𝐊𝐊𝐊 - (𝐊𝐢𝐫𝐚𝐧 𝐊𝐢 𝐊𝐚𝐡𝐚𝐧𝐢) | incest indian sex story – New Episode
Chapter 17
थोड़ी देर केँ बाद मैंने न्यू-यॉर्क कि बात छेड़ दि। मे तौ दिल सें चाहती थि कि मे एस-केँ केँ संग जाऊँ औऱ हर स्टाईल मे खूब चुदवाऊँ। मैंने पूछा, “अशफाक। क्याँ तुम् संजीदा हौ मुझे एस-केँ केँ संग भेजने केँ लिये”, तौ उसनेकहा, “हाँ किरन.जा करआओ। तुम्हारी भि थोड़ी आऊटिंग हौ जायेगी। कब तक घऱ मे हि पड़ी रहोगी” तौ मैंने कहा, “अशफाक तुमने सोचा हैं कि तुम् क्याँ कहरहे हौ। अगर मे चली गई, तौ लोग क्याँ कहेंगे औऱ स्वयं तुम् कैसा फ़ील करोगे कि मे किसी औऱ मर्द केँ संग उसकेरूम मे अकेली रहुँगी तौ.?” अशफाक नें कहा, “नहि किरन, मे फ्री खयालात कां व्यक्ति हूं औऱ यहऐसी क्याँ बात हैं। तुम् फिक्र नाँ करो, मे कुछ सोचने वाला नहि हूं। “ मैंने शरारत सें उसके लन्ड कों पकड़ केँ दबाया औऱ कहा कि “अगर एस-केँ नें मुझेयह दिखा दिया तोँ मे क्याँ करूँ?” अशफाक नें कहा, “किरन तुम्हें पता हैं। एस-केँ कां लन्ड इतना मोटा औऱ बड़ा हैं.” उसने अपनेहाथ मे अंगुलियों कों मिला केँ कहा जोँ मुझे अंधेरे मे नज़र आँ गय़ा। मैंने पूछा, “मुझे क्याँ करना हैं। पर्र तुम्हें केसे मालूम एस-केँ केँ लन्ड केँ बारे मे?” तोँ उसने बताया कि “पहली दफ़ा तौ उसने कॉलेज मे हि इंटरवल केँ टाईम पे क्लास मे हि अपना लन्ड निकाल कर सारी क्लास कों दिखाया थां। “ मैंने कहा, “क्याँ बात करते होँ। ऐसे केसेकोई क्लास मे सबके सामने दिखा सकता हैं। लेक्चरर नहि थें क्याँ?” तोँ उसनेकहा कि, “एक् दिन हम् कॉलेज मे थें तौ बारिश होनेलगी औऱ बहोत ज़ोर कि होनेलगी। उसदिन लेक्चरर क्लास मे नहि आये औऱ फिन एस-केँ कों पिशाब करना थां। बाहर् जानां मुश्किल थां तौ किसी नें मज़ाक सें कहा कि अरे दोस्त खिड़की मे खड़े होँ जाओ औऱ मूतदो तोँ उसनेसच मे ऐसे हि किया औऱ अपने बेंच पे खड़ा हौ गय़ा औऱ विंडो मे खड़े होँ कर पैंट मे सें लन्ड बाहर् निकाला औऱ मूतने लगा। सारे लड़के औऱ लड़कियाँ हैरत सें देखने लगे औऱ जितनी देर तक वोँ मुतता रहा, सारे लड़के औऱ लड़कियाँ उसके इतने मोटे औऱ बड़े लन्ड कों देखते रहे। “फिन अशफाक नें कहा कि, “अगर तुम्हें भि कभी चाँस मिले तोँ तुम् भि देख्ना। मैंने तोँ कभी किसी कां इतना बड़ा औऱ इतना मोटा लन्ड नहि देखा। “अब मे अशफाक सें केसे कहती कि मे उस लन्ड कों जिसकी वोँ इतनी तारीफ कररहा हैं, मे अपने शरीर केँ हरछेद मे वोँ वंडरफुल लन्ड डलवा चुकी हूं औऱ उसकी क्रीम खा केँ पेट भि भर चुकी हूं। मैंने कहा, “धत्त मे क्याँ करुँगी उसका लन्ड देखकर??? मुझे तोँ बस तुम्हारा हि लन्ड चाहिये। मुझे किसी औऱ केँ लन्ड सें क्याँ लेना देना हैं”, तौ वोँ हँसने लगा औऱ कहा कि, “वोँ तोँ हैं हि पऱ अगरकभी चाँस मिले तौ ट्राई अवश्य कर लेना। “ मैंने बातखतम करने केँ लियेकहा कि, “ठीक हैं। देखेंगे” औऱ फिन हम् दोनों सोगये।
उसरात हम् देर तक एस-केँ कि बातें करतेरहे थें। इसी लिये सुभहदेर सें उठे औऱ शॉवर लिया औऱ ब्रेकफॉस्ट रेडी करके टेबल पे बैठ केँ ब्रेकफास्ट करनेलगे। ब्रेकफास्ट करते-करते तकरीबन दसबज चुके थें तोँ अशफाक नें कहा कि उसकोदेर होँ रही हैं। औऱ वोँ तैयार होने केँ लियेचला गय़ा। इतनीदेर मे मे कप कॉफ़ी बनाकर लेँ आयी। अशफाक तैयार होँ केँ आये तोँ कप कॉफ़ी तैयार थि। हम् दोनों कप कॉफ़ी पीनेलगे। इतने मे हि बेलबजी। मैंने डोर खोला तौ एस-केँ खड़ा थां। अंदरआते हि कहा, “अरे इतनीदेर सें ब्रेकफास्ट कररहे होँ। क्याँ बात हैं?” तौ हमनेकहा कि हाँरात देर तक बातें कररहे थें औऱ सोने तक बहोत रात हौ गई, थि, इसी लिये सुभहदेर सें आँख खुली। मे एक् औऱ कपकप कॉफ़ी लेकर आँ गयीँ, औऱ एस-केँ कों दे दिया तोँ वोँ भि कप कॉफ़ी पीनेलगा औऱ बोला कि “वाउ। क्याँ मस्तकप कॉफ़ी बनायी हैं आज किरन नें!” अशफाक नें कहा कि “सुनो एस-केँ, रात हमने फैसला कर लिया हैं औऱ किरन तुम्हारे संग जाने केँ लिये तैयार होँ गई, हैं। तौ बाकी केँ इंतज़ामात मे तुम् पऱ छोड़ देता हूं। तुम् जैसे चाहोकर लो। मुझे एक्सपेंस बता देना औऱ हाँ! शायद मुझे भि कुछ दिनों केँ लिये मुंबई जानां पड़े। मे मुंबई चला जाऊँगा औऱ तुम् दोनों न्यू-यॉर्क चले जानां। “ एस-केँ नें कहा, “ठीक हैं अगर तुम् दोनों नें मिल केँ फैसला किया हैं तौ मुझे क्याँ प्रॉबलम होँ सकती हैं। मे सारे इंतज़ाम कर लूँगा। “
अशफाक नें दोनों कों गूड-बॉय किया औऱ चला गय़ा। उसके जाने केँ बादडोर लॉक किया औऱ मे दौड़ती हुई आयी औऱ एस-केँ सें लिपट गयीँ,। मे बे-इंतहा खुश थि कि अबसही मायेने मे हनीमून कां मजा आयेगा। उसदिन दफ़्तर कां काम तौ खाक होता, बस चुदाई हि हुइ सारादिन। एस-केँ कि वाइफ भि अपने मायके चली गयीँ, थि तौ वोँ भि फ्री थां। सुभह सें रात तक मेरेसंग हि रहा औऱ हर स्टाईल मे चुदाई कि। वोँ अपनेसंग स्कॉच व्हिस्की लाया थां औऱ हमनेपी कर मदहोशी मे इतनी चुदाई कि कि उसने मेरी बुर कां भोंसड़ा बना डाला। बुर केँ लिप्स सूजगये थें औऱ बुर डबल रोटी कि तरहलग रही थि।
बाद मे एस-केँ नें बताया कि उसने न्यू-यॉर्क जाने केँ इंतज़ाम शुरुआत कर दिये हें। वहा केँ होटल कों ई-मेलदे दिये हें औऱ सभीकाम होने केँ बाद वोँ मुझेबता देगा।
एक् दिन एस-केँ नें बताया कि उसको एक् वीक केँ लिये कहींटूर पे जानां पड़रहा हैं औऱ हौ सकता हैं कि थोड़े दिन ज्यादा भि हौ सकते हें। इत्तेफ़ाक सें अशफाक नें भि रात मे आँ कर बताया कि वोँ भि एक् वीक केँ लिये कहीं बाहर् जारहा हैं तौ मे बहोत दुःखी हौ गयीँ, औऱ सोचने लगी कि क्याँ करना चाहिये एक् वीक तक।
दूसरे दिन अशफाक औऱ एस-केँ दोनों बाहर् चलेगये। मे घऱ मे अकेली रह गई,। मे बहोत हि दुःखी थि। इतने मे बेलबजी, डोर खोला तौ देखा कि सलमा आँटीडोर पे खड़ी मुस्कुरा रही हें। सलमा आँटी अपने मायके सें आँ गयीँ, थि औऱ मेरेपास मिलने आँ गयीँ,। एस-केँ केँ संग इतना टाईम गुज़ारने केँ बाद मुझे सलमा आँटी कि ज़्यादा याद भि नहि आयी थि। अब उन्हें देखा तौ मेरे चेहरे पे मुस्कुराहट आँ गई, औऱ मैंने दिल मे सोचा कि चलोकुछ तौ इंजॉय कर सकते हें। सलमा आँटी कों बिठाया औऱ मे व्हिस्की कि बोतल औऱ ग्लास, पानी वगैरह लें आयी क्योंकि यह हम् दोनों कां रूटीन बन गय़ा थां कि हम् दोनों गरम चाय-कप कॉफ़ी कि स्थान व्हिस्की पीकर हि मस्ती करते थें। दोनों व्हिस्की पीनेलगे औऱ इधर-उधर कि बातें करनेलगे। मैंने आँटी कों आँखमार कर पूछा कि, “आँटी! क्याँ कुछ खाने कों मिला याँ मायके सें भूखी हि वापसआयी होँ” तोँ वोँ हंसने लगी। कुछ बताया नहि औऱ इतनाकहा कि “तुम्हारी बहोत यादआती थि। “ मैंने भि कहा कि “हाँ, मुझे भि आपकी बहोत यादआती थि” जबकि हक़ीकत तौ यह थि कि एस-केँ केँ संग रहतेहुए मुझे आँटी कि इतनी ज़्यादा भि याद नहि आयी। फिन जब थोडा नशा सवारहुआ तौ हमनेवही सिक्स्टी-नाईन वाले स्टाईल मे एक् दूसरे कि चूतों कों चूसा औऱ अपनी चूतों कि प्यास बुझायी। आँटी कि बुर मे सें ढेर साराजूस निकला तौ मैंने हँस केँ कहा कि, “वॉव आँटी! इतनाढेर साराजूस। लगाता हैं कोई मिला नहि” तौ फिन वोँ हंसने लगी। मे भि अकेली थि इसी लिये आँटीदेर रात तक मेरेसंग हि रही औऱ रात मे जाते-जाते भि एक् बार औऱ हमने अपनी चूतें आपस मे एक् दूसरे सें रगड़ी औऱ फिनचूस कर एक् दूसरे कां जूस पिया औऱ आँटी केँ चले जाने केँ बाद मे अपनेरूम मे सोनेचली गयीँ,।
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Chapter 18
दूसरे दिनजब सलमा आँटीआयी तौ उनकेसंग एक् लड़की भि थि। होगीकोई तकरीबन सत्रह याँ अठारह साल कि। बहुत सुंदर थि। मैंने दोनों कों अंदरआने केँ लियेकहा। मैंने अपने औऱ आँटी केँ लियेपैग बनाये औऱ उस लड़की केँ लियेकप कॉफ़ी बनाने रसोई मे चली गयीँ,। आँटी तौ मेरेसंग फ्री थि हि। वोँ भि रसोई मे आँ गई, तौ उनकेसंग हि वोँ लड़की भि आँ गयीँ,। हम् व्हिस्की पीतेहुए बातें करने लगीं। आँटी नें बताया कि “इस लड़की कां नाम डॉली हैं। इसके माता-पिता भि उनकेसंग वाली बिल्डिंग मे हि रहते हें। इसकी माँ सायरा औऱ डैडी जॉन, दोनों रेलवे मे काम करते हें। इसके डैडी एंगलो-इंडियन क्रिसचन हें मगर माँ मुस्लिम हें। “ उनकीलव मैरिज थि यह मुझेबाद मे पताचला। खैर, आँटी कों डॉली कि माँ नें बोला थां कि मुझसे पूछें कि क्याँ मे डॉली कों उसके बारहवीं केँ इग्ज़ैम केँ लियेकुछ सहायता कर सकती हूं। मैंने कहा कि, “आँटी आप् कों पता नहि कि अब मे नौकरी करनेलगी हूं औऱ दफ़्तर सें कामघऱ मे लाकर यहीं पे डेटा एंट्री करती हूं जिसके लिये दफ़्तर सें मेरेघऱ मे एक् कंप्यूटर भि आँ गय़ा हैं औऱ मे उसको फ़ुल टाईम नहि दे सकती.बस इतनाकर सकती हूं कि उसको थोडा सां गाईडकर सकती हूं औऱ उसके होमवर्क मे याँ कोई मुश्किल होँ तोँ समझा सकती हूं पर्र फ़ुल टाईम नहि पढ़ा सकती। “
सलमा आँटी नें कहा कि “ठीक हैं, यहकल सें तुम्हारे पास आँ जायेगी इसको इसके इग्ज़ैम तक हि सहायता करदो। बारहवीं कां इंपोर्टेंट साल हैं। “ मैंने कहा कि “कोईबात नहि। यहकलसाम सें आँ जाये.” सुभह कां टाईम मे एस-केँ केँ लिये फ्री रखना चाहती थि। डॉली बहोत हि सुंदर लड़की थि, एक् दम सें गुड़िया जैसी। शायद इसकानाम इसी लिये डॉलीरखा होगा। अभि जवानी कि दहलीज पर्र कदमरख रही थि। क्रीम जैसा सफ़ेद रंग, लाईट ब्राऊन कलर केँ बालों कि पोनीटेल जौ उसकेसर सें लटकती हुई बहोत अच्छी लगरही थि। जैसेइस उम्र कि लड़कियों मे सजने-संवरने कनयाजोश होता हैं वैसे हि उसने मेक-अप वगैरह कियाहुआ थां। नये स्टाईल कां शॉर्ट स्कर्ट औऱ ब्लाऊज़ पहनाहुआ थां। नाखुनों पे नेल-पॉलिश, होंठों पऱ लिपस्टिक औऱ पैरों मे स्ट्रैपी सैंडल। चूचियाँ थोड़ी छोटी हि थि, संतरे जितनी होंगी। उसके ब्लाऊज़ मे सें उसके निप्पलों कां छोटा सां उभार साफ़ नज़र आँ रहा थां। मीडियम-बिल्ट थि उसकीमगर सभी मिलकर वोँ एक् बे-इंतहा हसीनडॉल जैसी थि औऱ मुझे पक्का यकीन थां कि रास्ते चलते कितने लोग उसकोदेख केँ अपने पैंट मे हि झड़ जाते होंगे। डॉली डाँस क्लास भि अटेंड करती थि। इसी लिये उसकी टाँगें औऱ जाँघें भि बहोत हि शेप मे थीं औऱ जब वोँ मुस्कुराती तौ उसके गालों मे छोटे-छोटे डिंपल पड़ते बहोत हि मस्त दिखायी देते थें।
एक् हफ्ता आँटी तकरीबन रोज़ाना आती रहीं औऱ हम् मिलकर घंटों लेस्बियन-चुदाई करते। बाद मे सुभह एस-केँ आँ जाता औऱ एक्-दो पैगपी करफिन हम् दो याँ तीन रॉऊँड मस्त चुदाई करते औऱ फिन वोँ दफ़्तर चला जाता। कभी तौ डायरेक्ट दोपहर का खाना सें थोडा पहलेआता औऱ चुदाई केँ बाद लञ्च करकेचला जाता। डॉली तकरीबन डेलीसाम कों पाँचबजे केँ लगभग आँ जाती औऱ अपनाकाम करती रहती। कभी उसेकुछ पूछना होता तोँ मे उसको समझा देती.कभी मैथ तोँ कभी सायंस। डॉली एक् एवरेज स्टूडेंट थि मगर समझाने पर्र जल्द हि समझ जाती। मे उसको अक्सर देखती रहती थि। वोँ थि हि इतनी हसीन।
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Chapter 19
एक् दिन अच्छी खासी बारिश होँ रही थि। एस-केँ भि नहि आँ सका थां औऱ अशफाक हमेशा कि तरह कहीं बाहर् टूर पे गयेहुए थें। सलमा आँटी भि कहीं मसरूफ थीं। दो दिन सें चुदाई नहि हुईँ थि तोँ मे थोडा सां दुःखी थि औऱ मौसम भि ऐसा हि थां कि मैंने अकेले हि बैठकर व्हिस्की केँ दो तगड़े पैगपी लिये। फिन जैसे मे एस-केँ केँ लिये मेक-अप वगैरह करती हूं, वैसे हि मेक-अप किया औऱ हाई-हील सैंडल पहने औऱ एस-केँ कों याद करतेहुए नशे मे अपनी बुर कों एक् केले सें खूब चोदा। थोड़ी देरबाद, साम केँ समयजब डॉली नें बेल बजायी तोँ मैंने फटाफट एक् नाईटी औऱ उसकेऊपर गाऊनपहन लिया औऱ डोर खोला। वोँ अच्छी खासीभीग चुकी थि। मैंने कहा कि “अरे डॉली। तुम् तोँ भीग चुकी हौ। चलो अंदर, मे तुम्हें टॉवल देती हूं। अपने शरीर ड्राई करलो औऱ तुमको इतनी बारिश मे आने कि क्याँ ज़रूरत थि। कल आँ जाती नां!” उसनेकहा, “नहि आँटी मुझेकुछ आप् सें समझना थां। कल हमारी क्लास मे सायंस कां टेस्ट हैं। इसी लिये आनां ज़रूरी थां”, तौ मैंने कहा, “ठीक हैं पहले तुम् चलो औऱ अपनाबदन पौंछलो। फिनपढ़ लेना। “ मे डॉली कों लेकर अपनेरूम मे आँ गयीँ, औऱ उसको बड़ा सां टॉवल दिया औऱ कहा कि “तुम् अपने कपड़े उतारदो औऱ यह टॉवल लपेटलो। कपड़े जबसूख जायें तोँ पहन लेना। “ तौ उसनेकहा, “ठीक हैं आँटी!” डॉलीकुछ हिचकिचा कररही थि कपड़े चेंज करने केँ लिये क्योंकि मे कमरे मे हि थि मगर मैंने कोईखास ध्यान नहि दिया। मे समझरही थि कि वोँ कपड़े चेंजकर लेगी पऱ उसने नहि किये तोँ मैंने पूछा “क्याँ हुआ? तुमने चेंज नहि किया?” वोँ थोडा शर्मायी तोँ मे समझ गई, कि शायद मेरे सामने चेंज नहि करनाचाह रही हैं तौ मैंने हँसकर कहा, “अरे डॉली हम् दोनों हि फीमेल हें औऱ पता हैं लड़कियाँ हमेशा एक् दूसरे केँ सामने कपड़े चेंज करने मे शर्माती नहि। चलोबदल लो। “फिन मैंने कहा कि “अच्छा चलो। मे भि तुम्हारे सामने हि अपने कपड़े चेंजकर लेती हूं ताकि तुमको अगलीबार शरम नहि आये” औऱ मैंने अपनी नाइटी औऱ गाऊन उतार दिये। मे अब उसके सामने बिल्कुल नंगी थि। केवल हाई-हील सैंडल पहनेहुए थें। एक्-दो मिनट मे ऐसे नंगी हालत मे हि अलमारी मे कपड़े टटोलती रही औऱ फिन बिना पैंटी औऱ ब्रेज़ियर केँ एक् पतली सि झीनी नाइटी पहनली। इतनीदेर तक डॉली मेरे शरीर कों गौर सें देखती रही। फिन डॉली नें भि अपने कपड़े उतारने शुरुआत कर दिये औऱ शर्मा कर मेरी तरफ़ देखने लगी। मैंने देखा कि उसकी चूचियाँ तौ अच्छी खासी हें। बड़ी मस्तलग रही थि डॉली। नंगी खड़ी हुईँ। उसने भि सैंडल पहनेहुए थें पर्र उसकीहील मेरे सैंडल जैसी ऊँची नहि थि, ढाई-तीन इंच ऊँची हि रही होगी। उसकी चूचियों भि अच्छी खासीथीं, ऐसा लगाता थां केँ जब चूचियाँ कुछ औऱ बड़ी होँ जायेंगी तोँ इसशेप मे आँ जायेंगी। मैंने देखा कि डॉली नें स्कर्ट केँ अंदर पैंटी पहनी हुइ थि औऱ पैंटी भि भीग चुकी थि औऱ उसकी गोरी-गोरी बगैर बालों कि बुर साफ़ नज़र आँ रही थि। वोँ पैंटी नहि उताररही थि। मैंने कहा कि “डॉली, पैंटी भि उतारदो। यह गीली रहेगी तौ तुम्हें सर्दी लगेगी!” तौ उसने शर्माते हुए पैंटी भि उतार दि औऱ पूरी नंगी हौ गयीँ,। मैंने गौर सें देखा तोँ वोँ आसमान सें उतरी हुईँ कोईहूर लगरही थि औऱ इतना पर्फ़ेक्ट शरीर किसी तराशी हुइ मूर्ती मे हि दिख सकता थां।
मैंने डॉली कि स्कर्ट, ब्लाऊज़, ब्रा औऱ पैंटी लेकर बालकोनी मे सूखने केँ लिये फैला दिये। मैंने कहा कि “तुम् मेरे बाथरूम मे जा केँ गर्म पानी सें शॉवर लेकर आँ जाओ औऱ टॉवल लपेटलो औऱ हाँ अंदर सें लॉक नहि करना क्योंकि शायद अंदर सें तुमसे नाँ खुले। उसका बोल्ट कुछ टाइट हैं। “ मे उसकेसंग बाथरूम मे आँ गई,। मेरे बाथरूम मे बड़े साईज़ कां बाथटब हैं जिसमें कभी मे ड्रेन होल कों बंद करके गर्म पानीभर करके उसमें कोई पर्फयूम डालकर बैठ जाती हूं औऱ बाथटब मे जकूज़ी भि लगाहुआ हैं जिसके बुलबुलों सें मेरा शरीर रिलैक्स होँ जाता हैं औऱ बदन मे पर्फयूम कि गंध भि आँ जाती हैं। मैंने ऐसा हि उसके लिये भि किया औऱ बाथटब मे गर्म औऱ ठंडा पानी मिक्स करकेडाल दिया औऱ थोडा सां पर्फयूम भि डाल दिया औऱ उसमें पानी उतना हि डाला जितना डॉली केँ बदन कों बर्दाश्त होँ सके औऱ डॉली सें कहा कि थोड़ी देर वोँ इसमें ऐसे हि बैठ जाये। उसकेबाद ड्रेन होलखोल दे तोँ सारा पानी निकल जायेगा औऱ फिन बाहर् आँ जाये। उसनेऐसा हि किया। वोँ सैंडल उतारकर बाथटब मे बैठ गयीँ,। बाथरूम कां डोर खुलाहुआ थां। मे अपनेरूम मे आकरबैड पर्र बैठ गई,। मेरासिर नशे मे हल्का महसूस हौ रहा थां औऱ मेरा सारा ध्यान एस-केँ कि तरफ़ थां। वोँ दो दिनों सें नहि आँ सका थां। कुछ तौ बारिश कां असर थां कुछ उसकोकाम भि ज्यादा थां। मे यहीसोच रही थि औऱ फिन एक् औऱ पैगबना कर पीतेहुए एस-केँ केँ संग अपने न्यू-यॉर्क केँ ट्रिप केँ बारे मे सोचने लगी औऱ यही सोच-सोच कर मेरे होंठों पे मुस्कुरहाट भि आँ रही थि।
बाथरूम सें डॉली केँ चींखने कि आवाज़ सें मे अपने न्यू-यॉर्क केँ सपने सें बाहर् आँ गई, औऱ बाथरूम कि तरफ़ दौड़ केँ गई, तोँ देखा कि डॉलीटब केँ बाहर् केँ हिस्से मे नीचे गिरी हुईँ हैं। उसने शायदटब सें बाहर् निकलकर सैंडल पहने होंगे औऱ फर्श थोडा गीला होने सें उसकापेर फिसल गय़ा थां। मे उसको नंगी हि उठाकर सहारा देकर अपने बेडरूम मे लेकर आँ गयीँ, औऱ बेड पे बड़ा सां टॉवल बिछाकर वैसे हि उसको टॉवल पे लिटा दिया औऱ उसके शरीर कों उसी टॉवल सें सुखाते वक़्त देखा कि उसकी बुर तोँ मक्खन जैसी चिकनी औऱ मलाई जैसी गोरी हैं। उसकी बिना बालों वाली औऱ मोटे लिप्स कि बुर, जिसके दोनों लिप्स एक् दूसरे सें थोड़े सें अलगहुए थें औऱ अंदर सें पिंककलर, बहोत सैक्सी लगरही थि। मेरादिल कररहा थां कि बस मे इसकी बुर कों चूमलूँ औऱ अपनी ज़ुबान उसकी बुर केँ अंदरडाल केँ चाट डालूँ। मैंने उसके शरीर कों सुखाकर केँ ऐसे हि टॉवल सें लपेट दिया औऱ पूछा कि क्याँ हुआ तोँ वोँ बोलि कि “आँटी, मैंने बाहर् निकलकर सैंडल पहने हि थें कि मेरा पांव फिसल गय़ा औऱ मे गिर गई, !” मैंने कहा कि “तुम् फिक्र न् करो मे तुम्हारे जाँघों पे ऑलिवऑयल कि मालिश कर दूँगी तौ थोड़ी हि देर मे तुम् ठीक हौ जाओगी!” तोँ उसनेकहा “ठीक हैं आँटी” औऱ बोलि कि “यूआरसो स्वीट आँटी। आप् बहोत अच्छी होँ। कितना खयाल रखती हौ मेरा। मेरी मां केँ पास तोँ मेरे लिये टाईम हि नहि हैं। “ मे अपनी तारीफ सुनकर थोडा सां शरमा गयीँ, औऱ कहा “नहि डॉली, ऐसी बात नहि। तुम् देखो कि तुम्हारे मां औऱ डैडी दोनों काम करते हें, ताकि तुम् कों अच्छी तालीम दे सकें औऱ तुम्हारी हर ख्वाहिश पूरीकर सकें। “ उसनेकुछ कहा नहि, बस अपनासिर हिला दिया।
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