Meri Jung (Restart) – New Episode
भाग 138 -
आखिरकार निशा नें एक् गहरी सांसली औऱ अपनी चेयर सें उठकर अज्जू केँ पासआते हुए वोली
निशा- सॉरी मिस्टर अजय मे तुम्हारे इस सबाल कां जबाब नहि दे सकती हूं…। क्योंकि मैंने उससे वादा किया हैं…। बैसे भि तुम्हें उसे ढूंडने कि कोई जरूरत नहि हैं… क्योंकि जब तुमने उसे धोखा दिया औऱ उसेदूध मे डली किसी मक्खी कि तरह अपनी जीवन सें निकाल कर फेंक दिया थां, तब उसकादिल पूरीतरह सें टूट गय़ा थां, इसलिये वोँ सन्यास लेकर कहीँदूर चली गई हैं। वोँ सिर्फ तभीयहा आती हैं, जबउसे अपनी फैमली पर्र कोई खतरानजर आता हैं, बर्ना उससे मिलना तौ दूरउसे देख्ना भि करीब-करीब नामुमकिन हैं। इसलिये मिस्टर अजयअगर मेरी सलाह मानो तोँ अबउसे ढूंडना बंदकर दो… शायद वोँ अबकभी भि तुम्हारी जीवन मे बापिस नहि आऐगी।
निशा कि बात सुनकर अज्जू अपनी स्थान सें उठखडा हुआ औऱ निशा कि आँखों मे आँखें डालकर बोला
अज्जू- अगर तुम् निशा केँ बारे मे मुझेकुछ भि नहि बता सकती, तोँ कोईबात नहि मिस जोया, मगर मे उसे ढूंडना कभीबंद नहि करूँगा…। अगर वोँ मेरी जीवन मे लौटकर बापिस नहि आँ सकती, तोँ मे भि सभीकुछ छोडकर उसकी जीवन मे शामिल होँ जाऊंगा। वोँ जहाँ कहीँ भि औऱ जिसहाल मे रहेगी, मे भि उसकेसंग रहूँगा। वोँ भले हि मुझेकभी माफ नाँ करे…मगर मे फिन भि उसकेसंग रहूँगा औऱ मरतेदम तक उससे माफी माँगता रहूँगा….
निशा-अगर तुम् कोशिश करना हि चाहते होँ तोँ तुम्हारी मर्जी मिस्टर अजय। मगर मेरी एक् बातयाद रखना कि अगर निशा तुम्हें मिल भि गई तौ मे ये दावे केँ संगकह सकती हूं कि वोँ तुम्हारे पासकभी नहि लौटेगी।
अजय- पऱ क्यूं…। क्याँ सच मे मेरी गलती इतनीबडी थि कि निशा मुझेकभी माफ नहि कर सकती।
निशा- गलती तौ तुम्हारी सच मे बहोत बडी थि मिस्टर अजय… तुम् भले हि निशा केँ संग बचपन सें रहे होँ, मगर मुझेऐसा लगता हैं कि तुमने कभी निशा कों ठीक सें समझा हि नहि।
निशा कि बात सुनकर अज्जू हैरान होतेहुए बोला
अज्जू- क्याँ मतलब
निशा- मतलबये मिस्टर अजय कि निशा तुमसे इतना अधिक प्रेम करती हैं कि वोँ तुम्हारी हर गलतीमाफ कर सकती हैं। तुम् अगर निशा सें उसकीजान भि माँगलो तोँ वोँ हंसते हंसते दे देगी। मगर तुम्हारे माथे पऱ कभी एक् सिकन नहि आने देगी।
अज्जू- हाँ मे येबात जानता हूं… रहीबात जान देने कि तोँ वोँ पहले हि कईबार हंसते हंसते मेरेलिए अपनीजान पर्र खेल चुकी हैं। इसलिये उसके प्रेम कि गहराई जानने केँ लिए मुझे तुम्हारी जरूरत नहि हैं मिस जोया।
निशा-जब तुम् उसे इतनी अच्छी तरह सें जानते हौ तोँ तुम्हें ये भि पता होना चाहिए थां कि तीनसाल पहले तुमने जोँ गलतियां कीं थि, उन्हें माफ करने मे निशा कों एक् समय सें ज़्यादा कां टाइम नहि लगेगा। मगर निशा केँ जाने केँ बाद तुमने जोँ गलतियाँ कीं हें, निशा शायद उन्हें कभीमाफ नहि कर पाऐगी।
अज्जू- कैसी गलतियाँ मिस जोया
निशा- सबसे पहली गलती तौ यही हैं कि सबकुछ गलत करने केँ बाद भि तुम्हें अब तक अपनी गलती कां एहसास नहि हुआ हैं। तुम् अच्छी तरह सें जानते होँ कि तुम्हारा ड्रिंक करना निशा कों पसन्द नहि हैं, मगर निशा केँ जाने केँ बाद तुम् पूरीतरह सें बेबडे बन चुके हौ, तुम्हें क्याँ लगता हैं कि तुम्हारी ऐसी हालत देखकर निशाखुश हौ रही होगी। नहि मिस्टर अजय तुमने तीनसाल पहले जोँ उसेदुख दिया थां, उससे कहीं अधिकदुख तौ तुम् अबउसे देरहे होँ। इसके अलावा निशा नें जिस परिवार औऱ जिन रिश्तों कों अपने प्रेम औऱ मेहनत सें संवारा थां, उन्हें तुमने बिखरने दिया, अरे तुमसे तोँ अपना स्वयं कां परिवार नहि संभलरहा हैं, पिछले तीन सालों सें तुमने अपनी दूसरी बीबी जिया औऱ अपनी बच्ची राधा पऱ बिल्कुल भि ध्यान नहि दिया हैं।
इतना बोलकर निशा खामोश होँ गई औऱ अज्जू कि तरफ देखने लगी। मगर जब अज्जू नें कुछ भि नहि कहा तोँ निशा कों एहसास हौ गय़ा कि शायद उसकी बातों कां असर अज्जू पर्र होँ रहा हैं। इसलिये निशा नें बोल्ना जारीरखा
निशा-चलो रिश्तों कों एक् तरफ रखते हें, तुमसे तोँ अपने बिजिनेश नहि संभलरहे हें। अपनी फार्मेशी कम्पनी मे तोँ तुम् सालों सें गए हि नहि, इसके अलावा निशा केँ संग तुमने जोँ नए बिजिनेश शूरूकिए थें, उनकी भि तुम्हें कोईखबर नहि हैं। तुम्हें पता हि नहि हैं कि न्यूज चैनल मे क्याँ चलरहा, हॉस्पीटल मे क्याँ चलरहा हैं, कॉलेज ठीक सें चल भि रहा हैं याँ नहि, सिक्योरिटी कम्पनी कां काम कैसाचल रहा हैं तुम्हें इनके बारे मे कुछ भि पता नहि हैं। वोँ तोँ अच्छा हैं कि निशा नें तुमसे दूर जाने सें पहले हि बिजिनेश कों मैनेज करने केँ सारे इंतजाम करदिए थें, वर्ना तुम्हारे ऐसब बिजिनेश कब केँ बंद हौ गए होते। मे नहि जानती कि तुम् अपने प्रेम कि खातिर निशा कों अपनी जीवन मे बापिस लाना चाहते हौ याँ बस अपनीहवस मिटाने केँ लिए, मगर अगर तुम् सच मे निशा कों ढूँडना चाहते हौ, तौ तुम्हें सबसे पहले अपने आप् कों बदलना होगा। अगर तुम् अपने आप् कों नहि बदल सकते तौ भले हि तुम् निशा कों ढूँडलो, मगर वोँ तुम्हारे पासकभी नहि आऐगी।
इतना बोलकर निशा खामोश हौ गई, निशा केँ खामोश होते हि अज्जू नें कहा
अज्जू- थैंक्स मिस जोया जोँ तुमने मुझे मेरी गलतियों कां एहसास करवाया औऱ निशा कों अपनी जीवन मे बापिस लाने कां मार्ग दिखाया। अब मे समझ चुका हूं कि मुझे क्याँ करना हैं। मे तुमसे वादा करता हूं कि मे अपने आपको पूरीतरह सें बदल लूँगा… जैसा निशा चाहती थि, मे बिल्कुल बैसा बनकर दिखाऊँगा। मगर मे निशा कों ढूंडने कि कोशिश कभीबंद नहि कर सकता…। निशा मेरीजान हैं, उसके बिना मे अधूरा हूं औऱ अब मुझसे ये अधूरापन बरदास्त नहि हौ रहा हैं। अगर निशा कि तलाश मे मुझे पाताल तक भि जानां पडे, तोँ मे जाऊंगा… पऱ उसे अपनी जीवन मे हरहाल मे बापिस लाकर हि रहूँगा।
इतना बोलकर अज्जू निशा केँ दफ़्तर सें बाहर् निकल गय़ा। अज्जू केँ वहा सें जाते हि निशा अपने असलीरूप मे आँ गई औऱ वहीं पर्र घुटनों केँ बल बैठकर धीरे-धीरे सें बुदबुदाई
“बेबकूफ इंशान…। मे तौ हमेशा सें तुम्हारे हि संग हूं, मगर तुम् हि मुझे पहचान नहि पाऐ। ”
इतना बोलकर निशा अपनी आँखों मे झलकआऐ आँशुओं कों पौंछा औऱ दोबारा सें बुदबुदाई
“आखिर तुम् मुझेभूल क्यूं नहि जाते अज्जू…। अब हमारा एक् संग होना संभव नहि हैं…। प्लीज मुझेभूल जाओ औऱ जिया केँ संग एक् खुशहाल जीवन बिताओ… तुम् नहि जानते कि तुम्हें इसहाल मे देखकर मुझे कितना दुख होता हैं। पहले मामाजी जी औऱ जिया नें मुझेउस गलती कि सजा दि, जोँ मैंने कभी कि हि नहि थि, उसकेबाद तुमने भि मुझे अपनी जीवन सें निकाल दिया, यहा तक कि हमारे सब अपनों नें भि मुझेऐसे भुला दिया, जैसे मे कभी थि हि नहि, औऱ अबजब मे तुम् सबसेदूर होँ गई हूं, तब भि तुम् मुझेबार बारये एहसास करवारहे होँ कि तुम्हारी इस हालत कि जिम्मेदार मे हूं। क्यूं अज्जू क्यूं… आखिर तुम् अब मुझेकिस गलती कि सजादे रहे हौ….”
इतना बोलकर निशा अपने दोनों हाथों सें अपने चेहरे कों ढंककर रोनेलगी। तभी अचानक सें दफ़्तर कां दरवाजा खुला औऱ इकराम अंदरआते हुए बोला
इकराम- इसतरह अपने आप् कों दुख देने सें बेहतर हैं कि आप् एक् बार अपने असलीरूप मे जीजाजी सें मिलकर बातकर लें। मुझे पूरा यकीन हैं कि एक् बारजब आप् अपनेदिल कि पूरी भडास उनकेऊपर निकाल लेंगी, तोँ उसकेबाद सभीकुछ पहले कि तरहठीक हौ जाऐगा औऱ आपके अंदर कां दर्द हमेशा हमेशा केँ लिए ख़त्म हौ जाऐगा।
इकराम कि बात सुनकर निशा जल्द सें अपने आँशू पौंछते हुए उठकरखडी हौ गई, औऱ इकराम सें बोलीं
निशा- नहि मे ऐसा नहि कर सकती….सच कहूँ तौ मे चाहती हि नहि हूं कि मेरेदिल कां दर्दकभी समाप्त हौ…। मेरे अंदर कां ये दर्दहर लम्हा मुझेये एहसास करवाता रहता हैं कि मे नां तोँ कभी अच्छी बेहन, बेटी, भाभी याँ साथीबन पाई औऱ नाँ हि अच्छी बीबी। जिस कारण मे हमेशा अपने अंदर सुधार करने कि कोशिश करती रहती हूं। ताकि मे कभी तोँ एक् अच्छी इंशान बन पाऊँ….
इकराम- औऱ कितना परफेक्ट बनोगी जोया अप्पी… आप् पहले सें हि दुनिया कि सबसे अच्छी इँशान होँ औऱ सबसे अच्छी बेहन भि…। इसलिये खबरदार जोँ आज केँ बाद आपनेकभी येकहा कि आप् अच्छी बेहन नहि होँ…। बर्ना मे पक्का आपसे नाराज हौ जाऊंगा।
इकराम कि बात सुनकर निशा एक् फीकी सि मुस्कान केँ संग बोलि
निशा- अच्छा ठीक हैं बाबाआज केँ बाद नहि कहूँगी…। अब अपना मूँहमत सडा मेरे सामने…। औऱ बतायहा क्यूं आया हैं
निशा कि बात सुनकर इकराम कों यादआया कि वोँ यहा क्यूं आया थां। इसलिये वोँ अपनेसिर पर्र हाथ मारते हुए बोला
इकराम- ओह सॉरी सॉरी मे तोँ भूल हि गय़ा थां…। वोँ क्याँ हैं कि अभि कुछदेर पहले हिना नें अपनेघऱ पर्र फोन करकेबात कि थि औऱ अपने अब्बू कों हमारे उनकेघऱ जाकर सगाई केँ बारे मे बात करने केँ बारे मे बताया थां। इसलिये हिना केँ अब्बू नें हमेंआज साम कों हि अपनेघऱ पर्र डिनर केँ लिए इन्वाईट किया हैं। इस दौरान सगाई कि बात भि उनसे होँ जाऐगी।
इकराम कि बात सुनकर निशा नें कुछदेर सोचा औऱ फिन बोलि
निशा-ठीक हैं हिना सें बोलदो कि हम् लोगआज साम कों उनकेघऱ पऱ आँ जाऐंगे औऱ हाँ अपने जीजाजी कों भि बता देना कि आजसाम कों हमें हिना केँ घऱ डिनर पर्र जानां हैं।
निशा कि बात सुनकर इकराम कन्फ्यूज होतेहुए बोला
इकराम- पर्र जीजाजी कों क्यूं
निशा- क्योंकि मैंने उन्हें तुम्हारे औऱ हिना केँ बारे मे सभीकुछ बता दिया हैं।
इकराम- पऱ क्यूं
निशा- क्योंकि मे चाहती हूं कि वोँ तुम्हारी शॉपिंग सें लेकर सगाई तक केँ सारे कामों मे मेरी सहायता करें। बैसे भि तुम् उनके साले हौ…। तुम्हारे लिए तौ उन्हें इतना करना हि पडेगा।
इकराम- हाँ वोँ तोँ ठीक हैं… पर्र उन्हें तौ पता हि नहि कि मे उनका साला हूं। फिनभला वोँ आपकी सहायता क्यूं करनेलगे औऱ मेरेसंग शॉपिंग पर्र भला क्यूं जानेलगे।
निशा- अपनी बीबी केँ रूप मे नाँ सही, कम सें कम मित्र केँ रूप मे तौ वोँ मेरी सहायता करेंगे हि नां। खैरबो सभी तुम् मुझपर छोडदो… मे तुम्हारे जीजाजी कों अपने हिसाब सें हैंडिल कर लूँगी। बैसे भि उन्हें लाईन पऱ केसे लाना हैं, इसका मुझे बचपन सें एक्सपीरियंस हैं। इसलिये मैंने तुझसे जोँ कहा हैं, तूँ बस वोँ कर।
निशा कि बात सुनकर इकराम मुस्कुराते हुए बोला
इकराम- ठीक हैं अप्पी जैसा आप् कहें…
इतना बोलकर इकराम निशा केँ दफ़्तर सें बाहर् निकल गय़ा। इकराम केँ जाने केँ बाद निशा अपने दूसरे कामों मे बिजी होँ गई। चूँकि आजसाम कों निशा, इकराम औऱ अज्जू हिना केँ घऱ डिनर पऱ जाने बाले थें, इसलिये हिनाआज जल्द अपनेघऱ चली गई थि। वहीँ दूसरी तरफ अज्जू भि अपनाकाम जल्द समाप्त करकेरॉ हेटक्वाटर सें निकल गय़ा थां। असल मे आज सुभह जोया यानि निशा सें हुई बातों केँ बाद अज्जू नें मन हि मन अपनी गलतियों कों सुधारने कां फैसला कर लिया थां औऱ उन्हीं गलतियों कों ठीक करने केँ लिए जरूरी थां कि वोँ अपने बिजिनेश पऱ फिन सें ध्यान दे। इसलिये रॉ हैडक्वाटर कां अपनाकाम पूरा करके अज्जू अपनी फार्मेशी कम्पनी केँ इंस्पेक्शन केँ लिएचला गय़ा।
बैसे भि रॉ मे उसकेलिए फिलहाल कोई मिशन नहि थां। उसेबस कुछदेर रॉ आफिस मे आकर दूसरे ऐजेंट्स द्वारा किएजा रहे मिशन कां भाग लेकर एजेंट जीरो यानि जोया कों देना होता थां। जिसमें उसे अधिक टाइम नहि लगता थां। इसके अलावा वोँ कभी कभाररॉ केँ रिसर्च सेंटर मे चलरहे रिसर्च मे भि अपने साथियों कि थोडी बहोत सहायता कर दिया करता थां। ये सारेकाम दोपहर 12 बजे तक पूरे होँ जाते थें, जिसके बाद अज्जू केँ पास अपने स्वयं केँ बिजिनेश पर्र ध्यान देने औऱ अपने परिवार पर्र ध्यान देने कां अच्छा खासा टाइम थां। जिसका अब अज्जू सदुपयोग करना चाहता थां।
हाँलाकि आजसाम कों उसे जोया औऱ इकराम केँ संग हिना केँ घऱ डिनर पर्र जानां थां। मगरतब तक उसकेपास अपनी फार्मेशी कम्पनी कां इंस्पेक्शन करने कां पर्याप्त वक़्त थां। जब अज्जू अपनी फार्मेशी कम्पनी केँ दफ़्तर मे पहुँचा तोँ उसे देखकर वहा कां सारा स्टॉफ हैरान रह गय़ा, क्योंकि पिछले तीन सालों सें उन लोगों नें अज्जू कों बहाँ पऱ नहि देखा थां। एक् बारफिन अज्जू कों कम्पनी मे देखकर वोँ लोग बहुतखुश थें, संग हि संग पूरीतरह सें सतर्क होकर अपनाकाम भि करनेलगे थें। दफ़्तर पहुँचकर अज्जू कों पताचला कि मीटिंग हॉल मे आजवहा पऱ कोई अर्जेट मीटिंग चलरही हैं। इसलिये अज्जू अपने केबिन मे जाने केँ जगह पर्र सीधा मीटिंग हॉल कि तरफबड गय़ा।
जैसे हि वोँ मीटिंग हॉल केँ अंदर पहुंचा तौ वहा कां नजारा देखकर वोँ हैरान रह गय़ा। क्योंकि मीटिंग हॉल मे उसकेसब बिजिनेश हैड बैठेहुए थें। जिनमें रीनू जौ उसका न्यूज चैनल हैंडिल करती हैं, रघू जौ उसकी सिक्योरिटी कंपनी हैंडिल करता हैं, रवि भइया जौ हॉस्पीटल केँ हैड हें, कबीर मेहता जोँ उसके कॉलेज केँ प्रिंसिपल हें, वरूण जोँ उसकी फार्मेशी कम्पनी संभालता हैं औऱ जिया उसकी पत्नी औऱ एन.जी.ओ। कि प्रेसिडेंट हैं सामिल थें। अज्जू उनसब लोगों कों एक् संगवहा देखकर जितना हैरान थां, उतना हि वोँ लोग भि अज्जू कों वहा देखकर हैरान औऱ खुश थें।
अज्जू नें ध्यान दिया कि उस मीटिंग हॉल मे बडी सि टेविल केँ आमने सामने कुल 8 चेयरलगी हुईं हैं। जिनमें सें 6 चेयर पऱ वोँ लोग पहले सें हि बैठेहुए हें, मगर 2 चेयरअब भि खाली हूं, उन खाली चेयर केँ सामने टेबिल पऱ उनकीनेम प्लेट भि रखी हुईँ थि, जिनपर अज्जू औऱ निशा केँ नाम लिखेहुऐ थें। जिसे देखकर अज्जू चुपचाप अपने नेमप्लेट बाली चेयर पऱ जाकरबैठ गय़ा औऱ सबको सबालिया नजरों सें देखने लगा। कुछ देर कि खामोशी केँ बाद आखिरकार बरूण नें कहा
वरूण-गुड आफ्टरनून सर… हमें नहि पता थां कि आज आप् भि यहाआने बाले हें, बर्ना हम् लोगये मीटिंग किसी औऱ दिनरख लेते…
बरूण कि बात सुनकर अज्जू नें मुस्कुराते हुएकहा
अज्जू- मुझे तौ स्वयं भि नहि पता थां कि मे यहा आऊँगा… फिनभला तुम् लोगों कों केसेपता होता। खैर ये तौ अच्छी बात हैं कि तुम् सब एक् संग मुझे यहीँ पर्र मिलगए। अब मुझेअलग अलग स्थान जाकर तुम् लोगों सें मिलना नहि पडेगा। तुम् लोग चाहो तोँ अपनी मीटिंग कंटीन्यू कर सकते हौ। मे तुम् लोगों सें मीटिंग केँ बादबात कर लूँगा। बैसेये मीटिंग किस सिलसिले मे चलरही हैं।
अज्जू कि बात सुनकर उस मीटिंग हॉल मे सन्नाट छा गय़ा औऱ सबलोग एक् दूसरे कां चेहरा देखने लगे।
किस्सा जारी हैं.
Meri Jung (Restart) – New Episode
एपसोड 139 -
जब अज्जू केँ सबाल पऱ बहुतदेर तक किसी नें कुछ भि नहि कहा तौ आखिरकार रीनू स्थिती कों संभालते हुए बोलीं
रीनू- वोँ भइयाअसल मे हम् लोगहर महिने ये मीटिंग करते हें औऱ अपने अपने कामों कां हिसाब पुस्तक एक् दूसरे केँ सामने रखते हें, संग हि संग अपनेकाम मे आँ रही प्राब्लम्स कों भि एक् दूसरे केँ संग डिस्कस करते हें औऱ अगर हमें बिजिनेश रिलेटेड कोई डिसीजन लेना होँ हम् सबलोग वोटिंग करके इसका फैसला कर लेते हें। चूँकि आपने पिछले 3 सालों सें अपने किसी भि बिजिनेश पऱ कोई ध्यान हि नहि दिया हैं। ऐसे मे आपके डिसीजन औऱ सिग्नेचर केँ बिनाकोई काम नां रुके, बस इसकेलिए हि ये मीटिंग कि जाती हैं।
रीनू कि बात सुनकर अज्जू मुस्कुराते हुए बोला
अज्जू- हुम्म तोँ पिछले तीन सालों सें तुम् लोगइसी तरह सारा बिजिनेश हैंडिल कररहे हौ।
वरूण-हाँ सर…मगर हम् बस आपकेलिए गए पुराने डिसीजन केँ हिसाब सें हि अपना बिजिनेश चलारहे हें, मगर बिजिनेश बढाने याँ उसमें कुछ बदलाव करने कि नां तौ हमारे अंदर काबिलियत हैं औऱ नां हि पावर। इसीलिए तीनसाल पहले आपने अपनेसब बिजिनेश कों जिसहाल मे छोडा थां, वोँ सबअब भि उसी स्थिती मे हैं। मगरअब मार्केट मे कप कॉफ़ी ज़्यादा काम्पीशन हौ गय़ा हैं। हमें जल्द सें जल्द अपने बिजिनेश मे कई सारे बदलाव करने कि जरूरत हैं।
अज्जू- तुम् लोग इतने काम्पटीशन केँ बाबजूद अब तक मेरे बिजिनेश कों संभालकर रखने मे कामयाब रहे, ये भि कोईकम काबिलियत बालीबात नहि हैं। मुझे तोँ ऐसालग रहा थां जैसेअब तक सभीकुछ समाप्त होँ गय़ा होगा। मगर तुम् लोगों नें अपनी समझदारी, वफादारी औऱ मेहनत केँ बल पऱ मेरे बिजिनेश कों अब तक संभालकर रखा हैं। इसकेलिए मे तुम् लोगों कों जितनी बार भि शुक्रिया दूँ, उतनाकम हैं।
वरूण-सर आपने हम् लोगों पर्र जोँ इतना भरोसा किया हैं… उसकेआगे तोँ येकुछ भि नहि हैं। पऱ हम् लोग आपकी तारीफ केँ हकदार नहि हैं। क्योंकि हम् सब सीनियर्स कां एक् संग मीटिंग करके बिजिनेश कों हैण्डिल करने बाला आईडिया असल मे हमारा नहि हैं।
वरूण कि बात सुनकर अज्जू पूरीतरह सें हैरान होतेहुए बोला
अज्जू- तोँ फिनये आईडिया आखिर हैं किसका…….
रीनू- भइयाअसल मे भाभी नें हम् सब सें दूर जाने सें पहले हि ये सारा इंतजाम कर दिया थां। ताकिअगर कभीऐसी सिचुऐशन आऐजब आप् औऱ भाभी लम्बे टाइम तक बिजिनेश पऱ ध्यान नाँ देपाओ, तोँ बिजिनेश सें रिलेटेड कोई भि काम नां रुके। अगर भाभी फ्यूचर कों ध्यान मे रखतेहुऐ पहले हि ये इंतजाम नहि करतीं, तौ शायदआज आपके सारे बिजिनेश पूरीतरह सें बर्बाद हौ चुके होते।
रीनू कि बात सुनकर अज्जू कों सुभह जोया सें हुइ बातें याद आँ गईं, जब मिस जोया नें उससेकहा थां कि
“वोँ तौ अच्छा हैं कि निशा नें तुमसे दूर जाने सें पहले हि बिजिनेश कों मैनेज करने केँ सारे इंतजाम करदिए थें, वर्ना तुम्हारे ऐसब बिजिनेश कब केँ बंद होँ गए होते। ”
ये सभीयाद आते हि अज्जू केँ चेहरे पऱ मुस्कान आँ गई औऱ वोँ बोला
अज्जू- सि इजडैम गुड….जब तक संग थि तब तक मेराहल लम्हा संग दिया औऱ जाने केँ बाद भि वोँ मेरासंग देरही हैं। मगरअब मुझेऐसा लगनेलगा हैं कि उसने मुझसे दूर जाकर अच्छा हि किया… क्योंकि मे कभी उसके लायक थां हि नहि.
अज्जू- कि बात सुनकर जियाउसे समझाते हुए बोलि
जिया- आपकोइस सबकेलिए अपने आप् कों दोषी मानने कि जरूरत नहि हैं… हम् सब निशा दिदी केँ दोषी हें। रहीबात काबीलियत कि तौ अगर आप् उनके काबिल नहि होँ, तौ इस दुनिया मे कोई भि उनके काबिल नहि हौ सकता। बैसे भि आपकोअब इस बारे मे अधिक सोचने कि जरूरत नहि हैं, क्योंकि हम् लोग जल्द हि निशा दि कों ढूंड लेंगे।
जिया कि बात सुनकर अज्जू पूरे कांफिडेंश केँ संग बोला
अज्जू- हुम्म मे जानता हूं कि हम् उसे जरूर ढूंड लेंगे, मगर उससे पहले मुझेअब निशा केँ काबिल बनना होगा। मैंने अब तक जौ भि गलतियाँ कीं हें, उन्हें मे सुधारना चाहता हूं, इसलिये आज सें औऱ अभि सें मे सब बिजिनेश कों टेकओवर कररहा हूं। आज सें तुम् लोग बिजिनेश सें रिलेटेड हर एक् छोटीबडी बात मुझसे शेयर करोगे।
अज्जू कां ये बदलाहुआ रूप औऱ उसके अंदर कां कांफिडेंश देखकर वहा मौजूद हर एक् इंशान हैरान थां, मगर वोँ सबलोग दिल हि दिल मे खुश भि थें कि प्राचीन बाला अज्जू अब बापिस आँ गय़ा हैं। कुछदेर कि खामोशी केँ बाद अज्जू नें फिन सें कहा
अज्जू- तौ क्याँ अब हम् मीटिंग शुरुआत करें….
अज्जू कि बात सुनकर सबलोग अपने होशोहवास मे बापिस लौटआऐ, उसकेबाद वोँ सबलोग अज्जू केँ सामने अपनी अपनी प्राब्लम्स डिस्कस करनेलगे। वोँ मिटिंग अज्जू कि उम्मीद सें कुछ अधिक हि लम्बी खिंच गई थि, मीटिंग समाप्त होते होतेसाम केँ लगभग 5 बजगए थें, इसलिये मीटिंग केँ जल्दी बाद अज्जू जिया औऱ रीनू केँ संग अपनेघऱ बापिस लौटआया। अभि वोँ हिना केँ घऱ जाने केँ लिए सजधजकर हि होँ रहा थां, कि तभी उसका मोबाईल रिंग करनेलगा। अज्जू नें जब मोबाईल स्क्रीन कों चैक किया तौ उसपर प्राईवेट नम्बर लिखाहुआ आँ रहा थां। जिसे देखकर अज्जू नें जल्दी कॉलआई रिसीव करली। फोन रिसीव होते हि दूसरे तरफ सें निशा कि आवाज़ सुनाई दि
निशा- मिस्टर अजय कहां हें आप्… कहीं आप् भूल तौ नहि गए कि आज हमें हिना केँ घऱ डिनर पर्र चलना हैं।
अज्जू- अरे नहि मुझेयाद हैं। मे तौ बस अपनेघऱ पर्र फ्रेस होन केँ लिएआया थां, बस 10 मिनट मे दफ़्तर पहुँच जाऊंगा
निशा- उसकी जरूरत नहि हैं… हम् आपकी कॉलोनी केँ आसपास हि हैं, इसलिये 10 मिनटबाद हम् आपकेघऱ केँ बाहर् सें हि आपको रिसीव कर लेंगे।
अज्जू- हाँये ठीक रहेगा।
इतना बोलकर अज्जू नें कॉलआई डिस्कनेक्ट कर दि। फोन डिसकनेक्ट होते हि जियाउसे सबालिया नजरों सें देखने लगी तोँ अज्जू नें उससेकहा
अज्जू- जियाआज मुझे अपने किसी साथी केँ संग एक् जरूरी मिटिंग अटैंड करने जानां हैं औऱ हौ सकता हैं कि मुझेघऱ बापिस आने मे टाइमलगे। इसलिये तुम् लोग खाने पऱ मेरा प्रतीक्षा मत करना, बैसे भि खानां मे बाहर् सें खाकर आऊँगा।
इतना बोलकर अज्जू जल्द जल्द सजधजकर होकरघऱ सें निकल गय़ा। जहाँ पहले सें हि निशा औऱ इकराम अपनी गाड़ी सें उसकेआने कां प्रतीक्षा कररहे थें। जैसे हि अज्जू गाड़ी केँ पास पहुंचा तोँ उसने देखा कि निशा पहले सें हि ड्राईविंग सीट पर्र बैठी हुइ हैं, जबकि इकराम उसकेबगल मे बैठाहुआ निशा सें कुछ डिस्कस कररहा हैं। मगर जैसे हि उनकीनजर अज्जू पऱ पडी तोँ इकराम चुपचाप दरवाजा खोलकर बाहर् निकलआया औऱ पिछली सीट पर्र जाकरबैठ गय़ा। जिसके बाद अज्जू भि बिना किसी रिऐक्शन केँ इकराम कि स्थान ड्राईवर कि बल बालीसीट पऱ बैठ गय़ा।
आज निशा नें डार्क यलोकलर कि कुर्ती औऱ रेडकलर कि सलवार पहनी हुईँ थि, संग मे उसनेरेड कलर कि चुन्नी भि डालरखी थि। इसकेसंग हि निशा नें हल्का फुल्का मेकअप भि कियाहुआ थां। जिस कारणआज वोँ कुछ ज़्यादा हि हसीनलग रही थि। जोया कों पहलीबार इसरूप मे देखकर अज्जू नां चाहते हुए भि अपनी नजरें जोया केँ ऊपर सें हटा नहि पारहा थां। आखिरकार कुछदेर कि खामोशी केँ बाद निशा नें उसे टोकते हुएकहा
निशा- मिस्टर अजयअगर आपका मुझे घूरना होँ गय़ा हौ तोँ क्याँ अब हम् चलें
निशा कि बात सुनकर अज्जू बुरीतरह सें झेंप गय़ा औऱ नजरें चुराते हुए बोला
अज्जू- हाँहाँ क्यूं नहि….
इसकेबाद वाहन मे एक् लम्बी खामोशी छा गई औऱ निशा नें गाड़ी हिना केँ घऱ कि तरफबडा दि। हिना केँ परिवार मे उसके अब्बू सलीमखान, अम्मी शवाना बेगम, औऱ उसका छोटाबाई अनीशखान हें। हिना केँ अब्बू एक् जाने माने लॉयर हें औऱ उसका भइया अनीश भि अपने पिता केँ नक्शे कदम पऱ चलतेहुए लॉ कि स्टडी कररहा हैं। ताकिआगे चलकर वोँ अपने पिता कि विरासत संभाल सके। जबकि हिना कि मम्मी एक् नॉर्मल हाऊस बाईफ हैं। जैसे हि वोँ तीनोें हिना केँ घऱ पर्र पहुँचे तोँ हिना केँ परिवार नें उन तीनोें कां बडे गर्मजोशी सें स्वागत किया।
घऱ केँ अंदरआने केँ बाद हिना नें सब लोगों कां एक् दूसरे सें परिचय करवाया। इसी दौरान हिना कि अम्मी औऱ भइया नें सब लोगों केँ लिएगरम चाय ब्रेकफास्ट भि लगा दिया थां। गरमचाय ब्रेकफास्ट केँ दौरान निशा नें हिना औऱ इकराम कि सगाई कि बात हिना केँ अब्बू अम्मी सें कही। जिसके लिए वोँ लोग खुशी खुशी रेडी हौ गए। थोडे बहोत डिस्कस केँ बादउसी महिने कि 20 तारीख दोनों कि सगाई केँ लिए फाईनल हौ गई। चूँकि आज 2 तारीख थि तौ अब हिना औऱ इकराम कि सगाई मे बस 18 दिन हि बचे थें। जिसमें उन्हें कई सारी तैयारियाँ करनी थि।
अब चूँकी जिसकाम केँ लिए निशा, इकराम औऱ अज्जू वहांआऐ थें, वोँ पूरा होँ चुका थां, इसलिये सबलोग पूरीतरह सें रिलेक्स होकरआपस मे इधरउधर कि बातें करनेलगे। कुछदेर यूँ हि इधरउधर कि बातें औऱ हंसी मजाक करने केँ बादसब लोगों नें एक् संग डिनर किया औऱ फिन अज्जू, इकराम औऱ निशा नें हिना केँ घऱ बालों सें बिदाली। अगलेदिन सें हि बोलोग सगाई कि तैयारियों मे जुटगए। देखते हि देखते कब 10 दिनबीत गएपता हि नहि चला। एक् दिनजब अज्जू सुभह सुभह सबकेसंग ब्रेकफास्ट कररहा थां, तभी मां नें उससे सबाल किया
मम्मी- अरे अज्जू आजकल तुँ कुछ अधिक हि बिजी रहनेलगा हैं
मां कि बात सुनकर रीनू जल्दी बोलीं
रीनू-अरे मां आज-कल भइयाफिन सें अपने बिजिनेश पऱ ध्यान देनेलगे हें, शायद इसीलिए वोँ थोडा बिजी रहते हें।
मम्मी- अरेये तौ अच्छी बात हैं… मगर मे पिछले कुछ दिनों सें देखरही हूं कि एक् अनजान गाड़ी अक्सर हमारे घऱ केँ बाहर् आती हैं, जिसमें बैठकर अज्जू पता नहि कहां जाता हैं औऱ फिनवही गाड़ी रात कों अज्जू कों ड्राप करने भि आती हैं।
मां कि बात सुनकर अज्जू लापरवाही सें बोला
अज्जू- अरे माँ वोँ मेरे साथी कि वाहन हैं…। बसउसी केँ संग मे कुछ जरूरी काम सें जाता हूं।
तभी मोनूउसे बीच मे टोकते हुए बोला
मोनू-अरे भई तुम्हारा ऐसाकौन सां नया मित्र पैदा होँ गय़ा, जिसे मे नहि जानता।
अज्जू- मैंने ऐसाकब कहा कि तूँ उसे नहि जानता….
मोनू-अरे मेरे भइया पहले उसकानाम तोँ बता… आखिर मुझे भि पताचले कि हमारा कौन सां मित्र आजकल तुम् पर्र इतना मेहरवान हैं, जौ तुम्हें रोज हमारे घऱ सें अपनी गाड़ी मे बैठाकर लेँ जाता हैं औऱ रात मे ड्राप करने भि आता हैं।
अज्जू- जोया….
जोया कां नाम सुनते हि मोनू बुरीतरह सें चौंक गय़ा थां, उसे यकीन हि नहि हौ रहा थां कि रॉ कि डिप्युटी चीप औऱ उसकीबॉस आजकल अज्जू कों अपनेसंग कहीं पऱ लें जाती हैं, औऱ घऱ पऱ भि ड्राप करनेआती हैं। इसलिये अज्जू कि बात सुनकर मोनू केँ गले मे अचानक सें खाने कां निवाला फंस गय़ा औऱ वोँ जोरजोर सें खांसने लगा। मोनू कि ऐसी हालत देखकर मम्मी नें उससे पूछा
मां- अब तुम्हे क्याँ हुआ… तूँ क्यूं इतनी जल्द जल्द खानां खारहा हैं कि निवाला हि गले मे रुक गय़ा।
दिव्या औऱ अंकल पहले सें हि जानते थें कि पिछले कुछ दिनों सें निशा जोया बनकर अज्जू कों अपनेसंग लें जाती हैं। इसलिये मोनू कि ऐसी हालत देखकर उनकी हंसीछूट गई थि, मगर जल्द हि उन दोनों नें अपने आपको संभाल लिया। जिसके बाद दिव्या नें मोनू कि तरफ पानी कां गिलास बडा दिया, ताकि मोनू पानी पीकर अपनेगले मे फंसा निवाला साफकर सके। वहीं दूसरी तरफ मम्मी कि बात सुनकर अज्जू भि मोनू कां मजाक उडाते हुए बोला
अज्जू- वोँ इसलिये मम्मी क्योंकि मोनू पहले सें हि मिस जोया कों अच्छी तरह सें जानता हैं औऱ मेरी हि तरहमिस जोया मोनू कि भि मित्र हैं। क्यूं मोनू मे सहीकह रहा हूं नाँ.
अज्जू कि बात सुनकर मोनू नें जल्द जल्द पानी पीकर अपनागला साफ किया औऱ बोला
मोनू-हाँ हाँ मम्मी अज्जू सहीकह रहा हैं। मे भि मिस जोया कों अच्छी तरह सें जानता हूं।
मां- तोँ फिन तुम्हारी ऐमिस जोया मात्र अज्जू कों हि अपनेसंग क्यूं लें जाती हैं। तुम्हें क्यूं नहि.
मोनू-अरे मम्मी आज आपको आखिर होँ क्याँ गय़ा हैं… आप् क्यूं बेबजह फालतू केँ सबालकर रही होँ।
मोनू कि बात सुनकर अंकलआग मे घी कां काम करतेहुए बोले
अंकल- पऱ मोनू बेटा तेरी मम्मी कुछगलत भि तोँ नहि कररही हैं
तभी दिव्या भि उनकी बातों मे शामिल होतेहुए बोलि
दिव्या- हाँहाँ मम्मी सहीबोल रही हें…। औऱ बैसे भि अगरमिस जोया आप् दोनों कि इतनी अच्छी यार हें तौ आप् लोगों नें अब तक उन्हें हमसे क्यूं नहि मिलवाया।
उन लोगों कि बात सुनकर अज्जू कों लगा कि अबअगर उसने सबकोसच नहि बताया तोँ बात कां बतंगड बन जाऐगा। इसलिये वोँ बोला
अज्जू- अरेकोई बात नहि मोनू…अगर मम्मी केँ मन मे कोई डाऊट हैं तोँ उसे क्लीयर करना जरूरी हैं।
इतना बोलकर अज्जू मां कों देखते हुए बोला
अज्जू- मम्मी बात दरअसल ये हैं कि मिस जोया केँ छोटे भइया इकराम कि शादि फिक्स होँ गई हैं। इसी महिने कि 20 तारीख कों उसकी सगाई हैं। चूँकि मिस जोया केँ यहा पर्र अधिक साथी नहि हैं औऱ नाँ हि कोई फैमली मेंबर हैं। इसलिये मे बस उनकी हेल्प कररहा हूं।
अज्जू कि बात सुनकर मोनू एक् बारफिन हैरान होतेहुए बोला
मोनू- क्याँ…। क्याँ बातकर रहा हैं तूँ… इकराम कि सगाई हैं…। कब औऱ किस्से औऱ उस नालायक नें अब तक मुझेइस बारे मे बताया क्यूं नहि….
अज्जू- अबे अभि अभि तोँ बताया कि इसी महिने कि 20 तारीख कों उसकी सगाई हैं…। रहीबात किससे तोँ नैचुरली वोँ एक् लडकी हि होगी मेरे भइया….
मोनू-अरे मेरे भइया मे समझ गय़ा… पर्र किस लडकी सें उसकी सगाई हैं औऱ सबसेबडी बात कि इकराम नें याँ फिनमिस जोया नें मुझे क्यूं नहि बताया….
अज्जू- वोँ इसलिये मेरे भइया क्योंकि तेरा इन्विटेशन लडकी बालों कि तरफ सें आनां हैं। तौ तूँ प्रतीक्षा कर कि इकराम कि होने बाली मंगेतर कब तेरी अपनी सगाई केँ बारे मे बताती हैं। बाईदवे मोनू कों छोडकर मिस जोया नें हमारी पूरी फैमली कों अपने भइया कि इंगेज्मेंट मे इनवाईट किया हैं। उसीदिन मे आप् सब कों मिस जोया सें मिलवा दूँगा।
अब चूँकि मम्मी औऱ बाकी लोगों केँ सारे डाऊट एक् संग क्लीयर होँ गए थें, इसलिये वोँ लोग चुपचाप अपना ब्रेकफास्ट करनेलगे, मगर मोनू केँ दिमाग़ मे तौ इस वक़्त तूफान मचाहुआ थां। जिस कारण वोँ अज्जू कों परेशान करतेहुए बोला
मोनू- अज्जू मेरे भइयाबता नां इकराम कि मंगेतर कौन हैं…। अगर उसने मुझे नहि बुलाया याँ फिन वोँ मुझे बुलाना भूल गई तोँ… नहि नहि मेरे भइया मे उसदिन घऱ पर्र अकेले क्याँ करूँगा….
मोनू कि ऐसी हालत देखकर अज्जू उसकेमजे लेतेहुए बोला
अज्जू- अरे भइया तुँ इतना परेशान क्यूं होँ रहा हैं…। मेरा यकीनकर वोँ लडकी तुम को जरूर इन्वाईट करेगी… आखिर वोँ तेरे हि डिपार्टमेंट सें हैं….
मोनू-अरे मेरे भइया क्यूं सस्पेंस बडारहा हैं…। तेरेइस सस्पेंस केँ चक्कर मे मुझसे ब्रेकफास्ट भि नहि कियाजा रहा हैं।
मोनू कि बात सुनकर अज्जू हंसते हुए बोला
अज्जू- तुँ अब तक नहि समझा… मुझे तौ लगा थां कि तुँ समझ गय़ा होगा….अरे मेरे भइयाउस लडकी कां नाम हिना हैं….
अज्जू कि बात सुनकर मोनू एक् बारफिन हैरान होतेहुए बोला
मोनू- हिना…। तूँ अपनी हिना मतलब आई.पी.एस। हिनाखान कि बातकर रहा हैं….
अज्जू- हाँ मेरे भइया मे उसी कि बातकर रहा हूं….
मोनू- पर्र उन दोनों केँ बीचऐकब हुआ…। औऱ मुझेइस बारे मे अब तक पता क्यूं नहि चला।
अज्जू- वोँ इसलिये क्योंकि आज-कल तेरामन घास चरने गय़ा हुआ हैं…। अब तोँ मुझेतुझ पर्र डाऊट होनेलगा हैं कि तूँ सच मे एक् आई.पी.एस। ऑफिसर हैं भि याँ नहि…। कहीँ तुँ पुलिस कि जॉब छोडकर कोई दूसरा काम तोँ नहि करनेलगा हैं….
अज्जू कि बात सुनकर मोनू बुरीतरह सें सकपका गय़ा… क्योंकि अज्जू नें उसकाराज सबके सामने करीबखोल हि दिया थां। मगरफिन जल्द हि वोँ संभलकर वोला
मोनू- ऐंबी…कुछ भि बकवास किएजा रहा हैं… मे शत प्रतिशत एक् ईमानदार आई.पी.एस। ऑफिसर हूं…। रहीबात इकराम औऱ हिना कि…। तोँ उन्हें तौ मे बाद मे सबक सिखाऊंगा। वोँ दोनों मुझे एक् शानदार बर्थडे पार्टी दिए बिनाबच नहि सकते।
अज्जू- मतलब तूँ घूस लेगाउन दोनों सें
मोनू-इसे घूस लेना नहि बोलते बच्चू, बल्कि पनिश्मेंट बोलते हें…। खैरछोड तेरीसमझ मे नहि आऐगा।
इतना बोलकर मोनू चुपचाप अपना ब्रेकफास्ट करने मे बिजी होँ गय़ा।
स्टोरी जारी हैं.
Meri Jung (Restart) – New Episode
एपसोड 140 -
ब्रेकफास्ट करने केँ बादसब लोग अपने अपनेकाम पर्र निकलगए। उसीदिन जब दिब्या दफ़्तर मे अपनाकाम कररही थि, तभी उसके कानों मे निशा कि आवाज़ सुनाई दि।
निशा- लगता हैं कि आज जेठानी जीकुछ ज़्यादा हि बिजी हें…। तभी तोँ मे इतनीदेर सें दरवाजे पऱ खडी हुईँ हूं औऱ जेठानी जी कों मेरीतरफ एक् नजर देखने कि भि फुर्सत नहि हैं।
निशा कि आवाज़ सुनते हि दिव्या कां चेहरा खुशी सें खिलउठा, वोँ जल्दी खडी हुई औऱ निशा केँ पास जाकरउसे अपनेगले सें लगाते हुए बोलि
दिव्या- थैंक्स गॉड निशा दि आप् बापिस आँ गई…। आपके बिना तौ यहा बिल्कुल भि अच्छा नहि लगता हैं। बैसे आप् इतने दिनों केँ लिए आखिर कहां गायब होँ गई थि।
इतना बोलकर जैसे हि दिव्या निशा सें अलग हुईँ तौ निशा मुस्कुराते हुए बोलि
निशा- लम्बी स्टोरी हैं जेठानी जी…। आहिस्ता बैठकर बातें करते हें……
निशा कि बात सुनकर दिब्या कों अपनी गलती कां एहसास हुआ औऱ वोँ अपनेसिर पऱ चपत लगाते हुए बोलीं
दिव्या- ओह सॉरी सॉरी दि…। आईऐ धीरे-धीरे बैठकर बातें करते हें
निशा- नहि यहा नहि… मेरे दफ़्तर मे बात करेंगे…। तुम् जल्द सें अपनाकाम समाप्त करलो, उसकेबाद हम् दोनों मेरे दफ़्तर मे चलकर तसल्ली सें बातें करेंगे।
दिव्या- अरे नहि…। मे इतनाकोई खास अर्जेंट काम भि नहि कररही थि।
निशा-मगर तुम् तोँ उस फाईल कों बडे ध्यान सें पढरही थि, इसलिये तुम्हें देखकर मुझेलगा कि शायद तुम् कोई जरूरी कामकर रही हौ।
दिव्या- अरे वोँ तोँ मे बस अपनी कम्पनी केँ एंटीवायरस एण्ड इंटरनेट सिक्योरिटी कों दूसरी कम्पनी केँ एंटीवायरस औऱ इंटरनेट सिक्योरिटी केँ संग कम्पेयर कररही थि। ताकि हम् अपने सॉफ्टवेयर मे जरूरी सुधार करके उसकी सैलिंग बडा सकें। पर्र उस फाईल कों पढने केँ बाद मे ये जानकर हैरान हूं कि हमारा सॉफ्टवेयर दूसरी कम्पनी केँ सॉफ्टवेयर सें कहीं ज़्यादा एडवांस औऱ पॉवरफुल होने केँ बाद भि सॉफ्टवेयर मार्केट मे हमारा शेयर एक् प्रतिशत भि नहि हैं।
दिव्या कि बात सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोलि
निशा- वोँ इसलिये क्योंकि दूसरी कम्पनी पहले सें हि बहुत अधिक पापुलर हैं। बैसे भि आम लोगों कि येआदत हैं कि वोँ बडेनाम औऱ ब्रांड केँ पीछे पीछे भागते हें, जबकि उनके प्रोडक्ट घटिया होते हें। खैरये कोईबडी बात नहि हैं…। तुम्हारे कम्पनी ज्वाईन करने सें पहले मे बहुत ज़्यादा बिजी रहती थि, इसलिये इनसभी बातों पऱ ध्यान देने केँ िलिए मेरेपास वक्त हि नहि थां।
दिव्या- मगरअब तौ मे आँ गई हूं… आपकाकुछ काम तौ कमहुआ हि होगा, तोँ अब आप् इसकेलिए कुछ कीजिऐ नां।
दिव्या कि बात सुनकर निशा उसकी आँखों मे झांकते हुए बोलीं
निशा- तौ तुम् चाहती हौ कि हमारी कम्पनी केँ एंटीवायरस औऱ इंटरनेट सिक्योरिटी कि सैलिंग बडजाऐ…। बसयही नां….
दिव्या- हाँ निशा दि मे यही चाहती हूं….
निशा- लगता हैं कि अब तोँ मुझेकुछ करना हि होगा, बैसे भि मेरी जेठानी जी मुझसे कोई डिमांड करे औऱ मे पूरा नाँ करूँ, ये तोँ होँ हि नहि सकता। अब बस तुम् देखती जाओ एक् महिने केँ अंदर एंटीबायरस एण्ड इंटरनेट सिक्योरिटी केँ 15 सें 20 प्रतिशत मार्केट पऱ हमारा कब्जा होगा।
निशा कि बात सुनकर दिव्या एक्साईटेड होतेहुए बोलीं
दिव्या- क्याँ सच मे निशा दि ऐसा होँ सकता हैं…… पर्र केसे…… एक् महिने मे इतनासभी कुछ आखिर केसे पॉसिवल हैं…
दिव्या कि बात सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोलीं
निशा- तुम् बस देखती जाओ….अब छोडो भि ऐ बिजिनेश कि बातें… येकाम तौ बाद मे भि होता रहेगा। सबसे पहले हम् मेरे दफ़्तर मे चलकर एक् गर्मागर्म कप कॉफ़ी पिऐंगे, उसकेबाद हम् लोग लडकियों कां फेवरेट काम करने जाऐंगे। इसलिये आज कां पूरादिन तुम्हें मेरेसंग हि रहना पडेगा।
निशा कि बात सुनकर दिव्या थोडा कनफ्यूज होतेहुए बोलीं
दिव्या- लडकियों कां फेवरेट काम…। कहीं आपका मतलब शॉपिंग सें तौ नहि हैं।
निशा- ऑफकोर्स हम् आज शॉपिंग पऱ जारहे हें…। मगर उससे पहले मुझे तुम्हें किसी सें मिलवाना भि हैं।
दिव्या- किस्से…
निशा-अरे बाबा अपने दफ़्तर मे चलकरसभी बताती हूं…। बस थोडा सां सब्ररखो…
इतना बोलकर निशा अपने दफ़्तर कि तरफचल पडी तोँ दिव्या भि उसके पीछे पीछे निशा केँ दफ़्तर मे जा पहुँची। निशा केँ दफ़्तर केँ अंदरआते हि वोँ दोनों दफ़्तर केँ एक् कार्नर मे रखे सोफे पऱ जाकर आहिस्ता बैठगईं। जिसके जल्दी बाद निशा नें कॉलआई करकेदो कप कॉफ़ी लाने कां आर्डर कर दिया। कुछ हि देरबार पूजा निशा केँ दफ़्तर केँ अंदरआई औऱ दोकप कॉफ़ी रखकर बापिस चली गई। पूजा केँ जाते हि दिव्या नें एक् कप निशा कि तरफबडा दिया औऱ दूसरा कप स्वयं उठाकर कप कॉफ़ी शिप करतेहुए बोलीं
दिव्या- कमऑन निशा दि…। अबबता भि दो कि आप् मुझे किससे मिलवाना चाहती होँ……
दिव्या कां सबाल सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोलि
निशा- तुम्हारी होने बाली देवरानी सें….
निशा कि बात सुनकर दिव्या कन्फ्यूज होतेहुए बोलि
दिव्या- मतलब….
निशा- मतलब कि आज मे तुम्हें इकराम कि होने बाली बीबी सें मिलवाने बाली हूं….
इकराम कां नाम सुनते हि दिव्या कों यादआया कि आज सुभह हि अज्जू औऱ मोनू नें सबको बाताया थां कि कुछ दिनों बाद उनकीयार जोया केँ भइया कि इंगेज्मेंट हैं। जिसमें पूरी फैमली कों जानां हैं। येबात यादआते हि दिव्या खुश होतेहुए बोलीं…
दिव्या- अरे दोस्त मे तौ भूल हि गई थि…। आज सुभह हि तौ अज्जू नें इस बारे मे हम् सबको बताया थां। पऱ एक् बात मुझेसमझ नहि आँ रही हैं कि इकराम कि होने बाली वाईफ मेरी देवरानी केसे हौ गई।
निशा-अरे बाबा….अब जब इकराम तुम्हें भाभी कहकर बुलाता हैं तौ वोँ तुम्हारा देवरु हुआ नां, इस हिसाब सें इकराम कि होने बाली वाईफ तुम्हारी देवरानी हि तोँ होगी। बैसे भि मे मोनू औऱ रीनू कों अपने भइया बेहन मानती हूं औऱ मां-पिताजी भि मुझे अपनीसगी बेटी मानते हें। इस हिसाब सें मेरा भइया इकराम मोनू कां भि भइयाहुआ औऱ तुम्हारा देवर जी।
निशा कां लॉजिक सुनकर दिव्या सोचते हुए बोलि
दिव्या- हुम्ममम बात तोँ सही हैं आपकी…। पऱ मे आप् दोनों सें नाराज हूं…। आपने इकराम कि इंगेज्मेंट डेट भि फाईनल करली औऱ मुझेअब जाकरइस बारे मे बतारहे हौ।
निशा-अरे सॉरी बाबा सॉरी…मगर वोँ सभी इतनी जल्दहुआ कि मुझेइस बारे मे तुम्हें बाताने कां मौका हि नहि मिला, बैसे भि हमारी मुलाकात भि तोँ कितने दिनों बाद होँ रही हैं। इसीलिए आज मैंने इकराम कि होने बाली बाईफ कों सीधा यहीं बुलवा लिया। ताकि मे तुम्हें उससे मिलवा सकूँ औऱ हम् दोनों शॉपिंग मे उसकी हेल्प कर सकें।
दिव्या- हूम्म तोँ येबात हैं…। मतलब हम् दोनों आज अपनी शॉपिंग केँ लिए नहि बल्कि होने बाली दुल्हन कि शॉपिंग करवाने जारहे हें।
निशा-हाँ प्लान तौ कुछऐसा हि हैं… मगर दूसरों केँ लिए शॉपिंग करवाते समय हम् लडकियाँ अपनेऊपर कंट्रोल कहां रख पाती हें…। इसलिये अगर हमेंकुछ पसन्द आया तौ अपनेलिए भि खरीद लेंगे।
निशा कि बात सुनकर दिव्या खुश होतेहुए बोलि
दिव्या- ये भि ठीक हैं…। पर्र इकराम कां क्याँ होगा…। उसकेलिए भि तोँ शॉपिंग करवानी पडेगी नाँ।
निशा-अरे इकराम कि शॉपिंग मोनू औऱ अज्जू देख लेंगें…। बैसे भि मैंने उन दोनों कों फोन करके इकराम कि शॉपिंग करवाने केँ लिएबोल दिया हैं।
इतना बोलकर निशा दिव्या कों शरारती अंदाज मे आँख मारते हुए बोलीं
निशा-अब जीजा औऱ भइया होने केँ कुछ फर्ज तौ उन दोनों कों भि निभाने पडेंगे नां…….
निशा कि बात सुनकर दिव्या भि मुस्कुरा पडी औऱ फिन अचानक सें वोँ सीरियस होतेहुए बोलि
दिव्या- मगर निशा दि आप् इनसे औऱ अज्जू सें जोया केँ रूप मे कब मिली औऱ आप् लोगों कि दोस्ती आखिर केसे होँ गई।
दिव्या कि बात सुनकर निशा थोडा सीरियस हौ गई, असल मे वोँ रॉ केँ बारे मे दिव्या कों कुछ भि नहि बताना चाहती थि, इसलिये थोडा सोचने केँ बाद उसनेकहा
निशा-असल मे कुछ दिनों पहले मे औऱ इकराम किसी जरूरी काम सें आउटऑफ सिटीगए हुए थें, उसी दौरान हमारे दुशमनों नें हमेंजान सें मारने केँ लिए धोखे सें हम् पऱ हमलाकर दिया थां। जिसमें मे औऱ इकराम गंभीर रूप सें घायल होँ गए थें। भाग्य सें अज्जू औऱ मोनू भि अपने किसीकाम सें उसी स्थान पर्र गएहुए थें औऱ जैसे हि उन लोगों नें हमें गंभीर रूप सें घायल देखा तौ टाइम रहते हमें हॉस्पीटल पहुंचा दिया। बस इसलिये उस घटना केँ बाद हमारी दोस्ती हौ गई।
निशा कि बात सुनकर दिव्या परेशान होतेहुए बोलि
दिव्या- ओहमाई गॉड निशा दि आप् ठीक तोँ हें नां….
निशा-हाँ बाबा मे अब पूरीतरह सें ठीक हूं।
दिव्या- मुझे एक् बात समक्ष नहि आँ रही हैं कि आखिर आपकेऐसे कौन सें दुशमन पैदा हौ गए, जौ आपकीजान लेने कि कोशिश करें।
निशा- मेरी जीवन मे ऐसा बहोत कुछ हैं दिव्या…। जौ इकराम केँ अलावा कोई औऱ नहि जानता हैं…। अज्जू भि नहि…… रहीबात दुशमनों कि तौ उनकी मेरेपास कोईकमी नहि हैं। ईश्वर नें मेरे किस्मत मे थोक केँ भाव दुशमन भररखे हें, जोँ आऐदिन मुझेजान सें मारने कां सपना देखते रहते हें। तीनसाल पहलेहुए हादशे केँ बाद मेराघऱ बापिस नां आने कां एक् कारण मेरे दुशमन भि हें। असल मे मे नहि चाहती हूं कि मेरे दुशमन मुझसे बदला लेने केँ लिए हमारे परिवार कों निशाना बनाऐं। इसलिये अपने परिवार कों दुशमनों कि नजरों सें छिपाने केँ लिए मेरा तुम् सबसेदूर रहना जरूरी हैं।
दिव्या- पर्र निशा दि आपने आखिर इतने सारे दुशमन केसेबना लिए…। जहाँ तक मे आपको जानती हूं, उसके हिसाब सें आप् कोईगैर कानूनी काम तौ कभी नहि कर सकते। फिन आपकेथोक केँ भाव इतने सारे दुशमन कहां सें औऱ क्यूं पैदा हौ रहे हें।
दिव्या कि बात सुनकर निशा एक् गहरी सांस लेतेहुए बोलि
निशा- देखो दिव्या मे अपनेकाम केँ बारे मे तुम्हें अधिककुछ तोँ नहि बता सकती। मगर तुम् इतनासमझ लो कि मे कोई भि गलत याँ गैर कानूनी काम नहि करती हूं। बल्कि मे हमारे देश कि एक् महत्वपूर्ण गवर्मेंट आर्गनाईजेशन कां हिस्सा हूं औऱ मेरे पीछे जोँ दुशमन पडे हें, वोँ असल मे मेरे नहि बल्कि हमारे देश केँ दुशमन हें।
निशा कि बात सुनकर दिव्या बुरीतरह सें हैरान होतेहुए बोलीं
दिव्या- कहीं आप् कोई सीक्रेट ऐजेंट बगैरह तोँ नहि हौ…। जोँ रॉ याँ किसी दूसरी सीक्रेट आर्गनाईजेशन केँ लिएकाम करते हें।
निशारॉ औऱ रॉ मे अपनी पॉजीशन केँ बारे मे दिव्या कों नहि बताना चाहती थि। इसलिये वोँ दिव्या कि बात टालते हुए बोलि
निशा- हाँँऐसा हि कुछसमझ लो….
निशा कि बात सुनकर दिव्या एक्साईटेड होतेहुए बोलि
दिव्या- ओहमाई गॉड…। क्याँ आप् सच मे एक् सीक्रेट ऐजेंट होँ….
दिव्या अपने एक्साईटमेंट मे बहोत कुछ केहना चाहती थि, मगरतभी उसकेमन मे एक् बात क्लिक हुईँ औऱ वोँ थोडा हिचकिचाते हुए निशा सें बोलीं
दिव्या- एक् मिनट……। आपने अभि कुछदेर पहले बताया थां कि आपके औऱ इकारम केँ ऊपरकुछ लोगों नें हमला किया थां, मगरतभी सही मौके पऱ अज्जू औऱ मोनू वहां पहुँच गए थें। इसका मतलब हैं कि अज्जू औऱ मोनू भि आपकीतरह हि सीक्रेट ऐजेंट हें।
दिव्या कि बात सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोलीं
निशा-हाँ…। संग हि संग इकराम भि हमारी टीम मे सामिल हैं।
दिव्या- जब अज्जू औऱ मोनू आप् लोगों कि टीम मे पहले सें हि सामिल हें, तौ फिनउन दोनों नें अब तक आपको पहचाना क्यूं नहि।
निशा- वोँ इसलिये क्योंकि मे उन दोनों कि सीनियर ऑफिसर हूं। जिस कारण हमारी मुलाकातें बहोत कम होती हें औऱ जब भि मे उन लोगों सें मिलती हूं तोँ जोया केँ रूप मे मिलती हूं। जिस बाजह सें वोँ लोग मुझे पहचान नहि पाऐ हें। बैसे तौ मोनू बहुत वक्त सें मेरीटीम मे कामकर रहा हैं, मगर अज्जू नें अभि कुछ दिनों पहले हि हमारी टीम ज्वाईन कि हैं।
दिव्या- इसका मतलब हैं कि आप् अज्जू औऱ मोनू कि बॉस हौ….
दिव्या कि बात सुनकर निशा एक् बारफिन मुस्कुराते हुए बोलि
निशा-हाँ ऐसा हि कुछसमझ लो……
दिव्या- तब तौ उन दोनों पऱ हुकुम चलाने मे बहोत आनंदआता होगा।
निशा-ऐसा कुछ भि नहि हैं…। सच तौ ये हैं कि मे उन दोनों सें कोईखास काम नहि करवाती औऱ नां हि उन दोनों कों अब तक किसीबडे मिशन पर्र भेजा हैं। उन दोनों मे सें एक् मेरा पति हैं औऱ दूसरा मेरा भइया, इसलिये जब तक मे जिंदा हूं, उन दोनों कों किसी खतरनाक मिशन पऱ भेजने कां सबाल हि नहि उठता।
दिव्या- हाँये भि सही हैं…। बैसे आप् येसभी कब सें कररही होँ….
दिव्या कि बात सुनकर निशा सोचते हुए बोलि
निशा- बहुत लम्बा वक्त हौ गय़ा हैं, मेरे ख्याल सें मेरी औऱ अज्जू कि विवाह केँ कुछ महिनों बाद हि मे एक् अंडरकबर ऐजेंट केँ रूप मे कामकर रही हूं।
निशा कि बात सुनकर दिव्या हैरान होतेहुए बोलि
दिव्या- मतलब मेरी औऱ मोनू कि विवाह सें पहले हि जब आप् औऱ अज्जू इंदौर अपना वदला लेनेआऐ थें, तोँ उससमय तक आप् सीक्रेट ऐजेंट बन चुकी थि।
निशा-हाँ….
दिव्या- हे ईश्वर…। आपने इतनाबडा सीक्रेट हम् सब लोगों सें आखिर छिपाया केसे… हमें तोँ कभीइस बात पऱ कोईशक हि नहि हुआ कि आप् एक् अंडरकवर ऐजेंट हौ।
निशा- उम्मममम…। सच कहूँ तौ मुझे अपनाराज छिपाने केँ लिए ज़्यादा कुछ नहि करनापडा थां। क्योंकि इंदौर सें बापिस आने केँ कुछ दिनों बाद हि मे दिल्ली शहर सें बाहर् बने हमारे फार्महाऊस पऱ सिफ्ट होँ गई थि। जहाँ मुझसे मिलने बहोत कमलोग आते थें, यहा तक कि अज्जू भि कईकई हफ्तों तक मुझसे मिलने नहि आता थां। शायद इसलिये अब तक किसी कों भि मेरे अंडरकवर ऐजेंट होने कां शक नहि हुआ।
निशा नें येबात मुस्कुराते हुएकही थि, मगर उसकी मुस्कान केँ पीछे छिपे दर्द कों दिव्या अच्छी तरहसमझ रही थि। पर्र जौ बीत गय़ा उसे वोँ चाहकर भि बदल नहि सकती थि। मगर फ्यूचर मे निशा केँ लिएसभी कुछ आसान औऱ बेहतर करने कि कोशिश वोँ जरूरकर सकती थि। इसलिये वोँ टॉपिक चेंज करतेहुऐ बोलि
दिव्या- बैसे निशा दि मुझेअब भि येबात समझ नहि आई हैं कि आखिर अज्जू नें आपकोअब तक पहचाना क्यूं नहि। जहाँ तक मुझेपता हैं उसके हिसाब सें तौ आपकेआस पास होने पर्र भि अज्जू कों जल्दी आपका एहसास हौ जाता हैं। फिन एक् संगकाम करने औऱ जोया केँ रूप मे आपसेकई बार मिलने केँ बाद भि अज्जू नें आपको पहचाना क्यूं नहि।
दिव्या कां सबाल सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोलीं
निशा-बात दरअसल ये हैं कि मेरे औऱ अज्जू कि बॉडी मे सें एक् विशेष प्रकार कि एनर्जी बेब्स निकलती रहती हें। जिनकी बजह सें हमें एक् दूसरे कां एहसास हौ जाता हैं। मगर मे अपनी बॉडी मे सें निकलने बाली एनर्जी बेब्स कों कंट्रोल कर सकती हूं, पऱ अज्जू ऐसा नहि कर सकता। इसलिये मे जब चाहूँ तब अपने एहसास कों अज्जू सें छिपा सकती हूं। पऱ अज्जू चाहकर भि ऐसा नहि कर सकता। बैसे भि जब मे जोया कां याँ फिनकोई दूसरा रूप लेती हूं, तोँ मेरी सुपर पावर करीब-करीब समाप्त हौ जाती हें औऱ मेरी बॉडी सें एनर्जी बेब्स निकलना भि बंद हौ जाती हैं। बस इसीलिए अब तक अज्जू मुझे पहचान नहि पाया।
दिव्या- ओह तोँ येबात हैं…। मगर मैंने औऱ बापू नें तौ आपको जोया केँ रूप मे पहचान लिया थां औऱ सबसेबडी बात हमारे अंदर तोँ अज्जू कि तरहकोई सुपर पावर भि नहि हैं। ऐसे मे अगर हम् लोग आपको पहचान सकते हें तौ अज्जू औऱ मोनूअब तक आपको क्यूं नहि पहचान पाऐ। वोँ तौ आपके बचपन केँ साथी हें।
दिव्या कि बात सुनकर निशा मुस्कुराते हुएउसे देखने लगी, जबकि दिव्या बेसब्री केँ संग निशा केँ जबाब कां प्रतीक्षा कररही थि।
स्टोरी जारी हैं.
Meri Jung (Restart) - Kahani ab aur interesting hogi
Nice update redhat.ag bhay. halanki nisha kaa ajju say dhoke si divorce lena say ajju sayad hi bardasht krr payega kyuki bhale hi usne bhut galtiyan kee h halanki wo nisha say saccha pyar krta h.
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