थें। एक् तोँ लगभगदो फुट लंबाडबल डिल्डो थां जिसके दोनों तरफ लन्ड थें औऱ दूसरा बेटरी सें चलने वालानौ इंच लंबा डिल्डो थां। सलमा आँटी किसिंग मे तौ बेहद माहिर थीं औऱ उनके जूसी होंठों कों चूमना औऱ आपस मे एक् दूसरे केँ मुँह मे ज़ुबाने डालकर चूसना मुझे बेहद अच्छा लगता थां। इसके अलावा सलमा आँटी कों ऊँचीहील केँ सैंडलों कां बेहद जुनून थां औऱ मेरेसंग लेस्बियन चुदाई केँ समय स्वयं भि हाईहील केँ सैंडल पहने रहती औऱ मुझे भि सैंडल पहने रखने कों कहतीं। उन्हें मेरेपेर औऱ सैंडल चाटने मे बेहदमजा आता थां औऱ फिन मुझे भि इसमें मजाआने लगा।
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Chapter 9
हकीकत मे, उसकेकुछ हि दिनों बाद मेरी चुदाई अपनेबॉस केँ संग होनेलगी थि मगर मे आँटी कों इसबात कां पता नहि चलने देना चाहती थि। मे अपनाहर सीक्रेट उन्हें नहि बताना चाहती थि, इसी लिये आँटी सें नहि कहा औऱ उनके सामने ऐसीबनी रहती जैसे मेरी बुर बरसों कि प्यासी होँ औऱ उनकेसंग मुझे बहोत हि मजाआता थां।
हुआयूँ कि मे घऱ मे अकेले रहते-रहते बोर होनेलगी थि। सिवाय खानां पकाने केँ औऱ कोईकाम हि नहि थां। हर दूसरे दिन एक् धोबन आँ केँ हमारे कपड़े धो जाया करती थि। बोर होने कि वजह सें मैंने अशफाक सें कहा कि अगर वोँ बुरा नाँ माने तौ मे कोईजोब करलूँ ताकि मे बिज़ी रह सकूँ। अशफाक कों भि अपने बिज़नेस सें फ़ुर्सत नहि मिलती थि औऱ अब तक तौ उसकोपता चल हि गय़ा थां कि मेरी बुर उसके लन्ड सें औऱ उसकी चुदाई सें मुतमाईन नहि हैं तौ उसनेकहा, “ठीक हैं मेरा एक् फ्रैंड हैं, वोँ अपनी स्वयं कि कंपनी चलाता हैं, मे उससेबात कर लूँगा, तुम् घऱ बैठे हि उसकाकाम कर देना ताकि तुम् बिज़ी भि रहो औऱ तुम्हारा दिल भि लगारहे। “ फिन एक् दिन अशफाक नें बताया कि उसने अपने मित्र कों डिनर पे बुलाया हैं औऱ संग मे काम कि भि बातकर लेते हें, तोँ मे खुश हौ गयीँ, औऱ अच्छे सें अच्छा खानां बना केँ अपने होने वालेबॉस कों खिलाना चाहती थि इसलिये मे रसोई मे डिनर कि तैयारी मे बिज़ी हौ गई,।
रात केँ खाने केँ टाईम सें पहले हि अशफाक कां मित्र आँ गय़ा। कॉलबेल बजी तोँ अशफाक नें दरवाजा खोला औऱ “हेलो, हाऊ आरयू”, कह कर अंदर बुला लिया। मे देख केँ दंगरह गई,। वोँ तोँ एक् अच्छा खासा स्मार्ट व्यक्ति थां। तकरीबन छः फ़ुट केँ लगभग उसकी हाईट होगी, गोरारंग, चौड़े कंधे। हट्टा कट्टा मज़बूत जवानलग रहा थां। उसे देखते हि मेरी बुर मे एक् अजीब एक्साइटमेंट सि होनेलगी औऱ मुझेलगा केँ मेरी बुर गीली होँ रही हैं। मुझे खुशी हुईँ कि मैंने उसदिन ठीक सें मेक-अप करके चूड़ीदार सलवार औऱ स्लीवलेस कमीज़ पहनी थि जिसका गला भि लो-कट थां। खुशकिस्मती सें मैंने चारइंच उँचीहील केँ सैंडल पहनेहुए थें जिससे मेरी हाईटबढ़ कर पाँचफुट सातइंच केँ लगभग होँ गयीँ, थि उसकी ऊँचाई केँ मुनासिब लगरही थि। अशफाक नें इंट्रोड्यूस करवाया औऱ कहा कि यह मेरे बचपन कां यार औऱ क्लासमेट सुशांत कुमार श्रीवास्तव हैं जोँ अपनी फायनेंस कंपनी चलाता हैं। दोनों विद्यालय सें कॉलेज खतम होने तक क्लास-मेट रहे हें औऱ एक् दूसरे सें बहोत हि फ्री हें। दफ़्तर मे वोँ ‘एस-केँ’ केँ नाम सें फेमस हैं। औऱ फिन अशफाक नें कहा, “एस-केँ! यह मेरी वाइफ हैं किरन!” हम् दोनों नें एक् दूसरे कों सलाम किया औऱ हम् सभी अंदर ड्राईंग रूम मे आँ केँ सोफ़े पे बैठगये। अशफाक औऱ एस-केँ बैठ केँ व्हिस्की पीतेहुए बातें करनेलगे। अशफाक केँ कहने पऱ मैंने भि एक् पैग पिया औऱ फिन मे खानां टेबल पे रखने केँ लियेचली गयीँ,।
टेबल तैयार होँ गयीँ, तौ मैंने दोनों सें कहा कि “चलिये डिनर तैयार हैं!” वाश बेसिन पे हाथधो केँ वोँ दोनों आँ गये। सभी मिलकर खानां खानेलगे। एस-केँ मेरे बनाये हुए खाने कि बहोत तारीफ कररहे थें। खाने मे परांठे, दम कां चिकन, आलू गोश्त कां कोरमा, कबाब, टमाटर कि चटनी, पुलाव बना केँ उस पे उबले अंडों कों आधाकाट करसजा केँ रखा थां औऱ कस्टर्ड औऱ आईसक्रीम थि। खानां सच मे बहोत लज़ीज़ थां। अशफाक कभी मुझेकुछ देता तौ कभी एस-केँ कि प्लेट मे कुछडाल देता। खानां खाने केँ बादफिन सें वोँ दोनों ड्राईंग रूम मे जा केँ सोफ़े पे बैठगये औऱ मे टेबल साफ़कर केँ वहीं आँ गई, औऱ हम् सभीसंग बैठ केँ व्हिस्की पीनेलगे औऱ बातें करनेलगे।
अशफाक नें कहा, “दोस्त एस-केँ! देखो तोँ किरनघऱ मे अकेली रहती हैं औऱ अकेले रहते-रहते बोर होँ गयीँ, हैं। वोँ अपने आप् कों मसरूफ रखने केँ लियेकोई काम करना चाहती हैं। तुम्हारे पासअगर कोईऐसा काम हौ तौ बताना। “
एस-केँ नें कहा, “यह तोँ बहोत अच्छी बात हैं, मेरेपास डेटा एंट्री करने कां काम पड़ाहुआ हैं। मेरेपास डेटा एंट्री कां जौ क्लर्क थां वोँ चला गय़ा। किरन दफ़्तर सें इनवोयस औऱ वाऊचर घऱला सकती हैं औऱ घऱ बैठे-बैठे हि मेराकाम कर सकती हैं। दफ़्तर तोँ तुम्हारे घऱ केँ लगभग हि हैं। किरन दफ़्तर आके, डेली याँ वीकली, काम लेकर आँ सकती हैं औऱ घऱ बैठे हि कामकर सकती हैं। मे शुरुआत मे डेलीआके चेक करता रहुँगा औऱ उसको गाईड करता रहुँगा। मेरेपास दफ़्तर मे एक् एक्स्ट्रा कंप्यूटर भि हैं, मे वोँ भि किरन केँ पासभेज दुँगा। यहीं किसीरूम मे रख लेना औऱ वोँ धीरे-धीरे घऱ बैठे हि कामकर लेगी। “
अशफाक नें कहा कि यह तोँ बहोत अच्छी बात हैं, “किरनकल हि तुम्हारे दफ़्तर अआ जायेगी औऱ काम भि देख लेगी!”
दूसरे दिन मे बेहद अच्छे सें सजधजकर हौ केँ एस-केँ केँ दफ़्तर गई,। मे साड़ी कुछखास मौकों पऱ बहोत कम पहनती हूं मगरउस दिन मैंने फिरोज़ी रंग कि साड़ी इसतरह बांधी थि कि मेरी पतलीकमर औऱ नाभी दिखायी दे औऱ मेरा स्लीवलेस ब्लाऊज़ भि बहुत लो-कट औऱ लगभाग बैकलेस थां। मैंने ब्रा नहि पहनी थि क्योंकि मेरा ब्लाऊज़ किसी ब्रा सें अधिक बड़ा नहि थां। संग हि मे चारइंच ऊँचीहील केँ कालेरंग केँ स्ट्रैपी सैंडल पहनना नहि भूली क्योंकि एक् तोँ इससे मेरी हाईट पौनेछ: फुट केँ लगभग हौ गई, थि औऱ दूसरा यह कि उँचीहील केँ सैंडलों सें मेरा फिगर औऱ कयामत-खेज़ हौ गय़ा थां क्योंकि मेरी छातियाँ बाहर् कों उघड़रही थीं औऱ चूतड़ भि औऱ अधिकउभर आये थें औऱ चाल मे भि नज़ाकत आँ गयीँ, थि। मैंने अपने लंबेबाल खुले हि रखे थें।
दफ़्तर अच्छा खासा बड़ा थां औऱ नीट औऱ क्लीन थां। सारे दफ़्तर मे कार्पेट बिछी हुईँ थि औऱ एस-केँ कां दफ़्तर तोँ एक् दम सें शानदार थां। एक् बहोत बड़ी सेमी-सर्क्यूलर टेबल थि जिसके एक् साईड मे छोटी सि कंप्यूटर टेबल भि थि जिस पर्र कंप्यूटर, एल-सि-डी मॉनिटर औऱ नीचे प्रिंटर भि रखाहुआ थां। डोर कों अंदर सें लॉक करनेयह खोलने केँ लिये उसकेपास आटोमेटिक बटन थां। उसकेरूम केँ बाहर् एक् छोटा सां कैमरा थां जिससे उसकोपता चल जाता थां कि बाहर् कौनवेट कररहा हैं औऱ उसको मिलना हौ तौ वोँ आटोमेटिक लॉक कां बटन प्रेस कर देता जिससे दरवाजा खुल जाता औऱ फिन अंदर सें स्वयं-ब-स्वयं बंद भि हौ जाता। दफ़्तर सेंट्रली एयर कंडिशंड थां। सभी मिलाकर बहोत शानदार दफ़्तर थां। दफ़्तर कां सारा स्टाफ अपने-अपने काम मे बिज़ी थां।
मे दफ़्तर गयीँ, तौ एस-केँ नें मुझे जल्दी अंदर बुला लिया औऱ अपनी चेयर सें खड़ा हौ केँ मुझसे शेक हैंड किया तोँ उसका गर्महाथ मेरेहाथ मे आते हि मेरेबदन मे बिजली दौड़ने लगी औऱ मेरी बुर गीली होनेलगी। मैंने कहा कि “सर आपका दफ़्तर तौ वंडरफुल हैं, एक् दम सें शानदार। “ उसनेकहा कि “देखो किरन मुझेयह सर वगैरह कहने कि ज़रूरत नहि हैं। तुम् मेरे लिये किरन हौ औऱ मे तुम्हारे लिये सुशांत, तुम् मुझेसभी कि तरह एस-केँ भि कह सकती हौ मगर अगलीबार सें सर नहि कहना, ठीक हैं?” मैंने मुस्कुराते हुआकहा, “ठीक हैं सर!” औऱ हम् दोनों हँस पड़े। एस-केँ नें कप कॉफ़ी केँ लिये ऑर्डर दे दिया जोँ थोड़ी हि देर मे आँ गयीँ,। कैपेचिनो कप कॉफ़ी कि फ़र्स्ट क्लास खुशबू सें सारा दफ़्तर गंधउठा। दोनों कप कॉफ़ी पीनेलगे। उसकेबाद उसने किसी कों बुला केँ एक् कंप्यूटर, मॉनिटर औऱ प्रिंटर अपनी वाहन मे रखने केँ लियेकहा औऱ थोड़ी देर केँ बाद वोँ मुझे अपनी वाहन मे लेकर मेरेघऱ आँ गय़ा।
हमारे घऱ मे एक् स्पेयर रूम भि हैं जिस मे कंप्यूटर रख दिया गय़ा। कंप्यूटर कि स्पेशल टेबल तोँ नहि हैं मगरघऱ कि हि एक् टेबल पे रख दिया गय़ा औऱ एस-केँ नें कंप्यूटर केँ कनेक्शन लगा दिये औऱ कंप्यूटर स्टार्ट कर केँ मुझेबता दिया। कनेक्शन लगाने केँ बाद वोँ हाथ धोने केँ लिये बाथरूम मे चला गय़ा तोँ मे कप कॉफ़ी बनाने लगी। हम् दोनों ड्राईंग रूम मे आँ केँ बैठगये औऱ कप कॉफ़ी पीनेलगे। एस-केँ औऱ मे इधर-उधर कि बातें करनेलगे। वोँ अपने विद्यालय औऱ कॉलेज केँ किस्से सुनाने लगे कि केसे वोँ कॉलेज मे बदमाशियाँ किया करते थें औऱ लड़कियों कों छेड़ते रहते थें। मैंने कहा कि “आप् पर्र तौ लड़कियाँ मरती होंगी!” तौ वोँ हँस पड़ा औऱ कहा “नहि ऐसीबात नहि हैं, बस हमारे कुछ क्लासमेट औऱ कुछ जूनियर लड़कियाँ थीं, हम् (एक् आँखदबा केँ बोला) मस्ती करते थें। “ इतनीदेर मे दोपहर का खाना कां टाईम होँ गय़ा तौ मैंने कहा कि यहींरुक जायें औऱ संग मे खानां खाकर हि जानां तौ उसनेकहा कि “किरन तुम् जैसी क्यूट लड़की केँ संग किसे लञ्च याँ डिनर करना मनपसंद नं होगा, पऱ सच मे मुझे थोडा सां काम हैं। हम् किसी औऱ दिन लञ्च याँ डिनर लें लेंगे संग मे। “ जब उसने मुझे क्यूट लड़कीकहा तोँ मेरा चेहरा शरम सें लाल होँ गय़ा जिसको उसने भि नोट किया। उसनेकहा कि मे कल दफ़्तर आँ जाऊँ, तब तक वोँ सारी चीज़ें तैयार रखेगा मेरे लिये।
दूसरे दिन मे फिन सजधजकर दफ़्तर गयीँ, तौ उसने मुझे अपने कंप्यूटर केँ प्रोग्राम पऱ हि बता दिया केँ केसे एंट्रिज़ करनी हें औऱ कहा कि यह प्रोग्राम, मेरेपास जौ कंप्यूटर भेजा हैं, उस पऱ भि हैं। काम उतना मुश्किल नहि थां, जल्द हि समझ मे आँ गय़ा। हाँकुछ चीज़ें ऐसी थि जौ कि समझ मे नहि आँ रही थि। कुछ केलक्यूलेशन थें कुछ एडिशन औऱ सबट्रेक्शन थें पऱ उसनेकहा कि जोँ भि मे कर सकती हूं करूँ औऱ जौ मेरीसमझ मे नहि आँ रहा हैं, वोँ दोपहर का खाना टाईम पे मेरेपास आँ कर मुझे समझा देगा। मे इनवोयस कां बंडलउठा केँ घऱचली आयी।
दफ़्तर सें घऱ, तकरीबन पंद्रह-बीस मिनट कि वॉक हैं। घऱआने केँ बाद सारे इनवोयस औऱ वाऊचर कों अपने सामने रखकर पहले तौ ऐसे हि समझने कि कोशिश करतीरही औऱ थोड़ी देर केँ बाद एंट्री करना शुरुआत किया। नया-नया काम शुरुआत किया थां तौ काम करने मे मजा आँ रहा थां औऱ जोश केँ संगकाम कररही थि। मुझे टाईम कां पता हि नहि चला। साम केँ साढ़े तीन होँ गये औऱ जब एस-केँ नें बेल बजायी तौ मैंने टाईम देखा। “उफ़ यह तौ साढ़े तीन होँ गये। “
मैंने डोर खोला। एस-केँ अंदर आँ गय़ा औऱ हम् दोनों कंप्यूटर वालेरूम मे चलेआये। पता नहि एस-केँ कि व्यक्तित्व मे क्याँ थां कि मे उसको देखते हि अपनेहोश खो बैठती औऱ गीली होना शुरुआत हौ जाती। उसनेकाम देख्ना शुरुआत किया। कुछ मैंने गलत किया थां कुछसही किया थां। उसने केलक्यूलेशन वगैरह करना सिखाया औऱ कुछदेर बैठकर कप कॉफ़ी पीकरचला गय़ा। जितनी देर वोँ मेरेपास बैठारहा, उसकेबदन सें हल्की उठती हुइ पर्फ़्यूम कि खुशबू सें मे मस्त होतीरही। उसकेसंग बैठना मुझे बहोत अच्छा लगरहा थां। मे तोँ यह सोचने लगी केँ एस-केँ यहीं मेरेसंग हि रहे तौ कितना अच्छा होँ औऱ मेरी गर्म औऱ प्यासी बुर कों चोद-चोद केँ अपनी क्रीम बुर केँ अंदरडाल केँ उसकी प्यास बुझादे औऱ मेरी गर्म बुर कों ठंडाकर दे। पर्र यह मुमकिन नहि थां। एक् तौ वोँ मैरिड थां औऱ रात मेरेसंग नहि रह सकता थां, दूसरे यह कि दफ़्तर केँ दूसरे काम भि तौ देखने होते हें। मे एस-केँ कों अपनेदिल कि बात नां कहसकी पर्र मेरादिल चाहरहा थां केँ वोँ मेरेसंग हि रहे। वोँ मेराकाम देख केँ औऱ कुछकाम समझा केँ अपनेघऱ चला गय़ा औऱ मे पता नहि क्यूं दुःखी हौ गयीँ,।
इसीतरह सें एक् हफ़्ता गुज़र गय़ा। कोईखास बात नहि हुई बसयह कि मे उसके लियेहर रोज़ अच्छे सें सजधजकर होती औऱ जितनी देर वोँ मेरे लगभग रहता, मे मस्त रहती औऱ पूरेमूड मे रहती, पऱ उसकेचले जाने केँ बाद मे दुःखी हौ जाती। मे दफ़्तर सें तकरीबन दो हफ़्तों कां काम लें आयी थि तौ दफ़्तर भि नहि जानां थां। सुभहउठ केँ ब्रेकफास्ट कर केँ, फिन अच्छे सें रेडी होकर, काम शुरुआत करती औऱ काम केँ बीच-बीच मे अपनेकाम भि करती रहती, जैसे खानां बनाना याँ औऱ भि छोटे-मोटे काम। धोबन तोँ हर दूसरे दिन आँ कर कपड़े धो जाया करती थि। इसीतरह सें रुटीन चलनेलगी। सलमा आँटी कों भि पताचल गय़ा थां केँ मे दिन मे बिज़ी रहती हूं तोँ वोँ भि मुझेदिन केँ टाईम पे डिस्टर्ब नहि करती औऱ कभी उनकामन करता तौ वोँ साम कों याँ रात कों किसी टाईम पे आँ जाती औऱ गप्पें लगाने लगती औऱ संग मे हम् वही करते जोँ बालकोनी मे किया थां औऱ फिन आँटीचली जाती औऱ मे मस्त हौ केँ सो जाती। पहले भि जब अशफाक मेरी बुर मे आगलगा देता औऱ बुझा नहि पता तौ मे कभी-कभी बैंगन, मोमबत्ती याँ लन्ड कि शक्ल कि कोई औऱ चीज़ अपनी बुर मे डालकर मजा लेँ लेती थि पर्र आजकलकाम मे बिज़ी रहने केँ बावजूद मेरीयह हरकत बहुटबढ़ गयीँ, थि। कंप्यूटर पऱ डेटा ऐंट्री करते-करते एस-केँ कि याद आँ जाती तौ उसके लन्ड कां तसव्वुर करतेहुए मे स्वयं हि अपनी बुर कों कोई भि लन्ड केँ शक्ल कि चीज़ सें चोद-चोद करझड़ जाती औऱ फिन अपनाकाम मे लग जाती।
𝐊𝐊𝐊 - (𝐊𝐢𝐫𝐚𝐧 𝐊𝐢 𝐊𝐚𝐡𝐚𝐧𝐢) | incest indian sex story – New Episode
Chapter 10
एक् दिनऐसे हुआ केँ मे कामकर रही थि औऱ एस-केँ आँ गये औऱ मेरे पीछे खड़े हौ करकाम देखने लगे। कभी-कभी कोई मिस्टेक होँ जाती तौ बता देते। मे काम मे बिज़ी थि। बीच मे मुड़कर देखा तौ एस-केँ मेरे पीछे नहि थें। मैंने सोचा कि शायदकुछ काम होगा औऱ चलेगये होंगे औऱ मे उठकर बाथरूम मे गयीँ,। बाथरूम कां डोरखोल केँ अंदर पांव रखते हि एक् शॉकलगा। एस-केँ वहा खड़ा पेशाब कररहा थां औऱ उसने अपना इतना मोटागधे जैसा बे-खतना लौड़ा हाथ मे पकड़ा हुआ थां। पूराहाथ मे पकड़ने केँ बाद भि उसका लन्ड उसकेहाथ सें बाहर् निकला हुआ थां औऱ अभि वोँ इरेक्ट भि नहि थां। मे एक् हि सेकेंड केँ अंदर पलटी औऱ “ओह सॉरी”कह कर बाहर् निकल गयीँ, औऱ सोचने लगी केँ अभि उसका लन्ड अकड़ा नहि हैं तौ यहहाल हैं उसके लौड़े कां औऱ जब अकड़ जायेगा तोँ क्याँ हाल होगा औऱ यह तौ लड़कियों कि चूतें फाड़ डालेगा। इसीसोच केँ संग मे दूसरे बाथरूम मे चली गयीँ, औऱ पेशाब करके वापस आँ गई, औऱ अपनेकाम मे लग गयीँ,। एस-केँ फिन सें मेरे पीछे आँ कर खड़ा होँ गय़ा औऱ मेराकाम देखने लगा। मे काम तोँ कररही थि पऱ मेरा सारा ध्यान उसके लन्ड मे थां औऱ उसका लन्ड जैसे हि मेरे ज़हन मे आया, मेरी बुर गीली होनी शुरुआत हौ गई,। एस-केँ कों भि पक्का यकीन थां केँ मैंने उसके लन्ड कों देख लिया हैं औऱ औरों कि तरह मे भि हैरान रह गई, हूं।
मे काम मे बिज़ी थि औऱ वोँ पीछे खड़ा थां। अब उसने मेरे कंधे पे हाथरख दिया औऱ कहा कि “किरन तुम्हारा ध्यान किधर हैं?” मे घबड़ा गयीँ, औऱ सोचने लगी केँ उसको केसेपता चला कि मे दिल मे क्याँ सोचरही हूं। मे खामोश रही तौ उसनेकहा कि “देखो तुमने कितनी एंट्रिज़ गलतकर दि हें। “ मे औऱ घबरा गयीँ, क्योंकि सच मे मेरादिल काम मे थां हि नहि। मेरा दिमाग़ तोँ एस-केँ केँ लन्ड मे हि फंस केँ रह गय़ा थां। मे घऱ मे होने केँ बावजूद मे काफ़ी सजधजकर औऱ अच्छे कपड़े पहनकर काम करती थि क्योंकि एस-केँ कभी भि आँ सकता थां। लो-कटगले वाले स्लीवलेस औऱ टाईट सलवार-कमीज़ औऱ संग मे उँचीहील केँ सैंडल पहनना नहि भूलती थि। कभी-कभार साड़ी भि पहनती थि|
उसदिन भि मैंने स्काई ब्लूकलर कि स्लीवलेस कमीज़ औऱ सफेद सलवार पहनी थि जोँ मेरेबदन पे बहोत अच्छी लगरही थि। मेरी कमीज़ कां गला भि बहुत लो-कट थां औऱ चूछियों कां क्लीवेज बहुतहद तक नुमाया होँ रहा थां। मेरे कंधे खुलेहुए थें औऱ एस-केँ केँ दोनों हाथ मेरे कंधों पे थें। उसके गर्म हाथों केँ लम्स सें मेरा साराबदन जलनेलगा औऱ मेरी ज़ुबान लड़खड़ाने लगी। मे कुछ केहना चाहती थि औऱ ज़ुबान सें कुछ औऱ निकलरहा थां। मेरे सारे शरीर मे जैसे बिजली कां करंट दौड़रहा थां औऱ दिमाग़ मे साँय साँय होनेलगी थि।
एस-केँ केँ दोनों हाथअब मेरे कंधों सें स्लिप होँ केँ मेरी चूचियों पे आँ गये थें औऱ मेरी आँखें बंद होनेलगी थि। पहले कमीज़ केँ ऊपर सें हि दबाता रहा औऱ फिन बिनाहुक खोलेऊपर सें हि कमीज़ केँ अंदरहाथ डाल दिये। क्योंकि मैंने लो-कट कमीज़ केँ नीचे ब्रा नहि पहनी थि तोँ उसकेहाथ डायरेक्ट मेरी चूचियों केँ ऊपर आँ गये औऱ वोँ उनको मसलने लगा। मेरी कुर्सी सेक्रेटरी चेयर टाइप कि थि जिस मे नॉर्मल कुर्सी कि तरह सें बैक-रेस्ट नहि थां बल्कि पीठ कि स्थान पर्र एक् छोटा सां रेस्ट थां औऱ कुर्सी केँ बैठने कि स्थान सें बैक-रेस्ट तक पतली सि प्लास्टिक कि पट्टी लगी हुई थि जिससे मेरा पीछे सें साराबदन एक्सपोज़्ड थां, केवल मेरीपीठ कां वोँ हिस्सा छोड़कर जहाँबैक रेस्ट कां छोटा सां कुशन थां। एस-केँ मेरे औऱ लगभग आँ गय़ा तौ उसकी पैंट मे सें उसके लन्ड कां लम्स मुझे मेरेबदन पे महसूस होनेलगा। मे तोँ उसकाहाथ चूचियों पे महसूस कर केँ पहले सें हि गीली होँ चुकी थि औऱ जब लन्ड मेरेबदन सें लगा तौ मे अपनी जाँघें एक् दूसरे सें रगड़ने लगी औऱ एक् हि मिनट मे झड़ गयीँ, औऱ मेरे मुँह सें एक् लंबी सि “आआआआहहहहह” निकल गई, औऱ मे अपनी कुर्सी पे थोडा सां औऱ आगे कों खिसक गई, औऱ मेरेपेर स्वयं-ब-स्वयं खुलगये। मेरी जाँघें औऱ टाँगें मेरे बुर केँ रस सें भीग गयीं औऱ मेरी आँखें बंद होँ गयीं औऱ मे रिलैक्स हौ गयीँ,। मेरी सलवार बिल्कुल भीग गई, औऱ मुझे अपनारस टाँगों सें बहकर अपने पैरों केँ तलवों औऱ सैंडलों केँ बीच मे चूताहुआ महसूस हुआ। इतनारस थां कि ऐसालग रहाथ जैसे मेरा पेशाब निकल गय़ा हौ। अब मुझे यकीन होँ गय़ा कि आज मेरेदिल कि मुराद पूरी होने वाली हैं।
एस-केँ मेरी चूचियों कों मसलरहा थां औऱ मे इतनी मस्त हौ चुकी थि कि दिखावे कि मुज़ाहमत भि नहि करसकी औऱ मेरेहाथ उसकेहाथ पे आँ गये औऱ मे उसके हाथों कों सहलाने लगी। उसने मेरी दोनों चूचियों कों पकड़ लिया औऱ दबाने लगा औऱ निप्पलों कों पिंच करनेलगा। मे इतनी मस्त हौ चुकी थि कि अपने हि हाथों सें अपनी कमीज़ केँ हुक खोलने लगी। हुक खोलकर कमीज़ ढीली करतेहुए ज़रा नीचे खिसका दि औऱ अब वोँ मेरी चूचियों कों अच्छी तरह सें मसलरहा थां औऱ कहरहा थां कि, “आअहह किरन! क्याँ मस्त चूचियाँ हें, लगाता हैं अशफाक इन्हें दबाता नहि हैं। “ मे कुछ नहि बोलि औऱ खामोश रही। वोँ मेरे पीछे सें हि झुककर मेरी गर्दन पे किस करनेलगा औऱ उसके लिप्स मेरे शरीर पे लगते हि मेरेबदन मे एक् करंट सां दौड़ने लगा। फिन ऐसे हि किस करते-करते वोँ झुकेहुए हि मेरी चूचियों कों किस करनेलगा तौ मेरेहाथ बेसाखता उसकी गर्दन पे चलेगये औऱ मे उसको अपनी तरफ़ खींचने लगी।
अब एस-केँ मेरे पीछे सें हटकर मेरे सामने आँ गय़ा थां। उसकी पैंट मे सें उसका लन्ड बाहर् निकलने कों बेताब थां। उसने मेराहाथ पकड़ा औऱ मेरेहाथ कों अपने लन्ड पे रख दिया औऱ सच मानो, मे अपनाहाथ वहा सें हटा हि नहि सकी औऱ उसने मेरेहाथ कों ऐसे दबाया जैसे मेराहाथ उसके लन्ड कों दबारहा होँ। उसने अपनी पैंट कि ज़िपखोल दि औऱ बोला कि, “किरन!इसे बाहर् निकाल लो”, तौ मैंने उसका अंडरवीयर नीचे कों खींच दिया औऱ उसका लन्ड बाहर् निकाला तोँ वोँ एक् दम सें उछल केँ मेरे मुँह केँ सामने आँ गय़ा औऱ मे तोँ सच मे डर हि गयीँ,। इतना लंबा मोटा बिला-खतना लन्ड औऱ उसका मशरूम जैसा चिकना सुपाड़ा चमकरहा थां औऱ जोश केँ मारेहिल रहा थां। मेरे मुँह सें निकल गय़ा, “हायराम अल्लाह!! यह क्याँ हैं एस-केँ? इतना बड़ा औऱ मोटा.यह तौ किलर हैं। यह तौ जान हि लें लेगा!” तोँ वोँ हँसने लगा औऱ बोला कि “आज सें यह तुम्हारा हि हैं, जब चाहो लेँ लेना” औऱ फिन उसने अपनी पैंट नीचे करके उतार दि।
उसका लन्ड इतना मोटा औऱ लंबा वोँ भि बिला-खतना लन्ड देखकर मे तौ सच मे घबरा गयीँ, थि औऱ मन मे हि सोचने लगी कि यह तोँ मेरी बुर कों फाड़ केँ रसीली गाँड मे सें बाहर् निकल जायेगा। इतना मस्त लन्ड औऱ उसका सुपाड़ा भि बहोत हि मोटा थां, बिल्कुल हेलमेट कि तरह सें, जैसेकोई बहोत बड़ा चिकना मशरूम होँ औऱ लन्ड केँ सुपाड़े कां सुराख भि बहोत बड़ा थां। मैंने कभी इतना बड़ा औऱ मोटा लन्ड नहि देखा थां। औऱ पहलीदफा बिला -खतना लन्ड देखरही थि| उसका लन्ड बहोत गर्म थां। हाथ मे लेते हि मुझेलगा जैसेकोई गर्म-गर्म लोहे कां पाइप पकड़ लिया हौ। लगाता हैं वोँ झांटें शेव करता थां। उसका लन्ड एक् दम सें चिकना थां औऱ बिना झाँटों वाला लन्ड बेहद दिलकश लगरहा थां। उसने अपनी शर्ट भि उतार दि तोँ मे उसके नंगेबदन कों देखती हि रह गयीँ,। सारे शरीर पे हल्के-हल्के सें नरम-नरम बाल जोँ बहोत सैक्सी लगरहे थें औऱ मसक्यूलर बॉडी। उसने मुझे चेयर पे सें उठाया औऱ मेरेहाथ पीछेकर केँ मेरी कमीज़ कों निकाल दिया औऱ संग मे मेरी सलवार कां नाड़ा उसने एक् हि झटके मे खोल दिया औऱ मेरी टाँगों सें चिपकी हुइ भीगी सलवार एक्-एक् करके मेरी दोनों टाँगों औऱ सैंडलों सें नीचे खींचते हुए उतार दि।
मे एक् दम सें नंगी हौ चुकी थि औऱ वोँ भि। चारइंच ऊँचीहील केँ सैंडल पहने होने केँ बाद भि मेरी हाईट एस-केँ कि हाईट सें बहुतकम थि औऱ जब उसने मुझे खींच केँ अपने शरीर सें लिपटा लिया तोँ उसका लन्ड मेरेपेट मे घुसता हुआ महसूस होनेलगा। वोँ लोहे कि तरह सें सख्त थां औऱ मेरेपेट मे ज़ोर सें चुभरहा थां औऱ मेरी चूचियाँ हम् दोनों केँ बदन केँ बीच मे चिपक गई, थीं। उसका नंगाबदन मेरी चूचियों कों टच होते हि मेरे निप्पल खड़े होँ गये। इसी तरह सें वोँ मुझसे लिपटा रहा। मे भि ज़ोर सें उसको पकड़े रही औऱ अपनी ग्रिप टाइटकर ली। मेरी बुर कां हाल तोँ मत पूछो। उस मे सें जूसऐसे निकलरहा थां जैसेकोई नल खुला हौ औऱ उस मे सें पानी निकल-निकल केँ बहरहा हौ। उसने मेराहाथ पकड़कर अपने लन्ड सें लगाया तोँ मेरेबदन मे झुरझुरी सि आँ गई,। पहले तौ मैंने डर केँ मारे अपनाहाथ हटा लिया पर्र एस-केँ नें फिन सें मेराहाथ अपने लन्ड पे रखा तौ मे उसको धीरे-धीरे सें दबाने लगी औऱ दिल मे सोचने लगी कि आज मेरी छोटी सि बुर कि खैर नहि। आज तौ अवश्य मेरी बुर फटने वाली हैं। एस-केँ केँ हाथ मेरे शरीर पे फिसलरहे थें, कभी चूचियों पर्र तोँ कभी रसीली गाँड पर्र, औऱ जब उसकाहाथ मेरी चिकनी बुर पे लगा तौ मे बहोत ज़ोर सें काँपने लगी औऱ संग मे हि झड़ने लगी तोँ एस-केँ बोला, “वॉव किरन, तुम्हारी बुर तोँ मक्खन जैसी चिकनी औऱ समंदर जैसी गीली हैं। मजा आयेगा इसे चोदने मे। “ औऱ जब उसने अपनी मोटी उंगली मेरी छोटी सि बुर केँ अंदर डाली तोँ मानोऐसे महसूस हुआ कि कोई छोटा सां लन्ड हि घुस गय़ा होँ। वोँ मेराजूस उंगली मे लेकर चूसने लगा औऱ बोला, “वाउ तुम्हारी मीठी बुर कां जूस भि बहोत मीठा हैं”, औऱ फिन सें मेरी बुर मे अपनी उंगली डाल केँ मेरी बुर कां जूस निकाल केँ मेरे मुँह मे दे दिया औऱ कहा कि “तुम् भि टेस्ट करो कि तुम्हारी बुर कां जूस कितना मीठा हैं। “ मैंने अपनी बुर कां जूसचाट तोँ लिया पर्र मस्ती मे मेरीकुछ समझ मे नहि आया कि टेस्ट कैसा हैं।
कंप्यूटर कि टेबल बहुत बड़ी थि। कंप्यूटर रखने केँ बाद भि बहुत स्थान रहती थि तौ एस-केँ नें मुझे मेरेबगल सें पकड़कर उठा लिया औऱ मुझे टेबल पे बिठा दिया औऱ वोँ नीचे खड़े-खड़े मेरी चूचियों कों दोनों हाथों सें मसलने लगा औऱ एक् केँ बाद दूसरी चूँची कों चूसने लगा औऱ निप्पलों कों काटने लगा। मे बहोत हि मस्त औऱ गर्म हौ गयीँ, औऱ उसके अकड़े हुए लंबे लन्ड कों अपने हाथों सें पकड़ लिया। मे उसके लन्ड कों अपने दोनों हाथों सें पकड़े हुए थि मगर उसका लन्ड फिन भि मेरे दोनों हाथों केँ थोडा सां बाहर् निकलरहा थां औऱ मे उसके लन्ड कों अपने पूरेहाथ मे पकड़ नहि पारही थि। कितना मोटा औऱ बड़ा थां उसका लन्ड जौ मेरेहाथ मे नहि आँ रहा थां। मे उसके लन्ड कों दोनों हाथों सें पकड़कर आगे पीछे करनेलगी। वोँ मेरे सामने खड़ा थां औऱ उसका लन्ड मेरे जाँघों पे लगरहा थां। मे स्वयं थोडा सां टेबल पे सामने कों खिसक गयीँ, औऱ टेबल केँ किनारे पे आँ गई, तौ उसका लन्ड अब मेरी बुर पे लगनेलगा जिसमें सें निकलता हुआ प्री-कम मेरी बुर केँ अंदरूनी हिस्से कों चिकना कररहा थां। मैंने अपनी टाँगें थोड़ी औऱ खोललीं औऱ उसकेबैक पे क्रॉस करलीं औऱ उसे अपनी तरफ़ खींचने लगी। उसके लन्ड केँ सुपाड़े कों अपनी बुर केँ लिप्स केँ अंदर रगड़ना शुरुआत कर दिया औऱ इतना एक्साइटमेंट थां कि उसके प्री-कम सें चिकने लन्ड कां सुपाड़ा बुर केँ अंदर लगने सें मे जल्द हि झड़ने लगी। इतना बड़ा तगड़ा लन्ड देख केँ डर भि लगरहा थां औऱ मजा भि आँ रहा थां।
वोँ कभी मेरी चूचियों कों मसलता तोँ कभी मेरी रसीली गाँड कों दबाता। मेरा तौ मस्ती केँ मारे बुराहाल थां। उसने चेयर कों टेबल केँ लगभग खींच लिया औऱ उसपेबैठ गय़ा औऱ मेरी टाँगों औऱ जाँघों पे अपने होंठरख दिये। मे टेबल केँ पूरे किनारे पे आँ गयीँ, औऱ अपने हाथों सें उसकासर पकड़ केँ अपनी बुर पे दबा दिया औऱ अपनी टाँगें उसके कंधों पे रख केँ उसको अपनी तरफ़ खींचने लगी। उसका मुँह मेरी बुर पे लगते हि मे फिन सें झड़ने लगी। मे आज बहोत मस्ती मे थि, एक् तोँ यह कि आज सें पहलेकभी इतना बड़ा औऱ इतना मस्त लंबा-मोटा औऱ लोहे जैसा सख्त लन्ड देखा भि नहि थां औऱ दूसरे यह कि अशफाक तोँ बसआग लगाना हि जानता थां, आग बुझाना नहि। आज मुझे पक्का यकीन थां केँ मेरी इतने महीनों सें जलती बुर मे लगीआग आजइस तगड़े लन्ड सें बुझ जायेगी। मेरेहाथ उसकेसर कों पकड़े हुए थें औऱ मे उसकेसर कों बुर केँ जितना लगभग होँ सकता थां, दबा लेना चाहती थि। वोँ चाटता रहा औऱ उसकी ज़ुबान मेरी बुर केँ अंदर बहोत मजादे रही थि। कभी-कभी तौ पूरी बुर कों अपने दाँतों सें पकड़ केँ काट लेता तोँ मेरी सिसकरी निकल जाती। मेरी आँखें बंद थि। “ओओओओओहहहह”, बेइंतेहा मजा आँ रहा थां। बुर बेहद गीली हौ चुकी थि औऱ जूस लगातार निकलरहा थां। पता नहि कितने टाईम मे झड़ गयीँ, औऱ एस-केँ साराजूस पीतारहा।
थोड़ी देर केँ बाद एस-केँ खड़ा हौ गय़ा औऱ मुझेउठा लिया तौ मेरी टाँगें उसकीबैक पे लिपट गयीं औऱ मे उसके बंबू जैसे लन्ड पे बैठ गई, औऱ वोँ मुझेऐसे हि उठाये-उठाये बेडरूम मे लेँ आया औऱ मुझेऐसे आधाबेड पे लिटा दिया कि हाईहील सैंडल पहने मेरे पांव ज़मीन पऱ थें औऱ मेरे घुटने मुड़े हुए थें औऱ मेराआधा शरीरबेड केँ किनारे पे थां। अब एस-केँ फिन सें ज़मीन पे बैठ गय़ा औऱ मेरी बुर कों सहलाने लगा औऱ कहनेलगा कि, “वॉव किरन, क्याँ मक्खन जैसी चिकनी बुर हैं। मस्त मलाई जैसी बुर। लगाता हैं आज हि झाँटें साफ़ कि हें तुमने। “ मे कुछ भि नहि बोलसक रही थि। मस्ती मे आँखें बंद थि औऱ गहरी-गहरी साँसें लें रही थि। थोड़ी देरऐसे हि बुर कों सहलाते-सहलाते उसने मेरी बुर कों एक् बारफिन सें मुँह मे लेकर चूसना शुरुआत कर दिया औऱ बुर मे सें जूस लगातार निकलने लगा औऱ मेरी बुर मे आग लगनेलगी। मेरी टाँगें उसकी गर्दन पे थीं औऱ मे उसकेसिर कों पकड़ केँ अपनी बुर पे दबारही थि औऱ अपनी मोटी गाँड हिला-हिला केँ अपनी बुर उसके मुँह मे रगड़रही थि। मेरी बुर मे सें जूस निकलता रहा औऱ मे झड़ती रही। थोड़ी देर केँ बाद वोँ अपनी स्थान सें उठा औऱ अपने लन्ड केँ मशरूम जैसे सुपाड़े कों मेरी बुर केँ लिप्स केँ बीच मे रख दिया तोँ मे तभी उसके लन्ड कों अपनेहाथ मे लेकर अपनी बुर मे रगड़ने लगी। लन्ड कां प्री-कम औऱ बुर कां जूस, दोनों मिलकर मेरी नाज़ुक बुर कों गीलाकर चुके थें औऱ मेरी बुर बेहद गीली औऱ स्लिपरी हौ चुकी थि।
𝐊𝐊𝐊 - (𝐊𝐢𝐫𝐚𝐧 𝐊𝐢 𝐊𝐚𝐡𝐚𝐧𝐢) | incest indian sex story - Kahani ab aur interesting hogi
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