My Life @Jindgi Ek Safar Begana ( Action , , Thriller , Adult) (Full Storyd) (romance special) – New Episode
Update 75
ज़फ़्फ़र नें गनी कों इस हालत मे पाए जाने कि कतई उम्मीद नहीं कि होगी, सो वोँ उसे देखते हि बुरीतरह चोन्क्ते हुए बोला –
कॉन हौ तुम् लोग.? औऱ गनी भइयाजान कों इसतरह क्यूं बाँधरखा हैं.?
मैने उसकेठीक सामने खड़े होकर उसकी आँखों मे झाँकते हुएकहा-
हम् इस महानदेश केँ अदना सें सिपाही हें, औऱ रहीबात इसदेश केँ गद्दार कों इसतरह बाँधने कि…
तोँ तुझ जैसे चूहे कों उसकेबिल सें निकालने केँ लिए रोटी कां टुकड़ा पिजरे मे रखना पड़ता हैं ज़फ़्फरुल्ला ख़ान,
ज़फर – ओह ! तौ तुँ हि वोँ इंसान हैं, जिसने हमारे प्लान कि धज्जियाँ उड़ाई हें.
मगर तूँ यहभूल गय़ा, कि जिस व्यक्ति नें तेरे मुल्क मे इसकदर तावही मचारखी होँ उसे तुँ चूहासमझ रहा हैं हरम्जादे.?
लगता हैं अभि तूँ वाकिफ़ नहीं हैं मुझसे, ज़फ़्फरुल्ला ख़ाननाम हैं मेरा.
वोँ तोँ मे पहले हि बोल चुका हूं तेरानाम ! तूँ मुझे बताने कि जहमतमत कर – मैनेउसे औऱ खिजाते हुएकहा,
वैसे हमारे मुल्क मे चूहों केँ ऐसे हि नामरखे जाते हें। तभी तौ तूँ अपनेबिल मे बैठकर हमारे कपड़े कूतरता रहता हैं.
ज़फर- अभि तुम् लोगों कां वास्ता मुझ जैसेशेर सें नहीं पड़ा। हरामी केँ पिल.लेँ….तड़क.तड़क.
वोँ अपना डाइलॉग पूराबोल भि नहीं पाया थां, कि दोनो केँ सर पर्र पीछे सें रेवोल्वेर केँ हॅंडल कि भारी भरकमचोट नें उन्हें फिन सें सोफे पर्र ढेर होने पर्र मजबूर कर दिया।
रेवोल्वेर केँ दस्तों कि चोट इतनी पवरफुल औऱ सटीक स्थान पऱ पड़ी, कि असलम तौ पड़ते हि ढेर हौ गय़ा, औऱ अपनी चेतना खो बैठा.
मगर ज़फ़्फरुल्ला बड़ा जीवट किस्म कां इंसान थां…वोँ उसचोट झेल गय़ा, औऱ संग हि फुर्ती सें घूमकर विक्रम केँ हाथ सें रिवॉलव छीनली।
नाँ मात्र गन उसकेहाथ सें छीनी, वल्कि उसे अपने निशाने पऱ लेकर गुर्राया…
चलवे चूहे सामने आँ, ऐसे खिलौनों सें शेर कां शिकार नहींकर पाओगे तुम् लोग…
क्षणभर केँ लिए हि सही, पासा उसकेहाथ मे आँ गय़ा थां… मगर चूँकि उसका ध्यान विक्रम पर्र हि थां…
विक्रम मेरीतरफ देखने लगा, मैने इशारे सें उसको सामने आने कों कहा…
वोँ जैसे – 2 मेरीतरफ बढ़रहा थां, संग हि संग ज़फ़्फ़र हम् दोनो पर्र नज़र बनाएहुए उसे निशाने पऱ लेकर उसकेसंग हि घूमरहा थां…
वोँ जैसे हि मेरे 90 डिग्री पर्र आया, औऱ उसका ध्यान रणवीर कि तरफ गय़ा, मेरी एक् टाँग हरकतकर गई, …
पेर कि किक सीधी उसके रेवोल्वेर पऱ पड़ी, नतीजा ! रेवोल्वेर उसकेहाथ सें छूटकर उपरहवा मे उठतीचली गयीँ, …
इससे पहले कि वोँ ज़मीन पऱ गिरती, विक्रम नें हवा मे जंप लगाकर उसेकॅच कर लिया.औऱ उसे ज़फ़्फ़र कि कनपटी पऱ फिन सें दे मारा…
इस बार ज़फ़्फ़र अपनी चेतना खोने सें नहींबचा सका, अब वोँ दोनो हि हमारे सामने बेहोश पड़ेहुए थें…,
फिनउन दोनो कों भि बाँधकर डाल दिया गय़ा, उसकेबाद उनकोहोश मे लाया गय़ा, औऱ फिनदौर शुरुआत हुआ उनको टॉर्क्चर करने कां,
उन तीनो कों दोदिन तक हम् लोग टॉर्क्चर करतेरहे, बड़ाढीठ थां साला जाफ़रुल्ला,
जब उसकेहाथ औऱ पैरों केँ कईअंग काट डाले, तब जाकर उसने केहना शुरुआत किया.
देशभर मे उसके कितने नेटवर्क कामकर रहे हें, कॉन-कॉन कहां कहां इन्वॉल्व हैं उसकेसंग,
हमारे देश केँ खिलाफ उसका क्याँ-2 मिसन थां, औऱ कॉन-कॉन सें संगठन थें पाकिस्तान मे जौ भारत केँ खिलाफ कामकर रहे हैं, सारी इन्फर्मेशन उससे निकाल ली.
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गनी औऱ रुखसाना कों पोलीस केँ हवाले कर दिया गय़ा, यह साराकाम बिना हमारे सामने आएहोम मिनिस्ट्री कि स्पेशल सेल केँ नाम पर्र हुआ थां.
गनी केँ बच्चे कों बाल सुधार घऱभेज दिया गय़ा, औऱ उसकी सारी चल-अचल संपत्ति कों जप्तकर सरकारी खजाने मे जमाकर दिया गय़ा।
उसे मोहरा बनाकर इंटरनॅशनल लेवेल पर्र पाक केँ नापाक इरादों कों नंगा करने केँ लिए इस्तेमाल करना थां.
इसतरह सें एक् बहोत बड़ा आतंकवादी संघटन दुनिया सें मिटा दिया गय़ा थां, संग हि नाँ जाने कितनी जानें जाने सें बच गई,.
मेरायह एनएसएसआइ केँ अंडरकवर एजेंट केँ तौर पऱ पहला अफीशियल मिसन थां, जोँ कामयाब रहा,
जिसकी पीएम नें अपने सामने बिठाकर भूरी-भूरी प्रशंसा कि औऱ कुछ विशेष अधिकार भि दिए जौ भविश्य मे कामआने वाले थें.
पीएमआगे बोले.! बेटेऐसे हि देश कि सेवा करतेरहो, तुम्हारे जैसेदेश केँ सच्चे सिपाहियों कि कमी हैं इसदेश मे।
हम् अब रहें याँ नां रहें, होँ सकता हैं कि अब अधिकदिन इसदेश कि सेवाकर नहीं पाएँगे क्योंकि हमें तोँ 5 साल केँ लिए हि चुना गय़ा हैं,
अगले 6 महीनों मे चुनाव हें, हमेंलग रहा हैं कि आने वाली सरकार मे हमारा कोईरोल नहीं रहने वाला.
मगर हमें खुशीइस बात कि रहेगी, कि तुम्हारे जैसे सपूतइस देश मे मौजूद रहेंगे.! सोविश यूऑलदा बेस्ट आंडटेक केरफॉर युवरसेल्फ टू।
हौ सकता हैं अब हमारी मुलाकात पीएम केँ पद पऱ रहतेहुए नाँ होँ.
रणवीर औऱ विक्रम कों स्पेशल ड्यूटी पऱ मेरासंग देने केँ लिए भेजा थां, जौ उन्होने बखूबी निभाया थां.
इसकेलिए उन दोनो कों भि पुरशकृत किया गय़ा….!
देखते -2 मेरी विवाह कां समय नज़दीक आँ पहुंचा, अगले हफ्ते मेरी औऱ ट्रिशा कि विवाह थि,
वोँ यूपी पूर्वांचल केँ एक् छोटे सें शहर मे एसपी नियुक्त होँ चुकी थि.
हम् दोनो नें एक् हफ्ते कि लीव लेँ ली। दोनोतरफ केँ मुख्य-2 रिस्तेदारो कों मैने अपनेपास हि बुला लिया,
उनमें मेरे कॉलेज फ्रेंड्स भि थें, एक् गेस्ट हाउस औऱ विवाह केँ लिए जश्न प्लॉट बुककर दिया.
बड़े सादे तरीक़े सें हम् दोनो विवाह केँ बंधन मे बँधगये। दोनो हि ओर खुशी कां माहौल थां।
मेरी मम्मी भि किसीतरह सें विवाह मे शामिल हुई औऱ अपने आखिरी वर-बधू कों आशीर्वाद दिया.
विवाह केँ बाद ज़्यादातर लोग दूसरे दिन हि विदा होँ गये, ट्रिशा केँ माँ-बाप अभि ठहरेहुए थें, जोँ उसकेसंग हि जाने वाले थें.
आज हमारी सुहागरात थि, ट्रिशा कुछ अधिक हि एग्ज़ाइटेड थि इस क्षण कों लेकर, नाँ जाने कितने सालों सें इसरात कां उसने प्रतीक्षा किया थां।
अपनी सुहाग सेज कों उसने स्वयं अपने तरीक़े सें सजाया थां.
आज फूलों सें सजे एक् मास्टर बेड पर्र हम् सिर्फ़ दोनो हि थें, जौ आज एका-वाहन होने केँ लिए वर्षों सें इंतजार कररहे थें,
ख़ासकर ट्रिश जौ आज मेरी अर्धांगिनी बनी, सिकुड़ी सिमिटी सि लाल सुर्ख जोड़े मे बिस्तर पर्र बैठी थि थोडा घूँघट निकाल कर अपने प्रियतम केँ इंतेज़ार मे, कि कब वोँ आए औऱ उसका घूँघट खोले.
मैने कमरे मे प्रवेश किया औऱ उसको अंदर सें बोल्ट करके धीरे-धीरे-2 कदमों सें चलकरबेड पऱ आकरबैठ गय़ा.
ट्रिशा केँ मेहदी भरे हाथों कों अपने कठोर हाथों मे लेकर मैनेकहा- ट्रिशा। ! अबयह घूँघट किसके लिए हैं.? इसे उतारो जान ! मे अपने चाँद केँ दर्शन करना चाहता हूं.
उसने नाँ मे गर्दन हिलाकर इशारा किया औऱ वोँ ज्यादा सिमटकर बैठ गयीँ,.
मैने थोडा सां उसे सताने केँ उद्देश्य सें कहा- तुम् तौ पहलेदिन सें हि मेरीबात कि अवहेलना करनेलगी, भइयायह नाचीज़ अब आपका पति हैं, आइपीएस कां अरदली नहीं,
यह कहकर मैने अपनेहाथ उसके घुटनों पर्र रखदिए, तोँ उसने अपने घुटने औऱ अंदर कों समेटलिए.
मे उठकर खड़ा हौ गय़ा औऱ बोला-ठीक हैं कोईबात नहीं, वैसे भि एक् आइपीएस औऱ इंजिनियर कां कोई मुकवला नहीं हैं। मे चलता हूं टेककेर, यह कहकर मे वहा सें जानेलगा.
उसने मेराहाथ थाम लिया औऱ बोलीं- औऱ कितना सताओगे प्राणनाथ.? एक् नव विवाहित लड़की केँ अरमानों कि तौ कद्रकरो, जौ काम आपको करने चाहिए वोँ तोँ आपको हि करने होंगे नाँ.!
मे फिन सें उसकेबगल मे बैठ गय़ा औऱ उसके घूँघट कों अपने हाथों मे लेकरउलट दिया.
जैसेकोई चाँद निकलआया हौ उस कमरे मे, ट्रिशा सचमुच किसी चाँद सें कम नहींलग रही थि, नज़रें बिस्तर कि चादर कों देखरही थि, होंठथर थरारहे थें उसके.
मैने अपनी शेरवानी कि जेब सें एक् नेकक्लेशस निकाला औऱ उसे ट्रिशा केँ गले मे पहना दिया, औऱ बोला-यह आपकी मुँह दिखाई कां तोहफा हैं, अगर पसन्द होँ तौ कबूलकर लीजिए.
मुझे आपकाहर तोहफा कबूल हैं स्वामी.! -वोँ नज़रें नीचीकिए हुए हि बोलीं.
फिन भि एक् बारदेख तोँ लोजान ! कैसा हैं.? मैनेकहा तौ उसनेउसे अपनेहाथ मे लेके देखा औऱ बोलीं- सच मे बहोत सुंदर हैं.
मैने उसका चाँद सां मुखड़ा अपने हाथों मे लेकरकहा - मगर तुमसे ज्यादा सुंदर नहीं,
सच कहूँ तौ आज मे अपने आपको बहोत शौभागयशाली महसूस कररहा हूं कि तुम् मेरी पत्नि होँ।
वादाकरो कि हमारा पेशा, हमारे फ़र्ज़ कभी हम् दोनो केँ बीच नहीं आएँगे.
ट्रिशा- वादा मेरे स्वामी, मे अपनेकाम, अपने फ़र्ज़ कों हम् दोनो केँ बीच नहींआने दूँगी। मगर फ़र्ज़ सें कभी गद्दारी नहींकर पाउन्गि उसबात कां ख्याल आपको रखना होगा.
मे - बेशक ! मे अपनी पत्नि केँ उत्तरदयुक्तों कों भली- भाँति समझता हूं।
औऱ यह सुनिश्चित करूँगा कि मेरी पत्नि कि मेरीवजह सें कभी नज़र नीची नां होँ.
अब मैने उसके मेहदी भरे हाथों कों फिन सें अपने हाथों मे लियाजिन पऱ मेरेनाम कि मेहदी थि औऱ उनकोचूम लिया, उसकेबाद उसके माथे कों गालों कों गर्दन कों चूमने लगा।
वोँ आँखें बंदकिए मादक उमंगों मे खोतीजा रही थि.
जब मैने उसके होठों कों हल्के सें अपनेहाथ केँ अंगूठे सें सहलाया… अहह.कितने रसीले, पतले सुर्ख होंठ।
मन अपने आप् खींचा चला गय़ा औऱ मेरे तपते होंठ उसके लिपीसटिक लगे सुर्ख पतले रस्सीले होठों पऱ टिकगये औऱ उनपर मैनेबस एक् हल्का सां किसकर दिया.
उसका रोया-2 काँप गय़ा मेरे होठों केँ स्पर्श केवल सें हि, औऱ शरमाकर अपना मुँह दोनो हाथों सें ढांप लिया.
मैने उसके दोनोहाथ अपने हाथों सें पकड़कर उसके शर्मो-हया मे डूबे चेहरे सें हटाए औऱ उसकेकान मे फुसफुसा करकहा। क्याँ हुआजान। चेहरा क्यूं छुपारही होँ मुझसे.?
वोँ- लज्जा आँ रही हैं मुझे आपसे.!
मे - अब मुझसे कैसी लज्जा मेरीजान। अब तौ हम् एक् होनेजा रहे हें, ऐसे हि शरमाती रहोगी तौ यह हसीनरात जोँ वर्षों केँ बादआई हैं,
जिसको तुमने नाँ जाने कितनी बार ख्वाबों ख़यालों मे देखा होगा वोँ यौंही बीत जाएगी.
वोँ - उउन्नहु… मुझेकुछ नहींपता.? आपको जोँ करना हैं करिए.!
मे - यहठीक बात नहीं हैं, यहरात तौ हम् दोनो कि हैं नां.! तौ फिन हम् दोनो कों हि मिलकर मनानी होगी.!
चलोयह गहने औऱ यह भारी-भरकम कपड़े अलगकरो, यहआज कि रात हमारे सबसे बड़े दुश्मन हें, इतना कहकर मे उसके गहने एक्-2 करके उतारने लगा।
अब उसके माथे कां टीका औऱ नाक कि नथ हि शेष थें जौ मैनेजान बूझकर नहीं उतारे.
फिन उसकी साड़ी कों भि उसके शरीर सें अलगकर दिया, ब्लाउस औऱ पेटिकोट मे वोँ स्वर्ग सें उतरी किसी अप्सरा जैसीलग रही थि,
मैने उसको धीरे-धीरे सें बिस्तर पर्र लिटा दिया औऱ उसके अतुल्यनीय रूप कों अपनी आँखों सें पीनेलगा।
उसके कालेघने बालों केँ बीच हल्की लालिमा लिए उसका सफ़ेद चिटागोल चेहरा मानो बादलों केँ बीच चाँद निकलआया हौ,
माथे पर्र छोटी सि बिंदिया, कमान जैसी उसकी भवें(आइ ब्रो) हल्के काजल सें भरी उसकी हिरनी जैसी चंचल आँखें मानोकुछ कहना चाहती हों,
मैने अपने तपते होंठो सें उसकीबंद आँखों कि पलकों कों चूम लिया.
सुराई दार गर्दन, जिसके नीचे पतली सि एक् रेखा नीचे कों जाती हुई, जौ आगे जाते-2 चौड़ाई मे बदलरही थि।
सुर्ख कपड़े केँ ब्लाउस मे क़ैद उसके सुडौल वक्ष जौ अभि 24” केँ भि नहींहुए थें।
ट्रैनिंग मे किएगये अथक मेहनत कि वजह सें एकदमठोस टेनिस कि बॉल कि तरह गोल-गोल संतरे जैसे उसके उरोज.
उसके नीचे उसका एक् दम पतला सां सपाटपेट, जिसके मध्य मे एक् चबन्नी केँ साइज़ कि नाभि, जोँ कभी-2 हिलने लगती थि।
कमर इतनी पतली होँ गई, थि उसकी कि दोनो हाथों केँ बीच मे समाजाए.
वोँ अपनी दोनो टाँगें जोड़े हुए लेटी थि, पेटिकोट मे धकि उसकीगोल मगर सख़्त जांघे, थोड़ी मोटाई लिए, जांघों केँ बीच जहाँ उसके पेटिकोट कां कपड़ा थोडा चारों तरफ सें सिकुड गय़ा थां,
ऐसा प्रतीत होँ रहा थां मानो किसीनदी मे तेज बहाव केँ कारणभवर पड़गये हों.
उसकेरूप सौन्दर्य मे खोयाहुआ मे उसके पैरों तक चला गय़ा, औऱ उसके महाबर सें रंगी रसीले पैरों कि उंगलियों कों मुँह मे लेकर चूसने लगा.
ट्रिशा नें चोंककर अपनी गर्दन उठाई। औऱ झट सें अपना पांव खींचते हुए बोलीं.
नाथ ! यह क्याँ अनर्थ कररहे हैं आप्.? मेरे पैरों कों तौ आपको छुना भि नहीं चाहिए औऱ आपने तोँ.मुँह। क्यूं पाप चढ़ारहे हें मुझ पर्र.
मैने उसका चाँद सां मुखड़ा अपने हाथों मे लेकरकहा – क्याँ तुम् सच मे आइपीएस ऑफीसर हौ.?
मेरीबात सुनकर वोँ बोलि - क्याँ मतलब.? इसकाइस बात सें क्याँ लेना देना.?
मैनेकह - तुम्हारे यहपेर जिस्म सें अलग हें क्याँ.? नहीं नाँ। तोँ जब मुझे तुम्हारे बदन कां जौ अंग अच्छा लगेगा उसको मे मन मर्ज़ी प्रेम कर सकता हूं, फिन पैरों कों क्यूं नहीं.
वोँ तुनकते हुए बोलि – वोँ सभी मुझेकुछ नहींपता, मम्मी कहती हैं, पत्नि कों हमेशा पति केँ चरणों मे रहना चाहिए।
ग़लती सें भि पति, पत्नि केँ पांवछु भि लें तोँ वोँ पाप कि भागीदार होती हैं.
मे - अरे दोस्त तुम् तौ उपदेश देनेलगी, चुपकरो यह बाबाआदम केँ जमाने केँ दकियानूसी उपदेश औऱ मुझे प्रेम करनेदो तुम्हें.
वोँ मेरीबात सुनकर चुप होँ गई, …
अब मे उसको पैरों सें चूमता हुआ धीरे-धीरे-2 उपर कों बढ़ने लगा, जहाँ मेरे होंठ लगते हि ट्रिशा कां वहीअंग कंपकंपाने लगता.
चूमते-2 मे उसकेपेट पऱ आँ गय़ा औऱ जब मैने उसकी नाभि केँ उपर चूमा, तोँ वोँ खिल-खिला करउठकर बैठ गयीँ,। औऱ बोलीं.
अरुण प्लीज़ यहा नहीं…हहहे। नहीं.नहीं। प्लीज़। हहहे…हहुउ। मुझे गुदगुदी होती हैं,
मैने औऱ जान बूझकर उसकेपेट कों सहला दिया, गुदगुदी केँ मारे उसके आँसू निकलआए.! अबकुछ अधिक नाँ होँ जाए इसलिये मे उपर कों बढ़ने लगा.
मैने उसकेगोल सुडौल वक्षों कों ब्लाउस केँ उपर सें हि चूमता हुआ उसकी घाटी कि दरार पर्र सें गर्दन पऱ पहुँच गय़ा।
वोँ अबतक हल्की-2 सिसकियाँ लेनेलगी थि, आँखें बंद हौ रही थि उसकी, अंत मे मैने उसके होठों कों चूमा औऱ देर तक चूस्ता रहा, उसको भि बोला तौ वोँ भि मेरीतरह कोशिश करतीरही औऱ फिन हम् लंबी स्मूच मे डूबगये.
मैने उसके ब्लाउस केँ बटन खोलने शुरुआत करदिए, औऱ उसको उतारकर बिस्तर केँ नीचे फेंक दिया, ब्रा मे कसे उसके उन्नत सुडौल वक्ष इलाहाबादी अमरूद केँ साइज़ केँ बड़े आकर्षक लगरहे थें,
जब मैने उनको अपनी मुत्ठियों मे कस्के मसला तोँ ट्रिशा सिसक पड़ी…
आहह-आहह… सस्सिईइ… जोरे सें नहियीई…प्लस्ससस्स… आहह-आहह…दर्द होता हैं.उईई। माआ… ऊहह….जानणन्न्… मारीइ.
अब मेरा एक् हाथ उसकी चुनमुनिया पर्र पहुँच चुका थां जौ उसको प्रेम सें सहलारहा थां।
मैने आपने सारे कपड़े निकाल फेंके सिवाय अंडरवेर केँ, मुझे रुखसाना वाला अपना एनकाउंटर यादआया औऱ ट्रिशा कि ब्राखोल कर पलंग पर्र लेट गय़ा.
मे- जान तुम् मेरेउपर बैठजाओ, तोँ वोँ मेरेपेट पऱ बैठ गई,, मैनेकहा तोड़ा औऱ नीचे तौ वोँ समझ गयीँ,,
तब तक मैने अपने मूसल महाराज कों अंडरवेर मे हाथ डालकर उपर कों करके अपनेपेट सें लगा लिया.
अब वोँ मोटी ककड़ी जैसा अंडरवेर मे मेरी नाभि कि ओर मुँह करके अंडरवेर कों फ़ाडे देरहा थां। ट्रिशा अपनीपरी कि अनखूली फांकों कों उसकेउपर रखकरबैठ गयीँ,.
मैने उसको अपने उपेर झुका लिया औऱ उसकीकमर कों दोनोतरफ सें पकड़कर आगे-पीछे करनेलगा, जब उसको तरीक़ा समझ मे आँ गय़ा,
अब वोँ स्वयं सें हि अपनीकमर चलाने लगी औऱ अपनी अन्छुइ मुनिया कों मेरे लन्ड केँ उपेर घिसने लगी, उसके अमरूद मेरी हथेलियों मे थें.
हम् दोनो मज़े मे डूबते चलेगये, मुझे तोँ बहोत मजा आँ रहा थां, जब वोँ पीछे कों कमर लेँ जाती मेरा सुपाडा खुल जाता औऱ अंडरवेअर केँ कपड़े केँ रगड़ सें सुरसूराहट औऱ बढ़ जाती.
कमर हिलाते-2 ट्रिशा नें अपना मुँहउपर कों उठाया औऱ एक् लंबी सि सिसकी भरी कराह मुँह सें निकाल कर लंबी-2 साँसें लेनेलगी।
उसकी पेंटी कामरस सें एक् दमतर हौ गयीँ, थि, मेरा भि कुछऐसा हि हाल थां, अगर वोँ एक् दो रगड़े औऱ कसकरलगा देती तौ शायद मेरा पानी भि निकल जाता.
ट्रिशा मेरेउपर लेटी हुईँ थि उसके कड़क होँ चुके कंचे जैसे निप्पल मेरे सीने मे मीठी-2 चुभनदे रहे थें, मैने ट्रिशा केँ गले पर्र किस करकेकहा.
मे - जानमजा आया…? तौ उसने मेरे कंधे मे मुँह छिपाकर हुउंम। करके हामीभरी.
बेबी थोडा मेरेसाब बहादुर कि सेवा करोगी.? तोँ वोँ समझ नहींपाई औऱ आश्चर्य सें मेरीओर देखा.?
मैने अपने मूसल कों रगड़ते हुएकहा, इसको थोडा किसी-वीसी दो प्रेम करो जिससे यह तुम्हारी परी कों जिंदगी भर अच्छे सें प्रेम करतारहे.
वोँ शरमा गयीँ, औऱ नां मे मुन्डी हिलाने लगी.!
मे - क्याँ बेबी, मेरेलिए इतना भि नहींकर सकती.?
तोँ उसने झिझकते हुए मेरे अंडरवेर कों उतार दिया औऱ मेरे 8” लंबे औऱ सोट जैसे मोटे लन्ड कों अपने मुट्ठी मे लेकर सहलाने लगी,
उसके हाथों मे पहुँच कर साहिब बहादुर औऱ अकड़गये, औऱ एक् दमरोड कि तरह कड़क होँ गये.
वोँ आगे पीछे करके उसके सुपाडे कों खोलने औऱ बंद करके देखने लगी।
मैनेकहा क्याँ देखरही होँ जान.? तोँ वोँ बोलीं- आपकायह सिपाही तोँ बहोत तगड़ा हैं, मेरीउस छोटी सि परी मे केसे जाएगा.?
कोशिश करने सें तौ ईश्वर भि मिल जाते हें, तुम् भि कोशिश करो औऱ इसको अपने मुँह मे लेके इसको लूब्रिकेट करदो.
उसने मेरे सुपाडे कों खोलकर अपनी उंगली उसकेछेद पर्र घुमाई, मेरी सिसकी निकल गई, औऱ एक् बूँद अमृत कि उसके मुँह पऱ आँ गयीँ,,
ट्रिशा उसको अपनी उंगली केँ पोर पऱ रखकर देखने लगी, मैनेकहा इसको टेस्ट करके देखो बहोत टेस्टी होता हैं यह.
वोँ बोलीं-छि यह भि कोई टेस्ट करने कि चीज़ हैं, तौ मैने थोडा नाराज़गी वाले स्वर मे कहा.
तुम्हें मेरी किसीबात कां विश्वास क्यूं नहीं होता, जाओ अब तुम्हें जोँ ठीकलगे वोँ करो.
तोँ उसने अन्मने भाव सें उसको अपनीजीभ कि नोक पर्र ऐसेरखा मानो वोँ कोई बॉम्ब होँ औऱ टच करते हि फट नां जाए.
जीभ पर्र रखकरकुछ देर उसका टेस्ट समझने कि कोशिश करतीरही तौ मैने पुछा कैसालगा.
वोँ बोलि - अच्छा हैं, थोडा सां तेज हैं मगर मिठास केँ संग, तौ मैनेकहा फिन चूस्लो इसे, औऱ ज्यादा मिठास मिलेगी.
फिन उसने अपनी सारी झिझक छोड़कर मेरे सुपाडे कों अपनेलाल-2 होठों मे क़ैदकर लिया औऱ चूसने लगी,
बीच-2 मे अपनीजीभ कि नोक सें मेरेछेद कों कुरेद देती। मेरा मज़े केँ मारे लन्ड फटाजा रहा थां। वैसे भि इतनीदेर सें अकडाहुआ थां.
मैनेकहा- आअहह मेरीजान। थोडा औऱ अंदर लें नाँ,, ससिईई। तेज़ी सें मुँहचला। आहह-आहह। आयईयी। सीईइ। औऱ फिन मेरानल खुल गय़ा.
उसको जैसे हि यह आभासहुआ कि मेरा वीर्य छूट गय़ा हैं, उसने अपना मुँहहटा लिया। हटते-2 भि एक् दो पिचकारी तोँ उसके मुँह मे हि छूट गई, औऱ फिन होली केँ पिचकरे कि तरह सें उसके मुँह कों अपने ताज़े मक्खन सें रंग दिया।
वोँ जल्दी वॉशरूम कि ओर भागी औऱ अपना मुँहसॉफ किया। वापसआकर मेरेबगल मे लेट गयीँ,.
औऱ क्याँ-2 कराओगे मुझसे। वोँ बोलीं,
तोँ मैनेकहा- तुम्हें यहसभी अच्छा नहींलगा.?
वोँ बोलीं- नहीं.नहीं.! ऐसीबात नहीं हैं, मे तौ बसऐसे हि पुच्छ रही थि.
कुछदेर हम् एक् दूसरे कि बाहों मे लिपटे ऐसे हि पड़ेरहे, मेरेहाथ उसकीपीठ कों सहलाते हुए उसके कूल्हे पऱ चलेगये,
उसकी रसीले गोल-मटोल गान्ड कों सहलाते-2 उसकी दरार मे उंगली घुमाने लगा, तोँ उसने मुझे औऱ ज़ोर सें कस लिया.
अब मैने उसको सीधा करके लिटा दिया औऱ उसकी टाँगों केँ बीचआकर बैठ गय़ा, उसने अपनी टांगे भींचली तौ मैनेपुश करके एक् दूसरे सें अलग किया। औऱ उसकी पेंटी कों उतार फेंका.
उसकी अन्छुइ परी पहलीबार मेरी आँखों केँ सामने थि, मैने नज़ाकत सें उस पर्र हाथ फिराया औऱ फिन उसकी फांकों कों अलग करके उसके अन्द्रुनि गुलाबी भाग कों अपनेजीभ सें चाट लिया.
उसके मुँह सें सिसकी निकल गई, औऱ कमर हिलाने लगी, दो-तीन बारजीभ उपर सें नीचे फिराने केँ बाद मैने अपने मूसल कों उसकीपरी केँ होठों पऱ रखकर उसको उसकी खुश्बू सूँघाई,
वोँ मस्ती मे झूमउठा, अब वोँ बिफरे सांड़ कि तरह उसमें घुसने केँ लिए व्याकुल हौ उठा.
मैने भि उसकी मनसाजान, ट्रिशा कि परी केँ होठों कों खोल्कर उसकेलिए मार्ग बनाया औऱ उसके छोटे सें छेद पऱ अपना कड़कसोट जैसा लन्ड रखकरपुश करने हि वाला थां कि मेरे मोबाइल कि बेल घनघना उठी….!
इस समयकिस भेन्चोद कि गान्ड मे खुजली हुई हैं दोस्त.! साला खड़े लन्ड पऱ हथौड़ा मारने जैसी हालत होँ गई, मेरी तोँ।
फिन सोचा शायदकोई मित्र मज़ाक करने केँ मूड मे होगा तौ उसको एक्-आध गाली सुनाकर चुपकरा दूं पहले.
My Life @Jindgi Ek Safar Begana ( Action , , Thriller , Adult) (Full Storyd) (romance special) – New Episode
Update 76
मैने भि उसकी मनसाजान, ट्रिशा कि परी केँ होठों कों खोल्कर उसकेलिए मार्ग बनाया औऱ उसके छोटे सें छेद पऱ अपना कड़कसोट जैसा लन्ड रखकरपुश करने हि वाला थां कि मेरे मोबाइल कि बेल घनघना उठी….!
इस वक्तकिस भेन्चोद कि गान्ड मे खुजली हुईँ हैं दोस्त.! साला खड़े लन्ड पऱ हथौड़ा मारने जैसी हालत होँ गई, मेरी तौ।
फिन सोचा शायदकोई साथी मज़ाक करने केँ मूड मे होगा तोँ उसको एक्-आध गाली सुनाकर चुपकरा दूं पहले।
ये सोचकर मैने मोबाइल उठा लिया, पऱ जैसे हि फोन कि स्क्रीन पऱ फ्लश होँ रहे नंबर कों देखा…मेरे सारे मसानों नें एक् संग पानी छोड़ दिया !!
मे ट्रिशा कों सॉरी बोलकर, एक् तौलिया लपेटा औऱ बाहर् बाल्कनी मे आकरफोन अटेंड कि।
एनएसए चौधरी कां मोबाइल थां, उन्होने मुझे जैसे हि परिस्थिति सें अवगत कराया मेरा सारा सेक्स कां मूडहवा होँ गय़ा, मेरा खड़ा लन्ड किसी डरपोक चूहे कि तरहबिल मे छिप गय़ा.
उन्होने कहा - आइबी केँ हवाले सें खबर मिली हैं, कि पड़ौसी मुल्क केँ पोर्ट सें एक् स्टीमर किसी बड़े टेरर अटॅक केँ लिए गुजरात केँ कोस्ट्ल एरिया जहाँ बीएसफ कि निगरानी नां केँ बराबर होती हैं उसओर निकल चुका हैं,
वैसे तोँ पूरे कोस्टल एरिया पर्र सेक्यूरिटी फोर्सस बढ़ादिए गये हें, मगर हम् चाहते हें कि उन्हें रास्ते मे हि रोक दियाजाए औऱ होँ सके तौ उस स्टीमर कों अपनी सामुद्री सीमा पर्र हि उड़ा दियाजाए.
हमारे 10 एजेंट्स कों यहकाम सौंपा गय़ा हैं, जिनमें तुम् भि शामिल हौ, अति शीघ्रा तुमें कच्छ पहुँच करकलसाम सें पहलेवहा रिपोर्ट करना हैं। आगे कि सारी रिपोर्ट तुम्हें वही मिलेगी…!
मे कितनी हि देर अवाक अवस्था मे खड़ाउस मोबाइल कों देखता रहा, लगता हैं उपर वाले नें मेरी भाग्य गधे केँ लन्ड सें लिखी होगी शायद.
तभी तोँ ऐसे मौके पर्र जोँ व्यक्ति केँ जिंदगी मे सिर्फ़ एक् बार हि आता हैं, उसकी सुहागरात,
औऱ यह मोबाइल ठीकउस समय, जब हम् एक् होनेजा रहे थें…
मे अपनी इन्हीं सोचों मे खोया थां, कि तभी ट्रिशा नें मेरे कंधे पर्र हाथ रखकर मुझे चोंका दिया।
वोँ एक् चादर लपेटे हुए मेरे सामने खड़ी थि.
मैने उसकेहाथ कों अपनेहाथ मे लेकरकहा - सॉरीजान ! मेरे मोबाइल कि वजह सें तुम्हारा मूडऑफ हौ गय़ा। मगर क्याँ करताबॉस कां मोबाइल थां उठाना हि पड़ा.
वोँ - इट्सओके जानू मे समझ सकती हूं.!
मे - अब मुझेइसी वक्त निकलना होगा, ऑफीस मे कुछ प्राब्लम हौ गयीँ, हैं,
ऑपरेशन रुका पड़ा हैं मुझे फ़ौरन बुलाया हैं, तुम् थोडा अड्जस्ट कर लेना प्लीज़.
वोँ - इट्सओके स्वीट हार्ट.! आप् जाओ अपनाकाम देखो, अब तोँ हमें जिंदगी भरसंग रहना हैं, अपनी हसरतें तोँ हम् कभी भि पूरीकर लेंगे।
आप् मेरी चिंता बिल्कुल मतकरो.!
मे - होँ सकता हैं मे कल भि नाँ लौटपाउ,.? औऱ तुम्हें तोँ कलसाम कों निकलना थां.
ट्रिशा मेरेहाथ अपने हाथों मे लेकर बोलि - कोईबात नहीं, हम् निकल जाएँगे, आप् अपनाकाम निपटाओ। हमारी चिंता छोड़दो।
अबजाओ ! लेटमत करो.
मैने फटाफट अपनाबॅग पॅक किया, कपड़े पहने औऱ ट्रिशा केँ होठों कां चुंबन करकेउसे बाइ बोला, औऱ निकल गय़ा अपनी वाहन लेकर.
अभि सुभह केँ 3:30 बजे थें, रोड तोँ सॉफ हि मिलने वाले थें सोभगा दि वाहन अपनीफुल स्पीड मे, एक् दो स्थान पोलीस कि चेकिंग मिली जोँ आमबात थि.
एक् स्थान बीच मे एक् रोड साइड ढाबे पऱ काररोक कर फ्रेश हुआ, चाइ पी, जिससे आँखों सें नींद कि खुमारी थोडा कम हुईँ, औऱ फिनचल पड़ा.
कोई 11 बजे मे अपने गन्तब्य जगह पर्र पहुँच गय़ा।
वहा 9 लोग पहले सें मौजूद थें जोँ मेरा हि वेटकर रहे थें, यह एक् बीएसएफ कां हि बेस कॅंप थां जौ विशेष पर्मिज़न सें हमें मीटिंग केँ लिए मिलाहुआ थां,
हमारा परिचय वहा एनएसजी केँ कमॅंडोस केँ तौर पर्र दिया गय़ा थां.
हमारे सामने पाकिस्तान-हिन्दुस्तान कि समुद्रि सीमा कां मॅपरखा हुआ थां, पताचला थां कि वोँ स्टीमर सीमा पऱ पहुँच चुका हैं, औऱ पड़ौसी मुल्क कि नेवी कि देखरेख मे आजदिन भर वहीं रहेगा.
रात केँ अंधेरे मे उसकोवहा सें निकाला जाएगा,
सीमा सें हमारे तट तक पहुँचने मे उसकोदो घंटे सें अधिक टाइम नहीं लगेगा अगरकोई अड़चन नहींआई तौ.
इसतरफ चूँकि नमक कां दलदल जैसा हैं, बहोत अंदर तक तोँ हमारी नेवी कां कोई गस्ति शिपइधर नहीं आँ सकता, इसलिये उन्होने इधर सें घुसने कां प्लान किया हैं.
यहादूर-2 तक रेत औऱ फिननमक हि नमक हैं, तट पर्र भि बीएसएफ केँ अलावा औऱ कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं हैं,
वोँ किसीतरह नमक केँ दलदल कों पार करके घुसने कि कोशिश करेंगे.
चूँकि उनका स्टीमर भि किनारे तक नहीं आँ सकता तौ वोँ उसेकुछ अंदर हि रखेंगे औऱ वहा सें लाइफ बोट्स केँ ज़रिए किनारे तक आएँगे जैसा कि हमारा अनुमान हैं.
मैने प्रश्न किया- तोँ हमारा प्लान क्याँ हैं.? हम् केसे रोकेंगे उन्हें.?
ग्रूप लीडर बत्रा नें अपनेहाथ मे पकड़ी हुइ पेन्सिल सें निशान लगाते हुए बताना शुरुआत किया.
अगर मेरा अनुमान सही निकला तोँ वोँ इस पॉइंट तक अपना स्टीमर लाएँगे जोँ करीबरात केँ दोबजे तक आँ जानां चाहिए,
वजहयह हैं कि यह हमारे किनारे सें नज़दीक भि हैं औऱ यहा पानी कि गहराई भि इस एरिया मे सबसे ज़्यादा हैं,
तीसरी औऱ सबसे महत्वपूर्ण बातयह हैं, कि यहा हमारी नेवी कि कोई सेक्यूरिटी नहीं हैं.
फिन वोँ शायद कच्छ कि तरफ सीधेतौर पऱ नहीं आएगे क्योंकि इधर बीएसएफ कां बेस कॅंप हैं तोँ जाहिर सि बात हैं सेक्यूरिटी भि ज्यादा होगी,
हमारे हिसाब सें वोँ लाइफ बोट्स कां इस्तेमाल करके राजस्थान बॉर्डर कि तरफ रुख़ करेंगे, हालाँकि उधररेत अधिक हैं, मगर खारे पानी कां दलदलकम हैं.
तोँ हमेंसाम ढलते हि कच्छ केँ दलदल कों पार करकेवहा उन्हें किनारे पर्र पहुँचने सें पहले उनकी बोट्स कों रोकना होगा.
मैनेबीच मे अपनीनाक घुसेड़ते हुएकहा – इफ़यू डॉन’ट माइंड ! तौ मे कुछ सजेस्ट करूँ, सभी लोग मेरीओर देखने लगे।
लीडर बत्रा बोला - हां.हां ! श्योर ! यहा हम् सबके व्यू लेने केँ बाद हि कोई डिसिशन लिया जाएगा, जोँ सबकीराय मे उचित होगावही एक्शन डिसाइड होगा.
मैने कहना शुरुआत किया - हम् मे सें कितने लोगऐसे हें जोँ अच्छे तैराक हें.? मेरीबात पऱ तौ मेरे अलावा 4 लोगों नें औऱ हाथ खड़ेकिए.
औऱ हमारे पास समुद्र केँ अंदर तैरने वालेसूट भि होंगे.मैने पुछा ! तोँ उसने हामीभर दि.
मैनेआगे कहा - अब मेरे हिसाब सें यहसही होगा कि अगर आपनेजिस पॉइंट पऱ उनके स्टीमर कों खड़ा रहने कां अनुमान लगाया हैं वोँ अगरसही निकला तौ हमें साउत कि ओर सें जहाँ पानी हि पानी हैं उधर सें बोट द्वारा जानां चाहिए,
वोँ भि उनकेवहा पहुँचने सें पहले।
हम् उनसेकुछ दूरी पर्र रहकर उनका प्रतीक्षा करेंगे,
पहले पहुँचने सें एक् फ़ायदा यह होगा कि अगर उनका स्टीमर हमारे अनुमान सें थोडा इधरउधर भि होँ जाता हैं तोँ हम् उसेकवर कर सकते हें.
स्टीमर कों रुकने औऱ लंगर डालने मे, औऱ फिन उसमें सें लाइफबोट उतारने मे, उसमें समान ट्रान्स्फर करने मे उनको कम-सें-कम 1 घंटा तोँ लग हि ज्जाएगा,
इतनीदेर मे हम् 5 लोगतैर कर उनके स्टीमर तक पानी केँ अंदर-2 पहुँच कर स्टीमर केँ आउटर सर्फेस मे बॉम्ब स्लिम करके वापस आँ सकते हें.
इससे पहले कि वोँ लाइफबोट मे सिफ्ट हों, हम् उस स्टीमर कों हि उड़ा देंगे.
सभी मेरीओर देखते हि रहगये। फिनकुछ देरबाद बत्रा बोला- प्लान तौ सही हैं, मगर इसमें रिस्क बहोत हैं, बॉम्ब कि इंटेन्सिटी हमें भि चोट पहुंचा सकती हैं.
मे - सर बिना रिस्क केँ हमारा कोई मिसन होता हैं क्याँ.? आप् तौ मुझसे ज्यादा एक्सपीरियेन्स्ड हें.
वोँ - सो तोँ हैं, फिन दूसरे लोगों कि ओर देखते हुए बोला - आप् लोगों कि क्याँ राय हैं।
कुछदेर मिक्स डिसक्यूसषन केँ बादयही तयहुआ कि हम् उनके स्टीमर कों बॉम्ब सें हि उड़ाएँगे.
अबइसनये प्लान केँ मुताबिक हमेंवहा सें 150किमी साउत कि तरफ जानां थां, तौ 4 बजेवहा सें एक् बीएसएफ कि जीप मे सारी ज़रूरत कि चीज़ें लेकर निकललिए,
उस किनारे केँ नज़दीकी कॅंप पऱ मोबाइल करके एक् बोट रेडी रखने कों भि बोल दिया.
अचह्ी ख़ासी वाहन भगाने केँ बबजूद भि वहा पहुँचते-2 हमें काफ़ी अंधेरा होँ चुका थां…
प्लान केँ मुतविक दरिया किनारे पऱ हमेंबोट खड़ी मिली, हमारी टीमजीप छोड़कर बोट कि तरफ बढ़ने लगी, मैने उन्हें अभि बोट कि तरफ जाने सें रोक दिया.
मैनेकहा - अभि हमारे पास काफ़ी वक़्त हैं थोडा यहींबैठ करकुछ खापी लेते हें, जिसको जोँ करना हैं, यहीं निपटा लो।
तब तक मे इधर-उधर चक्कर लगाता हूं, कोईकुछ प्राब्लम तौ नहीं हैं.
उन लोगों नें वहीं एक् घास केँ मैदान जैसी स्थान मे बैठकर थोडा सां ड्रिंक वग़ैरह लिया, हल्का फूलका खाया पिया.
मे अपना बिनकलर गले मे लटकाए हाथ मे एक् सॅंडविच लेकर निकल लिया थोडा जंगल कि तरफ.
मे इधर-उधर नज़र मारते हुएआगे बढ़ता गय़ा, थोडा दूर हि गय़ा थां कि मुझेदो लोग झाड़ियों केँ पीछे दिखाई दिए.
वोँ झाड़ियों केँ पीछे सें हमारे ग्रूप पर्र नज़ररखे हुए थें।
मेरा अंदाज़ा सही निकला, अवश्य यह किनारे कि रेकी करकेयहा कां एपसोड देरहे होंगे।
बोट कों यहादेख कर चोन्कन्ने हुए होंगे औऱ अबयहा आने-जाने वालों पऱ नज़ररख रहे हें.
मे दबे पाँव उनके पीछे पहुंचा औऱ गनहाथ मे लेकर उनको ललकारा। कॉन हौ बे तुम् लोग ? यहाछुप कर क्याँ कररहे हौ.?
उनमें सें एक् हड़बड़ाते हुए बोला – क.क.कुछ नहीं,, ! त्तुम कॉन हौ.? औऱ इतने अंधेरे मे यहा क्याँ कररहे हौ.?
मे उनकोगन पॉइंट पर्र लेकर बोला - साला उल्टा चोर कोतवाल कों डान्टे.! हें ऐसे नहीं मनोगे तुम् लोग औऱ मैनेआगे बढ़के एक् केँ जोरदार चाँटा रसीदकर दिया,
वोँ पीछे कि तरफउलट गय़ा, तब तक दूसरे नें अपनीगन निकाल कर मेरेउपर तान दि औऱ बोला-
साला हमसे पंगा लेगा तूँ.! अबदेख साले तेरा भेजा केसे उड़ाता हूं मे, यह कहकर उसने गोलीचला हि दि.
मे सजधजकर थां, सो साइड मे हटके उसकी गोली कों बेकार कर दिया औऱ उसकेहाथ पऱ एक् केरटजमा दि,
गोली कि आवाज़ सुनकर मेरे दूसरे दोस्त भि उधर कों दौड़े,
तब तक दूसरा वहा सें खिसकने लगा तौ पीछे सें आकर मेरे एक् दोस्त नें उसको दबोच लिया.
अब वोँ दोनो हमारे कब्ज़े मे थें, थोड़े सें इलाज़ सें हि बकदिए कि वोँ इस किनारे कि इन्फर्मेशन अपने स्टीमर तक देरहे थें,
उनमें सें एक् कां नाम मुस्ताक़ थां, जिसके पास मोबाइल थें औऱ वोँ उन्हें वक्तटू समय इन्फर्मेशन पासऑन कररहा थां.
ज़रूरत कि जानकारी लेके हमनेउन दोनो कों शूटकर दिया औऱ उनको बॉडी वहीं जंगल मे पड़ा छोड़कर अपनीबोट कि तरफबढ़ गये.
बत्रा - तुम्हें केसेपता लगा कि यहलोग हम् पर्र नज़ररख रहे हें.?
मे - यहाआने केँ बाद मेरे सिक्स्त सेन्स नें कहा कि कुछ तौ गड़बड़ हैं, इसलिये आप् लोगों कों मैने रुकने केँ लिए बोला,
मे लिट्रली जंगल कि तरफ आँ गय़ा औऱ देखोयह लोगमिल गये, अब इसके मोबाइल सें उनकी स्थिति भि पतालग जाएगी.
बत्रा मेरी तारीफ किए बिना नाँ रह पाया औऱ बोला - ब्रिलियेंट। ! सच मे तुम् एकदम सटीक सोचते हौ…
हम् यह बातें करते-2बोट तक पहुँचे हि थें कि तभी मुस्ताक़ कां मोबाइल बजनेलगा।
मैने मोबाइल रिसीव की किया औऱ मुस्ताक़ कि आवाज़ निकाल कर बोला-हां भइया सलाम वलेकुम.!
मेरी आवाज़ सुनकर मेरेसब दोस्त चोंकगये। मैने मुस्करा कर उनकीओर देखा.
उधर सें पुछा गय़ा - क्याँ स्थिति हैं अबउधर कि, औऱ कुछपता लगा कि वोँ बोट किसलिए लगाई गयीँ, हैं.
मे - लाइन एक् दम क्लियर हैं भइया, वोँ तौ पता नहींकोई ऐसे हि खड़ी छोड़ गय़ा होगा, शायद फ़्यूल ख़तम हौ गय़ा होगा इसका.
उधर सें फिन बोला गय़ा - तोँ इसका मतलब अभि तक ऐसाकुछ नहीं हैं नाँ उधर.!
मे - नहीं भइयाइधर सभीठीक हैं, अब आप् बताओ हमारे लिए क्याँ हुकुम हैं.
उधर सें - ठीक हैं तुम् वहींरहो अब हमलोग भि वहीआते हें, कॉन सालावहा दलदल औऱ रेत मे मरेगा रात कों, तब तक तुम् लोग हमारे निकलने कां पुख़्ता इंतज़ाम करलोठीक हैं,
अगरसभी कुछ अच्छे सें कर दिया तुमने, तौ तुम् लोगों कों स्पेशल इनाम मिलेगा ओके.बाइ.
मे - ओकेबाइ ! खुदा हाफ़िज़ भइया। !
सभी एकदम शॉक्ड रहगये। ! एक् तोँ मुझे मुस्ताक़ कि आवाज़ मे बात करते देखा, औऱ अब वोँ लोग भि इधर हि आँ रहे हें, तौ अब क्याँ करें, यह प्रश्न सबके चेहरे पऱ थां.
सोचा क्याँ थां औऱ क्याँ होगया…!!
अचानक मेरे मुँह सें निकल पड़ा-यह मारा पापड वाले कों.!! सभीलोग मेरे मुँह कि तरफ देखने लगे।
बत्रा बोला-अब कौनसा आइडिया आँ गय़ा तुम्हारे इस कंप्यूटर मे.?
मैनेकहा - अरे दोस्त यह तौ सालामजा हि आँ गय़ा, वोँ कहते हें नाँ कि हल्दी लगे नां फिटकरी रंग चोखा हि चोखा.!
बत्रा - अबे साले सस्पेंस मे हि मार डालेगा क्याँ.? कुछ बताएगा भि याँ यह पहेलियाँ हि बुझाता रहेगा.!
मैने कहना शुरुआत किया - तौ सुनो ! अभि क्याँ समयहुआ हैं, घड़ी देखते हुए।
हन ! 9:30 बजे हें, आप् मोबाइल करकेपास केँ हि किसी सोर्स सें दूसरी बोट कां इटेज़ाम करो 1 घंटे मे.
वोँ - फिन.!
मे - पहले आप् मोबाइल करोफिन बताता हूं.!
उसने बीएसएफ कॅंप मे मोबाइल किया औऱ दूसरी बोट केँ लिए पुछा जोँ कि मौजूद थि, फ़ौरन एक् घंटे मे भेजने कों बोला, तोँ उधर सें कन्फर्म किया कि पहुँच जाएगी.
मे - अब सुनो, हम् इसबोट मे बॉम्ब स्लिम कर देते हें औऱ मे इसबोट कों ड्राइव करके उनके स्टीमर कि ओर लें जाउन्गा,
आप् लोग दूसरी बोट कों मेरे सें लगभग 500 मीटरदूर रखकर फॉलो करना,
मे उन लोगों कों मोबाइल करकेबोल दूँगा कि मे उनकी हेल्प केँ लिए अपनीबोट लेकर आँ रहा हूं.
वोँ लोग निश्चिंत हौ जाएँगे औऱ मेरीबोट पहुँचने तक इंतेज़ार करेंगे.
वोँ - फिन। !
मे - वोँ लोगकुछ दूरी तक चेक करेंगे कि मे बोट पर्र हूं याँ नहींमगर जब मे उनके बेहद लगभग मतलब150-200 मीटर पहले तक पहुँचुँगा.
वोँ निश्चिंत हौ जाएँगे औऱ चेक करनाबंद करके मेरे पहुँचने कां प्रतीक्षा करेंगे.
तभी मे बोट कि स्टेरिंग लॉक करके उसमें सें पानी मे कूद जाउन्गा, बोटफुल स्पीड मे स्टीमर सें टकराएगी औऱ फिन भाड़ामम्म… बूमबब्ब्…!
सभी भौचक्के मुझेऐसे घूर्ने लगे जैसे मे कोई भूत-वूत हूं.
मे - क्यूं क्याँ हुआ भाइयो.? आइडिया पसन्द नहींआया.?
बत्रा - नहीं मे तुम्हें यह ख़तरा मोल नहीं लेनेदे सकता.
मे - अरे दोस्त कोई ख़तरा नहीं हैं इसमें.! पानी मे 150 मीटर तक बॉम्ब कि इंटेन्सिटी इतनी अधिक नहीं होगी औऱ फिन आप् लोग हौ हि बॅक-अप केँ लिए मुझे सर्चकर लेना जल्द हि अगर मे नां पहुँच पाया तोँ.!
वोँ - नहीं मेरामन नहींमान रहा आक्स्पेट करने कों.!
मे - देखोअब हमारे पास अधिक वक्त नहीं हैं बर्बाद करने केँ लिए, औऱ रहीबात रिस्क कि तोँ इतनी सारी जानें बचाने केँ लिएयह रिस्क तौ लेना हि पड़ेगा,
देश नें हमेंरखा हि ऐसे रिस्क लेकरदेश कि रक्षा करने केँ लिए.अब ज्यादा सोच विचार करने कि ज़रूरत नहीं हैं.
इतने मे वोँ बोट भि आँ गई, औऱ प्लान केँ हिसाब सें हमनेउस बोट मे बॉम्ब स्लिम कर दिया, उस बॉम्ब कि पॉवरओपन सर्फेस पर्र इतनी थि कि एक् बड़े सें माल कों भि उड़ादे.
यहसभी करते-2, 12:30 हौ गये, उस पॉइंट तक पहुँचने केँ लिए 1 घंटालग सकता थां,
मैने मुस्ताक़ केँ मोबाइल सें स्टीमर वाला नंबर डाइयल किया, लाइन मिलते हि जैसा सोचा थां वैसे हि बोलकर फाइनल कर दिया,
वोँ लोग 2 बजे तक वहा पहुँचने वाले थें सोकुछ देरबाद हमने भि बोट स्टार्ट करली.
आधे रास्ते तक तौ दोनो बोट्स संग-2 चलाते रहेफिन लगभग 1:30 कों मैने अपनीबोट आगे बढ़ा दि,
धीरे-धीरे-2 दोनोबोट कि डिस्टेन्स 500 मीटर रखकर हम् आगे बढ़ते रहे.
कुछ देरबाद हि हमें स्टीमर कि तरफ सें एक् पतली सि लाइट कि रेखा जैसी दिखने लगी, जौ धीरे-धीरे-2 बड़ी होतीजा रही थि।
मुझेपता थां कि स्टीमर सें मेरीबोट कों देखाजा रहा होगासो मैने एक् कपड़े सें अपनेसर कों ढक लिया जौ मेरेआधे फेस कों भि ढकेहुए थां.
सच कहूँ तोँ मौत सें सबकोभय लगता हैं, जैसे-2 मेरी औऱ स्टीमर कि दूरीकम होती जारही थि, मेरेबदन मे कंपन जैसा होनेलगा,
मगरकुछ कर गुजरने केँ जज़्बे नें मुझे हमेशा हि सपोर्ट किया हैं, औऱ मेरेडर कों कम किया हैं.
मैनेबोट कि स्टेरिंग कों लॉककर दिया औऱ स्पीड बढ़ा दि,
तकरीबन हम् दोनो केँ बीच 150-200 मीटर कि हि दूरीबची थि कि मैने पानी मे जंपलगा दि औऱ जितनी देर मे बोट स्टीमर तक पहुँचती औऱ उससे टकराती मैने अपने तैरने कि दिशा पकड़ली औऱ अपने साथियों कि बोट कि तरफ तेज़ी सें तैरने लगा.
जैसे-2बोट स्टीमर केँ नज़दीक पहुँचती जारही थि, फिर्भी उसकी स्पीड मे कोई अंतरआया नाँ देख स्टीमर मे मौजूद आतंकवादियों मे हड़कंप मच गय़ा,
मगरतब तक उनकेलिए बहोत देर हौ चुकी थि, इससे पहले कि वोँ कुछकर पातेबोट स्टीमर सें फुल स्पीड मे टकराई औऱ फिन एक् कर्नभेदी बिस्फोट समुद्र केँ सीने पर्र हुआ.
एक् आग कां बहोत बड़ा सां गोला, पानी सें कोई 25-30 मीटर उँचाई तक उच्छलता चला गय़ा…
बोट औऱ स्टीमर केँ परखच्चे उड़कर समुद्र केँ पानी केँ संगहवा मे उड़ते नज़रआने लगे.
स्टीमर मे मौजूद बिस्फोटक कि वजह सें औऱ कई जोरदार धमाके हुए, औऱ कितनी हि देर तक समुद्र केँ पानी पऱ दूर-2 तक आग हि आग फैलने लगी.
पता नहीं पानी कां इतना फोर्स केसे पैदाहुआ, कि उसने 200 मीटर सें भि अधिक दूरी पर्र मेरेबदन कों हवा मे उछाल दिया.
औऱ जब मेराबदन फिन सें वापस पानी सें टकराया, तौ मेरेबदन कों इतनातेज झटका पड़ा कि मेरापोर-2 हिल गय़ा,
स्टीमर कि तरफ सें आग कां एक् सैलाब सां मेरीओर बढ़ता चला आँ रहा थां.
मरता क्याँ नां करता, नां चाहते हुए भि मे अपनेहाथ पेर हिलान पर्र मजबूर थां, जिससे कम-सें-कम अपने कों डूबने सें बचा सकूँ,
इधर फ़्यूल समुद्र केँ पानी मे घुलने सें आग तेज़ी सें मेरीओर लॅप-लपाती हुई चली आँ रही थि…
कुछदेर तक तौ मैने पानी कि लहरों सें लड़ने कि कोशिश कि, मगर जल्द हि मेराहोश जबाबदे गय़ा औऱ मे अंधेरे कि गर्त मे डूबता चला गय़ा.….!!
मुझे नहींपता कि मे कितनी देर बेहोश रहा, मगर जब मेरीआँख खुली तौ मे एक् हॉस्पिटल केँ बेड पऱ लेटाहुआ थां,
आँखों केँ धुधल्के मे मुझे एक्-दो मानव आकृतियाँ सि दिखाई दि,
जैसे-2 मेरी देखने कि क्षमता समान्य हुईँ, तोँ मैने अपनेपास खड़े एक् आर्मी डॉक्टर औऱ उसकी एक् असिस्टेंट कों पाया.
कॉंग्रुलेशन्स यंगमॅन आख़िर तुमने अपनीमौत कों मातदे हि दि - उस डॉक्टर नें मेरे सें कहा, तोँ मैने उससे पूछा.-
मे इस वक़्त कहां हूं डॉक्टर औऱ मेरे मित्र कहां हें.?
डॉक्टर - वोँ लोग तोँ चलेगये। औऱ तुम् इस वक्तभुज केँ आर्मी हॉस्पिटल मे होँ, आजइसबेड पऱ लेटेहुए तुम्हें 12 दिन होँ गये.!
मे - 12 दिन.? आख़िर हुआ क्याँ थां मुझे.?
डॉक्टर - पहले कां तोँ मुझे भि नहींपता, मगरजब तुम्हें यहा लाया गय़ा थां, तोँ तुम्हारे बदन केँ बाहरी हिस्से पऱ तौ मामूली सि हि चोटें थि,
परंतु जब तुम्हारी पूरी बॉडी कों एग्ज़ॅमिन किया गय़ा, तौ पताचला कि तुम्हारे बदन कों इतना जबेर्दस्त झटका पड़ा थां कि बॉडी कां पूरा स्ट्रक्चर हि हिल गय़ा थां,
एक्-2 जॉइंट हिल चुका थां, सारे लिगमेंट फट चुके थें.
फिन तुम्हारी पूरी बॉडी कों प्लास्टर सें कवरकर दिया गय़ा जिससे तुम् ग़लती सें भि किसी हिस्से कों हिला नां सको।
इंजेक्षन दे-देकर तुम्हें बेहोश रखा गय़ा, खुराक भि इंजेक्षन केँ फॉर्म मे याँ बोटेल चढ़ाकर दि जातीरही.
जब सारे लिगमेंट ओर जायंट्स पूरीतरह ठीक हौ गयेतब आज तुम्हारा प्लास्टर हटाया गय़ा हैं औऱ तुम्हें होश मे लाया गय़ा हैं,
अब सिर्फ़ तुम्हारी लेफ्ट लेग मे फ्रॅक्चर हैं, तौ वही पऱ प्लास्टर हैं जौ कि अभि एक् महीने औऱ रखना पड़ेगा.
मे - मेरे साथीकब औऱ क्यूं चलेगये.? मेरा समान कहां हैं.?
डॉक्टर - तुम्हारे एक् दो दोस्तों कों भि मामूली सि चोटें थि, जोँ दोदिन मे ठीक हौ गयीँ, औऱ वोँ चलेगये,
उन्होने यह सामान दिया थां तुम्हें देने केँ लिए जिसमें शायदयह वॉच तौ शायदबंद हौ गयीँ, थि, सेल हमनेचेक नहीं किया हैं, शायदउन लोगों नें हि स्विच ऑफकर दिया होगा याँ होँ गय़ा होगा.
मैने अपनासेल लिया बेटर्री, सिम वग़ैरह निकाल करचेक कि औऱ दुबारा डालकर ऑन किया तौ वोँ ऑन होँ गय़ा.
बेटर्री थोडा कम थि, चारजर भि नहीं थां, सो उसका अधिक यूज़ भि नहींकर सकता थां.
अभि मे कुछ औऱ पुछ पाता याँ कर पाता, कि मेरासेल बजउठा, देखा तौ ट्रिशा कि कॉलआई थि,
मैने जैसे हि मोबाइल उठाई किया, वोँ शेरनी कि तरह बिफर पड़ी.
ट्रिशा - कहां हौ आप्.? मोबाइल क्यूं बंद थां इतने दिनो सें.? जब सें गये होँ बात हि नहीं कि.? क्याँ हुआ थां.?
मे - ओ मेरी मां साँस तोँ लेले.! मुझेकुछ नहींहुआ, मे अबठीक हूं.
वोँ - अबठीक हूं मतलब.कुछ हुआ थां.? बताओ जल्द क्याँ हुआ थां आपको.?
मे- कुछ नहीं एक् छोटा सां आक्सिडेंट होँ गय़ा थां बस.
वोँ - आक्सिडेंट.? कब.? केसे…? अभि कहां होँ आप्.? मुझे बताओ प्लीज़ मे अभि निकलती हूं यहा सें.!
मे - अभि मे घऱ पर्र नहीं हूं, ईवन अपनेशहर मे भि नहीं हूं, तुम्हें बाद मे बताता हूं, ओके.
वोँ - नहीं मुझे अभि बताओ कोन्से हॉस्पिटल मे हौ मे वहींआती हूं आपको लेने।
मे - सबरकर मेरी मां, अच्छा मुझे 1 घंटे कां वक्त देदो मे बताता हूं, ठीक हैं, यह कहकर मैने मोबाइल कटकर दिया.
फिन मैने डॉक्टर सें पुछा कि मे अपनेघऱ कबजा सकता हूं, तौ उसनेकहा कि कभी भि जाओ,
यह प्लास्टर हि हैं जोँ कुच्छ दिन औऱ रहेगा, फिनउसे किसी भि फिज़ीशियान सें कन्सल्ट करके निकलवा सकते होँ.
मे - क्याँ आप् मेरा जाने कां अरेंज्मेंट करवा सकते हें, तौ उसने अपनी नर्स कों भेजा किसी कों बुलाने केँ लिए.
कुछ देर मे हि एक् आर्मी कां कर्नल अंदरआया, औऱ मेरे सें बोला- व्हाट कॅनआइ दो फ़ॉरयू मिस्टर। अरुण। ?
मे - कर्नल मुझे अपनेघऱ जानां हैं, क्याँ आप् अरेंज कर सकते हें.?
कर्नल - राइटनाउ.?
मे - यस.!
कर्नल - ऑफ कोर्स.! हमेंउपर सें आपकीहर संभव सहायता करने कि इन्स्ट्रक्षन्स हें, सोयूबी तैयार, वीकॅन मूव विदिन अवर वक्त।
मे देखता हूं कोना सां हेलिकॉप्टर तैयार हैं.
मैनेफिन डॉक्टर सें पुछा- डॉक्टर अब खानां खा सकता हूं, तौ उसनेकहा श्योर कुछ भि खाओ, तोँ मे बोला- तौ फिन खिलाओ नां डॉक्टर पेट मे चूहेकूद रहे हें।
डॉक्टर नें हसतेहुए नर्स कों खानां अरेंज करने केँ लिए बोला.
खानां खाकर मैने ट्रिशा कों मोबाइल करकेबता दिया कि मे आजसाम तक अपनेघऱ पहुँच जाउन्गा.
कुछ घंटों मे हि हम् मेरेशहर केँ मिलिटरी कांटोनमेंट केँ हेलिपॅड सें फिन सें मुझेचेक अप केँ लिएउस कॅंप केँ हॉस्पिटल लेँ जाया गय़ा। औऱ फिन एक् नर्स कों मेरेसंग भेजकर मिलिटरी कि जीप मेरेघऱ तक छोड़ गई,.
घऱआकर नर्स नें मुझेबेड रेस्ट कि हिदायत दे थि, औऱ स्वयं नें सभीकुछ मॅनेज कर लिया।
मैनेआते हि एनएसए चौधरी कों फोन किया, तौ उन्होने मेरा हाल-चाल पूछा, औऱ फिन मेरी तारीफ़ करतेहुए बोले-.
चौधरी - सच मे तुम् कमाल हौ अरुण, तुम्हारी मिसन रिपोर्ट बत्रा (ग्रूप लीडर) नें भेज दि हैं,
मे तुम्हें अभि मैल करताहू, पढ़ लेना क्याँ-2 हुआ थां सारा डीटेल हैं उसमें, तुम्हारे बेहोश होने सें लेकर हॉस्पिटल तक कां भि.
मैने अपना लॅपटॉप ऑन किया, मैल चेककिए, बहोत सारेमैल पेंडिंग थें रीड करने कों,
मैने-2मैल ओपन करके देखे, जिसमें ट्रिशा केँ भि डेली केँ हिसाब सें एक्-दो, एक्-दो मैल थें जिनमें वही उसकी चिंता झलकरही थि.
तब तक एनएसए कां भेजाहुआ मैल आँ गय़ा, जिसमें वोँ रिपोर्ट थि, उसको मैनेओपन किया, औऱ पढ़ने लगा,
वोँ हमारे मीटिंग सें लेकर आक्षन तक सारा डीटेल थां, सरसरी तौर पऱ देखकर मे अपने बेहोश होने केँ बाद केँ मॅटर पऱ आँ गय़ा, जोँ मेरा मे क्न्सर्न थां जानना कि क्याँ-2 हुआ थां उसकेबाद.
Hinglish k update delete hu gaye h abi ese khtam krr dena chahta ho . Bad mai agar waqt milega too translate katunga ya koy or chahe too krr sakta h Tab tk hindi mai enjoy kijiye Thanks for reading and support Stay with us.
My Life @Jindgi Ek Safar Begana ( Action , , Thriller , Adult) (Full Storyd) (romance special) – New Episode
Update 77
रिपोर्ट - हवा मे कोई 10-12 फीट तक उपर उछल्ने केँ बाद अरुण कां बदनफिन सें सागर केँ पानी मे डूबता चला गय़ा, हमारी बोट भि भीषण धमाके कि वजह सें समुद्र केँ पानी मे आए भूचाल सें बुरीतरह हिलने लगी,
एक् बार कों तौ लगा कि उलट हि जाएगी, ढेर सारा पानीबोट मे भर गय़ा थां.
हमारे 3-4 दोस्त भि बोट मे इधर-उधर गिरने कि वजह सें चोटिल हौ गये थें।
किसीतरह हमनेबोट कों संभाला, कुछलोग उसका पानी निकालने मे जुटगये।
हम् बराबर अरुण कों तलाशने केँ लिए जहाँ उसकी बॉडी पानी मे गिरी थि उसके आस-पास बिनकलर सें सर्चकर रहे थें,
कुछदेर तक वोँ हमें नज़र हि नहींआया, किंतु कुछदेर केँ बाद वोँ हमें दिखाई दिया.
स्टीमर सें उठीआग अरुण कि तरफ सें होती हुईँ हमारी ओरबढ़ रही थि, जल्द सें जल्द हम् अपनीबोट कों उसकेपास तक लें जानां चाहते थें,
वोँ भि हमें पानी केँ उपर तैरने कि कोशिश करता दिखाई दिया तौ हमेंकुछ राहत मिली.
मगर वोँ हमारी रहट अधिकदेर नहींरह पाई औऱ हमने अरुण कां बेहोश बदन पानी मे डूबता नज़रआया,
लाइट्स केँ फोकसउसी केँ उपररख कर, हम् उसके बेहद लगभग पहुँच चुके थें, सोदो जनों नें पानी मे छलान्ग लगाकर बेहोश अरुण कों बाहर् निकाला।
उधरआग करीब हम् तक पहुँच हि चुकी थि.
हमने झट-पट उसके जिस्म कों बोट मे डाला, औऱ दोनो साथियों कों भि चढ़ा हि पाए थें कि आग हमारी बोट तक पहुँच गई,.
फ़ौरन बोट कों वापस घुमाया औऱ दौड़ा दिया।
आग कों पीछे औऱ पीछे छोड़ते हुए हम् वहा सें बच निकले।
मगर किनारे पहुँचने तक भि, अरुण केँ बदन मे कोई हरकत हमें नज़र नहींआई.
मैने मोबाइल करकेएर आंब्युलेन्स केँ लिए रिक्वेस्ट कि जौ मिल गई,, हमारे किनारे पहुँचने सें पहले हि वोँ हमारा वेटकर रहे थें.
इसतरह सें हम् चन्द मिनट मे हि भुज केँ मिलिटरी हॉस्पिटल मे थें, जहाँ अरुण कों आइसीयू मे रख दिया औऱ उसका ट्रीटमेंट शुरुआत हौ गय़ा.
हमारे घायल साथियों कों भि मेडिकल ट्रीटमेंट दे दिया गय़ा, चूँकि वोँ अधिक सीरीयस नहीं थें सोदोदिन मे हि ठीक हौ गये.
सुभह डॉक्टर नें रिपोर्ट दि कि अरुण केँ सारे लिगमेंट डॅमेज होँ चुके हें, एक् टाँग फ्रॅक्चर्ड हैं,
पूरेबदन कों प्लास्टर कर दिया हैं, मगर वाकी औऱ कोई सीरीयसनेस नहीं हैं, तोँ हम् उसको अंडर मिलिटरी ट्रीटमेंट मे छोड़कर चलेआए.
बत्रा कि रिपोर्ट पढ़कर मे अभि उसकेबाद कि रिपोर्ट टाइप करके भेजने हि वाला थां कि डोरबेल बजनेलगी….
नर्स दूसरे रूम मे थि तौ उसनेडोर खोला, सामने एक् लेडी पोलीस ऑफीसर कों देखकर वोँ चोंक गई,,
इधर नर्स कों वहादेख कर वोँ लेडी ऑफीसर जोँ कोई औऱ नहीं अरुण कि पत्नि ट्रिशा शर्मा थि, बुरीतरह सें चोन्कि, उसकेमन मे अंजानी आशंका पैदा होनेलगी.
उसेलगा, कि कहीं मे ज्यादा क्रिटिकल कंडीशन मे तौ नहीं हूं, यहसोच कर वोँ तेज़ी सें अंदर कों बढ़ी,
वोँ नर्सउसे रोकती हि रह गयीँ,, मगर वोँ धड़ धड़ाती हुई अरुण केँ रूम मे घुस गयीँ,.
मे लॅपटॉप पऱ मैलकर रहा थां, अभि सेंड कां बटन क्लिक किया हि थां कि भड़ाक सें गेटओपन हुआ औऱ जैसे हि मेरी नज़रगेट पर्र पड़ी,
सामने ट्रिशा एसपी कि ड्रेस मे कमर पर्र हाथरखे मुझेखा जाने वाली नज़रों सें ताड़रही थि, क्रोध उसके चेहरे पर्र सॉफझलक रहा थां.
मैनेउसे देखते हि कहा - आइए एसपी साहिबा। वेलकम होम…!
ट्रिशा गुस्से मे बिफर्ति हुई बोलीं - आप् अपने आपको समझते क्याँ हौ हान्ं.?
15 दिन सें नाँ कोई संदेश, नां मोबाइल फोन, सोच-सोच केँ बुराहाल होँ रहा थां मेरा। मोबाइल भि स्विच ऑफ, करूँ तोँ क्याँ करूँ.?
मन मे नाँ जाने केसे-2 ख्याल आँ रहे थें। मे आपकी पत्नि हूं, मुझे तौ बताना चाहिए थां कि आख़िर जनाबजा कहां रहे हें.?
मे - अरे मेरी अम्मा.! थोडा शांत होँ जा.!आओ मे सभी बताता हूं.
ट्रिशा - अब क्याँ बताता हूं.? औऱ आप् तोँ बोलके गये थें कि ऑफीस मे कोई प्राब्लम हैं, उसे सॉल्व करना हैं, फिनयह दूसरे शहर मे केसे पहुँच गये ?
औऱ वोँ आक्सिडेंट.?
मे - अबयह अपनी थानेदारी छोड़कर मेरेपास आओगी याँ वहीं सें प्रश्न जबाब करती रहोगी.?
पहले एक् कामकरो यह यूनिफॉर्म उतारकर फ्रेश होकर दूसरे कपड़े चेंज कर्लो फिनबात करते हें ओके.
मे सच मे आपसे बहोत नाराज़ हूं, यह कहकर ट्रिशा पांव पटकती औऱ भुन्भुनाति हुई बाथरूम मे चली गयीँ,, 10 मिनटबाद एक् सारीपहन कर वोँ मेरेपास बिस्तर पऱ आकरबैठ गई,.
क्रोध अभि भि उसके मुखमंडल पऱ ज्यों कां त्यों विराजमान थां, औऱ उसी लहजे मे वोँ बोलि - हांअब कहो क्याँ एक्सक्यूस हें आपके.?
मैने लॅपटॉप मे वोँ रिपोर्ट ओपन करके उसके सामने कर दि- लोयह पढ़ो तुम्हारे हर प्रश्न केँ जबाब इसमें मिल जाएँगे.
ट्रिशा नें रिपोर्ट पढ़ना शुरुआत किया, जैसे -2 वोँ रिपोर्ट पढ़ती जारही थि, उसके चेहरे कां तनावकम होताजा रहा थां,
मगर उसकी स्थान घोर आश्चर्य केँ भाव दिखाई देनेलगे, रिपोर्ट कां लास्ट पार्ट पढ़ते-2 उसकी आँखों सें आँसुओं कि लड़ी बहनेलगी,
रिपोर्ट ख़तम होते हि वोँ पागल लड़की मेरे सीने मे लगकरफुट-2 कर रोनेलगी.
दरवाजे पर्र खड़ी नर्स हमेंदेख करकुछ समझी-कुछ नाँ समझी अवस्था मे थि,
जैसे हि मेरी नज़रउस पऱ गई, तोँ मैने इशारे सें उससे जाने कों कहा, वोँ वहा सें चली गयीँ,.
ट्रिशा सुबक्ते हुए बोलि - आख़िर कॉन हौ आप्, अरुण प्लीज़ अब तौ सचबता दो, एक् इंजिनियर कों क्याँ पड़ी कि वोँ वहा जाकेऐसे कामकरे.?
क्याँ मे इस लायक भि नहीं कि आपकी सच्चाई जान सकूँ.?
मे - तुम्हें याद हैं, जब तुमने मुझसे कमॅंडोस कि ट्रैनिंग केँ बाद पुछा थां, कि आपकोइस नौकरी केँ लिएयह ट्रैनिंग करने कि क्याँ ज़रूरत हैं.!
ट्रिशा - हां पुछा थां, औऱ आपने बोला थां कि टाइमआने पर्र सभीबता दूँगा। तौ क्याँ वोँ वक्त अभि भि नहींआया हैं.?
मे - आँ गय़ा हैं मेरीजान.!
ट्रिशा - तोँ बताओ अपने बारे मे। सभीकुछ.!
मे - बस अधिककुछ नहीं, मेरा एक् हि सच हैं जोँ तुम्हें नहींपता औऱ वोँ यह कि मे एनएसएसआइ कां अंडरकवर एजेंट 928 हूं.
ट्रिशा मेरी सच्चाई सुनकर बुरीतरह उछल पड़ी - क्याँ.? क्याँ सच मे.?
मे - हां ! यह बिल्कुल सच हैं, औऱ चूँकि तुम् भि एक् आइपीएस ऑफीसर हौ तौ तुम् पर्र इतना ट्रस्ट तौ कर हि सकता हूं कि यह सच्चाई अब सिर्फ़ हम् दोनो तक हि सीमित रहेगी।
भूल सें भि किसी औऱ कों पता नहीं होना चाहिए कि मे कॉन हूं। यहा तक कि हमारे होने वाले बच्चों कों भि.
बच्चों कां नामसुन कर वोँ शरमा गई, औऱ मुझे औऱ जोरे सें कस्ति हुईँ बोलीं - ओह्ह अरुण… मेरे स्वामी…। आप् सचमुच महान होँ.!
मे वादा करती हूं, मेरी ज़ुबान कटभले हि जाएमगर किसी केँ सामने खुलेगी नहीं। आप् तौ मेरे पति हें, ऐसे राज़ तोँ दूसरों केँ भि नहीं बताए जाते.
मेरे घरवाले यहा तक कि ऋषभ भैया भि मुझे क्याँ-2 बोलकर चिढ़ाते थें कि कैसी पागल हैं यह लड़की,
एक् आइपीएस होकर इंजिनियर केँ प्रेम मे पड़ गयीँ,। मगर उन्हें क्याँ पता कि मेरा पति मेरा हि नहींइस पूरेदेश कां रखवाला हैं,
यह कहकर उसने मेरे पूरे चेहरे कों चुंबनों सें भर दिया।
मैनेआगे कहा - जानती हौ ! यह मेरा तीसरा मिसन थां.
वोँ एकदम चोन्क्ते हुए बोलि - क्याँ.? दो औऱ कोन्से थें.? फिन मैने उसको अलीगढ़ केँ औऱ ज़फ़रुल्ला वाले मिसन केँ बारे मे भि बताया.
वोँ - आप् एक् सच्चे देश भक्त होँ, हमारी पोलीस तोँ किसीकाम कि नहीं होती, बस नेताओं केँ तलवे चाटते रहो औऱ अपनीजॉब करतेरहो, रुपया कमाते रहोबस.
फिनकुछ देर वोँ यौंही मेरे कंधे सें लगीबात करतीरही, कभी-2 मेरे सीने कों चूम लेती।
मेरेहाथ उसकीपीठ कों सहलारहे थें, जौ धीरे-धीरे-2 नीचे कि ओरचले गये औऱ फिन उसके गोल-गोल कसेहुए कुल्हों कों सहलाने लगे,
मुझेकुछ शरारत करने कि सूझी औऱ मैने अपनी एक् उंगली उसकी गान्ड कि दरार मे डाल दि.
वोँ चिंहूक कर मेरे सीने सें अलग हौ गई, औऱ गहरी नज़रों सें देखती हुईँ बोलि - उउन्न्हुउ.! यह अभि नहीं। पहले आप् एकदम सें ठीक हौ जाओफिन.!
मे - अरे दोस्त ! वोँ प्लास्टर तौ घुटने सें नीचे हि तोँ हैं, वाकीसभी समान तौ स्लिम हैं नाँ.!
ट्रिशा - नहीं.बिल्कुल नहीं.! अभि ऐसाकुछ भि करने कि पेर्मिशन नहीं हैं आपको.
मे - क्याँ मुशिबत हैं दोस्त ! यह साली थानेदारनी हि लिखी थि मेरे क़िस्मत मे।
विवाह कों 17-18 दिन हौ गये, औऱ अभि तक साला नां तौ हनी कां पता हें औऱ नाँ मून कां.
ट्रिशा मेरीबात सुनकर खिल-खिला करफिन सें गले सें लिपट गई,, मैने अपनी उंगली उसके लिप्स पऱ घुमाते हुएकहा- ड्राइ सेक्स तोँ कर सकते हें नां.! कि उसकी भि परमिशन लेनी पड़ेगी.
वोँ कुछसोच कर बोलि - ठीकरात कों, अभि नहींओके, अब मे घऱ कों थोडा ठीक करके, खाने-वाने कां देखती हूं.
जब वोँ बाहर् चली गयीँ, तोँ नर्स मेरे कमरे मे आई औऱ बोलि- सर ! यह पोलीस ऑफीसर कॉन हें.?
मे - अरे सिस्टर यह मेरी पत्नि हैं। ट्रिशा शर्मा, आइपीएस। वोँ ओह्ह्ह। करकेचली गयीँ,.
ट्रिशा घऱ कों व्यवस्थित करने मे लग गयीँ,, 3 डिन्नर किसी अच्छे सें होटेल सें ऑर्डर करके मॅंगा लिए जोँ हम् तीनो नें एक् संगबैठ करखाए।
इसबीच नर्स नें पुछा कि मेडमअब अगर आप् यहा हें तोँ मे थोडा अपनेघऱ जाउ,
मैनेउसे मनाकर दिया कि नहीं, मेडमदो दिनबाद चली जाएँगी अपनी ड्यूटी पर्र, तब तक केँ लिएअगर जानां चाहो तौ जा सकती हौ.
खानां खाकर नर्स अपनेघऱ चली गई,, उसने रिक्वेस्ट कि थि कि उसकेघऱ जाने कि बात हम् उसके ऑफीस मे नाँ बताएँ, जौ हमने आक्सेप्ट करली.
खानां खाकर हम् दोनो पति-पत्नि अपनेखाट पऱ आँ गये औऱ एक् दूसरे कि भूली-बिसरी बातों मे लगगये.
बातों-2 मे मैने उसकेसंग छेड़छाड शुरुआत कर दि, तौ वोँ भि गर्म होनेलगी, औऱ देखते-2 हम् दोनो अपने अंतर वस्त्रों मे आँ गये…!
मेरी हरकतों सें ट्रिशा इतनी ज्यादा गर्म हौ चुकी थि कि, वोँ यह भि भूल गयीँ, कि उसनेदो घंटे पहले क्याँ प्रॉमिस लिया थां मुझसे।
अब वोँ किसी भि तरह सें अपनी वर्जिनिटी खोना हि चाहती थि आज कि रात, आज एक् पूर्ण महिला होने कि जैसेठान ली थि उसने….!!
ट्रिशा नें मेरे आख़िरी वस्त्र कों भि निकाल फेंका, औऱ स्वयं भि केवल पेंटी मे आँ गयीँ,, वोँ अपने हाथों सें मेरे मूसल महाराज कों बड़े प्रेम सें सहलारही थि, बीच-बीच मे वोँ उसेचूम भि लेती थि.
मेरी आँखें आनंदतिरेक मे बंद हौ चुकी थि, मेरा लन्ड फटने तक कि कगार पऱ पहुँच चुका थां.
नीली – 2 नसें 1 सेमी तक कि मोटाई मे उभरआईं थि, वोँ इतना सख़्त होँ चुका थां, कि ट्रिशा अपनेहाथ सें उसेदबा भि नहींपा रही थि…
मैने ट्रिशा कि गान्ड कों पकड़कर अपने मुँह कि तरफ घुमाया औऱ उसकी पेंटी निकाल कर अपने मुँह केँ उपर बिठा लिया, अब हम् दोनो 69 कि पोज़िशन मे थें,
उसकीजीभ मेरे लन्ड केँ गोल-2लाल सुपाडे सें खेलरही थि औऱ मे उसकीपरी कों अपनीजीभ सें चाटरहा थां.
मुझसे अब सब्र करना मुश्किल होताजा रहा थां, औऱ शायद वोँ भि अब अपने कों रोक नहींपा रही थि.
मैनेकहा - डार्लिंग.! एक् बार तुम् कोशिश करो तोँ मेरेउपर बैठकर.! शायद मैने उसकेमन कि बातकह दि थि।
वोँ जल्दी पलट गई, औऱ अपनीपरी कों मेरे मूसल पर्र रखकर रगड़ने लगी, दोनो केँ हि पार्ट चिकने होकर स्लिपैरी हौ गये थें.
मैने उसकी जांघों केँ उपर सें अपने दोनोहाथ लेजाकर उसकीपरी केँ होंठों कों खोलकर बोला-
जान तुम् मेरा लन्ड पकड़ केँ सेट तोँ करो अपनेछेद पऱ,
उसने वैसा हि किया औऱ जब डाइरेक्षन मॅच होँ गय़ा तोँ उसको धीरे-धीरे सें बैठने कों कहा.
जैसे हि उसने अपनी गान्ड कों नीचे कि तरफमूव किया, उसकेहलक सें एक् चीख नियकल पड़ी.औऱ वोँ हाँफती सि बोलीं- नहीं अरुणयह मुझसे नहीं होगा, ऐसा लगा जैसे मेरीजान हि निकल गयीँ, होँ।
प्लीज़ मे नहींकर पाउन्गि यह.
मेरेहाथ उसके दोनो कुल्हों पऱ हि जमे थें मुझेपता थां कि जैसे हि उसे दर्द होगा वोँ उठ जाएगी, सो मैनेउसे उसी पोज़िशन मे दबाएरखा।
इस वक़्त मेरा सुपाडा पूरीतरह पोज़िशन मे थां औऱ उसकीपरी कि सील कि झिल्ली पर्र टिकाहुआ थां.
मैने उसको समझाया, देखो डार्लिंग ! यहसभी तोँ हर लड़की कों झेलना पड़ता हैं फर्स्ट वक्त, अब ऐसे तोँ तुम् जीवनभर नहीं रहोगी नाँ, तोँ फिनआज हि क्यूं नहीं.
उसकोकुछ मेरीबात जमी, औऱ वोँ मेरेसंग स्मूच करनेलगी, मे उसकी गान्ड कों सहलाता रहा,
जब उसकोकुछ राहत महसूस हुईँ, तोँ मैनेउसे फिन एक् बार औऱ कोशिश करने कां इशारा किया, उसने थोडा सां पुश किया, संग हि मैने उसके कुल्हों कों थोडा ज्यादा दबा दिया.
नतीजा मेराआधे सें ज्यादा लन्ड उसकीसील कों तोड़ता हुआ उसकीलाल परी केँ अंदरसमा गय़ा.
वोँ बुरीतरह छ्ट-पाटने लगी, उसकी आँखों सें पानी निकलने लगा, औऱ वोँ मेरे हाथों कों अपने कुल्हों सें हटाने कि भरपूर कोशिश मे लग गई,.
मैनेउसे एनकरेज करतेहुए कहा - बस मेरीजान, मे दरवाजा तोँ टूट चुका हैं, सिपाही कों अंदर जाने कां मार्ग मिल चुका हैं,
औऱ थोड़ी सि कोशिश करनी हैं बस, फिन फ़तह हि फ़तह.अब थोडा सां औऱ। प्लीज़…
वोँ कराहते हुए बोलीं - अहह…जानू ! दर्द केँ मारे जैसे मेरीकमर फटी हि जारही हैं, प्लीज़ थोडा सां निकालने दो नाँ.… फिन सें कर लेंगे.!
मैने थोडा डाँटते हुएकहा - पागलमत बनो ट्रिशा, जोँ अभि तक मेहनत कि हैं तुमने, वोँ सभी बेकार हौ जाएगी। प्लीज़ मुझे स्मूच करो औऱ अपना ध्यान सेक्स मे लगाओ.
वोँ फिन सें मुझे चूमने चाटने लगी मे भि उसको उत्तेजित करने कि कोशिश कररहा थां,
मे अपनी एक् उंगली सें उसकी गान्ड केँ छेद कों कुरेदने लगा, जिससे उसकीपरी कि अन्द्रुनि दीवारों मे सुरसूराहट होनेलगी औऱ धीरे-धीरे-2 उसकीकमर हिलने लगी.
अब कुछकम हुआ दर्द। मैनेउसे पुछा तौ वोँ हमम्म। करके बोलि,
तोँ अब धीरे-धीरे--2 इससे अंदर बाहर् करो… आप् लोगसोच रहे होंगे कि पहलीबार शायद किसी लड़की नें स्वयं उपरचढ़ कर अपनी वर्जिनिटी खोई होँ यह संभव नहीं,
पऱ यहा ट्रिशा कि मजबूरी थि। वोँ अबरुक भि नहीं सकती थि सो धीरे-धीरे-2 अपनीकमर कों उपर नीचे करनेलगी.
अबउसे इसमें थोडा – 2 मजाआने लगा थां, मे भि अब उसकी गान्ड सें हाथहटा कर उसकी चुचियों कों मसल्ने लगा उसके निप्प्लो कों सहलाने लगा, जिससे उसकामजा औऱ बढ़ गय़ा.
अब उसके मुँह सें खुशी कि किल्कारी फुटरही थि, मुझेलगा कि अब वोँ झड़ने वाली हैं, तभी मैने उसके कुल्हों पर्र हाथरख कर सहलाया औऱ उसको उत्तेजित करने केँ लिए बोला-
यस डार्लिंग। ऐसे हि मेरी रानी। शाबास औऱ ज़ोर सें…यस, औऱ संग हि उसकी गान्ड कों अपने हाथों मे कसकर, पूरी ताक़त सें नीचे कों दबा दिया.
मज़े कि वजह सें ट्रिशा इस झटके कों नज़र अंदाज कर गयीँ, औऱ एक् हल्की सि दर्दभरी चीख केँ संग वोँ झड़ने लगी,
मगरतब तक मेरा खूँटा पूरीतरह उसकी सन्करि सि गुफा मे स्लिम हौ चुका थां.
वोँ कुछदेर यौही पड़ी हफ्ती रही औऱ मेरे सीने सें लगकर सुस्ताने लगी।
मेरा मूसल उसकीपरी केँ अंदर फूल-पिचक रहा थां, बड़ी बैचैनि मे थां आज वोँ बेचारा,
क्योंकि आज कि कमॅंड उसके मालिक केँ हाथ मे नहीं थि तौ मजबूरी थि.
मैनेकहा - डार्लिंग मेरा बाबू परेशान हैं अंदर उसको थोडा खुराक तोँ दो, तौ वोँ मेरीओर देखकर एक् दर्दभरी मुस्कान केँ संग बोलीं- अब क्याँ करूँ.?
मे - अबफिन सें धीरे-धीरे-2 कमरचलो, तौ उसने बहोत हि धीरे-धीरे सें अपनीकमर कों उपर किया, उसे फिन सें दर्द कां आभासहुआ औऱ उसके मुँह सें एक् कराह निकल गई,,
मगरअब उसे अपने मित्र कों भि तोँ खुस करना थां, सो बेचारी फिन सें उसको दबाने लगी.
उसकी कोशिश रंगलाई औऱ कुछ हि प्रयासों मे उसका दर्दकम होता गय़ा औऱ वोँ खुशी मे परिवर्तित होनेलगा.
अब उसके धक्कों मे थोड़ी गतिआती जारही थि, मगर इतनी नहीं जैसी मूसल महाराज कों चाहिए थि,
सोअब उसकी कमान मैने अपनेहाथ मे लेने कां निर्णय लिया, मैने अपनी प्लास्टर वाली टाँग कों सीधा रखतेहुए, ट्रिशा कों अपने नीचे लेँ लिया,
उस टूटी टाँग कों ट्रिशा कि जाँघ केँ उपर सीधा किया, औऱ उसकी दूसरी टाँग कों उपर उठाकर उसकी फ्रेश सील टूटी मुनिया मे अपना लन्ड पेल दिया…
एक् बार वोँ फिन बुरीतरह कराहउठी, मगरअब वक्त नहीं थां, उसकेउपर ध्यान देने कां…
सो उसकेहोठ चूस्ते हुए, मैने अपनीकमर चलाना शुरुआत कर दिया…
एक् हाथ सें उसकी चुचियों कों मसल्ते हुए मेरे धक्कों कि रफ़्तार मे निरंतर तेज़ी आतीजा रही थि…
मेरी तूफ़ानी चुदाई सें ट्रिशा कां मुँह खुला कां खुलारह गय़ा… मगरकुछ पलोंबाद हि, वोँ भि पूरीतरह सें सहयोग करनेलगी.
इतनी स्पीड केँ धक्कों कों ट्रिशा कि लालपरी नहींझेल पाई औऱ वोँ फिन सें आँसू बहाने लगी,
उसके झड़ने सें लन्ड औऱ मस्ती सें अंदर बाहर् होनेलगा, औऱ कुच्छ हि पलोंबाद मैने भि अपना फब्बरा उसकीनयी-2 फटी बुर मे छोड़ दिया,
पहलीबार उसकीपरी मर्दाने वीर्य कां रसास्वादन करने सें आनंदतिरेक मे फिन सें पानी छोड़ने लगी औऱ पूरीतरह शांत होँ गई,.
मैनेफिन सें नीचेलेट करउसे अपनेउपर लिटाकर चिपका लिया,
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