" हैवान " – New Episode
चंडीगढ़ पुलिस हेडक्वार्टर,
एक् विशाल टेलीविज़न स्क्रीन केँ सामने पुलिस कमिश्नर खड़ेहुए थें उन कि सामने पुलिस स्पेशल सेलक़े 30 जाबाज अफसर बैठे थें,
आप् लोग एक् दोनों तस्बीरों कि धयान सें देखलो ये तस्बीरे हि लीलाबती उर्फ़ लाली औऱ उस कि बेटे कमलकिशोर उर्फ़ कालू कि हैं,
ये दोनों बेहद खतरनाक कातिल हैं पिछले तीन सालो मे इन लोगो नें हजारो मासूम लोगो कों मारा हैं येलोग बेबजह लोगो कों मरते हैं, कल ट्रक मे मिलीदो लाशों केँ कातिल भि यही हैं, औऱ कुछदिन पहले निजामुदीन स्टेशन कि पास कि बस्ती मे आग लगाके 650 लोगो कों भि इन लोगो नें हि मारा थां, आगरा होटल कांड कि पीछे भि इन लोगो कां हाथ थां,
मेरी बातो सें आप् लोगसमझ गये होंगे ये दोनों मां बेटा कितने बहसी औऱ बेरहम कातिल हैं,
खुफिया जानकारी कि अनुसार अभि येलोग चंडीगड़ मे छुपेहुए हैं, मे चाहता हु कि आप् सब एक् टीमबना करइन हैवानो कों जल्द सें जल्द जिन्दा याँ मुर्दा पकड़कर चंडीगड़ केँ मासूम लोगो कों इन कि चंगुल मे फसने सें बचाये इन दुर्दांत कातिलों कां ख़त्म करे,
मगर सरइन लोगो कि संग भि तौ बहोत बड़ा जुल्म हुआ हैं, ये लोग तोँ बेचारे बहोत हि शरीफलोग थें हमारे समाज केँ ठेकेदारों नें इन पऱ बहोत जुल्म ढाये थें, इन कि संग जौ हुआ थां वोँ भि तोँ किसी हैवानियत सें काम नं थां, इन कों हैवान बनाने बालेलोग भि तोँ हमारे समाज केँ सरीफ इज्जतदार लोग थें,
ऑफिसर देवराज आप् कि बातसही हैं, मे मानता हुइन लोगो कों हैवान बनाने वालेलोग हमारे हि समाज केँ सरीफ इज्जतदार औऱ पैसे बालेलोग थें, मगर आप् कों उन कां अंजाम भि पता होगाइन लोगो नें उनसभी कों उसीरात मार दिया थां, मगर उन लोगो कों मारने कि बादइन लोगो नें बेबजह लोगो कों मरना शुरुआत कर दिया थां, येलोग सारी दुनिया कों अपना दुश्मन समझने लगे थें, ऑफिसर देवराज हमे मुजरिमो कों पकड़ना हैं वोँ केसे मुजरिम बनेउन कि संग क्याँ हुआ थां येसभी सोचना हमारा काम नहि हैं, हमें भाबनाओ मे नहि बहना हैं हमें सख्ती सें अपनी ड्यूटी निभानी हैं,
मे आप् कि बात सें सहमतहु सर मे भाबनाओ मे नहि बह रहाथा मे केबलइन लोगो कि जीवन कां दूसरा पहलुबता रहा थां, आप् जानते हैं सर मुझे मुजरिमो सें नफरत हैं, मे हर कानून तोड़ने बाले केँ हाथ कों तोड़ देताहु,
मे आप् कि बात समझता हु ऑफिसर देव राज, इस टीम कों तुम् कमांड करोगे औऱ जल्द सें जल्दइन लोगो कों जिन्दा याँ मुर्दा मेरी सामने खड़ा करोगे,
आप् निश्चिंत रहेसर येलोग चंडीगड़ सें जिन्दा बापस नहि जयेगे, जय हिन्द सर,
ऑफिसर देवराज ऊंचे लम्बे हाइट कां सुर्ख गोररंग कां 28 साल कां नौजवान थां, कलफ लगी पुलिस कि बर्दी मे वोँ रियल हीरो लगता थां, उस केँ नाम सें अपराधियों कि पेन्ट गीली होँ जाती थि वोँ अभि तक 44 एनकाउटर कर चुका थां, जनता कि नजरो मे वोँ रियल हीरो थां,
देवराज पुलिस फ़ोर्स केँ संगदिन भर लाली कालू कों ढूढ़ता रहामगर उन कि कोईखबर न् मिलीरात कों 12 बजे अपनेसरे मुखबरो कों साबधान कर केँ वोँ घऱ बापस लोटा,
आज दरवाजा नहि खुलेगाजाओ अपने थाने औऱ जाकेबही सो जाओ, ये घऱ हि कोई होटल नहि कि जबमनहुआ आँ गयेजब मनहुआ चलेगये,
अरे दोस्त नीलम जल्दखोल न् दरबाजा ठण्डलग रही हैं, आस पास कि लोग यहीं कों देखरहे हैं,
क्यूं मेरी इज्जत कां कचराकर रहीहे,
कुछ भि बकतेरहो आज मे दरवाजा नहि खोलूगी, मे पागल नहि हु जोँ चार घंटे सें भूखी बैठी आप् कां प्रतीक्षा कररही हु, आप् नें 8 बजेआने कां बोला थां औऱ अब 12 बजे आँ रहे हौ, औऱ ऊपर सें मोबाईल भि बंदकर केँ रखाहे,
अरे जानू दरवाजा तौ खोलो अंदर तोँ आनेदो मे तेरी सारीभूख मिटा दूँगा पेट कि भि औऱ पेट केँ नीचे वाली भि,
लज्जा नहि आती दरबाजे पर्र खड़े होकर उलटी सीधी बातें करते हौ, पड़ोसियों नें सुन लिया तोँ क्याँ सोचेगे गंदे,
चलो जल्द सें अंदरआओ, गुंडे बदमासो केँ संग रहते रहते तुँ भि उन कों भाषा बोलने लगे,
मेने क्याँ गलतकहा आज क्याँ तुम्हे पेट केँ नीचे वालीभूख नहि लगरही क्याँ,
चल बेशरम जल्द सें फ्रेस होँ करआओ मे खानां लगतीहु,
शिमला मे बर्फ गिरना शुरुआत हौ गई थि चंडीगड़ मे भि ठण्ड बहुतबढ़ गई थि,
देवराज औऱ नीलम अतिसदान केँ पास बैठे थें, अतिसदान मे जलतीआग सें रूमगरम हौ रहा थां,
दोनों केँ हाथ मे बकार्डी रम केँ भरे गिलास थें संग मे गरमा गर्म ग्रिल्ड मटन औऱ बहुत खाने कि चीजे थि,
नीलम अपनेनाम कि तरह हि बेहद हसीन थि वोँ 24 साल कि थि, औऱ वोँ डॉक्टर थि,
देवराज औऱ उस कां परिवार फेमली फ्रेंड थें पासपास हि रहते थें, देवराज औऱ नीलम बचपन सें एक् दूसरे सें गहरी मुहबत करते थें, दो साल पहलेउन कि परिवार बालो नें उन कि पाक मुह्हबत कां मानरख करउन दोनों कि विवाह करा दि थि,
तोँ पहलेये बताओ पुलिस जीकिस सुंदरता केँ पीछे पीछेघूम रहे थें जोँ हमारी भि याद न् रही,
वोँ मुझ सें भि ज़्यादा सुंदर थि क्याँ, उस कि चूचिया कसी होगी मेरे जैसी लटकी नहि होगी,
उस कां पिछबाड़ा मेरे सें बड़ा होगातभी तोँ तूँ उस कि गांड केँ पीछे कुत्तो जैसाघूम रहा होगा,
अरे दोस्त कितनी बारकहा तूँ एक् डॉक्टर हे तमीज सें बोला कर, तुँ जरा सि दारू सें टल्ली हौ जातीहे फिन उल्टा सीधा बोलती हे, किसी नें सुन लिया तौ मे बदनाम हौ जाऊगा, लोग तौ यही कहेगे केँ देवराज पुलिस मे हेउसी नें नीलम कों ये गन्दी लेगबेज सिखाई होगी नहि तौ नीलम जैसी समझदार सरीफ डॉक्टर कों तोँ बहोत हे सभ्य तरीके सें बोल्ना चाहिए,
अब लोगो कों क्याँ पता केँ मे पुलिस मे जरूरहु मगर मेरे मुँह सें कभी गाली नहि निकलती औऱ ये मेडम बचपन सें मेरे सामने इतनी गन्दी गन्दी गालिया देतीहे केँ मुझे भि लज्जा आतीहे, नीलम बेटा पोस्टमार्टम कम किया करो, पूजा पाठ कियाकरो केँ तेरेमन कों शांति मिले औऱ मेरे कानो कों भि तेरीये गन्दी लेगबेज नं सुननी पड़े,
अरे दोस्त जाने केसा पुलिस वालाहे तूँ, पुलिस वाले तौ बिना गाली केँ बातहे नहि करते औऱ एक् तूँ हे केँ गाली सुनकर लड़कियों कि तरह शर्मा जाताहे,
वोँ तोँ मे तुझ सें चुद चुकी मेने तेरा 7 " कां लण्ड देखाहे नहि तोँ मे तेरी हिजड़ा समझती,
मेरी मां तूँ अपने पति सें बातकर रही हे, इंडिया कि सारी पत्निया अपने पतियों केँ पांव पड़ती हैं,
उन कि पूजा करती हैं, औऱ तुँ दिनभर मुझे गन्दी गन्दी गालिया देती रहती हैं,
औऱ करबाचौथ पऱ तोँ तूनेहद हि कर दि थि घऱ केँ सभीलोग समझरहे थें केँ तूने ब्रतरखा हैं मगर आप् तौ उसदिन सुभह सें छुपछुप करपेग पर्र पेगचढ़ा रही थि औऱ तंदूरी चिकिन खायेजा रही थि औऱ गालिया देदेकर मेरी मम्मी बहिन एक् कररही थि,
देवी करबाचौथ कां ब्रत पति कि लम्बी उम्र केँ लिएरखा जाता हैं कम सें कम एक् दिन तौ ठीख सें रह लियाकरो क्यूं मेरीजान कि दुश्मन बानी बैठी होँ,
अरे बच्चे ब्रत तोँ पतियों केँ लियारखा जाता हैं, मगर तूँ तौ मेरा प्रेमी हैं हम् दोनों बचपन सें संग हैं,
मे तेरेसंग पति पत्नि जैसे फॉर्मल नहि रह सकती, मुझे तौ तुँ प्रेमी केँ रूप मे हि अच्छा लगता हैं,
औऱ तुँ भि तोँ मुझ सें प्रेम करता हैं इसलिए तुम्हें मेरे सारे नखरे उठाने होंगे,
मे तुझ सें बातो मे नहि जीत सकताबड़े सें बड़े बदमाश मेरेनाम सें कांपते हे, औऱ तुँ दिनभर मुझे गालिया देती रहतीहे सुधरजा नहि तौ किसीदिन मुझे क्रोध आँ गय़ा तोँ तेज पिछबाड़े मे गोलीठूस दुगा,
चुप सालाबड़ा आया मेरे पिछाबडे मे गोली डालने वाला, साले कुत्ते आज तक लण्ड तौ डाल नहि पाया मेरे, पिछबाड़े मे गोली क्याँ डालेगा, मे भि डॉक्टर हु अधिक बोला तोँ बेहोसी कि दवा सुँघा कर तेरा लण्डकाट केँ सच मे तुम्हें हिजड़ा बना दूगी,
हे ऊपर वालेकहा फसा दिया मेरीमति मरी गई थि जोँ इस लड़की सें प्रेम किया,
चल बातें बहोत होँ गई जल्द सें आके मेरी बुर चाटदेख केसे पानीछोड़ रहीहे
भाड़ मे जाओआज मे कुछ भि नहि करुगा,
जल्द सें आँ जा नहि तोँ मे तेरी असलियत सभी कों बता दूगी,
क्याँ बता देगी,
मे सरे मुह्हले कों बता दूगी केँ शहर कां सभी सें अधिक फेमस पुलिस अफसररोज मेरी बुर चाटता हे,
सुनो सुनो चंडीगड़ बालोये देवराज जोँ पुलिस कां ऑफिसर हेरोज रात कों मेरी बुर चाटता हे,
देखोइस पुलिस बाले कि हकीकत,
नीलमजोर जोर सें चिल्लाने लगी,
देव राज औऱ नीलम बेसुध प्रेमी थें दोनों एक् दूसरे पर्र जान निछाबर करते थें, नीलम दिलोजान सें देवराज कों चाहती थि, बो बेहद शर्मीली लड़की थि वोँ केबल अपनेदेव केँ संग हि खुलती थि,
बाकि दुनिया केँ लिए वोँ एक् सख्त संस्कारी अपनेकाम केँ प्रति समर्पित डॉक्टर थि,
औऱ देवराज जौ इस बेहद सख्त पुलिस अफसर थां जिस केँ डर सें बड़ेबड़े गुंडे बदमाश कांपते थें,
नीलम केँ सामने आकर बच्चा बन जाता थां, उस कि बुरी सें बुरीबात मे छुपे अागाध प्यार कों महसूस करता थां,
अरे मेरी मां क्याँ नाटककर रहीहे चुप होजा मे कररहा हु न्,
हूं क्याँ कररहे हौ खुल केँ कहो न् मेरी बुर चाटरहे होँ,
अरे दोस्त तुम् जानती होँ मे उलटी सीधी बातें नहि करतामगर जौ तुम् कहरही होँ मे वोँ करने कों त्यार हु,
नहि अब तौ तुम् कों भि सभीकुछ साफ़ बोल्ना होगा नहि तौ मे बहार जाकेजोर जोर सें चिल्ला चिल्ला केँ सभी कों बताऊगी केँ तुम् मेरी डॉक्टर नीलम कि बुर चाटते हौ,
नीलमनसे केँ तरग मे देवराज कों परेशान कियेजा रही थि,
दिनभर कां थकाहरा देव भि अब परेशान हौ गय़ा थां, उस कों क्रोध आनेलगा थां उस नें एक् बड़ापेग बनाया औऱ नीटचढ़ा लियानीट रम नें उस केँ अंदर केँ पुलिस अफसर कों जगा दियाउस कां सब्रटूट गय़ा,
साली कुतियातू बहोत बोलती हेआज मे बताता हु केँ मे क्याँ हु, सालीआज मे तेरी गांडमार केँ तेरी गांड फाड् दुगा अभि दिखाता हु पुलिस कां डंडा क्याँ होताहे आज मे तेरी सारी गर्मी निकल दुगा,
आजा साले मे तौ स्वयं यही चाहती हु केँ तूँ मेरी गांडमार लें मे हौ गई नंगी आँ जा बडुबे,
नीलम नें अपना गाउनउतर दिया औऱ वोँ नंगी होँ गई,
अपनीजान कों नंगादेख देव कों भि माधोसी चढ़ गई औऱ उस कां लण्ड भि फुंकारने लगा, उस नें भि अपने कपडे निकलदिए औऱ उस नें अपनीजान केँ नंगे नशीले बेहद सुंदर शरीर कों अपनी बाहों मे समेट लिया,
दोनों केँ जवां जिस्मो केँ मिलान सें वासना कां तूफ़ान उठपड़ा दोनों एक् दूसरे केँ ओठों कों बेदर्दी सें काटने लगे
दोनों प्रेमी एक् दूसरे केँ जिस्मो कि गर्मी सें जलनेलगे देव नें नीलम कों जमीन पर्र लेटा दिया औऱ उस केकाम रास सेभरी जलती बुर कों अपने मुँह मे भर लिया, नीलम अपनी बुर कि गहराइयों मे देव कीजीव कों अंदर बहार होने केँ अहसास सें सिसकारियां छोड़ने लगी, वोँ अपने हाथो सें अपने दिलकस उरोजों कों मसलने लगीउस केँ जिस्म मे काम अग्नि परबाहित होनेलगी,
देव भि अपनीजान कि बुर सें बहतेकाम रास कों पीकर उत्तेजित होनेलगा उस कि सांसे भि भरी होनेलगी वोँ जोरजोर सें नीलम कि बुर पीनेलगा,
नीलमदेव कां सर अपनी बुर पऱ दवाने लगी वोँ मस्ती केँ मारे आसमान मे उडीजा रही थि,
कि तभीदेव नें उस कि गांड कि छेद कों अपने मुँह मे भर लिया औऱ अपनीजीव सें उस कि गांड कां छेद कुरेदने लगा,
अपनी गांड पर्र देव कां मुँह पाके नीलम कों जोर कां झटकालगा उस नें देव कां सर पूरी ताकत सें अपनी गांड पऱ दवा दिया,
देव भि नीलम कि गांड कां सुवाद औऱ खुसबू महसूस कर केँ बेहद कामुक होँ गय़ा, वोँ अपनी पूरीजीव कों अपनी पत्नि केँ गाड़ मे पेलने लगा, गांड कि खुसबू सूघकर उस कां लण्ड बेहाल हौ गय़ा औऱ उस नें नीलम कों कुतिया बना दिया औऱ अपने लण्ड कों नीलम कि गांड केँ छेद पर्र रख दिया,
अपनी गांड पर्र लण्ड पाकर नीलम केँ दिल केँ अरमान मचलउठे वोँ बरसो सें गांड मरना चाहती थि,
मगरदेव उस सें प्रेम करता थां वोँ नीलम केँ संग अप्राकृतिक मैथुन नहि करना कहता थां मगरआज नीलम केँ भड़काने पऱ वोँ अपना सब्रखो बैठा थां उस केँ अंदर कां पुलिस वालाजाग गय़ा थां,
देव नें एक् जोर कां झटका मारा औऱ उस कां आधा लण्ड नीलम कि गांड मे समां गय़ा नीलम कि चीखो सें रूमदहल गय़ा,
आँ मार गई देवरुक जा निकल लें अपना लण्ड मेरी गांड सें आँ फट गई मेरी गांडहटा लण्ड मुझे नहि मारनी अपनी गांड,
साली रंडीआज मे तुम्हे नहि छोड़ूगा कुतिया सालो सें नाक मे दम कियेहे रोज कहतीहे मेरी गांड मारोआज बताता हु तुम्हे केँ गांड मरना क्याँ होताहे,
औऱ देव बिना रुके अपने लण्ड कों नीलम कि गांड मे पूरापेल देताहे,
नीलम कि गांड सें खून औऱ टट्टी निकलने लगतीहे वोँ दर्द केँ मारे तड़पने लगतीहे, उस कि आखो सें आसुओ कि बारिस होने लगतीहे कमरे मे टट्टी केँ महकफेल जातीहे,
नीलम कां हालदेख करदेव कां क्रोध ठंडापड़ जाताहे, वोँ अपनी प्रेमिका कि गांड सें बहताखून औऱ टट्टी देखकर बेहाल होँ जाताहे उस कि चीखेउस कों तड़पा देतीहे,
वोँ जल्द सें अपना लण्ड नीलम कि गांड सें निकल लेताहे,
सॉरी मेरीजान मुझ सें गलती हौ गई मुझेमाफ़ करदो मुझेऐसा नहि करना चाहिए थां,
मादरचोद कुत्ते लण्ड क्यूं निकला हरामी जल्द सें डाल मेरी गांड मे लण्ड निकलने देखून औऱ टट्टी तूँ बिना रुके मेरी गांड मरताजा साले तुँ बहोत बड़ा चूतिया हे, औरतो कों तौ दर्द मे हि मज़ाआता हेडाल हिजड़े जल्दडाल अपना लण्ड मेरीफटी गाड़ मे,
बेचारा देव औरतो केँ अंदर छुपी दरिंदगी कों कहा समझता थां वोँ तोँ सोचरहा थां केँ उस कि जान कों दर्द हौ रहाहे मगर नीलम कों तोँ इस दर्द मे भि मज़ा आँ रहा थां नीलम कि बातसुन करउसे फिन सें क्रोध आँ जाताहे बेचारा अच्छा करने गय़ा थां तने औऱ सुनने पड़े,
वोँ दुबारा अपना लण्ड नीलम कि खून औऱ टट्टी छोड़ती गांड मे पेल देताहे औऱ जोरजोर सें नीलम कि गांड मरने लगताहे,
नीलम भि धीरे-धीरे धीरे-धीरे गांड मरने कां मज़ा लेने लगतीहे वोँ भि गांड उछाल उछालकर देव कां संग देने लगतीहे,
देव पहलीवॉर गांडमार रहा थां नीलम कि गांड बहुतकसी हुइ थि ऊपर सें टट्टी कि खुसबू नें उसे दीवाना बना दिया थां वोँ अपनीजान नीलम कि गांड कों बेदर्दी सें चोदने लगाउस केँ लण्ड केँ लिएये नया अहसास थां,
नीलम भि अपनी बरसो पुरानी तमन्ना पूरी कियेजा रही थि, वोँ डॉक्टर थि खून औऱ टट्टी देख्ना उस केँ लिएआम बात थि, वोँ जोरजोर सें सिसकारियां लेती अपनी गांडदेव केँ लण्ड पऱ द्वती जारही थि,
देव टट्टी कि खुसबू औऱ गांड कि कसबाट सें मस्ती केँ सिसकने लगा थां उस केँ लण्ड मे उफानआने लगा थां वोँ कराहने लगा थां,
नीलम मेरीजान आँ मज़ा आँ गय़ा तेरीकसी गांड मे लण्डडाल कर आँ आआ मेरामाल निकलने वालाहे रानी आँ अब तोँ मे रोज तेरी गांड मरूगा लें कुतिया लें कहाजा मेरे लण्ड कों,
साले मे तोँ कब सें कहरही हु कुत्ते तुँ हि नहि मारता थां मेरी गांड, आँ जानू औऱ जोर सें डालो मेरी गांड मे अपना लण्ड मुझे भि बहोत मज़ा आँ रहाहे ऊऊ आँ आआ
लेँ रैंड लें कहा मेरामाल अउअउ आँ लेँ
देव नें नीलम कि गांड मे पूरा लण्डपेल दिया औऱ उस केँ लण्ड सें माल निकलकर नीलम कि गांड मे जानेलगा,
नीलम भि अपनी गांड मे लण्ड केँ माल कि गर्मी कों महसूस कर अपनी बुर सें कामरस छोड़ने लगी दोनों प्रेमी एक् दूसरे कों दबोचे कामरस कि फुहारे छोड़ने लगे एक् दूसरे मे समानेलगे,
देव अपने लण्ड कों नीलम कि गांड मे खालीकर केँ बगल मेलेट गय़ा,
नीलम नें देव केँ लण्ड पर्र लगा अपनी गांड कां माल औऱ खून देखा तोँ उस केँ अंदर छुपा डॉक्टर जाग गय़ा वोँ देव केँ पास पहुंची औऱ उस नें अपनी गांड केँ माल औऱ देव केँ लण्ड केँ माल सें भीगा लण्ड अपने मुँह मे लें लिया
औऱ उस पर्र लगी गंदगी कों अपनेमुह मे भरकर निगलने लगी, वोँ अपनी चूचियों कों मसलते मसलते सारी गंदगी चाट गई औऱ देव केबगल मे लेट गई,
देव अपनीजान केँ प्रेम केँ इस कामुक अंदाज कों देखकर मद मस्त होँ गय़ा दोनों प्रेमी एक् दूसरे कों बाहों मे समेटे प्रेम केँ सागर कि गहराइयों मे डूबगए,
होँ गई आप् केँ दिल कि तमन्ना पूरीअब मे सो सकताहु कालमुझे जल्द उठनाहे एक् बहोत बड़ाकेस मिलाहे, जल्द दफ़्तर जानां होगा, तुम् नें लाली कालू केँ बारे मे सुना होगा वोँ दोनों आजकल अपनेशहर मे हैं उस कों पकड़ने कि जिम्मेदारी मुझे सौपी गई हैं,
हूं आज तोँ तूने साबित कर दिया केँ तुँ हिजड़ा नहि एक् मर्दहे, एक् असली पुलिस वाला हे, मज़ा आँ गय़ा आज तौ गांड मराके,
मगरअब मुझे लाली कालू कां पोस्टमार्टम करना होगा क्यूं कि तुम् उन लोगो कों मरने वाले हौ,
नहि मे उन कों नहि मरूगा मुझे हैवान मम्मी बेटे लाली कालू कों जिन्दा पकड़ना हे,
अबउन कों हैवान कहुँ केँ जमाने केँ सताये लोग मेनेआज तक ऐसेलोग नहि देखे,
इन लोगो नें हजारो मासूम लोगो कों मारा हैं मगरये लोग भि तौ मासूम हि थें,
मे अपराधियों कों मरताहु मासूमो कों नहि,
मासूम लोगजिन लोगो नें हजारो लोगो कों मारा हैं वोँ मासूम मम्मी बेटा, क्याँ कहना चाहते होँ तुम् देव,
ऐसेलोग जिन लोगो नें हजारो लोगो कों मारा हैं मगर वोँ मासूम हैं ये केसे हौ सकता हैं,
हजारो लोगो केँ कातिल हैवान होते हैं मासूम नहि,
सभीयही समझते हैं मगर जोँ इन हैवानो केँ पीछे छुपासच जानते हैं वोँ जानते हैं येलोग हैवान नहि मासूम हैं,
तुम्हारी बात मुझे बिल्कुल समझ नहि आँ रही तुम् मुझे लाली औऱ कालू कि सारी किस्सा खुल केँ बताओ,
आज सें तीनसाल पहले कि बात हैं,
मुंबई मे एकपरिवार रहताथा परिवार केँ सरदार 45 साल केँ पंडित राजीव शर्मा एक् सरकारी विद्यालय नें संस्कृत केँ अध्यापक थें, वोँ अपने परिवार केँ संग बेहद साधारण जिंदगी जीते थें, उन कि पूरी जंदगी लोगो केँ भलाई मे गुजारी थि, उन केँ दो जुड़वाँ बेटियां सीता औऱ गीता 19 साल कि थि औऱ एक् मासूम सां बेटा कमलकिशोर 18 साल कां थां जिस कों घऱ केँ सभीलोग प्रेम सें कालू बुलाते थें, कालू पड़ने मे बहोत तेज़ थां विद्यालय मे हमेसा फस्टआता थां, उस कि पत्नि लीलबती देवी एक् 37 साल कि बहोत हि संस्कारी पूजापाठ करने बाली स्त्री थि, पुराने ज़ामाने कि रीतियों केँ अनुसार उन केँ विवाह छोटी उम्र मे हौ गई थि मगरतीन बच्चो कि मां होने केँ बाद भि वोँ बहोत सुन्दर औऱ तेज़मय लगती थि
ये परिवार बेहद संस्कारी औऱ सुलझा हुआ थां,
उस भयानक रात लाली कालू कां परिवार खानां खाने हि बैठा थां केँ दरबाजा बजा,
राजीब नें उठकर दरबाजा खोला, सामने इलाके कां थानेदार चार सिपाहियों केँ संगखड़ा थां, उस केँ पीछे इलाके
केँ बिधायक शांताराम औऱ सेठ करोड़ी मलखड़े थें,
अरे आप् लोगरात कों इस टाइमआओ आओ अंदरआओ
सबलोग अंदर आँ गये, औऱ बैठक मे आकेबैठ गये,
लाली नें आकेसभी कों पानी दिया
औऱ बताओ आप् लोगो नें इतनारात कों क्यूं आने कां कष्ट किया
पंडित जी दोस्त आप् अपना दादर वालाघऱ हम् कों बेचदो हम् आप् कों 25 करोड़ रूपए देने कों सजधजकर हैं,
सेठजी आप् कों मेने कितनी बार बोलाउस घऱ मे मेरे पिता नें अनाथालय खोला थां आजउस मे 300 अनाथ बच्चे रहते हैं मे उन बच्चो कों बे सहारा नहि कर सकता,
पंडित जी आप् समझ नहि रहे वोँ प्रॉपर्टी कितनी महगी हैं आप् कों उस केँ कीमत कां अहसास नहि
बिधायक जी दुनिया केँ सारी दौलत मिलकर भि 300 मासूम बच्चो कि जीवन सें बडकर नहि होँ सकती,
मे उसघऱ कों किसी भि कीमत पर्र नहि बेचूगा,
मतलब आप् नहि मनोगे अब हम् कों ऊगली टेढ़ी करनी होगी,
सेठ जी आप् कों जौ करना हैं वोँ करो मे उसघऱ कों नहि बेचूगा,
लाली कालू सीता गीता दूसरे कमरे मे थें मगर वोँ लोग परदे केँ पीछेखड़े सभीसुन रहे थें,
पंडित जी कि बातसुन करसेठ जी नें थानेदार कों आखो हि आखो मे कुछ इशारा किया,
औऱ थानेदार अपने सिपाहियों केँ संग अंदर बाले कमरे मे पंहुचा औऱ वहांखड़े सीता गीता लाली औऱ कालू कों पकड़कर लें आया,
तुम् लोग क्याँ कररहे होँ मेरे परिवार कों छोड़ो मे तुम् लोगो कि सिकायत कमिश्नर सें करुगा,
तभीसेठ औऱ बिधायक नें पंडित जी केँ गले मे फंदादाल दिया औऱ सिपाहियों नें उन केँ परिवार केँ सर पर्र बन्दुक रख दि,
बोल पंडित तोँ वोँ घऱ बेचेगा केँ नहि
नहि मे जानदे दुगामगर वोँ घऱ नहि बेचूगा
मादरचोद पंडित तुँ हमें नहि जनता हम् हैवान हैं हम् कों जौ चाहिए हम् बो लेकर हि मनेगे,
छोड़दो मेरे पति कों छोड़दो, छोड़दो मेरे बापू कों छोड़दो,
पंडित जी कां परिवार चिखने लगा,
मारो सालो कों जिस केँ मुँह सें भि आबाज़ निकले उन कां मुँहबंद करदो,
सरे सिपाही बन्दुक कि बाटो सें लाली कालू सीता गीता कों मरनेलगे,
रुकजाओ मेरे बच्चो कों मत मारोछोड़ दो उन्हें,
छोड़ देंगे तूँ हम् कों वोँ घऱबेच दे हम् सभी कों छोड़ देंगे औऱ 25 करोड़ रूपए भि देंगे,
नहि मे मार जाऊगा अपने परिबार कों मर जाने दुगामगर 300 बच्चो कि जीवन सें नहि खेलूगा,
तुँ नहि मनेगा पंडित तौ देखअब हम् क्याँ करते हैं,
चलोसभी लोगइस कि बेटी सीता औऱ गीता कों नंगाकर दो औऱ इन दोनों कि जवानी लूटलो
सेठ कि बातसुन कर सीता औऱ गीता केँ शरीरडर सें काँपने लगे औऱ लाली कालूजोर सें चिल्ला कर बोले
नहि मेरी बेटियों कों हाथ भि मत लगाना, नहि मेरी बहिनो कों कोईकुछ मत करना,
ठीक हैं लाली हम् इन कों छोड़ देंगे मगर अपनी लड़कियों कि इज्जत बचने केँ लिए तुम् कों अपने बेटे सें चुदना होगा, बोल चुदेगी अपने बेटे सें याँ हम् सभी तेरी मासूम बेटियों केँ इज्जत कों लूट लेँ,
तुम् लोग इंसान नहि हैवान हौ एक् मां कों अपने बेटे सें संगये सभी करने केँ लिएकह रहे होँ तुम् लोगो सें बड़े हैवान इस दुनिया मे नहि होँ सकते,
ठीक हैं लाली देवी तोँ अब हम् अपनी हैवानियत दिखते हैं नंगाकर दोइनसभी लोगो कों औऱ लूटलो सीता गीता
कि कमसिन जवानी
पंडित जीगले मैफसी रस्सी केँ दवाओं सें तड़परहे थें औऱ उस केँ परिवारके लोग समाज केँ ठेकेदारों केँ जुल्म सें थरथर काँपरहे थें, अपने पति कि जान औऱ बच्चियों कि आबरू केँ डर सें लालीसहम गई औऱ वोँ बोलीं,
रुकजाओ मेरी बच्चियों कों कुछमत करो मे करूगी अपने बेटे केँ संग,
हां तौ जल्दकरो हमारे पास वक़्त नहि हैं हौ जा जल्द सें नंगी औऱ अपनी बुर मे अपने बेटे कां लण्डडाल लें, नहि तोँ हम् तेरी कमसिन बेटियों कि जवानी लूट लेंगे,
लाली नें रोते रोते जल्द सें कपडेउतर दिए औऱ अपने बेटे कालू केँ पास पहुंच गई कालू भि हालत कि गंभीरता कों समझ चुकता थां वोभी नंगा होगया औऱ अपनी मां कि बुर मे लण्डदाल करउसे चोदने लगा दोनों मम्मी बेटेआखो सें आंसू बहाते सभी केँ सामने चुदाई करनेलगे,
मम्मी बेटो कों चुदाई करतादेख सभी लोगो पर्र वासना कां नशा चढ़नेलगा पंडित जी स्बर्ग सिधार चुके थें,
सेठ औऱ बिधायक नें सीता गीता कोअपनी बाहों मे जकड़ लिया औऱ उन केँ कपडेफाड़ करउन कों नंगाकर दिया
येदेख कर लाली कालू चिल्ला उठे
रुकजाओ तुम् नें जौ कहा हम् नें वोँ कियाफिन भि तुम् लोग मेरी बेटियों केँ संगगतल कामकर रहे होँ
अरेकोई इन मां बेटो कों चुप कराओये हमारा मज़ा ख़राबकर रहे हैं,
बिधायक कि बातसुन करदो पुलिस वालो नें कालू औऱ लाली सें सर पऱ बन्दुक कि बटो सें वार किया दोनों मम्मी बेटे अपनेखून मे डूबकर बेहोस हौ गए,
कुछदेर बाद मम्मी बेटो कों होसआया उन नें बड़ी मुश्किल सेआखे खोलकर देखा,
सीता गीता केँ मासूम औऱ नाजुक जिस्म मुर्दो मे बदल चुके थें उस केँ कमसिन मासूम जिस्मो सें खूनबह रहा थां उन हैवानो नें बेचारी मासूम लड़कियों केँ संग बलात्कार हि नहि किया थां बल्कि उन केँ जिस्मो कों आदमखोरों कि तरह अपने दांतो औऱ नाखुनो सें काट दिया थां, घऱ केँ सरदार राजीव कीजीव लटकाती लाश भि बहापड़ी थि औऱ सरे हैवान मज़े सें मासूमो कि लाशो केबीच बैठे शराबपी रहे थें,
अपनेखून मे नहाये नंगे मां बेटे अपने परिवार कां येहाल देखकर पागल होँ गयेउन दोनों कि आखे मिली औऱ वोँ दोनों चुपचाप अंदर कों सरकगये,
नसे मे डूबे हैवानो कों उन कि जाने कां पता हैं नहि चला,
वोँ दोनों नें किचिन मे जाकेगैस सिलेंडर निकला औऱ रेगुलेटर ऑनकर केँ उसमेआग लगा दि औऱ जलते सिलेंडर कों लेजाके हैवानो केँ कमरे मे फेक दिया औऱ पिछले दरबाजे सें भागकर घऱ केँ बहार निकलगये,
शराबखून औऱ वासना केँ नसे नें डूबेसेठ जी बिधायक जी थानेदार औऱ पुलिस वालेजब तक कुछसमझ पाते एक् जोरदार धमाका हुआफुल भरागैस सिलेंडर फटपड़ा सब मासूम मुर्दो औऱ जिन्दा हैवानो केँ चिथड़े उड़गये,
औऱ दोनों खून मे डूबे मम्मी बेटे एक् नईराह पऱ चलदिए दोनों मां बेटे हैवानियत कि राह पऱ चलदिए दुनिया कों मिटने केँ राह पर्र चलदिए,
उफ़देव सच मे लाली औऱ कालू केँ संग बहोत बुराहुआ हमारे समाज केँ सिस्टम नें उन कों हैवान बना दिया
बेचारो केँ हस्ते खेलते परिवार कों तबाहकर दियाउन लोगो कां क्रोध जायज हैं,
आखिर लोगो कों क्याँ चाहिए सभीकुछ पास होतेहुए भि लोग क्यूं औऱ औऱ औऱ पाना चाहते हैं,
पहले तोँ किसी गरीब मासूम कों लुटेगे फिन भंडारा करायेगे गरीबो कों कपडे खानां दान करेगे,
ऊपर बाले केँ घरो मे जाकेबड़ी बड़ी रकमेदान करेगे,
आज जैसा पत्तित व्यक्ति पहलेकभी नहि हुआ पहले तोँ व्यक्ति अशिक्षित थां मगरआज तोँ करीब-करीब हर इंसान शिक्षित हैं फिन भि व्यक्ति कां नैतिक सामाजिक धार्मिक चरित्र पहले सें कई गुनागिर गय़ा हैं,
दुनिया मे इंसानो सें अधिक जानबर होगये हैं दुनिया मे इंसानो सें अधिक हैवान हौ गई हैं,
रॉक गार्डन,
चारोतरफ आदुनिक हतियार लिए पुलिस फैली थि
देवराज केँ हाथ मे मिनी माइक थां
लाली कालू हमेंपता हैं तुन दोनों यही छुपे होँ बहार निकलआओ औऱ अपने हथियार फेककर सरेंडर करदो.
धय धयदो गोलिया चली औऱ देवराज केँ बालो कों हवा देकर निकल गई,
सब पुलिस बालो नें अपनी अपनीगने लोडकर ली
नहि कोई फायर नहि करेगा, ऑफिसर देवराज जोर सें चीखा
लाली कालू मे जनताहु तुम् लोगो केँ संग बहोत बुराहुआ हैं तुम् लोगो नें जोँ अपराध किये हैं वोँ जूनून औऱ गुस्से मे किये हैं हम् तुम् कों मरना नहि चाहते, तुम् लोग चारोतरफ सें घिर चुके होँ अपने हतियार फेककर सरेंडर करदो हम् कों गोली चलने पऱ मजबूर मतकरो,
ऑफिसर हम् कों मौत सें मत डराओ मेने अपनी मासूम बच्चियों कि खूनसनी लाशे देखीं हैं मेने अपने देवता पति कों हैवानो केँ हाथो मरते देखा हैं मने अपनीआखो केँ सामने समाज केँ ठेकेदारों कों अपनेघऱ कों बर्बाद करते देखा हैं
लाली तुम् अपनी नं सही अपने बेटे कालू केँ बारे मे तोँ सोचो वोँ तोँ अभि बच्चा हैं उस कों तोँ जीवन मे बहोत कुछ देख्ना हैं,
इन्स्पेक्टर जिस बच्चे नें अपनी मां कों अपने सामने नंगा होता देखा होँ जिसे अपनी बहिनो कि इज्जत बचाने केँ लिए अपनी देवी जैसी मम्मी केँ संग सम्भोग करनापड़ा हौ अबउस केँ लिएइस दुनिया मे देखने कों कुछ नहि बचा, इस दुनिया नें मेरे सीधे सादे पिता औऱ मेरी मासूम बहनो कों तड़पा तड़पा केँ मारा हैं मुझेइस दुनिया मे कुछ नहि देख्ना मुझे तौ इस दुनिया कों तबाह करना हैं इस हैवानो कि दुनिया केँ सरे हैवानो कों मारना हैं,
धयधयधय धय कालू नें अपनीगन सें फायर करना शुरुआत करदिए,
कालू केँ चलाई गोलियों सें दो पुलिस बालो केँ सीने बिंध गई,
देवराज अपने सामने पुलिस वालो कों मरतेदेख गुस्से सें उबालपड़ा औऱ उस केँ मुँह सें निकला,
फायर फायर फायर फायर
लाली औऱ कालू कि गोलियों सें छलनी लाशे नीलम केँ सामने पड़ी थि औऱ वोँ आखो मे आंसूभरे उन कां पोस्टमार्टम कररही थि,
लाली औऱ कालू मारेजा चुके थें दुनिया सें दो हैवान काम हौ गये थें
दुनिया सुरक्षित हौ गई थि अब दुनिया मे केबल सरीफ औऱ इज्जत दारलोग बचे थें
" हैवान " – New Episode
Hello Everyone
We are Happy too present too you The annual kahani contest of Xforum "The Ultimate kahani Contest" (USC).
Jaisa की ap sabko maalum h abi pichle hafte he humne USC की announcement की h aur abi कुछ waqt pahle Rules and Queries thread bi open किया h aur Chit chat thread तो pahle से he Hind section में khulla h.
Iske baare main थोड़ा aapko btaadun yeh एक short kahani contest h jisme ap kissi bi prefix की short kahani post krr shaktey hu joo minimum 700 words and maximum 7000 words takk hu taqat h। iss liye mein aapko invitation deta hoon की ap is contest main apne khayaalon ko shabdon ka Rupp देकर ismein apni kahaniyan daalein jisko poora Xforum dekhega yeh एक bohot accha kadam hoga aapke aur aapki kahaniyan ke liye क्योंकि USC kee kahaniyan ko pure Xforum ke readers read kartey haen। aur joo readers likhna नहीं caahtey wo bi is contest main participate krr shaktey haen "Best Readers Award" ke liye aapko bas krna yeh hoga की contest main posted kahaniyan ko read karke unke Uppar apne views dene honge.
Winning Writer's ko well deserved Awards milenge, उसके aalwa aapko अपना thread apne section में sticky karne ka mouka bi milega Taaki aapka thread top पर rahe uss dauraan। iss liye aapsab ke liye yeh एक behtareen mouka h Xforum ke sabhi readers ke Uppar apni chaap chhodne kaa aur apni reach badhaane ka.
Entry thread 7th February ko open hoga matlab ap 7 February से kahani daalna suru krr shaktey haen aur wo thread 21st February takk open rahega is dauraan ap apni kahani daal shakte haen। iss liye ap abi से apni kahani likhna suru kardein तो aapke liye better rahega.
koy bi issue hu तो ap kissi bi staff member ko Message krr shaktey haen.
Regards : XForum Staff.
" हैवान " - Continue reading next part
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