Meri Jung (Restart) – New Episode
Kyu kyu kyu akhir kyu alag hu rahi nisha ajju से, ak too Nisha ne pehle hi bahut sari bewkufi की hain jese sabse rista tod देना, apni saktiya kaa ajju के demag से dowara chhedchhad krke miss use karna
, उसका dhoke से divorce papers par sign karwana, jabki aapko ptaa hain ajju kitna tdpa hain nishha के liye aur woh sudhar bi gya usne अपना office kaa karobar bi samha लिया, अगर woh alag hu gye too
Esse कई baate jhuti sabit hongi
Jese
1। Radha Krishna wale baba की बात
2। Nishha की बात joo usne sagai की shopping krne से phle boli thi
3। Ajju के liye yeh pyaar नहीं उसके sath visvas ghat karna hu
4। Renu, monu aur ma - uncle के liye bi के dhoke से कम नहीं hoga
aur bi बहुत kush.etc
Aàpse ak request hain sir अगर ap इस story ko sai end नहीं kre too Kam से
Kam ak khubsurat mod jarur de Dena
Kyu की shayad उसकी जगह mai hotha too ya too Nisha ko pa krr saare parivar ko ak kerta ya phir mai khud mar mar के jeeta
joo marne ak moth से bi badtar hotha
Thank you dear
Pichle update mai guruji ne ajju say kahatha kee philhal nisha pr aya khatra tal chuka he halanki phir say use jaan kaa khatra hone bala he phir nisha kaa divorse dena kya he Ekram kee sagai mai kya mummy or renu nisha ko pehchane gi ya nahee
Meri Jung (Restart) – New Episode
भाग 142 -
निशा केँ इसतरह अचानक खामोश होने केँ कारण दिव्या नें थोडा परेशान होतेहुए सबाल किया
दिव्या- फिन क्याँ हुआ निशा दि
दिव्या कि आवाज़ सुनकर निशा अपने होशो हावास मे बापिस आतेहुए बोलि
निशा-फिन वहींहुआ जौ नहि होना चाहिए थां…। हम् लोगों नें मामाजी जी औऱ बाकी लोगों केँ कहने पर्र विवाह तौ करली थि, मगर विवाह केँ जल्दी बादगी अज्जू कों अपनी गलती कां एहसास होनेलगा थां, उसेलगा कि दूसरों कि बातों मे आकर उसने अपनी बेहन सें विवाह करली हैं। इसलिये वोँ मुझेउसी टाइम डायवोर्स देना चाहता थां। मगर मेरी जिद्द केँ चलते वोँ उससमय मुझे डायवोर्स नहि दे पाया थां। मैंने उससे वादा किया थां कि चीफ सें अपना बदला लेने केँ बाद हम् दोनों एक् दूसरे सें हमेशा हमेशा केँ लिएदूर हौ जाऐँगे। पऱ फिनसंग रहते रहते हमें एक् दूसरे कि आदत हौ गई औऱ हम् दोनों हि मेरा वादाभूल गए थें। मगरफिन जिया दोबारा हमारी जीवन मे बापिस आँ गई। उस दौरान जिया औऱ मामाजी जी कि खुशी केँ लिए मे तुम् सबसेदूर फार्म हाऊस पर्र जाकर अकेले रहनेलगी थि। मगरजब मामाजी जी नें अपनी नफरत केँ चलते मुझेजान सें मारने कि कोशिश कि औऱ मुझे एहसास करवाया कि मैंने बाकई मे अज्जू केँ संग विवाह करकेपाप किया हैं। तब मुझेयाद आया कि मैंने अज्जू सें वादा किया थां कि चीफ सें वदला लेने केँ बाद हम् दोनों हमेशा केँ लिएअलग होँ जाऐंगे। बस इसीलिए मे तुम् सबसेदूर चली गई थि। हाँलाकि मे उसी टाइम अज्जू सें डायवोर्स लेना चाहती थि, पऱ उससमय अपनी मजबूरियों केँ चलते मे किसी केँ भि सामने नहि आनां चाहती थि औऱ सबसेबडी बात मेरेपास रहने केँ लिए अपना स्वयं कां कोई ठिकाना भि तोँ नहि थां। इसलिये मे अलगअलग स्थान भटकती रही औऱ जब मुझे रहने केँ लिए अपना स्वयं कां ठिकाना मिला तोँ मुझेपता चला कि असलीचीफ अभि भि जिंदा हैं। इसलिये असलीचीफ यानि नायडू कों समाप्त करने केँ बाद मैंने डायवोर्स पेपर पऱ धोखे सें अज्जू केँ साईन लेँ लिए औऱ केस फाईल करके डायवोर्स लें लिया।
इतना बोलकर निशा एक् बारफिन कुछ पलों केँ लिए खामोश हुइ औऱ दोबारा बोल्ना शुरुआत किया
निशा- देखो दिव्या मैंने जोँ कुछ भि किया हैं, वोँ बस अपना वादा पूरा करने केँ लिए किया हैं। अज्जू कभी भि मुझसे विवाह नहि करना चाहता थां औऱ नां हि उसनेकभी मुझसे प्रेम किया हैं। वोँ बस अपनी फिजीकल नीड कों पूरा करने केँ लिए मजबूरी मे मेरेसंग रहरहा थां। मगर जिया केँ बापिस आने केँ बाद उसकीये मजबूरी भि दूर होँ गई थि। रहीबात पिछले तीन सालों सें पागलों कि तरह मुझे ढूंडने कि तौ ये उसका प्रेम नहि हैं, बल्कि जिद्द हैं। वोँ बस मेरेइस तरह जाने सें गिल्टी फीलकर रहा हैं। उसेबस इसबात कां बुरालग रहा हैं कि उसके कारण मेरी जीवन खराब होँ गई हैं, जबकि वोँ स्वयं अपने परिवार केँ संग खुशी खुशीरह रहा हैं। मगरये पूरासच नहि हैं, मेरी जीवन तोँ उसी टाइम बर्बाद हौ गई थि, जब मुझे मेरे असली माँ-बाप सें चुरा लिया गय़ा थां। अगर मुझे मेरे असली माँ-बाप सें कभीअलग नहि किया गय़ा होता, तौ नां मुझेकभी अज्जू सें प्रेम होता औऱ नाँ हि हमारी कभी विवाह होती औऱ नाँ हि आज हमेंये दिन देख्ना पडता। इसलिये मेरेसंग जोँ कुछ भि हुआ हैं उससे अज्जू कां कुछ भि लेना देना नहि हैं। शायदयही मेरी भाग्य मे लिखा थां। रहीबात अज्जू कि तौ अगर उसने मुझेकभी भि सच्चा प्रेम किया होता तोँ मेरे जाने केँ बाद वोँ कभी भि पागलों बाली हरकतें नहि करता।
निशा कि बातें सुनकर एक् बारफिन दिव्या कि आँखों मे आँशू आँ गए थें। वोँ येबात अच्छी तरह सें समझरही थि कि पिछले तीनसाल सें अपने परिवार सें अलग रहने केँ कारण निशा नें हर छोटीबडी बात कां अपने हिसाब सें एक् अलग हि मतलब निकाल लिया हैं औऱ उसे हि सच मानकर वोँ सबसेदूर चली जानां चाहती हैं। जबकि सच निशा कि सोच सें बहुतअलग थां। इसलिये दिव्या निशा कों समझाते हुए बोलि
दिव्या- नहि निशा दि…। जैसा आप् अज्जू केँ बारे मे सोचरही हौ बैसाकुछ भि नहि हैं…। अज्जू हमेशा सें बस आपसे हि प्रेम करताआया हैं… हाँये बातअलग हैं कि उसे अपने प्रेम कां एहसास बहुतबाद मे हुआ थां। शायद इसका कारण आप् दोनों कां नातारहा हौ…। पऱ वोँ आज भि शिर्फ औऱ शिर्फ आपसे हि प्रेम करता हैं औऱ इसका सबसेबडा सबूतये हैं कि पिछले तीन सालों सें अज्जू औऱ जिया केँ बीच किसी भि प्रकार कोई भि फिजीकल रिलेशन नहि बना हैं। रहीबात जिया औऱ अज्जू केँ प्रेम कि तोँ वोँ भले हि जिया कि तरफ सें होँ मगर अज्जू नें जिया कों हमेशा अपना अच्छा यार माना हैं औऱ जिया कि खुशी केँ लिए हि उसकालव प्रपोजल एक्सेप्ट किया थां। बैसे भि वोँ बस कच्ची उम्र कां प्रेम थां जिसे अज्जू आपकासंग पाकरकब कां भूल चुका थां। अगर आप् एकबार फिन सबके सामने जिया कि असलियत नहि लाती, तोँ शायद अज्जू जिया कों कभीयाद भि नहि करता। वहीं दूसरी तरफ आप् हौ जिसे अज्जू इतने दिनों बाद भि एक् लम्हा केँ लिएभूल नहि पाया हैं। क्याँ अब भि आपकोयही लगता हैं कि अज्जू आपसे प्रेम नहि करताबस फिजीकल नीड पूरी करना चाहता हैं।
निशा-अगर अज्जू मुझेसच मे प्रेम करता याँ फिन उसनेदिल सें हमारी विवाह कों एक्सेप्ट किया होता, तौ वोँ कभी भि हमारे रिश्ते तोँ दुनिया सें छिपाने केँ लिए मुझसे नहि कहता। हमारी विवाह केँ बादजब मैंने अज्जू केँ संग दफ़्तर जानां शुरुआत किया थां, तब अज्जू नें मुझसे हमारे रिश्ते कों सबसे छिपाने कां वादा लिया थां। क्योंकि वोँ नहि चाहता थां कि दफ़्तर मे याँ हमारे करीबियों केँ अलावा किसी औऱ कों पताचले कि मे औऱ अज्जू शादीशुदा हें। अगरउस वक़्त अज्जू मुझसे ऐसा वादा नहि लेता, तौ जिया केँ बापिस आने केँ बादउसे पहले सें हि मेरे औऱ अज्जू केँ रिश्ते केँ बारे मे पता होता। आखिर वोँ पूनम बनकर अज्जू कि फार्मेशी कम्पनी मे कामकर रही थि औऱ अपनी पुरानी याददास्त आने केँ बाद भि उसे पूनम बाली लाईफयाद थि। इसलिये याददास्त आने केँ बाद शायद वोँ अज्जू सें विवाह करने केँ लिए सजधजकर हि नहि होती। पऱ अज्जू नें हमारे रिश्ते कों सबसे छिपाने कि कोशिश कि थि, जिस कारण जिया औऱ बाकी लोगों केँ मन मे मेरेलिए गलत फहमी पैदा होतीचली गई।
दिव्या- शायदउस समय अज्जू चीफ कि नजरों सें बचने केँ लिए अपने रिश्ते कों छिपाने कि कोशिश कररहा होँ। क्योंकि उससमय तक चीफ केँ दिल्ली मे अच्छे खासे कांटेक्ट थें।
निशा-अगर ऐसा हैं तोँ अज्जू नें जिया केँ संग दूसरी विवाह क्यूं कि थि…। माना कि मामाजी जी नें अज्जू पर्र जिया सें विवाह करने कां दबाब बनाया थां औऱ मैंने भि अपनी सहमती दे दि थि, मगर अज्जू मना भि तौ कर सकता थां नां। पऱ उसनेमना नहि किया। इसका मतलब हैं कि वोँ स्वयं भि जिया सें विवाह करके उसकेसंग रहना चाहता थां। हाँलाकि मामाजी जी सें मैंने वादा किया थां कि मे जिया कों हमारे रिश्ते केँ बारे मे नहि बताऊंगी…। पऱ अज्जू नें तौ ऐसाकोई भि वादा नहि किया थां…। फिन भि अज्जू नें जिया कों हमारे रिश्ते कां सचकभी नहि बताया। सचबात तोँ ये हैं कि अज्जू मुझे अपनी जीवन मे रखना तोँ चाहता हैं, मगर सारी दुनिया केँ सामने मुझे अपनी पत्नी कां मान सम्मान नहि देना चाहता। वोँ सारी दुनिया सें हमारे रिश्ते कों छिपाकर मुझे एक् रखैल केँ रूप मे अपनेसंग रखना चाहता हैं। मुझे सारी दुनिया केँ सामने अपनी पत्नी कि दर्जा देने कि हिम्मत आज भि अज्जू केँ अंदर नहि हैं।
दिव्या- नहि निशा दि येसच नहि हैं…। अज्जू नें हर न्यूज चैनल औऱ हर न्यूज पेपर मे इश्तहार देकर आपको खोजने कि पूरी कोशिश कि हैं। फिनभला वोँ सारी दुनिया केँ सामने आप् दोनों कां नाता क्यूं छिपाने लगा।
दिव्या कि बात सुनकर निशा केँ होंठों पर्र एक् फीकी सि मुस्कान आँ गई। कुछदेर खामोशी सें दिव्या कों घूरने केँ बाद निशा अपनी स्थान सें उठी औऱ लॉकर मे सें एक् दूसरी फाईल लाकर दिव्या केँ सामने रखतेहुए बोलीं।
निशा- तुम् इन्ही इश्तहारों कि बातकर रही हौ नां…… देखोइस फाईल मे वोँ सारे इश्तहार हें जौ अज्जू नें अलगअलग न्यूज चैनल औऱ न्यूज पेपर मे दिए हें। इनमें सें एक् भि इश्तहार मे अज्जू नें मुझे अपनी पत्नी नहि बताया हैं। बल्कि मुझे अपना फैमली मैंबर बताया हैं। इसके अलावा इस फाईल मे अज्जू केँ सब बैंक अकाऊंट, एफ.डी., नौकरी प्रोफाईल, इंश्योरेंस प्रोफाईल, कम्पनी प्रोफाईल औऱ दूसरे सब लीगल डॉक्यूमेंट कि कॉपी हैं। जिसमें अज्जू नें अपनी पत्नी औऱ नॉमिनी केँ रूप मे बस जिया कां नाम लिखा हैं। एक् भि स्थान मेरानाम नहि हैं। इसका मतलबसमझ रही हौ नां तुम्……। इनसभी डॉक्यूमेंट कां बस एक् हि मतबल हैं कि अज्जू मुझे अपना फैमली मैंबर तौ मानता हैं। पऱ आज तक वोँ मुझे अपनी पत्नी केँ रूप मे एक्सेप्ट नहि कर पाया हैं। फिनभाल मे अकेले हि क्यूं ये नाता निभाने कि कोशिश करती रहूँ। देखो दिव्या मे मानती हूं कि मुझे धोखे सें अज्जू केँ साईन लेकर डायवोर्स नहि लेना चाहिए थां। पऱ मेरेपास औऱ कोई मार्ग नहि थां। होँ सकता हैं कि तुम्हें मेरी बातें औऱ मेरे तर्क बचकाने लगरहे हों। पऱ एक् बार अपने आपको मेरी स्थान रखकर देखो औऱ फिन जबाबदो कि अगर तुम् मेरी स्थान होती तौ तुम् क्याँ करती।
आखिरकार दिव्या कों भि निशा केँ मन मे चलरही उथल पुथल कां असली कारणसमझ मे आँ चुका थां, इसलिये वोँ हार मानते हुए बोलि
दिव्या- मे मानती हूं निशा कि कि अज्जू नें कई सारी गलतियाँ कि हें औऱ मे ये भि मानती हूं कि अगर मे आपकी स्थान होती तोँ शायद मे भि वहीं करती, जौ आपने किया हैं। मगर क्याँ आप् उनसभी बातों कों भुलाकर अज्जू केँ संग अपने रिश्ते कि एक् नई शुरूआत नहि कर सकती होँ…। मुझे यकीन हैं कि अज्जू इसबार आपको उदास नहि करेगा।
निशा- देखो दिव्या मेरेलिए अबइनसभी बातों कां कोई मतलब नहि हैं…। क्योंकि मेरा औऱ अज्जू कां पहले हि डायवोर्स हौ चुका हैं। इसलिये अब मे अपना फैसला नहि बदल सकती। बैसे भि मे दोबारा अज्जू औऱ जिया कि शादीशुदा लाईफ मे दूसरी महिला नहि बनना चाहती।
दिव्या- ऐसाकुछ भि नहि हैं निशा दि…। जिया तोँ स्वयं आपको ढूँडकर आपसे माफी माँगना चाहती हैं औऱ आपको अज्जू कि जीवन मे बापिस लाना चाहती हैं।
दिव्या कि बात सुनकर निशा एक् बारफिन फीकी सि मुस्कान केँ संग बोलि
निशा- जिया कां मेरेलिए ये प्रेम मात्र तब तक हैं, जब तक कि मे सबके सामने नहि आँ जाती, जैसे हि मे सबकुछ भूलकर अज्जू कि जीवन मे बापिस लौट आऊंगी, बैसे हि जिया कि सोच एक् बारफिन मेरेलिए बदल जाऐगी। बैसे भि जिया कों अब तक मेरे औऱ अज्जू केँ डायवोर्स केँ बारे मे पता नहि हैं। इसलिये शायद अपनामन मारकर मुझे बापिस लाना चाहती हैं। मगरजब उसे डायवोर्स केँ बारे मे पता चलेगा, तौ उसके अंदर कि बीबीफिन सें जाग जाऐगी। देखो दिव्या मुझे नहि पता कि तुम् जिया कों कितना जानती होँ औऱ कितना नहि…। मगर अज्जू औऱ मोनू कि तरह जिया भि मेरी बचपन कि साथीरही हैं। उसकीहर एक् सोच औऱ हर एक् आदत मुझे अच्छी तरह सें पता हैं। मेरी औऱ अज्जू कि विवाह सें पहलेजब हम् दोनों बस एक् अच्छे साथी औऱ चचेरे भइया-बेहन थें, उस टाइम भि जिया कों हमारी दोस्ती सें जलन होती थि औऱ मुझपर क्रोध आता थां। मेरे अंदर सुपर पावरआने सें पहले हि मे अज्जू औऱ जिया कां दिमाग़ आसानी सें पढ लेती थि। फिनभला मुझे जिया कि सोच केँ बारे मे केसेपता नहि होगा।
दिव्या- निशा दि वोँ बस जिया कां बचपना रहा होगा….
निशा-चलो मे तुम्हारी बात मानकर उन बातों कों जिया कां बचपना समझकर भूल जाती हूं। मगरफिन भि अगर मे एक् नॉर्मल महिला कि नजर सें देखूँ तोँ भि इस दुनिया मे ऐसीकौन सि महिला होगी जौ अपने हि पति कों किसी दूसरी स्त्री केँ संग शेयर करने केँ लिएदिल सें रेडी होगी। क्याँ तुम् मोनू कों किसी औऱ महिला केँ संग बांट सकती होँ दिव्या…। नहि नां… तोँ फिनभला जियाऐसा केसेकर सकती हैं।
निशा कि बात सुनकर दिव्या निशा कि आँखों मे झाँकते हुए बोलि
दिव्या- मगर आप् तोँ ऐसा पहले हि कर चुकी हौ निशा दि…। मुझे अच्छी तरह सें याद हैं, तीनसाल पहले आपके जाने केँ बाद एक् बार रीनू नें मुझे बताया थां कि जब अज्जू मात्र औऱ सिर्फ आपका थां, तब आप् नां मात्र जिया कों ढूंडकर सबके सामने लाईं थि, बल्कि जिया कों ठीक करने औऱ उसकी याददास्त बापिस लाने केँ लिए आपने अपनीजान तक दाँव पर्र लगा दि थि। यहा तक कि चीफ सें बदला लेने केँ बाद आपने नाँ शिर्फ स्वयं जिया औऱ अज्जू कि विवाह करवाई बल्कि मामाजी जी औऱ जिया कि खुशी केँ लिए अपने औऱ अज्जू केँ रिश्ते कों भि जिया सें छिपाकर रखा औऱ सबसेदूर उस सुनसान फार्महाऊस पर्र रहनेचली गई थीं। आखिर आप् अपनी हि सौतन केँ लिए इतनासभी कुछ केसेकर सकती होँ निशा दि.…
अब तक निशा जौ दिव्या केँ सामने मजबूत बनने कां नाटककर रही थि, आखिरकार दिव्या कि बातें सुनकर अपने इमोशंस पऱ कंट्रोल नहि रखपाई औऱ उसकी आँखों सें भि आँशू बहनेलगे। मगरइस बार निशा नें अपने आंशुओं कों रोकने कि कोई कोशिश नहि कि औऱ जैसे हि दिव्या कि बात ख़त्म हुइ तौ उसनेकहा
निशा-बात बस इतनी सि हैं दिव्या कि अज्जू कभी मेरा थां हि नहि…। बो हमेशा सें हि जिया कां थां…। जिया कां हैं औऱ जिया कां हि रहेगा…। हाँये बातसच हैं कि मे अज्जू सें बहोत प्रेम करती हूं…। मेरीहर एक् सांसों मे बस अज्जू बसा हैं…। सच कहूं तौ अज्जू मेरीजान हैं…। मगर जिया मेरीजान कि भि जान हैं…। फिनभला मे उसे लाबारिस जीवन जीतेहुए केसेछोड सकती थि। मैंने जिया कों कभी भि अपनी सौतन नहि माना हैं… वोँ हमेशा सें मेरी औऱ अज्जू कि जीवन कां एक् अहम हिस्सा रही हैं। मगर मे जरूर अनजाने मे हि जिया कि सौतनबन गई थि। इसलिये मैंने अब अज्जू औऱ जिया दोनों कों हि अपने कलंकित रिश्ते सें आजादकर दिया हैं। ताकि मेरे श्रापित जिंदगी कि छाया भि उन दोनों पऱ नां पडे।
निशा कि बात सुनकर दिव्या भि अपने इमोशन पऱ कंट्रोल नहि रखपाई औऱ रोतेहुए बोलि….
दिव्या- दि आप् ये कैसी बातें कररही हौ…। नाँ तोँ आपका औऱ अज्जू कां नाता कलंकित हैं औऱ नां हि आपका जिंदगी श्रापित हैं……। औऱ फिन क्याँ आप् हम् लोगों सें दूर अकेले हि सारी जीवन बिता पाओगी….
दिव्या कि बात सुनकर निशा नें अपने आंशू पौंछे औऱ मुस्कुराते हुए बोलीं
निशा- तुमसे किसने कहा कि मे अकेले हि इसदेश कों छोडकर जारही हूं। मेरी जीवन मे भि ऐसाकोई हैं जिसे मे इस दुनिया मे सबसे ज़्यादा प्रेम करती हूं औऱ जिसके संग मे अपनी सारी जीवन बिताना चाहती हूं। अज्जू सें अलग होने केँ बाद मे अब तक अगर जिंदा हूं तौ बसउसी इंशान कि बजह सें हूं, उसकेसंग रहकर मे अपने सारेदुख औऱ तकलीफों कों भूल जाती हूं। सच कहूँ तोँ अपनी नौकरी औऱ अपनासभी कुछ छोडकर किसी औऱ देश मे जाकर बसने कां एक् कारण वोँ इंशान भि हैं। मे नहि चाहती कि मेरे दुशमनों कि नजरकभी भि उसपरपडे औऱ मेरे कारण उसपरकोई खतराआऐ।
निशा कि बात सुनकर दिव्या बुरीतरह सें हैरान होकर निशा कों देखने लगी औऱ उसकी बातों कां मतलब समझने कि कोशिश करनेलगी।
स्टोरी जारी हैं.
यारकोई भि बातगलत साबित नहि होगी. आपको अपनेसब सबालों केँ जबाबआने बाले एपसोड मे मिल जाऐंगे।
Meri Jung (Restart) – New Episode
Nisha के tarko mai bajan he लेकिन ismein nisha kaa drasti kon ajju के liye sirf apne tark he ajju की bastbik sthiti नहीं
Bo tesra admi nisha kaa bachha he और yeh bat hi ajju ko ptaa chalni he guru ji ne bi yahi कहा thaa
Update बहुत अच्छा he लेकिन humare samajh से dur sirf divya पर nirbhar he bo iss sthiti ko kaise sambhal ti he
Kya guru ji से phir mulakat hu gi
Meri Jung (Restart) - Kahani ab aur interesting hogi
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