Doctor मां – New Episode
रात केँ सन्नाटे मे बेडरूम कि मद्धम रोशनी उन दोनों केँ अर्धनग्न शरीरों पर्र एक् सुनहरी चमक बिखेर रही थि। अंजलि नें जब आर्यन कि आँखों मे वो सीखने कि प्यास देखी, तोँ उसनेतय कर लिया कि वो आजउसे मर्दानगी केँ उस शिखर पऱ लें जाएगी जहाँ सें वो एक् सम्पूर्ण प्रेमी बनकर उभरेगा।
अंजलि नें मुस्कुराते हुए आर्यन कां हाथ थामा। उसकी हथेलियाँ अभि भि शावर केँ पानी सें हल्की नम औऱ गरमथीं। उसने बहोत हि धीरे-धीरे सें आर्यन कां हाथ अपनी जाँघों केँ बीच लेँ जाकर अपनी कालीलेस वाली पैंटी केँ ठीकऊपर रख दिया।
जैसे हि आर्यन कि उंगलियों नें उस बारीक रेशमी कपड़े औऱ उसके नीचे छिपी अंजलि कि कोमल त्वचा कों छुआ, उसकेबदन मे एक् करंट सां दौड़ गय़ा। ये अहसास उसकेलिए बिल्कुल नया औऱ रोमांचक थां।
अंजलि नें अपनाहाथ आर्यन केँ हाथ केँ ऊपररखा औऱ उसे आहिस्ता गोलाकार मे घुमाने लगी। "देख आर्यन, " उसने बहोत हि धीमी औऱ मादक आवाज़ मे समझाना शुरुआत किया, "एक् स्त्री कां जिस्म सिर्फ ऊपर सें नहि, बल्कि इन कपड़ों केँ पीछे छिपे एहसासों सें खिलता हैं। ये जोँ कोमल हिस्सा तूँ महसूस कररहा हैं, यहा हज़ारों नसें होती हें जोँ सीधे दिमाग़ औऱ दिल सें जुड़ी होती हें। "
"यहा तुम को बहोत ज़ोर नहि लगाना हैं, " अंजलि नें उसकाहाथ पैंटी केँ बीचों-बीच उस उभार पर्र थोडा औऱ सख़्ती सें दबाया जहाँ उसकी 'योनि' कि हड्डी थि। "यहा कां हल्का दबाव एक् स्त्री कों अंदर तक हिला देता हैं। जब तूँ इस रेशम केँ ऊपर सें अपनी उंगलियां फेरता हैं, तोँ उसे घर्षण कहते हें, जोँ आहिस्ता आग सुलगाता हैं। "
अंजलि नें आर्यन कि एक् उंगली कों पैंटी केँ किनारे केँ अंदर सरकाया। जैसे हि आर्यन कि उंगली कों वहा कि अत्यधिक गर्माहट औऱ गीलेपन कां अहसास हुआ, उसकी सांसें फिन सें उखड़ने लगीं। "महसूस करइसे। येनमी बताती हैं कि तेरी छुअन कां असर क्याँ होँ रहा हैं। जबकोई मर्द अपनी स्त्री कों यहाइस तरह सहलाता हैं, तोँ वो उसे बिनाकुछ कहे अपनासभी कुछ सौंपने केँ लिए सजधजकर होँ जाती हैं। "
आर्यन अपनी मम्मी केँ एक्-एक् शब्द कों मंत्रमुग्ध होकरसुन रहा थां। उसेसमझ आँ रहा थां कि मात्र 'धक्के मारना' हि सभीकुछ नहि हैं, बल्कि इसतरह कि नज़ाकत औऱ समझ हि एक् महिला कों चरमसुख तक पहुँचाती हैं।
अंजलि नें अपनीकमर कों हल्का सां ऊपर उठाया ताकि आर्यन कां हाथ औऱ भि गहराई सें उस रेशमी कपड़े औऱ बदन केँ बीच केँ चमत्कार कों महसूस करसके। "अबदेख, जैसे-जैसे तुँ यहा अपनी उंगलियों कि रफ़्तार बढ़ाएगा, मेरी सांसें तेज़ होंगी। यही संकेत हैं कि तूँ सही दिशा मे जारहा हैं। "
आर्यन अब धीरे धीरे स्वयं अपनी उंगलियों कों उस काली पैंटी केँ ऊपर नचाने लगा थां। उसे महसूस होँ रहा थां कि केसे अंजलि कां बदन उसकेइस नए 'ज्ञान' पर्र प्रतिक्रिया देरहा हैं।
रात केँ उस तीसरे पहर मे, कमरे कि मद्धम रोशनी औऱ बैड कि गर्माहट केँ बीच, शिक्षा कां अगला अध्याय शुरुआत होने वाला थां। अंजलि नें आर्यन कि आँखों मे देखा, जहाँअब वासना सें कहीं अधिककुछ सीखने कि गहरीललक थि।
उसने आर्यन केँ हाथ कों पकड़कर अपनीकमर केँ पास टिकाया, जहाँ उसकी कालीलेस वाली पैंटी कां इलास्टिक उसकी गोरी त्वचा कों हल्का सां दबारहा थां।
अंजलि नें धीमी आवाज़ मे फुसफुसाते हुएकहा, "आर्यन। अबइस अंतिम बाधा कों हटा। एक् मर्द कों पता होना चाहिए कि वो अपनी स्त्री केँ शरीर सें पर्दा कितनी नज़ाकत सें हटाता हैं। इसे धीरे-धीरे सें नीचे उतार."
आर्यन नें कांपते हाथों सें पैंटी केँ किनारों कों पकड़ा औऱ उसे आरामसे अंजलि कि सुडौल जाँघों सें नीचे उतारना शुरुआत किया। जैसे-जैसे वो रेशमी कपड़ा नीचेसरक रहा थां, अंजलि कां वो मखमली औऱ पूरीतरह नग्न निचला हिस्सा आर्यन कि आँखों केँ सामने खुलरहा थां। जब पैंटी पूरीतरह निकल गई, तौ आर्यन कि सांसें थम सि गईं। शावर केँ मिलन केँ बादवहा कि रंगत औऱ भि गुलाबी औऱ मादकलग रही थि।
अंजलि नें आर्यन कां हाथफिन सें लिया औऱ उसे अपनी जाँघों केँ बीच केँ उस सबसे संवेदनशील हिस्से केँ बिल्कुल लगभगरखा। "देख आर्यन, यहासभी कुछ बहोत कोमल हैं, " उसने उसकी उंगली कों एक् छोटे सें गुलाबी उभार पर्र रखा। "इसे 'काम-बिंदु' समझ। जब तुँ इसे अपनी उंगली केँ पोरों सें बिल्कुल हल्का सां रगड़ता हैं, तौ महिला केँ पूरेबदन मे बिजली दौड़ जाती हैं। "
अंजलि नें उसकाहाथ थोडा औऱ नीचे सरकाया, जहाँ कुदरती नमी कां सैलाब थां। "येनमी तेरीजीत कि निशानी हैं। जब एक् मर्द अपनी महिला कों यहा अपनी उंगलियों सें सहलाता हैं, तोँ वो उसेआने वालेउस 'विशाल सुख' केँ लिए सजधजकर करता हैं। इसे छूना औऱ सहलाना एक् कला हैं, जैसे किसी साज़ कों बजाना। "
आर्यन अपनी मां केँ बदन केँ उस अद्भुत औऱ मुलायम हिस्से कों देख औऱ महसूस कररहा थां। अंजलि नें उसे सिखाया कि केसे अपनी उंगलियों कों अंदर औऱ बाहर् सरकाना हैं ताकिबदन कि गर्मी औऱ बढ़ती जाए।
"अहह। हाँ आर्यन। बिल्कुल ऐसे हि, " अंजलि नें अपनी आँखें मूंदलीं औऱ अपनीकमर कों हल्का सां ऊपर उठाया। "जब तूँ इसेइस तरह महसूस करता हैं, तौ मुझे लगता हैं जैसे मेरीरूह तेरे हाथों मे हैं। "
आर्यन अब आरामसे उस'नमी' औऱ 'गर्मी' केँ चमत्कार कों समझरहा थां। उसे अहसास हुआ कि अंजलि कां बदन एक् खुली पुस्तक कि तरह हैं, जिसेआज वो पहलीबार ध्यान सें पढ़रहा थां।
रात केँ सन्नाटे मे, अंजलि कां नग्नबदन आर्यन कि आँखों केँ सामने एक् खुली पुस्तक कि तरह थां। आर्यन कि उंगलियाँ अभि भि उस रेशमी नमी कों महसूस कररही थीं, मगर अंजलि नें अब उसकेहाथ कों धीरे-धीरे सें रोका औऱ उसे अपने औऱ भि लगभग खींच लिया।
उसने आर्यन कां चेहरा अपने दोनों हाथों मे लिया, उसकी आँखों मे गहराई सें झाँका औऱ 'ओरल' यानी मुख-मैथुन केँ उस गुप्त अध्याय कों समझाना शुरुआत किया, जिसके बारे मे आर्यन नें सुना तौ थां, मगरकभी उसकी गहराई कों नहि जानां थां।
अंजलि कि आवाज़ अब औऱ भि भारी औऱ रेशमी होँ गई थि। उसने बहोत हि धीमीलय मे विस्तार सें समझाना शुरुआत किया:
"आर्यन, 'ओरल' मात्र एक् क्रिया नहि हैं, ये अपनी स्त्री केँ प्रति पूर्ण समर्पण हैं। इसका मतलब हैं कि तुँ अपनी जुबान औऱ अपने होंठों सें मेरेबदन केँ सबसे निजी हिस्से कि पूजाकरे। जब एक् मर्द अपनी स्त्री केँ उस मुलायम दरवाज़ा कों चूमता हैं, तौ वो उसेये अहसास दिलाता हैं कि वो उसके अस्तित्व केँ कण-कण सें प्रेम करता हैं। "
उसने आर्यन केँ होंठों कों अपनी उंगली सें छुआ औऱ बोलीं, "तेरी जुबान, तेरेउस ७ इंचीअंग सें भि अधिक शक्तिशाली हथियार बन सकती हैं। महिला केँ बदन कां वो Clitoris इतना नाज़ुक होता हैं कि कभी-कभी उस पऱ अंग कां दबाव बहोत ज्यादा होता हैं, मगर जुबान कि मखमली छुअनउसे स्वर्ग पहुंचा देती हैं। तुम्हें सीखना होगा कि केसे अपनी जुबान कि नोक सें उस गुलाबी उभार कों सहलाना हैं, जैसेकोई प्यासा पानी कि एक्-एक् बूंद कों चखता हैं। "
"जब तुँ वहा अपने मुँह कि गर्माहट छोड़ता हैं औऱ अपनी साँसों कों उसनमी सें मिलाता हैं, तौ स्त्री कां मन सुन्न होने लगता हैं। उसे लगता हैं जैसे वो बादलों मे तैररही हैं। ये वो सुख हैं आर्यन, जौ उसे तेरे अंदरसमा जाने केँ लिए मजबूर कर देता हैं। एक् मर्द जोँ अपनी जुबान सें स्त्री कों चरम तक पहुंचा सकता हैं, वो उसकेदिल पऱ राज करता हैं। "
अंजलि नें बड़े हि नाज़ सें बताया कि केसे होंठों कां दबाव औऱ जुबान कि हरकत एक् स्त्री केँ भीतर कामुकता कां सैलाब ला सकती हैं। उसने समझाया कि ये प्रक्रिया सिर्फ नीचे केँ हिस्से तक सीमित नहि हैं, बल्कि गर्दन सें लेकर स्तनों तक जुबान कां चमत्कार चलाना 'ओरल' कां हि हिस्सा हैं।
आर्यन अपनी मां कि एक्-एक् बात सुनकर दंग थां। उसके दिमाग़ मे एक् नई तस्वीर बनरही थि—एक् ऐसी तस्वीर जहाँ वो सिर्फ अपनी ताकत कां इस्तेमाल नहि करेगा, बल्कि अपनी कोमलता औऱ नज़ाकत सें अपनी मां कों सुख केँ उस शिखर पर्र लेँ जाएगा जहाँ वो आज तक नहि पहुँची थि।
अंजलि नें अपनीबात ख़त्म करतेहुए कहा, "याद रख आर्यन, जब तूँ अपनी जुबान कां इस्तेमाल करता हैं, तौ तुँ मात्र सुख नहि देरहा होता, तूँ मेरा सारा तनाव, मेरी सारी थकान औऱ मेरी बरसों कि प्यास कों अपने भीतरसोख रहा होता हैं। "
रात केँ सन्नाटे मे अंजलि कि बातें आर्यन केँ कानों मे किसी मंत्र कि तरह गूँजरही थीं। कमरे कि मद्धम रोशनी मे अंजलि कां पूरीतरह नग्नबदन किसी अप्सरा कि तरहचमक रहा थां। 'ओरल' कां पूरा ज्ञान देने केँ बाद, अब वक़्त थां उस ज्ञान कों हकीकत मे बदलने कां।
अंजलि नें बैड पऱ लेटे-लेटे हि अपनीकमर कों थोडा औऱ ऊपर उठाया औऱ अपने दोनों हाथों सें आर्यन केँ सिर कों धीरे-धीरे सें थाम लिया। उसने अपनी उंगलियों कों आर्यन केँ घने बालों मे फँसाया औऱ बहोत हि कोमलता मगर एक् स्पष्ट दबाव केँ संग उसकेसिर कों नीचे, अपनी जाँघों केँ उस रेशमी औऱ मुलायम संगम कि ओर धकेलने कां इशारा किया।
आर्यन कां चेहरा अब अंजलि केँ पेट केँ लगभग पहुँच चुका थां, जहाँ सें उसेउस मदहोश कर देने वाली 'नारीदेह' कि खुशबू आँ रही थि।
अंजलि नें एक् गहरी औऱ कांपती हुई साँसली औऱ अपनी नशीली आँखों सें आर्यन कि ओर देखते हुए फुसफुसाकर पूछा:
"आर्यन। जौ मैंने तुझेही अभि समझाया, क्याँ तूँ उसे आज़माने केँ लिए रेडी हैं? क्याँ तुँ अपनी मम्मी केँ इस सबसे निजी हिस्से कां रसपान करने औऱ अपनी जुबान सें मुझेफिन सें उस स्वर्ग तक लेँ जाने केँ लिए सजधजकर हैं?"
आर्यन कां दिल ज़ोरों सें धड़करहा थां। अंजलि केँ हाथों कां वो हल्का दबाव औऱ उसकी आँखों मे छिपी वो 'भूख'उसे एक् अनूठे रोमांच सें भररही थि। उसे अपनी मां कि जाँघों केँ बीच कि वो गुलाबी रंगत औऱ वहा कि प्राकृतिक नमीसाफ दिखाई देरही थि।
आर्यन नें कुछ नहि कहा, मगर उसकी आँखों मे जोँ जुनून थां, उसने अंजलि कों उसका जवाबदे दिया। उसने अंजलि केँ घुटनों कों अपने हाथों सें धीरे-धीरे सें फैलाया, जिससे वो 'काम-दरवाज़ा' पूरीतरह उसकी आँखों केँ सामने खुल गय़ा।
अंजलि नें अपनी पकड़ आर्यन केँ सिर पऱ औऱ मज़बूत करली। "हिचकिचाना मत मेरे बच्चे। आज अपनी जुबान कों अपनीरूह बना लें औऱ मुझे वोँ सुखदे जौ आज तक किसी नें नहि दिया। "
शावर केँ मिलन केँ बाद अंजलि कां वो हिस्सा अभि भि बहोत संवेदनशील थां। जैसे-जैसे आर्यन कां चेहरा उस 'गुलाबी कली' केँ लगभग पहुँच रहा थां, अंजलि कि साँसें उखड़ने लगीथीं औऱ उसके पांवबैड कि चादरों कों जकड़ने लगे थें।
रात केँ सन्नाटे मे बेडरूम कि हवाअब इतनी भारी औऱ कामुक हौ चुकी थि कि उसे महसूस कियाजा सकता थां। अंजलि बैड पऱ पूरीतरह नग्न लेटी थि, उसके घुटने मुड़े हुए थें औऱ उसकी जाँघें आर्यन केँ लिए एक् निमंत्रण कि तरह खुलीथीं। आर्यन, जौ अब अपनी 'गुरु' केँ हर इशारे कों समझने लगा थां, आहिस्ता उस गुलाबी गुफा केँ लगभग पहुंचा जहाँ सें जिंदगी औऱ सुख कि धारा बहती हैं।
अंजलि नें अपने हाथों सें आर्यन केँ सिर कों थामेरखा थां, जैसे वो उसेइस 'पवित्र' अनुभव केँ लिए निर्देशित कररही होँ। आर्यन नें अपनी आँखें बंदकीं औऱ अपनीनाक कों अंजलि केँ उस भीगेहुए हिस्से केँ लगभग लें गय़ा। वहा कि प्राकृतिक खुशबू नें उसकेमन कि नसों कों झकझोर दिया।
अंजलि केँ निर्देशानुसार, आर्यन नें सीधे जुबान नहि लगाई। उसने पहले अपनी मम्मी कि जाँघों केँ अंदरूनी हिस्सों पर्र अपनेगरम होंठरखे। मखमली त्वचा औऱ उस पर्र मद्धम पड़ती शावर केँ पानी कि ठंडक नें एक् अजीब सां एहसास दिया। अंजलि कि एक् लंबी सिसकी गूँजी, "अहह.हाँ आर्यन। धीरे धीरेऊपर आँ."
आर्यन नें अब अपनी जुबान कि नोक निकाली औऱ उसे अंजलि केँ उस Clitoris पर्र बिल्कुल हल्के सें छुआ। जैसे हि उसकी गीली औऱ गरम जुबान उस संवेदनशील उभार सें टकराई, अंजलि कां पूरा जिस्म खाट पऱ उछल गय़ा। उसेलगा जैसे उसकेपेट मे हजारों तितलियाँ एक् संग उड़ने लगीहों।
अंजलि केँ उस हिस्से सें रिसती हुइ प्राकृतिक नमीअब आर्यन कि जुबान पर्र थि। वो स्वाद। वो नमक औऱ शहद जैसा मिला-जुला अहसास आर्यन केँ लिए किसी नशें सें कम नहि थां। उसनेअब अपनी जुबान कों थोडा औऱ फैलाया औऱ उस गुलाबी दरार केँ ऊपर सें नीचे तक एक् लंबी Strokeमारी।
अंजलि केँ हाथअब आर्यन केँ बालों कों कसकर जकड़ चुके थें। वो अपनीकमर कों ऊपर-नीचे मटकारही थि, जैसे वो चाहती हौ कि आर्यन उसकीरूह तक कों अपनी जुबान सें सोख लें।
"उफ़। मेरे बच्चे। तेरी जुबान। कितनी कोमल हैं। अहह! वहीं। वहीं रगड़इसे, " अंजलि नें हाँफते हुएकहा। उसकी आवाज़ मे अब वोँ प्यास थि जौ बरसों सें दबी हुइ थि औऱ आज अपने हि बेटे केँ मुँह सें तृप्त होँ रही थि।
आर्यन अबलय मे आँ चुका थां। वो कभी अपनी जुबान कों गोल-गोल घुमाता, तोँ कभीउसे अंजलि केँ उसतंग रास्ते केँ अंदर डालने कि कोशिश करता। हर बारजब उसकी जुबान अंजलि केँ 'अंदरूनी रेशों' कों छूती, अंजलि कां जिस्म कांप उठता औऱ उसके मुँह सें मदहोश कर देने वाली आवाज़ें निकलने लगतीं।
बेडरूम कि हवाअब अंजलि कि सिसकारियों औऱ आर्यन कि साँसों कि गर्मी सें भारी हौ चुकी थि। आर्यन कों अब अंदाज़ा होँ गय़ा थां कि उसकी जुबान कां एक् छोटा सां स्पर्श उसकी मां केँ बदन मे कैसा तूफ़ान ला सकता हैं। अंजलि केँ निर्देश औऱ उसकीदेह सें उठतीगंध नें आर्यन कों एक् मदहोश शिकारी बना दिया थां।
अंजलि पलंग पर्र बेहाल पड़ी थि, उसकेहाथ आर्यन केँ बालों मे बुरीतरह धँसेहुए थें। जैसे हि आर्यन नें महसूस किया कि अंजलि कि जाँघें कांपरही हें, उसने अपनी जुबान कि रफ़्तार औऱ गहराई बढ़ा दि।
आर्यन नें अब अपनी जुबान कों सिर्फ ऊपर हि नहि रखा, बल्कि उसे एक् नुकीली धार कि तरह अंजलि केँ उसतंग औऱ जूसी रास्ते केँ अंदर गहराई तक उतार दिया। वो अपनी जुबान कों अंदर-बाहर् तेज़ी सें चलाने लगा। अंजलि कों ऐसा महसूस हुआ जैसेकोई गरम मखमली लहर उसके भीतर बार-बार टकरारही हौ। वो अपनीकमर कों बैड सें ऊपर उठाकर आर्यन केँ मुँह पर्र अपना पूरा वजूद थोंप देना चाहती थि।
आर्यन नें अब अपनी जुबान कि नोक कों उस Clitoris पर्र टिका दिया औऱ उसे तेज़ी सें दाएं-बाएं रगड़ना शुरुआत किया। ये प्रहार इतना सटीक औऱ शक्तिशाली थां कि अंजलि कां मन सुन्न हौ गय़ा। उसके पैरों कि मज़बूत पकड़, जोँ पहले आर्यन कि गर्दन केँ पास थि, अब आरामसे ढीली होकरखाट पऱ फैलने लगी। उसके पंजेमुड़ गए औऱ वो बेतहाशा चिल्लाने लगी, "अहह। आर्यन। बस। वहीं। उफ़्फ़। मे। मे जारही हूं। मर जाऊंगी। अहह!"
अंजलि कां जिस्म एक् अंतिम बारज़ोर सें झटका खाकरतन गय़ा। उसकी जाँघों केँ बीच सें काम-रस कां एक् फव्वारा फूटा, जिसे आर्यन नें अपनी जुबान पर्र बड़े हि शौक़ सें समेट लिया। वो रस आर्यन केँ गले सें नीचे उतरा, जोँ उसे दुनिया केँ किसी भि अमृत सें कहीं ज्यादा मीठा औऱ नशीला लगा। अंजलि पूरीतरह निढाल होकरबैड पर्र बिखर गई। उसकेपेर बेजान होकरफैल गए थें औऱ उसकी आँखें आधी खुलीरह गईं, जिनमें सिर्फ़ औऱ सिर्फ़ रूहानी सुख कां नशा थां।
आर्यन कुछदेर तक वहीं रुकारहा, अपनी मम्मी केँ बदन सें निकलते उस आख़िरी चैन कों अपनी जुबान सें सोखता रहा। जब उसने अपना चेहरा ऊपर उठाया, तोँ उसके होंठों औऱ ठुड्डी पर्र अंजलि कि 'प्यास' कि चमकसाफ़ दिखरही थि।
अंजलि नें भारी आवाज़ मे बस इतना हि कहा, "तूँ। तूनेआज अपनी मम्मी कों जीत लिया आर्यन। आज केँ बाद मे मात्र तेरी दासी हूं। "
रात केँ ३:३०बज रहे थें, औऱ पूरारूम उन दोनों केँ मिलन कि खुशबू सें सराबोर थां। अंजलि केँ पैरों कि ढीलीपकड़ इसबात कां सबूत थि कि आर्यन नें अपना'ओरल' कां दूसरा पाठ न् सिर्फ सीखा थां, बल्कि उसमें महारत हासिल करली थि।
बेडरूम कि मदहोश कर देने वाली शांति मे अब मात्र उन दोनों कि भारी सांसें गूँजरही थीं। आर्यन, जोँ अब तक अंजलि कि जाँघों केँ बीचउस रसीली कला कों अंजाम देरहा थां, धीरे-धीरे सें ऊपरआया औऱ अपनी मां केँ बगल मे लेट गय़ा।
जैसे हि आर्यन बगल मे लेटा, अंजलि नें बिना एक् समय कि देरीकिए उसे अपनी बाहों केँ घेरे मे लें लिया। उसका गोरा औऱ नग्न शरीर आर्यन केँ पसीने सें भीगेबदन सें पूरीतरह सट गय़ा।
अंजलि कों आर्यन पऱ इतना प्रेम औऱ गर्व महसूस हौ रहा थां कि उसने उसके चेहरे कों अपने दोनों हाथों मे भरा औऱ सीधे उसके होंठों पर्र एक् गहरा औऱ लंबाकिस कर दिया। जैसे हि उनके होंठ मिले, अंजलि कों अपने हि जिस्म केँ उस 'काम-रस' कां स्वाद आर्यन केँ मुँह मे महसूस हुआ। वो स्वाद, जोँ आर्यन कि जुबान औऱ होंठों पऱ अभि भि ताज़ा थां, अब वापस अंजलि केँ मुँह मे घुलरहा थां।
आर्यन केँ लिएये लम्हा किसी ड्रीम्स जैसा थां। वो अपनी हि मम्मी केँ रस कों उसके होंठों केँ जरिएचख रहा थां। ये एक् ऐसा रोमांच थां जिसे शब्दों मे बयान करना नामुमकिन थां। उसे महसूस होँ रहा थां कि ये मात्र एक् शारीरिक क्रिया नहि थि, बल्कि ये उनकेबीच केँ उसनए औऱ अटूट रिश्ते कि मुहर थि। अंजलि कि जुबान जब आर्यन कि जुबान सें टकराई, तोँ वो 'स्वाद' दोनों केँ भीतर एक् नई बिजली दौड़ा गय़ा।
अंजलि नें किस तोड़ते हुए आर्यन कि आँखों मे देखा औऱ धीरे-धीरे सें उसकी ठुड्डी पर्र लगीउस नमी कों अपनी उंगली सें पोंछा। "मेराशेर बेटा." उसने गर्व सें फुसफुसाया। "तूनेआज मुझे वोँ स्वाद चखाया हैं जोँ मैंने स्वयं कभी महसूस नहि किया थां। तेरे होंठों पर्र मेरा वजूदलगा हैं, औऱ ये देखकर मुझे जौ खुशीमिल रही हैं, वोँ दुनिया केँ हरसुख सें बढ़कर हैं। "
आर्यन नें अपनी मां कों औऱ कसकर भींच लिया। उसे लगरहा थां जैसे वो दुनिया कां सबसे शक्तिशाली मर्द हैं, जिसने अपनी 'गुरु' औऱ अपनी 'मां' कों पूरीतरह संतुष्ट कर दिया हैं। अंजलि केँ भारी बूब्ज़ आर्यन केँ सीने पर्र दबेहुए थें, औऱ उन दोनों केँ पैरों केँ बीच कि वोँ गर्माहट अभि भि बरकरार थि।
रात केँ ३:४५बज चुके थें। थकानअब आरामसे आँखों मे उतररही थि, मगर उनके दिलों मे जौ आग सुलगी थि, उसकीचमक बेडरूम केँ अँधेरे कों भि मातदे रही थि।
Doctor मां – New Episode
जब आर्यन कि आँखें खुलीं, तौ कमरे कि खिड़कियों सें छनकरआती तेज़धूप बतारही थि कि दिन बहुतचढ़ चुका हैं। उसने घड़ी कि ओर देखा—सुभह केँ 11 बजरहे थें। बगल कां बैड खाली थां, मगर चादरों पऱ अभि भि अंजलि केँ जिस्म कि वोँ भीनी-भीनी खुशबू औऱ रात केँ उस तूफ़ान कि सिलवटें मौजूद थीं।
आर्यन अंगड़ाई लेतेहुए उठा औऱ मात्र अपनी सफेद अंडरवियर मे हि किचन कि तरफ बढ़ा। वहा कां नज़ारा देखते हि उसकी नींद पूरीतरह काफूर हौ गई।
अंजलि किचन मे गरमचाय बनारही थि। उसनेरात वाली हि हल्की नाइटी पहनी हुईँ थि, मगर सुभह कि जल्दबाज़ी याँ शायद एक् नई बेबाकी केँ कारण उसने ब्रा नहि पहनी थि।
नाइटी केँ पतले कपड़े केँ नीचे सें अंजलि केँ वे विशाल औऱ भारी उभार अपनी पूरी आज़ादी केँ संग लहरारहे थें। जब वो गरमचाय केँ लिए अदरककूट रही थि याँ कप निकाल रही थि, तौ उसके स्तनों कि हलचल नाइटी केँ ऊपर सें साफ दिखाई देरही थि। बिना ब्रा केँ वे उभार थोड़े नीचे कि ओर झुकेहुए औऱ भि ज्यादा प्राकृतिक औऱ आकर्षक लगरहे थें।
अंजलि केँ बिखरे हुएबाल औऱ सुभह कि वोँ 'मेकअप रहित' हुस्न आर्यन कों दीवाना बनारही थि। नाइटी केँ कपड़े पऱ उभरेहुए उसके निप्पल केँ निशान आर्यन कों याद दिलारहे थें कि रात कों इन्हीं शिखरों पर्र उसने अपनी जुबान कां चमत्कार चलाया थां।
आर्यन चुपचाप किचन केँ दरवाजे पर्र खड़ा होकर अपनी मम्मी केँ उस मदहोश कर देने वालेरूप कों निहारने लगा। धूप कि रोशनी जब अंजलि केँ जिस्म पर्र पड़रही थि, तौ उसका सफ़ेद रंग औऱ भि ज्यादा दमकरहा थां।
अंजलि कों जैसे हि आर्यन कि मौजूदगी कां अहसास हुआ, वो पीछे मुड़ी औऱ एक् प्यारी सि मुस्कान केँ संग बोलि, "सोकरउठ गय़ा मेरा बच्चा? देख 11 बजगए हें, आज तोँ सूरज नें भि हमारा इंतजार किया। "
जब वो बोलि, तौ उसके सीने मे होने वाले कंपन नें उन उभारों कों फिन सें हिला दिया, जिससे आर्यन कि नज़रें एक् लम्हा केँ लिए वहींजम गईं। अंजलि नें आर्यन कि नज़रों कां पीछा किया औऱ समझ गई कि उसका बेटा क्याँ देखरहा हैं, पर्र आज उसने नं तोँ दुपट्टा ओढ़ा औऱ नं हि स्वयं कों ढका।
किचन कि ताजीबनी अदरक वालीगरम चाय कि खुशबू पूरेघऱ मे गंधरही थि। अंजलि दोकपगरम चाय लेकर डाइनिंग टेबल पर्र आई औऱ आर्यन केँ सामने बैठ गई। बिना ब्रा केँ उसकी नाइटी केँ भीतर हिलते वे मखमली उभार औऱ चेहरे पऱ रात कि तृप्ति कि वो चमक, सुभह कि धूप मे अंजलि कों किसीपरी जैसा दिखारही थि।
आर्यन गरमचाय कां कपहाथ मे लेकर एक् घूँट भरता हैं औऱ फिन अपनी मम्मी कि आँखों मे झांकता हैं। उसकी आँखों मे अब वो पुरानां संकोच नहि, बल्कि एक् गहरा सम्मान औऱ 'मर्दानी चाहत' थि।
"मम्मी." आर्यन नें बहोत हि धीमे औऱ गंभीर स्वर मे कहा। "कल रात केँ लिए। औऱ उनसभी चीज़ों केँ लिए जौ आपने मुझे सिखाईं, मे आपकोबस Thank You केहना चाहता हूं। मुझे नहि पता थां कि एक् स्त्री कों महसूस करना औऱ उसेसुख देना इतनी बड़ी इबादत होँ सकती हैं। "
आर्यन नें आगेकहा, "आपने मुझे जोँ ज्ञान दिया, चाहे वोँ उंगलियों कां चमत्कार हौ याँ वोँ 'ओरल' कां अहसास। उसने मुझे अंदर सें बदल दिया हैं। मुझे स्वयं पऱ पहलेकभी इतना गर्व महसूस नहि हुआ जितना आज हौ रहा हैं। आपने मुझे मात्र अपना बेटा नहि रहने दिया, मुझे एक् 'मर्द'बना दिया। "
अंजलि नें गरमचाय कां कपमेज पर्र रखा औऱ आर्यन कां हाथ अपने हाथों मे लेकर सहलाने लगी। "धन्यवाद कि ज़रूरत नहि हैं मेरे बच्चे, " वो मुस्कुराते हुए बोलि। "एक् गुरु कों सबसे बड़ी गुरुदक्षिणा तब मिलती हैं जब उसका शिष्य पूरी निपुणता सें उसे संतुष्ट करदे। औऱ कलरात। तूने मुझे केवल संतुष्ट नहि किया, तूने मुझेफिन सें ज़िंदा कर दिया। "
अंजलि नें झुककर मेज पऱ अपनाहाथ आगे बढ़ाया, जिससे उसके बिना ब्रा वाले बूब्ज़ मेज केँ किनारे सें हल्के सें दबगए औऱ उनका उभार नाइटी केँ गले सें झांकने लगा। "कल रात जोँ तूने सीखा, वोँ तौ बस शुरुआत थि आर्यन। अभि तोँ तुझेही इसबदन केँ औऱ भि कई राज़ जानने हें। "
आर्यन गरमचाय पीतेहुए अपनी मां केँ उस उभरते हुए जिस्म कों देखरहा थां। 11 बजे कि येगरम चाय मात्र प्यास नहि बुझारही थि, बल्कि उसनईआग कों औऱ हवादे रही थि जौ अब उनकेबीच कभी नहि बुझने वाली थि।
गरमचाय कि उन नशीली चुस्कियों औऱ बीतीरात कि यादों केँ खुमार केँ बाद, दोनों अब वापस अपनी दिनचर्या मे आने कि कोशिश कररहे थें, फिरभी हवा मे अब भि वोँ 'अपनापन' औऱ कामुकता घुली हुई थि।
आर्यन नें गरमचाय ख़त्म कि औऱ रेडी होकर मार्केट जाने केँ लिए निकलने लगा। उसने अंजलि केँ गाल पर्र एक् छोटा सां प्रेम भरा'किस' किया, जोँ अब उनकेबीच एक् सहज क्रिया बन चुकी थि।
"मम्मी, मे बस एक् घंटे मे घऱ कां सारा सामान लेकर वापसआता हूं, " आर्यन नें कहा। अंजलि नें मुस्कुराते हुएउसे विदा किया।
आर्यन जब मार्केट पहुंचा, तौ उसके चलने केँ अंदाज़ मे एक् अलग हि आत्मविश्वास थां। कलरात केँ उस 'मर्दानी अनुभव' नें उसे अंदर सें बदल दिया थां। भीड़भाड़ केँ बीच भि उसके दिमाग़ मे अपनी मां कां वोँ बिना ब्रा वालारूप औऱ किचन मे गरमचाय पीते टाइम उनका वोँ झुकाव बार-बार घूमरहा थां। वो जल्द-जल्द सामान खरीदरहा थां ताकि वापसघऱ पहुँच सके।
इधर घऱ पऱ, अंजलि नें घऱ केँ बचेहुए काम निपटाने शुरुआत किए। उसने अभि भि ब्रा नहि पहनी थि, औऱ घऱ मे अकेली होने केँ कारण उसने अपनी नाइटी केँ ऊपर केँ एक्-दो बटन भि खोलदिए थें ताकिउसे काम करतेसमय हवा लगतीरहे।
झाड़ू-पोछा करते औऱ बैडठीक करतेसमय अंजलि कि नज़रउन सिलवटों पऱ गई जहाँरात कों आर्यन केँ संग उसने वोँ 'स्वर्ग' महसूस किया थां। वो मुस्कुरा दि औऱ अपने आप् हि उसकेहाथ अपनी जाँघों केँ उस हिस्से पर्र चलेगए जहाँ आर्यन कि जुबान कां चमत्कार चला थां। उसके जिस्म मे एक् मीठी सि सिहरन दौड़ गई।
अंजलि नें किचन समेटी औऱ फिन दोपहर केँ खाने कि तैयारी करनेलगी। वो बार-बार दरवाजे कि तरफ देखती, जैसेउसे उस '7 इंची गबरू' केँ वापसआने कां बेसब्री सें इंतजार होँ। घऱ कां सन्नाटा उसेअब काट नहि रहा थां, बल्कि उसेउस आने वाले तूफ़ान कि याद दिलारहा थां जौ आर्यन केँ वापसआते हि फिन सें शुरुआत हौ सकता थां।
आर्यन जब मार्केट सें लौटा, तोँ उसके हाथों मे सामान केँ थैले थें, मगर उसकेमन मे केवल एक् हि ख्याल घूमरहा थां। जैसे हि उसनेघऱ मे कदमरखा, उसे किचन सें मसालों कि खुशबू औऱ संग हि अंजलि केँ शरीर कि वोँ चिर-परिचित गंध महसूस हुईँ।
अंजलि अभि भि उसीहाल मे थि—नाइटी केँ बटन खुलेहुए औऱ बिना ब्रा केँ उसके भारी उभारहर हरकत केँ संग आज़ादी सें हिलरहे थें।
आर्यन नें सामान मेज पर्र रखा। अंजलि उसकीतरफ मुड़ी औऱ मुस्कुराते हुए बोलीं, "आँ गय़ा मेरा बच्चा? ला, सामान मुझेदे दे। "
मगर आर्यन वहीं खड़ारहा। उसके चेहरे पर्र एक् अजीब सि हिचकिचाहट थि, हाथ थोड़े कांपरहे थें औऱ वो अपनी मां कि आँखों मे सीधे देखने सें कतरारहा थां। उसने एक् गहरी सांसली औऱ रुक-रुक कर बोला:
"मम्मी। वोँ। बाहर् बहोत गर्मी औऱ धूल हैं। मे। मे सोचरहा थां कि क्याँ। क्याँ हम् दोनों एक् संगनहा सकते हें? मतलब। क्याँ आप् मेरेसंग शावर केँ नीचे चलेंगी?"
अंजलि ये सुनकर एक् समय केँ लिए ठिठक गई। उसने देखा कि आर्यन केसे एक् छोटे बच्चे कि तरह शर्मा रहा हैं, मगर उसकी आँखों मे वही 'मर्दानी प्यास' थि जोँ कलरात उसने देखी थि। अंजलि केँ होंठों पऱ एक् गहरी औऱ मादक मुस्कान फैल गई।
अंजलि नें सामान वहीं छोड़ दिया औऱ आहिस्ता चलकर आर्यन केँ बिल्कुल लगभग आँ गई। उसने आर्यन कि शर्ट केँ कॉलर कों ठीक किया औऱ अपनी नशीली आवाज़ मे फुसफुसाया, "इतनी हिचकिचाहट क्यूं आर्यन? अब तोँ इस जिस्म पर्र तेरा पूराहक हैं। कलरात तूने मुझे अंदर सें साफ किया थां, आज बाहर् सें भि करदे। "
अंजलि नें आर्यन कां हाथ पकड़ा औऱ उसे बाथरूम कि ओर लेँ जानेलगी। आर्यन कों महसूस हुआ कि उसकी मां कि हथेलियाँ कितनी गरम हें। चलतेसमय अंजलि कि नाइटी केँ खुलेहुए गले सें उसके नग्न औऱ विशाल स्तनों कि झलक साफ़दिख रही थि, जिसने आर्यन केँ भीतरफिन सें वहीआग लगा दि।
बाथरूम कां द्वार (दरवाज़ा) खुला औऱ शावर कि हल्की आवाज़ गूँजने लगी। आर्यन कों यकीन नहि होँ रहा थां कि वो अपनी खूबसूरत औऱ मदहोश कर देने वाली मम्मी केँ संगदिन केँ उजाले मे नहाने जारहा हैं।
बाथरूम कां दरवाजा बंद होते हि बाहर् कि दुनिया पीछेछूट गई। शावर सें गिरती पानी कि नन्हीं बूंदों कि आवाज़उस छोटे सें कमरे मे गूँजरही थि। अबकोई पर्दा नहि थां, मात्र दो शरीर थें औऱ उनकेबीच उमड़ता हुआ बेपनाह प्रेम औऱ उत्तेजना।
अंजलि औऱ आर्यन शावर केँ ठीक नीचे आमने-सामने खड़े थें। अंजलि कि नाइटी पानी कि फुहारों सें पहले हि भीगकर उसके जिस्म सें चिपक गई थि, जिससे उसकेबदन केँ उतार-चढ़ाव औऱ भि साफ़ दिखने लगे थें।
अंजलि नें बिना किसी झिझक केँ अपनाहाथ आर्यन कि टी-शर्ट केँ निचले हिस्से पर्र रखा। "उतारइसे आर्यन। आज हमें एक्-दूसरे कों पूरीतरह महसूस करना हैं, " उसने आदेशात्मक मगर प्रेम भरी आवाज़ मे कहा। आर्यन नें अपनी टी-शर्ट औऱ जींस उतार दि, औऱ अब वो केवल अपनी सफेद अंडरवियर मे खड़ा थां। उसका७ इंच कां अंगउस पतले कपड़े केँ भीतर अपनी मौजूदगी दर्जकरा रहा थां, जिसे देखकर अंजलि कि आँखों मे चमक आँ गई।
अब आर्यन कि बारी थि। उसने कांपते हाथों सें अंजलि कि नाइटी केँ कंधों कों पकड़ा। जैसे-जैसे वो नाइटी कों नीचे सरकारहा थां, अंजलि कां गोरा औऱ दमकता हुआ शरीरधूप औऱ पानी कि रोशनी मे चमकने लगा। नाइटी फर्श पऱ गिर गई। अंजलि अब आर्यन केँ सामने केवल अपनी कालीलेस वाली पैंटी मे खड़ी थि।
चूँकि अंजलि नें ब्रा नहि पहनी थि, इसलिये उसके विशाल औऱ भारी मम्मों अब पूरीतरह आज़ाद थें। पानी कि बूंदें उन गुलाबी शिखरों पर्र गिरकर नीचे कि ओर फिसलरही थीं। आर्यन कि नज़रें उन उभारों पर्र जम गई थीं, जौ हर सांस केँ संग ऊपर-नीचे होँ रहे थें। अंजलि कां पेट, उसकी पतलीकमर औऱ काली पैंटी केँ ऊपर कां वोँ मांसल हिस्सा किसी पेंटिंग जैसालग रहा थां।
शावर कां पानीअब उनके शरीरों कों पूरीतरह भिगो चुका थां। आर्यन नें अपनी मां कि कमर मे हाथ डाला औऱ उसे अपनीओर खींच लिया। अंजलि केँ नग्न औऱ ठंडे मम्मों जब आर्यन केँ गरम औऱ चौड़े सीने सें टकराए, तौ दोनों केँ मुँह सें एक् संग'अहह' निकल गई।
"मां। आप् दिन कि रोशनी मे औऱ भि ज्यादा हसीन लगती हें, " आर्यन नें मदहोश होकरकहा।
अंजलि नें अपने गीलेबाल पीछे झटके औऱ आर्यन कि गर्दन केँ चारों ओर अपनी बाहें डालदीं। "औऱ तूँ पहले सें कहीं ज्यादा मर्दलग रहा हैं आर्यन। देख, तेरीइस छुअन सें मेरी क्याँ हालत होँ रही हैं." उसने आर्यन कां हाथ अपनी पैंटी केँ गीले इलास्टिक पऱ रख दिया।
बाथरूम कि हवाअब साबुन कि भीनी-भीनी खुशबू औऱ शावर कि भाप सें भर चुकी थि। पानी कि गिरती हुईँ धार केँ नीचे आर्यन औऱ अंजलि एक्-दूसरे केँ बेहद लगभग थें। अंजलि नें पासरखे शॉवरजेल कि बोतल उठाई औऱ उसकीकुछ बूंदें अपनी हथेलियों पऱ लेकर उन्हें आपस मे रगड़ा, जिससे ढेर सारा सफेद औऱ मखमली झागबन गय़ा।
अंजलि नें मुस्कुराते हुए अपनीझाग वाली हथेलियाँ आर्यन केँ चौड़े सीने पऱ रखदीं। वो आरामसे अपनी उंगलियों कों उसके सीने कि मांसपेशियों पऱ घुमाने लगी।
"देख आर्यन, साबुन केवल सफाई केँ लिए नहि होता.ये शरीर कों औऱ भि ज्यादा संवेदनशील बना देता हैं, " उसने फुसफुसाते हुएकहा। झाग केँ बहाने वो आर्यन केँ पूरेधड़ कों सहलारही थि। जब उसकाहाथ आर्यन कि अंडरवियर केँ इलास्टिक केँ पास सें गुज़रा, तौ आर्यन केँ जिस्म मे एक् सिहरन दौड़ गई।
अब आर्यन नें साबुन लिया। उसकेहाथ कांपरहे थें, मगर इरादे मज़बूत थें। उसने अपनीझाग भरी हथेलियाँ अंजलि केँ नग्न औऱ भारी स्तनों पर्र रखीं। जैसे हि उसनेउन विशाल उभारों कों सहलाना शुरुआत किया, साबुन कि फिसलन कि वजह सें उसकाहाथ उन पऱ मखमली अंदाज़ मे फिसलने लगा।
आर्यन नें बड़े हि प्रेम सें उन गोलों केँ चारों ओरझाग कां घेरा बनाया। अंजलि नें अपनी आँखें मूंदलीं औऱ अपनासिर पीछे कि ओर झुका लिया। "अहह। आर्यन। बिल्कुल ऐसे हि। बहोत चैनमिल रहा हैं, " उसने मदहोश होकरकहा। शावर कां पानीउस झाग कों आरामसे नीचे कि ओरबहा रहा थां, जौ अंजलि कि पतलीकमर सें होताहुआ उसकी काली पैंटी केँ किनारों मे समारहा थां।
आर्यन अब औऱ भि बेबाक होँ गय़ा। उसने अंजलि कों पीछे घूमने कां इशारा किया औऱ उसकी चिकनी पीठ पर्र साबुन मलनेलगा। अंजलि कि रीढ़ कि हड्डी पऱ जब आर्यन कि झागभरी उंगलियाँ फिसलीं, तोँ वो उत्तेजना सें कांपउठी।
अंजलि फिन सें आर्यन कि ओर मुड़ी। अबवे दोनों पूरीतरह साबुन कि सफेदझाग मे लिपटे हुए थें। पानी औऱ साबुन नें उनके शरीरों कों इतना फिसलन भराबना दिया थां कि जबवे एक्-दूसरे सें सटे, तोँ उनका मांस एक्-दूसरे पर्र मखमल कि तरह फिसलरहा थां। अंजलि केँ भारी मम्मों आर्यन केँ सीने पर्र इधर-उधर फिसलरहे थें, जिससे एक् अजीब सां कामुक घर्षण पैदा होँ रहा थां।
अंजलि नें आर्यन कि आँखों मे देखा औऱ उसकेगले लग गई। "आज कि ये दोपहर। कलरात सें भि ज्यादा हसीनलग रही हैं आर्यन। तूने तोँ अपनी मां कों पानी-पानी कर दिया। "
बाथरूम कि दीवारों पऱ गिरती पानी कि बौछारें औऱ साबुन कि मखमली झाग नें माहौल कों किसी रोमांटिक फिल्म केँ सेट जैसाबना दिया थां। कलरात कि वोँ भारी उत्तेजना अब एक् प्यारी सि मस्ती औऱ शरारत मे बदल चुकी थि। दोनों एक्-दूसरे केँ संग बच्चों कि तरहखेल रहे थें, मगरउस खेल मे भि एक् गहरा कामुक खिंचाव थां।
आर्यन नें ढेर सारीझाग अपनेहाथ मे ली औऱ शरारत सें अंजलि कि नाक पऱ लगा दि। अंजलि नें अपनी आँखें सिकोड़ीं औऱ खिलखिलाकर हंसपड़ी।
"अच्छा! तोँ अब गुरु पर्र हि वार?" अंजलि नें हंसते हुए चुटकी ली औऱ शावर केँ नीचे सें हटकर अपनेहाथ मे साबुन कां झागभरा औऱ आर्यन केँ चेहरे पऱ मल दिया। आर्यन हंसते हुए पीछेहटा, मगर फर्श कि फिसलन कि वजह सें उसकापेर डगमगाया औऱ उसने सहारा लेने केँ लिए अंजलि कि कमर कों कसकरपकड़ लिया।
दोनों एक्-दूसरे सें पूरीतरह चिपकगए। आर्यन नें अंजलि केँ कान केँ पास जाकर फुसफुसाया, "मम्मी, आप् इस सफेदझाग मे बिल्कुल किसी 'मिल्क शेक' जैसीलग रही हौ। मनकररहा हैं अभि पी जाऊं। "
अंजलि नें शरारत सें अपनी भौहें चढ़ाईं औऱ आर्यन केँ गाल कों हल्के सें काटते हुए बोलि, "मिल्क शेक? बेटा, यहशेक थोड़ा महंगा पड़ेगा। औऱ वैसे भि, रात कों तौ तूने बहुत 'रसपान' किया हैं, अभि भि प्यास नहि बुझी क्याँ?"
आर्यन अंजलि कि इस बेबाकी पर्र झेंप गय़ा, मगर उसने भि हार नहि मानी। उसने अपनीझाग भरी उंगलियों सें अंजलि कि Navel केँ चारों ओर गोल-गोल चक्कर बनाना शुरुआत किया।
"मां, यहा बहोत साबुन लगा हैं, इसेसाफ़ करना पड़ेगा, " आर्यन नें शरारत सें कहा। अंजलि कों गुदगुदी होनेलगी औऱ वो मचलने लगी। "अहह! आर्यन। रुक। वहां गुदगुदी होती हैं। हाहा। बदतमीज़ कहीं केँ! अपनी मां कों तंग करनासीख गय़ा हैं?"
हँसी-मज़ाक केँ बीच आर्यन नें अंजलि केँ भीगे बालों कों कान केँ पीछे करतेहुए पूछा, "सच बताना मम्मी, क्याँ पिताजी नें कभी आपकेसंग ऐसे मस्ती कि हैं?" अंजलि कां चेहरा थोड़ा धीमापड़ा, फिन उसने मुस्कुराकर आर्यन कि आँखों मे देखा, "नहि आर्यन। तेरे बापू तौ बस अपनी प्यास बुझाना जानते थें। यह जौ 'चैन' औऱ 'मस्ती' तुँ मुझेदे रहा हैं, यह मेरेलिए बिल्कुल नया औऱ अनमोल हैं। "
बाथरूम कि मस्ती अब अपने शबाब पऱ थि। शावर कां पानीउन दोनों केँ झाग सें भरे शरीरों पऱ गिरकर फर्श पऱ सफेद समंदर बनारहा थां। आर्यन अब बहुतखुल चुका थां, उसने अंजलि कि कमर मे हाथ डालकर उसे अपने थोडा औऱ लगभग खींच लिया औऱ शरारत भरी नज़रों सें उसेऊपर सें नीचे तक देखने लगा।
आर्यन नें मुस्कुराते हुए अंजलि केँ गीले गालों कों थपथपाया औऱ बोला, "पता हैं मां, कॉलेज मे सभी लड़के अपनी-अपनी हॉट प्रोफेसर्स केँ ड्रीम्स देखते हें। हमारी एक् यंग प्रोफेसर हें, मिस शर्मा। पूरे कॉलेज केँ लड़के उनके पीछे पागल रहते हें। "
अंजलि नें बनावटी गुस्से सें अपनी भौहें सिकोड़ीं औऱ आर्यन केँ सीने पर्र अपनी उंगलियां घुमाते हुए पूछा, "अच्छा? तोँ क्याँ मेरा बेटा भि उनमिस शर्मा केँ ड्रीम्स देखता हैं? कैसी हें वोँ। मुझसे भि अधिक हसीन?"
आर्यन ज़ोर सें हँस पड़ा औऱ अंजलि कों औऱ कसकर भींच लिया, जिससे अंजलि केँ बिना ब्रा वालेनरम औऱ भारी मम्मों आर्यन केँ सीने पऱ पूरीतरह पिचकगए।
"अरे कहां मम्मी! वोँ तोँ उनके सामने पानीकम गरमचाय हें, " आर्यन नें मज़ाक उड़ाते हुएकहा। "वोँ साड़ी पहनकर आती हें तोँ लड़के समझते हें कि वोँ बहोत कयामत हें, मगरआज जब मे आपकोइस भीगी हुइ हालत मे देखरहा हूं। तोँ मुझेलग रहा हैं कि मेरे कॉलेज कि सबसेहॉट लड़की भि आपकी हुस्न केँ १०% भि नहि हैं। आपकीयह जोँ 'फिगर' हैं नं, यह किसी भि प्रोफेसर कि छुट्टी करदे। "
अंजलि नें शरारत सें आर्यन केँ कान कों हल्का सां मरोड़ा औऱ चहकते हुए बोलीं, "बड़ा पारखी होँ गय़ा हैं तुँ तौ! अपनी प्रोफेसर सें अपनी मम्मी कि तुलना कररहा हैं? वैसे। क्याँ तेरी वोँ मिस शर्मा इतनी 'मजबूत' औऱ 'रसीली' हें जितनी मे हूं?" ये कहतेहुए अंजलि नें जानबूझकर अपनीकमर कों आर्यन केँ उस७ इंची उभार सें रगड़ा जोँ अंडरवियर मे फन फैलाए खड़ा थां।
आर्यन कि सांसें रुकगईं। "मां। उनकेपास तौ आपके जैसाआधा खूबसूरती भि नहि हैं। वोँ तौ केवल मेकअप कि दुकान हें, औऱ आप्। आप् तोँ इस सादे भीगे शरीर औऱ साबुन कि झाग मे हि किसी अप्सरा जैसीलग रही होँ। अगर वोँ आपकोदेख लें, तोँ कल सें कॉलेज आनां छोड़ देंगी। "
अंजलि आर्यन कि इन बातों सें अंदर हि अंदर फूलकर कुप्पा हौ रही थि। उसे अपनी हुस्न पऱ इतना गर्व पहलेकभी नहि हुआ थां। उसने आर्यन कि गर्दन पऱ अपनी बाहें डालदीं औऱ फुसफुसाते हुए बोलि:
"तोँ फिनआज अपनीइस 'हॉट प्रोफेसर' कों हि अपना पूरासबक सुनादे आर्यन। देखूँ तौ सही, कल रात कि क्लास कां तुझ पर्र कितना असरहुआ हैं। "
आर्यन कि रगों मे अब जवानखून कां उबाल औऱ अपनी 'गुरु' सें मिली प्रशंसा कां नशा दौड़रहा थां। बातों-बातों मे अपनी मम्मी कि तुलना कॉलेज कि प्रोफेसर सें करने केँ बाद, उसके भीतर कां पुरुष अब पूरीतरह जाग चुका थां। अब वो वो शर्मीला बेटा नहि थां, बल्कि एक् मर्दबन चुका थां।
शावर कां पानी उनकीपीठ पऱ गिररहा थां, तभी आर्यन नें अचानक अपनी पकड़ मज़बूत कि। उसने अपना एक् हाथ अंजलि कि पतलीकमर पऱ रखा औऱ दूसरे हाथ कि उंगलियों कों अंजलि केँ गीले, रेशमी बालों मे पीछे कि ओर फँसा दिया।
आर्यन नें बहोत हि अधिकार केँ संग अंजलि केँ सिर कों हल्का सां पीछे कि ओर खींचा, जिससे अंजलि कि गर्दन पूरीतरह तन गई औऱ उसके होंठ स्वयं-ब-स्वयं थोड़े खुलगए। अंजलि इस अचानक आए बदलाव सें थोड़ी हैरान हुई, मगर आर्यन कि आँखों मे छाएउस 'हावी होने वाले' जुनून कों देखकर वो अंदर तक पिघल गई।
आर्यन नें बिना एक् लम्हा गँवाए अपने होंठ अंजलि केँ होंठों पऱ दे मारे। ये कोई साधारण चुंबन नहि थां; ये एक् गहरा, गीला औऱ जुनूनी फ्रेंच किस थां। आर्यन कि जुबान अंजलि केँ मुँह केँ भीतर किसी विजेता कि तरह प्रवेश कर गई। वो अंजलि कि जुबान कों अपने अधिकार मे लेँ रहा थां, उसेचूस रहा थां औऱ उसे अपनी ताकत कां अहसास करारहा थां।
अंजलि केँ मुँह सें एक् दबी हुईँ हल्की चीख निकली। उसे आर्यन कां ये 'डोमिनेंट' रूप पागलों कि तरह पसन्द आँ रहा थां। उसने अपनेहाथ आर्यन केँ कंधों पर्र कसदिए। आर्यन केँ बालों कों पीछे खींचने कि वजह सें अंजलि केँ बिना ब्रा वाले भारी बूब्ज़ सीधे आर्यन केँ सीने सें बुरीतरह पिचकगए थें, जिससे उनकेबीच कि गर्मी औऱ भि बढ़ गई थि।
पानी कि बौछारें उनके जुड़ते हुए होंठों पऱ गिररही थीं, मगर उन्हें होश नहि थां। आर्यन अब अंजलि केँ निचले होंठ कों अपने दाँतों सें हल्का सां काटरहा थां, जोँ अंजलि कों दर्द केँ संग एक् मीठाचैन देरहा थां। वो समझ गई थि कि उसका 'शिष्य' अबउसे अपनी उंगलियों पर्र नचाने केँ लिए सजधजकर हैं।
आर्यन नें किस तोड़ते हुए अंजलि केँ कान केँ पास जाकर भारी आवाज़ मे कहा, "आज कोई प्रोफेसर याद नहि आएगी मां। आज मात्र आप् होँ औऱ मेरायह पागलपन। "
बाथरूम कि दीवारों पऱ गिरती पानी कि आवाज़अब आर्यन केँ बढ़ते जुनून केँ आगे फीकीपड़ रही थि। आर्यन नें जिसतरह अंजलि केँ बालों कों पीछे घसीटकर उसे अपनी मर्दानगी कां अहसास कराया थां, उसने अंजलि केँ भीतर कि स्त्री कों पूरीतरह बेबसकर दिया थां।
आर्यन नें एक् बारफिन अंजलि केँ होंठों पऱ अपना कब्ज़ा जमाया। इसबार कां Kiss औऱ भि आक्रामक औऱ गहरा थां। अंजलि केँ मुँह सें निकलने वाली सिसकारियों कों आर्यन नें अपने मुँह मे हि सोख लिया।
अपनी ताकत कां प्रदर्शन करतेहुए, आर्यन नें अपने एक् हाथ सें अंजलि कि दोनों कलाइयों कों ऊपर कि ओर लें जाकर एक् संग दबोच लिया। अंजलि अब पूरीतरह निहत्थी थि; उसकेहाथ ऊपर बंधेहुए थें औऱ उसका सीना आर्यन केँ सामने पूरीतरह उभरकर आँ गय़ा थां। बिना ब्रा केँ उसके भारी मम्मों शावर केँ पानी मे भीगकर नीचे-ऊपर हौ रहे थें।
अब आर्यन नें अपना दूसरा हाथ आरामसे नीचे सरकाया। उसने अंजलि कि गीली औऱ चिपकी हुईँ कमर कों सहलाते हुए अपनाहाथ उसकी कालीलेस वाली पैंटी केँ इलास्टिक केँ भीतरडाल दिया। जैसे हि उसकी उंगलियाँ उस मखमली औऱ रेशमी नमी सें टकराईं, अंजलि कां पूराबदन एक् बिजली केँ झटके कि तरह कांपउठा।
आर्यन कि उंगलियाँ अब अंजलि केँ उस सबसे निजी औऱ जूसी हिस्से कों टटोलरही थीं जहाँकल रात उसने अपनी जुबान सें चमत्कार चलाया थां। पैंटी केँ भीतर कां वो इलाका पूरीतरह गरम औऱ गीला थां। आर्यन नें अपनी उंगलियों कों उस गुलाबी दरार केँ बीच गहराई सें सरकाया, जिससे अंजलि केँ पैरों केँ अंगूठे मुड़गए औऱ उसने आर्यन केँ मुँह केँ भीतर हि एक् लंबी कराहभरी।
अंजलि नें अपनेऊपर बंधे हाथों सें छूटने कि कोशिश नहि कि, बल्कि उसने स्वयं कों आर्यन केँ उस Dominance केँ हवाले कर दिया। वो अपनीकमर कों आगे-पीछे कररही थि ताकि आर्यन कि उंगलियाँ औऱ भि गहराई तक जा सकें।
आर्यन नें किस तोड़ते हुए अंजलि कि आँखों मे देखा—उसकी आँखों मे अब एक् 'शिकारी' कि चमक थि। उसने फुसफुसाते हुएकहा, "मां। यह पैंटी अब आपके औऱ मेरेबीच बहोत बड़ी बाधाबन रही हैं। क्याँ मे इसे हमेशा केँ लिएहटा दूँ?"
अंजलि नें हाँफते हुए अपनी गर्दन पीछे झुका दि औऱ बस इतना हि कहपाई, "जौ करना हैं कर आर्यन। आज मे मात्र तेरी हूं। मुझे पूरीतरह अपनाबना लेँ। "
आर्यन केँ भीतर कां 'डोमिनेंट' मर्दअब एक् चतुर खिलाड़ी बन चुका थां। उसने अंजलि कि आँखों मे वोँ बेतहाशा उतावलापन देखली थि, जोँ उसे पूरीतरह टूटने पऱ मजबूर कररही थि। अंजलि कों लगा थां कि अब उसकी पैंटी उतर जाएगी औऱ उसे वोँ आखिरी सुख मिलेगा, मगर आर्यन नें ऐन मौके पऱ अपनीचाल बदल दि।
आर्यन नें एक् शरारती औऱ गहरी मुस्कान केँ संग अपनाहाथ पैंटी केँ भीतर सें बाहर् निकाल लिया। अंजलि नें अपनी आँखें खोलीं, उसकी नज़रों मे एक् सवालिया निशान औऱ अधूरी प्यास थि। इससे पहले कि वो कुछसमझ पाती, आर्यन नें अपनाहाथ उसकी गीली काली पैंटी केँ ऊपररख दिया।
आर्यन अब अपनी हथेली सें पैंटी केँ उस रेशमी कपड़े कों अंजलि केँ काम-केंद्र पर्र धीरे धीरे रगड़ने लगा। गीला कपड़ा औऱ अंदर कि गर्माहट मिलकर एक् ऐसा घर्षण पैदाकर रहे थें जोँ अंजलि कों पागलकर रहा थां। वो चाहती थि कि आर्यन कां सीधा स्पर्श मिले, मगर आर्यन उसे मात्र उस कपड़े केँ जरिए महसूस करारहा थां।
अंजलि कि कलाइयां अभि भि आर्यन केँ एक् हाथ कि मज़बूत पकड़ मे थीं। उसने मचलते हुए अपनीकमर कों आर्यन केँ हाथ पऱ दबाया। "आर्यन। उफ़्फ़.यह क्याँ कररहा हैं? अंदर। अंदरहाथ डाल नं। मुझे वोँ चाहिए." वो करीब-करीब गिड़गिड़ाने लगी।
आर्यन नें उसकेकान केँ पास झुककर अपनीगरम साँसें छोड़ीं औऱ भारी आवाज़ मे कहा, "इतनी जल्द क्याँ हैं मां? अभि तौ दोपहर शुरुआत हुइ हैं। मे चाहता हूं कि आप् इस उतावलापन कों महसूस करें। जब प्यास चरम पर्र होगी, तब पानी पिलाने कां मजा हि कुछ औऱ होगा। "
आर्यन नें अपनी उंगलियों कि रफ़्तार थोड़ी औऱ बढ़ा दि, मगररहा वो पैंटी केँ ऊपर हि। पतले औऱ भीगेहुए लेस वाले कपड़े कि रगड़ अंजलि केँ उस नाज़ुक हिस्से कों बुरीतरह उत्तेजित कररही थि, मगरउसे वोँ गहराई नहि मिलरही थि जिसकी उसे तलाश थि। अंजलि केँ बिना ब्रा वाले बूब्ज़ तेज़ी सें ऊपर-नीचे होँ रहे थें, मानोवे भि इस 'अन्याय' कां विरोध कररहे हों।
शावर कां पानी उनकीपीठ पर्र गिरकर नीचेबह रहा थां, औऱ अंजलि केँ मुँह सें अब सिसकारियों केँ बजाय लंबी आहें निकलरही थीं। वो अपनी जाँघों कों आपस मे भींचरही थि, मानोउस अधूरे अहसास कों हि पकड़ने कि कोशिश कररही होँ।
बाथरूम कां तापमान अब उबलने लगा थां। आर्यन कां डोमिनेंट रूप अंजलि केँ लिए किसी मीठे टॉर्चर कि तरह थां। अंजलि कि कलाइयां अब भि आर्यन कि फौलादी पकड़ मे उसकेसिर केँ ऊपर बंधेहुए थें, जिससे उसका पूरा शरीरआगे कि ओरतन गय़ा थां।
अंजलि कि बेबसी हि उसकी सबसे बड़ी उत्तेजना बन गई थि। शावर कां गिरता पानी उसके नग्न स्तनों पऱ गिरकर आर्यन केँ चेहरे कों भिगोरहा थां।
आर्यन नें अपनी गर्दन झुकाई औऱ एक् भूखे शिकारी कि तरह अंजलि केँ एक् विशाल औऱ भारी मम्मों कों अपने मुँह मे भर लिया। जैसे हि उसनेउस गरम औऱ मखमली मांस कों अपनी ज़ुबान औऱ होंठों केँ घेरे मे लिया, अंजलि केँ गले सें एक् तीखी कराह निकली। आर्यन उसे मात्र चूस नहि रहा थां, बल्कि अपने दाँतों सें उन गुलाबी शिखरों पऱ हल्का दबाव भि बनारहा थां।
आर्यन कां मुँह अंजलि केँ स्तनों केँ संगखेल रहा थां, औऱ उसका दूसरा हाथ अभि भि उस काली गीली पैंटी केँ ऊपरजमा हुआ थां। वो अपनी हथेली केँ दबाव सें उस रेशमी कपड़े कों अंजलि केँ सबसे संवेदनशील हिस्से पऱ ज़ोर-ज़ोर सें रगड़रहा थां। पैंटी कां गीला कपड़ा अंजलि कि 'काम-कली' कों छू तौ रहा थां, मगरउसे वोँ तृप्ति नहि देपारहा थां जिसकी उसे बेचैनी थि।
अंजलि कां बदन धनुष कि तरहतन गय़ा थां। उसकी आँखों सें पानी औऱ पसीने कि मिली-जुली बूंदें बहरही थीं। "अहह। आर्यन। मर जाऊंगी मे। उफ़्फ़! एक् तरफ तुँ मुझेपी रहा हैं औऱ दूसरी तरफ.अहह। यह अधूरापन!" अंजलि अपनीकमर कों बेतहाशा हिलारही थि, वो चाहती थि कि आर्यन कां हाथ पैंटी फाड़कर अंदरचला जाए, पर्र आर्यन नें अपनी पकड़ औऱ दबाव पैंटी केँ ऊपर हि बनाएरखा।
आर्यन अब दूसरे मम्मों कि ओरबढ़ा, उसे भि अपने मुँह केँ अंधेरे घेरे मे लिया औऱ अपनी ज़ुबान कों गोल-गोल घुमाने लगा। अंजलि कि सांसें अब किसी टूटी हुईँ लय कि तरहचल रहीथीं। उसेसमझ नहि आँ रहा थां कि वो आर्यन केँ मुँह केँ सुख पर्र ध्यान दे याँ नीचे हौ रहीउस 'रेशमी रगड़' कि तड़प पर्र।
बाथरूम कि दीवारें उनकी भारी साँसों औऱ चप-चप कि आवाजों सें गूँजरही थीं। आर्यन नें अंजलि कों पूरीतरह अपने नियंत्रण मे कर लिया थां—वो उसका बेटा भि थां, उसका गुरु भि, औऱ आज उसका सबसे क्रूर प्रेमी भि।
बाथरूम कि दीवारों केँ बीच उमड़ती उससघन कामुकता नें अंजलि केँ संयम केँ सारे बांध तोड़दिए थें। आर्यन कां एक् हाथ उसकी कलाइयों कों मज़बूती सें जकड़ेहुए थां, उसका मुँह उसके भारी स्तनों कां रसपान कररहा थां, औऱ उसकी हथेली गीली काली पैंटी केँ ऊपर सें जौ दबावबना रही थि, उसने अंजलि केँ भीतर एक् ऐसा बवंडर पैदाकर दिया जिसेझेल पाना उसकेबस मे नहि थां।
अंजलि कां पूरा जिस्म धनुष कि तरहतन गय़ा थां। वो जोँ 'अधूरापन' महसूस कररही थि, वही उसकी उत्तेजना कां सबसे बड़ा कारणबन गय़ा। पैंटी केँ गीले कपड़े कि रगड़ नें उसके संवेदनशील हिस्से मे इतनी गर्मी पैदाकर दि थि कि उसे महसूस हौ रहा थां कि अब उसके भीतर सें लावा फूटने वाला हैं।
अंजलि कां सिर पीछे कि ओर लुढ़क गय़ा औऱ उसकी आँखों केँ सामने अंधेरा छानेलगा। "अहह। आर्यन। रुकमत। उफ़्फ़! मे। मे नहि रोकपा रही.अहह! मेरा जिस्म। फट जाएगा। आर्यन!" उसकी आवाज़अब सिसकारियों सें बदलकर चीखों मे तब्दील हौ रही थि।
आर्यन नें जब महसूस किया कि उसकी मम्मी कां बदन बुरीतरह कांपरहा हैं, तौ उसने अपने मुँह सें मम्मों कों औऱ ज़ोर सें चूसा औऱ नीचे पैंटी केँ ऊपर सें अपनी हथेली कि रगड़ कों औऱ भि तेज़कर दिया। वो रेशमी कपड़ा अब अंजलि कि त्वचा केँ संग मिलकर एक् ऐसा घर्षण पैदाकर रहा थां जौ उसे सीधे स्वर्ग केँ दरवाज़ा पऱ लें आया।
अचानक, अंजलि केँ गले सें एक् लंबी औऱ रूहानी कराह निकली, "आह्ह्ह्ह। आर्यन!" उसका पूरा शरीर एक् तेज़ झटके केँ संगऐंठ गय़ा। बिना किसी सीधे शारीरिक स्पर्श केँ, मात्र उस 'उतावलापन' औऱ 'रेशमी रगड़' केँ चमत्कार सें अंजलि कां बांधटूट गय़ा। उसकी जाँघों केँ बीच सें काम-रस कां वो गरम सैलाब फूटा जौ पैंटी कों पूरीतरह भिगोता हुआ फर्श पऱ बहरहे शावर केँ पानी मे मिल गय़ा।
अंजलि कि पकड़ आर्यन केँ कंधों पऱ ढीलीपड़ गई औऱ उसका जिस्म निढाल होकर आर्यन केँ सीने पर्र आँ गिरा। उसकी सांसें इतनी तेज़थीं मानो वो अभि-अभि कोई लंबी दौड़ दौड़कर आई होँ। उसके पैरों कि मज़बूती ख़त्म होँ गई थि औऱ वो पूरीतरह आर्यन कि बाहों केँ सहारे खड़ी थि।
आर्यन नें अपनी पकड़ थोड़ी ढीली कि औऱ अपनी मां केँ माथे कों चूमा। अंजलि नें अपनीआधी खुली आँखों सें उसे देखा, जिनमें एक् अजीब सि शांति औऱ समर्पण थां। वो समझ गई थि कि आज उसके बेटे नें उसेउस तरीके सें जीत लिया हैं जिसकी उसने कल्पना भि नहि कि थि।
Doctor मां – New Episode
बाथरूम कि फर्श पऱ शावर कां पानीअब अंजलि केँ शरीर सें होकरबह रहा थां। वो पूरीतरह निढाल थि, उसके पांव जवाबदे चुके थें औऱ वो धीरे-धीरे सें गीली टाइल्स पऱ बैठ गई। आर्यन केँ चेहरे पऱ एक् विजेता वाली मुस्कान थि; उसेइस बात कां गहराचैन थां कि उसने अपनी मम्मी कों उस अनोखे तरीके सें शांत किया जिसकी उसने कल्पना भि नहि कि थि।
मगर आर्यन कों क्याँ पता थां कि ये 'शांति' मात्र एक् तूफ़ान सें पहले कि खामोशी थि।
अंजलि फर्श पर्र बैठी हुई थि, उसकेबाल चेहरे पर्र बिखरे थें औऱ उसकी सांसें अब भि तेजथीं। आर्यन उसे बड़े प्रेम सें निहार रहा थां, तभी अचानक अंजलि कि आँखों मे वही 'गुरु' वालीचमक वापस लौटी। उसनेऊपर कि ओर देखा औऱ एक् शरारती मुस्कान दि।
इससे पहले कि आर्यन कुछसमझ पाता, अंजलि नें बिजली कि फुर्ती सें अपने दोनों हाथआगे बढ़ाए औऱ आर्यन कि सफेद अंडरवियर केँ इलास्टिक कों मजबूती सें जकड़ लिया। आर्यन सकपका गय़ा, "मम्मी। आप्.?" मगर अंजलि नें कोई जवाब नहि दिया। उसने एक् हि झटके मे अंडरवियर कों नीचे कि ओर खींच दिया।
जैसे हि कपड़ा नीचे गिरा, आर्यन कां 7 इंचीअंग पूरीतरह आजाद होकर अंजलि केँ चेहरे केँ ठीक सामने आँ गय़ा। शावर कि बूंदें उस पऱ गिरकर चमकरही थीं। अंडरवियर अब आर्यन केँ घुटनों तक थि औऱ वो पूरीतरह नग्न अवस्था मे अपनी मां केँ सामने खड़ा थां।
अंजलि नें अपनी नज़रें उस विशाल अंग पऱ जमादीं। उसने अपने गीले हाथों सें उसेजड़ सें पकड़ा। उसकी हथेली कि कोमलता औऱ ठंडे पानी केँ बीचउस अंग कि तपन नें आर्यन केँ पूरेबदन मे करंट दौड़ा दिया। अंजलि नें ऊपर देखते हुएकहा, "तूने क्याँ सोचा थां आर्यन? कि तूँ अपनी मम्मी कों तड़पाकर अकेला छोड़ देगा?अब देख कि तेरीयह 'शांति' कितनी देर तक टिकती हैं। "
अंजलि नें अपने होंठउस गरमअंग केँ बिल्कुल लगभग लेँ जाकर अपनीगरम सांसें उस पर्र छोड़ीं। आर्यन कि टांगें कांपने लगीं। वो जोँ अब तक 'डोमिनेंट' बनरहा थां, अंजलि केँ इस अचानक हमले सें पूरीतरह बेबस होँ गय़ा।
बाथरूम केँ उसभाप सें भरे माहौल मे अब बाजी पूरीतरह पलट चुकी थि। अंजलि फर्श पऱ घुटनों केँ बल बैठी थि, औऱ उसकी आँखों मे वो शरारत औऱ अधिकार थां जौ सिर्फ एक् अनुभवी 'गुरु' मे हौ सकता हैं।
आर्यन दीवार केँ सहारे खड़ा थां, उसकी सांसें रुक-रुक करचलरही थीं। अंजलि नें अपनी गर्दन थोड़ीऊपर उठाई औऱ सीधे आर्यन कि आँखों मे अपनी नज़रें गड़ादीं। उन आँखों मे चुनौती भि थि औऱ बेपनाह प्रेम भि।
अंजलि नें अपने दोनों हाथों कां इस्तेमाल किया। उसने आर्यन केँ उस७ इंचीअंग कों अपनी दोनों हथेलियों केँ बीच किसी कीमती चीज़ कि तरह थामा। शावर कां पानी उसके हाथों औऱ आर्यन केँ अंग केँ बीच एक् चिकनाई कां कामकर रहा थां।
अंजलि नें आहिस्ता मगर बहोत हि सधेहुए अंदाज़ मे अपने दोनों हाथों कों ऊपर-नीचे चलाना शुरुआत किया। वो उसेजड़ सें लेकरऊपर तक सहलारही थि। उसकी उंगलियों कां दबावकभी बढ़ जाता तौ कभी एकदम रेशम जैसा कोमल होँ जाता। अंजलि कि आँखों कां संपर्क आर्यन कों अंदर तक हिलारहा थां।
आर्यन केँ लिएये सभी सहना नामुमकिन होताजा रहा थां। जब अंजलि केँ हाथों कि मखमली पकड़ औऱ पानी कि ठंडी बूंदें एक् संग उसकेअंग पऱ महसूस हुईं, तोँ उसके पैरों नें जवाब देना शुरुआत कर दिया। उसकी गर्दन पीछे कि ओरमुड़ गई औऱ उसके मुँह सें बेतहाशा आहें निकलने लगीं। "मम्मी। अह्। प्लीज़। यह.यहसहन नहि हौ रहा.रुक जाइए। वरना मे."
अंजलि नें एक् मोहक मुस्कान केँ संग अपने हाथों कि रफ़्तार औऱ थोड़ीबढ़ा दि। "क्याँ हुआ मेरेशेर? अभि तौ तुँ बड़ी-बड़ी बातें कररहा थां। देख तोँ सही, तेरी मम्मी केँ हाथों मे कितनी ताकत हैं। "
आर्यन कां जिस्म झटके लेनेलगा। उसेलग रहा थां कि उसकीरीढ़ कि हड्डी सें लेकर दिमाग़ तक एक् तेज़ बिजली दौड़रही हैं। अंजलि कां ये 'हस्त-कौशल' इतना सटीक थां कि आर्यन कों अपनी आँखों केँ सामने तारेनज़र आनेलगे। वो चाहकर भि अंजलि केँ हाथों सें स्वयं कों छुड़ा नहि पारहा थां, औऱ नं हि वो चाहता थां कि येसुख रुके।
अंजलि एक् अनुभवी स्त्री थि, वो जानती थि कि आर्यन इस वक़्त उत्तेजना केँ उस शिखर पऱ हैं जहाँ सें वापसी मुमकिन नहि थि। वो नहि चाहती थि कि येखेल इतनी जल्द ख़त्म होँ जाए। जैसे हि उसने महसूस किया कि आर्यन कां बदन अकड़ने लगा हैं औऱ वो बस 'झड़ने' हि वाला हैं, उसने बड़ी चतुराई सें अपने हाथों कि रफ्तार कमकर दि औऱ फिन पूरीतरह रुक गई।
आर्यन नें एक् गहरी औऱ कांपती हुई सांसली। उसकाअंग अभि भि अंजलि केँ हाथों कि गिरफ्त मे थां, मगर हलचलरुक जाने सें उसे थोडा संभलने कां मौका मिला।
अंजलि नें वहीं फर्श पऱ बैठे-बैठे अपनासिर थोडा ऊपर उठाया औऱ आर्यन कि लाल होती आँखों मे झांका। "सांस लेँ आर्यन। लंबी सांस लेँ, " उसने बहोत हि शांत औऱ मधुर आवाज़ मे कहा। "इतनी जल्दहार मान लेगा तौ अपनी मां कों लंबीरेस कां मज़ा केसे दिलाएगा?"
अंजलि नें उसे संभलने कां टाइम देने केँ लिए बातों कां सिलसिला शुरुआत किया। उसने बड़े प्रेम सें आर्यन केँ घुटने पऱ अपनाहाथ रखा औऱ बोलि, "पता हैं आर्यन, एक् असली मर्दवही होता हैं जोँ अपनी उत्तेजना पऱ काबू करनासीख जाए। कल रात जोँ तूने सीखा, वोँ तौ बस ट्रेलर थां। आजजब मे तुम्हे इसतरह बेबसदेख रही हूं, तौ मुझेलग रहा हैं कि मेरा बच्चा वाकईअब जवान हौ गय़ा हैं। "
आर्यन कि सांसें आरामसे सामान्य होने लगीं। अपनी मां कि बातों औऱ उनकी नशीली आँखों नें उसेफिन सें मानसिक रूप सें रेडीकर दिया। "मम्मी। आप्। आप् बहोत शातिर होँ, " आर्यन नें मुस्कुराते हुएकहा। "आपने मुझेउस मोड़ पऱ ला दिया जहाँ सें मे गिरने हि वाला थां। "
अंजलि नें शरारत सें अपनी पलकें झपकाईं। "शातिर नहि बेटा, इसे 'कंट्रोल' कहते हें। देख, अब तूँ फिन सें रेडी हैं। अबबता, क्याँ अभि भि तुम्हारी तरफ वोँ 'प्रोफेसर' याद आँ रही हैं याँ अपनी मम्मी कां यहरूप देखकर सभीभूल गय़ा?"
अंजलि कि इन बातों नें आर्यन केँ भीतर केँ तनाव कों कम किया औऱ उसे वो 'समय'दे दिया जिसकी उसे ज़रूरत थि। अब वो फिन सें पूरी ताकत औऱ जोश केँ संगइस खेल कों आगे बढ़ाने केँ लिए सजधजकर थां। शावर कां पानीअब उन दोनों केँ बीच एक् ठंडी फुहार कि तरहकाम कररहा थां, जिसने माहौल कों औऱ भि रोमांटिक बना दिया।
शावर केँ गिरते पानी कि आवाज़ केँ बीच, आर्यन नें सोचा भि नहि थां कि अगला लम्हा उसके जिंदगी कि संवेदनाओं कों पूरीतरह बदल देगा। अभि वो अपनी मम्मी कि बातों सें संभल हि रहा थां कि अंजलि नें अपना आखिरी दांवखेल दिया।
आर्यन केँ नज़रिए सें, वो लम्हा किसी दैवीय बिजली केँ झटके जैसा थां। उसने नीचे देखा, अंजलि नें अपनी आँखें बंदकीं औऱ धीरे-धीरे सें अपना मुँह खोला।
जैसे हि अंजलि नें आर्यन केँ ७ इंचीअंग केँ अगले हिस्से कों अपने होंठों केँ घेरे मे लिया, आर्यन केँ मुँह सें एक् बेतहाशा चीख निकलने वाली थि जौ उसने अपने होंठों कों भींचकर रोकली। उसे महसूस हुआ कि बाहर् शावर कां पानी ठंडा थां, मगर अंजलि केँ मुँह केँ भीतर कां तापमान किसी दहकते हुए लावे जैसागरम थां। वो मखमली जुबान जब उसके संवेदनशील हिस्से पऱ गोल-गोल घूमी, तौ आर्यन कों लगा जैसे उसकामन सुन्न होँ गय़ा हैं।
ये आर्यन केँ लिए बिल्कुल नया अनुभव थां। उसने पहलेकभी नहि सोचा थां कि किसी केँ मुँह कां खिंचाव इतना शक्तिशाली हौ सकता हैं। जब अंजलि नें गहराई तक उसे अपनेगले मे उतारने कि कोशिश कि, तौ आर्यन केँ पैरों कि उंगलियां फर्श पऱ मुड़गईं। उसेऐसा लगा जैसे उसकेबदन कि सारी ऊर्जा एक् हि बिंदु पर्र सिमटकर रह गई हैं। उसे महसूस हौ रहा थां कि अंजलि कि कोमल जुबान उसकेअंग कि एक्-एक् नस कों पहचान रही हैं औऱ उसे सहलारही हैं।
आर्यन नें दीवार कों अपने नाखूनों सें खुरचना शुरुआत कर दिया। उसे ऐसा अहसास होँ रहा थां जैसे वो हवा मे तैररहा हैं। अंजलि केँ हाथों कि पकड़ अभि भि उसके आधार पऱ बनी हुई थि, औऱ ऊपर उसका मुँह वोँ जादुई कामकर रहा थां जिसे आर्यन नें मात्र कल्पनाओं मे सोचा थां। वो 'चप-चप' कि आवाज़ औऱ अंजलि केँ गले सें निकलती हल्की सि गूँज आर्यन केँ पौरुष कों ललकार रही थि।
आर्यन नें अपनी मां केँ भीगे बालों मे अपनी उंगलियां फँसादीं। वो उसे रोकना चाहता थां क्योंकि सुख असहनीय थां, मगरसंग हि वो चाहता थां कि ये लम्हा कभी ख़त्म नं होँ। उसे अहसास हुआ कि अंजलि मात्र उसे'ओरल' नहि देरही थि, बल्कि वो अपनी पूरी ममता औऱ कामुकता उसे सौंपरही थि।
"मां। ओह्। मम्मी। ये.ये क्याँ कररही हें आप्। मे। मे पागल हौ जाऊँगा." आर्यन नें लड़खड़ाती आवाज़ मे कहा। उसकी आँखें पलटरही थीं औऱ उसे शावर कां पानीअब महसूस होनाबंद होँ गय़ा थां; उसे केवल अपनी मम्मी केँ मुँह कि वोँ जादुई गर्मी औऱ गीलापन महसूस हौ रहा थां।
मम्मी केँ नजरिये सें -
बाथरूम मे शावर कि गिरती बूंदों औऱ उठतीभाप केँ बीच अंजलि केँ लिएये लम्हा सिर्फ एक् शारीरिक क्रिया नहि, बल्कि अपनी 'गुरु' वाली सत्ता औऱ ममतामयी अधिकार कां संगम थां। जब उसने आर्यन केँ उस७ इंचीअंग कों पूरीतरह नग्न औऱ अपने सामने तनाहुआ देखा, तोँ उसके भीतर एक् अजीब सि तृप्ति औऱ गर्व कि लहरदौड़ गई।
अंजलि फर्श पऱ घुटनों केँ बल बैठी थि, उसका भीगाहुआ जिस्म औऱ बिना ब्रा केँ भारी मम्मों हर सांस केँ संगहिल रहे थें। जब उसने आर्यन केँ अंग कों अपने मुँह केँ लगभग लिया, तौ उसकेमन मे क्याँ चलरहा थां, इसे विस्तार सें समझिए:
अंजलि नें जबपास सें उसअंग कों देखा, तोँ उसे अपनी परवरिश औऱ आर्यन कि मर्दानगी पऱ गर्वहुआ। वो ७इंच कां तनाहुआ अंगउसे एक् चुनौती कि तरहलगा। उसने अपनी उंगलियों सें उसकी नस-नस कों महसूस किया औऱ उसेलगा कि ये उसका अपना हि अंश हैं जौ अब एक् पूर्ण पुरुष बन चुका हैं।
जैसे हि अंजलि नें अपने होंठ खोले औऱ उसगरम अंग केँ अगले हिस्से कों अपनीजीभ सें छुआ, उसे आर्यन केँ बदन कि सोंधी खुशबू औऱ शावर केँ पानी कां मिला-जुला स्वाद महसूस हुआ। उसकेलिए ये किसी पवित्र अनुष्ठान जैसा थां। उसनेबड़े हि सलीके सें अपने होंठों कों सिकोड़ा औऱ उस मखमली हिस्से कों अपने मुँह केँ भीतर समेट लिया।
अंजलि एक् अनुभवी महिला थि। उसने केवल अपने मुँह कां इस्तेमाल नहि किया, बल्कि उसने अपनेगले कि मांसपेशियों कों भि ढीला छोड़ा ताकि वो उस७ इंची गहराई कों आत्मसात करसके। जब वो आहिस्ता ऊपर-नीचे होनेलगी, तोँ उसे अपने मुँह केँ भीतर आर्यन केँ अंग कि धड़कन महसूस होँ रही थि। वो जानती थि कि उसके मुँह कि गर्मी आर्यन कों किसकदर पागलकर रही होगी।
अंजलि कों सबसे अधिकमज़ा इसबात मे आँ रहा थां कि वो अपने बेटे, जोँ अब एक् जवान मर्द हैं, कों अपनी उंगलियों औऱ जुबान पऱ नचारही थि। जब उसने सुना कि आर्यन कि सांसें उखड़रही हें औऱ वो दीवार कों खुरचरहा हैं, तौ अंजलि केँ भीतर कि स्त्री कों एक् अजीब सां चैन मिला। उसने औऱ भि गहराई सें 'सक्शन' पैदा किया, मानो वो आर्यन कि सारी शक्ति कों अपने भीतर खींच लेना चाहती हौ।
उसने बीच-बीच मे अपनी आँखें खोलकर ऊपर कि ओर देखा। आर्यन कि तड़प, उसकीबंद आँखें औऱ उसकी कांपती हुईँ जाँघें अंजलि कों बतारही थीं कि उसका 'प्रैक्टिकल' सफलरहा हैं। अंजलि केँ लिएये स्वाद किसी अमृत सें कम नहि थां, क्योंकि इसमें उसके बेटे कां विश्वास औऱ उसका अपना समर्पण घुलाहुआ थां।
बाथरूम कि उस धुंधली औऱ पानी सें भरी दुनिया मे आर्यन इस वक़्त जिस मानसिक औऱ शारीरिक स्थिति मे थां, उसे शब्दों मे बांधना करीब-करीब नामुमकिन थां। अंजलि केँ मुंह कि वो दैवीय गर्मी औऱ उसकी जुबान कां वो जादुई स्पर्श आर्यन कों वास्तविकता सें बहोत दूर लेँ गय़ा थां।
आर्यन इस वक्त 'परमानंद' कि उस पराकाष्ठा पर्र थां, जहाँ जिस्म कि सारी संवेदनाएं मात्र एक् बिंदु पर्र आकरठहर जाती हें। उसकेलिए ये अनुभव किसी साधारण सुख सें कहींऊपर थां:
उस लम्हा मे आर्यन कों महसूस हौ रहा थां कि वो इस ब्रह्मांड कां सबसे शक्तिशाली पुरुष हैं। जब उसने अपनी मां जैसी हसीन औऱ अनुभवी स्त्री कों अपने कदमों मे बैठा देखा, जोँ पूरी तन्मयता सें उसकी सेवाकर रही थि, तौ उसका पुरुषार्थ हिमालय कि ऊंचाइयों कों छूनेलगा। उसेलग रहा थां कि दुनिया कि कोई भि प्रोफेसर, कोई भि मॉडल याँ कोई भि अप्सरा उसे वो गौरव प्रदान नहि कर सकती थि जौ उसेइस समयमिल रहा थां।
आर्यन केँ लिए वक़्त कां अस्तित्व समाप्त होँ चुका थां। शावर सें गिरते पानी कि आवाज़ उसके कानों मे किसी मधुर म्यूज़िक कि तरह गूँजरही थि। उसेलग रहा थां जैसे वो किसी दूसरे लोक मे पहुँच गय़ा हैं, जहाँ नं कोई समाज हैं, नं कोई नियम, औऱ न् हि कोई लज्जा। वहा सिर्फ वो थां औऱ उसका वो विराट मजा।
आर्यन कि आँखें बंदथीं, मगरउसे अपने भीतर हज़ारों रंगों कां विस्फोट महसूस होँ रहा थां। उसकेमन कि नसें खिंच गई थीं औऱ उसकीहर सांस केँ संग एक् नई ऊर्जा कां संचार हौ रहा थां। अंजलि केँ मुंह कि वोँ 'सक्शन' शक्ति उसेऐसा अहसास करारही थि मानो उसकीरूह उसके जिस्म सें निकलकर उस७ इंचीअंग केँ जरिए अंजलि मे समा जानां चाहती हौ।
उसेइस बात कां गहरा गर्व महसूस हौ रहा थां कि उसने अपनीउस 'गुरु' कों, जिसे वो कल तक सिर्फ श्रद्धा सें देखता थां, आज पूरीतरह अपनाबना लिया हैं। उसे अपनी मर्दानगी पर्र इतना गहरा विश्वास पहलेकभी नहि हुआ। वो उस 'अवस्था' मे थां जहाँ एक् पुरुष कों लगता हैं कि वो भगवान केँ समान हैं, क्योंकि वो सृजन औऱ चरमसुख कि आखिरी सीमा कों छूरहा हैं।
आर्यन केँ हाथ अंजलि केँ बालों मे जकड़ेहुए थें, उसका जिस्म धनुष कि तरहमुड़ चुका थां औऱ उसकीहर कोशिका उससुख केँ सागर मे गोतेलगा रही थि। वो अब पूरीतरह सें नियंत्रण खो चुका थां—वो अब मात्र एक् 'अहसास' बन गय़ा थां।
परमानंद कि वो अवस्था अब अपनेचरम बिंदु कों पारकर चुकी थि। आर्यन केँ बस मे अबकुछ भि नहि रहा; उसकेबदन कि रग-रग बिजली केँ झटकों कि तरह फड़कने लगी। उसने अंजलि केँ बालों कों कसकर मुट्ठी मे भींच लिया औऱ एक् लंबी, रूहानी चीख उसकेगले सें निकली।
आर्यन केँ भीतरजमा वो सारा तनाव, वो सारी उत्तेजना एक् हि समय मे ज्वालामुखी कि तरहफूट पड़ी।
शावर केँ पानी केँ बीच, आर्यन केँ उस७ इंचीअंग सें 'अमृत' कि वो गाढ़ी औऱ गरम धारें पूरी तीव्रता केँ संग निकलीं। अंजलि, जोँ अब तक गहराई सें अपनाकाम कररही थि, नें जैसे हि उसगरम बहाव कों अपनेगले केँ पास महसूस किया, उसने अपनी अनुभवी फुर्ती दिखाई।
वो जानती थि कि अगर वो पूरीतरह पीछे नहि हटी, तोँ वो इस सैलाब मे डूब जाएगी। उसने झटके सें अपना मुँह पीछे किया, मगर आर्यन केँ जोश कां वेग इतना ज़्यादा थां कि वो पूरीतरह बच नहि पाई। उस सफ़ेद औऱ गाढ़े रस कि कुछ बूंदें उसकी ठुड्डी, उसके गालों औऱ उसके होंठों केँ किनारों पर्र बिखरगईं।
जैसे हि अंजलि नें अपनीजीभ अपने होंठों पऱ फेरी, आर्यन केँ उस मर्दाना रस कां वो नमकीन औऱ कसैला स्वाद उसकी इंद्रियों सें टकराया। उसनेउस स्वाद कों अपनी जुबान पऱ महसूस किया—ये उसके अपने बेटे केँ पौरुष कां स्वाद थां, जिसमें प्रेम, समर्पण औऱ मर्दानगी कि गूँज थि। उसने थूकने केँ बजाय, उसे सहजता सें महसूस किया, मानो वो इस'जंग' केँ इनाम कों चखरही होँ।
आर्यन अब पूरीतरह निढाल होँ चुका थां। उसकाबदन ढीलापड़ गय़ा औऱ वो कांपते हुए घुटनों केँ बल फर्श पऱ बैठ गय़ा, ठीक अंजलि केँ सामने।
दोनों अब शावर केँ नीचे आमने-सामने बैठे थें। आर्यन कि आँखों मे एक् अजीब सि लज्जा औऱ संतुष्टि थि, जबकि अंजलि केँ चेहरे पर्र जीत कि चमक थि। उसके चेहरे पर्र बिखरा हुआ वो सफ़ेद रस पानी कि बूंदों केँ संग मिलकर आहिस्ता उसकी गर्दन सें होताहुआ उसके भारी स्तनों केँ बीच कि घाटी मे समारहा थां।
"देख लिया आर्यन? तूने तोँ अपनी मां कों पूरीतरह 'भिगो' दिया, " अंजलि नें मुस्कुराते हुए अपनी उंगली सें अपनेगाल पऱ लगा वो रस पोंछा औऱ आर्यन कि आँखों मे देखते हुएउसे चख लिया।
आर्यन अभि उस धमाके केँ बादहोश संभालने कि कोशिश हि कररहा थां कि अंजलि नें कुछऐसा किया जिसने उसेफिन सें सुन्न कर दिया।
आर्यन कां अंगअब भि तनाव मे थां, फिरभी 'विस्फोट' केँ बाद वो थोडा नरम पड़ने लगा थां। अंजलि नें अपनी आँखों सें उसे देखा, उसके चेहरे पर्र अब भि आर्यन केँ पौरुष कि कुछ बूंदें चमकरही थीं। उसने एक् गहरी सांसली औऱ फिन सें आगे झुकी।
अंजलि नें बिना किसी हिचकिचाहट केँ आर्यन केँ उसअंग कों फिन सें अपने मुँह केँ गरम घेरे मे लेँ लिया। आर्यन कि आँखें फटी कि फटीरह गईं। "मम्मी। यह.यह क्याँ कररही हें आप्? सभी तोँ समाप्त होँ गय़ा." उसने लड़खड़ाते हुएकहा। मगर अंजलि नें जवाब देने केँ बजाय अपनी जुबान कां इस्तेमाल शुरुआत किया।
वो जानती थि कि नली केँ भीतर अभि भि कुछ 'अमृत' बाकी हैं। उसने अपने होंठों सें एक् मज़बूत पकड़ बनाई औऱ उसे बिल्कुल जड़ सें ऊपर कि ओर चूसना शुरुआत किया। उसकी जुबान उसनली केँ मुहाने पर्र गोल-गोल घूमरही थि, जिससे आर्यन केँ जिस्म केँ भीतर एक् मीठी सि टीसउठी। अंजलि नें तब तक नहि छोड़ाजब तक उसने आर्यन केँ अंग कों पूरीतरह साफ़ औऱ सूखा नहि कर दिया।
अंजलि नें वो सारारस, जोँ नली केँ भीतरबचा थां, अपनी जुबान पर्र लिया औऱ उसे महसूस करतेहुए अंदर उतार लिया। उसकेलिए ये मात्र गंदगी साफ़ करना नहि थां, बल्कि येउस मिलन कि पूर्णता थि। उसने अपना मुँह हटाया औऱ एक् विजयी मुस्कान केँ संग आर्यन कि ओर देखा।
आर्यन पूरीतरह सें निशब्द थां। उसनेकभी ड्रीम्स मे भि नहि सोचा थां कि उसकी मम्मी इसहद तक उसे अपनाएगी। उसेलगा कि वो दुनिया कां सबसे खुशनसीब मर्द हैं, जिसे एक् ऐसी महिला मिली हैं जोँ उसे नं मात्र सुख देना जानती हैं, बल्कि उसके वजूद कि एक्-एक् बूंद कि कद्र करती हैं।
शावर कां पानीअब उनके शरीरों सें उस सफेदी कों धोकर फर्श पऱ बहा चुका थां। अंजलि उठी औऱ आर्यन कां हाथ पकड़कर उसेखड़ा किया।
"अब मेरा बेटा पूरीतरह साफ़ हैं, " अंजलि नें उसकेगाल पऱ अपनी गीली हथेली फेरते हुएकहा। "चल, अब बाहर् चलते हें। अभि तोँ मैंने तेरी मात्र अपनी 'सेवा' दिखाई हैं। असलीखेल तौ तब शुरुआत होगाजब तुँ मुझे अपनी बाहों मे भरेगा। "
Doctor मां - Kahani ab aur interesting hogi
vah bohot Khub majaa Aagya yeh story ab alag mod pe Aagyi he jaha ab gali galoch k sath Ma bete mai chudayi hongi bhot haseen update majaa aagya agle next ek bade update kaa Intezar Rahe ga
bhut accha kahani hain mgr etna shud hindi na likhe choot ko choot gaand jaesa aslee ne bhasa kaa upyog kare aur sath mai pic upload kare bari maherbani hongi khayalo say nikal k reality mai aaiye
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