Meri Jung (Restart) – New Episode
भाग 141 -
आखिरकार दिव्या कि बेसब्री कों देखते हुए निशा एक् गहरी सांस लेकर बोलि
निशा- वोँ इसलिये क्योंकि कुछ महिनों पहलेजब मामाजी जी कां सच सबके सामने आया थां औऱ तुम् लोगों नें नऐ शिरे सें मेरी तलाश शुरुआत कर दि थि। उससमय मुझे अपनेकई सारेकाम बहोत सावधानी सें करने पडते थें, यहा तक कि मुझे कहीं भि आने जाने पऱ यहीडर लगा रहता थां कि पता नहि कबकौन सां इंशान मुझे पहचान कर अज्जू केँ पास मेरी इंफॉर्मेशन पहुँच दे औऱ अज्जू मेरे सामने आकरखडा होँ जाऐ। मैंंकई बारबस कुछ पलों याँ सेकेण्डों केँ अंतर सें अज्जू कि नजरों मे आतेआते बची हूं। इसलिये मे अधिकतर दिल्ली सें बाहर् हि रहती थि, औऱ दिल्ली मात्र तभीआती थि, जब बहोत ज़्यादा जरूरी हौ। मगरजब नायडू नें तुम् लोगों कों किडनैप किया, तबसे मुझे तुम् लोगों कि सुरक्षा कों लेकर बहुत टेंशन होनेलगी थि। इसलिये मैंने तय किया थां कि मे तुम् सबकी सुरक्षा कां पूरा इंतजाम करके औऱ परिवार मे सबकेबीच जौ दूरियाँ आँ गईँ हें, उन्हें सुलझाकर हमेशा केँ लिए किसीऐसी स्थान पऱ चली जाऊँगी। जहाँ मेरे पहचाने जाने कां कोईडर नाँ हौ।
इतना बोलकर निशा नें एक् गहरी सांसली औऱ फिन दोवारा मुस्कुराते हुए बोलीं
निशा- पऱ सभीकुछ ठीक करकेयहा सें जाने सें पहले हि तुमने औऱ बापू नें मुझे पहचान लिया थां। मगर मे औऱ लोगों द्वारा पहचाने जाने कां रिस्क लेना नहि चाहती थि, इसलिये मैंने अपनी सुपर पावर कां यूज करके तुम्हें औऱ पिताजी कों छोडकर बाकीसब लोगों केँ मन केँ संग थोडी सि छेडछाड कर दि थि। जिसके अनुसार मे जब तक अपने असली यानि निशा केँ रूप मे सबके सामने नहि जाऊँगी, तब तक सबलोग जोया औऱ निशा कों दोअलग अलग इँशान हि मानते रहेंगे।
निशा कि बात सुनकर दिव्या हैरान होतेहुए निशा कों देखने लगी। असल मे दिव्या कि हालतइस टाइमऐसी थि, जैसे उसने अपने सामने कोईभूत देख लिया हौ। बहुतदेर तक निशा कों यूँ हि हैरानी सें देखने केँ बाद आखिरकार दिव्या नें उससे सबालपूछ हि लिया
दिव्या- पऱ निशा दि आखिर आप् ऐसे केसे किसी केँ भि दिमाग़ केँ संग छेडछाड कर सकती हौ…। ये तोँ गलतबात हैं…। मे मानती हूं कि आप् अज्जू औऱ बाकी लोगों सें नाराज होँ, जिस कारण आप् किसी सें भि निशा केँ रूप मे मिलना नहि चाहती। मगर आपकोकम सें कम अज्जू औऱ बाकी लोगों कों पूरी ईमानदारी केँ संग आप् तक पहुँचने कां एक् मौका तौ देना हि चाहिए। क्योंकि अगर आप् इसीतरह सबसेदूर दूर भागती रहीं तोँ फिनसभी कुछ केसेठीक होगा।
दिव्या कि बात सुनकर निशा चिढते हुए बोलीं
निशा- दिव्या कि बच्ची मे अच्छी तरहसमझ रही हूं तेरी बातों कां क्याँ मतलब हैं। मगर मे तेरी बातों मे नहि आने बाली, बैसे भि प्रेम औऱ जंग मे सभी जायज हैं। रहीबात अज्जू औऱ बाकी लोगों सें नाराज होने कि, तौ ऐसाकुछ भि नहि हैं। हाँये बातसही हैं कि मे नाराज हूं पऱ अज्जू औऱ बाकी लोगों सें नहि, बल्कि अपने आप् सें नाराज हूं। मे इसलिये नाराज हूं कि आखिर क्यूं मैंने अज्जू सें प्रेम किया, आखिर क्यूं मैंने सभी लोगों कि बात मानकर अज्जू सें विवाह कि। अगर मैंने कभी अज्जू सें प्रेम हि नहि किया होता याँ सबकीबात मानकर उससे विवाह नहि कि होती, तोँ आज हम् दोनों कि जीवन बहुतअलग होती।
निशा कि बात सुनकर दिव्या उसे समझाते हुए बोलीं
दिव्या- अब जोँ हौ गय़ा सो होँ गय़ा निशा दि, अबउसे बदला नहि जा सकता हैं। बैसे भि आप् दोनों बचपन सें हि एक् दूसरे सें प्रेम करते थें, हाँये बातअलग हैं कि आप् दोनों कों हि इसका एहसास सालों बादहुआ। मगर आप् दोनों कां एक् संग आनां आपकी क़िस्मत मे लिखा थां। जिसेकोई भि नहि बदल सकता हैं, भले हि उससमय आप् अज्जू सें विवाह नहि करती, मगर क़िस्मत आपकोकभी नाँ कभी एक् दूसरे कां जिंदगी मित्र जरूरबना देती।
दिव्या कि बात सुनकर निशा एक् गहरी सांस लेतेहुए बोलीं
निशा-हाँ शायद तुम् सहीकह रही हौ… मगरअब जब अज्जू मेरे बिना जीनासीख गय़ा हैं औऱ जिया नें भि सभीकुछ अच्छी तरह संभाल लिया हैं। तौ मुझे लगता हैं कि यहीसही मौका हैं सबकी जीवन सें हमेशा हमेशा केँ लिएदूर जाने कां
दिव्या- मगर आप् तौ पहले सें हि सबसेदूर हौ…। अब औऱ कहां जाओगी….
निशा- फिलहाल मे तुम् सबकेबीच मे हि अपनानाम औऱ पहचान बदलकर रहरही हूं। मगरअब मे यहा सें हमेशा हमेशा केँ लिएदूर जानां चाहती हूं।
दिव्या- कहीं आप् बांधवगढ मे जाकर तौ बसना नहि चाहती हौ
दिव्या कि बात सुनकर निशा मुस्कुराते हुए बोलि
निशा-हाँ येबात सही हैं कि मे बहुत लम्बे वक़्त तक बांधवगढ मे रही हूं औऱ अभि भि जब मुझे वक्त मिलता हैं तौ मे बांधवगढ चली जाती हूं। पर्र मेराये राजअब खुल चुका हैं। जिस कारण मे अबवहा पऱ ज़्यादा वक़्त तक नहि रह सकती। इसीलिए मैंने इण्डिया छोडकर किसी औऱ देश मे जाकर बसने कां फैसला कर लिया हैं।
दिव्या- अगर आप् इसदेश कों हि छोड दोगे तोँ फिन आपकी सीक्रेट ऐजेंट बाली ज़ॉब कां क्याँ होगा औऱ आपकीइस कम्पनी कां क्याँ होगा।
निशा- मैंने अपनी ऐजेंट बाली नौकरी सें रिजाईन करने कां फैसला कर लिया हैं, इकराम कि इंगेज्मेंट केँ बाद मे उस नौकरी सें रिजाईन कर दूँगी, रहीबात इस कम्पनी कि कों इसे संभालने केँ लिए तुम् औऱ इकराम होँ नाँ।
दिव्या- मतलब इकराम आपकेसंग नहि जारहा हैं
निशा- नहि…। क्योंकि सच तौ ये हैं कि इकराम कों मेरेइस प्लान केँ बारे मे अभि तक कुछ भि पता नहि हैं। बैसे भि जल्द हि उसकी विवाह होने बाली हैं, ऐसे मे उसे अपनेसंग लेँ जानां बिल्कुल भि ठीक नहि होगा।
निशा कि बात सुनकर दिव्या झुंझलाते हुए बोलि
दिव्या- अगरऐसा हि हैं तौ फिन आपनेये सच मुझे क्यूं बताया…। क्याँ आपकोडर नहि लगरहा कि मे आपके बारे मे सबकोबता दूंगी
निशा- नहि मुझे तुमसे बिल्कुल भि डर नहि लगरहा हैं।
दिव्या- पऱ क्यूं
निशा- क्योंकि मुझे तुम् पर्र पूरा भरोसा हैं।
दिव्या- औऱ अगर मैंने आपका भरोसा तोड़ दिया तौ….
निशा- तौ भि मेरे प्लान मे कोई अंतर नहि आऐगा…हाँ मगर तुम् पर्र सें मेरा भरोसा जरूरउठ जाऐगा।
दिव्या- अज्जू आपको कहीं नहि जाने देगा निशा दि
निशा- नहि दिव्या ऐसाकुछ भि नहि होगा…… क्योंकि अब अज्जू चाहकर भि मुझे कहीं भि जाने सें रोक नहि सकता हैं
दिव्या- मतलब…
दिव्या कि बात सुनकर निशा केँ चेहरे पर्र एक् रहस्यमई मुस्कान आँ गई थि, जिसे देखकर दिव्या बहुत अधिक कन्फ्यूज होँ रही थि, इससे पहले वोँ निशा सें कोई औऱ सबालकर पाती, निशा अपनी स्थान सें उठकरखडी होँ गई औऱ अपने दफ़्तर मे रखीसेफ मे सें कुछ डॉक्यूमेंट निकालकर दिव्या कि तरफबडा दिए। दिव्या नें जैसे हि उन पैपर केँ टाईटल कों पडा तौ वोँ बुरीतरह सें हैरान होतेहुए बोलीं
दिव्या- डायवोर्स पेपर….ओह माईगॉड…। येसभी क्याँ हैं निशा दि…। आपके औऱ अज्जू केँ बीच डायवोर्स कब हौ गय़ा… औऱ सबसेबडी बात कि हमेंइस बारे मे अब तक पता क्यूं नहि चला।
निशा- तुम् शायदभूल गई होँ दिव्या कि मे इस वक़्त अज्जू औऱ मोनू कि बॉस हूं। जब मे अपनी आईड़ेंटिटी बदलकर उनकेसंग नौकरी कर सकती हूं तोँ फिन अज्जू कों उल्झाकर उससे डायवोर्स पेपर पर्र साईन लेना मेरेलिए कौन सि बडीबात हैं। मैंने कुछ दिनों पहले हि अज्जू सें डायवोर्स पेपर पर्र धोखे सें साईन लेकर गुपचुप तरीके सें केश फाईलकर दिया थां औऱ अपनी पावर कां यूज करके अज्जू कों कुछ भि पताचले बिना हि कोर्ट सें डायवोर्स आर्डर भि लेँ लिया हैं। इसलिये अब कानूनी रूप सें मेरा अज्जू सें कोई नाता नहि हैं। जिस कारण वोँ चाहकर भि मुझे कहीं भि जाने सें रोक नहि सकता। बैसे भि उसकेपास जिया औऱ राधा तोँ हें हि… वोँ उनकेसंग हमेशा खुश रहेगा….
निशा कि बात सुनकर दिव्या उससे नाराज होतेहुए बोलि
दिव्या- ये तौ गलतबात हैं निशा दि…। आप् आखिरऐसा केसेकर सकते होँ…। आपने अज्जू कों धोखा देकरये डायवोर्स लिया हैं…… जिसेकोई भि एक्सेप्ट नहि करेगा
निशा-सच तोँ यही हैं दिव्या कि अब मेरे औऱ अज्जू केँ बीच मे कानूनी रूप सें डायवोर्स होँ चुका हैं। इसलिये इसबात सें क्याँ फर्क पडता हैं कि कोईइस डायवोर्स कों एक्सेप्ट करता हैं याँ नहि। बैसे भि अज्जू कां असली औऱ पहला प्रेम जिया हैं… नाँ कि मे…। मैंने तौ बसकुछ दिनों कि लिए जिया कि स्थान उधारली थि। जोँ मैंने जिया केँ बापिस आने केँ बादउसे खुशी खुशी लौटा दि थि। बैसे भि अबइस डायवोर्स केँ बाद नाँ तौ अज्जू कां मेरेऊपर कोईहक हैं औऱ नां हि मेरा अज्जू पऱ कोईहक बचा हैं। अब अज्जू कि पत्नी औऱ जीवनसाथी होने केँ सारे अधिकार जिया केँ पास हें।
निशा कि बातें सुनकर दिव्या कों इससमय दर्द, निराशा, क्रोध जैसेकई सारे इमोशन एकसाथ महसूस हौ रहे थें। वोँ इसबात कां अंदाजा भि नहि लगाना चाहती थि कि जब सबकोइस डायवोर्स केँ बारे मे पता चलेगा, तब क्याँ होगा। मगर वोँ इतना तौ समझ गई थि कि निशा केँ लिए भि ये फैसला लेना उतना आसान नहि रहा होगा। इन्हीं सभी बातों केँ बारे मे सोचते हुए दिव्या कि आँखों मे कब आँशू आँ गएउसे पता हि नहि चला। आखिरकार दिव्या अपने इमोशंस कों कंट्रोल करतेहुए बोलीं
दिव्या- निशा दि…। आखिर आप् येसभी क्यूं कररही हौ…। आपकेइस फैसले सें कोई भि खुश नहि रहेगा… नां आप्…। नां अज्जू औऱ नां हि हम् लोग….
दिव्या कि बात सुनकर निशा एक् गहरी सांस लेतेहुए बोलि
निशा- तुम् शायद मेरे औऱ अज्जू कि विवाह कां असलीसच नहि जानती दिव्या, इसलिये ऐसी बातें कररही होँ। सच तोँ यही हैं कि अज्जू कभी मुझसे विवाह करना हि नहि चाहता थां औऱ नाँ हि विवाह केँ बाद उसने हमारे रिश्ते कों एक्सेप्ट किया थां। वोँ तौ बस मेरी खुशी औऱ मेरी जिद्द केँ चलते अज्जू मात्र चीफ सें हमारा बदला लेने तक इस रिश्ते कों निभाने केँ लिए मजबूर थां। मगरअब जबचीफ माराजा चुका हैं तोँ उसेइस रिश्ते कों जबरदस्ती निभाने कि कोई जरूरत नहि हैं।
निशा कि बात सुनकर दिव्या हैरान होतेहुए बोलीं
दिव्या- येसभी आप् क्याँ कहरही हौ निशा दि…। हम् सबलोग अज्जू कि आँखों मे आपकेलिए प्रेम साफसाफ देख सकते हें…। फिन आपको अज्जू कां प्रेम क्यूं नजर नहि आँ रहा हैं…
निशा- वोँ प्रेम नहि बल्कि जिम्मेदारी औऱ मेरेलिए फिक्र हैं….
दिव्या- फिक्र भि तोँ हम् उन्हीं लोगों कि करते हें, जिनसे हमें प्रेम हौ….
निशा-कुछ टाइम तक संग रहते रहते प्रेम तोँ हमें पालतू कुत्तों सें भि हौ जाता हैं। तोँ इसका मतलबये तौ नहि हैं कि हम् कुत्तों सें विवाह करके उन्हें अपना जीवनसाथी बना लें।
दिव्या- आखिर आप् अपने औऱ अज्जू केँ प्रेम कि तुलना एक् कुत्ते सें केसेकर सकती होँ निशा दि.
निशा- क्योंकि यहीसच हैं…। तुम् तोँ जानती हि हौ कि मे अज्जू औऱ मोनू बचपन सें एक् दूसरे केँ बेस्टफ्रेंड रहे हें। ऐसे मे अज्जू कां मेरी फिक्र करना औऱ मेरेलिए इसतरह परेशान होना पूरीतरह सें नैचुरल हैं…। इसका मतलबये बिल्कुल भि नहि हैं कि वोँ मुझेदिल सें प्रेम करता हैं औऱ मुझे अपने जीवनसाथी केँ रूप मे देखता। मे बस उसकेलिए अपनी फिजीकल नीड पूरी करना कां माध्यम हूं… क्योंकि जियाउसे फिजीकली सैटिस्फाई नहि कर पाती हैं…। संग हि संग मेरे औऱ अज्जू केँ बीच बचपन सें हि एक् इमोशनल बॉण्ड रहा हैं, जिसेसभी लोग प्रेम समझ बैठे हें। पऱ वोँ प्रेम कभी थां हि नहि। वोँ तौ बस मजबूरी मे बने हमारे ऱिश्ते औऱ अपनी जिम्मेदारियां निभाने कि कोशिश कररहा हैं। मगरइस डायवोर्स केँ माध्यम सें मैंने उसे सारी जिम्मेदारियों सें आजादकर दिया हैं। इसलिये जब अज्जू कों इस डायवोर्स केँ बारे मे पता चलेगा, तोँ उसका रिऐक्शन देखकर तुम्हें हमारे रिश्ते कां सारासच स्वयं व स्वयं पताचल जाऐगा।
निशा कि बात सुनकर दिव्या अपनी आँखों मे झलकआऐ आँशुओं कों पोंछते हुए बोलीं
दिव्या- मुझे तोँ कुछ भि समझ नहि आँ रहा हैं कि आप् आखिरऐसा क्यूं बोलरही होँ। क्योंकि जहाँ तक मे जानती हूं अज्जू शिर्फ औऱ शिर्फ आपसे हि प्रेम करता हैं औऱ येबात सिर्फ मै हि नहि मानती बल्कि मोनू, मां, पिताजी, रीनूयहा तक कि जिया कां मानना भि यही हैं।
निशा- वोँ इसलिये क्योंकि तुम् मेरे औऱ अज्जू कि विवाह कां असलीसच नहि जानती होँ।
दिव्या- तौ आप् बताईऐ कि आखिर आप् दोनों कि विवाह कां असलीसच क्याँ हैं। मुझे भि तौ पताचले कि आपने इतनाबडा कदम आखिर क्यूं उठाया हैं।
निशा-बात बस इतनी सि हैं दिव्या कि मे औऱ अज्जू रिश्ते मे एक् दूसरे केँ भइया बेहन लगते हें। जिस कारण हमारे बीच विवाह औऱ फिजीकल रिलेशन जैसाकुछ भि होनापाप हैं।
दिव्या- हाँ मे इस बारे मे पहले सें हि जानती हूं…। मगर आपको तोँ एडोप्ट किया गय़ा थां नां… इस हिसाब सें टैक्निकली आप् दोनों केँ बीच भइया बेहन कां नाता नहि हैं।
निशा- नहि मुझे एडोप्ट नहि किया गय़ा थां, बल्कि मुझे मेरे असली माता पिता सें चुराया गय़ा थां। खैरअब इसबात सें कोई फर्क नहि पडता हैं। मगर मेरे असली माता पिता कां भि अज्जू सें एक् गरहा नाता थां, जिस कारण मुझे एडोप्ट किए जाने केँ बाबजूद भि टैक्निकल रूप सें मे औऱ अज्जू भइया बेहन हि हें।
दिव्या- ओहकमऑन निशा दि…। आजकल तौ येसभी बहुत ज़्यादा कॉमन हैं…। जब आप् लोगों कि विवाह हुइ तब आप् लोगों कों अपने असली रिश्ते केँ बारे मे नहि पता थां। इसलिये जोँ कुछ भि हुआ वोँ गलत केसे हौ सकता हैं। बैसे भि अगर आपका लॉजिक माने तोँ उस हिसाब सें अज्जू औऱ जिया भि भइया बेहनहुए… क्योंकि जिया प्रो। नारायण कि असली बेटी हैं औऱ प्रो। नारायण अज्जू केँ सगे मामाजी जी हें।
निशा- नहि ऐसा नहि हैं…। असल मे मेरी औऱ अज्जू कि विवाह सें पहले याँ फिन हमारे रिश्ते कां सारासच जानने सें पहले भि मे औऱ अज्जू चचेरे भइया बेहन थें। इसलिये ये कहना कि हमने अनजाने मे विवाह कि थि, ये पूरीतरह सें गलत होगा।
दिव्या- तोँ फिन आप् दोनों कि विवाह केँ पीछे कां असलीसच क्याँ हैं निशा दि
निशा-अगर तुम् सच जानना हि चाहती होँ तौ सुनो, बात असल मे ये हैं कि जब जिया कों ब्लड कैंसर हुआ औऱ वोँ एक्सीडेंट मे लापता हौ गई थि। उस टाइमसब कों यहीलगा थां कि जियाअब इस दुनिया मे नहि हैं। उसी दौरान साधना औऱ सिम्मी नें अज्जू कों धोखे सें बहोत बडी मात्रा मे ड्रगदे दिया थां। हाँलाकि अज्जू केँ द्वारा बनाऐगए सीरम केँ चलते उसकेबदन सें ड्रग कां अधिकतर असर समाप्त होँ गय़ा थां, मगर अज्जू केँ बदन मे उत्तेजना बहुत अधिकबड गई थि। जिसे कंट्रोल किया जानां बहोत जरूरी थां औऱ उसकेलिए अज्जू कां विवाह करके किसी लडकी केँ संग रैगुलर फिजीकल रिलेशन बनाना बहोत जरूरी थां। उसी दौरान चीफ सें बदला लेने केँ लिए अज्जू इंदौर आयाहुआ थां। जिया नें मरने सें पहले हॉस्पीटल मे मुझसे वादा लिया थां कि मे अज्जू कों कभी अकेले नहि छोडूंगी औऱ उसकी जीवन मे दोबारा प्रेम लाकर रहूँगी। अपना वादा पूरा करने केँ लिए मे अधिक सें ज़्यादा वक़्त अज्जू केँ संग बिताने लगी, इस दौरान पता हि नहि चला कि कब मे अज्जू सें प्रेम करनेलगी। वहीं दूसरी तरफ अज्जू भि अपनी फिजीकल नीड पूरी करने केँ लिए अनजाने मे हि मेरे लगभगआने लगा थां औऱ फिनचीफ केँ जाल मे फंसकर हम् लोग विवाह कर बैठे।
इतना बोलकर निशाकुछ पलों केँ लिए रुकी औऱ अपनी पुरानी यादों मे खो गई
किस्सा जारी हैं.
dill ❤️ tod diya is wale update ne sir PAhachan chhipana too phir bi thi thaa lekin dhoke say divorce Kuch bi Isse achaa too yeh hotha nisha mar hi jati ya ajjuu mar jata kyu kia Nisha ne ajju say bavafai Very very bad
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redhat.ag bhay iss update mai nisha kaa nirnay galt he balki nisha अब ajju से jyada galt he ajju ne usko joo dhoka दिया nisha ko bata krr दिया लेकिन nisha ne joo कुछ किया bo ajju ko dhoka he
Guru ji ne bi esa कोई hint नहीं दिया he
kahin esa too नहीं की yeh divors hi nisha की pehchan karaye
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Guru ji ne bi esa कोई hint नहीं दिया he
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